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Last Updated:April 08, 2026, 14:24 IST Summer Health Drink: महंगे सप्लीमेंट को टक्कर दे रहा है बिहार का यह देसी प्रोटीन पाउडर. गर्मी की दस्तक के साथ मधुबनी के बाजारों में सत्तू की डिमांड बढ़ी. जानिए डॉ. सुमन कुमार से कि कैसे महज एक गिलास सत्तू आपको लू से बचाने, वजन घटाने और दिन भर ऊर्जावान रखने में जादुई असर दिखाता है. मधुबनी: जैसे-जैसे सूरज के तेवर तल्ख हो रहे हैं और गर्मी ने दस्तक दी है. मधुबनी के बाजारों में एक खास चीज की डिमांड तेजी से बढ़ गई है वह है सत्तू. बिहार की संस्कृति और खान-पान का अभिन्न हिस्सा रहे सत्तू को न केवल स्वाद बल्कि सेहत के लिहाज से भी सुपरफूड माना जाता है. स्थानीय चिकित्सक डॉ.सुमन कुमार के अनुसार सत्तू वर्तमान समय में मांसपेशियों की रिकवरी और गर्मी से बचाव का सबसे सस्ता और प्रभावी विकल्प है. गरीबों का प्रोटीन पाउडर और इसके गुणसत्तू को अक्सर गरीबों का प्रोटीन पाउडर कहा जाता है. लेकिन इसके फायदे किसी भी महंगे सप्लीमेंट से कम नहीं हैं. डॉ.सुमन बताते हैं कि सत्तू फाइबर, आयरन और कैल्शियम का बेहतरीन स्रोत है. यह मांसपेशियों की रिकवरी में सहायक होता है. शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है. इसमें मौजूद हाई-फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है. वजन घटाने की चाहत रखने वालों के लिए यह एक वरदान है. गर्मी में क्यों है सबसे ज्यादा कारगर?डॉ.सुमन कुमार के मुताबिक गर्मी के मौसम में सत्तू का सेवन कई कारणों से विशेष है. इसकी तासीर ठंडी होती है. ये चिलचिलाती धूप में शरीर के तापमान को नियंत्रित रखती है. लू लगने के खतरे को कम करती है. अगर आप सुबह काम पर निकलते समय कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन जैसे चावल या रोटी खाते हैं, तो वह जल्दी पच जाता है. कुछ ही घंटों में फिर से भूख लगने लगती है. यदि आप एक-दो गिलास सत्तू पीकर निकलते हैं. तो यह 4 से 5 घंटे तक पेट को भरा रखता है. यह शरीर को हल्का महसूस कराता है. लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखता है. जब सत्तू के घोल में नींबू का रस मिलाया जाता है, तो शरीर को विटामिन-सी की भरपूर खुराक मिलती है. जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है. सर्दियों में परहेज क्यों?डॉक्टर का कहना है कि ठंड के मौसम में सत्तू के अत्यधिक सेवन से बचना चाहिए. क्योंकि इसकी तासीर बहुत ठंडी होती है. जिससे सर्दी-जुकाम होने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि, मौजूदा समय में जब मधुबनी के हर चौक-चौराहे, स्टेशन और घरों में सत्तू की मांग बढ़ी है. तो यह सेहत बनाने का सबसे सही समय है. अन्य पौष्टिक विकल्पडॉ.सुमन कुमार सलाह देते हैं कि सत्तू के अलावा इस मौसम में काबुली चना, राजमा और विभिन्न प्रकार की दालों को भी भोजन में शामिल करना चाहिए, ताकि शरीर को पर्याप्त प्रोटीन मिल सके. सत्तू को चाहें आप लिट्टी के रूप में खाएं या नमक, प्याज और नींबू के साथ घोल बनाकर पिएं, यह हर रूप में सेहत की जान है. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें Location : Madhubani,Bihar First Published : April 08, 2026, 14:24 IST
Poplar Leaves Benefits: मुंहासे से लेकर जोड़ों के दर्द तक…. पॉपुलर के पत्तों के चौंकाने वाले फायदे, ऐसे करें इस्तेमाल

Last Updated:April 07, 2026, 16:36 IST पॉपुलर के पत्ते न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनके औषधीय गुण भी अद्भुत हैं. इसमें पाए जाने वाले एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण मुंहासे, खुजली, घाव और दाग-धब्बों को कम करने में मदद करते हैं, जिससे यह एक प्राकृतिक और रामबाण घरेलू उपचार बन जाता है. पॉपुलर के पत्ते मुख्य रूप से अपनी लकड़ी (प्लाईवुड, माचिस) के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन इसके औषधीय गुण भी कम नहीं हैं. पत्तों और छाल में सूजनरोधी और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से त्वचा रोगों या दर्द निवारक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. यह पेड़ मुख्य रूप से व्यावसायिक उद्देश्य से उगाया जाता है और 5-7 साल में उपयोग के लिए तैयार हो जाता है. डॉक्टर विनीत शर्मा के अनुसार पॉपुलर (चिनार) के पत्ते और विशेषकर उसकी चिपचिपी कलियां औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं. ये श्वसन संबंधी समस्याओं जैसे खांसी और ब्रोंकाइटिस, दर्द निवारण, सूजन कम करने और त्वचा के घाव ठीक करने में सहायक हैं. इनमें सैलिसिन जैसे यौगिक पाए जाते हैं, जो जोड़ों के दर्द और गठिया में राहत देते हैं. इसके अर्क का उपयोग त्वचा की जलन और बवासीर के उपचार में भी किया जाता है. पॉपुलर के पत्ते और कलियाँ त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं. ये मुख्य रूप से सूजन, खुजली, मुंहासे और घावों को ठीक करने में मदद करती हैं. इनमें सैलिसिन, फ्लेवोनोइड्स और फिनोलिक एसिड जैसे सूजन-रोधी और एंटीसेप्टिक गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा की बीमारियों और सनबर्न में राहत प्रदान करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google पॉपुलर के पत्ते और पेड़ मुख्य रूप से कृषि-वानिकी के लिए फायदेमंद हैं, न कि सीधे तौर पर घरेलू उपचार के लिए. यह एक तेजी से बढ़ने वाला पेड़ है, जो 5-7 साल में अच्छी कमाई देता है. हालांकि, इसके पत्तों का उपयोग मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने (खाद के रूप में) और अन्य कृषि संबंधी लाभों के लिए किया जा सकता है. पॉपुलर के पेड़ के पत्ते और छाल का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में खांसी, जुकाम और श्वसन नली की समस्याओं को कम करने के लिए किया जाता है. यह पेट में सूजन, घाव और कुछ मामलों में जोड़ों के दर्द में भी राहत देने में सहायक माना जाता है. इसके अर्क में सूजन-रोधी गुण होते हैं, जो सांस लेने में आसानी प्रदान करते हैं. पॉपुलर के पेड़ के पत्ते, छाल और कलियों में दर्द और सूजन कम करने वाले गुण पाए जाते हैं, जो मुख्य रूप से सैलिसिन के कारण होते हैं. यह प्राकृतिक दर्द निवारक के रूप में काम करता है और गठिया, मांसपेशियों के दर्द और जोड़ों की सूजन में राहत प्रदान करने के लिए उपयोग किया जा सकता है. पॉपुलर के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो मुंहासे, खुजली और घाव जैसी त्वचा समस्याओं में बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनके पत्तों का पेस्ट या रस दाग-धब्बे कम करने, त्वचा को गहराई से साफ करने और प्राकृतिक निखार लाने में मदद करता है. यह त्वचा के रोगों में एक रामबाण घरेलू उपचार माना जाता है. First Published : April 07, 2026, 15:13 IST
Tej Patta Health Benefits | natural ayurvedic remedies for health | तेज पत्ता के फायदे | home remedies for cough cold hindi |

Last Updated:April 06, 2026, 19:19 IST Tej Patta Health Benefits: पहाड़ों के खान-पान का अहम हिस्सा रहने वाला तेज पत्ता सिर्फ मसालों की खुशबू तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद का एक शक्तिशाली खजाना है. डॉ. ऐजल पटेल के अनुसार, रोजाना तेज पत्ते का इस्तेमाल पाचन सुधारने से लेकर डायबिटीज कंट्रोल करने और दिल को सेहतमंद रखने में जादू की तरह काम करता है. एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर यह पत्ता न केवल सर्दी-खांसी जैसे मौसमी संक्रमणों से लड़ता है, बल्कि मानसिक तनाव दूर कर बेहतर नींद लाने में भी मददगार है. तेज पत्ता पाचन शक्ति को बढ़ाने में बेहद सहायक होता है. इसमें ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो पेट में गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं को कम करते हैं. नियमित रूप से इसका सेवन करने से खाना आसानी से पचता है, पेट हल्का महसूस होता है. पहाड़ी क्षेत्रों में लोग इसे खाने में शामिल कर पाचन संबंधी दिक्कतों से बचते हैं. डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि पाचन अग्नि को तेज करता है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है, कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है. तेज पत्ता डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद तत्व ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करते हैं. रोजाना सीमित मात्रा में तेज पत्ते का सेवन इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बना सकता है. कई लोग तेजपत्ते का पाउडर या काढ़ा बनाकर इसका सेवन करते हैं. हालांकि, इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह के साथ करना अधिक सुरक्षित रहता है. संतुलित आहार और नियमित जीवनशैली के साथ तेज पत्ता डायबिटीज नियंत्रण में सहायक हो सकता है. तेज पत्ते में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो सर्दी-खांसी और गले की खराश में राहत देने में मदद करते हैं. इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से गले को आराम मिलता है, बलगम कम होता है. पहाड़ों में ठंड के मौसम में लोग इसका उपयोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. यह शरीर को अंदर से गर्म रखने में भी मदद करता है. नियमित सेवन से मौसमी बीमारियों से बचाव होता है, इम्यूनिटी मजबूत बनती है. Add News18 as Preferred Source on Google तेज पत्ते में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं. जोड़ों के दर्द या गठिया जैसी समस्याओं में इसका सेवन फायदेमंद हो सकता है. इसके तेल या लेप का उपयोग भी दर्द वाले स्थान पर किया जाता है. यह मांसपेशियों को आराम देने और सूजन कम करने में सहायक होता है. आयुर्वेद में इसे दर्द निवारक गुणों वाला माना गया है, जो शरीर को अंदर से राहत प्रदान करता है. तेज पत्ता दिल को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं. नियमित सेवन से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है. इसलिए इसे संतुलित मात्रा में आहार में शामिल करना दिल के लिए फायदेमंद माना जाता है. तेज पत्ते की चाय मानसिक तनाव को कम करने में मददगार होती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व दिमाग को शांत करते हैं और चिंता को कम करने में सहायक होते हैं. दिनभर की थकान के बाद इसका सेवन करने से शरीर और मन दोनों को आराम मिलता है. यह नींद को बेहतर बनाने में भी मदद करता है. पहाड़ी इलाकों में लोग इसे हर्बल चाय के रूप में पीते हैं, जिससे मानसिक शांति और सुकून मिलता है. तेज पत्ते में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं, जो त्वचा से जुड़ी समस्याओं में फायदेमंद होते हैं. इसके पत्तों का पेस्ट बनाकर लगाने से फोड़े-फुंसी और संक्रमण में राहत मिलती है. यह त्वचा को साफ रखने और बैक्टीरिया से बचाने में मदद करता है. नियमित उपयोग से त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनती है. प्राकृतिक उपचार के रूप में यह सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है. तेज पत्ता शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने और वजन को संतुलित करने में मदद करता है. आयुर्वेद में इसे अग्नि बढ़ाने वाला माना गया है, जो शरीर के अंदर भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया को तेज करता है. नियमित सेवन से शरीर सक्रिय रहता है, थकान कम महसूस होती है. स्वस्थ जीवनशैली के लिए इसे सीमित मात्रा में शामिल करना फायदेमंद है. First Published : April 06, 2026, 19:19 IST
