India Government Summons Meta Global Team Over Content Control Issues

2 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी ने 23 जुलाई को पेपर लीक को गंभीर विषय बताते हुए एक वीडियो जारी किया था। इसे मेटा ने रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक हटा दिया था। भारत सरकार और मेटा की ग्लोबल टीम के बीच 5 और 6 अगस्त को एक अहम बैठक होने जा रही है। केंद्र सरकार ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा के प्रतिनिधियों को समन भेजकर तलब किया है। केंद्र सरकार इस बैठक में चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटीरियल यानी CSAM पर लगाम लगाने में हुई चूक, फर्जी/सिंथेटिक एआई कंटेंट और बड़े नेताओं के वेरिफाइड अकाउंट्स पर गलत कार्रवाई जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने मेटा द्वारा अब तक दिए गए जवाबों को नाकाफी माना है। पीएम मोदी की पोस्ट हटने के बाद बढ़ी सख्ती यह बैठक हाल ही में फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो पोस्ट के कुछ समय के लिए हट जाने के विवाद के बाद तय की गई है। इस घटना के बाद सरकार ने मेटा के प्लेटफॉर्म्स की कंटेंट मॉडरेशन नीतियों, ऑटोमेटेड सिस्टम और बिग-टेक कंपनियों की जवाबदेही पर निगरानी सख्त कर दी है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक मेटा ने पीएम मोदी के वीडियो के हटने पर खेद व्यक्त किया है और वह इसके लिए औपचारिक माफी मांगने को भी तैयार है। दरअसल, पीएम मोदी ने 23 जुलाई को पेपर लीक को गंभीर विषय बताते हुए एक वीडियो जारी किया था। इसे मेटा ने रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक हटा दिया था। लेकिन बाद में उसे रिस्टोर कर दिया गया। मेटा ने अपनी सफाई में कहा कि दरअसल, यह एक टेक्निकल एरर था। इंस्टाग्राम विज्ञापनों में CSAM का मुद्दा भी उठा मेटा केवल VIP पोस्ट हटाने के मामले में ही नहीं, बल्कि सुरक्षा संबंधी अन्य गंभीर मामलों में भी जांच के दायरे में है। इससे पहले इंस्टाग्राम पर पेड एड्स यानी प्रायोजित विज्ञापनों के जरिए चाइल्ड CSAM के प्रचार-प्रसार को लेकर सरकार ने मेटा को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 5-6 अगस्त की बैठक में सरकार यह भी समीक्षा करेगी कि उस नोटिस के बाद कंपनी ने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। BBC रिपोर्ट- Meta पर यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट सस्ता मिल रहा BBC की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल मौजूद हैं। भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बेहद कम कीमत 99 रुपए में बेचा जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर दिखने वाले सभी विज्ञापन पहले Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी मिलने के बाद ही लाइव होते हैं। BBC ने जब ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की, तो करीब 24 घंटे बाद कंपनी ने जवाब दिया कि यह पोस्ट उसकी कम्यूनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है। इसके बाद BBC ने मेटा से इस मामले पर जवाब मांगा। तब कंपनी ने कहा कि उसने कई विज्ञापनों को हटा दिया है, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया है और उन URL को हटा देने का दावा किया। Meta ने यह भी माना कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता और रिव्यू प्रोसेस हर नियम उल्लंघन की पहचान नहीं कर पाती। भास्कर नॉलेज: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का बनाना, रखना अपराध सवाल 1: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर क्या कानून है? जवाब: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है। सवाल 2: IT Act की धारा 67B में क्या सजा है? जवाब: पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना। दोबारा अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना। सवाल 3: सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी है? जवाब: भारत के आईटी, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होता है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं। सवाल 4: अगर कोई ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें? जवाब: उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें। सवाल 5: सरकार इस मामले में क्या कर सकती है? जवाब: सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांग सकती है। प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। जांच एजेंसियों के जरिए आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। नियमों के उल्लंघन पर आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है। सवाल 6: क्या सिर्फ प्लेटफॉर्म ही जिम्मेदार होता है? जवाब: नहीं। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Prayagraj Law University Rejects PhD Applications Due To AI Content Usage

