Saturday, 12 Sep 2026 | 01:15 PM

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मूवी रिव्यू- हैवान:अक्षय-सैफ की इस टक्कर में आंखों से ज्यादा दिमाग का खेल, जानिए प्रियदर्शन ने कितना चौंकाया और क्या रह गई कमी

मूवी रिव्यू- हैवान:अक्षय-सैफ की इस टक्कर में आंखों से ज्यादा दिमाग का खेल, जानिए प्रियदर्शन ने कितना चौंकाया और क्या रह गई कमी

कास्ट- अक्षय कुमार, सैफ अली खान डायरेक्टर- प्रियदर्शन ड्यूरेशन- 2 घंटे 44 मिनट रेटिंग- 3/5 प्रियदर्शन, अक्षय कुमार और सैफ अली खान, नाम सुनकर ही लगता है कि मामला कुछ बड़ा होने वाला है। ऊपर से कहानी में एक ऐसा नेत्रहीन किरदार है, जिसकी आंखें भले दुनिया नहीं देख पातीं, लेकिन उसके कान, नाक और दिमाग कमाल का काम करते हैं। सामने है अक्षय कुमार का खूंखार परशुराम का किरदार, जो बदले की आग में जल रहा है। यानी एक तरफ ऐसा आदमी जिसे दिखाई नहीं देता और दूसरी तरफ ऐसा आदमी जिसे रोकना आसान नहीं। ‘हैवान’ का यह मुकाबला कागज पर काफी दिलचस्प है और फिल्म कई जगह इस दिलचस्पी को पर्दे पर भी उतारती है। बस दिक्कत यह है कि फिल्म अपने असली खेल तक पहुंचने में थोड़ा ज्यादा वक्त लेती है। कैसी है फिल्म की कहानी? श्याम राणे जन्म से नेत्रहीन है। परिवार की जिम्मेदारियां उठाते हुए वह मुंबई की एक बड़ी बिल्डिंग में काम करता है। आंखों की रोशनी नहीं है, लेकिन आवाज, खुशबू और स्पर्श से आसपास की दुनिया को समझने की उसकी क्षमता असाधारण है। दूसरी तरफ है परशुराम गोखले। जेल से बाहर आने के बाद उसके पास गुस्सा है, पुराना हिसाब है और बदला लेने की पूरी तैयारी। श्याम की जिंदगी में एक बच्ची से जुड़ा ऐसा राज आता है, जो उसे सीधे परशुराम के निशाने पर ला खड़ा करता है। इसके बाद शुरू होता है असली बिल्ली-चूहे का खेल, जहां श्याम को उस दुश्मन से बचना है जिसे वह देख नहीं सकता, और परशुराम को उस आदमी से निपटना है जो उसकी हर आहट सुन सकता है। कहानी का आइडिया मजेदार है और खासकर श्याम के सेंसेस को जिस तरह इस्तेमाल किया गया है, उसमें काफी गुंजाइश है। लेकिन फिल्म को वहां तक पहुंचने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है। कहानी में दम है, बस रफ्तार थोड़ी और तेज होती तो मजा दोगुना हो जाता। कैसी है स्टारकास्ट की एक्टिंग? सैफ अली खान श्याम के किरदार में काफी सहज नजर आते हैं। उन्होंने नेत्रहीन किरदार को बेचारा बनाने की गलती नहीं की। श्याम शांत है, जिम्मेदार है और जरूरत पड़ने पर खतरनाक भी हो सकता है। सैफ की अंडरप्ले की गई एक्टिंग इस किरदार को विश्वसनीय बनाती है। अक्षय कुमार के लिए यह रोल अलग है। परशुराम में हीरो वाली चमक नहीं, बल्कि एक अजीब बेचैनी और गुस्सा है। अक्षय ने किरदार को पूरी एनर्जी के साथ निभाया है। हालांकि कुछ जगह उनका गुस्सा इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि डर पैदा होने के बजाय सीन थोड़ा ओवर-द-टॉप लगने लगता है। जिस ‘हैवान’ से खौफ पैदा होना चाहिए, वह हर बार उतना डरावना नहीं बन पाता। शारिब हाशमी पुलिस वाले के रोल में फिल्म के तनाव के बीच हंसी की खिड़की खोलते हैं और कई जगह खूब मजा देते हैं। बोमन ईरानी भरोसेमंद हैं। असरानी की मौजूदगी फिल्म में गर्माहट लाती है। सैयामी खेर और श्रिया पिलगांवकर को अच्छे कलाकार होने के बावजूद सीमित जगह मिली है। और मोहनलाल की झलक ‘ओप्पम’ देखने वालों के लिए खास तोहफा है। कैसा है डायरेक्शन और तकनीकी पक्ष? कॉमेडी के लिए मशहूर प्रियदर्शन यहां एक डार्क थ्रिलर लेकर आए हैं। उनका यह नया रंग देखने में अच्छा लगता है। फिल्म में माहौल बनाने की कोशिश साफ दिखाई देती है। स्क्रीनप्ले की सबसे बड़ी कमी इसकी रफ्तार है। कुछ हिस्से कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय उसे रोकते हुए लगते हैं। गाने और कुछ लंबे भावनात्मक हिस्से थ्रिलर की गति को तोड़ते हैं। जब फिल्म श्याम और परशुराम के बीच आमने-सामने का खेल शुरू करती है, तब इसका असर बेहतर होता है। श्याम की सुनने और सूंघने की क्षमता को कहानी में इस्तेमाल करना भी दिलचस्प है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म के मूड के साथ जाती है। मुंबई की ऊंची इमारतें, बंद गलियां और रात के दृश्य कहानी को जरूरी अंधेरा देते हैं। खासकर तनाव वाले सीन्स में कैमरा और साउंड मिलकर माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। बैकग्राउंड स्कोर भी फिल्म के मजबूत हिस्सों में है। कई जगह संगीत से ज्यादा आवाजें और खामोशी तनाव पैदा करती हैं, जो श्याम के किरदार को देखते हुए फिल्म की कहानी के लिए बिल्कुल सही चुनाव है। बस एडिटिंग टेबल पर थोड़ी और सख्ती होती तो फिल्म ज्यादा चुस्त हो सकती थी। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? प्रीतम का म्यूजिक फिल्म के मूड को सपोर्ट करता है, लेकिन कोई गाना ऐसा नहीं है जो फिल्म खत्म होने के बाद भी कानों में घूमता रहे। ‘मेरे हीरो हैं’ भावनात्मक हिस्सों में ठीक बैठता है और ‘रंगियारा’ थोड़ा हल्कापन देता है। लेकिन इस फिल्म में असली काम गानों से ज्यादा बैकग्राउंड स्कोर करता है। ‘ओप्पम’ का असर: पुरानी कहानी, नया तड़का ‘हैवान’ प्रियदर्शन की ही मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का हिंदी रूपांतरण है। मूल फिल्म में मोहनलाल ने नेत्रहीन श्याम जैसे किरदार को निभाया था। यहां सैफ अपनी अलग छाप छोड़ने की कोशिश करते हैं और काफी हद तक सफल भी होते हैं। हिंदी संस्करण में एक्शन, इमोशन, कॉमेडी और स्टारडम का मसाला थोड़ा ज्यादा है। यही इसे ‘ओप्पम’ से अलग बनाता है, लेकिन कभी-कभी यही मसाला थ्रिलर की कसावट कम भी करता है। फाइनल वर्डिक्टः फिल्म देखें या नहीं? ‘हैवान’ में आइडिया है, बड़े सितारे हैं और प्रियदर्शन का अलग अंदाज भी। सैफ का शांत श्याम और अक्षय का बेचैन परशुराम आमने-सामने आते हैं तो फिल्म में असली मजा शुरू होता है। समस्या सिर्फ इतनी है कि जिस थ्रिल के लिए दर्शक टिकट खरीदता है, फिल्म उसे थोड़ा इंतजार करवाकर देती है। अगर आपको डार्क थ्रिलर में थोड़ा मसाला, इमोशन और कॉमेडी पसंद है तो ‘हैवान’ आपको निराश नहीं करेगी। लेकिन अगर उम्मीद है कि फिल्म शुरू से आखिर तक सीट की पकड़ मजबूत रखेगी, तो मामला थोड़ा ढीला पड़ता है। कुल मिलाकर, ‘हैवान’ में काटने वाले दांत जरूर हैं, बस हमला थोड़ा देर से होता है।

