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ज्यादा चीनी नहीं, ट्रंकल ओबेसिटी है डायबिटीज की सबसे बड़ी वजह, ये होती क्या है जानिए

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Last Updated:April 06, 2026, 21:07 IST Sugar Causes : देश शुगर मरीजों का गढ़ बन चुका है. तेजी से बढ़ रही इस बीमारी का एक नया कारण सामने आया है. डॉक्टर इसे ट्रंकल ओबेसिटी बता रहे हैं. ट्रंकल ओबेसिटी में पेट के आसपास चर्बी जाम होने लगती है. हर साल 10 से 15% डायबिटीज के मरीज बढ़ रहे हैं. इसकी एक वजह ये भी है. कानपुर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसके गौतम लोकल 18 से बताते हैं कि पिछले दो-तीन सालों में लोगों के शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ रहा है, जो धीरे-धीरे डायबिटीज की ओर धकेल रहा है. कानपुर. देश में तेजी से बढ़ रही डायबिटीज की बीमारी के पीछे अब एक बड़ा कारण सामने आ रहा है, जिसे डॉक्टर ट्रंकल ओबेसिटी यानी पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी बता रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार हर साल 10 से 15% तक डायबिटीज के मरीज बढ़ रहे हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह बदलती जीवनशैली और बढ़ता मोटापा है. कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसके गौतम लोकल 18 से बताते हैं कि पिछले दो-तीन सालों में लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है. देर रात तक जागना, समय पर भोजन न करना और शारीरिक गतिविधियों में कमी ने शरीर पर सीधा असर डाला है. इससे शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ रहा है, जो धीरे-धीरे लोगों को डायबिटीज की ओर धकेल रहा है. ट्रंकल ओबेसिटी में होता क्या है डॉ. गौतम के मुताबिक ट्रंकल ओबेसिटी एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर का फैट खासतौर पर पेट के आसपास जमा होने लगता है और पेट बाहर की ओर निकल आता है. यह सामान्य मोटापे से ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि यह शरीर के अंदरूनी अंगों को प्रभावित करता है और हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है. यही वजह है कि ऐसे लोगों में डायबिटीज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. डॉ. गौतम कहते हैं कि डायबिटीज को लाइफस्टाइल डिजीज कहा जाता है, क्योंकि यह सीधे हमारी आदतों से जुड़ी हुई है. अगर समय रहते खानपान और दिनचर्या में सुधार कर लिया जाए तो इस बीमारी से बचाव संभव है. करें तो करें क्या डॉ. गौतम बताते हैं कि हाल के वर्षों में हुए शोध भी बताते हैं कि प्री-डायबिटिक मरीज सही खानपान और नियमित व्यायाम के जरिए पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं. रोजाना कम से कम आधा घंटा टहलना, संतुलित आहार लेना, मीठा और तला-भुना कम करना और पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है. कमर और वजन पर नजर रखना भी जरूरी है, क्योंकि पेट की बढ़ती चर्बी कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती है. ट्रंकल ओबेसिटी को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है. समय रहते सतर्क होकर और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh First Published : April 06, 2026, 21:07 IST

Tej Patta Health Benefits | natural ayurvedic remedies for health | तेज पत्ता के फायदे | home remedies for cough cold hindi |

