Monday, 10 Aug 2026 | 06:33 PM

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SIR Voter List Revision Phase 3 Update; Election Commission

SIR Voter List Revision Phase 3 Update; Election Commission

Hindi News National SIR Voter List Revision Phase 3 Update; Election Commission | States UTs नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक चुनाव आयोग ने गुरुवार को स्पेशल इंटेशिव रिवीजन (SIR) के तीसरे फेज की घोषणा की है। इस चरण के तहत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में करोड़ों मतदाताओं का घर-घर जाकर वेरिफिकेशन किया जाएगा। चुनाव आयोग के अनुसार तीसरे फेज में 36.73 करोड़ मतदाताओं का वेरिफिकेशन होगा। इस प्रक्रिया में 3.94 लाख बूथ लेवल अधिकारी (BLO) तैनात होंगे। BLO की मदद के लिए राजनीतिक पार्टियों की तरफ नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी शामिल रहेंगे। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

SIR Voter List Revision Phase 3 Update; Election Commission

SIR Voter List Revision Phase 3 Update; Election Commission

Hindi News National SIR Voter List Revision Phase 3 Update; Election Commission | States UTs नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक चुनाव आयोग ने गुरुवार को स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) के तीसरे फेज की घोषणा की है। इस फेज के तहत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन किया जाएगा। 16 राज्यों में हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली (NCT), चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन-दीव शामिल हैं। SIR के तीसरे फेज के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर पूरे देश में SIR प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इन तीनों राज्यों में मौसम और जनगणना के दूसरे चरण को देखते हुए SIR के शेड्यूल की घोषणा बाद में की जाएगी। करीब 4 लाख BLO, 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट तैनात होंगे चुनाव आयोग ने बताया कि तीसरे फेज की SIR प्रक्रिया में 3.94 लाख बूथ लेवल अधिकारी (BLO) तैनात होंगे। BLO की मदद के लिए राजनीतिक पार्टियों की तरफ नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी शामिल रहेंगे। दिल्ली में SIR के बाद फाइनल वोटर लिस्ट 7 अक्टूबर को जारी की जाएगी। चुनाव आयोग ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बर्फबारी और मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए SIR की तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी। SIR फेज 1-2 : 10 राज्य, 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हुए चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में SIR कराने का आदेश दिया था। अब तक 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। पहले फेज में बिहार में SIR हुआ था। दूसरे फेज के तहत 28 अक्टूबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR हुआ। इनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप शामिल हुआ। आयोग ने बताया कि SIR के पहले दो फेज में करीब 59 करोड़ मतदाताओं को कवर किया गया था। इस दौरान 6.3 लाख BLO और 9.2 लाख BLA प्रक्रिया में शामिल हुए। SIR प्रक्रिया, 6 सवाल-जवाब में जानें… 1. SIR क्या है? यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाकर वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। 18 साल से ज्यादा के नए वोटरों को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पते में गलतियों को भी ठीक किया जाता है। 2. पहले किस राज्य में हुआ? पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। दूसरे फेज के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में SIR की घोषणा हुई। 3. कौन करता है? ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों का वेरिफिकेशन करते हैं। 4. SIR में वोटर को क्या करना होगा? SIR के दौरान BLO/BLA वोटर को फॉर्म देंगे। वोटर को उन्हें जानकारी मैच करवानी है। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। 5. SIR के लिए कौन से दस्तावेज मान्य? पेंशनर पहचान पत्र किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र जन्म प्रमाणपत्र पासपोर्ट 10वीं की मार्कशीट स्थायी निवास प्रमाणपत्र वन अधिकार प्रमाणपत्र जाति प्रमाणपत्र राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम परिवार रजिस्टर में नाम जमीन या मकान आवंटन पत्र आधार कार्ड 6. SIR का मकसद क्या है? 1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना। डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

‘हिम्मत न हारें, मजबूत बने रहें…’ चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने टीएमसी कंसोल को दे दिया ये बड़ा मैसेज

'हिम्मत न हारें, मजबूत बने रहें...' चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने टीएमसी कंसोल को दे दिया ये बड़ा मैसेज