बिपाशा बसु की प्रोटीन ड्रिंक में दिखे कीड़े:तुकाराम मुंढे से मांगी मदद, कहा- आप हमारी इकलौती उम्मीद हैं

बिपाशा बसु की प्रोटीन ड्रिंक में दिखे कीड़े:तुकाराम मुंढे से मांगी मदद, कहा- आप हमारी इकलौती उम्मीद हैं

एक्ट्रेस बिपाशा बसु को प्रोटीन पाउडर के नए खुले जार में छोटे-छोटे कीड़े मिले हैं। उन्होंने इसका वीडियो इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया। बिपाशा ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर तुकाराम मुंढे को टैग किया और मामले में दखल देने की अपील की। बिपाशा ने लिखा ड्रिंक के वीडियो के साथ लिखा है, ‘तुकाराम मुंढे आप ही हमारी एकमात्र उम्मीद हैं। ताकि हम जो भी चीजें खरीदें, उनमें खराब या मिलावटी सामान न मिले।’ वीडियो में बिपाशा ने अपनी उंगली पर एक छोटा सा कीड़ा दिखाया। उन्होंने कहा, ‘इस आइसोप्योर में छोटे-छोटे कीड़े भरे हुए हैं। बहुत ही छोटे कीड़े। यह नया डिब्बा है, जिसे हमने अभी खोला है।’ इसके बाद उन्होंने उंगली पर कीड़ा दिखाते हुए कहा, ‘ये रहे कीड़े, इसमें ऐसे ही कीड़े भरे हुए हैं।’ महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर लोगों का ध्यान बढ़ रहा है। तुकाराम मुंढे राज्यभर में फूड बिजनेस के खिलाफ कई तरह की जांच और कार्रवाई कर रहे हैं। श्वेता तिवारी ने डिलीवरी में कॉकरोच आने पर मांगी थी तुकाराम मुंढे से मदद श्वेता तिवारी ने हाल ही में ऑनलाइन एनर्जी ड्रिंक ऑर्डर की थी। जब ऑर्डर खोला गया, तो उसमें कॉकरोच मिलने से एक्ट्रेस घबरा गईं। एक्ट्रेस ने वीडियो जारी कर महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी कार्रवाई से चर्चा में बने हुए FDA ऑफिसर तुकाराम मुंढे से सवाल किया है। ऑफिशियल इंस्टाग्राम से शेयर किए गए वीडियो में श्वेता तिवारी ने कहा, ‘हमने इंस्टामार्ट से रेडबुल मंगवाया। लेकिन इंस्टामार्ट से हमारे घर में ये (कॉकरोच) भी आया। कॉकरोच पूरे घर में भाग रहा है।’ दूसरे वीडियो में श्वेता ने कॉकरोच दिखाया और कहा, ‘क्या हमें तुकाराम मुंढे जी को टैग करना चाहिए। मुंढे जी ये हमारे घर में इंस्टामार्ट से कॉकरोच आ रहे हैं। आप कहां हैं, ध्यान दीजिए।’ प्रीति जिंटा और ट्विंकल खन्ना ने भी बात रखी हाल ही में मुंबई में एक्ट्रेस प्रीति जिंटा को काली टी-शर्ट पहने देखा गया। इस टी-शर्ट पर ‘टीम तुकाराम मुंढे’ लिखा था। उनके इस कपड़े को अधिकारी के फूड सेफ्टी अभियान के समर्थन के तौर पर देखा गया। मुंढे की इंस्पेक्शन पर हो रही चर्चा को लेकर ट्विंकल खन्ना ने भी अपनी बात रखी थी। एक पोस्ट में एक्ट्रेस से लेखिका बनीं ट्विंकल ने लिखा, ‘क्या किसी सरकारी अधिकारी को बस अपना काम करते हुए देखना इतनी अनोखी बात है कि यह खबर बन गई है?’ सलमान खान ने भी दोस्त की तुकाराम मुंढे के नाम से फिरकी ली सलमान खान ने अपनी दोस्त सृष्टि साहनी के मुंबई के बांद्रा में खुले नए कैफे ‘द टक शॉप एट सेवियोज’ का वीडियो शेयर किया। साथ ही सलमान ने दोस्त को कैफे की हाइजीन बनाए रखने की मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी। सलमान ने लिखा, “सृष्टि मेरी कॉफी रिफिल करना प्लीज। कीमत मत बढ़ाना, क्वालिटी मेंटेन करना। हाइजीन मेंटेन रखना, वरना मैं HIM को भेज दूंगा और काम हो जाएगा, बहन।” सलमान ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन “HIM” का इशारा महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ओर माना जा रहा है। यह बात ऐसे समय में आई है, जब महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर कार्रवाई तेज है।

