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Health Tips: औषधिय गुणों का खजाना है ये पेड़, जड़ से पत्ती तक सभी उपयोगी, जानें फायदे

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Last Updated:April 10, 2026, 22:31 IST Neem ke Fayde: बिहार में छपरा जिले के एक अनोखा गांव है. यहां गांव में कई प्रकार के औषधीय पेड़ पौधे आसानी से मिल जाता है. जो आयुर्वेदिक नजरिया से कई मायने में लाभदायक माना जाता है. जिसका उपयोग करने से कई बीमारी से राहत मिलती है. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे पेड़ के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है. इसके जड़ से लेकर पत्ता तक को औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है. इसे ग्रामीण क्षेत्र के लोग जो जानते हैं, उसका उपयोग बीमारी के शिकार होने पर करते हैं. जिस बीमारी के लिए लोग हजारों रुपए फूंक देते हैं. उस बीमारी को गांव में मिलने वाले इस मामूली पेड़ पौधे के जड़ी बूटी से खत्म किया जा सकता है. इसी तरह अमरूद के दतुवन से मुंह धोने से दांत का हिलना ठीक हो जाता है. जबकि जामुन के दतुवन से मुंह धोने पर शुगर लेवल सामान्य रहता है. यह पेड़ पौधा आपके घर के आसपास आसानी से मिल जाएगा. आज हम बात कर रहे हैं प्रत्येक गांव में मिलने वाले औषधिय गुणों के खजाने नाम से मशहूर नीम के पेड़ के बारे में. इसके जड़ से लेकर पत्ती तक को औषधी के रूप में उपयोग किया जाता है. नीम के जड़ के छिलका का काढ़ा बनाकर पीने से घाव फुंसी नहीं होता है. इसके साथ ही इसका दातुन करने से मुंह का बदबू खत्म हो जाता है. यही नहीं, दांत का हिलना और ब्लड आना भी खत्म हो जाता है. दांत में कीड़ा नहीं लगता है. इसके दातुन करने से दांत भी साफ रहता है. चांदी की तरह चमक दांत से आता है. दांत का लाइफ बढ़ जाता है. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग जो नीम का दातुवन करते हैं. वैसे लोगों का दांत बुढ़ापे के समय तक पूरी तरह से सुरक्षित रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google छपरा के एक्सपर्ट वीरू कुमार ने बताया कि वह बचपन से ही नीम का दतुवन करते आ रहे हैं. आज तक उनके मुंह से कभी बदबू नहीं आया है. उनका दांत चांदी की तरह हमेशा चमकता रहता है. उनके दांत से कभी ब्लड नहीं आता है. नीम के दातुवन करने से पूरे दिन मुंह अच्छा रहता है. किसी प्रकार के घाव फुंसी नहीं होती है. किसी कारणवश अगर घाव हो भी जाता है तो बहुत जल्द ठीक हो जाता है. उन्होंने बताया कि गांव में नीम के पेड़ को औषधिय गुणों का खजाना कहा जाता है. जो लोग जानते हैं. वैसे व्यक्ति कई रोग में नीम के जड़ से लेकर पत्ती तक उपयोग करते हैं, जिससे जटिल से जटिल बीमारी ठीक हो जाती है. उनके ग्रामीण क्षेत्र में आसानी से नीम का पेड़ पौधा मिल जाता है. जिसकी वजह से गांव के लोग भरपूर इसका उपयोग करते हैं. यही वजह है कि कई बीमारी से सुरक्षित रहते हैं. First Published : April 10, 2026, 22:31 IST

फेफड़ों में जमा कफ तुरंत आएगा बाहर, रातभर की खांसी भी होगी दूर, अदरक-गुड़ का ये घरेलू नुस्खा देगा राहत

