Delhi Police Caught Chines Agent: मोबाइल तोड़ा, चेक बुक जलाये, फिर भी नहीं बच सका गिरफ्तारी से, ऐसे दबोचे गए 3 चीनी एजेंट | delhi police busts international stock market scam cyber fraud racket 3 chines agent held

Last Updated:February 09, 2026, 12:40 IST Delhi Police Caught Chines Agent: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के तार चीन से जुड़े हैं और ये ठगी के पैसों को क्रिप्टोकरेंसी (USDT) के जरिए विदेश भेजते थे. दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर 42.5 लाख की ठगी का मामला सुलझाया है. दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन नई दिल्ली. दिल्ली में साइबर ठगों ने अब सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जड़ें जमा ली हैं. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ‘Cy-Hawk’ ऑपरेशन के तहत एक हाई-प्रोफाइल साइबर धोखाधड़ी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह न केवल भारतीय नागरिकों को स्टॉक मार्केट के नाम पर ठग रहा था, बल्कि ठगी की रकम को चीनी हैंडलर्स की मदद से क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेज रहा था. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अबतक तीन साइबर ठगों को गिरप्तार किया है. उत्तम नगर के 56 साल के शख्स रंजन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया कि स्टॉक मार्केट में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच देकर उनसे करीब 42.5 लाख रुपये की ठगी की गई है. क्राइम ब्रांच ने 17 दिसंबर 2025 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की. जांच और पहली गिरफ्तारी क्राइम ब्रांच की टीम ने जब पैसों के लेन-देन (Money Trail) का पीछा किया, तो पता चला कि ठगी की रकम 36 अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई थी. इनमें से एक खाता सब्बीर अहमद निवासी मुनिरका के नाम पर था, जिसमें यूको बैंक के जरिए साढ़े तीन लाख से ज्यादा रुपये आए थे और उसी दिन चेक के जरिए निकाल लिए गए थे. इसके बाद होने लगी ताबड़तोड़ गिरफ्तारी पुलिस ने 21 जनवरी 2026 को सब्बीर को धर दबोचा. पूछताछ में उसने चौंकाने वाला खुलासा किया कि वह महज 2% कमीशन के लिए 9-10 बैंक खाते खुलवाकर उनकी किट दूसरे गैंग को सौंप चुका है. सब्बीर की निशानदेही पर पुलिस ने 5 फरवरी 2026 को बाटला हाउस से दो और आरोपियों मो. सरफराज और मो. दिलशाद को गिरफ्तार किया. इन दोनों ने पूछताछ में कबूल किया कि उनके सीधे संबंध चीनी हैंडलर्स के साथ हैं. क्रिप्टोकरेंसी से पैसे भेजते थे ये आरोपी ठगी के पैसों का इस्तेमाल चीनी नागरिकों को USDT (क्रिप्टोकरेंसी) बेचने के लिए करते थे, जिससे पैसा आसानी से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार चला जाता था. ये बैंक अधिकारियों से साठगांठ कर डमी उम्मीदवारों के नाम पर फर्जी खाते खुलवाते थे. सब्बीर की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही इन्होंने चेक बुक जला दी और सिम कार्ड तोड़ दिए, ताकि पुलिस को कोई सबूत न मिले. हालांकि, पुलिस ने उस मोबाइल हैंडसेट को बरामद कर लिया है जिससे यह पूरा खेल संचालित हो रहा था. पकड़े गए तीनों आरोपी आदतन अपराधी हैं. इससे पहले सितंबर 2025 में भी इन्हें दिल्ली की ‘साइबर वेस्ट’ पुलिस ने ठगी के एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया था. जेल से बाहर आते ही इन्होंने फिर से अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के लिए काम करना शुरू कर दिया. डीसीपी पंकज कुमार ने बताया कि यह मॉड्यूल बहुत ही संगठित तरीके से काम कर रहा था. पुलिस अब उन बैंक अधिकारियों और चीनी एजेंटों की तलाश कर रही है जो इस मनी-लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा हैं. ऐसे में किसी भी अनजान व्हाट्सएप ग्रुप या टेलीग्राम चैनल पर मिले ‘स्टॉक मार्केट टिप्स’ पर भरोसा न करें. निवेश के लिए केवल सेबी (SEBI) द्वारा अधिकृत प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : New Delhi,New Delhi,Delhi First Published : February 09, 2026, 12:40 IST
सावधान! घर बैठे कमाई का लालच पड़ सकता है भारी, 12वीं पास साइबर ठग ने इस शख्स से झटके में कूट लिए 17 लाख रुपये | delhi police cyber crime arrest pathan uzef khalil khan maharashtra jalna work from home fraud case