कैथोलिक कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने मंगलवार को अपनी पार्टी के शौचालयों को हार पर आधारित कर दिया, लेकिन जुझारू शास्त्रीय प्रतिक्रिया देते हुए “बहादुर” शीर्षक वाली एक कविता साझा की, जिसमें विचारधारा से विपरीत प्रशांत महासागर में साहस, गरिमा और आंतरिक शक्ति बनाए रखने की वकालत की गई है। ममता ने कविता की शुरुआत “हिम्मत न हारें, मजबूत बने रहो” पंक्ति से की। उन्होंने लिखा, ”अगर आप कहेंगे कि आपके साथी हमेशा से हैं, तो आप कुछ नहीं बोल सकते.” कविता में बार-बार दृढ़ता, अकेलापन और नैतिक विश्वास जैसे विषयों का ज़िक्र किया गया है। ममता ने लिखा, “जब तुम पैदा हुए थे, अकेले आए थे और जब मृत्यु होगी, तब भी अकेले ही जाओगे। कर्म अच्छे को हमेशा याद किया जाएगा।” यह भी पढ़ें: टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने भड़के पूर्व सीएम पर कहा, ‘पश्चिम बंगाल में बीजेपी तो थी ही नहीं, आपने…’ कविता की अंतिम पंक्ति में अलौकिक सुप्रीमो ने लिखा है, “हिम्मत न हारें। अंततः तुम्हें लाभ होगा, यह विश्वास रखता है”। बंगाल में बीजेपी की सरकार पश्चिम बंगाल में हाल ही में आए समाजवादी पार्टी ने प्रचंड को बहुमत दिलाया और राज्य में पहली बार सरकार बनाई। 15 संतों से लेकर 100 आश्रमों तक की मान्यता। यह भी पढ़ें: शशि थरूर ऑन एसआईआर: बंगाल में कैसे हुई बंपर जीत? शशि थरूर ने बताया क्यों राहुल गांधी, ममता बनर्जी दोनों हो जाएंगे खुश! (टैग्सटूट्रांसलेट)इलेक्शन(टी)पश्चिम बंगाल(टी)ममता बनर्जी(टी)बीजेपी(टी)कोलकाता(टी)ममता बनर्जी(टी)ममता बनर्जी(टी)इलेक्शन(टी)बीजेपी(टी)कोलकाता(टी)नरेंद्र मोदी

चुनाव से पहले गोआ सरकार का बड़ा दांव, 82 लाख वर्ग मीटर का नो डाटा जोन घोषित, पर्यावरण पर नजर कदम

चुनाव से पहले गोआ सरकार का बड़ा दांव, 82 लाख वर्ग मीटर का नो डाटा जोन घोषित, पर्यावरण पर नजर कदम

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गोवा सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने 82 लाख वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र को ‘नो डिजायड जोन’ घोषित किया है। इस कदम को एक तरफ पर्यावरण संरक्षण की कोशिश माना जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे चुनाव से पहले सरकार की राजनीतिक और दूसरी रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। सरकार ने पहाड़ी ढलानों, बागवानों के बागानों, धान के साक्षियों और व्यापारियों के रूप में सेंधमारी को संरक्षण समूह में शामिल करने का निर्णय लिया है। टाउन एंड कंस्ट्रक्शन कम्पनियों (टीसीपी) बोर्ड द्वारा माजॉर्डा, गोंसुआ, मस्टरम और मंड्रेम के प्रस्तावों के तहत क्षेत्र में मजबूत नियंत्रण पर जोर दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, तेजी से बढ़ती रियल एस्टेट और पर्यटन दबाव के कारण इन इलाकों की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो रही थी। यह भी पढ़ें: टीवीके प्रमुख विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, ‘थलापति’ के पास 121 सौदे का समर्थन सरकारी दस्तावेज़ क्या कहते हैं? सरकारी आँकड़ों के अनुसार, सत्यारी तालुका के मध्यवर्ती क्षेत्र में लगभग 65.31 लाख वर्गमीटर भूमि और पेरनेम के मंड्रेम क्षेत्र में लगभग 6.44 लाख वर्गमीटर क्षेत्र की सुरक्षा सीमा शामिल है। इसके अलावा मांडवी और जुआरी नदी के किनारे करीब 6.72 करोड़ वर्गमीटर क्षेत्र को आकर्षक क्षेत्र घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। यह भी पढ़ें धोनी बने सबसे बड़े टैक्सपेयर, आईपीएल के बाहर भी ‘कैप्टन कूल’ का जलवा, बड़े-बड़े दिग्गज पीछे छूटे विश्वजीत राणे ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नदी तटीकरण तंत्र, हरित क्षेत्र और कृषि भूमि बचाना है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में धान के साकेत और तालाबों को भी बड़े पैमाने पर घोषित किया जा सकता है। हालाँकि नामांकन और कुछ रियल एस्टेट ग्रुप जजमेंट इस को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव से पहले सरकार पर्यावरण संरक्षण के जरिये राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है। वहीं पर्यावरणविद इसे गांव के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने की दिशा में अहम कदम उठा रहे हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)गोवा(टी)चुनाव(टी)भूमि(टी)विश्वजीत राणे(टी)गोवा कोई विकास क्षेत्र नहीं(टी)गोवा एनडीजेड समाचार(टी)गोवा पर्यावरण संरक्षण(टी)गोवा 2027 चुनाव(टी)विश्वजीत राणे का बयान(टी)गोवा पहाड़ी निर्माण प्रतिबंध(टी)गोवा धान के खेतों की सुरक्षा(टी)मंडोवी नदी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र(टी)ज़ुआरी नदी संरक्षण(टी)गोवा रियल एस्टेट प्रतिबंध(टी)गोवा पर्यावरण नीति(टी)गोवा टीसीपी बोर्ड निर्णय(टी)गोवा ग्रीन जोन समाचार(टी)गोवा भूमि संरक्षण(टी)गोवा राजनीतिक समाचार हिंदी(टी)गोवा(टी)चुनाव(टी)जमीन(टी)विश्वजीत राणे(टी)गोवा नोआडियन जोन(टी)गोवा एनडीजेड समाचार(टी)गोवा पर्यावरण संरक्षण(टी)गोवा 2027 चुनाव(टी)विश्वजीत राणे का(टी)गोवा पर्वत निर्माण पर प्रतिबंध(टी)गोवा धान के सरकारी संरक्षण(टी)मांड नदी इको-सेंस नॉटिकल जोन(टी)जुआरी नदी संरक्षण(टी)गोवा रियल एस्टेट प्रतिबंध(टी)गोवा पर्यावरण नीति(टी)गोवा टीसीपी बोर्ड का फैसला(टी)गोवा ग्रीन जोन समाचार(टी)गोवा भूमि संरक्षण(टी)गोवा राजनीतिक समाचार हिंदी

