Tuesday, 20 Oct 2026 | 12:10 AM

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दतिया में डिजिटल लोन फ्रॉड में 2.09 लाख की ठगी:आदित्य बिरला फाइनेंस बनकर महिला ने युवक को फंसाया

दतिया में डिजिटल लोन फ्रॉड में 2.09 लाख की ठगी:आदित्य बिरला फाइनेंस बनकर महिला ने युवक को फंसाया

डिजिटल लोन की जरूरत आम आदमी को किस तरह साइबर ठगों के जाल में फंसा रही है, इसका ताजा उदाहरण दतिया जिले से सामने आया है। यहां एक फाइनेंस कंपनी का नाम और फर्जी डिजिटल लोन स्कीम दिखाकर एक युवक से करीब 2 लाख 9 हजार 658 रुपये की ठगी कर ली गई। थाना गोदन में फरियादी विपिन यादव (33) निवासी ग्राम छान ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 8 फरवरी 2025 को उसने गूगल पर फाइनेंस लिमिटेड की वेबसाइट खोलकर न्यू डिजिटल बिजनेस लोन के लिए आवेदन किया था। आवेदन के 2-3 दिन बाद उसके मोबाइल नंबर पर 8959837049 से कॉल आया। कॉल करने वाली महिला ने खुद को फाइनेंस कंपनी से प्रिया वर्मा बताते हुए कहा कि वह लोन के लिए पात्र है। लेकिन पहले प्रोसेसिंग फीस जमा करनी होगी। किस्तों में ठगी का पूरा खेल विश्वास में लेकर ठगों ने अलग-अलग तारीखों में फोनपे और गूगलपे के जरिए रकम ट्रांसफर करवाई। 11 फरवरी 2025 से 29 दिसंबर 2025 तक लगातार अलग-अलग बहानों से पैसे मंगवाए गए। कभी फाइल चार्ज, कभी जीएसटी, कभी लोन अप्रूवल, तो कभी इंश्योरेंस के नाम पर रकम ऐंठी गई। इस तरह फरियादी से कुल कुल 2 लाख 9 हजार 658 की ठगी कर ली गई। लेकिन न लोन मिला और न ही कॉल रिसीव होना बंद हुआ। थाना प्रभारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि, अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मंदसौर ब्लड बैंक में घोटाला:35 डॉक्टर-26 कर्मचारियों को प्रोत्साहन की आड़ में बांट दिए 43.91 लाख रुपए

मंदसौर ब्लड बैंक में घोटाला:35 डॉक्टर-26 कर्मचारियों को प्रोत्साहन की आड़ में बांट दिए 43.91 लाख रुपए

मंदसौर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 35 डॉक्टर और 26 कर्मचारियों ने प्रोत्साहन के नाम पर 43.91 लाख रुपए की बंदरबांट कर ली। निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को जरूरत पर ब्लड बैंक से खून के बदले 1050 रुपए और डोनर देना अनिवार्य है। नियमानुसार पूरी राशि रोकस में जमा होनी चाहिए लेकिन यहां 750 रु. ही जमा कर बाकी 300 रु. प्रति यूनिट “प्रोत्साहन” बताकर आपस में बांट रहे थे जबकि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि अप्रैल 2016 से जनवरी 2025 तक यह खेल चला। इस दौरान 14,639 यूनिट रक्त के बदले 1.53 करोड़ रुपए प्राप्त हुए। इनमें से 43.91 लाख रुपए का बंटवारा कर लिया। इसमें तत्कालीन दो सिविल सर्जन डॉ. एके मिश्रा और डॉ. डीके शर्मा भी पीछे नहीं रहे। दोनों ने बेटे-बेटी के खातों में कुल 13.70 लाख रुपए का भुगतान करवाया। इस तरह शुरू हुआ खेल- इस बंदरबाट के लिए 2016 में ब्लड बैंक के तत्कालीन प्रभारी डॉ. सौरभ मंडवारिया ने प्रस्ताव बनाया। फिर तत्कालीन सीएस डॉ. एके मिश्रा ने नोटशीट तैयार की। इसमें एड्स कंट्रोल के 12 फरवरी 2014 के पत्र क्रमांक 12016/01/2012 का हवाला देकर तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह को भ्रमित कर वेतन मद बताकर मंजूरी ली गई। इसके तहत ब्लड बैंक प्रभारी को 150, टेक्नीशियन को 100 व असिस्टेंट को 50 रुपए दिए जाने लगे। मामला उजागर होते ही यह राशि लेना बंद कर दिया। तत्कालीन कलेक्टर को भ्रमित कर मंजूरी ली, अब फंसे तो रोक लगाई यह किया- कलेक्टर को भ्रमित कर मंजूरी ली। बेटी डॉ. नोमिता को प्रभारी बनाकर 1.17 लाख का भुगतान किया। जबकि डॉ. एके मिश्रा तत्कालीन सीएस ब्लड बैंक के प्रस्ताव की जांच करनी थी। कलेक्टर को दी नोटशीट में पूरी राशि रोगी कल्याण समिति को देने का उल्लेख करना था। अब बोले- ब्लड बैंक से ही प्रस्ताव आते हैं। इसके बाद अनुमोदन होता है। जांच में यदि गलत माना है तो संबंधितों को सही रिप्रेजेंट करना था। यह किया- इन्होंने अपने कार्यकाल में बेटे डॉ. सौरभ को ब्लड बैंक इंचार्ज बनाया। 12.52 लाख का भुगतान किया। जबकि खून डॉ. डीके शर्मा पूर्व सीएस के बदले मिलने वाली राशि से अतिरिक्त स्टाफ रखकर व्यवस्थाएं बेहतरीन कर इस बंदरबाट को रोकना था। अब बोले- तत्कालीन सीएस व डॉ. मंडवारिया ने ही स्वीकृति कराई। ब्लड बैंक ने रोकस को राशि कमाकर दी और उसमें से प्रोत्साहन राशि ली। डॉक्टर-टेक्नीशियन बोले- हमें नियम की जानकारी नहीं निजी चिकित्सकों की मांग के बाद प्रस्ताव भेजा था। राशि फिक्स नहीं होने से नए व्यक्ति नहीं रखकर मौजूद कर्मचारियों को ही अनुमोदन के बाद यह राशि दी गई। -डॉ. सौरभ मंडवारिया, तत्कालीन व वर्तमान ब्लड बैंक प्रभारी वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि लेने का कोई प्रावधान नहीं है। इस राशि से अन्य कर्मचारी रखकर सुविधा और बेहतर बनाई जा सकती थी। वरिष्ठ स्तर पर निर्देश के बाद रिकवरी संबंधी प्रक्रिया भी कराई जाएगी। डॉ. जीएस चौहान, सीएमएचओ, मंदसौर व्यवस्था बदल रहे हैं संबंधितों पर कार्रवाई प्रस्तावित की है। आगे इस तरह की स्थिति नहीं बने, इसके लिए बनाई गई व्यवस्था को ही बदला जा रहा है। -अदिति गर्ग, कलेक्टर मंदसौर