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Last Updated:April 06, 2026, 19:19 IST Tej Patta Health Benefits: पहाड़ों के खान-पान का अहम हिस्सा रहने वाला तेज पत्ता सिर्फ मसालों की खुशबू तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आयुर्वेद का एक शक्तिशाली खजाना है. डॉ. ऐजल पटेल के अनुसार, रोजाना तेज पत्ते का इस्तेमाल पाचन सुधारने से लेकर डायबिटीज कंट्रोल करने और दिल को सेहतमंद रखने में जादू की तरह काम करता है. एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर यह पत्ता न केवल सर्दी-खांसी जैसे मौसमी संक्रमणों से लड़ता है, बल्कि मानसिक तनाव दूर कर बेहतर नींद लाने में भी मददगार है. तेज पत्ता पाचन शक्ति को बढ़ाने में बेहद सहायक होता है. इसमें ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो पेट में गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं को कम करते हैं. नियमित रूप से इसका सेवन करने से खाना आसानी से पचता है, पेट हल्का महसूस होता है. पहाड़ी क्षेत्रों में लोग इसे खाने में शामिल कर पाचन संबंधी दिक्कतों से बचते हैं. डॉ. ऐजल पटेल ने लोकल 18 को बताया कि पाचन अग्नि को तेज करता है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है, कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है. तेज पत्ता डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद तत्व ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करते हैं. रोजाना सीमित मात्रा में तेज पत्ते का सेवन इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बना सकता है. कई लोग तेजपत्ते का पाउडर या काढ़ा बनाकर इसका सेवन करते हैं. हालांकि, इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह के साथ करना अधिक सुरक्षित रहता है. संतुलित आहार और नियमित जीवनशैली के साथ तेज पत्ता डायबिटीज नियंत्रण में सहायक हो सकता है. तेज पत्ते में एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो सर्दी-खांसी और गले की खराश में राहत देने में मदद करते हैं. इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर पीने से गले को आराम मिलता है, बलगम कम होता है. पहाड़ों में ठंड के मौसम में लोग इसका उपयोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. यह शरीर को अंदर से गर्म रखने में भी मदद करता है. नियमित सेवन से मौसमी बीमारियों से बचाव होता है, इम्यूनिटी मजबूत बनती है. Add News18 as Preferred Source on Google तेज पत्ते में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं. जोड़ों के दर्द या गठिया जैसी समस्याओं में इसका सेवन फायदेमंद हो सकता है. इसके तेल या लेप का उपयोग भी दर्द वाले स्थान पर किया जाता है. यह मांसपेशियों को आराम देने और सूजन कम करने में सहायक होता है. आयुर्वेद में इसे दर्द निवारक गुणों वाला माना गया है, जो शरीर को अंदर से राहत प्रदान करता है. तेज पत्ता दिल को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं. नियमित सेवन से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है. इसलिए इसे संतुलित मात्रा में आहार में शामिल करना दिल के लिए फायदेमंद माना जाता है. तेज पत्ते की चाय मानसिक तनाव को कम करने में मददगार होती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व दिमाग को शांत करते हैं और चिंता को कम करने में सहायक होते हैं. दिनभर की थकान के बाद इसका सेवन करने से शरीर और मन दोनों को आराम मिलता है. यह नींद को बेहतर बनाने में भी मदद करता है. पहाड़ी इलाकों में लोग इसे हर्बल चाय के रूप में पीते हैं, जिससे मानसिक शांति और सुकून मिलता है. तेज पत्ते में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं, जो त्वचा से जुड़ी समस्याओं में फायदेमंद होते हैं. इसके पत्तों का पेस्ट बनाकर लगाने से फोड़े-फुंसी और संक्रमण में राहत मिलती है. यह त्वचा को साफ रखने और बैक्टीरिया से बचाने में मदद करता है. नियमित उपयोग से त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनती है. प्राकृतिक उपचार के रूप में यह सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है. तेज पत्ता शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह शरीर में ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने और वजन को संतुलित करने में मदद करता है.‌ आयुर्वेद में इसे अग्नि बढ़ाने वाला माना गया है, जो शरीर के अंदर भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया को तेज करता है. नियमित सेवन से शरीर सक्रिय रहता है, थकान कम महसूस होती है. स्वस्थ जीवनशैली के लिए इसे सीमित मात्रा में शामिल करना फायदेमंद है. First Published : April 06, 2026, 19:19 IST

सेहत का खजाना है ‘शतावरी’! इम्यूनिटी बढ़ाने से लेकर तनाव दूर करने तक, आयुर्वेद के इस नुस्खे के कायल हुए डॉक्टर