Vijay Election Win Prediction by Pooja Hegde; Dream Come True!

Vijay Election Win Prediction by Pooja Hegde; Dream Come True!

25 मिनट पहले कॉपी लिंक थलापति विजय इन दिनों तमिलनाडु चुनाव में अपनी बड़ी जीत को लेकर सुर्खियों में हैं। इसी बीच एक्ट्रेस पूजा हेगड़े ने सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो शेयर किया है। फिल्म ‘जन नायकन’ की शूटिंग के दौरान पूजा ने विजय की जीत की भविष्यवाणी की थी, जो अब सच साबित हो गई है। यह वीडियो फिल्म ‘जन नायकन’ के सेट का है। वीडियो में एक व्हाइटबोर्ड दिख रहा है, जिस पर लिखा है “चुनाव कौन जीतेगा?” (Who Will Win the Election?)। पूजा हेगड़े पहले बोर्ड पर लिखा यह सवाल दिखाती हैं और फिर धीरे से कैमरा पीछे खड़े विजय की ओर घुमा देती हैं। कैमरा देखते ही विजय शर्मा जाते हैं और हंसते हुए अपना चेहरा छिपा लेते हैं। 4 मई को आए चुनाव नतीजों में पहली बार चुनाव लड़ने वाली विजय की पार्टी TVK ने 108 सीटें जीती हैं। बहुमत के लिए 118 सीटें चाहिए। TVK को सरकार बनाने के लिए 10 सीटों की जरूरत है। पूजा ने लिखा- ‘होने से पहले ही कह दिया था’ इस पुराने वीडियो को शेयर करते हुए पूजा ने कैप्शन में लिखा, “शायद मैंने इसके होने से पहले ही यह कह दिया था? सपनों के हकीकत में बदलने के लिए बधाई, विजय सर।” पूजा के इस पॉजिटिव मैसेज की लोग काफी तारीफ कर रहे हैं। फैंस का कहना है कि दोनों के बीच की केमिस्ट्री ऑन-स्क्रीन के साथ-साथ ऑफ-स्क्रीन भी काफी शानदार है। ‘बीस्ट’ के बाद फिर जमी जोड़ी पूजा हेगड़े और थलपति विजय इससे पहले फिल्म ‘बीस्ट’ में साथ काम कर चुके हैं। फिल्म ‘जन नायकन’ उनकी साथ में दूसरी बड़ी फिल्म है। सोशल मीडिया पर फैंस इस थ्रोबैक वीडियो को विजय के नए सफर से जोड़कर देख रहे हैं। साउथ से लेकर बॉलीवुड स्टार्स दे रहे बधाई विजय की इस नई पारी और सफलता पर फिल्म इंडस्ट्री के कई दिग्गज उन्हें बधाई दे रहे हैं। इनमें रजनीकांत, कमल हासन, सूर्या, सिलंबरासन, लोकेश कनगराज, चिरंजीवी और राम चरण जैसे बड़े नाम शामिल हैं। सोशल मीडिया पर हैशटैग #ThalapathyVijay लगातार ट्रेंड कर रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