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Last Updated:April 09, 2026, 12:58 IST Home Remedy For Cough: कई बार लोगों को कफ की बहुत ज्यादा समस्या हो जाती है और वे रात-रातभर खांसते रहते हैं, सो नहीं पाते. इसका इलाज झारखंड की राजधानी रांची के आयुर्वेदिक डॉक्टर वीके पांडे बताते हैं. वे कहते हैं एक गिलास पानी में आपको अदरक, थोड़ा सा गोल मिर्च, थोड़ा सा तेज पत्ता, थोड़ा सा गुड़ इन सभी चीजों को मिलाकर पानी को आधा कर लेना है और फिर इस पानी को रात में सोते समय पी लेना है. उसके बाद पानी नहीं पीना है. आप देखेंगे सुबह तक आपको काफी हद तक आराम मिल जाएगा. दिन में तीन टाइम ऐसा करना है. क्योंकि इन सारी चीजों की तासीर गर्म होती है और ये प्राकृतिक रूप से फेफड़ों को साफ करने का काम करता है. फेफड़ों में जितनी भी कफ जमी होती है, धीरे-धीरे यह बाहर निकालने का काम करता है. कई बार रात के सोते समय अधिक खांसी आती है, इससे भी निजात मिल जाएगी. दरअसल, अदरक, गोल मिर्च, गुड़, तेज पत्ता ये सारी चीजें जो हैं, ये विटामिन सी, जिंक, मैग्नीशियम व कॉपर इन सभी से भरपूर हैं और ये सभी लंग्स के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती हैं. विटामिन सी तो प्राकृतिक रूप से फेफड़े को साफ करने का काम करता है. अगर आपको हल्की खांसी शुरू हो गई है, तभी से ही आप सेवन कर लें, तो कोई गंभीर स्थिति देखने को नहीं मिलेगी. इसके अलावा कोशिश करें डाइट में संतरे को शामिल करें. ऐसा करना काफी फायदेमंद रहता है. संतरा में भी विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है. ऐसे में अगर आपको सर्दी खांसी बार-बार होती है, तो यह सारी चीज जल्दी आपको देखने को नहीं मिलेगी. Add News18 as Preferred Source on Google जिनको सर्दी खांसी बार-बार होती है, उनको तो डाइट में नींबू और संतरा की दोनों चीजें शामिल जरूर करना चाहिए. इसके अलावा खांसी के लिए एक टॉनिक ड्रिंक भी है. सुबह खाली पेट आपको गर्म पानी एक गिलास लेना है और उसमें एक चम्मच शहद डालना है और आधा नींबू पूरा निचोड़ कर डालना है. फिर देखिए इसका सेवन करने के बाद कैसे आपको खांसी से राहत मिलती है. इस ड्रिंक को आप सालभर सेवन कर सकते हैं. प्रचुर मात्रा में आपको कई सारे पोषक तत्वों के साथ विटामिन सी मिलता रहेगा. First Published : April 09, 2026, 12:58 IST

भयंकर ठंडी बीयर पीते हैं आप, ऐसा करना फायदेमंद या नुकसानदायक, गंगाराम के डॉक्टर से जान लीजिए

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Last Updated:April 08, 2026, 14:54 IST Very Cold Beer Health Risks: बीयर में अल्कोहल होता है और डॉक्टर्स इसे सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं. हालांकि तमाम लोग गर्मी में बहुत ज्यादा ठंडी बीयर पीना पसंद करते हैं, जो गले, पाचन और शरीर के तापमान पर नेगेटिव असर डाल सकती है. खाली पेट या ज्यादा मात्रा में बीयर पीने से कई परेशानियों का खतरा बढ़ जाता है. डॉक्टर की मानें तो लोगों को बहुत ज्यादा ठंडी बीयर पीने से बचना चाहिए. Ice Cold Beer Good or Bad: गर्मियों के मौसम में अधिकतर लोग ठंडी चीजें खाना-पीना पसंद करते हैं. कई लोग गर्मी में ठंडी बीयर पीना पसंद करते हैं. कई लोग शराब में भी आइस क्यूब डालकर पीते हैं, ताकि ठंडा महसूस हो. माना जाता है कि बर्फ जैसी ठंडी बीयर पीने से शरीर को तुरंत ठंडक मिलती है और राहत महसूस होती है. खासकर दोस्तों के साथ पार्टियों में ऐसे नजारे देखने को मिलते हैं. हालांकि कई लोग ठंडी बीयर को सेहत के लिए नुकसानदायक मानते हैं. अब सवाल है कि क्या सच में बहुत ज्यादा ठंडी बीयर पीना सेहत के लिए खतरनाक है? इस बारे में डॉक्टर से हकीकत जानने की कोशिश करते हैं. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के गैस्ट्रो एंड लिवर डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. अनिल अरोड़ा ने News18 को बताया कि बीयर एक अल्कोहॉलिक ड्रिंक है और इसका सेवन करना सेहत के लिए नुकसानदायक होता है. कभी-कभार आप बीयर पीते हैं, तो ठीक है, लेकिन रोज इसका सेवन करने से सेहत बिगड़ सकती है. कई लोग मानते हैं कि बीयर पीना सेहत के लिए सुरक्षित है, लेकिन यह सिर्फ गलतफहमी है. अल्कोहल वाली कोई भी ड्रिंक शरीर के लिए फायदेमंद नहीं होती है. अल्कोहल का सेवन करने से लिवर को गंभीर नुकसान होता है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. बहुत ठंडी बीयर पीनी चाहिए या नहीं? डॉक्टर अरोड़ा ने बताया कि जब आप बहुत ठंडी बीयर पीते हैं, तो इसका सीधा असर हमारे गले और पाचन तंत्र पर पड़ता है. अत्यधिक ठंडी ड्रिंक गले की नसों को अचानक सिकोड़ देती है, जिससे गले में खराश, सर्दी या संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. इसके अलावा बहुत ठंडी चीजें पाचन क्रिया को भी धीमा कर देती हैं, जिससे गैस, अपच या पेट में भारीपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. बहुत ठंडी बीयर शरीर के तापमान को अचानक कम कर सकती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ता है. शरीर को अपने तापमान को संतुलित करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, जिससे थकान या असहजता महसूस हो सकती है. खासकर जब बाहर का तापमान बहुत ज्यादा हो, तब बहुत ठंडी बीयर शरीर के लिए शॉक जैसा असर डाल सकती है. खाली पेट बीयर पीना नुकसानदायक एक्सपर्ट ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति खाली पेट बहुत ठंडी बीयर पीता है, तो यह ज्यादा नुकसानदायक हो सकता है. इससे अल्कोहल जल्दी खून में घुल जाता है और नशा तेजी से चढ़ता है. यह लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है. ज्यादा मात्रा में ठंडी बीयर पीने से डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. जिन लोगों को पहले से ही गले की समस्या, पाचन से जुड़ी परेशानी, लिवर रोग या हार्ट से संबंधित दिक्कतें हैं, उन्हें बहुत ठंडी बीयर से बचना चाहिए. जो लोग बार-बार सर्दी-जुकाम से परेशान रहते हैं, उनके लिए भी यह नुकसानदायक हो सकती है. ऐसे लोगों को सामान्य तापमान या हल्की ठंडी बीयर ही पीनी चाहिए. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 08, 2026, 14:54 IST