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Last Updated:April 06, 2026, 18:43 IST Shatavari Benefits in Hindi: बागपत के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर राघवेंद्र चौधरी के अनुसार, शतावरी एक ऐसी चमत्कारी और किफायती औषधि है जो इम्यूनिटी बढ़ाने, पाचन शक्ति सुधारने और मानसिक तनाव दूर करने में बेहद कारगर है. यह औषधि महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, विशेषकर स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए यह अत्यंत लाभकारी है. शारीरिक कमजोरी दूर करने और निरोगी जीवन जीने के लिए डॉक्टर इसे दूध के साथ लेने की सलाह देते हैं. बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिए इसका चिकित्सकीय परामर्श से सेवन करें. बागपत: भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खान-पान के बीच आयुर्वेद एक बार फिर संजीवनी बनकर उभर रहा है. बागपत के प्रसिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर राघवेंद्र चौधरी ने ‘शतावरी’ को स्वास्थ्य के लिए एक चमत्कारी औषधि बताया है. बाजार में बेहद किफ़ायती दाम पर मिलने वाली यह जड़ी-बूटी न केवल इम्यूनिटी को फौलादी बनाती है, बल्कि महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. मानसिक तनाव से लेकर शारीरिक कमजोरी तक, शतावरी हर मोर्चे पर शरीर को निरोगी बनाने की क्षमता रखती है. शतावरी: एक चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधिशतावरी एक ऐसी चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि है, जो आसानी से बाजार में उपलब्ध होती है. इस औषधि का इस्तेमाल करने से इम्यूनिटी मजबूत होती है, पाचन शक्ति मजबूत होती है और मानसिक तनाव से छुटकारा मिलता है. डॉक्टर बताते हैं कि यह औषधि महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इसका इस्तेमाल कर चिकित्सा के फायदे ले सकते हैं, हालांकि महिलाओं और पुरुषों को इसका इस्तेमाल करने से पहले चिकित्सक के परामर्श जरूर लेना चाहिए. इसका इस्तेमाल महिला-पुरुष जरूरी मात्रा में करके सेहत को बेहतर बना सकते हैं और एक लंबा और निरोगी जीवन जी सकते हैं. डॉक्टर की राय: शरीर पर होते हैं चौंकाने वाले फायदेआयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर राघवेंद्र चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि शतावरी एक चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि है, जो बाजार में सस्ते रेट पर उपलब्ध होती है. इसका इस्तेमाल करने से शरीर पर चौंकाने वाले फायदे देखने को मिलते हैं. शतावरी का इस्तेमाल करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे शरीर में कोई भी बीमारी आने से रोकी जा सकती है. पाचन तंत्र और शारीरिक कमजोरी में रामबाणशतावरी का उपयोग करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है. शरीर में खाने पीने से ताकत मिलती है और शरीर की कमजोरी को दूर किया जाता है. अक्सर कमजोरी महसूस करने वाले लोगों के लिए यह औषधि अत्यंत प्रभावी है. इसके साथ ही, शतावरी का इस्तेमाल करने से मानसिक तनाव से छुटकारा मिलता है और मानसिक विकारों में यह लाभदायक साबित होती है. महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहींडॉक्टर के अनुसार, शतावरी का इस्तेमाल महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है. बच्चों को स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसका अत्यधिक सेवन करना चाहिए, जिससे उनके शरीर में किसी प्रकार की कमी नहीं रहती और बच्चों को भी स्तनपान से भरपूर पोषण और लाभ मिलता है. डॉक्टर ने बताया कि महिला, पुरुष और बुजुर्ग सभी इसका इस्तेमाल कर शारीरिक लाभ ले सकते हैं, बस शर्त यह है कि इसका इस्तेमाल चिकित्सक की देखरेख में ही करना चाहिए. कैसे करें सेवन? जानें सही तरीकाडॉक्टर ने बताया कि शतावरी का उपयोग आप चूर्ण के रूप में दूध के साथ सुबह और शाम कर सकते हैं. हालांकि इसका शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होता, लेकिन इस्तेमाल से पहले चिकित्सक की सलाह और जरूरी मात्रा का निर्धारण करना आवश्यक है. यह एक ऐसी औषधि है जो शरीर पर तेजी से काम करके स्वास्थ्य लाभ देने का काम करती है. About the Author Rahul Goel राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें Location : Baghpat,Uttar Pradesh First Published : April 06, 2026, 18:43 IST

