Sunday, 26 Jul 2026 | 12:47 PM

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वैभव तत्ववादी बोले- नसीरुद्दीन शाह से सीखी असली एक्टिंग:संजय लीला भंसाली ने गले लगाकर कहा- "यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब"

वैभव तत्ववादी बोले- नसीरुद्दीन शाह से सीखी असली एक्टिंग:संजय लीला भंसाली ने गले लगाकर कहा- "यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब"

‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ में टाइटन के को-फाउंडर आकाश का किरदार निभाकर चर्चा में आए अभिनेता वैभव तत्ववादी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट ने उनके करियर की दिशा बदल दी। उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करना रही। उन्हें देखकर उन्होंने अभिनय को महसूस करना सीखा। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़कर अभिनेता बनने, मुंबई में संघर्ष, रिजेक्शन, नेपोटिज्म, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘आर्टिकल 370’ और ‘टाइटन’ से मिली पहचान पर बात की। सवाल: ‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ का ऑफर मिला तो पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: प्रोड्यूसर का फोन आया और बताया कि टाइटन पर सीरीज बन रही है। जैसे ही पता चला कि मुझे कंपनी के को-फाउंडर आकाश का किरदार निभाना है, मैंने तुरंत हामी भर दी। डायरेक्टर रॉबी ग्रेवाल से मुलाकात के बाद यकीन हो गया कि यह प्रोजेक्ट मुझे करना ही है। मेरे लिए यह किस्मत से मिला प्रोजेक्ट था। सवाल: नसीरुद्दीन शाह के साथ पहली बार काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: पहला ही सीन उनके साथ था। मैं काफी नर्वस था। उन्हें देखकर अभिनय को महसूस करना सीखा। पहले विजया मेहता जी से सुना था कि अभिनय की असली लय ठहराव में होती है। नसीर सर को काम करते देखकर उसका असली मतलब समझ आया। उन्होंने मुझे कुछ सिखाया नहीं, लेकिन उन्हें काम करते देखना ही सबसे बड़ी क्लास थी। सवाल: नसीरुद्दीन शाह से मिली सबसे बड़ी सीख क्या रही? जवाब: उनके साथ कुछ दिन शूट किया, लेकिन उसके बाद मेरा अभिनय बदल गया। डायलॉग बोलने का तरीका, पॉज, बॉडी लैंग्वेज और सीन में मौजूदगी ने मुझे प्रभावित किया। रिलीज के बाद जब उन्होंने मेरी परफॉर्मेंस की तारीफ की, तो लगा कि मेरी दस साल की मेहनत सफल हो गई। वह तारीफ मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: दर्शक आकाश के किरदार से इतना जुड़ क्यों पाए? जवाब: आकाश सिर्फ बिजनेसमैन नहीं, आम इंसान भी है। उसके सपने, जिम्मेदारियां और रिश्तों का संघर्ष है। कई लोग ऐसे दौर से गुजरते हैं, जहां वे कुछ और करना चाहते हैं, लेकिन जिम्मेदारियां उन्हें रोक देती हैं। शायद इसी वजह से लोगों ने खुद को इस किरदार में देखा। सवाल: इंजीनियरिंग छोड़कर अभिनय में आने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मैं मेटलर्जिकल इंजीनियर हूं। माता-पिता ने कहा था कि पहले इंजीनियरिंग पूरी करो, फिर दो साल अभिनय के लिए देंगे। मैंने वादा निभाया। अगर उन दो साल में काम नहीं मिलता, तो एम.टेक करके प्रोफेसर बन जाता। लेकिन उसी दौरान अभिनय में काम मिलने लगा और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। सवाल: अभिनय का शौक कब से था? जवाब: दूसरी कक्षा से थिएटर करता था। आठवीं में ही तय कर लिया था कि अभिनेता बनना है। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे में पढ़ाई के साथ थिएटर किया। वहीं कलाकार के तौर पर मेरी असली ग्रूमिंग हुई। FTII के छात्रों की शॉर्ट फिल्मों में काम किया, जिससे कैमरे के सामने अनुभव मिला। सवाल: आपकी हिंदी इतनी अच्छी कैसे हुई? जवाब: इसका सबसे बड़ा श्रेय अमीन सयानी साहब को जाता है। उन्होंने मुझे इब्राहिम दरवेश साहब के पास भेजा। उन्होंने सही उच्चारण, हिंदी-उर्दू लिखना और भाषा की बारीकियां सिखाईं। तभी समझ आया कि अभिनेता के लिए भाषा कितनी जरूरी है। मेरा मानना है कि आम लोगों को अपने लहजे पर शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। हर राज्य का एक्सेंट उसकी खूबसूरती है। सवाल: बिना किसी गॉडफादर के मुंबई में शुरुआत कितनी मुश्किल रही? जवाब: मैं नागपुर और पुणे से मुंबई आया था। यहां की रफ्तार अलग थी। शुरुआत में जोगेश्वरी में तीन दोस्तों के साथ छोटे-से घर में रहता था। बारिश में घर के आसपास पानी भर जाता था और कभी-कभी चूहे भी आ जाते थे। लोकल ट्रेन की भीड़ से कई बार तीन-तीन ट्रेन छोड़ देता था। धीरे-धीरे यही शहर अपना लगने लगा। आज भी मानता हूं कि मुंबई मेहनत करने वालों को कभी निराश नहीं करती। सवाल: शुरुआती संघर्ष का सबसे मुश्किल दौर कौन-सा था? जवाब: सबसे ज्यादा तकलीफ रिजेक्शन से नहीं, लोगों के व्यवहार से होती थी। कई बार पुणे से चार घंटे बस में सफर कर ऑडिशन देने आता था और सुनने को मिलता था, ‘आप फिट नहीं हैं।’ उस समय खुद पर शक होने लगता था। बाद में समझ आया कि बिना पहचान के इंडस्ट्री में आने वालों के लिए रिजेक्शन सफर का हिस्सा है। अगर इन्हीं से हार मान लेंगे, तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे। सवाल: उस दौर से खुद को कैसे संभाला? जवाब: मैंने तय किया कि खुद को कभी किसी दूसरे की राय से नहीं आंकूंगा। लोग आपके बारे में कुछ भी सोच सकते हैं, लेकिन वही सच हो, यह जरूरी नहीं। योग ने मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनाया। सफलता और असफलता, दोनों को संतुलित तरीके से लेना वहीं से सीखा। सवाल: बाजीराव मस्तानी तक पहुंचने का सफर कैसे तय हुआ? जवाब: मराठी फिल्मों और थिएटर में काम कर रहा था। उसी दौरान महेश मांजरेकर और अतुल कुलकर्णी ने मेरा नाम संजय लीला भंसाली तक पहुंचाया। मुझे चिमाजी अप्पा का किरदार मिला। पहली बार इतने बड़े सेट पर काम किया। वहां अभिनय के साथ दबाव में शांत रहना भी सीखा। सवाल: संजय लीला भंसाली से मिली सबसे बड़ी तारीफ क्या थी? जवाब: एक सीन देखने के बाद उन्होंने मुझे गले लगाकर कहा, “यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब।” बाद में उन्होंने कहा, “जब तुम एडिट टेबल पर दिखते हो, तब मैजिक होता है।” एक अभिनेता के लिए इससे बड़ा कॉम्प्लिमेंट नहीं हो सकता। सवाल: आर्टिकल 370 के लिए कैसी तैयारी करनी पड़ी? जवाब: हमने पूर्व कमांडो के साथ ट्रेनिंग की। हथियार पकड़ने से लेकर चलने और खड़े होने तक हर चीज पर काम किया। कोशिश थी कि स्क्रीन पर अभिनेता नहीं, असली सैनिक दिखे। फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ आर्मी अधिकारियों ने कहा कि किरदार बिल्कुल वास्तविक लगा। मेरे लिए वही सबसे बड़ी तारीफ थी। सवाल: आपको कब लगा कि हिंदी इंडस्ट्री में अलग पहचान बन गई है? जवाब: ‘निर्मल पाठक की घर वापसी’ मेरे करियर का टर्निंग पॉइंट थी। उसके बाद ‘आर्टिकल 370’ आई और ‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ ने दर्शकों से ऐसा जुड़ाव दिया, जो पहले कभी महसूस नहीं हुआ। लोगों ने सिर्फ किरदार

