Thursday, 11 Jun 2026 | 12:49 PM

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Israel Iraq Military Base Exposed; Iran War Attack

Israel Iraq Military Base Exposed; Iran War Attack

काबुल/वॉशिंगटन डीसीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक तारीख- 3 मार्च जगह- अल-नुखैब कस्बा, पश्चिमी इराक 29 साल का चरवाहा अवाद अल-शम्मारी अपनी पिकअप गाड़ी लेकर जरूरी सामान लेने निकला था। सऊदी अरब और जॉर्डन की सीमाओं के पास बसे इस रेगिस्तानी इलाके में गाड़ियों का गुजरना आम बात थी। कुछ घंटों बाद वही गाड़ी आग की लपटों में घिरी और गोलियों से छलनी हालत में वापस दिखाई दी। लोगों ने बताया कि एक हेलिकॉप्टर ट्रक का पीछा कर रहा था और लगातार उस पर गोलियां चला रहा था, जब तक कि ट्रक रेत में रुक नहीं गया। परिजनों का कहना है कि अवाद गलती से इजराइल के एक सीक्रेट सैन्य ठिकाने तक पहुंच गया था। वहां उसे एक अस्थायी हवाई पट्टी के आसपास सैनिक, हेलिकॉप्टर और तंबू दिखाई दिए। उसने तुरंत इराकी सेना के रीजनल कमांड को फोन कर इसकी सूचना दी। परिवार का मानना है कि इसी वजह से उसकी हत्या कर दी गई। इजराइली सेना ने इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है। रिपोर्ट में शामिल गवाहों और अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से नाम छिपाने की शर्त पर न्यूयॉर्क टाइम्स से बात की है। ईराक में इजराइल के 2 सीक्रेट सैन्य ठिकाने इजराइल पिछले एक साल से ज्यादा समय तक इराक के पश्चिमी रेगिस्तान में दो सीक्रेट मिलिट्री बेस चला रहा था। क्षेत्रीय और इराकी अधिकारियों के अनुसार इजराइल उस जगह का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में सहायता के लिए कर रहा था। इनमें से एक वही अड्डा था जिसे अवाद ने देख लिया था। इससे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने भी इराक में एक इजराइली ठिकाने की खबर दी थी, लेकिन इराकी अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि दूसरा सीक्रेट ठिकाना भी मौजूद था। अधिकारियों ने कहा कि यह ठिकाना अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जून 2025 में हुई 12 दिन की लड़ाई से पहले ही बनाया जा चुका था। एक क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक इजराइल ने 2024 के आखिर में ही ऐसे सीक्रेट ठिकानों की तैयारी शुरू कर दी थी ताकि भविष्य के युद्धों में उनका इस्तेमाल किया जा सके। अमेरिका को थी इजराइली सीक्रेट ठिकाने की जानकारी कम से कम एक सीक्रेट अड्डे की जानकारी अमेरिका को जून 2025 या उससे पहले से थी। इससे माना जा रहा है कि अमेरिका ने इराक से यह बात छिपाई कि उसकी जमीन पर एक दुश्मन देश की सेना काम कर रही थी। इराकी सांसद वाद अल-कदू ने कहा कि इजराइल का इराक की जमीन पर सीक्रेट ठिकाने बनाना देश की संप्रभुता और इराकी लोगों के सम्मान का खुला उल्लंघन है। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक इजराइल को भरोसा था कि वह इराक में सीक्रेट ठिकाना चला सकता है, क्योंकि वहां अमेरिका की मजबूत सैन्य मौजूदगी है। अधिकारियों ने कहा कि 2025 की लड़ाई और मौजूदा तनाव के दौरान अमेरिका ने इराक से अपने रडार बंद करवाए थे, ताकि अमेरिकी विमानों की जानकारी बाहर न जाए। इसकी वजह से इराक अपने इलाके में संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने के लिए काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर हो गया। इस खुलासे ने इराक के लिए असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला ये कि क्या इराकी सुरक्षा बलों को विदेशी सैन्य मौजूदगी की जानकारी नहीं थी? या फिर उन्हें पता था लेकिन उन्होंने नजरअंदाज किया? दोनों ही हालात से पता चलता है कि इराक अभी भी अपनी जमीन पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं रख पा रहा है। इराकी सेना के कमांडर बोले- मुझे पहले से शक था इराकी सेना के यूफ्रेट्स यूनिट के कमांडर मेजर जनरल अली अल-हमदानी ने कहा कि सेना को एक महीने पहले से रेगिस्तान में इजराइली मौजूदगी का शक था। वहां रहने वाले बेदुइन समुदाय के लोग कई हफ्तों से सेना को बता रहे थे कि रेगिस्तान में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। लोगों ने हेलिकॉप्टरों की आवाजाही, सैनिकों की मौजूदगी और रेगिस्तान में बने अस्थायी ढांचे देखे थे। अली अल-हमदानी ने कहा कि सेना को शक था कि वहां इजराइली बल मौजूद हो सकते हैं, लेकिन सेना ने सीधे वहां जाने की बजाय दूर से निगरानी करना चुना। उन्होंने बताया कि इराकी सेना ने अमेरिकी अधिकारियों से भी जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके कुछ समय बाद जब चरवाहे अवाद ने खुद फोन कर बताया कि उसने एक हवाई पट्टी के आसपास सैनिक, हेलिकॉप्टर और तंबू देखे हैं, तब मामला और गंभीर हो गया। लेकिन कुछ ही समय बाद उसका संपर्क टूट गया। सेना जांच के लिए पहुंची, इजराइल ने हमला कर भगाया अवाद के परिवार ने दो दिन तक उसकी तलाश की। बाद में उन्हें उन बेदुइन लोगों के बारे में पता चला जिन्होंने उसकी हत्या देखी थी। अवाद के चचेरे भाई आमिर अल-शम्मारी ने कहा कि लोगों ने उन्हें बताया कि रेगिस्तान में अवाद जैसी एक जली हुई पिकअप गाड़ी पड़ी है, लेकिन डर के कारण कोई वहां जाने की हिम्मत नहीं कर रहा था। जब परिवार वहां पहुंचा तो उन्हें जली हुई गाड़ी और अवाद का शव मिला। परिवार ने उसकी खून से लथपथ तस्वीरें साझा कीं। उसका सिर और उंगलियां बुरी तरह जली हुई थीं। परिवार ने उसी जगह गाड़ी के पास एक साधारण कब्र बनाकर उसे दफना दिया। अली अल-हमदानी के मुताबिक अवाद की सूचना के अगले दिन इराकी सेना ने इलाके में जांच के लिए टुकड़ी भेजी। लेकिन जैसे ही सैनिक उस इलाके के करीब पहुंचे, उन पर हमला हो गया। एक सैनिक मारा गया, दो घायल हुए और सेना की गाड़ियों पर बमबारी की गई। इसके बाद सैनिकों को पीछे हटना पड़ा। चरवाहे की गाड़ी पर इजराइली सैनिकों ने हमला किया, जिसके बाद वह जलकर तबाह हो गई। सीनियर अधिकारियों ने जांच को धीमा करने की कोशिश की बगदाद में सीनियर अफसर समझ नहीं पा रहे थे कि हमला किसने किया। कुछ बड़े सैन्य अधिकारियों ने घटना को कम महत्व देकर जांच को धीमा कर दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इराकी सेना ने सिर्फ इतना कहा कि ‘विदेशी फोर्स’ ने हमला किया और UNSC में शिकायत दर्ज कराई गई है। हालांकि अंदरूनी स्तर पर इराकी आर्मी चीफ जनरल अब्दुल-अमीर यारल्लाह ने अमेरिकी सेना से संपर्क किया। मेजर जनरल हमदानी और दो सीनियर अधिकारियों के मुताबिक अमेरिकी पक्ष ने

Bihar Contract Murder Network Exposed; Supari Killing

Bihar Contract Murder Network Exposed; Supari Killing

‘आप वीडियो कॉल पर रहना, लाइव मर्डर दिखाएंगे। मर्डर का पूरा वीडियो आपको बाद में भेज देंगे। आपको जब कान में पति की आखिरी चीख सुनाई दे तभी बाकी पैसे UPI करना। . माहौल शांत हो जाएगा तो आपके घर को तोड़ने वाली लड़की को भी टपका देंगे। पति की लोकेशन आपको देनी पड़ेगी। बॉडीगार्ड साथ में रहा तो उसको भी गोली मार देंगे। हमारे पास 5 शूटर्स की टीम है। सुपारी ले ली तो यमराज भी नहीं बचा पाएंगे। अब तक कई को मौत के घाट उतार चुका हूं..।’ ये डील 5 शूटर्स की गैंग चलाने वाला कॉन्ट्रैक्ट किलर कर रहा है। महिला रिपोर्टर के हाथ में पिस्टल रखकर शूटर ने दावा किया कि इसी से मारूंगा। उसने रिपोर्टर से कहा, एक साथ 9 गोली मारेंगे।। 9 से ज्यादा गोली लगी तो रेट 5 लाख से ऊपर हो सकता है। भास्कर इन्वेस्टिगेशन में पढ़िए डॉक्टर बनकर रिपोर्टर ने कैसे की सुपारी किलर से पति और बॉयफ्रेंड के साथ सौतन के मर्डर की पूरी डील…। कई दिनों की पड़ताल के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को सीवान के कॉन्ट्रैक्ट किलर सलीम का इनपुट मिला। पता चला कि सलीम का पेशा ही मर्डर के कॉन्ट्रैक्ट लेना है। कड़ी जोड़ते हुए हमारे रिपोर्टर ने सलीम से कॉन्टेक्ट करने की कोशिश की। कई दिनों की बातचीत के बाद भी उसने मेल रिपोर्टर से मर्डर की कोई डील नहीं की। विश्वास जमाने के लिए हमने महिला रिपोर्टर को लगाया तो सलीम ने कॉन्ट्रैक्ट पर मर्डर की पूरी डील की। रिपोर्टर – एक परेशानी है? सलीम – क्या? रिपोर्टर – एक फ्रेंड है, वो एक लड़के के साथ रिलेशनशिप में रहती थी, अब उसकी शादी होने वाली है। सलीम – तो इसमें दिक्क्त क्या है भाई? रिपोर्टर – लड़की UP की रहने वाली है, लड़का बिहार का है। अब वह परेशान कर रहा है। सलीम – उसे सीवान बुला लीजिए। रिपोर्टर – कैसे बुला लें, उसकी शादी होने वाली है। सलीम – अच्छा, बॉयफ्रेंड साला लफड़ा कर रहा है? रिपोर्टर – हां, उसे ब्लैकमेल कर रहा है, इसलिए वह परेशान है। सलीम – हां, अब वह शादी में भी परेशानी कर देगा। रिपोर्टर – किसी का नंबर दीजिए जो उसकी मदद कर सके। सलीम – लड़का कहां का है? रिपोर्टर – बिहार के मुजफ्फरपुर या मोतिहारी के पास रहता है। सलीम – अच्छा, मोतिहारी का होगा तो वहीं उठवा लेंगे, वहां हमारा सिक्का चलता है। रिपोर्टर – सिक्का मतलब? विधायक जी का जलवा है, काम हो जाएगा सलीम ने दावे के साथ कहा कि जहां लड़का रहता है, वहां विधायक जी का जलवा है। वहां काम आसानी से हो जाएगा। इसके लिए पूरा प्लान तैयार कर लिया जाएगा। रिपोर्टर – मोतिहारी में नेटवर्क है क्या आपका? सलीम – वहां हम लोगों का जलवा है, जो विधायक है, ओसामा शहाब, शहाबुद्दीन के बेटे, उनका दबदबा है। रिपोर्टर – तो काम हो जाएगा ना? सलीम – क्या करना है? रिपोर्टर – मरवाना है। सलीम – यहां से मोतिहारी जाने में 6 से 7 घंटे लगेंगे, अगर वो सीवान आ जाए तो काम आसान हो जाएगा। रिपोर्टर – सीवान में धोखे से लेकर आ जाएं तो काम हो जाएगा ना? सलीम – हां, यहां पर ले आएंगे तो आराम से काट-काटकर नदी में डाल देंगे। रिपोर्टर – शूटर लोग आपके साथ रहते हैं? सलीम – शूटर क्या, ऐसे बुरी तरह काटेंगे कि शव इकट्ठा करते-करते पुलिस भी परेशान हो जाएगी। रिपोर्टर – अच्छा, फिर तो लड़की को दिक्कत नहीं होगी? सलीम – जैसे बकरे को काटा जाता है, वैसे टुकड़ों में काटकर अलग-अलग बोरे में भरकर फेंक देंगे। मुंडी अलग, पीस अलग। अभी कुछ दिन पहले सत्तू वाले ने जैसे मुंडी काटी थी, वैसे ही। सलीम ने कहा, लड़के को सीवान बुला लीजिए, वहीं उसे काटकर अलग-अलग जगहों पर फेंक देंगे। -तस्वीर महिला रिपोर्टर ने अपने हिडन कैमरे से ली है। 4 लाख दीजिए, 1 घंटे में जनाजा निकाल देंगे सलीम ने सीवान के कई माफियाओं का नाम लेकर कहा- हम लोग जिसकी सुपारी लेते हैं, उसका जनाजा एक घंटे में निकल जाता है। आप भी एडवांस दे दीजिए, जनाजा निकल जाएगा तो पूरा पैसे दे दीजिएगा। रिपोर्टर – आप काम करवा देंगे? सलीम – हां, काम हो जाएगा, लेकिन पैसे लगेंगे। रिपोर्टर – कितने पैसे लगेंगे? सलीम – 3 से 4 लाख रुपए लग जाएंगे। रिपोर्टर – कैसे संपर्क किया जाएगा उससे? सलीम – पहले लड़की की ID से बात होगी, फिर प्लानिंग होगी। फेक ID भी बनाई जाएगी। रिपोर्टर – लड़की का नाम कहीं नहीं आएगा ना? उसे कोई दिक्कत नहीं होगी ना? सलीम – नहीं, कहीं से नहीं, शहर में काम नहीं होगा, ऐसी जगह होगा जहां से पुलिस को भी भनक नहीं लगेगी। रिपोर्टर – हमको तो सुनकर डर लग रहा है, कहीं मेरी दोस्त न फंस जाए? सलीम – ऐसी जगह काटकर मिट्टी में दफन किया जाएगा, पता नहीं चलेगा। मिट्टी और ईंट से दबा दिया जाएगा। 6 लोगों को टपकाया है, दो बार ही जेल गया सलीम ने दावा किया कि मैं अब तक 6 कॉन्ट्रेक्ट किलिंग कर चुका हूं। महज दो ही बार पुलिस मुझे पकड़ पाई है। 4 घटनाओं में तो पुलिस सुराग ही नहीं लगा पाई है। हाल ही में बाहर आया हूं, एक दो बड़े काम करने हैं। कॉन्ट्रेक्ट मिल रहा है। इनको अंजाम देकर नेपाल भाग जाऊंगा। रिपोर्टर – आपने कभी हत्या की है या नहीं? सलीम – 6 मर्डर किए हैं, दो में जेल गया हूं, हाल में ही जेल से बाहर आया हूं। रिपोर्टर – लड़की को यहां आने की जरूरत नहीं है ना? सलीम – नहीं, बस लड़के की पूरी डिटेल्स मिल जाए, उसके बाद फोन पर बात होगी। लड़के को बुलाकर काम किया जाएगा। लड़की का नाम भी कहीं नहीं आएगा, हम पकड़े भी गए तो वो सेफ रहेगी। रिपोर्टर – अगर पुलिस को पता चल गया तो? सलीम – नहीं जान पाएंगे, अपना फंडा है। हत्या के बाद पूरी बॉडी अलग-अलग कर दो, किसी को पता ही नहीं चलेगा। 60 अपराधियों वाले ग्रुप से जुड़ा है सलीम सलीम ने दावा किया कि वो 60 अपराधियों वाले ग्रुप से जुड़ा है। यह ग्रुप रंगदारी से लेकर कॉन्ट्रैक्ट लेकर मर्डर करता है। उसने

