एसिडिटी से राहत का देसी उपाय I Sultanpur news

Last Updated:April 07, 2026, 10:47 IST गलत खान-पान और तनाव की वजह से बढ़ रही एसिडिटी अब आम समस्या बन चुकी है. आयुर्वेद के अनुसार मुलेठी का सेवन पाचन तंत्र को मजबूत कर पित्त दोष को शांत करने में मदद करता है और बार-बार होने वाली जलन से राहत दे सकता है. सुल्तानपुर. आज के समय में गलत दिनचर्या और गलत खान-पान की वजह से हमारा स्वास्थ्य कई तरह की बीमारियों का शिकार होता चला जा रहा है. उसी में एक आम समस्या पित्त अम्ल दोष की भी लोगों को ज्यादा हो रही है. पीत अम्ल दोष जिसे आम बोलचाल की भाषा में एसिडिटी भी कहा जाता है. यह समस्या आज के लोगों में ज्यादा हो रही है और एसिडिटी की वजह से कई बार लोगों को ज्यादा तेज पीड़ा भी होने लगती है. ऐसे में आयुर्वेद में एसिडिटी और पित्त को साफ करने के लिए मुलेठी के सेवन को बताया गया है. चिकित्सकों के मुताबिक मुलेठी का सेवन एसिडिटी के लिए रामबाण इलाज है. तीन चीज़ें हैं महत्वपूर्ण सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव लोकल 18 से बताते हैं कि इसके लिए हरी करी और बरी यह तीन चीज काफी इंपोर्टेंट होती हैं. इन्हीं तीनों की वजह से लोगों को एसिडिटी की समस्या होती है. जिसमें हरी का मतलब होता है जल्दी-जल्दी खाना खाना क्योंकि जब हम जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं तो इससे हमारा पाचन तंत्र खाने को पचाने में अधिक समय लेता है और सही से पचा भी नहीं पाता. वहीं करी का मतलब है मिर्च, मसाला और तली-भुनी हुई चीज का अधिक सेवन करना, ये भी एसिडिटी का कारण बनता है और बरी का मतलब अधिक चिंता करना यानी कि आप अधिक चिंता करते हैं तो भी आपको एसिडिटी हो सकती है. करें यह उपायअगर आपको भी बार-बार एसिडिटी की समस्या आती है तो इसके लिए आप आयुर्वेद के देसी उपाय में मुलेठी का सेवन कर सकते हैं. अगर आप मुलेठी के स्वरस का प्रयोग करते हैं तो यह एसिडिटी के लिए और अधिक फायदेमंद होता है अन्यथा आप मुलेठी के टुकड़े को भी मुंह में रखकर एसिडिटी से छुटकारा पा सकते हैं या फिर आप इसका चूर्ण बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. अन्य में भी है फायदेमंद मुलेठी का सेवन करने से हमारे शरीर का पाचन तंत्र मजबूत होता है इसके साथ ही एसिडिटी की भी समस्या दूर होती है लेकिन इन सबके अलावा मुलेठी का सेवन हमारे लिए उन चीजों में भी फायदेमंद है जिन लोगों को खांसी आदि की समस्या है. वह लोग भी मुलेठी का सेवन कर सकते हैं और खांसी की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh First Published : April 07, 2026, 10:47 IST
Health Tips: अगर खाते हैं बैंगन की सब्जी तो हो जाएं सावधान, हो सकता है नुकसान

Last Updated:April 03, 2026, 16:48 IST Health Tips: कई बार होता है कि हम अनजाने में ऐसा खाना खा रहे होते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए सही नहीं होता है. हमें लगता है कि ये हेल्दी सब्जी है, पर असलियत कुछ और ही होती है. अब डॉक्टर की माने तो बैंगन भी ऐसी सब्जी है, जिसे खाने से आपकी सेहत पर गलत असर पड़ सकता है. आइए जानते हैं कैसे… सुल्तानपुर: वैसे तो ज्यादातर सब्जियां सेहत के लिए फायदेमंद बताई जाती हैं. मगर, इन्हीं सब्जियों में कुछ ऐसी सब्जियां भी होती हैं जिनको खाने का नुकसान भी होता है. डॉक्टर भी उनसे परहेज करने के लिए कहते हैं. उन्हीं सब्जियों में से एक है बैंगन. आज हम जानेंगे कि बैगन की सब्जी खाने के क्या नुकसान है और किन लोगों को बैंगन की सब्जी खाने से परहेज करना चाहिए. गर्भावस्था में हो सकता है नुकसान सुल्तानपुर के नगर पालिका स्थित अब्दुल हमीद चिकित्सालय में कार्यरत जनरल फिजिशियन डॉक्टर एसबी सिंह ने लोकल 18 से बात की. उन्होंने कहा कि सबसे पहले बात करें बैंगन की तो वो तासीर में गरम और