वैभव तत्ववादी बोले- नसीरुद्दीन शाह से सीखी असली एक्टिंग:संजय लीला भंसाली ने गले लगाकर कहा- "यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब"

वैभव तत्ववादी बोले- नसीरुद्दीन शाह से सीखी असली एक्टिंग:संजय लीला भंसाली ने गले लगाकर कहा- "यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब"

‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ में टाइटन के को-फाउंडर आकाश का किरदार निभाकर चर्चा में आए अभिनेता वैभव तत्ववादी ने कहा कि इस प्रोजेक्ट ने उनके करियर की दिशा बदल दी। उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करना रही। उन्हें देखकर उन्होंने अभिनय को महसूस करना सीखा। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़कर अभिनेता बनने, मुंबई में संघर्ष, रिजेक्शन, नेपोटिज्म, ‘बाजीराव मस्तानी’, ‘आर्टिकल 370’ और ‘टाइटन’ से मिली पहचान पर बात की। सवाल: ‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ का ऑफर मिला तो पहला रिएक्शन क्या था? जवाब: प्रोड्यूसर का फोन आया और बताया कि टाइटन पर सीरीज बन रही है। जैसे ही पता चला कि मुझे कंपनी के को-फाउंडर आकाश का किरदार निभाना है, मैंने तुरंत हामी भर दी। डायरेक्टर रॉबी ग्रेवाल से मुलाकात के बाद यकीन हो गया कि यह प्रोजेक्ट मुझे करना ही है। मेरे लिए यह किस्मत से मिला प्रोजेक्ट था। सवाल: नसीरुद्दीन शाह के साथ पहली बार काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: पहला ही सीन उनके साथ था। मैं काफी नर्वस था। उन्हें देखकर अभिनय को महसूस करना सीखा। पहले विजया मेहता जी से सुना था कि अभिनय की असली लय ठहराव में होती है। नसीर सर को काम करते देखकर उसका असली मतलब समझ आया। उन्होंने मुझे कुछ सिखाया नहीं, लेकिन उन्हें काम करते देखना ही सबसे बड़ी क्लास थी। सवाल: नसीरुद्दीन शाह से मिली सबसे बड़ी सीख क्या रही? जवाब: उनके साथ कुछ दिन शूट किया, लेकिन उसके बाद मेरा अभिनय बदल गया। डायलॉग बोलने का तरीका, पॉज, बॉडी लैंग्वेज और सीन में मौजूदगी ने मुझे प्रभावित किया। रिलीज के बाद जब उन्होंने मेरी परफॉर्मेंस की तारीफ की, तो लगा कि मेरी दस साल की मेहनत सफल हो गई। वह तारीफ मेरे लिए किसी अवॉर्ड से कम नहीं थी। सवाल: दर्शक आकाश के किरदार से इतना जुड़ क्यों पाए? जवाब: आकाश सिर्फ बिजनेसमैन नहीं, आम इंसान भी है। उसके सपने, जिम्मेदारियां और रिश्तों का संघर्ष है। कई लोग ऐसे दौर से गुजरते हैं, जहां वे कुछ और करना चाहते हैं, लेकिन जिम्मेदारियां उन्हें रोक देती हैं। शायद इसी वजह से लोगों ने खुद को इस किरदार में देखा। सवाल: इंजीनियरिंग छोड़कर अभिनय में आने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मैं मेटलर्जिकल इंजीनियर हूं। माता-पिता ने कहा था कि पहले इंजीनियरिंग पूरी करो, फिर दो साल अभिनय के लिए देंगे। मैंने वादा निभाया। अगर उन दो साल में काम नहीं मिलता, तो एम.