क्या बिहार में तेजस्वी की छाया से बाहर निकलेगी कांग्रेस:तमिलनाडु में राहुल ने DMK को छोड़ा, प्रशांत किशोर के साथ जाने की कितनी संभावना

तमिलनाडु में राहुल गांधी के DMK का साथ छोड़कर फिल्मी सितारे विजय से गठजोड़ करने की घटना ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। RJD-कांग्रेस के गठबंधन को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। इस बीच 8 मई को तेजस्वी यादव ने साफ शब्दों में कहा- भाजपा को क्षेत्रीय दल ही टक्कर दे सकते हैं। अब सवाल है- क्या कांग्रेस तमिलनाडु वाला साहस बिहार में भी दिखाएगी। थालापति विजय के फ्रेंड प्रशांत किशोर से हाथ तो नहीं मिला लेगी। अगर ऐसा होता है तो 2029 से पहले बिहार की राजनीति का पूरा समीकरण बदल सकता है। इन्हीं सवालों का जवाब आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः तमिलनाडु में राहुल गांधी ने विजय के साथ गठबंधन कर क्या मैसेज दिया? जवाबः 4 मई को आए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के रिजल्ट के बाद कांग्रेस ने दशकों पुराने साथी DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) का साथ छोड़ दिया। राहुल गांधी ने अपने पांचों विधायकों का समर्थन अभिनेता से नेता बने थालापति विजय को दे दिया। राहुल गांधी का DMK जैसे पुराने और भरोसेमंद सहयोगी को छोड़ना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। TVK (तमिलगा वेट्टी कड़गम) के साथ जाने का राहुल गांधी का यह फैसला बता रहा है कि वह अब घिसे-पीटे नारों और मॉडल के आधार पर चल रही पार्टियों से अलग नए और बढ़ते हुए राजनीतिक चेहरों के साथ कदमताल करना चाहते हैं। राहुल गांधी शायद अब क्षेत्रीय क्षत्रपों के दबाव से मुक्त होकर नई, युवा और भविष्य की राजनीति की ओर देख रहे हैं। सवाल-2ः राहुल के इस फैसले का बिहार में क्या असर पड़ेगा? जवाबः बिहार में कांग्रेस और RJD (लालू-तेजस्वी) का रिश्ता बहुत पुराना है, लेकिन तमिलनाडु के फैसले का गहरा असर इस गठबंधन पर पड़ सकता है। बिहार कांग्रेस के नेता अलग होने का सुझाव दे चुके हैं सवाल-3ः कांग्रेस तेजस्वी का साथ क्यों छोड़ सकती है? जवाबः तेजस्वी का साथ छोड़ने के 3 बड़े कारण हैं… 1. सामाजिक न्याय का पुराना मॉडल फेल तेजस्वी यादव बीते 4-5 सालों में लगातार तमिलनाडु के सामाजिक न्याय के मॉडल को अपनाने की बातें करते रहे हैं। जातीय गणना से लेकर रिजर्वेशन का दायरा बढ़ाने की जमकर वकालत करते रहे हैं। अगस्त 2022 से जनवरी 2024 तक तेजस्वी यादव जब नीतीश सरकार में आए तो बिहार में जातीय गणना भी हुई। रिजर्वेशन का दायरा भी बढ़ा, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। इतने प्रयास के बावजूद 2025 विधानसभा चुनाव में महागठबंधन 35 सीटों पर सिमट गया। वहीं, तेजस्वी यादव जिस तमिलनाडु मॉडल को बिहार में लागू करने की बातें करते हैं, वह मॉडल उसी राज्य में फेल हो गया। साथी स्टालिन की पार्टी DMK सत्ता से बाहर हो गई। एक्टर विजय ने स्टालिन से अलग सामाजिक न्याय का नया मॉडल पेश किया, जिसे लोगों ने स्वीकार किया है। तमिलनाडु: क्यों फेल हुआ ‘सामाजिक न्याय’ का पुराना मॉडल? 2. नहीं बढ़ रहा कांग्रेस का वोट बैंक 3. भ्रष्टाचार और जंगलराज का नैरेटिव सवाल-4: क्या 2029 से पहले कांग्रेस प्रशांत किशोर के साथ जाएगी? जवाबः हां, संभावना मजबूत है। कांग्रेस बिहार में अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है और RJD की छाया से दूर जाना चाहती है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद दिसंबर 2025 में प्रशांत किशोर की कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी से दो घंटे तक मुलाकात हुई थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत किशोर की प्रियंका गांधी से बिहार और देश में विपक्ष की राजनीति पर बातें हुईं थी। मुद्दों पर भी बातें हुईं थी। कांग्रेस जानती है कि प्रशांत किशोर रणनीतिकार हैं, जो कांग्रेस को नई ऊर्जा दे सकते हैं। चुनाव में कांग्रेस को लेकर सॉफ्ट थे प्रशांत किशोर प्रशांत किशोर के साथ आने की संभावना क्यों मजबूत है सवाल-5: बिहार में सत्ता चाहिए तो तेजस्वी को क्या करना होगा? जवाबः तेजस्वी यादव अभी भी बिहार के सबसे मजबूत विपक्षी चेहरा हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में RJD को सबसे ज्यादा वोट शेयर (करीब 23%) मिला, लेकिन सीटें सिर्फ 25 आईं। अगर उन्हें 2030 या उससे पहले सत्ता चाहिए तो पुरानी रणनीति से बाहर निकलना पड़ेगा। उनको 3 काम करने होंगे… 1. MY इक्वेशन से आगे निकलकर ब्रॉड कोएलिशन बनाना 2. जंगलराज के नैरेटिव को विकास की पॉलिटिक्स से खत्म करना होगा 3. मजबूत संगठन करना होगा
