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हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने कहा कि हम हरियाणा में बादशाह के शो नहीं होने देंगे। बॉलीवुड सिंगर और रैपर बादशाह के ‘टटीरी’ गाने में आपत्तिजनक शब्दों और लड़कियों के सीन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। रविवार को कुरुक्षेत्र पहुंची हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष रेणु भाटिया ने कहा- ‘बेटियों के लिए घटिया शब्द बोलने वाले को बादशाह नहीं रहन . वहीं गाने में फीमेल वोकल देने वाली कैथल की सिमरन जागलान के पिता हरियाणवी सिंगर कर्मबीर फौजी ने दैनिक भास्कर एप की टीम से बातचीत में कहा कि उनकी बेटी ने सिर्फ अपनी लाइनें रिकॉर्ड कर बादशाह की टीम को भेजी थीं। उन्हें गाने के रिलीज होने के बाद बादशाह के रैप की लाइनों के बारे में पता चला। कर्मबीर ने यह भी कहा कि विवाद होने के बाद उन्होंने बादशाह की टीम से बात की और इन लाइनों पर आपत्ति जताई। उन्होंने टीम को स्पष्ट रूप से कह दिया कि यदि गाना दोबारा रिलीज हुआ तो इसकी वर्डिंग बदली जाए। टटीरी गाने में बोले गए कुछ आपत्तिजनक शब्दों और लड़कियों के स्कूल ड्रेस में डांस करने को लेकर विवाद हो रहा है। सिलसिलेवार ढंग से जानिए कर्मबीर फौजी ने क्या कहा… गाना फेमस हुआ, इसलिए विवाद कर्मबीर फौजी ने बताया कि गाना रिलीज होते ही काफी फेमस हो गया। अगर यह फेमस नहीं होता तो शायद इतना विवाद नहीं होता। गाने में हरियाणवी बोल थे, इसलिए पब्लिक भी खुश थी और परिवार को भी खुशी थी कि उनकी बेटी का गाना बॉलीवुड तक पहुंच रहा है। गाने का म्यूजिक भी अच्छा था और सिमरन की आवाज भी लोगों को पसंद आई। गाने के शब्दों को लेकर कई फोन आए कर्मबीर ने कहा कि गाने के रैप हिस्से में कुछ ऐसे शब्द थे, जिनकी वजह से विवाद खड़ा हुआ। वही शब्द गलत थे और लोगों ने उन पर आपत्ति जताई। इसलिए गाने को यूट्यूब से हटा दिया गया। समाज में इस तरह की वर्डिंग स्वीकार नहीं होती और इसलिए लोगों की नाराजगी भी सामने आई। कई ग्रामीणों के मेरे पास फोन आए, लेकिन किसी भी तरह की धमकी नहीं मिली। लोगों ने बस यह कहा कि ऐसे शब्द गानों में नहीं होने चाहिए। हरियाणवी सिंगर कर्मबीर फौजी अपनी बेटी सिमरन (बाएं से पहली) और शिवानी (बीच में) जागलान के साथ। हमें रैप की लाइनों का नहीं पता था कर्मबीर फौजी ने बताया कि गाना रिलीज होने से पहले हमें बादशाह के रैप की लाइनों की जानकारी नहीं थी। हमें लगा था कि रैप भी वैसा ही होगा जैसी गाने की लाइनें हैं। विवाद के बाद उन्होंने बादशाह की टीम से बात की। हमने उन्हें साफ कहा कि इस तरह की वर्डिंग यहां की संस्कृति में स्वीकार नहीं की जाती। बस और स्कूल की भी जानकारी नहीं गाने में दिखाई गई हरियाणा रोडवेज की बस पर कर्मबीर ने कहा कि उन्हें शूटिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं है। परिवार की तरफ से सिर्फ गाना रिकॉर्ड कर भेजा गया था। गाने की डबिंग कैथल में हुई थी, जबकि बाकी गाने की डबिंग मुंबई में हुई होगी। जो जींद के सच्चा खेड़ा गांव के स्कूल को बादशाला लिखा गया है, उसकी भी हमें जानकारी नहीं है। हम लोग वहां नहीं गए। स्कूल को एडिटिंग के जरिए बनाया गया। किसने क्या गाया, यह सबके सामने कर्मबीर फौजी ने कहा कि किसी भी ऐसी चीज से दुख होता है जो संस्कृति को नुकसान पहुंचाए। ऐसे मामलों में खुशी या दुख से ज्यादा समाज की मर्यादा अहम होती है और उसी के हिसाब से चलना पड़ता है। सिमरन जागलान ने एक फोक सॉन्ग गाया था, जबकि बादशाह ने उसे रीमिक्स किया था। गाने में किसने क्या गाया है, यह अब सबके सामने है। 26 फरवरी को कैथल और सोनीपत में बादशाह टटीरी गाने की प्रमोशन के लिए आए थे। पंचकूला-जींद में FIR, यूट्यूब से गाना हटा टटीरी गाने के रैप में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, लड़कियों को स्कूल ड्रेस में बैग फेंकते हुए दिखाया गया है, और हरियाणा रोडवेज बस का इस्तेमाल किया गया है, जिसके कारण विवाद हो रहा है। इस मामले में बादशाह के खिलाफ पंचकूला और जींद में अलग-अलग मामले दर्ज हुए हैं। हरियाणा पुलिस ने बादशाह की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित करने और लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी करने की बात कही है। इसके अलावा, गाने को यूट्यूब से हटा दिया गया है, और पुलिस ने यह भी कहा है कि जो भी इस पर रील बनाएगा, उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बादशाह बोले- बेटा समझकर माफ कर दो विवाद के बाद बादशाह ने वीडियो जारी कर कहा, “मेरे गाने ‘टटीरी’ के कुछ बोल और सीन से हरियाणा के कुछ लोगों को ठेस पहुंची है। मैं खुद हरियाणा से हूं। मेरा कोई उद्देश्य नहीं था कि मैं हरियाणा के किसी बच्चे या महिला के बारे में ऐसी बेहूदी बात कहूं। मैं हिप-हॉप जॉनर से हूं, जहां बोल हमेशा कॉम्पिटिशन को नीचा दिखाते हैं। एक तरह से ये प्रतिद्वंद्वी के लिए होते हैं। मैंने हमेशा कोशिश की है कि मैं हरियाणा की संस्कृति को आगे लेकर जाऊं। अगर मेरे गाने के उस हिस्से से किसी को बुरा लगा हो, तो मुझे हरियाणा का बेटा समझकर माफ कर दीजिए।” ——————————— ये खबर भी पढ़ें :- बादशाह संग ‘टटीरी’ सॉन्ग गाने वाली सिमरन की कहानी:पिता हरियाणवी सॉन्ग ‘पानी आली पानी प्यादे’ गाकर फेमस हुए, बेटी बॉक्सिंग में स्टेट चैंपियन रही बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह ने हरियाणवी फोक सॉन्ग ‘टटीरी’ लॉन्च किया है। इस गाने में कैथल की रहने वाली सिमरन जागलान ने अपनी आवाज दी है। सिमरन, हरियाणवी सिंगर कर्मबीर फौजी की बेटी हैं, जिन्होंने फेमस हरियाणवी सॉन्ग ‘पानी आली पानी प्यादे’ गाया है। पढ़ें पूरी खबर…
