गर्मी और लू से बचाएगा कच्चे आम का पन्ना, जानिए इसे बनाने की आसान रेसिपी – News18 हिंदी

X गर्मी और लू से बचाएगा कच्चे आम का पन्ना, जानिए इसे बनाने की आसान रेसिपी Aam Panna Recipe: आम पन्ना या आम पना जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी किसी औषधि से कम नहीं है. आम पन्ना कच्चे आम से तैयार किया जाने वाला एक लोकप्रिय देसी पेय है, जिसे खासतौर पर गर्मियों में पीया जाता है. यह शरीर की गर्मी को संतुलित करने में मदद करता है और लू से बचाव के लिए बेहद कारगर माना जाता है. सीधी निवासी प्रियंका सिंह ने बताया कि गर्मियों में राहत देने वाला आम पन्ना बनाने की विधि बेहद आसान है. कच्चे आमों को चूल्हे या गैस पर तब तक भूनें, जब तक छिलका काला और अंदर से नरम न हो जाए. इसके बाद इन्हें ठंडा कर छीलें और गूदा निकाल लें. इसे पानी, चीनी या गुड़, पुदीना, भुना जीरा, काला नमक और साधारण नमक के साथ पीस लें. तैयार गाढ़ा मिश्रण फ्रिज में रखें. सर्व करते समय गिलास में बर्फ, 3-4 चम्मच पन्ना और ठंडा पानी मिलाकर परोसें. तैयार पेय को ठंडा कर पुदीने की पत्तियों के साथ परोसने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.
सिर्फ 5 मिनट में पेट की गैस से मिलेगा छुटकारा, डॉक्टर शुभम वत्स से जानें आसान ट्रिक्स, जरूर करें ट्राई

Stomach Gas Relief Tips: पेट में गैस और ब्लोटिंग की समस्या आजकल बहुत आम हो गई है, जो गलत खान-पान, अनियमित दिनचर्या और खराब पाचन के कारण होती है. गैस्ट्रो डॉक्टर शुभम वत्स ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो में बताया है कि कुछ ऐसे फूड्स हैं जो बहुत कम समय में गैस की समस्या से राहत दिला सकते हैं. ये फूड्स पेट में बनने वाली गैस को जल्दी बाहर निकालने में मदद करते हैं. खास बात यह है कि ये सभी चीजें आसानी से घर में उपलब्ध होती हैं और इन्हें तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है. इन फूड्स का सही तरीके से सेवन करने से न सिर्फ गैस से राहत मिलती है, बल्कि पाचन तंत्र भी मजबूत होता है. हालांकि अगर गैस की समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह लेना भी जरूरी है.
गर्मियों में ठंडक चाहिए? यह खास सौंफ वाली ठंडाई कर देगी कमाल, जानिए घर पर बनाने की आसान रेसिपी

Last Updated:April 08, 2026, 15:15 IST गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडा और तरोताजा रखना जरूरी होता है. भरतपुर के गांवों में सौंफ से बनी देसी ठंडाई पारंपरिक रूप से सबसे ज्यादा पसंद की जाती है. यह न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है, बल्कि ऊर्जा और पाचन में भी मदद करती है, और पूरी तरह प्राकृतिक होने के कारण स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है. भरतपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में गर्मियों के दिनों में एक पारंपरिक पेय लोगों की पहली पसंद बन जाता है. यह पेय है सौंफ से तैयार की जाने वाली देसी ठंडाई, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करती है. गांवों में लोग इसे पीकर खुद को तरोताजा महसूस करते हैं और गर्मी के असर से बचने के लिए इसे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना चुके हैं. ग्रामीण लोगों के अनुसार सौंफ की तासीर ठंडी होती है, जिससे शरीर का तापमान संतुलित रहता है. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में सौंफ वाली ठंडाई का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह पेय पाचन क्रिया को भी बेहतर बनाता है और शरीर में पानी की कमी को दूर करने में मदद करता है. ग्रामीण इलाकों में खेतों पर काम करने वाले लोग इसे खास तौर पर पसंद करते हैं. क्योंकि यह उन्हें लंबे समय तक ऊर्जा देता है. इस देसी ठंडाई को बनाना भी बेहद आसान है और इसके लिए किसी महंगे सामान की जरूरत नहीं होती. सबसे पहले ठंडा पानी लिया जाता है, फिर सौंफ को अच्छी तरह साफ करके बारीक पीस लिया जाता है. इसके बाद पिसी हुई सौंफ को पानी में डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें चीनी डाली जाती है, जिससे इसका स्वाद मीठा और लाजवाब हो जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google इसके बाद इसमें थोड़ी सी काली मिर्च मिलाई जाती है, जो इसे हल्का तीखापन और अलग स्वाद देती है. कुछ लोग इसमें बर्फ भी डालते हैं, जिससे यह और ज्यादा ठंडी और ताजगी भरी बन जाती है. ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि यह ठंडाई पूरी तरह प्राकृतिक होती है और इसमें किसी तरह का केमिकल नहीं होता, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है. बाजार में मिलने वाले ठंडे पेय पदार्थों के मुकाबले यह सस्ती और ज्यादा फायदेमंद मानी जाती है. सौंफ वाली यह देसी ठंडाई न केवल गर्मी से राहत देती है, बल्कि परंपरा और स्वाद का भी बेहतरीन उदाहरण है. यही कारण है कि भरतपुर के गांवों में इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है और ग्रामीण क्षेत्र के लोग इसे खूब पसंद करते हैं. First Published : April 08, 2026, 15:15 IST
ग्रामीण इलाकों में आम सा दिखने वाला मकोय का पौधा, पेट की गंभीर बीमारियों में फायदेमंद, एक्सपर्ट की सलाह पर करें उपयोग

Last Updated:April 08, 2026, 08:16 IST वैद्य वेद प्रकाश पांडेय बताते हैं कि मकोय का पौधा लीवर से जुड़ी समस्याओं में फायदेमंद माना जाता है. पीलिया के मरीजों को इसका उपयोग करने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा यह पेट से जुड़ी दिक्कतों जैसे गैस, अपच और कब्ज में भी राहत देता है. यह पौधा आमतौर पर गांव में नजर आता है. मकोय को कई जगह काकमाची भी कहा जाता है. इसके छोटे-छोटे काले फल और हरे पत्ते होते हैं. आयुर्वेद में इस पौधे का खास महत्व बताया गया है. खेतों और आसपास के इलाकों में आसानी से मिलने वाला मकोय का पौधा देखने में भले ही साधारण लगता हो, लेकिन इसके औषधीय गुण इसे खास बनाते हैं. ग्रामीण इलाकों में लोग इसे लंबे समय से घरेलू इलाज के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं. मकोय को कई जगह काकमाची भी कहा जाता है. इसके छोटे-छोटे काले फल और हरे पत्ते होते हैं. आयुर्वेद में इस पौधे का खास महत्व बताया गया है. मकोय लीवर के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. खासकर पीलिया (जॉन्डिस) जैसी बीमारी में इसका इस्तेमाल पुराने समय से घरेलू इलाज के रूप में किया जाता रहा है. ग्रामीण इलाकों में लोग इसके पत्तों का रस या काढ़ा बनाकर पीते हैं, जिससे लीवर को साफ करने और उसकी कार्यक्षमता बेहतर करने में मदद मिलती है. मकोय में ऐसे प्राकृतिक गुण पाए जाते हैं, जो शरीर से विषैले तत्व (टॉक्सिन) बाहर निकालने में सहायक होते हैं. मकोय पेट से जुड़ी समस्याओं में भी काफी लाभकारी माना जाता है. आजकल बदलती खानपान की आदतों की वजह से गैस, अपच और कब्ज जैसी दिक्कतें आम हो गई है, ऐसे में मकोय एक आसान घरेलू उपाय बन सकता है. लोग इसके पत्तों का साग बनाकर खाते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है. यह पेट को साफ रखने में सहायक होता है और कब्ज की समस्या को धीरे-धीरे कम कर सकता है.
