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drinking water after meal effects | ayurveda tips for drinking water | खाना खाने के बाद पानी पीना सही या गलत | खाना खाने के बाद पानी कब पिएं |

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Last Updated:March 16, 2026, 19:13 IST Khana Khane Ke Bad Pani Kab Peena Chahiye: हम अक्सर खाना खत्म करते ही गटागट पानी पीना एक सामान्य आदत मानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी सी चूक आपके पाचन तंत्र के लिए भारी पड़ सकती है. ऋषिकेश के डॉक्टर राजकुमार के अनुसार, भोजन के तुरंत बाद पानी पीना पेट में मौजूद उन जादुई पाचक रसों को पतला कर देता है जो खाने को ऊर्जा में बदलते हैं. इससे न सिर्फ पाचन प्रक्रिया सुस्त होती है, बल्कि गैस और एसिडिटी जैसी परेशानियां भी घर कर लेती हैं. सेहतमंद रहने के लिए पानी कब और कैसे पीना चाहिए, जानिए इसका सही समय. ऋषिकेश: अक्सर हम में से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि जैसे ही खाना खत्म हुआ, तुरंत एक गिलास पानी पी लिया. कई घरों में तो खाना खत्म करते ही पानी पीना सामान्य दिनचर्या का हिस्सा माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह आदत आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकती है.भोजन के तुरंत बाद ज्यादा पानी पीना पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. इसलिए जरूरी है कि हम अपनी इस छोटी सी आदत के पीछे की सच्चाई को समझें. लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि खाना हमारे शरीर के लिए ऊर्जा और पोषण का मुख्य स्रोत होता है. जब हम भोजन करते हैं तो शरीर में पाचन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. पेट में मौजूद पाचक रस और एंजाइम भोजन को तोड़ने का काम करते हैं ताकि शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिल सकें. ऐसे में अगर हम खाना खत्म करते ही तुरंत ज्यादा मात्रा में पानी पी लेते हैं तो यह पाचक रसों को पतला कर सकता है. इससे पाचन की प्रक्रिया थोड़ी धीमी पड़ सकती है. खाना खाने के कितने समय बाद पानी पीना चाहिए कई लोगों को यह भी महसूस होता है कि खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीने से पेट में भारीपन या गैस की समस्या होने लगती है. कुछ मामलों में एसिडिटी या अपच की शिकायत भी देखने को मिलती है. हालांकि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए इसका असर भी अलग-अलग हो सकता है. फिर भी  सामान्य तौर पर भोजन के तुरंत बाद ज्यादा पानी पीने से बचना बेहतर माना जाता है. सबसे अच्छा तरीका यह है कि भोजन करने के करीब 20 से 30 मिनट बाद पानी पिया जाए. इस दौरान पेट में पाचन की शुरुआती प्रक्रिया शुरू हो चुकी होती है, जिससे खाना धीरे-धीरे पचने लगता है. जब आप थोड़ी देर बाद पानी पीते हैं तो यह शरीर को हाइड्रेट भी करता है और पाचन प्रक्रिया को भी ज्यादा प्रभावित नहीं करता. यह भी पढ़ें: वजन कम करना या बढ़ानी हो इम्यूनिटी! रोज खाएं स्प्राउट्स, एक्सपर्ट से जानिए इसके कमाल के फायदे क्या खाना खाते समय पानी पी सकते हैं?हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि खाना खाते समय पानी बिल्कुल नहीं पीना चाहिए. अगर आपको खाने के दौरान प्यास लगती है तो आप थोड़ा-थोड़ा पानी पी सकते हैं. भोजन के दौरान एक-दो घूंट पानी लेना सामान्य है और इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं होता. बवजन कम करना या बढ़ानी हो इम्यूनिटी! रोज खाएं स्प्राउट्स, एक्सपर्ट से जानिए इसके कमाल के फायदेल्कि कुछ लोगों के लिए यह खाना निगलने में भी मदद करता है.एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि बहुत ठंडा पानी भी खाने के तुरंत बाद नहीं पीना चाहिए. अत्यधिक ठंडा पानी पाचन प्रक्रिया को थोड़ी देर के लिए धीमा कर सकता है और पेट में असहजता महसूस हो सकती है. इसलिए सामान्य तापमान का पानी पीना ज्यादा बेहतर माना जाता है. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें Location : Rishikesh,Dehradun,Uttarakhand First Published : March 16, 2026, 19:13 IST

सावधान! सुबह उठते ही पैरों में होता है झनझनाहट, तो न करें इग्नोर, इस बीमारी का हो सकता है संकेत, जानें डॉक्टर की सलाह