Karauli Ram Navami Violence Mastermind Exposed; Hindu Muslim

Karauli Ram Navami Violence Mastermind Exposed; Hindu Muslim

करौली में 2 अप्रैल 2022 को दंगा भड़का था। छतों से पथराव हुआ था, दुकानों में आग लगा दी गई थी। . लट्ठ दिए हैं जमा-जमा कर। गंडासी, तलवार सब चलाए हैं। ये भूल जाएंगे रैली निकालना। तलवार, लाठी व सभी हथियार थे। पहले से तैयारी थी। हम कई लोग वहां पर सोए थे। 4 साल पहले करौली में रामनवमी पर निकली रैली के दौरान हुए दंगों के बाद आरोपी फोन पर बातचीत में इसी तरह जहर उगल रहे थे। 2 से 5 अप्रैल 2022 तक दंगाइयों की बातचीत की 7 रिकॉर्डिंग पुलिस के पास हैं। इनके अलावा इन्वेस्टिगेशन में 3 और बातों का खुलासा हुआ है। 1. दंगे की प्लानिंग 3 दिन पहले हो गई थी। 2. उस दिन एक समुदाय के ऑटो और दुकानें बंद रखवाईं। 3. मास्टरमाइंड ने सबूत मिटाने के लिए पत्थरों और सड़क पर फैले खून को साफ कराया। पुलिस जल्दी ही चार्जशीट पेश करने वाली है। इससे पहले भास्कर ने पूरे मामले को इन्वेस्टिगेट किया तो कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 4 साल पहले 2 अप्रैल 2022 को करौली दंगों की आग में झुलसा था। करौली में 2 अप्रैल 2022 को रामनवमी पर वाहन रैली निकाली गई। रैली के संयोजक नीरज गुप्ता ने रैली के रूट और डीजे के लिए परमिशन ली थी। गुलाबबाग से रवाना हुई रैली का हिंडौनगेट, फूटा गेट से हटवाड़ा, गणेशगेट से अंबेडकर सर्किल होते हुए रामद्वार पर समापन होना था। रैली जैसे ही फूटा गेट से हटवाड़ा की ओर बढ़ी, छतों से पथराव शुरू हो गया। बड़ी संख्या में युवक हाथों में लाठी-डंडे लेकर सड़कों पर उतरे और रैली में शामिल लोगों को पीटने लगे। रथ तोड़ दिया। 15 दुकानों में आग लगा दी गई। कई दुकानों को लूट लिया। पूरा घटनाक्रम एक घंटे चला। एएसपी किशोर बुटोलिया और तत्कालीन एसएचओ रामेश्वरदयाल मीना टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कुछ देर के बाद तांबे की टोरी में दंगा भड़क गया। वहां पर 5 दुकानों में आग लगा दी। पूरा करौली दंगे की चपेट में आ गया। 7 दिन पूरा करौली बंद रहा। 15 दिन कर्फ्यू रहा। पुलिस ने दंगों के मास्टरमाइंड अमीनुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया। उसकी एक प्रॉपर्टी को तोड़ दिया। 48 दिन बाद जमानत हो गई। पुलिस मामले में जल्द चार्जशीट पेश करने वाली है। पुलिस फाइल में 126 लोगों के नाम पुलिस फाइल में दंगों से जुड़े 126 लोगों के नाम रिकॉर्ड हैं। आरोपियों में 69 मुस्लिम और 57 हिंदू हैं। 56 को गिरफ्तार किया, जिनमें 33 मुस्लिम, 23 हिंदू थे। 34 मुस्लिम, 25 हिंदू, यानी कुल 59 लोगों को अग्रिम जमानत मिल चुकी है। पुलिस ने दंगों के मास्टरमाइंड अमीनुद्दीन की एक प्रॉपर्टी को तुड़वा दिया। पुलिस जांच में सामने आईं 3 बड़ी बातें… 3 दिन पहले ही हो चुकी थी दंगे की प्लानिंग दंगे की प्लानिंग रैली से 3 दिन पहले ही हो चुकी थी। जमात के नाम पर बाहर से 200 से ज्यादा युवकों को बुलाया गया था। उनके साथ मीटिंग में तय किया कि रैली नहीं निकलने देंगे। पहली बार इतने बड़े स्तर पर निकाली जा रही रैली सफल हो गई तो हर बार ऐसी ही रैली निकाली जाएगी। मीटिंग में तय हो गया था कि हटवाड़ा पहुंचने से पहले ही हमला कर दिया जाएगा। इसके लिए मकानों और दूसरी इमारतों पर पहले ही पत्थर जमा कर लिए थे। ऑटो और दुकानें बंद रखवाए पुलिस जांच में सामने आया कि रैली के दिन एक समुदाय के ज्यादातर ऑटो और दुकानें बंद करवा दिए गए थे। मुख्य बाजार खासतौर पर फूटा गेट और हटवाड़ा की दुकानें पूरी तरह से बंद थीं, जबकि दूसरे समुदाय की दुकानें खुली थीं। वे रैली पर दुकानों की छतों से फूल बरसा रहे थे। ऑटो और दुकानों को बंद रखने की प्लानिंग 3 दिन पहले ही हो चुकी थी। दंगे के बाद खुद अमीनुद्दीन मौके पर पहुंचा था। मकसूद भी वहां पर मौजूद था। मकसूद के दो बेटे मतलूब ओर अंचू हैं। मकसूद मनोनीत पार्षद है। मकसूद का दवाखाना है। जहां रैली में दंगा हुआ था, वहां मस्जिद के पास उसकी जिम भी है। पुलिस का दावा है कि जिम के अंदर पहले से ही लड़के बैठे थे। रैली आते ही उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। जिम के ऊपर से बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए। मकसूद और अंचू को भी पुलिस ने मुख्य आरोपियों में माना। पत्थरों और सड़क पर फैले खून को कराया साफ पुलिस जांच में सामने आया कि कि दंगों के बाद सभापति रशीदा खातून के बेटे अमीनुद्दीन ने सफाई कर्मचारी पिंटू को कॉल किया। पिंटू खुद ट्रॉली लेकर वहां पर पहुंचा था। उसने सारे पत्थरों को ट्रॉली में भर लिया था। टैंकर मंगाकर पूरी गली साफ करा दी। पुलिस के पहुंचने से पहले ही सारे सबूत मिटा दिए गए थे। पुलिस ने पिंटू से पूछताछ की तो इसका खुलासा हुआ। रैली दो बजे शुरू होनी थी। अमीनुद्दीन 11 बजे वहां पहुंच गया था। उस वक्त ढोली खार में असामाजिक तत्व जमा हो गए थे। गलियों से निकलते हुए हटवाड़ा पहुंचे और रैली पर हमला कर दिया। विरोध में रैली से भागे युवकों ने तांबे की टोरी में हंगामा किया। वहां पर आग लगा दी थी। गिरफ्त में अमीनुद्दीन। आरोप है कि पुलिस के पहुंचने से पहले उसने पत्थरों और सड़क पर फैले खून को साफ कराकर सारे सबूत मिटा दिए थे। पढ़िए 7 ऑडियो में कैसे जहर उगल रहे थे दंगाई जांच के दौरान पुलिस को दंगों के बाद 2 अप्रैल 2022 की रात से लेकर 5 अप्रैल 2022 तक दंगाइयों के बीच आपस में हुई बातचीत की कई ऑडियो फाइल भी मिली। जियायुद्दीन (7976****75) और अलादीन(9783****14) के बीच बातचीत… अलादीन : कहां पर है? जियायुद्दीन : कौन बोल रहा है? अलादीन : अलादीन। घर पहुंचा या नहीं? जियायुद्दीन : हां, घर पर ही हूं। अलादीन : बाहर मत निकलना। जियायुद्दीन (7976****75) और गंगापुर सिटी निवासी रियान (935235****) के बीच दो अप्रैल 2022 को शाम 6.51 बजे हुई बातचीत रियान : क्या हो गया करौली में? जियायुद्दीन : हिंदू-मुस्लिम में झगड़ा हो गया है। वो लट्ठ दिए हैं जमा-जमाकर। गंडासी, तलवार सब चलाए हैं। रियान : तुमने भी? जियायुद्दीन : अरे सबने। रियान : अब लॉक डाउन लग गया?

Hyderabad Ginger Garlic Paste Adulteration Scam Exposed

Hyderabad Ginger Garlic Paste Adulteration Scam Exposed

Hindi News Lifestyle Hyderabad Ginger Garlic Paste Adulteration Scam Exposed | Fake Vs Real Testing Methods 48 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक हाल ही में ‘हैदराबाद फूड एडल्टरेशन सर्विलांस टीम’ (H-FAST) ने 4,032 किलो जिंजर-गार्लिक (अदरक-लहसुन) पेस्ट जब्त किया। साथ ही 6,210 किलो घटिया कच्चा माल भी सीज किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे अनहाइजीनिक तरीके से बनाया जा रहा था। अमूमन हर भारतीय किचन में हर रोज जिंजर-गार्लिक पेस्ट का इस्तेमाल होता है। ऐसे में फूड सेफ्टी मानकों के विपरीत तैयार पेस्ट सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर‘ में आज जिंजर-गार्लिक पेस्ट पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे- अनहाइजीनिक पेस्ट से क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं? शुद्ध और मिलावटी पेस्ट में अंतर कैसे पहचानें? एक्सपर्ट: -डॉ. उमेश कुमार, फूड एनालिस्ट, फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन, उत्तर प्रदेश -डॉ. नरेंद्र कुमार सिंगला, प्रिंसिपल कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली सवाल- जिंजर-गार्लिक पेस्ट में किस तरह की मिलावट की जाती है? जवाब- मिलावटखोर ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इसमें कई तरह की मिलावट करते हैं। जैसेकि- खराब क्वालिटी के अदरक-लहसुन इस्तेमाल करते हैं। मात्रा बढ़ाने के लिए आलू, कद्दू, आटा और स्टार्च जैसे सस्ते फिलर्स मिलाते हैं। स्वाद बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाते हैं। शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए प्रिजर्वेटिव्स मिलाते हैं। पेस्ट को ताजा/आकर्षक दिखाने के लिए आर्टिफिशियल कलर मिलाते हैं। गाढ़ेपन के लिए थिकनर एजेंट्स मिलाते हैं। सवाल- क्या इसमें सड़े-गले अदरक-लहसुन का इस्तेमाल होता है? जवाब- हां, कुछ मामलों में सड़े-गले या खराब क्वालिटी के अदरक-लहसुन का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी खराब स्मेल दबाने के लिए ज्यादा नमक, प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं। सड़े माल से कलर बदलने पर आर्टिफिशियल कलर मिलाया जाता है। खराब क्वालिटी छिपाने के लिए ज्यादा तेल या स्टार्च मिलाया जाता है। ऐसे पेस्ट में बैक्टीरिया या फंगस पनप सकते हैं, जिससे फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं हो सकती हैं। सवाल- इसमें आर्टिफिशियल कलर, फ्लेवर और प्रिजर्वेटिव्स क्यों मिलाए जाते हैं? जवाब- ये चीजें इसलिए मिलाई जाती हैं, ताकि- पेस्ट ज्यादा दिन तक खराब न हो। फ्रेश और नेचुरल दिखे। खुशबू, स्वाद बना रहे। खराब क्वालिटी का पता न चले। लागत कम हो। सवाल- पेस्ट की मात्रा बढ़ाने के लिए कौन-से सस्ते फिलर्स मिलाए जाते हैं? जवाब- मात्रा बढ़ाने और लागत कम करने के लिए जिंजर गार्लिक पेस्ट में सस्ते फिलर्स मिलाए जाते हैं। ये दिखने और टेक्सचर में असली पेस्ट जैसे लगते हैं, लेकिन न्यूट्रिशन और क्वालिटी घटा देते हैं। जैसेकि- कॉर्न या अन्य स्टार्च। आलू का पेस्ट। कद्दू या लौकी का पल्प। मैदा, आटा। सवाल- जिंजर-गार्लिक पेस्ट में अमूमन कौन से इंग्रीडिएंट्स होते हैं? जवाब- इसमें बेसिक और एडेड इंग्रीडिएंट्स होते हैं, जो ब्रांड और क्वालिटी के हिसाब से बदल सकते हैं। नीचे ग्राफिक में देखिए– सवाल- शुद्ध और मिलावटी जिंजर-गार्लिक पेस्ट में अंतर कैसे पहचानें? जवाब- इसकी पहचान आसान संकेतों से की जा सकती है। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- अनहाइजीनिक तरीके से तैयार पेस्ट से क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं? जवाब- अनहाइजीनिक जिंजर-गार्लिक पेस्ट में बैक्टीरिया, फंगस और हानिकारक टॉक्सिन्स हो सकते हैं, जिससे कई तरह के हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर गलती से मिलावटी पेस्ट खा लिया तो क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में घबराने की बजाय तुरंत सही कदम उठाएं। जैसेकि- साफ पानी से कुल्ला करें। खूब पानी पिएं। स्वाद बहुत खराब है तो गुनगुना पिएं। नींबू पानी या ORS लें। खिचड़ी, दही-चावल, केला जैसे सुपाच्य फूड लें। इन लक्षणों पर नजर रखें पेट दर्द, मरोड़ उल्टी, मतली दस्त (डायरिया) एसिडिटी या सीने में जलन सिर दर्द या कमजोरी तेज पेट दर्द बुखार डिहाइड्रेशन (मुंह सूखना, चक्कर आना) ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर को दिखाएं। बिना डॉक्टरी सलाह के अपने मन से कोई दवाई न लें। सवाल- पैक्ड पेस्ट खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- पैक्ड जिंजर-गार्लिक पेस्ट खरीदते समय इन बातों का ख्याल रखें- इंग्रीडिएंट्स लिस्ट देखें। केमिकल्स या एडिटिव्स ज्यादा हों तो न लें। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट चेक करें। एक्सपायरी डेट नजदीक हो तो न लें। सील चेक करें। लीक पैकेट न लें। FSSAI लाइसेंस नंबर जरूर देखें। विश्वसनीय ब्रांड का पेस्ट खरीदें। बहुत सस्ता न खरीदें। खरीदने के बाद फ्रिज में स्टोर करें। सवाल- जिंजर-गार्लिक पेस्ट घर पर कैसे बना सकते हैं? जवाब- जिंजर-गार्लिक पेस्ट घर पर बनाना आसान, सस्ता और हेल्दी होता है। तरीका ग्राफिक में देखिए- सवाल- घर पर बना जिंजर-गार्लिक पेस्ट कितने दिन सेफ रहता है? जवाब- होममेड पेस्ट आमतौर पर फ्रिज में 5–7 दिन तक सुरक्षित रहता है, बशर्ते इसे साफ एयरटाइट कंटेनर में रखा जाए। तेल या नमक मिलाने से शेल्फ लाइफ थोड़ी बढ़ सकती है। सवाल- होममेड पेस्ट को स्टोर करने का सही तरीका क्या है? जवाब- होममेड जिंजर-गार्लिक पेस्ट को सही तरीके से स्टोर करना जरूरी है, वरना यह जल्दी खराब हो सकता है और हेल्थ रिस्क बढ़ा सकता है। ऊपर से हल्का तेल डालें। एयरटाइट कंटेनर में फ्रिज में स्टोर करें। सूखा और साफ चम्मच यूज करें। स्मेल, कलर या टेक्सचर बदलने पर यूज न करें। सवाल- कैसे पहचानें कि अब पेस्ट खराब हो गया है? जवाब- जिंजर-गार्लिक पेस्ट खराब होने पर ये संकेत दिखते हैं- खट्टी, सड़ी या अजीब गंध आना। असामान्य या धब्बेदार रंग दिखना। सफेद, हरे या काले धब्बे दिखना। ऊपर फफूंदी की परत बनना। बहुत पतला या चिपचिपा हो जाना। ऊपर पानी जमा होना। बहुत खट्टा, कड़वा या अजीब स्वाद लगना। सवाल- पेस्ट में मिलावट का शक हो तो कहां शिकायत करें? जवाब- अदरक-लहसुन पेस्ट में मिलावट का शक हो तो संबंधित फूड अथॉरिटी में शिकायत कर सकते हैं। FSSAI के ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ एप से शिकायत दर्ज करें। FSSAI की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत करें। राज्य के फूड सेफ्टी विभाग से संपर्क करें। नजदीकी नगर निगम या फूड इंस्पेक्टर को जानकारी दें। शिकायत के समय प्रोडक्ट की फोटो, पैकेजिंग और बिल जरूर शेयर करें। ………………….. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- केमिकल से पके 200 किलो आम सीज: 5 तरीकों से पहचानें नेचुरल आम, खाने से पहले ऐसे करें साफ, घर पर पकाने के 6 तरीके हाल ही में ‘हैदराबाद फूड एडल्टरेशन सर्विलांस टीम’ (H-FAST) ने केमिकल से पके फलों की बिक्री

