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Delhi Police Caught Chines Agent: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के तार चीन से जुड़े हैं और ये ठगी के पैसों को क्रिप्टोकरेंसी (USDT) के जरिए विदेश भेजते थे. दिल्ली पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर 42.5 लाख की ठगी का मामला सुलझाया है.
दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन
नई दिल्ली. दिल्ली में साइबर ठगों ने अब सीधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जड़ें जमा ली हैं. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ‘Cy-Hawk’ ऑपरेशन के तहत एक हाई-प्रोफाइल साइबर धोखाधड़ी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह न केवल भारतीय नागरिकों को स्टॉक मार्केट के नाम पर ठग रहा था, बल्कि ठगी की रकम को चीनी हैंडलर्स की मदद से क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेज रहा था. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अबतक तीन साइबर ठगों को गिरप्तार किया है.
उत्तम नगर के 56 साल के शख्स रंजन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया कि स्टॉक मार्केट में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच देकर उनसे करीब 42.5 लाख रुपये की ठगी की गई है. क्राइम ब्रांच ने 17 दिसंबर 2025 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की.
जांच और पहली गिरफ्तारी
क्राइम ब्रांच की टीम ने जब पैसों के लेन-देन (Money Trail) का पीछा किया, तो पता चला कि ठगी की रकम 36 अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई थी. इनमें से एक खाता सब्बीर अहमद निवासी मुनिरका के नाम पर था, जिसमें यूको बैंक के जरिए साढ़े तीन लाख से ज्यादा रुपये आए थे और उसी दिन चेक के जरिए निकाल लिए गए थे.
इसके बाद होने लगी ताबड़तोड़ गिरफ्तारी
पुलिस ने 21 जनवरी 2026 को सब्बीर को धर दबोचा. पूछताछ में उसने चौंकाने वाला खुलासा किया कि वह महज 2% कमीशन के लिए 9-10 बैंक खाते खुलवाकर उनकी किट दूसरे गैंग को सौंप चुका है. सब्बीर की निशानदेही पर पुलिस ने 5 फरवरी 2026 को बाटला हाउस से दो और आरोपियों मो. सरफराज और मो. दिलशाद को गिरफ्तार किया. इन दोनों ने पूछताछ में कबूल किया कि उनके सीधे संबंध चीनी हैंडलर्स के साथ हैं.
क्रिप्टोकरेंसी से पैसे भेजते थे
ये आरोपी ठगी के पैसों का इस्तेमाल चीनी नागरिकों को USDT (क्रिप्टोकरेंसी) बेचने के लिए करते थे, जिससे पैसा आसानी से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार चला जाता था. ये बैंक अधिकारियों से साठगांठ कर डमी उम्मीदवारों के नाम पर फर्जी खाते खुलवाते थे. सब्बीर की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही इन्होंने चेक बुक जला दी और सिम कार्ड तोड़ दिए, ताकि पुलिस को कोई सबूत न मिले. हालांकि, पुलिस ने उस मोबाइल हैंडसेट को बरामद कर लिया है जिससे यह पूरा खेल संचालित हो रहा था.
पकड़े गए तीनों आरोपी आदतन अपराधी हैं. इससे पहले सितंबर 2025 में भी इन्हें दिल्ली की ‘साइबर वेस्ट’ पुलिस ने ठगी के एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया था. जेल से बाहर आते ही इन्होंने फिर से अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के लिए काम करना शुरू कर दिया. डीसीपी पंकज कुमार ने बताया कि यह मॉड्यूल बहुत ही संगठित तरीके से काम कर रहा था. पुलिस अब उन बैंक अधिकारियों और चीनी एजेंटों की तलाश कर रही है जो इस मनी-लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा हैं. ऐसे में किसी भी अनजान व्हाट्सएप ग्रुप या टेलीग्राम चैनल पर मिले ‘स्टॉक मार्केट टिप्स’ पर भरोसा न करें. निवेश के लिए केवल सेबी (SEBI) द्वारा अधिकृत प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें.
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भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें













