बिपाशा बसु की प्रोटीन ड्रिंक में दिखे कीड़े:तुकाराम मुंढे से मांगी मदद, कहा- आप हमारी इकलौती उम्मीद हैं

बिपाशा बसु की प्रोटीन ड्रिंक में दिखे कीड़े:तुकाराम मुंढे से मांगी मदद, कहा- आप हमारी इकलौती उम्मीद हैं

एक्ट्रेस बिपाशा बसु को प्रोटीन पाउडर के नए खुले जार में छोटे-छोटे कीड़े मिले हैं। उन्होंने इसका वीडियो इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किया। बिपाशा ने महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर तुकाराम मुंढे को टैग किया और मामले में दखल देने की अपील की। बिपाशा ने लिखा ड्रिंक के वीडियो के साथ लिखा है, ‘तुकाराम मुंढे आप ही हमारी एकमात्र उम्मीद हैं। ताकि हम जो भी चीजें खरीदें, उनमें खराब या मिलावटी सामान न मिले।’ वीडियो में बिपाशा ने अपनी उंगली पर एक छोटा सा कीड़ा दिखाया। उन्होंने कहा, ‘इस आइसोप्योर में छोटे-छोटे कीड़े भरे हुए हैं। बहुत ही छोटे कीड़े। यह नया डिब्बा है, जिसे हमने अभी खोला है।’ इसके बाद उन्होंने उंगली पर कीड़ा दिखाते हुए कहा, ‘ये रहे कीड़े, इसमें ऐसे ही कीड़े भरे हुए हैं।’ महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर लोगों का ध्यान बढ़ रहा है। तुकाराम मुंढे राज्यभर में फूड बिजनेस के खिलाफ कई तरह की जांच और कार्रवाई कर रहे हैं। श्वेता तिवारी ने डिलीवरी में कॉकरोच आने पर मांगी थी तुकाराम मुंढे से मदद श्वेता तिवारी ने हाल ही में ऑनलाइन एनर्जी ड्रिंक ऑर्डर की थी। जब ऑर्डर खोला गया, तो उसमें कॉकरोच मिलने से एक्ट्रेस घबरा गईं। एक्ट्रेस ने वीडियो जारी कर महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी कार्रवाई से चर्चा में बने हुए FDA ऑफिसर तुकाराम मुंढे से सवाल किया है। ऑफिशियल इंस्टाग्राम से शेयर किए गए वीडियो में श्वेता तिवारी ने कहा, ‘हमने इंस्टामार्ट से रेडबुल मंगवाया। लेकिन इंस्टामार्ट से हमारे घर में ये (कॉकरोच) भी आया। कॉकरोच पूरे घर में भाग रहा है।’ दूसरे वीडियो में श्वेता ने कॉकरोच दिखाया और कहा, ‘क्या हमें तुकाराम मुंढे जी को टैग करना चाहिए। मुंढे जी ये हमारे घर में इंस्टामार्ट से कॉकरोच आ रहे हैं। आप कहां हैं, ध्यान दीजिए।’ प्रीति जिंटा और ट्विंकल खन्ना ने भी बात रखी हाल ही में मुंबई में एक्ट्रेस प्रीति जिंटा को काली टी-शर्ट पहने देखा गया। इस टी-शर्ट पर ‘टीम तुकाराम मुंढे’ लिखा था। उनके इस कपड़े को अधिकारी के फूड सेफ्टी अभियान के समर्थन के तौर पर देखा गया। मुंढे की इंस्पेक्शन पर हो रही चर्चा को लेकर ट्विंकल खन्ना ने भी अपनी बात रखी थी। एक पोस्ट में एक्ट्रेस से लेखिका बनीं ट्विंकल ने लिखा, ‘क्या किसी सरकारी अधिकारी को बस अपना काम करते हुए देखना इतनी अनोखी बात है कि यह खबर बन गई है?’ सलमान खान ने भी दोस्त की तुकाराम मुंढे के नाम से फिरकी ली सलमान खान ने अपनी दोस्त सृष्टि साहनी के मुंबई के बांद्रा में खुले नए कैफे ‘द टक शॉप एट सेवियोज’ का वीडियो शेयर किया। साथ ही सलमान ने दोस्त को कैफे की हाइजीन बनाए रखने की मजाकिया अंदाज में चेतावनी दी। सलमान ने लिखा, “सृष्टि मेरी कॉफी रिफिल करना प्लीज। कीमत मत बढ़ाना, क्वालिटी मेंटेन करना। हाइजीन मेंटेन रखना, वरना मैं HIM को भेज दूंगा और काम हो जाएगा, बहन।” सलमान ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन “HIM” का इशारा महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंढे की ओर माना जा रहा है। यह बात ऐसे समय में आई है, जब महाराष्ट्र में फूड सेफ्टी को लेकर कार्रवाई तेज है।