असम-बंगाल में कांग्रेस के 21 में से 20 विधायक मुस्लिम:AIUDF बोली- कांग्रेस अब 'मुस्लिम लीग' बनी; भाजपा ने एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था

असम-बंगाल में कांग्रेस के 21 में से 20 विधायक मुस्लिम:AIUDF बोली- कांग्रेस अब 'मुस्लिम लीग' बनी; भाजपा ने एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में मुस्लिम सीटों पर सबसे अलग ट्रेंड बंगाल में दिखा। यहां 142 मुस्लिम सीटों में से भाजपा ने 72, टीएमसी ने 64 सीटें और कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। वहीं, असम की 22 मुस्लिम बहुल सीटों पर कांग्रेस को 18, AIUDF को 2 सीटें मिलीं। केरलम की 44 मुस्लिम बहुल सीटों में IUML को 21 और कांग्रेस को 14 सीटें मिलीं। केरलम में कांग्रेस ने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा, इसमें 63 सीटें मिलीं। यहां उसके 8 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीते हैं। कांग्रेस ने बंगाल और असम में कुल 390 सीटों पर चुनाव लड़ा। 21 सीटों पर जीत दर्ज की, इनमें से 20 मुस्लिम विधायक हैं। इधर भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीवार को टिकट नहीं दिया। AIUDF के नेता बदरुद्दीन अजमल ने तंज कसते हुए कहा- ‘असम में कांग्रेस अब मुस्लिम लीग बन चुकी है।’ पहले AIUDF का कांग्रेस के साथ गठबंधन था। असम में कांग्रेस के 20 में से 18 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीते बंगाल में कांग्रेस ने TMC से ज्यादा मुसलमानों को टिकट दिया पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने 63 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया। वहीं, 15 साल से शासन कर रही TMC ने 47 मुस्लिम कैंडिडेट्स उतारे। कांग्रेस ने 2021 में भी 94 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। असम की कई सीटों पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों के मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत की दर 80 प्रतिशत से भी ज्यादा रही है। कई सीटों पर तो कांग्रेस उम्मीदवारों ने 1 लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। पांचों राज्यों के रिजल्ट… ——————————————————– ये खबर भी पढ़ें… बंगाल- 10 साल में भाजपा 3 से 207 पर पहुंची:तमिलनाडु में विजय की 2 साल पुरानी पार्टी जीती; केरलम में कांग्रेस, असम में भाजपा सरकार पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 207 सीटों पर पहुंच गई है। पूरी खबर पढ़ें…

असम-बंगाल में कांग्रेस के 21 में से 20 विधायक मुस्लिम:AIUDF बोली- कांग्रेस 'मुस्लिम लीग' बनी; भाजपा ने किसी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था

असम-बंगाल में कांग्रेस के 21 में से 20 विधायक मुस्लिम:AIUDF बोली- कांग्रेस अब 'मुस्लिम लीग' बनी; भाजपा ने एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया था

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में मुस्लिम सीटों पर सबसे अलग ट्रेंड बंगाल में दिखा। यहां 142 मुस्लिम सीटों में से भाजपा ने 72, टीएमसी ने 64 सीटें और कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। वहीं, असम की 22 मुस्लिम बहुल सीटों पर कांग्रेस को 18, AIUDF को 2 सीटें मिलीं। केरलम की 44 मुस्लिम बहुल सीटों में IUML को 21 और कांग्रेस को 14 सीटें मिलीं। केरलम में कांग्रेस ने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा, इसमें 63 सीटें मिलीं। यहां उसके 8 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीते हैं। कांग्रेस ने बंगाल और असम में कुल 390 सीटों पर चुनाव लड़ा। 21 सीटों पर जीत दर्ज की, इनमें से 20 मुस्लिम विधायक हैं। इधर भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीवार को टिकट नहीं दिया। AIUDF के नेता बदरुद्दीन अजमल ने तंज कसते हुए कहा- ‘असम में कांग्रेस अब मुस्लिम लीग बन चुकी है।’ पहले AIUDF का कांग्रेस के साथ गठबंधन था। असम में कांग्रेस के 20 में से 18 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीते बंगाल में कांग्रेस ने TMC से ज्यादा मुसलमानों को टिकट दिया पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने 63 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया। वहीं, 15 साल से शासन कर रही TMC ने 47 मुस्लिम कैंडिडेट्स उतारे। कांग्रेस ने 2021 में भी 94 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। असम की कई सीटों पर कांग्रेस और उसके सहयोगियों के मुस्लिम उम्मीदवारों की जीत की दर 80 प्रतिशत से भी ज्यादा रही है। कई सीटों पर तो कांग्रेस उम्मीदवारों ने 1 लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। पांचों राज्यों के रिजल्ट… ——————————————————– ये खबर भी पढ़ें… बंगाल- 10 साल में भाजपा 3 से 207 पर पहुंची:तमिलनाडु में विजय की 2 साल पुरानी पार्टी जीती; केरलम में कांग्रेस, असम में भाजपा सरकार पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 207 सीटों पर पहुंच गई है। पूरी खबर पढ़ें…

Amit Shah Bengal Election Strategy

Amit Shah Bengal Election Strategy

नई दिल्ली/कोलकाता27 मिनट पहले कॉपी लिंक भाजपा की बंगाल विजय ऐतिहासिक है। इस बदलाव के रणनीतिकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रहे जो 15 दिन से ज्यादा बंगाल में डटे रहे। उन्होंने चुनाव अभियान को मिशन में बदल दिया। शाह दिन में रैली और रोड शो करते, रात में हर सीट की समीक्षा करते। इसी आधार पर माइक्रो मैनेजमेंट देखते थे। 50 से अधिक रैली और रोड शो किए। उनके साथ 5 और प्रमुख नेता कोर टीम की तरह हर मोर्चे पर डटी रही। 2021 की हिंसा के बाद घर-घर पहुंचा संघ भाजपा की जीत के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की करीब डेढ़ दशक लंबी तैयारी भी है। 2011 में राज्य में करीब 530 शाखाएं थीं, जो 2500 से ज्यादा हो चुकी हैं। पिछले साल में 583 नई शाखाएं खुलीं। चुनाव से पहले संघ ने पर्दे के पीछे रहकर एक लाख से ज्यादा छोटी बैठकों के जरिए परिवर्तन का नैरेटिव सेट कर दिया। जानते हैं संघ के 5 असरदार कदम क्या रहे… पीड़ितों का ‘कवच’: 2021 की हिंसा के बाद संघ सुरक्षा कवच की भूमिका में आया। पीड़ितों के घर जाकर आर्थिक और कानूनी मदद दी। शीर्ष नेतृत्व से संवाद कराया। संदेश गया कि संगठन साथ है। संदेशखाली से आवाज: संदेशखाली जैसे इलाकों में सीधे टकराव के बजाय भरोसे की रणनीति अपनाई। महिलाओं व पीड़ितों से संवाद के जरिए उन्हें बात उठाने को प्रेरित किया। बड़ी संख्या में लोग सामने आए। बाहरी नैरेटिव खत्म: सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर काम किया। स्थानीय त्योहारों, विवेकानंद और सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए भाजपा को स्थानीय विकल्प के रूप में पेश किया। डर तोड़ने का अभियान: गांव-मोहल्ले तक पहुंच वोटर्स-वर्कर्स में भरोसा बनाया कि निडर हो वोट दें। लोगों को बूथ तक लाने की तैयारी की। हर क्षेत्र-बूथ की जमीनी स्थिति भाजपा तक पहुंचाई। मुद्दे भविष्य से जोड़े: शिक्षक भर्ती घोटाला, आरजीकर व अन्य मामलों को परिवार और महिलाओं की सुरक्षा व भविष्य से जोड़ा। मुद्दे गांव और शहरी मध्यमवर्ग तक पहुंचाए। असंतोष को वोट में बदलने का माहौल बना। ………………… यह खबर भी पढ़ें… बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार, असम में हैट्रिक: तमिलनाडु में एक्टर विजय बनेंगे CM; केरलम में कांग्रेस लौटी, लेफ्ट सरकार अब देश में कहीं नहीं पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी TVK ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

west bengal tamil nadu keralam assam puducherry election results

west bengal tamil nadu keralam assam puducherry election results

कोलकाता/चेन्नई/गुवाहाटीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी TVK ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसमें DMK या AIADMK नहीं होगी। दो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एम के स्टालिन चुनाव हार गए। बंगाल में 15 साल बाद ममता का राज खत्म भाजपा को वोट शेयर 7.50% बढ़ा, TMC का इतना ही घटा बंगाल में 12 मंत्री हारे, भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट महिला को मिल सकती है कमान: बंगाल में भाजपा ने बिना चेहरे के चुनाव लड़ा, इसलिए अब बड़ा सवाल यह है कि कौन मुख्यमंत्री होगा। संभावित नामों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य का नाम सबसे आगे है। पार्टी किसी महिला चेहरे को भी ला सकती है। भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट: बंगाल में भाजपा ने 293 में से 206 सीटें जीतकर करीब 70% का स्ट्राइक रेट हासिल किया। वहीं, TMC 81 सीटों पर सिमट गई और उसका स्ट्राइक रेट करीब 27.6% रहा। ममता समेत 12 मंत्री हारे: सीएम ममता समेत 12 मंत्री चुनाव हार गए। ममता के पास होम मिनिस्ट्री समेत 7 महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। महिला और बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा, उदयन गुहा, ब्रत्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सुजीत बसु, सिद्दीकुल्लाह चौधरी, रथिन घोष, बेचाराम मन्ना, बिरबाहा हंसदा, मोलय घटक को हार का सामना करना पड़ा है। पहली बार राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार: 1972 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में अब ऐसी पार्टी की सरकार होगी, जो केंद्र में भी सत्ता में है। 1972 में राज्य में कांग्रेस ने 216 सीटें जीतीं थीं और उस वक्त केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी। बांग्लादेश सीमा, घुसपैठ और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी सख्ती हो सकती है। मोदी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में इसका ऐलान भी किया। नॉर्थ से साउथ तक BJP: साउथ बंगाल पहले TMC का मजबूत गढ़ था, यहां BJP ने सबसे ज्यादा 33 सीटें जीतीं। नॉर्थ 24 परगना में BJP ने 18 सीटें जीत लीं। TMC को यहां 15 सीटें मिलीं। पूर्वी मेदिनीपुर में BJP ने 16 और हुगली में 15 सीटें जीतीं। नॉर्थ बंगाल की 54 सीटों में BJP ने 27 सीटें जीतीं। मालदा में BJP को 8 और TMC को 4 सीटें मिलीं। जंगलमहल में भाजपा ने पुरुलिया की 9, बांकुरा की 11 पश्चिम मेदिनीपुर 12 सीटें जीतीं। टीएमसी ने सबसे अधिक सीटें दक्षिणी बंगाल में जीतीं। सबसे छोटी और सबसे बड़ी जीत: बंगाल की सतगछिया सीट पर सबसे कम मार्जिन वाली जीत हुई। BJP के अग्निस्वर नास्कर ने TMC के सोमाश्री बेताल को 401 वोट से हराया है। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर जीत का मार्जिन सबसे बड़ा रहा। यहां BJP के आनंदमय बर्मन ने TMC के शंकर मलाकर को 1,04,265 वोट से हराया। मोदी का 242 सीट पर प्रचार, 184 में भाजपा जीती मोदी ने सोमवार शाम को भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। वे बंगाली कुर्ता-धोती पहनकर पहुंचे। मोदी ने अपनी जनसभाओं और रोड-शो के जरिए बंगाल की 294 में से 242 सीटें कवर कीं। इनमें से 184 सीटों पर भाजपा की जीत हुई। भाजपा ने राज्य में 208 सीटें जीतीं। जिन सीटों पर मोदी ने सभा या रोड-शो किया, वहां पार्टी का स्ट्राइक रेट 76% रहा। ममता भवानीपुर से चुनाव हारीं, सुवेंदु दोनों सीट पर जीते SIR से अनुपात में मुस्लिम वोटर्स के नाम ज्यादा कटे SIR के तहत बंगाल में वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। भाजपा को 2.89 और TMC को 2.57 करोड़ वोट मिले। दोनों पार्टियों के बीच 31 लाख 84 वोटों का अंतर रहा। SIR में 63% (लगभग 57.47 लाख) हिंदू और 34% (लगभग 31.1 लाख) मुस्लिमों के नाम कटे थे। सीधा मतलब है कि आबादी के अनुपात में मुस्लिम वोट ज्यादा कटे। जिन इलाकों में मुस्लिम वोटर निर्णायक हो सकते थे, वहां कमजोर हो गए। इसका फायदा भाजपा को हुआ। भाजपा की स्ट्रैटजी, शाह 15 दिन बंगाल में रहे शाह 15 दिन बंगाल में रहे। बंगाल में पहली बार ‘पन्ना प्रमुख’ स्ट्रैटजी पर काम किया। 44,000 से ज्यादा मतदान केंद्रों को ‘मजबूत’, ‘केंद्रित’ व ‘कमजोर’ श्रेणियों में बांटा। हर पन्ना प्रमुख को 30-60 मतदाताओं की सीधी जिम्मेदारी दी। उनका कार्य प्रचार करना और यह सुनिश्चित करना था कि उनके आवंटित वोटर मतदान केंद्र पहुंचें। टीएमसी की महिलाओं में ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाएं काफी लोकप्रिय हुईं। इसमें 1000-1200 रु. दिए जा रहे थे। भाजपा सबके लिए 3 हजार की योजना लाई। सुवेंदु अधिकारी और अमित शाह ने बार-बार मंचों से आश्वासन दिया कि भाजपा कोई मौजूदा योजना बंद नहीं करेगी, उनके लाभ और बढ़ाएगी। राज्य के कर्मियों के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग को तुरंत लागू करने और सभी बकाया वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रमुख वादा किया। तमिलनाडु में 2 साल पुरानी TVK ने 50+ साल पुरानी DMK-AIADMK को हराया एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी TVK को 108 सीट पर जीत मिली है। ये DMK (59) और AIDMK (47) की कुल सीटों से ज्यादा है। TVK का उत्तर-मध्य में दबदबा, 46% स्ट्राइक रेट विजय की पार्टी TVK ने हर इलाके में सीटें जीतीं। सबसे अधिक दबदबा उत्तर और तटीय इलाकों में रहा। मध्य तमिलनाडु में भी उसे खूब सीटें मिलीं। DMK ने ज्यादातर सीटें दक्षिणी इलाकों में जीतीं। AIADMK को अधिकतर सीटें उत्तर-मध्य क्षेत्र में मिलीं। TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर 46% के साथ सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट हासिल किया। DMK ने 164 में 59 सीटें जीतकर 36% और AIADMK ने 170 में 47 सीटों के साथ 27.6% स्ट्राइक रेट दर्ज किया। कांग्रेस 28 में 5 सीटें जीतकर 17.8% पर रही। BJP का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। पार्टी 27 सीटों पर लड़कर सिर्फ 1 सीट जीत सकी और उसका स्ट्राइक रेट मात्र 3.4% रहा। सीएम स्टानिल 8795 वोट से हारे 59 साल बाद पहली बार गैर

