Wednesday, 12 Aug 2026 | 03:25 PM

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Donald Trump Vs Emmanuel Macron; Message Leak Controversy

Donald Trump Vs Emmanuel Macron; Message Leak Controversy

नई दिल्ली12 घंटे पहले कॉपी लिंक मैक्रों ने कहा कि असहमति जताना गलत नहीं है, लेकिन उसका तरीका सही होना चाहिए। (बैकग्राउंड में मैक्रों के लीक मैसेज का स्कीनशॉट) फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि देशों के बीच रिश्तों में सम्मान बहुत जरूरी होता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोनों नेताओं के बीच हुए प्राइवेट मैसेज लीक कर दिए। भारत के तीन दिन के दौरे पर आए मैक्रों ने भारतीय पॉडकास्टर राज शमानी के शो में यह बात कही। उनसे पूछा गया कि उनके निजी मैसेज लीक होने पर उन्हें कैसा लगा। इस पर मैक्रों ने सीधे ट्रम्प का नाम लेकर कुछ नहीं कहा, लेकिन इतना जरूर कहा कि कूटनीति में एक-दूसरे का सम्मान जरूरी है। मैक्रों ने कहा कि देश आपस में सहमत हों या असहमत, लेकिन अपनी बात सम्मान के साथ रखनी चाहिए। असहमति जताना गलत नहीं है, लेकिन उसका तरीका सही होना चाहिए। मैक्रों ने ट्रम्प पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ नेता आगे बढ़ने के बजाए पीछे जाते हुए दिख रहे हैं। मैक्रों के मैसेज का स्क्रीनशॉट ट्रम्प ने 20 जनवरी को मैक्रों का निजी मैसेज लीक किया था। उस मैसेज में मैक्रों ने ट्रम्प से कहा था कि वे समझ नहीं पा रहे हैं कि ट्रम्प ग्रीनलैंड को लेकर क्या करना चाहते हैं। उन्होंने आगे मिलकर काम करने की बात भी कही थी और G7 बैठक की मेजबानी का सुझाव दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि इस बैठक में यूक्रेन, डेनमार्क, सीरिया और रूस जैसे देशों को शामिल किया जा सकता है। मैक्रों बोले- हिंसा और अपमान की जरूरत नहीं मैक्रों ने पॉडकास्ट में यह भी कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपने नेता बदलने का अधिकार होता है, इसलिए हिंसा और अपमान की जरूरत नहीं है। वे समाज में नफरत भरी भाषा और हिंसा के खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जब फ्रांसीसी राष्ट्रपति से पूछा गया कि क्या दुनिया को अमेरिका के मौजूदा लीडरशिप से डरने की जरूरत है, तो उन्होंने कहा कि आज के हालात में यह थोड़ा हैरान करने वाला है कि कुछ नेता आगे बढ़ने की बजाय पीछे की तरफ जाते दिख रहे हैं। ट्रम्प ने फ्रांसीसी वाइन पर 200% टैरिफ की धमकी दी थी ट्रम्प और मैक्रों के बीच लंबे समय के तल्खी रही है, लेकिन हाल में विवाद तब बढ़ा जब फ्रांस ने ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता ठुकरा दिया। यह बोर्ड गाजा के विकास के लिए बनाया गया है। फ्रांस समेत कई देशों ने इस बात पर चिंता जताई कि बोर्ड के दस्तावेज में गाजा और इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष का साफ जिक्र नहीं है। इसके बाद ट्रम्प ने फ्रांस की वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी और कहा कि इससे मैक्रों पर दबाव पड़ेगा। बाद में ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दोनों के बीच हुए निजी मैसेज भी शेयर कर दिए, जिनमें मैक्रों ने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की दिलचस्पी पर चिंता जताई थी। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने पिछले महीने दावोस में कहा था कि फ्रांस धमकी नहीं, सम्मान में भरोसा करता है। यूरोप पर और पाबंदियां लगाने की धमकी देना गलत है। फ्रांस दुनिया की वाइन राजधानी कही जाती है फ्रेंच वाइन और शैम्पेन दुनिया भर में बहुत प्रसिद्ध हैं। फ्रांस की वाइन संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता हैं। फ्रांस को दुनिया की वाइन राजधानी कहा जाता है। फ्रेंच वाइन में कई तरह की रेड, व्हाइट, रोजे और स्पार्कलिंग वाइन शामिल हैं। फ्रेंच वाइन फ्रांस के विभिन्न क्षेत्रों में उगाए गए अंगूरों से बनाई जाती है। फ्रेंच वाइन में आमतौर पर कोई बुलबुले नहीं होते। ये स्टिल वाइन होती हैं, जिनमें अल्कोहल 11-15% तक होता है। इनकी क्वालिटी मिट्टी, मौसम और अंगूर की किस्म पर निर्भर करती है। इटली के बाद फ्रांस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा वाइन उत्पादक देश है। 2025 में वैश्विक वाइन उत्पादन लगभग 23.2 खरब मिलीलीटर रहा, जिसमें फ्रांस का उत्पादन 3.59 खरब मिलीलीटर है, यानी दुनिया की कुल वाइन का लगभग 15-16%। फ्रेंच वाइन फ्रांस के अलग-अलग इलाकों में उगाए गए अंगूरों से बनाई जाती है। इसमें 11-15% तक अल्कोहल होता है। ट्रम्प और मैक्रों के बीच कई बार तनातनी हुई अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के बीच पिछले कुछ समय में कई बार तनातनी देखी गई है। 1. बोर्ड ऑफ पीस विवाद (2026) जब ट्रम्प ने गाजा के विकास के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बनाया, तो फ्रांस ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। फ्रांस समेत कई देशों ने कहा कि बोर्ड के दस्तावेज में गाजा और इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष का साफ जिक्र नहीं है। 2. ग्रीनलैंड को लेकर बयानबाजी (2026) ग्रीनलैंड में अमेरिका की दिलचस्पी को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आए। ट्रम्प ने शेयर किए गए मैसेज में मैक्रों ने ग्रीनलैंड को लेकर अपनी चिंता जताई थी। 3. ट्रेड और टैरिफ को लेकर तनाव ट्रम्प ने फ्रांस के उत्पादों, खासकर वाइन और शैम्पेन पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी और कहा कि इससे फ्रांस पर दबाव बनेगा। इस पर फ्रांस ने नाराजगी जताई थी। 4. NATO और डिफेंस खर्च (2018–2019) ट्रम्प बार-बार कहते है कि यूरोपीय देश NATO पर कम खर्च कर रहे हैं और अमेरिका पर ज्यादा बोझ है। मैक्रों ने एक बार NATO को “ब्रेन-डेड” (दिमागी रूप से निष्क्रिय) तक कह दिया था। इस बयान पर ट्रम्प ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और दोनों के बीच सार्वजनिक बहस हुई थी। 5. डिजिटल टैक्स विवाद (2019) फ्रांस ने बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लगाने का फैसला किया था। ट्रम्प ने इसे अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ कदम बताया और फ्रांसीसी सामान पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। बाद में बातचीत के जरिए मामला कुछ हद तक सुलझ गया था। 6. ईरान परमाणु समझौता (2018) ट्रम्प ने अमेरिका को जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) से बाहर कर लिया था। यह एक एक परमाणु समझौता था, जो 2015 में ईरान और दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच हुआ था। मैक्रों चाहते थे कि समझौता बना रहे और उन्होंने ट्रम्प को मनाने की कोशिश भी की, लेकिन

