जोरहाट में बीजेपी-एजीपी ने नामांकित किया, स्वास्थ्य-पानी और विकास के वादों को लेकर गरमाई नागरिकता

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित असम के जोरहाट जिले में सोमवार (23 मार्च, 2026) को उस समय राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई, जब भारतीय पार्टी (बीजेपी) और असम गण परिषद (एजीपी) के असम ने जिले के चार जिलों के लिए अपना नामांकन पत्र जारी किया। इस दौरान बेन्जिम ने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, स्वच्छ सपने की व्यवस्था और क्षेत्र के समग्र विकास को अपनी प्राथमिकता दी। नामांकन भरने वालों में जोरहाट से बीजेपी उम्मीदवार हितेंद्र नाथ गोस्वामी, मरियानी से बीजेपी उम्मीदवार रूपज्योति कुर्मी, टाटा से बीजेपी उम्मीदवार धीरज गोवला और टायक से एजीपी उम्मीदवार विकास सैकिया शामिल रहे। जनता के समर्थन से हासिल करेंगे जीतः गोस्वामी नामांकन के बाद मीडिया से बातचीत में भाजपा उम्मीदवार हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने कहा कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनाव लड़ेंगे और जनता के समर्थन से जीत हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य क्षेत्र का समग्र विकास है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय मेडिकल कॉलेजों को उन्नत बनाने के लिए विस्तृत योजना तैयार की गई है, ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर किया जा सके। उन्होंने कहा कि आम लोगों के लिए गंभीर रसायनों का इलाज आर्थिक बोझ बन जाता है, इसलिए सरकार की जिम्मेदारी है कि गुणवत्तापूर्ण और सुविधाजनक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जाए। प्रिंस क्राइसिस पर उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी से सागर तक पानी परियोजना के लिए करीब 300 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट शुरू हुआ है। साथ ही, असम कृषि विश्वविद्यालय के आसपास और शहरी वार्डों में जल आपूर्ति सुधार का काम तेजी से चल रहा है, जिसे इस साल पूरा करने का लक्ष्य है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में कुछ विकास कार्य समय की कमी के कारण शुरू किये गये, जिसमें सामूहिक अवसर बैठक भी शामिल थी। हम क्षेत्र के विकास के लिए पूरी तरह से सत्यः धीरज गोवला तिताबर से भाजपा उम्मीदवार धीरज गोवला ने भी जिला कार्यालय में अपना नामांकन दाखिल किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जनता का भारी समर्थन मिल रहा है और वे क्षेत्र के विकास के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्हें विश्वास है कि आगामी चुनाव में जनता उन्हें भारी भरकम गोलियों से उड़ा देगी। ग्राउंड लेवल पर सतत श्रम सेसफलताः रूपज्योति मरियानी से भाजपा उम्मीदवार रूपज्योति कुर्मी ने नामांकन के बाद कहा कि राजनीति में सफलता केवल ईश्वर के रूप में नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर निरंतर मेहनत है। उन्होंने कहा कि जनता का मजबूत संसाधन ही उनकी असली ताकत है। कुर्मी ने कहा कि खराब मौसम के बावजूद उनके क्षेत्र में 10,000 से अधिक समर्थक हैं, जो जनता के दावे का संकेत है। उन्होंने कहा कि लोगों का विश्वास आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बना हुआ है। जबकि रायजोर दल के उम्मीदवार डॉ. ज्ञानश्री बोरा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है, लेकिन नामांकन के दिन ही जमीनी समर्थन स्पष्ट दिखाई दे रहा है। जनता की सभी समस्याओं का समाधानः विकास सैकिया जबकि टियोक से एजीपी उम्मीदवार विकास सैकिया ने भी अपना नामांकन प्राप्त किया और क्षेत्र के विकास, विशाल सुविधाओं के विस्तार और जनता की समस्याओं के समाधान का समर्थन किया। जोरहाट और आस-पास के क्षेत्रीय क्षेत्रों में कैथोलिक एलायंस और चर्च के सक्रिय सदस्यों के बीच चुनावी मुकाबला आने वाले दिनों में और भी तेज होने की संभावना है। यह भी पढ़ें: ‘भारत के पास 53 लाख टन का तेल भंडार मौजूद’, तेल-एलपीजी संकट पर संसद में क्या बोले पीएम मोदी? (टैग्सटूट्रांसलेट)असम(टी)असम चुनाव 2026(टी)बीजेपी(टी)एजीपी(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)पीएम मोदी(टी)भारतीय जनता पार्टी(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)कांग्रेस(टी)गौरव गोगोई(टी)असम(टी)असम चुनाव 2026(टी)भाजपा(टी)एजेपी(टी)हिमंत बिस्वा सरमा (टी) पीएम मोदी (टी) भारतीय जनता पार्टी (टी) असम विधानसभा चुनाव 2026 (टी) कांग्रेस (टी) गौरव गोगोई
चुनाव आयोग के पत्र पर बीजेपी की मुहर, कांग्रेस-सीपीएम-टीएमसी ने सवाल उठाया तो आई ईसी की सफाई

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में अगले कुछ दिनों में वोट खराब है। इस बीच इलेक्शन कमीशन का एक पुराना लेटर वायरल हो रहा है, जिस पर केरल बीजेपी की धूम मची है, जिसके बाद सारथी में मोटरसाइकल गरमा गया है। इस पत्र को सबसे पहले सीपीआईएम केरल ने शेयर कर आयोग के सचिवालय पर साझा किया था, उसके बाद पूरे नामांकन ने ही चुनाव आयोग के सहयोगियों पर प्रश्नचिह्न लगाया। विवाद बढ़ा देख अब चुनाव आयोग की ओर से राइटर लेकर सफाई दी गई है। क्या भाजपा ने सारे दिखावे छोड़ दिये हैं? यह कोई रहस्य नहीं है कि एक ही सत्ता केंद्र भारत के चुनाव आयोग और भाजपा दोनों को नियंत्रित करता है। फिर भी कम से कम दो अलग-अलग डेस्कों का शिष्टाचार तो बनाए रखें। अब तो वह भी अनावश्यक लगता है. मुहरें लापरवाही से लगाई जा रही हैं… pic.twitter.com/MfMXNaXTgk – सीपीआई (एम) केरल (@CPIMKerala) 23 मार्च 2026 सीपीआईएम ने सोशल मीडिया पर एक डॉक्युमेंट शेयर किया था। इसमें 19 मार्च 2019 को चुनाव आयोग के पत्र के साथ हाफनामे पर केरल बीजेपी की छाप दिखाई दी। सीपीआईएम ने सवाल किया कि अब चुनाव आयोग और बीजेपी एक ही पावर सेंटर से क्या चल रहे हैं? वहीं कांग्रेस ने पूछा कि चुनाव आयोग के पास बीजेपी की ओर से कैसे मतदान किया जाए। चुनाव आयोग ने यह काम किया चुनाव आयोग ने कहा, ‘हमें यह जानकारी मिली है कि बीजेपी की छाप लगी है चुनाव आयोग के एक चैनल पर कई मलयालम न्यूज चैनल प्रसारित हो रहे हैं। मुख्य इलेक्ट्रॉनिक्स अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक क्लेरिकल एरर था, जिसे तुरंत पहचान कर सुधार किया गया।’ आधिकारिक स्पष्टीकरण: चुनाव आयोग दस्तावेज़ के ग़लत प्रसार के संबंध में यह हमारे संज्ञान में आया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुहर वाला चुनाव आयोग का एक पत्र विभिन्न मलयालम समाचार चैनलों पर प्रसारित किया जा रहा है।… – मुख्य निर्वाचन अधिकारी केरल (@Ceokerala) 23 मार्च 2026 टीएमसी ने चुनाव आयोग को बीजेपी की ‘बी’ टीम बताया कांग्रेस नेता पवन चौधरी ने कहा, ‘क्या अबकी बार, मोदी सरकार भी इसी तरह की थी?’ कैथोलिक कांग्रेस (टीएमसी) ने कहा, ‘आधिकारिक तौर पर यह एक तरह से मिल गया है कि चुनाव आयोग की बी-टीम बन गई है।’ अविश्वासी न्यूनाइन मोइत्रा ने कहा, ‘चुनाव आयोग ने पहली बार बीजेपी की मुहर लगाई थी, आधिकारिक पत्र जारी करने का साहसिक कार्य दिखाया गया था। ज्ञानेश कुमार से निवेदन है कि वह बात स्पष्ट करें जो हम सभी पहले से जानते हैं और आगे भी इसी तरह का पत्र जारी करते हैं। लोकतंत्र जिंदाबाद.’ चुनाव आयोग के पदाधिकारियों पर कांग्रेस ने प्रतिबंध प्रश्न एक्स पर पोस्ट कर कहा गया, ‘चुनाव आयोग की ओर से राजनीतिक आश्रमों को चुनाव आयोग की ओर से भेजे गए पत्र में केरल कांग्रेस बीजेपी की मुहर लगी थी।’ यह कोई ग़लत नहीं, बल्कि एक गंभीर संदेह का विषय है। इससे संबंधित संवैधानिक संस्था की समितियाँ और सामान्यतः गंभीर प्रश्न पूछे जाते हैं। कांग्रेस ने पूछा, चुनाव आयोग का किसी राजनीतिक दल पर आधिकारिक संदेश कैसा लगा? चुनाव आयोग बीजेपी के कठपुतली की तरह व्यवहार क्यों कर रहा है? क्या चुनाव आयोग भारत की जनता को पहचान दिला सकता है?’ 𝐀 𝐁𝐉𝐏 𝐬𝐞𝐚𝐥 𝐨𝐧 𝐚𝐧 𝐄𝐥𝐞𝐜𝐭𝐢𝐨𝐧 𝐂𝐨𝐦𝐦𝐢𝐬𝐬𝐢𝐨𝐧 𝐥𝐞𝐭𝐭𝐞𝐫! चुनाव आयोग की ओर से राजनीतिक दलों को भेजे गए पत्र में चुनाव आयोग की मुहर की जगह बीजेपी की केरल इकाई की मुहर लगी हुई है. उसे अंदर डूबने दो। कोई ग़लती नहीं, लेकिन एक गंभीर ख़तरा… pic.twitter.com/eXSqartMLH – कांग्रेस (@INCIndia) 23 मार्च 2026 एक अधिकारी को ऑफिस भेज दिया गया इस मामले में विज्ञप्ति जारी करने के बाद, मुख्य अधिकारी के कार्यालय में, इस मामले से जुड़े विभागीय अधिकारी की जांच के लिए अपार्टमेंट में बिस्तर तक रखा गया है। केरल के मुख्य इलेक्ट्रॉनिक्स अधिकारी कार्यालय ने कहा, ‘यह पूरी तरह से एक क्लेरिकल एरर था। केरल बीजेपी ने हाल ही में एक पुरानी कॉमर्स की कॉपी जमा की थी, जिस पर उनकी मुहर लगी थी। इसी कॉपी को अन्य सॉफ्टवेयर से भेज दिया गया।’ (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)बीजेपी(टी)ईसीआई(टी)कांग्रेस(टी)केरल(टी)इलेक्शन कमीशन बीजेपी सिंबल लेटर(टी)ईसी केरलम(टी)ईसीआई केरल(टी)केरल विधानसभा चुनाव(टी)सीपीआईएम केरल(टी)सीपीएम न्यूज(टी)केरल न्यूज(टी)केरल न्यूज(टी)कांग्रेस प्रतिक्रिया ईसीआई लेटर(टी)ईसी लेटर बीजेपी सील(टी)चुनाव आयोग(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)केरल चुनाव बीजेपी लेखक(टी)केरल बीजेपी नेता(टी)चुनाव आयोग पत्र(टी)चुनाव आयोग पत्र बीजेपी सील(टी)महुआ मोइत्रा(टी)पवन साहूकार(टी)कांग्रेस
कांग्रेस का BRICS+ समिट को लेकर पीएम से सवाल:पूछा- पश्चिम एशिया संकट पर समिट आगे क्यों नहीं बढ़ा रहे 'विश्वगुरु'

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि वेस्ट एशिया संकट से निपटने के लिए BRICS+ समिट को आगे क्यों नहीं बढ़ाया जा रहा। पार्टी का आरोप है कि मोदी अमेरिका और इजराइल को नाराज नहीं करना चाहते। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने X पोस्ट में कहा- भारत इस साल नई दिल्ली में 18वीं BRICS+ समिट की मेजबानी करने वाला है। ऐसे में सरकार को वेस्ट एशिया संकट पर कूटनीतिक पहल के लिए इस मंच का इस्तेमाल करना चाहिए। खुद को ‘विश्वगुरु’ बताने वाले प्रधानमंत्री इस दिशा में पहल क्यों नहीं कर रहे हैं। रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को नाराज नहीं करना चाहते। केवल फोन कॉल के जरिए बातचीत की सीमाएं होती हैं, जबकि समिट के जरिए ठोस फैसले और आमने-सामने बातचीत ज्यादा प्रभावी हो सकती है। G20 पर भी उठाए सवाल कांग्रेस नेता ने कहा कि इस साल G20 की अध्यक्षता अमेरिका के पास है और इससे कोई ठोस नतीजा निकलने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह मंच सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रह सकता है। पहले भी सरकार पर साधा था निशाना कांग्रेस ने पिछले हफ्ते भी केंद्र सरकार की आलोचना की थी। पार्टी का कहना था कि BRICS+ चेयर होने के बावजूद भारत ने वेस्ट एशिया संघर्ष पर कोई सामूहिक बयान जारी नहीं किया। शनिवार को भी कांग्रेस ने अमेरिका-इजराइल के हमले की निंदा न करने को लेकर सरकार पर सवाल उठाए थे।
Parliament Budget Session LIVE Update; Corporate Laws Bill – BJP Congress