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Hindi News National Congress Claims MeitY Block Rahul Gandhi Instagram Reel With Tamil Nadu Cm Vijay नई दिल्ली/चेन्नई5 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु CM विजय ने शपथ के बाद इंडोर स्टेडियम में राहुल गांधी के साथ वीडियो बनाया था। कांग्रेस ने दावा किया कि इंस्टाग्राम ने राहुल गांधी की उस रील और फोटो पोस्ट को ब्लॉक कर दिया है, जिसमें वे तमिलनाडु के CM विजय के साथ नजर आ रहे थे। कांग्रेस ने इसका कारण इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के नियमों को बताया। हालांकि सरकारी सूत्रों ने इस आरोप से इनकार किया है। सूचना मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। यह प्लेटफॉर्म के आंतरिक सिस्टम की एक गलती के कारण हुआ, जिसने गलती से इस पोस्ट को ब्लॉक करने के लिए फ्लैग कर दिया था। हालांकि पोस्ट रीस्टोर कर दी गई है। गांधी रविवार को चेन्नई में थे, जहां उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर विजय के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर इस अभिनेता-राजनेता के साथ अपनी कई तस्वीरें भी शेयर की थीं। राहुल के साथ विजय की तस्वीरें… कांग्रेस का दावा- एक घंटे में 1.2 करोड़ व्यूज हो गए थे कांग्रेस नेता और गांधी के सहयोगी श्रीवत्स ने दावा किया कि वायरल रील को एक घंटे से भी कम समय में 1.2 करोड़ (12 मिलियन) बार देखा गया था, जबकि वायरल तस्वीरों वाली पोस्ट 4.6 करोड़ (46 मिलियन) लोगों तक पहुंच चुकी थी। मेटा ने इस बात का कोई कारण नहीं बताया है कि आखिर क्यों उनका अकाउंट एक्सेस नहीं हो पा रहा है। श्रीवत्स ने आरोप लगाया, “यह तकनीकी गड़बड़ी सूचना मंत्रालय के नियमों के कारण हुई है। राहुल गांधी के सोशल मीडिया अकाउंट्स को लंबे समय से रोका जा रहा है। X पर उनकी रीच, यूट्यूब पर उनके व्यूज और इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स को भी मैनेज किया जा रहा है। श्रीवत्स ने आगे कहा- इसी तरह भारत में विपक्ष के नेता की आवाज को दबाया जाता है। मंत्रालय की सफाई- हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं कांग्रेस के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, सूचना मंत्रलाय के सूत्रों ने कहा कि कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स यह गलत दावा कर रहे हैं कि विपक्ष के नेता की कुछ पोस्ट्स को मंत्रालय ने ब्लॉक किया था। मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा- “हम साफ कर देना चाहते हैं कि इस कार्रवाई से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। यह प्लेटफॉर्म के इंटरनल सिस्टम की एक गलती के कारण हुआ था, जिसने गलती से उस पोस्ट को ब्लॉक करने के लिए फ्लैग कर दिया था। अब उस पोस्ट को रीस्टोर कर दिया गया है। —————- ये खबर भी पढ़ें… विजय की शपथ में राष्ट्रगान–वंदेमातरम पर विवाद: DMK बोली- पहले तमिल गीत बजाने की परंपरा, इसे तीसरे नंबर पर धकेला; लेफ्ट–VCK का भी विरोध तमिलनाडु में सीएम विजय के शपथ ग्रहण समारोह में ‘तमिल थाई वाजथु’ (तमिल राज्य गीत) से पहले ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ बजाने पर विवाद शुरू हो गया है। विजय के शपथ ग्रहण में सबसे पहले वंदे मातरम, फिर जन-गण-मन और इसके बाद तमिल राज्य गीत बजाया गया। DMK का कहना है कि राज्य के सम्मान के लिए तमिल राज्य गीत सबसे पहले बजाया जाना चाहिए था। हालांकि TVK ने सफाई देते हुए कहा कि गाने कब बजेंगे ये फैसला राज्यपाल का था। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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Hindi News National Congress Claims MeitY Block Rahul Gandhi Instagram Reel With Tamil Nadu Cm Vijay नई दिल्ली/चेन्नई1 घंटे पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु CM विजय ने शपथ के बाद इंडोर स्टेडियम में राहुल गांधी के साथ वीडियो बनाया था। कांग्रेस ने दावा किया कि इंस्टाग्राम ने राहुल गांधी की उस रील और फोटो पोस्ट को ब्लॉक कर दिया है, जिसमें वे तमिलनाडु के CM विजय के साथ नजर आ रहे थे। कांग्रेस ने इसका कारण इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के नियमों को बताया। हालांकि सरकारी सूत्रों ने इस आरोप से इनकार किया है। सूचना मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है। यह प्लेटफॉर्म के आंतरिक सिस्टम की एक गलती के कारण हुआ, जिसने गलती से इस पोस्ट को ब्लॉक करने के लिए फ्लैग कर दिया था। हालांकि पोस्ट रीस्टोर कर दी गई है। गांधी रविवार को चेन्नई में थे, जहां उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर विजय के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर इस अभिनेता-राजनेता के साथ अपनी कई तस्वीरें भी शेयर की थीं। राहुल के साथ विजय की तस्वीरें… कांग्रेस ने विजय को तमिलनाडु में सरकार बनाने में मदद के लिए DMK का साथ छोड़ दिया। कांग्रेस के 5 विधायक तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में जीते हैं। जबकि TVK के पास 108 विधायक हैं। विजय पहले भी कई बार कह चुके हैं कि राहुल गांधी के फैन हैं। विजय के कांग्रेस में शामिल होने की अफवाहें भी आई थीं। कांग्रेस का दावा- एक घंटे में 1.2 करोड़ व्यूज हो गए थे कांग्रेस नेता और गांधी के सहयोगी श्रीवत्स ने दावा किया कि वायरल रील को एक घंटे से भी कम समय में 1.2 करोड़ (12 मिलियन) बार देखा गया था, जबकि वायरल तस्वीरों वाली पोस्ट 4.6 करोड़ (46 मिलियन) लोगों तक पहुंच चुकी थी। मेटा ने इस बात का कोई कारण नहीं बताया है कि आखिर क्यों उनका अकाउंट एक्सेस नहीं हो पा रहा है। श्रीवत्स ने आरोप लगाया, “यह तकनीकी गड़बड़ी सूचना मंत्रालय के नियमों के कारण हुई है। राहुल गांधी के सोशल मीडिया अकाउंट्स को लंबे समय से रोका जा रहा है। X पर उनकी रीच, यूट्यूब पर उनके व्यूज और इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोअर्स