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Last Updated:March 16, 2026, 11:17 IST Health Tips: सुबह उठते ही पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या झुनझुनी को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह कई समस्याओं का संकेत हो सकता है. गाजियाबाद के गणेश हॉस्पिटल की फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. अरुणिमा चौधरी के अनुसार यह गलत तरीके से सोने, नसों पर दबाव, विटामिन-B12 की कमी या कमर की समस्या के कारण हो सकता है. लगातार ऐसी परेशानी स्लिप डिस्क या डायबिटीज का संकेत भी हो सकती है. नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीने से इससे बचाव किया जा सकता है. सुबह नींद से उठते ही अगर पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या हल्की झुनझुनी महसूस होती है, तो अक्सर लोग इसे मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. कई बार यह थोड़ी देर में अपने आप ठीक भी हो जाती है. इसलिए लोग इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते. फिजियोथैरेपिस्ट का कहना है कि अगर यह समस्या बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है. यह नसों की कमजोरी, कमर की समस्या या शरीर में पोषण की कमी का संकेत भी हो सकता है. ये लक्षण हैं बेहद खतरनाकगाजियाबाद के गणेश हॉस्पिटल की फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. अरुणिमा चौधरी के अनुसार सुबह उठते समय पैरों में सुन्नपन महसूस होना कई कारणों से हो सकता है. आमतौर पर यह गलत तरीके से सोने, लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने या सोते समय नसों पर दबाव पड़ने की वजह से होता है. कई मामलों में शरीर में विटामिन-बी12 की कमी भी नसों को कमजोर कर देती है, जिससे पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन की समस्या सामने आती है. उन्होंने बताया कि कई बार कमर दर्द भी इस समस्या की बड़ी वजह बन जाता है. कमर की नसें पैरों से जुड़ी होती हैं और जब कमर में दर्द या नसों पर दबाव बढ़ता है, तो उसका असर पैरों तक पहुंच सकता है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति को पैरों में भारीपन, सुन्नपन या झनझनाहट महसूस होने लगती है. अगर इस तरह की परेशानी लगातार बनी रहती है, तो यह स्लिप डिस्क, नसों की कमजोरी या डायबिटीज जैसी बीमारी का संकेत भी हो सकती है. इसलिए बार-बार होने वाली इस समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. रोजाना एक्सरसाइज है जरूरीडॉ. चौधरी का कहना है कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना व्यायाम करना बेहद जरूरी है. सुबह के समय कम से कम 30 से 40 मिनट तक हल्की एक्सरसाइज या स्ट्रेचिंग करने से शरीर की नसें और मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं. जो लोग ऑफिस या नौकरी पर जाने से पहले थोड़ा समय निकालकर व्यायाम करते हैं, उन्हें शरीर से जुड़ी कई समस्याओं से राहत मिलती है. नियमित व्यायाम से शरीर में रक्त संचार भी बेहतर रहता है और दर्द या अकड़न की शिकायत कम होती है. डाइट का भी इस समस्या से सीधा संबंध है डॉक्टर के अनुसार शरीर को मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है. खासतौर पर गर्मियों के मौसम में पानी की पर्याप्त मात्रा पीनी चाहिए. ऐसे फल और खाद्य पदार्थ खाने चाहिए, जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो ताकि शरीर हाइड्रेट रहे. नारियल पानी भी गर्मियों में शरीर को ऊर्जा और जरूरी पोषण देने में मदद करता है. अगर कोई व्यक्ति जिम या ज्यादा शारीरिक मेहनत करता है तो उसे अपनी डाइट पर विशेष ध्यान देना चाहिए. कई बार लोग छोटी-छोटी समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है. अगर पैरों में बार-बार सुन्नपन, झनझनाहट या दर्द की शिकायत हो रही है तो तुरंत डॉक्टर या फिजियोथैरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए. फिजियोथैरेपी का इलाज केवल मशीनों से ही नहीं होता, बल्कि कई मामलों में मैन्युअल थेरेपी और विशेष एक्सरसाइज के जरिए भी मरीज को राहत दी जाती है. About the Author Lalit Bhatt पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें Location : Ghaziabad,Ghaziabad,Uttar Pradesh First Published : March 16, 2026, 11:17 IST

हर दिन मखाना खाते हैं? ज्यादा सेवन से पेट और किडनी को हो सकता है नुकसान, जानिए जरूरी बातें