'मैं हमेशा देश के समर्थन में खड़ी रही हूं':खामेनेई की मौत पर दुख जताने के बाद ट्रोल हुईं फरहाना भट्ट ने किया रिएक्ट

‘बिग बॉस 19’ की पूर्व कंटेस्टेंट फरहाना भट्ट ने ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर दुख जताने के बाद हुई ट्रोलिंग पर प्रतिक्रिया दी है। फरहाना ने कहा कि उन्होंने हमेशा अपने देश के समर्थन में खड़े होकर काम किया है और देश के खिलाफ किसी भी नैरेटिव का विरोध किया है। इंस्टेंट बॉलीवुड से बातचीत में फरहाना भट्ट ने अपने बयान को लेकर कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है और लोग अपने विचार अलग-अलग तरीके से व्यक्त कर सकते हैं। विचारों में मतभेद होना स्वाभाविक है और वह इसे स्वीकार करती हैं। उन्होंने कहा कि लोग उनकी बात को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने देश के लिए काम किया है और आगे भी करती रहेंगी। कश्मीर में शांति के लिए कई पहल कीं: फरहाना फरहाना ने कहा कि पहलगाम हमले, ईरान, फिलिस्तीन या इजरायल से जुड़े मुद्दों पर वह पहले भी अपनी राय रखती रही हैं। पुलवामा हमले और पहलगाम हमले जैसे मामलों में भी वह भारतीय सेना के साथ खड़ी रही हैं। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि कश्मीर में शांति से जुड़े काम के दौरान उन्होंने भारतीय सेना के साथ मिलकर कई पहल की हैं। कश्मीर में सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके काम की सराहना की है और उन्हें कई बार सम्मानित भी किया गया है। वहीं, होली को लेकर हुई ट्रोलिंग पर जवाब देते हुए फरहाना ने कहा कि भारत एक स्वतंत्र देश है। यहां हर व्यक्ति को अपने तरीके से त्योहार मनाने और अपनी बात रखने का अधिकार है, बशर्ते इससे देश की गरिमा को ठेस न पहुंचे। फरहाना ने खामेनेई के निधन पर क्या कहा था? खामेनेई के निधन को लेकर फरहाना भट्ट ने कहा था, “बिल्कुल, वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्हें हम कभी नहीं भूल सकते। वे हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे। इस घटना से सभी कश्मीरी गहरे सदमे में हैं। आप विश्वास नहीं करेंगे, सेहरी के बाद मैं बिल्कुल नहीं सो पाई। मैं बहुत दुखी थी। ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था।”
खिलचीपुर में अतिक्रमण हटाने पहुंची नगर परिषद टीम से विवाद:युवक ने पावड़ा उठाकर कर्मचारियों को डराने की कोशिश की

राजगढ़ के खिलचीपुर में शुक्रवार को नगर परिषद की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के दौरान विवाद की स्थिति बन गई। नगर परिषद के राजस्व उप निरीक्षक राजेन्द्र दांगी कर्मचारियों और जेसीबी मशीन के साथ चौराहे पर स्थित नेहरू बाल उद्यान के सामने लगी गुमटियों को हटाने पहुंचे थे। टीम ने अतिक्रमणकारियों से पहले स्वयं अपनी गुमटियां हटाने के लिए कहा, लेकिन इसी दौरान एक युवक ने कर्मचारियों को डराने के लिए पावड़ा उठा लिया। मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और शिकायत के बाद युवक को थाने में बैठा लिया गया। नेहरू बाल उद्यान के सामने हुई कार्रवाई नगर परिषद की टीम शुक्रवार को नेहरू बाल उद्यान के सामने सड़क किनारे लगी गुमटियों को हटाने पहुंची थी। टीम के साथ नगर परिषद के कर्मचारी और जेसीबी मशीन भी मौजूद थी। अधिकारियों ने पहले गुमटी संचालकों से कहा कि वे स्वयं अपनी गुमटियां हटा लें, ताकि उन्हें नुकसान न हो। युवक ने पावड़ा उठाकर किया विवाद कार्रवाई के दौरान एक युवक ने अचानक पावड़ा उठा लिया और कर्मचारियों को डराने की कोशिश करने लगा। युवक के इस व्यवहार से मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थिति बिगड़ने की आशंका के बीच नगर परिषद के कर्मचारियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शिकायत के बाद युवक को थाने में बैठा लिया गया। जेसीबी से हटाई गईं गुमटियां नगर परिषद की टीम ने कार्रवाई के दौरान जेसीबी मशीन की मदद से कुछ गुमटियों को हटाकर जब्त किया। वहीं कई दुकानदारों ने कार्रवाई शुरू होते ही अपनी गुमटियां खुद ही हटाना शुरू कर दिया, ताकि उनका सामान खराब न हो। कार्रवाई को लेकर उठे सवाल इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि नगर परिषद की कार्रवाई केवल नेहरू बाल उद्यान के सामने तक ही सीमित रही, जबकि शहर के कई प्रमुख स्थानों पर लंबे समय से बड़े पैमाने पर अतिक्रमण फैला हुआ है। शहर के अन्य क्षेत्रों में भी अतिक्रमण स्थानीय लोगों के अनुसार तहसील चौराहा, इमली स्टैंड, छापीहेड़ा नाका, बस स्टैंड, झालावाड़ नाका और सोमवारिया क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में लोगों ने सरकारी जमीन पर गुमटियां रखी हुई हैं। कई जगह इन गुमटियों को किराए पर भी दिया जा रहा है। लोगों का यह भी कहना है कि नगर परिषद कार्यालय के सामने ही कुछ दुकानदारों ने 10 फीट की दुकानों को बढ़ाकर करीब 30 फीट तक कर लिया है, लेकिन वहां अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अनुमति लेकर दुकान लगाने का दावा इसी बीच उत्तर प्रदेश निवासी सुनील कुमार ने बताया कि उन्होंने फरवरी माह में 4500 रुपए जमा कर नगर परिषद से दुकान लगाने की अनुमति ली थी। इसके लिए उन्हें रसीद भी दी गई थी। लेकिन शुक्रवार को अचानक उनकी अनुमति निरस्त कर दी गई, रसीद फाड़ दी गई और पैसे वापस कर दिए गए। इसके साथ ही उनसे तुरंत गुमटी हटाने के लिए कहा गया। दुकानदारों ने उठाई वैकल्पिक व्यवस्था की मांग दुकानदारों का कहना है कि यदि नगर परिषद को अतिक्रमण हटाना ही था, तो पहले उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था देनी चाहिए थी। अचानक कार्रवाई से उनका रोजगार संकट में पड़ गया है और कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है। रंग पंचमी के बाद होगी बड़ी कार्रवाई नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) देवनारायण दांगी ने बताया कि जिस युवक ने कार्रवाई के दौरान विवाद किया था, उसके खिलाफ थाने में आवेदन दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन दुकानों की शिकायत मिली थी, उन्हें हटाया गया है। CMO के अनुसार जल्द ही शहर में मुनादी कराई जाएगी और रंग पंचमी के बाद पूरे शहर में फैले अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