फैसलाबाद एयरपोर्ट पर रोके गए 104 सिख श्रद्धालु:अमृतसर-दिल्ली जाने को PAK से भारत आ रहे थे; वीजा वैलिड, महंगी टिकटें खरीदी थीं

फैसलाबाद एयरपोर्ट पर रोके गए 104 सिख श्रद्धालु:अमृतसर-दिल्ली जाने को PAK से भारत आ रहे थे; वीजा वैलिड, महंगी टिकटें खरीदी थीं

पाकिस्तान से भारत स्थित सिख गुरुधामों के दर्शन के लिए आ रहे 104 श्रद्धालुओं को फैसलाबाद एयरपोर्ट पर करीब 12 घंटे से रोककर रखा गया है। श्रद्धालुओं का आरोप है कि भारत के इस्लामाबाद स्थित दूतावास की ओर से उन्हें वीजा जारी किए गए थे। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी(FIA) ने उन्हें एयरपोर्ट से आगे जाने की अनुमति नहीं दी। इमीग्रेशन अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से पाकिस्तान सरकार, गृह विभाग और विदेश विभाग की एनओसी पेश करने को कहा। श्रद्धालुओं के मुताबिक, पाकिस्तान ने वाघा बॉर्डर से भारत जाने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद उन्होंने हवाई यात्रा का फैसला किया। इसके लिए महंगी टिकटें खरीदीं और समय पर फैसलाबाद एयरपोर्ट पहुंच गए। हालांकि, वहां पहुंचने के बाद उन्हें रोक दिया गया। श्रद्धालुओं का कहना है कि अगर एनओसी जरूरी थी, तो उन्हें पहले ही इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई और टिकटें क्यों बेची गईं। वाघा बॉर्डर से रास्ता नहीं मिला, इसलिए हवाई सफर चुना श्रद्धालुओं का कहना है कि वे पहले वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत आने वाले थे, लेकिन उन्हें जमीनी रूट से जाने की अनुमति नहीं मिली। इस फैसले के बाद उन्होंने हवाई मार्ग से भारत पहुंचने की तैयारी की और महंगी टिकटें खरीदीं। इससे पहले भी पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं को वाघा-अटारी के रास्ते भारत आने की अनुमति नहीं दिए जाने का मामला सामने आया था। इस फैसले पर पूर्व राज्यसभा सांसद और पद्म भूषण से सम्मानित तरलोचन सिंह ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त को पत्र लिखकर भूमि मार्ग खोलने की अपील की थी। रातभर एयरपोर्ट पर इंतजार श्रद्धालुओं के मुताबिक, उन्हें रात करीब 10 बजे से सुबह 7 बजे तक एयरपोर्ट पर परेशानी झेलनी पड़ी। यात्रा की अनुमति नहीं मिलने के बाद जत्थे के सदस्य एयरपोर्ट पर ही बैठकर पाठ और गुरु साहिब का जाप करते रहे। श्रद्धालुओं ने कहा कि टिकट खरीदने और यात्रा की तैयारी करने के बाद एयरपोर्ट पर रोक दिया जाना उनके लिए बेहद परेशान करने वाला है। उनका दावा है कि टिकट रद्द होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी हुआ है। सिख युवक ने वीजा दिखाकर उठाए सवाल एयरपोर्ट पर मौजूद एक सिख युवक ने अपना वीजा दिखाते हुए इमीग्रेशन प्रक्रिया पर सवाल उठाया। उसका कहना था कि उनके पास भारत का वीजा मौजूद है और उन्हें अतिरिक्त NOC की जरूरत के बारे में पहले कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उसने कहा कि अगर कोई सरकारी अनुमति जरूरी थी तो यात्रियों को टिकट खरीदने से पहले इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी। युवक ने राजनीतिक विवाद से धार्मिक यात्रा को अलग रखने की अपील भी की। हेमकुंड साहिब और गोल्डन टेंपल जाना था 104 श्रद्धालु भारत में श्री हेमकुंड साहिब, अमृतसर के श्री हरमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल), दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारों और पंजाब के अन्य प्रमुख गुरुधामों के दर्शन करने वाले थे। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य धार्मिक दर्शन था। श्रद्धालुओं का कहना है कि इसी उद्देश्य से उन्होंने भारत का वीजा लिया और यात्रा की पूरी तैयारी की। जत्थे के नेताओं ने भारत के सिख नेताओं से हस्तक्षेप मांगा उन्होंने भारत में सिख नेताओं से पाकिस्तान सरकार के सामने मामला उठाने और श्रद्धालुओं को भारत आने की अनुमति दिलाने की अपील की। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज, SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका से हस्तक्षेप की मांग की। NOC पर पाकिस्तान के आधिकारिक जवाब का इंतजार मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत का वीजा होने के बावजूद पाकिस्तानी इमीग्रेशन ने इन श्रद्धालुओं से किस नियम के तहत NOC मांगी। श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्हें ऐसी किसी अतिरिक्त अनुमति की जानकारी पहले नहीं दी गई। पाकिस्तान की ओर से इस विशेष मामले में NOC मांगने की विस्तृत वजह स्पष्ट नहीं की गई है। धामी बोले- सिख श्रद्धालुओं को रोकना दुर्भाग्यपूर्ण इस पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि श्रद्धालुओं को रोके जाने की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत सरकार से वीजा प्राप्त कर चुके इन सिख श्रद्धालुओं को वाघा सीमा के रास्ते भारत आने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। यदि किसी कारण से ऐसा नहीं हुआ, तो उन्हें हवाई मार्ग से भारत आने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। श्रद्धालुओं को रोकना उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।

मराठी बोलने से इनकार पर संजय दत्त की माफी:मंत्री को कॉल कर बोले- अच्छी मराठी आती है, मजाक था, महाराष्ट्र ने बहुत कुछ दिया, जानिए विवाद

मराठी बोलने से इनकार पर संजय दत्त की माफी:मंत्री को कॉल कर बोले- अच्छी मराठी आती है, मजाक था, महाराष्ट्र ने बहुत कुछ दिया, जानिए विवाद

बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त मराठी बोलने से इनकार करने पर विवादों में हैं। वह कुछ समय पहले दही हांडी प्रोग्राम में पहुंचे थे, जहां शिवसेना नेता (शिंदे गुट) और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बात करने कहा था। संजय ने इनकार कर दिया और कहा कि वो 6 साल तक जेल में रहकर भी मराठी नहीं सीख सके। संजय के बयान पर विवाद हो गया, जिसके बाद अब उन्होंने मंत्री प्रताप सरनाईक को कॉल कर माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें अच्छी मराठी आती है। गलत संदेश गया, तो माफी मांगता हूं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रताप सरनाईक एक बैठक में थे, तभी संजय दत्त का फोन आया। एक्टर ने बातचीत की शुरुआत मराठी में “प्रताप भाई, जय महाराष्ट्र” कहकर की। संजय दत्त ने सफाई देते हुए कहा कि ठाणे में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में उन्होंने यह बात मजाकिया अंदाज में कही थी। उन्होंने सरनाईक से कहा, “अगर मेरी बात से किसी की भावना आहत हुई हो या कोई गलत संदेश गया हो तो मैं माफी चाहता हूं। मेरा परिवार मुंबईकर है। मैं इसी मिट्टी में पला-बढ़ा हूं और महाराष्ट्र ने मुझे बहुत कुछ दिया है।” बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया फोन पर बातचीत के दौरान संजय दत्त ने शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के कठिन दौर में बालासाहेब ठाकरे मजबूती से उनके साथ खड़े रहे थे। संजय दत्त ने कहा कि वह बालासाहेब ठाकरे के प्रति हमेशा सम्मान रखते हैं। जानिए क्या है पूरा विवाद? संजय दत्त रविवार को मुंबई में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में पहुंचे थे। यह कार्यक्रम ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आयोजित किया था। संजय दत्त मंच पर हिंदी में बोल रहे थे। इस पर प्रताप सरनाईक ने कहा, “आजकल मैं सभी लोगों को मराठी सिखा रहा हूं। तो मैंने सोचा कि क्यों न हम सब संजय दत्त से मराठी में बात करवाएं। वह हिंदी में बात करते हैं, लेकिन हम सभी मराठी समझते हैं।” मंत्री की बात पर मंच पर मौजूद लोगों के चेहरे पर हंसी दिखाई दी। इसके बाद संजय दत्त ने माइक लिया और पहले “हर हर महादेव” के नारे लगाए। फिर उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “प्रताप भाई, मैं 6 साल जेल में रहा, येरवडा में। तब भी मराठी नहीं सीख पाया। मैंने थोड़ी सी सीखी थी।” बीजेपी विधायक ने शिवसेना मंत्री पर निशाना साधा संजय दत्त के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। नरेंद्र मेहता ने कहा, “अगर कोई कलाकार मराठी नहीं जानता तो उस पर आप हंसते हैं, लेकिन दूसरी तरफ आम रिक्शा चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव बनाया जाता है। यह कैसा न्याय है? एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया। वहां डमी मंत्री की जरूरत है, इसलिए वे हैं।” मराठी न बोलने पर सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान ही किसी मंत्री को इस तरह मना कर सकते हैं और फिर भी मुस्कुरा सकते हैं।” एक यूजर ने लिखा, “मतलब साफ है, मराठी भाषा का अनिवार्य होना सिर्फ शहर के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी वालों के लिए है, बड़े लोगों के लिए नहीं।” एक ने कहा, “विडंबना देखिए, काश शहर के ऑटो वाले भी ऐसा कह पाते और भारी जुर्माने से बच पाते।” कुछ लोग मराठी न बोलने पर संजय दत्त को ट्रोल भी कर रहे हैं। एक ने कहा, “आप पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहे, फिर भी आपको मराठी नहीं आती। यह शर्मनाक है।” संजय दत्त के वो बयान और डायलॉग, जिनसे हुआ विवाद 1. 2009: चुनावी सभा में TADA को लेकर बयान 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान संजय दत्त समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे। उत्तर प्रदेश के मऊ में एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने अपने पिता सुनील दत्त और मां नरगिस का जिक्र करते हुए 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर बात की। संजय दत्त ने कहा था कि उनकी मां मुस्लिम थीं और इसी वजह से उनके परिवार को परेशान किया गया। उन्होंने अपने खिलाफ TADA के तहत हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। इस बयान को लेकर विवाद हुआ और चुनाव आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया। संजय दत्त के बयान को चुनाव प्रचार में सांप्रदायिक संदर्भ के तौर पर देखा गया। 2. 2016: सलमान खान को बताया ‘एरोगेंट’ संजय दत्त और सलमान खान की दोस्ती बॉलीवुड की चर्चित दोस्तियों में रही है। ऐसे में 2016 में एक कार्यक्रम के दौरान जब संजय दत्त से सलमान खान को एक शब्द में बयान करने के लिए कहा गया और उन्होंने ‘एरोगेंट’ कहा, तो यह जवाब सुर्खियों में आ गया। मीडिया में दोनों के बीच अनबन की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, संजय दत्त ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनके और सलमान के बीच कोई झगड़ा नहीं है। 3. 2026: ‘धुरंधर’ के डायलॉग को लेकर विवाद फिल्म ‘धुरंधर में संजय दत्त के किरदार एसपी चौधरी असलम के एक डायलॉग पर बलोच समुदाय ने आपत्ति जताई। विवाद के बाद थिएटर रिलीज के वर्जन में उस हिस्से को म्यूट किया गया।

मराठी बोलने से इनकार पर संजय दत्त की माफी:मंत्री को कॉल कर बोले- अच्छी मराठी आती है, मजाक था, महाराष्ट्र ने बहुत कुछ दिया, जानिए विवाद

