Healthy Street Food| Benefits of boiled egg| Bhuna chana khane ke fayde: हेल्दी स्ट्रीट फूड्स कौन-से हैं

Last Updated:March 26, 2026, 23:10 IST Healthy Street Foods: स्ट्रीट फूड्स आमतौर पर सिर्फ स्वाद और फटाफट पेट भरने के लिए फेमस होते हैं. लेकिन हार्ट एक्सपर्ट डॉक्टर आलोक चोपड़ा ने बताया कि सही स्ट्रीट फूड्स का चुनाव सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है. इसमें चटपटी भेल पूरी से लेकर उबले अंडे, भूनी मकई शामिल है. ख़बरें फटाफट भारत के स्ट्रीट फूड्स दुनिया भर में फेमस हैं.देश के अलग-अलग राज्यों की तरह ही स्ट्रीट फूड में भी बहुत विविधता देखने को मिलती है. ये फूड्स किफायती होने के साथ ही स्वाद के मामले में बड़े-बड़े महंगे रेस्टोरेंट को भी टक्कर देता है. लेकिन स्ट्रीट फूड को लेकर सबसे बड़ी चिंता उसकी साफ-सफाई को लेकर होती है. लोगों को डर रहता है कि इसमें इस्तेमाल होने वाला पानी और सामग्री शुद्ध नहीं होती, और कई बार इसे बनाने में सही हाइजीन का पालन भी नहीं किया जाता. हालांकि इन कमियों के बावजूद स्ट्रीट फूड की लोकप्रियता कभी कम नहीं हुई है और आगे भी लोग इसे पसंद करते रहेंगे. अगर हम कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें, जैसे खाने की जगह साफ हो और सामग्री ताजी हो, तो स्ट्रीट फूड को भी हेल्दी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है. हार्ट स्पेशलिस्ट ने बताया स्ट्रीट फूड्स को हेल्दीदिल्ली के अनुभवी हार्ट डिजीज विशेषज्ञ डॉ. आलोक चोपड़ा ने इंस्टाग्राम पर बताया कि पौष्टिक खाना खाने के लिए हमेशा ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं होती. भारत के कई स्ट्रीट फूड ऐसे हैं जो तले-भुने और ज्यादा प्रोसेस्ड खाने के मुकाबले ज्यादा हेल्दी होते हैं. उन्होंने कहा कि “सही खाना महंगा नहीं, बल्कि समझदारी से चुना हुआ होना चाहिए.” View this post on Instagram
Kurja Plant Benefits : नवजात बच्चों के लिए दादी-नानी से कम नहीं ये पौधा, इसकी कोमल गर्माहट के कहने ही क्या, जानें उपयोग

Last Updated:March 24, 2026, 17:48 IST Kurja plant ke fayde : पहाड़ों में नवजात बच्चों की देखभाल के लिए कुरजा पौधा पारंपरिक नुस्खे में शामिल है. इसकी पत्तियों को हल्का गर्म कर कपड़े में लपेटकर छाती, पीठ या पैरों पर सेकाई दी जाती है. इससे शरीर को गर्माहट, बेहतर रक्त संचार और आराम मिलता है. पिथौरागढ़ की बुजुर्ग नंदी देवी लोकल 18 से बताती हैं कि यह तरीका आज भी फायदेमंद है, बस सावधानी जरूरी है. कुरजा एक जंगली पौधा है. इसकी पत्तियों में प्राकृतिक रूप से गर्म तासीर (हीट) होती है. पहाड़ों की जिंदगी हमेशा से प्रकृति के बेहद करीब रही है. यहां के लोग आज भी कई मामलों में पुराने पारंपरिक नुस्खों पर भरोसा करते हैं, खासकर जब बात नवजात बच्चों की देखभाल की हो. पहाड़ों में एक ऐसा ही खास और अनोखा नुस्खा है– कुरजा पौधा, जिसे नवजात बच्चों को हल्की गर्माहट देने यानी सेकाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है. कुरजा एक जंगली पौधा होता है, जो पहाड़ी इलाकों में आसानी से मिल जाता है. इसकी पत्तियों में प्राकृतिक रूप से गर्म तासीर (हीट) होती है. यही वजह है कि पुराने समय से इसे छोटे बच्चों की देखभाल में इस्तेमाल किया जाता रहा है. खासतौर पर ठंडे इलाकों में, जहां मौसम ज्यादातर ठंडा रहता है, वहां यह पौधा काफी उपयोगी माना जाता है. कुरजा पौधे की पत्तियों का इस्तेमाल बहुत ही सरल तरीके से किया जाता है. सबसे पहले इसकी ताजी पत्तियां और तेहनिया तोड़ी जाती हैं. फिर इन्हें हल्का सा गर्म किया जाता है (ध्यान रहे, ज्यादा गर्म नहीं करना है), इसके बाद पत्तियों को एक साफ कपड़े में लपेटा जाता है और फिर बच्चे की छाती, पीठ या पैरों पर हल्की-हल्की सेकाई दी जाती है. यह प्रक्रिया बहुत सावधानी से की जाती है, ताकि बच्चे की नाजुक त्वचा को कोई नुकसान न पहुंचे. Add News18 as Preferred Source on Google कुरजा पौधे की सेकाई के कई फायदे बताए जाते हैं. पहाड़ों में ठंड ज्यादा होती है, ऐसे में नवजात बच्चों को ठंड से बचाना बहुत जरूरी होता है. कुरजा की पत्तियां शरीर को प्राकृतिक गर्माहट देती हैं. हल्की सेकाई से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है, जिससे बच्चे का शरीर