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आजमगढ़ में आयुर्वेदिक उपचार की नई सुविधा, 25 स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सक के साथ मिलेगी बेहतर सुविधा

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Last Updated:February 23, 2026, 22:30 IST आजमगढ़ जिले में मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आयुर्वेदिक उपचार की नई सुविधा मिलेगी. अब सीएचसी और पीएचसी केंद्रों पर एलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेदिक इलाज भी उपलब्ध होगा. पहले चरण में 25 स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी, जहां मरीज आयुर्वेदिक दवाइयों जैसे काढ़ा, तेल और जड़ी बूटियों से इलाज करवा सकेंगे. ख़बरें फटाफट आजमगढ़. जिले में अब मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक नई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, मंडलीय अस्पताल के साथ-साथ सीएचसी व पीएचसी सेंटरों पर भी अब एलोपैथ दावों के साथ-साथ आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की व्यवस्था भी उपलब्ध होगी. मरीज को आयुर्वेदिक उपचार के लिए शहर मुख्यालय की भाग दौड़ नहीं करनी होगी. उन्हें अब अंग्रेजी दावों के साथ-साथ आयुर्वेदिक इलाज के लिए अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज उपलब्ध होगा और साथ ही दवाइयां भी उपलब्ध कराई जाएगी. पहले चरण में 25 अस्पतालों पर शुरू होगी यह व्यवस्थाग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को सस्ता सुरक्षित और भरोसेमंद इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पहले चरण में जिले 25 स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग के द्वारा चिकित्सकों के बैठने के लिए अलग से ओपीडी कक्ष की व्यवस्था होगी, जिसमें अस्पताल में आने वाले मरीजों को एलोपैथ के अलावा आयुर्वेदिक उपचार का विकल्प भी उपलब्ध होगा. समस्याओं को बताते हुए आयुर्वेदिक चिकित्सकीय सलाह प्राप्त करते हुए दवाइयां भी प्राप्त कर सकेंगे. जड़ी बूटियां से संभव होगा इलाजइसके लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा पहले चरण में चयनित सीएचसी और पीएचसी में आयुर्वेदिक चिकित्सकों की तैनाती की जाएगी, जहां पर आयुर्वेदिक दवाइयां काढ़ा,तेल और आवश्यक जड़ी बूटियां भी उपलब्ध होगी. इस व्यवस्था के शुरू हो जाने से खास तौर पर उन लोगों को राहत मिलेगी जो महंगे निजी अस्पतालों तक नहीं पहुंच पाते. डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, पेट की बीमारियां एवं त्वचा से संबंधित तमाम समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अब प्राकृतिक तरीके से उपचार मिल सकेगा. जिन स्वास्थ्य केंद्रों पर यह सुविधा प्रथम चरण में उपलब्ध होगी उनमें मार्टिनगंज ब्लॉक का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, फूलपुर ब्लॉक के अंबारी पीएससी, बिलरियागंज ब्लॉक के परशुरामपुर, बनकट और जमीन फरेंदा पीएचसी, अजमतगढ़ ब्लॉक के अवुमारी नारायणपुर, बिलरियागंज, तरवां, महानगर ब्लॉक के खरिहानी पीएससी आदि पर आयुष डॉक्टर तैनात किए जाएंगे. About the Author Monali Paul Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें Location : Azamgarh,Uttar Pradesh First Published : February 23, 2026, 22:30 IST

फिरोजाबाद में मौसम बदलने से बीमारियां बढ़ीं, डॉक्टर की सलाह जरूरी

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Last Updated:February 21, 2026, 21:45 IST बदलते मौसम में अचानक सर्दी और गर्मी के असर से लोग बीमार हो रहे हैं. वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. मनोज कुमार ने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने और मौसम के अनुसार खान-पान व कपड़ों का ध्यान रखने की सलाह दी है. जानें कैसे बचें बीमारियों से. ख़बरें फटाफट फिरोजाबाद. जैसे-जैसे मौसम बदलता जा रहा है, वैसे ही लोग बीमार हो रहे हैं।. सर्दी के बाद गर्मी ने अपना तेवर दिखाना शुरू कर दिया है, जिसकी वजह से लोग बीमार हो रहे हैं. लोगों को सर्दी-जुकाम हो रहा है और इसके साथ ही पेट की भी बीमारियां देखने को मिल रही हैं. इसको लेकर डॉक्टर भी मरीजों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की सलाह दे रहे हैं. सर्दी–गर्मी से लोगों को हो रही दिक्कत फिरोजाबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. मनोज कुमार ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि अचानक मौसम बदल रहा है. रात में लोगों को सर्दी लगती है, तो वहीं दिन में तेज धूप से पसीना आ रहा है, इसलिए यह मौसम स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है. इस मौसम में कपड़े पहनने से लेकर खाने-पीने तक की चीजों का सही प्रयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मौसम में लोग एकदम सारे गर्म कपड़े नहीं छोड़ें. इसके साथ ही खाने-पीने के लिए ठंडी चीजों से परहेज करें. डॉ. कुमार ने बताया कि अभी लोग इसी वजह से अधिक बीमार हो रहे हैं कि वे मौसम के हिसाब से चीजें नहीं खा रहे हैं. इस मौसम में अधिक ऑयली, भुनी और फास्ट फूड का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पेट की बीमारियां भी हो सकती हैं. धीरे-धीरे करें बदलाव, वरना हो जाएंगे बीमार वरिष्ठ फिजिशियन ने बताया कि मौसम धीरे-धीरे बदल रहा है, लेकिन लोग एकदम से बदलाव कर देते हैं. इसकी वजह से हमारी बॉडी तापमान के अनुसार काम नहीं कर पाती, इसलिए आपको भी मौसम के हिसाब से रहना चाहिए. यदि कोई भी बीमारी हो, या जो डायबिटीज या हार्ट के मरीज हैं, वे इस मौसम में धीरे-धीरे बाहर निकलें. किसी भी तरह की बीमारी होने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाकर संपर्क करें. पानी अच्छे से पीएं और ज्यादा से ज्यादा खान पान का ख्याल रखें. About the Author Monali Paul Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें Location : Firozabad,Uttar Pradesh First Published : February 21, 2026, 21:45 IST

बरगद के पत्तों के फायदे: पाचन, त्वचा व जोड़ों के दर्द में असरदार

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Last Updated:February 21, 2026, 21:28 IST वट वृक्ष (बरगद) के पत्ते, छाल और कोपलें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और रोगाणुरोधी गुणों से भरपूर होती हैं. जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता  को मजबूती प्रदान करते हैं. इन पत्तियों का काढ़ा या अर्क संक्रमण से लड़ने, त्वचा रोगों, मधुमेह और श्वसन संबंधी समस्याओं में कारगर माना जाता है. जिससे समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है। वट वृक्ष यानी के बरगद के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. जो पाचन में सुधार, त्वचा रोगों, जोड़ों के दर्द, सूजन और डायबिटीज जैसी समस्याओं में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनके कोमल पत्तों का लेप घावों को भरने में सहायक है और इनका रस एंटी-इंफ्लेमेटरी के रूप में कार्य करता है. डॉक्टर रवि आर्य ने बताया कि बरगद के कोमल पत्ते (कूपल) और दूध दस्त, पेचिश और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए आयुर्वेद में एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार हैं. कसैले गुणों के कारण, यह आंतों की गति को नियंत्रित करते हैं और मल को बांधते हैं. इसके कूपलों को रात भर भिगोकर सुबह पानी पीने या दही के साथ सेवन करने से दस्त में तुरंत लाभ होता है. बरगद के पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द, मोच और सूजन में कारगर हैं. सबसे असरदार उपाय में पत्तों पर घी/सरसों का तेल लगाकर गर्म करें और सूजन वाले स्थान पर बांधें. इसके ताजे पत्तों का लेप खुजली व लाल चकत्तों में आराम देता है. जो एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प है. Add News18 as Preferred Source on Google वट वृक्ष (बरगद) के पत्ते और अन्य भाग हड्डियों के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. इनमें कैल्शियम और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. जो हड्डियों को मजबूत बनाने, जोड़ों के दर्द, गठिया और सूजन को कम करने में सहायक हैं. यह दर्द से राहत और टूटी हड्डियों के उपचार में मदद करता है. बरगद के पत्ते औषधीय खजाना हैं. जिनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं. इनमें ट्राइटरपेन्स, फ्रीडेलिन, सिटोस्टेरॉल, और फ्लेवोनोइड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये पत्ते मधुमेह नियंत्रण, त्वचा रोगों (दाग-धब्बे, खुजली), जोड़ों के दर्द, दस्त, और इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं. बरगद के पत्ते जीवाणुरोधी और सूजनरोधी गुणों से भरपूर होते हैं. जो त्वचा की समस्याओं और शरीर के दर्द में राहत देते है. ताजे पत्तों का लेप खुजली, मुंहासे और घावों को जल्दी भरने में मदद करता है. जबकि पत्तों का गर्म काढ़ा जोड़ों के दर्द में उपयोगी है. First Published : February 21, 2026, 21:28 IST