मराठी बोलने से इनकार पर संजय दत्त की माफी:मंत्री को कॉल कर बोले- अच्छी मराठी आती है, मजाक था, महाराष्ट्र ने बहुत कुछ दिया, जानिए विवाद

बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त मराठी बोलने से इनकार करने पर विवादों में हैं। वह कुछ समय पहले दही हांडी प्रोग्राम में पहुंचे थे, जहां शिवसेना नेता (शिंदे गुट) और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बात करने कहा था। संजय ने इनकार कर दिया और कहा कि वो 6 साल तक जेल में रहकर भी मराठी नहीं सीख सके। संजय के बयान पर विवाद हो गया, जिसके बाद अब उन्होंने मंत्री प्रताप सरनाईक को कॉल कर माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि उन्हें अच्छी मराठी आती है। गलत संदेश गया, तो माफी मांगता हूं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रताप सरनाईक एक बैठक में थे, तभी संजय दत्त का फोन आया। एक्टर ने बातचीत की शुरुआत मराठी में “प्रताप भाई, जय महाराष्ट्र” कहकर की। संजय दत्त ने सफाई देते हुए कहा कि ठाणे में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में उन्होंने यह बात मजाकिया अंदाज में कही थी। उन्होंने सरनाईक से कहा, “अगर मेरी बात से किसी की भावना आहत हुई हो या कोई गलत संदेश गया हो तो मैं माफी चाहता हूं। मेरा परिवार मुंबईकर है। मैं इसी मिट्टी में पला-बढ़ा हूं और महाराष्ट्र ने मुझे बहुत कुछ दिया है।” बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया फोन पर बातचीत के दौरान संजय दत्त ने शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के कठिन दौर में बालासाहेब ठाकरे मजबूती से उनके साथ खड़े रहे थे। संजय दत्त ने कहा कि वह बालासाहेब ठाकरे के प्रति हमेशा सम्मान रखते हैं। जानिए क्या है पूरा विवाद? संजय दत्त रविवार को मुंबई में आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में पहुंचे थे। यह कार्यक्रम ठाणे में शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आयोजित किया था। संजय दत्त मंच पर हिंदी में बोल रहे थे। इस पर प्रताप सरनाईक ने कहा, “आजकल मैं सभी लोगों को मराठी सिखा रहा हूं। तो मैंने सोचा कि क्यों न हम सब संजय दत्त से मराठी में बात करवाएं। वह हिंदी में बात करते हैं, लेकिन हम सभी मराठी समझते हैं।” मंत्री की बात पर मंच पर मौजूद लोगों के चेहरे पर हंसी दिखाई दी। इसके बाद संजय दत्त ने माइक लिया और पहले “हर हर महादेव” के नारे लगाए। फिर उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “प्रताप भाई, मैं 6 साल जेल में रहा, येरवडा में। तब भी मराठी नहीं सीख पाया। मैंने थोड़ी सी सीखी थी।” बीजेपी विधायक ने शिवसेना मंत्री पर निशाना साधा संजय दत्त के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक नरेंद्र मेहता ने प्रताप सरनाईक पर सवाल उठाए। नरेंद्र मेहता ने कहा, “अगर कोई कलाकार मराठी नहीं जानता तो उस पर आप हंसते हैं, लेकिन दूसरी तरफ आम रिक्शा चालकों पर मराठी भाषा को लेकर दबाव बनाया जाता है। यह कैसा न्याय है? एकनाथ शिंदे ने उन्हें कभी कुछ करने नहीं दिया। वहां डमी मंत्री की जरूरत है, इसलिए वे हैं।” मराठी न बोलने पर सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल संजय दत्त के मराठी बोलने से इनकार के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने लिखा, “सिर्फ संजय दत्त या सलमान खान ही किसी मंत्री को इस तरह मना कर सकते हैं और फिर भी मुस्कुरा सकते हैं।” एक यूजर ने लिखा, “मतलब साफ है, मराठी भाषा का अनिवार्य होना सिर्फ शहर के ऑटो-रिक्शा और टैक्सी वालों के लिए है, बड़े लोगों के लिए नहीं।” एक ने कहा, “विडंबना देखिए, काश शहर के ऑटो वाले भी ऐसा कह पाते और भारी जुर्माने से बच पाते।” कुछ लोग मराठी न बोलने पर संजय दत्त को ट्रोल भी कर रहे हैं। एक ने कहा, “आप पूरी जिंदगी महाराष्ट्र में रहे, फिर भी आपको मराठी नहीं आती। यह शर्मनाक है।” संजय दत्त के वो बयान और डायलॉग, जिनसे हुआ विवाद 1. 2009: चुनावी सभा में TADA को लेकर बयान 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान संजय दत्त समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे। उत्तर प्रदेश के मऊ में एक चुनावी सभा के दौरान उन्होंने अपने पिता सुनील दत्त और मां नरगिस का जिक्र करते हुए 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद अपने खिलाफ हुई कार्रवाई पर बात की। संजय दत्त ने कहा था कि उनकी मां मुस्लिम थीं और इसी वजह से उनके परिवार को परेशान किया गया। उन्होंने अपने खिलाफ TADA के तहत हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। इस बयान को लेकर विवाद हुआ और चुनाव आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया। संजय दत्त के बयान को चुनाव प्रचार में सांप्रदायिक संदर्भ के तौर पर देखा गया। 2. 2016: सलमान खान को बताया ‘एरोगेंट’ संजय दत्त और सलमान खान की दोस्ती बॉलीवुड की चर्चित दोस्तियों में रही है। ऐसे में 2016 में एक कार्यक्रम के दौरान जब संजय दत्त से सलमान खान को एक शब्द में बयान करने के लिए कहा गया और उन्होंने ‘एरोगेंट’ कहा, तो यह जवाब सुर्खियों में आ गया। मीडिया में दोनों के बीच अनबन की अटकलें लगने लगीं। हालांकि, संजय दत्त ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनके और सलमान के बीच कोई झगड़ा नहीं है। 3. 2026: ‘धुरंधर’ के डायलॉग को लेकर विवाद फिल्म ‘धुरंधर में संजय दत्त के किरदार एसपी चौधरी असलम के एक डायलॉग पर बलोच समुदाय ने आपत्ति जताई। विवाद के बाद थिएटर रिलीज के वर्जन में उस हिस्से को म्यूट किया गया।