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Last Updated:March 14, 2026, 13:47 IST मखाना या फॉक्स नट्स एक पौष्टिक और हेल्दी स्नैक है, जो प्रोटीन, फाइबर और कैल्शियम से भरपूर होता है. यह सामान्यत: गर्भावस्था में भी सुरक्षित माना जाता है. हालांकि, अधिक मात्रा में सेवन करने से पाचन समस्याएं, एलर्जी और किडनी स्टोन जैसी दिक्कतें हो सकती हैं, इसलिए सेवन करते समय सावधानी बरतना जरूरी है. मखाने हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ कुछ हद तक नुकसानदायक भी हो सकते हैं. इनके अधिक सेवन से पेट में कब्ज, ब्लोटिंग और दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं. कैल्शियम और फाइबर की अधिकता के कारण यह किडनी स्टोन वाले लोगों के लिए हानिकारक हो सकते हैं. इसके अलावा, अत्यधिक पोटैशियम किडनी रोगियों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है, और बहुत ज्यादा मात्रा में सेवन से कुछ लोगों को एलर्जी या पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं. मखाने वैसे तो एक बहुत हेल्दी स्नैक हैं, लेकिन ज्यादा मात्रा में (30–60 ग्राम से अधिक) खाने से पेट फूलना, गैस, कब्ज और बदहजमी जैसी पाचन समस्याएं हो सकती हैं. मखानों में उच्च फाइबर होता है और पानी की मात्रा कम होती है, जो अधिक सेवन करने पर पाचन तंत्र पर दबाव डालता है. डॉक्टर गीतिका शर्मा के अनुसार, मखाने में उच्च फाइबर और प्रोटीन पाए जाते हैं. इनका अत्यधिक सेवन करने से पेट फूलना, गैस, कब्ज और अपच जैसी पाचन समस्याएं हो सकती हैं. मखाने पचने में समय लेते हैं और अधिक मात्रा में खाने से दस्त भी बढ़ सकते हैं. साथ ही, खाली पेट मखाने खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पेट दर्द हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google मखानों में ज्यादा नमक, मसाले या घी का इस्तेमाल हाई बीपी और हार्ट संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकता है. इसलिए मखानों का सेवन सीमित मात्रा में करें और कम नमक वाले विकल्प चुनें. अपने आहार में संतुलन बनाए रखें और हार्ट हेल्थ का ध्यान रखें. साथ ही, डॉक्टर की सलाह लेना भी उचित रहेगा. मखाना कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जिन्हें नट्स या बीजों से एलर्जी होती है. इसमें मौजूद उच्च स्टार्च और प्रोटीन की वजह से उन्हें खुजली, सूजन, सांस लेने में तकलीफ या पाचन संबंधी समस्याएं जैसे पेट दर्द और दस्त हो सकते हैं. मखानों में पोटैशियम और फास्फोरस पाया जाता है, जो किडनी की बीमारी वाले मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है. इसलिए किडनी की समस्या वाले लोगों को मखानों का सेवन सीमित करना चाहिए या डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और सही आहार चुनें. मखाने आमतौर पर गर्भावस्था में सुरक्षित और पौष्टिक माने जाते हैं. यह कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं. लेकिन बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने पर ये नुकसानदायक हो सकते हैं, जिससे कब्ज, ब्लोटिंग (पेट फूलना), किडनी स्टोन में वृद्धि और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. First Published : March 14, 2026, 13:47 IST

Health Tips: पेट दर्द से पाना है तुरंत राहत, आजमाएं ये आसान घरेलू उपाय, 5 मिनट में मिलेगा आराम

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Last Updated:March 13, 2026, 09:42 IST Home Remedies for Stomach Ailments: आजकल अनियमित खानपान और बदलती जीवनशैली के कारण पेट दर्द, गैस और अपच की समस्या आम होती जा रही है. ऐसे में लोग तुरंत दवाइयों का सहारा लेते है, जबकि घर में मौजूद कुछ साधारण चीजें भी राहत दिला सकती है. सुल्तानपुर में 20 वर्षों से अधिक अनुभव प्राप्त जनरल फिजिशियन डॉक्टर एस. बी. सिंह बताते है कि पेट दर्द में सबसे आसान और असरदार घरेलू नुस्खा हींग है. हींग को गर्म पानी में घोलकर पीने से गैस और अपच से होने वाला दर्द जल्दी कम हो सकता है. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते है, जो आंतों की सूजन को कम करने में मदद करते है. डॉक्टर के अनुसार अदरक भी पाचन के लिए फायदेमंद है. अदरक का सेवन करने से गैस, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. आज के समय में लोगों के गलत खान-पान और दिनचर्या के कारण पेट दर्द और अन्य पेट संबंधी समस्याएं आम हो गई है. अक्सर लोग इन समस्याओं के लिए अंग्रेजी दवाओं का सहारा लेते है जो तुरंत राहत तो देती है. लेकिन इनके साइड इफेक्ट्स भी होते है. अगर आपको भी बार-बार पेट दर्द की समस्या होती है तो आज हम आपको कुछ घरेलू उपाय बताएंगे जिनका इस्तेमाल करने से पेट दर्द ठीक हो जाएगा और इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होगा. तो आइए जानते है पेट दर्द से छुटकारा पाने के लिए क्या कहते है चिकित्सक. हींग है सबसे बेहतर उपायसुल्तानपुर में 20 वर्षों से अधिक अनुभव वाले जनरल फिजिशियन डॉक्टर एस बी सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि पेट दर्द के लिए हींग सबसे आसान और असरदार नुस्खा है. हींग को गर्म पानी में घोलकर पीने से गैस और अपच से होने वाला पेट दर्द तुरंत कम होता है. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते है जो आंतों की सूजन को घटाते है. इसी तरह अदरक का इस्तेमाल भी फायदेमंद है. अदरक की चाय या शहद के साथ अदरक का रस लेने से पाचन क्रिया सुधरती है और पेट दर्द से राहत मिलती है. पुदीना है रामबाणपुदीना भी पेट दर्द के लिए रामबाण माना जाता है. पुदीने के पत्तों का रस या पुदीना चाय गैस और अपच को दूर करने में सहायक है. इसमें मौजूद मेंथॉल आंतों को ठंडक देता है और मरोड़ कम करता है. वहीं, जीरा पानी भी बेहद फायदेमंद है. एक चम्मच जीरे को उबालकर उसका पानी पीने से अपच और एसिडिटी की समस्या खत्म होती है. यदि पेट दर्द कब्ज की वजह से है तो इसबगोल की भूसी या गुनगुना दूध लेना लाभकारी होता है. इसके अलावा हल्का गर्म पानी लगातार पीते रहना भी पेट दर्द में आराम पहुंचाता है, क्योंकि इससे पाचन तंत्र सक्रिय रहता है. यह है पारंपरिक तरीकापहले गांवों में पेट दर्द होने पर सौंफ और मिश्री का सेवन किया जाता था. यह पाचन को दुरुस्त करता है और गैस बनने से रोकता है. वहीं, हल्दी वाला दूध भी आंतों को संक्रमण से बचाकर पेट दर्द में राहत देता है. हालांकि, ध्यान रहे कि यदि पेट दर्द लगातार बना रहे या बहुत तेज हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. घरेलू नुस्खे केवल सामान्य दर्द, गैस, अपच और हल्के संक्रमण में ही कारगर होते है. About the Author Manish Rai काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh First Published : March 13, 2026, 09:42 IST