आंवला के अत्यधिक सेवन से एसिडिटी, ब्लड शुगर कम और रक्तस्राव का खतरा.

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Last Updated:February 21, 2026, 21:12 IST आंवला स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन या कुछ विशेष परिस्थितियों में यह नुकसानदायक हो सकता है. खाली पेट लेने, ज्यादा मात्रा में खाने, लो ब्लड शुगर या सर्जरी के आसपास इस्तेमाल करने पर यह एसिडिटी, पेट दर्द, रक्तस्राव और कमजोरी जैसी समस्याएँ पैदा कर सकता है। विशेषज्ञ डॉ. गीतिका शर्मा की सलाह है कि इसे सीमित मात्रा में ही लें. आंवले का अत्यधिक सेवन या कुछ विशेष शारीरिक स्थितियों में यह नुकसानदायक हो सकता है. यह एसिडिटी, पेट में जलन, कब्ज, दस्त, ब्लड शुगर कम होना, और रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकता है. इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. एक्सपर्ट डॉ गीतिका शर्मा ने बताया कि खाली पेट या अत्यधिक सेवन करने पर यह एसिडिटी, जलन और पेट खराब जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है. चूंकि आंवला विटामिन C से भरपूर होता है. इसकी उच्च अम्लीय प्रकृति संवेदनशील पेट या हाइपरएसिडिटी वाले लोगों में एसिड रिफ्लक्स बढ़ा सकती है. लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) वाले लोगों के लिए आंवले का बहुत अधिक सेवन हानिकारक हो सकता है. आंवला रक्त शर्करा के स्तर को काफी कम करता है. यदि आपका शुगर लेवल पहले से ही कम है. तो आंवला इसे और कम कर सकता है. जिससे चक्कर आना, कमजोरी या बेहोशी हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google सर्जरी से दो सप्ताह पहले और बाद में आंवले का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह खून को पतला कर सकता है. जिससे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है. यह ब्लीडिंग जोखिम को बढ़ाता है और ब्लड शुगर/बीपी में उतार-चढ़ाव कर सकता है.  आंवले का सेवन उन लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है जिन्हें इससे एलर्जी है. यह एक दुर्लभ प्रतिक्रिया है. लेकिन एलर्जी होने पर खुजली, पित्ती, त्वचा पर चकत्ते, सूजन, या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. इसके अलावा, अत्यधिक सेवन से एसिडिटी, पेट दर्द, लो ब्लड प्रेशर और किडनी स्टोन की समस्या भी बढ़ सकती है. अत्यधिक आंवला खाने या लगाने से बालों और त्वचा में रूखापन और डैंड्रफ की समस्या हो सकती है. आंवला में मौजूद प्राकृतिक टैनिन और एस्ट्रिंजेंट गुण बालों की प्राकृतिक नमी को कम कर सकते हैं. इसके अलावा, इसके मूत्रवर्धक प्रभाव के कारण डिहाइड्रेशन भी हो सकता है. वैसे तो यह सुरक्षित है, लेकिन अत्यधिक मात्रा में सेवन से दस्त, एसिडिटी और पेट में ऐंठन हो सकती है. गर्भावस्था में किसी भी प्राकृतिक उपाय से पहले विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है. First Published : February 21, 2026, 21:12 IST