वाराणसी में दिखेगा रामायण से जुड़ा 30 मिनट लंबा सीक्वेंस:महेश, रुद्र के अलावा भगवान राम के किरदार में भी नजर आएंगे

एसएस राजामौली की ‘वाराणसी’ लगातार चर्चाओं में बनी हुई है। अब फिल्म से जुड़ी एक और अपडेट सामने आ रही है कि फिल्म में भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच युद्ध का सीन दिखाया जाएगा। इससे पहले जानकारी आई थी कि फिल्म में रामायण से जुड़ा 30 मिनट लंबा सीक्वेंस होगा। फिल्मी फोकस द्वारा आयोजित एक इवेंट में राजामौली के पिता और फिल्म के लेखक विजयेंद्र प्रसाद ने फिल्म के बारे में अपडेट साझा की। जब उनसे फिल्म के 30 मिनट लंबे सीक्वेंस के बारे में पूछा गया कि यह पौराणिक है या राजनीतिक, तो उन्होंने कहा…‘यह राम और कुंभकर्ण के बीच युद्ध है, आपने ट्रेलर में देखा होगा, है ना? आपने राम और कुंभकर्ण को देखा। आपने भगवान हनुमान की पूंछ और उस पर रथ देखा। मैं उसी की बात कर रहा हूं। यह सीन हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देने वाला होगा।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या फिल्म टाइम ट्रैवल पर आधारित है और यह विचार किसका था? इस पर उन्होंने कहा कि ‘हमें अब इस बारे में और बात नहीं करनी चाहिए।’ ‘वाराणसी’ में महेश, रुद्र के अलावा भगवान राम के किरदार में भी नजर आएंगे।
जावेद जाफरी की पत्नी से 16 करोड़ की ठगी:केस में BMC अधिकारी सस्पेंड, क्राइम ब्रांच जांच में जुटी

बॉलीवुड अभिनेता जावेद जाफरी के परिवार से जुड़ा वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। उनकी पत्नी हबीबा जाफरी ने आरोप लगाया है कि उनसे करीब 16.24 करोड़ रुपए की ठगी की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। वहीं, केस में नाम सामने आने के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के एक अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हबीबा जाफरी ने शिकायत में आरोप लगाया है कि उन्हें रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स और निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपए निवेश करने के लिए राजी किया गया। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि निवेश की रकम पर आकर्षक रिटर्न मिलेगा और प्रोजेक्ट्स से बड़ा आर्थिक फायदा होगा। हालांकि बाद में न वादा किया गया रिटर्न मिला और न ही मूल रकम वापस की गई। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। शिकायत दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों ने मामले की पड़ताल शुरू की। शुरुआती जांच में कुछ तथ्य सामने आए, जिसके बाद मुंबई क्राइम ब्रांच को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित ठगी का नेटवर्क क्या था, इसमें कितने लोग शामिल थे और निवेशकों से जुटाई गई रकम कहां गई। इस मामले में BMC के अधिकारी महेश पाटिल का नाम भी सामने आया है। आरोपों और जांच को देखते हुए BMC प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी। यदि किसी स्तर पर अनियमितता साबित होती है तो आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस कथित घोटाले में अन्य निवेशक प्रभावित हुए हैं। यदि ऐसा पाया जाता है तो मामले का दायरा बढ़ सकता है। फिलहाल इस विवाद के बीच जावेद जाफरी की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अभिनेता अपने पेशेवर कामकाज में व्यस्त हैं, जबकि कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसमें करोड़ों रुपए की कथित ठगी, एक सरकारी अधिकारी की भूमिका और मनोरंजन जगत से जुड़े परिवार का नाम शामिल है। अब सबकी नजर क्राइम ब्रांच की जांच पर है, जिससे साफ हो सकेगा कि कथित निवेश योजना के पीछे कौन लोग थे और 16.24 करोड़ रुपए की रकम का क्या हुआ।
जावेद जाफरी की पत्नी से ₹16 करोड़ की ठगी:केस में BMC अधिकारी सस्पेंड, क्राइम ब्रांच जांच में जुटी