मोबाइल-लैपटॉप की ब्लू लाइट बिगाड़ रही आंखों की सेहत, रात में ज्यादा इस्तेमाल कर रहें, तो जान लें खतरा

Last Updated:April 07, 2026, 19:12 IST Ghaziabad News: आज के युवा मोबाइल और लेपटॉप के दीवाने हो गए हैं. इसके साथ ही अब ज्यादातर काम डिजिटल हो चुका है. ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या फिर मनोरंजन, हर चीज स्क्रीन के जरिए ही हो रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है. गाजियाबाद: आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और लैपटॉप हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या फिर मनोरंजन, हर चीज स्क्रीन के जरिए ही पूरी हो रही है. लेकिन यही सुविधा अब धीरे-धीरे हमारी सेहत खासकर आंखों के लिए खतरा बनती जा रही है. रात के समय लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत लोगों में तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर आंखों और नींद दोनों पर पड़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है. डिजिटल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों पर दबाव डालती है, जिससे जलन, सूखापन और धुंधला दिखने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. इस स्थिति को डिजिटल आई स्ट्रेन कहा जाता है. खासकर रात में जब रोशनी कम होती है, तब स्क्रीन का असर और ज्यादा बढ़ जाता है. यही वजह है कि कई लोग देर रात तक फोन इस्तेमाल करने के बाद भी ठीक से सो नहीं पाते और सुबह उठने पर आंखों में भारीपन महसूस करते हैं. आंखों की मांसपेशियों पर प्रभावनेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुज ने बताया कि लगातार मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल आंखों की मांसपेशियों को जल्दी थका देता है. कई लोग रात में स्क्रीन देखने के तुरंत बाद सोने की कोशिश करते हैं, लेकिन ब्लू लाइट के प्रभाव के कारण नींद आने में परेशानी होती है. इससे नींद पूरी नहीं हो पाती और शरीर पर भी इसका असर पड़ता है. ब्लू लाइट फिल्टर जरूर ऑन रखेंउन्होंने बताया कि ब्लू लाइट के कारण आंखों में ड्राइनेस, जलन और इरिटेशन की समस्या आम हो गई है. अगर रात में स्क्रीन का इस्तेमाल जरूरी हो, तो ब्लू लाइट फिल्टर जरूर ऑन रखें. इसके अलावा ब्लू कट लेंस वाले चश्मे का इस्तेमाल भी आंखों को काफी हद तक सुरक्षित रख सकता है. हर 20 मिनट में स्क्रीन से ब्रेक लेना ब्राइटनेस को कम रखना और आंखों को आराम देना बेहद जरूरी है. कोशिश करें कि रात 8 बजे के बाद स्क्रीन टाइम कम कर दें और सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल बिल्कुल बंद कर दें. सावधानी बरतना जरूरीडॉक्टर का यह भी कहना है कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम कम उम्र में ही चश्मा लगने की वजह बन सकता है. जो समस्या आमतौर पर 40 साल की उम्र में होती थी, वह अब युवाओं में भी देखने को मिल रही है. इसलिए समय रहते सावधानी जरूरी है. साथ ही आंखों की सेहत के लिए सही खानपान भी बेहद जरूरी है. गाजर का जूस, अंडे, ताजे फल और हरी सब्जियां आंखों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं. अगर आंखों में लगातार जलन, पानी आना या धुंधलापन महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और लापरवाही से बचना चाहिए. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. Location : Ghaziabad,Uttar Pradesh First Published : April 07, 2026, 19:12 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
इसे सिर्फ हरी पत्ती मत समझिए, यह मसाला कई गंभीर बीमारियों में इम्यूनिटी बूस्टर! औषधीय गुणों से भरपूर