डायबिटीज और पेट के कीड़ों का दुश्मन ‘पलाश’, फूल-बीज और छाल में छिपे औषधीय गुण

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Last Updated:March 10, 2026, 19:49 IST Palash Flower Benefits: त्वचा संबंधी रोगों में पलाश काफी उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद में बताया गया है कि पलाश के बीज का पेस्ट लगाने से एक्जिमा और अन्य स्किन इन्फेक्शन में राहत मिल सकती है. इससे त्वचा का रूखापन और खुजली भी कम होती है. सीधी. फागुन आते ही आते ही विंध्य क्षेत्र में पलाश के फूलों की बहार आ जाती है. इसे ग्रामीण क्षेत्र में टेसू के फूल के नाम से भी जाना जाता है. चमकीले लाल और नारंगी रंग के ये फूल दूर से ही लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं. हालांकि लगातार हो रही जंगलों की कटाई के कारण अब पलाश के पेड़ों की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है. इसके बावजूद जहां भी पलाश के पेड़ दिखाई देते हैं, वहां की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है. पलाश के फूल जितने मनमोहक दिखाई देते हैं, उतने ही औषधीय गुणों से भी भरपूर माने जाते हैं. आयुर्वेद में पलाश के फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कई तरह की बीमारियों के इलाज में किया जाता है. छोटे घाव से लेकर त्वचा संबंधी रोगों और कई अन्य समस्याओं में भी इसका उपयोग लाभकारी माना जाता है. मध्य प्रदेश के सीधी के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर संतोष कुमार ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि प्राचीन समय से ही पलाश के फूलों का उपयोग होली के प्राकृतिक रंग बनाने में किया जाता रहा है. होली के कई दिन पहले लोग इन फूलों को पानी में भिगो देते थे. इसके बाद उन्हें उबालकर ठंडा किया जाता था, जिससे हल्का नारंगी रंग तैयार हो जाता था. यह प्राकृतिक रंग त्वचा के लिए सुरक्षित माना जाता है. पलाश के बीजों में एंटी वर्मडॉ संतोष कुमार के अनुसार, पलाश के बीजों में एंटी वर्म यानी कृमिनाशक गुण पाए जाते हैं. इसी वजह से इसका उपयोग पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए किया जाता है. पलाश के बीज का पाउडर नियमित रूप से लेने से पेट के संक्रमण में भी राहत मिल सकती है. इसके अलावा पलाश के फूलों में एस्ट्रिंजेंट गुण मौजूद होता है, जो दस्त जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है. मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायकउन्होंने कहा कि पलाश में एंटी हाइपरग्लाइसेमिक गुण भी पाए जाते हैं, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं. इसके सेवन से शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है. वहीं पलाश के पत्तों में टिक्ता गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में कफ और पित्त को कम करने में सहायक होते हैं. इससे शरीर का चयापचय बेहतर होता है और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है. डॉ संतोष कुमार के मुताबिक, गलत खानपान के कारण जब रक्त दूषित होने लगता है, तब पलाश की छाल का उपयोग खून को साफ करने के लिए किया जाता है. यह शरीर के अंदर से रक्त को शुद्ध करने में मदद करती है और दूषित रक्त से होने वाली बीमारियों से बचाव करती है. त्वचा संबंधी रोगों में उपयोगीत्वचा संबंधी रोगों में भी पलाश काफी उपयोगी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, पलाश के बीज का पेस्ट लगाने से एक्जिमा और अन्य स्किन इन्फेक्शन में राहत मिल सकती है. इससे खुजली और त्वचा का रूखापन भी कम होता है. इसके अलावा पलाश के बीज का काढ़ा घाव भरने में भी सहायक माना जाता है. पलाश के फूल को गुलाब जल के साथ पीसकर घाव पर लगाने से रक्तस्राव रुकने में मदद मिलती है और घाव जल्दी भरने लगता है. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : March 10, 2026, 19:49 IST