इसे सिर्फ हरी पत्ती मत समझिए, यह मसाला कई गंभीर बीमारियों में इम्यूनिटी बूस्टर! औषधीय गुणों से भरपूर

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Last Updated:April 07, 2026, 18:05 IST Health News: आज भी हमारे देश के लोग आयुर्वेद पर विश्वास करते हैं, क्योंकि आयुर्वेद में हर मर्ज का इलाज है. ऐसी ही एक औषधि है लेमनग्रास, जो हमारी सेहत के साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद ही फायदेमंद है. आइए पोषक तत्वों से भरपूर इसकी खासियत के बारे में जानते हैं. वैसे हरी धनिया एक ऐसी चीज है, जो बाजार में सालभर पाई जाती है. इसकी पत्तियों का उपयोग हर घर में होता है, चाहे सब्जी हो या दाल रायता हो या चटनी, धनिया की पत्तियां हर खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ा देती है. ये पत्तियां सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ातीं, बल्कि हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद भी होती हैं. यह एक ऐसी चीज है, जो दिखने में भले ही मामूली लगे, लेकिन इसके अंदर छिपे पोषक तत्व हमारी सेहत और स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. आयुर्वेद में भी धनिया को औषध‍ि के रूप में माना गया है, जिस कारण धनिया का नियमित रूप से इस्तेमाल कर कई बीमारियों से बचा जा सकता है. जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा (एमडी मेडिसिन ) ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि हरी धनिया एक औषधीय पौधा है. इसकी पत्तियां और बीज हमारी सेहत व स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद हैं. इसमें बहुत सारे औषधीय गुण मौजूद होते हैं, जैसे विटामिन ए और सी, पोटैशियम, कैल्शियम, विटामिन-सी और मैग्‍नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमें कई गंभीर बीमारियों से बचाते हैं. बस इसका सही से इस्तेमाल करने की जरूरत है. आंखों के दर्द में फायदेमंद: धनिया क़े पत्तों के रस को बकरी के दूध में मिला लें. इसे आंख में एक-एक बूंद डालने से आंखों का दर्द ठीक हो जाता है. धनिया बीज और जौ को बराबर-बराबर लेकर पीस लें. इसका गाढ़ा लेप बना लें. इसे आंखों पर बांधने से आंख के दर्द ठीक हो जाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google कब्ज क़ी समस्या में फायदेमंद: जिन लोगों को कब्ज रहती है, वो 20 ग्राम धनिया और 120 मिली पानी को मिट्टी के बर्तन में डालकर, रात भर रहने दें. सुबह इसे छानकर, 13 ग्राम खांड डाल लें. इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से कब्ज में लाभ मिलता है. पेट दर्द की समस्या में 2 ग्राम धनिया चूर्ण को, 5 ग्राम मिश्री के साथ मिला लें. इसे दिन में दो-तीन बार देने से गर्मी से होने वाले पेट दर्द में लाभ होता है. इसके अलावा 5 ग्राम धनिया को 100 मिली पानी में रात में भिगो लें. इसे सुबह मसलकर और छानकर रखें. इस पानी को बच्चों को पिलाने से पेट दर्द में लाभ होता है. वहीं 10-20 मिली धनिया के पत्ते के रस को 10 मिली सिरके में मिलाकर लगाने से पेट दर्द ठीक हो जाता है. अगर किसी को हाई कॉलेस्ट्रॉल की शिकायत है, तो उसे धनिया के बीज उबालकर उस पानी को पीना चाहिए. डायबिटीज के मरीजों के लिए भी धनिया काफी फायदेमंद होता है. यह खून में इंसुलिन की मात्रा को नियमित करता है. पाचन की समस्या में फायदेमंद: पाचन को दुरुस्त करने के लिए हरी धनिया खाएं. यह पेट की समस्याओं को दूर कर पाचनशक्ति बढ़ाता है. धनिया के ताजे पत्तों को छाछ में मिलाकर पीने से बदहजमी, मतली, पेचिश और कोलाइटिस में आराम मिलता है. इसके सेवन से गैस की समस्या से भी छुटकारा मिलता है. First Published : April 07, 2026, 18:05 IST