Govinda on David Dhawan: Affair was Dangerous for Career

2 घंटे पहले कॉपी लिंक 90 के दशक में बॉलीवुड को कई सुपरहिट कॉमेडी फिल्में देने वाली गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी की कड़वाहट एक बार फिर सामने आई है। गोविंदा ने हाल ही में इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि डेविड धवन उनके प्रति वफादार नहीं थे। गोविंदा के मुताबिक, जब उन्हें लगा कि मामला अब उनके करियर के लिए खतरनाक हो रहा है, तो उन्होंने इस जोड़ी से दूरी बनाना ही बेहतर समझा। गोविंदा ने कहा, मुझे ऐसा लगता है कि डेविड अपने बेटे वरुण के साथ वैसी फिल्में नहीं कर पाएंगे जैसी उन्होंने मेरे साथ की थीं। गोविंद और डेविड की जोड़ी ने साल 2007 में फिल्म ‘पार्टनर’ में आखिरी बार काम किया था। गोविंदा बोले- डेविड के मन में कुछ और था इंटरव्यू में गोविंदा ने डेविड धवन अपने काम के प्रति तो ईमानदार थे, लेकिन एक दोस्त और एक्टर के तौर पर वफादार नहीं रहे। उन्होंने आगे कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में वफादारी का बहुत महत्व है। अगर आपकी वफादारी किसी और के प्रति है, तो ईमानदारी पर सवाल उठेंगे ही। मुझे कभी नहीं लगा कि वह कोई अजनबी हैं, लेकिन मुझे महसूस हुआ कि कुछ लोग उन्हें मेरे खिलाफ भड़का रहे थे।गोविंदा ने बताया कि एक वक्त ऐसा आया जब उन्हें लगा कि अब चीजें हाथ से बाहर निकल रही हैं। उन्होंने कहा, मुझे लगा कि ये मामला अब खतरनाक हो गया है, इसलिए इससे बाहर निकलना ही ठीक है। बता दें कि साल 2007 में फिल्म ‘पार्टनर’ के लिए यह जोड़ी दोबारा साथ आई थी। गोविंदा ने ही डेविड को सलाह दी थी कि इस फिल्म में सलमान खान को साथ लिया जाए। फिल्म ब्लॉकबस्टर रही, लेकिन इसके बाद दोनों ने फिर कभी साथ काम नहीं किया। 90 के दशक में गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी ने करीब 15 सुपरहिट फिल्में दीं। चश्मे बद्दूर’ फिल्म ने बढ़ाई थी कड़वाहट गोविंदा और डेविड के बीच दरार तब और गहरी हुई जब 2013 में ‘चश्मे बद्दूर’ की रीमेक बनी। गोविंदा का दावा है कि इस फिल्म का आइडिया उन्होंने ही डेविड को दिया था, लेकिन डेविड ने उन्हें बिना बताए फिल्म किसी और के साथ बना ली। गोविंदा ने कहा कि जब उन्होंने अपनी 18वीं फिल्म साथ करने के लिए डेविड को फोन किया, तो डायरेक्टर ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया। वरुण धवन के साथ वैसा जादू मुश्किल इंटरव्यू के दौरान जब गोविंदा से वरुण धवन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि डेविड अब वही सफलता अपने बेटे के साथ दोहराना चाहते हैं। गोविंदा बोले, मुझे ऐसा लगता है कि वह अपने बेटे के साथ वैसी फिल्में नहीं कर पाएंगे जैसी उन्होंने मेरे साथ की थीं। वैसा जादू दोबारा क्रिएट करना बहुत मुश्किल काम है। सुपरहिट रही गोविंदा-डेविड धवन की जोड़ी 90 के दशक में गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी ने मिलकर ‘कुली नंबर 1’, ‘हीरो नंबर 1’, ‘साजन चले ससुराल’ और ‘राजा बाबू’ जैसी करीब 15 सुपरहिट फिल्में दीं। उस दौर में डेविड के निर्देशन और गोविंदा की कॉमेडी का बॉक्स ऑफिस पर एकतरफा राज था, लेकिन बाद में आपसी मनमुटाव के कारण यह जोड़ी टूट गई। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
डायरेक्टर सुदीप्तो सेन को मिली धमकियां:बताया क्यों नहीं हैं द केरल स्टोरी पार्ट 2 में शामिल, ‘चरक’ से लौटे, हाथरस कांड को लाएंगे सामने

‘द केरल स्टोरी’ के निर्देशक सुदीप्तो सेन एक बार फिर अपनी नई फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ को लेकर सुर्खियों में हैं। सामाजिक और संवेदनशील मुद्दों पर फिल्में बनाने के लिए पहचाने जाने वाले सेन इस बार आस्था और अंधविश्वास के टकराव को बड़े पर्दे पर पेश कर रहे हैं। ‘चरक’ केवल एक ऐतिहासिक उत्सव की कहानी नहीं है, बल्कि परंपरा, तर्क, समाज और अंधविश्वास के बीच के जटिल संबंधों को दिखाने की कोशिश है। फिल्म की रिसर्च प्रक्रिया, विवाद, सेंसर बोर्ड के मुद्दे, आलोचनाओं और उनके खिलाफ उठ रही आवाजों के बारे में सुदीप्तो ने खुलकर अपने विचार साझा किए हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुदीप्तो ने बताया कि उनके लिए सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज से सवाल पूछने और जागरूकता फैलाने का एक जरिया है। ‘द केरल स्टोरी’ के बाद आप फिर एक सामाजिक मुद्दे पर फिल्म लेकर आ रहे हैं। ‘चरक फेयर ऑफ फेथ’ के बारे में बताइए। कितनी रिसर्च की गई है? ‘चरक’ कोई नई परंपरा नहीं है। ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि यह उत्सव लगभग एक हजार साल से भी अधिक समय से पूर्वी भारत बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और झारखंड साथ ही दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में मनाया जाता रहा है। चैत्र महीने (करीब 15 मार्च से 15 मई) के बीच यह उत्सव बड़े पैमाने पर आयोजित होता है। पश्चिम बंगाल में जैसे दुर्गा पूजा की लोकप्रियता है, उसी तरह ‘चरक’ भी अत्यंत लोकप्रिय है। इसे मां काली और भगवान शिव की आराधना से जोड़ा जाता है। लोकविश्वास है कि इस दौरान देवी-देवता धरती पर आकर भक्तों के बीच निवास करते हैं। बचपन में हम जेब खर्च बचाकर इस मेले का इंतजार करते थे। हजारों लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम इससे जुड़े हैं। लेकिन इस उत्सव का एक दूसरा पक्ष भी है तांत्रिक साधनाएं और अघोरी प्रथाएं। इतिहास में कुछ स्थानों पर ऐसी प्रथाएं रही हैं, जिन्हें अब कानूनन प्रतिबंधित किया जा चुका है। हमारी फिल्म इसी ‘फेथ’ यानी आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा को सवालों के कटघरे में खड़ा करती है। आपकी फिल्में अक्सर विवादों में घिर जाती हैं। क्या आपको लगता है लोग सच से डरते हैं? हमारे समाज में विज्ञान, तर्क और शिक्षा को हम सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करते हैं। जहां हमें फायदा दिखता है, वहां लॉजिक अपनाते हैं, और जहां परंपरा टकराती है, वहां चुप हो जाते हैं। मैं एक उदाहरण देता हूं। कई घरों में लड़कियों को रात में खुले बाल लेकर बाहर न जाने या कुछ विशेष रंग के कपड़े न पहनने की सलाह दी जाती है। इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता, लेकिन वे पीढ़ियों से चली आ रही हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब अंधविश्वास हिंसा में बदल जाता है। जैसे किसी दंपती को संतान न हो तो किसी मासूम की बलि देने की सोच, यह भयावह है। हाथरस की एक घटना ने मुझे झकझोर दिया, जहां कथित तौर पर स्कूल का रिजल्ट सुधारने के नाम पर एक बच्चे की बलि देने की बात सामने आई। जब तक समाज इन घटनाओं पर सवाल नहीं उठाएगा, तब तक बदलाव कैसे आएगा? ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज डेट टल गई है। आप इस प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा रहे हैं। इसे आप कैसे देखते हैं? लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है। आप किसी फिल्म से असहमत हो सकते हैं, आलोचना कर सकते हैं, बहस कर सकते हैं। लेकिन कला को रोक देना समाधान नहीं है। मेरे लिए आर्ट का काम है जो सच दबाया जा रहा है, उसे सामने लाना। सरकारें आएंगी-जाएंगी, राजनीतिक दल बदलेंगे, लेकिन समाज और आने वाली पीढ़ियां यहीं रहेंगी। इसलिए कलाकार की जिम्मेदारी है कि वह ईमानदारी से अपनी बात कहे। ‘द केरल स्टोरी 2’ में आप निर्देशक के तौर पर नजर नहीं आएंगे। इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। क्या प्रोडक्शन टीम के साथ किसी प्रकार का मतभेद हुआ था? ऐसी कोई अनबन नहीं है। शुरुआत में मुझे ही निर्देशन करना था, लेकिन कहानी का दायरा केरल से आगे बढ़ाया गया। मेरा रिसर्च मुख्यतः केरल पर आधारित था और मैंने उस पर लगभग दस साल काम किया। मैं अखबार की खबरों या सोशल मीडिया फॉरवर्ड के आधार पर फिल्म नहीं बना सकता। जिस विषय को छूता हूं, उस पर गहन अध्ययन करता हूं। इसलिए मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया। ‘द केरल स्टोरी’ और ‘बस्तर’ के बाद आपको धमकियां भी मिलीं। क्या कभी डर लगा? सच कहूं तो हां, शुरुआत में डर लगा। ‘द केरला स्टोरी’ के बाद और खासकर ‘बस्तर’ के दौरान मेरे नाम पर बाकायदा “रेट कार्ड” चल रहा था किसी ने कहा आंख निकालने का इतना, हाथ काटने का इतना। ये सब सोशल मीडिया पर फैलाया गया। एक-दो दिन के लिए मन में डर आया, लेकिन फिर लगा कि अगर मैं डर गया तो फिल्म बनाना ही छोड़ दूं। मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि कोई फिल्म सिर्फ प्रोपेगेंडा के दम पर इतनी बड़ी सफलता हासिल कर सकती है। अगर दर्शक जुड़ते हैं तो उसकी वजह कहानी होती है, इरादा होता है। फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के पार्ट 2 को लेकर कई फिल्मकारों ने भी प्रतिक्रिया दी है। अनुराग कश्यप ने इसे ‘बकवास’ कहा, वहीं प्रकाश राज ने भी फिल्म को बेकार बताया। आप इन आलोचनाओं को कैसे देखते हैं? देखिए, लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है। अगर अनुराग कश्यप या प्रकाश राज को मेरी फिल्म पसंद नहीं आई, तो उन्हें यह कहने की पूरी स्वतंत्रता है। मैं उनके अधिकार का सम्मान करता हूं। लेकिन मेरा मानना है कि किसी भी फिल्म को ट्रेलर या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर जज नहीं करना चाहिए। पूरी फिल्म देखने के बाद असहमति हो तो खुलकर आलोचना कीजिए, बहस कीजिए। हमारा संविधान हमें सवाल करने और तर्क करने का अधिकार देता है। आप सोशल मीडिया पर लिखिए, लेख लिखिए, चर्चा कीजिए मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन किसी फिल्म को रुकवाने या बैन करने की मांग करना सही परंपरा नहीं है। अगर आपको फिल्म खराब लगती है तो दर्शकों से कहिए कि मत देखिए। लेकिन कला को रोकना समाधान नहीं है। कला नदी की तरह है उसे
‘धुरंधर में अक्षय खन्ना के रोल पर उठा सवाल:शोभा डे बोलीं- प्रमोशन में किरदार और डांस मूव्स को बढ़ा-चढ़ाकर किया गया पेश

राइटर-कॉलमिस्ट शोभा डे ने फिल्म धुरंधर में अक्षय खन्ना के रोल को लेकर हो रही हाइप पर सवाल उठाया। एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि उनके रोल और डांस मूव्स को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है। शोभा डे ने रेडिफ ओरिजिनल्स पॉडकास्ट में फिल्म के बारे में अपनी राय शेयर करते हुए कहा, “मुझे लगा कि जिस तरह का माहौल बनाया गया, वह थोड़ा मैनिपुलेटिव था। ऐसा दिखाया गया मानो अक्षय खन्ना रणवीर से बड़े स्टार हों और उन्होंने पूरी फिल्म को अपने दम पर संभाल लिया हो। उनके डांस को भी खास तरह से पेश किया गया। हालांकि डांस वाकई शानदार था और वायरल भी हुआ, लेकिन उसे जिस तरह प्रमोट किया गया, वह सोच-समझकर बनाई गई रणनीति जैसा लगा।” वहीं, जब पॉडकास्ट में फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर जब ऋतिक रोशन के बयान का जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें फिल्म पसंद आई, लेकिन वह इसकी राजनीति से सहमत नहीं हैं, शोभा डे ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी ने ऋतिक से यह नहीं पूछा था कि वह फिल्म की राजनीति से सहमत हैं या नहीं। उनके मुताबिक, यह उनकी अपनी पसंद थी कि उन्होंने इस पहलू पर टिप्पणी की। शोभा डे ने हल्के अंदाज में कहा कि वह चाहते तो सिर्फ इतना कह सकते थे कि उन्हें फिल्म पसंद आई। राजनीति पर राय देना जरूरी नहीं था। फिल्म को लेकर ऋतिक ने क्या कहा था? बता दें कि ऋतिक ने फिल्म देखने के बाद इंस्टाग्राम पर लिखा था कि उन्हें फिल्म की स्टोरीटेलिंग पसंद आई। उन्होंने कहा था कि वह फिल्म की राजनीति से सहमत नहीं हैं, लेकिन सिनेमा के स्टूडेंट के तौर पर उन्होंने इससे बहुत कुछ सीखा। ऋतिक ने लिखा, “मुझे सिनेमा पसंद है। मुझे वे लोग पसंद हैं जो कहानी में पूरी तरह डूब जाते हैं। धुरंधर इसका उदाहरण है। मुझे इसकी कहानी कहने का तरीका अच्छा लगा। मैं इसकी राजनीति से सहमत नहीं हूं। फिर भी इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” हालांकि, कुछ घंटों बाद उन्होंने एक्स और इंस्टाग्राम पर फिर पोस्ट किया। उन्होंने डायरेक्टर आदित्य धर और एक्टर रणवीर सिंह की तारीफ की। उन्होंने लिखा कि फिल्म अभी भी उनके दिमाग में चल रही है। फिल्म धुरंधर 5 दिसंबर को रिलीज हुई थी। इसमें रणवीर सिंह एक भारतीय जासूस बने थे। रणवीर के अलावा फिल्म में अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और आर माधवन भी थे। फिल्म ने दुनियाभर में 1300 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजनेस किया था।
Badshah Visits Sonipat for Teteri Song Promotion, Jokes on Sarpanch Controversy

राम सिंहमार, सोनीपत5 घंटे पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड मशहूर रैपर एवं सिंगर बादशाह सोनीपत के गांव असदपुर नांदनोर पहुंचे और अपने नए सॉन्ग टटीरी पर परफोर्मेंस दी। कैथल के पट्टी अफगान गांव में भी सिंगर ने हरियाणवी सॉन्ग पर जमकर ठुमके लगाए। बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह ने हरियाणवी फॉक सॉन्ग टटीरी का रैप वर्जन रिकॉर्ड किया है। इसी सिलसिले में सिंगर अपनी टीम के साथ सोनीपत के गांव असदनपुर-नांदनोर पहुंचे, यहां उन्हें बैल-बुग्गी पर बैठाकर गांव की गलियों में घुमाया गया। सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू के घर पर देसी खाना खाया। गांव के स्कूल में रखे गए कार्यक्रम के दौरान मंच से घोषणा की गई कि सिंगर बादशाह असदपुर और नांदनोर गांवों के सरपंचों का सम्मानित करेंगे। इस पर सिंगर ने माइक थामकर कहा- वैसे तो इन लोगों को मुझे सम्मानित करना चाहिए था। फिर मजाकिया अंदाज में बोले-मासूम शर्मा वाली वीडियो तो देखी ही होगी आपने…। दरअसल, जींद में 18 फरवरी को हुए कार्यक्रम के दौरान हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने चिल्लाकर पूर्व सरपंच को मंच से उतार दिया था। कहा था- मेरे गाने के प्रोग्राम के बीच में कोई सरपंच हो, कोई एमएलए हो, कोई मंत्री हो, मैं किसी ने कुछ नहीं मानता। आप चाहे सरपंच हो मेरा परफॉर्मेंस नीचे बैठकर देखो। फिलहाल, यह बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सरपंच एसोसिएशन ने सिंगर को माफी मांगने के लिए 3 दिन की मोहलत दे रखी है। यह भी कह रखा है कि जब तक मासूम शर्मा सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगेंगे, हरियाणा प्रदेश की किसी भी पंचायत में उनके शो आयोजित नहीं होने दिए जाएंगे। कैथल में हरियाणवी सॉन्ग पर डांस करते रैपर बादशाह। अपने नए गीत ‘टटीरी’ के प्रमोशन के सिलसिले में बादशाह बुग्गी में बैठकर गांव पहुंचे। उन्होंने बच्चों के बीच रैप किया। बच्चे झूमते नजर आए और खुशी जाहिर की। एक छोटी बच्ची को गोद में उठाकर भी उन्होंने डांस किया। सिंगर बदमाश को देखने के लिए खूब भीड़ जुटी। यहां जानिए बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह का कैसा हुआ वेलकम… ढोल के साथ बुग्गी पर बैठाकर लाए ग्रामीण : सिंगर बादशाह के गांव में पहुंचने की सूचना से ग्रामीण जुट गए। गांव की सीमा पर ढोल बजाकर उनका स्वागत किया गया और फूलमालाएं पहनाई गईं। अनुराज आंतिल, सरपंच राजवीर आंतिल सहित अन्य व्यक्तियों ने उनका अभिनंदन किया। गांव की एंट्री पर उनके लिए विशेष रूप से बैल-बुग्गी मंगवाई गई। बुग्गी पर गद्दे बिछाए गए और करीब 500 मीटर तक उन्हें बुग्गी में बैठाकर राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मैदान स्थित कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। बच्चों में दिखा जबरदस्त उत्साह, म्यूजिक सिस्टम भेंट किया : बादशाह को देखने के लिए बच्चे दौड़ते हुए पहुंचे। कई बच्चे हाथों में उनके पोस्टर लिए खड़े नजर आए। विद्यार्थियों के लिए बादशाह ने 40 हजार रुपए का सोनी कंपनी का म्यूजिक सिस्टम गिफ्ट किया। हरियाणवी संस्कृति और संगीत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विद्यालय को यह स्पीकर सेट भेंट किया गया। मंच से बच्चों संग मस्ती, ‘पार्टी’ का एलान: मंच से संबोधित करते हुए बादशाह ने बच्चों से पूछा कि आज स्कूल लगा था या छुट्टी थी। बच्चों ने जवाब दिया कि छुट्टी हो गई है। इस पर बादशाह ने कहा, “अब पार्टी करनी है… पार्टी करनी है तो शोर मचाओ…”। हरियाणवी अंदाज में बच्चों ने जोरदार किलकी लगाई। उन्होंने मंच से एक बुजुर्ग ताऊ को आवाज देते हुए कहा, “राम-राम ताऊ… तन्ये पार्टी नहीं करनी के…”। ग्राम प्रतिनिधियों ने किया सम्मान : इस दौरान सरपंच रणवीर उर्फ नाना, सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू, जिला प्रसाद संत कुमार अंतिल और राजबीर अंतिल एडवोकेट सहित अन्य गणमान्य लोगों ने बादशाह का स्वागत किया। ग्राम प्रतिनिधियों और आयोजन समिति की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया गया। बादशाह ने सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू के घर पर देसी भोजन का आनंद लिया। सरपंच के घर देसी पकवानों का आनंद गांव पहुंचने के बाद बादशाह ने सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू के घर पर देसी भोजन का आनंद लिया। घर में सरपंच की पत्नी और उनकी मां मक्की की रोटी बनाती नजर आई। वीडियो में बादशाह पीछे खड़े होकर पूछते दिखाई दिए कि “सरसों का है या किसी और का…”, जिस पर जवाब मिला कि सरसों का साग है। बादशाह की टीम के हिमाचल से आए एक सदस्य ने पूछा कि आप क्या कहना चाहोगे, तो बादशाह ने हंसते हुए कहा, “आज तक तूने मुझे कुछ नहीं खिलाया है…” इसके बाद उन्होंने सरसों का साग, मक्की की रोटी, मक्खन और लस्सी के साथ भोजन किया। मंच से “मासूम शर्मा वाली वीडियो देखी है ना…” कहकर चल रहे सरपंच विवाद पर भी हल्के-फुल्के अंदाज में मजे लिए, जिससे माहौल में जोश और बढ़ गया। सम्मान समारोह में बादशाह ने सिंगर मासूम शर्मा का जिक्र किया कार्यक्रम के दौरान सरपंच रणवीर सिंह मंच संभाले हुए थे। उन्होंने कहा कि बादशाह ने गांव को जो प्रेरणा दी है, उसके लिए पूरा गांव आभारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह हरियाणा ही नहीं, बल्कि पूरे संसार की शान हैं। सरपंच रणवीर सिंह उर्फ नाना ने कहा कि असदपुर और नांदनोर एक ही गांव हैं और दोनों का एक ही सरकारी स्कूल है। दोनों सरपंचों को बादशाह सम्मानित करेंगे। बादशाह ने मजाकिया अंदाज में कहा कि “वैसे तो इन्हें मुझे सम्मानित करना चाहिए…” रणवीर सिंह ने जवाब दिया कि बादशाह को पहले ही सम्मानित किया जा चुका है और “हम उल्हाणा नहीं ओटेंगे…” बादशाह ने रणवीर सिंह और बल्लू प्रधान को पटका पहनाकर सम्मानित किया। इसी बीच बादशाह ने माइक लेकर कहा, “मासूम शर्मा वाली वीडियो देखी है ना…” इतना सुनते ही भीड़ में किलकियां गूंज उठी। बता दें कि इन दिनों मासूम शर्मा और सरपंचों के बीच विवाद चर्चा में है। वहीं मंच पर सरपंचों को सम्मानित करवाए जाने के दौरान बादशाह ने इसी संदर्भ में मंच से मासूम शर्मा के वीडियो को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की गई, जिसकी गांव में खूब चर्चा रही। —————- ये खबर भी पढ़ें… हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच को धमकाया, VIDEO:मंच से उतारकर बोले- MLA-मंत्री तक को कुछ नहीं समझता, भीड़ से भी धक्का-मुक्की की हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। एक लाइव शो के दौरान उन्होंने स्टेज पर खड़े पूर्व सरपंच व समर्थकों पर चिल्लाते
Karan Aujla Delhi Show Controversy

करन औजला के दिल्ली शो से पहले विवाद बढ़ा। नोटिस जारी हुआ। (फाइल फोटो) पंजाबी सिंगर करन औजला दिल्ली में ‘पी पॉप कल्चर इंडिया टूर’ से पहले मुश्किल में फंस गए हैं। औजला इस शो में अपने कई हिट सॉन्ग नहीं गा पाएंगे। वो यहां अपने कई हिट गाने जैसे ‘अधिया’, ‘चिट्टा कुर्ता’, ‘एल्कोहल 2’, ‘फ्यू डे’ और ‘बंदूक’ पर परफॉर्म करने वाले . दरअसल, साउथ ईस्ट दिल्ली की चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट ने औजला के गानों को लेकर शो के आयोजकों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि लाइव शो में शराब और ड्रग को ग्लोरिफाई करने वाले गाने नहीं गाने चाहिए। इस संबंध में चंडीगढ़ के प्रोफेसर धरनेरव राव ने एक आवेदन दायर किया था। उन्होंने मांग की थी कि ऐसे गानों से शराब की खपत, ड्रग्स के इस्तेमाल, गन कल्चर और महिलाओं के प्रति असम्मान को बढ़ावा मिलता है, इसलिए इन पर रोक लगाई जानी चाहिए। सिंगर करन औजला के शो को लेकर नोटिस जारी। अब जानिए क्या है पूरा मामला… गानों में ड्रग-गन कल्चर को बढ़ावा देने की बातः दरअसल, शिकायतकर्ता चंडीगढ़ के प्रोफेसर धरनेरव राव ने आरोप लगाया है कि करण औजला के गाने शराब की खपत, ड्रग्स एब्यूज, गन कल्चर को ग्लोरिफाई करते हैं और महिलाओं के प्रति अपमान को दिखाते है। इसके बाद यह नोटिस जारी हुआ है। हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दियाः नोटिस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 22 जुलाई 2019 के फैसले (CWP No. 6213 of 2016) का हवाला दिया गया है। जिसमें स्पष्ट निर्देश हैं कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में कोई भी लाइव शो या इवेंट में शराब, ड्रग्स, हिंसा को ग्लोरिफाई करने वाले गाने नहीं बजाए/गाए जाएं। कोर्ट ने डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को इसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के आदेश दिए थे। नोटिस में ये कहा गयाः नोटिस में कहा गया है कि चूंकि इवेंट में बच्चे भी मौजूद रहेंगे, इसलिए ऐसे गानों की परफॉर्मेंस से बचना चाहिए। गैर-पालना पर हाईकोर्ट की अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। आयोजकों को ईमेल के जरिए यह निर्देश भेजा गया है। हाईकोर्ट के निर्देश में यह कहा गया था प्रोफेसर राव की तरफ से यूनिट को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेश की कॉपी दी गई थी। जिसमें पंजाब, हरियाणा और संघ शासित प्रदेश, चंडीगढ़ में पुलिस के डीजीपी को निर्देश दिया गया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी गीत में, यहां तक कि लाइव शो में भी, शराब, मादक पदार्थों और हिंसा का महिमामंडन करने वाले गाने न बजाए जाएं। उस आर्डर में यह भी कहा गया है कि 12 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को सिनेमा हॉल/मल्टीप्लेस में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जहां “ए” प्रमाणपत्र वाली फिल्में प्रदर्शित की जाती हैं। जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि पंजाब, हरियाणा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के किसी भी जिले में शैक्षणिक संस्थान के पास नग्न पोस्टर, अर्ध-निर्मित पोस्टर और अश्लील पोस्टर प्रदर्शित न किए जाएं।
‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘द केरल स्टोरी’ के पहले भाग ने देशभर में तीखी बहस को जन्म दिया था। फिल्म को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। अब इसका दूसरा भाग एक नई कहानी और नए किरदारों के साथ दर्शकों के सामने आने वाला है। फिल्म के इस भाग में अभिनेता सुमित गहलावत सलीम नामक एक अहम और परतदार किरदार निभा रहे हैं। लगभग 12 वर्षों से इंडस्ट्री में सक्रिय सुमित का कहना है कि यह उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने फिल्म, विवाद, संघर्ष और अपने सफर पर खुलकर बात की हैं। आपकी फिल्में, जैसे द केरल स्टोरी और बस्तर: द नक्सल स्टोरी, अक्सर राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म देती हैं। एक कलाकार के रूप में आप इन प्रतिक्रियाओं और विवादों को किस नजरिए से देखते हैं? मैं व्यक्तिगत रूप से हर फिल्म को सिर्फ सिनेमा के रूप में देखता हूं। एक अभिनेता के तौर पर मेरा काम है अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाना। विषय राजनीतिक है, सामाजिक है या विवादित है यह लेखक और निर्देशक का दृष्टिकोण होता है। मैं स्क्रिप्ट पढ़ते समय यही देखता हूं कि मेरे किरदार में कितनी गहराई है, कितनी चुनौती है और मैं उसमें कितना सच्चापन ला सकता हूं। मैं इस इंडस्ट्री में इसलिए आया हूं ताकि अलग-अलग तरह के रोल निभा सकूं। इसलिए मेरा चयन हमेशा भूमिका और स्क्रिप्ट के आधार पर होता है, किसी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं। ऐसी फिल्मों में ‘प्रोपेगेंडा बनाम सच्चाई’ की बहस शुरू हो जाती है। क्या यह आपको प्रभावित करती है? बहस होना स्वाभाविक है, लेकिन कभी-कभी दुख इस बात का होता है कि अभिनय की चर्चा पीछे रह जाती है। हम कलाकार महीनों तैयारी करते हैं, मानसिक रूप से किरदार में उतरते हैं, कई सालों के संघर्ष के बाद ऐसे मौके मिलते हैं। जब फिल्म रिलीज होती है तो चर्चा कहानी से ज्यादा राजनीतिक एंगल पर होने लगती है। मैं राजनीति में नहीं पड़ता। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग यह भी देखें कि कलाकार ने अपना काम कितनी ईमानदारी से किया है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर अनुराग कश्यप और प्रकाश राज जैसे फिल्मी हस्तियों ने आलोचना की। इस पर आपका क्या कहना है? मैं इस पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देना चाहूंगा। हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है। जरूरी नहीं कि हर फिल्म या ट्रेलर सबको पसंद आए। कई बार हमें भी कोई ट्रेलर पसंद नहीं आता और हम आपस में खुलकर बोल देते हैं। अगर किसी को अच्छा नहीं लगा तो यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है। बहुत से लोग तारीफ भी कर रहे हैं। जो अच्छा कह रहे हैं, उनका भी सम्मान है और जो आलोचना कर रहे हैं, उनका भी। हमारा काम है मेहनत करना और आगे और बेहतर करने की कोशिश करना। ट्रेलर में दिखाए गए एक ‘बीफ’ से जुड़े दृश्य को लेकर विवाद हुआ। क्या उस सीन को हटाने या बदलने पर कोई चर्चा हुई? ऐसे फैसले पूरी तरह निर्देशक और निर्माता के होते हैं। एक अभिनेता के रूप में हमारा काम है कि जो सीन हमें दिया गया है, उसे पूरी सच्चाई और प्रभाव के साथ निभाएं। वह दृश्य भावनात्मक रूप से कठिन था। लेकिन अगर दर्शक मेरे किरदार सलीम से नफरत महसूस करते हैं, तो एक अभिनेता के रूप में मैं समझूंगा कि मैंने अपना काम सही तरीके से किया। नेगेटिव किरदार को इस तरह निभाना कि वह वास्तविक लगे यही अभिनय की सफलता है। द केरला स्टोरी पार्ट 2 में आपका किरदार कितना अलग है? इस बार कहानी पूरी तरह नई है। मैं सलीम का किरदार निभा रहा हूं। यह एक लेयर्ड रोल है। शुरुआत में वह पढ़ा-लिखा, समझदार और सभ्य व्यक्ति दिखाई देता है, लेकिन परिस्थितियों के साथ उसका दूसरा रूप सामने आता है। यह किरदार केवल पूरी तरह नकारात्मक या सकारात्मक नहीं है। उसकी एक यात्रा है एक बदलाव है। उस जर्नी को निभाना मेरे लिए बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण अनुभव रहा। नेगेटिव रोल करने से क्या इमेज या फैन बेस पर असर पड़ सकता है? बिल्कुल नहीं। एक अभिनेता का काम हर तरह के भाव निभाना है। अगर आप उदाहरण देखें तो मनोज बाजपेयी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकारों ने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भूमिकाएं की हैं। आज दर्शक समझदार हैं। वे जानते हैं कि अभिनेता और उसका किरदार अलग होते हैं। नेगेटिव रोल में अक्सर ज्यादा चैलेंज होता है और अभिनेता को अपने अभिनय की रेंज दिखाने का मौका मिलता है। एक आउटसाइडर के तौर पर इंडस्ट्री में आपका संघर्ष कैसा रहा? जब मैं मुंबई आया तो मुझे शहर की बुनियादी जानकारी भी नहीं थी। ऑडिशन के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता था। कई बार ‘फिट नहीं’ कहकर मना कर दिया जाता था। मैंने शुरू से तय कर लिया था कि कम से कम 10 साल इस इंडस्ट्री को देने होंगे। यहां कोई गारंटी नहीं है। एक फिल्म मिलने का मतलब यह नहीं कि दूसरी भी मिल जाएगी। हर स्तर पर खुद को साबित करना पड़ता है। धैर्य सबसे जरूरी है। अगर धैर्य नहीं है, तो इस क्षेत्र में टिक पाना मुश्किल है। दर्शकों के लिए द केरला स्टोरी पार्ट 2 खास क्यों है और उन्हें यह फिल्म देखने के लिए क्या संदेश या अनुभव मिलेगा? यह फिल्म बहुत मेहनत से बनी है। निर्देशक से लेकर तकनीकी टीम और कलाकारों तक, सभी ने पूरी लगन से काम किया है। हम नए कलाकार हैं और हमारे लिए दर्शकों का भरोसा बहुत मायने रखता है। हम बस यही चाहते हैं कि दर्शक एक मौका दें। अगर उन्हें हमारा काम पसंद आए, तो वही हमारी सबसे बड़ी सफलता होगी।
‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘द केरल स्टोरी’ के पहले भाग ने देशभर में तीखी बहस को जन्म दिया था। फिल्म को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। अब इसका दूसरा भाग एक नई कहानी और नए किरदारों के साथ दर्शकों के सामने आने वाला है। फिल्म के इस भाग में अभिनेता सुमित गहलावत सलीम नामक एक अहम और परतदार किरदार निभा रहे हैं। लगभग 12 वर्षों से इंडस्ट्री में सक्रिय सुमित का कहना है कि यह उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने फिल्म, विवाद, संघर्ष और अपने सफर पर खुलकर बात की हैं। आपकी फिल्में, जैसे द केरल स्टोरी और बस्तर: द नक्सल स्टोरी, अक्सर राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म देती हैं। एक कलाकार के रूप में आप इन प्रतिक्रियाओं और विवादों को किस नजरिए से देखते हैं? मैं व्यक्तिगत रूप से हर फिल्म को सिर्फ सिनेमा के रूप में देखता हूं। एक अभिनेता के तौर पर मेरा काम है अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाना। विषय राजनीतिक है, सामाजिक है या विवादित है यह लेखक और निर्देशक का दृष्टिकोण होता है। मैं स्क्रिप्ट पढ़ते समय यही देखता हूं कि मेरे किरदार में कितनी गहराई है, कितनी चुनौती है और मैं उसमें कितना सच्चापन ला सकता हूं। मैं इस इंडस्ट्री में इसलिए आया हूं ताकि अलग-अलग तरह के रोल निभा सकूं। इसलिए मेरा चयन हमेशा भूमिका और स्क्रिप्ट के आधार पर होता है, किसी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं। ऐसी फिल्मों में ‘प्रोपेगेंडा बनाम सच्चाई’ की बहस शुरू हो जाती है। क्या यह आपको प्रभावित करती है? बहस होना स्वाभाविक है, लेकिन कभी-कभी दुख इस बात का होता है कि अभिनय की चर्चा पीछे रह जाती है। हम कलाकार महीनों तैयारी करते हैं, मानसिक रूप से किरदार में उतरते हैं, कई सालों के संघर्ष के बाद ऐसे मौके मिलते हैं। जब फिल्म रिलीज होती है तो चर्चा कहानी से ज्यादा राजनीतिक एंगल पर होने लगती है। मैं राजनीति में नहीं पड़ता। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग यह भी देखें कि कलाकार ने अपना काम कितनी ईमानदारी से किया है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर अनुराग कश्यप और प्रकाश राज जैसे फिल्मी हस्तियों ने आलोचना की। इस पर आपका क्या कहना है? मैं इस पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देना चाहूंगा। हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है। जरूरी नहीं कि हर फिल्म या ट्रेलर सबको पसंद आए। कई बार हमें भी कोई ट्रेलर पसंद नहीं आता और हम आपस में खुलकर बोल देते हैं। अगर किसी को अच्छा नहीं लगा तो यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है। बहुत से लोग तारीफ भी कर रहे हैं। जो अच्छा कह रहे हैं, उनका भी सम्मान है और जो आलोचना कर रहे हैं, उनका भी। हमारा काम है मेहनत करना और आगे और बेहतर करने की कोशिश करना। ट्रेलर में दिखाए गए एक ‘बीफ’ से जुड़े दृश्य को लेकर विवाद हुआ। क्या उस सीन को हटाने या बदलने पर कोई चर्चा हुई? ऐसे फैसले पूरी तरह निर्देशक और निर्माता के होते हैं। एक अभिनेता के रूप में हमारा काम है कि जो सीन हमें दिया गया है, उसे पूरी सच्चाई और प्रभाव के साथ निभाएं। वह दृश्य भावनात्मक रूप से कठिन था। लेकिन अगर दर्शक मेरे किरदार सलीम से नफरत महसूस करते हैं, तो एक अभिनेता के रूप में मैं समझूंगा कि मैंने अपना काम सही तरीके से किया। नेगेटिव किरदार को इस तरह निभाना कि वह वास्तविक लगे यही अभिनय की सफलता है। द केरला स्टोरी पार्ट 2 में आपका किरदार कितना अलग है? इस बार कहानी पूरी तरह नई है। मैं सलीम का किरदार निभा रहा हूं। यह एक लेयर्ड रोल है। शुरुआत में वह पढ़ा-लिखा, समझदार और सभ्य व्यक्ति दिखाई देता है, लेकिन परिस्थितियों के साथ उसका दूसरा रूप सामने आता है। यह किरदार केवल पूरी तरह नकारात्मक या सकारात्मक नहीं है। उसकी एक यात्रा है एक बदलाव है। उस जर्नी को निभाना मेरे लिए बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण अनुभव रहा। नेगेटिव रोल करने से क्या इमेज या फैन बेस पर असर पड़ सकता है? बिल्कुल नहीं। एक अभिनेता का काम हर तरह के भाव निभाना है। अगर आप उदाहरण देखें तो मनोज बाजपेयी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकारों ने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भूमिकाएं की हैं। आज दर्शक समझदार हैं। वे जानते हैं कि अभिनेता और उसका किरदार अलग होते हैं। नेगेटिव रोल में अक्सर ज्यादा चैलेंज होता है और अभिनेता को अपने अभिनय की रेंज दिखाने का मौका मिलता है। एक आउटसाइडर के तौर पर इंडस्ट्री में आपका संघर्ष कैसा रहा? जब मैं मुंबई आया तो मुझे शहर की बुनियादी जानकारी भी नहीं थी। ऑडिशन के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता था। कई बार ‘फिट नहीं’ कहकर मना कर दिया जाता था। मैंने शुरू से तय कर लिया था कि कम से कम 10 साल इस इंडस्ट्री को देने होंगे। यहां कोई गारंटी नहीं है। एक फिल्म मिलने का मतलब यह नहीं कि दूसरी भी मिल जाएगी। हर स्तर पर खुद को साबित करना पड़ता है। धैर्य सबसे जरूरी है। अगर धैर्य नहीं है, तो इस क्षेत्र में टिक पाना मुश्किल है। दर्शकों के लिए द केरला स्टोरी पार्ट 2 खास क्यों है और उन्हें यह फिल्म देखने के लिए क्या संदेश या अनुभव मिलेगा? यह फिल्म बहुत मेहनत से बनी है। निर्देशक से लेकर तकनीकी टीम और कलाकारों तक, सभी ने पूरी लगन से काम किया है। हम नए कलाकार हैं और हमारे लिए दर्शकों का भरोसा बहुत मायने रखता है। हम बस यही चाहते हैं कि दर्शक एक मौका दें। अगर उन्हें हमारा काम पसंद आए, तो वही हमारी सबसे बड़ी सफलता होगी।