स्वस्थ रहता है. नवजात बच्चे जल्दी सर्दी-जुकाम की चपेट में आ जाते हैं. कुरजा की गर्म तासीर उन्हें इस समस्या से बचाने में मदद करती है. सेकाई से बच्चे की मांसपेशियों को आराम मिलता है और शरीर में जकड़न नहीं होती. जब बच्चा आराम महसूस करता है, तो उसे अच्छी और गहरी नींद आती है, जो उसके विकास के लिए बहुत जरूरी है. पहाड़ों में आज भी बुजुर्गों के पास ऐसे कई पारंपरिक ज्ञान होते हैं, जो पीढ़ियों से चले आ रहे हैं. बुजुर्ग नंदी देवी बताती हैं, “हमारे जमाने में तो यही सब उपाय होते थे. कुरजा की पत्तियों से बच्चों को हल्की सेकाई देते थे, इससे बच्चा जल्दी ठीक रहता था और ठंड भी नहीं लगती थी. आज भी अगर सही तरीके से किया जाए तो यह बहुत फायदेमंद है.” उनकी बातों से पता चलता है कि यह नुस्खा केवल परंपरा नहीं, बल्कि अनुभव पर आधारित है. हालांकि यह एक प्राकृतिक और सुरक्षित तरीका माना जाता है, फिर भी कुछ सावधानियां बहुत जरूरी हैं. पत्तियों को ज्यादा गर्म न करें, वरना बच्चे की त्वचा जल सकती है. हमेशा साफ कपड़े का इस्तेमाल करें. सेकाई बहुत हल्की और थोड़े समय के लिए ही करें, अगर बच्चे की त्वचा पर कोई रिएक्शन या लालपन दिखे तो तुरंत बंद करें. किसी भी समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूर लें. आजकल जहां लोग छोटी-छोटी बातों के लिए दवाइयों पर निर्भर हो गए हैं, ऐसे पारंपरिक नुस्खे हमें प्रकृति के करीब ले जाते हैं. हालांकि आधुनिक चिकित्सा बहुत जरूरी है, लेकिन अगर सही जानकारी और सावधानी के साथ इन पुराने तरीकों को अपनाया जाए, तो यह भी काफी लाभदायक हो सकते हैं. First Published : March 24, 2026, 17:48 IST
Ladyfinger benefits : शुगर कैसे कंट्रोल करती है भिंडी, पेट भी रखे हल्का…99% लोग नहीं जानते इसके ये वाले फायदे

Last Updated:March 21, 2026, 22:58 IST Ladyfinger health benefits : भिंडी न केवल स्वाद की रानी है, बल्कि सेहत का भी खजाना है. अक्सर लोग इसे साधारण सब्जी समझते हैं, लेकिन असल में भिंडी पोषक तत्वों का पावरहाउस है. अगर सही तरीके से इसका सेवन किया जाए, तो कई गंभीर रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है. भिंडी में कैलोरी कम होती है, इसलिए यह हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा बन जा सकती है. लोकल 18 से बलिया की चिकित्सक डॉ. वंदना तिवारी बताती हैं कि भिंडी प्राकृतिक रेचक की तरह काम करती है. गर्भावस्था में इसका फोलेट भ्रूण के विकास में काफी मददगार माना जाता है. भिंडी कोई आम सब्जी नहीं, बल्कि फाइबर, विटामिन K, फोलेट और एंटीऑक्सीडेंट जैसे तमाम गुणों से भरपूर होती है. ये सभी तत्व शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और कई जरूरी कार्यों को संतुलित रखते हैं. भिंडी में कैलोरी कम होती है, इसलिए यह हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा बन जा सकती है. भिंडी हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है. शुगर रोगियों के लिए भिंडी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. इसमें फाइबर और म्यूसीलेज नामक तत्व पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं. इसके नियमित सेवन से शुगर लेवल संतुलित रहता है और शरीर में अचानक बढ़ने वाले ग्लूकोज को नियंत्रित करने में सहायक होता है. भिंडी पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी अहम भूमिका निभा सकती है. इसका उच्च फाइबर कब्ज, गैस और पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करता है. यह एक प्राकृतिक रेचक की तरह काम करती है, जिससे पेट साफ रहता है. इसी के चलते पाचन प्रक्रिया भी बेहतर हो जाती है. इसको रोजाना सीमित मात्रा में खाने से पेट हल्का और स्वस्थ रहता हैं. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के मुताबिक, भिंडी में पेक्टिन होते हैं, जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम करता है. भिंडी ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी सहायक है, जिससे हृदय लंबे समय तक निरोग रहता है. अगर आप वजन घटाने के लिए तरकीब खोज रहे हैं, तो आपके लिए भिंडी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है. भिंडी में कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर पाए जाते हैं, ऐसा होने के कारण हो यह पेट को लंबे समय तक भरा रखती है. इससे बार-बार भूख नहीं लगती है और अनहेल्दी खाने से बचाव होता हैं. भिंडी वेट लॉस करने में बहुत उपयोगी है. भिंडी हड्डियों, त्वचा और आंखों के लिए भी बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसमें विटामिन K पाया जाता हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है, जबकि एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन A त्वचा को चमकदार और आंखों की रोशनी को बेहतर बनाए रखते हैं. गर्भावस्था में इसका फोलेट भ्रूण के विकास में काफी मददगार माना जाता है. इसे आप बगैर मसालेदार सब्जी, सलाद या भिंडी के पानी के रूप में सेवन कर सकते हैं. रात में भिंडी भिगोकर सुबह उसका पानी पीना खासतौर पर बेहद लाभकारी और फायदेमंद माना जाता हैं. लेकिन इसका अत्यधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा में ही खाएं. अगर आप किसी गंभीर रोग से ग्रस्त हैं तो बगैर आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लिए इसका सेवन न करें. First Published : March 21, 2026, 22:58 IST
Marigold Benefits: खुशबू नहीं…. बीमारियों का दुश्मन है ये फूल, स्किन से पेट तक हर समस्या का हल, जानिए फायदे

Last Updated:March 21, 2026, 13:18 IST गेंदे का फूल सिर्फ पूजा और सजावट के लिए ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद में एक प्रभावी औषधि के रूप में भी जाना जाता है. इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा से लेकर पाचन और आंखों तक के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. सही तरीके से उपयोग करने पर यह प्राकृतिक उपचार का एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है. गेंदे का फूल आयुर्वेद में एक औषधीय खजाना माना जाता है, जो पाचन, त्वचा और सूजन जैसी समस्याओं में लाभकारी होता है. इसमें एंटीसेप्टिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं. गेंदे की चाय या काढ़ा पेट की तकलीफ, एसिडिटी और बवासीर में राहत देने में मदद करता है. इसका उपयोग मुंहासों को ठीक करने और घाव भरने के लिए भी किया जाता है. एक्सपर्ट डॉक्टर विनीता शर्मा ने बताया की गेंदे का फूल आयुर्वेद में त्वचा के लिए एक चमत्कारी औषधि माना जाता है. यह एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है, जो मुंहासे, त्वचा की जलन, सूजन, दाग-धब्बे और रूखेपन को कम करने में मदद करता है. इसके पेस्ट या तेल के उपयोग से त्वचा में निखार और प्राकृतिक चमक आती है. आयुर्वेद में गेंदे का फूल पाचन सुधार के लिए एक उत्कृष्ट जड़ी-बूटी माना जाता है. इसके कड़वे और कसैले गुण पित्त के उत्पादन को उत्तेजित करते हैं, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है. यह कब्ज, एसिडिटी, गैस और पेट की सूजन (अल्सर) में राहत देने में मदद करता है. साथ ही, यह शरीर को डिटॉक्स करने और यकृत के स्वास्थ्य के लिए भी सहायक माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google आयुर्वेद में गेंदे का फूल सूजनरोधी गुणों के कारण दर्द और सूजन के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक औषधि माना जाता है. इसका उपयोग गठिया, मोच, मांसपेशियों के दर्द और चोट की सूजन को कम करने के लिए फूल और पत्तियों के लेप या तेल के रूप में किया जाता है. आयुर्वेद में गेंदे के फूल का उपयोग आंखों की रोशनी बढ़ाने और आंखों के स्वास्थ्य के लिए किया जाता है. इसमें ल्यूटिन और जेक्सैंथिन जैसे शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो नीली रोशनी से रक्षा करते हैं और मोतियाबिंद जैसी उम्र से जुड़ी समस्याओं को कम करने में सहायक हो सकते हैं. आयुर्वेद में गेंदे के फूल का उपयोग बवासीर (विशेषकर खूनी बवासीर) और अनियमित मासिक धर्म में लाभकारी माना गया है. इसकी पंखुड़ियों का इस्तेमाल रक्तस्राव रोकने, सूजन कम करने और दर्द से राहत देने के लिए किया जाता है. यह रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर बवासीर के मस्सों को सूखाने में सहायक माना जाता है. गेंदे के फूल आयुर्वेद में सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं, लेकिन इनका सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी होता है. बिना सलाह के सेवन करने पर यह नुकसानदायक हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर की सलाह लेकर ही इसका उपयोग करें. First Published : March 21, 2026, 13:18 IST
