Clacton UK Election | Count Binface vs Nigel Farage Bizarre Candidate

लंदन2 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन के क्लैक्टन संसदीय क्षेत्र में होने वाला उपचुनाव इस बार एक अनोखे उम्मीदवार की वजह से चर्चा में है। यहां दक्षिणपंथी पार्टी रिफॉर्म यूके के नेता नाइजेल फराज के सामने काउंट बिनफेस चुनाव लड़ रहे हैं। बिनफेस की खास बात यह है कि वे चुनाव प्रचार के दौरान कचरे के डिब्बे जैसी पोशाक पहनते हैं और खुद को मजाकिया अंदाज में ‘ग्रह सिग्मा IX का एलियन’ बताते हैं। काउंट बिनफेस का दावा है कि चुनाव का नतीजा चाहे जो भी हो, जीत आखिर उनकी ही होगी। काउंट बिनफेस अपने अजीबोगरीब वादों की वजह से खूब चर्चा में है। वह हर नागरिक को सस्ता घर देने का वादा कर रहे हैं। लंदन के एक स्टूडियो में पिछले महीने इंटरव्यू के दौरान काउंट बिनफेस। उनका किरदार कॉमेडियन जॉन हार्वे निभाते हैं। कॉपीराइट को लेकर विवाद हुआ, फिर नाम पड़ा काउंट बिनफेस काउंट बिनफेस का किरदार 46 वर्षीय लेखक और कॉमेडियन जॉन हार्वे निभाते हैं। वे काउंट बिनफेस नाम से कई बार चुनाव लड़ चुके हैं। हार्वे ने पहली बार 2017 के ब्रिटिश आम चुनाव में लॉर्ड बकेटहेड नाम से तत्कालीन पीएम थेरेसा मे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस नाम को लेकर कॉपीराइट विवाद हो गया। दरअसल, लॉर्ड बकेटहेड भी एक व्यंग्यात्मक काल्पनिक किरदार है। यह काले रंग की टोपी पहनता है जो कि बाल्टी जैसा दिखता है। सबसे पहले 1984 में माइक ली नाम के एक शख्स ने लॉर्ड बकेटहेड नाम से यह चुनाव लड़ा था। इसके बाद हार्वे को लॉर्ड बकेटहेड नाम छोड़ना पड़ा। इसके बाद हार्वे ने काउंट बिनफेस को 2018 में चुनाव से कुछ महीने पहले लॉन्च किया। जॉन हार्वे ने पहला चुनाव लॉर्ड बकेटहेड के नाम से साल 2018 में लड़ा था। काउंट बिनफेस नाम का मतलब क्या है यह नाम 3 शब्दों से मिलकर बना है। काउंट, बिन और फेस। काउंट राजशाही से जुड़ी एक उपाधि है। जैसे कि लॉर्ड, अर्ल या बैरन भी एक उपाधि है। ऐसे में काउंट बिन फेस का मतलब है- कूड़ेदान के चेहरे वाला काउंट। काउंट बिनफेस ने 2019 में तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसके बाद वे 2021 और 2024 के लंदन मेयर चुनाव, 2023 उपचुनाव, 2024 आम चुनाव और 2026 में एक उपचुनाव में भी उम्मीदवार रहे। इस साल मेकरफील्ड उपचुनाव में ब्रिटेन के मौजूदा प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम (बीच में), काउंट बिनफेस (बाएं) और लोमड़ी की पोशाक पहनने वाले एनिमल राइट एक्टिविस्ट रॉबर्ट पाउनॉल भी उम्मीदवार थे। काउंट बिनफेस क्या चुनाव जीत पाएंगे? मौजूदा हालात में काउंट बिनफेस चुनाव जीत जाएंगे इसकी संभावना बहुत कम है। दरअसल, क्लैक्टन सीट से फराज सांसद रह चुके हैं। पिछले चुनाव में उन्हें 46% वोट मिले थे। हालिया सर्वेक्षणों में उन्हें करीब 73% वोट मिलने का अनुमान जताया गया है। ब्रिटेन की लेबर, कंजर्वेटिव और लिबरल डेमोक्रेट जैसी बड़ी पार्टियों ने इस उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारा है। इससे फराज की जीत की संभावना और मजबूत हो गई है। काउंट बिनफेस इस चुनाव में फराज के सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन वे अकेले नहीं हैं। इस उपचुनाव में कुल 33 उम्मीदवार मैदान में हैं। काउंट बिनफेस के लिए असली जीत सीट जीतना नहीं, बल्कि अच्छा वोट हासिल करना होगा। अब तक उन्हें सबसे ज्यादा 2021 के लंदन मेयर चुनाव में करीब 1% वोट मिले थे। क्लैक्टन उपचुनाव में बड़ी पार्टियों शामिल नहीं होने से काउंट बिनफेस फराज के सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्वी बन गए हैं। अगर उन्हें 5% या उससे ज्यादा वोट मिल जाते हैं, तो उनकी 500 पाउंड की जमानत राशि वापस मिल जाएगी। इसे उनके लिए बड़ी सफलता माना जाएगा। काउंट बिनफेस के चर्चित चुनावी वादे काउंट बिनफेस के चुनावी वादे भी पूरी तरह मजाक और व्यंग्य से भरे होते हैं। वे कहते हैं कि अगर जीत गए तो कम से कम एक सस्ता घर जरूर बनवाएंगे। यह उन सरकारों पर तंज है, जो हर चुनाव में लाखों सस्ते घर बनाने का वादा करती हैं, लेकिन अक्सर अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पातीं। वे यह भी कहते हैं, ‘आपका टैक्स कम करेंगे और बाकी सभी का बढ़ा देंगे।’ यह भी एक व्यंग्य है, क्योंकि हर नेता जनता से टैक्स कम करने का वादा करता है। उनका एक और मजाकिया वादा है कि वे ब्रिटेन की मशहूर गायिका एडेल को सरकारी संपत्ति घोषित कर देंगे। एडेल ब्रिटेन की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली गायिका हैं। काउंट उनके नाम का इस्तेमाल एक असंभव वादा करके राजनीतिक व्यंग्य करने के लिए करते हैं। पिछले महीने मध्य लंदन स्थित डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर एक शख्स काउंट बिनफेस का पोस्टर दिखाता हुआ। काउंट बिनफेस जैसे 3 और उम्मीदवार फराज के खिलाफ काउंट बिनफेस के अलावा 3 और उम्मीदवार हैं जो अपने व्यंग्यात्मक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। ये तीनों उम्मीदवार ऑफिशियल मॉन्स्टर रेविंग लूनी पार्टी से हैं। यह ब्रिटेन की व्यंग्यात्मक राजनीतिक पार्टी है जो चुनाव में ऐसे उम्मीदवार उतारने के लिए जानी जाती है।इसकी स्थापना 1983 में संगीतकार डेविड सैच ने की थी। इस पार्टी के उम्मीदवार अक्सर अजीब पोशाक पहनते हैं और ऐसे चुनावी वादे करते हैं, जिनका मकसद लोगों को हंसाने के साथ-साथ राजनीतिक व्यवस्था की कमियों की ओर ध्यान दिलाना होता है। हालांकि पार्टी के कई मजाकिया सुझाव बाद में सच भी साबित हुए। इनमें 24 घंटे पब खोलने की अनुमति, पालतू जानवरों के पासपोर्ट और जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के जरिए फैसले जैसे विचार शामिल हैं, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सरकारों ने अलग-अलग समय पर लागू किया। ब्रिटेन में ऐसे उम्मीदवारों की पुरानी परंपरा ब्रिटेन में 18 साल या उससे अधिक उम्र का कोई भी ब्रिटिश, आयरिश या पात्र कॉमनवेल्थ नागरिक संसदीय चुनाव लड़ सकता है। इसके लिए 500 पाउंड की जमानत राशि जमा करनी होती है और स्थानीय क्षेत्र के 10 लोगों का समर्थन चाहिए। इसी वजह से ब्रिटेन के चुनावों में अक्सर मजाकिया या व्यंग्यात्मक उम्मीदवार भी मैदान में उतरते हैं। कोई कार्टून किरदार की पोशाक पहनता है तो कोई अजीब वेशभूषा में प्रचार करता है। इनका मकसद चुनाव जीतने से ज्यादा चर्चा में आना और राजनीति पर व्यंग्य करना होता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