Israel Nuclear Location Exposed; Iran Dimona Missile Attack

Israel Nuclear Location Exposed; Iran Dimona Missile Attack

तेल अवीव6 मिनट पहले कॉपी लिंक इजराइल के सबसे सुरक्षित इलाकों में उसका मुख्य परमाणु रिसर्च सेंटर माना जाता है। डिमोना न्यूक्लियर फैसिलिटी नेगेव रेगिस्तान में डिमोना शहर के पास स्थित है। यहां सुरक्षा बहुत कड़ी रहती है और इसे बचाने के लिए कई परतों वाली मिसाइल डिफेंस सिस्टम लगी हुई है। लेकिन शनिवार रात एक चौंकाने वाली घटना हुई। ईरान की दो बैलिस्टिक मिसाइलें इजराइल के एयर डिफेंस को चकमा देकर डिमोना और पास के शहर अराद के रिहायशी इलाकों में गिर गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए मिसाइलों ने 1500 किमी से ज्यादा दूरी तय की ये दोनों हमले करीब तीन घंटे के अंतर से हुए। इजराइल के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, ईरान की मिसाइल हमलों में 180 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है। डिमोना में शनिवार रात हुए ईरानी मिसाइल हमलों के बाद रिहायशी इलाके में भारी नुकसान हुआ। इजराइल ने माना- ईरानी मिसाइलें रोकने में नाकाम रहे डिमोना में स्थित शिमोन पेरेस नेगेव परमाणु रिसर्च सेंटर को आम तौर पर ‘डिमोना रिएक्टर’ कहा जाता है। माना जाता है कि यहां इजराइल के परमाणु हथियार मौजूद हैं, हालांकि इजराइल ने कभी इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया। यह देश के सबसे सुरक्षित इलाके माना जाता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि इजराइली सेना ने खुद माना कि उसने इन मिसाइलों को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। ऐसे में यहां हुए हमले से आसपास रहने वाले लोगों में डर फैल गया है। इजराइल बोला- अब तक 400 ईरानी मिसाइलें रोकीं इजराइल का दावा है कि वह ज्यादातर मिसाइलों को रोक लेता है। इजराइली वायुसेना के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले के बाद से अब तक ईरान 400 मिसाइलें दाग चुका है, जिनमें से 92 प्रतिशत को हवा में ही रोक लिया गया। हालांकि शनिवार रात की यह घटना दिखाती है कि कोई भी सुरक्षा सिस्टम 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं होता। अब जांच की जा रही है कि आखिर ये मिसाइलें इजराइल के एयर डिफेंस सिस्टम को कैसे पार कर गईं। इजराइल के पास कई तरह के एयर डिफेंस सिस्टम हैं। आयरन डोम छोटे रॉकेट रोकने के लिए है। डेविड्स स्लिंग मध्यम दूरी की मिसाइलों के लिए इस्तेमाल होता है। सबसे एडवांस सिस्टम एरो-3 है, जो अंतरिक्ष के पास ही मिसाइल को नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा अमेरिका का THAAD सिस्टम भी वहां तैनात है। इसके बावजूद ये मिसाइलें अंदर तक पहुंच गईं। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर गलती कहां हुई। कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ऑपरेशन की नाकामी हो सकती है, यानी सिस्टम सही था लेकिन उसे इस्तेमाल करने में चूक हुई। इंटरसेप्टर मिसाइलों के स्टॉक खत्म होने की आशंका एक और बड़ी चिंता यह भी सामने आ रही है कि कहीं इजराइल अपने सबसे महंगे और ताकतवर इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल बचाकर तो नहीं कर रहा। पिछले साल ईरान के साथ 12 दिन की लड़ाई में काफी मिसाइलें खर्च हो चुकी थीं, इसलिए स्टॉक कम होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इजराइली सेना ने कहा है कि उसके पास पर्याप्त मिसाइलें हैं और वह लंबी लड़ाई के लिए तैयार है। फिर भी अगर युद्ध लंबा चलता है, तो दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने डिमोन पर हुए हमले की घटना को ‘चमत्कार’ बताया, क्योंकि इतने बड़े हमले के बावजूद कोई मौत नहीं हुई। उन्होंने लोगों से कहा कि अलर्ट मिलते ही तुरंत बंकर में जाएं और लापरवाही न करें। इन हमलों में करीब 175 लोग घायल हुए, जिनमें से कम से कम 10 की हालत गंभीर है। कई लोग इसलिए बच गए क्योंकि वे समय रहते बम शेल्टर में पहुंच गए थे। कोई भी डिफेंस सिस्मट फुल प्रूफ नहीं एक्सपर्ट्स के मुताबिक बैलिस्टिक मिसाइल को रोकना बेहद मुश्किल काम होता है। एरो-3 जैसे सिस्टम को सीधे मिसाइल से टकराना पड़ता है, जो ऐसा है जैसे दो गोलियां हवा में टकराएं। अगर मिसाइल रास्ता बदल दे या हवा में हल्का सा बदलाव हो जाए, तो उसे रोकना और मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा कुछ मिसाइलें हवा में ऊपर जाकर कई छोटे हिस्सों में टूट जाती हैं, जिन्हें पूरी तरह रोकना और भी कठिन होता है। इनके टुकड़े भी जमीन पर गिरकर नुकसान पहुंचाते हैं। कुल मिलाकर, यह घटना दिखाती है कि चाहे सिस्टम कितना भी मजबूत क्यों न हो, युद्ध की स्थिति में पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं होती। साथ ही यह भी साफ हो रहा है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला, तो इजराइल के लिए अपने संसाधनों को संभालकर इस्तेमाल करना बड़ी चुनौती बन सकता है। ————————————- दावा-ईरान ने हीट ट्रैकिंग मिसाइल से अमेरिकी F-35 को गिराया:यह दुनिया का सबसे एडवांस फाइटर जेट, लेकिन ईरानी खतरे का अंदाजा नहीं लगा पाया ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने स्वदेशी ‘मजीद’ एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए इसे मार गिराया। अगर यह सच है तो ईरान पहला ऐसा देश होगा जो ऐसा कर पाया है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Iran Claims F-35 Shot Down by Majid Air Defense System – Stealth Jet Weakness Exposed

Iran Claims F-35 Shot Down by Majid Air Defense System – Stealth Jet Weakness Exposed

तेहरान32 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने स्वदेशी ‘माजिद’ एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए इसे मार गिराया। अगर यह सच है तो ईरान पहला ऐसा देश होगा जो ऐसा कर पाया है। F-35 फाइटर जेट को करीब दो दशकों से अमेरिकी सैन्य ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता रहा है। यह सबसे प्रीमियम फाइटर जेट है, जिसे खास तौर पर इस तरह बनाया गया है कि वह दुनिया के सबसे मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम में भी बिना पकड़े घुसकर हमला कर सके। ईरान का दावा है कि उसने इस ‘अदृश्य’ माने जाने वाले जेट की कमजोरी पकड़ ली है। माजिद डिफेंस सिस्टम ने F-35 से निकली इंफ्रारेड यानी गर्मी को पकड़कर उसे निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि F-35 भले ही रडार से बचने में सक्षम हो, लेकिन उसके इंजन से निकलने वाली गर्मी को पूरी तरह छुपाया नहीं जा सकता। वहीं, अमेरिकी वेबसाइट CNN ने भी सूत्रों के हवाले से बताया था कि ईरान के हमलों की वजह से F-35 को मिडिल ईस्ट में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 19 मार्च को F-35 पर हुए हमले का फुटेज जारी किया है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। दावा- सिर्फ 1 मिसाइल से गिराया F-35 ईरानी मीडिया के मुताबिक पहले यह माना जा रहा था कि F-35 को गिराने में ‘तलाश’ एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल हुआ है। लेकिन अब कहा जा रहा है कि माजिद शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम ने ही F35 को गिराया है। माजिद डिफेंस सिस्टम रडार की बजाय इंफ्रारेड तकनीक पर काम करता है। ऐसे में F-35 के अंदर जो सेंसर और चेतावनी सिस्टम लगे होते हैं, वे इस खतरे को आसानी से पहचान नहीं पाते। F-35 के पास जो इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम होते हैं, वे आम तौर पर दुश्मन के रडार सिग्नल को जाम कर देते हैं। लेकिन यहां यह पूरी तरह बेकार साबित हुए। ईरान की ओर से जारी वीडियो के मुताबिक, इस हमले में सिर्फ एक मिसाइल ही काफी रही। इससे यह दिखाने की कोशिश की गई कि सिस्टम कितना सटीक है और F-35 की गर्मी वाली कमजोरी कितनी बड़ी है। माजिद एयर डिफेंस 6km दूरी तक निशाना लगा सकता है माजिद एयर डिफेंस सिस्टम को ईरान ने 2021 में पहली बार सार्वजनिक तौर पर दिखाया था। इसे खास तौर पर नजदीकी दूरी की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रडार पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि इंफ्रारेड तकनीक का इस्तेमाल करता है। इसी वजह से ऐसे विमान जो रडार से बचने के लिए डिजाइन किए गए हैं, वे भी इसकी नजर से बच नहीं पाते। माजिद सिस्टम आम तौर पर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को पकड़ने के लिए बनाया गया है। इसकी मार करने की दूरी करीब 700 मीटर से लेकर 6 किलोमीटर तक मानी जाती है। इस वजह से यह उन हालात में ज्यादा कारगर होता है, जहां दुश्मन के विमान या ड्रोन को किसी खास इलाके के ऊपर आना पड़ता है। इसे ‘पॉइंट डिफेंस’ सिस्टम कहा जाता है, यानी यह एयरबेस, सैन्य ठिकानों, रडार स्टेशन या किसी महत्वपूर्ण इमारत जैसी जगहों की सीधी सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है। यह सिस्टम आमतौर पर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगाया जाता है, यानी इसे जरूरत के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह जल्दी शिफ्ट किया जा सकता है। इससे दुश्मन के लिए इसकी सही लोकेशन पता लगाना मुश्किल हो जाता है। रडार सिस्टम बंद कर अमेरिका को धोखे में रखा ईरान के मुताबिक वे पहले से ही इस तरह की स्थिति के लिए तैयारी कर रहे थे। मसलन कब क्या करना है, कौन सा सिस्टम इस्तेमाल करना है, दुश्मन को कैसे धोखा देना है। ये सब पहले से तय था। बताया गया है कि 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने पहला हमला शुरू किया, तब ईरान ने जानबूझकर अपने असली रडार सिस्टम को बंद कर दिया और उन्हें सुरक्षित जगहों पर छिपा दिया। उनकी जगह नकली रडार सिस्टम लगा दिए गए। ये साधारण नकली ढांचे नहीं थे, बल्कि ऐसे डिकॉय थे जो असली रडार जैसी ही सिग्नल भेजते थे। हर एक डिकॉय बनाने में करीब 10 हजार डॉलर तक खर्च आता है। अमेरिका और इजराइल के ड्रोन, जो कैमरा और इंफ्रारेड सेंसर से नुकसान का आकलन करते हैं, उन्हें लगा कि उन्होंने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया है। इन नकली ठिकानों के नष्ट होने और असली रडार के बंद रहने से अमेरिका और इजराइल को यह भरोसा हो गया कि ईरान का एयर डिफेंस पूरी तरह खत्म हो चुका है। इसी आधार पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड और इजराइली वायुसेना ने यह मान लिया कि अब उन्हें बढ़त मिल गई है। यहां तक कि अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 19 मार्च की सुबह दावा भी किया कि ईरान की हवाई सुरक्षा को खत्म कर दिया गया है। लेकिन यही सबसे बड़ी गलती साबित हुई। इस भरोसे में आकर अमेरिका और इजराइल ने अपने सबसे एडवांस फाइटर जेट, जैसे F-35 को ईरान के अंदर गहराई तक भेजना शुरू कर दिया। 10 दिन बाद असली रडार सिस्टम स्टार्ट किए दूसरी तरफ, ईरान ने चुपचाप अपने असली रडार सिस्टम फिर से चालू कर दिए और माजिद जैसे इंफ्रारेड सिस्टम को उन जगहों पर तैनात कर दिया, जहां से अमेरिका-इजराइल के फाइटर जेट्स आने की संभावना थी। जैसे ही F-35 उस इलाके में पहुंचा, उसे कोई कमजोर या बंद पड़ा डिफेंस सिस्टम नहीं मिला। बल्कि उसे पूरी तरह तैयार और मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम का सामना करना पड़ा, जो पहले से ही उसी मौके का इंतजार कर रहा था। नोट- यह पूरी जानकारी ईरान के दावों और रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसकी अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सिंगापुर में एक बेस पर तैनात F-35B फाइटर जेट्स। तस्वीर जून 2025 की है। दुनियाभर में F-35 की छवि पर सवाल ईरान के F-35 गिराने के दावे ने दुनियाभर की सेनाओं और

Iran Claims F-35 Shot Down by Majid Air Defense System – Stealth Jet Weakness Exposed

Iran Claims F-35 Shot Down by Majid Air Defense System – Stealth Jet Weakness Exposed

तेहरान2 घंटे पहले कॉपी लिंक ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने स्वदेशी ‘माजिद’ एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए इसे मार गिराया। अगर यह सच है तो ईरान पहला ऐसा देश होगा जो ऐसा कर पाया है। F-35 फाइटर जेट को करीब दो दशकों से अमेरिकी सैन्य ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता रहा है। यह सबसे प्रीमियम फाइटर जेट है, जिसे खास तौर पर इस तरह बनाया गया है कि वह दुनिया के सबसे मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम में भी बिना पकड़े घुसकर हमला कर सके। ईरान का दावा है कि उसने इस ‘अदृश्य’ माने जाने वाले जेट की कमजोरी पकड़ ली है। माजिद डिफेंस सिस्टम ने F-35 से निकली इंफ्रारेड यानी गर्मी को पकड़कर उसे निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि F-35 भले ही रडार से बचने में सक्षम हो, लेकिन उसके इंजन से निकलने वाली गर्मी को पूरी तरह छुपाया नहीं जा सकता। वहीं, अमेरिकी वेबसाइट CNN ने भी सूत्रों के हवाले से बताया था कि ईरान के हमलों की वजह से F-35 को मिडिल ईस्ट में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 19 मार्च को F-35 पर हुए हमले का फुटेज जारी किया है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। दावा- सिर्फ 1 मिसाइल से गिराया F-35 ईरानी मीडिया के मुताबिक पहले यह माना जा रहा था कि F-35 को गिराने में ‘तलाश’ एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल हुआ है। लेकिन अब कहा जा रहा है कि माजिद शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम ने ही F35 को गिराया है। माजिद डिफेंस सिस्टम रडार की बजाय इंफ्रारेड तकनीक पर काम करता है। ऐसे में F-35 के अंदर जो सेंसर और चेतावनी सिस्टम लगे होते हैं, वे इस खतरे को आसानी से पहचान नहीं पाते। F-35 के पास जो इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम होते हैं, वे आम तौर पर दुश्मन के रडार सिग्नल को जाम कर देते हैं। लेकिन यहां यह पूरी तरह बेकार साबित हुए। ईरान की ओर से जारी वीडियो के मुताबिक, इस हमले में सिर्फ एक मिसाइल ही काफी रही। इससे यह दिखाने की कोशिश की गई कि सिस्टम कितना सटीक है और F-35 की गर्मी वाली कमजोरी कितनी बड़ी है। माजिद एयर डिफेंस 6km दूरी तक निशाना लगा सकता है माजिद एयर डिफेंस सिस्टम को ईरान ने 2021 में पहली बार सार्वजनिक तौर पर दिखाया था। इसे खास तौर पर नजदीकी दूरी की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रडार पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि इंफ्रारेड तकनीक का इस्तेमाल करता है। इसी वजह से ऐसे विमान जो रडार से बचने के लिए डिजाइन किए गए हैं, वे भी इसकी नजर से बच नहीं पाते। माजिद सिस्टम आम तौर पर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को पकड़ने के लिए बनाया गया है। इसकी मार करने की दूरी करीब 700 मीटर से लेकर 6 किलोमीटर तक मानी जाती है। इस वजह से यह उन हालात में ज्यादा कारगर होता है, जहां दुश्मन के विमान या ड्रोन को किसी खास इलाके के ऊपर आना पड़ता है। इसे ‘पॉइंट डिफेंस’ सिस्टम कहा जाता है, यानी यह एयरबेस, सैन्य ठिकानों, रडार स्टेशन या किसी महत्वपूर्ण इमारत जैसी जगहों की सीधी सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है। यह सिस्टम आमतौर पर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगाया जाता है, यानी इसे जरूरत के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह जल्दी शिफ्ट किया जा सकता है। इससे दुश्मन के लिए इसकी सही लोकेशन पता लगाना मुश्किल हो जाता है। रडार सिस्टम बंद कर अमेरिका को धोखे में रखा ईरान के मुताबिक वे पहले से ही इस तरह की स्थिति के लिए तैयारी कर रहे थे। मसलन कब क्या करना है, कौन सा सिस्टम इस्तेमाल करना है, दुश्मन को कैसे धोखा देना है। ये सब पहले से तय था। बताया गया है कि 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने पहला हमला शुरू किया, तब ईरान ने जानबूझकर अपने असली रडार सिस्टम को बंद कर दिया और उन्हें सुरक्षित जगहों पर छिपा दिया। उनकी जगह नकली रडार सिस्टम लगा दिए गए। ये साधारण नकली ढांचे नहीं थे, बल्कि ऐसे डिकॉय थे जो असली रडार जैसी ही सिग्नल भेजते थे। हर एक डिकॉय बनाने में करीब 10 हजार डॉलर तक खर्च आता है। अमेरिका और इजराइल के ड्रोन, जो कैमरा और इंफ्रारेड सेंसर से नुकसान का आकलन करते हैं, उन्हें लगा कि उन्होंने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया है। इन नकली ठिकानों के नष्ट होने और असली रडार के बंद रहने से अमेरिका और इजराइल को यह भरोसा हो गया कि ईरान का एयर डिफेंस पूरी तरह खत्म हो चुका है। इसी आधार पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड और इजराइली वायुसेना ने यह मान लिया कि अब उन्हें बढ़त मिल गई है। यहां तक कि अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 19 मार्च की सुबह दावा भी किया कि ईरान की हवाई सुरक्षा को खत्म कर दिया गया है। लेकिन यही सबसे बड़ी गलती साबित हुई। इस भरोसे में आकर अमेरिका और इजराइल ने अपने सबसे एडवांस फाइटर जेट, जैसे F-35 को ईरान के अंदर गहराई तक भेजना शुरू कर दिया। 10 दिन बाद असली रडार सिस्टम स्टार्ट किए दूसरी तरफ, ईरान ने चुपचाप अपने असली रडार सिस्टम फिर से चालू कर दिए और माजिद जैसे इंफ्रारेड सिस्टम को उन जगहों पर तैनात कर दिया, जहां से अमेरिका-इजराइल के फाइटर जेट्स आने की संभावना थी। जैसे ही F-35 उस इलाके में पहुंचा, उसे कोई कमजोर या बंद पड़ा डिफेंस सिस्टम नहीं मिला। बल्कि उसे पूरी तरह तैयार और मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम का सामना करना पड़ा, जो पहले से ही उसी मौके का इंतजार कर रहा था। नोट- यह पूरी जानकारी ईरान के दावों और रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसकी अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सिंगापुर में एक बेस पर तैनात F-35B फाइटर जेट्स। तस्वीर जून 2025 की है। दुनियाभर में F-35 की छवि पर सवाल ईरान के F-35 गिराने के दावे ने दुनियाभर की सेनाओं और