green vs yellow kiwi benefits | which kiwi is better for health | हरी और पीली कीवी में फर्क | सेहत के लिए कौन सी कीवी ज्यादा फायदेमंद है |

Last Updated:March 20, 2026, 20:00 IST Green vs Yellow Which Kiwi is Better for Health: कीवी को विटामिन्स का पावरहाउस माना जाता है, लेकिन बाजार में मिलने वाली हरी और पीली (गोल्डन) कीवी में चुनाव करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. बाहर से देखने में एक जैसी लगने वाली इन दोनों कीवी के स्वाद, बनावट और पोषण में काफी अंतर होता है. जहां हरी कीवी अपने खास खट्टे-मीठे स्वाद और फाइबर के लिए जानी जाती है, वहीं पीली कीवी अपनी मिठास और भारी मात्रा में विटामिन C के लिए मशहूर है. अगर आप अपनी डाइट में सही कीवी शामिल करना चाहते हैं, तो इनके बीच का यह बारीक फर्क समझना आपके लिए बहुत जरूरी है. हरी और पीली कीवी दोनों ही सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं, लेकिन अक्सर लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि आखिर खरीदें कौन सी. बाहर से दिखने में भले ये फल एक जैसे लगें, लेकिन इनके स्वाद, पोषक तत्व और शरीर पर असर में थोड़ा अंतर होता है. अगर आप भी हेल्थ को ध्यान में रखकर सही विकल्प चुनना चाहते हैं, तो दोनों कीवी के बीच का फर्क जानना बेहद जरूरी है. डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि हरी कीवी का स्वाद हल्का खट्टा और ताजगी भरा होता है, जो इसे गर्मियों में बेहद रिफ्रेशिंग बनाता है. इसमें विटामिन C भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है. इसके अलावा इसमें फाइबर भी अच्छा होता है, जो पाचन को दुरुस्त रखता है. अगर आपको हल्का खट्टा स्वाद पसंद है और पेट से जुड़ी दिक्कतें रहती हैं, तो हरी कीवी आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकती है. वहीं पीली कीवी, जिसे गोल्डन कीवी भी कहा जाता है, स्वाद में ज्यादा मीठी और जूसी होती है. इसमें विटामिन C की मात्रा हरी कीवी से भी ज्यादा होती है, जो स्किन को ग्लोइंग बनाने और शरीर को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है. इसका टेक्सचर मुलायम होता है, जिससे इसे खाना आसान लगता है. जो लोग खट्टा कम और मीठा ज्यादा पसंद करते हैं, उनके लिए पीली कीवी बेहतर चॉइस हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google अगर पोषण की बात करें तो दोनों ही कीवी में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं. हरी कीवी में जहां फाइबर ज्यादा होता है, वहीं पीली कीवी में विटामिन और मिनरल्स की क्वालिटी थोड़ी ज्यादा मानी जाती है. इसलिए अगर आपका फोकस पाचन पर है तो हरी कीवी चुनें, और अगर स्किन और इम्युनिटी पर ध्यान देना है तो पीली कीवी ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है. वजन घटाने वालों के लिए भी कीवी एक शानदार फल है. हरी कीवी में फाइबर ज्यादा होने के कारण यह लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है, जिससे ओवरईटिंग से बचा जा सकता है. वहीं पीली कीवी मीठी जरूर होती है, लेकिन इसमें कैलोरी ज्यादा नहीं होती, इसलिए यह भी डाइट में शामिल की जा सकती है. बस मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है ताकि बैलेंस बना रहे. स्किन के लिए अगर आप खास तौर पर कुछ ढूंढ रहे हैं, तो पीली कीवी आपको बेहतर रिजल्ट दे सकती है. इसमें मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स स्किन को अंदर से हेल्दी बनाते हैं और टैनिंग कम करने में मदद करते हैं. हालांकि हरी कीवी भी स्किन के लिए फायदेमंद है, लेकिन पीली कीवी का असर थोड़ा जल्दी दिख सकता है. इसलिए ग्लोइंग स्किन के लिए इसे डाइट में शामिल करना अच्छा रहेगा. खरीदते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. कीवी हमेशा हल्की सॉफ्ट होनी चाहिए, बहुत ज्यादा सख्त या बहुत ज्यादा गली हुई नहीं होनी चाहिए. हरी कीवी की स्किन पर हल्के बाल होते हैं, जबकि पीली कीवी की स्किन स्मूद होती है. इन छोटे-छोटे अंतर को पहचानकर आप सही और ताजी कीवी खरीद सकते हैं, जिससे आपको पूरा पोषण मिल सके. First Published : March 20, 2026, 20:00 IST