को भी मैनेज किया जा रहा है। श्रीवत्स ने आगे कहा- इसी तरह भारत में विपक्ष के नेता की आवाज को दबाया जाता है। मंत्रालय की सफाई- हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं कांग्रेस के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए, सूचना मंत्रलाय के सूत्रों ने कहा कि कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स यह गलत दावा कर रहे हैं कि विपक्ष के नेता की कुछ पोस्ट्स को मंत्रालय ने ब्लॉक किया था। मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा- हम साफ कर देना चाहते हैं कि इस कार्रवाई से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। यह प्लेटफॉर्म के इंटरनल सिस्टम की एक गलती के कारण हुआ था, जिसने गलती से उस पोस्ट को ब्लॉक करने के लिए फ्लैग कर दिया था। अब उस पोस्ट को रीस्टोर कर दिया गया है। —————- ये खबर भी पढ़ें… विजय की शपथ में राष्ट्रगान–वंदेमातरम पर विवाद: DMK बोली- पहले तमिल गीत बजाने की परंपरा, इसे तीसरे नंबर पर धकेला; लेफ्ट–VCK का भी विरोध तमिलनाडु में सीएम विजय के शपथ ग्रहण समारोह में ‘तमिल थाई वाजथु’ (तमिल राज्य गीत) से पहले ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ बजाने पर विवाद शुरू हो गया है। विजय के शपथ ग्रहण में सबसे पहले वंदे मातरम, फिर जन-गण-मन और इसके बाद तमिल राज्य गीत बजाया गया। DMK का कहना है कि राज्य के सम्मान के लिए तमिल राज्य गीत सबसे पहले बजाया जाना चाहिए था। हालांकि TVK ने सफाई देते हुए कहा कि गाने कब बजेंगे ये फैसला राज्यपाल का था। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
केरलम सीएम का ऐलान जल्द, वेणुगोपाल राहुल की पसंद:कांग्रेस नेता बोले- हमारे यहां मोदी-शाह सारे फैसले लें, ऐसा सिस्टम नहीं

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की केरलम सीएम के लिए पहली पसंद केसी वेणुगोपाल हैं। सूत्रों के मुताबिक, राहुल ने दिल्ली में वेणुगोपाल से अकले में मुलाकात की। ऐसे में पार्टी जल्द ही सीएम चेहरे का ऐलान कर सकती है। वेणुगोपाल फिलहाल अलाप्पुझा लोकसभा सीट से सांसद हैं। केरलम के अगले CM के चुनाव को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कांग्रेस के सीनियर लीडर रमेश चेन्निथला ने भाजपा पर निशाना साधा। चेन्निथला ने कहा- कांग्रेस पार्टी में सीएम का चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से होता है। हमारे यहां मोदी-शाह सारे फैसले लें, ऐसा सिस्टम नहीं है। केरलम में चुनावी नतीजे आए 6 दिन हो गए हैं। अभी तक सीएम का ऐलान नहीं हो पाया है। राज्य में 10 साल बाद कांग्रेस की वापसी हुई। कांग्रेस ने 140 में से 63 सीटें जीतीं। 26 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर CPI(M) रही। LDF की हार पर सीएम पिनाराई विजयन पद से इस्तीफा दे चुके हैं। दावा- वेणुगोपाल को सबसे ज्यादा विधायकों का समर्थन रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस के 63 विधायकों में 75-80% ने के.सी. वेणुगोपाल को समर्थन दिया। वेणुगोपाल के सीएम बनने पर इरिक्कूर से चुनाव जीते सनी जोसेफ अपनी सीट से इस्तीफा दे सकते हैं। इससे वेणुगोपाल के सीएम बनने के बाद इस सीट से चुनाव लड़कर विधायक का चुनाव लड़ेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में वीडी सतीशन को महज 6 विधायकों का समर्थन मिला। हालांकि, बैठक के बाद तीन पूर्व प्रदेश अध्यक्षों ने सतीशन के नाम का समर्थन किया है। इसके अलावा UDF के सहयोगी दल IUML और केरलम कांग्रेस (जोसेफ) ने खुले तौर पर सतीशन को समर्थन दिया है। बंगाल, तमिलनाडु में सीएम शपथ ले चुके, असम में 12 को शपथ ग्रहण तमिलनाडु: विजय राज्य के 9वें मुख्यमंत्री बने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) चीफ और एक्टर से नेता बने सी जोसेफ विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। विजय की पार्टी TVK को 234 में से 108 सीटें मिली थीं। उन्हें कांग्रेस, लेफ्ट, IUML और VCK के 13 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। पूरी खबर पढ़ें… पश्चिम बंगाल: सुवेंदु भाजपा के पहले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी 9 मई को पश्चिम बंगाल में BJP के पहले मुख्यमंत्री बन गए। सुवेंदु ने बांग्ला में ईश्वर के नाम की शपथ ली। शपथ के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री को झुककर प्रणाम किया। NDA और BJP शासित राज्यों के 20 मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में पहुंचे। पश्चिम बंगाल चुनावों में बीजेपी ने 294 में से 207 सीटें जीती हैं। पूरी खबर पढ़ें… असम: हिमंता 12 मई को सीएम पद की शपथ लेंगे असम में बीजेपी की विधायक दल की बैठक में हिमंता बिस्वा सरमा को फिर विधायक दल का नेता चुना गया। हिमंता 12 मई को सुबह 11 बजे लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वहीं पुडुचेरी में एन. रामास्वामी 13 मई को शपथ लेंगे।
केरलम सीएम का ऐलान जल्द, वेणुगोपाल राहुल की पसंद:कांग्रेस नेता बोले- हमारे यहां मोदी-शाह सारे फैसले लें, ऐसा सिस्टम नहीं