Summer Fruit Benefits: गर्मी में तुरंत ताजगी और हेल्थ का बूस्टर! जानें ये 5 फल जो शरीर को ठंडक और पोषण देंगे

Last Updated:April 06, 2026, 18:03 IST गर्मियों का मौसम ताजगी और स्वाद से भरे फलों का समय है. ये फल न सिर्फ स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि शरीर को ठंडक, ऊर्जा और पोषण भी प्रदान करते हैं. आइए जानते हैं पांच ऐसे फल जो गर्मियों में जल्दी आनंद और स्वास्थ्य दोनों देते हैं लीची, अनानास, चेरी, आलूबुखारा और जामुन. गर्मी के मौसम में ताजे और स्वादिष्ट फल आते हैं, जो न सिर्फ स्वाद में अच्छे हैं बल्कि शरीर को ठंडक और जरूरी पोषण भी देते हैं. कुछ फल सीमित समय के लिए ही मिलते हैं, इसलिए इन्हें समय रहते खाया जाना चाहिए. ये फल शरीर में पानी की कमी को पूरा करते हैं और गर्मी से होने वाली परेशानियों से बचाते हैं. आइए जानते हैं ऐसे पांच फल जो जल्दी आनंद दे जाते हैं. लीची: गर्मियों का पसंदीदा फल, छोटा, मीठा और रसीला. इसमें भरपूर विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं. लीची शरीर को हाइड्रेट रखती है, पाचन सुधारती है और गर्मी में ठंडक व थकान कम करती है. अनानास: खट्टा-मीठा स्वाद वाला यह फल बाहर से सख्त, अंदर से रसदार और फायदेमंद है. इसमें ब्रोमेलिन एंजाइम होता है, जो पाचन में मदद करता है और पेट की समस्याएं कम करता है. अनानास में सूजन कम करने वाले गुण भी हैं. इसे सीधे खाया जा सकता है या सलाद में मिलाकर ताजा और चटपटा स्वाद लिया जा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google चेरी: छोटे लाल और आकर्षक फल, स्वाद में बेहद लाजवाब. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, ये शरीर को बीमारियों से बचाते हैं और सूजन कम करते हैं. चेरी खाने से नींद भी अच्छी आती है, इसलिए इसे स्नैक के रूप में लेना हेल्दी विकल्प है. आलूबुखारा: खट्टा-मीठा और रसदार फल, जिसे कई जगह बेर भी कहते हैं. यह पोषक तत्वों और फाइबर से भरपूर होता है, पाचन को मजबूत बनाता है और कब्ज दूर करता है. आलूबुखारा त्वचा के लिए भी फायदेमंद है और चेहरे पर निखार लाने में मदद करता है. इसकी प्राकृतिक मिठास इसे हेल्दी डाइट का बेहतरीन हिस्सा बनाती है. जामुन: गहरे बैंगनी और खट्टा-मीठा स्वाद वाला यह फल गर्मियों में मिलता है. जामुन ब्लड शुगर नियंत्रित करता है, पाचन मजबूत बनाता है और शरीर को ठंडक देता है. यह गर्मी से राहत देता है और स्वाद के साथ बचपन की यादें भी ताजा करता है. First Published : April 06, 2026, 18:03 IST
Gond Katira Health Benefits; Fiber Rich Digestion Improvement Foods

Hindi News Lifestyle Gond Katira Health Benefits; Fiber Rich Digestion Improvement Foods | Side Effects 25 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक गर्मियों में शरीर को कूल और एनर्जेटिक बनाए रखना चैलेंजिंग होता है। इसके लिए लोग तरह-तरह के ड्रिंक्स और फूड का सहारा लेते हैं। लेकिन बाजार के शुगरी और कैफीन युक्त ड्रिंक्स सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि प्रकृति ने कुछ ऐसी चीजें दी हैं, जो गर्मी के मौसम में हमें कूल रखने में मदद करती हैं। इन्हीं में एक गोंद कतीरा है। यह एस्ट्रागलस (Astragalus) प्रजाति के पौधों से निकाला जाता है। आयुर्वेद में सदियाें से इसका इस्तेमाल शरीर को ठंडा रखने और पाचन सुधारने के लिए किया जाता रहा है। रिसर्च जर्नल ऑफ फार्माकोलॉजी एंड फार्माकोडायनामिक्स (RJPPD) की स्टडी के मुताबिक, गोंद कतीरा गर्मियों में शरीर को नेचुरली कूल रखता है। यह हीट-संबंधी समस्याओं से बचाने में भी कारगर है। वहीं नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, गोंद कतीरा में एंटी-माइक्रोबियल और इम्यून सपोर्टिव गुण होते हैं। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज बात गोंद कतीरा के हेल्थ बेनिफिट्स की। साथ ही जानेंगे- गोंद कतीरा में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं? इसे खाने का सही तरीका क्या है? एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइडटुडे’ सवाल- गोंद कतीरा क्या होता है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- गोंद कतीरा एक प्राकृतिक गोंद (रेजिन) है। इसे एस्ट्रागलस प्रजाति के पौधों की जड़ों और छालों से निकाला जाता है। यह सफेद या हल्के पीले क्रिस्टल जैसा होता है। पानी में भिगोने पर जेली जैसा बन जाता है। इसमें सॉल्यूबल फाइबर भरपूर होता है। इसलिए इसे कूलिंग और पाचन सुधारने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। दुनिया में सबसे ज्यादा गोंद कतीरा ईरान में होता है। सवाल- गोंद कतीरा में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं? जवाब- इसमें डाइटरी फाइबर के अलावा कुछ और भी पोषक तत्व होते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से 100 ग्राम गोंद कतीरा की न्यूट्रिशनल वैल्यू देखिए- सवाल- गोंद कतीरा के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं? जवाब- पाॅइंटर्स से समझिए- गोंद कतीरा की तासीर ठंडी होती है, जिससे यह शरीर का तापमान संतुलित रखता है। यह पानी सोखकर जेली जैसा बन जाता है, जिससे हाइड्रेशन में मदद करता है। इसमें नेचुरल प्रीबायोटिक गुण पाचन तंत्र को सपोर्ट करते हैं। सभी हेल्थ बेनिफिट्स नीचे ग्राफिक में देखिए- सवाल- गोंद कतीरा हमेशा गर्मी के मौसम में ही क्यों खाया जाता है? जवाब- गोंद कतीरा पारंपरिक रूप से नेचुरल कूलेंट है। पानी में भिगोने पर यह जेली जैसा बन जाता है और शरीर को ठंडक देता है। इसे शरबत या दूध में मिलाकर लेने से डिहाइड्रेशन, कमजोरी और कब्ज से राहत मिलती है। इसलिए इसे गर्म मौसम में खाया जाता है। सवाल- गोंद कतीरा खाने का सही तरीका क्या है? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- इसे रात में 1 गिलास पानी में 1 चम्मच गोंद कतीरा डालकर छोड़ दें। सुबह तक यह फूलकर मुलायम जेल जैसा हो जाएगा। इसे शरबत, दूध, दही, नींबू पानी या स्मूदी में मिलाकर ले सकते हैं। लड्डू में भी मिला सकते हैं। गोंद कतीरा बिना भिगोए न खाएं। यह बहुत सख्त होता है। सूखा खाने पर गले में फंस सकता है। पाचन तंत्र में ब्लॉकेज या गंभीर कब्ज का कारण बन सकता है। सवाल- क्या गोंद कतीरा रोज खा सकते हैं? जवाब- सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि हां, सीमित मात्रा में रोज खा सकते हैं। लेकिल कोई भी नई चीज डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। सवाल- एक बार में कितनी मात्रा में गोंद कतीरा खा सकते हैं? जवाब- डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 1–2 ग्राम गोंद कतीरा सुरक्षित है। इसे हमेशा पानी में भिगोकर लें। खाने के बाद पर्याप्त पानी पिएं। सवाल- क्या गोंद कतीरा के कोई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं? जवाब- हां, ज्यादा या गलत तरीके से खाने पर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। यह सॉल्यूबल फाइबर से भरपूर है, इसलिए बिना पर्याप्त पानी के लेने पर गैस, कब्ज या आंतों में प्रॉब्लम हो सकती है। कुछ लोगों में एलर्जी या सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। सवाल- किन लोगों को गोंद कतीरा खाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए? जवाब- गोंद कतीरा सीमित मात्रा में खाना सुरक्षित है। लेकिन कुछ लोगों को इसे डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं खाना चाहिए। जैसेकि- जिन्हें रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम है। जिन्हें किडनी से जुड़ी प्रॉब्लम है। जो किसी बीमारी का इलाज करा रहे हैं। जिन्हें गोंद कतीरा से एलर्जी है। जिनका पाचन तंत्र कमजोर है। प्रेग्नेंट या ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाएं। सवाल- गोंद कतीरा असली है या नहीं, ये कैसे पता करें? जवाब- कुछ आसान तरीकों से इसकी पहचान की जा सकती है- यह पारदर्शी या हल्के पीले क्रिस्टल जैसा दिखता है। इसमें कोई स्मेल या स्वाद नहीं होता है। अगर पूरी तरह सफेद या मिट्टी के जैसा है तो मिलावटी हो सकता है। पानी में 6–8 घंटे भिगोने पर यह फूलकर जेली जैसा बन जाता है। अगर यह न फूले या पानी में घुल जाए तो मिलावट की आशंका है। सवाल- बाजार से गोंद कतीरा खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- गोंद कतीरा खरीदते समय कुछ बातों का ध्यान रखें- यह पारदर्शी या हल्के पीले रंग का हो। पूरी तरह सफेद और अपारदर्शी न हो। टुकड़े साफ और बिना धूल-मिट्टी के हों। इसमें कोई स्मेल न हो। लेबल, एक्सपायरी डेट और ब्रांड की विश्वसनीयता जांचें। भरोसेमंद विक्रेता से खरीदें। मिलावटी गोंद सही तरह से नहीं फूलता, इसलिए क्वालिटी चेक जरूरी है। …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- किस दवा के साथ क्या न खाएं?: गलत फूड-ड्रग कॉम्बिनेशन के हेल्थ रिस्क, दवा खाने से पहले डॉक्टर से पूछें, लेबल पढ़ें आमतौर पर दवाएं लेते समय लोग डोज और टाइमिंग पर ध्यान देते हैं। लेकिन यह नहीं जानते कि दवा के साथ क्या खाना चाहिए और क्या नहीं। कुछ फूड-ड्रग कॉम्बिनेशन नुकसानदायक हो सकते हैं। पूरी खबर पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Dates vs Jaggery Weight Control; Khajur Gud Nutrition Value; Natural Sweetener Benefits

Hindi News Lifestyle Dates Vs Jaggery Weight Control; Khajur Gud Nutrition Value; Natural Sweetener Benefits 1 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, मोटापा ‘एपिडेमिक’ बन गया है। एपिडेमिक का मतलब है ऐसी बीमारी, जो दुनिया में तेजी से फैल रही है। दुनिया में हर साल मोटापे से जुड़ी बीमारियों के कारण करीब 28 लाख लोगों की मौत होती है। मोटापे की एक बड़ी वजह शुगर कंजम्प्शन है। इसलिए लोग वेट कंट्रोल के लिए नेचुरल विकल्प खजूर और गुड़ का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये वजन कम करने के साथ एनीमिया, पीलिया, अस्थमा और एलर्जी जैसी समस्याओं से बचाते हैं। इसलिए आज जरूरत की खबर में हम गुड़ और खजूर की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- इन दोनों में क्या खाना बेहतर है? इनमें कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं? क्या ये वाकई वेट कंट्राेल में मददगार हैं? एक्सपर्ट- डॉ. अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली सवाल- क्या गुड़ के मुकाबले खजूर वेट मैनेजमेंट में मदद करता है? जवाब- हां, बिल्कुल। खजूर इन कारणों से बेहतर है– खजूर एक कंप्लीट फूड है। इसमें नेचुरल शुगर के साथ फाइबर, पोटेशियम और एंटीऑक्सिडेंट्स होता है। फाइबर ‘गैस्ट्रिक एंम्पटिइंग’ (Gastric Emptying) के प्रोसेस को धीमा करता है। इसका मतलब है कि भोजन के छोटी आंत तक पहुंचने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसका सरल मतलब ये है भोजन फटाफट एब्जॉर्ब नहीं होता। शुगर तेजी से नहीं बढ़ती। फाइबर के कारण पेट भरा महसूस होता है। तो बार-बार खाने की इच्छा कम होती है। सवाल- खजूर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ग्लाइसेमिक लोड कितना होता है? जवाब- खजूर का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 44 से 53 के बीच होता है। ये लो-मीडियम कैटेगरी है। इसका ग्लाइसेमिक लोड (GL) 42 से 55 के बीच होता है। ग्लाइसेमिक इंडेक्स बताता है कि कोई फूड ब्लड शुगर को कितनी तेजी से बढ़ाता है। ग्लाइसेमिक लोड बताता है कि कोई फूड खाने से ब्लड शुगर कितना बढ़ेगा। सवाल- क्या गुड़ भी ब्लड शुगर कंट्रोल रखने और वेट मैनेजमेंट में मदद करता है? जवाब- नहीं, गुड़ और चीनी, दोनों में समान मात्रा में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। दोनों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स और लोड लगभग एक जैसा है। इसलिए दोनों ब्लड शुगर लेवल बढ़ाते हैं। इनमें ज्यादा कैलोरी होती है, जो खर्च न करने पर फैट में बदल जाती है। इसलिए गुड़ वेट मैनेजमेंट में मदद नहीं करता, बल्कि वेट बढ़ा सकता है। सवाल- खजूर में कौन-कौन से न्यूट्रिएंट्स होते हैं? जवाब- खजूर न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होता है। इसमें नेचुरल शुगर, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, विटामिन्स और एंटीऑक्सिडेंट्स (फ्लेवोनॉयड्स, कैरोटेनॉयड्स, फेनोलिक कंपाउंड्स) होते हैं। ग्राफिक में इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू देखिए- सवाल- गुड़ में कौन-कौन से न्यूट्रिएंट्स होते हैं? जवाब- गुड़ मुख्य रूप से सुक्रोज (नेचुरल शुगर का एक फॉर्म) से बना होता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट के साथ आयरन, कैल्शियम भी होता है। ग्राफिक में 100 ग्राम गुड़ की न्यूट्रिशनल वैल्यू देखिए- सवाल- अगर वेट को कंट्रोल में रखना है तो खजूर और गुड़ में से क्या बेहतर है? जवाब- अगर आपका लक्ष्य वजन कम करना है तो आमतौर पर खजूर बेहतर विकल्प माना जाता है। इसमें मौजूद फाइबर- सेटिस्फेक्शन बढ़ाता है। देर तक पेट भरा रखता है। ब्लड शुगर पर कम प्रभाव डालता है। इससे कंट्रोल्ड ईटिंग पैटर्न बनाए रखना आसान होता है। जबकि, गुड़ खाने से वजन बढ़ सकता है, क्योंकि- यह हाई कैलोरी फूड है। इससे ब्लड शुगर भी तेजी से बढ़ता है। इससे कैलोरी ओवरलोड हो सकता है। सवाल- एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को एक दिन में कितना खजूर खाना चाहिए? जवाब- सीनियर डाइटीशियन डॉ. अमृता मिश्रा के मुताबिक, रोजाना 2–3 खजूर खा सकते हैं। इससे ब्लड शुगर और वेट कंट्रोल में रहता है। साथ ही जरूरी पोषक तत्व भी मिल जाते हैं। सवाल- क्या बच्चों को खजूर देना सेफ है? जवाब- हां, बच्चों को खजूर देना सुरक्षित है, लेकिन उम्र और मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। 1 साल से छोटे शिशुओं को पूरा खजूर नहीं देना चाहिए। उन्हें चोकिंग (गले में कोई फूड फंसना) का खतरा रहता है। छोटे बच्चों को इसे पेस्ट या प्यूरी के रूप में दें। बड़े बच्चों को 1–2 खजूर दे सकते हैं। सवाल- क्या डायबिटीज के पेशेंट्स के लिए खजूर सेफ है? जवाब- डॉ. अमृता मिश्रा के मुताबिक, अगर ब्लड शुगर 200 से कम है तो डायबिटिक लोग रोज एक खजूर खा सकते हैं। इसमें कार्ब के साथ भरपूर मात्रा में फाइबर भी होता है। सवाल- वजन कम करने के लिए ओवरऑल लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए? जवाब- सस्टेनेबल वेट लॉस के लिए सिर्फ डाइटिंग नहीं, डेली रुटीन में बदलाव करें। नियमित फिजिकल एक्टिविटी भी करें। इसके लिए- लो कैलोरी फूड्स खाएं। फाइबर से भरपूर चीजें जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करें। हाइड्रेटेड रहें। हफ्ते में कम-से-कम 150 मिनट फिजिकल एक्टिविटी (जैसे तेज चलना, साइक्लिंग या वर्कआउट) करें। कुल मिलाकर, वेट कंट्रोल के लिए सिर्फ खजूर पर निर्भर रहने के बजाय ओवरऑल लाइफस्टाइल सुधारना जरूरी है। खजूर और गुड़ दोनों प्राकृतिक मिठास के सोर्स हैं, लेकिन इनमें कैलोरी और शुगर की मात्रा होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हेल्दी लाइफस्टाइल का कोई शॉर्टकट नहीं होता। छोटे-छोटे संतुलित फैसले लंबे समय में बड़ा फर्क लाते हैं। ………………………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- आपका मोटापा फैट है या वाटर वेट:जानें ये क्या होता है, शरीर पानी क्यों स्टोर करता है, डॉक्टर को दिखाना कब जरूरी मनुष्य के शरीर में लगभग 60% हिस्सा पानी होता है। यह शरीर के हर फंक्शन में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन क्या होगा अगर शरीर जरूरत से ज्यादा पानी स्टोर करने लगे? इससे अचानक वजन बढ़ सकता है। शरीर फूला हुआ महसूस हो सकता है। इसे ‘वाटर वेट’ कहते हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Amla Benefits: डिटॉक्स से लेकर हार्ट हेल्थ तक, आंवला के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान, ऐसे करें सेवन

Last Updated:April 03, 2026, 15:33 IST गर्मी का मौसम आते ही शरीर में कई तरह की समस्याएं बढ़ने लगती हैं. ऐसे में आंवला एक ऐसा प्राकृतिक सुपरफूड है, जो शरीर को ठंडक देने, इम्यूनिटी बढ़ाने और बीमारियों से बचाने में मदद करता है. इसे अपनी डाइट में शामिल करना गर्मियों में सेहतमंद रहने का आसान तरीका हो सकता है. गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. तेज धूप, लू, शरीर में पानी की कमी, कमजोरी और पाचन से जुड़ी दिक्कतें आम हो जाती हैं. ऐसे में रोजाना की डाइट में आंवला शामिल करना किसी वरदान से कम नहीं है. आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि आंवला गर्मियों में शरीर को ठंडक देने और बीमारियों से बचाने का प्राकृतिक उपाय है. शरीर को देता है ठंडक: जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, आंवला की तासीर ठंडी होती है, जिससे गर्मियों में इसका सेवन शरीर का तापमान संतुलित रखता है और लू लगने का खतरा कम करता है. गांवों में आज भी लोग आंवला का मुरब्बा या शरबत पीना पसंद करते हैं, क्योंकि यह शरीर को तुरंत ठंडक पहुंचाकर तरोताजा बनाए रखता है. इम्यूनिटी बढ़ाने में लाभकारी: आंवला इम्यूनिटी बढ़ाने में बेहद फायदेमंद है. इसमें मौजूद विटामिन C शरीर को वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने की ताकत देता है. जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से आंवला का सेवन करते हैं, वे सर्दी-खांसी जैसे सामान्य संक्रमण से काफी हद तक बचे रहते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google पेट के लिए फायदेमंद: पाचन तंत्र के लिए आंवला बहुत लाभकारी माना जाता है. अनियमित खानपान और गर्मी के कारण होने वाली गैस, कब्ज और अपच की समस्या में यह राहत देता है. आंवला पेट को साफ रखने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है. कई लोग सुबह आंवला जूस का सेवन करते हैं, जिससे उन्हें पूरे दिन हल्कापन महसूस होता है. त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद: आंवला त्वचा और बालों के लिए बेहद लाभकारी है. इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं, जिससे वह साफ और चमकदार बनती है. यह बालों को झड़ने से रोककर उन्हें मजबूत बनाता है. यही कारण है कि कई हेयर ऑयल और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में आंवला का इस्तेमाल किया जाता है. आंवला शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करता है. यह शरीर में जमा गंदगी और विषैले तत्वों को बाहर निकालकर अंदर से साफ रखता है. इसके नियमित सेवन से लीवर स्वस्थ रहता है और खून साफ होता है, जिससे कई बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. दिल के लिए फायदेमंद: आंवला दिल की सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है. आज के समय में बढ़ती हार्ट समस्याओं के बीच आंवला एक आसान और प्राकृतिक उपाय साबित हो सकता है. सावधानियां: जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, आंवला जितना फायदेमंद है, उतना ही जरूरी है इसका सही तरीके से सेवन करना. किसी भी चीज की अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है, इसलिए आंवला का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. रोजाना 1-2 आंवला या एक गिलास आंवला जूस पर्याप्त माना जाता है. यदि आप किसी बीमारी से ग्रस्त हैं या कोई दवा ले रहे हैं, तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. First Published : April 03, 2026, 15:33 IST
Moringa Benefits: सहजन की पत्तियों से बनी प्राकृतिक औषधि, जो रखे आपको बीमारियों से दूर, ऐसे करें इस्तेमाल

Last Updated:April 03, 2026, 14:44 IST सहजन (मोरिंगा) एक आयुर्वेदिक सुपरफूड है, जिसके पत्तों और टहनियों से तैयार पाउडर सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह इम्यूनिटी बढ़ाने, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों को नियंत्रित करने के साथ-साथ बाल और त्वचा की सेहत सुधारने में भी मदद करता है. इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है. सहजन एक ऐसा पौधा है जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है. इसके फल, जड़ और पत्तियां सभी एक जबरदस्त आयुर्वेदिक औषधि के रूप में काम कर सकती हैं. आमतौर पर सहजन के फल को सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसकी औषधीय गुणों की वजह से इसे दवा के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है. सहजन के पत्ते और टहनियां बेहद खास औषधि के रूप में उपयोग हो सकती हैं. सहजन की पत्तियां ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और वजन घटाने में बेहद लाभदायक होती हैं. इसके अलावा, यह आंखों से संबंधित रोगों, गठिया और सटिका जैसी समस्याओं में भी उपयोगी साबित हो सकती हैं. इस औषधि को घर पर तैयार करना भी बेहद आसान है. सहजन के उत्पाद बनाने वाले किसान राजेश यादव बताते हैं कि इसके लिए सबसे पहले सहजन की पत्तियों और टहनियों को पेड़ से तोड़कर अलग कर लें और फिर धूप में अच्छी तरह सुखा लें. Add News18 as Preferred Source on Google अच्छी तरह से सूखने के बाद अब इसे पाउडर के रूप में तैयार करने की बारी है. इसे पीसकर पाउडर बनाने के लिए आप मिक्सर ग्राइंडर का इस्तेमाल कर सकते हैं. पत्तियों को बारीक पीसने से यह पाउडर अच्छी तरह तैयार हो जाता है. इस तरह आपकी जबरदस्त औषधि बनकर तैयार हो जाती है, जिसे कई तरह के रोगों के उपचार के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. सहजन के पत्तों से तैयार इस पाउडर के सेवन से शरीर की इम्यूनिटी मजबूत की जा सकती है. सुखाई हुई पत्तियों से बने इस पाउडर में कैल्शियम, आयरन और पोटेशियम की भरपूर मात्रा होती है. इसके अलावा, इसमें कई महत्वपूर्ण विटामिन भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. सहजन की पत्तियों से बने पाउडर का उपयोग बालों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसका सेवन झड़ते हुए बालों की समस्या को कम कर सकता है. इस पाउडर की खास बात यह है कि इसे बनाने के बाद यह लंबे समय तक खराब नहीं होता और आसानी से लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है. इस पाउडर के सेवन से मलेरिया और टाइफाइड जैसे गंभीर बुखार से लेकर डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है. किसान राजेश यादव बताते हैं कि उनके ओर से तैयार की जाने वाली सहजन की यह औषधि लोगों को बेहद पसंद आती है. आसपास के क्षेत्र और दूर-दराज से लोग इसे खरीदने आते हैं. First Published : April 03, 2026, 14:44 IST
Summer Fruits Benefits; Dehydration Prevention Tips

Hindi News Lifestyle Summer Fruits Benefits; Dehydration Prevention Tips | High Water Fruits List 2 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक धरती का सबसे इंटेलिजेंट ब्रेन है नेचर यानी प्रकृति। यह मौसम के हिसाब से सर्वाइवल के लिए फल-सब्जियां उगाता है। गर्मियों में तापमान अधिक होने कारण शरीर से पसीना ज्यादा निकलता है तो डिहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ जाता है। डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए प्रकृति इस मौसम में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर फल-सब्जियां उगाती है। ये फल जरूरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स से भरपूर होते हैं। इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर एनर्जेटिक रहता है। इसलिए जरूरत की खबर में जानेंगे कि- गर्मियों में कौन-से फल शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं? कौन से फल गर्मियों में बॉडी को हाइड्रेटेड रखते हैं? एक्सपर्ट- डॉ. अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली सवाल- गर्मियों में फल खाना क्यों जरूरी है? जवाब- गर्मियों में शरीर से पसीने के जरिए पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स और जरूरी पोषक तत्व बाहर निकलते हैं। इससे डिहाइड्रेशन, कमजोरी और थकान हो सकती है। फल नेचुरल सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करते हैं। सवाल- गर्मियों में शरीर को फलों की ज्यादा जरूरत क्यों होती है? जवाब- ज्यादा गर्मी में शरीर जल्दी थकता है। फल शरीर को हाइड्रेट करते हैं और एनर्जी देते हैं। ये गर्मी से बचाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। ग्राफिक में देखिए कि फल खाना क्यों जरूरी है- सवाल- गर्मियों में ज्यादा फल खाने से हेल्थ को क्या फायदा होता है? जवाब- टेम्परेचर ज्यादा होने पर शरीर को ज्यादा पोषण, पानी और एनर्जी की जरूरत होती है। फल इसकी पूर्ति में मदद करते हैं। सभी फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या गर्मियों में फल शरीर को भीतर से ठंडा रखते हैं? जवाब- हां, ज्यादातर फल पानी से भरपूर होते हैं और शरीर का तापमान बैलेंस रखते हैं। तरबूज, खरबूज और खीरा कूलिंग इफेक्ट देते हैं। इससे हीट स्ट्रेस कम होता है और शरीर तरोताजा महसूस करता है। सवाल- क्या गर्मियों में फल शरीर को हाइड्रेट करते हैं? जवाब- हां, इनमें 70-90% तक पानी होता है। इनमें मौजूद नेचुरल शुगर और मिनरल्स शरीर में फ्लूइड बैलेंस बनाए रखते हैं। नियमित रूप से फल खाने से- हाइड्रेशन में मदद मिलती है। स्किन हेल्दी रहती है। थकान व सिरदर्द जैसी समस्याएं कम होती हैं। सवाल- कौन से फल शरीर में पानी की कमी पूरी करते हैं? जवाब- कई ऐसे हाई वाटर कंटेंट वाले फल हैं, जो हाइड्रेशन में मदद करते हैं। ग्राफिक में ऐसे फलों की लिस्ट देखिए- सवाल- क्या तरबूज, खरबूज जैसे फल खाना पानी पीने के बराबर है? जवाब- तरबूज और खरबूज जैसे फलों में भरपूर मात्रा में पानी होता है, लेकिन ये पानी का विकल्प नहीं है। ये फल शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद जरूर करते हैं, लेकिन शरीर की रोज की जरूरत पूरी करने के लिए सादा पानी पीना जरूरी है। आमतौर पर एक स्वस्थ्य व्यक्ति को रोजाना 8-10 गिलास (2.5- 3 लीटर) पानी पीना चाहिए। फल रिप्लेसमेंट नहीं सप्लीमेंट की तरह काम करते हैं। सवाल- गर्मियों में कौन से फल सबसे ज्यादा पौष्टिक होते हैं? जवाब- ऐसे फल सबसे ज्यादा पौष्टिक होते हैं, जिनमें पानी के साथ विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सिडेंट्स भी हों। ग्राफिक में देखिए कौन से फल गर्मियों में सबसे ज्यादा पौष्टिक होते हैं- सवाल- क्या गर्मियों में फल खाने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस बना रहता है? जवाब- हां, नारियल पानी, तरबूज, केला, संतरा, अंगूर जैसे फल शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस बनाने में मदद करते हैं। इनमें सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं। सवाल- क्या फल खाने से हीट स्ट्रोक (लू) से बचाव होता है? जवाब- फल सीधे तौर पर हीट स्ट्रोक को रोक नहीं सकते, लेकिन ये इसका रिस्क कम कर सकते हैं। लू से बचने के लिए फल खाने के साथ पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। साथ ही तेज धूप के सीधे एक्सपोजर से भी बचाव करें। सवाल- क्या गर्मियों में फल खाने से पाचन बेहतर होता है? जवाब- हां, फलों में मौजूद फाइबर और एंजाइम्स पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं। गर्मियों में एसिडिटी, अपच और कब्ज की समस्या बढ़ जाती है। पपीता, तरबूज और सेब जैसे फल इन समस्याओं को कम करने में मदद करते हैं। ये आंतों को साफ रखते हैं और पाचन को बेहतर बनाते हैं। इससे शरीर हल्का और एनर्जेटिक रहता है। सवाल- क्या गर्मियों में फल इंस्टेंट एनर्जी देते हैं? जवाब- हां, फलों में फ्रुक्टोज और ग्लूकोज जैसी नेचुरल शुगर होती है। इससे शरीर को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है। इनमें मौजूद विटामिन्स शरीर की एनर्जी प्रोडक्शन प्रक्रिया को सपोर्ट करते हैं, जिससे व्यक्ति ज्यादा एक्टिव महसूस करता है। सवाल- गर्मियों में कमजोरी और थकान होने पर कौन से फल खाने चाहिए? जवाब- नीचे ग्राफिक में फलों की पूरी लिस्ट देखिए- सवाल- क्या डायबिटिक लोग भी सारे फल खा सकते हैं? जवाब- इसका जवाब पॉइंटर्स से समझते हैं- डायबिटिक लोगों को फल संतुलन में खाना चाहिए, क्योंकि आम, केला, अंगूर जैसे फलों में नेचुरल शुगर ज्यादा होती है। इसलिए इन्हें डॉक्टर की सलाह से खाएं। लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) वाले फल जैसे सेब, अमरूद, नाशपाती और संतरा खा सकते हैं। लेकिन इन्हें भी सीमित मात्रा में ही खाएं। …………………………. ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- गर्मियों में जल्दी खराब होता खाना:फूड स्टोरेज के 24 टिप्स, फूड रहेगा सेफ, स्टोर करते हुए न करें ये 10 गलतियां गर्मियों में खाने-पीने की चीजें जल्दी खराब होती हैं। फूड स्टोरेज की छोटी-छोटी गलतियों को नजरअंदाज करने से फूड पॉइजनिंग, डायरिया और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में सही फूड स्टोरेज बीमारियों से बचाव का अहम हिस्सा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
bel juice benefits and side effects | bel juice benefits in hindi | बेल के जूस के फायदे | बेल के जूस के फायदे और नुकसान |

Last Updated:April 02, 2026, 17:03 IST तपती गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच प्रकृति ने हमें ‘बेल’ के रूप में एक अनमोल वरदान दिया है. आयुर्वेद में ‘श्रीफल’ के नाम से मशहूर यह फल न केवल शरीर को बर्फ जैसी ठंडक देता है, बल्कि पुरानी से पुरानी कब्ज और डायबिटीज जैसी बीमारियों को जड़ से खत्म करने की ताकत रखता है. महज ₹20 में मिलने वाला बेल का एक गिलास जूस आपकी सेहत के लिए किसी महंगे टॉनिक से कम नहीं है. आइए जानते हैं क्यों इस मौसम में बेल का सेवन आपके लिए अनिवार्य है. गर्मियों के मौसम में कई ऐसे फल होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद माने जाते हैं. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे फल के बारे में बताने जा रहे हैं जो कई बीमारियों के लिए रामबाण माना जाता है. ऐसा ही एक फल बेल है, जिसे श्रीफल भी कहा जाता है. यह एक औषधीय गुणों से भरपूर फल है, जो आयुर्वेद में प्राचीन काल से इस्तेमाल होता आ रहा है. यह गर्मियों में विशेष रूप से उपयोगी होता है. शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ कई गंभीर बीमारियों से बचाने की ताकत रखता है. बेल का फल, पत्ते, बीज और जड़ सब कुछ औषधि की तरह काम करते हैं. परंतु गर्मियों के मौसम में बेल के जूस की डिमांड अधिक रहती है क्योंकि बेल का जूस हमारे शरीर को ठंडक प्रदान करता है, जिससे कई बीमारियां ठीक हो सकती हैं. बेल का जूस हमारे पाचन तंत्र के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. बेल के फल के गूदे से बना शरबत या मुरब्बा कब्ज, गैस, एसिडिटी और दस्त जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. यह फल सिर्फ गर्मियों के मौसम में ही मिलता है. बाजारों में आसानी से ₹20 से लेकर ₹40 तक बेल के जूस का गिलास मिल जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google बेल के पत्तों का रस डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभदायक माना जाता है. यह ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है. सुबह खाली पेट आप बेल के पत्तों को साफ पानी से धुलाई करने के बाद पीसकर रस निकालकर सेवन करने से डायबिटीज जैसी समस्या से राहत मिल सकती है. बेल में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन ‘C’ प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं. यह संक्रमण से लड़ने की ताकत देता है और मौसम बदलने पर होने वाली बीमारियों से सुरक्षा करता है. बेल का सेवन हार्ट के लिए भी लाभकारी है. यह कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है. आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि बेल का जूस खून साफ करने में भी मदद करता है. बेल में मौजूद विटामिन्स और मिनरल्स त्वचा को ग्लोइंग बनाते हैं और बालों को जड़ से मजबूत करते हैं. बेल के पत्तों का रस त्वचा पर लगाने से कील-मुंहासे और फोड़े-फुंसियों से राहत मिलती है. बेल फायदेमंद होता है, लेकिन बेल का सेवन सीमित मात्रा में ही करें, क्योंकि अत्यधिक मात्रा में इसका सेवन कब्ज पैदा कर सकता है. First Published : April 02, 2026, 17:03 IST