PoK Election Results | PML-N Government Formation & Nawaz Sharif PM Status

कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 10 अगस्त सोमवार को होने वाली वोटिंग टल गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगातार हो रहे प्रदर्शन के चलते यह चुनाव अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए हैं। इससे पहले दो चरणों में शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने कुल 24 सीटें जीतीं। इसके बाद PML-N का PoK में सरकार बनाना तय था। दावा- पहले चरण के चुनाव के दौरान 19 लोगों की मौत PoK में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान हिंसा भड़क गई। अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 19 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। चुनावी धांधली के आरोपों और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच कई मतदान केंद्रों पर झड़पें भी हुईं। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के समर्थकों का आरोप है कि रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 19 लोगों की जान गई। संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मृतकों के नाम भी जारी किए हैं। भारत ने PoK में हो रहे चुनावों को मानने से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि पाकिस्तान इन चुनावों के जरिए PoK पर अपने अवैध कब्जे को छिपाने और वहां हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों से दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें… रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की गई, जिसके बाद वहां भगदड़ मच गई। पहले चरण के चुनाव के बीच रावलाकोट के ईदगाह मैदान में हजारों लोग इकट्ठा होकर पाकिस्तान सरकार और वहां की सत्ता व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। 27 जुलाई को फायरिंग में घायल एक आदमी जमीन पर लेटा हुआ है। भारत ने चुनाव को बताया दिखावटी भारत लंबे समय से PoK में होने वाले चुनावों को खारिज करता रहा है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान को उस इलाके में कोई राजनीतिक प्रक्रिया चलाने का अधिकार नहीं है, जिसे भारत अपना हिस्सा मानता है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने PoK चुनाव को पाकिस्तान के अवैध कब्जे को सही दिखाने की कोशिश बताते हुए इसे दिखावटी एक्सरसाइज कहा है। भारत ने यह भी आरोप लगाया है कि पाकिस्तान चुनावों के जरिए अपने कब्जे को छिपाने और इलाके में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहा है। खबर लगातार अपडेट हो रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
PoK Assembly Election 2026 | Voting Begins in Three Phases

13 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सोमवार को विधानसभा चुनाव का पहला चरण हैं। पाकिस्तानी चुनाव आयोग के मुताबिक, मौजूदा सुरक्षा हालात और विरोध प्रदर्शनों के देखते हुए यह चुनाव तीन चरणों में होंगे। पहला 27 जुलाई, दूसरा 2 अगस्त और तीसरा 10 अगस्त को मतदान कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 27 जुलाई को मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान होगा। दो अगस्त को मुजफ्फराबाद डिवीजन की 9 सीटों और पाकिस्तान में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। अंतिम चरण में 10 अगस्त को पूंछ डिवीजन की 11 सीटों पर मतदान होगा। PoK में कई महीनों से चल रहा है विरोध प्रदर्शन PoK में पिछले कई महीनों से महंगाई, बिजली के बढ़े हुए बिल, सरकारी नीतियों और राजनीतिक दखल के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की अगुआई जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) कर रही है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है। महंगाई के विरोध से शुरू हुआ ये आंदोलन, अब पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने कई जगह बल प्रयोग किया, रास्ते बंद किए और संचार सेवाएं रोक दीं। उनका कहना है कि इससे खाने-पीने की चीजों और दवाइयों की भी कमी हो गई। कई प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी हटाने और क्षेत्र की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। PoK में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जून में प्रदर्शन करते स्थानीय लोग। (यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।) 