टेक करके प्रोफेसर बन जाता। लेकिन उसी दौरान अभिनय में काम मिलने लगा और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। सवाल: अभिनय का शौक कब से था? जवाब: दूसरी कक्षा से थिएटर करता था। आठवीं में ही तय कर लिया था कि अभिनेता बनना है। कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग पुणे में पढ़ाई के साथ थिएटर किया। वहीं कलाकार के तौर पर मेरी असली ग्रूमिंग हुई। FTII के छात्रों की शॉर्ट फिल्मों में काम किया, जिससे कैमरे के सामने अनुभव मिला। सवाल: आपकी हिंदी इतनी अच्छी कैसे हुई? जवाब: इसका सबसे बड़ा श्रेय अमीन सयानी साहब को जाता है। उन्होंने मुझे इब्राहिम दरवेश साहब के पास भेजा। उन्होंने सही उच्चारण, हिंदी-उर्दू लिखना और भाषा की बारीकियां सिखाईं। तभी समझ आया कि अभिनेता के लिए भाषा कितनी जरूरी है। मेरा मानना है कि आम लोगों को अपने लहजे पर शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। हर राज्य का एक्सेंट उसकी खूबसूरती है। सवाल: बिना किसी गॉडफादर के मुंबई में शुरुआत कितनी मुश्किल रही? जवाब: मैं नागपुर और पुणे से मुंबई आया था। यहां की रफ्तार अलग थी। शुरुआत में जोगेश्वरी में तीन दोस्तों के साथ छोटे-से घर में रहता था। बारिश में घर के आसपास पानी भर जाता था और कभी-कभी चूहे भी आ जाते थे। लोकल ट्रेन की भीड़ से कई बार तीन-तीन ट्रेन छोड़ देता था। धीरे-धीरे यही शहर अपना लगने लगा। आज भी मानता हूं कि मुंबई मेहनत करने वालों को कभी निराश नहीं करती। सवाल: शुरुआती संघर्ष का सबसे मुश्किल दौर कौन-सा था? जवाब: सबसे ज्यादा तकलीफ रिजेक्शन से नहीं, लोगों के व्यवहार से होती थी। कई बार पुणे से चार घंटे बस में सफर कर ऑडिशन देने आता था और सुनने को मिलता था, ‘आप फिट नहीं हैं।’ उस समय खुद पर शक होने लगता था। बाद में समझ आया कि बिना पहचान के इंडस्ट्री में आने वालों के लिए रिजेक्शन सफर का हिस्सा है। अगर इन्हीं से हार मान लेंगे, तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे। सवाल: उस दौर से खुद को कैसे संभाला? जवाब: मैंने तय किया कि खुद को कभी किसी दूसरे की राय से नहीं आंकूंगा। लोग आपके बारे में कुछ भी सोच सकते हैं, लेकिन वही सच हो, यह जरूरी नहीं। योग ने मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनाया। सफलता और असफलता, दोनों को संतुलित तरीके से लेना वहीं से सीखा। सवाल: बाजीराव मस्तानी तक पहुंचने का सफर कैसे तय हुआ? जवाब: मराठी फिल्मों और थिएटर में काम कर रहा था। उसी दौरान महेश मांजरेकर और अतुल कुलकर्णी ने मेरा नाम संजय लीला भंसाली तक पहुंचाया। मुझे चिमाजी अप्पा का किरदार मिला। पहली बार इतने बड़े सेट पर काम किया। वहां अभिनय के साथ दबाव में शांत रहना भी सीखा। सवाल: संजय लीला भंसाली से मिली सबसे बड़ी तारीफ क्या थी? जवाब: एक सीन देखने के बाद उन्होंने मुझे गले लगाकर कहा, “यू हैव डन अ फिनॉमिनल जॉब।” बाद में उन्होंने कहा, “जब तुम एडिट टेबल पर दिखते हो, तब मैजिक होता है।” एक अभिनेता के लिए इससे बड़ा कॉम्प्लिमेंट नहीं हो सकता। सवाल: आर्टिकल 370 के लिए कैसी तैयारी करनी पड़ी? जवाब: हमने पूर्व कमांडो के साथ ट्रेनिंग की। हथियार पकड़ने से लेकर चलने और खड़े होने तक हर चीज पर काम किया। कोशिश थी कि स्क्रीन पर अभिनेता नहीं, असली सैनिक दिखे। फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ आर्मी अधिकारियों ने कहा कि किरदार बिल्कुल वास्तविक लगा। मेरे लिए वही सबसे बड़ी तारीफ थी। सवाल: आपको कब लगा कि हिंदी इंडस्ट्री में अलग पहचान बन गई है? जवाब: ‘निर्मल पाठक की घर वापसी’ मेरे करियर का टर्निंग पॉइंट थी। उसके बाद ‘आर्टिकल 370’ आई और ‘मेड इन इंडिया: अ टाइटन स्टोरी’ ने दर्शकों से ऐसा जुड़ाव दिया, जो पहले कभी महसूस नहीं हुआ। लोगों ने सिर्फ किरदार

