बंगाल में 20 साल बाद टाटा की वापसी संभव:सीएम सुवेंदु खुद मामले को देख रहे; ममता के आंदोलन से बंद हुआ था प्लांट

पश्चिम बंगाल के सिंगूर में करीब दो दशक पहले टाटा की नैनो परियोजना को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद टाटा समूह की सिंगूर में वापसी को लेकर चर्चा तेज हो रही है। राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कहा कि टाटा के साथ शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है। अगर टाटा ग्रुप लौटने को तैयार होता है तो सरकार वहां किसी दूसरी कंपनी को नहीं लाएगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, जिन किसानों ने 2006 में नैनो के लिए अपनी जमीन दी थी, उनके लिए यह अधूरा सपना है। टाटा के सिंगूर छोड़ने के बाद हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजरते रहे। करीब 3,600 ऐसे परिवारों को आज भी सरकार हर महीने दो हजार रुपये और 16 किलो चावल देती है, लेकिन कई परिवार अब भी उस सदमे से उबर नहीं पाए हैं। टाटा को जमीन देने के लिए तैयार हैं लोग 75 साल की अंगूर दास बताती हैं कि उनके पति ने छह बीघा जमीन परियोजना के लिए दी थी। टाटा के जाने के बाद वे गहरे सदमे में चले गए और वर्ष 2019 में उनका निधन हो गया। अंगूर दास कहती हैं कि यदि टाटा दोबारा लौटती है तो वे अपनी बची हुई जमीन भी देने को तैयार हैं। जब सिंगूर आंदोलन चल रहा था तब अनिद्य दास महज 12 साल के थे। आज 32 साल के अनिद्य को रोजगार के लिए कोलकाता जाना पड़ता है। उनका कहना है कि यदि फैक्ट्री लग गई होती तो उन्हें रोज शहर जाकर नौकरी नहीं करनी पड़ती। उनके पिता ने भी जमीन दी थी, लेकिन आज वह जमीन भी खेती के योग्य नहीं बची है। खासेरभेड़ी गांव के स्वरूप दास ने भी दो बीघा जमीन परियोजना के लिए दी थी। वे बताते हैं कि मुआवजा मिलने के बाद वे दुबई चले गए थे, जबकि उनके दोनों भाइयों का चयन टाटा ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग प्रशिक्षण के लिए किया था। उत्तराखंड में ट्रेनिंग शुरू हो चुकी थी और नौकरी की उम्मीद भी थी, लेकिन परियोजना बंद होने के साथ सारे सपने टूट गए। उनका कहना है कि यदि आज टाटा या कोई दूसरी बड़ी कंपनी आती है तो वे फिर जमीन देने के लिए तैयार हैं। 20 साल में 15 गुना बढ़ी जमीन की कीमत भूमि अधिग्रहण के समर्थन में बनी सिंगूर शिल्प विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. उदयन दास का कहना है कि वर्ष 2006 के बाद से जमीन की कीमतों में लगभग 15 गुना वृद्धि हो चुकी है। उनके मुताबिक सड़क किनारे की जमीन, जिसकी कीमत उस समय करीब तीन लाख रुपये प्रति बीघा थी, अब एक करोड़ रुपये प्रति बीघा तक पहुंच गई है। ऐसे में यदि टाटा दोबारा लौटती है तो केवल मुआवजे पर ही 1,300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करना पड़ सकता है। यही वजह है कि उनकी नजर में टाटा की वापसी आसान नहीं होगी। 997 एकड़ जमीन बेकार हो रही वर्तमान में सिंगूर की वह 997 एकड़ जमीन, जहां कभी नैनो परियोजना शुरू हुई थी, बड़े हिस्से में झाड़ियों से ढकी पड़ी है। कभी यह इलाका पश्चिम बंगाल की सबसे उपजाऊ कृषि भूमि माना जाता था, जहां धान, आलू और अन्य फसलें होती थीं। लेकिन परियोजना रुकने के बाद खेती भी प्रभावित हुई और बड़ी संख्या में किसान रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों में चले गए। हालांकि, सिंगूर में सभी लोग टाटा की वापसी के पक्ष में नहीं हैं। सिंगूर कृषि रक्षा समिति के प्रमुख सदस्य प्रबीर पात्रा का कहना है कि उनका विरोध उद्योगों से नहीं था और न ही आज है। उनका कहना है कि उनका संघर्ष केवल तीन फसली उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए था और यदि फिर से ऐसी स्थिति बनती है तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… ममता TMC के बैंक खातों से सीमित लेनदेन कर सकेंगी:हाईकोर्ट ने निगरानी के लिए विशेष अधिकारी तैनात किया, बड़े खर्च पर रोक कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता बनर्जी गुट को पार्टी के फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों से सीमित लेनदेन की इजाजत दे दी। हालांकि खातों से सिर्फ रोजमर्रा और कानूनी मामलों से जुड़े खर्च ही किए जा सकेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
बंगाल में 20 साल बाद टाटा की वापसी संभव:सीएम सुवेंदु खुद मामले को देख रहे; ममता के आंदोलन से बंद हुआ था प्लांट

पश्चिम बंगाल के सिंगूर में करीब दो दशक पहले टाटा की नैनो परियोजना को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद टाटा समूह की सिंगूर में वापसी को लेकर चर्चा तेज हो रही है। राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कहा कि टाटा के साथ शुरुआती स्तर पर बातचीत चल रही है। अगर टाटा ग्रुप लौटने को तैयार होता है तो सरकार वहां किसी दूसरी कंपनी को नहीं लाएगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, जिन किसानों ने 2006 में नैनो के लिए अपनी जमीन दी थी, उनके लिए यह अधूरा सपना है। टाटा के सिंगूर छोड़ने के बाद हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजरते रहे। करीब 3,600 ऐसे परिवारों को आज भी सरकार हर महीने दो हजार रुपये और 16 किलो चावल देती है, लेकिन कई परिवार अब भी उस सदमे से उबर नहीं पाए हैं। टाटा को जमीन देने के लिए तैयार हैं लोग 75 साल की अंगूर दास बताती हैं कि उनके पति ने छह बीघा जमीन परियोजना के लिए दी थी। टाटा के जाने के बाद वे गहरे सदमे में चले गए और वर्ष 2019 में उनका निधन हो गया। अंगूर दास कहती हैं कि यदि टाटा दोबारा लौटती है तो वे अपनी बची हुई जमीन भी देने को तैयार हैं। जब सिंगूर आंदोलन चल रहा था तब अनिद्य दास महज 12 साल के थे। आज 32 साल के अनिद्य को रोजगार के लिए कोलकाता जाना पड़ता है। उनका कहना है कि यदि फैक्ट्री लग गई होती तो उन्हें रोज शहर जाकर नौकरी नहीं करनी पड़ती। उनके पिता ने भी जमीन दी थी, लेकिन आज वह जमीन भी खेती के योग्य नहीं बची है। खासेरभेड़ी गांव के स्वरूप दास ने भी दो बीघा जमीन परियोजना के लिए दी थी। वे बताते हैं कि मुआवजा मिलने के बाद वे दुबई चले गए थे, जबकि उनके दोनों भाइयों का चयन टाटा ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग प्रशिक्षण के लिए किया था। उत्तराखंड में ट्रेनिंग शुरू हो चुकी थी और नौकरी की उम्मीद भी थी, लेकिन परियोजना बंद होने के साथ सारे सपने टूट गए। उनका कहना है कि यदि आज टाटा या कोई दूसरी बड़ी कंपनी आती है तो वे फिर जमीन देने के लिए तैयार हैं। 20 साल में 15 गुना बढ़ी जमीन की कीमत भूमि अधिग्रहण के समर्थन में बनी सिंगूर शिल्प विकास समिति के अध्यक्ष डॉ. उदयन दास का कहना है कि वर्ष 2006 के बाद से जमीन की कीमतों में लगभग 15 गुना वृद्धि हो चुकी है। उनके मुताबिक सड़क किनारे की जमीन, जिसकी कीमत उस समय करीब तीन लाख रुपये प्रति बीघा थी, अब एक करोड़ रुपये प्रति बीघा तक पहुंच गई है। ऐसे में यदि टाटा दोबारा लौटती है तो केवल मुआवजे पर ही 1,300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करना पड़ सकता है। यही वजह है कि उनकी नजर में टाटा की वापसी आसान नहीं होगी। 997 एकड़ जमीन बेकार हो रही वर्तमान में सिंगूर की वह 997 एकड़ जमीन, जहां कभी नैनो परियोजना शुरू हुई थी, बड़े हिस्से में झाड़ियों से ढकी पड़ी है। कभी यह इलाका पश्चिम बंगाल की सबसे उपजाऊ कृषि भूमि माना जाता था, जहां धान, आलू और अन्य फसलें होती थीं। लेकिन परियोजना रुकने के बाद खेती भी प्रभावित हुई और बड़ी संख्या में किसान रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों में चले गए। हालांकि, सिंगूर में सभी लोग टाटा की वापसी के पक्ष में नहीं हैं। सिंगूर कृषि रक्षा समिति के प्रमुख सदस्य प्रबीर पात्रा का कहना है कि उनका विरोध उद्योगों से नहीं था और न ही आज है। उनका कहना है कि उनका संघर्ष केवल तीन फसली उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए था और यदि फिर से ऐसी स्थिति बनती है तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… ममता TMC के बैंक खातों से सीमित लेनदेन कर सकेंगी:हाईकोर्ट ने निगरानी के लिए विशेष अधिकारी तैनात किया, बड़े खर्च पर रोक कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ममता बनर्जी गुट को पार्टी के फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों से सीमित लेनदेन की इजाजत दे दी। हालांकि खातों से सिर्फ रोजमर्रा और कानूनी मामलों से जुड़े खर्च ही किए जा सकेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
दिलजीत की फिल्म सतलुज पूरी तरह बैन:ZEE5 ग्लोबल कैटेगरी से भी हटाई, सेंट्रल कमेटी ने रिपोर्ट सौंपी; अब आगे क्या? जानिए सवाल-जवाब में सबकुछ

पंजाबी एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज अब पूरी तरह बैन हो गई है। इसे OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 की ग्लोबल कैटेगरी से भी हटा दिया गया है। इस फिल्म को अब विदेश में भी नहीं देखा जा सकेगा। इसी के साथ फिल्म के कंटेंट की जांच के लिए गठित केंद्रीय समिति ने भी सिफारिश कर दी है कि फिल्म को बैन ही रहने दिया जाए। क्योंकि, फिल्म भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ है। सरकारी सूत्रों से हवाले से यह जानकारी शनिवार को न्यूज एजेंसी PTI ने दी। सूत्रों के अनुसार, समिति ने इस बात पर जोर दिया कि IT अधिनियम की धारा 69A के तहत फिल्म पर प्रतिबंध लगाना उचित था। इसमें पाया गया कि फिल्म की कहानी संतुलित नहीं है, क्योंकि यह उग्रवादियों के कृत्यों को छिपाती है। जबकि, उग्रवाद के दौरान पंजाब में सुरक्षा बलों की ओर से की गई ज्यादतियों को उजागर करती है। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन को दर्शाती है, जिन्होंने 1984 और 1994 के बीच पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के दाह संस्कार की जांच की थी। 1995 में पंजाब पुलिस ने उनका अपहरण कर हत्या कर दी थी। सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 3 जुलाई को रिलीज होने के 2 दिन बाद ही इस फिल्म को भारत में ZEE5 से हटा दिया था। इसके बाद मंत्रालय ने फिल्म की विस्तृत जांच के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के तहत एक अंतर-विभागीय समिति (आईडीसी) का गठन किया था। उसी समिति ने इसे बैन रखने की सिफारिश की है। पंजाब में यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने प्रतिबंध हटाने की मांग की है और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने राज्य भर में फिल्म प्रदर्शित करने की घोषणा की है। ऐसा क्या है इस फिल्म में, जो इस बैन किया जा रहा है, क्या यह फिल्म फिर से रिलीज होगी? सवाल-जवाब में जानते हैं सभी सवालों के जवाब। इस फिल्म में ऐसा क्या है, जिससे इसे बैन किया गया? यह फिल्म प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है। फिल्म में खालड़ा का रोल दिलजीत दोसांझ ने निभाया है। इसमें खालड़ा द्वारा 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के दौर में पुलिस की ओर से लावारिस बताकर जलाए गए सिखों के शवों की खोज और उनके दस्तावेजीकरण की कहानी को दर्शाया गया है। फिल्म दिखाती है कि खालड़ा ने अमृतसर और तरनतारन के श्मशान घाटों से नगर निगम के रिकॉर्ड हासिल किए, जिससे साबित हुआ कि पुलिस ने हजारों युवाओं को अवैध हिरासत में लेकर मार डाला। इस दौरान साहस दिखाकर राज्य के सिस्टम के सामने खालड़ा खड़े रहे। दुनिया के सामने सच लाने के बाद सितंबर 1995 में पंजाब पुलिस ने खालड़ा की भी हत्या कर दी। फिल्म की किन चीजों पर विवाद हुआ? बैन पर राजनीतिक हुई, पार्टियों ने क्या-क्या कहा? शिरोमणि अकाली दल (SAD) SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इस बैन को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया। उन्होंने लिखा, “यह केवल सेंसरशिप नहीं