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की केरलम सीएम के लिए पहली पसंद केसी वेणुगोपाल हैं। सूत्रों के मुताबिक, राहुल ने दिल्ली में वेणुगोपाल से अकले में मुलाकात की। ऐसे में पार्टी जल्द ही सीएम चेहरे का ऐलान कर सकती है। वेणुगोपाल फिलहाल अलाप्पुझा लोकसभा सीट से सांसद हैं। केरलम के अगले CM के चुनाव को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कांग्रेस के सीनियर लीडर रमेश चेन्निथला ने भाजपा पर निशाना साधा। चेन्निथला ने कहा- कांग्रेस पार्टी में सीएम का चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से होता है। हमारे यहां मोदी-शाह सारे फैसले लें, ऐसा सिस्टम नहीं है। केरलम में चुनावी नतीजे आए 6 दिन हो गए हैं। अभी तक सीएम का ऐलान नहीं हो पाया है। राज्य में 10 साल बाद कांग्रेस की वापसी हुई। कांग्रेस ने 140 में से 63 सीटें जीतीं। 26 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर CPI(M) रही। LDF की हार पर सीएम पिनाराई विजयन पद से इस्तीफा दे चुके हैं। दावा- वेणुगोपाल को सबसे ज्यादा विधायकों का समर्थन रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस के 63 विधायकों में 75-80% ने के.सी. वेणुगोपाल को समर्थन दिया। वेणुगोपाल के सीएम बनने पर इरिक्कूर से चुनाव जीते सनी जोसेफ अपनी सीट से इस्तीफा दे सकते हैं। इससे वेणुगोपाल के सीएम बनने के बाद इस सीट से चुनाव लड़कर विधायक का चुनाव लड़ेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में वीडी सतीशन को महज 6 विधायकों का समर्थन मिला। हालांकि, बैठक के बाद तीन पूर्व प्रदेश अध्यक्षों ने सतीशन के नाम का समर्थन किया है। इसके अलावा UDF के सहयोगी दल IUML और केरलम कांग्रेस (जोसेफ) ने खुले तौर पर सतीशन को समर्थन दिया है। बंगाल, तमिलनाडु में सीएम शपथ ले चुके, असम में 12 को शपथ ग्रहण तमिलनाडु: विजय राज्य के 9वें मुख्यमंत्री बने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) चीफ और एक्टर से नेता बने सी जोसेफ विजय तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। विजय की पार्टी TVK को 234 में से 108 सीटें मिली थीं। उन्हें कांग्रेस, लेफ्ट, IUML और VCK के 13 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। पूरी खबर पढ़ें… पश्चिम बंगाल: सुवेंदु भाजपा के पहले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी 9 मई को पश्चिम बंगाल में BJP के पहले मुख्यमंत्री बन गए। सुवेंदु ने बांग्ला में ईश्वर के नाम की शपथ ली। शपथ के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री को झुककर प्रणाम किया। NDA और BJP शासित राज्यों के 20 मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में पहुंचे। पश्चिम बंगाल चुनावों में बीजेपी ने 294 में से 207 सीटें जीती हैं। पूरी खबर पढ़ें… असम: हिमंता 12 मई को सीएम पद की शपथ लेंगे असम में बीजेपी की विधायक दल की बैठक में हिमंता बिस्वा सरमा को फिर विधायक दल का नेता चुना गया। हिमंता 12 मई को सुबह 11 बजे लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वहीं पुडुचेरी में एन. रामास्वामी 13 मई को शपथ लेंगे।
Modi Jokes About Joining BJP; Offers Gujarat-Level Aid

Hindi News National Telangana CM Revanth Reddy: Modi Jokes About Joining BJP; Offers Gujarat Level Aid हैदराबाद4 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता रेवंत रेड्डी से मजाक में भाजपा जॉइन करने को कहा। दरअसल पीएम राज्य में 9,400 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का इनॉगरेशन करने पहुंचे थे। पीएम ने यहां हल्के-फुल्के अंदाज में रेवंत रेड्डी से कहा कि केंद्र सरकार ने 10 साल में गुजरात को जो दिया, मैं तेलंगाना को देने के लिए भी तैयार हूं। लेकिन मेरे अनुभव के मुताबिक ऐसा करते ही आपको अभी जो मिल रहा है, वह आधा हो जाएगा। इसलिए बेहतर होगा कि आप मेरे से ही जुड़ो। हालांकि पीएम ने ये बातें तेलंगाना सीएम की उस सिफारिश के बात कहीं। जिसमें उन्होंने पीएम से कहा था कि जिस तरह मनमोहन सरकार में गुजरात का विकास हुआ, उसी तरह तेलंगाना का भी विकास हो। रेवंत बोले- जैसे मनमोहन सरकार में गुजरात को मिला, आप हमें दें रेवंत रेड्डी ने कहा, जब मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। तब मोदी मुख्यमंत्री थे और उन्होंने 10 साल में ‘गुजरात मॉडल’ को साकार किया। इसी तरह, तेलंगाना के लोगों को उम्मीद है कि अगले 10 साल में, मेरे मुख्यमंत्री रहते हुए ‘तेलंगाना विकास मॉडल’ भी साकार होगा। जिस तरह मनमोहन सिंह ने गुजरात का समर्थन किया था, उसी तरह रेड्डी ने मोदी से तेलंगाना के विकास में समर्थन करने का अनुरोध किया। रेवंत रेड्डी ने यह भी कहा कि जहां एक ओर मोदी भारत का विकास चाहते हैं, वहीं उन्हें तेलंगाना को भी साथ लेकर चलना चाहिए। तेलंगाना के विकास के लिए, कृपया दो घंटे का समय निकालें, ताकि हम आपके सामने अपने विकास प्रस्ताव पेश कर सकें। पीएम का जवाब- मैं देने को तैयार, आप साथ जुड़ जाएं रेवंत की बात का जवाब देते हुए पीएम ने कहा- जो कुछ भी केंद्र सरकार (पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में) ने गुजरात को 10 साल में दिया (जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे) मैं भी आपको वह सब देने के लिए तैयार हूं लेकिन तब राज्य के पास उतना भी नहीं बचेगा जितना उसे अभी केंद्र से मिल रहा है, और आप अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएंगे। इसलिए, बेहतर यही है कि आप मेरे साथ आ जाएं। पीएम के तेलंगाना कार्यक्रम की 3 तस्वीरें… पीएम ने तेलंगाना के वारंगल में पहले पीएम मित्र पार्क का इनॉगरेशन किया पीएम मोदी तेलंगाना के वारंगल में PM MITRA पार्क का भी इनॉगरेशन करेंगे। इसे काकतिया मेगा टेक्सटाइल पार्क के नाम से भी जाना जाता है। लगभग 1,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित यह भारत का पहला पूरी तरह से काम करने वाला PM MITRA पार्क है। यह भारत सरकार के ‘5F’ विजन को साकार करता है – Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign (खेत से फाइबर तक, फैक्ट्री से फैशन तक, और फैशन से विदेश तक)। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Modi Jokes About Joining BJP; Offers Gujarat-Level Aid

Hindi News National Telangana CM Revanth Reddy: Modi Jokes About Joining BJP; Offers Gujarat Level Aid हैदराबाद2 घंटे पहले कॉपी लिंक पीएम ने हैदराबाद में 9,400 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इसी दौरान उन्होंने रेंवत रेड्डी से मजाकिया अंदाज में साथ जुड़ने के लिए कहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता रेवंत रेड्डी से मजाक में साथ आने को कहा। दरअसल पीएम राज्य में 9,400 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का इनॉगरेशन करने पहुंचे थे। पीएम ने यहां हल्के-फुल्के अंदाज में रेवंत रेड्डी से कहा कि केंद्र सरकार ने 10 साल में गुजरात को जो दिया, मैं तेलंगाना को देने के लिए भी तैयार हूं। लेकिन मेरे अनुभव के मुताबिक ऐसा करते ही आपको अभी जो मिल रहा है, वह आधा हो जाएगा। इसलिए बेहतर होगा कि आप मेरे से ही जुड़ो। हालांकि पीएम ने ये बातें तेलंगाना सीएम की उस सिफारिश के बात कहीं। जिसमें उन्होंने पीएम से कहा था कि जिस तरह मनमोहन सरकार में गुजरात का विकास हुआ, उसी तरह तेलंगाना का भी विकास हो। रेवंत बोले- जैसे मनमोहन सरकार में गुजरात को मिला, आप हमें दें रेवंत रेड्डी ने कहा, जब मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। तब मोदी मुख्यमंत्री थे और उन्होंने 10 साल में ‘गुजरात मॉडल’ को साकार किया। इसी तरह, तेलंगाना के लोगों को उम्मीद है कि अगले 10 साल में, मेरे मुख्यमंत्री रहते हुए ‘तेलंगाना विकास मॉडल’ भी साकार होगा। जिस तरह मनमोहन सिंह ने गुजरात का समर्थन किया था, उसी तरह रेड्डी ने मोदी से तेलंगाना के विकास में समर्थन करने का अनुरोध किया। रेवंत रेड्डी ने यह भी कहा कि जहां एक ओर मोदी भारत का विकास चाहते हैं, वहीं उन्हें तेलंगाना को भी साथ लेकर चलना चाहिए। तेलंगाना के विकास के लिए, कृपया दो घंटे का समय निकालें, ताकि हम आपके सामने अपने विकास प्रस्ताव पेश कर सकें। पीएम का जवाब- मैं देने को तैयार, आप साथ जुड़ जाएं रेवंत की बात का जवाब देते हुए पीएम ने कहा- जो कुछ भी केंद्र सरकार (पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में) ने गुजरात को 10 साल में दिया (जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे) मैं भी आपको वह सब देने के लिए तैयार हूं लेकिन तब राज्य के पास उतना भी नहीं बचेगा जितना उसे अभी केंद्र से मिल रहा है, और आप अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएंगे। इसलिए, बेहतर यही है कि आप मेरे साथ आ जाएं। पीएम के तेलंगाना कार्यक्रम की 2 तस्वीरें… हैदराबाद में डेवलेपमेंट प्रोजेक्ट्स के इनॉगरेशन के दौरान रेवंत रेड्डी पीएम मोदी स हाथ मिलाते हुए। रेवंत रेड्डी ने कार्यक्रम में पीएम मोदी को मोमेंटम भी दिया। पीएम के मजाक के दो मायने तेलंगाना में दो साल बाद विधानसभा चुनाव: तेलंगाना में पिछले विधानसभा चुनाव 30 नवंबर 2023 को हुए थे। कांग्रेस पार्टी ने बहुमत हासिल किया और रेवंत रेड्डी मुख्यमंत्री बने, जबकि भारत राष्ट्र समिति (BRS) सत्ता से बाहर हो गई। भाजपा को सिर्फ 8 सीटें मिलीं थीं। मोदी ऐसे में अगले चुनाव के लिए अभी से तैयारी में जुट गए हैं। आंध्र में एनडीए, इसी से अलग हुआ था तेलंगाना: आंध्र प्रदेश में एनडीए की सरकार है। चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी भाजपा के साथ है। ऐसे में भाजपा चाहती है कि पड़ोसी राज्य में भी सरकार बने। दरअसल तेलंगाना 2024 में आंध्र प्रदेश से अलग होकर ही नया राज्य बना था। पीएम ने तेलंगाना के वारंगल में पहले पीएम मित्र पार्क का इनॉगरेशन किया पीएम मोदी ने तेलंगाना के वारंगल में PM MITRA पार्क का भी इनॉगरेशन किया। इसे काकतिया मेगा टेक्सटाइल पार्क के नाम से भी जाना जाता है। लगभग 1,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित यह भारत का पहला पूरी तरह से काम करने वाला PM MITRA पार्क है। यह भारत सरकार के ‘5F’ विजन को साकार करता है – Farm to Fibre to Factory to Fashion to Foreign (यानी खेत से फाइबर तक, फैक्ट्री से फैशन तक, और फैशन से विदेश तक)। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
द फाइनल टेक: एक सिनेमा आइकन से तमिलनाडु के संरक्षक तक विजय की यात्रा के बारे में | भारत समाचार