Last Updated:April 07, 2026, 18:05 IST Health News: आज भी हमारे देश के लोग आयुर्वेद पर विश्वास करते हैं, क्योंकि आयुर्वेद में हर मर्ज का इलाज है. ऐसी ही एक औषधि है लेमनग्रास, जो हमारी सेहत के साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद ही फायदेमंद है. आइए पोषक तत्वों से भरपूर इसकी खासियत के बारे में जानते हैं. वैसे हरी धनिया एक ऐसी चीज है, जो बाजार में सालभर पाई जाती है. इसकी पत्तियों का उपयोग हर घर में होता है, चाहे सब्जी हो या दाल रायता हो या चटनी, धनिया की पत्तियां हर खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ा देती है. ये पत्तियां सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ातीं, बल्कि हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद भी होती हैं. यह एक ऐसी चीज है, जो दिखने में भले ही मामूली लगे, लेकिन इसके अंदर छिपे पोषक तत्व हमारी सेहत और स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. आयुर्वेद में भी धनिया को औषधि के रूप में माना गया है, जिस कारण धनिया का नियमित रूप से इस्तेमाल कर कई बीमारियों से बचा जा सकता है. जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा (एमडी मेडिसिन ) ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि हरी धनिया एक औषधीय पौधा है. इसकी पत्तियां और बीज हमारी सेहत व स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद हैं. इसमें बहुत सारे औषधीय गुण मौजूद होते हैं, जैसे विटामिन ए और सी, पोटैशियम, कैल्शियम, विटामिन-सी और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमें कई गंभीर बीमारियों से बचाते हैं. बस इसका सही से इस्तेमाल करने की जरूरत है. आंखों के दर्द में फायदेमंद: धनिया क़े पत्तों के रस को बकरी के दूध में मिला लें. इसे आंख में एक-एक बूंद डालने से आंखों का दर्द ठीक हो जाता है. धनिया बीज और जौ को बराबर-बराबर लेकर पीस लें. इसका गाढ़ा लेप बना लें. इसे आंखों पर बांधने से आंख के दर्द ठीक हो जाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google कब्ज क़ी समस्या में फायदेमंद: जिन लोगों को कब्ज रहती है, वो 20 ग्राम धनिया और 120 मिली पानी को मिट्टी के बर्तन में डालकर, रात भर रहने दें. सुबह इसे छानकर, 13 ग्राम खांड डाल लें. इसे थोड़ा-थोड़ा पीने से कब्ज में लाभ मिलता है. पेट दर्द की समस्या में 2 ग्राम धनिया चूर्ण को, 5 ग्राम मिश्री के साथ मिला लें. इसे दिन में दो-तीन बार देने से गर्मी से होने वाले पेट दर्द में लाभ होता है. इसके अलावा 5 ग्राम धनिया को 100 मिली पानी में रात में भिगो लें. इसे सुबह मसलकर और छानकर रखें. इस पानी को बच्चों को पिलाने से पेट दर्द में लाभ होता है. वहीं 10-20 मिली धनिया के पत्ते के रस को 10 मिली सिरके में मिलाकर लगाने से पेट दर्द ठीक हो जाता है. अगर किसी को हाई कॉलेस्ट्रॉल की शिकायत है, तो उसे धनिया के बीज उबालकर उस पानी को पीना चाहिए. डायबिटीज के मरीजों के लिए भी धनिया काफी फायदेमंद होता है. यह खून में इंसुलिन की मात्रा को नियमित करता है. पाचन की समस्या में फायदेमंद: पाचन को दुरुस्त करने के लिए हरी धनिया खाएं. यह पेट की समस्याओं को दूर कर पाचनशक्ति बढ़ाता है. धनिया के ताजे पत्तों को छाछ में मिलाकर पीने से बदहजमी, मतली, पेचिश और कोलाइटिस में आराम मिलता है. इसके सेवन से गैस की समस्या से भी छुटकारा मिलता है. First Published : April 07, 2026, 18:05 IST
यह सफेद फूल है औषधि का खजाना! बवासीर से लेकर कान-दांत दर्द तक देता है राहत, जानें सही इस्तेमाल

