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Moringa Fruit Benefits: हड्डियों से लेकर दिल तक….. यह सब्जी कैसे बदल सकती है आपका स्वास्थ्य, जानिए पूरी कहानी

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Last Updated:April 02, 2026, 14:30 IST भारत में सहजन, जिसे मोरिंगा या ड्रमस्टिक के नाम से भी जाना जाता है, स्वास्थ्य और पोषण से भरपूर है. यह सब्जी इम्यून सिस्टम मजबूत करने, पाचन सुधारने, हड्डियों और दिल की सेहत बनाए रखने में मदद करता है. इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स इसे एक महत्वपूर्ण सुपरफूड बनाते हैं. भारत में सहजन, जिसे कई जगहों पर मोरिंगा या ड्रमस्टिक के नाम से भी जाना जाता है, एक ऐसा पौधा है जो अपने औषधीय गुणों के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. आमतौर पर लोग इसकी पत्तियों के फायदे के बारे में जानते हैं, लेकिन सहजन सब्जी भी पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से किसी वरदान से कम नहीं मानी जाती है. इसमें मौजूद विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. दरअसल, रायबरेली जिले के आयुष चिकित्सालय, शिवगढ़ की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. स्मिता श्रीवास्तव (BAMS, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सहजन की फली को आसानी से सब्जी, सूप या सांभर के रूप में आहार में शामिल किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन शरीर को संपूर्ण पोषण प्रदान करता है और कई बीमारियों से बचाव में मदद करता है. सहजन की फली में विटामिन-सी, विटामिन-ए, कैल्शियम, आयरन और पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. ये सभी तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. नियमित रूप से सहजन की फली का सेवन करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google सहजन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर में फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा और कोशिकाओं को नुकसान से बचाया जा सकता है. सहजन की फली पाचन तंत्र के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है. इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायक है. पेट से जुड़ी समस्याओं से परेशान लोगों के लिए सहजन की सब्जी या सूप फायदेमंद हो सकता है. यह आंतों की सफाई में मदद करता है और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है. सहजन की फली हड्डियों को मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसमें मौजूद कैल्शियम और फास्फोरस हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी होते हैं. बढ़ते बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए इसका सेवन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा, यह जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में भी मदद कर सकता है. दिल की सेहत के लिए भी सहजन की फली उपयोगी मानी जाती है. इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. साथ ही, यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी सहायक माना जाता है, जिससे मधुमेह के मरीजों को लाभ मिल सकता है. First Published : April 02, 2026, 14:30 IST

Betel leaves benefits : जोड़ों का दर्द हो या गले की खराश, चुटकियों में होगा छूमंतर, जानें पान पत्तों के जादुई फायदे

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Last Updated:April 02, 2026, 04:01 IST Paan Patte Ke Fayde : पान का पत्ता केवल स्वाद या परंपरा तक सीमित है, बल्कि इसके फायदे चौंकाने वाले हैं. अगर पान के पत्तों का सही सेवन किया जाए, तो कई बीमारियां दूर हो सकती हैं. इसका नियमित लेकिन सीमित सेवन पाचन शक्ति को बेहतर कर पेट को हल्का और आरामदायक बनाता है. लोकल 18 से बलिया की चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी कहती हैं कि पान के पत्तों का लेप घाव, फुंसी या सूजन वाली जगह पर लगाने से जल्दी आराम मिलता है. बात अगर पान के पत्तों की हो, तो यह पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी है. इसे चबाने से लार का स्राव बढ़ता है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है. गैस, कब्ज और पेट दर्द जैसी समस्याओं में काफी राहत मिलती है. इसके नियमित लेकिन सीमित सेवन पाचन शक्ति को बेहतर कर पेट को हल्का व आरामदायक बनाता है. जब मौसम में बदलाव होता है, तो सर्दी-खांसी आम समस्या बन जाती है. ऐसे में तो पान का पत्ता एक घरेलू उपाय के रूप में बहुत काम आ सकता है. इसका काढ़ा या रस शहद के साथ लेने से गले की खराश, बलगम और सांस की तकलीफ में राहत मिलती है. इसके अलावा, यह शरीर को अंदर से भी स्वस्थ बनाता है. पान के पत्तों में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो मुंह की सफाई में बहुत उपयोगी हैं. यह सांसों की बदबू को दूर करता है और मसूड़ों को मजबूती प्रदान करता है. इसके रोजाना उपयोग से मुंह के संक्रमण का खतरा कम होता है. इसी के चलते सदियों से इसे प्राकृतिक माउथ फ्रेशनर के रूप में प्रयोग किया जाता आ रहा है. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, इसके पत्तों का लेप घाव, फुंसी या सूजन वाली जगह पर लगाने से जल्दी आराम मिलता है. इसमें एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो संक्रमण को फैलने से रोकते हैं. पुराने जमाने में इसको देसी गाय के घी में गर्म कर घाव पर लगाने से बहुत फायदे मिलते थे. पान का पत्ता शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी साबित होता है. इससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है. यह वजन कम करने की प्रक्रिया को भी सपोर्ट करता है. हालांकि, इसे किसी इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि संतुलित जीवनशैली के साथ अपनाना बेहतर होता है. पान का पत्ता जोड़ों का दर्द, सिरदर्द या नसों के दर्द में राहत पहुंचाने में भी मददगार है. इसके अर्क या रस का उपयोग दर्द कम करने के लिए किया जाता है. इसके प्राकृतिक गुण सूजन को कम करने में सहायक हैं और शरीर को आराम देते हैं. यह पारंपरिक उपचार में लंबे समय से इस्तेमाल होता आ रहा है. यह दादी नानी के नुस्खे में महत्त्वपूर्ण माना गया है. पान का पत्ता शरीर को डिटॉक्स करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में भी सहायक है. यह शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करता है. लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. किसी भी बीमारी या विशेष स्थिति में सबसे पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, वरना हानिकारक भी सिद्ध हो सकता है. First Published : April 02, 2026, 04:01 IST

Papaya Health Benefits | Papaya Seeds for Kidney | पपीते के फायदे | पपीते के खाने के फायदे |

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Last Updated:April 01, 2026, 20:24 IST Papaya Health Benefits: आयुर्वेद में पपीते को केवल एक फल नहीं, बल्कि एक संपूर्ण औषधि माना गया है. अक्सर लोग पपीता खाकर उसके बीज फेंक देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पत्ते, बीज और यहां तक कि इसकी जड़ भी गंभीर बीमारियों को जड़ से खत्म करने की ताकत रखती है? जिला अस्पताल बाराबंकी के विशेषज्ञ डॉक्टर अमित वर्मा के अनुसार, डेंगू, मलेरिया और किडनी जैसी समस्याओं में पपीता किसी वरदान से कम नहीं है. आइए जानते हैं पपीते के उन औषधीय गुणों के बारे में जो आपके शरीर के लिए प्राकृतिक टॉनिक का काम करते हैं. Papaya Health Benefits: वैसे तो फलों का सेवन सेहत के लिए हमेशा फायदेमंद माना जाता है, और पपीता उनमें एक बेहद गुणकारी फल है. पपीते का फल ही नहीं, बल्कि इसके पत्ते, बीज और दूध भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. आयुर्वेद में पपीते को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को कई रोगों से बचाने में मदद करते हैं. प्राचीन समय से ही इसका उपयोग घरेलू और आयुर्वेदिक उपचारों में किया जाता रहा है. पपीता पाचन को बेहतर बनाने, शरीर को ऊर्जा देने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है. इसका नियमित सेवन शरीर के लिए प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करता है और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. इन गंभीर बीमारियों में है कारगरआयुर्वेद के अनुसार पपीते का हर हिस्सा हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है. यह हमें कब्ज, अपच, डेंगू, मलेरिया, पाचन संबंधी विकार, बुखार और किडनी जैसी कई बीमारियों में काफी राहत पहुंचाता है. इसके प्राकृतिक गुण शरीर की आंतरिक सफाई करने में मदद करते हैं. एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह: कैसे करें इस्तेमाल?जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा (MD मेडिसिन) ने बताया कि पपीता एक ऐसा फल है जो साल भर पाया जाता है. इसके फल, बीज, पत्ते और जड़ में बहुत सारे औषधीय गुण मौजूद होते हैं. डेंगू और टाइफाइड: जिन लोगों को डेंगू, मलेरिया, बुखार या टाइफाइड की वजह से प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं, वहां पर इसकी पत्तियों के रस का इस्तेमाल करने से काफी फायदा होता है. किडनी की समस्या: अगर किसी को किडनी में प्रॉब्लम है, तो वहां पर इसके बीजों को पीसकर चूर्ण बना लें. इसे जल के साथ लेने से काफी लाभ मिलता है. पाचन और मोटापा: इसके अलावा कब्ज, अपच, गैस व वजन बढ़ने की समस्या में पपीते के फल का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे पाचन शक्ति मजबूत होती है और पेट की समस्याओं से छुटकारा मिलता है. सावधानी: किन लोगों को नहीं करना चाहिए सेवन?डॉक्टर वर्मा ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि कुछ विशेष स्थितियों में पपीते का सेवन हानिकारक हो सकता है. गर्भवती महिलाओं को पपीते से परहेज करना चाहिए. साथ ही, जिन महिलाओं को पीरियड्स अधिक आ रहे हैं, उन्हें भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. About the Author Rahul Goel राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें Location : Bara Banki,Uttar Pradesh First Published : April 01, 2026, 20:24 IST

health benefits of potato peel | aalu ke chilkon ke fayde | आलू के छिलके के फायदे | सफेद बालों को काला करने का घरेलू नुस्खा |

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Last Updated:April 01, 2026, 17:17 IST Health Benefits of Potato Peel: आलू के छिलके जिन्हें हम अक्सर कूड़ा समझकर फेंक देते हैं, असल में सेहत और खूबसूरती का अनमोल खजाना हैं. बाराबंकी जिला अस्पताल के डॉक्टर अमित वर्मा के अनुसार, इन छिलकों में आयरन, कैल्शियम और फाइबर जैसे जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह न केवल वजन घटाने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मददगार है, बल्कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने की ताकत भी रखता है. जानिए कैसे चेहरे के दाग-धब्बों से लेकर सफेद बालों की समस्या तक, आलू के छिलकों का सही इस्तेमाल कैसे आपकी पूरी सेहत बदल सकता है. आलू एक ऐसी सब्जी है, जिसका इस्तेमाल लगभग हर घर में सब्जी, स्नैक्स और कई स्वादिष्ट व्यंजनों में किया जाता है. लेकिन अक्सर लोग इसका छिलका बेकार समझकर फेंक देते हैं, जबकि यही छिलका सेहत और सुंदरता दोनों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. आलू के छिलकों में कई ऐसे दुर्लभ पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर को भीतर से मजबूती देते हैं. बस जरूरत है तो इनके सही इस्तेमाल का तरीका जानने की. जिला अस्पताल, बाराबंकी के चिकित्सक डॉ. अमित वर्मा (MD मेडिसिन) ने बताया कि आलू का छिलका स्वास्थ्य के लिए काफी गुणकारी होता है. इसमें भरपूर मात्रा में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं. इसके अलावा, इसमें मौजूद फाइबर न केवल पाचन शक्ति को दुरुस्त रखता है, बल्कि हमें कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से भी बचाता है. अगर आप वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आलू का छिलका आपके लिए मददगार साबित हो सकता है. इसमें मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और आप अतिरिक्त कैलोरी लेने से बच जाते हैं. इसे हल्का उबालकर या सूप में डालकर डाइट में शामिल करने से वजन को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google त्वचा की समस्याओं के लिए आलू का छिलका एक बेहतरीन प्राकृतिक उपाय है. इसे चेहरे पर रगड़ने से पिंपल्स, दाग-धब्बे और झाइयों से राहत मिलती है. छिलके में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण त्वचा की गहराई से सफाई करते हैं और प्राकृतिक निखार लाते हैं. यह झुर्रियों को कम करने में भी काफी मददगार साबित होता है. आलू के छिलके कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को कम करने में भी सहायक माने जाते हैं. इनमें ‘फाइटोकेमिकल्स’ और ‘क्लोरोजेनिक एसिड’ भरपूर मात्रा में होते हैं, जो ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट का काम करते हैं. ये तत्व शरीर की कोशिकाओं को नुकसान होने से बचाते हैं, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है. आलू का छिलका बालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इसका रस नियमित रूप से स्कैल्प (सिर की त्वचा) पर लगाने से बाल झड़ना कम होते हैं और जड़ें मज़बूत होती हैं. यह बालों को प्राकृतिक चमक भी देता है. सबसे खास बात यह है कि अगर बाल समय से पहले सफेद हो रहे हों, तो छिलकों के उबले हुए पानी से बाल धोने पर वे धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से काले होने लगते हैं. हड्डियों की मजबूती के लिए भी आलू के छिलके बहुत प्रभावी हैं. इनमें कैल्शियम के साथ-साथ कई ऐसे मिनरल्स होते हैं जो बोन डेंसिटी को बढ़ाते हैं. बढ़ती उम्र में हड्डियों को कमजोर होने से बचाने के लिए छिलकों का उचित सेवन या इस्तेमाल एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है. First Published : April 01, 2026, 17:17 IST

health benefits of mulberry in summer | sahtoot Khane Ke Fayde | शहतूत के फायदे और औषधीय गुण | शहतूत खाने का सही तरीका |

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Last Updated:March 31, 2026, 18:57 IST Sahtoot Khane Ke Fayde: गर्मियों में सिर्फ 2-3 महीने के लिए मिलने वाला छोटा सा शहतूत सेहत के लिए बड़े कमाल का है. बाजारों में इन दिनों इस खट्टे-मीठे फल की धूम है, जो न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है बल्कि आंखों की रोशनी बढ़ाने से लेकर दिल की सेहत दुरुस्त रखने तक का पावर हाउस है. वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, शहतूत का सेवन खून की कमी दूर करने और चमकती त्वचा पाने का सबसे सस्ता प्राकृतिक नुस्खा है. लेकिन इसे खाते समय कौन सी एक बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए, जिससे पेट की खराबी से बचा जा सके. आइए जानते हैं शहतूत के बेमिसाल फायदे और इसके इस्तेमाल का सही तरीका. गर्मी के मौसम की शुरुआत होते ही बाजारों में एक खास फल नजर आने लगता है, जिसे शहतूत कहा जाता है. यह फल साल भर उपलब्ध नहीं रहता, बल्कि केवल 2 से 3 महीने के लिए ही मिलता है. स्वाद में मीठा और हल्का खट्टा शहतूत न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत लाभकारी माना जाता है. यही वजह है कि लोग इसके मौसम का बेसब्री से इंतजार करते हैं. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि शहतूत शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. बदलते मौसम में जब लोग जल्दी बीमार पड़ते हैं, तब शहतूत का सेवन शरीर को मजबूत बनाता है और संक्रमण से बचाता है. गर्मी के मौसम में शहतूत का एक बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर को ठंडक पहुंचाता है. तेज धूप और गर्मी में अक्सर शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है. ऐसे में शहतूत खाने से शरीर को ताजगी मिलती है और ऊर्जा बनी रहती है. Add News18 as Preferred Source on Google पेट की समस्या में भी फायदेमंद, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में भी शहतूत काफी मददगार होता है. इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जो पेट को साफ रखने में सहायक होता है. जिन लोगों को कब्ज या अपच की समस्या रहती है, उनके लिए शहतूत बहुत लाभकारी साबित हो सकता है. नियमित रूप से इसका सेवन करने से पाचन क्रिया मजबूत होती है. शहतूत खून के लिए भी बहुत अच्छा माना जाता है. इसमें आयरन की मात्रा पाई जाती है, जो शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में मदद करता है. खासकर महिलाओं को अक्सर खून की कमी की समस्या होती है, ऐसे में शहतूत उनके लिए एक अच्छा प्राकृतिक उपाय हो सकता है. त्वचा के लिए फायदेमंद : त्वचा की देखभाल के लिए भी शहतूत बेहद उपयोगी है. इसमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाते हैं. नियमित रूप से शहतूत खाने से त्वचा में निखार आता है और झुर्रियों की समस्या भी कम होती है. यह त्वचा को अंदर से पोषण देता है. आंखों के लिए लाभकारी: शहतूत आंखों के लिए भी फायदेमंद होता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करते हैं और आंखों को स्वस्थ रखते हैं. आजकल मोबाइल और कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों पर असर पड़ता है, ऐसे में शहतूत का सेवन लाभकारी हो सकता है. दिल के लिए फायदेमंद: दिल की सेहत के लिए भी शहतूत अच्छा माना जाता है. यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक होता है. इससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि शहतूत के कई फायदे हैं लेकिन इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. ज्यादा मात्रा में सेवन करने से पेट में गड़बड़ी हो सकती है. इसलिए संतुलित मात्रा में इसका सेवन करना ही बेहतर होता है. यदि आप किसी गंभीर बीमारी से परेशान हो तो अपने डॉक्टर के सलाह बिना शहतूत का प्रयोग ना करें. First Published : March 31, 2026, 18:40 IST

palash flower health benefits | natural heat stroke prevention tips | पलाश के फूल के फायदे | हीट स्ट्रोक से बचाव के उपाय |

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Last Updated:March 30, 2026, 19:18 IST Palash Flower Health Benefits: पलाश जिसे ‘जंगल की आग कहा जाता है, उसके सुर्ख लाल फूल असल में गर्मियों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं हैं. आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. आशीष के अनुसार, पलाश के फूल, बीज और छाल का सही इस्तेमाल न केवल आपके शरीर को भीतर से AC जैसी ठंडक देता है, बल्कि यह डायबिटीज कंट्रोल करने और पेट के कीड़ों को जड़ से खत्म करने में भी अचूक है. भयंकर हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए इसका शरबत एक रामबाण इलाज है, तो वहीं स्किन इंफेक्शन और एक्जिमा जैसी जिद्दी समस्याओं के लिए इसके बीजों का लेप जादू की तरह काम करता है. गर्मियों का मौसम अपने साथ-साथ कई तरीके की स्वस्थ संबंधी समस्याएं भी लेकर आता है. इस मौसम में लोगों को तरह-तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देखने को मिलती हैं. पेट से लेकर त्वचा संबंधित कई समस्याएं ऐसी होती है, जो गर्मी के मौसम में लोगों को सबसे अधिक परेशान करती हैं. इनसे निजात पाने के लिए ज्यादातर लोग अंग्रेजी दावों का उपयोग करते हैं, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे फूल के बारे में बताएंगे जो आयुर्वेद की दृष्टि से सेहत के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है. इसके सेवन से पेट से लेकर स्किन संबंधी कई तरीके की समस्याओं के लिए अचूक इलाज साबित हो सकता है. हम बात कर रहे हैं पलाश के फूल के बारे में जो एक जबरदस्त आयुर्वेदिक औषधि के रूप में उपयोग की जाती है. आयुर्वेदिक दावों के सलाहकार डॉ. आशीष बताते हैं कि इस पेड़ की सबसे खास बात यह है कि इसके फूल, बीज और छाल सभी चीज औषधि रूप से जबरदस्त उपयोगी होती हैं, गर्मियों के दिनों में इसका प्रयोग बेहद लाभदायक हो सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google पलाश के बीजों में एंटी वार्म अच्छा पाए जाते हैं यानी इसके उपयोग से पेट के कीड़े जैसी समस्या से निजात पाई जा सकती. इसके बीज के पाउडर को नियमित रूप से लेने से पेट से संबंधित कई तरीके के संक्रमण को दूर किया जा सकता है. इसके अलावा यह दस्त जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में भी उपयोगी होता है. यह पेड़ डायबिटीज की समस्या से परेशान व्यक्तियों के लिए भी बेहद उपयोगी हो सकता है. पलाश में एंटी हाइपरग्लिसमिक अच्छा पाए जाते हैं जो मधुमेह को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं. इसके सेवन से डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है, इसके अलावा यह शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी बनाए रखने में उपयोगी होता है. त्वचा से संबंधी समस्याओं के लिए यह पेड़ जबरदस्त उपयोगी हैं. पलाश के बीज का पेस्ट बनाकर उपयोग करने से एक्जिमा और स्किन इन्फेक्शन संबंधित समस्याओं से राहत मिल सकती है. इससे त्वचा का रूखापन कम होता है और स्किन में खुजली की समस्या से भी निजात पाई जा सकती है. गर्मियों के मौसम में पलाश के फूलों का उपयोग शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है, इसके फूल ठंडा माने जाते हैं जिस कारण गर्मियों में लोग इसका शर्बत बनाकर पीना भी पसंद करते हैं. इसके सेवन से शरीर को ठंडक मिलती है इसके अलावा गर्मियों में चलने वाली तेज लव और अधिक तापमान के कारण ही हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं भी दूर रहती हैं. First Published : March 30, 2026, 19:18 IST

Benefits of aloevers I त्वचा, बाल और पाचन के लिए प्राकृतिक उपाय

एलोवेरा

Last Updated:March 30, 2026, 14:26 IST आजकल लोग प्राकृतिक उपचार की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं और ऐसे में एलोवेरा एक बेहतरीन घरेलू उपाय बनकर उभरा है. यह त्वचा, बाल और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद होने के साथ इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करता है. हालांकि इसके उपयोग में सही मात्रा और सावधानी रखना जरूरी है, तभी इसके पूरे लाभ मिल सकते हैं. आज के समय में लोग अपनी सेहत को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं. कई लोग दवाइयों की जगह प्राकृतिक और घरेलू उपायों को अपनाना पसंद करते हैं. ऐसे में एलोवेरा एक ऐसा पौधा है, जिसे “प्राकृतिक इलाज का खजाना” कहा जाता है. यह पौधा न सिर्फ आसानी से घर में उगाया जा सकता है, बल्कि इसके उपयोग से कई बीमारियों में राहत भी मिलती है. एलोवेरा का सबसे ज्यादा उपयोग त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता है. इसके जेल को सीधे चेहरे पर लगाने से त्वचा मुलायम और चमकदार बनती है. यह पिंपल्स को कम करने में भी मदद करता है. जिन लोगों की त्वचा सूखी रहती है, उनके लिए एलोवेरा एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर का काम करता है. अगर किसी को सनबर्न या जलन की समस्या हो जाए, तो एलोवेरा जेल लगाने से तुरंत ठंडक मिलती है और त्वचा जल्दी ठीक होती है. एलोवेरा बालों के लिए भी बहुत फायदेमंद है, इसे बालों में लगाने से बाल मजबूत होते हैं और टूटना कम होता है. यह डैंड्रफ को खत्म करने में भी मदद करता है. एलोवेरा जेल को नारियल तेल के साथ मिलाकर बालों में लगाने से बाल घने और चमकदार बनते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google एलोवेरा का जूस पीने से पाचन तंत्र बेहतर होता है. यह कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत देता है. रोजाना सुबह खाली पेट थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जूस पीने से पेट साफ रहता है और शरीर हल्का महसूस होता है. हालांकि, एलोवेरा जूस का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि ज्यादा सेवन करने से नुकसान भी हो सकता है. एलोवेरा में कई तरह के विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाते हैं. इसका नियमित सेवन करने से शरीर बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है. अगर कहीं कट, छिलन या जलन हो जाए, तो एलोवेरा जेल लगाने से घाव जल्दी भरता है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो संक्रमण को रोकते हैं और दर्द को कम करते हैं. वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि एलोवेरा का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है. इसके ताजे पत्ते से जेल निकालकर सीधे त्वचा या बालों में लगाया जा सकता है. इसके अलावा बाजार में एलोवेरा जूस और जेल भी उपलब्ध होते हैं. अगर आप घर में एलोवेरा उगाना चाहते हैं, तो यह बहुत आसान है. इसे गमले में लगाकर धूप वाली जगह पर रखें और ज्यादा पानी न दें. यह कम देखभाल में भी अच्छी तरह बढ़ता है. वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि एलोवेरा जितना फायदेमंद है, उतनी ही सावधानी भी जरूरी है. इसका सेवन अधिक मात्रा में करने से पेट खराब हो सकता है. गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. First Published : March 30, 2026, 14:26 IST

papaya benefits for skin | best time to eat papaya | पपीता के फायदे | खाली पेट पपीता खाने के फायदे |

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Last Updated:March 29, 2026, 18:25 IST Papaya Health Benefits: क्या आप भी महंगी क्रीम और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करके थक चुके हैं, फिर भी चेहरे पर वो निखार नहीं आ रहा है, तो ये खबर आपके लिए है. देहरादून के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. सिराज सिद्दीकी के अनुसार, चमकती त्वचा का राज डब्बों में नहीं बल्कि आपकी डाइट में छिपा है. ‘पपीता’ एक ऐसा सुपरफूड है जो न सिर्फ वजन घटाता है बल्कि झाइयां और कालेपन को दूर कर स्किन को अंदर से ग्लोइंग बनाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे खाने का सही समय क्या है? आइए जानते हैं. देहरादून: हर इंसान चाहता है कि वह सुंदर और आकर्षक दिखे, लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी और प्रदूषण के कारण कई लोग झाइयां, सूखी त्वचा और अनइवन स्किन टोन जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं. अक्सर लोग महंगे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स पर भरोसा करते हैं, जबकि असली समाधान हेल्दी फूड में छिपा होता है. देहरादून के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. सिराज सिद्दीकी बताते हैं कि पपीता त्वचा की सेहत सुधारने के लिए सबसे प्रभावी फलों में से एक है. हालांकि, इसके फायदे तभी दोगुने होते हैं जब इसे सही समय पर खाया जाए. सुबह के समय इसका सेवन शरीर और त्वचा के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी साबित होता है. स्मूथ और ग्लोइंग स्किन के लिए पपीते के पोषक तत्व डॉ. सिराज सिद्दीकी के अनुसार, पपीते में बीटा कैरोटिन और विटामिन-ए प्रचुर मात्रा में होता है, जो आंखों की रोशनी तेज करने के साथ-साथ स्किन को हेल्दी रखता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा की चमक बढ़ाते हैं और चेहरे के कालेपन को दूर करने में मदद करते हैं. पपीते में विटामिन बी-1, बी-2 और विटामिन-सी के साथ-साथ कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, कॉपर, मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं. इसमें करीब 90% पानी होता है, जो शरीर को हाइड्रेट रखता है और चेहरे पर कुदरती निखार लाता है. यह भी पढ़ें: गर्मी में बीमारियों से बचना है तो अपनाएं ये देसी सुपरफूड, डाइट बदलते ही दिखेगा असर सुबह खाली पेट पपीता खाने के पीछे का विज्ञान पपीते को सुबह खाली पेट खाने की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि इसमें ‘पपेन’ और ‘काइमोपपेन’ जैसे शक्तिशाली एंजाइम मौजूद होते हैं. ये एंजाइम पाचन तंत्र को दुरुस्त करते हैं और गैस, कब्ज या जी मिचलाने जैसी पेट की समस्याओं को दूर रखते हैं. जब पेट साफ रहता है, तो उसका सीधा असर आपकी त्वचा पर दिखाई देता है और मुहांसे जैसी समस्याएं कम हो जाती हैं. इसके अलावा, पपीते में पाए जाने वाले तत्व शरीर के एक्स्ट्रा फैट को रिड्यूस करने यानी वजन कम करने में भी बेहद उपयोगी माने जाते हैं. कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स और अन्य बीमारियों में लाभसिर्फ खाने में ही नहीं, बल्कि पका हुआ पपीता चेहरे पर लगाने से भी त्वचा स्मूथ और ग्लोइंग बनती है. यही कारण है कि आजकल फेस वॉश, फेस क्रीम और स्क्रब जैसे कई कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स में पपीते का इस्तेमाल मुख्य रूप से किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, पपीता न केवल सौंदर्य बढ़ाता है बल्कि यह हृदय रोगों और प्रोस्टेट जैसी समस्याओं से बचाव में भी फायदेमंद माना जाता है. नियमित रूप से पपीते का सही तरीके से सेवन करना पूरे शरीर के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें Location : Dehradun,Uttarakhand First Published : March 29, 2026, 18:25 IST

Pumpkin Benefits : वजन घटाए, इम्युनिटी बढ़ाए…99% लोग नहीं जानते कद्दू के ये वाले जादुई फायदे

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Last Updated:March 28, 2026, 22:54 IST Pumpkin health benefits : आज हम बात करेंगे कद्दू की, जिसे कोहड़ा के नाम से भी जाना जाता हैं. यह केवल एक साधारण सब्जी नहीं, बल्कि सेहत का खजाना है. इसमें विटामिन A, C, E, फाइबर और पोटेशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसके सही सेवन से कई रोग ठीक हो सकते हैं. बलिया की आयुर्वेदाचार्य डॉ. प्रियंका सिंह लोकल 18 से कहती हैं कि यह कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है और आंतों को साफ रखता है. यह न केवल नजर को तेज करता है, बल्कि मोतियाबिंद जैसी समस्याओं से भी दूर रखता है. कद्दू कम कैलोरी वाली सब्जी है, जिसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है. अगर आप भी पाचन की समस्या से परेशान रहते हैं, तो कद्दू आपकी थाली का अहम हिस्सा जरूर होनी चाहिए. इसमें फाइबर और पानी पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाते हैं. यह कब्ज से राहत दिलाने में मदद करता है और आंतों को साफ रखता है. हल्का होने के कारण यह पेट पर बोझ भी नहीं डालता और खाने के बाद राहत की अनुभूति होती है. कद्दू यानी कोहड़ा आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी कमाल है. इसमें बीटा-कैरोटीन होता हैं, जो शरीर में जाकर विटामिन A में बदलता है. यह कारण है कि कद्दू आंखों के लिए बेहद जरूरी है. यह न केवल नजर को तेज करता है, बल्कि मोतियाबिंद जैसी समस्याओं से बचाने में भी सहायता कर सकता है. बलिया की सात साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य  डॉ. प्रियंका सिंह के अनुसार, कद्दू वजन कम करने वालों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह कम कैलोरी वाली सब्जी है, जिसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है. इसी के चलते बार-बार भूख भी नहीं लगती है और अतिरिक्त खाने से बचाव होता है. इस प्रकार से यह वजन नियंत्रित रखने में बड़ा महत्त्वपूर्ण है. Add News18 as Preferred Source on Google कद्दू इम्युनिटी मजबूत करने के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. इसके नियमित सही सेवन से सर्दी-जुकाम और संक्रमण से लड़ने की ताकत मिलती है, जिससे आदमी ज्यादा स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करता है. कद्दू का त्वचा और बालों की खूबसूरती बढ़ाने में भी कोई जवाब नहीं है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जिससे चमक बनी रहती है. यह समय से पहले झुर्रियां आने से रोकता है और बालों को भी पोषण देकर मजबूत बनाता है यानी यह त्वचा के साथ बालों के लिए भी लाभकारी है. कद्दू दिल की सेहत के लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है. इसमें पोटेशियम और फाइबर पाए जाते हैं, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखते हैं और कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायता प्रदान करते हैं. इसके नियमित सेवन से हृदय रोगों का खतरा भी कम हो सकता है और दिल लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है. कद्दू के बीज और पत्ते भी कम उपयोगी नहीं हैं. बीजों में मैग्नीशियम, जिंक और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो हड्डियों और शरीर को मजबूत बनाते हैं. पत्तों में भी पोषक तत्व भरपूर होते हैं. इसको सब्जी पत्ती या फूल की पकौड़ी, चटनी आदि व्यंजन बेहद स्वादिष्ट बनते हैं. ध्यान रखें कि जरूरत से ज्यादा सेवन हानिकारक हो सकता है, इसलिए यदि कोई बीमारी हो, तो आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श जरूर लें. First Published : March 28, 2026, 22:54 IST

Natural Laxative Food Benefits; Constipation Relief

Natural Laxative Food Benefits; Constipation Relief

3 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक आज की तेज रफ्तार जिंदगी में खराब लाइफस्टाइल और अनियमित खानपान के कारण कब्ज एक कॉमन समस्या बन गई है। अगर लंबे समय तक कब्ज बना रहे तो इससे बॉडी फंक्शनिंग और ओवरऑल हेल्थ प्रभावित होती है। ‘एबॉट’ की गट हेल्थ सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 22% वयस्कों को कब्ज है। इनमें से 13% लोग गंभीर रूप से प्रभावित हैं। अक्सर लोग कब्ज से राहत के लिए दवाएं लेते हैं। जबकि नेचुरल लैक्सेटिव कब्ज से राहत दिला सकते हैं। ये ऐसे फूड या सब्सटेंस होते हैं, जिससे बाउल मूवमेंट सुधरता है। इससे स्टूल सॉफ्ट हो जाता है और कब्ज की समस्या नहीं होती है। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि- नेचुरल लैक्सेटिव क्या होते हैं? ये शरीर में कैसे काम करते हैं? किन फूड्स में नेचुरल लैक्सेटिव होता है? एक्सपर्ट: डॉ. नृपेन साइकिया, सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोलॉजी, पीएसआरआई हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- लैक्सेटिव क्या होते हैं? जवाब- लैक्सेटिव यानी ऐसी दवाएं या खाने की चीजें, जो कब्ज में राहत देकर पेट साफ करने में मदद करती हैं। लैक्सेटिव अलग-अलग तरीके से काम करते हैं। आमतौर पर डॉक्टर पेट साफ न होने पर लैक्सेटिव्स देते हैं। सवाल- नेचुरल लैक्सेटिव क्या होते हैं? जवाब- नेचुरल लैक्सेटिव यानी ऐसी नेचुरल चीजें जो पेट साफ करने में मदद करती हैं। इसमें फाइबर से भरपूर फल, सब्जियां, होल ग्रेन्स शामिल हैं। आर्टिफिशियल लैक्सेटिव की तरह इनमें केमिकल नहीं होता है। ये आमतौर पर रोजमर्रा के खाने का ही हिस्सा होते हैं और धीरे-धीरे, नेचुरल तरीके से कब्ज में राहत देते हैं। सवाल- नेचुरल लैक्सेटिव शरीर में कैसे काम करते हैं? जवाब- नेचुरल लैक्सेटिव शरीर में दो तरह से काम करते हैं। इनमें मौजूद फाइबर और पानी स्टूल (मल) को मुलायम बनाते हैं, जिससे ये आसानी से पास हो सकें। कुछ नेचुरल ऑप्शन आंतों की हल्की मूवमेंट बढ़ाकर बॉवेल को नियमित रखते हैं। सवाल- कौन से फूड्स नेचुरल लैक्सेटिव होते हैं? जवाब- नेचुरल लैक्सेटिव वो फाइबर रिच फूड होते हैं, जो पेट को साफ रखने में मदद करते हैं। ग्राफिक में नेचुरल लैक्सेटिव की लिस्ट देखिए- इन्हें थोड़ा विस्तार से समझते हैं- फल कुछ फल नेचुरल लैक्सेटिव की तरह काम करते हैं। पपीता, अमरूद, सेब (छिलके सहित), नाशपाती, केला (पका हुआ), संतरा, मौसंबी, अंगूर, कीवी और अनार जैसे फल फाइबर से भरपूर होते हैं। फाइबर स्टूल का वॉल्यूम बढ़ाता है और उसे सॉफ्ट बनाता है, जिससे बाउल मूवमेंट आसान हो जाती है। इसके अलावा इन फलों में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो बॉडी को हाइड्रेट रखती है और कब्ज की समस्या कम करती है। अंजीर (ताजा/सूखा) अंजीर में हाई फाइबर होता है, खासकर इसके छोटे-छोटे बीज आंतों को स्टिमुलेट करते हैं। यह स्टूल को सॉफ्ट बनाता है और आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है। इसलिए इसे पहले के समय में कब्ज के घरेलू उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। प्रून्स (सूखा आलूबुखारा) प्रून्स में एक नेचुरल तत्व ‘सॉर्बिटोल’ होता है। इससे आंतों में पानी एब्जॉर्ब होता है, जिससे स्टूल सॉफ्ट हो जाता है और बाउल मूवमेंट बेहतर हो जाता है। इससे कब्ज में राहत मिलती है। अलसी के बीज अलसी के बीज फाइबर से भरपूर होते हैं। ये आंतों में जेल जैसा टेक्सचर बनाते हैं, जिससे स्टूल स्मूदली पास होता है और बाउल मूवमेंट रेगुलर रहता है। कॉफी कॉफी में मौजूद कैफीन आंतों की मसल्स को स्टिमुलेट करता है। यह कोलन (बड़ी आंत) की एक्टिविटी बढ़ाकर बाउल मूवमेंट को ट्रिगर कर सकता है। इसलिए कई लोगों को कॉफी पीने के बाद तुरंत टॉयलेट जाने की इच्छा होती है। नींबू नींबू का रस डाइजेशन में मदद करता है। यह गैस्ट्रिक जूस के प्रोडक्शन को बढ़ाता है। गुनगुने पानी के साथ लेने पर बाउल मूवमेंट में मदद करता है। सवाल- कब्ज से बचने के नेचुरल उपाय क्या हैं? जवाब- इसके लिए कुछ तरीके अपनाए जा सकते हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या नेचुरल लैक्सेटिव के साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं? जवाब- हां, गलत तरीके या ज्यादा मात्रा में नेचुरल लैक्सेटिव लेने पर नुकसान हो सकता है। जैसे बहुत ज्यादा कॉफी पीने से कैफीन टॉक्सिसिटी हो सकती है। ग्राफिक में इसके सभी साइड इफेक्ट्स देखिए- थोड़ा विस्तार से समझते हैं- 1. गैस, ब्लोटिंग इसबगोल, चिया सीड्स या ओट्स जैसे नेचुरल लैक्सेटिव्स ज्यादा लेने पर गैस हो सकती है। 2. पेट में ऐंठन या दर्द कुछ नेचुरल लैक्सेटिव्स जैसे प्रून्स या अंजीर ज्यादा मात्रा में नहीं लेने चाहिए। इससे बाउल मूवमेंट बहुत बढ़ जाता है, जिसके कारण क्रैम्प्स हो सकते हैं। 3. डायरिया नेचुरल लैक्सेटिव्स ज्यादा लेने से स्टूल ढीला हो सकता है, लेकिन इससे कब्ज ठीक होने की बजाय डायरिया हो सकता है। 4. डिहाइड्रेशन लैक्सेटिव्स पानी को एब्जॉर्व करते हैं। इसलिए इनके साथ लगातार ढेर सारा पानी पीना जरूरी है। पानी कम पीने पर डिहाइड्रेन हो सकता है। 5. इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन ज्यादा मात्रा में नेचुरल लैक्सेटिव्स लेने पर शरीर में सोडियम-पोटेशियम का बैलेंस बिगड़ सकता है। 6. दवाओं का असर कम हो सकता है इसबगोल या हाई फाइबर नेचुरल लैक्सेटिव्स से कुछ दवाओं के एब्जॉर्प्शन पर असर पड़ता है। 7. एलर्जी कुछ लोगों को नेचुरल लैक्सेटिव फूड से एलर्जी हो सकती है। सवाल- क्या नेचुरल या ओवर-द-काउंटर लिए गए लैक्सेटिव्स पर परमानेंट निर्भरता भी हो सकती है? जवाब- हां, दोनों तरह के लैक्सेटिव्स डिपेंडेंसी पैदा कर सकते हैं। लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि डिपेंडेंसी का जोखिम हमेशा और सबके लिए एक जैसा नहीं होता। डिपेंडेंसी के कुछ कारण हैं- अगर हफ्तों-महीनों तक रोज लैक्सेटिव्स लिए जाएं। अगर बिना डॉक्टर की सलाह के अपने मन से लैक्सेटिव्स लिए जाएं। अगर इंस्टेंट रिलीफ पर फोकस हो, लेकिन लाइफस्टाइल में सुधार न किए जाएं। अगर IBS या थायरॉइड जैसी कोई मेडिकल कंडीशन हो। अगर ओवर-द-काउंटर मिलने वाले स्टिमुलेंट लैक्सेटिव का यूज ज्यादा किया जाए। अगर टॉयलेट जाने का टाइमिंग और रूटीन खराब हो। कुल मिलाकर, नेचुरल लैक्सेटिव रोजमर्रा की डाइट के ऐसे विकल्प हैं, जो पेट को हल्का रखने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। हालांकि ये ज्यादातर सुरक्षित होते हैं, पर हर शरीर का रिस्पॉन्स अलग होता है। इसलिए इन्हें संतुलित मात्रा में लें और अपनी लाइफस्टाइल को भी साथ में बैलेंस रखना जरूरी है। अगर अक्सर