Hindi News Career Prayagraj Law University Rejects PhD Applications Due To AI Content Usage 22 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रयागराज स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ने पीएचडी की 5 सीटों के लिए आए 22 आवेदनों की जांच के बाद आठ आवेदन रद्द कर दिए। जांच में पता चला कि कई उम्मीदवारों की रिसर्च सिनॉप्सिस में एआई से तैयार मटेरियल का ज्यादा उपयोग किया गया था। विश्वविद्यालय ने यूजीसी के दिशानिर्देशों के अनुसार एआई इंडेक्स और सिमिलैरिटी की सीमा तय कर रखी थी। निर्धारित सीमा से ज्यादा पाए जाने पर आवेदन अयोग्य घोषित कर दिए गए। जांच में 36% आवेदन खारिज विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी सिनॉप्सिस की जांच टर्निटिन सॉफ्टवेयर के माध्यम से कराई। इस प्रक्रिया में एआई इंडेक्स और सिमिलैरिटी इंडेक्स दोनों की जांच की गई। कई आवेदनों में एआई से तैयार मटेरियल का स्तर 80% तक पाया गया, जबकि कुछ में सिमिलैरिटी इंडेक्स भी तय सीमा से काफी अधिक था। अब शेष 14 उम्मीदवारों को 12 अगस्त को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है, जहां उनकी विषय की समझ, रिसर्च की मौलिकता और रिसर्च कैपेसिटी चेक की जाएगी। 6 महीने के अंदर दोबारा जमा करना होगी रिसर्च रिसर्च में एआई के बढ़ते उपयोग और साहित्यिक चोरी को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार अगर किसी थीसिस में 10 से 40% तक प्लेजरिज्म मिलता है तो उसे करेक्शन के लिए वापस भेजा जाएगा और रिसर्चर छह महीने के अंदर सुधार कर दोबारा जमा कर सकेगा। एआई का उपयोग थीसिस में करना जरूरी यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि एआई का सीमित उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसका उल्लेख थीसिस में करना अनिवार्य होगा। सभी विश्वविद्यालयों को इन नियमों की जानकारी शोधार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। प्लेजरिज्म क्या है? पीएचडी रिसर्च में प्लेजरिज्म का अर्थ है किसी दूसरे व्यक्ति के विचार, रिसर्च, आर्टिकल, डाटा, फोटो या शब्दों को बिना उचित स्रोत दिए अपना बताकर प्रस्तुत करना। यह शैक्षणिक ईमानदारी का उल्लंघन है। इसके शोध की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। डिग्री रद्द हो सकती है। शोध-पत्र वापस (Retract) किए जा सकते हैं। यहां तक कि विश्वविद्यालय अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है। —————————————————— ये खबर भी पढ़ें रेलवे ग्रुप डी फिजिकल में 1,032 उम्मीदवार फेल:1000 मीटर की दौड़ सिलेक्शन की सबसे कठिन स्टेप, उमस भरे मौसम ने बढ़ाई परेशानी चिपचिपी गर्मी और उमस भरे मौसम में जहां ज्यादा देर चल पाना भी मुश्किल है। ऐसे मौसम में प्रयागराज के DSA ग्राउंड में 25 से 28 जुलाई तक रेलवे ग्रुप-डी PET परीक्षा की फिजिकल टेस्ट का आयोजन हुआ। इस टेस्ट के चलते 1,032 उम्मीदवार फेल हो गए। पांच दिनों तक चली फिजिकल टेस्ट उम्मीदवारों को भारी पड़ी। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Instagram Meta Notice: Child Abuse Content Blocked

नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेट को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर सरकार ने पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस भेजा। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार कंपनी को 7 दिन में इस नोटिस का जबाव देना होगा। ये नोटिस 4 जुलाई को जारी किया गया है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार IT मिनिस्ट्री ने इंस्टाग्राम को अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले या ऐसे कंटेंट तक पहुंच बनाने वाले सभी विज्ञापनों को तुरंत ब्लॉक करने और हटाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, बीबीसी ने अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में बताया था कि इंस्टाग्राम भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापन दिखा रहा है। इससे पहले सरकार ने 1 जुलाई को Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर नोटिस भेजा था। BBC रिपोर्ट- Meta पर यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट सस्ता मिल रहा BBC की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल मौजूद हैं। भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बेहद कम कीमत 99 रुपए में बेचा जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर दिखने वाले सभी विज्ञापन पहले Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी मिलने के बाद ही लाइव होते हैं। BBC ने जब ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की, तो करीब 24 घंटे बाद कंपनी ने जवाब दिया कि यह पोस्ट उसकी कम्यूनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है। इसके बाद BBC ने मेटा से इस मामले पर जवाब मांगा। तब कंपनी ने कहा कि उसने कई विज्ञापनों को हटा दिया है, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया है और उन URL को हटा देने का दावा किया। Meta ने यह भी माना कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता और रिव्यू प्रोसेस हर नियम उल्लंघन की पहचान नहीं कर पाती। भास्कर नॉलेज: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का बनाना, रखना अपराध सवाल: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर क्या कानून है? जवाब: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है। सवाल: IT Act की धारा 67B में क्या सजा है? जवाब: पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना। दोबारा अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना। सवाल: सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी है? जवाब: भारत के आईटी, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होता है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं। सवाल: अगर कोई ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें? जवाब: उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें। सवाल: सरकार इस मामले में क्या कर सकती है? जवाब: सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांग सकती है। प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। जांच एजेंसियों के जरिए आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। नियमों के उल्लंघन पर आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है। सवाल: क्या सिर्फ प्लेटफॉर्म ही जिम्मेदार होता है? जवाब: नहीं। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Instagram Meta Notice: Child Abuse Content Blocked

नई दिल्ली35 मिनट पहले कॉपी लिंक इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेट को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर सरकार ने पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस भेजा। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार कंपनी को 7 दिन में इस नोटिस का जबाव देना होगा। ये नोटिस 4 जुलाई को जारी किया गया है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार IT मिनिस्ट्री ने इंस्टाग्राम को अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले या ऐसे कंटेंट तक पहुंच बनाने वाले सभी विज्ञापनों को तुरंत ब्लॉक करने और हटाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, बीबीसी ने अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में बताया था कि इंस्टाग्राम भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापन दिखा रहा है। इससे पहले सरकार ने 1 जुलाई को Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर नोटिस भेजा था। BBC रिपोर्ट- Meta पर यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट सस्ता मिल रहा BBC की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल मौजूद हैं। भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बेहद कम कीमत 99 रुपए में बेचा जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर दिखने वाले सभी विज्ञापन पहले Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी मिलने के बाद ही लाइव होते हैं। BBC ने जब ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की, तो करीब 24 घंटे बाद कंपनी ने जवाब दिया कि यह पोस्ट उसकी कम्यूनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है। इसके बाद BBC ने मेटा से इस मामले पर जवाब मांगा। तब कंपनी ने कहा कि उसने कई विज्ञापनों को हटा दिया है, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया है और उन URL को हटा देने का दावा किया। Meta ने यह भी माना कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता और रिव्यू प्रोसेस हर नियम उल्लंघन की पहचान नहीं कर पाती। भास्कर नॉलेज: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का बनाना, रखना अपराध सवाल: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर क्या कानून है? जवाब: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है। सवाल: IT Act की धारा 67B में क्या सजा है? जवाब: पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना। दोबारा अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना। सवाल: सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी है? जवाब: भारत के आईटी, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होता है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं। सवाल: अगर कोई ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें? जवाब: उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें। सवाल: सरकार इस मामले में क्या कर सकती है? जवाब: सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांग सकती है। प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। जांच एजेंसियों के जरिए आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। नियमों के उल्लंघन पर आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है। सवाल: क्या सिर्फ प्लेटफॉर्म ही जिम्मेदार होता है? जवाब: नहीं। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Telegram Pirated Content Channels & Groups Removal

नई दिल्ली16 मिनट पहले कॉपी लिंक अब आप टेलीग्राम एप पर फ्री में मिलने वाली पायरेटेड फिल्में और वेब सीरीज डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। केंद्र सरकार ने मैसेजिंग एप से फिल्मों और OTT कंटेंट के पायरेसी वर्जन उपलब्ध कराने वाले चैनल्स और ग्रुप्स को हटाने को कहा है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज नोटिस जारी कर कंपनी से कहा कि वह अपने प्लेटफॉर्म से पाइरेटेड फिल्मों और वेब सीरीज के सर्कुलेशन को तुरंत रोके और अगले 15 दिन में इस पर लिए गए एक्शन की रिपोर्ट सौंपे। एप को 3 दिन में सरकार का दूसरा नोटिस मिला है। प्लेटफॉर्म लेवल पर कार्रवाई करने का आदेश सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने साफ कर दिया है कि टेलीग्राम अब सिर्फ शिकायतों का इंतजार नहीं कर सकता। सिर्फ एक-एक करके पाइरेसी करने वाले चैनलों को हटाने के बजाय प्लेटफॉर्म लेवल पर पुख्ता सिस्टम बनाना होगा। सरकार का मानना है कि यह सुस्त रवैया इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 और IT रूल्स, 2021 के तहत मध्यस्थों (इंटरमीडियरीज) पर लागू होने वाली ‘ड्यू डिलिजेंस’ की शर्तों को पूरा नहीं करता है। सरकार ने कंपनी को बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले चैनलों, ग्रुप्स, बॉट्स, अकाउंट्स, एडमिनिस्ट्रेटर और उनसे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ एक्शन लेने का निर्देश दिया है। 