दुनिया की इकलौती एक्सरसाइज, जिसे करने से एक बूंद भी पसीना नहीं आता ! शरीर रहता है कूल-कूल

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Last Updated:April 07, 2026, 15:39 IST Swimming Health Benefits: स्विमिंग एक ऐसी एक्सरसाइज है, जो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद है. यह शरीर को ठंडा रखने के साथ-साथ हार्ट हेल्थ सुधारती है, मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और जोड़ों पर दबाव कम करती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि स्विमिंग करने से तनाव, एंजायटी और डिप्रेशन को कम करने में मदद मिल सकती है. गर्मी में स्विमिंग करना सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है. Swimming Benefits in Summer: गर्मी के मौसम में लोग एक्सरसाइज करने से भी बचते हैं. दरअसल एक्सरसाइज करते वक्त पसीना बहुत आता है. कई लोग पसीने से बचने के लिए वर्कआउट ही नहीं करते हैं या गर्मी की वजह से घर से बाहर नहीं निकलते हैं. अगर आप गर्मी में ऐसी एक्सरसाइज करना चाहते हैं, जिसमें आपको गर्मी न लगे, तो स्विमिंग करना शुरू कर दें. स्विमिंग करते वक्त न आपको पसीना आता है और न ही किसी तरह की परेशानी होती है. ठंडे-ठंडे पानी में स्विमिंग करने से गर्मी से राहत मिलती है और शरीर को गजब के फायदे मिलते हैं. भीषण गर्मी से बचने के लिए तैराकी सबसे प्रभावी विकल्प हैं. गर्मियों में स्विमिंग करना बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए फायदेमंद माना जाता है. क्रोनिक बीमारियों से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए भी तैराकी बेहद फायदेमंद है. स्विमिंग करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पानी का उत्प्लावन बल शरीर का वजन कम कर देता है. इससे जोड़ों पर दबाव नहीं पड़ता और दर्द या चोट का खतरा काफी कम हो जाता है. जो लोग गठिया, घुटनों के दर्द या हड्डियों की कमजोरी से परेशान रहते हैं, उनके लिए तैराकी बहुत सुरक्षित और प्रभावी व्यायाम है. यह एरोबिक व्यायाम के साथ-साथ मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाला व्यायाम है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार स्विमिंग करने से दिल की सेहत बूस्ट हो जाती है. इससे शरीर में ब्लड फ्लो सुधर जाता है और ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है. यह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियों वाले लोगों के लिए भी बहुत उपयोगी है. नियमित तैराकी से मांसपेशियों की ताकत, सहनशक्ति, संतुलन और लचीलापन बढ़ता है. गर्मियों में तैराकी का एक और बड़ा लाभ यह है कि यह शरीर का तापमान नियंत्रित रखती है और डिहाइड्रेशन से बचाती है. स्विमिंग करने से मेंटल हेल्थ भी सुधर सकती है. इससे स्ट्रेस, एंजायटी और डिप्रेशन कम होता है, मूड अच्छा रहता है और नींद की गुणवत्ता बढ़ती है. तैरीका के दौरान एंडोर्फिन, डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे अच्छे हार्मोन रिलीज होते हैं, जो खुशी और सुकून का एहसास कराते हैं. कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया कि पानी के आस-पास रहने से कोर्टिसोल यानी तनाव हार्मोन कम होता है और ऑक्सीटोसिन बढ़ता है, जिससे व्यक्ति ज्यादा खुश और स्वस्थ महसूस करता है. अकेलापन और सामाजिक अलगाव आजकल बुजुर्गों में आम समस्या है. ग्रुप एक्टिविटी से यह समस्या कम होती है और मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होता है. वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि नदियों, झीलों या स्विमिंग पूल जैसे ब्लू स्पेस में समय बिताने से शारीरिक गतिविधि बढ़ती है, तनाव घटता है और स्वास्थ्य बेहतर होता है. अगर आपके घर में स्विमिंग पूल है या आसपास इसकी सुविधा है, तो गर्मियों में आप वहां अक्सर जाकर स्विमिंग करें. इससे न सिर्फ आपकी सेहत बेहतर होगी, बल्कि आप तपिश से भी बच सकते हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 07, 2026, 15:39 IST

यह सफेद फूल है औषधि का खजाना! बवासीर से लेकर कान-दांत दर्द तक देता है राहत, जानें सही इस्तेमाल

