Thursday, 17 Sep 2026 | 06:26 AM

Trending :

EXCLUSIVE

पश्चिम बंगाल चुनाव: 19 पर हत्या से जुड़े मामले की जानकारी… जानें पश्चिम बंगाल के पहले चरण में कितने करोड़पति

पश्चिम बंगाल चुनाव: 19 पर हत्या से जुड़े मामले की जानकारी... जानें पश्चिम बंगाल के पहले चरण में कितने करोड़पति

पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले चरण से पहले सभी आश्रमों ने प्रचार प्रसार तेज कर दिया है। पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को है, इससे पहले एक इंटरव्यू वाली रिपोर्ट सामने आई है। एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स) के अनुसार पहले चरण में उतरने वाले प्रतियोगी में लगभग हर 4 साल में एक पर आपराधिक मामला दर्ज है। इसी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लगभग हर पांचवां उम्मीदवार करोड़पति है। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, 1475 बदमाशों में 23 प्रतिशत (345) बदमाशों के मुताबिक ऊपर आपराधिक मामले दर्ज हैं। 20 प्रतिशत (294) पर तो गंभीर मामले दर्ज हैं. हत्‍या के प्रयास के मामले में 100 से अधिक लाभार्थी दर्ज हैं। 6 उम्मीदवार तो ऐसे हैं, जिन पर ऊपर अपवित्रता के आरोप हैं। 19 पर हत्या से जुड़ा मामला रिपोर्ट में सबसे डेट्स वाली बात ये है कि 19 कैंडिडेट्स ऐसे हैं, जिनके ऊपर हत्या से जुड़े मामले हैं। 105 पर हत्या के प्रयास का आरोप है. 98 दावेदार ऐसे हैं, जो महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले दर्ज करते हैं। प्रमुखों में सबसे बड़ा मामला भाजपा के ऊपर है। उन्होंने 152 में से 106 में इन मामलों की जानकारी दी है. इस सूची में कांग्रेस के 63, सीपीएम के 43 और कांग्रेस के 39 उम्मीदवार शामिल हैं। यह भी पढ़ें- बंगाल चुनाव से पहले EC सख्त! बर्नोल-बोरोलीन का ज़िक्र क्या कहा जानिए गंभीर आरोप की बात करें तो बीजेपी के 63 प्रतिशत, सीपीएम के 37 प्रतिशत, औद्योगिक के 32 और कांग्रेस के 22 प्रतिशत पर गंभीर आरोप हैं। रिपोर्ट में 66 रेज़्यूमे को ‘रेड इलैक्ट्रोनिक क्षेत्र’ के बारे में बताया गया है। ये वो इलाका है, जहां 3 या उससे ज्यादा लोगों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। अभ्यर्थी कितने करोड़पति? पहले चरण में 309 उम्मीदवार ऐसे हैं, जो करोड़पति हैं। ऑलवेज की एवरेज प्रॉपर्टी 1.34 करोड़ रुपये आंकी गई है। पार्टी को देखें तो लैंडस्केप एवरेज प्रॉपर्टी में सबसे आगे है। उनकी एबेज प्रॉपर्टी 5.70 करोड़ रुपये है। 2.57 करोड़ के साथ बीजेपी दूसरे और 2.06 करोड़ रुपये के साथ कांग्रेस तीसरे स्थान पर है. रिपोर्ट में बताया गया है कि जमीन के 72 फीसदी, भारतीय जनता पार्टी के 47 फीसदी, सीपीएम के 24 और कांग्रेस के 33 फीसदी दावेदार हैं, संपत्ति एक करोड़ रुपये से ज्यादा है. यह भी पढ़ें- ‘दीदी को बयान का समय’, अमित शाह की ममता सरकार पर हमले, घुसपैठ और सीमा बाड़ लगाने को लेकर लेकर आए ये बड़े वादे सबसे अमीर और सबसे गरीब आंध्र के जाकिर हुसैन सबसे अमीर दावेदार हैं, कुल संपत्ति 133 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। सबसे गरीब उम्मीदवार रुबिया बटम (500 रुपये) है, जिसके पास कोई अचल संपत्ति नहीं है। इनमें सुश्रता सारेन (700 रुपए) और जशोदा बर्मन भी शामिल हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल(टी)भारतीय जनता पार्टी(टी)टीएमसी(टी)कांग्रेस(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 तारीख(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव बीजेपी उम्मीदवार(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव बीजेपी उम्मीदवार(टी)टीएमसी उम्मीदवार(टी)पश्चिम बंगाल कांग्रेस उम्मीदवार