3000 से ज्यादा चैनल पहले भी ब्लॉक हो चुके हैं सरकार इससे पहले भी पाइरेसी कंटेंट फैलाने वाले 3000 से ज्यादा टेलीग्राम चैनलों पर कार्रवाई कर चुकी है। सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर आगे भी ऐसा कंटेंट उपलब्ध रहता है या कंपनी की तरफ से अधूरा जवाब मिलता है, तो कानूनी दायरे के तहत और सख्त कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में बताया गया कि कॉपीराइट का उल्लंघन सिर्फ एक सिविल विवाद नहीं है। इसके लिए कॉपीराइट एक्ट 1957 और सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 के तहत क्रिमिनल लायबिलिटी भी तय हो सकती है, जिससे जेल तक हो सकती है। जून में लीक पेपर्स के कारण लगा था बैन इससे पहले जून के महीने में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की सिफारिश पर सरकार ने पेपर लीक मामले में टेलीग्राम पर 16 जून से 22 जून तक प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा, 21 जून को हुई NEET 2026 की दोबारा परीक्षा को देखते हुए सरकार ने टेलीग्राम को 30 जून तक अपना ‘मैसेज-एडिटिंग’ फीचर बंद रखने का भी आदेश दिया था। ——————– ये खबर भी पढ़ें… यूजरनेम फीचर पर वॉट्सएप के बाद टेलीग्राम को नोटिस: सरकार ने पूछा- इससे साइबर अपराधों का खतरा, रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने वॉट्सएप के बाद गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा है। सरकार ने पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सरकार ने टेलीग्राम से पूछा कि उसे यूजरनेम फीचर जारी रखने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए। सरकार ने बुधवार को मेटा और वॉट्सएप के यूजरनेम फीचर पर नोटिस जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Telegram Pirated Content Channels & Groups Removal

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक अब आप टेलीग्राम एप पर फ्री में मिलने वाली पायरेटेड फिल्में और वेब सीरीज डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। केंद्र सरकार ने मैसेजिंग एप पर फिल्मों और OTT कंटेंट के पायरेसी वर्जन उपलब्ध कराने वाले चैनल्स और ग्रुप्स को हटाने को कहा है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने शनिवार, 4 जुलाई को टेलीग्राम को एक आधिकारिक नोटिस जारी किया है। सरकार ने कंपनी से कहा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म से पाइरेटेड फिल्मों और वेब सीरीज के सर्कुलेशन को तुरंत रोके और अगले 15 दिन में इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपे। सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने साफ कर दिया है कि टेलीग्राम अब सिर्फ शिकायतों का इंतजार नहीं कर सकता। उसे अपने स्तर पर पायरेसी रोकने के लिए एक मजबूत सिस्टम बनाना होगा। एप को 3 दिन में सरकार का दूसरा नोटिस मिला है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
66 Hard disk Stolen from Zoya Akhtar’s Office By Production Employees, worth crores Footages and sensitive content, one accused arrested

Hindi News Entertainment Bollywood 66 Hard Disk Stolen From Zoya Akhtar’s Office By Production Employees, Worth Crores Footages And Sensitive Content, One Accused Arrested 7 मिनट पहले कॉपी लिंक जिंदगी न मिलेगी दोबारा, गली बॉय और दिल धड़कने दो जैसी कई बेहतरीन फिल्में बनाने वालीं डायरेक्टर और फरहान अख्तर की बहन जोया अख्तर के ऑफिस में चोरी की बड़ी घटना हुई है। उनके ऑफिस से 66 हार्ड डिस्क चोरी हुए हैं, जिनमें अपकमिंग कई फिल्मों और वेब सीरीज के फुटेज थे। जोया अख्तर की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल एक आरोपी गिरफ्तार हो चुका है, जबकि एक अब भी फरार है। इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, घटना 21 मई की है। जोया अख्तर और रीमा कागती के प्रोडक्शन हाउस टाइगर बेबी फिल्म्स के बांद्रा वेस्ट स्थित कंपनी ऑफिस के कुछ एंप्लॉय्ज, कुछ फुटेजेस देखने के लिए हार्ड डिस्क ढूंढ रहे थे। काफी तलाश के बाद भी हार्ड डिस्क नहीं मिली। स्टोरेज कैबिनेट की जांच करने पर सामने आया कि कई बॉक्स खाली हैं और कई हार्ड डिस्क टूटी हुई हैं। बाद में सामने आया कि 66 हार्ड डिस्क वहां हैं ही नहीं। चोरी की पुष्टि होने के बाद कंपनी की एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट और एचआर मेहजबीन मुश्ताक शेख ने बांद्रा पुलिस स्टेशन में कंपनी ने ही दो कर्मचारियों मोहम्मद शाहिद अजीम खान और रितेश के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। करोड़ों का डाटा 15-20 हजार में बेचा मोहम्मद शाहिद ने पुलिस पूछताछ में चोरी के आरोप कबूल कर लिए हैं। उसके बयान के अनुसार, 5 महीने पहले उसने 24 हार्ड डिस्क चुराईं और बोरिवली निवासी रितेश को 15-20 हजार रुपए प्रति हार्ड डिस्क बेचीं। रितेश फिलहाल फरार है, पुलिस अन्य हार्ड डिस्क की तलाश में है। टाइगर बेबी फिल्म्स प्रोडक्शन, जोया