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Last Updated:April 07, 2026, 13:38 IST धतूरा एक ऐसा पौधा है, जिसे जहां धार्मिक दृष्टि से भगवान शिव को अर्पित किया जाता है, वहीं आयुर्वेद में इसके कई औषधीय उपयोग भी बताए गए हैं. हालांकि यह पौधा विषैला होता है, इसलिए इसके सही और सीमित उपयोग से ही स्वास्थ्य लाभ मिल सकता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में धतूरा का पौधा आसानी से मिल जाता है. धतूरा एक ऐसा पौधा है, जिसके फल, पत्तियां और तना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. इसमें ट्रोपेन एल्कलॉइड जैसे स्कोपोलामाइन, एट्रोपिन, एनिसोडामाइन, मेटेलोइडिन और एंजेलेट एस्टर जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो कई बीमारियों से बचाव में सहायक माने जाते हैं. धतूरा का फल भगवान शिव को बेहद प्रिय माना जाता है. शिव भक्त सोमवार के दिन पूजा के बाद भगवान शिव को धतूरे का फल और फूल अर्पित करते हैं. धतूरा एक विषैला पौधा है, लेकिन इसका ऐतिहासिक और पारंपरिक उपयोग विभिन्न संस्कृतियों में औषधीय और धार्मिक उद्देश्यों के लिए होता आया है. मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने पिया था और धतूरा उस विष को नियंत्रित करने में सहायक माना गया, इसलिए शिव पूजा में इसका विशेष महत्व है. अगर आप बवासीर की समस्या से परेशान हैं, तो गांव में मिलने वाला यह फल राहत दिला सकता है. हालांकि, धतूरे के पत्ते और फल का सही तरीके से उपयोग करना बेहद जरूरी है. बवासीर में धतूरे के फल और पत्तियों को जलाकर निकलने वाले धुएं से मस्सों की सिकाई करने पर दर्द में राहत मिल सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google कई बार बाइक या अन्य कारणों से चोट लगने पर पैर में सूजन आ जाती है, जिससे दर्द और चलने में दिक्कत होने लगती है. ऐसे में लोग धतूरे के पत्तों को गर्म करके प्रभावित स्थान पर बांधते हैं, जिससे सूजन कम हो सकती है. वहीं, धतूरे के पत्तों को पीसकर लेप बनाकर सूजन वाली जगह पर लगाने से भी धीरे-धीरे राहत मिल सकती है. अगर आप कान के दर्द या सिरदर्द से परेशान रहते हैं, तो धतूरे का पत्ता फायदेमंद माना जाता है. कान दर्द में इसके उपयोग के लिए सरसों के तेल में गंधक के साथ थोड़ा सा धतूरे के पत्तों का रस मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं. इसके बाद हल्का गुनगुना होने पर इस तेल की दो-दो बूंद कान में डालने से दर्द में राहत मिल सकती है. आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार के अनुसार दांतों के दर्द में धतूरे के बीज उपयोगी माने जाते हैं. इसके लिए धतूरे के बीज निकालकर धूप में सुखा लें, फिर उन्हें पीसकर दाढ़ की खाली जगह में रखें. कुछ समय बाद दर्द में राहत मिल सकती है, इसके बाद कुल्ला कर लें. उन्होंने यह भी सलाह दी है कि अधिक जानकारी और सही उपयोग के लिए डॉक्टर से जरूर संपर्क करें. First Published : April 07, 2026, 13:38 IST

इस मौसमी फल के बीजों को न समझें बेकार, कई बीमारियों का डटकर करता है सामना! गर्मी में बेहद फायदेमंद