कॉकरोच से गलत नहीं डरती लड़कियां…आज के बाद आप भी खाओगे खौफ, जानिए ये कितने खतरनाक

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Last Updated:April 06, 2026, 16:23 IST Cockroaches Caused Diseases : क्या आप भी कॉकरोच से डरने वालों का मजाक उड़ाते रहे हैं. अगर ऐसा है तो ये न करें. डॉक्टरों के हिसाब से भी कॉकरोच से डरना जरूरी है. लोकल 18 से आगरा के चिकित्सक डॉ. आशीष मित्तल कहते हैं कि कॉकरोच से टाइफाइड, हैजा (कॉलरा), पेचिश, डायरिया और पेट के गंभीर संक्रमण जैसी बीमारियां हो सकती हैं. इनके मलमूत्र से गंभीर एलर्जी और अस्थमा भी हो सकता है. डॉ. आशीष के मुताबिक, कॉकरोच अपने साथ कई तरह की गंदगी लाते हैं. आगरा. घरों में कॉकरोच दिखना आम बात है. अक्सर कॉकरोच गंदी जगहों से होकर कई बार किचन तक पहुंच जाते है. ये किचन में रखे बर्तन और खाने को दूषित कर सकते हैं, जिससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. आगरा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशीष मित्तल बताते हैं कि कॉकरोच से टाइफाइड, हैजा (कॉलरा), पेचिश, डायरिया और पेट के गंभीर संक्रमण जैसी बीमारियां हो सकती हैं. कॉकरोच साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया फैलाते हैंजो दूषित भोजन के माध्यम से पेट में संक्रमण, तेज बुखार, उल्टी और पेट दर्द का कारण बन सकते हैं. डॉ. आशीष बताते हैं कि इनके मलमूत्र से गंभीर एलर्जी और अस्थमा भी हो सकता है. इससे बचने के लिए खाने को ढक कर रखें. बर्तन को इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छे से जरूर धुलें. कितना जोखिम डॉ. आशीष के मुताबिक, कॉकरोच अपने साथ कई तरह की गंदगी लाते हैं. खाने के बर्तन को गंदा कर सकते हैं. खुले में रखा खाना भी कॉकरोच के संपर्क में आने से दूषित हो सकता है. ऐसे खाने से टाइफाइड होने का डर रहता है. यदि बुखार, पेट दर्द तीन दिनों से ज्यादा समय तक रहे तो अपने नजदीकी चिकित्सक से परामर्श करना बेहद जरूरी है. कई बार मरीज लापरवाही कर देते हैं जो कई बार जोखिम भरा भी हो सकता है. और क्या करें डॉ. आशीष बताते हैं कि खाना खाने से पहले इस्तेमाल करने वाले बर्तन को अच्छे से जरूर धोएं. हाथों को भी धोकर ही खाना खाना चाहिए. पका हुआ या कच्चा खाना, फल आदि को हमेशा किसी बर्तन से ढक कर रखें. घरों ने यदि कॉकरोच हैं तो उनके रास्तों को ब्लॉक कर दें.  किचन में दरार, गड्डों आदि जगहों को बंद कर दें ताकि कॉकरोच या दूसरे कोई कीट वहां छुपे न. बाहर मिलने वाले सोल्यूशन का भी इस्तेमाल कर उन्हें भगाया जा सकता है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Agra,Uttar Pradesh First Published : April 06, 2026, 16:23 IST

गर्मी में भूख न लगने की समस्या से हैं परेशान? तो आजमाएं यह घरेलू नुस्खे, जमकर खाने लगेंगे खाना – News18 हिंदी

