Sunday, 30 Aug 2026 | 11:56 AM

Trending :

Ken River Protest Continues | Tribal Displacement Stir, Chita Andolan

Ken River Protest Continues | Tribal Displacement Stir, Chita Andolan

छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित हो रहे आदिवासियों का ‘चिता आंदोलन’ आज (रविवार) और तेज हो गया। केन नदी की जलधारा में चिताओं पर लेटकर विरोध कर रहे हजारों आदिवासियों ने सामूहिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है।

.

आंदोलन के आठवें दिन, प्रभावित गांवों के हजारों परिवारों ने अपने घरों में चूल्हा नहीं जलाया। बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और पुरुषों सहित सभी ने सामूहिक रूप से भोजन का त्याग किया। “खाना नहीं बनाएंगे, न्याय लेकर रहेंगे” के नारे लगाते हुए, वे नदी के किनारे और जलधारा के बीच बनी चिताओं तक पहुंचे।

महिलाएं बच्चों के साथ चिताओं पर लेटीं भूख हड़ताल के कारण नदी के बीच चल रहा ‘चिता आंदोलन’ और तीव्र हो गया। सैकड़ों महिलाएं अपने बच्चों के साथ चिताओं पर लेटी गईं। नदी किनारे हजारों अन्य लोग भी बिना भोजन के “न्याय दो या मौत दो!” के नारे लगाकर आंदोलनकारियों का समर्थन कर रहे थे।

जय किसान संगठन के अमित भटनागर, जो आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं, ने प्रशासन पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “आज हजारों घरों में चूल्हा नहीं जला। यह भूख हड़ताल प्रशासन के दमन और असंवेदनशीलता का सीधा जवाब है।” भटनागर ने आगे कहा कि उन्हें झूठा मुआवजा नहीं, बल्कि अपनी जल, जंगल, जमीन और संस्कृति चाहिए।

मांग पूरी न होने तक आंदोलन चलेगा उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी वैधानिक मांगें (धारा 11, 15, 18 आदि का पालन) पूरी नहीं होंगी, तब तक यह सामूहिक भूख हड़ताल और चिता आंदोलन जारी रहेगा। भटनागर ने प्रशासन पर मेडिकल टीम और राशन-पानी की आपूर्ति पर रोक लगाकर मानवीय संकट पैदा करने का भी आरोप लगाया।

इधर, कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने आंदोलन को अवैध बताते हुए धारा 163 (धारा 144) के उल्लंघन पर कानूनी कार्यवाही की चेतावनी दी है। उनका दावा है कि 90 फीसदी मुआवजा दिया जा चुका है, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि यह झूठ है और वे ग्राम सभा के दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

यह भी पढ़ें…

पानी में नमक डालकर बच्चों को खिला रहे रोटी; अर्थी पर लेटे, बोले- न्याय दो या फिर मौत

सरकार ने सबकुछ तो छीन लिया। चिता पर बच्चों के साथ लेटे हैं। बच्चे रोते हैं, सूखी रोटी नहीं खाते। मजबूरी में पानी में नमक मिलाकर उसमें रोटी डुबोकर खिला रहे हैं।

यह दर्द है रानी का, जो केन-बेतवा लिंक परियोजना में शामिल प्रभावितों में से एक है। प्रशासन द्वारा लगाई धारा 163 और कड़े पहरे के बीच, हजारों आदिवासियों, किसानों और महिलाओं ने केन नदी की जलधारा के बीचों-बीच विरोध स्वरूप ‘प्रतीकात्मक चिताओं’ पर लेटे हैं।

रानी समेत बच्चों को लेकर चिताओं पर लेटी इन महिलाओं की एक ही मांग है- “न्याय दो या मौत।” पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
देश में 576 अरबपति, 5 साल में चार गुना बढ़े:सरकार को नहीं पता अरबपतियों के पास कितनी संपत्ति, दावा- बेरोजगारी और गरीबी घटी

July 28, 2026/
10:31 am

देश में पिछले पांच साल में अरबपतियों की संख्या में चार गुना से ज्यादा का इजाफा हुआ है। साल 2021-22...

Epstein Files Sex Scandal Controversy; Hyatt Hotels Chairman

February 19, 2026/
3:12 am

न्यूयॉर्क2 दिन पहले कॉपी लिंक हयात होटल्स के कार्यकारी अध्यक्ष अरबपति थॉमस प्रित्जकर 2018 से जेफ्री एपस्टीन के संपर्क में...

5 जून को रिलीज होगी करिश्मा कपूर स्टारर सीरीज:‘ब्राउन’ में दिखेगा कोलकाता का अनदेखा चेहरा; डायरेक्टर अभिनय देव से खास बातचीत

June 1, 2026/
4:59 pm

बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा कपूर जल्द ही जी 5 की वेब सीरीज ‘ब्राउन’ में नजर आने वाली हैं। अभिनय देव के...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Ken River Protest Continues | Tribal Displacement Stir, Chita Andolan

Ken River Protest Continues | Tribal Displacement Stir, Chita Andolan

छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित हो रहे आदिवासियों का ‘चिता आंदोलन’ आज (रविवार) और तेज हो गया। केन नदी की जलधारा में चिताओं पर लेटकर विरोध कर रहे हजारों आदिवासियों ने सामूहिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है।

.

आंदोलन के आठवें दिन, प्रभावित गांवों के हजारों परिवारों ने अपने घरों में चूल्हा नहीं जलाया। बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और पुरुषों सहित सभी ने सामूहिक रूप से भोजन का त्याग किया। “खाना नहीं बनाएंगे, न्याय लेकर रहेंगे” के नारे लगाते हुए, वे नदी के किनारे और जलधारा के बीच बनी चिताओं तक पहुंचे।

महिलाएं बच्चों के साथ चिताओं पर लेटीं भूख हड़ताल के कारण नदी के बीच चल रहा ‘चिता आंदोलन’ और तीव्र हो गया। सैकड़ों महिलाएं अपने बच्चों के साथ चिताओं पर लेटी गईं। नदी किनारे हजारों अन्य लोग भी बिना भोजन के “न्याय दो या मौत दो!” के नारे लगाकर आंदोलनकारियों का समर्थन कर रहे थे।

जय किसान संगठन के अमित भटनागर, जो आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं, ने प्रशासन पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “आज हजारों घरों में चूल्हा नहीं जला। यह भूख हड़ताल प्रशासन के दमन और असंवेदनशीलता का सीधा जवाब है।” भटनागर ने आगे कहा कि उन्हें झूठा मुआवजा नहीं, बल्कि अपनी जल, जंगल, जमीन और संस्कृति चाहिए।

मांग पूरी न होने तक आंदोलन चलेगा उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी वैधानिक मांगें (धारा 11, 15, 18 आदि का पालन) पूरी नहीं होंगी, तब तक यह सामूहिक भूख हड़ताल और चिता आंदोलन जारी रहेगा। भटनागर ने प्रशासन पर मेडिकल टीम और राशन-पानी की आपूर्ति पर रोक लगाकर मानवीय संकट पैदा करने का भी आरोप लगाया।

इधर, कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने आंदोलन को अवैध बताते हुए धारा 163 (धारा 144) के उल्लंघन पर कानूनी कार्यवाही की चेतावनी दी है। उनका दावा है कि 90 फीसदी मुआवजा दिया जा चुका है, लेकिन आंदोलनकारियों का कहना है कि यह झूठ है और वे ग्राम सभा के दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग पर अड़े हुए हैं।

यह भी पढ़ें…

पानी में नमक डालकर बच्चों को खिला रहे रोटी; अर्थी पर लेटे, बोले- न्याय दो या फिर मौत

सरकार ने सबकुछ तो छीन लिया। चिता पर बच्चों के साथ लेटे हैं। बच्चे रोते हैं, सूखी रोटी नहीं खाते। मजबूरी में पानी में नमक मिलाकर उसमें रोटी डुबोकर खिला रहे हैं।

यह दर्द है रानी का, जो केन-बेतवा लिंक परियोजना में शामिल प्रभावितों में से एक है। प्रशासन द्वारा लगाई धारा 163 और कड़े पहरे के बीच, हजारों आदिवासियों, किसानों और महिलाओं ने केन नदी की जलधारा के बीचों-बीच विरोध स्वरूप ‘प्रतीकात्मक चिताओं’ पर लेटे हैं।

रानी समेत बच्चों को लेकर चिताओं पर लेटी इन महिलाओं की एक ही मांग है- “न्याय दो या मौत।” पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.