Kajal Benefits For Eyes | kajal benefits for eyes in hindi | काजल के फायदे |

सहारनपुर: आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए काजल का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है. दादी-नानी के नुस्खों से लेकर आधुनिक मेकअप किट तक, काजल हर किसी की पसंद है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि काजल सिर्फ एक श्रृंगार की वस्तु नहीं, बल्कि आंखों के लिए एक औषधि भी है? आयुर्वेद के अनुसार, सही तरीके से बना काजल न केवल आपकी आंखों को ठंडक पहुंचाता है, बल्कि यह कई गंभीर संक्रमणों से भी बचाता है. सहारनपुर के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. हर्ष ने बताया है कि कैसे घर पर तैयार किया गया काजल आपकी और आपके बच्चों की आंखों की रोशनी को नई शक्ति दे सकता है. आंखों के लिए काजल: सिर्फ सुंदरता नहीं, सेहत का राजअक्सर हम देखते हैं कि महिलाएं अपने छोटे बच्चों की आंखों में प्रतिदिन काजल लगाती हैं. बड़े व्यक्ति भी अपनी आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए काजल लगाना काफी पसंद करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि यह काजल आंखों को किस तरह का फायदा पहुंचाता है? आयुर्वेद के अनुसार, आंखों में घर का बना या अच्छी गुणवत्ता वाला काजल लगाना न केवल सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि यह आंखों को प्राकृतिक ठंडक और पोषण भी प्रदान करता है. आज के प्रदूषण भरे माहौल में आंखों की थकान, सूजन और संक्रमण एक आम समस्या बन गई है. ऐसे में प्राकृतिक काजल इन समस्याओं से लड़ने में रामबाण सिद्ध होता है. काजल लगाने के आयुर्वेदिक लाभप्राकृतिक या घर के बने काजल (जैसे कपूर, घी और अरंडी के तेल से निर्मित) आंखों में ताजगी और शीतलता लाते हैं. इससे जलन और थकान से तुरंत राहत मिलती है. काजल में मौजूद प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण कीटाणुओं को मारकर आंखों को खतरनाक इन्फेक्शन से बचाते हैं. यह आंखों के रूखेपन को कम करता है और नमी बनाए रखने में मदद करता है. इसके साथ ही, यह आंखों में धूल और बाहरी प्रदूषण को जाने से रोकने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. क्या कहते हैं आयुर्वेद विशेषज्ञ?आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बीएएमएस, एमडी डॉक्टर हर्ष ने लोकल 18 से विशेष बातचीत में बताया कि आंखों में काजल लगाना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है. उन्होंने कहा, ‘काजल आंखों की रोशनी को बढ़ाता है और आंखों में कफ इकट्ठा नहीं होने देता.’ डॉ. हर्ष ने आयुर्वेदिक ग्रंथों का हवाला देते हुए बताया कि ‘अष्टांग हृदयम’ में अंजन (काजल) के प्रयोग का स्पष्ट वर्णन है. जब आंखों में खुजली हो, चिपचिपापन महसूस हो, या धूल के कण जैसा अहसास हो, तो अंजन का प्रयोग करना चाहिए. इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति वातज, कफज या पित्तज दोषों से संबंधित नेत्र रोगों से पीड़ित है, तो उसे भी औषधीय काजल का प्रयोग कराया जा सकता है. बच्चों के लिए क्यों जरूरी है काजल?भारतीय परंपरा में बच्चों को काजल लगाना अनिवार्य माना जाता है. इसके पीछे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों कारण हैं. डॉ. हर्ष के अनुसार, बच्चों को काजल लगाने से उनकी आंखों की रोशनी अच्छी होती है और आंखें बड़ी व सुंदर दिखाई देती हैं. पारंपरिक रूप से इसे बच्चों को ‘बुरी नजर’ से बचाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है, जो समाज में गहरी आस्था का विषय है. घर पर काजल तैयार करने की सरल विधिबाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त काजल के बजाय घर पर शुद्ध काजल बनाना बेहद आसान है. डॉ. हर्ष ने इसकी विधि साझा करते हुए बताया:1. सबसे पहले शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं.2. इस जलते हुए दीपक के ऊपर थोड़ी दूरी पर एक दूसरा खाली दीपक या प्लेट रख दें.3. जलते हुए दीपक की कालिख (कालस) धीरे-धीरे ऊपर रखे बर्तन पर इकट्ठा होने लगेगी.4. इस एकत्रित कालिख को ही काजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसमें आवश्यकतानुसार एक बूंद बादाम का तेल या शुद्ध घी मिलाया जा सकता है.
kuchla vati uses in hindi | Kuchla Vati Benefits | कुचला वटी के फायदे | कुचला वटी |

Last Updated:March 19, 2026, 22:01 IST Kuchla Vati Benefits: कुचला वटी एक चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि है, जो कमजोर शरीर में ऊर्जा भरने और नसों की कमजोरी को दूर करने में सहायक है. बागपत के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र चौधरी के अनुसार, यह जोड़ों के दर्द, साइटिका, पाचन तंत्र की समस्याओं और पुरुष स्वास्थ्य के लिए रामबाण इलाज है. हालांकि, इसका सेवन बिना डॉक्टरी परामर्श और शोधन के जोखिम भरा हो सकता है. बागपत: आयुर्वेद की दुनिया में कई ऐसी औषधियां हैं जो लाइलाज बीमारियों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती हैं. इन्हीं में से एक है ‘कुचला वटी’, जिसे एक चमत्कारी औषधि माना जाता है. अगर आप शारीरिक कमजोरी, नसों की सुन्नता या जोड़ों के पुराने दर्द से परेशान हैं, तो कुचला वटी आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. बागपत के अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र चौधरी के अनुसार, यह औषधि न केवल शरीर को फौलादी ताकत देती है, बल्कि पाचन तंत्र और नर्वस सिस्टम को भी नए सिरे से सक्रिय कर देती है. हालांकि, इसका उपयोग जितना लाभकारी है, सावधानी न बरतने पर उतना ही जोखिम भरा भी हो सकता है. कुचला वटी: आयुर्वेद का एक शक्तिशाली उपहारकुचला वटी एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग सदियों से शरीर की शक्ति बढ़ाने और वात रोगों को दूर करने के लिए किया जाता रहा है. डॉ. राघवेंद्र बताते हैं कि कुचला वटी का मुख्य घटक ‘कुचला’ है. यह औषधि विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रभावी है जिनका शरीर समय से पहले कमजोर होने लगा है या जिन्हें नसों से जुड़ी गंभीर समस्याएं हैं. यह शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाकर आलस और थकान को कोसों दूर रखती है. जोड़ों के दर्द और सूजन में तुरंत आरामआज के समय में गठिया, साइटिका और मांसपेशियों का खिंचाव एक आम समस्या बन गई है. कुचला वटी इन समस्याओं में प्राकृतिक पेनकिलर की तरह काम करती है. यह शरीर के भीतर की सूजन को नियंत्रित करती है, जिससे जोड़ों की गतिशीलता बढ़ती है. जिन लोगों को चलने-फिरने में कठिनाई होती है या जिनके घुटनों में हमेशा दर्द बना रहता है, उनके लिए यह औषधि काफी राहत देने वाली साबित होती है. पुरुष स्वास्थ्य और यौन शक्ति में सुधारयौन स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कुचला वटी का विशेष महत्व माना गया है. डॉ. राघवेंद्र के अनुसार, यह पुरुषों में स्तंभन दोष जैसी समस्याओं को दूर करने में बेहद मददगार है. यह शरीर की आंतरिक कार्यक्षमता को बढ़ाती है और स्टैमिना में सुधार करती है, जिससे वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है. पाचन तंत्र को बनाए फौलादीखराब जीवनशैली के कारण कब्ज, अपच और पेट दर्द की समस्या अब घर-घर की कहानी है. कुचला वटी पाचन अग्नि को प्रदीप्त करती है. यह पुरानी से पुरानी कब्ज को ठीक करने और खाया-पिया शरीर को लगाने में मदद करती है. अगर आपका पेट साफ नहीं रहता, तो यह औषधि पाचन क्रिया को सुधारकर पूरे शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक है. नसों की कमजोरी और झनझनाहट का अंतहाथ-पैरों का सुन्न हो जाना या नसों में झनझनाहट होना तंत्रिका तंत्र की कमजोरी का संकेत है. कुचला वटी नसों को सक्रिय और मजबूत बनाती है. यह मस्तिष्क से शरीर के अंगों तक पहुंचने वाले संकेतों को तेज करती है, जिससे लकवा जैसी स्थितियों के बाद रिकवरी में भी मदद मिलती है. सावधानी: बिना शोधन है जानलेवाकुचला वटी के फायदों के साथ इसकी सावधानी सबसे महत्वपूर्ण है. डॉ. राघवेंद्र चौधरी चेतावनी देते हैं कि कच्चा कुचला अत्यंत विषैला होता है. आयुर्वेद में इसे शुद्ध करने (शोधन) की एक लंबी प्रक्रिया है, जिसके बाद ही यह औषधि बनती है. इसलिए कभी भी कच्चे कुचले का प्रयोग न करें. डॉक्टर की सलाह और सेवन विधिइसका सेवन दूध या पानी के साथ किया जा सकता है, लेकिन इसकी खुराक व्यक्ति की उम्र और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करती है. डॉ. राघवेंद्र चौधरी ने स्पष्ट किया है कि इसका अधिकतम सेवन नुकसानदेह हो सकता है. इसलिए, इस्तेमाल से पहले अपने नजदीकी सरकारी आयुर्वेदिक चिकित्सालय या किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें. About the Author Rahul Goel राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें Location : Baghpat,Uttar Pradesh First Published : March 19, 2026, 21:58 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