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Last Updated:April 06, 2026, 16:56 IST Health Tips: आज भी लोग कई सारी बीमारियों में आयुर्वेदिक औषधीयों पर भरोसा करते हैं, क्योंकि आयुर्वेद में हर मर्ज का इलाज है. ऐसी ही एक औषधि है खरबूजे का फल और बीज, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद ही फायदेमंद है. इसमें बहुत सारे पोषक तत्त्व मौजूद होते हैं, जिसके इस्तेमाल से शरीर के कई रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है. प्रकृति ने हमें कई ऐसे फल दिए हैं, जो स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना है. उन्हीं में से एक है खरबूजा, जो गर्मियों क़े दिनों मे अधिक पाया जाता है. लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं, लेकिन अक्सर इसके बीजों को बेकार समझकर फेंक देते हैं. जबकि आयुर्वेद के अनुसार, खरबूजे का गूदा ही नहीं, इसके बीज भी शरीर के लिए बेहद लाभकारी होते हैं. खरबूजे का पारंपरिक रूप से उपयोग कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने व शरीर को स्वस्थ रखने के अलावा यह कई कभी बीमारियों से बचाता है. जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा एमडी मेडिसिन ने बताया कि खरबूजा एक ऐसा फल है, जो गर्मियों के दिनों में पाया जाता है. इसमें बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं. इसका फल ही नहीं, इसके बीज भी हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद है, क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन-ए, सी, पोटैशियम, फोलेट और आहार फाइबर होता है. खरबूजे के बीज में प्रोटीन, वसा, खनिज, मैग्नीशियम, पोटेशियम, जिंक, आयरन और विटामिन-ए, सी, ई जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमें कई बीमारियों से बचाते हैं. बस इसका सही से इस्तेमाल करने की जरूरत है. पेशाब अगर रुक-रुक कर आती है, वहां पर खरबूजे के फल का सेवन करना चाहिए. इससे मूत्र संस्थान की सारी समस्याओं का निवारण होता है. खरबूजे की बीज में मिश्री और काली मिर्च मिलाकर खिलाने से पेशाब की वृद्धि होती है और मूत्र विकार का खत्म होते हैं. इसके बीज को पीसकर, दूध में मिलाकर पीने से मूत्रनली की जलन शांत होती है. Add News18 as Preferred Source on Google स्किन की समस्या में फायदेमंद: खरबूजे के बीजों और फल के छिलकों को पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग, झांई आदि मिट जाते हैं. यह प्रयोग चेहरे को कोमल बनाता है और चेहरे पर चमक लाता है. किडनी स्टोन में फायदेमंद: गूर्दे में दर्द होने का मुख्य कारण है पथरी का होना. खरबूज में पथरी को गलाने की शक्ति होती है. खरबूज के 5-10 ग्राम बीजों को पीसकर पानी में मिलाकर सेवन करने से गुर्दे के दर्द में आराम मिलता है. इससे पथरी भी गलकर निकल जाती है. लू की समस्या में फायदेमंद: गर्मियों में अक्सर लू लगने की समस्या होती है. लू लगने पर खरबूज के बीजों को पीसकर सिर पर और सारे शरीर पर लगाएं. इससे लू के कारण होने वाली जलन, दर्द और बुखार आदि समस्याएं ठीक होती हैं और शरीर में ठंडक मिलती है. पेट की समस्या में फायदेमंद: अक्सर छोटे बच्चों का पेट फूल जाता है और दर्द करने लगता है. बच्चा बहुत रोता है. ऐसे में समझ नहीं आता कि बच्चा क्यों रो रहा है. ऐसी हालत में खरबूजे के बीज को पीसकर गुनगुना करके बच्चे के पेट पर लेप करने से पेट की गैस निकल जाती है और दर्द में आराम मिलता है. पेशाब की समस्या में फायदेमंद: पेशाब अगर रुक-रुक कर आती है, वहां पर खरबूजे के फल का सेवन करना चाहिए. इससे मूत्र संस्थान की सारी समस्याओं का निवारण होता है. खरबूजे के बीज में मिश्री और काली मिर्च मिलाकर खिलाने से पेशाब की वृद्धि होती है और मूत्र विकार का खत्म होते हैं. इसके बीज को पीसकर, दूध में मिलाकर पीने से मूत्रनली की जलन शांत होती है. First Published : April 06, 2026, 16:56 IST

45 की उम्र के बाद महिलाओं में क्यों बढ़ता है लिवर फैट? डॉक्टर ने बताई असली वजह और बचाव के तरीके

