चांदी आज ₹2,924 सस्ती, ₹2.19 लाख पर आई:सोना ₹1,848 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया; चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.67 लाख सस्ती हुई

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 24 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,924 रुपए घटकर 2.19 लाख रुपए पर आ गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,848 रुपए गिरकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया है। एक दिन पहले चांदी 2.22 लाख रुपए और सोना 1.44 लाख रुपए पर था। ऑल टाइम हाई से 1.67 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 34,000 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी की कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक चांदी 1.67 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोने-चांदी के दाम में आगे तेजी देखने को मिल सकती है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं। हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है।
चांदी आज ₹2,924 सस्ती, ₹2.19 लाख पर आई:सोना ₹1,848 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया; चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.67 लाख सस्ती हुई

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 24 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,924 रुपए घटकर 2.19 लाख रुपए पर आ गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,848 रुपए गिरकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया है। एक दिन पहले चांदी 2.22 लाख रुपए और सोना 1.44 लाख रुपए पर था। ऑल टाइम हाई से 1.67 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 34,000 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी की कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक चांदी 1.67 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोने-चांदी के दाम में आगे तेजी देखने को मिल सकती है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं। हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है।
टीवी इंडस्ट्री की पार्टी में ड्रग का बजट होता है:एक्ट्रेस नारायणी शास्त्री बोलीं- नशे की वजह से कई बार शूटिंग कैंसिल हुई, मैंने भी सारे नशे किए

क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कुसुम और कोई अपना सा जैसे कई सुपरहिट टीवी शोज में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस नारायणी शास्त्री ने हाल ही में टीवी इंडस्ट्री और एक्टर्स के नशे करने से जुड़ा एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने खुद भी कबूला है कि वो सभी तरह के नशे कर चुकी हैं। इतना ही नहीं एक्ट्रेस ने ये भी दावा किया है कि टीवी इंडस्ट्री की पार्टीज के लिए ड्रग का बजट बनता था, कई बार तो शूटिंग तक कैंसिल करना पड़ता था। एक्ट्रेस नारायणी शास्त्री ने हाल ही में सिद्धार्थ कानन के पॉडकास्ट में सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर बात की। एक्ट्रेस ने कहा कि ड्रग्स ही एक्टर की मौत की वजह बने। उन्होंने कहा- ‘उन्होंने आत्महत्या क्यों की ये मेरी समझ से परे है। लेकिन मुझे लगता है ड्रग्स ही वजह है। पहले हमारी इंडस्ट्री में पार्टी का बजट होता था कि दारू का कितना बजट होगा। अब ड्रग्स का बजट होता है।’ आगे एक्ट्रेस ने कहा, ‘आप इसे पसंद करें या न करें, लेकिन मैं खुद भी देखकर शॉक थी कि ड्रग्स का बजट होता है। इसलिए बहुत सालों से मैंने पार्टी करना बंद कर दिया है। अब वो पार्टियां नहीं होतीं कि गाना लगा है चलो डांस करें, अब पार्टीज कुछ अलग होती हैं, पूरी तरह।’ एक्ट्रेस ने दावा किया है कि टीवी इंडस्ट्री की बड़ी पार्टीज में खुलेआम ड्रग्स इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन छोटी पार्टीज में ओपनली ड्रग्स इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा- ‘हर कोई जानता है कि सब नशे करते हैं। मैं पर्सनली नहीं जानती कि कौन नशे करता है, लेकिन मैं ऐसी जगह गई हूं, जहां मैंने लोगों को ड्रग्स लेते देखा है।’ आगे एक्ट्रेस ने कहा है, ‘मैं सती सावित्री बनने की कोशिश नहीं कर रही हूं, मैंने अपनी जिंदगी में सारे नशे किए हैं। लेकिन मैंने एक्सपेरिमेंट की तरह किया है कि ये करने से क्या होता है। वर्ना अगर आप ड्रग्स में घुस जाओ, तो जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते हो।’ नारायणी ने आगे कहा, ‘कोकेन की लत लग जाती है। मुझे लगता है कोकेन इंडस्ट्री को खा रही है। ये दुनिया को खा रही है, क्योंकि सभी ड्रग्स करते हैं। मैं बहुत कम लोगों को जानती हूं जो ड्रग्स नहीं करते हैं। मैं ये सब नहीं करती थी, लेकिन जब मैं ऐसी जगह गई, तो मैं वहां लोगों को देखकर शॉक हो जाती थी।’ एक्टर्स खड़े होने लायक नहीं होते, शूटिंग कैंसिल होती है- नारायणी जब आगे एक्ट्रेस से पूछा गया कि क्या एक्टर्स सेट पर या वैनिटी में ड्रग्स लेते हैं, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे नाम नहीं लेना है, लेकिन ये बहुत होता है। हमारी शूट कैंसिल हुई है, क्योंकि एक्टर्स शूट करने की हालत में नहीं है। महंगे एक्टर्स सेट पर बैठे हैं, लेकिन शूट नहीं हो रही, क्योंकि लोग खड़े होने लायक नहीं हैं। मेरे आखिरी दो शोज में ऐसा नहीं हुआ है, लेकिन पिछले शोज में ये बहुत हुआ है।’ अपने विवादित बयान में नारायणी शास्त्री ने साफ किया है कि वो ड्रग एडिक्ट नहीं हैं, उन्होंने सारे नशे सिर्फ ट्राय करने के लिए इस्तेमाल किए थे। एक्ट्रेस ने सफाई में कहा है कि उन्होंने पहली बार शराब इसलिए पी, जिससे उन्हें पता रहे कि अगर कोई उन्हें छिपकर शराब पिलाए तो पता हो कि उसका स्वाद कैसा है। कौन हैं एक्ट्रेस नारायणी शास्त्री
टीवी इंडस्ट्री की पार्टी में ड्रग का बजट होता है:एक्ट्रेस नारायणी शास्त्री बोलीं- नशे की वजह से कई बार शूटिंग कैंसिल हुई, मैंने भी सारे नशे किए

क्योंकि सास भी कभी बहू थी, कुसुम और कोई अपना सा जैसे कई सुपरहिट टीवी शोज में नजर आ चुकीं एक्ट्रेस नारायणी शास्त्री ने हाल ही में टीवी इंडस्ट्री और एक्टर्स के नशे करने से जुड़ा एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने खुद भी कबूला है कि वो सभी तरह के नशे कर चुकी हैं। इतना ही नहीं एक्ट्रेस ने ये भी दावा किया है कि टीवी इंडस्ट्री की पार्टीज के लिए ड्रग का बजट बनता था, कई बार तो शूटिंग तक कैंसिल करना पड़ता था। एक्ट्रेस नारायणी शास्त्री ने हाल ही में सिद्धार्थ कानन के पॉडकास्ट में सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर बात की। एक्ट्रेस ने कहा कि ड्रग्स ही एक्टर की मौत की वजह बने। उन्होंने कहा- ‘उन्होंने आत्महत्या क्यों की ये मेरी समझ से परे है। लेकिन मुझे लगता है ड्रग्स ही वजह है। पहले हमारी इंडस्ट्री में पार्टी का बजट होता था कि दारू का कितना बजट होगा। अब ड्रग्स का बजट होता है।’ आगे एक्ट्रेस ने कहा, ‘आप इसे पसंद करें या न करें, लेकिन मैं खुद भी देखकर शॉक थी कि ड्रग्स का बजट होता है। इसलिए बहुत सालों से मैंने पार्टी करना बंद कर दिया है। अब वो पार्टियां नहीं होतीं कि गाना लगा है चलो डांस करें, अब पार्टीज कुछ अलग होती हैं, पूरी तरह।’ एक्ट्रेस ने दावा किया है कि टीवी इंडस्ट्री की बड़ी पार्टीज में खुलेआम ड्रग्स इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन छोटी पार्टीज में ओपनली ड्रग्स इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा- ‘हर कोई जानता है कि सब नशे करते हैं। मैं पर्सनली नहीं जानती कि कौन नशे करता है, लेकिन मैं ऐसी जगह गई हूं, जहां मैंने लोगों को ड्रग्स लेते देखा है।’ आगे एक्ट्रेस ने कहा है, ‘मैं सती सावित्री बनने की कोशिश नहीं कर रही हूं, मैंने अपनी जिंदगी में सारे नशे किए हैं। लेकिन मैंने एक्सपेरिमेंट की तरह किया है कि ये करने से क्या होता है। वर्ना अगर आप ड्रग्स में घुस जाओ, तो जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते हो।’ नारायणी ने आगे कहा, ‘कोकेन की लत लग जाती है। मुझे लगता है कोकेन इंडस्ट्री को खा रही है। ये दुनिया को खा रही है, क्योंकि सभी ड्रग्स करते हैं। मैं बहुत कम लोगों को जानती हूं जो ड्रग्स नहीं करते हैं। मैं ये सब नहीं करती थी, लेकिन जब मैं ऐसी जगह गई, तो मैं वहां लोगों को देखकर शॉक हो जाती थी।’ एक्टर्स खड़े होने लायक नहीं होते, शूटिंग कैंसिल होती है- नारायणी जब आगे एक्ट्रेस से पूछा गया कि क्या एक्टर्स सेट पर या वैनिटी में ड्रग्स लेते हैं, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे नाम नहीं लेना है, लेकिन ये बहुत होता है। हमारी शूट कैंसिल हुई है, क्योंकि एक्टर्स शूट करने की हालत में नहीं है। महंगे एक्टर्स सेट पर बैठे हैं, लेकिन शूट नहीं हो रही, क्योंकि लोग खड़े होने लायक नहीं हैं। मेरे आखिरी दो शोज में ऐसा नहीं हुआ है, लेकिन पिछले शोज में ये बहुत हुआ है।’ अपने विवादित बयान में नारायणी शास्त्री ने साफ किया है कि वो ड्रग एडिक्ट नहीं हैं, उन्होंने सारे नशे सिर्फ ट्राय करने के लिए इस्तेमाल किए थे। एक्ट्रेस ने सफाई में कहा है कि उन्होंने पहली बार शराब इसलिए पी, जिससे उन्हें पता रहे कि अगर कोई उन्हें छिपकर शराब पिलाए तो पता हो कि उसका स्वाद कैसा है। कौन हैं एक्ट्रेस नारायणी शास्त्री
भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव पर भड़कीं मलाइका अरोड़ा:फोटो के लिए कुत्ते को बेरहमी से घसीटा गया, एक्ट्रेस बोलीं- ये बेवकूफ आदमी है कौन, वाहियात

एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा हाल ही में भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव पर भड़क गई हैं। इतना ही नहीं एक्ट्रेस उन्हें पहचान भी नहीं सकीं और उनके अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए। दरअसल, हाल ही में खेसारी लाल यादव एक इवेंट का हिस्सा बने थे। जैसे ही वो पोज देने के लिए कैमरामैन के सामने पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि जिस जगह बैकग्राउंड बैनर लगा है, ठीक उसी जगह एक आवारा कुत्ता बैठा है। खेसारी लाल यादव ने खुद तो कुत्ते को छुआ तक नहीं, लेकिन वहां मौजूद टीम ने उस कुत्ते को बेरहमी से घसीटते हुए वहां से अलग कर दिया। खेसारी लाल यादव शांत खड़े देखते रहे और कुत्ते को हटाए जाने के बाद उन्होंने वहां पोज दिए। इवेंट का वीडियो सामने आने के बाद मलाइका भड़क गईं। मलाइका ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से खेसारी लाल यादव का वो वीडियो शेयर कर भड़कते हुए लिखा है, ‘ये लोग हैं कौन और ये आदमी कौन है, जो खड़ा होकर पोज दे रहा है। वाहियात।’ इतना ही नहीं। ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से वीडियो री-शेयर करने के अलावा मलाइका अरोड़ा ने शेयर किए गए वीडियो पर भी दो कमेंट किए। पहले कमेंट में मलाइका ने लिखा, ‘वाहियात’। और दूसरे कमेंट में उन्होंने लिखा, ‘ये बेवकूफ कौन है, क्या इसके लिए पोज देना इतना जरूरी था।’ मलाइका का कमेंट सामने आने के बाद कई लोग खेसारी लाल यादव की पैरवी करते हुए उनकी पहचान बता रहे हैं। वहीं कुछ ट्रोलर्स ऐसे भी हैं, जो मलाइका को ही ट्रोल कर रहे हैं। कौन हैं खेसारी लाल यादव?
भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव पर भड़कीं मलाइका अरोड़ा:फोटो के लिए कुत्ते को बेरहमी से घसीटा गया, एक्ट्रेस बोलीं- ये बेवकूफ आदमी है कौन, वाहियात

एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा हाल ही में भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव पर भड़क गई हैं। इतना ही नहीं एक्ट्रेस उन्हें पहचान भी नहीं सकीं और उनके अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए। दरअसल, हाल ही में खेसारी लाल यादव एक इवेंट का हिस्सा बने थे। जैसे ही वो पोज देने के लिए कैमरामैन के सामने पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि जिस जगह बैकग्राउंड बैनर लगा है, ठीक उसी जगह एक आवारा कुत्ता बैठा है। खेसारी लाल यादव ने खुद तो कुत्ते को छुआ तक नहीं, लेकिन वहां मौजूद टीम ने उस कुत्ते को बेरहमी से घसीटते हुए वहां से अलग कर दिया। खेसारी लाल यादव शांत खड़े देखते रहे और कुत्ते को हटाए जाने के बाद उन्होंने वहां पोज दिए। इवेंट का वीडियो सामने आने के बाद मलाइका भड़क गईं। मलाइका ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट से खेसारी लाल यादव का वो वीडियो शेयर कर भड़कते हुए लिखा है, ‘ये लोग हैं कौन और ये आदमी कौन है, जो खड़ा होकर पोज दे रहा है। वाहियात।’ इतना ही नहीं। ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से वीडियो री-शेयर करने के अलावा मलाइका अरोड़ा ने शेयर किए गए वीडियो पर भी दो कमेंट किए। पहले कमेंट में मलाइका ने लिखा, ‘वाहियात’। और दूसरे कमेंट में उन्होंने लिखा, ‘ये बेवकूफ कौन है, क्या इसके लिए पोज देना इतना जरूरी था।’ मलाइका का कमेंट सामने आने के बाद कई लोग खेसारी लाल यादव की पैरवी करते हुए उनकी पहचान बता रहे हैं। वहीं कुछ ट्रोलर्स ऐसे भी हैं, जो मलाइका को ही ट्रोल कर रहे हैं। कौन हैं खेसारी लाल यादव?
मूवी रिव्यू: उत्तर दा पुत्तर:वास्तु के बहाने बड़ा तंज कसती है फिल्म, क्या किस्मत सच में दिशाओं से बदलती है?