बॉलीवुड अभिनेता जावेद जाफरी के परिवार से जुड़ा वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। उनकी पत्नी हबीबा जाफरी ने आरोप लगाया है कि उनसे करीब 16.24 करोड़ रुपए की ठगी की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। वहीं, केस में नाम सामने आने के बाद बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के एक अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, हबीबा जाफरी ने शिकायत में आरोप लगाया है कि उन्हें रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स और निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपए निवेश करने के लिए राजी किया गया। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि निवेश की रकम पर आकर्षक रिटर्न मिलेगा और प्रोजेक्ट्स से बड़ा आर्थिक फायदा होगा। हालांकि बाद में न वादा किया गया रिटर्न मिला और न ही मूल रकम वापस की गई। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। शिकायत दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों ने मामले की पड़ताल शुरू की। शुरुआती जांच में कुछ तथ्य सामने आए, जिसके बाद मुंबई क्राइम ब्रांच को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित ठगी का नेटवर्क क्या था, इसमें कितने लोग शामिल थे और निवेशकों से जुटाई गई रकम कहां गई। इस मामले में BMC के अधिकारी महेश पाटिल का नाम भी सामने आया है। आरोपों और जांच को देखते हुए BMC प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने तक विभागीय कार्रवाई जारी रहेगी। यदि किसी स्तर पर अनियमितता साबित होती है तो आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस कथित घोटाले में अन्य निवेशक प्रभावित हुए हैं। यदि ऐसा पाया जाता है तो मामले का दायरा बढ़ सकता है। फिलहाल इस विवाद के बीच जावेद जाफरी की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अभिनेता अपने पेशेवर कामकाज में व्यस्त हैं, जबकि कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसमें करोड़ों रुपए की कथित ठगी, एक सरकारी अधिकारी की भूमिका और मनोरंजन जगत से जुड़े परिवार का नाम शामिल है। अब सबकी नजर क्राइम ब्रांच की जांच पर है, जिससे साफ हो सकेगा कि कथित निवेश योजना के पीछे कौन लोग थे और 16.24 करोड़ रुपए की रकम का क्या हुआ।
बिग टीएमसी स्प्लिट ब्रूइंग? सुखेंदु शेखर रॉय, 5 अन्य सांसदों ने दिल्ली में भाजपा नेता भूपेन्द्र यादव से मुलाकात की | भारत समाचार

आखरी अपडेट:08 जून, 2026, 14:18 IST पार्टी से इस्तीफा देने के कुछ घंटे बाद पूर्व टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय पांच टीएमसी सांसदों के साथ बीजेपी नेता भूपेन्द्र यादव के आवास पहुंचे। ममता को ताजा झटका: भाजपा नेताओं से मुलाकात करने वाले सांसदों में सुखेंदु, प्रसून बनर्जी तृणमूल कांग्रेस का संसदीय संकट तेजी से गहराता नजर आ रहा है. पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा देने के कुछ घंटे बाद पूर्व टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय पांच टीएमसी सांसदों के साथ बीजेपी नेता भूपेन्द्र यादव के आवास पहुंचे. बैठक में पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे. सूत्रों ने कहा कि बागी टीएमसी सांसद फिलहाल यादव से बातचीत कर रहे हैं। बैठक में भाग लेने वालों में टीएमसी के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी भी शामिल हैं, जो पार्टी के संसदीय रैंकों में संभावित बड़े विभाजन का संकेत है। यह ऐसे समय में आया है जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी इंडिया ब्लॉक बैठक के लिए राष्ट्रीय राजधानी में हैं। उपस्थित लोगों में बर्धमान पूर्व सांसद शर्मिला सरकार, हावड़ा सांसद प्रसून बनर्जी, कूच बिहार सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया, बांकुरा सांसद अरूप चक्रवर्ती, झारग्राम सांसद कालीपद सोरेन और बोलपुर सांसद असित मल शामिल थे। एक सूत्र ने यह भी दावा किया कि मथुरापुर के सांसद बापी हलदर ने बैठक में भाग लिया। सुखेंदु रे के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए, बागी टीएमसी विधायक और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, “यह सिर्फ सुखेंदु के बारे में