12 शरणार्थी सीटों पर सबसे ज्यादा विवाद विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटें भी हैं। ये सीटें पाकिस्तान में रहने वाले उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो दशकों पहले कश्मीर से वहां गए थे। JKJAAC और कई स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की सरकार चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है। इससे स्थानीय लोगों की राय कमजोर पड़ जाती है और केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, इस बार के चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब लोगों का बड़ा वर्ग पाकिस्तान सरकार की नीतियों से नाराज है। इसी वजह से चुनाव की निष्पक्षता और उसके नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, PoK के चुनाव आयुक्त गुलाम मुस्तफा मुगल ने बताया कि मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और सेना तैनात रहेगी। क्या चुनाव से खत्म होगी नाराजगी? एक्सपर्ट्स का मानना है कि मतदान तो हो जाएगा और वोटिंग भी हो सकती है, लेकिन इससे लोगों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। महंगाई, बिजली, राजनीतिक अधिकार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पाकिस्तान की भूमिका जैसे मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। ऐसे में चुनाव के बाद भी PoK में राजनीतिक तनाव जारी रहने की आशंका जताई जा रही है। भारत ने चुनाव पर विरोध दर्ज कराया भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न हिस्से हैं। भारत ने PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले चुनावों पर पहले भी कई बार पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इन क्षेत्रों की तथाकथित विधानसभाओं को मान्यता नहीं दी है। मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हालात पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने भी हिंसा में हुई मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK में मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। नवाज शरीफ ने PoK का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताई चुनावी माहौल के बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) प्रमुख नवाज शरीफ ने मुजफ्फराबाद की चुनावी रैली में कहा कि अगर उनकी पार्टी चुनाव जीतती है तो वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने के लिए कहेंगे ताकि वे खुद इलाके के विकास की निगरानी कर सकें। नवाज शरीफ ने कहा कि PoK उनके लिए पंजाब जितना ही प्रिय है और उनके पूर्वज कश्मीर से आए थे। उन्होंने कहा कि यह उनका दूसरा घर है। इस चुनाव में PML-N का मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से है। खास बात यह है कि PPP इस समय केंद्र सरकार में PML-N की सहयोगी भी है। 2021 में इमरान खान की पार्टी ने बनाई थी सरकार PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
PoK Assembly Election 2026 | Voting Begins in Three Phases

30 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सोमवार को विधानसभा चुनाव का पहला चरण हैं। पाकिस्तानी चुनाव आयोग के मुताबिक, मौजूदा सुरक्षा हालात और विरोध प्रदर्शनों के देखते हुए यह चुनाव तीन चरणों में होंगे। पहला 27 जुलाई, दूसरा 2 अगस्त और तीसरा 10 अगस्त को मतदान कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 27 जुलाई को मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान होगा। दो अगस्त को मुजफ्फराबाद डिवीजन की 9 सीटों और पाकिस्तान में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। अंतिम चरण में 10 अगस्त को पूंछ डिवीजन की 11 सीटों पर मतदान होगा। PoK में कई महीनों से चल रहा है विरोध प्रदर्शन PoK में पिछले कई महीनों से महंगाई, बिजली के बढ़े हुए बिल, सरकारी नीतियों और राजनीतिक दखल के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की अगुआई जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) कर रही है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है। महंगाई के विरोध से शुरू हुआ ये आंदोलन, अब पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने कई जगह बल प्रयोग किया, रास्ते बंद किए और संचार सेवाएं रोक दीं। उनका कहना है कि इससे खाने-पीने की चीजों और दवाइयों की भी कमी हो गई। कई प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी हटाने और क्षेत्र की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। PoK में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जून में प्रदर्शन करते स्थानीय लोग। (यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।) 12 शरणार्थी सीटों पर सबसे ज्यादा विवाद विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटें भी हैं। ये सीटें पाकिस्तान में रहने वाले उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो दशकों पहले कश्मीर से वहां गए थे। JKJAAC और कई स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की सरकार चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है। इससे स्थानीय लोगों की राय कमजोर पड़ जाती है और केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, इस बार के चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब लोगों का बड़ा वर्ग पाकिस्तान सरकार की नीतियों से नाराज है। इसी वजह से चुनाव की निष्पक्षता और उसके नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, PoK के चुनाव आयुक्त गुलाम मुस्तफा मुगल ने बताया कि मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और सेना तैनात रहेगी। क्या चुनाव से खत्म होगी नाराजगी? एक्सपर्ट्स का मानना है कि मतदान तो हो जाएगा और वोटिंग भी हो सकती है, लेकिन इससे लोगों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। महंगाई, बिजली, राजनीतिक अधिकार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पाकिस्तान की भूमिका जैसे मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। ऐसे में चुनाव के बाद भी PoK में राजनीतिक तनाव जारी रहने की आशंका जताई जा रही है। भारत ने चुनाव पर विरोध दर्ज कराया भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न हिस्से हैं। भारत ने PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले चुनावों पर पहले भी कई बार पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इन क्षेत्रों की तथाकथित विधानसभाओं को मान्यता नहीं दी है। मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हालात पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने भी हिंसा में हुई मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK में मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। नवाज शरीफ ने PoK का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताई चुनावी माहौल के बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) प्रमुख नवाज शरीफ ने मुजफ्फराबाद की चुनावी रैली में कहा कि अगर उनकी पार्टी चुनाव जीतती है तो वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने के लिए कहेंगे ताकि वे खुद इलाके के विकास की निगरानी कर सकें। नवाज शरीफ ने कहा कि PoK उनके लिए पंजाब जितना ही प्रिय है और उनके पूर्वज कश्मीर से आए थे। उन्होंने कहा कि यह उनका दूसरा घर है। इस चुनाव में PML-N का मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से है। खास बात यह है कि PPP इस समय केंद्र सरकार में PML-N की सहयोगी भी है। 2021 में इमरान खान की पार्टी ने बनाई थी सरकार PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति ने हरिद्वार में की पूजा:सिद्धपीठ से नवंबर में होने वाले चुनाव में जीत की कामना की, पहली बार आए उत्तराखंड

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जूमा भारत दौरे पर हरिद्वार पहुंचे। उन्होंने सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में मां भगवती के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना की और आगामी चुनावों में सफलता की कामना की। मंदिर प्रशासन ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने महामंडलेश्वर से मुलाकात कर आशीर्वाद भी लिया। इस दौरान जूमा ने कहा कि हरिद्वार का आध्यात्मिक वातावरण उन्हें बेहद पसंद आया। उन्होंने बताया कि वह पहले भी कई बार भारत आ चुके हैं, लेकिन हरिद्वार पहली बार आए हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की सराहना की। महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका में नवंबर में स्थानीय निकाय चुनाव और 2029 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। जूमा ने संकल्प लिया कि यदि वह दोबारा राष्ट्रपति बने तो सबसे पहले हरिद्वार आकर मां दक्षिण काली के दर्शन करेंगे। इस दौरान भारत-दक्षिण अफ्रीका के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। तस्वीरें देखिए- सिलसिलेवार ढंग से पढ़िए पूरी खबर… 1. हरिद्वार के सिद्धपीठ में जैकब जूमा ने की पूजा- दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति जैकब जूमा इन दिनों भारत के आध्यात्मिक दौरे पर हैं। उन्होंने उत्तराखंड के हरिद्वार पहुंचकर प्रसिद्ध सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में मां भगवती की विशेष पूजा-अर्चना की। जूमा ने बताया कि वे पहले भी कई बार भारत (2008, 2010, 2015, 2016) आ चुके हैं, लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार का यह उनका पहला दौरा है। मंदिर के महामंडलेश्वर ने फूलों की भव्य माला पहनाकर उनका स्वागत किया। जूमा दक्षिण अफ्रीका के एक प्रमुख विपक्षी दल के अध्यक्ष हैं। वहां इसी साल 4 नवंबर को स्थानीय निकाय चुनाव हैं और 2029 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। जूमा ने संकल्प लिया है कि यदि वे दोबारा राष्ट्रपति बनते हैं, तो सबसे पहले फिर से हरिद्वार आकर मां काली की पूजा करेंगे। इस यात्रा के दौरान जूमा के साथ दक्षिण अफ्रीका के राजनयिक, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री वाईपी सिंह और उनके बेहद करीबी मित्र व विवादित कारोबारी अजय कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे। 2. सहारनपुर की राशन दुकान से दक्षिण अफ्रीका के ‘किंगमेकर’ बने गुप्ता ब्रदर्स- जैकब जूमा की किस्मत को बदलने और फिर डुबाने के पीछे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के गुप्ता बंधुओं (अजय, अतुल और राजेश गुप्ता) का हाथ रहा है। गुप्ता बंधुओं के पिता शिवकुमार गुप्ता सहारनपुर के रायवाला बाजार में राशन और मसालों की दुकान चलाते थे। 1985 में पढ़ाई के बाद मंझले भाई अतुल गुप्ता दक्षिण अफ्रीका चले गए, जहां उन्हें रंगभेद के बाद व्यापार की बड़ी संभावनाएं दिखीं। बाद में उन्होंने अपने भाइयों अजय और राजेश को भी बुला लिया। 1993 में उन्होंने सहारा कंप्यूटर्स की शुरुआत की। मेहनत के दम पर यह देश की नंबर वन कंपनी बनी। इसके बाद उन्होंने कोल-गोल्ड माइनिंग, अखबार (न्यूज एज) और कई न्यूज चैनलों पर कब्जा कर अरबों का साम्राज्य खड़ा कर लिया। 3. संकट के समय जैकब जूमा की मदद और गुप्ता राज की शुरुआत- 2000 के आसपास गुप्ता ब्रदर्स और तत्कालीन उपराष्ट्रपति जैकब जूमा के बीच दोस्ती हुई। इसके बाद जूमा पर भ्रष्टाचार और गंभीर आरोप लगे, जिसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया और 15 साल की सजा सुनाई गई। इस बुरे वक्त में गुप्ता बंधुओं ने जैकब जूमा की 5 पत्नियों और 23 बच्चों की आर्थिक मदद की, बच्चों को नौकरियां दीं और जुमा को राष्ट्रपति बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया। 2009 में जैकब ज़ूमा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बन गए। इसके बाद देश में गुप्ता बंधुओं का परोक्ष राज शुरू हो गया। सरकारी ठेके केवल गुप्ता ब्रदर्स को मिलते, बड़े पदों पर नियुक्तियां वे तय करते और यहां तक कि सेना के एयरपोर्ट पर अपने निजी विमान उतारते थे। 4. तीन भाइयों के चक्कर में गई राष्ट्रपति की कुर्सी और फिर जेल- 2016 में तत्कालीन उप वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि गुप्ता भाइयों ने उन्हें वित्त मंत्री बनाने का सौदा किया था। इसके बाद देश में भारी बवाल मच गया। इस बेतहाशा राजनीतिक दखल और अरबों के घोटाले के आरोप के चलते दक्षिण अफ्रीका में बेहद लोकप्रिय रहे जैकब ज़ूमा को अपनी राष्ट्रपति की कुर्सी गंवानी पड़ी और उन्हें 15 महीने की जेल काटनी पड़ी। जुमा के हटते ही गुप्ता ब्रदर्स पर शिकंजा कसा। 2018 में छापेमारी के बाद तीनों भाई कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए दुबई (UAE) भाग गए। हालांकि, प्रत्यर्पण संधि होने के बाद हाल ही में दो भाइयों को यूएई में गिरफ्तार कर लिया गया है, जिन्हें वापस दक्षिण अफ्रीका लाने की तैयारी है। राष्ट्रपति पद गंवाने और जेल जाने के बाद, अब जैकब ज़ूमा एक बार फिर अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। अभी वे अपने पुराने साथी अजय गुप्ता को साथ लेकर हरिद्वार में मां भगवती की शरण में पहुंचे हैं। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें… देहरादून बॉर्डर पांवटा साहिब पर डटे 200 निहंग:SSP को दिया दो दिन का अल्टीमेटम; बोले- साथियों को छोड़ो वरना कूच करेंगे देहरादून कूच करने वाले निहंगों में से कुछ लोग अब भी पांवटा साहिब में डटे हुए हैं। मामले में हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने पांवटा साहिब पहुंचकर निहंग जत्थेदारों से बातचीत की। उन्होंने उनकी मांगों और उत्तराखंड कूच को लेकर विस्तार से चर्चा की। (पढ़ें पूरी खबर)
नवीनतम आरएसएस-बीजेपी हलचल के अंदर: तावड़े, शिवराज, बंसल और चुघ प्रमुख संगठनात्मक भूमिकाओं के लिए फोकस में | भारत समाचार

आखरी अपडेट:18 जून, 2026, 07:00 IST हालांकि संगठनात्मक कार्यभार चर्चा का हिस्सा बने, लेकिन समझा जाता है कि बड़ी बातचीत भाजपा के राजनीतिक संदेश और लामबंदी की रणनीति पर केंद्रित रही। हालाँकि, नवीनतम विचार-विमर्श से संकेत मिलता है कि संघ पुनर्गणना की वकालत कर सकता है, जो चुनावी रणनीति को मजबूत वैचारिक संदेश के साथ जोड़ना चाहता है। फ़ाइल चित्र/पीटीआई पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और आरएसएस के वरिष्ठतम पदाधिकारियों के बीच सोमवार को दिल्ली में हुई हालिया समन्वय बैठक के बाद भाजपा के भीतर एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक कवायद चल रही है। हालांकि कोई औपचारिक निर्णय की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन समझा जाता है कि चर्चा में कई प्रमुख नेताओं के लिए संभावित नई जिम्मेदारियों के साथ-साथ पांच राज्यों में आगामी चुनावों से पहले पार्टी की व्यापक राजनीतिक दिशा भी शामिल है। विचार-विमर्श से परिचित सूत्रों के अनुसार, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को पंजाब और उत्तराखंड से संबंधित जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी उत्तर प्रदेश में एक बड़ी भूमिका के लिए माना जा रहा है, एक ऐसा राज्य जो 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की राजनीतिक गणना का केंद्र बना हुआ है। सूत्र आगे संकेत देते हैं कि सुनील बंसल, जिन्हें व्यापक रूप से भाजपा के सबसे प्रभावी संगठनात्मक रणनीतिकारों में से एक माना जाता है, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों की देखरेख जारी रख सकते हैं और साथ ही मणिपुर में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पुनर्गठन प्रक्रिया के गति पकड़ने पर राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ के संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच एक महत्वपूर्ण समन्वय कड़ी के रूप में उभरने की उम्मीद है। नियुक्तियों से परे एक रणनीतिक बातचीत बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष, राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत अन्य लोग शामिल हुए। आरएसएस का प्रतिनिधित्व करते हुए संगठन के महासचिव दत्तात्रेय होसबले और संयुक्त महासचिव अरुण कुमार सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे। जबकि संगठनात्मक कार्य चर्चा का हिस्सा बने, समझा जाता है कि बड़ी बातचीत भाजपा की राजनीतिक संदेश और लामबंदी रणनीति पर केंद्रित रही। सूत्रों का कहना है कि आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने वैचारिक पहुंच को तेज करने और पार्टी के मूल समर्थन आधार के साथ फिर से जुड़ने की जरूरत पर जोर दिया। विशेष रूप से, समझा जाता है कि दत्तात्रेय होसबले ने जाति-आधारित राजनीतिक गणनाओं पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति आगाह करते हुए हिंदुत्व-केंद्रित लामबंदी और सामाजिक जुड़ाव पर अधिक ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया है। यह चर्चा महत्वपूर्ण है क्योंकि, 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद, भाजपा के भीतर कुछ वर्गों ने कई राज्यों में बदलती राजनीतिक वास्तविकताओं को नेविगेट करने के लिए जाति समीकरणों और सामाजिक इंजीनियरिंग पर ध्यान केंद्रित किया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में मधुपर्णा दास सीएनएन न्यूज 18 में एसोसिएट एडिटर (पॉलिसी) मधुपर्णा दास लगभग 14 वर्षों से पत्रकारिता में हैं। वह बड़े पैमाने पर राजनीति, नीति, अपराध और आंतरिक सुरक्षा मुद्दों को कवर करती रही हैं। उसके पास सह…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया नवीनतम आरएसएस-बीजेपी हलचल के अंदर: तावड़े, शिवराज, बंसल और चुघ प्रमुख संगठनात्मक भूमिकाओं के लिए फोकस में अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)आरएसएस(टी)बीजेपी(टी)चुनाव
डबल-इंजन ड्राइव: क्यों जितिन प्रसाद आश्वस्त हैं कि बीजेपी यूपी चुनाव में जीत हासिल करेगी | News18 इंडिया अमृत रत्न सम्मान | भारत समाचार

आखरी अपडेट:17 जून, 2026, 17:15 IST मंत्री ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में एकजुट मोर्चा बनाने के विपक्ष के नए प्रयासों को पूरी तरह से खारिज कर दिया प्रसाद ने जोर देकर कहा कि भाजपा की दुर्जेय संगठनात्मक मशीनरी पहले से ही राज्य के हर मतदान केंद्र पर सभी सिलेंडरों पर काम कर रही है। फ़ाइल चित्र/पीटीआई आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चुनावी संभावनाओं के बारे में पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए, केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि पार्टी भारी जनादेश हासिल करने के लिए तैयार है। बुधवार को न्यूज 18 इंडिया अमृत रत्न सम्मान कॉन्क्लेव में, मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि अभियान का मुख्य आधार “डबल-इंजन” शासन मॉडल की दृश्यमान उपलब्धियां होंगी, जिसमें नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने के साथ कानून और व्यवस्था पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अडिग रुख को शामिल किया जाएगा। प्रसाद ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में एकजुट मोर्चा बनाने के विपक्ष के नए प्रयासों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश में मतदाता ऐतिहासिक रूप से अस्थिरता, प्रणालीगत नीतिगत पक्षाघात और जाति-आधारित गठबंधन से जुड़े समझौता कानून प्रवर्तन से पीड़ित रहे हैं। मंत्री के अनुसार, मतदाता पूरी तरह से खंडित पहचान की राजनीति से आगे निकल चुके हैं और शासन मॉडल में किसी भी प्रतिगामी वापसी को दृढ़ता से खारिज कर देंगे जो अराजकता को सहन करते हैं या सांप्रदायिक समझौतों के लिए विकास की गति को रोकते हैं। उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश के मतदाता पहले ही अवसरवादी, जाति-संचालित गठबंधनों की अराजक अस्थिरता का स्वाद चख चुके हैं। वे प्रशासनिक पंगुता की वापसी के लिए पारदर्शी शासन और व्यक्तिगत सुरक्षा का सौदा नहीं करेंगे।” परिचालन तत्परता की ओर मुड़ते हुए, प्रसाद ने जोर देकर कहा कि भाजपा की दुर्जेय संगठनात्मक मशीनरी पहले से ही राज्य के हर मतदान केंद्र पर सभी सिलेंडरों पर काम कर रही है। प्रतिद्वंद्वी गुटों के विपरीत, जो मौसमी गठबंधनों और ग्यारहवें घंटे की सीट-बंटवारे की व्यवस्था पर भरोसा करते हैं, सत्तारूढ़ पार्टी के जमीनी स्तर के कैडर निरंतर सार्वजनिक जुड़ाव बनाए रखते हैं, राज्य कल्याण पहलों को सीधे जमीनी स्तर की सद्भावना में अनुवाद करते हैं। मंत्री ने दोहराया कि भाजपा का अभियान समावेशी विकास और पारदर्शी प्रशासन के उसके सत्यापित ट्रैक रिकॉर्ड से सख्ती से जुड़ा रहेगा। विपक्ष के जाति-केंद्रित अंकगणित में शामिल होने से इनकार करके, प्रसाद ने संकेत दिया कि प्रदर्शन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए उनकी पार्टी की सीधी अपील क्षेत्रीय विखंडन को खत्म कर देगी, जिससे राज्य विधानसभा में अजेय बहुमत का रास्ता साफ हो जाएगा। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना लेखक के बारे में न्यूज़ डेस्क न्यूज़ डेस्क उत्साही संपादकों और लेखकों की एक टीम है जो भारत और विदेशों में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का विवरण और विश्लेषण करती है। लाइव अपडेट से लेकर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट से लेकर गहन व्याख्याताओं तक…और पढ़ें न्यूज़ इंडिया डबल-इंजन ड्राइव: क्यों जितिन प्रसाद आश्वस्त हैं कि बीजेपी यूपी चुनाव में जीत हासिल करेगी | न्यूज18 इंडिया अमृत रत्न सम्मान अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)उत्तर प्रदेश(टी)चुनाव(टी)बीजेपी(टी)योगी आदित्यनाथ(टी)डबल इंजन(टी)नरेंद्र मोदी(टी)यूपी
India 6th in World Stock Market; Neelam Meena Appointed Chief Election Officer

Hindi News Career India 6th In World Stock Market; Neelam Meena Appointed Chief Election Officer 6 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. क्वाड देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क पर MoU साइन किया 26 मई को नई दिल्ली में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक खत्म हुई। बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री शामिल हुए। अमेरिका की ओर से मार्को रूबियो, जापान से तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की तरफ से पेनी वोंग मौजूद रहे। भारत और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ सप्लाई सिक्योरिटी के लिए एक MoU साइन किया। ये MoU भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग बढ़ाने में मदद करेगा। क्वाड देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क शुरू करने को मंजूरी दी। इसके साथ ही खनन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए मिलकर निवेश और सहयोग करने पर मंजूरी दी। क्वाड देशों ने इंडो-पैसिफिक में एनर्जी सिक्योरिटी बढ़ाने के लिए भी पहल की है, जिसके तहत फ्यूल सिक्योरिटी फोरम और रीजनल एनर्जी सिक्योरिटी को आगे बढ़ाया जाएगा। हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री निगरानी बढ़ाने के लिए क्वाड देश सैटेलाइट डेटा साझा करेंगे, जिससे तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और आपदा राहत में मदद मिलेगी। क्वाड देशों ने फिजी में ‘पोर्ट्स ऑफ द फ्यूचर’ प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला भी किया है, जिसके तहत पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और रीजनल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही क्वाड देशों ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े संकट पर भी बात की। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 2. ताइवान दुनिया का 5वां सबसे बड़ा शेयर मार्केट बना 25 मई को ब्लूमबर्ग की जारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को पीछे छोड़ ताइवान दुनिया का 5वां सबसे बड़ा शेयर मार्केट बन गया है। ताइवान का कुल मार्केट कैप 4.95 ट्रिलियन हुआ, जबकि भारत का मार्केट कैप 4.92 ट्रिलियन है। ताइवान के शेयर मार्केट में आए इस उछाल का मुख्य कारण ताइवानी सेमीकंडक्टर और एआई (AI) इंडस्ट्री की बढ़ती मांग है। ताइवान के मार्केट में आई इस तेजी की सबसे बड़ी वजह चिप निर्माता कंपनी Taiwan Semiconductor Manufacturing Company यानी TSMC रही है। कंपनी के शेयर इस साल करीब 49 प्रतिशत बढ़े हैं। भारत अब ग्लोबल शेयर मार्केट रैंकिंग में छठे नंबर पर आ गया है। दुनिया के सबसे बड़े शेयर मार्केट अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग के हैं। शेयर मार्केट रैंकिंग के मामले में ताइवान भारत से आगे है, लेकिन अर्थव्यवस्था के आकार में भारत अब भी काफी बड़ा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमान के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था करीब 4.15 ट्रिलियन डॉलर की है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वहीं, ताइवान का ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानी, GDP करीब 977 अरब डॉलर है। 3. भारत और कनाडा ने ‘CEPA 2030’ लक्ष्य तय किया 25 मई को भारत और कनाडा ने साल 2026 के आखिर तक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पूरा करने का लक्ष्य तय किया। कनाडा के पीएम मार्क कॉर्नी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के बीच ओटावा में हुई बैठक में इस बात की जानकारी दी। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, CEPA का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को $50 बिलियन (लगभग 4 लाख करोड़ रुपए) तक करना है। कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने इस समझौते को दोनों देशों के लिए ‘गेम चेंजर’ बताया है। ये MoU सर्विस, इंवेस्टमेंट और ह्यूमन रिसोर्स से संबंधित है। इसके साथ ही दोनों देश एनर्जी, एग्रीकल्चर और हायर एजुकेशन जैसे सेक्टर्स में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इस MoU से भारतीय निर्यातकों को कनाडा के बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकेगी। ये CEPA भारत की ‘एक्ट वेस्ट’ और कनाडा की ‘इंडो-पैसिफिक’ रणनीति का हिस्सा है। इस MoU के पूरा होने पर फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल और IT प्रोफेशनल्स को फायदा मिलेगा। भारत और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता की अगली बैठक जुलाई 2026 में ओटावा में आयोजित की जाएगी। अपॉइंटमेंट (APPOINTMENT) 4. नीलम मीणा चीफ इलेक्शन ऑफिसर अपॉइंट हुईं 26 मई को 1998 बैच की IAS नीलम मीणा ने पश्चिम बंगाल की नई चीफ इलेक्शन ऑफिसर (CEO) का पद संभाला। IAS नीलम की नियुक्ति पूर्व CEO मनोज कुमार अग्रवाल को राज्य का मुख्य सचिव बनाए जाने के बाद की गई है। नीलम हुगली जिले की मजिस्ट्रेट भी रह चुकी हैं। साथ ही सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (SJDA) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी रहीं। नीलम पश्चिम बंगाल सरकार के युवा सेवा और पर्यावरण विभाग में वरिष्ठ पदों पर रह चुकी हैं। इसके साथ ही नीलम चाय बोर्ड और ग्रामीण विकास मंत्रालय में भी काम कर चुकी हैं। फरवरी 2024 में नीलम पश्चिम बंगाल के कंज्यूमर डिपार्टमेंट की सेक्रेटरी बनाई गई थीं और अब तक वे इस पद पर थीं। इससे साथ ही नीलम कई सारे डिपार्टमेंट में प्रिंसिपल सेक्रेटरी, डायरेक्टर, सेक्रेटरी, डिप्टी चेयरमैन, प्राइवेट सेक्रेटरी, जिला कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट, जॉइंट सेक्रेटरी, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर समेत कई पदों पर काम कर चुकी हैं। नीलम कई डिपार्टमेंट में प्रिंसिपल सेक्रेटरी, डायरेक्टर और डिप्टी चेयरमैन रह चुकी हैं। मिसलीनियस (MISCELLENEOUS) 5. बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह पर FWICE ने बैन लगाया 25 मई को बॉलीवुड एक्टर रणवीर सिंह पर फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने बैन लगाया। ये बैन अचानक फिल्म छोड़ने की वजह से लगाया गया है। एक्टर-डायरेक्टर फरहान अख्तर ने रणवीर सिंह के अचानक फिल्म ‘डॉन 3’ से बाहर होने की शिकायत FWICE में की थी। फरहान ने अपनी शिकायत में कहा कि फिल्म का प्री प्रोडक्शन शुरू हो गया था, इसके बाद रणवीर ने फिल्म छोड़ दी। इससे फिल्म मेकर्स को 45 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। FWICE के मुताबिक, फेडरेशन के अध्यक्ष वीएन तिवारी नेरणवीर से इस मामले में तीन बार बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने रिस्पोंस नहीं दिया। इसके बाद FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव (उनके साथ काम न करने का निर्देश) जारी कर दिया है। फरहान ने साल 2023 में फिल्म डॉन-3 की घोषणा एक्टर रणवीर सिंह के साथ की थी। 2006 में आई शाहरुख स्टारर डॉन और 2011 में आई डॉन-2 के बाद ये इस फ्रेंचाइजी की ये तीसरी फिल्म थी। फेडरेशन
Joint Parliamentary Committee on ‘One Nation One Election’ held meeting in gandhinagar

Hindi News National Joint Parliamentary Committee On ‘One Nation One Election’ Held Meeting In Gandhinagar गांधीनगर6 मिनट पहले कॉपी लिंक वन नेशन-वन इलेक्शन के मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति ने विभिन्न राज्यों का दौरा कर राजनीतिक दलों और अधिकारियों से परामर्श शुरू कर दिया है। प्रियंका गांधी, संबित पात्रा और बांसुरी स्वराज समेत समिति के 39 सदस्य आज से तीन दिनों के लिए गुजरात पहुंचे रहे हैं। जेपीसी सदस्य मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और राज्य के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और उनके विचार जानेंगे। समिति की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस शाम 5:30 बजे गांधीनगर की गिफ्ट सिटी में होगी। वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता वकील पीपी चौधरी कर रहे हैं। इसके अलावा, इसमें कुल 39 सदस्य हैं, जिनमें 27 लोकसभा सांसद और 12 राज्यसभा सांसद शामिल हैं। वन नेशन वन इलेक्शन के मुद्दे पर 2019 में हुई सर्वदलीय बैठक की तस्वीर। सपा, टीआरएस, शिरोमणि अकाली दल जैसी पार्टियों ने इसका समर्थन किया था। शीर्ष अधिकारियों को मीटिंग में उपस्थित रहने के निर्देश गुजरात की न्यायिक परिषद ने राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को मीटिंग में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। समिति ने मुख्य सचिव मनोज दास, डीजीपी केएनएल राव, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी नटराजन और 10 से अधिक वरिष्ठ सचिवों को बैठक में उपस्थित रहने के लिए कहा है। माना जा रहा है कि जेपीसी और राज्य के अधिकारियों के बीच तीन से चार घंटे तक चर्चा हो सकती है। समिति ने सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को को अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए 20 मई को आमंत्रित किया है। इस मुद्दे पर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल पटेल ने कहा- गुजरात भाजपा एक राष्ट्र-एक चुनाव का पूरी तरह से समर्थन करती है। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोषी ने कहा- कांग्रेस इस मुद्दे पर अपने विचार रखेगी। यह मुद्दा जनता के अधिकारों से जुड़ा है और हमारी सभी चिंताओं को समिति के समक्ष रखा जाएगा। तस्वीर 23 सितंबर, 2024 की है, जब दिल्ली के जोधपुर ऑफिसर्स हॉस्टल में वन नेशन-वन इलेक्शन के लिए बनाई कमेटी की बैठक हुई थी। एक देश-एक चुनाव क्या है भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। एक देश-एक चुनाव का मतलब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से है। यानी मतदाता लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय वोट डालेंगे। आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही हुए थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद दिसंबर, 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई। ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर, 2023 को एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल ने हितधारकों-विशेषज्ञों के साथ चर्चा और 191 दिनों के शोध के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। एक साथ चुनाव करवाने के 4 बड़े फायदे- रामनाथ कोविंद समिति ने अपनी रिपोर्ट में एकसाथ चुनाव करवाए जाने के पक्ष में ये तर्क दिए हैं… 1. शासन में निरंतरता आएगी: देश के विभिन्न भागों में चुनावों के चल रहे चक्रों के कारण राजनीतिक दल, उनके नेता और सरकारों का ध्यान चुनावों पर ही रहता है। एक साथ चुनाव करवाने से सरकारों का फोकस विकासात्मक गतिविधियों और जनकल्याणकारी नीतियों के क्रियान्वयन पर केंद्रित होगा। 2. अधिकारी काम पर ध्यान दे पाएंगे: चुनाव की वजहों से पुलिस सहित अनेक विभागों के पर्याप्त संख्या में कर्मियों की तैनाती करनी पड़ती है। एकसाथ चुनाव कराए जाने से बार बार तैनाती की जरूरत कम हो जाएगी, जिससे सरकारी अधिकारी अपने मूल दायित्यों पर फोकस कर पाएंगे। 3. पॉलिसी पैरालिसिस रुकेगा: चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता के क्रियान्वयन से नियमित प्रशासनिक गतिविधियां और विकास कार्य बाधित हो जाते हैं। एक साथ चुनाव कराने से आदर्श आचार संहिता के लंबे समय तक लागू रहने की अवधि कम होगी, जिससे पॉलिसी पैरालिसिस कम होगा। 4. वित्तीय बोझ में कमी आएगी: एकसाथ चुनाव कराने से खर्च में काफी कमी आ सकती है। जब भी चुनाव होते हैं, मैनपॉवर, उपकरणों और सुरक्षा उपायों के प्रबंधन पर भारी खर्च होता है। इसके अलावा राजनीतिक दलों को भी काफी खर्च करना पड़ता है। ये आंकड़े करते हैं एकसाथ चुनावों का समर्थन • 2019-2024 के दौरान भारत में 676 दिन आचार संहिता लागू रही, यानी हर साल करीब 113 दिन। • अकेले 2024 के लोकसभा चुनावों में ही एक अनुमान के मुताबिक करीब 1 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए। ————— वन नेशन-वन इलेक्शन से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… एक देश-एक चुनाव से मतदाता अधिकार प्रभावित नहीं होंगे:JPC की मीटिंग में पहुंचे पूर्व CJI बीआर गवई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व CJI जस्टिस बीआर गवई ने गुरुवार को वन नेशन, वन इलेक्शन (ONOE) पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक देश एक चुनाव से मतदाता अधिकार प्रभावित नहीं होंगे और संघीय ढांचे पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
SC Questions Centre on Election Commissioner Appointments

Hindi News National SC Questions Centre On Election Commissioner Appointments | Opposition Leader Role नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग में नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया। कोर्ट ने कहा- अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में विपक्ष के नेता (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा- CBI डायरेक्टर की सिलेक्शन कमेटी में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होते हैं, लेकिन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में कोई स्वतंत्र सदस्य नहीं रखा गया है। कोर्ट ने आगे कहा- कमेटी में तीन लोग हैं और हर फैसला 2:1 के बहुमत के हिसाब से ही होगा तो फिर विपक्ष के नेता को शामिल ही क्यों करते हैं? वह सिर्फ दिखावटी हो जाते हैं। क्या कैबिनेट का कोई मंत्री प्रधानमंत्री के खिलाफ जाएगा? कोर्ट ने यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और दो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई चयन प्रक्रिया में केंद्र को ज्यादा अधिकार दिए गए हैं, जिससे आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…