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X गर्मी में भूख न लगने की समस्या से हैं परेशान? तो आजमाएं यह घरेलू नुस्खे   Health Tips: मौसम में अचानक बदलाव का असर दिनचर्या और सेहत पर साफ दिख रहा है. गर्मी बढ़ते ही भूख कम हो रही है और पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ रही हैं. सर्दियों में जहां लोग भरपेट भोजन करते हैं, वहीं गर्मियों में खाने की इच्छा घट जाती है. ऐसे में नींबू शरबत का सेवन शरीर को ठंडक देने, पाचन सुधारने और भूख बढ़ाने में कारगर माना जा रहा है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि यह नुस्खा पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ है और दादी-नानी के समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. अगर इस उपाय को रोजाना अपनाया जाए, तो न सिर्फ पाचन बेहतर होता है बल्कि भूख भी खुलकर लगती है. इसके लिए केवल नींबू, काली मिर्च और नमक की जरूरत होती है. यह नुस्खा बेहद सरल है. एक नींबू को बीच से काट लें और उसमें काली मिर्च पाउडर और थोड़ा सा नमक डाल दें. इसके बाद इसे हल्की आंच पर थोड़ा गर्म करें ताकि इसका रस हल्का गुनगुना हो जाए. फिर इसे धीरे-धीरे चूसकर सेवन करें. यह उपाय गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं को दूर करने में काफी असरदार है.

सिर्फ सब्जी नहीं… सेहत का भी स्वाद बढाता है ये जीरा, इम्यूनिटी करेगा बूस्ट और खून की कमी को करेगा दूर

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X रोजाना खाएं सफेद जीरा, इम्यूनिटी बढ़ाए और खून की कमी करे दूर   Benefits of White Cumin: सफेद जीरा रसोई में इस्तेमाल होने वाला सामान्य मसाला है. लेकिन इसके कई औषधीय फायदे भी है. आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र चौधरी के अनुसार सफेद जीरा पाचन शक्ति को मजबूत करता है और पेट की गर्मी कम करने में मदद करता है. इसके नियमित सेवन से वजन नियंत्रित रहता है और शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ती है. इसमें आयरन और विटामिन भरपूर मात्रा में होते है जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सहायक होते है और खून की कमी दूर करने में मदद करते है. यह शरीर से विषैले तत्व निकालने और त्वचा को साफ रखने में भी उपयोगी माना जाता है. सफेद जीरे का सेवन रात में पानी में भिगोकर सुबह पीने, सब्जी में मिलाकर या दही-छाछ में डालकर किया जा सकता है. नियमित और संतुलित उपयोग से यह संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी साबित हो सकता है.

भीषण गर्मी में लू की मार से बचाने में मदद करेगा ये शरबत, जानें इसे घर पर बनाने की आसान विधि – News18 हिंदी

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X भीषण गर्मी में लू की मार से बचाने में मदद करेगा ये शरबत, जानें बनाने की विधि   Palash Flower Benefits: गर्मी का मौसम शुरू होते ही गांवों-जंगलों में पलाश (टेसू) के फूल खिलने लगते हैं, जो आग की तरह लाल-नारंगी रंग के नजर आते हैं. ग्रामीण इलाकों में इसे टेसू के नाम से जाना जाता है. आयुर्वेद में पलाश के फूल, बीज, पत्ते और छाल का उपयोग कई बीमारियों के इलाज में किया जाता है. खास बात ये कि इन फूलों से बनने वाला शरबत गर्मियों में किसी वरदान से कम नहीं माना जाता. पलाश के फूलों का शरबत शरीर को ठंडक देने के साथ कई समस्याओं में राहत देता है. लू और गर्मी से बचाव पलाश का शरबत शरीर को अंदर से ठंडा रखता है. तेज धूप में निकलने पर होने वाली थकान, सिरदर्द और बेचैनी को कम करने में मदद करता है. इसे पीने से लू लगने का खतरा भी कम हो जाता है. यह शरबत पाचन तंत्र को मजबूत करता है. गैस, कब्ज, दस्त और पेट की जलन जैसी समस्याओं में राहत देता है. जिन लोगों को पेट में गर्मी की शिकायत रहती है, उनके लिए यह काफी फायदेमंद माना जाता है.