नहीं है। मैंने सुखेंदु से बात नहीं की है। लेकिन मैंने टीवी पर सुखेंदु के बयान देखे और सुने हैं। उन्होंने जो कहा है, उसमें से ज्यादातर से मैं सहमत हूं। और सुखेंदु संसद के उच्च सदन के कामकाज के बारे में बिल्कुल सही हैं। संसद प्रश्नोत्तरी का स्थान नहीं है…” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शुद्धान्त पात्र आठ साल के अनुभव के साथ एक अनुभवी पत्रकार, शुद्धंता पात्रा, सीएनएन न्यूज़ 18 में वरिष्ठ उप-संपादक के रूप में कार्यरत हैं। राष्ट्रीय राजनीति, भू-राजनीति, व्यावसायिक समाचारों में विशेषज्ञता के साथ, उन्होंने प्रभावित किया है…और पढ़ें जगह : दिल्ली, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया बिग टीएमसी स्प्लिट ब्रूइंग? सुखेंदु शेखर रॉय, 5 अन्य सांसदों ने दिल्ली में भाजपा नेता भूपेन्द्र यादव से मुलाकात की अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)टीएमसी(टी)टीएमसी संकट(टी)ममता बनर्जी(टी)तृणमूल कांग्रेस संकट(टी)टीएमसी संसदीय संकट(टी)सुखेंदु शेखर रॉय(टी)टीएमसी सांसदों की बैठक(टी)बीजेपी नेता भूपेन्द्र यादव(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)ममता बनर्जी(टी)सुवेंदु अधिकारी
10 राज्यों के 50 गांवों में पर्यटन के साथ लर्निंग:विदेशी बच्चों की पढ़ाई का हिस्सा बने भारतीय गांव, स्थानीय उत्पाद बिकने से सुधरी अर्थव्यवस्था

टोटो, दुनिया की सबसे छोटी जनजाति है। पश्चिम बंगाल के टोटोपारा गांव में इस जनजाति के आखिरी बचे 1700 लोग रहते हैं। गांव अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा था, इकलौते स्कूल में एक अतिरिक्त कमरे की जरूरत थी। खानपान को बचाने के लिए महिलाएं कैफे खोलना चाहती थीं। टोटोपारा से 2500 किलोमीटर दूर बेंगलुरु की क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के छात्रों का 14 सदस्यीय दल बीते साल इस गांव की विजिट पर आया। अपने 10 दिन के टूर में छात्रों ने महिलाओं के साथ मिलकर कैफे का प्राइसिंग मॉडल-मेन्यू बनाया। छात्रों की इस यात्रा से गांव को 6 लाख रु. की कमाई हुई। इससे स्कूल का कमरा तैयार हो गया, कैफे भी खुल गया। ‘लोकल नैरेटिव्स’ ने गांवों में पर्यटन को मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लर्निंग से जोड़ दिया। जापान-ऑस्ट्रेलिया के 10 संस्थान जुड़े ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू कासल, क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी और जापान में टोक्यो व नागोया के 8 स्कूलों के बच्चे इसे सीखने के लिए भारत आ रहे हैं। भारत के 50 गांव मेजबानी के लिए तैयार वैष्णवी बताती हैं, लोकल नैरेटिव्स की शुरुआत 2021 में हुई। कम्युनिटी आधारित पर्यटन का उद्देश्य लोकल की तरह गांव में रहकर जनजीवन समझना-सीखना है। इसमें 50 गांवों को मेजबानी के लिए तैयार किया है। इससे गांवों को भी फायदा हो रहा है। उत्तराखंड के सुनकिया में छात्रों की यात्रा के बाद वहां देश की पहली कम्युनिटी टूरिज्म प्लेबुक तैयार हुई। इससे पर्यटन में मदद मिल रही है। एक अन्य यात्रा में गोवा के असनोरा में बुनकर महिलाओं को खरीदारों से जोड़ा, इससे उनकी कमाई बढ़ी। वैष्णवी सोमानी फाउंडर- लोकल नैरेटिव्स IIM बेंगलुरु ने इसे क्रेडिट प्रोग्राम के रूप में अप्रूव किया वैष्णवी कहती हैं, हमने पर्यटन को लर्निंग से जोड़ा। इसके लिए 5 दिन का करिकुलम बनाया। इसमें लोकल नैरेटिव्स को-फैकल्टी था। IIM बेंगलुरु ने इस कोर्स को अप्रूव किया। यानी गांवों में सामाजिक उद्यमिता सीखने के बाद छात्रों को 3 क्रेडिट मतलब मार्क्स भी मिल रहे हैं। – जैसा रोमेश साहू को बताया
10 राज्यों के 50 गांवों में पर्यटन के साथ लर्निंग:विदेशी बच्चों की पढ़ाई का हिस्सा बने भारतीय गांव, स्थानीय उत्पाद बिकने से सुधरी अर्थव्यवस्था