The Kerala Story 2 Controversy; CBFC

The Kerala Story 2 Controversy; CBFC

15 घंटे पहले कॉपी लिंक फिल्म द केरल स्टोरी 2 में मुख्य भूमिकाओं में उल्का गुप्ता, अदिति भाटिया और ऐश्वर्या ओझा नजर आएंगी। केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ के प्रोड्यूसर्स को नोटिस जारी किया। यह नोटिस उस याचिका पर सुनवाई के बाद जारी हुआ, जिसमें संबंधित फिल्म को दिए गए सेंसर सर्टिफिकेट को कैंसिल करने की मांग की गई। कन्नूर जिले के चिट्टारिपरम्बा के रहने वाले श्रीदेव नम्बूथिरी ने यह याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि फिल्म में बिना किसी ठोस सबूत के पूरे राज्य को गलत तरीके से बदनाम किया गया और रूढ़िवादी तरीके से दिखाया गया। याचिका में कहा गया, “फिल्म का ट्रेलर देखने से साफ है कि कहानी तीन अलग-अलग राज्यों की महिलाओं पर आधारित है और ज्यादातर घटनाएं उत्तर भारत में घटित होती हैं। इसके बावजूद, फिल्म का टाइटल और सीन केरल को गलत तरीके से नकारात्मक रूप में पेश करने की कोशिश करते हैं। यह फिल्म केरल और केरलवासियों को देश के बाकी हिस्सों से अलग दिखाने की कोशिश करती है, जबकि केरलवासी भारत और विदेशों में काम कर देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं और दूसरे राज्यों से आए लोगों को रोजगार व रहने की जगह भी देते हैं।” याचिका में आगे कहा गया, “फिल्म का नाम लेखक या डायरेक्टर के अधिकतर अनुमानित भय को वास्तविकता की तरह प्रस्तुत करने का एक सोचा-समझा प्रयास है। याचिकाकर्ता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किसी भी अनुमानित भय को पूरे केरल राज्य से झूठा जोड़ना उचित नहीं है।” ‘द केरल स्टोरी’ (2023) का सीक्वल, ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ 27 फरवरी, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। अगली सुनवाई 24 फरवरी को तय बता दें कि याचिका पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने सेंसर बोर्ड को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने फिल्म के निर्माता सनशाइन पिक्चर्स से भी अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार, 24 फरवरी को निर्धारित की गई है। हाल ही में ‘द केरल स्टोरी 2’ का ट्रेलर जारी किया गया, जिसमें दिखाया गया है कि प्रेम के नाम पर हिंदू महिलाओं को कथित तौर पर फंसाया जाता है। फिल्म की कहानी अमरनाथ झा और विपुल अमृतलाल शाह ने लिखी है, जबकि फिल्म का डायरेक्शन कमाख्या नारायण सिंह ने किया है। वहीं, गुरुवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने ‘द केरल स्टोरी’ के सीक्वल का कड़ा विरोध करते हुए इसे राज्य में सांप्रदायिक वैमनस्य भड़काने की एक और कोशिश बताया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Pakistan Cricket Controversy; PCB Vs Shadab Khan

Pakistan Cricket Controversy; PCB Vs Shadab Khan

नई दिल्ली8 घंटे पहले कॉपी लिंक टी-20 वर्ल्ड कप में नामीबिया के खिलाफ जीत के बाद की यह तस्वीर शादाब खान की प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शादाब खान ने पूर्व खिलाड़ियों को लेकर एक बयान दिया था, जिस पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) नाराज बताया जा रहा है। पाकिस्तान क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर शादाब खान को अपने बयान के कारण पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की नाराजगी का सामना करना पड़ा है। शादाब ने कहा था कि पाकिस्तान के सीनियर प्लेयर कभी वर्ल्डकप में भारत को हरा नहीं पाए, लेकिन हमनें हराया है। शादाब का इशारा 2021 टी-20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की भारत पर जीत को लेकर था। अब PCB ने पूर्व खिलाड़ियों की आलोचना पर दिए शादाब के बयान को अनुचित माना है। बोर्ड ने शादाब को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखने की सलाह दी है। यह पूरा मामला 18 फरवरी को नामीबिया के खिलाफ मैच के बाद हुई पाकिस्तान की प्रेस कॉन्फ्रेंस से शुरू हुआ, जहां शादाब ने पूर्व क्रिकेटरों पर बयान दिया था। इस मैच में पाकिस्तान ने नामीबिया से जीत हासिल की थी। वहीं, इससे पिछले मैच में पाकिस्तान को भारत से 61 रन से हार था। शादाब ने कहा था- जो हमने किया, वो दिग्गज भी नहीं कर सके नामीबिया के खिलाफ 36 रन बनाने और 3 विकेट लेने के बाद शादाब खान ने पूर्व खिलाड़ियों पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा, ‘आलोचना क्रिकेट के इतिहास का हिस्सा है। पूर्व क्रिकेटर्स की अपनी राय है। वे दिग्गज थे, लेकिन हमने जो किया, वे नहीं कर सके। हमने वर्ल्ड कप में भारत को हराया है।’ भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप के ग्रुप मैच में पाकिस्तान को 61 रन से हराया। PCB ने टीम मैनेजर के जरिए मैसेज भेजा न्यूज एजेंसी IANS के मुताबिक PCB ने टीम मैनेजर नवीद चीमा के जरिए शादाब से नाराजगी जाहिर की है। चीमा ने शादाब को फोन कर बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अपनी सीमाएं लांघी हैं। शादाब को याद दिलाया गया कि उनके ससुर सकलैन मुश्ताक समेत सभी पूर्व खिलाड़ी पाकिस्तान के दिग्गज हैं और वे सम्मान के हकदार हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि खिलाड़ियों को ऐसी भाषा के इस्तेमाल से बचना चाहिए। मैनेजमेंट की अन्य खिलाड़ियों को भी चेतावनी PCB ने सिर्फ शादाब ही नहीं, बल्कि पूरी टीम को नसीहत दी है। टीम मैनेजर को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी खिलाड़ियों को समझाएं कि वे अपनी टिप्पणियों को सिर्फ मैच तक ही सीमित रखें। अगर कोई खिलाड़ी दोबारा मर्यादा लांघता है तो बोर्ड उस पर कड़ी कार्रवाई कर सकता है। पूर्व क्रिकेटर कामरान अकमल ने भी शादाब के बयान को गैरजरूरी बताया और कहा कि दिग्गजों के खिलाफ बोलते समय सावधानी बरतनी चाहिए। भारत से हार के बाद पाकिस्तान ने टी-20 वर्ल्ड कप के आखिरी लीग मैच में नामीबिया को 102 रन सो हराकर सुपर-8 में अपना स्थान पक्का किया। मीडिया से बातचीत पर टीम मैनेजमेंट सख्त पाकिस्तान टीम मैनेजमेंट फिलहाल मीडिया इंटरैक्शन को लेकर काफी सतर्क है। भारत के साथ हुए अहम मैच से दो दिन पहले तक मैनेजमेंट ने किसी भी खिलाड़ी को मीडिया के सामने नहीं भेजा था। नामीबिया के खिलाफ मैच से पहले जब उस्मान तारिक से भारत के खिलाफ उनकी गेंदबाजी को लेकर सवाल पूछा गया तो मीडिया मैनेजर नईम गिलानी ने उन्हें जवाब देने से रोक दिया। उन्होंने तर्क दिया कि हेड कोच माइक हेसन इस पर पहले ही सफाई दे चुके हैं। पाकिस्तान ने 2021 में पहली बार वर्ल्ड कप में हराया था पाकिस्तान ने 2021 टी-20 वर्ल्ड कप में पहली बार भारत को 10 विकेट से हराया था। 2021 टी-20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान ने भारत को 10 विकेट से हराया था। पहले टॉस जीत कर पाकिस्तान ने फील्डिंग करने का फैसला किया था। टीम इंडिया ने 7 विकेट खोकर 151 रन बनाए थे। इस मैच में शाहीन शाह अफरीदी ने 3, हसन अली ने 2, शादाब खान ने 1 और हारिश रउफ ने 1 विकेट लिए थे। वहीं, 152 रन के टारगेट का पीछा करने उतरी पाकिस्तान ने बिना विकेट खोए 17.5 ओवर में ही टारगेट को हासिल कर लिया था। सुपर-8 में न्यूजीलैंड से भिड़ेगा पाकिस्तान भारत से हार और नामीबिया पर 102 रनों की जीत के बाद अब पाकिस्तान की नजरें सुपर-8 राउंड पर हैं। पाकिस्तान अपना पहला सुपर-8 मैच 21 फरवरी को कोलंबो में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलेगा। इसके बाद 24 फरवरी को पल्लेकेले में इंग्लैंड और 28 फरवरी को श्रीलंका से उनका मुकाबला होगा। टीम की कोशिश मैदान के बाहर चल रहे विवादों को पीछे छोड़कर सेमीफाइनल की रेस में बने रहने की होगी। ———————————————— क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें —————————————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… T20 वर्ल्डकप सुपर-8 टीमों के खिलाफ भारत का टी-20 प्रदर्शन:वेस्टइंडीज वर्ल्ड कप में भारी पड़ा, साउथ अफ्रीका को पिछला फाइनल हराया टी-20 वर्ल्ड कप में ग्रुप स्टेज के बाद 8 टीमें सेकेंड राउंड में पहुंच चुकी हैं। यहां 4-4 टीमों को 2 ग्रुप में बांटा गया। टीम इंडिया को साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के ग्रुप में रखा है। विंडीज को छोड़कर बाकी दोनों टीमों के खिलाफ भारत का वर्ल्ड कप रिकॉर्ड अच्छा है। पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