आखरी अपडेट:10 मई, 2026, 06:00 IST जिस व्यक्ति को लाखों लोग ‘थलापति’ (कमांडर) के नाम से जानते हैं, उसने उस चीज़ को सफलतापूर्वक तैयार किया है जिसे कई लोग असंभव मानते थे: ऐतिहासिक रूप से नवागंतुकों के लिए प्रतिरोधी राज्य में एक व्यवहार्य तीसरा मोर्चा जैसे ही वह सचिवालय में जाने की तैयारी करता है, विजय को अपने जीवन की चुनौती का सामना करना पड़ता है: यह साबित करना कि एक ‘प्रशंसक-संचालित’ आंदोलन तमिलनाडु की आर्थिक और सामाजिक जटिलता वाले राज्य पर शासन कर सकता है। (फ़ाइल छवि/न्यूज़18) तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में शनिवार को एक भूकंपीय बदलाव देखा गया, जब द्रमुक और अन्नाद्रमुक का दशकों पुराना एकाधिकार आधिकारिक तौर पर खत्म हो गया। चुनाव के बाद एक सप्ताह की गहन बातचीत के बाद, तमिलनाडु के राज्यपाल, राजेंद्र आर्लेकर ने सी जोसेफ विजय को मनोनीत मुख्यमंत्री नियुक्त किया। तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) के 51 वर्षीय नेता रविवार को सुबह 10 बजे जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में पद की शपथ लेंगे, जो एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत का प्रतीक है। ‘तीसरे रास्ते’ के वास्तुकार जिस व्यक्ति को लाखों लोग “थलापथी” (कमांडर) के नाम से जानते हैं, उसने उस चीज़ को सफलतापूर्वक तैयार किया है जिसे कई लोग असंभव मानते थे: ऐतिहासिक रूप से नवागंतुकों के लिए प्रतिरोधी राज्य में एक व्यवहार्य तीसरा मोर्चा। 22 जून 1974 को अनुभवी फिल्म निर्माता एसए चन्द्रशेखरन और गायिका शोबा चन्द्रशेखर के घर जन्मे विजय का पथ सावधानीपूर्वक नियोजित विकास में से एक रहा है। जबकि उनके शुरुआती करियर को सर्वोत्कृष्ट रोमांटिक हीरो ट्रॉप्स द्वारा परिभाषित किया गया था, उनकी बाद की फिल्मोग्राफी – मर्सल, सरकार और लियो जैसी हिट फिल्मों के साथ – जीएसटी सुधारों से लेकर स्वास्थ्य देखभाल असमानताओं तक हर चीज से निपटने के लिए तेज राजनीतिक संदेश का माध्यम बन गई। यह सिनेमाई बुनियाद कोई आकस्मिक घटना नहीं थी। फरवरी 2024 में जब उन्होंने औपचारिक रूप से टीवीके लॉन्च किया, तब तक विजय ने अपने विशाल प्रशंसक क्लबों को एक अनुशासित सामाजिक कल्याण नेटवर्क में बदलने में कई साल लगा दिए थे। सचिवालय में उनका परिवर्तन एक दशक लंबे “सॉफ्ट लॉन्च” की परिणति है, जहां उन्होंने खुद को पारंपरिक द्रविड़ प्रमुखों के लिए एक शांत, नीति-संचालित विकल्प के रूप में स्थापित किया, अंततः अपनी पहली पारी में 108 सीटें जीतीं। ‘118वाँ घंटा’: कूटनीति में एक मास्टरक्लास एक राजनेता के रूप में विजय की शुरुआत को गठबंधन अंकगणित की कठोर वास्तविकता से तुरंत परखा गया। 118 के जादुई आंकड़े से कम, मनोनीत मुख्यमंत्री को नतीजों के कुछ ही घंटों के भीतर जन नेता से मास्टर वार्ताकार की भूमिका निभानी पड़ी। सफलता तब मिली जब उन्हें कांग्रेस (5 सीटें), वाम दलों (4 सीटें) और वीसीके (2 सीटें) का समर्थन हासिल हुआ, साथ ही आईयूएमएल से भी समर्थन की खबरें मिलीं। इन वार्ताओं की तात्कालिकता संवैधानिक घड़ी द्वारा बढ़ा दी गई थी; वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 10 मई की आधी रात को समाप्त हो रहा है, किसी भी देरी से राष्ट्रपति शासन लग सकता है। शनिवार शाम तक सीमा पार करते हुए, विजय ने साबित कर दिया कि उनका राजनीतिक कौशल स्क्रीन से परे तक फैला हुआ है, एक “इंद्रधनुष गठबंधन” को नेविगेट करते हुए जिसमें अनुभवी दिग्गज और वैचारिक दिग्गज शामिल हैं। रविवार समारोह और आगे की राह रविवार को शपथ ग्रहण समारोह एक बड़े पैमाने पर होने की उम्मीद है, जिसमें 50,000 से अधिक समर्थक पहले से ही चेन्नई में मौजूद हैं। मंच पर विजय के साथ शामिल होने वाला एक कैबिनेट होगा जो उनके गठबंधन की विविधता को दर्शाता है, जो शासन के अधिक परामर्शात्मक स्वरूप की ओर बदलाव का संकेत देता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित उच्च-प्रोफ़ाइल राष्ट्रीय हस्तियों के भाग लेने की उम्मीद है, जो लगभग 70 वर्षों में पहली बार चेन्नई में एक गैर-द्रविड़ प्रमुख के सत्ता संभालने के राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करता है। जैसे ही वह सचिवालय में जाने की तैयारी करता है, विजय को अपने जीवन की चुनौती का सामना करना पड़ता है: यह साबित करना कि एक “प्रशंसक-संचालित” आंदोलन तमिलनाडु की आर्थिक और सामाजिक जटिलता वाले राज्य पर शासन कर सकता है। उस व्यक्ति के लिए जिसने “पहला दिन, पहला शो” के प्रचार में महारत हासिल करने में 30 साल बिताए, असली परीक्षा तब शुरू होती है जब कैमरे घूमना बंद कर देते हैं और फ़ाइलें घूमना शुरू कर देती हैं। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया द फाइनल टेक: एक सिनेमा आइकन से तमिलनाडु के संरक्षक तक विजय की यात्रा के बारे में अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु चुनाव(टी)एआईएडीएमके(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)बीजेपी(टी)डीएमके(टी)एमके स्टालिन(टी)विजय(टी)टीवीके(टी)विधानसभा चुनाव(टी)कांग्रेस(टी)इंडिया ब्लॉक