बरसात के मौसम में खाने से बचें: बारिश के मौसम में नुकसानदेह ये 4 टिप्स, सेहत को हो सकते हैं बड़े नुकसान

बरसात के मौसम में खाने से बचें: बारिश के मौसम में नुकसानदेह ये 4 टिप्स, सेहत को हो सकते हैं बड़े नुकसान

24 जुलाई 2026 को 22:18 IST पर अद्यतन किया गया बरसात के मौसम में खाने से बचें: बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन इसके साथ कई तरह के विकार और संक्रमण भी आते हैं। इस मौसम में वृद्धि के कारण बैक्टीरिया, कीट और फंगस तेजी से बढ़ते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार, मसूदा में अपने अंतर्विरोधों का विशेष ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, अन्य में पेट दर्द, खाद्य पदार्थ की खुराक और पाचन संबंधी संबद्धता शामिल हो सकती है। आइए जानते हैं कि किन खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए? (टैग्सटूट्रांसलेट)मानसून में कौन सी सब्जी नहीं खाना चाहिए(टी)मानसून आहार युक्तियाँ(टी)बरसात के मौसम में परहेज करने वाली सब्जियां(टी)बरसात के मौसम में स्वास्थ्य सावधानियां(टी)मानसून में पत्तेदार सब्जियां(टी)बरसात के मौसम में पाचन समस्याएं(टी)मानसून में खाद्य विषाक्तता(टी)मानसून स्वास्थ्य दिशानिर्देश(टी)बरसात के मौसम में जीवाणु संक्रमण(टी)स्वस्थ मानसून आहार

मानसून मच्छर रोग: बारिश में बढ़ा मच्छरों का आतंक? इन आसान नामांकन से करें आरक्षण; नहीं रहेगा सूची-मलेरिया का खतरा

मानसून मच्छर रोग

24 जुलाई 2026 को 19:27 IST पर अपडेट किया गया डेंगू मलेरिया से बचाव के उपाय: बारिश के मौसम में मच्छरों का आतंक काफी बढ़ जाता है। इस प्रकार के लेबल और मलेरियल जैसे पदार्थों का खतरा रहता है। तो जानिए क्या हैं मच्छरों से बचने के कुछ बेहद आसान तरीके। अनुसरण करना : पानी जमा होने न दें: मच्छर हमेशा अंकित रहते हैं पानी में पठते हैं। अपने घर के होने के नाते, छतों पर या खाली गैमलों और टायरों में पानी बिल्कुल जमा न हो। येही किताब के मंत्रों का सबसे बड़ा घर है। छवि: फ्रीपिक पूरी तरह से आरामदायक सुविधा: शाम के वक्ता मच्छर सबसे ज्यादा समुदाय के लोग हैं। बाहर जाने का समय या पार्क में वॉक करते समय पूरी तरह से झूलते हुए खिलौने। बच्चों को भी हमेशा पूरे कपड़े ही कपड़े, बाहरी सजावटी सामान। छवि: फ्रीपिक ब्लॉकचेन और टंकियों की सफाई: घर में रखे तालाबों, पानी की टंकियों और पक्षियों के तालाबों का पानी हर सप्ताह कम हो जाता है। अगर पानी बनाने वाले मशहूर न हों, तो इसमें थोड़ा सा मिट्टी का तेल या नीम का तेल दाल शामिल है। छवि: एआई मच्छरदानी का उपयोग: रात को मच्छरदानी मच्छरों से बचने का सबसे सुरक्षित और पुराना तरीका है। इसके अलावा आप मॉस्किटो रिपेलेन्ट क्रीम, स्प्रे या डिटर्जेंट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक मच्छरों को भगाने के लिए शाम के समय घर में नीम के दोस्त या कपूर का धूम्रपान करें। घर में मौजूद तुलसी, बाला और लेमनग्रास जैसे उपचारों से भी मच्छर दूर रहते हैं। छवि: एआई तेज बुखार, सिरदर्द, या शरीर और जोड़ों में दर्द होना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। यह विनाशकारी या मलेरियल हो सकता है। तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें और खूब पानी लें। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: समृद्धि ब्रेजा प्रकाशित 24 जुलाई 2026, 19:27 IST

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा संसद (जातीय संसद) के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद को सौंपा। राष्ट्रपति ने इस्तीफे की वजह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बताया है। अपने इस्तीफे में शहाबुद्दीन ने लिखा कि वह लंबे समय से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी की बीमारी से जूझ रहे हैं। हाल ही में डॉक्टरों ने उनमें ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी नाम की बीमारी का पता लगाया है। इस बीमारी की वजह से उन्हें कई बार अचानक कुछ समय के लिए बेहोशी आ जाती है। उन्होंने कहा कि शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए अब राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारियां निभाना संभव नहीं है और उन्हें लंबे समय तक इलाज की जरूरत है। पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेशी मीडिया में उनके इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही थीं। कई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि लंदन दौरे पर उन्होंने पूर्व पीएम शेख हसीना से फोन पर बातचीत की कोशिश की थी। इस खबर के बाहर आने के बाद प्रधानमंत्री नाराज हो गए थे। अब स्पीकर राष्ट्रपति की जिम्मेदारी निभाएंगे बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 54 के मुताबिक, नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बाद संसद को 90 दिनों के भीतर नया राष्ट्रपति चुनना होगा, जो मौजूदा कार्यकाल का बाकी समय पूरा करेगा।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा संसद (जातीय संसद) के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद को सौंपा। राष्ट्रपति ने इस्तीफे की वजह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बताया है। अपने इस्तीफे में शहाबुद्दीन ने लिखा- मैं लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और किडनी की बीमारी से जूझ रहा हूं। हाल ही में डॉक्टरों ने मुझमें ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी नाम की बीमारी का पता लगाया है। इस बीमारी की वजह से कई बार अचानक कुछ समय के लिए बेहोशी आ जाती है। शारीरिक और मानसिक स्थिति को देखते हुए अब राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद की जिम्मेदारियां निभाना संभव नहीं है। पिछले कुछ दिनों से बांग्लादेशी मीडिया में उनके इस्तीफे की अटकलें लगाई जा रही थीं। कई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि उन्होंने पूर्व पीएम शेख हसीना से फोन पर बातचीत की कोशिश की थी। इस खबर के बाहर आने के बाद प्रधानमंत्री नाराज हो गए थे। हसीना के देश छोड़ने के बाद भी पद नहीं छोड़ा था मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अप्रैल 2023 में राष्ट्रपति पद संभाला था। जुलाई-अगस्त 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। उस आंदोलन के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद शहाबुद्दीन ही अवामी लीग सरकार के दौर के एकमात्र संवैधानिक पदाधिकारी थे, जो 2 साल बाद भी पद पर बने हुए थे। लंदन दौरे पर शेख हसीना से बातचीत का आरोप वह 9 मई को इलाज के लिए लंदन गए थे और 18 मई को ढाका लौटे थे। बांग्लादेशी समाचार पत्रों की रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने भारत में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बातचीत की थी। जैसे ही इस बातचीत की भनक बीएनपी (BNP) के शीर्ष नेतृत्व को लगी, उन्होंने इसे बहुत गंभीरता से लिया। इसके बाद राष्ट्रपति तक यह मैसेज पहुंचाया कि शेख हसीना से संपर्क साधना या बातचीत करना मौजूदा राजनीतिक माहौल में स्वीकार्य नहीं है और उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। अखबार प्रोथोम आलो ने भी सरकार के एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया कि सरकार इस बात से नाराज है कि राष्ट्रपति ने हाल ही में शेख हसीना से दोबारा संपर्क करने की कोशिश की थी। वहीं द डेली स्टार ने बीएनपी के एक सीनियर नेता के हवाले से लिखा था कि शहाबुद्दीन और शेख हसीना के बीच कथित फोन पर हुई बातचीत ही इस्तीफे की एकमात्र वजह नहीं है। दरअसल शेख हसीना ने इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया है। इससे देश का राजनीतिक माहौल और ज्यादा संवेदनशील हो गया है। अब स्पीकर राष्ट्रपति की जिम्मेदारी निभाएंगे बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 54 के मुताबिक, नए राष्ट्रपति के चुने जाने तक संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके बाद संसद को 90 दिनों के भीतर नया राष्ट्रपति चुनना होगा, जो मौजूदा कार्यकाल का बाकी समय पूरा करेगा। मोहम्मद शहाबुद्दीन ने 24 अप्रैल 2023 को बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। वह सत्तारूढ़ अवामी लीग के उम्मीदवार थे और निर्विरोध चुने गए थे। उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 तक चलना था। स्पीकर इलाज के लिए बैंकॉक गए थे स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद 19 जुलाई को इलाज के लिए थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक गए थे। उनकी वापसी रविवार को तय थी, लेकिन उन्होंने अपना दौरा बीच में ही खत्म कर दो दिन पहले ढाका लौटने का फैसला किया। ढाका हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था कि विदेश में होने के कारण उन्हें राष्ट्रपति के इस्तीफे के फैसले की जानकारी नहीं थी।

मानसून में पर्यटन स्थल: बारिश में पहाड़ों पर यात्रा से बचना चाहते हैं? तो आपके लिए वो 6 जगहें हैं जहां घूमने पर कोई खतरा नहीं है

तस्वीर का विवरण

अलपुज्जा, केरला: अलेप्पी को पूर्व का वेनिस कहा जाता है और यह उनके बैकवाटर्स और हाउसबोट के लिए दुनिया भर में मशहूर है। बारिश के बीच हाउसबोट में पानी की सैर का एक अलग ही आनंद मिलता है। छवि: एआई ओरछा, मध्य प्रदेश: बेतवा नदी के किनारे बसा यह ऐतिहासिक शहर की धरोहर बिल्कुल हरा-भरा हो जाता है। शांत महल और पुराना महल आपको बहुत पसंद आएगा। यह यात्रा बिल्कुल भरोसेमंद रहेगी। छवि: एआई दुविधा का गाँव: ऑफ-सीजन के कारण बारिश में गोवा घूमना काफी सस्ता है। यहां आपको हरियाली, शांत समंदर और सैमुअल होटल मिलेंगे। कम बजट वाले यात्रियों के लिए यह सटीक गंतव्य है। छवि: एआई यूके, राजस्थान: बारिश में यूके की झीलें और महल और भी खूबसूरत हो जाते हैं। यहां आप कम बजट में शाही अंदाज का अनुभव ले सकते हैं। जैसे पहाड़ों में कोई जोखिम नहीं। छवि: एआई पुडुचेरी: फ्रेंच स्टाइल की इमारतें बारिश और से धुली सासा सड़कें। पुडुचेरी में बेहद शांत और खूबसूरत नज़ारे हैं। यहां रहना और खाना-पीना काफी बजट-अनुकूल है। छवि: एआई माउंट आबू,राजस्थान: राजस्थान का हिल स्टेशन, पहाड़ों का मतलब है लेकिन यहां जोखिम बराबर नहीं है। बारिश के मौसम में नक्की झील के पास चाय-पकौड़े का बागान जरूर पढ़ें। छवि: एआई डिजाईन ट्रिप पर हमेशा साझीदार बैग, छाता और अच्छी पकड़ वाले उपभोक्ता साथ-साथ रहते हैं। तो देर किस बात की? कम बजट में अपना बैग पैक करें और सुरक्षित जगह पर आनंद लें। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)मानसून ट्रिप प्लान(टी)मानसून ट्रिप(टी)मानसून ट्रिप प्लानिंग(टी)परिवार यात्रा विचार(टी)बजट में युगल यात्रा(टी)सर्वोत्तम स्थान(टी)भारत में सर्वोत्तम स्थान(टी)मानसून में सर्वोत्तम स्थान

क्वांटस के प्रोजेक्ट सनराइज की पहली टेस्ट फ्लाइट ऑस्ट्रेलिया पहुंची:फ्रांस से 19 घंटे की उड़ान भरकर इतिहास बनाया; अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी डायरेक्ट फ्लाइट्स

क्वांटस के प्रोजेक्ट सनराइज की पहली टेस्ट फ्लाइट ऑस्ट्रेलिया पहुंची:फ्रांस से 19 घंटे की उड़ान भरकर इतिहास बनाया; अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी डायरेक्ट फ्लाइट्स

ऑस्ट्रेलियाई एयरलाइन क्वांटस के विमान ने सबसे लंबी दूरी तय करने का रिकॉर्ड बनाया है। इस कॉमर्शियल एयरक्राफ्ट ने शुक्रवार 24 जुलाई की सुबह ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में लैंडिंग की। 19 घंटे 13 मिनट में तय किया 17,000 किमी का सफर विमान ने फ्रांस के टूलूज शहर से स्थानीय समयानुसार गुरुवार सुबह 7:33 बजे उड़ान भरी थी। 19 घंटे और 13 मिनट का लंबा सफर तय करके इसने मेलबर्न में टचडाउन किया। खास फ्यूल सिस्टम की जांच: 20,000 लीटर का एक्स्ट्रा टैंक अक्टूबर 2027 से सिडनी-लंदन और न्यू यॉर्क रूट की शुरुआत क्वांटस ने साल 2017 में पहली बार ‘प्रोजेक्ट सनराइज’ का ऐलान किया था और 2022 में एयरबस को 12 कस्टमाइज्ड A350-1000ULR एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया था। पहले विमान की डिलीवरी इसी साल होनी थी, लेकिन अब इसमें देरी हुई है और पहला विमान अप्रैल 2027 में मिलेगा। इसके बाद बाकी 11 विमान अगले ढाई सालों में डिलीवर किए जाएंगे। प्रोजेक्ट सनराइज का पहला कॉमर्शियल रूट सिडनी-लंदन होगा। टिकटों की बिक्री फरवरी में शुरू होगी और उड़ानें अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी। सिडनी-न्यू यॉर्क रूट भी 2027 के आखिरी महीनों में शुरू होने की उम्मीद है। प्रत्येक रूट पर रोजाना सर्विस के लिए क्वांटस को 3 एयरक्राफ्ट की जरूरत होगी। मेलबर्न को कब मिलेगी नॉन-स्टॉप फ्लाइट? भले ही टेस्ट फ्लाइट मेलबर्न में उतरी है, लेकिन मेलबर्न से लंदन या न्यू यॉर्क के लिए सीधी फ्लाइट कब शुरू होगी, इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं है। क्वांटस की सीईओ वैनेसा हडसन ने बताया कि सिडनी रूट शुरू होने के बाद ही मेलबर्न पर चर्चा की जाएगी। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) रॉब मार्कोलिना ने बताया कि बाजार का बड़ा आकार होने के कारण सिडनी को मेलबर्न के मुकाबले प्राथमिकता दी गई है। क्वांटस का इरादा पहले 6 विमानों के बाद आने वाले एयरक्राफ्ट्स को पर्थ-लंदन और ऑकलैंड-न्यू यॉर्क जैसे मौजूदा रूट्स पर तैनात करने का है। इससे पुराने बोइंग 787 विमान फ्री होंगे, जिन्हें शिकागो, कनाडा, दक्षिण अमेरिका या पर्थ से एथेंस व अफ्रीका जैसे नए रूट्स पर लगाया जा सकेगा। नॉर्थ पोल वाला अनोखा रूट: हवाओं से बचकर दूरी बचेगी क्वांटस के चीफ टेक्निकल पायलट एलेक्स पासेरिनी ने बताया कि सिडनी-लंदन नॉन-स्टॉप फ्लाइट के लिए एक अनोखा ‘नॉर्थ पोलर फ्लाइट पाथ’ इस्तेमाल किया जाएगा। लगभग 20% उड़ानों में, खासकर उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में, इसी रूट का उपयोग होगा। दूरी के हिसाब से यह लंबा लग सकता है, लेकिन साल के खास समय में तेज हवाओं से बचने और कम एयर ट्रैफिक के कारण यह रूट असल में सबसे तेज साबित होता है। इसमें विमान नॉर्थ पैसिफिक, अलास्का, ग्रीनलैंड और आइसलैंड के ऊपर से गुजरते हुए उत्तर दिशा से लंदन में प्रवेश करेगा। क्वांटस की प्लानिंग के मुताबिक, सिडनी से लंदन की सबसे तेज उड़ान 19 घंटे 25 मिनट और सबसे धीमी 20 घंटे 55 मिनट की होगी। वहीं लंदन से सिडनी की उड़ान 18 से 20 घंटे के बीच तेज रहेगी। 12 घंटे अंधेरा रहेगा: जेट लेग से बचाने के लिए स्पेशल लाइट्स और खाना इस यात्रा के दौरान यात्री 9 से 11 टाइम जोन पार करेंगे (न्यू यॉर्क रूट पर 14 से 16 टाइम जोन)। 21 घंटे तक लगातार प्लेन में रहने से यात्रियों को नींद की कमी, थकान, जेट लेग और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे निपटने के लिए सिडनी यूनिवर्सिटी के चार्ल्स पर्किन्स सेंटर के प्रोफेसर पीटर सिस्टुली की मदद ली गई है। उन्होंने बताया कि सही समय पर खाना और लाइटिंग का सही इस्तेमाल बॉडी क्लॉक को एडजस्ट करने में बहुत मददगार होता है। क्या है क्वांटस का ‘प्रोजेक्ट सनराइज’? ‘प्रोजेक्ट सनराइज’ ऑस्ट्रेलियाई एयरलाइन क्वांटस की एक ऐतिहासिक योजना है, जिसका मकसद दुनिया के किसी भी कोने को ऑस्ट्रेलिया से सीधे (नॉन-स्टॉप) जोड़ना है। इसका नाम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उड़ने वाली उन गुप्त उड़ानों पर रखा गया है, जो इतने लंबे समय तक हवा में रहती थीं कि यात्री अपनी यात्रा के दौरान दो बार सनराइज देखते थे। इस प्रोजेक्ट के तहत सिडनी से लंदन (19+ घंटे) और सिडनी से न्यू यॉर्क की सीधी उड़ानें शुरू की जा रही हैं।

क्वांटस के प्रोजेक्ट सनराइज की पहली टेस्ट फ्लाइट ऑस्ट्रेलिया पहुंची:फ्रांस से 19 घंटे की उड़ान भरकर इतिहास बनाया; अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी डायरेक्ट फ्लाइट्स

क्वांटस के प्रोजेक्ट सनराइज की पहली टेस्ट फ्लाइट ऑस्ट्रेलिया पहुंची:फ्रांस से 19 घंटे की उड़ान भरकर इतिहास बनाया; अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी डायरेक्ट फ्लाइट्स

ऑस्ट्रेलियाई एयरलाइन क्वांटस के विमान ने सबसे लंबी दूरी तय करने का रिकॉर्ड बनाया है। इस कॉमर्शियल एयरक्राफ्ट ने शुक्रवार 24 जुलाई की सुबह ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में लैंडिंग की। 19 घंटे 13 मिनट में तय किया 17,000 किमी का सफर विमान ने फ्रांस के टूलूज शहर से स्थानीय समयानुसार गुरुवार सुबह 7:33 बजे उड़ान भरी थी। 19 घंटे और 13 मिनट का लंबा सफर तय करके इसने मेलबर्न में टचडाउन किया। खास फ्यूल सिस्टम की जांच: 20,000 लीटर का एक्स्ट्रा टैंक अक्टूबर 2027 से सिडनी-लंदन और न्यू यॉर्क रूट की शुरुआत क्वांटस ने साल 2017 में पहली बार ‘प्रोजेक्ट सनराइज’ का ऐलान किया था और 2022 में एयरबस को 12 कस्टमाइज्ड A350-1000ULR एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया था। पहले विमान की डिलीवरी इसी साल होनी थी, लेकिन अब इसमें देरी हुई है और पहला विमान अप्रैल 2027 में मिलेगा। इसके बाद बाकी 11 विमान अगले ढाई सालों में डिलीवर किए जाएंगे। प्रोजेक्ट सनराइज का पहला कॉमर्शियल रूट सिडनी-लंदन होगा। टिकटों की बिक्री फरवरी में शुरू होगी और उड़ानें अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी। सिडनी-न्यू यॉर्क रूट भी 2027 के आखिरी महीनों में शुरू होने की उम्मीद है। प्रत्येक रूट पर रोजाना सर्विस के लिए क्वांटस को 3 एयरक्राफ्ट की जरूरत होगी। मेलबर्न को कब मिलेगी नॉन-स्टॉप फ्लाइट? भले ही टेस्ट फ्लाइट मेलबर्न में उतरी है, लेकिन मेलबर्न से लंदन या न्यू यॉर्क के लिए सीधी फ्लाइट कब शुरू होगी, इस पर फिलहाल कोई स्पष्ट समयसीमा तय नहीं है। क्वांटस की सीईओ वैनेसा हडसन ने बताया कि सिडनी रूट शुरू होने के बाद ही मेलबर्न पर चर्चा की जाएगी। कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) रॉब मार्कोलिना ने बताया कि बाजार का बड़ा आकार होने के कारण सिडनी को मेलबर्न के मुकाबले प्राथमिकता दी गई है। क्वांटस का इरादा पहले 6 विमानों के बाद आने वाले एयरक्राफ्ट्स को पर्थ-लंदन और ऑकलैंड-न्यू यॉर्क जैसे मौजूदा रूट्स पर तैनात करने का है। इससे पुराने बोइंग 787 विमान फ्री होंगे, जिन्हें शिकागो, कनाडा, दक्षिण अमेरिका या पर्थ से एथेंस व अफ्रीका जैसे नए रूट्स पर लगाया जा सकेगा। नॉर्थ पोल वाला अनोखा रूट: हवाओं से बचकर दूरी बचेगी क्वांटस के चीफ टेक्निकल पायलट एलेक्स पासेरिनी ने बताया कि सिडनी-लंदन नॉन-स्टॉप फ्लाइट के लिए एक अनोखा ‘नॉर्थ पोलर फ्लाइट पाथ’ इस्तेमाल किया जाएगा। लगभग 20% उड़ानों में, खासकर उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में, इसी रूट का उपयोग होगा। दूरी के हिसाब से यह लंबा लग सकता है, लेकिन साल के खास समय में तेज हवाओं से बचने और कम एयर ट्रैफिक के कारण यह रूट असल में सबसे तेज साबित होता है। इसमें विमान नॉर्थ पैसिफिक, अलास्का, ग्रीनलैंड और आइसलैंड के ऊपर से गुजरते हुए उत्तर दिशा से लंदन में प्रवेश करेगा। क्वांटस की प्लानिंग के मुताबिक, सिडनी से लंदन की सबसे तेज उड़ान 19 घंटे 25 मिनट और सबसे धीमी 20 घंटे 55 मिनट की होगी। वहीं लंदन से सिडनी की उड़ान 18 से 20 घंटे के बीच तेज रहेगी। 12 घंटे अंधेरा रहेगा: जेट लेग से बचाने के लिए स्पेशल लाइट्स और खाना इस यात्रा के दौरान यात्री 9 से 11 टाइम जोन पार करेंगे (न्यू यॉर्क रूट पर 14 से 16 टाइम जोन)। 21 घंटे तक लगातार प्लेन में रहने से यात्रियों को नींद की कमी, थकान, जेट लेग और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इससे निपटने के लिए सिडनी यूनिवर्सिटी के चार्ल्स पर्किन्स सेंटर के प्रोफेसर पीटर सिस्टुली की मदद ली गई है। उन्होंने बताया कि सही समय पर खाना और लाइटिंग का सही इस्तेमाल बॉडी क्लॉक को एडजस्ट करने में बहुत मददगार होता है। क्या है क्वांटस का ‘प्रोजेक्ट सनराइज’? ‘प्रोजेक्ट सनराइज’ ऑस्ट्रेलियाई एयरलाइन क्वांटस की एक ऐतिहासिक योजना है, जिसका मकसद दुनिया के किसी भी कोने को ऑस्ट्रेलिया से सीधे (नॉन-स्टॉप) जोड़ना है। इसका नाम द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उड़ने वाली उन गुप्त उड़ानों पर रखा गया है, जो इतने लंबे समय तक हवा में रहती थीं कि यात्री अपनी यात्रा के दौरान दो बार सनराइज देखते थे। इस प्रोजेक्ट के तहत सिडनी से लंदन (19+ घंटे) और सिडनी से न्यू यॉर्क की सीधी उड़ानें शुरू की जा रही हैं। ये खबर भी पढ़ें… खुद की एयरलाइंस शुरू नहीं करेगा अडाणी ग्रुप: अभी एयरपोर्ट ऑपरेशन संभालता है ग्रुप, नियमों में ढील देने की बात चल रही थी अडाणी ग्रुप ने उन सभी खबरों और अटकलों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि ग्रुप खुद की एयरलाइन शुरू करने की योजना बना रहा है। कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर इन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद बताया है। पूरी खबर पढ़ें…

चांदी आज ₹2,924 सस्ती, ₹2.19 लाख पर आई:सोना ₹1,848 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया; चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.67 लाख सस्ती हुई

चांदी आज ₹2,924 सस्ती, ₹2.19 लाख पर आई:सोना ₹1,848 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया; चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.67 लाख सस्ती हुई

सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 24 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,924 रुपए घटकर 2.19 लाख रुपए पर आ गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,848 रुपए गिरकर 1.42 लाख रुपए पर आ गया है। एक दिन पहले चांदी 2.22 लाख रुपए और सोना 1.44 लाख रुपए पर था। ऑल टाइम हाई से 1.67 लाख रुपए गिरी चांदी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 34,000 रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी की कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक चांदी 1.67 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोने-चांदी के दाम में आगे तेजी देखने को मिल सकती है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं। हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है।