पाकिस्तान- CM मरियम के लिए लग्जरी जेट खरीदने का आरोप:10 अरब रुपए कीमत; मंत्री बोलीं- सरकारी एयरलाइन के लिए खरीदा

पाकिस्तान- CM मरियम के लिए लग्जरी जेट खरीदने का आरोप:10 अरब रुपए कीमत; मंत्री बोलीं- सरकारी एयरलाइन के लिए खरीदा

पाकिस्तान में पंजाब सरकार पर मुख्यमंत्री मरियम नवाज के लिए लग्जरी जेट खरीदने का आरोप लगा है। ट्रिब्यून एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक गल्फस्ट्रीम G500 मॉडल के इस विमान की कीमत करीब 10 अरब पाकिस्तानी रुपए है। विमान की खरीद को लेकर सोशल मीडिया में विवाद तेज हो गया है। दावा किया जा रहा है कि यह जेट मुख्यमंत्री मरियम नवाज के उपयोग के लिए खरीदा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विमान फिलहाल अमेरिका में रजिस्टर्ड है और अभी पाकिस्तान में इसका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। इसका रजिस्ट्रेशन नंबर N144S बताया जा रहा है। पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बोखारी ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि यह जेट मुख्यमंत्री के लिए नहीं, बल्कि एयर पंजाब के लिए तैयार की जा रही फ्लीट का हिस्सा है। फाइव-स्टार होटल से कम नहीं गल्फस्ट्रीम G500 गल्फस्ट्रीम G500 को दुनिया के सबसे लग्जरी बिजनेस जेट्स में गिना जाता है। इसकी केबिन डिजाइन और सुविधाएं इसे आसमान में चलता फाइव-स्टार सुइट बनाती हैं। विमान में आमतौर पर 10 से 19 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होती है, जिसे जरूरत के मुताबिक तीन अलग-अलग रहने के हिस्सों में बांटा जा सकता है। सीटें पूरी तरह फ्लैट बेड में बदल जाती हैं। बीच में कॉन्फ्रेंस टेबल लगाई जा सकती है, जहां मीटिंग की जा सके। लंबी उड़ान के दौरान आराम के लिए अलग विश्राम क्षेत्र भी बनाया जा सकता है। G500 का केबिन इंडस्ट्री में सबसे शांत केबिन में गिना जाता है। केबिन प्रेशर और हवा की गुणवत्ता ऐसी रखी जाती है कि लंबी दूरी की उड़ान में यात्रियों को कम थकान महसूस हो। बड़ी-बड़ी अंडाकार खिड़कियां ज्यादा प्राकृतिक रोशनी देती हैं। विमान में अलग गैली (किचन स्पेस), पर्याप्त लगेज स्पेस और एडवांस एयर-फिल्ट्रेशन सिस्टम दिया गया है। सुरक्षा के लिए आधुनिक कॉकपिट सिस्टम और दो ताकतवर इंजन लगाए गए हैं। लंबी दूरी, कम शोर और होटल जैसी सुविधाओं की वजह से इसे वीआईपी और कॉर्पोरेट यात्राओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पायलट भर्ती के विज्ञापन से शुरू हुआ विवाद लग्जरी जेट खरीदने का पूरा विवाद एक पायलट भर्ती विज्ञापन से शुरू हुआ। सर्विसेज एंड जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (SGAD) की ओर से जारी इस विज्ञापन में गल्फस्ट्रीम जी-500 उड़ाने के लिए प्रशिक्षित पायलट को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी। विज्ञापन सामने आते ही सवाल उठने लगे कि क्या सरकार पहले से ही इस मॉडल का विमान खरीद चुकी है। एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी अहम शर्त आमतौर पर तभी रखी जाती है, जब विमान पहले से संचालन में हो या बहुत जल्द शामिल होने वाला हो। इसी के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा फैल गया कि पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री के उपयोग के लिए लग्जरी जेट खरीदा है। पंजाब की सूचना मंत्री अजमा बोखारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि एयर पंजाब के लिए एक बेड़ा तैयार किया जा रहा है। कुछ विमान खरीदे जाएंगे और कुछ किराये पर लिए जाएंगे। पाकिस्तान की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं CM मरियम नवाज पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने फरवरी 2024 में पद संभाला और इस पद पर पहुंचने वाली वह देश के किसी भी प्रांत की पहली महिला बनीं। मरियम नवाज 2011 में सक्रिय राजनीति में आई थीं। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत यूनिवर्सिटीज में और महिलाओं के मुद्दों पर भाषण देकर की थी। साल 2017 मरियम के लिए सबसे अच्छा रहा, लेकिन इसी साल उनके पिता नवाज शरीफ को पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने पनामा पेपर्स में नाम आने पर चुनाव के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। यहां से मरियम ने अपनी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) की कमान संभाली। इसी साल BBC ने उन्हें अपनी 100 प्रभावशाली महिलाओं की लिस्ट में जगह दी। इसके बाद वह न्यूयॉर्क टाइम्स की दुनिया की 11 ताकतवर महिलाओं की लिस्ट में जगह बनाने में कामयाब रहीं।