वास्तु, किस्मत और अंधविश्वास जैसे विषयों पर कई बार बहस होती है, लेकिन फिल्मों में इसे हल्के फुल्के और मनोरंजक अंदाज में कम ही दिखाया जाता है। ‘उत्तर दा पुत्तर’ इसी कोशिश के साथ आती है। फिल्म हंसाती है, व्यंग्य करती है और आखिर में एक ऐसा सवाल छोड़ जाती है, जो शायद थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी आपके साथ चलता है। हालांकि कुछ कमियां इसे और बेहतर बनने से रोकती हैं। इस फिल्म की लेंथ 1 घंटा 43 मिनट है। इस फिल्म को दैनिक भास्कर ने 5 में से 3 स्टार रेटिंग दी है। फिल्म की कहानी कैसी है? फिल्म की कहानी फिजिक्स के प्रोफेसर साईं राम टुटेजा (अन्नू कपूर) की है। विज्ञान पढ़ाने वाले टुटेजा खुद वास्तु पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं। उनकी जिद है कि वह तभी अपना घर बनाएंगे, जब उसे उत्तर दिशा की ओर फेस करने वाली परफेक्ट जमीन मिले। इसी वजह से सालों तक किराए के घर में रहते हैं। जब आखिरकार उन्हें मनचाही जमीन मिलती है और सपनों का घर बनाने का सफर शुरू होता है, तब किस्मत उनके सामने एक के बाद एक मुश्किलें खड़ी कर देती है। इंटरवल के बाद कहानी दिलचस्प मोड़ लेती है, जब टुटेजा समझते हैं कि जिंदगी सिर्फ दिशा नहीं, बल्कि अपने फैसलों और मेहनत से बदलती है। इस सफर में उनका छात्र ज्ञान चंद उर्फ जीसी (सुमित गुलाटी) उनका सबसे बड़ा सहारा बनता है। फिल्म कॉमेडी और व्यंग्य के जरिए वास्तु और अंधविश्वास पर सवाल भी उठाती है। कई जगह इसकी झलक ‘खोसला का घोंसला’ की याद दिलाती है। स्टारकास्ट की एक्टिंग कैसी है? अन्नू कपूर पूरी फिल्म की जान हैं। साईं राम टुटेजा के किरदार में उनका अभिनय इतना सहज है कि कई बार लगता है जैसे यह किरदार उन्हीं के लिए लिखा गया हो। कॉमेडी, इमोशन और टाइमिंग, हर जगह वह फिल्म को अपने कंधों पर संभाल लेते हैं। सुमित गुलाटी (ज्ञान चंद उर्फ जीसी) दूसरे हिस्से में कहानी का मजबूत आधार बनते हैं और अपने किरदार में ईमानदार नजर आते हैं। रुखसार रहमान (गिन्नी) सधी हुई एक्टिंग करती हैं। राजेंद्र सेठी (आनंद राज आनंद) कम स्क्रीन टाइम में भी असर छोड़ते हैं। बृजेंद्र काला, पवन मल्होत्रा, इश्तियाक खान और नितिन अरोड़ा जैसे कलाकार अपनी मौजूदगी से फिल्म को और मनोरंजक बनाते हैं। डायरेक्शन और टेक्निकल पक्ष डायरेक्टर रविंदर सिवाच ने एक अच्छे आइडिया को मनोरंजक तरीके से पेश किया है। फिल्म का मैसेज साफ है और वह बिना भाषण दिए अपनी बात कह जाती है। हालांकि कुछ सीन जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं और एडिटिंग थोड़ी टाइट होती तो फिल्म का असर और बढ़ सकता था। कास्टिंग में भी एक बात खटकती है। नासिर अब्दुल्ला, जो गिन्नी के पिता बने हैं, पर्दे पर अन्नू कपूर से उम्र में छोटे नजर आते हैं। ऐसे में उनका अन्नू कपूर के ससुर वाला किरदार पूरी तरह विश्वसनीय नहीं लगता। कैमरा वर्क और बाकी टेक्निकल पहलू कहानी के हिसाब से ठीक हैं। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का म्यूजिक कहानी के साथ चलता है। गाने सीन के हिसाब से अच्छे लगते हैं, लेकिन थिएटर से बाहर निकलने के बाद बहुत ज्यादा याद नहीं रहते। बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के मूड को सपोर्ट करता है। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? ‘उत्तर दा पुत्तर’ कोई बड़ी या भव्य फिल्म नहीं है, लेकिन एक अच्छे विषय को ईमानदारी और हल्के फुल्के अंदाज में पेश करती है। अन्नू कपूर का शानदार अभिनय, बाकी कलाकारों का साथ और व्यंग्य से भरी कहानी इसे एक बार देखने लायक बनाती है। अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जो हंसाने के साथ सोचने पर भी मजबूर करें, तो ‘उत्तर दा पुत्तर’ आपको निराश नहीं करेगी। हालांकि थोड़ी टाइट एडिटिंग और कुछ बेहतर कास्टिंग फैसले इसे और मजबूत बना सकते थे।
अमेरिका ने भारत पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया:जबरन मजदूरी से बने सामान को लेकर कार्रवाई, 60 देशों पर एक्शन

अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला शुक्रवार से लागू हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से बने सामान के आयात को लेकर 60 देशों पर कार्रवाई की है। अमेरिका ने इन देशों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है। वहीं बाकी 43 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, मेक्सिको, पाकिस्तान और श्रीलंका समेत कई देशों को 10% टैरिफ वाले समूह में रखा गया है। अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने फोर्स्ड लेबर से बने सामान पर प्रतिबंध लगाया है या ऐसा करने की दिशा में कदम उठाए हैं। भारत को कैसे मिली राहत अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक शुरुआत में भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। हालांकि श्रम मानकों पर अमेरिका के साथ हुई बातचीत और भारत की ओर से किए गए नीति बदलाव के बाद इसे घटाकर 10% कर दिया गया। फेडरल नोट में कहा गया है कि जून में प्रस्तावित टैरिफ घोषित होने के बाद भारत ने 14 जून को अपनी विदेशी व्यापार नीति में संशोधन किया। इसके तहत फोर्स्ड लेबर से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया। इसी बदलाव को टैरिफ तय करते समय ध्यान में रखा गया।
हेयरफॉल: बालों की झड़ी से परेशान हैं तो मेथी में फैले ये 4 कपड़े, 2 सप्ताह में शानदार दिखते हैं

इस भाग में भारी जिंदगी, प्रदूषण, तनाव और गलत भाषा का सबसे पहला असर हमारे बालों पर पड़ता है। बालों का स्टाइल एक ऐसी समस्या बन गई है, जिससे हर दूसरा व्यक्ति परेशान है। बाजार में कई तरह के हेयर केयर उत्पाद मौजूद हैं, लेकिन उनमें मौजूद केमिकल कई बार बालों को नुकसान पहुंचाते हैं। अगर आप भी बालों से परेशान हैं और कोई प्रभावशाली प्राकृतिक उपाय ढूंढ रहे हैं, तो मेथी दाना आपके लिए वरदान साबित हो सकता है। मेथी में प्रोटीन, निकोटिनिक एसिड और फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो बालों के प्रोटीन को मजबूत बनाते हैं। नारियल तेल बाले को गहराई से पोषण आहार के लिए जाना जाता है। जब इसे मेथी के साथ शामिल किया जाता है, तो यह बालों के झड़ने की समस्या को जड़ से ख़त्म करने में मदद करता है। 2 लार्ज मेथी दाना और लें उसे नारियल तेल में कैनवास पेंटिंग गर्म कर लें। जब तेल गुनगुना हो जाए, तो इससे स्कैल्प की मालिश करें। इसे हर हफ्ते 2 बार खरीदें। डैंड्रफ और ड्राय स्कैल्प भी बाल स्कैल्प का एक बड़ा कारण होते हैं। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड स्कैल्प को साफ और वर्गीकृत किया गया है। रातभर भीगे हुए मेथी दानों को पीसकर पेस्ट बना लें। अब इसमें 3-4 बड़े ताज़ा डेयरी रेवेअर शामिल हैं। इस पैक को बालों की जड़ों से सिरों तक और 30 मिनट बाद किसी भी फफूंदी से धो लें। एलोवेरा जेल बाल प्राकृतिक रूप से चमकदार और मजबूत बनते हैं। इसमें मौजूद एंजाइम एंजाइम को बढ़ावा दिया जाता है। मेथी के पेस्ट में 2 माइक्रो ताज़ा एलोवेरा जेल पकड़े। इस मिक्सचर को स्कैल्प पर अच्छी तरह से सजाया गया है। यह बालों के झड़ने को तुरंत नियंत्रित करने में मदद करता है और बालों को स्थापित करता है। प्याज के रस में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा होती है, जो नए बाल ओबने और स्कैल्प के ब्लड सर्कोलन को बेहतर बनाने में सहायक होता है। मेथी के पाउडर या पेस्ट में 2 प्याज का रस मिला लें। इसे अपने नाम की मदद से स्कैल्प पर लगाएं। 20 से 25 मिनट बाद बालों को धो लें।
नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा:भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात करेंगे; 3 महीने में ही फैसले से पलटे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पहली बार अपने बनाए नियम से हटकर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इसे नेपाल की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह अपने दोनों सबसे बड़े पड़ोसियों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखना चाहता है। एक ही दिन दोनों देशों के राजदूतों के साथ मीटिंग बालेन शाह नहीं चाहते थे कि भारत या चीन में से किसी को यह लगे कि दूसरे देश को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने दोनों देशों के राजदूतों से एक ही दिन अलग-अलग मुलाकात करने का फैसला किया है। दोनों बैठकें एक के बाद एक होंगी, ताकि दोनों देशों के साथ समान व्यवहार का मैसेज जाए। नेपाल सरकार ने पुष्टि की है कि भारत और चीन के राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठकें इसी सप्ताह होंगी। हालांकि, दोनों बैठकों की सटीक तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। नेपाल का विदेश मंत्रालय इन बैठकों की अंतिम तैयारियों में जुटा है। बालेन शाह ने अपना रुख क्यों बदला? प्रधानमंत्री बनने के बाद बालेन शाह ने यह परंपरा बनाई थी कि वह किसी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। उनका मानना था कि कई शक्तिशाली देश सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर सीधे नेपाल के टॉप नेताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश करते रहे हैं। इसलिए उन्होंने विदेशी राजनयिकों से सिर्फ समूह (ग्रुप) में मुलाकात करने की नीति अपनाई। इस फैसले के चलते उन्होंने कई बड़े विदेशी प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत मुलाकात करने से इनकार कर दिया। अब बालेन शाह मान रहे हैं कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए भारत और चीन के साथ सीधे संवाद बनाए रखना जरूरी हो चुका है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है, जब उनकी सरकार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और शुरुआती नीतिगत फैसलों को लेकर लगातार आलोचना का सामना कर रही है। नेपाल की विदेश नीति में भारत-चीन की अहम भूमिका नेपाल लंबे समय से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाकर विदेश नीति चलाता रहा है। भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है और लाखों नेपाली नागरिक रोजगार, व्यापार और अन्य कारणों से भारत से जुड़े हुए हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते भी काफी गहरे हैं। वहीं चीन ने पिछले एक दशक में नेपाल में बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के जरिए अपना प्रभाव लगातार बढ़ाया है। बीजिंग नेपाल के साथ अपने रणनीतिक संबंध मजबूत करना चाहता है, जबकि काठमांडू दोनों पड़ोसी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश करता है। भारत से मुलाकात क्यों अहम है? भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते बेहद मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है और सुरक्षा तथा व्यापार के मामले में भी दोनों एक-दूसरे पर काफी निर्भर हैं। हालांकि समय-समय पर सीमा विवाद और राजनीतिक मतभेदों को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव भी देखने को मिला है। इसके बावजूद नेपाल के लिए भारत के साथ स्थिर और मजबूत संबंध बनाए रखना उसकी विदेश नीति की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक माना जाता है। चीन भी क्यों है बराबर अहम? चीन ने हाल के वर्षों में नेपाल में सड़क, रेल, ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसके जरिए वह नेपाल में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा रहा है। ऐसे में भारत के साथ-साथ चीन के साथ भी अच्छे संबंध बनाए रखना नेपाल की विदेश नीति का अहम हिस्सा है। क्या बदल रही है बालेन शाह की राजनीति? बालेन शाह पहले काठमांडू के मेयर थे। उन्होंने पारंपरिक राजनीति से अलग छवि बनाकर लोकप्रियता हासिल की थी। विदेशी राजदूतों से अकेले मुलाकात नहीं करने का फैसला भी उसी सोच का हिस्सा था। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें व्यावहारिक कूटनीति की जरूरतों को भी ध्यान में रखना पड़ रहा है।