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Last Updated:April 06, 2026, 15:42 IST Menopause and Fatty Liver: महिलाओं में 45 की उम्र के बाद हार्मोनल बदलाव होने लगता है, जिसके कारण लिवर में फैट तेजी से बढ़ने लगता है. एस्ट्रोजन का स्तर घटने से फैट पेट और आंतरिक अंगों के आसपास जमा होता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है और फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है. समय पर जागरुकता से इस समस्या से बचा जा सकता है. मेनोपॉज के बाद महिलाओं में फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है. Fatty Liver Risk in Women: हमारे शरीर में उम्र के अनुसार बदलाव होते रहते हैं. 45 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में बेहद तेजी से बदलाव होने लगते हैं, जिनका असर सिर्फ हार्मोन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे मेटाबॉलिज्म पर पड़ता है. खासकर मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिससे शरीर में फैट के जमाव का पैटर्न बदल जाता है. यही कारण है कि इस उम्र के बाद कई महिलाओं में लिवर फैट तेजी से बढ़ने लगता है, जो गंभीर समस्या पैदा कर सकता है. चेन्नई की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. कनगा लक्ष्मी ने HT को बताया कि मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर घटने से शरीर में फैट का वितरण प्रभावित होता है. पहले जो फैट शरीर के बाहरी हिस्सों जैसे हिप्स और जांघों में जमा होता था, वह अब पेट और आंतरिक अंगों के आसपास जमा होने लगता है. यह विसरल फैट ज्यादा खतरनाक होता है और लिवर पर सीधा असर डालता है. इसी बदलाव के कारण महिलाओं में फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है. हार्मोनल बदलाव के साथ शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस भी बढ़ने लगता है. जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर का स्तर असंतुलित हो जाता है. इससे मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है और एक्स्ट्रा फैट लिवर में जमा होने लगता है, जिससे फैटी लिवर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर के अनुसार फैटी लिवर की समस्या शुरुआती स्टेज में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती है. कई महिलाओं का वजन सामान्य रहता है, इसलिए वे इसे गंभीरता से नहीं लेतीं. हालांकि अंदरूनी फैट धीरे-धीरे लिवर में जमा होता रहता है, जिससे समय पर इसका पता नहीं चल पाता और बाद में यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है. दरअसल मेनोपॉज से पहले एस्ट्रोजन महिलाओं को एक तरह का सुरक्षा कवच देता है, जिससे वे मेटाबॉलिक बीमारियों से कुछ हद तक सुरक्षित रहती हैं. मेनोपॉज के बाद यह सुरक्षा खत्म हो जाती है. इसके बाद महिलाओं में न केवल फैटी लिवर बल्कि दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है. कुछ मामलों में यह जोखिम पुरुषों से भी ज्यादा हो सकता है. फैटी लिवर के लक्षण साफ नहीं होते, लेकिन कुछ संकेत इस ओर इशारा कर सकते हैं. जैसे बिना ज्यादा वजन बढ़े पेट का घेरा बढ़ना, लगातार थकान रहना, लिवर एंजाइम्स का बढ़ना या पहले से PCOS, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या होना. ये सभी संकेत बताते हैं कि शरीर में मेटाबॉलिक असंतुलन बढ़ रहा है. इस समस्या से बचने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार बेहद जरूरी है. संतुलित और प्रोटीन युक्त आहार लेना, नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और एरोबिक एक्सरसाइज करना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित रखना काफी मददगार साबित होता है. इसके साथ ही समय-समय पर हेल्थ चेकअप कराना भी जरूरी है, ताकि समस्या को शुरुआती स्टेज में ही पकड़ा जा सके. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 15:42 IST

किचन में रखी इस दाल में छुपा है हेल्थ सीक्रेट! दिल से पाचन तक करेगी कमाल, ऐसे करें इस्तेमाल

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Last Updated:April 06, 2026, 14:02 IST भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली उड़द की दाल सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी है. इसमें मौजूद प्रोटीन, आयरन, फाइबर और कई जरूरी खनिज शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. यह पाचन सुधारने से लेकर दिल को स्वस्थ रखने और त्वचा-बालों को निखारने तक कई तरह से फायदेमंद मानी जाती है. उड़द की दाल (ब्लैक ग्राम) के पत्ते और दाल दोनों ही स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन और अन्य खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पाचन सुधारने, हड्डियों को मजबूत बनाने, ऊर्जा बढ़ाने और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद करते हैं. यह पेट के लिए भी काफी पौष्टिक मानी जाती है. डॉक्टर विनीत शर्मा ने बताया कि उड़द की दाल का सेवन, विशेषकर इसके पत्ते (पौधे का भाग) और दाल, फाइबर और खनिजों से भरपूर होने के कारण पाचन में सुधार, कब्ज से राहत और पेट के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देने में बेहद फायदेमंद है. यह वात दोष को भी कम करती है. हालांकि, पचने में भारी (गुरु) होने के कारण इसे अदरक या लहसुन के साथ पकाना बेहतर माना जाता है. उड़द की दाल में पोटेशियम, मैग्नीशियम और फाइबर की उच्च मात्रा पाई जाती है, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करती है. इससे हृदय स्वास्थ्य बेहतर रहता है. यह दाल रक्त परिसंचरण में सुधार करती है और धमनियों में प्लाक जमने से रोककर दिल को मजबूत बनाए रखने में सहायक होती है. Add News18 as Preferred Source on Google उड़द की दाल आयरन, प्रोटीन, मैग्नीशियम और पोटैशियम का बेहतरीन स्रोत है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर एनीमिया की समस्या को कम करने में मदद करती है और ऊर्जा स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाती है. यह थकान कम करने, मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने और पाचन तंत्र को सुधारने में भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. उड़द की दाल त्वचा और बालों के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि यह आयरन, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है. यह रूखी त्वचा को नमी प्रदान करती है, मुंहासों को कम करने में मदद करती है और स्कैल्प को पोषण देकर बालों को घना व मजबूत बनाती है, जिससे झड़ने की समस्या भी कम होती है. उड़द की दाल का पेस्ट त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण मुंहासे, दाग-धब्बे और झुर्रियों को कम करने में मदद करते हैं. यह प्राकृतिक रूप से त्वचा को साफ कर डेड स्किन हटाता है, जिससे चेहरा चमकदार और मुलायम बनता है. इसे रातभर भिगोकर पीसकर इस्तेमाल किया जा सकता है. उड़द की दाल और इसके पौधे के विभिन्न हिस्से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने और आंतों की सफाई में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इसमें भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है, जो कब्ज, गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है और मल त्याग को आसान बनाता है. First Published : April 06, 2026, 14:02 IST

क्या वर्कआउट के बाद प्रोटीन लेना जरूरी है? जानिए 30 मिनट के नियम का असली सच!