Ghooskhor Pandat Movie Title Controversy; Neeraj Pandey SC

Ghooskhor Pandat Movie Title Controversy; Neeraj Pandey SC

नई दिल्ली2 दिन पहले कॉपी लिंक मनोज बाजपेयी की फिल्म घूसखोर पंडत का नाम बदल दिया गया है। फिल्ममेकर नीरज पांडेय ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल करके इसकी जानकारी दी। जिसमें बताया गया कि फिल्म का विवादित टाइटल हटा दिया गया है। अब इसका कहीं इस्तेमाल नहीं होगा। नया नाम अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन जो भी रखा जाएगा, वह पुराने नाम जैसा या उससे मिलता-जुलता नहीं होगा। नीरज पांडेय ने कोर्ट में बताया कि नया नाम फिल्म की कहानी और उद्देश्य को सही ढंग से दिखाएगा और कोई गलत मतलब नहीं निकलेगा। इसके अलावा पुराने नाम से जुड़े सभी पोस्टर, ट्रेलर और प्रचार सामग्री भी पहले ही हटा दी गई है। दरअसल 12 फरवरी को पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने फिल्ममेकर और ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को फिल्म का नाम बदलने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता अतुल मिश्रा ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है। 3 फरवरी को टीजर के साथ फिल्म के नाम का ऐलान हुआ था नेटफ्लिक्स ने 3 फरवरी 2026 को मनोज बाजपेयी की ‘घूसखोर पंडत’ का ऐलान भी टीजर रिलीज करके किया गया था। लेकिन जैसे ही इसका टीजर जारी किया गया तो इसके टाइटल को लेकर विवाद शुरू हो गया है। लोग सड़कों पर उतर गए। इसके बाद यह मामला कोर्ट तक पहुंच गया। टीजर में मनोज बाजपेयी सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिन्हें दिल्ली में ‘पंडित’ के नाम से जाना जाता है। फिल्म में उन्हें एक बदनाम पुलिस अधिकारी के रूप में दिखाया गया है। टीजर के मुताबिक, दीक्षित 20 साल पहले एसआई के रूप में भर्ती हुए थे और अपने किए गए कारनामों की वजह से उन्हें बार-बार डिमोट किया गया। फिल्म में मनोज बाजपेयी सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित के किरदार निभा रहे हैं। ब्राह्मण समाज ने फिल्म का विरोध किया अलग-अलगह जगहों पर ब्राह्मण समाज ने नेटफ्लिक्स की ‘घूसखोर पंडत’ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा मुंबई के वकील आशुतोष दुबे का आरोप है कि ‘पंडत’ जैसे सम्मानजनक शब्द को भ्रष्टाचार के साथ जोड़ना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि इससे पूरे समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचती है। नोटिस में कहा गया है कि यह फिल्म जानबूझकर एक समुदाय की छवि को खराब करने की कोशिश कर रही है। यह केवल क्रिएटिव फ्रीडम नहीं है बल्कि कला के नाम पर किसी समुदाय की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है। उनका कहना है कि फिल्म का नाम केवल सनसनी फैलाने के इरादे से रखा गया है, जिसमें सामाजिक संवेदनशीलता की अनदेखी की गई है। इसके साथ ही, वकील ने फिल्म का नाम बदलने की मांग भी की है। विवाद बढ़ता देख फिल्ममेकर ने टीजर हटाया फिल्म का टीजर और उससे जुड़ा सभी प्रमोशनल कंटेंट नेटफ्लिक्स इंडिया के सोशल मीडिया अकाउंट्स और यूट्यूब से हटा दिया गया। फिल्म को लेकर नीरज पांडे ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, हमारी फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है और इसमें ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल सिर्फ एक काल्पनिक किरदार के लिए आम बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है। इस कहानी का फोकस एक व्यक्ति के काम और उसके फैसलों पर है। इसका किसी भी जाति, धर्म या समुदाय से कोई संबंध नहीं है और न ही यह किसी का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने आगे लिखा, एक फिल्ममेकर के तौर पर मैं अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेता हूं और ऐसी कहानियां कहना चाहता हूं जो सोच-समझकर और सम्मान के साथ बनाई जाएं। यह फिल्म भी मेरे पिछले कामों की तरह ईमानदार नीयत से और सिर्फ दर्शकों के मनोरंजन के लिए बनाई गई है। —————– इससे संबंधित यह खबर भी पढ़ें.. सुप्रीम कोर्ट बोला- घूसखोर पंडत फिल्म का नाम बदलें:नया नाम बताओ, तब रिलीज होगी; किसी वर्ग को ऐसे बदनाम नहीं कर सकते सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल को लेकर फिल्ममेकर और नेटफ्लिक्स को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि समाज के किसी वर्ग को ऐसे नाम से बदनाम नहीं किया जा सकता। पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

थाने पहुंची हरियाणवी कलाकारों की कन्ट्रोवर्सी:'जीजा जी' सॉन्ग पर विवाद, सिंगर मीता बोले-बिग बॉस ऑफर के लिए कर रही; सोनिका ने गंदा आदमी बताया

थाने पहुंची हरियाणवी कलाकारों की कन्ट्रोवर्सी:'जीजा जी' सॉन्ग पर विवाद, सिंगर मीता बोले-बिग बॉस ऑफर के लिए कर रही; सोनिका ने गंदा आदमी बताया

हरियाणवी सिंगर अमित खासा उर्फ मीता बरोदा और मॉडल सोनिका सिंह का विवाद अब थाने तक पहुंच गया है। सोनिका सिंह का कहना है कि लगातार हो रही बदनामी से परेशान होकर उन्होंने पुलिस में शिकायत दी है। बता दें कि दोनों स्टॉर्स के बीच ‘जीजा जी’ सॉन्ग को लेकर विवाद चल रहा है। दोनों सोशल मीडिया पर भी एक- दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर चुके हैं। दोनों ने सॉन्ग की ऑनरशिप, यू-ट्यूब इनकम को लेकर अपना दावा कर रहे हैं। जीजा जी सॉन्ग करीब एक साल पहले आजाद सिंह खांडा खेड़ी की रागनी का मॉडिफाई वर्जन था। सिंगर मीता बरोदा का कहना है कि आजाद सिंह से परमिशन लेने के बाद ही उन्होंने इस गाने को रिकॉर्ड किया था। मीता बरोदा ने कहा… सोनिका बेवजह कन्ट्रोवर्सी को लंबा खींच रही है। उन्हें बिग बॉस में जाना है। इसीलिए कॉन्ट्रोवर्सी कर रही है। अब सिलसिलेवार पढ़िए विवाद की वजह… अब पढ़िए सोनिका सिंह ने क्या दावा किया… 3 पॉइंट में पढ़िए…विवाद पर मीता बरोदा क्या बोले सोनिका बोलीं- पुलिस को शिकायत दी सोनिका का कहना है कि सोशल मीडिया पर अभद्र टिप्पणियों और बदनाम करने के प्रयास के चलते उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मीता के साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं की है। पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। ——————- ये खबर भी पढ़ें… हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच को धमकाया, VIDEO:मंच से उतारकर बोले- MLA-मंत्री तक को कुछ नहीं समझता, भीड़ से भी धक्का-मुक्की की हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। एक लाइव शो के दौरान उन्होंने स्टेज पर खड़े पूर्व सरपंच व समर्थकों पर चिल्लाते हुए नीचे उतरने को कह दिया। सिंगर ने कहा- मेरे गाने के प्रोग्राम के बीच में कोई सरपंच हो, कोई एमएलए हो, कोई मंत्री हो, मैं किसी ने कुछ नहीं मानता। आप चाहे सरपंच हो मेरा परफॉर्मेंस नीचे बैठकर देखो। (पूरी खबर पढ़ें)