भोपाल के बड़ा तालाब से 50 मीटर में निर्माण अवैध:153 झुग्गियां-निर्माण लिस्टेट; खानूगांव में 15 सरकारी जमीनों पर कब्जे मिले

भोपाल के बड़ा तालाब से 50 मीटर में निर्माण अवैध:153 झुग्गियां-निर्माण लिस्टेट; खानूगांव में 15 सरकारी जमीनों पर कब्जे मिले

भोपाल की लाइफ लाइन बड़ा तालाब के फुल टैंक लेवल (एफटीएल) से 50 मीटर के दायरे में जितने भी निर्माण 16 मार्च 2022 के बाद हुए, वे सभी अवैध माने जाएंगे। ये बड़ा तालाब का शहरी हिस्सा है, जबकि ग्रामीण हिस्से में एफटीएल से ढाई सौ मीटर की दूरी तय है। अब तक के सर्वे में कुल 153 झुग्गियां और पक्के निर्माण सामने आ चुके हैं। इनमें कई रसूखदारों के आलिशान मकान भी शामिल हैं। अफसरों की माने तो 16 मार्च 2022 को वेटलैंड एक्ट लागू हुआ था। इसके बाद यदि एफटीएल के निर्धारित दायरे में कोई भी निर्माण हुआ है तो वह अवैध ही कहलाएगा। दूसरी ओर, नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल के आदेशों का पालन करते हुए पुराने अतिक्रमण भी हटाए जाएंगे। इसकी रिपोर्ट भी एनजीटी में पेश करना है। इसलिए फिर शुरू हुई है। सांसद अलोक शर्मा और कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह की फटकार के बाद यह कार्रवाई तेज कर दी गई है। कहां मिले कब्जे होली से पहले पूरा होगा सीमांकन कलेक्टर सिंह ने बड़ा तालाब के आसपास के हिस्से के अधिकार क्षेत्र वाले सभी एसडीएम को होली से पहले हर हाल में सीमांकन पूरा करने को कहा है। साथ ही एमपी पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को वाटर बॉडी में मिलने वाले गंदे नालों का पता लगाने की बात कही गई है। पानी को दूषित करने वाले सभी सोर्स का पता लगाया जाएगा। ऐसे दो स्तर पर होगी कार्रवाई बता दें कि वेटलैंड एक्ट 16 मार्च 2022 को लागू हुआ था। ऐसे में इसके बाद एफटीएल के दायरे में होने वाले सभी निर्माण एक तरह से अवैध ही माने जाएंगे। चाहे इसे लेकर निगम या पंचायत स्तर से कोई भी अनुमति दी ही क्यों न गई हो। शहर में 50 मीटर और ग्रामीण में 250 मीटर का पैमाना निर्धारित है। यदि इससे पहले का कोई निर्माण है, लेकिन वह तालाब की जद में आ रहा है तो संबंधित से नगर निगम, पंचायत, टीएंडसीपी, पर्यावरण, वन आदि संबंधित विभागों की अनुमति के बारे में दस्तावेज मांगे जाएंगे। साथ ही परमिशन देने वालों की जानकारी भी ली जाएगी। अब तक 3 बार सर्वे, ठोस कार्रवाई नहीं बता दें कि बड़ा तालाब का बीते दस साल में 3 बार सर्वे हो चुका है। इनमें बड़ी संख्या में अतिक्रमण सामने आए, लेकिन सर्वे रिपोर्ट का आज तक पता नहीं है। इस वजह से बैरागढ़, खानूगांव, सूरज नगर, गौरागांव, बिसनखेड़ी समेत कई जगहों पर अतिक्रमण हुए। कई मैरिज गार्डन, फार्म हाउस, स्कूल-कॉलेज, घरों की सीमाएं बड़ा तालाब में हैं। 50 मीटर के दायरे में ढेरों अतिक्रमण एक्सपर्ट राशिद नूर की मानें तो शहरी सीमा में 50 मीटर और ग्रामीण सीमा में 250 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए, लेकिन एफटीएल मुनार से सटकर ही पक्के निर्माण बन गए हैं। ऐसे 1 या 2 नहीं, बल्कि सैकड़ों निर्माण हैं। भदभदा, बिसनखेड़ी, गौरागांव, बील गांव और सूरजनगर में बड़ी बिल्डिंग, फार्म हाउस, रिसॉर्ट भी देखने को मिल सकते हैं। हैरत की बात ये है कि बड़ा तालाब रामसर साइट भी है। बावजूद सालों से सिर्फ फाइलों में ही कब्जे हटे हैं। सूरजनगर में तो जिस जगह पर रामसर साइट है और नगर निगम की मुनार लगी है। ठीक उससे जुड़ी बिल्डिंग की बाउंड्रीवॉल है। यही पर नगर निगम की सीवेज लाइन भी बिछाई गई है। मुनार के पास सड़क भी भरी गई है, जो नियम के विरुद्ध है। दूसरी ओर गौरागांव से बील गांव की तरफ सड़क भी तालाब के बीच से ही गुजरी है। मुनारों में भी फर्जीवाड़ा…दो तरह की मुनारे मिले बड़ा तालाब के किनारों पर भू-माफिया सक्रिय हैं, जो कम दाम पर प्लॉट देने का वादा कर रहे हैं। उन्होंने और लोगों ने इस दायरे को लेकर ही भ्रम की स्थिति भी खड़ी की है। जिन मुनारों से एफटीएल की सीमा तय होती है, उन्हीं में फर्जीवाड़ा किया गया है। मौके पर एफटीएल बताने वाली 5 तरह की मुनारे लगे हुए मिले हैं। इनमें से एक में बीएमसी यानी, भोपाल म्युनसिपल कॉर्पोरेशन लिखा है। बाकी पर सफेद रंग है। लिखा कुछ नहीं है। इन्हीं फर्जी मुनारों के आसपास अतिक्रमण और अवैध निर्माण है। सिलसिलेवार जानिए, अब तक क्या हुआ… पहला सर्वे: साल 2016 में डीजीपीएस सर्वे, पर रिपोर्ट सामने नहीं आई साल 2016 में नगर निगम ने डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) सर्वे कराया था। यह जमीन का सटीक माप करने की तकनीक है, जो जीपीएस की तुलना में ज्यादा जानकारी सामने लाती है। जमीन की सीमा, आकार का सटीक डेटा इकट्ठा करती है। इस सर्वे में बड़ा तालाब का क्षेत्र 38.72 वर्ग किमी बताया गया था, जबकि पहले यह एरिया 32 वर्ग किमी माना जाता था। इसकी रिपोर्ट में तालाब के एफटीएल के को-ऑर्डिनेट्स दर्ज हैं। इन को-ऑर्डिनेट्स के आधार पर धरातल पर भी सीमाएं तय की जा सकती हैं। तालाब की सीमा में आ रही निजी जमीन के मालिकाना हक का भी निर्धारण हो सकता है, लेकिन यह रिपोर्ट निगम की फाइलों में दबकर रह गई। रिपोर्ट का आज तक खुलासा नहीं हो सका। दूसरा सर्वे: 141 मुनारे ही गायब हो गए इसी साल एनजीटी ने बड़े तालाब का सर्वे करने के निर्देश दिए थे। इसमें 943 में से 802 मुनारे ही मिले थे। इसमें भी 337 मुनारे पानी के भीतर डूबे हुए थे, यानी उन्हें एफटीएल से पहले ही लगाया गया था। 141 मुनारे मौके से गायब थे, लेकिन इसके बाद मुनारे दोबारा लगाने और अतिक्रमण रोकने की कोई ठोस पहल नहीं हुई। तीसरा सर्वे: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सर्वे हुआ, रिपोर्ट का पता नहीं इस साल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सर्वे किया गया। जिला प्रशासन ने मप्र झील संरक्षण प्राधिकरण के साथ मिलकर सर्वे किया, लेकिन इसकी रिपोर्ट का कोई पता नहीं है। ये रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। न ही सरकार के किसी दस्तावेज में यह जिक्र आया है कि इस सर्वे का क्या हुआ? एक मोबाइल ऐप पर इसकी रिपोर्ट दर्ज होने की बात कही जाती है। जब तक यह दस्तावेज में नहीं आएगा तब तक धरातल पर सीमांकन नहीं हो सकता। पांच महीने पहले CM दे चुके निर्देश, सांसद ने कहा-मास्टर प्लान बने बड़ा तालाब को लेकर सरकार तो गंभीर है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही सामने

पुतुल समारोह में एकलव्य की गाथा की प्रस्तुति:उज्जैन में विक्रम उत्सव में बच्चों ने सीखा कठपुतली का कौशल

पुतुल समारोह में एकलव्य की गाथा की प्रस्तुति:उज्जैन में विक्रम उत्सव में बच्चों ने सीखा कठपुतली का कौशल

महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ एवं संस्कृति संचालनालय द्वारा विक्रम उत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को आयोजित ‘पुतुल समारोह’ के दूसरे दिन दो प्रस्तुतियां हुईं। पुतुल समारोह के प्रथम चरण में डॉल्स थिएटर, कोलकाता द्वारा ‘द आर्चर स्टूड अलोन’ (निर्देशन: सुदीप गुप्ता) प्रस्तुत किया गया। इस प्रस्तुति में एकलव्य की कथा को प्रभावी कठपुतली शैली में दिखाया गया, जिसे दर्शकों ने सराहा। द्वितीय चरण में मेहर द रूप, अहमदाबाद के कलाकारों ने ‘आठवां’ का कठपुतली मंचन किया। इस प्रस्तुति का निर्देशन मानसिंह झाला ने किया। दोनों प्रस्तुतियों में कलाकारों की सजीव अभिव्यक्ति और तकनीकी कौशल ने दर्शकों को बांधे रखा। इस अवसर पर शहर के एक्टिव इंग्लिश हाई स्कूल एवं रविन्द्र नाथ टैगोर स्कूल के लगभग 350 विद्यार्थी उपस्थित रहे। स्कूली बच्चों ने कठपुतलियों को हाथ में लेकर उन्हें चलाने का अनुभव भी प्राप्त किया। कठपुतली कला के प्रति बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। शनिवार को केरल और कोलकाता के कलाकार देंगे प्रस्तुति पुतुल समारोह में 28 फरवरी को के.के. पुलवर मेमोरियल थोलपावाकुथु पपेट सेंटर, केरल द्वारा ‘दुर्योधन वधम्’ की प्रस्तुति दी जाएगी, जिसका निर्देशन रामचंद्र पुलवर करेंगे। दूसरी प्रस्तुति डॉल्स थिएटर, कोलकाता द्वारा ‘पदमगाथा’ की होगी, जिसका निर्देशन सुदीप गुप्ता द्वारा किया गया है। कठपुतली कला की पारंपरिक एवं रचनात्मक शैलियों का अद्भुत संगम दर्शकों को देखने को मिलेगा।

52 साल की उम्र में भी इतनी फिट हैं मलाइका अरोड़ा? रोज सुबह खाली पेट पीती हैं ये ड्रिंक

तस्वीर का विवरण

मैडम अरोड़ा के फिटनेस का हर कोई दीवाना है। वो सिर्फ खुद एक एक्टिव लाइफस्टाइल फॉलो ना करती हैं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए अपने फॉलोअर्स को भी मोटिवेट करती हैं। छवि: इंस्टाग्राम मल्लिका अरोड़ा 52 साल की हैं लेकिन उनका पतला फिगर और बेदाग चेहरा देखने वाले लोग 25 साल के हैं। हालाँकि, आपको बता दें कि ऐसे स्ट्रेचर स्किन और बॉडी पाना जरा भी आसान नहीं है। छवि: इंस्टाग्राम मॅलाइक अपनी फिटनेस को काफी सीरियसली प्लास्टिसिन में पेश करती हैं, जो उनकी डेली सोसाइटियों में धूम मचाती है। वो रोज सुबह की कथा ही एक जादुई पेय पीती है जिसका रहस्योद्घाटन एक व्याख्या में किया गया है। यह वो वॉटर थेरेपी विशेषज्ञ हैं। छवि: इंस्टाग्राम मलाइका अरोड़ा ने खुलासा किया कि वो रोज सुबह खाली पेट जीरा और परेशानी का पानी पीती हैं। रात भर एक गिलास पानी में जीरा और सस्तेकर रचते हैं, सुबह पानी गर्म करके, अच्छाकर पी बेचते हैं। छवि: इंस्टाग्राम जीरा और पानी के बहुत से फायदे हैं। ये पाचन शक्ति, पेट की गैस-एसिडिटी दूर करने और मेटाबोलिज्म को बढ़ाने में प्रभावशाली है। छवि: इंस्टाग्राम जीरा और अजीब पानी से मेटाबॉलिज्म का दायरा बढ़ता है और ये पेट की सूजन कम करता है इसलिए ये वजन में सहायक होता है। इससे शरीर की इम्युनिटी भी अधिक होती है। छवि: इंस्टाग्राम अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)मलाइका अरोड़ा(टी)मलाइका अरोड़ा फिटनेस(टी)मलाइका अरोड़ा डाइट(टी)मलाइका अरोड़ा फिटनेस सीक्रेट(टी)आंत स्वास्थ्य(टी)जीरा अजवाइन सौंफ पानी

भोपाल में घर में नमाज पढ़ने को लेकर विवाद:पड़ोसियों ने पुलिस से की शिकायत, कहा- मस्जिद के रूप में हो रहा उपयोग

भोपाल में घर में नमाज पढ़ने को लेकर विवाद:पड़ोसियों ने पुलिस से की शिकायत, कहा- मस्जिद के रूप में हो रहा उपयोग

भोपाल के साकेत नगर इलाके में एक मकान में नमाज अदा किए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति ने थाने में आवेदन देकर आपत्ति दर्ज कराई है। आवेदन में आरोप लगाया है कि संबंधित मकान का उपयोग मस्जिद के रूप में किया जा रहा है। एडीशनल डीसीपी गौतम सौलंकी ने बताया कि साकेत नगर क्षेत्र से एक आवेदन प्राप्त हुआ है। शिकायत में कहा है कि एक घर में नमाज पढ़ी जा रही है और उसे मस्जिद के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस ने आवेदन को जांच में लिया है और तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में अब तक वहां किसी प्रकार की मस्जिद संचालित होने की पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित स्थल एक आवासीय मकान है। पुलिस का कहना है कि आगे की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने जताई नाराजगी ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने इस मामले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राजधानी की गंगा-जमुनी तहजीब को खराब करने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति अपने निजी मकान में इबादत कर रहा है और वह सार्वजनिक स्थल पर आयोजन नहीं कर रहा, तो उस पर आपत्ति उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर आवेदन देकर माहौल खराब करने की कोशिश करने वालों पर भी प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। धर्म के नाम पर विवाद खड़ा करना शहर की सांस्कृतिक परंपरा के विपरीत है। अपन घर में इबादत कर सकता है व्यक्ति ऑल इंडिया मुस्लिम त्यौहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने कहा कि पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया जांच में संबंधित मकान आवासीय ही पाया गया है और वहां स्थायी रूप से मस्जिद संचालित होने के संकेत नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपने घर में इबादत कर सकता है, बशर्ते वह सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न करे। राजधानी जैसे शहर में आपसी सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

Lemon grass benefits: लेमन ग्रास के फायदे जान होंगे हैरान, डाइट में करें शामिल

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Lemon grass health benefits: आयुर्वेद में औषधीय पौधों का इस्तेमाल कई तरह के रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है. इसी में से एक है लेमन ग्रास, जो देखने में बिल्कुल घास जैसा होता है. क्या आप जानते हैं कि लेमन ग्रास कोई घास नहीं, बल्कि एक बेहद ही हेल्दी हरा पत्ता है, जिसका इस्तेमाल सेलिब्रिटीज से लेकर फिटनेस से जुड़े लोग भी कर रहे हैं. आजकल लोग लेमन ग्रास को नया समझकर इस्तेमाल करना शुरू किए हैं, लेकिन ये सदियों से आयुर्वेद का हिस्सा रहा है और कई रोगों के उपचार में उपयोग में लाया जाता रहा है. लेमन ग्रास के फायदे -लेमन ग्रास में कई तरह के औषधीय गुण मौजूद होते हैं. आयुर्वेद में लेमन ग्रास को ‘भूस्तृण’ कहते हैं. इसका इस्तेमाल वात, पित्त और कफ दोषों को संतुलित करने में मदद करता है. जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से राहत दिलाता है. -स्वाद में थोड़ा कड़वा-तीखा, लेकिन इसकी तासीर ठंडी होती है. इसके सेवन से नसों की समस्या शांत होती है. तंत्रिका तंत्र मजबूत करता है. मस्तिष्क को हेल्दी रखता है. -लेमन ग्रास खांसी, बुखार, तपेदिक, कुष्ठ रोग, फाइलेरिया, मलेरिया, आंखों की सूजन, मसूड़ों की सूजन, निमोनिया और रक्त की अशुद्धि से जुड़े विकारों में भी काम आता है. -लेमनग्रास का तेल पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. मतली, उल्टी, पीरियड्स से संबंधित समस्याओं और सिरदर्द से राहत देता है. लेमनग्रास का लेप त्वचा संबंधी परेशानियों में बेहद कारगर होता है. कैसे करें लेमन ग्रास का इस्तेमाल आप हर दिन लेमन ग्रास का ताजा जूस पी सकते हैं. इससे शरीर के अंदर मौजूद टॉक्सिन पदार्थों से छुटकारा मिलता है. शरीर अंदर से साफ और हेल्दी बनता है. आप चाहें तो इसकी चाय बनाकर भी पी सकते हैं. कैफीन की जगह आप लेमन ग्रास टी का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह स्वाद और सेहत दोनों में बेहतर है. आप लेमनग्रास ऑयल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. नींद की परेशानी और तनाव दूर करने में कारगर साबित हो सकता है लेमनग्रास का तेल. इसे आप सिर में लगाकर मालिश कर सकते हैं. सिरदर्द में आराम महसूस होगा. साथ ही स्किन पर भी लेमनग्रास ऑयल लगा सकते हैं. ड्राइनेस दूर होगी. स्किन हेल्दी रहेगी.