क्या वर्कआउट के बाद प्रोटीन लेना जरूरी है? जानिए 30 मिनट के नियम का असली सच!

Last Updated:April 05, 2026, 14:59 IST अपनी प्रोटीन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए, लोग आमतौर पर अपने आहार में शाकाहारी भोजन, मांसाहारी भोजन और प्रोटीन शेक जैसे स्रोतों को शामिल करते हैं. क्या आपने कभी गौर किया है कि जो लोग जिम जाते हैं, वे अक्सर यह मानते हैं कि वर्कआउट के 30 मिनट के भीतर प्रोटीन शेक का सेवन कर लेना चाहिए? प्रोटीन एक जरूरी पोषक तत्व है जिसकी सभी को जरूरत होती है. लेकिन अगर इसे सही मात्रा में लिया जाए तो ही शरीर को फायदा मिलता है. प्रोटीन की मात्रा व्यक्ति की शारीरिक जरूरत, जेंडर और एक्टिविटी लेवल पर निर्भर करती है. प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए लोग आमतौर पर शाकाहारी खाना, मांसाहारी खाना और प्रोटीन शेक जैसे स्रोत अपने खाने में शामिल करते हैं. क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जो लोग जिम जाते हैं, उनके मन में ये मान्यता होती है कि वर्कआउट के 30 मिनट के अंदर प्रोटीन शेक लेना चाहिए? लेकिन वैज्ञानिक सबूत इस दावे का समर्थन नहीं करते. हाल के शोध और हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, प्रोटीन का समय उतना जरूरी नहीं है जितना कि कुछ और चीजें, जिन पर आपको ध्यान देना चाहिए. क्या वर्कआउट के 30 मिनट के अंदर प्रोटीन लेना जरूरी है?: ऐसा माना जाता है कि वर्कआउट के बाद तुरंत प्रोटीन लेना मसल्स की रिकवरी और ग्रोथ के लिए जरूरी है. लेकिन करीब 3,000 वयस्कों पर हुई एक स्टडी बताती है कि मसल्स बनाने के मामले में कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप वर्कआउट के बाद तुरंत प्रोटीन लेते हैं या कुछ घंटे बाद. असल में सबसे जरूरी बात ये है कि आप पूरे दिन में अपने शरीर को कितना प्रोटीन देते हैं. जब तक आप दिनभर में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेते हैं, तब तक आपके मसल्स सही तरीके से ग्रो और रिकवर होते हैं. प्रोटीन कब और कैसे लेना चाहिए?: एक्सपर्ट्स कहते हैं कि वर्कआउट के बाद 30 मिनट के अंदर प्रोटीन लेने पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि दिनभर के अलग-अलग खाने में प्रोटीन की कुल मात्रा बांटना बेहतर है. हर खाने में करीब 25 से 30 ग्राम प्रोटीन शामिल करने से मेटाबॉलिज्म एक्टिव रहता है और बार-बार भूख को कंट्रोल करता है. खासकर अगर आपने खाली पेट वर्कआउट किया है, तो 1 से 2 घंटे के अंदर प्रोटीन लेना रिकवरी के लिए फायदेमंद होता है. Add News18 as Preferred Source on Google आपकी उम्र के हिसाब से समय: युवाओं के मुकाबले, बढ़ती उम्र के लोगों (खासकर 40 साल से ऊपर) के लिए प्रोटीन लेने का समय थोड़ा ज्यादा जरूरी होता है. जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं. इसे रोकने के लिए, सुबह के नाश्ते और दोपहर के खाने में अच्छी मात्रा में प्रोटीन लेना फायदेमंद है. इसके अलावा, रात को सोने से पहले धीरे-धीरे पचने वाला प्रोटीन (जैसे दूध या पनीर) लेने से मांसपेशियों की रिकवरी में ज्यादा मदद मिल सकती है. प्रोटीन की मात्रा और समय?: एक्सपर्ट्स कहते हैं कि आपको ‘एनाबोलिक विंडो’ के पीछे भागने के बजाय अपने रोज के खाने में कुल प्रोटीन पर ध्यान देना चाहिए. अपने शरीर के वजन और एक्टिविटी लेवल के हिसाब से प्रोटीन की जरूरत तय करें, और उसे छोटे हिस्सों में लें. क्वालिटी के लिए लीन मीट, डेरी प्रोडक्ट्स, अंडे और दालों को प्राथमिकता दें. (यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है. कोई भी उपाय अपनाने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें. News18 इसकी कोई पुष्टि नहीं करता.) First Published : April 05, 2026, 14:59 IST