नई दिल्ली. डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां इंटरनेट ने हमारे जीवन को सुगम बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने इसे ठगी का नया हथियार बना लिया है. दिल्ली पुलिस की नॉर्थ-वेस्ट जिला साइबर सेल ने एक ऐसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो वर्क फ्रॉम होम यानी घर बैठे काम के नाम पर मासूम लोगों की मेहनत की कमाई डकार रहा था. इस मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र के जालना जिले से 25 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है, जो इस पूरे खेल का मुख्य किरदार था. इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत नए साल के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी 2026 को हुई, जब दिल्ली के त्रिनगर के केशव पुरम निवासी राहुल सैनी ने पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई. राहुल ने बताया कि उसे घर बैठे ऑनलाइन टास्क पूरा करने के बदले मोटी कमाई का झांसा दिया गया था. शुरुआत में उसे कुछ छोटे-मोटे टास्क दिए गए और बदले में पैसे भी मिले, जिससे उसका भरोसा जीत लिया गया. लेकिन जैसे ही उसने बड़े निवेश वाले टास्क शुरू किए, साइबर ठगों ने उसे अपने जाल में फंसा लिया. राहुल से अलग-अलग बहानों और टैक्स के नाम पर कुल 17,16,777 रुपये ठग लिए गए. जब राहुल को अहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है, तब तक काफी देर हो चुकी थी. दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर-पश्चिमी जिला पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया. इस टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर दिनेश दहिया कर रहे थे, जिसमें एसआई आरएन अशांग, हेड कांस्टेबल अमित, सोहन और संदीप शामिल थे. पुलिस ने सबसे पहले उन बैंक खातों की पड़ताल शुरू की जिनमें राहुल ने पैसे ट्रांसफर किए थे. जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मनी ट्रेल सामने आया. ठगी की गई रकम को कई म्यूल अकाउंट्स में घुमाया गया था ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके. तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर पुलिस को पता चला कि इस गिरोह का एक मुख्य सदस्य महाराष्ट्र के जालना में बैठकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है. पुलिस टीम ने तुरंत महाराष्ट्र का रुख किया और जालना में डेरा डाल दिया. कड़ी मेहनत और तकनीकी निगरानी के बाद आरोपी पठान उजेफ खलील खान को उसके ठिकाने से दबोच लिया गया. कौन है पठान उजेफ और क्या था उसका काम? 25 वर्षीय पठान उजेफ खलील खान केवल 12वीं पास है और पेशे से एक निजी होटल में शेफ का काम करता था. पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह अपनी विलासितापूर्ण जीवनशैली और माता-पिता की खराब आर्थिक स्थिति के कारण इस अपराध की दुनिया में शामिल हुआ. पुलिस के अनुसार, उजेफ इस गिरोह का वह ‘वर्टिकल’ था जो ठगी के पैसे को लिक्विडेट (नकद में बदलना) करता था. गिरोह के अन्य सदस्य जब शिकार को फंसा लेते थे तो पैसे उजेफ द्वारा प्रबंधित खातों में आते थे. उजेफ इन पैसों को ‘सेल्फ चेक’ के जरिए बैंक से निकालता था और फिर अपना कमीशन काटकर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा देता था. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने मोबाइल नंबर और ठिकाने बदलता रहता था. पुलिस ने उसके पास से अपराध में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी बरामद किया है. कैसे काम करता है वर्क फ्रॉम होम स्कैम? यह स्कैम आमतौर पर टेलीग्राम या व्हाट्सएप मैसेज से शुरू होता है. ठग खुद को किसी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी या मार्केटिंग फर्म का प्रतिनिधि बताते हैं. लुभावना ऑफर: आपको यूट्यूब वीडियो लाइक करने या होटल रिव्यू देने जैसे आसान काम दिए जाते हैं. भरोसा जीतना: पहले दो-तीन टास्क के लिए आपको 200-500 रुपये का भुगतान किया जाता है. बड़ा निवेश: इसके बाद आपको ‘वीआईपी टास्क’ के लिए पैसे जमा करने को कहा जाता है, जहाँ से ठगी का असली खेल शुरू होता है. पैसे की लेयरिंग: ठगी गई रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजा जाता है ताकि पुलिस मुख्य अपराधी तक न पहुँच सके. दिल्ली पुलिस के एडिशनल कमिश्नर नॉर्थ-वेस्ट जिला भीष्म सिंह ने कहा है कि किसी भी अज्ञात नंबर से आए ‘वर्क फ्रॉम होम’ के ऑफर्स पर भरोसा न करें. यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था काम देने से पहले आपसे पैसे की मांग करती है, तो वह निश्चित रूप से एक फ्रॉड है. पुलिस अब उजेफ से पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाया जा सके. उजेफ को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है और पुलिस को उम्मीद है कि उससे पूछताछ के बाद कई और बड़े खुलासे होंगे.