Neem phool health benefits| garmi Main body ko thanda krne wale food| नीम के फूल के फायदे

Last Updated:March 19, 2026, 21:24 IST Neem flowers Benefits: नीम के पत्ते ही नहीं इसके छोटे-सफेद फूल भी सेहत के लिए वरदान साबित होते हैं. गर्मी के मौसम में इसका सेवन करने से हीटवेव के साइड इफेक्ट से बचाव में मदद मिलती है. इसमें ऐसे औषधिय गुण होते हैं, जो आपको गर्मी की मार से बचा सकते हैं. ख़बरें फटाफट Neem Ke Phool Ke Fayde: गर्मी का मौसम शुरू हो गया है. तेज धूप, लू और बढ़ती गर्मी में स्वस्थ रहना आसान नहीं होता. इस मौसम में शरीर जल्दी थक जाता है और कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं. आयुर्वेद के अनुसार इन समस्याओं से बचने के लिए नीम के फूलों का सेवन फायदेमंद होता है. ये छोटे-छोटे फूल शरीर को ठंडक देते हैं, खून साफ करते हैं, पेट की समस्याओं को दूर करते हैं और त्वचा को भी बेहतर बनाते हैं. हम सब जानते हैं कि नीम की पत्तियां कड़वी होती हैं, लेकिन इसके फूल भी बहुत लाभकारी होते हैं. पहले के समय में दादी-नानी गर्मियों में नीम के फूलों से शरबत या भुजिया बनाकर खिलाती थीं. ये फूल खुशबूदार होते हैं और इनमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो शरीर को गर्मी से बचाते हैं. नीम के फूल के औषधिय गुणआयुर्वेद में नीम के फूलों को बहुत उपयोगी माना गया है. इनमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. रोजाना इनका सेवन करने से खून साफ होता है, चेहरे पर निखार आता है और मुंहासे व दाग-धब्बे कम होते हैं. साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और भूख भी सुधारते हैं. कुछ शोधों में भी पाया गया है कि नीम के फूलों में ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं. ये डायबिटीज और अन्य बीमारियों के खिलाफ भी मदद कर सकते हैं. पाचन के लिए रामबाणनीम के फूल पेट के लिए भी ये बहुत फायदेमंद हैं. अपच, कब्ज, गैस और पेट के कीड़ों जैसी समस्याओं में राहत मिलती है.इससे पाचन अच्छा होता है और ब्लड शुगर भी कंट्रोल में रहती है. कैसे करें नीम के फूलों का सेवन उत्तर भारत में नीम के फूलों को सरसों के तेल और जीरे के साथ भुजिया बनाकर खाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत में भी कई व्यंजनों में इनका उपयोग होता है. गर्मियों में नीम के फूलों का शरबत पीने से पेट ठंडा रहता है. कुल मिलाकर नीम के फूल गर्मी में शरीर को स्वस्थ और ठंडा रखने का एक आसान और नेचुरल तरीका हैं. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 19, 2026, 21:24 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
Benefits of moringa I इम्यूनिटी, हड्डियां और ब्लड शुगर के लिए सुपरफूड

Last Updated:March 19, 2026, 20:43 IST सहजन, जिसे मोरिंगा या शीगरू भी कहते हैं, एक देसी सुपरफूड है. इसके पत्ते, फली और छाल में भरपूर पोषण और औषधीय गुण हैं. यह इम्यूनिटी बढ़ाने, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. सही मात्रा में सेवन से यह कई बीमारियों से बचाव में भी लाभकारी है. बलिया. सहजन या मोरिंगा, जिसे शीगरू के नाम से भी जाना जाता हैं, एक ऐसा देसी सुपरफूड है, जो किसी संजीवनी से कम नहीं है. इसके पत्ते, फल (ड्रमस्टिक) और छाल तीनों रूप में ही पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर हैं. अगर इम्युनिटी मजबूत करना आप चाह रहे हैं, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखना चाहते हैं या फिर हड्डियों को ताकत देना चाहते हैं, तो सहजन आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह अनेकों बीमारियों को दूर करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. काया चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर डॉ. स्नेहामई मिश्रा ने कहा कि, वह उड़ीसा की रहने वाली है, जो अभी फिलहाल शांति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल बांसडीह रोड थाना क्षेत्र अंतर्गत मझौली बलिया में एक साल से कार्यरत हैं. चीज एक, लेकिन फायदे अनेक सबसे पहले बात करते हैं सहजन के पत्ते की, ये आयरन, कैल्शियम, विटामिन A, C और E का अच्छा स्रोत हैं. ये न केवल एनीमिया यानी खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाने में मददगार हैं. जिन लोगों को हाई ब्लड शुगर या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उनके लिए ये पत्ते रामबाण है. यहीं