अरे बाप रे! बिना OTP के ही 38 लाख साफ, देखते ही देखते शख्स हो गया कंगाल, जामताड़ा मॉडल ने ढूंढा अब यह नया तरीका – 38 lakh rupees wiped out without an otp from bank account mobile delhi police exposed new cyber crime fraud Jamtara model

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Last Updated:February 11, 2026, 13:09 IST Jamtara Cyber Criminals News: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सिम पोर्टिंग के जरिए लाखों की ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है. ठगों ने पीड़ित का मोबाइल एक्सेस लेकर 38 लाख रुपये निकाल लिए और सिम कार्ड को जामताड़ा में पोर्ट करवा दिया. दिल्ली पुलिस ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा से मुख्य साजिशकर्ता 21 साल के आयुष शर्मा और विपुल कश्यप को गिरफ्तार किया है. इस गिरफ्तारी से दिल्ली जामताड़ा मॉडल का बैंक से पैसा गायब करने का नया तरीका पता चला है. पढ़ें कैसे साइबर ठगों ने अब अपनी रणनीति बदल ली है. बिना ओटीपी के ही बैंक अकाउंट हो रहे खाली. नई दिल्ली. केंद्र सरकार और जांच ऐजेंसियां चाहे जितना कोशिश कर ले, साइबर ठगों पर नहीं लग रहे हैं लगाम. अब तो साइबर ठगों ने ठगी का एक ऐसा खतरनाक तरीका ढूंढ निकाला है, जिसमें आपके पास कोई ओटीपी (OTP) भी नहीं आएगा और आपका बैंक खाता खाली हो जाएगा. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने सिम पोर्टिंग और डिवाइस हैकिंग के जरिए 38.10 लाख रुपये की बड़ी ठगी करने वाले एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है, जो हजारों लोगों के बैंक खाते अब तक साफ कर चुके हैं. खास बात यह है कि इस गिरोह के तार कुख्यात जामताड़ा झारखंड से जुड़े हैं. जानें कैसे जामताड़ा मॉडल ने अब साइबर ठगी का तरीका बदल लिया है. दिल्ली पुलिस ने बताया है कि शिकायतकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई कि 30 दिसंबर 2025 से 12 जनवरी 2026 के बीच अज्ञात ठगों ने उसके साथ इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया. ठगों ने व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए पीड़ित को झांसे में लिया और धोखे से उसके मोबाइल फोन का एक्सेस हासिल कर लिया. एक बार फोन का कंट्रोल मिलते ही, ठगों ने पीड़ित के मोबाइल नंबर को अपने जामताड़ा स्थित सोर्स पर पोर्ट करवा लिया. पैसा उड़ाने का नया जामताड़ा मॉडल  सिम पोर्ट होते ही पीड़ित के फोन का सिग्नल गायब हो गया और ठगों ने बैंकिंग ऐप्स का एक्सेस लेकर IMPS, NEFT और UPI के जरिए अलग-अलग खातों में 38,10,341 रुपये ट्रांसफर कर लिए. क्राइम ब्रांच ने जब बैंक स्टेटमेंट और टेक्निकल फुटप्रिंट्स की जांच की तो एक बड़ा सुराग हाथ लगा. ठगी की रकम में से 99,999 रुपये ग्रेटर नोएडा के विपुल कश्यप के पीएनबी खाते में पहुंचे थे. पुलिस ने उसे 4 मई 2026 को धर दबोचा. 21 साल का लड़का गिरोह का मास्टर माइंड विपुल से पूछताछ के बाद पुलिस ने 21 साल के मुख्य साजिशकर्ता आयुष शर्मा को नोएडा से गिरफ्तार किया. आयुष ही इस पूरे गिरोह का संचालन कर रहा था. इस गैंग का मॉडस ऑपेरंडी इंस्टाग्राम से शुरू होता था. पूछताछ में आयुष शर्मा ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. उसने दिल्ली पुलिस कहा कि वह इंस्टाग्राम पर विज्ञापन देकर लोगों को लालच देता था कि वे कमीशन के बदले अपने बैंक खाते और सिम कार्ड किराए पर दें. दिल्ली पुलिस ने ऐसे पकड़ा दिल्ली पुलिस ने राजस्थान के भिवाड़ी निवासी विशाल कुमार ने आयुष को सिम कार्ड उपलब्ध कराए थे, जिसे पुलिस ने पकड़कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. ये लोग दिल्ली-एनसीआर से बैंक खाते और सिम कार्ड इकट्ठा कर जामताड़ा के मुख्य ठगों को मुहैया कराते थे, जो वहां बैठकर ठगी को अंजाम देते थे. दिल्ली पुलिस के डीसीपी आदित्य गौतम के निर्देशन और एसीपी अनिल शर्मा की देखरेख में इंस्पेक्टर मंजीत कुमार की टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया. टीम में एसआई प्रवेश कुमार राठी और हेड कांस्टेबल सोहनपाल सहित कई तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे. पुलिस अब इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और जामताड़ा में बैठे उनके आकाओं की तलाश कर रही है. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi First Published : February 11, 2026, 13:09 IST