Health Tips: मौसम बदलते ही बढ़ा जुकाम-बुखार का खतरा, एक्सपर्ट से जानें कैसे रखें खुद का ख्याल

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Last Updated:March 10, 2026, 11:34 IST Health Tips: मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव बताते है कि अगर आपको वसंत के इस मौसम में जुकाम और बुखार हो रहा है तो काली मिर्च, सोंठ और पिपल को मिक्सर में अच्छी तरह पीसकर पाउडर तैयार कर लें. इस पाउडर को चाय या काढ़े के माध्यम से सुबह और शाम कम से कम 5 से 6 दिन तक पिएं. इससे आपका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होगा और जुकाम और बुखार से राहत मिलेगी. सर्दी का मौसम विदा ले रहा है और गर्मी का मौसम दस्तक देने लगा है. दिन में तेज धूप और रात में ठंड का अनुभव हो रहा है. ऐसे में रात में बाइक से यात्रा करने वालों को ठंडी हवा से परेशानी हो रही है. सुबह और शाम की ठंड और दिन की गर्मी की वजह से लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, जिससे उन्हें जुकाम और बुखार तेजी से हो रहा है. यदि आप भी इस बदलते मौसम का शिकार हो गए है और आपको जुकाम और बुखार हो गया है तो हम आयुर्वेदिक चिकित्सक से जानेंगे कि इसे ठीक करने के क्या घरेलू उपाय है और इस तरह के मौसम में खुद को कैसे बचाएं. मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव बताते है कि अगर आपको वसंत के इस मौसम में जुकाम और बुखार हो रहा है तो काली मिर्च, सोंठ और पिपल को मिक्सर में अच्छी तरह पीसकर पाउडर तैयार कर लें. इस पाउडर को चाय या काढ़े के माध्यम से सुबह और शाम कम से कम 5 से 6 दिन तक पिएं. इससे आपका इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होगा और जुकाम और बुखार से राहत मिलेगी. अगर आप इसे शहद के साथ लेते है तो यह और जल्दी फायदा करेगा. इस वजह से हो रहा जुकाम बुखार इस समय सर्दी का मौसम समाप्त हो रहा है. लेकिन दिन में तेज धूप से तापमान बढ़ गया है. जिससे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है. दिन में गर्मी और सुबह-शाम की ठंड की वजह से जुकाम और बुखार की समस्या बढ़ रही है. सुबह शाम पहनें गर्म कपड़ा अगर आप सुबह और शाम बाहर टहल रहे है या बाइक चला रहे है तो अपने कपड़ों का ध्यान रखें. थोड़ी सी धूप के बाद लोग गर्म कपड़े कम कर देते है और गर्मियों के कपड़े पहन लेते है. जब तक लगातार कुछ दिनों तक धूप न निकलने लगे, तब तक सर्दी के कपड़े पहनते रहें. यह भी है महत्वपूर्ण इन उपायों के अलावा, अगर आप गिलोय का रस हल्के गुनगुने पानी के साथ सेवन करते है तो इससे भी जुकाम और बुखार से राहत मिलेगी. अदरक का रस भी सर्दी और जुकाम से राहत देता है. ये उपाय शरीर को किसी साइड इफेक्ट से बचाते है और सर्दी में फायदा देते है. About the Author Manish Rai काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh First Published : March 10, 2026, 11:34 IST

भगवान भी खुश, भक्त भी हेल्दी…ये पत्ता इतना चमत्कारी, शरीर के तीनों दोषों का दुश्मन, चबाते ही तुरंत राहत – Uttar Pradesh News