Hindi News National Parliament Budget Session LIVE Update; Corporate Laws Bill BJP Congress | Oil Gas Crisis नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक तस्वीर 13 मार्च की सदन के बाहर विपक्ष की महिला सांसदों ने एलपीजी के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया था। संसद के बजट सत्र के दौरान आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेंगी। इस विधेयक के जरिए लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप एक्ट 2008 और कंपनी एक्ट 2013 में और संशोधन किए जाएंगे। इधर, सत्र की पिछली कार्रवाई के दौरान लोकसभा में विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों को पारित कर दिया गया। इसके लिए गिलोटिन प्रक्रिया लागू की गई। इस प्रक्रिया के तहत बिना चर्चा या बहस के मांगों को पारित कर दिया जाता है। विपक्ष आज अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग के कारण पश्चिम एशिया के हालात और इसके भारत पर असर को लेकर हंगामा कर सकता है। जंग के कारण देश में तेल-गैस की कमी को मुद्दा बनाया जा सकता है। रविवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग के कारण पश्चिम एशिया में बने संघर्ष के हालात पर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक हुई। 3.30 घंटे चली बैठक में पीएम मोदी ने साफ कहा है कि लोगों को कम से कम परेशानी हो। जमाखोरी और कालाबाजारी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सदन के दूसरे फेज के पिछले 8 दिन की कार्यवाही… 17 मार्च: देवगौड़ा सहित 59 सांसदों की राज्यसभा से विदाई अप्रैल 2026 से जुलाई 2026 के बीच राज्यसभा से रिटायर हो रहे 59 सांसदों को विदाई दी गई। इनमें पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा, शरद पवार, सभापति हरिवंश, आरपीआई नेता रामदास आठवले शामिल हैं। हालांकि पवार और आठवले राज्यसभा के लिए फिर चुन लिए गए। इस दौरान पीएम मोदी ने संसद को एक ओपन यूनिवर्सिटी बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं होता। भविष्य आपका इंतजार कर रहा है। आपका अनुभव हमारे राष्ट्रीय जीवन का स्थायी हिस्सा बना रहेगा। पूरी खबर पढ़ें… 16 मार्च: लोकसभा से 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन हटा लोकसभा में मंगलवार को पहले फेज के दौरान निलंबित किए गए 8 सांसदों पर लगा सस्पेंशन हटा दिया गया। इनमें कांग्रेस के 7 और लेफ्ट के एक सांसद हैं। ये आठ सांसद 4 फरवरी को लोकसभा से पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित किए गए थे। उन पर हंगामा करने के दौरान स्पीकर पीठासीन कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी की कुर्सी की ओर कागज फेंकने का आरोप लगा था। यह हंगामा उस समय हुआ था जब राहुल गांधी सदन में पूर्वी लद्दाख में 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव का जिक्र कर रहे थे। पूरी खबर पढ़ें… 15 मार्च: राज्यसभा में LPG संकट पर हंगामा, खड़गे बोले- सरकार को पहले से पता था, इंतजाम क्यों नहीं किया बजट सत्र के दूसरे फेज में सोमवार को लोकसभा में पहली बार प्रश्नकाल बिना किसी हंगामे के पूरा हुआ। इधर राज्यसभा में LPG सिलेंडर के संकट को लेकर हंगामा हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा में कहा कि पेट्रोलियम मंत्री ने लोकसभा में दावा किया कि LPG की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों को गलत साबित कर रही है। अगर सरकार समय रहते इंतजाम कर लेती, तो हालात इतने खराब नहीं होते। पूरी खबर पढ़ें… 13 मार्च: LPG संकट पर संसद में विपक्ष की नारेबाजी:वित्त मंत्री बोलीं- मुश्किल समय में साथ खड़े हों विपक्षी सांसदों ने शुक्रवार को संसद परिसर में LPG संकट के खिलाफ प्रदर्शन किया। राहुल गांधी समेत विपक्ष के सांसदों ने 8 निलंबित सांसदों की वापसी की मांग की। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा- सदन की मेजों पर चढ़ोगे तो यही एक्शन होगा। लोकसभा में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि विदेशों में हो रहे घटनाक्रम के कारण हमारे देश में कुछ मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। सरकार जरूरी फंड मुहैया कराने और पूरी तरह तैयार रहने के लिए कदम उठा रही है। पूरी खबर पढ़ें… 12 मार्च: राहुल बोले- पेट्रोलियम मंत्री ने एपस्टीन को दोस्त कहा था; स्पीकर ने बोलने से रोका, एपस्टीन-एपस्टीन के नारे लगे राहुल गांधी ने लोकसभा में गुरुवार को LPG संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, ‘किसी भी देश की बुनियाद उसकी ऊर्जा सुरक्षा होती है। अगर अमेरिका यह तय करे कि हम रूस से गैस या तेल खरीद सकते हैं या नहीं, तो यह समझ से परे है। पेट्रोलियम मंत्री खुद कह चुके हैं कि वे एपस्टीन के दोस्त हैं। स्पीकर बिरला ने राहुल को रोका। उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री से बोलने को कहा। पुरी ने जैसे ही बोलना शुरू किया, विपक्षी सांसद एपस्टीन-एपस्टीन के नारे लगाने लगे। पूरी खबर पढ़ें… 11 मार्च: शाह बोले- आंख मारने वाले स्पीकर पर सवाल उठा रहे; LPG कीमत बढ़ोतरी पर लोकसभा में हंगामा बुधवार को सदन की शुरुआत होते ही विपक्षी सदस्यों ने LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और कई सदस्य वेल में पहुंच गए। विपक्ष का विरोध जारी रहने के कारण अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे दिलीप सैकिया ने लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। वहीं शाह ने राहुल पर आरोप लगाया कि राहुल सदन में PM मोदी से आकर गले लग जाते हैं। आंख मारते हैं। फ्लाइंग किस देते हैं। मुझे तो बोलने में भी शर्म आती है। ये स्पीकर के आचरण पर सवाल करते हैं। अपने आचरण पर भी तो सवाल करिए। पूरी खबर पढ़ें… 10 मार्च: गोगोई बोले- राहुल को 20 बार टोका गया; रिजिजू का जवाब- प्रियंका को नेता प्रतिपक्ष बनाते तो अच्छा होता कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में कहा कि 2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी जब बोल रहे थे, तब उन्हें बार-बार रोका गया। स्पीकर सर ने उनके तर्क पर सबूत देने का कहा। 9 फरवरी को शशि थरूर जब बोल रहे थे, तब उनका माइक बंद कर दिया गया। इस पर संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि प्रियंका को LoP बनाते तो कुछ अच्छा होता। देखिए प्रियंका हंस रही हैं। जो अच्छा व्यवहार करे तो उसकी सराहना करनी चाहिए। पूरी खबर पढ़ें… 9 मार्च: वेस्ट एशिया पर संकट जयशंकर बोले- हम शांति और बातचीत से समाधान के पक्ष में विदेश मंत्री ने सोमवार को पहले राज्यसभा में
West Bengal Assam Kerala Tamilnadu Puducherry Election 2026 TMC Mamata Himanta Stalin Modi Congress

Hindi News National West Bengal Assam Kerala Tamilnadu Puducherry Election 2026 TMC Mamata Himanta Stalin Modi Congress नई दिल्ली/गुवाहाटी/कोलकाता17 मिनट पहले कॉपी लिंक देश के 5 राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में अगले महीने विधानसभा चुनाव हैं। सभी राज्यों नें राजनीति उठापटक जारी। रविवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 30 सेकेंड का एनिमेटेड टीजर जारी किया। इसमें सीएम ममता बनर्जी को बंगाली पहचान की रक्षा करने वाली आखिरी दीवार बताया गया। वीडियो में बंगाल के आसमान में मंडराते काले बादल, घबराई जनता और मुरझाए कमल वाला झंडा दिखाया गया, जिसे बीजेपी पर निशाना माना जा रहा है। वीडियो के आखिर में सीएम ममता को मजबूत और संघर्षशील नेता के तौर पर दिखाया गया। उनके साथ देवी दुर्गा, रॉयल बंगाल टाइगर की इमेज दिखाई गईं। आखिर में स्क्रीन पर ‘फाइटर दीदी’ का नारा उभरता है। ममता आवाज में कहा गया- खेला होबे। TMC का जारी टीचर देखिए… अपडेट्स 19 मिनट पहले कॉपी लिंक भाजपा उम्मीदवार बोले- ममता सरकार ने हिंदू वोटरों के नाम कटवाए पश्चिम बंगाल में चंदिताला विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देबाशीष मुखर्जी ने कहा, भारत का चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है। राज्य सरकार ने कुछ हिंदू वोटरों के नाम हटा दिए हैं। BJP का रुख यह है कि एक भी नाम ऐसे लोगों का नहीं होना चाहिए जो भारतीय नहीं हैं। 29 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल चुनाव: AIMIM-हुमायूं कबीर की पार्टी में गठबंधन AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को ऐलान किया कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के साथ मिलकर लड़ेगी। ओवैसी ने कहा कि वे 25 मार्च को कोलकाता में हुमायूं कबीर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। दोनों पार्टियों राज्य की 182 सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ेंगी। AIMIM 8 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। अब तक 18 उम्मीदवारों की सूची जारी की जा चुकी है, जिसमें हुमायूं कबीर रानीनगर सीट से, एक अन्य उम्मीदवार भगवानगोला से और मनीषा पाठक पांडे मुर्शिदाबाद सीट से चुनाव लड़ेंगी। 30 मिनट पहले कॉपी लिंक असम: हिमंता की मंत्री ने भाजपा छोड़ी, टिकट कटने से नाराज थीं नंदिता गार्लोसा रविवार शाम को कांग्रेस में शामिल हुईं। वे हाफलोंग सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। असम सरकार में मंत्री भाजपा नेता नंदिता गार्लोसा पार्टी से नाराज होकर कांग्रेस में शामिल हुईं। भाजपा ने हाफलोंग सीट से गार्लोसा का टिकट काटकर नई उम्मीदवार रुपाली लांगथासा को दिया था। इससे गार्लोसा नाराज चल रही थीं। 31 मिनट पहले कॉपी लिंक असम: नाराज पार्टी नेताओं को मनाने में जुटे सीएम हिमंता और प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने के बाद असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। असम में बीजेपी के भीतर नेताओं की नाराजगी सामने आने लगी है। पार्टी टिकट से वंचित कई मौजूदा विधायक और दावेदार निर्दलीय चुनाव लड़ने की धमकी दे रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया खुद आगे आकर नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल, हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं प्रद्युत बोरदोलोई और भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने के बाद बोरदोलोई को दिसपुर सीट से बोरा को बिहपुरिया सीट से पार्टी टिकट दिए गया है। इस फैसले से पार्टी के कई पुराने दावेदारों में नाराजगी बढ़ गई है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
असम में कांग्रेस ने जारी की 5वीं सूची, सातवीं सूची का खुलासा किया

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 5वीं लिस्ट जारी की है। इस सूची में सात द्वीप के कारखाने का विमोचन किया गया है। कांग्रेस पार्टी ने असम विधानसभा चुनाव के लिए जिन 7 सीटों पर अपने उम्मीदवार बनाए हैं, उनमें गोसाईंगांव विधानसभा सीट से जोसेफ हासदा, दोतमा की एसटी आरक्षित सीट से बिरखांग बोरा, बिजनी से रजत कांति साहा, भेरगांव से आंचुला गुआरा दैमारी, मजबत से नारायण अधिकारी, हाफलॉन्ग की एसटी रिजर्व सीट से निर्मल लंगथासा और कटिगोरा विधानसभा सीट से अमर चंद जैन कोयर को उम्मीदवार बनाया गया है। घटक कांग्रेस के घटकों की चार सूची होल जारी पार्टी कांग्रेस इससे पहले असम विधानसभा चुनाव के लिए जंगल के जंगलों की चार लिस्ट पहले जारी कर चुकी है। इसके बाद पार्टी ने आज रविवार (22 मार्च, 2026) को 7 असेंबली रिजॉर्ट्स की घोषणा की। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर कहा कि कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति ने असम में अगले महीने 9 अप्रैल, 2026 को होने वाले चुनाव के लिए 7 समर्थकों को चिन्हित किया है। कांग्रेस के सीईसी ने असम विधान सभा के आगामी चुनावों के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों को कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुना है 👇 pic.twitter.com/lBHoGujobe – कांग्रेस (@INCIndia) 22 मार्च 2026 वामपंथियों को कांग्रेस ने दी उपाधि कांग्रेस ने राज्य में अपनी पार्टी के लिए विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए असम में अपने सहयोगी वामपंथी समर्थकों के साथ नामांकन करने की भी घोषणा की है। कांग्रेस ने दो दिन पहले शुक्रवार (20 मार्च, 2026) को अपनी चौथी सूची जारी की थी। लिस्ट में पार्टी ने अपने 7 जंगलों के जंगलों की घोषणा की। इसके साथ कांग्रेस ने लेफ्ट को लीज वाली 11 के बारे में जानकारी सार्वजनिक की। कांग्रेस ने असम के मानस, दलगांव, धींग, कालियाबोर, तेजपुर, सिसिबारगांव, मार्गेरिटा, दिगबोई, सिबसागर, मारियानी और बोकाखाट विधानसभा सीटों पर वामपंथी दल को चुनावी मैदान में उतारा है। जबकि असम में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और अल्पसंख्यक गौरव गोगोई खुद राज्य के जोरहाट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले हैं। यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को बताया गद्दार तो भड़के शुभेंदु अधिकारी, कहा- ‘वह खुद सांप्रदायिकता’ (टैग्सटूट्रांसलेट)असम(टी)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)असम(टी)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026
राहुल बोले- रुपए का गिरना-फ्यूल कीमत बढ़ना महंगाई का संकेत:कहा- सरकार चाहे इसे नॉर्मल बताए, लेकिन रोजमर्रा की चीजों का दाम बढ़ेंगे

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने डॉलर के मुकाबले रुपए के स्तर के गिरने और इंस्ट्रीयल फ्यूल की कीमत बढ़ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल ने X पोस्ट में लिखा- रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 100 की तरफ बढ़ना और इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, ये सिर्फ आंकड़े नहीं, आने वाली महंगाई के साफ संकेत हैं। उन्होंने लिखा कि सरकार चाहे इसे नॉर्मल बताए, लेकिन हकीकत ये है कि उत्पादन और ट्रांसपोर्ट महंगे होंगे, MSMEs को सबसे ज्यादा चोट लगेगी, रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ेंगे। राहुल बोले- शेयर बाजार पर दबाव बढ़ेगा राहुल ने लिखा किविदेशी संस्थागत निवेशक (FII) का पैसा और तेजी से बाहर जाएगा, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ेगा। यानी हर परिवार की जेब पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ना तय है। उन्होंने लिखा है कि सवाल यह नहीं कि सरकार क्या कह रही है, सवाल यह है कि आपकी थाली में क्या बचा है। 20 मार्च- प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़े सरकारी तेल कंपनियों ने स्पीड और पावर जैसे प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें ₹2.09-₹2.35 प्रति लीटर तक बढ़ाईं। एमपी के भोपाल में इसकी कीमत बढ़कर करीब ₹117 पहुंची है। हालांकि सामान्य पेट्रोल की कीमत में बदलाव नहीं किया गया। भारत पेट्रोलियम यानी BPCL प्रीमियम पेट्रोल को स्पीड नाम से बेचता है। वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम यानी HPCL इसे पावर और इंडियन ऑइल यानी IOCL XP95 के नाम से इसे बेचता है। ये सामान्य पेट्रोल के मुकाबले करीब 10-12 रुपए महंगा होता है। इंडियन ऑयल ने अपने इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमत में भी 25% की बढ़ोतरी की गई। इसके दाम ₹87.67 प्रति लीटर से बढ़कर अब ₹109.59 प्रति लीटर हो गए। औद्योगिक डीजल के खरीदारों में रेलवे, रोडवेज बसें, बड़ी फैक्ट्रियां, अस्पताल और बड़े मॉल शामिल हैं। तेल कंपनियां ये डीजल टैंकरों के जरिए सीधे इन संस्थानों के निजी स्टोरेज टैंकों में भेजती हैं। पूरी खबर पढ़ें… रुपया 93.53 के रिकॉर्ड लो पर पहुंचा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर 20 मार्च को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 64 पैसे कमजोर होकर 93.53 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंचा। बाजार के जानकारों का कहना था कि दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल की वजह से घरेलू करेंसी पर है। ……………… यह खबर भी पढ़ें… लोकलसर्किल्स का दावा- 20% लोग सिलेंडर ब्लैक में खरीद रहे: ₹4,000 तक ज्यादा देना पड़ रहा, 68% घरों में समय पर नहीं पहुंच रही गैस रसोई गैस की कमी के कारण देश में सिलेंडर की कालाबाजारी बढ़ गई है। गैस की कमी और डिलीवरी में देरी की वजह से देश के करीब 20% परिवारों को ब्लैक में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। इसके लिए लोगों को एक घरेलू सिलेंडर के 4000 रुपए तक देने पड़ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