Last Updated:April 07, 2026, 13:38 IST धतूरा एक ऐसा पौधा है, जिसे जहां धार्मिक दृष्टि से भगवान शिव को अर्पित किया जाता है, वहीं आयुर्वेद में इसके कई औषधीय उपयोग भी बताए गए हैं. हालांकि यह पौधा विषैला होता है, इसलिए इसके सही और सीमित उपयोग से ही स्वास्थ्य लाभ मिल सकता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में धतूरा का पौधा आसानी से मिल जाता है. धतूरा एक ऐसा पौधा है, जिसके फल, पत्तियां और तना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. इसमें ट्रोपेन एल्कलॉइड जैसे स्कोपोलामाइन, एट्रोपिन, एनिसोडामाइन, मेटेलोइडिन और एंजेलेट एस्टर जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो कई बीमारियों से बचाव में सहायक माने जाते हैं. धतूरा का फल भगवान शिव को बेहद प्रिय माना जाता है. शिव भक्त सोमवार के दिन पूजा के बाद भगवान शिव को धतूरे का फल और फूल अर्पित करते हैं. धतूरा एक विषैला पौधा है, लेकिन इसका ऐतिहासिक और पारंपरिक उपयोग विभिन्न संस्कृतियों में औषधीय और धार्मिक उद्देश्यों के लिए होता आया है. मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने पिया था और धतूरा उस विष को नियंत्रित करने में सहायक माना गया, इसलिए शिव पूजा में इसका विशेष महत्व है. अगर आप बवासीर की समस्या से परेशान हैं, तो गांव में मिलने वाला यह फल राहत दिला सकता है. हालांकि, धतूरे के पत्ते और फल का सही तरीके से उपयोग करना बेहद जरूरी है. बवासीर में धतूरे के फल और पत्तियों को जलाकर निकलने वाले धुएं से मस्सों की सिकाई करने पर दर्द में राहत मिल सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google कई बार बाइक या अन्य कारणों से चोट लगने पर पैर में सूजन आ जाती है, जिससे दर्द और चलने में दिक्कत होने लगती है. ऐसे में लोग धतूरे के पत्तों को गर्म करके प्रभावित स्थान पर बांधते हैं, जिससे सूजन कम हो सकती है. वहीं, धतूरे के पत्तों को पीसकर लेप बनाकर सूजन वाली जगह पर लगाने से भी धीरे-धीरे राहत मिल सकती है. अगर आप कान के दर्द या सिरदर्द से परेशान रहते हैं, तो धतूरे का पत्ता फायदेमंद माना जाता है. कान दर्द में इसके उपयोग के लिए सरसों के तेल में गंधक के साथ थोड़ा सा धतूरे के पत्तों का रस मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं. इसके बाद हल्का गुनगुना होने पर इस तेल की दो-दो बूंद कान में डालने से दर्द में राहत मिल सकती है. आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार के अनुसार दांतों के दर्द में धतूरे के बीज उपयोगी माने जाते हैं. इसके लिए धतूरे के बीज निकालकर धूप में सुखा लें, फिर उन्हें पीसकर दाढ़ की खाली जगह में रखें. कुछ समय बाद दर्द में राहत मिल सकती है, इसके बाद कुल्ला कर लें. उन्होंने यह भी सलाह दी है कि अधिक जानकारी और सही उपयोग के लिए डॉक्टर से जरूर संपर्क करें. First Published : April 07, 2026, 13:38 IST
घर पर ऐसे बनाएं पुदीना की चटनी, सेहत के साथ-साथ स्वाद में भी लाजवाब! – News18 हिंदी

X घर पर ऐसे बनाएं पुदीना की चटनी, सेहत के साथ-साथ स्वाद में भी लाजवाब! पुदीना चटनी रेसिपी (Pudina Chutney Recipe): विंध्य क्षेत्र के पारंपरिक व्यंजनों में पुदीने की चटनी का अपना एक अलग स्थान है. यह चटनी खासतौर पर गर्मी के मौसम में खाई जाती है, क्योंकि यह शरीर को ठंडक और भरपूर ऊर्जा देती है. सादा खाना भी इस चटनी के साथ और ज्यादा खास बन जाता है. आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को बताया कि पुदीने की चटनी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी देती है. गर्मी के दिनों में यह शरीर को ठंडक पहुंचाने का काम करती है. इसलिए लोग इसे अपने रोजमर्रा के भोजन में शामिल करते हैं. उन्होंने बताया कि चटनी को मिक्सर में आसानी से बनाया जा सकता है, लेकिन अगर इसे पारंपरिक तरीके से सिलबट्टे पर पीसा जाए तो इसका स्वाद और भी ज्यादा बढ़ जाता है. पुदीना पाचन तंत्र को मजबूत करता है और गैस, अपच, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. इसके अलावा यह मुंह की बदबू दूर करने, तनाव कम करने और त्वचा संबंधी दिक्कतों को कम करने में भी सहायक है.
फलों को काटकर खाना या फिर उसका जूस पीना, जानिए सेहत के लिए क्या है ज्यादा फायदेमंद – News18 हिंदी

X फलों को काटकर खाना या फिर उसका जूस पीना, जानिए सेहत के लिए क्या है फायदेमंद Health Tips: अभी गर्मी का मौसम चल रहा है और सीजनल तरबूज, खरबूजा, संतरा, मौसंबी, अंगूर, संतरा, ककड़ी, खीरा और केला जैसे फल खूब मिल रहे हैं. डॉक्टरों का मानना है कि ये फल शरीर को ठंडक देने के साथ ही जरूरी पोषक तत्व भी देते हैं. लेकिन, कुछ लोग इन फलों को काटकर खाना पसंद करते हैं, जबकि कई लोग इनका जूस बनाकर पीते हैं. अब ऐसे में कई बार लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि फल का जूस बनाकर पीना ज्यादा फायदेमंद है या सीधे चबाकर खाना बेहतर होता है. स्वास्थ्य पर इसका क्या असर पड़ता है? खरगोन के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. संतोष मौर्य ने बताया कि फल किसी भी रूप में खाए जाएं, शरीर को फायदा जरूर मिलता है. लेकिन, अगर सही तरीके की बात करें तो फलों को चबाकर खाना ज्यादा अच्छा होता जाता है. उनका मानना है कि विशेष रूप से गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी होता है. मौसमी फल इस काम में सबसे ज्यादा मदद करते हैं. ये न सिर्फ पानी की कमी को पूरा करते हैं, बल्कि शरीर को ठंडा भी रखते हैं और लू से बचाव करते हैं.
सेहत के लिए खजाना है मां दुर्गा का प्रिय गुड़हल का फूल, एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन से भरपूर, इन बीमारियों के लिए फायदेमंद

Last Updated:April 07, 2026, 09:37 IST आयुर्वेद विशेषज्ञ वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा के अनुसार, गुड़हल में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. यही वजह है कि पुराने समय से ही इसका उपयोग घरेलू उपचार के रूप में किया जाता रहा है. गुड़हल का सेवन हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है. इसका काढ़ा या चाय बनाकर पीने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और दिल स्वस्थ रहता है. गुड़हल में मौजूद विटामिन C शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है. इससे सर्दी-खांसी जैसी सामान्य बीमारियों से बचाव होता है. ख़बरें फटाफट गोंडा: गांव-देहात से लेकर शहरों तक घरों में आसानी से मिलने वाला गुड़हल का फूल सिर्फ पूजा-पाठ में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है खास तौर पर मां दुर्गा को यह फूल बहुत प्रिय है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व भी काफी ज्यादा है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह खूबसूरत लाल फूल कई बीमारियों में प्राकृतिक दवा की तरह काम करता है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान आयुर्वेद विशेषज्ञ वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा के अनुसार, गुड़हल में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन C और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. यही वजह है कि पुराने समय से ही इसका उपयोग घरेलू उपचार के रूप में किया जाता रहा है. ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में मददगार गुड़हल का सेवन हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है. इसका काढ़ा या चाय बनाकर पीने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और दिल स्वस्थ रहता है. गुड़हल में मौजूद विटामिन C शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है. इससे सर्दी-खांसी जैसी सामान्य बीमारियों से बचाव होता है.गुड़हल का फूल त्वचा और बालों के लिए भी बहुत लाभकारी होता है. इसका पेस्ट या तेल बालों में लगाने से बाल मजबूत और घने होते हैं. वहीं, चेहरे पर लगाने से त्वचा में निखार आता है और दाग-धब्बे कम होते हैं. वजन कम करने में सहायक जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए भी गुड़हल फायदेमंद है. इसकी चाय पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम करने में मदद मिलती है. गुड़हल का सेवन पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, कब्ज और अपच को दूर करने में मदद करता है यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. वायरल इन्फेक्शन के दौरान अक्सर बुखार, कमजोरी और शरीर में दर्द होता है. गुड़हल की चाय पीने से शरीर को ठंडक मिलती है और थकान कम होती है. यह शरीर को अंदर से शांत और ऊर्जा देने का काम करता है. गुड़हल में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) गुण होते हैं, जो गले की खराश और खांसी में राहत देते हैं. इसका काढ़ा या चाय पीने से गले को आराम मिलता है. जान लें उपयोग का तरीका डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि गुड़हल का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है. इसके फूलों को सुखाकर चाय बनाई जा सकती है. इसके अलावा पत्तियों और फूलों का पेस्ट बनाकर बालों और त्वचा पर लगाया जा सकता है. कुछ लोग इसका काढ़ा बनाकर भी पीते हैं. हालांकि गुड़हल के कई फायदे हैं, लेकिन इसका ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए. खासकर गर्भवती महिलाएं या कोई गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति डॉक्टर की सलाह लेकर ही इसका उपयोग करें. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें Location : Gonda,Uttar Pradesh First Published : April 07, 2026, 09:37 IST