टोटो, दुनिया की सबसे छोटी जनजाति है। पश्चिम बंगाल के टोटोपारा गांव में इस जनजाति के आखिरी बचे 1700 लोग रहते हैं। गांव अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा था, इकलौते स्कूल में एक अतिरिक्त कमरे की जरूरत थी। खानपान को बचाने के लिए महिलाएं कैफे खोलना चाहती थीं। टोटोपारा से 2500 किलोमीटर दूर बेंगलुरु की क्राइस्ट यूनिवर्सिटी के छात्रों का 14 सदस्यीय दल बीते साल इस गांव की विजिट पर आया। अपने 10 दिन के टूर में छात्रों ने महिलाओं के साथ मिलकर कैफे का प्राइसिंग मॉडल-मेन्यू बनाया। छात्रों की इस यात्रा से गांव को 6 लाख रु. की कमाई हुई। इससे स्कूल का कमरा तैयार हो गया, कैफे भी खुल गया। ‘लोकल नैरेटिव्स’ ने गांवों में पर्यटन को मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लर्निंग से जोड़ दिया। जापान-ऑस्ट्रेलिया के 10 संस्थान जुड़े ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू कासल, क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी और जापान में टोक्यो व नागोया के 8 स्कूलों के बच्चे इसे सीखने के लिए भारत आ रहे हैं। भारत के 50 गांव मेजबानी के लिए तैयार वैष्णवी बताती हैं, लोकल नैरेटिव्स की शुरुआत 2021 में हुई। कम्युनिटी आधारित पर्यटन का उद्देश्य लोकल की तरह गांव में रहकर जनजीवन समझना-सीखना है। इसमें 50 गांवों को मेजबानी के लिए तैयार किया है। इससे गांवों को भी फायदा हो रहा है। उत्तराखंड के सुनकिया में छात्रों की यात्रा के बाद वहां देश की पहली कम्युनिटी टूरिज्म प्लेबुक तैयार हुई। इससे पर्यटन में मदद मिल रही है। एक अन्य यात्रा में गोवा के असनोरा में बुनकर महिलाओं को खरीदारों से जोड़ा, इससे उनकी कमाई बढ़ी। वैष्णवी सोमानी फाउंडर- लोकल नैरेटिव्स IIM बेंगलुरु ने इसे क्रेडिट प्रोग्राम के रूप में अप्रूव किया वैष्णवी कहती हैं, हमने पर्यटन को लर्निंग से जोड़ा। इसके लिए 5 दिन का करिकुलम बनाया। इसमें लोकल नैरेटिव्स को-फैकल्टी था। IIM बेंगलुरु ने इस कोर्स को अप्रूव किया। यानी गांवों में सामाजिक उद्यमिता सीखने के बाद छात्रों को 3 क्रेडिट मतलब मार्क्स भी मिल रहे हैं। – जैसा रोमेश साहू को बताया
20 सांसद, गुप्त बैठकें, बंद फोन: बंगाल से परे ममता बनर्जी के सामने संकट | भारत समाचार

आखरी अपडेट:08 जून, 2026, 13:27 IST रिपोर्टों में कहा गया है कि लगभग 20 सांसद वर्तमान में दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर उन विकल्पों पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं जिनमें एक अलग संसदीय ब्लॉक बनाना या टीएमसी से इस्तीफा देना शामिल है। टीएमसी में कोई भी बड़ा विभाजन न केवल राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी के प्रभाव को कमजोर करेगा, बल्कि विपक्षी गठबंधन के भीतर संतुलन को भी बदल सकता है। (एआई-जनरेटेड इमेज) पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस में नाटकीय विद्रोह के कुछ ही दिनों बाद, संकेत उभर रहे हैं कि राजनीतिक संकट अब संसद तक जा सकता है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसद वर्तमान में दिल्ली में एक अज्ञात स्थान पर एकत्र हुए हैं और उन विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं जिनमें एक अलग संसदीय गुट बनाना या पार्टी से इस्तीफा देना भी शामिल है। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है कि बंगाल में पार्टी की विधायी शाखा को खंडित करने वाला विद्रोह जल्द ही संसदीय स्तर तक फैल सकता है। यह घटनाक्रम चिंताजनक क्षणों की एक श्रृंखला को जोड़ता है, जिनसे टीएमसी जूझ रही है, जिसमें एनडीटीवी द्वारा उद्धृत सूत्रों द्वारा किए गए दावे भी शामिल हैं कि जब पार्टी नेताओं ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया तो कई तृणमूल सांसदों से संपर्क नहीं हो सका, कुछ ने कथित तौर पर अपने फोन बंद कर दिए और नेतृत्व के साथ संचार से परहेज किया। यह भी पढ़ें | कहानी में ट्विस्ट? टीएमसी संकट गहराने के बाद ममता बनर्जी विद्रोहियों को वापस लाने की कैसे योजना बना रही हैं? एनडीटीवी ने बताया कि मुंबई से कोलकाता जा रहे तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद रविवार शाम को दिल्ली में अनिर्धारित रूप से रुके। सूत्रों ने चैनल को बताया कि समझा जाता है कि संक्षिप्त पड़ाव के दौरान सांसद ने लोगों की नजरों से दूर कई कम-प्रोफ़ाइल बैठकें कीं। सूत्रों के मुताबिक, सांसद कोलकाता से सटे जिलों के एक निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उत्तर 24 परगना के एक तृणमूल सांसद, जिन्हें कथित तौर पर विधानसभा टिकट के लिए नजरअंदाज कर दिया गया था, वह भी एक दिन से अधिक समय से संपर्क से बाहर हैं, पार्टी के अंदरूनी सूत्र इस चुप्पी को बढ़ते असंतोष का संकेत मान रहे हैं। सूत्रों ने अभिनेता से सांसद बने एक व्यक्ति की ओर भी इशारा किया, जो रविवार को दिल्ली पहुंचे और माना जाता है कि वे धीरे-धीरे खुद को पार्टी से दूर कर रहे हैं। उत्तर बंगाल के कम से कम दो सांसद भी नेतृत्व की चिंताओं को बढ़ा रहे हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे वर्तमान स्थिति से नाखुश हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने स्पष्टीकरण के रूप में यात्रा और कनेक्टिंग उड़ानों का हवाला दिया, लेकिन इस प्रकरण ने रैंकों के भीतर बढ़ते असंतोष की अटकलों को हवा दे दी। तृणमूल संकट में एक नया मोर्चा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद उथल-पुथल शुरू हो गई, जब तृणमूल विधायकों का एक बड़ा वर्ग विधानसभा में पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व से अलग हो गया, जिससे ममता बनर्जी की सत्ता के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती पैदा हो गई। विद्रोह जल्द ही एक नियमित आंतरिक असहमति से बंगाल में सत्ता में आने के बाद से पार्टी के सामने सबसे बड़े संकट में बदल गया। यह भी पढ़ें | ममता का चलो दिल्ली आंदोलन: भारत के लिए आउटरीच या टीएमसी का अस्तित्व संघर्ष? अब, ध्यान संसद पर केंद्रित हो गया है। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, विद्रोही सांसदों का मानना है कि उनके पास स्वतंत्र रास्ता तय करने के लिए आवश्यक संख्या है, हालांकि प्रतिद्वंद्वी दावे इस बात पर कायम हैं कि कितने सांसद ममता बनर्जी के प्रति वफादार रहते हैं। जबकि असंतुष्टों ने कथित तौर पर लगभग 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया है, तृणमूल नेतृत्व के करीबी नेताओं का कहना है कि विद्रोहियों ने अभी तक दल-बदल विरोधी प्रावधानों के तहत औपचारिक विभाजन के लिए आवश्यक ताकत हासिल नहीं की है। एनडीटीवी ने पहले बताया था कि कम से कम 20 तृणमूल सांसद राजनीतिक मध्यस्थों के संपर्क में थे और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के बीच विकल्प तलाश रहे थे। कुछ बागी नेताओं ने यह भी दावा किया कि अभिषेक बनर्जी को पार्टी के संसदीय नेता के पद से हटाने के प्रयास चल रहे हैं। ममता का दिल्ली मिशन यह संकट राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षण में सामने आया है। ममता बनर्जी आधिकारिक तौर पर विपक्षी चर्चा में भाग लेने के लिए इंडिया ब्लॉक की बैठक से पहले दिल्ली पहुंचीं। हालाँकि, कई रिपोर्टों से पता चलता है कि उनकी अपनी संसदीय पार्टी के भीतर विभाजन को रोकना भी उतनी ही जरूरी प्राथमिकता बन गई है। अभिषेक बनर्जी सहित वरिष्ठ नेता इस आशंका के बीच सांसदों के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं कि असंतुष्ट लोग औपचारिक रूप से संसद में अलग मान्यता की मांग कर सकते हैं। दांव महत्वपूर्ण हैं. तृणमूल वर्तमान में संसद में सबसे बड़े विपक्षी दलों में से एक और इंडिया ब्लॉक का एक प्रमुख घटक बना हुआ है। कोई भी बड़ा विभाजन न केवल राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी के प्रभाव को कमजोर करेगा बल्कि ऐसे समय में विपक्षी गठबंधन के भीतर संतुलन को भी बदल सकता है जब पार्टियां मानसून सत्र और भविष्य की चुनावी लड़ाई से पहले फिर से संगठित होने का प्रयास कर रही हैं। विद्रोह को दबाने की कोशिश में, बनर्जी ने संगठनात्मक फेरबदल किया। जबकि अभिषेक बनर्जी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बने रहेंगे, दो संयुक्त राष्ट्रीय सचिव, राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को नियुक्त किया गया है। यह भी पढ़ें | इंडिया ब्लॉक को किसने डुबाया? जदयू के संजय झा ने ममता, केजरीवाल द्वारा ‘तोड़फोड़’ की ओर इशारा किया अफवाहें, इस्तीफे और अनिश्चितता अनिश्चितता सोमवार को और अधिक गहरा गई जब वरिष्ठ तृणमूल नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने संसद और पार्टी दोनों से अपने इस्तीफे की घोषणा की, जो संकट शुरू होने के बाद से सबसे अधिक प्रोफ़ाइल निकासियों में से एक बन गया। उनके जाने से अटकलें तेज हो गई हैं कि अगर नेतृत्व विद्रोह