गठिया का दर्द हो या फोड़े-फुंसी…हरी पत्तियों वाला ये पौधा सेहत के लिए वरदान, जानिए उपयोग का तरीका

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Last Updated:April 05, 2026, 17:09 IST Sudarshan Benefits : सुदर्शन का पौधा अपने औषधीय गुणों के लिए जगत विख्यात है. इसके पत्ते, जड़, तना और दूसरे हिस्से सेहत के लिए रामबाण हैं. लोकल 18 से बाराबंकी के चिकित्सक अमित वर्मा बताते हैं कि सुदर्शन में पाए जाने वाले ग्लूकेन, कार्बनिक अम्ल, सैपोनिन, अमीनो अम्ल और एल्कलॉइड जैसे पोषक तत्व कई गंभीर बीमारियों से बचाते हैं. सुदर्शन का पौधा घाव भरने में भी सहायक है. चर्म रोगों में सुदर्शन की पत्तियों का रस फायदेमंद है. सुदर्शन का पौधा अपने औषधीय गुणों के लिए काफी प्रसिद्ध है. यह पौधा आसानी से मिल जाता है. इसके पत्ते, जड़, तना और दूसरे हिस्से सेहत के लिए रामबाण हैं. आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में सुदर्शन पौधे का पारंपरिक उपयोग रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, शरीर को स्वस्थ रखने और कई सामान्य परेशानियों से राहत पाने के लिए किया जाता रहा है. जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉ. अमित वर्मा (एमडी मेडिसिन) बताते हैं कि सुदर्शन में भरपूर मात्रा में ग्लूकेन, कार्बनिक अम्ल, सैपोनिन, अमीनो अम्ल और एल्कलॉइड जैसे पोषक तत्व मौजूद हैं, जो हमें कई गंभीर बीमारियों से बचाते हैं. सुदर्शन के पत्तों को गर्म करके उस पर जैतून का तेल लगाकर घुटनों में बांधने से गठिया का दर्द दूर हो सकता है. दर्द को कम करने के लिए आप इसके पत्तों को हल्का गर्म करके प्रभावित हिस्से के आसपास रखकर सिकाई कर सकते हैं. ऐसा करने से सूजन भी कम हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google डॉ. अमित वर्मा बताते हैं कि अधिक बुखार होने पर सुदर्शन के पत्तों का पाउडर 2 से 3 ग्राम शहद और गर्म पानी में मिलाकर सेवन करें. इससे बुखार में तुरंत राहत मिलती है. सुदर्शन का पौधा त्वचा के लिए भी बहुत लाभदायक है. इसके पत्तों के रस का प्रयोग किया जाता है. गर्मी के मौसम में त्वचा पर फोड़े, फुंसी, दाद, खाज, खुजली आदि परेशानियां होने लगती हैं, इन सभी परेशानियों को दूर करने में सुदर्शन का पौधा बहुत लाभदायक है. सुदर्शन का पौधा घाव भरने में भी सहायक है. चर्म रोगों में सुदर्शन की पत्तियों का रस फायदेमंद है. जिन लोगों को पाइल्स की वजह से खून आ रहा है या अधिक दर्द हो रहा है, ऐसे में सुदर्शन के ताजे पत्तों को पीसकर अर्श या बवासीर के मस्सों में लेप करने से लाभ होता है. जोड़ों पर लेप करने से होने वाले दर्द से राहत मिलती है. पेट के कीड़े खराब खानपान और जीवन शैली के चलते एक आम समस्या हो गई है. खासकर बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है. इस समस्या में सुदर्शन के पौधे के पत्तों का रस फायदा दे सकता है. सुदर्शन के पत्तों का रस पेट के कीड़े को खत्म करता है. First Published : April 05, 2026, 17:09 IST

क्या आपके शरीर का एक हिस्सा हो रहा सुन्न? बोलने में हो रही है दिक्कत… तो तुरंत हो जाएं सतर्क, यह ब्रेन स्ट्रोक का संकेत हो सकता है जानलेवा

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Last Updated:April 05, 2026, 16:17 IST ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में न्यूरोसर्जरी प्रमुख डॉ. सुमित गोयल ने ब्रेन स्ट्रोक को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है. उन्होंने बताया कि शरीर के एक हिस्से में सुन्नपन, बोलने में दिक्कत और अचानक चक्कर आना स्ट्रोक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में दिमाग की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता और कुछ ही मिनटों में स्थायी क्षति शुरू हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर लोग इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण इलाज में देरी होती है और स्थिति गंभीर हो जाती है. ग्रेटर नोएडा: क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर में होने वाली एक मामूली सी सुन्नपन या बोलने में हल्की सी लड़खड़ाहट किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकती है? जिसे हम अक्सर थकान समझकर टाल देते हैं, वह असल में ‘ब्रेन स्ट्रोक’ जैसा जानलेवा हमला हो सकता है. चिकित्सा विज्ञान में इसे ऐसी इमरजेंसी माना जाता है जहाँ एक-एक सेकंड की कीमत मरीज की जिंदगी होती है. यथार्थ अस्पताल के न्यूरोसर्जरी प्रमुख डॉ. सुमित गोयल ने इस गंभीर बीमारी के प्रति आगाह करते हुए बताया है कि कैसे हमारी छोटी सी जागरूकता और समय पर लिया गया फैसला स्थायी विकलांगता और मौत के मुंह से किसी को बाहर निकाल सकता है. यथार्थ अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. सुमित गोयल ने बताया कि स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग तक खून का प्रवाह अचानक रुक जाता है या किसी रक्त वाहिका के फटने से दिमाग के हिस्से को नुकसान पहुंचता है. ऐसी स्थिति में दिमाग की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता और कुछ ही मिनटों में स्थायी क्षति शुरू हो सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर लोग इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके कारण इलाज में देरी होती है और स्थिति गंभीर हो जाती है. ये हैं ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती संकेत1. शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन2. बोलने में दिक्कत या शब्दों का स्पष्ट उच्चारण न कर पाना3. अचानक चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना4. आंखों से धुंधला दिखना समय पर इलाज क्यों जरूरी?उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के मामलों में गोल्डन पीरियड बेहद अहम होता है. यदि मरीज को शुरुआती कुछ घंटों में इलाज मिल जाए, तो दिमाग को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. वहीं, देरी होने पर न केवल जान का खतरा बढ़ जाता है, बल्कि मरीज को स्थायी विकलांगता का सामना भी करना पड़ सकता है. डॉ. सुमित गोयल ने बताया कि स्ट्रोक पूरी तरह समय पर निर्भर बीमारी है. मरीज जितनी जल्दी चिकित्सा सुविधा तक पहुंचता है, उसके ठीक होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है. शुरुआती लक्षणों को पहचानना और तुरंत इलाज शुरू करना बेहद जरूरी है, क्योंकि देरी होने पर दिमाग को होने वाला नुकसान स्थायी हो सकता है. उन्होंने कहा कि कई बार लोग हल्के लक्षणों को थकान या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में गंभीर रूप ले लेते हैं. इसलिए किसी भी संदिग्ध लक्षण को हल्के में नहीं लेना चाहिए. युवाओं में भी बढ़ रहा खतराडॉ गोयल ने बताया कि पहले स्ट्रोक को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब यह तेजी से युवाओं में भी देखने को मिल रहा है. इसके पीछे मुख्य कारण बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, धूम्रपान और अनियमित खानपान हैं. उन्होंने कहा कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं भी स्ट्रोक के खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं. यही वजह है कि कम उम्र के लोगों को भी नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए. कैसे करें बचाव?उन्होंने बताया कि स्ट्रोक से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है. इसके लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें, संतुलित और पौष्टिक आहार लें, धूम्रपान और अत्यधिक शराब से दूरी बनाएं,ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें. About the Author Rahul Goel राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें Location : Greater Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh First Published : April 05, 2026, 16:17 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

sugar health risks | sugar health problems | अत्यधिक चीनी के नुकसान | शुगर से होने वाली बीमारियां |

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Last Updated:April 05, 2026, 15:26 IST Sugar Health Risks: अगर आप भी हर छोटी खुशी में मीठा ढूंढते हैं या फिर चाय, कॉफी और मिठाइयों में अत्यधिक चीनी के शौकीन हैं, तो ठहर जाइए! यह स्वाद आपकी सेहत के लिए ‘मीठा जहर’ साबित हो सकता है. चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी का अत्यधिक सेवन न केवल मोटापे को दावत देता है, बल्कि यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे लिवर, हृदय और मस्तिष्क को भी अंदरूनी रूप से खोखला कर देता है. आइए विस्तार से समझते हैं कि क्यों आज से ही आपको अपनी डाइट में चीनी की मात्रा को नियंत्रित करने की जरूरत है. चीनी के अधिक सेवन का सबसे पहला और सीधा असर हमारे रक्त शर्करा (Blood Sugar) के स्तर पर पड़ता है. शोध बताते हैं कि ज्यादा चीनी का सेवन शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता है. जब कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं, तो रक्त में शर्करा का स्तर अनियंत्रित हो जाता है. यही स्थिति आगे चलकर टाइप-2 मधुमेह का कारण बनती है. मधुमेह रोगियों के लिए तो चीनी का सेवन जानलेवा तक हो सकता है. चीनी में कैलोरी की मात्रा बहुत अधिक होती है, लेकिन इसमें फाइबर, विटामिन या मिनरल्स जैसे आवश्यक पोषक तत्व बिल्कुल नहीं होते. इसे ‘एम्प्टी कैलोरी’ कहा जाता है. जब हम अधिक चीनी खाते हैं, तो यह शरीर में अतिरिक्त फैट के रूप में जमा होने लगती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है और व्यक्ति मोटापे का शिकार हो जाता है. क्या आपको लगता है कि सिर्फ नमक से ब्लड प्रेशर बढ़ता है? ऐसा नहीं है. अधिक चीनी का सेवन शरीर में सूजन और ट्राईग्लिसराइड्स (खून में मौजूद वसा) के स्तर को बढ़ा देता है. यह स्थिति हाई ब्लड प्रेशर को जन्म देती है, जो सीधे तौर पर दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ाती है. ब्लड प्रेशर के मरीजों को हमेशा चिकित्सक की सलाह पर ही चीनी का सेवन करना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google चीनी का एक बड़ा हिस्सा लिवर द्वारा संसाधित किया जाता है. जब हम बहुत अधिक चीनी खाते हैं, तो हमारा लिवर इसे फैट में बदलने लगता है. समय के साथ यह फैट लिवर में जमा होने लगता है, जिससे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है. लिवर के मरीजों को इस मामले में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है. बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि चॉकलेट खाने से दांत खराब होते हैं. इसके पीछे का विज्ञान यह है कि चीनी दांतों के हानिकारक बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करती है. इससे बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जो दांतों के इनेमल को नष्ट कर कैविटी और टूथ डिके (सड़न) का कारण बनते हैं. चीनी केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी घातक है. चिकित्सक बताते हैं कि चीनी के अत्यधिक सेवन से मस्तिष्क के रसायनों में असंतुलन पैदा हो सकता है. यह डिप्रेशन (अवसाद), चिंता और एकाग्रता में कमी का एक बड़ा कारण बन सकता है. मानसिक शांति और बेहतर फोकस के लिए चीनी का सीमित सेवन अनिवार्य है. First Published : April 05, 2026, 15:26 IST