Epstein Files Sex Scandal Controversy; Hyatt Hotels Chairman

Epstein Files Sex Scandal Controversy; Hyatt Hotels Chairman

न्यूयॉर्क2 दिन पहले कॉपी लिंक हयात होटल्स के कार्यकारी अध्यक्ष अरबपति थॉमस प्रित्जकर 2018 से जेफ्री एपस्टीन के संपर्क में थे। अमेरिका के यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ संबंधों का खुलासा होने के बाद दुनियाभर में इस्तीफों का दौर जारी है। ताजा इस्तीफा अमेरिकी होटल चेन हयात होटल्स के कार्यकारी अध्यक्ष अरबपति थॉमस प्रित्जकर का है। वे इस पद पर 1999 से थे। अमेरिकी न्याय विभाग की फाइल से पता चला है कि 2008 से एपस्टीन और प्रित्जकर लगातार संपर्क में थे। 2018 में एपस्टीन ने प्रित्जकर से अपनी प्रेमिका की दक्षिण-पूर्व एशिया यात्रा की व्यवस्था में मदद का अनुरोध किया था। 2015 का एक अन्य ईमेल बताता है कि एपस्टीन ने दुबई में निवेश बढ़ाने के लिए डीपी वर्ल्ड के सीईओ बिन सुलेयम और प्रित्जकर को जोड़ने की कोशिश की थी। उसने सुलेयम और जेस स्टेली के बीच कारोबारी संबंध बढ़ाने की भी कोशिश की, जो उस समय जेपी मॉर्गन चेस एंड कंपनी में वरिष्ठ कार्यकारी थे। हयात होटल्स के कार्यकारी चेयरमैन थॉमस जे. प्रित्जकर। हयात होटल्स के उत्तराधिकारियों में दूसरे सबसे धनी हैं प्रित्जकर थॉमस जे. प्रित्जकर, परिवार के 13 अरबपति होटल उत्तराधिकारियों में दूसरे सबसे धनी हैं। संपत्ति 6.2 अरब डॉलर है। 1999 से हयात के अध्यक्ष और 1999 से 2006 तक सीईओ रहे। एपस्टीन विवाद में अब तक ये छोड़ चुके पद एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद 10 देशों के 15 प्रोफेशनल्स, नेता और बैंकर्स इस्तीफा दे चुके हैं। इनमें प्रमुख हैं… वर्ल्ड की टॉप लॉजिस्टिक्स कंपनियों में से एक डीपी वर्ल्ड के सीईओ बिन सुलेयम गोल्डमैन सैक्स की शीर्ष वकील कैथी रुएमलर अमेरिकी लॉ फर्म पॉल वीस के चेयरमैन ब्रैड कार्प हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष लैरी समर्स नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री थोरब्योर्न जगलैंड नॉर्वे की राजनयिक मोना जुउल और उनके पति पूर्व राजनयिक टेर्जे रोड-लार्सन अमेरिका में ब्रिटेन के पूर्व राजदूत पीटर मेंडेलसन ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय के छोटे भाई प्रिंस एंड्रयू फुटबॉल टीम न्यूयॉर्क जायंट्स के सह-मालिक स्टीव टिस्क यूएनएचसीआर की स्वीडन की अध्यक्ष जोआना रुबिनस्टीन कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया। जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई। मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं। एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी। हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था। मी टू मूवमेंट की लहर में डूबा एपस्टीन साल 2009 में जेल से आने के बाद एपस्टीन लो प्रोफाइल रहने लगा। ठीक 8 साल बाद अमेरिका में मी टू मूवमेंट शुरू हुआ। साल 2017 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ कई रिपोर्ट्स छापीं। इसमें बताया गया कि वाइंस्टीन ने दशकों तक अभिनेत्रियों, मॉडल्स और कर्मचारियों का यौन शोषण किया। इस घटना ने पूरी दुनिया में सनसनी पैदा कर दी। 80 से ज्यादा महिलाओं ने वाइंस्टीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मी टू (मेरे साथ भी शोषण हुआ) के आरोप लगाए। इसमें एंजेलीना जोली, सलमा हायेक, उमा थरमन और एश्ले जुड जैसे बड़े नाम थे। इसके बाद लाखों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर ‘#MeToo’ लिखकर अपने शोषण की कहानियां शेयर कीं। इसमें वर्जीनिया ग्रिफे नाम की युवती भी थी। उसने एप्सटीन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उसने दावा किया कि उसके साथ 3 साल तक यौन शोषण हुआ था। इसके बाद करीब 80 महिलाओं ने उसके खिलाफ शिकायत की। —————- ये खबर भी पढ़ें… अपनी नर्सरी में धतूरे का पौधा उगाता था जेफ्री एपस्टीन:नशे में इस्तेमाल होता है, भगवान शिव से जुड़ा है इसका फूल हाल ही में जारी हुए एपस्टीन फाइल्स के ईमेल्स में यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की जहरीले पौधों में दिलचस्पी को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इन ईमेल्स में खास तौर पर ‘ट्रम्पेट प्लांट्स’ (धतुरा का पौधा) का जिक्र है। ईमेल्स में ऐसे लेख फॉरवर्ड किए गए थे, जिनमें कोलंबिया में इसके इस्तेमाल का जिक्र था। बताया गया कि इसके असर में व्यक्ति को कहीं भी ‘ले जाया’ जा सकता है, क्योंकि वह पूरी तरह आज्ञाकारी और भ्रमित हो जाता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

अमेरिकी सांसद बोले- कुत्तों-मुसलमानों में से एक को चुनना आसान:फिलिस्तीनी एक्टिविस्ट ने लिखा था- न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा, कुत्ते घर में नहीं रखें

अमेरिकी सांसद बोले- कुत्तों-मुसलमानों में से एक को चुनना आसान:फिलिस्तीनी एक्टिविस्ट ने लिखा था- न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा, कुत्ते घर में नहीं रखें