गैस पैदा करने वाला होता है. यही वजह है कि यह पाचन तंत्र पर दबाव डालता है. जिन लोगों को एसिडिटी, गैस और पेट फूलने की समस्या रहती है, उनके लिए बैंगन का सेवन नुकसानदायक हो सकता है. खासकर गर्भवती महिलाओं को बैंगन खाने से परहेज करने की सलाह दी जाती है. बैंगन में मौजूद फाइटोहॉर्मोन गर्भाशय को उत्तेजित कर सकता है, जिससे गर्भपात और अन्य समस्याएं हो सकती हैं. खासकर शुरुआती महीनों में बैंगन खाने से बचना चाहिए. जोड़ों के दर्द में नुकसानदायक जिन लोगों को आर्थराइटिस या जोड़ों के दर्द की समस्या है उनके लिए भी बैंगन सही नहीं माना जाता है. क्योंकि इसमें सोलानेन नाम का एक तत्व पाया जाता है, जो जोड़ों में सूजन और दर्द को बढ़ा सकता है. इसी वजह से गठिया के मरीजों को बैंगन खाने से परहेज करना चाहिए. बढ़ाता है स्टोनइसके साथ ही बैंगन में ऑक्सलेट्स पाए जाते हैं, जो किडनी स्टोन की समस्या बढ़ा सकते हैं. जिन लोगों को पहले से पथरी की शिकायत है, उन्हें बैंगन का सेवन कम या बिल्कुल नहीं करना चाहिए. ऐसे में जो लोग ज्यादा मात्रा में बैगन कहते हैं उन्हें सावधान होने की जरूरत है क्योंकि उनको किडनी की समस्या हो सकती है और इससे किडनी में बढ़ते हुए स्टोन से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. About the Author काव्या मिश्रा Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh First Published : April 03, 2026, 16:48 IST
Benefits of aloevers I त्वचा, बाल और पाचन के लिए प्राकृतिक उपाय

Last Updated:March 30, 2026, 14:26 IST आजकल लोग प्राकृतिक उपचार की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं और ऐसे में एलोवेरा एक बेहतरीन घरेलू उपाय बनकर उभरा है. यह त्वचा, बाल और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होने के साथ इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करता है. हालांकि इसके उपयोग में सही मात्रा और सावधानी रखना जरूरी है, तभी इसके पूरे लाभ मिल सकते हैं. आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं. कई लोग दवाइयों की जगह प्राकृतिक और घरेलू उपायों को अपनाना पसंद करते हैं. ऐसे में एलोवेरा एक ऐसा पौधा है, जिसे “प्राकृतिक इलाज का खजाना” कहा जाता है. यह पौधा न सिर्फ आसानी से घर में उगाया जा सकता है, बल्कि इसके उपयोग से कई बीमारियों में राहत भी मिलती है. एलोवेरा का सबसे ज्यादा उपयोग त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता है. इसके जेल को सीधे चेहरे पर लगाने से त्वचा मुलायम और चमकदार बनती है. यह पिंपल्स को कम करने में भी मदद करता है. जिन लोगों की त्वचा सूखी रहती है, उनके लिए एलोवेरा एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर का काम करता है. अगर किसी को सनबर्न या जलन की समस्या हो जाए, तो एलोवेरा जेल लगाने से तुरंत ठंडक मिलती है और त्वचा जल्दी ठीक होती है. एलोवेरा बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद है, इसे बालों में लगाने से बाल मजबूत होते हैं और टूटना कम होता है. यह डैंड्रफ को खत्म करने में भी मदद करता है. एलोवेरा जेल को नारियल तेल के साथ मिलाकर बालों में लगाने से बाल घने और चमकदार बनते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google एलोवेरा का जूस पीने से पाचन तंत्र बेहतर होता है. यह कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत देता है. रोजाना सुबह खाली पेट थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जूस पीने से पेट साफ रहता है और शरीर हल्का महसूस होता है. हालांकि, एलोवेरा जूस का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा सेवन करने से नुकसान भी हो सकता है. एलोवेरा में कई तरह के विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाते हैं. इसका नियमित