नेपाल में पुनर्निर्माण के लिए ₹4.52 लाख करोड़ लगेंगे:यह देश की GDP से भी ज्यादा; बाढ़ से 16 लाख लोग प्रभावित, 1377 की मौत

नेपाल में पुनर्निर्माण के लिए ₹4.52 लाख करोड़ लगेंगे:यह देश की GDP से भी ज्यादा; बाढ़ से 16 लाख लोग प्रभावित, 1377 की मौत

नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ ने इतनी बड़ी तबाही मचाई है कि अब टूटे घर, सड़कें, पुल और दूसरी सुविधाएं फिर से बनाने में 4.52 लाख करोड़ भारतीय रुपए खर्च होने का अनुमान है। यह रकम नेपाल की GDP 4.32 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। बाढ़ से करीब 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक 1377 लोगों की मौत हो चुकी है और 5130 लोग लापता हैं। कुल अनुमानित खर्च का करीब 75% यानी ₹2.96 लाख करोड़ सड़क, पुल, बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाएं फिर से बनाने में लगेगा। बाढ़ में 7,570 घर, 48 सरकारी इमारतें, 18 स्कूल और 7 स्वास्थ्य केंद्र भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। खबर से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

कांगो के 2 स्कूलों में आग, 24 स्टूडेंट्स की मौत:29 का इलाज जारी; जान बचाने खिड़कियों से कूदे बच्चे

कांगो के 2 स्कूलों में आग, 24 स्टूडेंट्स की मौत:29 का इलाज जारी; जान बचाने खिड़कियों से कूदे बच्चे

कांगो के पूर्वी शहर बुकावु में गुरुवार को आग लगने की घटना में 24 छात्रों की मौत हो गई। शहर को नियंत्रित करने वाले M23 विद्रोही प्रशासन ने बताया कि मृतकों में 19 लड़कियां और 5 लड़के हैं। 29 लोगों का इलाज चल रहा है। स्थानीय अधिकारी मोज लुबाला के मुताबिक, आग पहले एक घर में लगी। इसके बाद यह फुराहा सेकेंडरी स्कूल और उजामा प्राइमरी स्कूल तक फैल गई। M23 विद्रोही समूह के प्रवक्ता लॉरेंस कनयुका ने मृतकों की संख्या की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 29 लोगों का इलाज स्थानीय चिकित्सा केंद्रों में जारी है। मोज लुबाला ने बताया कि कई छात्र फुराहा सेकेंडरी स्कूल के अंदर फंस गए थे। इनमें से कुछ का दम घुट गया। फुराहा और उजामा स्कूलों के अलग-अलग उम्र के छात्र न्यमुलागिरा BDOM हेल्थ सेंटर लाए गए। इनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल थे। नर्स सिजा जीन-बैप्टिस्ट ने बताया कि छात्र स्कूल यूनिफॉर्म में हेल्थ सेंटर पहुंचे थे। घायलों की संख्या बहुत ज्यादा होने से मेडिकल स्टाफ के लिए सही संख्या दर्ज करना मुश्किल हो रहा था। निकलने की जगह संकरी थी लुबाला के मुताबिक, स्कूल से बाहर निकलने का रास्ता बहुत संकरा था। कुछ छात्रों ने खिड़कियों से छलांग लगानी शुरू कर दी। कुछ छात्र दरवाजे की ओर भागे। सभी के एक साथ बाहर निकलने की कोशिश में कई छात्र गिर गए और उनके ऊपर से लोग गुजर गए। आग लगने की वजह अभी पता नहीं चली है। लुबाला के मुताबिक, जिस इलाके से आग शुरू हुई, वह घनी आबादी वाला है। उन्होंने बताया कि इलाके के ज्यादातर घर लकड़ी से बने हैं।

हूती विद्रोहियों ने यमन के मोखा शहर पर कब्जा किया:यह बाब अल-मंदेब से सिर्फ 75km दूर, इससे आगे बढ़े तो तेल सप्लाई पर संकट

हूती विद्रोहियों ने यमन के मोखा शहर पर कब्जा किया:यह बाब अल-मंदेब से सिर्फ 75km दूर, इससे आगे बढ़े तो तेल सप्लाई पर संकट

यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। यह बाब-अल मंदेब स्ट्रेट से सिर्फ 75 किमी दूर है। बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में इसकी गिनती होती है। यहां से एशिया, यूरोप और खाड़ी क्षेत्र के बीच बड़ी मात्रा में सामान और ऊर्जा उत्पादों की आवाजाही होती है। यमन फोर्स और हूती विद्रोहियों के बीच 9 दिन से लड़ाई चल रही है। मोखा शहर पर कब्जे के बाद पिछले 4 साल में हूतियों की यह सबसे बड़ी क्षेत्रीय कामयाबी मानी जा रही है। मोखा पर कब्जे से हूतियों की पकड़ मजबूत मोखा लंबे समय से यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में था। पिछले करीब 10 दिनों से हूती लड़ाके ताइज की पश्चिमी दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने रास्ते में पड़ने वाले अल-शकीरा इलाके पर भी कब्जा कर लिया। यह इलाका ताइज शहर को पश्चिमी तट से जोड़ने वाले अहम रास्ते पर है। इस पर कब्जे से हूतियों की इस इलाके में पकड़ और मजबूत हो गई। हूती पहले से ही यमन की राजधानी सना और लाल सागर के बड़े बंदरगाह होदेइदा पर नियंत्रण रखते हैं। मोखा पर कब्जे से उनके कब्जे वाले उत्तरी और पश्चिमी इलाकों के बीच संपर्क और मजबूत हुआ है। यही वजह है कि मोखा की लड़ाई को सिर्फ एक बंदरगाह शहर पर कब्जे के तौर पर नहीं देखा जा रहा। इससे यमन के पश्चिमी तट पर हूतियों की सैन्य और रणनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है। बाब अल-मंदेब के करीब पहुंचे हूती, जहाजों पर बढ़ा खतरा मोखा पर कब्जे के बाद हूती बाब अल-मंदेब के और करीब पहुंच गए हैं। उन्होंने लाल सागर में मौजूद हनीश द्वीपों की ओर भी बढ़त बनाई है। धुबाब और उसके सामने मौजूद ये द्वीप बाब अल-मंदेब के बहुत करीब हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हूती इस इलाके में अपनी पकड़ और मजबूत करते हैं, तो लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखना और उन पर दबाव बनाना उनके लिए आसान हो सकता है। बाब अल-मंदेब समुद्र का एक संकरा रास्ता है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को खतरा पैदा करने के लिए किसी बहुत बड़े इलाके पर कब्जा करना जरूरी नहीं है। यानी आसपास के कुछ रणनीतिक इलाकों पर पकड़ बनाकर भी हूती जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। खबर अपडेट हो रही है…