Haryana Congress MLAs Face Suspension Over Rajya Sabha Cross-Voting Allegations

Haryana Congress MLAs Face Suspension Over Rajya Sabha Cross-Voting Allegations

केंद्रीय नेतृत्व ने हरियाणा कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति की रिपोर्ट पर यह एक्शन लिया है। हरियाणा राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय कैंडिडेट के पक्ष में वोटिंग करने वाले कांग्रेस के पांच विधायकों शैली चौधरी (नारायणगढ़), रेनू बाला (साढ़ौरा), मोहम्मद इलियास (पुन्हाना), मोहम्मद इजराइल (हथीन) और जरनैल सिंह (रतिया) को निलंबित कर दिया है . 16 मार्च को हुए इस चुनाव में कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध हारते-हारते बचे थे। हरियाणा कांग्रेस की डिसिप्लिनरी एक्शन कमेटी (DAC) ने विधायकों को निलंबित करने की सिफारिश की थी। इस रिपोर्ट को केंद्रीय नेतृत्व ने स्वीकार कर लिया गया। सस्पेंशन के आदेश पर दैनिक भास्कर एप ने सभी विधायकों से पहला रिएक्शन लिया। शैली चौधरी ने कहा कि निलंबन की जानकारी नहीं है, अभी बाहर हैं। जरनैल सिंह ने कहा-एक तरफा कार्रवाई हुई है। विधायक मोहम्मद इजराइल व मोहम्मद इलियास ने कहा पार्टी का फैसला मंजूर है। रेनू बाला के पीए ने कहा-मैडम पारिवारिक समारोह में व्यस्त हैं। हरियाणा कांग्रेस की ओर से जारी किया गया लेटर… पार्टी से सस्पेंड होने से पांचों विधायकों का क्या होगा… विधायक बने रहेंगेः कानून मामलों के जानकार एडवोकेट हेमंत कुमार के मुताबिक कांग्रेस ने जिन विधायकों को सस्पेंड किया है, उनके विधायक पद को कोई खतरा नहीं है। यानी वो विधायक बने रहेंगे। उनका पद तभी खतरे में होगा, यदि वो खुद पार्टी छोड़ते हैं। व्हिप मानना होगाः विधानसभा सदन में कांग्रेस यदि व्हिप (अनिवार्य आदेश) जारी करती है, तो ये निलंबित विधायक उसे मानने को बाध्य होंगे। किसी महत्वपूर्ण बिल पर वोटिंग की स्थिति में पार्टी व्हिप जारी करती है। पार्टी मीटिंग में नहीं बुलाया जाएगाः आमतौर पर निलंबन की स्थिति में कांग्रेस विधायक दल या पार्टी की मीटिंग में इन विधायकों को नहीं बुलाया जाएगा। हालांकि कांग्रेस विधायक ही कहलाएंगे। निलंबन पर विधायकों ने इस तरह दी प्रतिक्रिया… रतिया विधायक बोले- बहुत धक्का हुआ, हमारी सुनवाई नहीं हई रतिया से विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि मुझे मीडिया के जरिए ही पता चला है कि पार्टी ने सस्पेंड कर दिया है। यह हमारे साथ बहुत धक्का हुआ है। हमारी सुनवाई नहीं हुई। जवाब मांगा था, मैंने लिखित में दे दिया था। मगर, बाद में हमें बुलाना चाहिए था। एक तरफा कार्रवाई हुई है, जिसका हमें बहुत दुख हुआ है। आगे कहा कि रतिया में कांग्रेस को जिंदा रखा तो जरनैल सिंह ने रखा है। मैं और मेरे साथी बहुत समय तक कांग्रेस के लिए लगे रहे। रतिया में कभी कांग्रेस नहीं जीती, हमने जिताया। मेरे इलाके के 87 हजार वोटर्स ने मुझे विधायक चुना। उन सबके साथ राय-मशविरा करूंगा। दुख तो इसी बात का है कि जिस आदमी की वफादारी की है, उसी ने यह सिला दिया है। पार्टी हाईकमान ने गलत किया है, हमें बुलाकर पूछना चाहिए था। सारी जांच करनी चाहिए थी। शैली चौधरी बोलीं- हमें कोई चिट्‌ठी प्राप्त नहीं हुई कांग्रेस पार्टी से निलंबन किए जाने पर नारायणगढ़ से विधायक शैली चौधरी का पहला रिएक्शन आया है। उन्होंने बताया कि अभी उन्हें इस मामले में कोई चिट्‌ठी पार्टी की ओर से प्राप्त नहीं हुई है। जब तक वह उन्हें नहीं मिल जाती, तब तक वह इस मामले में कुछ नहीं कह पाएंगी। कहा कि वह अभी अपने परिवार के साथ हरियाणा से बाहर आई हुई हैं। संडे को उन्होंने लौटने की बात कही है। इजराइल बोले-हलके के लिए क्रॉस वोट किया हथीन विधायक मोहम्मद इसराइल ने कहा-इलाके के लोगों की भलाई के लिए क्रॉस वोट किया था। कांग्रेस का राज्यसभा का उम्मीदवार पसंद नहीं था। देश में लोकतंत्र है और कोई किसी को भी अपना वोट दे सकता है। हाईकमान का फैसला मंजूर है। पार्टी ने भले ही उनको निलंबित कर दिया हो, लेकिन मैं लोगों की भलाई के लिए काम करता रहूंगा। किसी दूसरी पार्टी में जाने का मन में विचार नहीं है। इलाके के लोगों को एकत्रित करूंगा। जनता जो फैसला लेगी उसी से आगे बढ़ेंगे। इलियास बोले-कुछ नहीं कहूंगा, रेनू बाला का फोन बंद पुन्हाना विधानसभा मोहम्मद इलियास ने कहा-पार्टी का अधिकार है, हम इसमें कुछ नहीं कह सकते, वह चाहे जो कर सकते हैं। BJP या दूसरी किसी पार्टी में शामिल होने वाले सवाल पर वे चुप्पी साध गए। उधर, साढौरा की विधायक रेनू बाला का मोबाइल फोन फिलहाल स्विच ऑफ है। उनके निजी सहायक (पीए) रवि ने बताया कि मैडम आज एक पारिवारिक कार्यक्रम में व्यस्त हैं। सस्पेंशन का आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। सस्पेंड होने वाले विधायकों के बारे में जानिए… सस्पेंड की गईं रेनू बाला और शैली चौधरी सांसद कुमारी सैलजा की करीबी हैं। दोनों दूसरी बार विधायक बनी हैं। इन दोनों को टिकट दिलाने में सैलजा की ही भूमिका रही थी। 16 मार्च को वोटिंग के दिन शैली चौधरी विधानसभा के गेट पर सीएम नायब सैनी की टीम से जुड़े तरूण भंडारी के साथ दिखी थीं। वोटिंग के बाद मोहम्मद इलियास सीएम नायब सैनी से मिलने गए थे। इलियास लंबे समय से डायलिसिस पर हैं। दिलचस्प है कि नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर विधानसभा तक पहुंचे थे। इससे अंदाजा लगाया गया कि हुड्डा को पहले से ही उन पर संदेह था। इलियास पांचवीं बार के विधायक हैं। पहले इनेलो में भी रहे हैं। मोहम्मद इजराइल भी दूसरी बार विधायक बने हैं। उनके पिता जलेब खान हुड्डा सरकार में मुख्य संसदीय सचिव रहे। अब यहां जानिए राज्यसभा चुनाव में क्या हुआ था… कुल 90 वोट थे, इनेलो के 2 विधायकों ने बनाई थी दूरी : 16 मार्च को हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कुल 90 विधायकों के वोट थे, जिनमें से इनेलो के 2 विधायकों ने वोट नहीं डाला था, जबकि 5 वोट रद्द हो गए थे। इस प्रकार, कुल 83 वोट बचे। भाजपा के 48 विधायकों में से 1 का वोट रद्द हो गया, जिससे 47 वोट बचे। कांग्रेस के चार और भाजपा को एक वोट रद्द हुआ था: पहली प्राथमिकता वाले वोट संजय भाटिया को 39 और सतीश नांदल को 8 मिले थे। कांग्रेस के 37 विधायकों में से 4 वोट रद्द हो गए थे, जबकि 5 ने क्रॉस वोटिंग की थी, जिससे 28 वोट बचे। इससे कर्मवीर बौद्ध की जीत हुई थी। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को पहली प्राथमिकता के

MP Minister Kailash Vijayvargiya Bengal Fake Cases

MP Minister Kailash Vijayvargiya Bengal Fake Cases

मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने ही एक बयान के कारण मुसीबत में घिर गए हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शनिवार रात रतलाम में कहा कि उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल में 38 फर्जी केस दर्ज हैं और वहां जाने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता . मंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए कैलाश विजयवर्गीय का चुनाव शून्य करने की मांग की है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक। मुकेश नायक बोले: विजयवर्गीय की सदस्यता शून्य हो कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा- पिछले दिनों कैलाश विजयवर्गीय से पूछा गया कि वो बंगाल के प्रभारी रहे हैं अब वहां प्रचार करने क्यों नहीं जा रहे हैं? तो उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में उनके खिलाफ 35 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं उनका वॉरंट निकला हुआ है इस कारण वे चुनाव प्रचार करने नहीं जा रहे हैं। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि उन पर 30-35 केस उन पर दर्ज हैं। लेकिन, इन मुकदमों की जानकारी उन्होंने अपने निर्वाचन के समय फॉर्म में नहीं दी। तो जिस आधार पर मुकेश मल्होत्रा के चुनाव को शून्य घोषित किया गया है उसी आधार पर कैलाश विजयवर्गीय के चुनाव को भी शून्य घोषित करना चाहिए क्योंकि उन्होंने भी अपने ऊपर चल रहे मुकदमों की जानकारी छिपाई है। हमारे अधिवक्ता और कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने निर्वाचन आयोग से तथ्यों के साथ इसकी शिकायत की है कि इन्होंने निर्वाचन के समय मुकदमों की जानकारी छिपाई है इसलिए उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजी गई शिकायत। कांग्रेस प्रवक्ता ने निर्वाचन आयोग से की लिखित शिकायत एमपी कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और एडवोकेट प्रमोद द्विवेदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक लिखित शिकायत भेजी है। प्रमोद द्विवेदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से स्वत: संज्ञान लेकर मामला दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने अपने शिकायती पत्र में लिखा कि मप्र सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने रतलाम में कहा कि उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज हैं जो ममता बनर्जी की सरकार ने लगाए हैं। जिसमें गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। क्या कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 1 से विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी हलफनामे में इन केसों का उल्लेख किया है? यदि उल्लेख नहीं किया है तो चुनाव आयोग स्वयं उनके हलफनामे की जांच करे और मुकद्मे छिपाने के अपराध के तहत उनका निर्वाचन निरस्त करवाया जाए। अगर एक आपराधिक मामले को छिपाने पर कांग्रेस के दो विधायक दोषी करार दिए गए तो विजयवर्गीय ने स्वयं स्वीकार किया है। ये खबर भी पढ़ें… कैलाश विजयवर्गीय बोले- बंगाल गया तो गिरफ्तार हो जाऊंगा मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शनिवार रात रतलाम में कहा कि उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल में 38 फर्जी केस दर्ज हैं और वहां जाने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। पूर्व आरडीए अध्यक्ष अशोक पोरवाल के राजबाग स्थित निवास पर मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि पार्टी ने भी ‘नए लफड़े’ से बचने के लिए उन्हें बंगाल चुनाव में जाने से मना किया है। पढ़ें पूरी खबर…

MP Minister Kailash Vijayvargiya Bengal Fake Cases

MP Minister Kailash Vijayvargiya Bengal Fake Cases

भोपाल7 घंटे पहले कॉपी लिंक मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपने ही एक बयान के कारण मुसीबत में घिर गए हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शनिवार रात रतलाम में कहा कि उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल में 38 फर्जी केस दर्ज हैं और वहां जाने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। विजयवर्गीय ने यह भी कहा था कि पार्टी ने भी ‘नए लफड़े’ से बचने के लिए उन्हें बंगाल चुनाव में जाने से मना किया है। मंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए कैलाश विजयवर्गीय का चुनाव शून्य करने की मांग की है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक। मुकेश नायक बोले: विजयवर्गीय की सदस्यता शून्य हो कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने कहा- पिछले दिनों कैलाश विजयवर्गीय से पूछा गया कि वो बंगाल के प्रभारी रहे हैं अब वहां प्रचार करने क्यों नहीं जा रहे हैं? तो उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में उनके खिलाफ 35 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं उनका वॉरंट निकला हुआ है इस कारण वे चुनाव प्रचार करने नहीं जा रहे हैं। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि उन पर 30-35 केस उन पर दर्ज हैं। लेकिन, इन मुकदमों की जानकारी उन्होंने अपने निर्वाचन के समय फॉर्म में नहीं दी। तो जिस आधार पर मुकेश मल्होत्रा के चुनाव को शून्य घोषित किया गया है उसी आधार पर कैलाश विजयवर्गीय के चुनाव को भी शून्य घोषित करना चाहिए क्योंकि उन्होंने भी अपने ऊपर चल रहे मुकदमों की जानकारी छिपाई है। हमारे अधिवक्ता और कांग्रेस प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने निर्वाचन आयोग से तथ्यों के साथ इसकी शिकायत की है कि इन्होंने निर्वाचन के समय मुकदमों की जानकारी छिपाई है इसलिए उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजी गई शिकायत। कांग्रेस प्रवक्ता ने निर्वाचन आयोग से की लिखित शिकायत एमपी कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और एडवोकेट प्रमोद द्विवेदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक लिखित शिकायत भेजी है। प्रमोद द्विवेदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से स्वत: संज्ञान लेकर मामला दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने अपने शिकायती पत्र में लिखा कि मप्र सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने रतलाम में कहा कि उन पर फर्जी मुकदमे दर्ज हैं जो ममता बनर्जी की सरकार ने लगाए हैं। जिसमें गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं। क्या कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 1 से विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी हलफनामे में इन केसों का उल्लेख किया है? यदि उल्लेख नहीं किया है तो चुनाव आयोग स्वयं उनके हलफनामे की जांच करे और मुकद्मे छिपाने के अपराध के तहत उनका निर्वाचन निरस्त करवाया जाए। अगर एक आपराधिक मामले को छिपाने पर कांग्रेस के दो विधायक दोषी करार दिए गए तो विजयवर्गीय ने स्वयं स्वीकार किया है। ये खबर भी पढ़ें… कैलाश विजयवर्गीय बोले- बंगाल गया तो गिरफ्तार हो जाऊंगा मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने शनिवार रात रतलाम में कहा कि उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल में 38 फर्जी केस दर्ज हैं और वहां जाने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। पूर्व आरडीए अध्यक्ष अशोक पोरवाल के राजबाग स्थित निवास पर मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि पार्टी ने भी ‘नए लफड़े’ से बचने के लिए उन्हें बंगाल चुनाव में जाने से मना किया है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

श्योपुर में डॉ. अंबेडकर की भव्य शोभायात्रा:भाजपा-कांग्रेस ने अलग-अलग कार्यक्रमों में किया बाबा साहेब को नमन

श्योपुर में डॉ. अंबेडकर की भव्य शोभायात्रा:भाजपा-कांग्रेस ने अलग-अलग कार्यक्रमों में किया बाबा साहेब को नमन

संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मंगलवार को श्योपुर जिले में उत्साह और सामाजिक समरसता के साथ मनाई गई। जिलेभर में शोभायात्राएं, माल्यार्पण और संगोष्ठियों का आयोजन कर बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्योपुर नगर के वार्ड क्रमांक 11 स्थित अंबेडकर नगर से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में अनुयायी शामिल हुए, जो डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए चल रहे थे। यह शोभायात्रा मुख्य बाजार, गणेश गली, पुल दरवाजा और पटेल चौक से होते हुए अंबेडकर पार्क में समाप्त हुई। मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने पुष्पवर्षा कर इसका स्वागत किया। भाजपा पांडोला मंडल के तहत पांडोला और लुहाड़ ग्राम में भी बाबा साहेब की जयंती मनाई गई। लुहाड़ स्थित अंबेडकर प्रतिमा पर आयोजित कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष शशांक भूषण और पूर्व जिला महामंत्री गिरधारीलाल बैरवा ने डॉ. अंबेडकर के जीवन और संघर्षों पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त कर डॉ. अंबेडकर ने देश के पहले कानून मंत्री और संविधान निर्माता के रूप में अतुलनीय योगदान दिया। कार्यक्रम से पूर्व कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। शिवकरण मीणा ने संचालन किया और रघुनंदन शर्मा ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इसी क्रम में जिला कांग्रेस कार्यालय श्योपुर में भी डॉ. अंबेडकर की जयंती श्रद्धा और समर्पण के साथ मनाई गई। कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके विचारों को याद किया तथा संविधान की उद्देशिका का वाचन किया। इस दौरान वक्ताओं ने समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों को समाज में स्थापित करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में जिला कांग्रेस अध्यक्ष मांगीलाल फौजी, विधायक बाबू जंडेल, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष दौलतराम गुप्ता सहित अनेक पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस प्रकार श्योपुर जिले में डॉ. अंबेडकर की जयंती सामाजिक समरसता और जागरूकता के साथ मनाई गई, जहां सभी वर्गों के लोगों ने बाबा साहेब के विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

राज्यसभा सीट पर कांग्रेस में कास्ट प्रेशर बढ़ा:दलित और ब्राह्मणों के बाद अब सिंधी समाज ने ठोकी दावेदारी

राज्यसभा सीट पर कांग्रेस में कास्ट प्रेशर बढ़ा:दलित और ब्राह्मणों के बाद अब सिंधी समाज ने ठोकी दावेदारी

मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद खाली हुई सीट को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान तेज हो गई है। पार्टी में जातीय समीकरणों को लेकर दबाव(कास्ट प्रेशर) लगातार बढ़ रहा है। जहां पहले दलित और फिर विंध्य के ब्राह्मणों की ओर से दावेदारी पेश की गई थी, वहीं अब इस रेस में सिंधी समाज की भी एंट्री हो गई है। सिंधी प्रतिनिधित्व की मांग उठी रीवा शहर कांग्रेस कमेटी के महामंत्री दिलीप ठारवानी ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर सिंधी समाज से राज्यसभा प्रतिनिधि भेजने की मांग उठाई है। ठारवानी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संबोधित पत्र में लिखा है कि वे लंबे समय से कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं और उनका परिवार पीढ़ियों से पार्टी की विचारधारा से जुड़ा है। सिंधी समाज देशभर में कांग्रेस के प्रति अपनी आस्था और योगदान के लिए जाना जाता है। आगामी राज्यसभा चयन में सिंधी समाज से एक योग्य और समर्पित प्रतिनिधि के रूप में उनके नाम पर विचार किया जाए। इस पत्र की प्रतिलिपि मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी भेजी गई है। त्रिकोणीय हुआ जातीय समीकरण दलित वर्ग: दिग्विजय सिंह के राज्यसभा जाने से इनकार करने के बाद कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दलित वर्ग के नेता को राज्यसभा भेजे जाने की मांग की थी। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा भी इसका समर्थन कर चुके हैं। ब्राह्मण समाज: विंध्य क्षेत्र के ब्राह्मण नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में उमंग सिंघार और जीतू पटवारी से मुलाकात की थी। उनका तर्क है कि विंध्य में ब्राह्मण समाज का बड़ा प्रभाव है, जिसे राज्यसभा के जरिए प्रतिनिधित्व देना जरूरी है। सिंधी समाज: अब दिलीप ठारवानी की दावेदारी ने इस रेस को और दिलचस्प बना दिया है। ठारवानी का मानना है कि यदि उन्हें अवसर मिलता है, तो वे संसद में पार्टी की नीतियों और जनहित के मुद्दों को पूरी निष्ठा से उठाएंगे। प्रदेश भर में सिंधी समाज कांग्रेस से जुडे़गा।

Punjab Sacrilege Bill 2026 Debate LIVE Update; Bhagwant Mann Vs Congress

Punjab Sacrilege Bill 2026 Debate LIVE Update; Bhagwant Mann Vs Congress

सेशन में बोलते हुए पंजाब सीएम भगवंत मान। पंजाब विधानसभा के स्पेशल सेशन में सोमवार को CM भगवंत मान ने जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026 पेश किया। इसे सर्वसम्मति से पास किया गया। उन्होंने कहा कि बेअदबी की सजा उम्र कैद टिल डेथ तक है। . वहीं, उन्होंने यह भी साफ किया कि यह विधेयक अभी केवल श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी पर ही लागू होगा। जबकि, गैर सिखों (हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, आदि) के पवित्र ग्रंथों और धार्मिक स्थलों से छेड़छाड़ पर इस विधेयक के तहत फिलहाल कोई सजा का प्रावधान नहीं है। CM ने कहा कि अन्य धर्मों के लोगों से भी राय लेकर जल्द ही कानून बनाया जाएगा। विधानसभा में CM मान ने विपक्ष के नेताओं से कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप की बेअदबी के बारे में विस्तार से बताया गया है। यह स्टेट एक्ट है। गवर्नर से साइन कराना हमारी ही नहीं आपकी भी जिम्मेदारी है। गवर्नर के पास मेरी शिकायत लेकर तीसरे दिन पहुंच जाते हो। कभी काम करवाने भी चले जाया करो। गवर्नर ने लेट किया तो दोनों साथ चलेंगे। स्पीकर साहब एक-आधा कौआ मारकर लटका दिया तो दोबारा पीढ़ियों तक कोई बेअदबी नहीं करेगा। नए बिल ये काम करने को बेअदबी माना जाएगा.. श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के ‘स्वरूप’ (पवित्र ग्रंथ) को जानबूझकर फाड़ना, जलाना या किसी भी तरह से खंडित करना। पवित्र ग्रंथ पर थूकना, उसे गंदे हाथों से छूना या किसी ऐसी जगह रखना जहां उनकी गरिमा भंग होती हो। गुरु साहिब के स्वरूप को सार्वजनिक रूप से फेंकना या गलियों/नालियों में लावारिस छोड़ देना। पवित्र स्वरूप को चोरी करना या उसे मर्यादा के विरुद्ध अपने पास रखना। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की उपस्थिति में शराब, तंबाकू या किसी भी नशीले पदार्थ का सेवन करना या लेकर जाना। सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से पवित्र बाणी या गुरु साहिब के प्रति अभद्र टिप्पणी या अपमानजनक फोटो-वीडियो बनाना। स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि नकोदर कांड की जांच अब सेलेक्ट कमेटी करेगी। नेता विपक्ष विधानसभा में स्पीकर और CM से भिड़े बेअदबी बिल पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के बीच बहस हुई। बाजवा ने कहा कि हम इस बिल का समर्थन करते हैं, लेकिन मैं गुजारिश करूंगा कि जो इस मामले में कमेटी बनी थी, उसने विभिन्न वर्ग के लोगों से बातचीत की थी, उसकी रिपोर्ट निज्जर साहिब को हाउस में पेश करनी चाहिए। स्पीकर ने कहा कि कमेटी अपनी रिपोर्ट पेश कर देगी। वहीं, नकोदर कांड की जांच भी वह कमेटी करेगी। बाजवा ने कहा कि केजरीवाल और भगवंत मान ने कहा था कि कुंवर प्रताप सिंह की रिपोर्ट के आधार पर 48 घंटे में दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचा देंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि स्पीकर साहब वह हलका आपका था। इस पर स्पीकर ने कहा कि आपकी जानकारी उचित नहीं है। मौजूदा सरकार ने सबूतों से छेड़छाड़ की, जिससे आरोपियों को जमानत मिली, लेकिन हमने चालान पेश किया। आज सख्त कानून बनाने के लिए सेशन बुलाया है। बाजवा ने कहा कि उस समय के 5 केस शहर से बाहर चले गए। सरकार ने विरोध नहीं किया। कुंवर विजय प्रताप सिंह पोस्टर बॉय था, वह पार्टी से बाहर है। मैं आपकी सरकार की इंटेंट जाना चाहता हूं। मान साहब दिल बड़ा कर इन पुलिस अफसरों पर कार्रवाई करो। इसके जवाब में CM भगवंत मान ने कहा कि आपका खजाना मंत्री व मुख्यमंत्री पार्टी से बाहर हैं। किसको मंत्री बनाना है या नहीं बनाना यह हमारा फैसला है। आपसे 4 साल बाद प्रधानगी छीन ली है। किसी मौके पर तो कोई शर्म रख लिया करो। आज यह मौका नहीं है। इस पर बाजवा ने कहा आपसे लोग जवाब मांगते हैं। सीएम बताएं कि पंजाब पुलिस के कितने अफसरों पर केस दर्ज हुए। उन पर क्या कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि हम पांचवीं बार कानून बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसको लेकर हमने कानून माहिरों से बात की है। पहले की तरह इस बिल की स्थिति न हो। हम कानून का समर्थन करते हैं। हम लोागें के बीच ही रहे हैं। 25 साल आपको राज नहीं मिलना है। पंजाब में बेअदबी बड़ा मुद्दा क्यों है? अकाली दल सत्ता से बाहर हुआ, विपक्ष तक की हैसियत नहीं बची: अकाली दल ने पूर्व CM स्वर्गीय प्रकाश सिंह बादल की अगुआई में 2007 से 2017 तक BJP के साथ मिलकर लगातार 2 टर्म पंजाब में सरकार चलाई। उनके कार्यकाल के दौरान 2015 में बरगाड़ी बेअदबी और उससे जुड़ी घटनाएं हुईं। इसका असर ये हुआ कि 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल सत्ता से बाहर हो गया। पार्टी का प्रदर्शन लगातार गिरता गया। कुल 117 विधानसभा सीटों में से 2017 में 15 सीटें और 2022 में 3 सीटें मिलीं। अकालियों की विपक्षी दल तक की हैसियत नहीं बची। कांग्रेस भी सत्ता से बाहर हुई: कांग्रेस ने 2017 के चुनाव में कहा था कि अगर सरकार बनी तो बेअदबी मामलों में इंसाफ दिलाया जाएगा। इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुआई में 117 में से 77 सीटें जीतकर सरकार बना ली। हालांकि बेअदबी के इंसाफ के मामले में SIT बनाई। लेकिन दोषियों को कोई सजा नहीं मिली। 2022 में कांग्रेस भी सत्ता से बाहर हो गई और सिर्फ 18 सीटें ही जीत सकीं। AAP भी संकट में फंसी हुई: AAP ने 2022 के चुनाव में कहा था कि बेअदबी मामलों की जांच दोबारा खोली जाएगी और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी। CM भगवंत मान सरकार ने जांच प्रक्रिया को एक्टिव कर SIT को नए सिरे से बनाया। जांच और चार्जशीट आगे बढ़ी। लेकिन अभी कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। अभी तक किसी दोषी को सजा नहीं मिली। हाल ही में कोटकपूरा गोलीकांड की सुनवाई फरीदकोट कोर्ट से चंडीगढ़ शिफ्ट हो गई। ऐसे में AAP भी बेअदबी को लेकर निशाने पर है। सेशन के पल-पल के अपडेट के लिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | dk shivakumar

Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | dk shivakumar

Hindi News National Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | Dk Shivakumar | Siddaramaiah बेंगलुरु/नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक कर्नाटक कांग्रेस में कैबिनेट फेरबदल की मांग कर रहे 40 सीनियर विधायकों में 30 विधायक रविवार को दिल्ली पहुंचे। यहां वे पार्टी हाईकमान से मिलकर मंत्रिमंडल में फेरबदल और नए चेहरों को मौका देने की मांग करेंगे। तीन से ज्यादा बार विधायक बन चुके करीब 40 विधायकों की मांग है कि मौजूदा मंत्रियों को लगभग तीन साल का समय मिल चुका है, इसलिए अब सीनियर विधायकों को मौका दिया जाए। दूसरी ओर पहली बार चुने गए विधायकों ने भी दबाव बढ़ाते हुए मंत्री बनाने की मांग दोहराई है। कर्नाटक कांग्रेस के विधायक अशोक पट्टन ने कहा कि पोर्टफोलियो बांटते समय रणदीप सुरजेवाला ने भरोसा दिया था कि सभी को मौका मिलेगा, लेकिन वही लोग बार-बार चौथी बार भी उन्हीं मंत्रालयों में नियुक्त किए जा रहे हैं। विधायक किसी को ब्लैकमेल नहीं कर रहे, बल्कि पार्टी नेतृत्व को सिर्फ उसका पुराना वादा याद दिलाने आए हैं। पहली बार चुने गए 38 MLA ने भी मंत्री पद मांगा कैबिनेट फेरबदल की मांग सिर्फ सीनियर विधायकों तक सीमित नहीं है। पहली बार विधायक बने 38 कांग्रेस MLA भी लामबंद हो गए हैं। इन विधायकों ने हाल ही में पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर मांग की है कि फेरबदल के दौरान उनमें से कम से कम 5 को मंत्री बनाया जाए। मांड्या से पहली बार विधायक बने रविकुमार गौड़ा (रवि गनीगा) ने कहा कि मंत्री बनने की इच्छा हर विधायक की होती है और नए चेहरों को भी मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारी मांग है कि पहली बार चुने गए विधायकों में से कम से कम पांच लोगों को कैबिनेट में शामिल किया जाए। मांग करना गलत नहीं है।” उन्होंने कुछ मौजूदा मंत्रियों के कामकाज पर भी सवाल उठाए और कहा कि कुछ मंत्री न तो उपलब्ध रहते हैं और न ही काम ठीक से हो रहा है। 2 कैबिनेट पद पहले से खाली कर्नाटक में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 मंत्रियों की मंजूरी है। फिलहाल दो मंत्री पद पहले से खाली हैं। इनमें एक पद बी नागेंद्र के इस्तीफे के बाद खाली हुआ, जिन पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि एसटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में गबन के आरोप लगे थे। दूसरा पद पार्टी हाईकमान के निर्देश पर केएन राजन्ना को हटाए जाने के बाद खाली हुआ। ऐसे में विधायकों की मांग है कि इन पदों को भरने के साथ व्यापक फेरबदल किया जाए। दिल्ली पहुंचे नेताओं में टीबी जयचंद्र, अशोक पट्टन, एसएन नारायणस्वामी, के. शदाक्षरी, एआर कृष्णमूर्ति, पुट्टारंगा शेट्टी और बेलूर गोपाल कृष्ण समेत कई विधायक शामिल हैं। ये नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला और संभव हो तो राहुल गांधी से भी मुलाकात करेंगे। वरिष्ठ विधायक टीबी जयचंद्र ने कहा कि यह एक नियमित राजनीतिक प्रक्रिया है और उनका मुख्य एजेंडा सिर्फ कैबिनेट फेरबदल है। उन्होंने साफ किया कि नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा उनके एजेंडे में नहीं है। उन्होंने कहा, “सरकार को तीन साल पूरे हो चुके हैं और अब केवल दो साल का कार्यकाल बचा है। ऐसे में वरिष्ठ विधायकों को भी मंत्री बनने का अवसर मिलना चाहिए।” फेरबदल के पीछे नेतृत्व की खींचतान भी कर्नाटक कांग्रेस में यह हलचल ऐसे समय तेज हुई है, जब पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी खींचतान जारी है। 2023 में सरकार बनने के समय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी CM डीके शिवकुमार के बीच कथित पावर-शेयरिंग फॉर्मूले की चर्चा रही थी। अब सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण में पहुंच रही है, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें भी तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि शिवकुमार चाहते हैं कि पहले नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला हो। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि हाईकमान कैबिनेट फेरबदल को मंजूरी देता है, तो इसका संकेत यह माना जा सकता है कि सिद्धारमैया पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इससे शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। शिवकुमार ने कहा था- सब मंत्री या मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं इस बीच डिप्टी CM डीके शिवकुमार ने भी गुरुवार को कहा था कि यदि मुख्यमंत्री ने फेरबदल के संकेत दिए हैं तो हर विधायक का मंत्री या मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा था- इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हर कोई कोशिश कर सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | dk shivakumar

Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | dk shivakumar

Hindi News National Karnataka Congress Cabinet Reshuffle Demand | Dk Shivakumar | Siddaramaiah बेंगलुरु/नई दिल्ली5 घंटे पहले कॉपी लिंक कर्नाटक कांग्रेस में कैबिनेट फेरबदल की मांग कर रहे 40 सीनियर विधायकों में 30 विधायक रविवार को दिल्ली पहुंचे। यहां वे पार्टी हाईकमान से मिलकर मंत्रिमंडल में फेरबदल और नए चेहरों को मौका देने की मांग करेंगे। तीन से ज्यादा बार विधायक बन चुके करीब 40 विधायकों की मांग है कि मौजूदा मंत्रियों को लगभग तीन साल का समय मिल चुका है, इसलिए अब सीनियर विधायकों को मौका दिया जाए। वहीं पहली बार चुने गए 38 कांग्रेस विधायक भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर कम से कम 5 नए विधायकों को मंत्री बनाने की मांग की है। मांड्या विधायक रविकुमार गौड़ा ने कहा कि नए चेहरों को भी मौका मिलना चाहिए। 2 कैबिनेट पद पहले से खाली कर्नाटक में मुख्यमंत्री समेत कुल 34 मंत्रियों की मंजूरी है। फिलहाल दो मंत्री पद पहले से खाली हैं। इनमें एक पद बी नागेंद्र के इस्तीफे के बाद खाली हुआ, जिन पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि एसटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में गबन के आरोप लगे थे। दूसरा पद पार्टी हाईकमान के निर्देश पर केएन राजन्ना को हटाए जाने के बाद खाली हुआ। ऐसे में विधायकों की मांग है कि इन पदों को भरने के साथ व्यापक फेरबदल किया जाए। दिल्ली पहुंचे नेताओं में टीबी जयचंद्र, अशोक पट्टन, एसएन नारायणस्वामी, पुट्टारंगा शेट्टी और बेलूर गोपाल कृष्ण समेत कई विधायक शामिल हैं। ये नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला और संभव हो तो राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे। कर्नाटक कांग्रेस विधायक अशोक पट्टन ने कहा कि पोर्टफोलियो बंटवारे के समय रणदीप सुरजेवाला ने सभी को मौका देने का भरोसा दिया था, लेकिन कुछ लोग चौथी बार भी मंत्री बने। विधायक किसी को ब्लैकमेल नहीं कर रहे, बल्कि पार्टी नेतृत्व को उसका पुराना वादा याद दिला रहे हैं। शिवकुमार ने कहा था- सब मंत्री या मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं इस बीच डिप्टी CM डीके शिवकुमार ने भी गुरुवार को कहा था कि यदि मुख्यमंत्री ने फेरबदल के संकेत दिए हैं तो हर विधायक का मंत्री या मुख्यमंत्री बनने की इच्छा रखना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा था- इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हर कोई कोशिश कर सकता है। फेरबदल के पीछे नेतृत्व की खींचतान भी कर्नाटक कांग्रेस में यह हलचल ऐसे समय तेज हुई है, जब पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी खींचतान जारी है। 2023 में सरकार बनने के समय मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी CM डीके शिवकुमार के बीच कथित पावर-शेयरिंग फॉर्मूले की चर्चा रही थी। अब सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण में पहुंच रही है, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें भी तेज हो गई हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि शिवकुमार चाहते हैं कि पहले नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला हो। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि हाईकमान कैबिनेट फेरबदल को मंजूरी देता है, तो इसका संकेत यह माना जा सकता है कि सिद्धारमैया पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इससे शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। क्या है रोटेशन फॉर्मूला? 2023 विधानसभा चुनाव के बाद दोनों नेताओं में तीखी प्रतिस्पर्धा थी। उस समय ढाई-ढाई साल के रोटेशन फॉर्मूले की चर्चा थी, जिसके मुताबिक शिवकुमार 2.5 साल बाद CM बन सकते थे, लेकिन कांग्रेस ने इसे कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। 2 दिसंबर: सिद्धारमैया ने कहा था- जब हाईकमान कहेगा डीके शिवकुमार CM होंगे, हमारे बीच मतभेद नहीं कर्नाटक CM सिद्धारमैया ​​​​​​ने कहा कि जब हाईकमान कहेगा, तब डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा। उन्होंने यह बात ‘शिवकुमार को कब CM बनाया जाएगा’ से जुड़े सवाल पर कही। सिद्धारमैया ​​​​​​ने कहा कि हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है और दोनों राज्य सरकार को एकजुट होकर चला रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें… ———————————– ये खबर भी पढ़ें… सिद्धारमैया कर्नाटक के सबसे लंबे कार्यकाल वाले सीएम बनेंगे, देवराज उर्स के कार्यकाल की बराबरी की कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बनने जा रहे हैं। वे 7 जनवरी को यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे। उन्होंने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद पर 2,792 दिन पूरे कर लिए हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

राजगढ़ में स्विमिंग पूल उद्घाटन पर शुल्क विवाद:कांग्रेस ने कहा- पहले मुफ्त था, अब 200 रुपए रोज; विभाग बोला- ₹50 प्रति घंटा ही वास्तविक चार्ज

राजगढ़ में स्विमिंग पूल उद्घाटन पर शुल्क विवाद:कांग्रेस ने कहा- पहले मुफ्त था, अब 200 रुपए रोज; विभाग बोला- ₹50 प्रति घंटा ही वास्तविक चार्ज

राजगढ़ में प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कौशल विकास एवं रोजगार विभाग गौतम टेटवाल ने रविवार को जिला मुख्यालय स्थित शासकीय स्विमिंग पूल का विधिवत शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम के बाद मंत्री द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के बाद पूल के शुल्क को लेकर विवाद खड़ा हो गया। यह स्विमिंग पूल नया नहीं है, बल्कि लगभग 10 साल पुराना है और इसे हर साल गर्मियों में चालू किया जाता रहा है। इस बार प्रशासन ने औपचारिक रूप से मंत्री से इसका उद्घाटन करवाया। मंत्री टेटवाल ने अपने संबोधन में कहा कि जिले में खेल सुविधाओं का विस्तार युवाओं के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक है, जिससे उन्हें तैराकी जैसी गतिविधियों में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। शुल्क बढ़ने पर मंत्री से हस्तक्षेप की मांग हालांकि, मंत्री की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस नेता एहेतेशाम सिद्धीकी ने शुल्क वृद्धि पर सवाल उठाए। उन्होंने टिप्पणी की कि यह पूल पहले निःशुल्क था, फिर 10 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जाने लगा और अब इसे बढ़ाकर 200 रुपए प्रतिदिन कर दिया गया है। सिद्धीकी के अनुसार, इस हिसाब से मासिक खर्च लगभग 6,000 रुपए होता है, जो आम जनता की पहुंच से बाहर है। उन्होंने मंत्री से हस्तक्षेप कर छात्रों और आम लोगों को राहत प्रदान करने की मांग की। वास्तविक शुल्क 50 रुपए प्रति घंटा : विभाग इस संबंध में, खेल एवं युवक कल्याण विभाग की जिला संयोजक शर्मिला डाबर ने स्पष्ट किया कि वास्तविक शुल्क 50 रुपए प्रति घंटा है। उन्होंने बताया कि मासिक शुल्क लगभग 1,500 रुपए है और एक घंटे से अधिक समय तक रुकने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता है। उद्घाटन कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा, पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी सहित अन्य अधिकारी और नागरिक उपस्थित रहे।