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Last Updated:February 24, 2026, 20:48 IST बेलपत्र भोलेनाथ का प्रिय है, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि बेलपत्र हमारे शरीर के लिए भी जादुई है, खासकर पाचन, मधुमेह और इम्युनिटी के लिए. लोकल 18 से बात करते हुए सुल्तानपुर के आयुष चिकित्सक डॉ. हर्ष बताते हैं कि सुबह खाली पेट 2-3 ताजी पत्तियां चबाने से कब्ज, पेट के कीड़े, दस्त और एसिडिटी दूर होती है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. यह ब्लड शुगर, उच्च रक्तचाप (BP) और हृदय स्वास्थ्य को भी नियंत्रित करता है. डॉ. हर्ष कहते हैं कि बेलपत्र शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ तीनों को शांत करता है. सहारनपुर. बेलपत्र भगवान शिव का प्रिया माना जाता है. इसे शिवलिंग के ऊपर जलाभिषेक के दौरान चढ़ाया जाता है. बेलपत्र मानव शरीर के लिए भी चमत्कारी है. बेल के पौधे पर आने वाला फल भी हमारे पेट के लिए रामबाण हैं. ये शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं. बेल के पत्ते भी रामबाण से कम नहीं हैं. बेलपत्र से कई आयुर्वेदिक दवाइयां भी बनाई जाती हैं. अगर आपको बेल का फल नहीं मिल रहा तो बेलपत्र से भी शरीर को ठंडक पहुंचा सकते हैं. इससे पेट की समस्या से तुरंत छुटकारा मिलता है. बेलपत्र मधुमेह नियंत्रण और इम्युनिटी बढ़ाने में भी काम आता है. लोकल 18 से बात करते हुए सुल्तानपुर के आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बीएएमएस/ एमडी डॉ. हर्ष बताते हैं कि बेलपत्र ब्लड शुगर, उच्च रक्तचाप (BP) और हृदय स्वास्थ्य को भी ठीक रखता है. बेलपत्र से बनी हुई कई आयुर्वेदिक दवाइयां मार्केट में उपलब्ध हैं. घर पर भी इससे दवा बना सकते हैं. सुबह खाली पेट 2-3 ताजी पत्तियां चबाने से कब्ज, पेट के कीड़े, दस्त और एसिडिटी दूर होती है. इसके पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. इसमें भी फायदा डॉ. हर्ष के मुताबिक, बेलपत्र शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ तीनों का शमन करता है. गर्मी में डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है, बेलपत्र इससे बचाता है. हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए भी बेलपत्र का सेवन लाभदायक है. जिनका लिपिड प्रोफाइल गड़बड़ हो जाता है, कोलेस्ट्रॉल लेवल मेंटेन नहीं रहता, उनके लिए भी बेलपत्र रामबाण है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Saharanpur,Uttar Pradesh First Published : February 24, 2026, 20:48 IST

कब्ज के कारण और प्राकृतिक उपाय जानें, पेट साफ रखने के लिए जरूरी टिप्स.

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कब्ज आजकल की लाइफस्टाइल से जुड़ी एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है. लोग इसे छोटी बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सच यह है कि अगर पेट रोज साफ न हो तो शरीर में कई तरह की दिक्कतें शुरू हो सकती हैं. गैस, एसिडिटी, मुंह के छाले, मुंह से बदबू, स्किन एलर्जी और सिरदर्द जैसी परेशानियां अक्सर कब्ज से ही जुड़ी होती हैं. कब्ज कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि हमारी बड़ी आंत यानी लार्ज इंटेस्टाइन की सुस्ती का संकेत है. इसलिए जरूरी है कि इसके कारणों को समझकर सही समय पर प्राकृतिक उपाय अपनाए जाएं. हमारी गलत आदतें ही कब्ज की सबसे बड़ी वजह बनती हैं. कम पानी पीना, फाइबर की कमी, देर रात तक जागना और खाना, सुबह देर से उठना, पूप को जबरदस्ती रोकना और टॉयलेट में मोबाइल लेकर लंबे समय तक बैठे रहना – ये सभी कारण आंतों की नैचुरल प्रक्रिया को बिगाड़ देते हैं. इसके अलावा मानसिक तनाव भी पाचन तंत्र के काम को स्लो कर देता है. जब आंतों की मूवमेंट कम हो जाती है तो स्टूल सख्त हो जाता है और बाहर निकलने में दिक्कत होती है. धीरे-धीरे यही समस्या पुरानी कब्ज का रूप ले लेती है. 1. सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीनासुबह उठते ही खाली पेट कम से कम दो गिलास गुनगुना पानी पीना बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह हमारे पाचन तंत्र को धीरे-धीरे सक्रिय करता है और आंतों की मूवमेंट को बढ़ाता है. गुनगुना पानी कोलन रिफ्लेक्स को एक्टिव करता है, जिससे स्टूल पास करना आसान हो जाता है. कई लोग पानी तो पीते हैं, लेकिन सही मात्रा और नियमितता नहीं रखते. अगर रोजाना एक ही समय पर पानी पिया जाए तो शरीर की अंदरूनी घड़ी सेट हो जाती है और पेट साफ होने की आदत बन जाती है. 2. इसबगोल यानी सिलियम हस्क का सही इस्तेमालइसबगोल में घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जो स्टूल को भारी और नरम बनाता है. रात को सोने से पहले एक से दो चम्मच इसबगोल गुनगुने पानी या दूध के साथ लेने से सुबह पेट साफ होने में मदद मिलती है. यह आंतों की सफाई में सहायक होता है और लंबे समय से चल रही कब्ज में भी राहत देता है. हालांकि इसे नियमित मात्रा में ही लेना चाहिए और ज्यादा मात्रा से बचना चाहिए. यह कोलन की सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है. 3. फाइबर से भरपूर भोजन शामिल करेंकब्ज से बचने के लिए रोजाना के खाने में फाइबर शामिल करना बहुत जरूरी है. हरी पत्तेदार सब्जियां, सलाद, पपीता, सेब, नाशपाती, दालें और साबुत अनाज आंतों को मजबूत बनाते हैं. फाइबर स्टूल में पानी को बनाए रखता है, जिससे वह सख्त नहीं होता और आसानी से बाहर निकल जाता है. अगर डाइट में जंक फूड ज्यादा और प्राकृतिक आहार कम है तो कब्ज की समस्या बार-बार हो सकती है. इसलिए संतुलित और फाइबर युक्त आहार अपनाना जरूरी है. 4. नियमित व्यायाम और सुबह की सैरशारीरिक गतिविधि कम होने से भी कब्ज बढ़ती है. रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट तेज चाल से चलना, योग या हल्की एक्सरसाइज करना पाचन तंत्र को सक्रिय रखता है. खासतौर पर सुबह की सैर आंतों की मूवमेंट को बेहतर बनाती है. जो लोग पूरा दिन बैठकर काम करते हैं, उन्हें बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना चाहिए. इससे पाचन तंत्र सुस्त नहीं पड़ता. 5. तनाव कम करें और सही दिनचर्या अपनाएंमानसिक तनाव सीधे तौर पर पाचन तंत्र को प्रभावित करता है. ज्यादा चिंता या तनाव होने पर आंतों की गति धीमी हो जाती है. समय पर सोना, सुबह जल्दी उठना और मल त्याग के लिए नियमित समय तय करना बहुत जरूरी है. टॉयलेट में मोबाइल का इस्तेमाल करने से बचें और ज्यादा देर तक न बैठें. जब दिनचर्या संतुलित होती है तो पेट भी लंबे समय तक स्वस्थ रहता है.

पेट और ब्रेन के तनाव को दूर करता है त्रिफला चूर्ण! आयुर्वेदिक डॉक्टर ने बताए फायदे, घर पर बनाने का तरीका – Madhya Pradesh News

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Last Updated:February 22, 2026, 16:48 IST Triphala Powder Making Mehtod: कब्ज दूर करने के अलावा, आयुर्वेद में कई रोगों को दूर करने के लिए सबसे अधिक त्रिफला चूर्ण का प्रयोग होता है. इसे घर पर बनाना भी आसान है. तो आइए मध्य प्रदेश रीवा में स्थित आयुर्वेदिक हॉस्पिटल के डॉक्टर से जानते हैं त्रिफला के फायदे और इसे तैयार करने की विधि… Health Tips: आयुर्वेद में सबसे अधिक जिस हर्बल का प्रयोग होता है, वह है त्रिफला चूर्ण. यह मुख्य रूप से तीन प्रकार की जड़ी-बूटियों से मिल कर तैयार होता है. यह कई प्रकार के रोगों को दूर कर शरीर को स्वस्थ बनाता है, इसलिए आयुर्वेद में सबसे अधिक त्रिफला चूर्ण का ही प्रयोग होता है. रीवा आयुर्वेद हॉस्पिटल के चिकित्सक डाॅ. अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि इस चूर्ण पर सबसे अधिक रिसर्च हुए हैं. इसे घर पर भी बनाया जा सकता है. आइए जानते हैं कि त्रिफला चूर्ण के फायदे और घर पर तैयार करने की विधि… त्रिफला चूर्ण के तत्वत्रिफला चूर्ण को पॉली हर्बल भी कहा जाता है. इसमें आंवला, बहेड़ा और हडरा (हरितकी) को शामिल किया जाता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, मिनरल्स, सोडियम, आहार फाइबर के अलावा शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट गैलिक एसिड, चेबुलजिक एसिड भी पाए जाते हैं. बायोएक्टिव फ्लेवोनोइड्स जैसे कि क्वेरसेटिन और ल्यूटोलिन, सैपोनिन्स, एंथ्राक्विनोन, अमीनो एसिड, फैटी एसिड भी पाए जाते हैं. इसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, गैस्ट्रिक हाइपरएसिडिटी में कमी, एंटीपायरेटिक, एनाल्जेसिक, एंटी बैक्टीरियल, एंटीमुटाजेनिक गुण पाए जाते हैं. इसमें हाइपोग्लाइसेमिक, एंटीकैंसर, हेपेटोप्रोटेक्टिव, केमोप्रोटेक्टिव, रेडियोप्रोटेक्टिव भी पाए जाते हैं. कितना फायदेमंद त्रिफला चूर्णडॉक्टर के अनुसार, त्रिफला भोजन के उचित पाचन और अवशोषण को भी बढ़ावा दे सकता है. सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकता है. परिसंचरण में सुधार कर सकता है. पित्त नलिकाओं को शिथिल कर सकता है. यह होमियोस्टैसिस को बनाए रख सकता है. त्रिफला गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य में उपयोग के लिए सबसे प्रसिद्ध है. त्रिफला के जलीय और अल्कोहल-आधारित दोनों अर्क दस्त को रोकते हैं. तनाव कम करता है पशु अध्ययनों से पता चला है कि त्रिफला ठंड से प्रेरित तनाव से बचाता है. तनाव से प्रेरित व्यवहार परिवर्तन और जैव रासायनिक परिवर्तन जैसे कि लिपिड पेरोक्सीडेशन और कॉर्टिकोस्टेरोन के स्तर में वृद्धि करता है. इसके एंटीऑक्सिडेंट गुण तनाव को कम करने में सक्षम हैं. डायबिटीज में भी फायदेमंदएक पशु अध्ययन में त्रिफला को 10 सप्ताह के लिए मोटापे से ग्रस्त चूहों को दिया गया. इससे शरीर में वसा का संचयन, वजन कम हुआ. इससे कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल को भी कम किया गया. शुगर की दवा के साथ त्रिफला का सेवन फास्टिंग ब्लड शुगर और फास्टिंग सीरम इंसुलिन का लेवल भी कम हो गया. इस विधि से तैयार करें त्रिफला चूर्ण आयुर्वेद विशेषज्ञ के अनुसार, त्रिफला चूर्ण बनाने के लिए तीन तरह की जड़ी-बूटियों का प्रयोग किया जाता है. ये हैं हरड़, बहेड़ा और आंवला. इसे बनाने के लिए 1 भाग हरड़, 2 भाग बहेड़ा और 3 भाग आंवला लें. चूर्ण बनाने के लिए यह जरूरी है कि इन तीनों को खूब सुखाया जाए. सूखने के बाद आप आसानी से इनमें मौजूद गुठली को निकाल कर अलग कर सकती हैं. अब ये तीनों सामग्री चूर्ण बनने के लिए तैयार हैं. अब इन तीनों को खूब बारीक पीसकर उसका चूर्ण बना लें. लीजिए आपका त्रिफला चूर्ण तैयार हो गया है. इस चूर्ण को एयर टाइट कंटेनर में रख लें. रोज रात में सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण लें. सुबह इसका सेवन कर रहे हैं तो शहद के साथ ले सकते हैं. About the Author Rishi mishra एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें Location : Rewa,Madhya Pradesh First Published : February 22, 2026, 16:48 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

सूजन से लेकर वेट लॉस तक…कच्ची हल्दी सेहत का सोना, इम्युनिटी बूस्टर के लिए वरदान – Uttar Pradesh News

इम्युनिटी बूस्टर

Last Updated:February 20, 2026, 23:56 IST भारतीय रसोई में आसानी से मिलने वाली कच्ची हल्दी इन दिनों सेहत की दुनिया में फिर सुर्खियां बटोर रही है. आयुर्वेद में इसे संजीवनी समान कहा गया है. इसमें करक्यूमिन और शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर को भीतर से मजबूत बनाते हैं. यह कई रोगों से निजात दिला सकती है. कच्ची हल्दी को इम्यूनिटी बूस्टर कहा गया है. इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो संक्रमण से बचाव में सहायक होते हैं. इसके नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे मौसमी बीमारियों के खतरे की संभावना कम रहती हैं. कच्ची हल्दी जोड़ों के दर्द और सूजन से परेशान लोगों के लिए भी फायदेमंद होती है. इसकी सूजनरोधी क्षमता गठिया जैसी समस्याओं में राहत दे सकती है. कच्ची हल्दी के करक्यूमिन तत्व सूजन को कम करने में मदद करते है, जिससे जोड़ों की जकड़न और दर्द में आराम मिलता हैं. कच्ची हल्दी का पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी योगदान बेहद महत्वपूर्ण है. यह गैस, अपच और ब्लोटिंग जैसी दिक्कतों को कम करने में लाभकारी सिद्ध हो सकती है. इसके नियमित सेवन से आंतों की कार्यप्रणाली बेहतर होती है और पेट हल्का महसूस होता है, जिससे दिनभर शरीर ऊर्जावान रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ वंदना तिवारी के अनुसार, कच्ची हल्दी की भूमिका शरीर को डिटॉक्स करने में खास मानी जाती है. यह लिवर की कार्यक्षमता को समर्थन दे सकती है और शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मददगार साबित हो सकती है. खून को साफ करने में भी इसके गुण उपयोगी होते हैं, जिससे त्वचा पर भी सकारात्मक असर दिखता है. कच्ची हल्दी का गुनगुना दूध या काढ़ा सर्दी-खांसी या गले में खराश को दूर करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसकी तासीर गर्म होती है, जो गले को आराम देने में सहायक हो सकती है. कई घरों में बदलते मौसम में इसे रोगों से बचाव के उपाय के तौर पर प्रयोग किया जाता है. कच्ची हल्दी एक शानदार औषधि है. वजन को कंट्रोल करने में भी कच्ची हल्दी लाभकारी है. यह मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है, जिससे कैलोरी बर्न की प्रक्रिया शानदार होती है. यही नहीं, कच्ची हल्दी सूजन कम करने और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भी बहुत उपयोगी हैं, क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं. कच्ची हल्दी को कद्दूकस कर दूध में उबालकर, चाय में मिलाकर या सुबह गुनगुने पानी के साथ सेवन जा सकता है. हालांकि, यदि किसी को पित्त की पथरी, मधुमेह या खून पतला करने वाली दवाएं चल रही हों, तो सेवन से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट से सलाह जरूरी ले. क्योंकि किन्हीं परिस्थितियों में यह हानिकारक भी हो सकती हैं. First Published : February 20, 2026, 23:56 IST