सेवन करने से शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है. अगर कहीं कट, छिलन या जलन हो जाए, तो एलोवेरा जेल लगाने से घाव जल्दी भरता है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो संक्रमण को रोकते हैं और दर्द को कम करते हैं. वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि एलोवेरा का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है. इसके ताजे पत्ते से जेल निकालकर सीधे त्वचा या बालों में लगाया जा सकता है. इसके अलावा बाजार में एलोवेरा जूस और जेल भी उपलब्ध होते हैं. अगर आप घर में एलोवेरा उगाना चाहते हैं, तो यह बहुत आसान है. इसे गमले में लगाकर धूप वाली जगह पर रखें और ज्यादा पानी न दें. यह कम देखभाल में भी अच्छी तरह बढ़ता है. वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि एलोवेरा जितना फायदेमंद है, उतनी ही सावधानी भी जरूरी है. इसका सेवन अधिक मात्रा में करने से पेट खराब हो सकता है. गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. First Published : March 30, 2026, 14:26 IST
गेंदा के फूल के फायदे: त्वचा, पाचन और सूजन में प्राकृतिक औषधीय लाभ

Last Updated:March 29, 2026, 16:11 IST गेंदा का फूल केवल पूजा और सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई औषधीय गुणों से भरपूर प्राकृतिक उपचार भी है. त्वचा की समस्याओं से लेकर पाचन सुधारने, सूजन कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तक, गेंदा का उपयोग आयुर्वेद में लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि, इसका इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना गया है. गेंदा का फूल औषधीय गुणों से भरपूर होता है और यह कई बीमारियों में राहत देने का काम करता है. आमतौर पर लोग इसे पूजा-पाठ और सजावट के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि गेंदा एक असरदार औषधि भी है. आयुर्वेद में गेंदा के फूल, पत्तियां और यहां तक कि इसके रस का भी उपयोग कई तरह की समस्याओं के इलाज में किया जाता है. त्वचा से जुड़ी समस्याओं में गेंदा बहुत फायदेमंद है. अगर किसी को खुजली, दाने, फोड़े-फुंसी या जलन की समस्या हो, तो गेंदा के फूल का लेप लगाने से आराम मिलता है. यह त्वचा को ठंडक देता है और जलन को कम करता है. इसके अलावा, गेंदा से बना तेल भी त्वचा को मुलायम और स्वस्थ रखने में मदद करता है. गेंदा का फूल आंखों के लिए भी लाभकारी माना जाता है, अगर आंखों में जलन, लालिमा या सूजन हो, तो गेंदा के फूल को पानी में उबालकर ठंडा करके उससे आंख धोने से राहत मिलती है. हालांकि, आंखों में इस्तेमाल करने से पहले साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google मालती वर्मा बताती है कि पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी गेंदा का उपयोग किया जाता है. गेंदा के फूल से बनी चाय या काढ़ा पेट की गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है. यह शरीर के अंदर की सफाई करने में भी मदद करता है और पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है. गेंदा का उपयोग सूजन और दर्द कम करने में भी किया जाता है. इसके फूल में ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर की सूजन को कम करते हैं. अगर किसी को जोड़ों में दर्द या सूजन की समस्या है, तो गेंदा के तेल से मालिश करने से आराम मिल सकता है. गेंदा का फूल महिलाओं के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसका उपयोग मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए किया जाता है. हालांकि, इसका उपयोग करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है. गेंदा का फूल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं. नियमित रूप से इसका सीमित उपयोग करने से शरीर स्वस्थ रहता है. गांवों और छोटे कस्बों में गेंदा का उपयोग घरेलू इलाज के रूप में काफी समय से किया जा रहा है. यह आसानी से मिलने वाला और सस्ता पौधा है, जिसे लोग अपने घरों में भी उगा सकते हैं. यही वजह है कि यह आम लोगों के लिए एक सुलभ औषधि बन चुका है. मालती वर्मा बताती है गेंदा का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं. किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी या गर्भवती महिला को उसका प्रयोग करने से पहले किसी किसी डॉक्टर या और आयुर्वेदाचार्य के सलाह बिना किसी भी औषधि पौधे का प्रयोग नहीं करना चाहिए. किसी भी औषधि पौधे का प्रयोग केवल 7 दिन तक ही करना चाहिए. First Published : March 29, 2026, 16:11 IST
गन्ने के रस का देसी सिरका: पेट दर्द और बदहजमी का पारंपरिक इलाज

Last Updated:March 26, 2026, 20:59 IST गाजीपुर के जमानिया क्षेत्र के किशुनीपुर गांव की 75 वर्षीय इंदिरा सनी आज भी गन्ने के रस से देसी सिरका बनाने की पारंपरिक विधि को जीवित रखे हुए हैं. दो से तीन महीने तक धूप में प्राकृतिक किण्वन से तैयार यह सिरका पाचन संबंधी समस्याओं में असरदार माना जाता है. बिना केमिकल के बनने वाला यह देसी नुस्खा पुराने समय में बदहजमी, पेट दर्द और उल्टी जैसी परेशानियों के लिए घरेलू औषधि के रूप में इस्तेमाल होता था. गाजीपुर. आज के दौर में जहां सिरदर्द से लेकर पेट दर्द तक के लिए हम तुरंत अंग्रेजी दवाइयों और एंटीबायोटिक्स की ओर भागते हैं, वहीं हमारे गांवों में आज भी सेहत का खजाना रसोई और परंपराओं में छिपा है. गाजीपुर के जमानिया क्षेत्र के किशुनीपुर गांव की रहने वाली 75 वर्षीय इंदिरा सनी एक ऐसी ही विलुप्त होती परंपरा को बचाती है. गन्ने के रस से बना देसी सिरका, यह सिरका केवल शरबत नहीं, बल्कि पुराने समय की एक अचूक औषधि भी है.इंदिरासनी बताती हैं कि असली और शुद्ध सिरका बनाना कोई जल्दबाजी का काम नहीं, बल्कि धैर्य की प्रक्रिया है. वह कहती हैं, पहले गन्ने के ताजे रस को मिट्टी के बर्तनों में भरकर 2 से 3 महीने तक कड़ी धूप में रखा जाता था. इस लंबी अवधि के दौरान रस प्राकृतिक रूप से फर्मेंट (किण्वन) होता है. अशुद्धियों को दूर करने के लिए इसे समय-समय पर महीन कपड़े से छाना जाता था, जिससे रस धीरे-धीरे गाढ़ा और तीखा होने लगता था. कढ़ाई का छौंक और औषधीय गुणसिरका तैयार होने का अंतिम चरण सबसे महत्वपूर्ण है, जब रस पूरी तरह फर्मेंट हो जाता है, तब इसे लोहे की कढ़ाई में हल्का गर्म किया जाता है. इंदिरासनी के अनुसार, इसे एक खास तरीके से तड़का दिया जाता है, जिससे न केवल इसका स्वाद बढ़ता है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी कई गुना बढ़ जाते हैं. यही वह प्रक्रिया है जो इसे बाज़ार में मिलने वाले सिंथेटिक सिरके से कोसों दूर और गुणकारी बनाती है. पेट की समस्याओं का रामबाण इलाजयह देसी सिरका पुराने समय में हर घर की फर्स्ट एड किट हुआ करता था, इंदिरासनी साझा करती हैं कि बदहजमी, असहनीय पेट दर्द और उल्टी जैसी समस्याओं में यह किसी चमत्कार की तरह काम करता था. अगर किसी का पेट खराब होता या खाना नहीं पचता, तो बस थोड़ी मात्रा में यह सिरका पिला दिया जाता था और एक-दो दिन में मरीज भला-चंगा हो जाता था. आज के आधुनिक जीवन में हम इन पारंपरिक तरीकों से दूर हो गए हैं, लेकिन किशुनीपुर जैसे गांवों में यह ज्ञान आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Ghazipur,Uttar Pradesh First Published : March 26, 2026, 20:59 IST
सीने में दर्द को न करें नजरअंदाज | symptoms of heart attack

Last Updated:March 24, 2026, 14:58 IST सीने में अचानक होने वाला दर्द एक गंभीर संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है और समय पर इलाज न मिलने पर हार्ट अटैक का कारण बन सकती है. मऊ. अक्सर देखा जाता है छोटी-छोटी समस्याओं को लोग नजर अंदाज करते हैं, लेकिन उन्हें या नहीं पता कि छोटी सी लापरवाही उनकी जान ले सकती है. वर्तमान में देखा जा रहा है लोगों के सीने में दर्द अधिक हो रहा है और इस दर्द को नजर अंदाज करना लोगों को भारी पड़ जा रहा है. इस बीमारी को लेकर एक्सपर्ट क्या सलाह दे रहे हैं. लोकल 18 से बात करते हुए प्रेमा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर अरमान अली बताते हैं कि सीने में दर्द कई कारणों से अचानक शुरू हो रही हैं, जिसमें ज्यादा शिकार युवा हो रहे हैं. यह समस्या हर उम्र के लोगों में देखी जा रही है और यह बड़ी बीमारी बनती चली जा रही है और छोटी सी लापरवाही इस बीमारी में जान तक ले रह रही है, क्योंकि इस बीमारी में सीने में तीव्र गति से अचानक दर्द शुरू हो रहा है. इसमें लोगों को पसीना अधिक आना शुरू हो जा रहा है और उनकी सांस फूलने लगा रही हैं. यदि आप के सीने में अचानक दर्द शुरू हो रहा है तो किसी नजदीकी योग्य चिकित्सक को दिखाकर अपना इलाज शुरू कर दें नहीं आपकी समस्या बढ़ सकती है. छोटी सी लापरवाही में जा सकती है जानयदि इस बीमारी में आप लापरवाही बढ़ाते हैं तो अचानक सीने का दर्द हार्ट अटैक हो सकता है और दिल की गड़बड़ी की वजह से अचानक हृदय गति रुक सकती है और मौत भी हो सकती है. सीने के दर्द को हल्के में ना ले किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर इलाज शुरू कर दें, नहीं तो छोटी सी लापरवाही आपकी जान ले सकती है. यदि आप बीपी, थायराइड या शुगर जैसी बीमारी से ग्रसित हो तो इस बीमारी में आप सावधानी बरतना जरूरी हैं क्योंकि इन बीमारियों में यह समस्या तेजी से आती है और लोगों के सीने में अचानक दर्द होने लगता है जो हृदय गति को रोक देता है. सीने में दर्द से बचने के लिए शुगर बीपी को करें मेंटेनइस समस्या से बचने के लिए यदि आप शुगर के पेशेंट हैं तो शुगर के अनुसार अपना खान-पान रखें, शुगर को मेंटेन रखें. यदि बीपी के मरीज है तो नमक कम खाएं यदि कोलेस्ट्रॉल ज्यादा रहता है तो नियमित व्यायाम करें. हाई-फाई डाइट को अवॉइड करें और हरी सब्जियों का ज्यादा सेवन करें. सीने का दर्द अचानक शुरू होता है और बहुत तीव्र गति से पहुंचता है यह दर्द अधिकतर कुछ सेकंड या मिनट का होता है, लेकिन कुछ लोगों का दर्द घंटे चला जाता है. जिसमें मरीज की हालत गंभीर बन जाती है और कभी-कभी जान चली जाती है. यदि छाती में दर्द के साथ पसीने आए तो यह हार्ट अटैक के कारण बन सकते हैं. ऐसे में सावधान रहें यदि सेने में दर्द शुरू हो तो किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर इलाज शुरू कर दें. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Mau,Uttar Pradesh First Published : March 24, 2026, 14:58 IST
Benefits of moringa I इम्यूनिटी, हड्डियां और ब्लड शुगर के लिए सुपरफूड

Last Updated:March 19, 2026, 20:43 IST सहजन, जिसे मोरिंगा या शीगरू भी कहते हैं, एक देसी सुपरफूड है. इसके पत्ते, फली और छाल में भरपूर पोषण और औषधीय गुण हैं. यह इम्यूनिटी बढ़ाने, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. सही मात्रा में सेवन से यह कई बीमारियों से बचाव में भी लाभकारी है. बलिया. सहजन या मोरिंगा, जिसे शीगरू के नाम से भी जाना जाता हैं, एक ऐसा देसी सुपरफूड है, जो किसी संजीवनी से कम नहीं है. इसके पत्ते, फल (ड्रमस्टिक) और छाल तीनों रूप में ही पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर हैं. अगर इम्युनिटी मजबूत करना आप चाह रहे हैं, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखना चाहते हैं या फिर हड्डियों को ताकत देना चाहते हैं, तो सहजन आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह अनेकों बीमारियों को दूर करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. काया चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर डॉ. स्नेहामई मिश्रा ने कहा कि, वह उड़ीसा की रहने वाली है, जो अभी फिलहाल शांति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल बांसडीह रोड थाना क्षेत्र अंतर्गत मझौली बलिया में एक साल से कार्यरत हैं. चीज एक, लेकिन फायदे अनेक सबसे पहले बात करते हैं सहजन के पत्ते की, ये आयरन, कैल्शियम, विटामिन A, C और E का अच्छा स्रोत हैं. ये न केवल एनीमिया यानी खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाने में मददगार हैं. जिन लोगों को हाई ब्लड शुगर या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उनके लिए ये पत्ते रामबाण है. यहीं नहीं, इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो सूजन कम कर जोड़ों के दर्द में राहत देते हैं. यह दिमाग के लिए भी किसी टॉनिक से कम नहीं है. यह याददाश्त बेहतर बनाने में सहायक होता है. अगर बात सहजन की फली की करे, तो इसे हम ड्रमस्टिक के नाम से जानते हैं. यह फली फाइबर से भरपूर होती हैं, जो पाचन को दुरुस्त कर कब्ज जैसी परेशानियों से छुटकारा दिलाती है. इसमें कैल्शियम और फास्फोरस पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करते हैं. इसके एंटीबैक्टीरियल गुण शरीर को संक्रमण से भी बचाते हैं. सहजन की छाल और तना भी अद्भुत फायदे देते हैं. इसका काढ़ा गठिया, साइटिका और सूजन जैसी समस्याओं में राहत देता है. यह पाचन सुधारने और ब्लड शुगर कम करने में भी मददगार है. हालांकि, गर्भवती महिलाओं को इसकी जड़ या छाल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह नुकसानदायक हो सकता है. पत्तों का साग या काढ़ा, फली की सब्जी या सांभर और छाल का काढ़ा बनाकर सेवन किया जाता हैं. लेकिन उपयोग से पहले आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह बहुत जरूरी है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Ballia,Uttar Pradesh First Published : March 19, 2026, 20:43 IST
आगरा में बढ़ती हड्डियों की कमजोरी I युवाओं में ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षण

Last Updated:March 18, 2026, 22:06 IST आगरा में हड्डियों की कमजोरी यानी ऑस्टियोपोरोसिस के मामले बढ़ रहे हैं, अब युवाओं में भी इसके लक्षण दिखाई देने लगे हैं. हल्की चोट में फ्रैक्चर, पीठ में दर्द और कद घटना इसके मुख्य संकेत हैं. डॉक्टर आशीष मित्तल के अनुसार, समय पर इलाज और हेल्दी लाइफस्टाइल से इस बीमारी से बचा जा सकता है. आगरा. शहर में ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों की संख्या बढ़ी है, आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि बदलती लाइफस्टाइल और खान पान से कई तरह की बीमारियां शिकार बना लेती है. उन्होंने कहा कि हड्डियों से संबंधित मरीज बढ़े है जिसमें युवाओं कि संख्या भी देखी जा रही है. चिकित्सक ने बताया कि मरीजों में ऑस्टियोपोरोसिस कि शिकायत देखी जा रही है. चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस बीमारी में मरीज कि हड्डियां कमजोर व छिद्रयुक्त होने लगती है. उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हड्डियों का घनत्व जिसे डेंसिटी भी कहते है यह कम हो जाता है, जिससे वे पतली, नाजुक और ट्रटने यानि कि फ्रेक्चर के प्रति अत्यधिक संभावना बढ़ जाती है. डॉ. ने कहा कि इसका समय रहने उपचार कराना बेहद जरूरी है. दर्द और बार बार फ्रेक्चर होने पर चिकित्सक से करें सम्पर्कआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस के लक्षणों को पहचाना जा सकता है, हालांकि शुरुआत में इसके लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते है. उन्होंने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर और भुरभुरी हो जाती हैं, जिसे अक्सर ‘साइलेंट डिजीज कहते है क्योंकि शुरुआती चरणों में इसका कोई खास लक्षण दिखते नहीं देता है. उन्होंने कहा कि इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में हल्की चोट से फ्रैक्चर होना (विशेषकर कल्हे, कलाई, रीढ) पीठ में तेज दर्द रहना, समय के साथ कद कम होना और झुककर चलना आदि होते है. डॉ. आशीष ने कहा कि ऐसी स्थिति में मरीज को लापरवाही नहीं करनी चाहिए. ऐसे अवस्था में मरीज को तत्काल नज़दीकी हड्डी रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर अपना इलाज शुरू कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि समय रहने इलाज से बीमारी से छुटकारा भी पाया जा सकता है. ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए हेल्दी फ़ूड खाएंआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस से बचना है तो अपनी जीवन शैली में सुधार करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि अनहेल्दी फ़ूड का त्याग कर हेल्दी फ़ूड का इस्तेमाल करना चाहिए. डॉ. आशीष ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस से बचने के लिए कैल्शियम औरविटामिन डी से भरपूर आहार लें, नियमित रूप से वजन उठाने वाले व्यायाम जैसे चलना, दौड़ना, योगासन आदि करें. डॉ. ने कहा कि युवाओं को धुम्रपान और शराब से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये उपाय हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने और फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने में मदद करते है. डॉ. आशीष ने कहा कि यदि हड्डियों में कहीं भी लगातार दर्द बना रहता है तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Agra,Uttar Pradesh First Published : March 18, 2026, 22:06 IST
पलाश के फूल के फायदे: लू, डायबिटीज और त्वचा रोग में असरदार

Last Updated:March 15, 2026, 19:18 IST फागुन के महीने में तराई क्षेत्र में खिलने वाले टेसू यानी पलाश के फूल सिर्फ खूबसूरती ही नहीं बढ़ाते, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. आयुर्वेद में इसके फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग पेट के कीड़े, डायबिटीज, त्वचा रोग और गर्मी से राहत पाने के लिए किया जाता है. गर्मियों में पलाश के फूलों से बना शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ लू से भी बचाने में मदद करता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में टेसू के पेड़ पाए जाते हैं. फागुन माह में पलाश के फूलों की बहार आ जाती है. ग्रामीण क्षेत्रों में टेसु के फूल के नाम से जाना जाता है. वही अब धीरे-धीरे पलाश के पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है. वहीं आयुर्वेद में पलाश के फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है. पलाश के बीजों में एंटी वर्म यानी कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं. इसी वजह से इसका उपयोग पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए किया जाता है. पलाश के बीज का पाउडर नियमित रूप से लेने से पेट के संक्रमण में भी राहत मिल सकती है. इसके अलावा पलाश के फूलों में एस्ट्रिंजेंट गुण मौजूद होता है, जो दस्त जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है. पलाश में एंटी हाइपरग्लाइसेमिक गुण भी पाए जाते हैं, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं. इसके सेवन से शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है. वहीं पलाश के पत्तों में टिक्ता गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में कफ और पित्त को कम करने में सहायक होते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google त्वचा संबंधी रोगों में भी पलाश काफी उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, पलाश के बीज का पेस्ट लगाने से एक्जिमा और अन्य स्किन इन्फेक्शन में राहत मिल सकती है. इससे खुजली और त्वचा का रूखापन भी कम होता है. इसके अलावा पलाश के बीज का काढ़ा घाव भरने में भी सहायक माना जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्सक देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताएं कि गर्मियों के मौसम में पलाश के फूलों की डिमांड बढ़ जाती है, इसके फूल बहुत ही ठंडे माने जाते हैं. जिस कारण गर्मियों में लोग शरबत बनाकर सेवन करते हैं. इसका सेवन करने से शरीर को ठंडक मिलती है साथ में गर्मी में लू जैसी समस्या से छुटकारा मिल जाता है. पलाश के फूलों को अच्छी तरह धूप में सुखाकर पाउडर बना लें और हर सुबह ठंडे पानी के साथ इसका सेवन करें. यह शरीर को हल्का महसूस कराने के साथ-साथ आंतरिक सफाई में मदद करता है. डायबिटीज जैसी समस्या से छुटकारा मिल जाएगा. पलाश का फूल स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है. First Published : March 15, 2026, 19:18 IST
गर्मियों में ठंडक और हाइड्रेशन के लिए गन्ने का जूस – फायदे और सावधानियां

Last Updated:March 12, 2026, 21:14 IST मार्च से बढ़ती गर्मी के बीच गन्ने का जूस बन गया लोगों का पसंदीदा पेय. यह न सिर्फ शरीर को अंदर से ठंडक और ताजगी देता है, बल्कि पाचन, हाइड्रेशन और लिवर की सेहत के लिए भी फायदेमंद है. लेकिन उच्च ब्लड शुगर वाले लोगों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए. रायबरेली. मार्च की शुरुआत से ही गर्मी का असर दिखाई देने लगा है, तापमान में हो रही लगातार बढ़ोत्तरी से आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है. बढ़ी हुई गर्मी के कारण लोगों को बार-बार प्यास लगने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है. गर्मी के मौसम में तेज धूप की वजह से लोगों को थकान सुस्ती महसूस होती है इस दौरान लोग अपने शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए कई तरह के पेय पदार्थ का सेवन करते हैं. जो गर्मी के मौसम में शरीर में हाइड्रेट रखने के साथ ही तरोताजा बनाए रखने में भी कारगर होते हैं. गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट बनाए रखने के साथ ही अंदर से शीतलता प्रदान करने में गन्ने का जूस भी बड़ा ही लाभदायक है. गन्ने के जूस की तासीर ठंडी होती है जो शरीर को अंदर से शीतलता प्रदान करती है. यह आपको गर्मी के मौसम में चलने वाली तेज लू से भी बचाने में कारगर होता है. इन तत्वों से भरपूर रायबरेली जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवगढ़ की आयुष चिकित्सक डॉ. आकांक्षा दीक्षित (एम डी आयुर्वेद नेशनल इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद जयपुर ,राजस्थान) लोकल 18 से बात करते हुए बताती हैं कि गन्ने के जूस में जिंक, आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम, मैंगनीज, मैग्नीशियम सहित कई अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं. अगर आपका पाचन तंत्र कमजोर है, तो आपको गन्ने का रस पीना चाहिए. गन्ने के रस में मौजूद पोटैशियम पेट में पीएच लेवल को संतुलित करता है. गन्ने का रस लोगों को हाइड्रेटेड रखता है और इससे कब्ज की समस्या से आराम मिलता है. इनके लिए फायदा आकांक्षा दीक्षित के मुताबिक जिन लोगों को पीलिया की समस्या हो जाती है, उनके लिए गन्ने का जूस किसी अमृत से कम नहीं होता है, क्योंकि गन्ने के जूस में एंटीऑक्सीडेंट होता है ,जो लीवर को संक्रमित होने से बचाते हैं. आगे की जानकारी देते हुए बताती है कि गन्ने का जूस उन लोगों को भूलकर भी नहीं पीना चाहिए. जिनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ हो क्योंकि यह उनके लिए नुकसानदायक होता है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Rae Bareli,Uttar Pradesh First Published : March 12, 2026, 21:14 IST