अख्तर और रीमा कागती ने मिलकर शुरू किया था। पुलिस शिकायत के अनुसार, प्रोडक्शन हाउस के ऑफिस में कुल 119 हार्ड डिस्क थीं, इनमें से 66 गायब हैं, जिनमें 16-72 टीबी की कैपेसिटी वाली हाई स्टोरेज डिवाइज शामिल हैं। इन हार्ड डिस्क में प्रोडक्शन हाउस की अपकमिंग फिल्मों के फुटेज, एडिटिंग कंटेंट, पोस्ट प्रोडक्शन फाइल्स, एड्स की फुटेजेस हैं। अगर ये फुटेज लीग होती हैं या डिलीट की जाती हैं, तो प्रोडक्शन हाउस को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, चोरी हुईं हार्ड डिस्क में प्रोडक्शन की फिल्मों और सीरीज मेड इन हेवन, घोस्ट स्टोरीज, नायका और गांधी मनी का कंटेंट भी था। इनके अलावा कुछ डिस्क में सेंसिटिव रॉ कंटेंट था। जोया अख्तर के बारे में- जोया अख्तर, मशहूर लिरिसिस्ट जावेद अख्तर और पहली पत्नी हनी ईरानी की बेटी हैं। एक्टर फरहान अख्तर उनके भाई और फराह खान उनकी कजिन हैं। जोया अख्तर ने दिल चाहता है और लक्ष्य जैसी फिल्मों में बतौर कास्टिंग डायरेक्टर और एग्जीक्यूटिव काम करने के बाद 2009 की फिल्म लक बाय चांस से डायेक्टोरियल डेब्यू किया था। ये फिल्म हिट रही, जिसके लिए जोया को बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। आगे उन्होंने जिंदगी न मिलेगी दोबारा, बॉम्बे टॉकीज (एक पार्ट), दिल धड़कने दो, गली बॉय जैसी कई बेहतरीन फिल्में डायरेक्ट की हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
MP Four Arrested Jaipur | Vasundhara Raje AI Fake Content Case

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से फर्जी लेटर और AI से बनाए वीडियो को शेयर करने के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। डीसीपी साउथ राजश्री राज ने बताया- ज्योति नगर थाना पुलिस ने निखिल, बिलाल खान, इनाम अहमद को मध्यप्रदेश के भोपाल स . AI से बना फर्जी लेटर-वीडियो जांच में सामने आया कि पूर्व सीएम के नाम से संघ प्रमुख भागवत को संबोधित एक फर्जी लेटर सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था। इस लेटर को AI तकनीक की मदद से वीडियो के रूप में भी प्रसारित किया गया। कार्रवाई पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल के निर्देश पर की गई। पुलिस अब चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर पुलिस कस्टडी (PC) की मांग करेगी, ताकि उनसे पूछताछ कर पूरे मामले का खुलासा किया जा सके। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क और इस फर्जी कंटेंट के पीछे शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। MP कनेक्शन और सियासी बयानबाजी इससे पहले मामले की जांच में मध्यप्रदेश कनेक्शन सामने आने के बाद भोपाल पुलिस ने कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े चार कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। इस कार्रवाई पर हरिश चौधरी और सांसद विवेक टांक ने सवाल उठाए थे। हरीश चौधरी ने X पर पोस्ट करते हुए कहा था कि कांग्रेस आईटी सेल के कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से हिरासत में रखना निंदनीय है। यह कानून व लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने इसे असहमति की आवाज दबाने और सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया। यह खबर भी पढ़ें… वसुंधरा के फर्जी लेटर मामले में 3 कांग्रेसी हिरासत में:भोपाल पुलिस ने पकड़ा, प्रभारी हरीश चौधरी बोले- रिहा नहीं किया तो कोर्ट जाएंगे पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का संघ प्रमुख मोहन भागवत के नाम से सोशल मीडिया पर आए फर्जी लेटर का मामला अब मध्यप्रदेश से जुड़ गया है। लेटर को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने पर MP कांग्रेस आईटी सेल के 3 कार्यकर्ताओं को भोपाल पुलिस ने हिरासत में लिया है। एमपी के पार्टी प्रभारी हरीश चौधरी और सांसद विवेक तन्खा ने हिरासत पर सवाल उठाए हैं। (पूरी खबर पढ़ें) राजे ने लिखा था- सांच को आंच की जरूरत नहीं पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के नाम से सोशल मीडिया पर 18 अप्रैल को फर्जी लेटर सामने आया था। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को संबोधित इस फर्जी लेटर में महिला आरक्षण बिल पर बीजेपी की लाइन से हटकर बातें लिखी थीं। पूरी खबर पढ़िए…
Youtube india unprofessional channels and wrong advice content spread

नई दिल्ली37 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में लगभग 2.5 करोड़ एक्टिव यूट्यूब चैनल्स में से महज 30 लाख ही प्रोफेशनल हैं, बाकी करोड़ों चैनलों में से कई बिना नियमन या कमाई के गलत सलाह या कॉपी-पेस्ट वाला कंटेंट फैला रहे हैं। देश में यूट्यूब के हर महीने करीब 50 करोड़ एक्टिव यूजर्स है। अब यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक डॉक्टर, मैकेनिक, जिम ट्रेनर और कानूनी सलाहकार तक बन चुका है। यदि इन चैनलों पर बताई गई किसी सलाह से किसी को नुकसान हो जाए तो न्याय पाने का रास्ता इतना पेचीदा है कि अपराधी साफ बच निकलता है। इन्फ्लुएंसर ट्रस्ट रिपोर्ट के मुताबिक देश में हर 10 में से 7 लोग यूट्यूब की सलाह पर भरोसा करते हैं, जिनमें से 60% उसे बिना क्रॉस-चेक किए सही मान लेते हैं। 14 फरवरी 2005 को यूट्यूब लॉन्च हुआ था। अक्टूबर 2006 में इसे गूगल ने खरीद लिया था। ऐसे केस जब यूट्यूबर्स की गलत सलाह भारी पड़ी केस-1 : तमिलनाडु के कृष्णगिरी जिले में एक उच्च शिक्षित दंपती यूट्यूब पर ‘होम डिलीवरी’ के वीडियो देखता था। प्रसव के दौरान पति यूट्यूब वीडियो देखकर निर्देश फॉलो कर रहा था। गंभीर रक्तस्राव से स्थिति बिगड़ी, महिला की मौत हो गई। फरवरी 2026 में मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा- ‘कुछ यूट्यूब चैनल केवल ‘व्यूज’ और ‘सब्सक्राइबर्स’ बढ़ाने के लिए कुछ भी सामग्री परोस रहे हैं। ये समाज के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।’ केस-2 : मो. नासिरुद्दीन अंसारी यूट्यूब पर ‘बाप ऑफ चार्ट’ नाम से चैनल चलाते थे। वे इस प्लेटफॉर्म्स से लोगों को शेयर बाजार में निवेश, खासकर ‘ऑप्शंस ट्रेडिंग’ की सलाह देते थे। सेबी की जांच में सामने आया कि अंसारी खुद शेयर बाजार में 2.89 करोड़ रुपए के घाटे में थे। सेबी ने अंसारी को निवेशकों से अवैध तरीके से जुटाए गए 17.2 करोड़ रुपए वापस करने का आदेश दिया। लेकिन इसमें भी यूट्यूब की कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई। केस-3 : साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े अजीत मोहन (फेसबुक) बनाम दिल्ली विधानसभा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को केवल ‘बिचौलिया’ नहीं माना जा सकता। उनकी एल्गोरिदम तय करती है कि कौन सी खबर फैलेगी, इसलिए दंगों के दौरान उनकी भूमिका की जांच की जा सकती है। एक्सपर्ट बोले- यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करें डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत बुक के लेखक और वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करना चाहिए, तभी इन पर लगाम संभव है। यूट्यूब/फेसबुक जैसी कंपनियों का तर्क है ‘हम सिर्फ प्लेटफॉर्म दे रहे हैं, कंटेंट तो लोग डाल रहे हैं।’ इंटरमीडिएरी की वजह से उन्हें ‘सेफ हार्बर’ (धारा-79) की सुरक्षा मिलती है यानी यूजर के गलत वीडियो के लिए यूट्यूब को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। गुप्ता कहते हैं कि यह गलत है क्योंकि यूट्यूब बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। उसे बिचौलिया नहीं, बल्कि मीडिया कंपनी मानना चाहिए। कंपनी कानून व आयकर कानून के मुताबिक, देश में इनकी व्यापारिक उपस्थिति के आधार पर इन पर आयकर लगाने के साथ ही देश का कानून लागू होना चाहिए। डेटा पर जीएसटी: ये कंपनियां भारतीयों के डेटा का इस्तेमाल करके विज्ञापन से मोटा पैसा कमाती हैं। इस डेटा के कारोबार पर जीएसटी लगना चाहिए। यूजर बेस पर टैक्स: टैक्स सिर्फ विज्ञापन आय पर नहीं, ग्लोबल यूजर्स की संख्या के अनुपात में लगाया जाना चाहिए। शिकायत निवारण अफसर: आईटी नियमों के मुताबिक, इन कंपनियों की शिकायत व नामांकित अधिकारियों की डिटेल सार्वजनिक होना चाहिए। ताकि पुलिस और कोर्ट को साइबर क्राइम के समाधान में इनसे आवश्यक मदद मिल सके। यूट्यूब के लिए नियम, जिनमें एक्शन होता है… उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 19: भ्रामक विज्ञापन या गलत दावे पर 10-50 लाख तक का जुर्माना। IT एक्ट की धारा 66D व 69A: गलत जानकारी फैलाने पर वीडियो ब्लॉक व जेल हो सकती है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) : गलत सलाह से जान को खतरा हो तो धारा 318 में एफआईआर। खामियां, जो बचा लेती हैं… डिस्क्लेमर: वीडियो में शैक्षिक उद्देश्य लिखने से ये जानकारी बन जाती है, जवाबदेही खत्म। विशेषज्ञता की परिभाषा: कानून में इन्फ्लुएंसर के लिए कोई न्यूनतम योग्यता तय नहीं। धीमी न्यायिक प्रक्रिया: डिजिटल नुकसान के लिए फास्ट ट्रैक कानून नहीं है। छोटे आर्थिक या शारीरिक नुकसान के लिए पीड़ित कोर्ट नहीं जाता। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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नई दिल्ली7 घंटे पहले कॉपी लिंक देश में लगभग 2.5 करोड़ एक्टिव यूट्यूब चैनल्स में से महज 30 लाख ही प्रोफेशनल हैं, बाकी करोड़ों चैनलों में से कई बिना नियमन या कमाई के गलत सलाह या कॉपी-पेस्ट वाला कंटेंट फैला रहे हैं। इन्फ्लुएंसर ट्रस्ट रिपोर्ट के मुताबिक देश में यूट्यूब के हर महीने करीब 50 करोड़ एक्टिव यूजर्स है। अब यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक डॉक्टर, मैकेनिक, जिम ट्रेनर और कानूनी सलाहकार तक बन चुका है। यदि इन चैनलों पर बताई गई किसी सलाह से किसी को नुकसान हो जाए तो न्याय पाने का रास्ता इतना पेचीदा है कि अपराधी साफ बच निकलता है। देश में हर 10 में से 7 लोग यूट्यूब की सलाह पर भरोसा करते हैं, जिनमें से 60% उसे बिना क्रॉस-चेक किए सही मान लेते हैं। 14 फरवरी 2005 को यूट्यूब लॉन्च हुआ था। अक्टूबर 2006 में इसे गूगल ने खरीद लिया था। ऐसे केस जब यूट्यूबर्स की गलत सलाह भारी पड़ी केस-1 : तमिलनाडु के कृष्णगिरी जिले में एक उच्च शिक्षित दंपती यूट्यूब पर ‘होम डिलीवरी’ के वीडियो देखता था। प्रसव के दौरान पति यूट्यूब वीडियो देखकर निर्देश फॉलो कर रहा था। गंभीर रक्तस्राव से स्थिति बिगड़ी, महिला की मौत हो गई। फरवरी 2026 में मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले में कहा- ‘कुछ यूट्यूब चैनल केवल ‘व्यूज’ और ‘सब्सक्राइबर्स’ बढ़ाने के लिए कुछ भी सामग्री परोस रहे हैं। ये समाज के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।’ केस-2 : मो. नासिरुद्दीन अंसारी यूट्यूब पर ‘बाप ऑफ चार्ट’ नाम से चैनल चलाते थे। वे इस प्लेटफॉर्म्स से लोगों को शेयर बाजार में निवेश, खासकर ‘ऑप्शंस ट्रेडिंग’ की सलाह देते थे। सेबी की जांच में सामने आया कि अंसारी खुद शेयर बाजार में 2.89 करोड़ रुपए के घाटे में थे। सेबी ने अंसारी को निवेशकों से अवैध तरीके से जुटाए गए 17.2 करोड़ रुपए वापस करने का आदेश दिया। लेकिन इसमें भी यूट्यूब की कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई। केस-3 : साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े अजीत मोहन (फेसबुक) बनाम दिल्ली विधानसभा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को केवल ‘बिचौलिया’ नहीं माना जा सकता। उनकी एल्गोरिदम तय करती है कि कौन सी खबर फैलेगी, इसलिए दंगों के दौरान उनकी भूमिका की जांच की जा सकती है। एक्सपर्ट बोले- यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करें डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत बुक के लेखक और वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर करना चाहिए, तभी इन पर लगाम संभव है। यूट्यूब/फेसबुक जैसी कंपनियों का तर्क है ‘हम सिर्फ प्लेटफॉर्म दे रहे हैं, कंटेंट तो लोग डाल रहे हैं।’ इंटरमीडिएरी की वजह से उन्हें ‘सेफ हार्बर’ (धारा-79) की सुरक्षा मिलती है यानी यूजर के गलत वीडियो के लिए यूट्यूब को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। गुप्ता कहते हैं कि यह गलत है क्योंकि यूट्यूब बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल रहा है। उसे बिचौलिया नहीं, बल्कि मीडिया कंपनी मानना चाहिए। कंपनी कानून व आयकर कानून के मुताबिक, देश में इनकी व्यापारिक उपस्थिति के आधार पर इन पर आयकर लगाने के साथ ही देश का कानून लागू होना चाहिए। डेटा पर जीएसटी: ये कंपनियां भारतीयों के डेटा का इस्तेमाल करके विज्ञापन से मोटा पैसा कमाती हैं। इस डेटा के कारोबार पर जीएसटी लगना चाहिए। यूजर बेस पर टैक्स: टैक्स सिर्फ विज्ञापन आय पर नहीं, ग्लोबल यूजर्स की संख्या के अनुपात में लगाया जाना चाहिए। शिकायत निवारण अफसर: आईटी नियमों के मुताबिक, इन कंपनियों की शिकायत व नामांकित अधिकारियों की डिटेल सार्वजनिक होना चाहिए। ताकि पुलिस और कोर्ट को साइबर क्राइम के समाधान में इनसे आवश्यक मदद मिल सके। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