अमेरिकी सांसद रैंडी फाइन के एक सोशल मीडिया पोस्ट से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने मंगलवार को X पर लिखा कि अगर कुत्तों और मुसलमानों में से एक को चुनना पड़े तो यह मुश्किल फैसला नहीं है। दरअसल, रैंडी फाइन ने यह टिप्पणी न्यूयॉर्क में एक फिलिस्तीनी-अमेरिकी एक्टिविस्ट नरदीन किसवानी की पोस्ट के जवाब में की थी। किसवानी ने लिखा था कि कुत्ते अपवित्र हैं। ऐसे समय में जब न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा है, कुत्तों को घर के अंदर नहीं रखना चाहिए। इन्हें बैन करना चाहिए। इस पर फाइन ने कहा कि दुनिया में 57 ऐसे देश हैं, जहां शरिया कानून लागू है। अगर आप ऐसा चाहते हैं तो वहीं चले जाइए। अमेरिका 58वां मुस्लिम देश नहीं बनेगा। बाद में किसवानी ने कहा कि वह बस मजाक कर रही थीं। यह न्यूयॉर्क में सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों की गंदगी को लेकर चल रही बहस से जुड़ा था। ऐसा उन लोगों के लिए कहा गया था, जो राजनीति में मुस्लिमों के बढ़ते प्रभाव को खतरा मानते हैं। फाइन पर मुसलमानों को अमानवीय दिखाने का आरोप किसवानी ने होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम के पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने अपने फार्म पर एक कुत्ते को गोली मारने की बात कही थी। किसवानी ने लिखा, ‘क्रिस्टी नोएम ने अपने ही कुत्ते को गोली मारने की बात कही और ज्यादातर लोगों ने ध्यान नहीं दिया। न्यूयॉर्क में एक मुस्लिम कह दे कि शहर पालतू जानवरों के लिए सही जगह नहीं है तो उसे मौत की धमकियां मिलने लगती हैं।’ किसवानी ने फाइन पर फिलिस्तीनियों और मुसलमानों को अमानवीय दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों की ओर से आ रही मुस्लिम विरोधी भाषा पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती। फाइन के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज रैंडी फाइन के इस बयान पर वॉशिंगटन में भारी विरोध हुआ है। डेमोक्रेट्स, सिविल राइट्स ग्रुप्स और कई नेताओं ने इसे इस्लामोफोबिया और घृणा फैलाने वाला बताया। अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस काउंसिल (CAIR) ने फाइन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और कहा कि उनके इस्तीफे की मांग पहले से चल रही है। यास्मीन अंसारी ने हाउस स्पीकर से तुरंत निंदा करने को कहा। कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने फाइन को नस्लवादी कहकर इस्तीफा देने को कहा। ब्रिटिश पत्रकार पीयर्स मॉर्गन ने भी उन्हें कड़ी फटकार लगाई। फाइन बोले- कुत्ते हमारे परिवार के सदस्य, इन्हें नहीं छोड़ेंगे फाइन ने विरोध पर पलटवार किया और कहा कि असली समस्या किसवानी का बयान है, जो लिखित रूप में था। फाइन ने न्यूजमैक्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनका पोस्ट किसवानी के बयान के जवाब में था, जो शरिया लॉ (इस्लामी कानून) थोपने की कोशिश है। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका में कुत्ते परिवार के सदस्य हैं, और हम यूरोप की तरह शर्मिंदा होकर हार नहीं मानेंगे।’ उन्होंने कुत्तों की तस्वीरें शेयर कीं, जिन पर ‘डोंट ट्रेड ऑन मी’ (ऐतिहासिक गैड्सडेन फ्लैग का स्लोगन) लिखा था। इस पोस्ट को 42 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले, हजारों लाइक्स, रीपोस्ट्स और कमेंट्स। फाइन ने क्रिटिक्स को जवाब दिया कि किसवानी का बयान लिखित था और लाखों ने देखा। पोस्ट के तुरंत बाद वॉशिंगटन और पूरे अमेरिका में हंगामा मच गया। इसे इस्लामोफोबिया, कट्टरता और अमानवीयकरण कहा गया। फाइन पहले भी गाजा से जुड़े बयानों पर आलोचना झेल चुके हैं। 2025 में उन्होंने गाजा पर कहा था कि गाजावासियों को भूखा मरने दो जब तक इजराइली बंधक रिहा न हों। उन्होंने गाजा का हाल हिरोशिमा और नागासाकी जैसा करने की बात भी की थी। फाइन बोले- यूरोप की तरह कमजोरी नहीं दिखाएंगे फाइन का कहना है कि यूरोप के लोग मुसलमानों के सामने शर्मिंदा होकर या दबाव में आकर अपनी संस्कृति, परंपराओं और आजादी को खो चुके हैं। वे नहीं चाहते कि अमेरिका में भी ऐसा हो। उनका कहना है कि अमेरिका, यूरोप जैसी कमजोरी नहीं दिखाएंगे। फाइन और उनके जैसे कई राइट-विंग ट्रम्प समर्थक अक्सर यह दावा करते हैं कि यूरोप में इस्लामिक टेकओवर हो रहा है। उनके अनुसार बड़े पैमाने पर मुस्लिम इमिग्रेशन से नो-गो जोन्स बन गए हैं, जहां स्थानीय कानून कमजोर पड़ गए हैं। यूरोपीय सरकारें पॉलिटिकल करेक्टनेस या मल्टीकल्चरलिज्म के नाम पर मुसलमानों की मांगों के आगे झुक रही हैं, जैसे कुत्तों पर प्रतिबंध या महिलाओं के अधिकारों में बदलाव। इसका नतीजा यह हो रहा है की यूरोप अपनी मूल संस्कृति और वैल्यूज खो रहा है और लोग शर्मिंदा होकर विरोध नहीं कर पा रहे। फाइन ने खुद कई बार कहा है कि शरिया अमेरिका में नहीं आएगी। अमेरिका इस्लामिक देश नहीं बनेगा। उन्होंने नो शरिया जैसा बिल भी पेश किया है। इजराइल के कट्टर समर्थक माने जाते हैं फाइन रैंडी फाइन एक अमेरिकी राजनेता हैं, जो रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े हैं। उनका जन्म 20 अप्रैल 1974 को एरिजोना के ट्यूसन शहर में हुआ था। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से 1996 में बीए डिग्री और 1998 में एमबीए पूरा किया। पेशे से वे बिजनेस एक्जीक्यूटिव हैं और पहले जुआ इंडस्ट्री में काम कर चुके हैं। राजनीति में उन्होंने फ्लोरिडा स्टेट हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 2016 से 2024 तक सेवा की, फिर फ्लोरिडा संसद में 2024-2025 तक रहे। अप्रैल 2025 में एक स्पेशल इलेक्शन में वे फ्लोरिडा के 6वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए चुने गए। वे इजराइल के कट्टर समर्थक हैं और अक्सर फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष पर विवादास्पद बयान देते हैं। न्यूयॉर्क मेयर पद पर जोहरान ममदानी मुस्लिम समुदाय से हैं न्यूयॉर्क इस्लाम की ओर बढ़ रहा है, नरदीन किसवानी के इस बयान को न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी से जोड़ कर देखा जा रहा है। दरअसल, ममदानी इस पद पर आने वाले पहले मुस्लिम हैं। हालांकि, किसवानी ने ममदानी का जिक्र नहीं किया। इन्होंने 2025 में मेयर चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। वे शहर के पहले मुस्लिम और 100 साल से अधिक समय में सबसे युवा गवर्नर बने। उनका कार्यकाल 1 जनवरी 2026 से शुरू हुआ, जिसमें वे किराए पर रोक, निःशुल्क बस सेवा, किफायती आवास और शहर को अधिक सस्ता बनाने पर जोर दे रहे हैं। जोहरान ममदानी एक प्रमुख अमेरिकी राजनीतिज्ञ हैं। उनका जन्म 18 अक्टूबर 1991 को युगांडा की राजधानी कंपाला में हुआ था। वे प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्देशक मीरा नायर के बेटे हैं।

गलगोटिया यूनिवर्सिटी AI समिट से बाहर:पहले चीनी रोबोट, फिर ड्रोन को अपना बताया; कांग्रेस बोली- सरकार ने देश की इमेज खराब की

गलगोटिया यूनिवर्सिटी AI समिट से बाहर:पहले चीनी रोबोट, फिर ड्रोन को अपना बताया; कांग्रेस बोली- सरकार ने देश की इमेज खराब की