है, बल्कि हमारी सामूहिक स्मृति, सच्चाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक हमला है। पंजाब अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करने का हकदार है, दमन से नहीं।” अकाली दल ने घोषणा की कि सरकार के इस बैन को चुनौती देने के लिए पंजाब के हर गांव और गुरुद्वारों में इस फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग करेंगे, ताकि युवा अपनी पहचान और इतिहास को जान सकें। कांग्रेस वरिष्ठ नेता व विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने केंद्र सरकार के इस कदम की निंदा की। उन्होंने कहा कि खालड़ा के अपहरण और पुलिस बर्बरता के सच को दिखाने वाली फिल्म को रोकना अन्यायपूर्ण है। पार्टी के अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि जब द कश्मीर फाइल्स और द केरल स्टोरी जैसी संवेदनशील नैरेटिव वाली फिल्मों को बिना किसी बाधा के अनुमति मिल सकती है, तो तथ्यों और अदालती फैसलों पर आधारित सतलुज पर प्रतिबंध लगाना केंद्र सरकार के दोहरे मापदंड को दर्शाता है। आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब की सत्ताधारी AAP ने भी फिल्म को ZEE5 से हटाने के फैसले की आलोचना की। पार्टी प्रवक्ताओं ने मांग की कि फिल्म को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए, क्योंकि नई पीढ़ी के लिए राज्य के इस दर्दनाक और ऐतिहासिक सच को समझना बेहद जरूरी है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) सिख धार्मिक मामलों की सर्वोच्च संस्था SGPC ने फिल्म का पूरी तरह समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा का बलिदान सिख कौम के लिए सर्वोच्च है और फिल्म के माध्यम से उनकी आवाज को दबाने की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म की टाइमिंग और उसके नैरेटिव पर सवाल उठाए। बीजेपी का तर्क है कि चुनाव या संवेदनशील समय में ऐसी फिल्में पंजाब में दोबारा अशांति फैला सकती हैं। केंद्र ने फिल्म के खिलाफ क्या कहा? फिल्म रिलीज के बाद केंद्र सरकार ने क्या किया? 1. IT एक्ट की धारा 69A का उपयोग कर फिल्म तुरंत हटवाई फिल्म के रिलीज होने के ठीक 48 घंटे के भीतर केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने IT एक्ट की धारा 69A और IT नियम, 2021 के तहत प्राप्त आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया। सरकार ने सुरक्षा चिंताओं और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए ZEE5 को तुरंत इस फिल्म को भारत में अपने प्लेटफॉर्म से हटाने का लिखित निर्देश जारी किया। 2. हाई-लेवल स्पेशल कमेटी का गठन फिल्म को केवल हटाने तक ही केंद्र नहीं रुका। इसके कंटेंट की गहराई से जांच करने के लिए केंद्र सरकार ने IT नियम 2021 के नियम 14 के तहत एक उच्च स्तरीय अंतर-विभागीय समिति बनाई। इस विशेष समिति को फिल्म के दृश्यों, नैरेटिव और उसके संभावित सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों की समीक्षा कर सरकार को अंतिम सिफारिश सौंपने का जिम्मा दिया गया। 3. CBFC के नियमों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत केंद्र सरकार ने साफ किया कि कोई भी फिल्म प्रोड्यूसर सेंसर बोर्ड (CBFC) के सर्टिफिकेशन प्रोसेस को बायपास कर सीधे ओटीटी पर ऐसी संवेदनशील फिल्में रिलीज नहीं कर सकता। सरकार ने रुख अपनाया कि यदि फिल्म को दोबारा भारत में स्ट्रीम
हरियाणवी गाने भोला-भोली की रील पर विवाद:गंगा में प्रदीप बूरा ने पत्नी पूजा हुड्डा को उठाया; यूजर बोला- इन पर इमरान हाशमी सूट करेगा

हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री के कलाकार पूजा हुड्डा और प्रदीप बूरा का नया गाना ‘भोला भोली’ रिलीज होते ही विवादों में घिर गया है। हरिद्वार की हर की पौड़ी पर शूट की गई एक रील को लेकर सोशल मीडिया पर दोनों को जमकर ट्रोल किया जा रहा है। रील में गंगा नदी में प्रदीप बूरा अपनी पत्नी पूजा हुड्डा को गोद में उठाए नजर आ रहे हैं। बैकग्राउंड में गाना बज रहा है, ‘एक घाट पै भोली खड़ी अर एक घाट पै भोला, अरदास करै मां गंगा तै म्हारा मेल करा दे तौला।’ दोनों के भीगे कपड़ों और धार्मिक स्थल पर फिल्माए गए इस दृश्य पर कुछ लोगों ने आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक आस्था और हर की पौड़ी की गरिमा के खिलाफ बताया है। एक यूजर ने लिखा कि इन पर भोले बाबा नहीं, इमरान हाशमी सूट करेगा। विवाद बढ़ने के बाद प्रदीप बूरा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पति-पत्नी के प्रेम पर आधारित म्यूजिक वीडियो का हिस्सा है और इसमें कुछ भी अश्लील नहीं है। 6 जुलाई को रिलीज हुआ था गाना पूजा हुड्डा और प्रदीप बूरा का नया गाना ‘भोला भोली’ 6 जुलाई को रिलीज हुआ था। इसकी शूटिंग हरिद्वार और ऋषिकेश के अलग-अलग धार्मिक व पर्यटन स्थलों पर की गई थी। पूरी शूटिंग करीब दो दिन में पूरी हुई। यूट्यूब पर इस गाने को अब तक करीब ढाई करोड़ बार देखा और सुना जा चुका है। गाने के प्रमोशन के लिए पूजा हुड्डा और प्रदीप बूरा ने हरिद्वार में कई रील भी बनाई थीं। यूजर ने लिखा- ऐसी चीजें शोभा नहीं देतीं इन रील्स पर यूजर अलग-अलग तरह के कमेंट कर रहे हैं। कुछ लोगों ने लिखा कि आस्था के केंद्र हरिद्वार जैसे पवित्र स्थान पर गंगा नदी में इस तरह अश्लील हरकत करना गलत है। एक यूजर ने कहा, “आप जैसे बड़े कलाकारों से ऐसी उम्मीद नहीं थी।” वहीं दूसरे ने लिखा, “भोले बाबा के नाम पर इस तरह का कंटेंट शोभा नहीं देता।” कुछ यूजर्स ने इसे “बेशर्मी” करार दिया, जबकि कई ने कहा कि “आप अच्छे कलाकार हैं, आपको ऐसी चीजें शोभा नहीं देतीं।” महिला बोली- ऐसे कलाकारों का विरोध करना चाहिए विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक महिला का वीडियो भी वायरल हुआ। महिला ने कहा कि जो लोग पहले मासूम शर्मा का विरोध करते थे, उन्हें अब पूजा हुड्डा और प्रदीप बूरा के वीडियो पर भी बोलना चाहिए। आखिर कौन सा भोला और कौन सी भोली कांवड़ यात्रा के दौरान इस तरह का व्यवहार करेंगे। महिला ने आरोप लगाया कि मासूम शर्मा पर अक्सर बदमाशी को बढ़ावा देने वाले गाने बनाने के आरोप लगाए जाते थे, लेकिन उन्होंने कभी किसी धार्मिक स्थल पर इस तरह का वीडियो नहीं बनाया। उसने पूजा हुड्डा की ड्रेसिंग पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह का कंटेंट समाज में गलत संदेश देता है। जो कलाकार धार्मिक स्थलों पर इस तरह का कंटेंट बनाते हैं, उनका विरोध किया जाना चाहिए। प्रदीप बूरा बोले- हमारी रील में कुछ भी अश्लील नहीं विवाद पर प्रदीप बूरा ने कहा, “अगर लोगों को उस रील में वल्गर कंटेंट नजर आ रहा है, तो फिर भी वे उसे देख रहे हैं। हमने उस वीडियो में कोई आपत्तिजनक कपड़े नहीं पहने हैं। भोले और पार्वती की भी लव मैरिज हुई थी। लोग हरिद्वार जाकर शराब पीते हैं, लेकिन हमारी रील में ऐसा कुछ भी नहीं है। हमने सिर्फ पति-पत्नी के प्यार को दिखाया है, जो भोले और पार्वती के रूप में दर्शाया गया है। हमारी रील देखकर किसी पर कोई गलत प्रभाव नहीं पड़ रहा।”
बोल बेबी बोल फेम सिंगर एस जानकी का निधन:88 साल की थीं, 60 साल के करियर में कई भाषाओं में 48 हजार गाने गाए

मशहूर प्लेबैक सिंगर एस. जानकी का शनिवार को मैसूर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 88 साल की थीं। शुक्रवार रात उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई थी। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। एस. जानकी ने अपने करियर में 48 हजार से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए। इनमें ज्यादातर हिंदी, कन्नड़, तमिल, तेलुगु और मलयालम भाषाओं में हैं। एस. जानकी को ‘बोल बेबी बोल (मेरी जंग), प्रभु मोरे अवगुण (सुर संगम), ओ मारिया (सागर), गोपाला-गोपाला (हमसे है मुकाबला) जैसे हिंदी गानों के लिए जाना जाता है। एस. जानकी को चार नेशनल फिल्म अवॉर्ड और कई राज्य-स्तरीय सम्मानों से नवाजा गया है। पद्मभूषण ठुकरा दिया था जानकी ने 1957 में अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत की थी। उनका पहला हिंदी गाना साल 1958 में आई फिल्म ‘मिस 58’ में था, जिसका संगीत जी. रामनाथन ने तैयार किया था। 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण देने की घोषणा की, लेकिन उन्होंने यह सम्मान स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि दक्षिण भारतीय कलाकारों को अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर देर से पहचान मिलती है और उन्हें यह सम्मान बहुत देर से दिया गया। उन्होंने यह भी कहा था कि दक्षिण भारतीय कलाकारों को उनका उचित हक नहीं मिलता है। संगीत जगत की जानकी अम्मा, 60 साल गाने गाए एस. जानकी को संगीत की दुनिया में जानकी अम्मा के नाम से जाना जाता था। वे हमेशा कहती थीं कि सिंगिंग ईश्वर का दिया हुआ उपहार है। वे अपनी सफलता का श्रेय संगीतकारों और गीतकारों को भी देती थीं। उनकी और एसपी बालसुब्रह्मण्यम की जोड़ी भारतीय फिल्म संगीत की सबसे सफल जोड़ियों में मानी जाती है। दोनों ने साथ मिलकर हजारों डुएट गाए। करीब छह दशक तक एक्टिव रहने के बाद उन्होंने 2017 में स्वयं घोषणा की कि अब वे नई रिकॉर्डिंग नहीं करेंगी। उनका कहना था, ‘मैं बहुत गा चुकी हूं, अब आराम करना चाहती हूं।’ उन्होंने मैसूर में एक कार्यक्रम के साथ अपने गायन करियर को विराम दिया।
नीता अंबानी देश की सबसे पावरफुल महिला:फॉर्च्यून इंडिया की लिस्ट में नंबर 1 पर; टॉप-10 में ईशा अंबानी भी शामिल

रिलायंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन नीता अंबानी फॉर्च्यून इंडिया की सबसे पावरफुल टॉप-100 महिलाओं की लिस्ट में पहला स्थान हासिल किया हैं। यह सम्मान उन्हें लीडरशिप और समाज सेवा के लिए मिला है। उनकी लीडरशिप में फाउंडेशन ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में काम करते हुए 2.9 करोड़ बच्चों समेत देश के 10 करोड़ से ज्यादा लोगों की जिंदगी बदली है। खास बात ये है कि इस लिस्ट में उनकी बेटी ईशा अंबानी 7वें नंबर पर रहीं।
झुर्रियां हटाने के टिप्स: कम उम्र में भी अगर आपके चेहरे पर पड़ रही हैं झुर्रियां, तो आज ही हैं ये छोटी आदतें

झुर्रियाँ हटाने के उपाय: आज- कल के समय में प्रदूषण, भाग भारी नस्लीय जीवन शैली और गलत खान-पान का सीधा असर हमारी खाल पर दिखता है। उम्र से पहले चेहरे पर आने वाली फाइन लाइन्स और जर्रियां में काफी टेंशन बढ़ जाती है। बाजार में मिलने वाले सरकारी सौंदर्य उत्पाद कई बार कैमिकल्स के कारण त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर आप अपने बालों को खूबसूरत दिखाने के लिए हमेशा जवां और चमकदार दिखना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं उन खास टिप्स के बारे में, जो आपको बेडाग और खूबसूरत लुक पाने में मदद करते हैं। पानी पीने की आदत शरीर में पानी की कमी पर स्कार्फ स्ट्रेंथ और बेजान दिखने लगते हैं, जिससे झुर्रियां जल्दी उभरती हैं। दिन भर में 7 से 10 लीटर पानी पिएं। यह आदतन शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और चेहरे पर बिकने वाली ग्लो बनाने में मदद करता है। अन्तःकरण रूखी त्वचा पर उम्र के निशान जल्दी दिखते हैं। इससे बचने के लिए सुबह संस्थान के बाद और रात को सोने से पहले महान अलैहिस्सर का कमरा। आप नारियल तो नारियल या बादाम के तेल की कुछ पत्तियों से शरीर को नरिश कर सकते हैं। ये है सॉफ्ट और शील्डेड रखने का तरीका सबसे आसान उपाय। धूप से बचाव तेज़ धूप की किरणें चमक को गहराई से नुकसान पहुंचाती हैं और इसे ठीक करती हैं। गर्मी हो या नज़ारे, घर से बाहर यात्रा से पहले सनस्क्रीन ले जाना बिल्कुल नहीं। यह केवल धूप से बचने के लिए ही नहीं किया जाता है, बल्कि समय से पहले धूप वाली त्वचा को भी शामिल किया जाता है। म रोज़ रात को रात को आतंकी हमले में शामिल होने के लिए धन्यवाद। एलोवेरा जेल का उपयोग करके यह रक्त शर्करा को बढ़ाता है और त्वचा को टाइट करने में मदद करता है। सारांश हमारा खान-पान सीधे चेहरे पर दिखता है। इनमें हरी पत्तेदार सामुद्रिक और समुद्री पत्ते जैसे सेंट्रा, सेब और अनार शामिल हैं। साथ ही मूंगफली और बादाम का सेवन करें। ये पोषक तत्त्व रेशम को अंदर के शहर में युवा बनाए रखता है। उत्तर रात में स्किन खुद को रिपेयर करती है। 7 से 8 घंटे की गहरी नींद, आंखों के नीचे काले घेरे और थकान नहीं। समय पीठ के बल सोने की कोशिश करें, क्योंकि करवट लेकर सोने से सोल तकिए के दबाव के कारण चेहरे पर निशान पैड हो सकता है। तनाव मुक्त लगातार चिंता करने से चेहरे का ग्लो खत्म हो जाता है। हमेशा खुश रहने की कोशिश करें और मेंटल पीस के लिए सुबह योगा या मेडिकल इंडस्ट्रीज़ अपनाएं। तनाव कम करने से आप लंबे समय तक जवान और ताज़ा महसूस करेंगे। यह भी पढ़ें: थलापति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ का इंतजार हुआ खत्म, रिलीज डेट (टैग्सटूट्रांसलेट)प्राकृतिक झुर्रियां हटाना(टी)त्वचा की देखभाल के टिप्स(टी)बुढ़ापा रोधी घरेलू उपचार(टी)चमकती त्वचा पाएं(टी)झुर्रियों के लिए चेहरे की मालिश(टी)त्वचा के लिए स्वस्थ आहार(टी)समय से पहले बुढ़ापा रोकना
वियतनाम में भारतीय टूरिस्टों से भरी बोट पलटी:32 भारतीय सवार थे, 18 का रेस्क्यू, 14 की तलाश जारी

वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास शनिवार को भारतीय पर्यटकों को लेकर जा रही एक बोट समुद्र में पलट गई। भारतीय दूतावास ने हादसे की पुष्टि करते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है और खोज-बचाव अभियान जारी है। सोशल मीडिया पर दावा किया किया जा रहा है कि इसमें 32 भारतीय टूरिस्ट सवार थे। इनमें से 18 का रेस्क्यू कर लिया गया है, जबकि 14 की तलाश जारी है। वियतनाम की हो ची मिन्ह सिटी में स्थित इंडियन एंबेसी ने बताया कि घटना के सही जानकारी जुटाई जा रही है। यहां यात्रियों की मदद के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। इससे संपर्क करने के लिए हेल्पलाइन नंबर +84 36 281 7930, +84 91 552 37 14 और +84 33 452 0414 जारी किए गए हैं। हादसे की तस्वीरें… भारतीय दूतावास ने बनाए कंट्रोल रूम भारतीय दूतावास ने कहा कि हादसे के बाद हनोई स्थित दूतावास और हो ची मिन्ह सिटी स्थित भारतीय दूतावास में कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। दोनों मिशन स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं और भारतीय नागरिकों को हर संभव मदद दी जा रही है। दूतावास ने कहा कि हादसे से जुड़ी पूरी जानकारी अभी जुटाई जा रही है। फिलहाल स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। सुबह 10:30 बजे हुआ हादसा रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसा सुबह करीब 10:30 बजे हुआ। नाव भारतीय पर्यटकों को फु क्वोक के पास स्थित होन मे रुट न्गोआई द्वीप घुमाने ले जा रही थी। यह द्वीप अपने साफ समुद्र, छोटे बीच और कोरल रीफ डाइविंग के लिए मशहूर है। यहां पहुंचने के लिए पर्यटक आमतौर पर एन थोई बंदरगाह से नाव या स्पीडबोट किराये पर लेते हैं। खबर लगातर अपडेट हो रही है…
भारतीय फिल्म महोत्सव मेलबर्न में 13-23 अगस्त तक होगा:सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में सितारे जमीन पर और सैयारा सबसे आगे

भारत के बाहर होने वाले सबसे बड़े भारतीय फिल्म महोत्सव इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (IFFM) 2026 के अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेशन घोषित हो गए हैं। इस बार फिल्मों में ‘सितारे जमीन पर’, ‘सैयारा’ और ‘कांतारा: ए लीजेंड- चैप्टर 1’ सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरी हैं। वहीं ओटीटी में ‘कोहरा सीजन-2’ को सबसे ज्यादा नॉमिनेशन मिले हैं। फेस्टिवल 13 से 23 अगस्त तक ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित होगा। इस बार उद्घाटन समारोह में ऑस्कर-नामांकित फिल्म ‘लगान’ की विशेष स्क्रीनिंग भी की गई। जानते हैं किन फिल्मों को सबसे ज्यादा चयनित किया गया है। फिल्मों में इनका दबदबा – सितारे जमीन पर बेस्ट फिल्म, बेस्ट एक्टर (आमिर खान) व बेस्ट डायरेक्टर समेत कई श्रेणियों में है। – सैयारा बेस्ट फिल्म, डायरेक्टर (मोहित सूरी), एक्टर (अहान पांडे) और बेस्ट एक्ट्रेस (अनीत पड्डा) की रेस में है। – कांतारा: ए लीजेंड- चैप्टर 1 के लिए ऋषभ शेट्टी को अभिनेता और निर्देशक दोनों श्रेणियों में नॉमिनेशन मिला है। -‘धुरंधर’ को इस बार सीमित प्रमुख नॉमिनेशन मिले हैं। रणवीर सिंह बेस्ट एक्टर की दौड़ में जरूर शामिल हैं। ओटीटी में ये आगे नेटफ्लिक्स की क्राइम-थ्रिलर ‘कोहरा: सीजन-2’ इस बार सबसे चर्चित वेब सीरीज बनकर उभरी है। इसे बेस्ट सीरीज के साथ अभिनय श्रेणियों में भी कई नॉमिनेशन मिले हैं। बारुन सोबती और मोना सिंह अपनी-अपनी कैटेगरी में दावेदार हैं। इन सीरीज को भी जगह मिली है: – फ्रीडम एट मिडनाइट: सीजन 2 – सपने Vs एवरीवन – मटका किंग इन सितारों पर नजर बेस्ट एक्टर – आमिर खान (सितारे जमीन पर) – रणवीर सिंह (धुरंधर) – ऋषभ शेट्टी (कांतारा) – दुलकर सलमान (कांथा) – अहान पांडे (सैयारा) बेस्ट एक्ट्रेस – रानी मुखर्जी (मर्दानी 3) – यामी गौतम (हक) – अनीत पड्डा (सैयारा) – कल्याणी प्रियदर्शन (लोकाह) – कीर्ति कुल्हारी (फुल प्लेट)
बिजनेस शहरों में कॉफी क्रेज; 1200+ कैफे बेंगलुरु में:कॉफी स्टार्टअप्स की नई रेस; सेलेब्स कर रहे निवेश, विदेशी ब्रांड भी भारतीय मार्केट में उतरे

भारत में अब लोग सिर्फ कॉफी नहीं, बेहतर कॉफी की तलाश कर रहे हैं। स्पेशलिटी कॉफी यानी चुनिंदा बीन्स से बनी प्रीमियम कॉफी, जिसकी पहचान उसके स्वाद, गुणवत्ता और बनाने के तरीके से होती है। इसी बदलती पसंद की वजह से पिछले 10 वर्षों में यह बाजार करीब ₹11,000 करोड़ तक पहुंच गया है। 2016 के बाद 100 से ज्यादा नए स्पेशलिटी कॉफी ब्रांड शुरू हुए हैं। स्पेशलिटी कॉफी की सबसे बड़ी ताकत मिलेनियल और जेन-जी हैं। यही वर्ग नई चीजें आजमाने, प्रीमियम उत्पादों पर खर्च करने और कैफे को सोशल स्पेस की तरह इस्तेमाल करने में सबसे आगे है। इसी वजह से अब कई सेलेब्रिटीज भी इस बिजनेस में उतर रहे हैं। विराट से दीपिका तक ये सेलेब्रिटी कॉफी स्टार्टअप्स पर लगा रहे दांव – विराट कोहली रेज कॉफी में निवेशक और ब्रांड एंबेसडर हैं। ब्रांड को तेजी से बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। – दीपिका पादुकोण ब्लू टोकई कॉफी रोस्टर्स में निवेश किया है। स्पेशलिटी कॉफी ब्रांड में बड़ा नाम है। – निखिल कामत ‘सबको’और ‘थर्ड वेव कॉफी’ जैसे भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश। – राणा दग्गुबाती हैदराबाद के कॉफी स्टार्टअप कथा कॉफी के शुरुआती निवेशकों में शामिल हैं। – रकुल प्रीत सिंह कनाडा की प्रसिद्ध कैफे ब्रांड ब्लेंज कॉफी के भारत विस्तार में साझेदारी की है। दक्षिण भारत से उत्तर की ओर बढ़ रहा बाजार बेंगलुरु – 1200 से अधिक कैफे, देश में सबसे ज्यादा यह देश का कॉफी हब है। यहां 1200 से ज्यादा कैफे मौजूद हैं, यानी हर 11 हजार लोगों पर एक कैफे, जो भारत में सबसे अधिक है। चेन्नई – प्रति व्यक्ति कॉफी की खपत में सबसे आगे यहां प्रति व्यक्ति सालाना करीब 2.4 किलोग्राम कॉफी की खपत होती है, जो देश में सबसे अधिक है। यह देश की ‘फिल्टर कॉफी कैपिटल’ भी है। दिल्ली – भविष्य का सबसे तेज बढ़ता कॉफी बाजार बन रहा यहां कॉफी बाजार 22% सालाना की दर से बढ़ रहा है, जो बड़े शहरों में सबसे अधिक है। यह भविष्य का सबसे तेज बढ़ता बाजार है। बड़ी कॉफी कंपनियों की नजर अब भारत पर -2000 के दशक में कैफे कॉफी डे, स्टारबक्स व कॉस्टा कॉफी ने भारतीयों को कैफे जाने की आदत डाली। अब नई पीढ़ी के ब्रांड्स ने स्पेशलिटी कॉफी को लोकप्रिय बनाया है। – पिछले 10 वर्षों में कम से कम 6 बड़े विदेशी कॉफी ब्रांड भारत आए हैं। कनाडा का टिम हॉर्टन्स (2022) और ग्रीस का कॉफी आइलैंड (2025) इनमें प्रमुख ब्रांड हैं। (सोर्स: ब्लू टोकाई, सेकेंडरी रिसर्च, Inc42)