क्या पकाया जा रहा है? डिनर डिप्लोमेसी से कर्नाटक कांग्रेस में दरार गहरी, शिवकुमार के वफादार एक साथ आए | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:27 फरवरी, 2026, 19:58 IST राजनीतिक तापमान तब और बढ़ गया जब केपीसीसी के पूर्व मीडिया सचिव केपी भाग्यराज ने आलाकमान को पत्र लिखकर शिवकुमार के ‘बलिदान और योगदान’ पर विचार करने का आग्रह किया। मगदी विधायक एचसी बालकृष्ण के जन्मदिन के शुरुआती जश्न की आड़ में, प्रभावशाली मंत्रियों और विधायकों का एक महत्वपूर्ण समूह एक निजी होटल में इकट्ठा हुआ। (न्यूज़18) कर्नाटक कांग्रेस का आंतरिक परिदृश्य इस सप्ताह चरम पर पहुंच गया जब उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में वफादारों की एक हाई-प्रोफाइल सभा ने सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर गहरी दरार का संकेत दिया। मगदी विधायक एचसी बालकृष्ण के शुरुआती जन्मदिन समारोह की आड़ में, प्रभावशाली मंत्रियों और विधायकों का एक महत्वपूर्ण समूह एक निजी होटल में इकट्ठा हुआ, जिसे कई पर्यवेक्षक “रात्रिभोज राजनीति” का रणनीतिक प्रदर्शन कह रहे हैं। भोज में प्रमुख विधायकों शरत बाचेगौड़ा और सीपी योगेश्वर के साथ-साथ मंत्री डी सुधाकर और मनकला वैद्य जैसी प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया, यह विशेष रूप से तब हुआ जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ गठबंधन करने वाला एक प्रतिद्वंद्वी गुट विदेश यात्रा पर गया, जो राज्य नेतृत्व की बढ़ती ध्रुवीकरण प्रकृति को उजागर करता है। केपीसीसी के पूर्व मीडिया सचिव और मैसूर के समर्पित पार्टी कार्यकर्ता केपी भाग्यराज द्वारा कांग्रेस आलाकमान को भेजे गए एक औपचारिक पत्र के खुलासे के बाद राजनीतिक तापमान और बढ़ गया। पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे से अपनी अपील में, भाग्यराज ने राष्ट्रीय नेतृत्व से पार्टी के लिए शिवकुमार के “बलिदान और योगदान” पर विचार करने और उन्हें कर्नाटक में शीर्ष पद पर पदोन्नत करने का आग्रह किया। पत्र में विशेष रूप से 2023 के चुनावों में 136 सीटों का निर्णायक जनादेश हासिल करने के लिए केपीसीसी अध्यक्ष के रूप में शिवकुमार के कार्यकाल को श्रेय दिया गया, भाग्यराज ने जोर देकर कहा, “आप इस सच्चाई को जानते हैं, आलाकमान इसे जानता है, और इस राज्य के लोग इसे जानते हैं।” पत्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में संभावित चुनावी असफलताओं की चेतावनी दी गई है और उम्मीद जताई गई है कि 2026 दशहरा समारोह का उद्घाटन मुख्यमंत्री के रूप में शिवकुमार करेंगे। समन्वित पैरवी प्रयास की बढ़ती अटकलों और रिपोर्टों के जवाब में, शिवकुमार ने एक सार्वजनिक बयान जारी कर अपनी स्थिति को बनाए रखते हुए स्थिति को कम करने का प्रयास किया। पत्रकारों को संबोधित करते हुए, शिवकुमार ने स्पष्ट रूप से अपने समर्थकों से उनकी ओर से पैरवी करने के लिए नई दिल्ली की यात्रा करने से परहेज करने की अपील की, उन्होंने कहा, “मैं सभी से अपील करता हूं कि वे मेरे लिए पैरवी करने के लिए दिल्ली न जाएं। यदि आपके पास व्यक्तिगत अनुरोध हैं या कैबिनेट पदों के लिए इच्छुक हैं, तो आप दिल्ली जा सकते हैं। लेकिन मेरे लिए वकालत करने के लिए आपको दिल्ली जाने की जरूरत नहीं है।” उन्होंने कहा कि हाल ही में 40 से अधिक विधायकों का जमावड़ा शक्ति का औपचारिक प्रदर्शन नहीं था, उन्होंने इस आयोजन को पार्टी के आधिकारिक कामकाज से असंबद्ध एक व्यक्तिगत सामाजिक जुड़ाव बताकर खारिज कर दिया और कहा कि “वे व्यक्तिगत कारणों से जो करते हैं उसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।” “डिनर पॉलिटिक्स” कथा के संबंध में शिवकुमार के खारिज करने वाले रुख के बावजूद, विधानसभा के समय ने राजनीतिक विश्लेषकों को आश्वस्त कर दिया है कि आंतरिक सत्ता संघर्ष अधिक मुखर चरण में प्रवेश कर रहा है। शिवकुमार ने पार्टी के विभिन्न सदस्यों की गतिविधियों, जिनमें विदेश यात्रा या रात्रिभोज के लिए बैठकें शामिल हैं, को निजी अवकाश बताया, जो पार्टी की एकता में दरार को प्रतिबिंबित नहीं करता है। हालाँकि, भाग्यराज जैसे वफादारों ने खुले तौर पर “भ्रम को समाप्त करने” के लिए आलाकमान से याचिका दायर की है और संगठित सभाएं अधिक होने लगी हैं, कर्नाटक में दोहरी-सत्ता संरचना को संबोधित करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव लगातार बढ़ रहा है क्योंकि सरकार अपने मध्यावधि निशान के करीब पहुंच रही है। पहले प्रकाशित: 27 फरवरी, 2026, 19:58 IST समाचार राजनीति क्या पकाया जा रहा है? शिवकुमार के वफादारों के एक साथ आने से कर्नाटक कांग्रेस में डिनर डिप्लोमेसी से दरार गहरा गई है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक कांग्रेस की आंतरिक दरार(टी)डीके शिवकुमार नेतृत्व(टी)कांग्रेस पार्टी सत्ता संघर्ष(टी)सिद्धारमैया गुट(टी)डिनर पॉलिटिक्स कर्नाटक(टी)केपी भाग्यराज पत्र(टी)कर्नाटक राजनीतिक संकट(टी)कांग्रेस आलाकमान कर्नाटक

‘राहुल गांधी ए राजा बेटा’: राइजिंग भारत में कंगना रनौत का कहना है कि कांग्रेस को एक बेहतर चेहरा चुनना चाहिए | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:27 फरवरी, 2026, 19:52 IST नई दिल्ली में एआई शिखर सम्मेलन में युवा कांग्रेस नेताओं के शर्टलेस विरोध पर टिप्पणी करते हुए, रनौत ने इस घटना को निंदनीय बताया और कहा कि इसे उजागर किया जाना चाहिए। राइजिंग भारत समिट में कंगना रनौत। (न्यूज़18) अगर कांग्रेस खुद को बचाना चाहती है, तो उसे एक बेहतर चेहरे की तलाश करनी चाहिए, बॉलीवुड अभिनेत्री और मंडी से सांसद कंगना रनौत ने शुक्रवार को राइजिंग भारत समिट में राजनीतिक जीवन में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा। यह पूछे जाने पर कि वह राजनीति किससे सीख रही हैं, रनौत ने कहा कि किसी को सर्वश्रेष्ठ से सीखना चाहिए और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने गांधी से यह सबक सीखा कि क्या नहीं करना चाहिए क्योंकि उन्होंने उन्हें “अपरिपक्व” और “अशिक्षित” करार दिया था। नई दिल्ली में एआई शिखर सम्मेलन में युवा कांग्रेस नेताओं के शर्टलेस विरोध पर टिप्पणी करते हुए, कंगना ने इस घटना को निंदनीय बताया और कहा कि इसे उजागर किया जाना चाहिए। “यह दुर्भाग्यपूर्ण है। सबसे बढ़कर, राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों को ‘बब्बर शेर’ कहा। मुझे लगता है कि उनका दिमाग खराब हो गया है। आजादी के बाद महात्मा गांधी ने कहा था कि कांग्रेस को भंग कर देना चाहिए। लेकिन नेहरू नहीं माने। मुझे लगता है कि राहुल गांधी कांग्रेस को पूरी तरह से नष्ट करके अपना वह सपना पूरा करेंगे।” अभिनेता ने संसद में गांधी के व्यवहार को ‘टपोरी’ या ‘मवाली’ (गुंडे) जैसा करार दिया। “आपने देखा होगा कि वह संसद में कैसा व्यवहार करते हैं। मुझे लगता है कि कांग्रेस भी गांधी के कार्यों से शर्मिंदा है। मुझे नहीं लगता कि पार्टी का कोई भविष्य है लेकिन अगर वे खुद को बचाना चाहते हैं, तो उन्हें अब एक बेहतर चेहरे की तलाश करनी चाहिए।” उन्होंने गांधी को “राजा बेटा” (बिगड़ैल बेटा) कहा और कहा कि उन्हें लोगों द्वारा उनके लिए तालियां बजाने और उन पर ध्यान देने की आदत है। “मुझे लगता है कि वह बुरे व्यवहार वाले भी हैं क्योंकि संसद में बोलते समय स्पीकर को संबोधित करना चाहिए। मैं उनसे नाराज नहीं हूं लेकिन मुझे लगता है कि गांधी देश के लिए खतरा हैं क्योंकि वैश्विक मंच पर भी वह भारत के बारे में बुरा बोलते हैं और देश और इसकी अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की कोशिश करते हैं। वह भारत विरोधी ताकतों के हाथों की कठपुतली हैं। यह देखते हुए कि उनका आईक्यू कितना कम है, वह एक बहुत बड़ा खतरा हैं। एक भारतीय के रूप में, मुझे लगता है कि विपक्ष में भी, हम बेहतर के हकदार हैं।” राइजिंग भारत समिट 2026 भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण क्षण पर स्थित, न्यूज18 राइजिंग भारत शिखर सम्मेलन 2026 27-28 फरवरी को भारत मंडपम में शीर्ष राष्ट्रीय नेतृत्व और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है। “स्ट्रेंथ विदइन” थीम पर आधारित यह शिखर सम्मेलन देश के सबसे बड़े प्लेटफार्मों में से एक है जहां शासन, आर्थिक महत्वाकांक्षा और रणनीतिक सोच मिलती है, जो वैश्विक बातचीत में भारत के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। पिछले कुछ वर्षों में, राइजिंग भारत मंच ठोस नीति संवाद के लिए एक विश्वसनीय स्थल के रूप में विकसित हुआ है, और 2026 संस्करण भारत की प्रगति के अगले चरण को आकार देने वाले विचारों के इर्द-गिर्द तीव्र जुड़ाव का संकेत देता है। विषय प्रत्येक नागरिक के भीतर की सामूहिक शक्ति को सलाम करता है – वह शक्ति जो नवाचार को बढ़ावा देती है, लोकतंत्र को कायम रखती है, भारत विश्व मंच पर एक अग्रणी प्रकाश के रूप में है। पहले प्रकाशित: 27 फरवरी, 2026, 19:17 IST समाचार राजनीति ‘राहुल गांधी ए राजा बेटा’: राइजिंग भारत में कंगना रनौत का कहना है कि कांग्रेस को एक बेहतर चेहरा चुनना चाहिए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कंगना रनौत कांग्रेस(टी)कंगना रनौत बयान(टी)कांग्रेस नेतृत्व(टी)राहुल गांधी आलोचना(टी)राइजिंग भारत समिट(टी)बॉलीवुड अभिनेता राजनीति(टी)मंडी सांसद कंगना रनौत(टी)कांग्रेस पार्टी की छवि

दिल्ली आबकारी नीति: केजरीवाल और सिसौदिया को सीबीआई मामले में क्लीन चिट, ईडी जांच का क्या होगा? | व्याख्याकार समाचार