चांदी ₹15,748 गिरकर ₹2.41 लाख किलो पर आई:ऑलटाइम हाई से ₹1.45 लाख गिर चुकी, सोना आज ₹3,470 टूटा; 10 ग्राम की कीमत ₹1.51 लाख

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से आज यानी 8 जून को सोने-चांदी के दाम में गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 3,470 रुपए गिरकर 1.51 लाख रुपए हो गया है। वहीं 1 किलो चांदी की कीमत 15,748 रुपए कम होकर 2.41 लाख रुपए पर आ गई है। एक्सपर्ट्स के अनुसार जियो पॉलिटिकल टेंशन के चलते लोग मार्केट से पैसा निकालकर अपने पास कैश रख रहे हैं। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 8 जून 2026 ऑल टाइम हाई से 1.45 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 25 हजार रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 130 दिन में चांदी 1.45 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोना 130 दिन में ₹25 हजार और चांदी ₹1.45 लाख सस्ती सोर्स: IBJA गिरावट के मुख्य कारण: मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है:
ममता को पहला संसदीय झटका: टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रे ने राज्यसभा से इस्तीफा दिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:08 जून, 2026, 12:09 IST आरजी कर बलात्कार मामले की जांच पर पार्टी से असहमति का हवाला देते हुए सुखेंदु शेखर रे ने भी तृणमूल कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ दी। टीएमसी नेता सुखेंदु शेखर रॉय. (फ़ाइल छवि) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सोमवार को संसद में पहला बड़ा झटका लगा जब वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रे ने उच्च सदन से इस्तीफा दे दिया और पार्टी छोड़ दी। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पार्टी पश्चिम बंगाल में अपने विधायकों के एक बड़े वर्ग के विद्रोह के बाद एक बड़े आंतरिक संकट से जूझ रही है। अपने इस्तीफे में रे ने कहा, “पश्चिम बंगाल की जनता ने कथित भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, उद्योग, रोजगार और कानून व्यवस्था सहित शासन में विफलताओं के कारण 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद तृणमूल कांग्रेस को खारिज कर दिया है। उन्होंने विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन को ऐतिहासिक जनादेश बताया और कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा देकर लोगों के फैसले को स्वीकार कर रहे हैं।” रे के इस्तीफे को पार्टी नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण झटके के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब उन्होंने हाल ही में चेतावनी दी थी कि विधानसभा में अशांति संसद तक फैल सकती है। ताजा घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के 80 में से लगभग 60 विधायकों द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में निष्कासित विधायक रीतब्रत बनर्जी का समर्थन करने के कुछ दिनों बाद आया है। इस कदम से पार्टी को बड़ा झटका लगा और चिंता पैदा हो गई कि पार्टी के सांसदों के बीच भी इसी तरह का विद्रोह उभर सकता है। रे ने सार्वजनिक रूप से संकेत दिया था कि ऐसी संभावना मौजूद है और सुझाव दिया था कि विधानसभा में हुए घटनाक्रम को अंततः संसद में दोहराया जा सकता है। उनका इस्तीफा अब पार्टी के भीतर चल रहे संकट का पहला बड़ा संसदीय नतीजा है। इस्तीफे के बाद उन्होंने क्या कहा? पद छोड़ने के बाद रे ने आरजी कर मामले का जिक्र किया और इस मुद्दे पर अपनी स्थिति दोहराई। उन्होंने कहा, “मैंने पुलिस कमिश्नर और आरजी कार के प्रिंसिपल को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की मांग की थी। मेरा अब भी मानना है कि सबूतों से छेड़छाड़ करने में उनकी मुख्य भूमिका थी।” उन्होंने कहा, “मैं तब समझ गया था कि टीएमसी जल्द ही ढह जाएगी। आरजी कर घटना के कारण पार्टी के खिलाफ बड़े पैमाने पर सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन हुआ, लेकिन नेतृत्व ने कभी भी अपनी हार के पीछे के कारणों का आत्मनिरीक्षण करने की कोशिश नहीं की। टीएमसी ने लोगों के साथ अपना संपर्क खो दिया है।” ऐसा लगता है कि आरजी कर आंदोलन के दौरान पार्टी के साथ उनके रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे। मतभेदों के बावजूद, रे प्रमुख मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व के साथ खड़े रहे। जब ममता बनर्जी ने एसआईआर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो वह उनके पक्ष में थे। टीएमसी से पुराना नाता सुखेंदु शेखर रे पहली बार 2011 में राज्यसभा सदस्य बने। तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें लगातार तीन बार उच्च सदन के लिए नामित किया। वर्षों तक, वह पार्टी के वरिष्ठ संसदीय चेहरों में से एक बने रहे। 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान जब ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ा तो रे को भी वहां भेजा गया था. हालाँकि, यह आरोप लगाया गया कि पार्टी नेताओं ने उनकी बातों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। चुनाव में हार के बाद उभरे मतभेद 2026 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद, रे ने खुले तौर पर सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों पर भी पार्टी की कड़ी आलोचना की. उनकी सार्वजनिक आलोचना ने उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच बढ़ते मतभेदों की अटकलों को हवा दी। वे मतभेद अब राज्यसभा और तृणमूल कांग्रेस दोनों से उनके इस्तीफे के रूप में सामने आए हैं। पार्टी के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले सांसदों में से एक के जाने से तृणमूल कांग्रेस के सामने चुनौतियां बढ़ गई हैं क्योंकि वह उस विद्रोह को रोकने का प्रयास कर रही है जिसने पहले ही पश्चिम बंगाल में उसके संगठन को हिलाकर रख दिया है। इस बीच सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी इस्तीफे आने वाले हैं. चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में शुद्धान्त पात्र आठ साल के अनुभव के साथ एक अनुभवी पत्रकार, शुद्धंता पात्रा, सीएनएन न्यूज़ 18 में वरिष्ठ उप-संपादक के रूप में कार्यरत हैं। राष्ट्रीय राजनीति, भू-राजनीति, व्यावसायिक समाचारों में विशेषज्ञता के साथ, उन्होंने प्रभावित किया है…और पढ़ें जगह : दिल्ली, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया ममता को पहला संसदीय झटका: टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रे ने राज्यसभा से इस्तीफा दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तृणमूल कांग्रेस विद्रोह(टी)टीएमसी आंतरिक संकट(टी)सुखेंदु शेखर रे(टी)राज्यसभा इस्तीफा(टी)पश्चिम बंगाल की राजनीति(टी)टीएमसी विधायकों का विद्रोह(टी)संसद झटका टीएमसी(टी)भारतीय राजनीतिक समाचार
रघुवीर यादव बोले- महंगाई से बुरा हाल सैयां का है:पंचायत सीरीज पर बोले- आधी शूटिंग हो चुकी; बच्चों को थिएटर से जोड़े

बॉलीवुड एक्टर, सिंगर और थियेटर आर्टिस्ट रघुवीर यादव जयपुर में आयोजित बच्चों की क्यूरियो थिएटर वर्कशॉप के समापन पर आए। उन्होंने कहा- थिएटर केवल अभिनय की कला नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पाठशाला है। बच्चों को बचपन से ही रंगमंच, संगीत और कला से जोड़ दिया जाए तो उनका व्यक्तित्व निखरता है। फिल्म पीपली लाइव के फेमस गाने ‘महंगाई डायन खाय जात है’ का गाना आज भी लोगों को काफी पंसद है। इस पर उन्होंने कहा- महंगाई तो मेरे बचपन से बढ़ती ही चली आ रही है। गाने में ‘सैयां’ पर ज्यादा जोर दिया था। महंगाई