नहीं, इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो सूजन कम कर जोड़ों के दर्द में राहत देते हैं. यह दिमाग के लिए भी किसी टॉनिक से कम नहीं है. यह याददाश्त बेहतर बनाने में सहायक होता है. अगर बात सहजन की फली की करे, तो इसे हम ड्रमस्टिक के नाम से जानते हैं. यह फली फाइबर से भरपूर होती हैं, जो पाचन को दुरुस्त कर कब्ज जैसी परेशानियों से छुटकारा दिलाती है. इसमें कैल्शियम और फास्फोरस पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे को कम करते हैं. इसके एंटीबैक्टीरियल गुण शरीर को संक्रमण से भी बचाते हैं. सहजन की छाल और तना भी अद्भुत फायदे देते हैं. इसका काढ़ा गठिया, साइटिका और सूजन जैसी समस्याओं में राहत देता है. यह पाचन सुधारने और ब्लड शुगर कम करने में भी मददगार है. हालांकि, गर्भवती महिलाओं को इसकी जड़ या छाल का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह नुकसानदायक हो सकता है. पत्तों का साग या काढ़ा, फली की सब्जी या सांभर और छाल का काढ़ा बनाकर सेवन किया जाता हैं. लेकिन उपयोग से पहले आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह बहुत जरूरी है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Ballia,Uttar Pradesh First Published : March 19, 2026, 20:43 IST
castor leaves benefits in hindi | castor leaves benefits | अरंडी के पत्ते के फायदे | अरंडी के पत्ते के फायदे और नुकसान |

Last Updated:March 19, 2026, 15:28 IST Castor Leaves Benefits: बदलते मौसम और गलत जीवनशैली के कारण आज हर दूसरा व्यक्ति जोड़ों के दर्द, सूजन या पेट की समस्याओं से जूझ रहा है. ऐसे में आयुर्वेद का एक प्राचीन नुस्खा ‘अरंडी के पत्ते’ किसी वरदान से कम नहीं हैं. एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर ये पत्ते न केवल गंभीर से गंभीर दर्द को सोख लेते हैं, बल्कि पुरानी कब्ज और त्वचा रोगों को जड़ से मिटाने की क्षमता रखते हैं. आइए जानते हैं डॉक्टर गीतिका शर्मा के अनुसार, कैसे ये मामूली दिखने वाले पत्ते आपकी सेहत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं. अरंडी के पत्ते स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. विशेष रूप से सूजन, जोड़ों के दर्द और त्वचा रोगों में, इनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं. जो दर्द कम करने और घाव भरने में मदद करते हैं. इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से लेप या तेल के रूप में किया जाता है. जो कब्ज और त्वचा की समस्याओं में भी आराम देते हैं। डॉक्टर गीतिका शर्मा ने बताया किअरंडी के पत्ते जोड़ों के दर्द, सूजन और गठिया में राहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं. इनमें सूजन-रोधी गुण होते हैं. जो दर्द कम करने में मदद करते हैं. सरसों या तिल के तेल के साथ गर्म करके, इन पत्तों का लेप या सिंकाई करने से जोड़ों की जकड़न कम होती है और पुराने दर्द में भी राहत मिलती है। अरंडी के पत्ते और उनका तेल त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे संक्रमण, खुजली, घाव और सूजन के इलाज में बेहद फायदेमंद होते हैं. इनके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण, ये दाद और सोरायसिस जैसी स्किन कंडीशंस को ठीक करने में मदद करते हैं. पत्तों का पेस्ट या तेल त्वचा को नमी भी प्रदान करता है। Add News18 as Preferred Source on Google अरंडी के पत्ते और पाचन सुधारने व कब्ज दूर करने के लिए अत्यधिक फायदेमंद होते हैं. इनमें रेचक गुण होते हैं जो आंतों को उत्तेजित कर मल त्याग को आसान बनाते हैं. इनका उपयोग पुरानी कब्ज, गैस, और पेट की सूजन से राहत पाने के लिए किया जाता है। अरंडी के पत्ते शरीर में गांठ या सूजन को कम करते हैं. इनमें एंटी-इफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो दर्द और सूजन को राहत देते हैं. अब्जिव पत्तों का रस या पेस्ट लगाकर लाभ उठाएं. डॉक्टर से सलाह लेकर इसका उपयोग करें और सेहत का ध्यान रखें। अरंडी के पत्ते का पेस्ट घावों को जल्दी भरता है और बालों के विकास को बढ़ावा देता है. इसमें एंटीसेप्टिक और पोषक तत्व होते हैं जो त्वचा और बालों को स्वस्थ बनाते हैं. अब्जिव पत्तों का पेस्ट लगाकर लाभ उठाएं और सेहत का ध्यान रखें। अरंडी के पत्ते सेहत के लिए वैसे तो फायदेमंद होते हैं. लेकिन इसका सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी होता है. बिना चिकित्सक की सलाह के इसका सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि यह नुकसानदायक भी हो सकते हैं। First Published : March 19, 2026, 15:28 IST









