RSS OTT Content Censorship Panel

16 मिनट पहले कॉपी लिंक OTT प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले कंटेंट के सेंसरशिप के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने एक पैनल बनाया है। यह पैनल तय करेगा कि OTT पर दिखाया जाने वाला कंटेंट अश्लील, संस्कृति के खिलाफ, एंटी नेशनल या बच्चों पर गलत प्रभाव डालने वाला नहीं है। RSS का मानना है कि OTT पर कुछ ऐसा कंटेंट दिखाया जा रहा है, जिसका बच्चों और युवाओं पर गलत असर पड़ सकता है। संघ इसे भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से भी जोड़कर देखता है। इसी वजह से OTT कंटेंट पर ज्यादा सख्त नियम बनाने की जरूरत पर चर्चा हो रही है। RSS प्रमुख मोहन भागवत पहले भी OTT और डिजिटल कंटेंट को लेकर चिंता जता चुके हैं। क्या OTT के लिए सेंसर बोर्ड बनेगा? फिलहाल ऐसा कोई सेंसर बोर्ड नहीं बना है। RSS ने सिर्फ एक पैनल बनाया है, जो इस मुद्दे पर सुझाव देगा। पैनल की सिफारिशों के बाद ही यह तय होगा कि आगे क्या व्यवस्था हो सकती है। संघ से जुड़े लोगों ने OTT के लिए फिल्मों के सेंसर बोर्ड जैसी व्यवस्था बनाने को कहा है। अगर ऐसा होता है तो OTT पर रिलीज होने वाले कंटेंट की पहले से जांच और सर्टिफिकेशन की व्यवस्था की जा सकती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन ने इस पर कहा है, OTT पर सेंसरशिप जरूर होना चाहिए। मैं मोहन भागवत साहब से बिल्कुल सहमत हूं। सिर्फ सिनेमा ही क्यों, फिल्में चाहें ओटीटी पर कंज्यूम हो या कहीं ओर, सेंसर बहुत जरूरी है। भारत बड़ा देश है, कब, कहां, कैसे किसी के सेंटिमेंट्स हर्ट हों हमें नहीं पता। पहले भी कई विवाद हुए हैं। भूतनाथ डायरेक्टर विवेक शर्मा कहते हैं, सबको लगा था कि जिन लोगों को थिएटर में क्रिएटिव फ्रीडम नहीं मिल रही है OTT पर उन्हें मदद मिलेगी, लेकिन उल्टा हुआ। लोगों ने क्रिएटिव फ्रीडम का मतलब अश्लीलता बना दिया। फिल्मों से कैसे अलग है OTT? सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों को CBFC यानी सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। इसके बिना फिल्म को थिएटर में रिलीज नहीं किया जा सकता। वहीं OTT पर रिलीज होने वाली फिल्मों और वेब सीरीज को CBFC से सर्टिफिकेट नहीं लेना पड़ता। कई OTT प्लेटफॉर्म्स किए जा चुके हैं बैन लंबे समय से OTT पर आने वाले कंटेंट की कई शिकायतें मिली हैं। जिसके बाद OTT से जुड़े सख्त नियम भी बनाए जा रहे हैं। पिछले दो सालों में 50 OTT प्लेटफॉर्म को हटाया जा चुका है। केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने इस साल की शुरुआत में 5 ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (OTT) को ब्लॉक किया है। जिनमें मूडएक्सवीआईपी, कोयल प्लेप्रो, डिजी मूवीप्लेक्स, फील और जुगनू शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म पर अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाया जा रहा था। यह कंटेंट आईटी एक्ट 2000, आईटी नियम 2021, आईपीसी की धारा 292 और महिलाओं को गलत तरीक से दिखाने से जुड़े कानूनों का उल्लंघन करता पाया गया। पिछले साल जुलाई में Ullu-ALT समेत 25 OTT प्लेटफॉर्म बैन किए गए थे। मार्च 2024 में सरकार ने अश्लील कंटेंट को लेकर 18 OTT प्लेटफॉर्म पर बैन लगाया था। साथ ही 19 वेबसाइट्स, 10 एप्स और 57 सोशल मीडिया हैंडल्स भी ब्लॉक कर दिए थे। देश में कब और कैसे हुई OTT की शुरुआत? देश में OTT की शुरुआत 2008 में हुई थी। पहला डिपेंडेंट ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘बिगफ्लिक्स’ था। इसे रिलायंस एंटरटेनमेंट ने साल 2008 में रिलीज किया था। इसके बाद 2010 में डिजिवाइव ने ‘नेक्सजीटीवी’ नाम से इंडिया का पहला ओटीटी मोबाइल ऐप लॉन्च किया। आईपीएल की लाइव स्ट्रीमिंग ने बढ़ाई लोकप्रियता 2013 और 2014 में नेक्सजीटीवी, आईपीएल मैचों की लाइव स्ट्रीमिंग करने वाला पहला ऐप बना। इसके बाद 2015 में आईपीएल की लाइव स्ट्रीमिंग ने ही हॉटस्टार (जो अब डिज्नी+हॉटस्टार है) को देश का सबसे लोकप्रिय ओटीटी प्लेटफॉर्म बनाया। 2013 में टीवी शोज भी ओटीटी पर आए 2013 में डिट्टो टीवी और सोनी लिव जैसे ऐप भी लॉन्च हुए जिन्होंने स्टार, सोनी, वायकॉम और जी जैसे चैनल्स पर प्रसारित किए जाने वाले शोज भी ओटीटी पर स्ट्रीम करने शुरू कर दिए। इसके बाद दर्शकों ने बड़े पैमाने पर इन ओटीटी ऐप्स को डाउनलोड करके मनमर्जी से किसी भी वक्त अपने फेवरेट शोज देखना शुरू कर दिए। कोरोना काल में बढ़ी लोकप्रियता 2020 में कोराेना काल के शुरुआती तीन महीने में भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को 2019 के अंतिम तीन महीनों के मुकाबले 13% ज्यादा व्यूज मिले। पहले लॉकडाउन के दौरान जी-5 के सब्सक्राइबर सबसे ज्यादा 80% बढ़े, वहीं अमेजन प्राइम को 67% नए यूजर्स ने सब्सक्राइब किया। इन्वेस्ट इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना काल में अमेजन प्राइम, नेटफ्लिक्स और डिज्नी प्लस हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेफॉर्म्स पर यूजर्स का टाइम स्पेंड 82.63% बढ़ा। इसी दौरान यू-ट्यूब जैसे फ्री एक्सेस प्लेटफॉर्म पर देश के लोगों ने 20.5% ज्यादा समय खर्च किया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Ukraine War News | Adult Content Tax to Fund Drone Procurement

कीव1 मिनट पहले कॉपी लिंक रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन सरकार देश में चल रहे एडल्ट कंटेंट के कारोबार को कानूनी दायरे में लाने और उस पर टैक्स लगाने पर विचार कर रही है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक, इससे सरकार को हर साल करीब 2.5 करोड़ डॉलर यानी करीब 236 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। यूक्रेन के एक सांसद के मुताबिक, इतनी रकम से करीब 30 हजार ड्रोन खरीदे जा सकते हैं। टैक्स के साथ भ्रष्टाचार रोकने का भी दावा यूक्रेन में पोर्नोग्राफी को पूरी तरह कानूनी दर्जा नहीं मिला है। इसे कानूनी दर्जा देने का मकसद सिर्फ सरकार की कमाई बढ़ाना नहीं है बल्कि भ्रष्टाचार के रास्ते भी बंद करना है। प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि पुलिस को एडल्ट कंटेंट से जुड़े मामलों के बजाय गंभीर अपराधों पर ज्यादा ध्यान देने का मौका मिलेगा। फिलहाल इस कारोबार का बड़ा हिस्सा कानूनी कार्रवाई के डर से छिपकर चल रहा है। यूक्रेन की संसद ने जुलाई में इस बिल को पहली रीडिंग में मंजूरी दे दी थी। अब इसे दूसरी रीडिंग के लिए पेश किया जाना है। पहली रीडिंग में बिल के पक्ष में 231 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 8 ने विरोध किया। 3 सांसद मतदान से दूर रहे। सांसद यारोस्लाव झेलेजनियाक वित्त, टैक्स और बजट से जुड़े मामलों की समिति के चीफ हैं और इस बिल के सह लेखक हैं। कारोबार बड़ा, लेकिन कानून आड़े आ रहा यूक्रेन में एडल्ट कंटेंट का ऑनलाइन कारोबार तेजी से बढ़ा है। खासकर ओनली फैन्स जैसे प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में यूक्रेनी क्रिएटर्स काम कर रहे हैं। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक, 2023 में करीब 8 हजार यूक्रेनियों ने ओनली फैन्स से 13.1 करोड़ डॉलर (1237 करोड़ भारतीय रुपए) से ज्यादा कमाए थे। यह सिर्फ ओनली फैन्स की कमाई है, पूरे एडल्ट-कंटेंट कारोबार का आंकड़ा नहीं है। दिक्कत ये है कि यूक्रेन के मौजूदा कानून में पोर्न कंटेंट बनाना और बांटना गैरकानूनी है। ऐसे में क्रिएटर्स के लिए अपनी कमाई पर टैक्स देना भी आसान नहीं है। अगर वे अपनी कमाई सरकार को बताते हैं, तो उनकी पहचान सामने आ सकती है और पोर्न बनाने के मामले में उन पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। खबर अपडेट हो रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Ukraine War News | Adult Content Tax to Fund Drone Procurement

कीव39 मिनट पहले कॉपी लिंक रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन सरकार देश में चल रहे एडल्ट कंटेंट के कारोबार को कानूनी दायरे में लाने और उस पर टैक्स लगाने पर विचार कर रही है। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक, इससे सरकार को हर साल करीब 2.5 करोड़ डॉलर यानी करीब 236 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है। यूक्रेन के एक सांसद के मुताबिक, इतनी रकम से करीब 30 हजार ड्रोन खरीदे जा सकते हैं। टैक्स के साथ भ्रष्टाचार रोकने का भी दावा यूक्रेन में पोर्नोग्राफी को पूरी तरह कानूनी दर्जा नहीं मिला है। इसे कानूनी दर्जा देने का मकसद सिर्फ सरकार की कमाई बढ़ाना नहीं है बल्कि भ्रष्टाचार के रास्ते भी बंद करना है। प्रस्ताव के समर्थकों का तर्क है कि पुलिस को एडल्ट कंटेंट से जुड़े मामलों के बजाय गंभीर अपराधों पर ज्यादा ध्यान देने का मौका मिलेगा। फिलहाल इस कारोबार का बड़ा हिस्सा कानूनी कार्रवाई के डर से छिपकर चल रहा है। यूक्रेन की संसद ने जुलाई में इस बिल को पहली रीडिंग में मंजूरी दे दी थी। अब इसे दूसरी रीडिंग के लिए पेश किया जाना है। पहली रीडिंग में बिल के पक्ष में 231 सांसदों ने वोट दिया, जबकि 8 ने विरोध किया। 3 सांसद मतदान से दूर रहे। सांसद यारोस्लाव झेलेजनियाक वित्त, टैक्स और बजट से जुड़े मामलों की समिति के चीफ हैं और इस बिल के सह लेखक हैं। कारोबार बड़ा, लेकिन कानून आड़े आ रहा यूक्रेन में एडल्ट कंटेंट का ऑनलाइन कारोबार तेजी से बढ़ा है। खासकर ओनली फैन्स जैसे प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में यूक्रेनी क्रिएटर्स काम कर रहे हैं। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के मुताबिक, 2023 में करीब 8 हजार यूक्रेनियों ने ओनली फैन्स से 13.1 करोड़ डॉलर (1237 करोड़ भारतीय रुपए) से ज्यादा कमाए थे। यह सिर्फ ओनली फैन्स की कमाई है, पूरे एडल्ट-कंटेंट कारोबार का आंकड़ा नहीं है। दिक्कत ये है कि यूक्रेन के मौजूदा कानून में पोर्न कंटेंट बनाना और बांटना गैरकानूनी है। ऐसे में क्रिएटर्स के लिए अपनी कमाई पर टैक्स देना भी आसान नहीं है। अगर वे अपनी कमाई सरकार को बताते हैं, तो उनकी पहचान सामने आ सकती है और पोर्न बनाने के मामले में उन पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। ओनली फैन्स की शुरुआत सितंबर 2016 में हुई थी। यह सब्सक्रिप्शन बेस्ड प्लेटफॉर्म है, जहां क्रिएटर्स अपने कंटेंट के बदले सीधे यूजर्स से पैसे ले सकते हैं। टैक्स देने पर भी जांच का डर रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कंटेंट क्रिएटर्स ने अपनी कमाई सरकार को बताकर उस पर टैक्स चुकाने की कोशिश की। लेकिन इसके बाद उन्हें टैक्स से जुड़े मामलों के साथ-साथ पोर्नोग्राफी कानून के तहत भी जांच का सामना करना पड़ा। बिल के समर्थकों का कहना है कि जब यह कारोबार पहले से बड़े पैमाने पर चल रहा है, तो इसे कानूनी दायरे में लाकर उस पर टैक्स लिया जाना चाहिए। इस कारोबार को लेकर भ्रष्टाचार की शिकायतें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के तीन क्षेत्रों में अधिकारियों पर एडल्ट कंटेंट कारोबार से जुड़े लोगों से रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं। बिल के समर्थकों का कहना है कि यह कारोबार गैरकानूनी होने के कारण क्रिएटर्स और अधिकारियों के बीच रिश्वत और दबाव के मामले सामने आते हैं। उनका मानना है कि अगर कारोबार को कानूनी बनाया गया और इसके लिए साफ नियम तय किए गए, तो भ्रष्टाचार के ऐसे मामलों को कम किया जा सकता है। एक क्रिएटर ने 9 लाख डॉलर टैक्स दिया रिपोर्ट में एडल्ट कंटेंट क्रिएटर स्वितलाना द्वोर्निकोवा का भी जिक्र है। उनका दावा है कि वह अब तक करीब 9 लाख डॉलर यानी लगभग 8.5 करोड़ रुपए टैक्स दे चुकी हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार इस कारोबार को कानूनी कर दे और इससे टैक्स ले, तो युद्ध के लिए सरकार को अतिरिक्त पैसा मिल सकता है। इस पैसे से ड्रोन और दूसरे सैन्य सामान खरीदे जा सकते हैं। द्वोर्निकोवा पहले भी एडल्ट कंटेंट बनाने वाले लोगों पर हो रही कानूनी कार्रवाई का मुद्दा उठा चुकी हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की वेबसाइट पर एक याचिका भी दायर की थी। वयस्कों के कंटेंट पर राहत, बच्चों के मामलों में सख्ती इस याचिका को 25 हजार से ज्यादा लोगों का समर्थन मिला था। इसके बाद जेलेंस्की ने संसद से प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही थी। इसके बाद संसद में वयस्कों के बीच बनाए गए एडल्ट कंटेंट को अपराध न मानने का प्रस्ताव रखा गया। हालांकि प्रस्ताव में बच्चों से जुड़ी पोर्नोग्राफी को अपराध ही रखने की बात है। ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी और सजा को और सख्त करने की कोशिश की जा रही है। सांसद यारोस्लाव झेलेजनियाक का कहना है कि पुलिस को वयस्कों के बीच बनाए गए एडल्ट कंटेंट के मामलों में समय लगाने के बजाय बच्चों के यौन शोषण और दूसरे गंभीर अपराधों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। GDP का आधा हिस्सा जंग पर खर्च रूस के मिसाइल हमले के बाद कीव के बुक मार्केट में लगी आग को देख चिंता जताता शख्स। यूक्रेन रूस के साथ फरवरी 2022 से युद्ध लड़ रहा है। इस दौरान देश का सबसे बड़ा खर्च रक्षा और सेना पर हो रहा है। विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, यूक्रेन को 2024 तक जंग में करीब 171 अरब डॉलर (16 लाख करोड़ भारतीय रुपए) खर्च करने पड़े। युद्ध का असर यूक्रेन के पूरे बजट पर भी पड़ा है। विश्व बैंक के मुताबिक, 2025 में देश ने सुरक्षा और रक्षा पर करीब 3.83 ट्रिलियन ह्रीव्निया खर्च किए, जो उसकी GDP का करीब 42.9% था। फिलहाल यूक्रेन को युद्ध जारी रखने के लिए बड़ी रकम की जरूरत है। अगस्त 2026 में यूक्रेन के नए रक्षा मंत्री ने बताया था कि देश को 2026 के सैन्य बजट में करीब 27 अरब डॉलर की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यानी एडल्ट कंटेंट से मिलने वाले 236 करोड़ रुपए यूक्रेन की जरूरत के मुकाबले बहुत कम हैं, लेकिन सरकार के लिए पहले से चल रहे कारोबार से अतिरिक्त टैक्स जुटाने का एक और रास्ता बन सकते हैं। —————————- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के दामाद ने यूक्रेनी राष्ट्रपति से मुलाकात
Delhi High Court Order | Janhvi Kapoor Obscene Content URLs Removed

1 मिनट पहले कॉपी लिंक जाह्नवी कपूर से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 552 URLs हटाने का आदेश दिया। जाह्नवी कपूर से जुड़े अश्लील और आपत्तिजनक ऑनलाइन कंटेंट के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 552 URLs से ऐसा कंटेंट हटाने का आदेश दिया है, जिसमें अभिनेत्री की पहचान और तस्वीरों का कथित तौर पर अश्लील इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, करीब 6,884 URLs को एक साथ हटाने की मांग कोर्ट ने नहीं मानी। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि अलग-अलग तरह के कंटेंट पर एक जैसा आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ किसी सेलिब्रिटी के नाम या तस्वीर वाले हर फैन पेज को गैरकानूनी नहीं माना जा सकता। जाह्नवी कपूर ने 11 अगस्त 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में 6,884 URLs हटाने की मांग की थी। 552 URLs पर कोर्ट ने दिया टेकडाउन का आदेश टाइम्स नाउ नवभारत की रिपोर्ट के मुताबिक, जाह्नवी कपूर ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े मामले में इंटरनेट पर मौजूद करीब 6,884 URLs के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इनमें कथित अश्लील कंटेंट के अलावा तस्वीरों और पहचान के गलत इस्तेमाल से जुड़े मामले भी शामिल थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुरुआती तौर पर 552 URLs पर मौजूद सामग्री को बेहद अश्लील या पोर्नोग्राफिक माना और इन्हें हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने माना कि इस कंटेंट के ऑनलाइन बने रहने से अभिनेत्री को अपूरणीय नुकसान हो सकता है। लाइव लॉ के अनुसार, कोर्ट ने इन 552 URLs के संबंध में जाह्नवी का प्रथमदृष्टया मामला मजबूत पाया और अंतरिम राहत को उचित माना। 6,884 URLs पर एकमुश्त आदेश से इनकार कोर्ट ने जाह्नवी कपूर की सभी 6,884 URLs को एक साथ हटाने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में URLs अलग-अलग तरह के कंटेंट से जुड़े हैं, इसलिए सभी पर एक जैसा ब्लैंकेट टेकडाउन आदेश देना उचित नहीं होगा। अदालत ने विवादित ऑनलाइन सामग्री को अलग-अलग श्रेणियों में देखने की जरूरत बताई। पहली श्रेणी में अश्लील या पोर्नोग्राफिक कंटेंट, दूसरी में अभिनेत्री के पर्सनैलिटी राइट्स से सीधे कमाई करने वाला कंटेंट और तीसरी में उनके नाम या पहचान का इस्तेमाल कर अप्रत्यक्ष रूप से किसी प्रोडक्ट या सर्विस को बढ़ावा देने वाली सामग्री शामिल है। फैन पेजों को लेकर कोर्ट ने क्या कहा? कोर्ट ने साफ किया कि किसी सेलिब्रिटी के नाम से चलने वाला हर फैन पेज अपने आप गैरकानूनी नहीं हो जाता। ऐसे पेजों पर कलाकार की तस्वीरें, वीडियो, फिल्मों से जुड़ी जानकारी, तारीफ या आलोचना जैसी सामग्री हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने इसी आधार पर सभी फैन पेज और URLs हटाने की मांग स्वीकार नहीं की। हालांकि, कोई अकाउंट अश्लील सामग्री पोस्ट करता है या सेलिब्रिटी की पहचान का इस्तेमाल कर व्यावसायिक फायदा कमाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। AI और डीपफेक कंटेंट भी बना था मुद्दा इस मामले में सामान्य ऑनलाइन पोस्ट के अलावा AI से बनाई गई तस्वीरों, डीपफेक और अभिनेत्री की पहचान का इस्तेमाल करने वाले अकाउंट्स से जुड़े मुद्दे भी सामने आए थे। कोर्ट ने आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री को बाकी कंटेंट से अलग करके देखने का फैसला किया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Delhi High Court Order | Janhvi Kapoor Obscene Content URLs Removed

25 मिनट पहले कॉपी लिंक जाह्नवी कपूर से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 552 URLs हटाने का आदेश दिया। जाह्नवी कपूर से जुड़े अश्लील और आपत्तिजनक ऑनलाइन कंटेंट के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 552 URLs से ऐसा कंटेंट हटाने का आदेश दिया है, जिसमें अभिनेत्री की पहचान और तस्वीरों का कथित तौर पर अश्लील इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, करीब 6,884 URLs को एक साथ हटाने की मांग कोर्ट ने नहीं मानी। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि अलग-अलग तरह के कंटेंट पर एक जैसा आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ किसी सेलिब्रिटी के नाम या तस्वीर वाले हर फैन पेज को गैरकानूनी नहीं माना जा सकता। जाह्नवी कपूर ने 11 अगस्त 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में 6,884 URLs हटाने की मांग की थी। 552 URLs पर कोर्ट ने दिया टेकडाउन का आदेश टाइम्स नाउ नवभारत की रिपोर्ट के मुताबिक, जाह्नवी कपूर ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े मामले में इंटरनेट पर मौजूद करीब 6,884 URLs के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इनमें कथित अश्लील कंटेंट के अलावा तस्वीरों और पहचान के गलत इस्तेमाल से जुड़े मामले भी शामिल थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुरुआती तौर पर 552 URLs पर मौजूद सामग्री को बेहद अश्लील या पोर्नोग्राफिक माना और इन्हें हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने माना कि इस कंटेंट के ऑनलाइन बने रहने से अभिनेत्री को अपूरणीय नुकसान हो सकता है। लाइव लॉ के अनुसार, कोर्ट ने इन 552 URLs के संबंध में जाह्नवी का प्रथमदृष्टया मामला मजबूत पाया और अंतरिम राहत को उचित माना। 6,884 URLs पर एकमुश्त आदेश से इनकार कोर्ट ने जाह्नवी कपूर की सभी 6,884 URLs को एक साथ हटाने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में URLs अलग-अलग तरह के कंटेंट से जुड़े हैं, इसलिए सभी पर एक जैसा ब्लैंकेट टेकडाउन आदेश देना उचित नहीं होगा। अदालत ने विवादित ऑनलाइन सामग्री को अलग-अलग श्रेणियों में देखने की जरूरत बताई। पहली श्रेणी में अश्लील या पोर्नोग्राफिक कंटेंट, दूसरी में अभिनेत्री के पर्सनैलिटी राइट्स से सीधे कमाई करने वाला कंटेंट और तीसरी में उनके नाम या पहचान का इस्तेमाल कर अप्रत्यक्ष रूप से किसी प्रोडक्ट या सर्विस को बढ़ावा देने वाली सामग्री शामिल है। फैन पेजों को लेकर कोर्ट ने क्या कहा? कोर्ट ने साफ किया कि किसी सेलिब्रिटी के नाम से चलने वाला हर फैन पेज अपने आप गैरकानूनी नहीं हो जाता। ऐसे पेजों पर कलाकार की तस्वीरें, वीडियो, फिल्मों से जुड़ी जानकारी, तारीफ या आलोचना जैसी सामग्री हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने इसी आधार पर सभी फैन पेज और URLs हटाने की मांग स्वीकार नहीं की। हालांकि, कोई अकाउंट अश्लील सामग्री पोस्ट करता है या सेलिब्रिटी की पहचान का इस्तेमाल कर व्यावसायिक फायदा कमाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। AI और डीपफेक कंटेंट भी बना था मुद्दा इस मामले में सामान्य ऑनलाइन पोस्ट के अलावा AI से बनाई गई तस्वीरों, डीपफेक और अभिनेत्री की पहचान का इस्तेमाल करने वाले अकाउंट्स से जुड़े मुद्दे भी सामने आए थे। कोर्ट ने आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री को बाकी कंटेंट से अलग करके देखने का फैसला किया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
India Government Summons Meta Global Team Over Content Control Issues

2 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी ने 23 जुलाई को पेपर लीक को गंभीर विषय बताते हुए एक वीडियो जारी किया था। इसे मेटा ने रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक हटा दिया था। भारत सरकार और मेटा की ग्लोबल टीम के बीच 5 और 6 अगस्त को एक अहम बैठक होने जा रही है। केंद्र सरकार ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा के प्रतिनिधियों को समन भेजकर तलब किया है। केंद्र सरकार इस बैठक में चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटीरियल यानी CSAM पर लगाम लगाने में हुई चूक, फर्जी/सिंथेटिक एआई कंटेंट और बड़े नेताओं के वेरिफाइड अकाउंट्स पर गलत कार्रवाई जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने मेटा द्वारा अब तक दिए गए जवाबों को नाकाफी माना है। पीएम मोदी की पोस्ट हटने के बाद बढ़ी सख्ती यह बैठक हाल ही में फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो पोस्ट के कुछ समय के लिए हट जाने के विवाद के बाद तय की गई है। इस घटना के बाद सरकार ने मेटा के प्लेटफॉर्म्स की कंटेंट मॉडरेशन नीतियों, ऑटोमेटेड सिस्टम और बिग-टेक कंपनियों की जवाबदेही पर निगरानी सख्त कर दी है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक मेटा ने पीएम मोदी के वीडियो के हटने पर खेद व्यक्त किया है और वह इसके लिए औपचारिक माफी मांगने को भी तैयार है। दरअसल, पीएम मोदी ने 23 जुलाई को पेपर लीक को गंभीर विषय बताते हुए एक वीडियो जारी किया था। इसे मेटा ने रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक हटा दिया था। लेकिन बाद में उसे रिस्टोर कर दिया गया। मेटा ने अपनी सफाई में कहा कि दरअसल, यह एक टेक्निकल एरर था। इंस्टाग्राम विज्ञापनों में CSAM का मुद्दा भी उठा मेटा केवल VIP पोस्ट हटाने के मामले में ही नहीं, बल्कि सुरक्षा संबंधी अन्य गंभीर मामलों में भी जांच के दायरे में है। इससे पहले इंस्टाग्राम पर पेड एड्स यानी प्रायोजित विज्ञापनों के जरिए चाइल्ड CSAM के प्रचार-प्रसार को लेकर सरकार ने मेटा को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 5-6 अगस्त की बैठक में सरकार यह भी समीक्षा करेगी कि उस नोटिस के बाद कंपनी ने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। BBC रिपोर्ट- Meta पर यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट सस्ता मिल रहा BBC की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल मौजूद हैं। भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बेहद कम कीमत 99 रुपए में बेचा जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर दिखने वाले सभी विज्ञापन पहले Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी मिलने के बाद ही लाइव होते हैं। BBC ने जब ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की, तो करीब 24 घंटे बाद कंपनी ने जवाब दिया कि यह पोस्ट उसकी कम्यूनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है। इसके बाद BBC ने मेटा से इस मामले पर जवाब मांगा। तब कंपनी ने कहा कि उसने कई विज्ञापनों को हटा दिया है, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया है और उन URL को हटा देने का दावा किया। Meta ने यह भी माना कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता और रिव्यू प्रोसेस हर नियम उल्लंघन की पहचान नहीं कर पाती। भास्कर नॉलेज: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का बनाना, रखना अपराध सवाल 1: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर क्या कानून है? जवाब: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है। सवाल 2: IT Act की धारा 67B में क्या सजा है? जवाब: पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना। दोबारा अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना। सवाल 3: सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी है? जवाब: भारत के आईटी, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होता है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं। सवाल 4: अगर कोई ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें? जवाब: उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें। सवाल 5: सरकार इस मामले में क्या कर सकती है? जवाब: सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांग सकती है। प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। जांच एजेंसियों के जरिए आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। नियमों के उल्लंघन पर आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है। सवाल 6: क्या सिर्फ प्लेटफॉर्म ही जिम्मेदार होता है? जवाब: नहीं। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Prayagraj Law University Rejects PhD Applications Due To AI Content Usage

Hindi News Career Prayagraj Law University Rejects PhD Applications Due To AI Content Usage 22 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रयागराज स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ने पीएचडी की 5 सीटों के लिए आए 22 आवेदनों की जांच के बाद आठ आवेदन रद्द कर दिए। जांच में पता चला कि कई उम्मीदवारों की रिसर्च सिनॉप्सिस में एआई से तैयार मटेरियल का ज्यादा उपयोग किया गया था। विश्वविद्यालय ने यूजीसी के दिशानिर्देशों के अनुसार एआई इंडेक्स और सिमिलैरिटी की सीमा तय कर रखी थी। निर्धारित सीमा से ज्यादा पाए जाने पर आवेदन अयोग्य घोषित कर दिए गए। जांच में 36% आवेदन खारिज विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी सिनॉप्सिस की जांच टर्निटिन सॉफ्टवेयर के माध्यम से कराई। इस प्रक्रिया में एआई इंडेक्स और सिमिलैरिटी इंडेक्स दोनों की जांच की गई। कई आवेदनों में एआई से तैयार मटेरियल का स्तर 80% तक पाया गया, जबकि कुछ में सिमिलैरिटी इंडेक्स भी तय सीमा से काफी अधिक था। अब शेष 14 उम्मीदवारों को 12 अगस्त को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है, जहां उनकी विषय की समझ, रिसर्च की मौलिकता और रिसर्च कैपेसिटी चेक की जाएगी। 6 महीने के अंदर दोबारा जमा करना होगी रिसर्च रिसर्च में एआई के बढ़ते उपयोग और साहित्यिक चोरी को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार अगर किसी थीसिस में 10 से 40% तक प्लेजरिज्म मिलता है तो उसे करेक्शन के लिए वापस भेजा जाएगा और रिसर्चर छह महीने के अंदर सुधार कर दोबारा जमा कर सकेगा। एआई का उपयोग थीसिस में करना जरूरी यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि एआई का सीमित उपयोग किया जा सकता है, लेकिन इसका उल्लेख थीसिस में करना अनिवार्य होगा। सभी विश्वविद्यालयों को इन नियमों की जानकारी शोधार्थियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। प्लेजरिज्म क्या है? पीएचडी रिसर्च में प्लेजरिज्म का अर्थ है किसी दूसरे व्यक्ति के विचार, रिसर्च, आर्टिकल, डाटा, फोटो या शब्दों को बिना उचित स्रोत दिए अपना बताकर प्रस्तुत करना। यह शैक्षणिक ईमानदारी का उल्लंघन है। इसके शोध की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है। डिग्री रद्द हो सकती है। शोध-पत्र वापस (Retract) किए जा सकते हैं। यहां तक कि विश्वविद्यालय अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है। —————————————————— ये खबर भी पढ़ें रेलवे ग्रुप डी फिजिकल में 1,032 उम्मीदवार फेल:1000 मीटर की दौड़ सिलेक्शन की सबसे कठिन स्टेप, उमस भरे मौसम ने बढ़ाई परेशानी चिपचिपी गर्मी और उमस भरे मौसम में जहां ज्यादा देर चल पाना भी मुश्किल है। ऐसे मौसम में प्रयागराज के DSA ग्राउंड में 25 से 28 जुलाई तक रेलवे ग्रुप-डी PET परीक्षा की फिजिकल टेस्ट का आयोजन हुआ। इस टेस्ट के चलते 1,032 उम्मीदवार फेल हो गए। पांच दिनों तक चली फिजिकल टेस्ट उम्मीदवारों को भारी पड़ी। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Instagram Meta Notice: Child Abuse Content Blocked

नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेट को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर सरकार ने पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस भेजा। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार कंपनी को 7 दिन में इस नोटिस का जबाव देना होगा। ये नोटिस 4 जुलाई को जारी किया गया है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार IT मिनिस्ट्री ने इंस्टाग्राम को अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले या ऐसे कंटेंट तक पहुंच बनाने वाले सभी विज्ञापनों को तुरंत ब्लॉक करने और हटाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, बीबीसी ने अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में बताया था कि इंस्टाग्राम भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापन दिखा रहा है। इससे पहले सरकार ने 1 जुलाई को Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर नोटिस भेजा था। BBC रिपोर्ट- Meta पर यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट सस्ता मिल रहा BBC की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल मौजूद हैं। भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बेहद कम कीमत 99 रुपए में बेचा जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर दिखने वाले सभी विज्ञापन पहले Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी मिलने के बाद ही लाइव होते हैं। BBC ने जब ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की, तो करीब 24 घंटे बाद कंपनी ने जवाब दिया कि यह पोस्ट उसकी कम्यूनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है। इसके बाद BBC ने मेटा से इस मामले पर जवाब मांगा। तब कंपनी ने कहा कि उसने कई विज्ञापनों को हटा दिया है, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया है और उन URL को हटा देने का दावा किया। Meta ने यह भी माना कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता और रिव्यू प्रोसेस हर नियम उल्लंघन की पहचान नहीं कर पाती। भास्कर नॉलेज: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का बनाना, रखना अपराध सवाल: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर क्या कानून है? जवाब: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है। सवाल: IT Act की धारा 67B में क्या सजा है? जवाब: पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना। दोबारा अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना। सवाल: सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी है? जवाब: भारत के आईटी, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होता है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं। सवाल: अगर कोई ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें? जवाब: उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें। सवाल: सरकार इस मामले में क्या कर सकती है? जवाब: सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांग सकती है। प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। जांच एजेंसियों के जरिए आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। नियमों के उल्लंघन पर आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है। सवाल: क्या सिर्फ प्लेटफॉर्म ही जिम्मेदार होता है? जवाब: नहीं। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Instagram Meta Notice: Child Abuse Content Blocked

नई दिल्ली35 मिनट पहले कॉपी लिंक इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेट को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर सरकार ने पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस भेजा। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार कंपनी को 7 दिन में इस नोटिस का जबाव देना होगा। ये नोटिस 4 जुलाई को जारी किया गया है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार IT मिनिस्ट्री ने इंस्टाग्राम को अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले या ऐसे कंटेंट तक पहुंच बनाने वाले सभी विज्ञापनों को तुरंत ब्लॉक करने और हटाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, बीबीसी ने अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में बताया था कि इंस्टाग्राम भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापन दिखा रहा है। इससे पहले सरकार ने 1 जुलाई को Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर नोटिस भेजा था। BBC रिपोर्ट- Meta पर यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट सस्ता मिल रहा BBC की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल मौजूद हैं। भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बेहद कम कीमत 99 रुपए में बेचा जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर दिखने वाले सभी विज्ञापन पहले Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी मिलने के बाद ही लाइव होते हैं। BBC ने जब ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की, तो करीब 24 घंटे बाद कंपनी ने जवाब दिया कि यह पोस्ट उसकी कम्यूनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है। इसके बाद BBC ने मेटा से इस मामले पर जवाब मांगा। तब कंपनी ने कहा कि उसने कई विज्ञापनों को हटा दिया है, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया है और उन URL को हटा देने का दावा किया। Meta ने यह भी माना कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता और रिव्यू प्रोसेस हर नियम उल्लंघन की पहचान नहीं कर पाती। भास्कर नॉलेज: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का बनाना, रखना अपराध सवाल: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर क्या कानून है? जवाब: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है। सवाल: IT Act की धारा 67B में क्या सजा है? जवाब: पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना। दोबारा अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना। सवाल: सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी है? जवाब: भारत के आईटी, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होता है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं। सवाल: अगर कोई ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें? जवाब: उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें। सवाल: सरकार इस मामले में क्या कर सकती है? जवाब: सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांग सकती है। प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। जांच एजेंसियों के जरिए आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। नियमों के उल्लंघन पर आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है। सवाल: क्या सिर्फ प्लेटफॉर्म ही जिम्मेदार होता है? जवाब: नहीं। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Telegram Pirated Content Channels & Groups Removal

नई दिल्ली16 मिनट पहले कॉपी लिंक अब आप टेलीग्राम एप पर फ्री में मिलने वाली पायरेटेड फिल्में और वेब सीरीज डाउनलोड नहीं कर पाएंगे। केंद्र सरकार ने मैसेजिंग एप से फिल्मों और OTT कंटेंट के पायरेसी वर्जन उपलब्ध कराने वाले चैनल्स और ग्रुप्स को हटाने को कहा है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने आज नोटिस जारी कर कंपनी से कहा कि वह अपने प्लेटफॉर्म से पाइरेटेड फिल्मों और वेब सीरीज के सर्कुलेशन को तुरंत रोके और अगले 15 दिन में इस पर लिए गए एक्शन की रिपोर्ट सौंपे। एप को 3 दिन में सरकार का दूसरा नोटिस मिला है। प्लेटफॉर्म लेवल पर कार्रवाई करने का आदेश सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने साफ कर दिया है कि टेलीग्राम अब सिर्फ शिकायतों का इंतजार नहीं कर सकता। सिर्फ एक-एक करके पाइरेसी करने वाले चैनलों को हटाने के बजाय प्लेटफॉर्म लेवल पर पुख्ता सिस्टम बनाना होगा। सरकार का मानना है कि यह सुस्त रवैया इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 और IT रूल्स, 2021 के तहत मध्यस्थों (इंटरमीडियरीज) पर लागू होने वाली ‘ड्यू डिलिजेंस’ की शर्तों को पूरा नहीं करता है। सरकार ने कंपनी को बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले चैनलों, ग्रुप्स, बॉट्स, अकाउंट्स, एडमिनिस्ट्रेटर और उनसे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ एक्शन लेने का निर्देश दिया है। 3000 से ज्यादा चैनल पहले भी ब्लॉक हो चुके हैं सरकार इससे पहले भी पाइरेसी कंटेंट फैलाने वाले 3000 से ज्यादा टेलीग्राम चैनलों पर कार्रवाई कर चुकी है। सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर आगे भी ऐसा कंटेंट उपलब्ध रहता है या कंपनी की तरफ से अधूरा जवाब मिलता है, तो कानूनी दायरे के तहत और सख्त कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में बताया गया कि कॉपीराइट का उल्लंघन सिर्फ एक सिविल विवाद नहीं है। इसके लिए कॉपीराइट एक्ट 1957 और सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 के तहत क्रिमिनल लायबिलिटी भी तय हो सकती है, जिससे जेल तक हो सकती है। जून में लीक पेपर्स के कारण लगा था बैन इससे पहले जून के महीने में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की सिफारिश पर सरकार ने पेपर लीक मामले में टेलीग्राम पर 16 जून से 22 जून तक प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा, 21 जून को हुई NEET 2026 की दोबारा परीक्षा को देखते हुए सरकार ने टेलीग्राम को 30 जून तक अपना ‘मैसेज-एडिटिंग’ फीचर बंद रखने का भी आदेश दिया था। ——————– ये खबर भी पढ़ें… यूजरनेम फीचर पर वॉट्सएप के बाद टेलीग्राम को नोटिस: सरकार ने पूछा- इससे साइबर अपराधों का खतरा, रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार ने वॉट्सएप के बाद गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस भेजा है। सरकार ने पूछा है कि यूजरनेम फीचर के जरिए होने वाली ऑनलाइन ठगी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सरकार ने टेलीग्राम से पूछा कि उसे यूजरनेम फीचर जारी रखने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए। सरकार ने बुधवार को मेटा और वॉट्सएप के यूजरनेम फीचर पर नोटिस जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