से ज्यादा बुरा हाल तो सैयां का है। अपने अपकमिंग प्रोजेक्ट पंचायत के नए सीजन पर कहा कि अभी इसकी शूटिंग चल रही है। एक्टर ने अपने करियर और निजी जीवन से जुड़ी कई बात भास्कर के साथ साझा की। पढ़िए- सवाल: जयपुर में बच्चों की थिएटर वर्कशॉप में आए हैं। बच्चों को रंगमंच से जोड़ना कितना जरूरी है? रघुवीर यादव: बहुत जरूरी है। रंगमंच ही ऐसी विधा है जो जीने का सलीका सिखाती है, दिशा दिखाती है कि आपको अपने आप को कैसे बचाकर, बनाकर और समझदारी से आगे बढ़ना है। थिएटर कभी वक्त जाया करना नहीं सिखाता, बल्कि जो समय आपके पास है उसका सही इस्तेमाल करना सिखाता है। अगर बच्चों को छोटी उम्र से ही थिएटर की आदत डाल दी जाए और इसके मायने समझा दिए जाएं तो जिंदगी काफी आसान हो जाती है। बच्चे तो वैसे भी होनहार होते हैं, बस उन्हें सही दिशा दिखानी होती है। थिएटर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप कभी खुद को अकेला महसूस नहीं करते। सवाल: आपने अपने करियर की शुरुआत संगीत से की थी और फिर थिएटर से जुड़े। शुरुआती दौर में कैसी चुनौतियां रहीं? रघुवीर यादव: देखिए, तकलीफें तो कुछ होती नहीं हैं। आप चाहें तो उन्हें तकलीफ कह दीजिए, चाहें तो मजा। मेरी नजर में अगर जिंदगी बनानी है तो तकलीफों में मजा लेना सीखना पड़ेगा। असल में तकलीफ काम में नहीं होती, तकलीफ आलस में होती है। स्कूल की घंटी बजते ही अगर कोई कहे कि तकलीफ शुरू हो गई और स्कूल जाना छोड़ दे, तो फिर कुछ नहीं होगा। मुझे तो कभी तकलीफ महसूस नहीं हुई। जो कर पाया, कर लिया। जो नहीं कर पाया, उसे सीखने की कोशिश की। बस यही तरीका रहा। सवाल: पंचायत की सफलता के बाद अपने अंदर क्या बदलाव महसूस किया? रघुवीर यादव: मेरे अंदर कोई बदलाव नहीं आया। बदलाव तो थिएटर ने बहुत पहले ला दिया था। थिएटर ने सिखाया कि सीखते रहो, मेहनत से मत भागो और समय बर्बाद मत करो। पंचायत के बाद भी मैं वही हूं। बस कोशिश यही रहती है कि लगातार सीखता रहूं। सवाल: आपका गाया हुआ गीत ‘महंगाई डायन खाय जात है’ आज भी लोगों की जुबान पर है। इसे कैसे देखते हैं? रघुवीर यादव: अच्छा लगता है कि लोग आज भी उसे सुनते और गाते हैं। मेरा काम था गाना गाना, मैंने गा दिया। अब लोगों को अच्छा लग रहा है तो यह उनकी मर्जी है। और जहां तक महंगाई की बात है, वो तो मेरे बचपन से बढ़ती ही चली आ रही है। मैंने तो गाने में ‘सैयां’ पर ज्यादा जोर दिया था। महंगाई से ज्यादा बुरा हाल तो सैयां का है। सवाल: पंचायत के नए सीजन को लेकर क्या अपडेट है? रघुवीर यादव: अभी शूटिंग चल रही है। शूटिंग पूरी होने में करीब दो-तीन महीने लगेंगे। उसके बाद पोस्ट-प्रोडक्शन में भी कुछ समय लगेगा। तो अभी थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। सवाल: क्या इसके अलावा भी कोई नए प्रोजेक्ट्स कर रहे हैं? रघुवीर यादव: हां, अभी पाइप लाइन और गॉड ऑफ नाम की दो वेब सीरीज की हैं लेकिन मैं बहुत ज्यादा काम नहीं करता। मुझे कछुए की चाल में चलना पसंद है। आराम-आराम से काम करता हूं और वही करता हूं जिसमें दिलचस्पी हो। सवाल: जयपुर से आपकी कौन-कौन सी यादें जुड़ी हैं? रघुवीर यादव: जयपुर से तो बहुत सारी यादें जुड़ी हैं। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के दिनों में यहां कई नाटक किए। उससे पहले संगीत के कार्यक्रम भी किए। अजीत पालावत जैसे दोस्तों के साथ काम किया। मैं यहां अक्सर आता रहता हूं, इसलिए जयपुर मेरे लिए नया शहर नहीं है। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां थिएटर को लेकर लोगों में बहुत उत्साह है। यहां की ऑडियंस कमाल की है। सच कह रहा हूं, जब भी जयपुर आया हूं, यहां काम करके और दर्शकों से मिलकर हमेशा मजा आया है। — ये खबर भी पढ़िए- राजस्थान में एनएसडी का रीजनल सेंटर बने तो होगा फायदा:एनएसडी के निदेशक बोले- सरकार को आगे आकर पहल करनी होगी, संसाधन जुटाने होंगे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने राजस्थान में एनएसडी का क्षेत्रीय केंद्र (रीजनल सेंटर) स्थापित किए जाने की मांग का समर्थन किया है। (पढ़िए पूरी खबर)