चीनी रोबोट और कोरियन ड्रोन को अपना प्रोजेक्ट बताने वाली गलगोटिया यूनिवर्सिटी को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो से बाहर निकाल दिया गया है। आयोजकों ने पहले यूनिवर्सिटी के पवेलियन की बिजली काटी, फिर ताला लगाकर बेरीकेडिंग कर दी गई। यह कार्रवाई उस वीडियो के वायरल होने के बाद हुई है, जिसमें यूनिवर्सिटी ने एक चाइनीज कंपनी के रोबोटिक डॉग को अपनी खुद की खोज बताया था। चीनी रोबो डॉग के साथ ही यूनिवर्सिटी ने कोरियन कंपनी के एक ड्रोन को भी अपना बताया था। इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने देश की इमेज खराब की है। चीनी मीडिया ने हमारा मजाक उड़ाया है। यह भारत के लिए वाकई शर्मिंदगी की बात है। वीडियो वायरल होने के बाद शुरू हुआ विवाद वीडियो में यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह कह रही हैं कि इस रोबोटिक डॉग का नाम ‘ओरियन’ है। इसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ ने तैयार किया है। उन्होंने ये भी कहा कि यूनिवर्सिटी AI के क्षेत्र में 350 करोड़ रुपए का निवेश कर रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद कई टेक एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने दावा किया कि यह असल में चीनी कंपनी ‘यूनिट्री’ का ‘Go2’ मॉडल है, जो बाजार में 2-3 लाख रुपए में उपलब्ध है। वहीं एक अन्य वीडियो में यूनिवर्सिटी जिस ड्रोन को कैंपस में ‘शुरुआत से’ तैयार करने का दावा कर रही हैं, उसे यूजर्स ने ₹40 हजार वाला रेडीमेड ‘स्ट्राइककर V3 ARF’ मॉडल बताया है। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने माफी मांगी AI समिट में हुई इस घटना के लिए गलगोटिया यूनिवर्सिटी माफी मांगी है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि उनके स्टॉल पर मौजूद एक प्रतिनिधि को प्रोडक्ट के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। कैमरे के सामने आने के उत्साह में उस लड़की ने कुछ गलत टेक्निकल जानकारियां दे दीं, जबकि उसे मीडिया से बात करने की इजाजत भी नहीं थी। यूनिवर्सिटी ने माना था, हमने नहीं बनाया ये डॉग वीडियो वायरल होने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने कहा- हमने लगातार कैंपस में बेहतरीन टेक्नोलॉजी लाने की कोशिश की है। क्यों? क्योंकि जब छात्र नई चीजें देखते हैं, तभी उनकी सोच विकसित होती है। और यही सोच नए रचनाकारों को जन्म देती है। हाल ही में यूनिट्री से लिया गया रोबोटिक डॉग इसी सफर का एक हिस्सा है। यह सिर्फ दिखाने के लिए रखी गई कोई मशीन नहीं है, यह एक चलता-फिरता क्लासरूम है। हमारे छात्र इस पर प्रयोग कर रहे हैं, इसकी क्षमताओं को परख रहे हैं और इस प्रक्रिया में अपना ज्ञान बढ़ा रहे हैं। हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि गलगोटिया ने यह रोबोटिक डॉग नहीं बनाया है और न ही हमने कभी ऐसा दावा किया है। लेकिन हम ऐसे दिमाग तैयार कर रहे हैं जो जल्द ही भारत में ऐसी ही टेक्नोलॉजी को डिजाइन करेंगे, उनकी इंजीनियरिंग करेंगे और उन्हें यहीं बनाएंगे। इनोवेशन की कोई सीमा नहीं होती। सीखने की भी नहीं होनी चाहिए। हम दुनियाभर से बेहतरीन टेक्नोलॉजी लाना जारी रखेंगे ताकि हमारे छात्र उनका अध्ययन कर सकें, उन्हें चुनौती दे सकें और उनमें सुधार कर सकें और अंत में वर्ल्ड-क्लास समाधान तैयार कर सकें। नेहा सिंह बोलीं- जोश में बात साफ नहीं कह पाई प्रोफेसर नेहा ने कहा कि यह विवाद इसलिए हुआ क्योंकि बातें साफ तौर पर नहीं रखी गईं। मैं इसकी जिम्मेदारी लेती हूं। यह सब बहुत जोश और उत्साह में बहुत जल्दी-जल्दी हुआ। एक्स ने यूनिवर्सिटी के दावे को गलत बताया यूनिवर्सिटी के स्पष्टीकरण के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने इस पोस्ट पर एक ‘कम्युनिटी नोट’ जोड़ दिया। इसमें कहा गया कि यूनिवर्सिटी का यह दावा कि उन्होंने इसे अपना नहीं बताया, भ्रामक है। एक्स का कम्युनिटी नोट एक ऐसा फीचर है, जिसमें आम यूजर्स ही किसी भ्रामक पोस्ट पर सही जानकारी और संदर्भ जोड़कर उसे फैक्ट-चेक करते हैं। कांग्रेस बोली- मोदी सरकार ने दुनिया में देश का मजाक बनवाया कांग्रेस ने इस मामले पर कहा कि मोदी सरकार ने AI के मामले में दुनिया भर में भारत का मजाक बनवाया है। AI समिट में चीन के रोबोट्स को हमारा बताकर दिखाया जा रहा है। चीनी मीडिया ने हमारा मजाक उड़ाया है। यह भारत के लिए वाकई शर्मिंदगी की बात है। इससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह है कि मोदी के मंत्री अश्विनी वैष्णव भी इसी झूठ में शामिल हैं और भारतीय समिट में चीन के रोबोट्स को प्रमोट कर रहे हैं। मोदी सरकार ने देश की छवि को ऐसा नुकसान पहुंचाया है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती। वहीं नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि भारत के टैलेंट और डेटा का सही इस्तेमाल करने के बजाय, यह AI समिट एक ‘डिसऑर्गनाइज्ड पीआर स्पेक्टेकल’ बनकर रह गया है। यानी एक ऐसा इवेंट जिसे बड़ी इमेज बनाने (PR) के लिए बहुत बढ़ा-चढ़ाकर आयोजित किया गया हो, लेकिन खराब मैनेजमेंट की वजह से वह तमाशा बन जाए। नॉलेज बॉक्स: क्या है यूनिट्री Go2 रोबोटिक डॉग रोबोटिक डॉग और ह्युमनॉइड रोबोट बनाती है यूनिट्री यूनिट्री चीन की एक मशहूर टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो हाई-परफॉर्मेंस वाले रोबोटिक डॉग और ह्युमनॉइड रोबोट बनाने के लिए दुनियाभर में जानी जाती है। यह कंपनी मुख्य रूप से किफायती और एडवांस सेंसर वाली रोबोटिक्स तकनीक विकसित करती है, जिसका इस्तेमाल रिसर्च, एजुकेशन और इंडस्ट्रियल कामों के लिए किया जाता है। 2011 में शुरू हुई थी गलगोटिया यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी 2011 में शुरू हुई थी। ये यूनिवर्सिटी 20 अलग-अलग स्कूलों के जरिए डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक के 200 से ज्यादा कोर्स कराती हैं। सुनील गलगोटिया यूनिवर्सिटी के चांसलर और ध्रुव गलगोटिया CEO हैं। अब दिल्ली में चले रही AI समिट के बारे में जानें… ————————————————- ये खबर भी पढ़े… सुंदर पिचाई ने PM मोदी से मुलाकात की:AI समिट में शामिल होंगे गूगल CEO, मोदी बोले-2030 तक $400 बिलियन का होगा आईटी सेक्टर गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने आज यानी 18 फरवरी को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। पिचाई ‘ग्लोबल AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हैं। 20 फरवरी को वे इस समिट में की-नोट एड्रेस (मुख्य भाषण) देंगे। पूरी खबर पढ़ें…