थलपति की कांटेदार राह: विजय और स्थिर कार्यकाल के बीच 10 बड़ी बाधाएं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:09 मई, 2026, 22:03 IST तमिलनाडु में सिल्वर स्क्रीन से सचिवालय तक का संक्रमण विजय के लिए संरचनात्मक और राजनीतिक बाधाओं का एक जटिल सेट लेकर आया है हनीमून अवधि से परे जीवित रहने के लिए, टीवीके को अपनी ‘स्थापना-विरोधी’ और ‘द्रमुक-विरोधी’ बयानबाजी से आगे बढ़ना होगा। फ़ाइल चित्र अभिनेता-राजनेता विजय का मुख्यमंत्री पद पर ऐतिहासिक आरोहण तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य में एक आदर्श बदलाव का प्रतीक होगा। हालाँकि, सिल्वर स्क्रीन से सचिवालय तक का संक्रमण अपने साथ संरचनात्मक और राजनीतिक बाधाओं का एक जटिल सेट लेकर आता है। जैसा कि तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) बागडोर संभालने की तैयारी कर रहा है, निम्नलिखित दस चुनौतियाँ विजय के पहले प्रशासन की सफलता या विफलता को परिभाषित करेंगी। 1. राजनीतिक स्थिरता सिद्ध करना हालाँकि टीवीके सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, लेकिन वह अकेले बहुमत से पीछे रह गई, जिसके कारण कांग्रेस, वामपंथी दलों और वीसीके पर निर्भरता जरूरी हो गई। यह गठबंधन अंकगणित तत्काल कमजोरियाँ पैदा करता है, जिसमें प्रमुख मंत्रालयों के लिए लगातार सौदेबाजी और सहयोगियों से नीतिगत प्रभाव शामिल है। राज्यपाल की गहन जांच के दौरान एक नाजुक गठबंधन को आगे बढ़ाना पहले 6 से 12 महीनों को विजय की जीवित रहने की प्रवृत्ति के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बना देगा। 2. सिनेमा से शासन तक संक्रमण एमजी रामचंद्रन और जे. जयललिता जैसे दिग्गजों के नक्शेकदम पर चलते हुए, विजय को अब व्यापक लोकप्रियता को प्रशासनिक विश्वसनीयता में बदलना होगा। शासन के लिए चुनाव प्रचार से अलग कौशल की आवश्यकता होती है – विशेष रूप से एक जटिल नौकरशाही का प्रबंधन करना, कैबिनेट गुटों को संभालना और बजट अनुशासन में महारत हासिल करना। विश्लेषक इस बात पर बंटे हुए हैं कि क्या जनता ने टीवीके की संगठनात्मक गहराई के लिए मतदान किया या केवल “विजय प्रतीक” के लिए। 3. एक मजबूत प्रशासनिक टीम का निर्माण एक उभरते हुए संगठन के रूप में, टीवीके में पहली बार चुने गए विधायक और अपेक्षाकृत अनुभवहीन जिला नेता मौजूद हैं। द्रमुक या अन्नाद्रमुक के विपरीत, टीवीके के पास दशकों पुरानी प्रशासनिक मशीनरी का अभाव है। सक्षम मंत्रियों को ढूंढना जो एक पेशेवर शासन संरचना स्थापित करते हुए आंतरिक शक्ति केंद्रों को बनने से रोक सकें, नए मुख्यमंत्री के लिए एक कठिन काम होगा। 4. द्रमुक को एक मजबूत विपक्ष के रूप में संभालना अपने चुनावी झटके के बावजूद, एमके स्टालिन और डीएमके राज्य के संस्थागत ढांचे में गहराई से जमे हुए हैं। एक विशाल कैडर नेटवर्क, स्थानीय निकाय की ताकत और एक परिष्कृत मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र के साथ, द्रमुक के एक आक्रामक विपक्ष होने की उम्मीद है। अनुभवहीन टीवीके सरकार के हर कदम को राजनीतिक माइक्रोस्कोप के तहत रखा जाएगा। 5. एआईएडीएमके गतिशीलता का प्रबंधन अन्नाद्रमुक, हालांकि कमजोर हो गई है, फिर भी थेवर बेल्ट में एक महत्वपूर्ण ग्रामीण वोट बैंक और प्रभाव बरकरार रखा है। पर्दे के पीछे की बातचीत और अन्नाद्रमुक विधायकों के बीच संभावित गुटीय आंदोलनों की रिपोर्ट से पता चलता है कि तमिलनाडु का राजनीतिक माहौल अत्यधिक अस्थिर और अप्रत्याशित रहेगा। 6. आर्थिक और रोजगार का दबाव जनता की उम्मीदें आसमान पर हैं, खासकर युवाओं के लिए रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास के संबंध में। हालाँकि, विजय को महत्वपूर्ण राजकोषीय दबाव और भारी कल्याण सब्सिडी बोझ का सामना करने वाला राज्य विरासत में मिला है। शहरी बुनियादी ढांचे के तनाव और पड़ोसी राज्यों से औद्योगिक प्रतिस्पर्धा का मतलब है कि युवा मतदाताओं द्वारा अपेक्षित “तेज़ बदलाव” को पूरा करना मुश्किल होगा। 7. फैनबेस की अपेक्षाओं का प्रबंधन करना यह विजय की सबसे अनोखी चुनौती बनी हुई है। उनके मुख्य समर्थक सिनेमाई परिवर्तन की उम्मीद करते हैं – स्वच्छ शासन और भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई एक फिल्म की पटकथा की गति से की जाती है। हकीकत में, प्रशासन के पहिये धीरे-धीरे चलते हैं, और सिनेमाई अपेक्षा और नौकरशाही वास्तविकता के बीच कोई भी कथित अंतर तेजी से सार्वजनिक निराशा का कारण बन सकता है। 8. केंद्र-राज्य संबंध भाजपा के खिलाफ विजय की प्रचार स्थिति यह सुनिश्चित करती है कि नई दिल्ली के साथ उनके संबंधों पर करीब से नजर रखी जाएगी। संघर्ष के बारहमासी क्षेत्रों में घर्षण की संभावना है: एनईईटी, जीएसटी बकाया, भाषा नीति और संघीय अधिकार। सरकार गठन के दौरान लोकभवन के साथ हालिया तनाव से पता चलता है कि राज्यपाल के साथ बातचीत राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहेगी। 9. कानून एवं व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा सत्ता में बदलाव से अक्सर कैडर संघर्ष, विरोध लामबंदी और राजनीतिक दलबदल शुरू हो जाता है। अनुभवहीन राजनीतिक प्रबंधकों के नेतृत्व वाली सरकार के लिए, शुरुआती महीनों को अक्सर कानून-व्यवस्था परीक्षणों द्वारा परिभाषित किया जाता है। प्रतिद्वंद्वी दलों की दबाव रणनीति से निपटते हुए शांति बनाए रखना नए गृह मंत्री के लिए अग्निपरीक्षा होगी। 10. एक विशिष्ट विचारधारा को परिभाषित करना हनीमून अवधि से परे जीवित रहने के लिए, टीवीके को अपनी “स्थापना-विरोधी” और “द्रमुक-विरोधी” बयानबाजी से आगे बढ़ना होगा। असली सवाल यह है: टीवीके शासन मॉडल क्या है? आर्थिक नीति, सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यक आउटरीच के लिए एक स्पष्ट ढांचे के बिना, दीर्घकालिक राजनीतिक गति को बनाए रखना एक संघर्ष होगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया थलपति की कांटेदार राह: विजय और स्थिर कार्यकाल के बीच 10 बड़ी बाधाएं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु चुनाव(टी)एआईएडीएमके(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)बीजेपी(टी)डीएमके(टी)एमके स्टालिन(टी)विजय(टी)टीवीके(टी)विधानसभा चुनाव(टी)कांग्रेस(टी)इंडिया ब्लॉक
समय के विपरीत दौड़ जीतना: क्यों विजय को 10 मई से पहले तमिलनाडु की संख्या पर मुहर लगानी पड़ी | भारत समाचार

आखरी अपडेट:09 मई, 2026, 17:45 IST वर्तमान 16वीं तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई की आधी रात को समाप्त होने वाला है लगभग पांच दशकों में पहली बार, तमिलनाडु एक गठबंधन मॉडल द्वारा शासित होने जा रहा है, जहां प्रमुख पार्टी के पास अपने दम पर साधारण बहुमत नहीं है। (फाइल फोटो: पीटीआई) एक सप्ताह तक चले संवैधानिक गतिरोध की नाटकीय परिणति में, अभिनेता-राजनेता विजय ने आखिरकार तमिलनाडु में अगली सरकार बनाने के लिए आवश्यक गणितीय जनादेश हासिल कर लिया है। सफलता शनिवार दोपहर को तब मिली जब विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) ने औपचारिक रूप से लोक भवन को अपना समर्थन पत्र सौंप दिया, जिससे तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे बढ़ गया। रिपोर्टों से पता चलता है कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने भी “थलापति” शिविर को अपना समर्थन दिया है, चुनाव परिणामों के बाद से चेन्नई में व्याप्त राजनीतिक गतिरोध प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। टीवीके बहुमत का आंकड़ा पार करने में कैसे कामयाब रही? 118 के जादुई आंकड़े तक की यात्रा गठबंधन अंकगणित में एक उच्च जोखिम वाली कवायद थी। जबकि विजय की टीवीके 107 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन वह अपने दम पर बहुमत से काफी पीछे रह गई। पूर्ववर्ती धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन के घटकों के साथ तेजी से बातचीत की एक श्रृंखला के माध्यम से गतिरोध को तोड़ा गया। कांग्रेस, अपने पांच विधायकों के साथ, और वामपंथी दल, जिनके पास चार सीटें थीं, द्रमुक खेमे से कूदने वाले पहले व्यक्ति थे। हालाँकि, “किंगमेकर” की भूमिका अंततः थोल ने निभाई। थिरुमावलवन का वीसीके। पुराने गठबंधन को बनाए रखने के लिए मौजूदा द्रमुक के तीव्र दबाव के बावजूद, वीसीके नेतृत्व ने सामाजिक न्याय के प्रति साझा प्रतिबद्धता और कैबिनेट में “सत्ता-साझाकरण” व्यवस्था की इच्छा का हवाला देते हुए, विजय का समर्थन करने का विकल्प चुना। आईयूएमएल को शामिल किए जाने की खबर से नए मोर्चे की धर्मनिरपेक्ष साख और मजबूत हुई है, जिससे विजय को 234 सदस्यीय सदन में 119 से 120 विधायकों का आरामदायक समर्थन मिल गया है। 10 मई की समय सीमा के ख़िलाफ़ इतनी होड़ क्यों मची हुई थी? इन वार्ताओं के पीछे की तात्कालिकता केवल राजनीतिक नहीं बल्कि पूरी तरह से संवैधानिक थी। वर्तमान 16वीं तमिलनाडु विधान सभा का कार्यकाल 10 मई की आधी रात को समाप्त होने वाला है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 172(1) के तहत, एक विधानसभा अपनी पहली बैठक के लिए नियुक्त तिथि से ठीक पांच साल तक अस्तित्व में रहती है, जब तक कि जल्दी भंग न हो जाए। यदि रविवार रात बारह बजने से पहले नई सरकार शपथ नहीं लेती है या स्पष्ट बहुमत स्थापित नहीं होता है, तो राज्य संवैधानिक शून्य में आ जाएगा। ऐसे परिदृश्य में, राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर को अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करनी पड़ी होगी। इसका मतलब होगा कि केंद्र सरकार राज्यपाल के माध्यम से राज्य के प्रशासन का सीधा नियंत्रण ले लेगी, एक ऐसा कदम जो टीवीके के जनादेश के लिए एक बड़ा झटका होगा और शपथ ग्रहण में हफ्तों या महीनों की देरी हो सकती थी। शनिवार को सौदा हासिल करके, विजय ने केंद्र के अधिग्रहण को सफलतापूर्वक टाल दिया और सत्ता का लोकतांत्रिक परिवर्तन सुनिश्चित किया। शपथ ग्रहण के लिए राज्यपाल का अगला कदम क्या है? अब उम्मीद है कि राज्यपाल अर्लेकर विजय को सरकार बनाने के लिए औपचारिक निमंत्रण जारी करेंगे। पनियूर में टीवीके मुख्यालय पहले से ही उत्सव स्थल में बदल गया है क्योंकि कैडर इसे “पीपुल्स कोरोनेशन” कहते हैं। लगभग पांच दशकों में पहली बार, तमिलनाडु एक गठबंधन मॉडल द्वारा शासित होने जा रहा है, जहां प्रमुख पार्टी के पास अपने दम पर साधारण बहुमत नहीं है। यह बदलाव “समावेशी शासन” के एक नए युग का प्रतीक है जिसका विजय ने अपने अभियान के दौरान वादा किया था, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि मुख्यमंत्री के रूप में उनकी पहली चुनौती अपने पांच गठबंधन सहयोगियों की विविध और अक्सर मांग वाली आकांक्षाओं का प्रबंधन करना होगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया समय के विपरीत दौड़ जीतना: क्यों विजय को 10 मई से पहले तमिलनाडु की संख्या पर मुहर लगानी पड़ी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु चुनाव(टी)एआईएडीएमके(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)बीजेपी(टी)डीएमके(टी)एमके स्टालिन(टी)विजय(टी)टीवीके(टी)विधानसभा चुनाव(टी)कांग्रेस(टी)इंडिया ब्लॉक