India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry

India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry

Hindi News National India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry 1 मिनट पहले कॉपी लिंक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी TVK ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसमें DMK या AIADMK नहीं होगी। दो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एम के स्टालिन चुनाव हार गए। बंगाल में 15 साल बाद ममता का राज खत्म भाजपा को वोट शेयर 7.50% बढ़ा, TMC का इतना ही घटा बंगाल में 12 मंत्री हारे, भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट 1. महिला को मिल सकती है कमान: बंगाल में भाजपा ने बिना चेहरे के चुनाव लड़ा, इसलिए अब बड़ा सवाल यह है कि कौन मुख्यमंत्री होगा। संभावित नामों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य का नाम सबसे आगे है। पार्टी किसी महिला चेहरे को भी ला सकती है। 2. भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट: बंगाल में भाजपा ने 293 में से 206 सीटें जीतकर करीब 70% का स्ट्राइक रेट हासिल किया। वहीं, TMC 81 सीटों पर सिमट गई और उसका स्ट्राइक रेट करीब 27.6% रहा। 3. ममता समेत 12 मंत्री हारे: सीएम ममता समेत 12 मंत्री चुनाव हार गए। ममता के पास होम मिनिस्ट्री समेत 7 महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। महिला और बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा, उदयन गुहा, ब्रत्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सुजीत बसु, सिद्दीकुल्लाह चौधरी, रथिन घोष, बेचाराम मन्ना, बिरबाहा हंसदा, मोलय घटक को हार का सामना करना पड़ा है। 4. पहली बार राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार: 1972 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में अब ऐसी पार्टी की सरकार होगी, जो केंद्र में भी सत्ता में है। 1972 में राज्य में कांग्रेस ने 216 सीटें जीतीं थीं और उस वक्त केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी। बांग्लादेश सीमा, घुसपैठ और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी सख्ती हो सकती है। मोदी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में इसका ऐलान भी किया। 5. नॉर्थ से साउथ तक BJP: साउथ बंगाल पहले TMC का मजबूत गढ़ था, यहां BJP ने सबसे ज्यादा 33 सीटें जीतीं। नॉर्थ 24 परगना में BJP ने 18 सीटें जीत लीं। TMC को यहां 15 सीटें मिलीं। पूर्वी मेदिनीपुर में BJP ने 16 और हुगली में 15 सीटें जीतीं। नॉर्थ बंगाल की 54 सीटों में BJP ने 27 सीटें जीतीं। मालदा में BJP को 8 और TMC को 4 सीटें मिलीं। जंगलमहल में भाजपा ने पुरुलिया की 9, बांकुरा की 11 पश्चिम मेदिनीपुर 12 सीटें जीतीं। टीएमसी ने सबसे अधिक सीटें दक्षिणी बंगाल में जीतीं। 6. सबसे छोटी और सबसे बड़ी जीत: बंगाल की सतगछिया सीट पर सबसे कम मार्जिन वाली जीत हुई। BJP के अग्निस्वर नास्कर ने TMC के सोमाश्री बेताल को 401 वोट से हराया है। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर जीत का मार्जिन सबसे बड़ा रहा। यहां BJP के आनंदमय बर्मन ने TMC के शंकर मलाकर को 1,04,265 वोट से हराया। मोदी का 242 सीट पर प्रचार, 184 में भाजपा जीती मोदी ने सोमवार शाम को भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। वे बंगाली कुर्ता-धोती पहनकर पहुंचे। मोदी ने अपनी जनसभाओं और रोड-शो के जरिए बंगाल की 294 में से 242 सीटें कवर कीं। इनमें से 184 सीटों पर भाजपा की जीत हुई। भाजपा ने राज्य में 208 सीटें जीतीं। जिन सीटों पर मोदी ने सभा या रोड-शो किया, वहां पार्टी का स्ट्राइक रेट 76% रहा। ममता भवानीपुर से चुनाव हारीं, सुवेंदु दोनों सीट पर जीते SIR से अनुपात में मुस्लिम वोटर्स के नाम ज्यादा कटे SIR के तहत बंगाल में वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। भाजपा को 2.89 और TMC को 2.57 करोड़ वोट मिले। दोनों पार्टियों के बीच 31 लाख 84 वोटों का अंतर रहा। SIR में 63% (लगभग 57.47 लाख) हिंदू और 34% (लगभग 31.1 लाख) मुस्लिमों के नाम कटे थे। सीधा मतलब है कि आबादी के अनुपात में मुस्लिम वोट ज्यादा कटे। जिन इलाकों में मुस्लिम वोटर निर्णायक हो सकते थे, वहां कमजोर हो गए। इसका फायदा भाजपा को हुआ। भाजपा की स्ट्रैटजी, शाह 15 दिन बंगाल में रहे शाह 15 दिन बंगाल में रहे। बंगाल में पहली बार ‘पन्ना प्रमुख’ स्ट्रैटजी पर काम किया। 44,000 से ज्यादा मतदान केंद्रों को ‘मजबूत’, ‘केंद्रित’ व ‘कमजोर’ श्रेणियों में बांटा। हर पन्ना प्रमुख को 30-60 मतदाताओं की सीधी जिम्मेदारी दी। उनका कार्य प्रचार करना और यह सुनिश्चित करना था कि उनके आवंटित वोटर मतदान केंद्र पहुंचें। टीएमसी की महिलाओं में ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाएं काफी लोकप्रिय हुईं। इसमें 1000-1200 रु. दिए जा रहे थे। भाजपा सबके लिए 3 हजार की योजना लाई। सुवेंदु अधिकारी और अमित शाह ने बार-बार मंचों से आश्वासन दिया कि भाजपा कोई मौजूदा योजना बंद नहीं करेगी, उनके लाभ और बढ़ाएगी। राज्य के कर्मियों के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग को तुरंत लागू करने और सभी बकाया वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रमुख वादा किया। तमिलनाडु में 2 साल पुरानी TVK ने 50+ साल पुरानी DMK-AIADMK को हराया एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी TVK को 108 सीट पर जीत मिली है। ये DMK (59) और AIDMK (47) की कुल सीटों से ज्यादा है। TVK का उत्तर-मध्य में दबदबा, 46% स्ट्राइक रेट विजय की पार्टी TVK ने हर इलाके में सीटें जीतीं। सबसे अधिक दबदबा उत्तर और तटीय इलाकों में रहा। मध्य तमिलनाडु में भी उसे खूब सीटें मिलीं। DMK ने ज्यादातर सीटें दक्षिणी इलाकों में जीतीं। AIADMK को अधिकतर सीटें उत्तर-मध्य क्षेत्र में मिलीं। TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर 46% के साथ सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट हासिल किया। DMK ने 164 में 59 सीटें जीतकर 36% और AIADMK ने 170 में 47 सीटों के साथ 27.6% स्ट्राइक रेट दर्ज किया। कांग्रेस 28 में 5 सीटें जीतकर 17.8% पर रही। BJP का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। पार्टी 27 सीटों पर लड़कर सिर्फ