Packaged Milk Controversy; Coliform Bacteria Health Risk & Prevention Tips

Packaged Milk Controversy; Coliform Bacteria Health Risk & Prevention Tips

Hindi News Lifestyle Packaged Milk Controversy; Coliform Bacteria Health Risk & Prevention Tips | FSSAI 8 दिन पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें ‘ट्रस्टिफाइड’ नाम के एक टेस्टिंग प्लेटफॉर्म ने दावा किया है कि भारत की कुछ प्रतिष्ठित कंपनियों के पैकेज्ड दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया तय सीमा से कई गुना ज्यादा पाया गया। बैक्टीरिया की ये मात्रा सुरक्षित स्तर से बहुत ज्यादा है, जो दूध के हाइजीन और क्वालिटी पर सवाल उठाती है। इन दावों के सामने आने के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। इसलिए जरूरत की खबर में डेयरी प्रोडक्ट्स पर उठ रहे सवालों पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- दूध में मिला कोलिफॉर्म बैक्टीरिया क्या है? यह बैक्टीरिया कितना खतरनाक होता है? दूध खरीदते हुए किन बातों का ध्यान रखें? दूध को सुरक्षित तरीके से अपनी डाइट में कैसे शामिल करें? एक्सपर्ट: डॉ. अरविंद अग्रवाल, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन एंड इन्फेक्शियस डिजीज, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- पैकेज्ड दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मिलने का दावा कितना सही और गंभीर है? जवाब- पैकेज्ड दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मिलने के दावे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। डेयरी प्रोडक्ट्स की जांच 100% ब्लाइंड टेस्टिंग करने वाली स्वतंत्र संस्था ‘ट्रस्टिफाइड’ ने की है। 100% ब्लाइंड टेस्टिंग का मतलब है कि ब्रांड की पहचान बताए बिना निष्पक्ष जांच करना। दूध की क्वालिटी में लगातार कमियां मिल रही हैं। पिछले महीने गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मिलावटी दूध बनाने वाली अवैध यूनिट्स पर कार्रवाई भी हुई है। गुजरात की एक रेड में सामने आया कि दूध में पानी, मिल्क पाउडर, कास्टिक सोडा, तेल, डिटर्जेंट और यूरिया मिलाया जा रहा था। इसलिए दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मिलने का दावा बेहद गंभीर है। सवाल- भारत के कुछ प्रतिष्ठित दूध के ब्रांड्स पर उठे सवाल कितने जायज हैं? जवाब- भारत में पैकेज्ड दूध बेचने से पहले FSSAI (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के सख्त गुणवत्ता मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। बड़े ब्रांड्स आमतौर पर कई स्तरों की क्वालिटी जांच से गुजरते हैं। हालांकि किसी भी फूड प्रोडक्ट में गड़बड़ी की आशंका को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता है। इसलिए शिकायत या रिपोर्ट सामने आने के बाद फूड आइटम्स की गुणवत्ता को लेकर स्वतंत्र रूप से टेस्टिंग जरूरी है। ऐसे में भारत की कुछ प्रतिष्ठित डेयरी कंपनियों पर उठे सवाल की सख्ती से जांच करने की जरूरत है। डेयरी प्रोडक्ट्स पर लगातार उठ रहे सवालों के बाद FSSAI ने जांच और सैंपलिंग तेज कर दी है। सवाल- कोलिफॉर्म बैक्टीरिया क्या होता है और यह दूध में कैसे पहुंचता है? जवाब- कोलिफॉर्म बैक्टीरिया आमतौर पर इंसानों और जानवरों के मल, मिट्टी, पानी और गंदगी में पाए जाते हैं। इसके कारण दस्त, उल्टी और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। साथ ही यह दूध में ई. कोली जैसे हानिकारक बैक्टीरिया की मौजूदगी का संकेत हो सकता है। ई. कोली बैक्टीरिया से गंभीर संक्रमण हो सकता है। ये बैक्टीरिया जानवरों का दूध निकालते समय, प्रोसेसिंग या स्टोरेज के दौरान हाइजीन का ध्यान न रखने के कारण आ जाते हैं। सवाल- क्या दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मिलने का मतलब उसकी क्वालिटी खराब होना है? जवाब- दूध में कोलिफॉर्म बैक्टीरिया मानक से अधिक होने का मतलब है कि उसकी हाइजीन का ध्यान नहीं रखा गया है। दूध किसी-न-किसी स्तर पर गंदगी, दूषित पानी या खराब हैंडलिंग से गुजरा है। साइंटिफिक तरीके से पैकेज्ड और सुरक्षित माने जाने वाले दूध में मानक से कई गुना ज्यादा बैक्टीरिया की मात्रा लापरवाही दिखाती है। इससे दूध जल्दी खराब हो सकता है और फूड इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। सवाल- कोलिफॉर्म बैक्टीरिया सेहत को कैसे नुकसान पहुंचा सकता है? जवाब- दूध में मानक से अधिक कोलिफॉर्म बैक्टीरिया होने का मतलब है कि यह दूषित है। इसके कारण पेट में संक्रमण, दस्त, उल्टी, पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग का खतरा हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसका गंभीर असर हो सकता है। इसलिए दूषित दूध से बचना जरूरी है। इससे क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- कोलिफॉर्म बैक्टीरिया से किन लोगों को ज्यादा हेल्थ रिस्क होता है? जवाब- इसके कारण सबसे अधिक समस्या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को होती है। ये सभी रिस्क के दायरे में हैं- छोटे बच्चे: इनकी इम्यूनिटी पूरी तरह विकसित नहीं होती है। बुजुर्ग लोग: इनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। गर्भवती महिलाएं: संक्रमण मां और शिशु दोनों को प्रभावित कर सकता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग: इन्हें बीमारियों का रिस्क ज्यादा होता है। डायबिटिक लोग: इन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग: इन्हें संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। कुपोषण से ग्रसित लोग: इनका शरीर संक्रमण से लड़ने में सक्षम नहीं होता है। जिनका डाइजेस्टिव सिस्टम खराब है: इन्हें पेट की समस्याओं का जोखिम ज्यादा होता है। सवाल- क्या दूध को उबालने से कोलिफॉर्म बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं? जवाब- बैक्टीरिया हाई-टेम्परेचर सहन नहीं कर पाते हैं। उबालने से संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाता है। हालांकि अगर दूध उबालने के बाद दूषित बर्तन या गंदे हाथों के संपर्क में आए, तो बैक्टीरिया दोबारा बढ़ सकते हैं। इसलिए उबालने के साथ साफ-सफाई भी जरूरी है। सवाल- दूध खरीदते समय पैकेट पर कौन-कौन सी चीजें जरूर चेक करनी चाहिए? जवाब- पैकेज्ड दूध खरीदते समय भी कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- खुले और पैकेज्ड दूध में कौन सा ज्यादा सुरक्षित है और क्यों? जवाब- पैकेज्ड दूध कई मायनों में ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसे प्रोसेसिंग और पैकिंग के दौरान FSSAI के तय सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों का पालन करना होता है। इसमें पॉश्चरीकरण (ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें दूध के हानिकारक बैक्टीरिया को मारने के लिए एक निश्चित समय तक उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है और फिर तुरंत ठंडा कर दिया जाता है।) जैसी प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे हानिकारक बैक्टीरिया बेहद कम हो जाते हैं। वहीं खुले दूध में यह ट्रैक करना मुश्किल होता है कि दूध निकालने, स्टोरेज करने और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान कितनी साफ-सफाई रखी गई है। इससे संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि