Thursday, 15 Oct 2026 | 06:09 AM

Trending :

EXCLUSIVE

Iran Claims F-35 Shot Down by Majid Air Defense System – Stealth Jet Weakness Exposed

Iran Claims F-35 Shot Down by Majid Air Defense System – Stealth Jet Weakness Exposed

तेहरान32 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने स्वदेशी ‘माजिद’ एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए इसे मार गिराया।

अगर यह सच है तो ईरान पहला ऐसा देश होगा जो ऐसा कर पाया है। F-35 फाइटर जेट को करीब दो दशकों से अमेरिकी सैन्य ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता रहा है। यह सबसे प्रीमियम फाइटर जेट है, जिसे खास तौर पर इस तरह बनाया गया है कि वह दुनिया के सबसे मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम में भी बिना पकड़े घुसकर हमला कर सके।

ईरान का दावा है कि उसने इस ‘अदृश्य’ माने जाने वाले जेट की कमजोरी पकड़ ली है। माजिद डिफेंस सिस्टम ने F-35 से निकली इंफ्रारेड यानी गर्मी को पकड़कर उसे निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि F-35 भले ही रडार से बचने में सक्षम हो, लेकिन उसके इंजन से निकलने वाली गर्मी को पूरी तरह छुपाया नहीं जा सकता।

वहीं, अमेरिकी वेबसाइट CNN ने भी सूत्रों के हवाले से बताया था कि ईरान के हमलों की वजह से F-35 को मिडिल ईस्ट में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 19 मार्च को F-35 पर हुए हमले का फुटेज जारी किया है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 19 मार्च को F-35 पर हुए हमले का फुटेज जारी किया है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

दावा- सिर्फ 1 मिसाइल से गिराया F-35

ईरानी मीडिया के मुताबिक पहले यह माना जा रहा था कि F-35 को गिराने में ‘तलाश’ एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल हुआ है। लेकिन अब कहा जा रहा है कि माजिद शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम ने ही F35 को गिराया है।

माजिद डिफेंस सिस्टम रडार की बजाय इंफ्रारेड तकनीक पर काम करता है। ऐसे में F-35 के अंदर जो सेंसर और चेतावनी सिस्टम लगे होते हैं, वे इस खतरे को आसानी से पहचान नहीं पाते।

F-35 के पास जो इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम होते हैं, वे आम तौर पर दुश्मन के रडार सिग्नल को जाम कर देते हैं। लेकिन यहां यह पूरी तरह बेकार साबित हुए।

ईरान की ओर से जारी वीडियो के मुताबिक, इस हमले में सिर्फ एक मिसाइल ही काफी रही। इससे यह दिखाने की कोशिश की गई कि सिस्टम कितना सटीक है और F-35 की गर्मी वाली कमजोरी कितनी बड़ी है।

माजिद एयर डिफेंस 6km दूरी तक निशाना लगा सकता है

माजिद एयर डिफेंस सिस्टम को ईरान ने 2021 में पहली बार सार्वजनिक तौर पर दिखाया था। इसे खास तौर पर नजदीकी दूरी की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है।

इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रडार पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि इंफ्रारेड तकनीक का इस्तेमाल करता है। इसी वजह से ऐसे विमान जो रडार से बचने के लिए डिजाइन किए गए हैं, वे भी इसकी नजर से बच नहीं पाते।

माजिद सिस्टम आम तौर पर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को पकड़ने के लिए बनाया गया है। इसकी मार करने की दूरी करीब 700 मीटर से लेकर 6 किलोमीटर तक मानी जाती है। इस वजह से यह उन हालात में ज्यादा कारगर होता है, जहां दुश्मन के विमान या ड्रोन को किसी खास इलाके के ऊपर आना पड़ता है।

इसे ‘पॉइंट डिफेंस’ सिस्टम कहा जाता है, यानी यह एयरबेस, सैन्य ठिकानों, रडार स्टेशन या किसी महत्वपूर्ण इमारत जैसी जगहों की सीधी सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है।

यह सिस्टम आमतौर पर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगाया जाता है, यानी इसे जरूरत के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह जल्दी शिफ्ट किया जा सकता है। इससे दुश्मन के लिए इसकी सही लोकेशन पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

रडार सिस्टम बंद कर अमेरिका को धोखे में रखा

ईरान के मुताबिक वे पहले से ही इस तरह की स्थिति के लिए तैयारी कर रहे थे। मसलन कब क्या करना है, कौन सा सिस्टम इस्तेमाल करना है, दुश्मन को कैसे धोखा देना है। ये सब पहले से तय था।

बताया गया है कि 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने पहला हमला शुरू किया, तब ईरान ने जानबूझकर अपने असली रडार सिस्टम को बंद कर दिया और उन्हें सुरक्षित जगहों पर छिपा दिया।

उनकी जगह नकली रडार सिस्टम लगा दिए गए। ये साधारण नकली ढांचे नहीं थे, बल्कि ऐसे डिकॉय थे जो असली रडार जैसी ही सिग्नल भेजते थे। हर एक डिकॉय बनाने में करीब 10 हजार डॉलर तक खर्च आता है।

अमेरिका और इजराइल के ड्रोन, जो कैमरा और इंफ्रारेड सेंसर से नुकसान का आकलन करते हैं, उन्हें लगा कि उन्होंने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया है।

इन नकली ठिकानों के नष्ट होने और असली रडार के बंद रहने से अमेरिका और इजराइल को यह भरोसा हो गया कि ईरान का एयर डिफेंस पूरी तरह खत्म हो चुका है।

इसी आधार पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड और इजराइली वायुसेना ने यह मान लिया कि अब उन्हें बढ़त मिल गई है। यहां तक कि अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 19 मार्च की सुबह दावा भी किया कि ईरान की हवाई सुरक्षा को खत्म कर दिया गया है।

लेकिन यही सबसे बड़ी गलती साबित हुई। इस भरोसे में आकर अमेरिका और इजराइल ने अपने सबसे एडवांस फाइटर जेट, जैसे F-35 को ईरान के अंदर गहराई तक भेजना शुरू कर दिया।

10 दिन बाद असली रडार सिस्टम स्टार्ट किए

दूसरी तरफ, ईरान ने चुपचाप अपने असली रडार सिस्टम फिर से चालू कर दिए और माजिद जैसे इंफ्रारेड सिस्टम को उन जगहों पर तैनात कर दिया, जहां से अमेरिका-इजराइल के फाइटर जेट्स आने की संभावना थी।

जैसे ही F-35 उस इलाके में पहुंचा, उसे कोई कमजोर या बंद पड़ा डिफेंस सिस्टम नहीं मिला। बल्कि उसे पूरी तरह तैयार और मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम का सामना करना पड़ा, जो पहले से ही उसी मौके का इंतजार कर रहा था।

नोट- यह पूरी जानकारी ईरान के दावों और रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसकी अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

सिंगापुर में एक बेस पर तैनात F-35B फाइटर जेट्स। तस्वीर जून 2025 की है।

सिंगापुर में एक बेस पर तैनात F-35B फाइटर जेट्स। तस्वीर जून 2025 की है।

दुनियाभर में F-35 की छवि पर सवाल

ईरान के F-35 गिराने के दावे ने दुनियाभर की सेनाओं और रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है। अब तक कई देशों की रणनीति इस सोच पर आधारित थी कि F-35 लगभग अजेय है, लेकिन इस दावे के बाद इस धारणा पर सवाल उठने लगे हैं।

इसका असर अब कई देशों के फैसलों में दिखने लगा है। स्पेन ने F-35 खरीदने की योजना छोड़ दी है और यूरोप के फाइटर जेट्स पर निवेश करने का फैसला किया है।

भारत ने भी साफ संकेत दिया है कि वह F-35 नहीं खरीदेगा और अपने घरेलू प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देगा, स्विट्जरलैंड में इस सौदे को रद्द करने की मांग उठ रही है और कनाडा भी अतिरिक्त विमानों की खरीद पर फिर से विचार कर रहा है।

फिलहाल अमेरिका के पास लगभग 450 से 500 F-35 जेट मौजूद हैं। F-35 को दुनिया का सबसे महंगा हथियार प्रोग्राम माना जाता है, जिसकी कुल लागत करीब 1.7 ट्रिलियन डॉलर बताई जाती है।

दावा- अमेरिकी हवाई क्षमता को बहुत नुकसान पहुंचा

ईरान मीडिया की की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल को इस पूरे संघर्ष में लगातार नुकसान उठाना पड़ा है। ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने अमेरिका-इजराइल के 125 से ज्यादा एडवांस ड्रोन मार गिराए हैं।

इनमें कम से कम 10 MQ-9 रीपर ड्रोन मार गिराए हैं। 9 ड्रोन उड़ान के दौरान गिराए गए, जबकि एक ड्रोन जॉर्डन के एयरबेस पर खड़ा था, जिसे बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया गया।

MQ-9 रीपर ड्रोन अमेरिका की निगरानी और हमले की क्षमता का अहम हिस्सा माना जाता है। इसकी कीमत करीब 30 मिलियन डॉलर (लगभग 250 करोड़ रुपये) होती है।

ईरान का दावा है कि उसके इंफ्रारेड सिस्टम ऐसे ड्रोन के खिलाफ खास तौर पर असरदार साबित हुए हैं, जैसा कि पहले यमन में भी देखा गया था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इराक में सक्रिय इस्लामिक रेजिस्टेंस ग्रुप ने पश्चिमी इराक के ऊपर एक KC-135 टैंकर विमान को मार गिराया, जिसमें सवार सभी 6 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा, सऊदी अरब के एक एयरबेस पर खड़े 5 KC-135 टैंकर विमान को क्षतिग्रस्त कर दिया।

इन घटनाओं को अमेरिका की सैन्य योजना में गड़बड़ी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के चलते अमेरिकी और इजराइली बलों को बार-बार अपनी पोजीशन बदलनी पड़ रही है, जिससे गलती की संभावना बढ़ जाती है।

अगर तुलना करें, तो 2011 में लीबिया में अमेरिका के अभियान के दौरान 4 महीनों में सिर्फ 3 लड़ाकू नुकसान दर्ज किए गए थे। जबकि यहां एक महीने से भी कम समय में इतने बड़े नुकसान की बात कही जा रही है।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
ODI, Test for 2027 World Cup & WTC; No T20 Selection

June 7, 2026/
4:18 pm

स्पोर्ट्स डेस्क17 मिनट पहले कॉपी लिंक गिल अभी अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच में भारत की कप्तानी कर रहे हैं।...

रतलाम के पास राजधानी एक्सप्रेस में भीषण आग:एसी कोच बी-1 से उठीं लपटें, दो डिब्बे चपेट में, बाल-बाल बचे यात्री; रेल मार्ग बंद

May 17, 2026/
7:41 am

रतलाम जिले के आलोट से गुजर रही त्रिवेंद्रम-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस (12431) में रविवार सुबह आग लग गई। हादसा सुबह...

Pakistan vs New Zealand Live Cricket Score: PAK vs NZ T20 World Cup 2026 Match Scorecard Latest Updates Today

February 22, 2026/
7:00 am

आखरी अपडेट:22 फरवरी, 2026, 07:00 IST विश्लेषकों का सुझाव है कि ये ‘अनूठे’ विरोध अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता हासिल...

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: हैशटैग की जंग में बीजेपी बनाम टीएमसी का खुलासा- खुलासा, सोशल मीडिया पर 'डिजिटल महाभारत', नया चुनावी हथियार

March 19, 2026/
3:22 pm

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीति का सबसे बड़ा क्षेत्र अब मैदान या मंच नहीं, बल्कि सोशल मीडिया...

भोपाल में छात्रा ने फांसी लगाकर किया सुसाइड:परिजन बोले-रिजल्ट बिगड़ने से दुखी थी, पुलिस जांच में जुटी

April 22, 2026/
2:26 pm

भोपाल के हबीबगंज इलाके में रहने वाली छात्रा ने मंगलवार रात घर में फांसी लगा ली। परिजनों ने फंदे से...

निवाड़ी में प्रजापति समाज का होली मिलन समारोह:सेंगुवा में बुंदेली गीतों पर झूमे लोग; नए पदाधिकारियों को सौंपे नियुक्ति पत्र

March 9, 2026/
6:18 pm

निवाड़ी जिले के ग्राम सेंगुवा में सोमवार को राष्ट्रीय प्रजापति महासंघ के तत्वावधान में होली मिलन समारोह आयोजित किया गया।...

Asha Bhosle Ashes Immersed in Ganga Kashi

April 20, 2026/
6:09 pm

आशा भोसले की अस्थियां लेकर बेटे आंनद और पोती जनाई सोमवार को काशी पहुंचे। यहां अस्सी घाट पर गंगा में...

राजनीति

Iran Claims F-35 Shot Down by Majid Air Defense System – Stealth Jet Weakness Exposed

Iran Claims F-35 Shot Down by Majid Air Defense System – Stealth Jet Weakness Exposed

तेहरान32 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

ईरान ने 19 मार्च को दुनिया के सबसे एडवांस अमेरिकी फाइटर जेट F-35 को गिराने का दावा किया। ईरानी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने स्वदेशी ‘माजिद’ एयर डिफेंस सिस्टम के जरिए इसे मार गिराया।

अगर यह सच है तो ईरान पहला ऐसा देश होगा जो ऐसा कर पाया है। F-35 फाइटर जेट को करीब दो दशकों से अमेरिकी सैन्य ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता रहा है। यह सबसे प्रीमियम फाइटर जेट है, जिसे खास तौर पर इस तरह बनाया गया है कि वह दुनिया के सबसे मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम में भी बिना पकड़े घुसकर हमला कर सके।

ईरान का दावा है कि उसने इस ‘अदृश्य’ माने जाने वाले जेट की कमजोरी पकड़ ली है। माजिद डिफेंस सिस्टम ने F-35 से निकली इंफ्रारेड यानी गर्मी को पकड़कर उसे निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि F-35 भले ही रडार से बचने में सक्षम हो, लेकिन उसके इंजन से निकलने वाली गर्मी को पूरी तरह छुपाया नहीं जा सकता।

वहीं, अमेरिकी वेबसाइट CNN ने भी सूत्रों के हवाले से बताया था कि ईरान के हमलों की वजह से F-35 को मिडिल ईस्ट में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 19 मार्च को F-35 पर हुए हमले का फुटेज जारी किया है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 19 मार्च को F-35 पर हुए हमले का फुटेज जारी किया है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

दावा- सिर्फ 1 मिसाइल से गिराया F-35

ईरानी मीडिया के मुताबिक पहले यह माना जा रहा था कि F-35 को गिराने में ‘तलाश’ एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल हुआ है। लेकिन अब कहा जा रहा है कि माजिद शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम ने ही F35 को गिराया है।

माजिद डिफेंस सिस्टम रडार की बजाय इंफ्रारेड तकनीक पर काम करता है। ऐसे में F-35 के अंदर जो सेंसर और चेतावनी सिस्टम लगे होते हैं, वे इस खतरे को आसानी से पहचान नहीं पाते।

F-35 के पास जो इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम होते हैं, वे आम तौर पर दुश्मन के रडार सिग्नल को जाम कर देते हैं। लेकिन यहां यह पूरी तरह बेकार साबित हुए।

ईरान की ओर से जारी वीडियो के मुताबिक, इस हमले में सिर्फ एक मिसाइल ही काफी रही। इससे यह दिखाने की कोशिश की गई कि सिस्टम कितना सटीक है और F-35 की गर्मी वाली कमजोरी कितनी बड़ी है।

माजिद एयर डिफेंस 6km दूरी तक निशाना लगा सकता है

माजिद एयर डिफेंस सिस्टम को ईरान ने 2021 में पहली बार सार्वजनिक तौर पर दिखाया था। इसे खास तौर पर नजदीकी दूरी की सुरक्षा के लिए तैयार किया गया है।

इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह रडार पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि इंफ्रारेड तकनीक का इस्तेमाल करता है। इसी वजह से ऐसे विमान जो रडार से बचने के लिए डिजाइन किए गए हैं, वे भी इसकी नजर से बच नहीं पाते।

माजिद सिस्टम आम तौर पर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को पकड़ने के लिए बनाया गया है। इसकी मार करने की दूरी करीब 700 मीटर से लेकर 6 किलोमीटर तक मानी जाती है। इस वजह से यह उन हालात में ज्यादा कारगर होता है, जहां दुश्मन के विमान या ड्रोन को किसी खास इलाके के ऊपर आना पड़ता है।

इसे ‘पॉइंट डिफेंस’ सिस्टम कहा जाता है, यानी यह एयरबेस, सैन्य ठिकानों, रडार स्टेशन या किसी महत्वपूर्ण इमारत जैसी जगहों की सीधी सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है।

यह सिस्टम आमतौर पर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगाया जाता है, यानी इसे जरूरत के हिसाब से एक जगह से दूसरी जगह जल्दी शिफ्ट किया जा सकता है। इससे दुश्मन के लिए इसकी सही लोकेशन पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

रडार सिस्टम बंद कर अमेरिका को धोखे में रखा

ईरान के मुताबिक वे पहले से ही इस तरह की स्थिति के लिए तैयारी कर रहे थे। मसलन कब क्या करना है, कौन सा सिस्टम इस्तेमाल करना है, दुश्मन को कैसे धोखा देना है। ये सब पहले से तय था।

बताया गया है कि 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने पहला हमला शुरू किया, तब ईरान ने जानबूझकर अपने असली रडार सिस्टम को बंद कर दिया और उन्हें सुरक्षित जगहों पर छिपा दिया।

उनकी जगह नकली रडार सिस्टम लगा दिए गए। ये साधारण नकली ढांचे नहीं थे, बल्कि ऐसे डिकॉय थे जो असली रडार जैसी ही सिग्नल भेजते थे। हर एक डिकॉय बनाने में करीब 10 हजार डॉलर तक खर्च आता है।

अमेरिका और इजराइल के ड्रोन, जो कैमरा और इंफ्रारेड सेंसर से नुकसान का आकलन करते हैं, उन्हें लगा कि उन्होंने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया है।

इन नकली ठिकानों के नष्ट होने और असली रडार के बंद रहने से अमेरिका और इजराइल को यह भरोसा हो गया कि ईरान का एयर डिफेंस पूरी तरह खत्म हो चुका है।

इसी आधार पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड और इजराइली वायुसेना ने यह मान लिया कि अब उन्हें बढ़त मिल गई है। यहां तक कि अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 19 मार्च की सुबह दावा भी किया कि ईरान की हवाई सुरक्षा को खत्म कर दिया गया है।

लेकिन यही सबसे बड़ी गलती साबित हुई। इस भरोसे में आकर अमेरिका और इजराइल ने अपने सबसे एडवांस फाइटर जेट, जैसे F-35 को ईरान के अंदर गहराई तक भेजना शुरू कर दिया।

10 दिन बाद असली रडार सिस्टम स्टार्ट किए

दूसरी तरफ, ईरान ने चुपचाप अपने असली रडार सिस्टम फिर से चालू कर दिए और माजिद जैसे इंफ्रारेड सिस्टम को उन जगहों पर तैनात कर दिया, जहां से अमेरिका-इजराइल के फाइटर जेट्स आने की संभावना थी।

जैसे ही F-35 उस इलाके में पहुंचा, उसे कोई कमजोर या बंद पड़ा डिफेंस सिस्टम नहीं मिला। बल्कि उसे पूरी तरह तैयार और मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम का सामना करना पड़ा, जो पहले से ही उसी मौके का इंतजार कर रहा था।

नोट- यह पूरी जानकारी ईरान के दावों और रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसकी अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

सिंगापुर में एक बेस पर तैनात F-35B फाइटर जेट्स। तस्वीर जून 2025 की है।

सिंगापुर में एक बेस पर तैनात F-35B फाइटर जेट्स। तस्वीर जून 2025 की है।

दुनियाभर में F-35 की छवि पर सवाल

ईरान के F-35 गिराने के दावे ने दुनियाभर की सेनाओं और रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है। अब तक कई देशों की रणनीति इस सोच पर आधारित थी कि F-35 लगभग अजेय है, लेकिन इस दावे के बाद इस धारणा पर सवाल उठने लगे हैं।

इसका असर अब कई देशों के फैसलों में दिखने लगा है। स्पेन ने F-35 खरीदने की योजना छोड़ दी है और यूरोप के फाइटर जेट्स पर निवेश करने का फैसला किया है।

भारत ने भी साफ संकेत दिया है कि वह F-35 नहीं खरीदेगा और अपने घरेलू प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देगा, स्विट्जरलैंड में इस सौदे को रद्द करने की मांग उठ रही है और कनाडा भी अतिरिक्त विमानों की खरीद पर फिर से विचार कर रहा है।

फिलहाल अमेरिका के पास लगभग 450 से 500 F-35 जेट मौजूद हैं। F-35 को दुनिया का सबसे महंगा हथियार प्रोग्राम माना जाता है, जिसकी कुल लागत करीब 1.7 ट्रिलियन डॉलर बताई जाती है।

दावा- अमेरिकी हवाई क्षमता को बहुत नुकसान पहुंचा

ईरान मीडिया की की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल को इस पूरे संघर्ष में लगातार नुकसान उठाना पड़ा है। ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम ने अमेरिका-इजराइल के 125 से ज्यादा एडवांस ड्रोन मार गिराए हैं।

इनमें कम से कम 10 MQ-9 रीपर ड्रोन मार गिराए हैं। 9 ड्रोन उड़ान के दौरान गिराए गए, जबकि एक ड्रोन जॉर्डन के एयरबेस पर खड़ा था, जिसे बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया गया।

MQ-9 रीपर ड्रोन अमेरिका की निगरानी और हमले की क्षमता का अहम हिस्सा माना जाता है। इसकी कीमत करीब 30 मिलियन डॉलर (लगभग 250 करोड़ रुपये) होती है।

ईरान का दावा है कि उसके इंफ्रारेड सिस्टम ऐसे ड्रोन के खिलाफ खास तौर पर असरदार साबित हुए हैं, जैसा कि पहले यमन में भी देखा गया था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इराक में सक्रिय इस्लामिक रेजिस्टेंस ग्रुप ने पश्चिमी इराक के ऊपर एक KC-135 टैंकर विमान को मार गिराया, जिसमें सवार सभी 6 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा, सऊदी अरब के एक एयरबेस पर खड़े 5 KC-135 टैंकर विमान को क्षतिग्रस्त कर दिया।

इन घटनाओं को अमेरिका की सैन्य योजना में गड़बड़ी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि ईरान के लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों के चलते अमेरिकी और इजराइली बलों को बार-बार अपनी पोजीशन बदलनी पड़ रही है, जिससे गलती की संभावना बढ़ जाती है।

अगर तुलना करें, तो 2011 में लीबिया में अमेरिका के अभियान के दौरान 4 महीनों में सिर्फ 3 लड़ाकू नुकसान दर्ज किए गए थे। जबकि यहां एक महीने से भी कम समय में इतने बड़े नुकसान की बात कही जा रही है।

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.