काला हिरण फिल्म पर सलमान की याचिका पर सुनवाई:दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रोड्यूसर से 2 हफ्ते में जवाब मांगा, रिलीज रोकने की मांग, जानिए पूरा विवाद

काला हिरण फिल्म पर सलमान की याचिका पर सुनवाई:दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रोड्यूसर से 2 हफ्ते में जवाब मांगा, रिलीज रोकने की मांग, जानिए पूरा विवाद

दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ पर रोक लगाने की सलमान खान की याचिका पर प्रोड्यूसर से जवाब मांगा है। जस्टिस ज्योति सिंह ने प्रोड्यूसर अमित जानी के वकील को दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। सलमान खान ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है। यह फिल्म कथित तौर पर 1998 के काले हिरण शिकार मामले से प्रेरित है। 10 सितंबर को हुई सुनवाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्ममेकर्स की तरफ से आए वकील से पूछा कि ये फिल्म कब रिलीज होगी, हालांकि इसके जवाब में वकील ने कहा है कि फिल्म अभी रिलीज के लिए तैयार नहीं है। इसके कंटेंट को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट मिलना बाकी है। सलमान की ओर से पेश सीनियर वकील रवि प्रकाश ने इस पर कहा, “वे खुद कह रहे हैं कि यह सितंबर में रिलीज होने वाली है।” इस पर कोर्ट ने कहा कि वह 2 हफ्तों के अंदर फिल्म रिलीज की डेट बताएं। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी। सलमान के वकील ने OTT रिलीज पर भी आपत्ति जताई सुनवाई के दौरान सलमान खान के वकील ने कहा कि फिल्म को OTT पर रिलीज करने के लिए मेकर्स को किसी सर्टिफिकेशन की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने इस बात को भी रिकॉर्ड पर लिया। सलमान के वकील ने कहा, “मान लीजिए कि फिल्म रिलीज हो जाती है, तो इससे बहुत नुकसान होगा।” सलमान ने पहले भी दायर किया था केस सलमान खान ने पहले कई अनजान लोगों यानी जॉन डो के खिलाफ ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ का केस दायर किया था। याचिका में उन्होंने कहा कि फिल्म काला हिरण में दिखाए गए शख्स का हुलिया उनसे प्रेरित रखा गया है, जो उनके पर्सनालिटी राइट्स के विरुद्ध है। उन्होंने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी। पिछले साल हाईकोर्ट ने सलमान के ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ केस की सुनवाई की थी। कोर्ट ने उनकी तस्वीर और शक्ल का इस्तेमाल करके बिना अनुमति बनाए गए सामान यानी मर्चेंडाइज पर रोक लगा दी थी। जुलाई में हाईकोर्ट ने मेकर्स को फिल्म के टीजर से जुड़े कई लिंक हटाने का आदेश दिया था। जानिए क्या है फिल्म से जुड़ा पूरा विवाद? 27 जुलाई को दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी’ के टीजर को सोशल मीडिया से हटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर प्रोड्यूसर 24 घंटे के अंदर टीजर के लिंक नहीं हटाते हैं, तो एक्स (ट्विटर) और यूट्यूब जैसी इंटरनेट कंपनियों को इसे हटाने के आदेश दिए जाएंगे। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस ज्योति सिंह ने फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि आरोपी हर दिन अपनी सीमाएं पार कर रहा है और खुद को कानून से ऊपर समझ रहा है। जज ने टिप्पणी की कि किसी सामान्य नागरिक के साथ भी ऐसा बर्ताव नहीं किया जा सकता। साख बनाने में बहुत मेहनत लगती है और एक बार छवि खराब होने के बाद उसे वापस पाना आसान नहीं होता। अदालत ने फिल्म निर्माता अमित जानी के दिए गए इंटरव्यू भी हटाने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा की सुरक्षा जरूरी है। कोर्ट ने फिल्म में अभिनेता के संदर्भ दिखाई देने पर चिंता भी जताई थी। सुप्रीम कोर्ट पहुंचे फिल्म काला हिरण के मेकर्स फिल्म निर्माता अमित जानी ने अपनी फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लीगेसी’ का टीजर हटाने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। जानी ने अपनी अपील में कहा है कि यह आदेश अनुचित सेंसरशिप है और उनके अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार को सीमित करता है। उनका कहना है कि सार्वजनिक रिकॉर्ड और ऐतिहासिक कानूनी मामलों पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता। कानूनी विवाद के बीच फिल्म निर्माता की सुरक्षा को लेकर भी चिंता सामने आई है। जानी का दावा है कि संगठित आपराधिक समूहों ने उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां दी हैं। इन समूहों ने उनसे फिल्म प्रोजेक्ट छोड़ने की मांग की है। जानी ने अपील में कहा कि हाईकोर्ट ने उनकी कानूनी टीम को अपना पक्ष रखने का उचित मौका दिए बिना ही रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया।