क्या चॉकलेट खाने से बढ़िया हो जाता है मूड? ब्रेन पर किस तरह होता है असर, जानिए 5 रोचक तथ्य

Last Updated:April 08, 2026, 15:39 IST Chocolate and Mood: चॉकलेट खाने से मूड बेहतर हो सकता है, क्योंकि इसमें मौजूद तत्व सेरोटोनिन, डोपामाइन और एंडॉर्फिन जैसे फील-गुड हार्मोन को बढ़ाते हैं. खासकर डार्क चॉकलेट तनाव कम करने और मन को शांत रखने में मदद करती है. हालांकि इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, ताकि इसके फायदे ज्यादा मिलें और नुकसान न हो. कई रिसर्च में पता चला है कि डार्क चॉकलेट स्ट्रेस कम करती है और मूड बेहतर बनाती है. Chocolate Reduce Stress: जब हमारा मूड खराब होता है, तब ऐसी चीजें खाना का मन करता है, जिससे मूड बेहतर हो जाए. कई लोग इसके लिए चॉकलेट खाना पसंद करते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो डार्क चॉकलेट खाना सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है. इसमें पाए जाने वाले कुछ तत्व मूड को बेहतर करते हैं और आपका तनाव कम कर सकते हैं. कई लोग इसे कम्फर्ट फूड मानते हैं, क्योंकि इसे खाने के बाद तुरंत अच्छा महसूस होता है. यह सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक आदत नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी मौजूद हैं. चॉकलेट में ऐसे कई प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे भावनाओं को प्रभावित करते हैं. साइंस डायरेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक चॉकलेट खाने से हमारे दिमाग में सेरोटोनिन, डोपामाइन और एंडॉर्फिन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर सक्रिय हो जाते हैं. ये सभी फील-गुड केमिकल्स माने जाते हैं, जो खुशी, संतोष और रिलैक्सेशन का एहसास दिलाते हैं. सेरोटोनिन मूड को स्थिर करता है, डोपामाइन हमें खुशी और इनाम जैसा एहसास देता है, जबकि एंडॉर्फिन दर्द और तनाव को कम करते हैं. यही वजह है कि चॉकलेट खाने के बाद मन हल्का और खुश महसूस करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. चॉकलेट में एक खास यौगिक पाया जाता है, जिसे फेनाइलएथाइलामाइन कहा जाता है. यह वही रसायन है, जो हमारे दिमाग में तब बनता है, जब हम प्यार में होते हैं या बहुत खुश होते हैं. यह दिमाग में एनर्जी और उत्साह का एहसास पैदा करता है. हालांकि इसकी मात्रा कम होती है, फिर भी यह मूड को थोड़ा बेहतर करने में भूमिका निभा सकता है. डार्क चॉकलेट में फ्लेवोनॉयड्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में तनाव को कम करने और दिमाग के कार्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि डार्क चॉकलेट का सेवन कोर्टिसोल हार्मोन को कम कर सकता है. इससे चिंता और तनाव कम होता है. चॉकलेट का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनोवैज्ञानिक रूप से भी हमें खुशी देता है. इसका स्वाद, खुशबू और बचपन की यादें भी हमारे दिमाग को सकारात्मक संकेत देती हैं. जब हम चॉकलेट खाते हैं, तो हमें एक रिवॉर्ड जैसा एहसास होता है, जो मूड को बेहतर बनाता है. चॉकलेट मूड अच्छा करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसका ज्यादा सेवन सेहत के लिए सही नहीं है. इसमें शुगर और कैलोरी अधिक होती है, जिससे वजन बढ़ सकता है, दांतों की समस्या हो सकती है और ब्लड शुगर लेवल भी बढ़ सकता है. इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि चॉकलेट सीमित मात्रा में ही खानी चाहिए. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 08, 2026, 15:39 IST
trikonasana worl record: इस योगासन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, ABR में हुआ दर्ज, क्या हैं त्रिकोणासन करने के फायदे? एक्सपर्ट से समझिए

होमताजा खबरदेश इस योगासन ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, ABR में हुआ दर्ज, कौन सा है आसन? Last Updated:April 08, 2026, 15:28 IST Trikonasana world record: योगासनों में से एक त्रिकोणासन ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है. महाराष्ट्र के बुलढाणा में 5000 लोगों ने एक साथ त्रिकोणासन कर एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में यह उपलब्धि दर्ज कराई है. आइए जानते हैं कि इस आसन को करने के क्या फायदे हैं? त्रिकोणासन कर भारतीयों ने बनाया विश्व रिकॉर्ड. Trikonasana World Record: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अब 74 दिन बाकी बचे हैं लेकिन उससे पहले ही एक योगासन ने ऐसा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है, जो एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है. यह योगासन है त्रिकोणासन.आयुष मंत्रालय के तहत मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा (MDNIY) के भव्य योग महोत्सव-2026 में इस योगासन ने नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है. आयुष मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी के अनुसार 7 अप्रैल को महाराष्ट्र के बुलढाणा में सुबह 6 बजे से 8 बजे तक चले योग महोत्सव में शामिल हुए 5000 योग प्रेमियों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल (CYP) का सामूहिक अभ्यास करते हुए त्रिकोणासन (Trikonasana) किया. यह पहली बार था जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने एक जगह पर इकठ्ठे होकर त्रिकोणासन का अभ्यास किया. अब इस उपलब्धि को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में बतौर नया विश्व रिकॉर्ड दर्ज कर लिया गया है. आइए जानते हैं इस योगासन के बारे में और इसके फायदे क्या हैं? कैसे किया जाता है त्रिकोणासन 5000 लोगों ने त्रिकोणासन कर वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया है. तस्वीर- MDNIY त्रिकोणासन (Triangle Pose) एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है. इसमें पैरों, हाथों और रीढ़ की मदद से शरीर एक त्रिकोण (Triangle) जैसी आकृति बनाता है, जिससे पैरों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी में खिंचाव आता है और वे मजबूत बनते हैं. यह एक सामान्य आसन हैं जो कॉमन योग प्रोटोकॉल में शामिल है लेकिन इसके फायदे जानकर आपको हैरानी होगी. इस योगासन के क्या फायदे हैं? मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली में योग प्रशिक्षक, वसुधा राजावत बताती हैं, ‘त्रिकोणासन का अभ्यास महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है. इस आसन का अभ्यास पेट की चर्बी को कम करने में सहायक है. जिन महिलाओं को इन्फर्टिलिटी की समस्या है, उन्हें इसका अभ्यास विशेष रूप से करना चाहिए. मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, नई दिल्ली में योग प्रशिक्षक,वसुधा राजावत वे बताती हैं कि यह कमर का लचीलापन बढ़ाता है, अकड़न को कम करता है. यह अभ्यास पिंडली, जंघा और कटिभाग की मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करता है. यह मेटाबॉलिज्म को मजबूत करता है, पाचन शक्ति को सक्रिय करता है, पूरे शरीर में रक्तसंचार को बढ़ाता है. साथ ही यह अभ्यास श्वास के आवागमन को सक्रिय कर शरीर में स्फूर्ति लाता है. क्या बरतें सावधानियांराजावत आगे कहती हैं कि इस योगासन का अभ्यास करते हुए हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि पीठ, गर्दन और घुटने की गंभीर चोट होने पर इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए. चक्कर आने या उल्टी जैसा महसूस होने पर भी इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए. इस अभ्यास को क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें First Published : April 08, 2026, 15:28 IST
भयंकर ठंडी बीयर पीते हैं आप, ऐसा करना फायदेमंद या नुकसानदायक, गंगाराम के डॉक्टर से जान लीजिए

Last Updated:April 08, 2026, 14:54 IST Very Cold Beer Health Risks: बीयर में अल्कोहल होता है और डॉक्टर्स इसे सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं. हालांकि तमाम लोग गर्मी में बहुत ज्यादा ठंडी बीयर पीना पसंद करते हैं, जो गले, पाचन और शरीर के तापमान पर नेगेटिव असर डाल सकती है. खाली पेट या ज्यादा मात्रा में बीयर पीने से कई परेशानियों का खतरा बढ़ जाता है. डॉक्टर की मानें तो लोगों को बहुत ज्यादा ठंडी बीयर पीने से बचना चाहिए. Ice Cold Beer Good or Bad: गर्मियों के मौसम में अधिकतर लोग ठंडी चीजें खाना-पीना पसंद करते हैं. कई लोग गर्मी में ठंडी बीयर पीना पसंद करते हैं. कई लोग शराब में भी आइस क्यूब डालकर पीते हैं, ताकि ठंडा महसूस हो. माना जाता है कि बर्फ जैसी ठंडी बीयर पीने से शरीर को तुरंत ठंडक मिलती है और राहत महसूस होती है. खासकर दोस्तों के साथ पार्टियों में ऐसे नजारे देखने को मिलते हैं. हालांकि कई लोग ठंडी बीयर को सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं. अब सवाल है कि क्या सच में बहुत ज्यादा ठंडी बीयर पीना सेहत के लिए खतरनाक है? इस बारे में डॉक्टर से हकीकत जानने की कोशिश करते हैं. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के गैस्ट्रो एंड लिवर डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा ने News18 को बताया कि बीयर एक अल्कोहॉलिक ड्रिंक है और इसका सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदायक होता है. कभी-कभार आप बीयर पीते हैं, तो ठीक है, लेकिन रोज इसका सेवन करने से सेहत बिगड़ सकती है. कई लोग मानते हैं कि बीयर पीना सेहत के लिए सुरक्षित है, लेकिन यह सिर्फ गलतफहमी है. अल्कोहल वाली कोई भी ड्रिंक शरीर के लिए फायदेमंद नहीं होती है. अल्कोहल का सेवन करने से लिवर को गंभीर नुकसान होता है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. बहुत ठंडी बीयर पीनी चाहिए या नहीं? डॉक्टर अरोड़ा ने बताया कि जब आप बहुत ठंडी बीयर पीते हैं, तो इसका सीधा असर हमारे गले और पाचन तंत्र पर पड़ता है. अत्यधिक ठंडी ड्रिंक गले की नसों को अचानक सिकोड़ देती है, जिससे गले में खराश, सर्दी या संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा बहुत ठंडी चीजें पाचन क्रिया को भी धीमा कर देती हैं, जिससे गैस, अपच या पेट में भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बहुत ठंडी बीयर शरीर के तापमान को अचानक कम कर सकती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ता है. शरीर को अपने तापमान को संतुलित करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, जिससे थकान या असहजता महसूस हो सकती है. खासकर जब बाहर का तापमान बहुत ज्यादा हो, तब बहुत ठंडी बीयर शरीर के लिए शॉक जैसा असर डाल सकती है. खाली पेट बीयर पीना नुकसानदायक एक्सपर्ट ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति खाली पेट बहुत ठंडी बीयर पीता है, तो यह ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है. इससे अल्कोहल जल्दी खून में घुल जाता है और नशा तेजी से चढ़ता है. यह लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है. ज्यादा मात्रा में ठंडी बीयर पीने से डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. जिन लोगों को पहले से ही गले की समस्या, पाचन से जुड़ी परेशानी, लिवर रोग या हार्ट से संबंधित दिक्कतें हैं, उन्हें बहुत ठंडी बीयर से बचना चाहिए. जो लोग बार-बार सर्दी-जुकाम से परेशान रहते हैं, उनके लिए भी यह नुकसानदायक हो सकती है. ऐसे लोगों को सामान्य तापमान या हल्की ठंडी बीयर ही पीनी चाहिए. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 08, 2026, 14:54 IST
घर में पड़ी सूखी तुलसी से बनाएं हेल्दी काढ़ा, जानिए आसान तरीका

Last Updated:April 08, 2026, 14:49 IST तुलसी का पौधा लगभग हर घर में होता है, लेकिन उसकी सूखी टहनियों को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है. जबकि विशेषज्ञों के अनुसार, इन्हीं टहनियों से आसानी से काढ़ा-मसाला तैयार किया जा सकता है, जो चाय का स्वाद बढ़ाने के साथ गले की खराश और कफ में भी राहत दे सकता है. पारंपरिक घरेलू नुस्खों में शामिल यह तरीका न सिर्फ सरल है, बल्कि रोजमर्रा की छोटी स्वास्थ्य समस्याओं में भी काफी उपयोगी साबित हो सकता है. रिपोर्ट- अभिनव कुमार घर-आंगन में तुलसी का पौधा लगभग हर घर में देखा जाता है. इसकी पत्तियां पूजा-पाठ से लेकर चाय तक में उपयोग की जाती हैं, लेकिन सूख जाने के बाद इसकी टहनियों को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है. जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि तुलसी की सूखी टहनियां भी बेहद उपयोगी होती हैं और इन्हें घरेलू काढ़ा-मसाला बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है. तुलसी की सूखी टहनियों से काढ़ा-मसाला तैयार करने का तरीका काफी आसान है. इसके लिए सूखी टहनियों के साथ लौंग, इलायची और तेजपत्ता को हल्का दरदरा पीस लें और इसे किसी साफ-सुथरे डिब्बे में सुरक्षित रख लें. जब भी चाय बनाएं, इसमें एक चम्मच यह मिश्रण मिलाने से चाय का स्वाद बेहतर हो जाता है और यह शरीर को सुकून भी देता है. गले में खराश या कफ की समस्या होने पर इसी मिश्रण को एक चम्मच मात्रा में गर्म पानी में उबालकर छानकर पीने से राहत मिल सकती है. पारंपरिक रूप से तुलसी को श्वसन तंत्र के लिए लाभकारी माना जाता है, वहीं मसालों की गर्म तासीर गले को आराम पहुंचाने में मदद करती है. Add News18 as Preferred Source on Google हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक घरेलू उपाय है, कोई चिकित्सीय इलाज नहीं. यदि किसी को एलर्जी है, गर्भावस्था है, छोटे बच्चों को देना हो या किसी दवा के साथ इसका सेवन करना हो, तो पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. साथ ही टहनियों को इस्तेमाल से पहले अच्छी तरह साफ और पूरी तरह सूखा कर ही रखें. किसी भी चीज का अत्यधिक उपयोग नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है. तुलसी की महत्ता नई नहीं है. यह उपाय इस बात का उदाहरण है कि रसोई और आंगन में मौजूद सामान्य चीजों का भी सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो वे बेहद काम की साबित हो सकती हैं. सूखी टहनियों को फेंकने के बजाय संभालकर रख लें, क्योंकि सर्दी-खांसी के समय यह छोटा सा घरेलू नुस्खा काफी फायदेमंद हो सकता है. दरअसल, बचपन में दादी-नानी द्वारा तुलसी का काढ़ा पिलाने की परंपरा लगभग हर घर में रही है. तुलसी में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं और यही कारण है कि यह आज भी घरेलू उपचार का अहम हिस्सा बनी हुई है. First Published : April 08, 2026, 14:49 IST
मतदान दिवस लिटमस टेस्ट: मालदा से स्तब्ध, क्या चुनाव आयोग हिंसा-मुक्त मतदान सुनिश्चित कर सकता है? | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:अप्रैल 08, 2026, 14:44 IST पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल ने एक खतरनाक पैटर्न को सामान्य बना दिया है जहां चुनावों को लोकतंत्र में अभ्यास के बजाय हिंसा का फ्लैशप्वाइंट बना दिया जाता है ईसीआई की विश्वसनीयता का परीक्षण उसकी तैनाती के पैमाने से नहीं, बल्कि मतदान के दिन उसके कार्यान्वयन की प्रभावशीलता से किया जाएगा। (पीटीआई) सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शब्दों में कोई कमी नहीं की। स्पष्ट पीड़ा व्यक्त करते हुए, अदालत ने पश्चिम बंगाल में एक चौंकाने वाली घटना को गंभीरता से लिया, यह देखते हुए कि कैसे राज्य के मुख्य सचिव कथित तौर पर संपर्क से बाहर रहे, जबकि कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने पिछले हफ्ते मालदा में न्यायिक अधिकारियों का घेराव होने पर उन्मत्त फोन किए। वह अवलोकन केवल प्रक्रियात्मक नहीं था, बल्कि गहन था। यह घटना एक बुनियादी सवाल उठाती है: यदि भारत का चुनाव आयोग (ईसीआई), केंद्रीय बलों की लगभग 2,400 कंपनियों और सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता उच्च न्यायालय सहित उच्च न्यायपालिका के साथ, न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सका या उन्हें नौ घंटे के आघात से नहीं बचा सका, तो इसका सिस्टम की मजबूती के बारे में क्या मतलब है? तो फिर, वही चुनाव आयोग, अपरिवर्तित प्रशासनिक और नौकरशाही तंत्र पर निर्भर होकर, 23 और 29 अप्रैल को हिंसा-मुक्त मतदान की गारंटी कैसे देगा? जब राज्य जवाब नहीं देता 1 अप्रैल को मालदा में जो कुछ हुआ वह चुनावी मौसम में हिंसा का एक और उदाहरण नहीं है। यह एक ऐसा क्षण है जो संस्थागत प्रतिक्रिया की नाजुकता को उजागर करता है जब इसका सबसे अधिक परीक्षण किया जाता है। न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया गया, बाइक सवारों के एक समूह ने उन पर पथराव किया, उनके पायलट वाहनों पर हमला किया और लगभग नौ घंटे तक उनकी आवाजाही अवरुद्ध कर दी। पहुंच रोकने के लिए लकड़ी के तख्त बिछाए गए थे। यह स्वतःस्फूर्त अराजकता नहीं थी; इसमें आयोजन और आत्मविश्वास की छाप थी। विश्वास कि परिणाम तत्काल नहीं होंगे। और यहीं पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप महत्वपूर्ण हो जाता है। चिंता केवल यह नहीं है कि हिंसा हुई, बल्कि यह है कि वास्तविक समय में आदेश की श्रृंखला लड़खड़ाती हुई दिखाई दी। कागज पर सुरक्षा, जमीन पर वैक्यूम यह सब पहले से ही मौजूद एक अभूतपूर्व सुरक्षा वास्तुकला के बावजूद आता है। केंद्रीय बलों की 2,000 से अधिक कंपनियां तैनात की गई हैं। ईसीआई ने व्यापक प्रशासनिक फेरबदल किया है। यहां तक कि पिछले पदाधिकारियों के हटने के बाद शीर्ष अधिकारियों, मुख्य सचिव और डीजीपी को भी इसकी देखरेख में नियुक्त किया गया था। कागज़ पर यह एक सुदृढ़ राज्य है। ज़मीन पर यह छिद्रयुक्त दिखाई देता है। पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल ने एक खतरनाक पैटर्न को सामान्य कर दिया है। लोकतंत्र में चुनावों को अभ्यास के बजाय हिंसा का केंद्र बना दिया जाता है। कोलकाता में नगर निगम चुनावों से लेकर भीतरी इलाकों में पंचायत चुनावों तक, पटकथा चिंताजनक रूप से सुसंगत बनी हुई है। राज्य धमकी, झड़प और चुनाव के बाद प्रतिशोध का गवाह है। पैमाना अलग-अलग होता है. प्रकृति नहीं करती. 2021 की यादें अभी भी ताजा हैं। नतीजों के बाद के दिनों में पार्टी लाइन से हटकर राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई। करीब 72 घंटों तक राज्य की मशीनरी पंगु नजर आई। एफआईआर में “अज्ञात व्यक्तियों” का नाम दिया गया है। जवाबदेही गुमनामी में विलीन हो गई। दस्तावेज़ीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी न्यायिक हस्तक्षेप और केंद्रीय जांच की आवश्यकता पड़ी। हालाँकि, राज्य को सीबीआई जाँच से भी कोई महत्वपूर्ण परिणाम नहीं मिला, भले ही 50 से अधिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं की बिना सोचे-समझे हत्या कर दी गई या दिनदहाड़े सार्वजनिक रूप से पीट-पीट कर मार डाला गया। और अब, जब बंगाल लगभग दो दशकों के बाद दो चरणों में चुनाव की ओर बढ़ रहा है, मालदा एक गंभीर पूर्वावलोकन प्रस्तुत करता है। यदि उच्च न्यायपालिका की सीधी निगरानी में न्यायिक अधिकारियों को नौ घंटे तक बंधक बनाया जा सकता है, तो सामान्य मतदान अधिकारियों के लिए क्या गारंटी है? सुदूर बूथों के मतदाताओं के लिए? राजनीतिक रूप से संवेदनशील इलाकों में विपक्षी कार्यकर्ताओं के लिए? गहरी चिंता सिर्फ हिंसा नहीं है, बल्कि दंडमुक्ति भी है। हिंसा वहाँ पनपती है जहाँ परिणाम अनिश्चित होते हैं। या इससे भी बदतर, अनुपस्थित. ईसीआई की विश्वसनीयता का परीक्षण उसकी तैनाती के पैमाने से नहीं, बल्कि मतदान के दिन उसके कार्यान्वयन की प्रभावशीलता से किया जाएगा। भाजपा की बहादुरी और लचीलेपन को उनके समर्थन आधार के लिए मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए सुरक्षित मार्ग बनाने और उनके मतदान एजेंटों के लिए मतदान केंद्र में रहने और बूथ छोड़ने से बचने के लिए सुरक्षित महसूस करने की स्थिति बनाने की उनकी क्षमता के संदर्भ में भी देखा जाएगा। पहले प्रकाशित: अप्रैल 08, 2026, 14:37 IST समाचार चुनाव मतदान दिवस लिटमस टेस्ट: मालदा से स्तब्ध, क्या चुनाव आयोग हिंसा-मुक्त मतदान सुनिश्चित कर सकता है? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव हिंसा(टी)सुप्रीम कोर्ट भारत(टी)मालदा न्यायिक अधिकारी(टी)भारत का चुनाव आयोग(टी)केंद्रीय बलों की तैनाती(टी)कलकत्ता उच्च न्यायालय संकट(टी)पश्चिम बंगाल राजनीतिक हिंसा(टी)मतदान दिवस सुरक्षा
सलमान खान का सपोर्ट मिलने से खुश हैं राजपाल यादव:कहा- भाईजान का आशीर्वाद साथ है; अवॉर्ड शो में मजाक बनाने पर एक्टर ने दी थी प्रतिक्रिया

अवॉर्ड शो में मजाक उड़ाए जाने के मामले में सलमान खान का सपोर्ट मिलने से राजपाल यादव बेहद खुश हैं। दरअसल, हाल ही में स्क्रीन अवॉर्ड में होस्ट जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी ने राजपाल यादव के चेक बाउंस केस और उधार पर तंज कसते हुए एक कमेंट किया था, जिसके बाद कई फैंस ने इसे एक्टर का अपमान माना। वीडियो वायरल होने के बाद सलमान खान ने राजपाल के सपोर्ट में पोस्ट की थी। राजपाल यादव मंगलवार रात फिल्ममेकर रामगोपाल वर्मा के बर्थडे में शामिल हुए थे। इस दौरान पैपराजी से बात करते हुए उन्होंने सलमान खान का सपोर्ट मिलने पर खुशी जताते हुए कहा, आज खुश भी बहुत हूं, क्योंकि आज आशीर्वाद साथ में है। आगे राम गोपाल वर्मा का भी आभार व्यक्त करते हुए राजपाल यादव ने कहा, ‘आज यहां राम गोपाल वर्मा सर के बर्थडे में आने का सौभाग्य मिला है। ये हमारी जिंदगी के ऐसे डेयरिंग डायरेक्टर रहे हैं, जिन्होंने मुझे कॉमेडियन बनाया, जिन्होंने मुझे विलेन बनाया, जिन्होंने मुझे मैन लीड बनाया। एक नहीं 17-17 फिल्में आपके डायरेक्शन में करने का मौका मिला।’ सलमान खान ने मजाक बनाए जाने पर किया था सपोर्ट 5 अप्रैल को मुंबई में स्क्रीन अवॉर्ड आयोजित किया गया था।जर्नलिस्ट सौरभ द्विवेदी और कॉमेडियन जाकिर खान ने अवॉर्ड का एक हिस्सा होस्ट किया। इस दौरान राजपाल यादव से बात करते हुए सौरभ द्विवेदी ने उनके चेक बाउंस केस का मजाक उड़ाया। राजपाल यादव माइक पर डॉलर के रेट बढ़ने-घटने और यूथ पर एक बयान दे रहे थे। तभी सौरभ द्विवेदी ने तंज कंसने के अंदाज में कहा, ‘डॉलर का रेट चाहे बढ़े या घटे, आपको उतने ही पैसे लौटाने हैं जितने आपने उधार लिए थे।’ जल्द ही ये वीडियो वायरल हो गया और फैंस राजपाल यादव का मजाक बनाए जाने से नाराज हो गए। इसी बीच सलमान खान ने राजपाल यादव के इस वीडियो पर रिएक्शन दिया। उन्होंने कहा, “राजपाल भाई, आप 30 साल से काम कर रहे हो और हम सबने आपको बार-बार रिपीट किया है क्योंकि आप अपना काम जानते हो और एक वैल्यू लाते हो। हकीकत यह है कि काम तो आपको बहुत मिलेगा और इसी डॉलर रेट पर मिलता रहेगा।” आगे सलमान ने लिखा “ये याद रखना कि कभी-कभी फ्लो में कुछ बातें निकल आती हैं। अगर कुछ देना ही है तो दिमाग में रखो और दिल से काम करो। डॉलर ऊपर हो या नीचे, क्या फर्क पड़ता है, पैसा तो इंडिया में ही देना है।” राजपाल यादव ने सलमान की पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा “सलमान भाई मेरे तीस साल के सफर को सराहने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया। आप हमेशा बड़े भाई की तरह रास्ता दिखाते आए हैं, लव यू भाई।” इसके अलावा राजपाल यादव ने एक वीडियो जारी कर फैंस से अपील की कि उनका मजाक उड़ाने वाले सौरभ द्विवेदी की निंदा न की जाए, क्योंकि वो उनके लिए छोटे भाई की तरह हैं। उन्होंने ये भी कहा कि अवॉर्ड शो में सौरभ ने उनके लिए खड़े होकर तालियां बजवाई थीं।
धुरंधर 2 ने कमाई में बाहुबली 2 को पछाड़ा:अब सिर्फ पुष्पा 2 से पीछे; 200 करोड़ कमा कर भारत में हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म बन सकती है

रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। रिलीज के 20 दिनों के भीतर फिल्म ने भारत में 1,033.37 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन कर लिया है। इस आंकड़े के साथ ही फिल्म ने एसएस राजामौली की ‘बाहुबली 2’ के घरेलू नेट कलेक्शन (1,030.42 करोड़) को पीछे छोड़ दिया है। अब जल्द ही यह फिल्म अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा 2’ के ऑल-टाइम रिकॉर्ड को तोड़ कर भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन सकती है। अब भी पुष्पा 2 से 200 करोड़ दूर सैक्निल्क के मुताबिक, भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का खिताब हासिल करने के लिए ‘धुरंधर 2’ को अभी 200.63 करोड़ रुपए और कमाने होंगे। ‘पुष्पा 2’ का भारत में कुल नेट कलेक्शन 1,234.10 करोड़ रुपए है। जबकि धुरंधर 2 ने अभी 1,033.37 करोड़ रुपए कमाए हैं। वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन की बात करें तो ‘धुरंधर 2’ अब तक 1,641.21 करोड़ रुपए जुटा चुकी है। इसमें से विदेशों का योगदान 404 करोड़ रुपए है। हिंदी बेल्ट में मजबूत, साउथ में पिछड़ी फिल्म के कलेक्शन का विश्लेषण करें तो यह फिल्म हिंदी बेल्ट में काफी मजबूत रही है। ‘धुरंधर 2’ ने हिंदी मार्केट में अब तक 960.54 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया है, जो लगभग ‘पुष्पा 2’ के हिंदी वर्जन के बराबर ही है। हालांकि, साउथ के राज्यों में फिल्म वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई जैसा अल्लू अर्जुन की फिल्म ने किया था। ‘पुष्पा 2’ ने साउथ इंडिया से 511.70 करोड़ रुपए जुटाए थे, जिसकी भरपाई के लिए ‘धुरंधर 2’ को हिंदी मार्केट में लंबी दौड़ लगानी होगी। 20वें दिन भी कमाई में तेजी जारी तीसरे हफ्ते में पहुंचने के बावजूद फिल्म की कमाई की रफ्तार स्थिर बनी हुई है। मंगलवार (20वें दिन) को फिल्म ने भारत में 10.10 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया, जो सोमवार की कमाई के लगभग बराबर है। फिल्म ने अपने पहले हफ्ते में 674.17 करोड़ और दूसरे हफ्ते में 263.65 करोड़ रुपए का बिजनेस किया था। 19 मार्च को रिलीज हुई इस फिल्म ने ओपनिंग डे पर ही 102.55 करोड़ रुपए कमा लिए थे। पार्ट 1 के लाइफटाइम रिकॉर्ड को 10 दिन में तोड़ा इस फिल्म की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट के ओवरसीज लाइफटाइम कलेक्शन को महज 10 दिनों में ही पीछे छोड़ दिया था। यह सबसे तेजी से 1000 करोड़ रुपए (वर्ल्डवाइड) कमाने वाली फिल्म बन गई है। फिल्म ने भारत में 100 करोड़ से लेकर 1000 करोड़ तक के सभी माइलस्टोन सबसे कम समय में हासिल किए हैं। साथ ही, यह अब तक की सबसे बड़ी हिंदी ओपनर और वर्ल्डवाइड सबसे बड़ा ओपनिंग वीकेंड देने वाली फिल्म भी बन चुकी है। फिल्म के नाम दर्ज हुए ये बड़े रिकॉर्ड्स भारत में 1000 करोड़ नेट कलेक्शन करने वाली पहली फिल्म। नॉर्थ अमेरिका में 25 मिलियन डॉलर कमाने वाली पहली भारतीय फिल्म। सबसे तेजी से 1000 करोड़ का ग्लोबल आंकड़ा पार करने वाली फिल्म। जर्मनी में 1 मिलियन यूरो का आंकड़ा छूने वाली पहली भारतीय फिल्म। ऑल टाइम सबसे बड़ी भारतीय ब्लॉकबस्टर।
धुरंधर 2 ने कमाई में बाहुबली 2 को पछाड़ा:अब सिर्फ पुष्पा 2 से पीछे; 200 करोड़ कमा कर भारत में हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म बन सकती है

रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर 2’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। रिलीज के 20 दिनों के भीतर फिल्म ने भारत में 1,033.37 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन कर लिया है। इस आंकड़े के साथ ही फिल्म ने एसएस राजामौली की ‘बाहुबली 2’ के घरेलू नेट कलेक्शन (1,030.42 करोड़) को पीछे छोड़ दिया है। अब जल्द ही यह फिल्म अल्लू अर्जुन की ‘पुष्पा 2’ के ऑल-टाइम रिकॉर्ड को तोड़ कर भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन सकती है। अब भी पुष्पा 2 से 200 करोड़ दूर सैक्निल्क के मुताबिक, भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का खिताब हासिल करने के लिए ‘धुरंधर 2’ को अभी 200.63 करोड़ रुपए और कमाने होंगे। ‘पुष्पा 2’ का भारत में कुल नेट कलेक्शन 1,234.10 करोड़ रुपए है। जबकि धुरंधर 2 ने अभी 1,033.37 करोड़ रुपए कमाए हैं। वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन की बात करें तो ‘धुरंधर 2’ अब तक 1,641.21 करोड़ रुपए जुटा चुकी है। इसमें से विदेशों का योगदान 404 करोड़ रुपए है। हिंदी बेल्ट में मजबूत, साउथ में पिछड़ी फिल्म के कलेक्शन का विश्लेषण करें तो यह फिल्म हिंदी बेल्ट में काफी मजबूत रही है। ‘धुरंधर 2’ ने हिंदी मार्केट में अब तक 960.54 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन किया है, जो लगभग ‘पुष्पा 2’ के हिंदी वर्जन के बराबर ही है। हालांकि, साउथ के राज्यों में फिल्म वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई जैसा अल्लू अर्जुन की फिल्म ने किया था। ‘पुष्पा 2’ ने साउथ इंडिया से 511.70 करोड़ रुपए जुटाए थे, जिसकी भरपाई के लिए ‘धुरंधर 2’ को हिंदी मार्केट में लंबी दौड़ लगानी होगी। 20वें दिन भी कमाई में तेजी जारी तीसरे हफ्ते में पहुंचने के बावजूद फिल्म की कमाई की रफ्तार स्थिर बनी हुई है। मंगलवार (20वें दिन) को फिल्म ने भारत में 10.10 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया, जो सोमवार की कमाई के लगभग बराबर है। फिल्म ने अपने पहले हफ्ते में 674.17 करोड़ और दूसरे हफ्ते में 263.65 करोड़ रुपए का बिजनेस किया था। 19 मार्च को रिलीज हुई इस फिल्म ने ओपनिंग डे पर ही 102.55 करोड़ रुपए कमा लिए थे। पार्ट 1 के लाइफटाइम रिकॉर्ड को 10 दिन में तोड़ा इस फिल्म की कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट के ओवरसीज लाइफटाइम कलेक्शन को महज 10 दिनों में ही पीछे छोड़ दिया था। यह सबसे तेजी से 1000 करोड़ रुपए (वर्ल्डवाइड) कमाने वाली फिल्म बन गई है। फिल्म ने भारत में 100 करोड़ से लेकर 1000 करोड़ तक के सभी माइलस्टोन सबसे कम समय में हासिल किए हैं। साथ ही, यह अब तक की सबसे बड़ी हिंदी ओपनर और वर्ल्डवाइड सबसे बड़ा ओपनिंग वीकेंड देने वाली फिल्म भी बन चुकी है। फिल्म के नाम दर्ज हुए ये बड़े रिकॉर्ड्स भारत में 1000 करोड़ नेट कलेक्शन करने वाली पहली फिल्म। नॉर्थ अमेरिका में 25 मिलियन डॉलर कमाने वाली पहली भारतीय फिल्म। सबसे तेजी से 1000 करोड़ का ग्लोबल आंकड़ा पार करने वाली फिल्म। जर्मनी में 1 मिलियन यूरो का आंकड़ा छूने वाली पहली भारतीय फिल्म। ऑल टाइम सबसे बड़ी भारतीय ब्लॉकबस्टर।
मैं प्राकृतिक रूप से कोरियाई होंठ कैसे प्राप्त कर सकता हूं: अंधेरे होंठों से मिनटों में बाहर, घर पर अपनाएं ये आसान कोरियाई होंठ देखभाल रूटीन

8 अप्रैल 2026 को 13:46 IST पर अद्यतन किया गया मैं प्राकृतिक रूप से कोरियाई होंठ कैसे पा सकता हूं: काले और काले होंठ से गायब हैं, तो घर पर ही आसान कोरियाई होंठ देखभाल अपना सकते हैं। आइए जानें इस समस्या से मिनटों में कैसे निपटें। (टैग्सटूट्रांसलेट) कोरियाई गुलाबी होंठ स्वाभाविक रूप से (टी) गुलाबी होंठ कैसे पाएं (टी) प्राकृतिक होंठ देखभाल दिनचर्या (टी) घर का बना लिप स्क्रब (टी) चुकंदर लिप टिंट DIY (टी) मुलायम गुलाबी होंठ युक्तियाँ (टी) कोरियाई सौंदर्य होंठ देखभाल (टी) काले होंठ उपचार घरेलू उपाय
दवा नहीं, ये पत्ते हैं सेहत का खजाना! डायबिटीज से दिल तक फायदेमंद, जानें इसके चमत्कारी फायदे

Last Updated:April 08, 2026, 13:21 IST आयुर्वेद में शहतूत के पत्तों को बेहद गुणकारी माना गया है. ये न सिर्फ डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, बल्कि हृदय स्वास्थ्य, इम्यूनिटी और त्वचा के लिए भी फायदेमंद होते हैं. नियमित रूप से इनका सेवन करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते हैं. शहतूत के पत्ते मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं. इनमें विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. साथ ही ये पाचन को बेहतर करते हैं और सूजन कम करने में भी लाभकारी होते हैं. इनका सेवन चाय या काढ़े के रूप में किया जा सकता है. एक्सपर्ट डॉ. विनीता शर्मा के अनुसार, शहतूत के पत्ते मधुमेह को नियंत्रित करने में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. ये प्राकृतिक रूप से ब्लड शुगर को कम करने में मदद करते हैं और टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों में इंसुलिन की संवेदनशीलता को बेहतर बनाते हैं. शहतूत के पत्ते हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं, क्योंकि इनमें एंटीऑक्सीडेंट और फ्लेवोनोइड्स भरपूर मात्रा में होते हैं. ये कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करने, उच्च रक्तचाप को कम करने, धमनियों की सूजन घटाने और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. इससे हृदय रोगों, जैसे एथेरोस्क्लेरोसिस, के जोखिम को कम करने में सहायता मिल सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google शहतूत के पत्ते वजन प्रबंधन के लिए एक प्राकृतिक और प्रभावी उपाय माने जाते हैं. इनमें मौजूद पॉलीफेनोल और फाइबर शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा करते हैं, फैट के संचय को कम करने में मदद करते हैं और मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देते हैं. शहतूत के पत्ते विटामिन C, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. इनमें सूजनरोधी और एंटीवायरल गुण पाए जाते हैं, जो संक्रमण से लड़ने और पुरानी बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं. शहतूत के पत्ते त्वचा और मुंह के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं. इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन A, C, E और एंटी-बैक्टीरियल गुण दाग-धब्बों को कम करने, त्वचा को चमकदार बनाने, सूजन घटाने और मुंह के छालों व संक्रमण से राहत देने में सहायक होते हैं. शहतूत के पत्ते त्वचा और मुंह के स्वास्थ्य के लिए वरदान माने जाते हैं. इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन A, C, E और एंटी-बैक्टीरियल गुण दाग-धब्बों को कम करने, त्वचा को निखारने, सूजन घटाने और मुंह के छालों व संक्रमण को ठीक करने में मदद करते हैं. First Published : April 08, 2026, 13:21 IST









