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Kajal Benefits For Eyes | kajal benefits for eyes in hindi | काजल के फायदे |

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सहारनपुर: आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए काजल का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है. दादी-नानी के नुस्खों से लेकर आधुनिक मेकअप किट तक, काजल हर किसी की पसंद है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि काजल सिर्फ एक श्रृंगार की वस्तु नहीं, बल्कि आंखों के लिए एक औषधि भी है? आयुर्वेद के अनुसार, सही तरीके से बना काजल न केवल आपकी आंखों को ठंडक पहुंचाता है, बल्कि यह कई गंभीर संक्रमणों से भी बचाता है. सहारनपुर के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. हर्ष ने बताया है कि कैसे घर पर तैयार किया गया काजल आपकी और आपके बच्चों की आंखों की रोशनी को नई शक्ति दे सकता है.

आंखों के लिए काजल: सिर्फ सुंदरता नहीं, सेहत का राज
अक्सर हम देखते हैं कि महिलाएं अपने छोटे बच्चों की आंखों में प्रतिदिन काजल लगाती हैं. बड़े व्यक्ति भी अपनी आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए काजल लगाना काफी पसंद करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि यह काजल आंखों को किस तरह का फायदा पहुंचाता है? आयुर्वेद के अनुसार, आंखों में घर का बना या अच्छी गुणवत्ता वाला काजल लगाना न केवल सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि यह आंखों को प्राकृतिक ठंडक और पोषण भी प्रदान करता है.

आज के प्रदूषण भरे माहौल में आंखों की थकान, सूजन और संक्रमण एक आम समस्या बन गई है. ऐसे में प्राकृतिक काजल इन समस्याओं से लड़ने में रामबाण सिद्ध होता है.

काजल लगाने के आयुर्वेदिक लाभ
प्राकृतिक या घर के बने काजल (जैसे कपूर, घी और अरंडी के तेल से निर्मित) आंखों में ताजगी और शीतलता लाते हैं. इससे जलन और थकान से तुरंत राहत मिलती है. काजल में मौजूद प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण कीटाणुओं को मारकर आंखों को खतरनाक इन्फेक्शन से बचाते हैं. यह आंखों के रूखेपन को कम करता है और नमी बनाए रखने में मदद करता है. इसके साथ ही, यह आंखों में धूल और बाहरी प्रदूषण को जाने से रोकने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है.

क्या कहते हैं आयुर्वेद विशेषज्ञ?
आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बीएएमएस, एमडी डॉक्टर हर्ष ने लोकल 18 से विशेष बातचीत में बताया कि आंखों में काजल लगाना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है. उन्होंने कहा, ‘काजल आंखों की रोशनी को बढ़ाता है और आंखों में कफ इकट्ठा नहीं होने देता.’

डॉ. हर्ष ने आयुर्वेदिक ग्रंथों का हवाला देते हुए बताया कि ‘अष्टांग हृदयम’ में अंजन (काजल) के प्रयोग का स्पष्ट वर्णन है. जब आंखों में खुजली हो, चिपचिपापन महसूस हो, या धूल के कण जैसा अहसास हो, तो अंजन का प्रयोग करना चाहिए. इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति वातज, कफज या पित्तज दोषों से संबंधित नेत्र रोगों से पीड़ित है, तो उसे भी औषधीय काजल का प्रयोग कराया जा सकता है.

बच्चों के लिए क्यों जरूरी है काजल?
भारतीय परंपरा में बच्चों को काजल लगाना अनिवार्य माना जाता है. इसके पीछे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों कारण हैं. डॉ. हर्ष के अनुसार, बच्चों को काजल लगाने से उनकी आंखों की रोशनी अच्छी होती है और आंखें बड़ी व सुंदर दिखाई देती हैं. पारंपरिक रूप से इसे बच्चों को ‘बुरी नजर’ से बचाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है, जो समाज में गहरी आस्था का विषय है.

घर पर काजल तैयार करने की सरल विधि
बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त काजल के बजाय घर पर शुद्ध काजल बनाना बेहद आसान है. डॉ. हर्ष ने इसकी विधि साझा करते हुए बताया:
1. सबसे पहले शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं.
2. इस जलते हुए दीपक के ऊपर थोड़ी दूरी पर एक दूसरा खाली दीपक या प्लेट रख दें.
3. जलते हुए दीपक की कालिख (कालस) धीरे-धीरे ऊपर रखे बर्तन पर इकट्ठा होने लगेगी.
4. इस एकत्रित कालिख को ही काजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसमें आवश्यकतानुसार एक बूंद बादाम का तेल या शुद्ध घी मिलाया जा सकता है.

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आंखों के लिए काजल: सिर्फ सुंदरता नहीं, सेहत का राज
अक्सर हम देखते हैं कि महिलाएं अपने छोटे बच्चों की आंखों में प्रतिदिन काजल लगाती हैं. बड़े व्यक्ति भी अपनी आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए काजल लगाना काफी पसंद करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि यह काजल आंखों को किस तरह का फायदा पहुंचाता है? आयुर्वेद के अनुसार, आंखों में घर का बना या अच्छी गुणवत्ता वाला काजल लगाना न केवल सुंदरता बढ़ाता है, बल्कि यह आंखों को प्राकृतिक ठंडक और पोषण भी प्रदान करता है.

आज के प्रदूषण भरे माहौल में आंखों की थकान, सूजन और संक्रमण एक आम समस्या बन गई है. ऐसे में प्राकृतिक काजल इन समस्याओं से लड़ने में रामबाण सिद्ध होता है.

काजल लगाने के आयुर्वेदिक लाभ
प्राकृतिक या घर के बने काजल (जैसे कपूर, घी और अरंडी के तेल से निर्मित) आंखों में ताजगी और शीतलता लाते हैं. इससे जलन और थकान से तुरंत राहत मिलती है. काजल में मौजूद प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण कीटाणुओं को मारकर आंखों को खतरनाक इन्फेक्शन से बचाते हैं. यह आंखों के रूखेपन को कम करता है और नमी बनाए रखने में मदद करता है. इसके साथ ही, यह आंखों में धूल और बाहरी प्रदूषण को जाने से रोकने के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है.

क्या कहते हैं आयुर्वेद विशेषज्ञ?
आयास आयुर्वेदिक चिकित्सालय से बीएएमएस, एमडी डॉक्टर हर्ष ने लोकल 18 से विशेष बातचीत में बताया कि आंखों में काजल लगाना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी है. उन्होंने कहा, ‘काजल आंखों की रोशनी को बढ़ाता है और आंखों में कफ इकट्ठा नहीं होने देता.’

डॉ. हर्ष ने आयुर्वेदिक ग्रंथों का हवाला देते हुए बताया कि ‘अष्टांग हृदयम’ में अंजन (काजल) के प्रयोग का स्पष्ट वर्णन है. जब आंखों में खुजली हो, चिपचिपापन महसूस हो, या धूल के कण जैसा अहसास हो, तो अंजन का प्रयोग करना चाहिए. इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति वातज, कफज या पित्तज दोषों से संबंधित नेत्र रोगों से पीड़ित है, तो उसे भी औषधीय काजल का प्रयोग कराया जा सकता है.

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1. सबसे पहले शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं.
2. इस जलते हुए दीपक के ऊपर थोड़ी दूरी पर एक दूसरा खाली दीपक या प्लेट रख दें.
3. जलते हुए दीपक की कालिख (कालस) धीरे-धीरे ऊपर रखे बर्तन पर इकट्ठा होने लगेगी.
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