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आखरी अपडेट:27 फरवरी, 2026, 18:14 IST अपने डिस्चार्ज आदेश में, अदालत ने माना कि सीबीआई द्वारा दायर आरोपपत्र में बड़े अंतराल, विरोधाभास और बयान थे जो स्वतंत्र साक्ष्य पर आधारित नहीं थे। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पार्टी नेता मनीष सिसौदिया ने दिल्ली की एक अदालत द्वारा उन्हें उत्पाद शुल्क नीति से संबंधित भ्रष्टाचार मामले में बरी किए जाने के बाद परिवार के सदस्यों के साथ जश्न मनाया। (पीटीआई) आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व को एक महत्वपूर्ण राहत देते हुए, दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके डिप्टी मनीष सिसोदिया सहित दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति मामले में सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर आरोप पत्र “दागदार” था और अभियोजन का समर्थन करने के लिए “प्रथम दृष्टया” सबूतों का अभाव था। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने कहा कि व्यापक रूप से आलोचना की गई शराब उत्पाद शुल्क नीति के डिजाइन और कार्यान्वयन में “कोई व्यापक साजिश या आपराधिक इरादा” नहीं था, और सीबीआई का मामला “अटकलों पर आधारित था और ठोस तथ्यों पर आधारित नहीं था।” न्यायाधीश ने सीबीआई द्वारा की गई जांच में विसंगतियों, अफवाहों और कमियों की ओर भी इशारा किया। हालाँकि यह घटनाक्रम आप नेतृत्व के लिए मनोबल बढ़ाने वाला रहा है, लेकिन इसने एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा कर दिया है- घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के बारे में क्या? उत्पाद शुल्क नीति मामला यह मामला 2021-22 की दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति के निर्माण में प्रक्रियात्मक अनियमितताओं और धन की संभावित हानि के संबंध में दिल्ली के मुख्य सचिव की एक शिकायत के आधार पर सीबीआई द्वारा दर्ज की गई 2022 की एफआईआर से जुड़ा है। कुछ निजी शराब लाइसेंसधारियों के पक्ष में नीति तैयार करने और राजनीतिक व्यक्तियों को रिश्वत दिए जाने की खबरें थीं। सीबीआई को संदेह था कि नीति को इस तरह से तैयार किया गया था कि इसमें कम शुल्क और छूट जैसे अनुचित लाभ दिए गए, जिसके कारण भ्रष्टाचार और धन की हानि के आरोप लगे। एक बिंदु ऐसा भी था जहां सीबीआई को नीति को प्रभावित करने के लिए तीसरे पक्ष से 100 करोड़ रुपये के भुगतान का संदेह था। इसकी मनी लॉन्ड्रिंग के लिए प्रवर्तन निदेशालय द्वारा एक साथ जांच की गई थी। नीति तैयार होने के समय उत्पाद शुल्क विभाग संभाल रहे सिसौदिया को 2023 की शुरुआत में सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया था। केजरीवाल को बाद में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहे ईडी मामले में गिरफ्तार किया गया था, जो कथित तौर पर उसी उत्पाद शुल्क नीति से जुड़ा था। कोर्ट ने सीबीआई केस क्यों हटा दिया? अपने डिस्चार्ज आदेश में, अदालत ने माना कि सीबीआई द्वारा दायर आरोपपत्र में बड़े अंतराल, विरोधाभास और बयान थे जो स्वतंत्र साक्ष्य पर आधारित नहीं थे। सबसे पहले, केजरीवाल या सिसौदिया के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बना, जिसका मतलब है कि अदालत को मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय सामग्री नहीं मिली। अदालत ने यह भी माना कि अभियोजन पक्ष का मामला उन धारणाओं और गवाहों के बयानों पर आधारित था जिनमें दम नहीं था। इसके अलावा, अदालत अनुमोदक साक्ष्य के उपयोग की आलोचना कर रही थी, जिसका अर्थ है कि अभियुक्त को उसकी गवाही के बदले में छूट दी गई थी। दरअसल, कुछ बयानों में कोर्ट ने खराब जांच के लिए सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की थी. फैसले के बाद केजरीवाल ने क्या कहा? केजरीवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “मैं मोदी जी को दिल्ली में दोबारा चुनाव कराने की चुनौती देता हूं। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि अगर उन्हें 10 से ज्यादा सीटें मिलेंगी तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।” पूर्व मुख्यमंत्री ने यह बताते हुए कि उन्होंने चुप रहना क्यों चुना, कहा, “लोग पूछते रहे कि मैं कहां गया था। मैंने सच्चाई सामने आने तक चुप रहने का फैसला किया। इस अवधि के दौरान हमारे परिवारों को बहुत नुकसान हुआ।” केजरीवाल ने पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर पार्टी को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए आम आदमी पार्टी के खिलाफ राजनीतिक साजिश का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “आप को खत्म करने के लिए दो लोगों ने यह साजिश रची। आज उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। मैंने पैसा नहीं, बल्कि ईमानदारी कमाई है।” अब ED केस का क्या होगा? इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, “आम तौर पर, ईडी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला एक ‘विधेय अपराध’ पर आधारित होता है – वह अपराध जो कथित तौर पर अपराध की आय का उत्पादन करता है। वकीलों का कहना है कि अक्सर, यदि विधेय अपराध को खत्म कर दिया जाता है या आरोपियों को बरी कर दिया जाता है, तो मनी लॉन्ड्रिंग में उनके खिलाफ मामला टूट सकता है क्योंकि पैसे की कोई ‘अवैध उत्पत्ति’ नहीं होगी।” लेकिन सरकार की एजेंसियों ने संकेत दिया है कि वे आरोपमुक्ति के फैसले के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय सहित उच्च न्यायालयों में अपील कर सकते हैं। यदि अपील स्वीकार कर ली जाती है और मुकदमा जारी रहता है या रिहाई पर रोक लगा दी जाती है, तो ईडी मामले का भाग्य बदल सकता है। साथ ही, राजस्व के नुकसान की ओर इशारा करने वाली स्वतंत्र ऑडिट और असेंबली रिपोर्ट ने मामले की कानूनी जटिलताओं को और बढ़ा दिया है। आगे क्या? संभावना है कि सीबीआई निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील करेगी, जिसका मतलब है कि कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। इसके अतिरिक्त, मनी लॉन्ड्रिंग का ईडी मामला अभी भी लंबित है, हालांकि इसकी व्यवहार्यता विधेय उत्पाद शुल्क मामले की अपील के नतीजे पर निर्भर हो सकती है। राजनीतिक रूप से, अदालत के फैसले को आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ी मंजूरी के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि इसके विरोधी लंबित ईडी मामले या ऑडिट रिपोर्ट का इस्तेमाल गर्मी बनाए रखने के लिए कर सकते हैं। पहले प्रकाशित: 27 फरवरी, 2026, 18:14 IST समाचार समझाने वाले दिल्ली आबकारी नीति: केजरीवाल और सिसौदिया को सीबीआई मामले में क्लीन चिट, ईडी जांच का क्या होगा? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