द ग्रेट असम माइग्रेशन: कैसे हिमंत बिस्वा सरमा कांग्रेस को खोखला कर रहे हैं | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 20, 2026, 16:45 IST चुनावों से पहले व्यक्तिगत दलबदल से परे, सरमा असम में भाजपा की पहचान-आधारित अपील को तेज करने के लिए ‘कांग्रेस आयात’ का उपयोग कर रहे हैं सरमा की रणनीति कांग्रेस की क्षेत्रीय ताकत के मूल स्तंभों को लक्षित करती है। (फाइल फोटो) 2026 के असम विधानसभा चुनावों के उच्च-दांव वाले क्षेत्र में, पर्यवेक्षकों का कहना है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक राजनीतिक रणनीति लागू की है जो जितनी साहसी है उतनी ही प्रभावी भी है: कांग्रेस पार्टी को उसके सबसे प्रभावशाली डीएनए को अवशोषित करके खत्म करना। 19 मार्च को, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 88 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची का अनावरण किया, जिसमें कांग्रेस के पूर्व दिग्गजों की भारी आबादी वाले रोस्टर का खुलासा किया गया। भाजपा सूत्रों का कहना है कि यह “कांग्रेस-मुक्त” मिशन न केवल चुनावों में विपक्ष को हराकर हासिल किया जा रहा है, बल्कि इसे व्यवस्थित रूप से अंदर से खोखला करके भी हासिल किया जा रहा है। महान प्रवासन: नागांव से दिसपुर तक कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका उम्मीदवार की घोषणा से कुछ दिन पहले प्रद्युत बोरदोलोई के हाई-प्रोफाइल दलबदल से लगा। नगांव से मौजूदा सांसद और 1975 से कांग्रेस में जड़ें जमा चुके अनुभवी बोरदोलोई को तुरंत प्रतिष्ठित दिसपुर निर्वाचन क्षेत्र के लिए भाजपा के टिकट से पुरस्कृत किया गया। उनका बाहर निकलना कोई अलग घटना नहीं थी; यह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के फरवरी में दलबदल के बाद हुआ। बोरा को सुरक्षित करके, भाजपा ने स्वदेशी खिलंजिया समुदाय के बीच कांग्रेस के सबसे पहचाने जाने वाले चेहरों में से एक को प्रभावी ढंग से बेअसर कर दिया है। बोरा को बिहपुरिया सीट से मैदान में उतारा गया है, रणनीतिकारों का मानना है कि यह कदम ऊपरी और उत्तरी असम के लगभग 45 विधानसभा क्षेत्रों में स्थिति को बदल सकता है, जहां उनका प्रभाव प्रबल बना हुआ है। क्षेत्रीय नेतृत्व को ख़त्म करना सरमा की रणनीति कांग्रेस की क्षेत्रीय ताकत के मूल स्तंभों को लक्षित करती है। भाजपा की 2026 की सूची में कई अन्य पूर्व कांग्रेस विधायक शामिल हैं, जिनमें कमलाख्या डे पुरकायस्थ, शशि कांता दास और सुशांत बोरगोहेन शामिल हैं। बराक घाटी की एक प्रमुख आवाज पुरकायस्थ को कटिगोराह से मैदान में उतारा गया है, जबकि शशिकांत दास भगवा बैनर के तहत राहा सीट बरकरार रखना चाहते हैं। यह व्यवस्थित अवशोषण दोहरे उद्देश्य को पूरा करता है। सबसे पहले, यह भाजपा को तैयार विजेता प्रदान करता है जिनके पास गहरी जड़ें वाले स्थानीय नेटवर्क हैं। दूसरे, यह एपीसीसी अध्यक्ष गौरव गोगोई के नेतृत्व वाले शेष कांग्रेस नेतृत्व को लगातार रक्षात्मक स्थिति में छोड़ देता है। अनुभवी नेताओं द्वारा अपने बाहर निकलने के कारणों के रूप में “अपमान” और “घुटन” का हवाला देते हुए, सरमा ने सफलतापूर्वक कांग्रेस को एक डूबते जहाज के रूप में ब्रांड किया है, जहां “स्वाभिमानी” नेता अब जीवित नहीं रह सकते हैं। ‘खिलंजिया’ और जाति-आधारित एकीकरण व्यक्तिगत दलबदल से परे, सरमा भाजपा की पहचान-आधारित अपील को तेज करने के लिए इन “कांग्रेस आयातों” का उपयोग कर रहे हैं। भूपेन बोरा जैसे नेताओं को लाकर, भाजपा हिंदू असमिया वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां कांग्रेस का ऐतिहासिक रूप से प्रभाव रहा है। यह नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर मुख्यमंत्री की आक्रामक बयानबाजी और “अवैध घुसपैठ” की कहानी से पूरक है, जो कांग्रेस को अपने स्वयं के अल्पसंख्यक मतदाता आधार के संबंध में एक कोने में रहने के लिए मजबूर करता है। सरमा का दृष्टिकोण सर्जिकल है. हाल के सार्वजनिक संबोधनों के दौरान, उन्होंने खुले तौर पर “सभी अच्छे कांग्रेस नेताओं” को भाजपा के पाले में लाने के अपने इरादे की घोषणा की, जिससे प्रभावी ढंग से भाजपा को एक छत्र संगठन में बदल दिया गया, जिसमें राज्य के राजनीतिक अभिजात वर्ग का निवास है। बूथ स्तर पर मनोवैज्ञानिक युद्ध इन दलबदलों के मनोवैज्ञानिक प्रभाव को कम करके नहीं आंका जा सकता। जब एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और एक निवर्तमान सांसद चुनाव की पूर्व संध्या पर पाला बदलते हैं, तो इससे भाजपा की जीत की अनिवार्यता की भावना पैदा होती है। जमीनी स्तर के कार्यकर्ता के लिए, दोनों पार्टियों के बीच की रेखा धुंधली हो गई है, जिससे भाजपा के लिए उस स्थानीय मशीनरी को अपने साथ लेना आसान हो गया है जो कभी कांग्रेस की थी। जैसा कि असम 9 अप्रैल को मतदान के लिए तैयार है, विश्लेषकों का कहना है कि लड़ाई अब केवल दो विचारधाराओं के बीच नहीं है। यह एक पुनर्जीवित भाजपा के बीच है, जिसे उन्हीं लोगों का समर्थन प्राप्त है जिन्होंने कभी इसका विरोध किया था, और एक खंडित कांग्रेस अपने स्वयं के रैंकों को भरने के लिए पर्याप्त “संदिग्धों” को खोजने के लिए संघर्ष कर रही है। हिमंत बिस्वा सरमा ने सिर्फ खिलाड़ियों को नहीं बदला है; उन्होंने खेल के नियमों को फिर से लिखा है। पहले प्रकाशित: मार्च 20, 2026, 16:45 IST समाचार चुनाव द ग्रेट असम माइग्रेशन: कैसे हिमंत बिस्वा सरमा कांग्रेस को खोखला कर रहे हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)असम(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी)असम चुनाव(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम चुनाव(टी)गौरव गोगोई(टी)घुसपैठ
‘मुख्यमंत्री पद का दावेदार…’, केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सीएम पद के दावेदार शशि थरूर क्या बोले?

केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के न्यूनतम नेता शशि थरूर ने कहा था कि वह मुख्यमंत्री पद के लिए आवेदन नहीं करते हैं, क्योंकि वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उनका मानना है कि आदर्श रूप से मुख्यमंत्री का चुनाव शेयरों में होना चाहिए। गुरुवार (19 मार्च, 2026) को शशि थरूर ने टीपी-भाषा को दिए गए विशेष साक्षात्कार में कहा कि वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे, इसलिए उन्हें किसी एक खास क्षेत्र की चिंता करने की जरूरत नहीं है, और राज्य चुनाव में उनकी भूमिका मिल-जुली है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव प्रचार के लिए राज्य के कोने-कोने में जाने का बास से इंतजार कर रहे हैं। शशि थरूर ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की उस विचारधारा का भी ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय गठबंधन के नेताओं से ‘एक लय-ताल के साथ काम करने’ की बात कही थी। शशि थरूर ने कहा कि यह एक अच्छा संदेश था, और अब हर कोई एक गीत-ताल के साथ काम कर रहा है। शशि थरूर ने यह भी कहा कि वैसे तो उन्हें केरल में कांग्रेस को बहुमत मिलने पर खुशी होगी, लेकिन 140 संसदीय क्षेत्र में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक मोर्चा (यूडीएफ) के लिए 85 से 100 नामांकन के बीच का आंकड़ा काफी अच्छा रहेगा। क्रिकेट की दवाओं का इस्तेमाल करते हुए शशि थरूर ने कहा कि यूएफसी, विशेष रूप से आसामी के नेतृत्व वाले वाम डेमोक्रेटिक मोर्चा (एलडीएफ) के खिलाफ गुगली गेंदें फेंकी जा रही हैं, क्योंकि वे मुश्किल पिच पर हैं, और हम उन्हें कैच कर सकते हैं। शशि थरूर ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे राष्ट्रपति-शैली के चुनाव अधिक होते जा रहे हैं, वह व्यक्तिगत रूप से पद से पहले मुख्यमंत्री के व्यक्तिगत चेहरे को सामने रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि केरल में कांग्रेस के पास यह क्षमता है कि वह किसी एक व्यक्ति या नाम के बजाय एक आयाम, एक मिशन और पार्टी के चुनाव के आधार पर भी अच्छे चुनाव परिणाम दे सकते हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या चुनावी प्रचार में कोई चेहरा नहीं है, एल कम्युनिस्ट कांग्रेस की आम जनता पर प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि मैसाचुसेट्स एलायंस के पास के समाजवादी मुख्यमंत्री पिनराईन की जीत में एक चेहरा है, इस पर शशि थरूर ने कहा, ‘निजी तौर पर, मैं आपकी बात से सहमत हूं; मेरा मतलब यह है कि हम अपना पद छोड़ सकते हैं, लेकिन जैसा कि पार्टी नेतृत्व ने मुझे बताया, कांग्रेस ने पहले कभी ऐसा नहीं किया।’ शशि थरूर ने कहा, ‘क्योंकि यह सिद्धांत है कि चुनाव पार्टी के लिए होता है, और एक बार जब पार्टी जीतती है, तो वह अपना नेता चुनती है। ‘असल में इसका मतलब यह है कि चुनाव के बाद नेता का चुनाव होना, चुनाव के बाद नेता का चुनाव होना।’ उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस की राज्य में बहुत गहरी पैठ है. पूरे केरल में उनकी बात बहुत ही पसंदीदा तरीके से सुनी जाती है. हर खंड, हर गांव और हर वार्ड में मौजूद है। इसी वजह से कांग्रेस के पास यह क्षमता है कि वह किसी एक व्यक्ति के चेहरे या नाम के बजाय, एक आदर्श, एक मिशन और पार्टी के चुनाव-श्रेणी के आधार पर भी अच्छे नतीजे दे सकती है।’ शशि थरूर ने कहा कि जरूरी नहीं कि हर जगह यही सिद्धांत बदला जाए। उन्होंने कहा कि अब जिस तरह असम में साफा पर गौरव गोगोई पार्टी के चेहरे हैं, वहीं दूसरे राज्यों में भी इसी तरह के नेता हैं. उन्होंने कहा, ‘लेकिन केरल में हम इसी तरह (बिना चेहरे घोषित किए) लड़ने जा रहे हैं और केरल में हमारी जगहों की वजह से मुझे लगता है कि यह एक ऐसा राज्य है जहां हम कलाकारी: इसी तरह जीतेंगे।’ जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि वह मुख्यमंत्री पद के लिए क्या पात्र हैं, तो शशि थरूर ने कहा, ‘नहीं, मैं नहीं हूं।’ इसके कई अच्छे कारण हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि मैं खुद चुनाव लड़ने की बात नहीं कर रहा हूं। मेरा मानना है कि आदर्श रूप से मुख्यमंत्री का चुनाव शेयरों में होना चाहिए।’ उन्होंने अप्रैल में वोटिंग प्रोग्राम के संदर्भ में कहा, ‘यह काफी स्टार्स वाली बात है कि वोटिंग 9 आ रही है, खासकर तब जब इसकी घोषणा खुद 15 मार्च को करने में काफी देर हो गई थी।’ मूल रूप से, इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग ने हमें लगभग तीन सप्ताह के लिए प्रोत्साहन दिया है। ज्यादातर यूनिवर्सल ने तो अभी तक अपने सभी साझा के नाम भी घोषित नहीं किये हैं. नॉमिनेशन सोमवार तक जमा हैं और अचानक, ये दावेदार 9 अप्रैल को रिजॉल्यूशन का सामना करने वाले हैं।’ शशि थरूर ने आरोप लगाया कि देखने में ऐसा लगता है कि यह सब जान-जेकर केरल में अलास्का, असम में बीजेपी और पुदुचेरी में स्थानीय पार्टी की एकजुटता को बढ़ावा देने के लिए गया है; ये हैं वो तीन राज्य जहां 9 अप्रैल को मतदान होना है. केरल विधानसभा चुनाव में यू.एफ.एफ.एफ.ई.सी. की जीत पर विश्वास व्यक्त करते हुए शशि थरूर ने कहा कि एल.एफ.एफ.ई.सी. सरकार के खिलाफ 10 साल की सत्य-विरोधी लहर है। उन्होंने कहा, ‘उसकी कट्टरपंथी नाकामियां, आर्थिक संकट, समर्थकों के आधार और हर तरह के नुकसान हैं, सिद्धांतों के आधार पर समाजवादी सरकार से विमुख हो गए हैं।’ यह पूछे जाने पर कि एक हफ्ते पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उनके सभी मुद्दे उठाए जाने के बाद शशि थरूर ने कहा, ‘मेरे मुद्दे मूल रूप से राज्य के लिए कोई मतलब नहीं है। मैं राज्य चुनाव में उम्मीदवार नहीं हूं. यह ज्यादातर एक टीम के तौर पर सामूहिक काम करने का सवाल था और मैं इस टीम का पूरी तरह से हिस्सा हूं। असल में, मैं प्रचार समिति का सह-अध्यक्ष हूं।’ चुनाव में अपनी भूमिका के बारे में शशि थरूर ने कहा, ‘मैं संसद सत्र में हिस्सा लेने के लिए भी प्रचार समिति में अन्य दलों के साथ नियमित ऑफ़लाइन बैठकों में शामिल हो रहा हूं।’ मैं संसद सत्र के पिछले कुछ सप्ताह को खत्म करने जा रहा हूं।’ उन्होंने कहा कि वह नाइजीरिया और राज्य के सभी 14 पर्यटकों के बीच अपनी यात्रा की संभावना जता रहे हैं।
‘हमारी कोई दुश्मनी नहीं…’, असम चुनाव में गौरव गोगोई को टक्कर देने जा रहे हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने क्या कहा

असम में विधानसभा चुनाव को लेकर फोकस बिसात बिछुनी शुरू हो गई है. इस बार जोरहाट में एक हाई-प्रोफाइल चुनावी मुकाबला होने जा रहा है, क्योंकि असम विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी इस बार चुनाव में असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसी) के अध्यक्ष गौरव गोगोई को चुनौती देने के लिए तैयार हैं। अपने उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए गोस्वामी ने जोरहाट क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए गोगोई के फैसले पर आश्चर्यचकित कर दिया। मीडिया से बात करते हुए गोस्वामी ने कहा, “मुझे आश्चर्य है कि गौरव गोगोई यहां नेता के रूप में चुनाव लड़ने क्यों आए हैं। वे जोर देकर कह रहे हैं कि वे अब विधानसभा चुनाव में उतरने का फैसला क्यों कर रहे हैं?” क्या बोले हितेन्द्र नाथ गोस्वामी?समर्थक समर्थक ने अपनी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि गोगोई के अल्पसंख्यक रहते हुए भी विकास समन्वय पर प्रत्यक्ष समन्वय की कमी हो रही है। उन्होंने आगे कहा, “वे जोरहाट के न्यूनतम थे और मैं यहां का नेता हूं, लेकिन मुझे इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के यात्रियों को ले जाने के बारे में कोई चर्चा याद नहीं है।” युवा पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका – गोस्वामीगोस्वामी ने स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं के बीच कोई व्यक्तिगत प्रतिद्वंदिता नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारी कंपनी कोई शत्रु नहीं है, इसलिए मैं किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहता।” आगामी प्रकाशन में युवा कॉलेज की भूमिका में गोस्वामी ने अपने बढ़ते प्रभाव को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, ”युवा पीढ़ी इस चुनाव में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, लेकिन वे वैज्ञानिक हैं और जानते हैं कि किसे नियुक्त किया गया है।” बेहोशी की हालत में बेबस हुए गोस्वामी ने गोगोई को पाकिस्तान से जोड़ने वाले काम पर टिप्पणी करने से पहले कहा और कहा, “मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। जोर के घाट के लोग शिक्षित हैं और वे जानते हैं कि क्या सही है।” इसी बीच गोस्वामी ने असमिया म्यूजिक के दिग्गज जुबिन गर्ग के सम्मान में एक प्रोजेक्ट की योजना का खुलासा करते हुए एक कल्चरल पहल की घोषणा की। उन्होंने बताया, “हम जुबिन गर्ग को समर्पित एक प्रोजेक्ट शुरू कर रहे हैं, जिसका निर्माण उद्योग महाविद्यालय के पास सोताई में किया जाएगा।” दोनों नेताओं के महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए, आने वाले दिनों में जोर-शोर से एक कड़ा और गहन मुकाबला देखने की उम्मीद है। ये भी पढ़ें असम बीजेपी उम्मीदवारों की सूची: असम में बीजेपी ने की फील्डिंग सेट! प्रद्युत बोरदोलोई सहित कई बड़े दांव, क्या उलटी पड़ जाएगी बाजी? (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)गौरव गोगोई(टी)हितेंद्र नाथ गोस्वामी(टी)कांग्रेस(टी)असम(टी)विधानसभा चुनाव(टी)जोरहाट(टी)कांग्रेस(टी)गौरव गोगोई(टी)हितेंद्र नाथ गोस्वामी








