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Amla Benefits: डिटॉक्स से लेकर हार्ट हेल्थ तक, आंवला के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान, ऐसे करें सेवन

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Last Updated:April 03, 2026, 15:33 IST गर्मी का मौसम आते ही शरीर में कई तरह की समस्याएं बढ़ने लगती हैं. ऐसे में आंवला एक ऐसा प्राकृतिक सुपरफूड है, जो शरीर को ठंडक देने, इम्यूनिटी बढ़ाने और बीमारियों से बचाने में मदद करता है. इसे अपनी डाइट में शामिल करना गर्मियों में सेहतमंद रहने का आसान तरीका हो सकता है. गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. तेज धूप, लू, शरीर में पानी की कमी, कमजोरी और पाचन से जुड़ी दिक्कतें आम हो जाती हैं. ऐसे में रोजाना की डाइट में आंवला शामिल करना किसी वरदान से कम नहीं है. आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि आंवला गर्मियों में शरीर को ठंडक देने और बीमारियों से बचाने का प्राकृतिक उपाय है. शरीर को देता है ठंडक: जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, आंवला की तासीर ठंडी होती है, जिससे गर्मियों में इसका सेवन शरीर का तापमान संतुलित रखता है और लू लगने का खतरा कम करता है. गांवों में आज भी लोग आंवला का मुरब्बा या शरबत पीना पसंद करते हैं, क्योंकि यह शरीर को तुरंत ठंडक पहुंचाकर तरोताजा बनाए रखता है. इम्यूनिटी बढ़ाने में लाभकारी: आंवला इम्यूनिटी बढ़ाने में बेहद फायदेमंद है. इसमें मौजूद विटामिन C शरीर को वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने की ताकत देता है. जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से आंवला का सेवन करते हैं, वे सर्दी-खांसी जैसे सामान्य संक्रमण से काफी हद तक बचे रहते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google पेट के लिए फायदेमंद: पाचन तंत्र के लिए आंवला बहुत लाभकारी माना जाता है. अनियमित खानपान और गर्मी के कारण होने वाली गैस, कब्ज और अपच की समस्या में यह राहत देता है. आंवला पेट को साफ रखने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है. कई लोग सुबह आंवला जूस का सेवन करते हैं, जिससे उन्हें पूरे दिन हल्कापन महसूस होता है. त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद: आंवला त्वचा और बालों के लिए बेहद लाभकारी है. इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं, जिससे वह साफ और चमकदार बनती है. यह बालों को झड़ने से रोककर उन्हें मजबूत बनाता है. यही कारण है कि कई हेयर ऑयल और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में आंवला का इस्तेमाल किया जाता है. आंवला शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करता है. यह शरीर में जमा गंदगी और विषैले तत्वों को बाहर निकालकर अंदर से साफ रखता है. इसके नियमित सेवन से लीवर स्वस्थ रहता है और खून साफ होता है, जिससे कई बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. दिल के लिए फायदेमंद: आंवला दिल की सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. यह शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है. आज के समय में बढ़ती हार्ट समस्याओं के बीच आंवला एक आसान और प्राकृतिक उपाय साबित हो सकता है. सावधानियां: जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, आंवला जितना फायदेमंद है, उतना ही जरूरी है इसका सही तरीके से सेवन करना. किसी भी चीज की अधिक मात्रा नुकसानदायक हो सकती है, इसलिए आंवला का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. रोजाना 1-2 आंवला या एक गिलास आंवला जूस पर्याप्त माना जाता है. यदि आप किसी बीमारी से ग्रस्त हैं या कोई दवा ले रहे हैं, तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. First Published : April 03, 2026, 15:33 IST

इम्यूनिटी, हृदय और हड्डियों के लिए फायदेमंद… बच्चों और बड़ों के लिए हेल्दी पौधा, जानिए मोरिंगा के फायदे

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Last Updated:April 03, 2026, 13:32 IST आज के समय में स्वास्थ्य को लेकर जागरूक लोग प्राकृतिक चीजों की ओर बढ़ रहे हैं. मोरिंगा (सहजन) ऐसा सुपरफूड है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने, ब्लड शुगर नियंत्रित करने और हड्डियों, त्वचा व बालों की सेहत सुधारने में मदद करता है. यह पौधा गांव और शहर दोनों जगह आसानी से पाया जाता है और रोजाना आहार में शामिल किया जा सकता है. आज के समय में लोग सेहत को लेकर काफी जागरूक हो रहे हैं और प्राकृतिक चीजों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में मोरिंगा (सहजन) एक ऐसा पौधा है जिसे “सुपरफूड” कहा जाता है. गांव से लेकर शहर तक आसानी से मिलने वाला सहजन न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि यह शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद भी है. इसकी फली (ड्रमस्टिक), पत्तियां और बीज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक: वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार, मोरिंगा (सहजन) का रोजाना सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को बीमारियों से लड़ने की ताकत देते हैं. खासकर मौसम बदलने पर सर्दी-खांसी और वायरल संक्रमण से बचाव में यह काफी मददगार होता है. सहजन की फली या पत्तियों को खाने में शामिल करने से शरीर अंदर से मजबूत रहता है और इसे एक सस्ता व असरदार घरेलू उपाय भी माना जाता है. डायबिटीज में फायदेमंद: आज के समय में मधुमेह तेजी से बढ़ती समस्या बन गई है, ऐसे में मोरिंगा (सहजन) का सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है. सहजन के पत्तों में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. नियमित और सीमित मात्रा में सेवन करने से शुगर संतुलित रहता है और अचानक बढ़ने का खतरा कम होता है. कई डॉक्टर भी इसे खाने की सलाह देते हैं, लेकिन दवा के साथ लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. Add News18 as Preferred Source on Google दिल की सेहत के लिए लाभकारी: मोरिंगा (सहजन) दिल को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाते हैं, जिससे दिल पर दबाव कम पड़ता है. नियमित और संतुलित मात्रा में सहजन का सेवन हृदय रोग के खतरे को घटा सकता है. इसे अपने खानपान में शामिल करने से दिल मजबूत रहता है और स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलती है. हड्डियों को मजबूत बनाता है: मोरिंगा (सहजन) में कैल्शियम और फॉस्फोरस अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. इसका नियमित सेवन हड्डियों को मजबूत रखता है और कमजोरी दूर करता है. खासकर बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह फायदेमंद है. इसके अलावा, यह आर्थराइटिस यानी जोड़ों के दर्द में भी राहत देने में सहायक है. संतुलित मात्रा में आहार में शामिल करने से हड्डियों की सेहत बेहतर बनी रहती है और दर्द की समस्या कम हो सकती है. पाचन तंत्र को रखता है दुरुस्त: मोरिंगा (सहजन) पेट के लिए बहुत फायदेमंद है. इसका सेवन गैस, कब्ज और अपच जैसी समस्याओं में राहत देता है. सहजन में ऐसे गुण होते हैं जो पाचन क्रिया को मजबूत बनाते हैं और भोजन को आसानी से पचाने में मदद करते हैं. नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से पेट साफ रहता है, पाचन बेहतर होता है और शरीर हल्का महसूस करता है. दिमाग के लिए फायदेमंद: मोरिंगा (सहजन) दिमाग की सेहत के लिए काफी लाभकारी है. इसमें मौजूद पोषक तत्व दिमाग को सक्रिय और तेज बनाए रखने में मदद करते हैं. नियमित सेवन से याददाश्त बेहतर होती है और पढ़ाई या काम में ध्यान लगाने में आसानी होती है. यह मानसिक तनाव और थकान को कम करने में भी सहायक है. आहार में सहजन शामिल करने से दिमाग मजबूत रहता है और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है. त्वचा और बालों के लिए लाभकारी: मोरिंगा (सहजन) में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं. नियमित सेवन से त्वचा की चमक बढ़ती है और दाग-धब्बों में कमी आ सकती है. इसके अलावा, सहजन बालों को मजबूत बनाता है और झड़ने की समस्या कम करने में मदद करता है. रोजाना आहार में शामिल करने से त्वचा और बाल दोनों की सेहत बेहतर बनी रहती है. First Published : April 03, 2026, 13:32 IST

Betel leaves benefits : जोड़ों का दर्द हो या गले की खराश, चुटकियों में होगा छूमंतर, जानें पान पत्तों के जादुई फायदे

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Last Updated:April 02, 2026, 04:01 IST Paan Patte Ke Fayde : पान का पत्ता केवल स्वाद या परंपरा तक सीमित है, बल्कि इसके फायदे चौंकाने वाले हैं. अगर पान के पत्तों का सही सेवन किया जाए, तो कई बीमारियां दूर हो सकती हैं. इसका नियमित लेकिन सीमित सेवन पाचन शक्ति को बेहतर कर पेट को हल्का और आरामदायक बनाता है. लोकल 18 से बलिया की चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी कहती हैं कि पान के पत्तों का लेप घाव, फुंसी या सूजन वाली जगह पर लगाने से जल्दी आराम मिलता है. बात अगर पान के पत्तों की हो, तो यह पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी है. इसे चबाने से लार का स्राव बढ़ता है, जिससे खाना आसानी से पच जाता है. गैस, कब्ज और पेट दर्द जैसी समस्याओं में काफी राहत मिलती है. इसके नियमित लेकिन सीमित सेवन पाचन शक्ति को बेहतर कर पेट को हल्का व आरामदायक बनाता है. जब मौसम में बदलाव होता है, तो सर्दी-खांसी आम समस्या बन जाती है. ऐसे में तो पान का पत्ता एक घरेलू उपाय के रूप में बहुत काम आ सकता है. इसका काढ़ा या रस शहद के साथ लेने से गले की खराश, बलगम और सांस की तकलीफ में राहत मिलती है. इसके अलावा, यह शरीर को अंदर से भी स्वस्थ बनाता है. पान के पत्तों में एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो मुंह की सफाई में बहुत उपयोगी हैं. यह सांसों की बदबू को दूर करता है और मसूड़ों को मजबूती प्रदान करता है. इसके रोजाना उपयोग से मुंह के संक्रमण का खतरा कम होता है. इसी के चलते सदियों से इसे प्राकृतिक माउथ फ्रेशनर के रूप में प्रयोग किया जाता आ रहा है. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, इसके पत्तों का लेप घाव, फुंसी या सूजन वाली जगह पर लगाने से जल्दी आराम मिलता है. इसमें एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो संक्रमण को फैलने से रोकते हैं. पुराने जमाने में इसको देसी गाय के घी में गर्म कर घाव पर लगाने से बहुत फायदे मिलते थे. पान का पत्ता शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी साबित होता है. इससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रखने में सहायता मिल सकती है. यह वजन कम करने की प्रक्रिया को भी सपोर्ट करता है. हालांकि, इसे किसी इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि संतुलित जीवनशैली के साथ अपनाना बेहतर होता है. पान का पत्ता जोड़ों का दर्द, सिरदर्द या नसों के दर्द में राहत पहुंचाने में भी मददगार है. इसके अर्क या रस का उपयोग दर्द कम करने के लिए किया जाता है. इसके प्राकृतिक गुण सूजन को कम करने में सहायक हैं और शरीर को आराम देते हैं. यह पारंपरिक उपचार में लंबे समय से इस्तेमाल होता आ रहा है. यह दादी नानी के नुस्खे में महत्त्वपूर्ण माना गया है. पान का पत्ता शरीर को डिटॉक्स करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में भी सहायक है. यह शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करता है. लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. किसी भी बीमारी या विशेष स्थिति में सबसे पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, वरना हानिकारक भी सिद्ध हो सकता है. First Published : April 02, 2026, 04:01 IST

Papaya Health Benefits | Papaya Seeds for Kidney | पपीते के फायदे | पपीते के खाने के फायदे |

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Last Updated:April 01, 2026, 20:24 IST Papaya Health Benefits: आयुर्वेद में पपीते को केवल एक फल नहीं, बल्कि एक संपूर्ण औषधि माना गया है. अक्सर लोग पपीता खाकर उसके बीज फेंक देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पत्ते, बीज और यहां तक कि इसकी जड़ भी गंभीर बीमारियों को जड़ से खत्म करने की ताकत रखती है? जिला अस्पताल बाराबंकी के विशेषज्ञ डॉक्टर अमित वर्मा के अनुसार, डेंगू, मलेरिया और किडनी जैसी समस्याओं में पपीता किसी वरदान से कम नहीं है. आइए जानते हैं पपीते के उन औषधीय गुणों के बारे में जो आपके शरीर के लिए प्राकृतिक टॉनिक का काम करते हैं. Papaya Health Benefits: वैसे तो फलों का सेवन सेहत के लिए हमेशा फायदेमंद माना जाता है, और पपीता उनमें एक बेहद गुणकारी फल है. पपीते का फल ही नहीं, बल्कि इसके पत्ते, बीज और दूध भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. आयुर्वेद में पपीते को विशेष महत्व दिया गया है, क्योंकि इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को कई रोगों से बचाने में मदद करते हैं. प्राचीन समय से ही इसका उपयोग घरेलू और आयुर्वेदिक उपचारों में किया जाता रहा है. पपीता पाचन को बेहतर बनाने, शरीर को ऊर्जा देने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है. इसका नियमित सेवन शरीर के लिए प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करता है और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है. इन गंभीर बीमारियों में है कारगरआयुर्वेद के अनुसार पपीते का हर हिस्सा हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद है. यह हमें कब्ज, अपच, डेंगू, मलेरिया, पाचन संबंधी विकार, बुखार और किडनी जैसी कई बीमारियों में काफी राहत पहुंचाता है. इसके प्राकृतिक गुण शरीर की आंतरिक सफाई करने में मदद करते हैं. एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह: कैसे करें इस्तेमाल?जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा (MD मेडिसिन) ने बताया कि पपीता एक ऐसा फल है जो साल भर पाया जाता है. इसके फल, बीज, पत्ते और जड़ में बहुत सारे औषधीय गुण मौजूद होते हैं. डेंगू और टाइफाइड: जिन लोगों को डेंगू, मलेरिया, बुखार या टाइफाइड की वजह से प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं, वहां पर इसकी पत्तियों के रस का इस्तेमाल करने से काफी फायदा होता है. किडनी की समस्या: अगर किसी को किडनी में प्रॉब्लम है, तो वहां पर इसके बीजों को पीसकर चूर्ण बना लें. इसे जल के साथ लेने से काफी लाभ मिलता है. पाचन और मोटापा: इसके अलावा कब्ज, अपच, गैस व वजन बढ़ने की समस्या में पपीते के फल का इस्तेमाल करना चाहिए. इससे पाचन शक्ति मजबूत होती है और पेट की समस्याओं से छुटकारा मिलता है. सावधानी: किन लोगों को नहीं करना चाहिए सेवन?डॉक्टर वर्मा ने सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि कुछ विशेष स्थितियों में पपीते का सेवन हानिकारक हो सकता है. गर्भवती महिलाओं को पपीते से परहेज करना चाहिए. साथ ही, जिन महिलाओं को पीरियड्स अधिक आ रहे हैं, उन्हें भी इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. About the Author Rahul Goel राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें Location : Bara Banki,Uttar Pradesh First Published : April 01, 2026, 20:24 IST

कब्ज, अपच और गैस? गर्मियों में बेल बन सकता है आपका सुपरफूड, जानिए इसके फायदे और इस्तेमाल का तरीका

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Last Updated:April 01, 2026, 13:41 IST गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक देने और पाचन सुधारने के लिए बेल का शरबत एक बेहतरीन उपाय है. यह प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक है जो कब्ज, अपच, दस्त और लू जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है. नियमित सेवन से शरीर हाइड्रेटेड रहता है और इम्यूनिटी भी मजबूत होती है. गर्मी का मौसम आते ही लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिसमें सबसे आम समस्या पेट से जुड़ी होती है. तेज धूप, गलत खानपान, कम पानी पीना और बाहर का तला-भुना खाना खाने से कब्ज, गैस, अपच, पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे समय में अगर कोई आसान, सस्ता और देसी उपाय अपनाया जाए तो काफी राहत मिल सकती है, और इसमें सबसे असरदार फल है बेल. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि बेल का फल गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पेट को स्वस्थ रखने में भी बहुत मदद करता है. आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है और सदियों से इसका उपयोग पेट की बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है. बेल क्यों है खास? अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि बेल में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जैसे फाइबर, विटामिन C, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट. ये सभी मिलकर पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं. गर्मियों में अक्सर पेट खराब हो जाता है, लेकिन बेल का सेवन करने से पेट को आराम मिलता है. यह न सिर्फ पेट को साफ करता है, बल्कि पाचन प्रक्रिया को भी बेहतर बनाता है. Add News18 as Preferred Source on Google कब्ज में राहत: अगर किसी को कब्ज की समस्या रहती है, तो पका हुआ बेल का फल बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है. बेल का सेवन करने से मल नरम होता है और आसानी से बाहर निकलता है, जिससे पेट साफ रहता है और कब्ज की समस्या धीरे-धीरे कम हो जाती है. नियमित रूप से बेल खाना या उसका शरबत पीना आंतों को स्वस्थ बनाए रखता है और पाचन को मजबूत करता है. गैस और अपच से राहत: गलत खान-पान और अनियमित दिनचर्या के कारण गैस और अपच की समस्या आम हो जाती है. ऐसे में बेल का फल बहुत फायदेमंद साबित होता है. बेल में ऐसे गुण होते हैं जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और भोजन को अच्छे से पचाने में मदद करते हैं. इसके सेवन से पेट में गैस बनने की समस्या कम होती है, भारीपन दूर होता है और पेट हल्का महसूस होता है. नियमित रूप से बेल का शरबत या गूदा लेने से अपच की परेशानी धीरे-धीरे कम हो जाती है. दस्त और लू से बचाव: गर्मी के मौसम में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लू लगने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही, बाहर का दूषित पानी या खाना खाने से दस्त की समस्या भी हो सकती है. ऐसे में बेल का शरबत एक असरदार देसी उपाय है. यह शरीर को अंदर से ठंडक देता है और पानी की कमी को पूरा करता है. बेल में मौजूद पोषक तत्व आंतों को मजबूत बनाते हैं, जिससे दस्त में राहत मिलती है और शरीर जल्दी ठीक होने लगता है. नियमित रूप से बेल का शरबत पीने से लू से बचाव में भी मदद मिलती है. गर्मियों में बेल का शरबत क्यों है फायदेमंद: गर्मियों में रोजाना बेल का शरबत पीना शरीर के लिए बेहद लाभकारी होता है. यह एक प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक की तरह काम करता है और शरीर को अंदर से ठंडक देता है. इसके नियमित सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है. First Published : April 01, 2026, 13:41 IST

दातून करने से दांत को मिलता है चमत्कारिक फायदा, मसूड़ों की होती है मालिश, जाने सही तरीका

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चंदौलीः आज के इस दौर में जहां टूथब्रश और टूथपेस्ट ने हमारी दिनचर्या में स्थायी जगह बना ली है. वहीं, कभी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा रहा दातून अब धीरे-धीरे लोगों की आदतों से गायब होता जा रहा है. पहले जहां लोग नीम या बबूल के दातून से अपने दिन की शुरुआत करते थे. वहीं, अब यह परंपरा केवल गांवों या खास अवसरों तक सीमित रह गई है. हालांकि, दातून के महत्व को लेकर विशेषज्ञ आज भी इसे बेहद उपयोगी मानते हैं. इसी विषय पर डॉक्टर रिद्धि पांडेय ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि दातून का इस्तेमाल केवल एक पुरानी परंपरा नहीं, बल्कि दांतों और मसूड़ों के लिए एक प्राकृतिक औषधि के रूप में भी काम करता है. नीम के दातून में होता है ये गुण डॉक्टर पांडे ने बताया कि दातून का उपयोग अगर नियमित रूप से किया जाए, तो यह मुंह की स्वच्छता बनाए रखने में बेहद प्रभावी होता है. खासतौर पर नीम का दातून एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, जो मुंह में पनपने वाले हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस को खत्म करने में मदद करता है. इससे पायरिया, मसूड़ों की सूजन, दांतों की सड़न और सांसों की बदबू जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. उन्होंने यह भी बताया कि दातून करने से मसूड़ों की हल्की मालिश होती है, जिससे उनमें मजबूती आती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है. इसके अलावा, दांतों पर जमा प्लाक को हटाने में भी यह सहायक साबित होता है. डॉक्टर यह भी स्पष्ट करती हैं कि दातून अपनाने का मतलब यह नहीं है कि ब्रश को पूरी तरह छोड़ दिया जाए, बल्कि अगर सुबह ब्रश से पहले दातून का उपयोग किया जाए, तो यह और भी बेहतर परिणाम दे सकता है. इससे मुंह में तुरंत ताजगी का एहसास होता है और दिनभर फ्रेशनेस बनी रहती है. सभी दातून के होते हैं औषधीय गुण वहीं, उन्होंने बताया कि नीम के अलावा बबूल, अमरूद और आंवला जैसे पेड़ों के दातून भी उपयोगी माने जाते हैं. हर प्रकार के दातून के अपने-अपने औषधीय गुण होते हैं, जो न सिर्फ दांतों बल्कि पूरे शरीर के लिए लाभकारी हो सकते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग दातून का उपयोग करते हैं और उनके दांत ज्यादा स्वस्थ पाए जाते हैं. यह दर्शाता है कि पारंपरिक तरीकों में आज भी विज्ञान छिपा हुआ है. बता दें किबदलते समय के साथ जहां हम आधुनिक सुविधाओं को अपना रहे हैं. वहीं, यह भी जरूरी है कि हम अपनी पुरानी और प्राकृतिक आदतों को पूरी तरह न भूलें. दातून को अपनी जीवनशैली में शामिल कर हम न केवल अपने दांतों को मजबूत बना सकते हैं, बल्कि कई प्रकार की मौखिक बीमारियों से भी बचाव कर सकते हैं.

गर्मियों में त्वचा के लिए मुलेठी ज्यादा अच्छी या एलोवेरा जेल? आप भी नहीं जानते होंगे ये वाली ट्रिक

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Last Updated:March 31, 2026, 23:37 IST Skin Care in Summer : गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका है. धूप तीखी होती जा रही है. तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण इन दिनों टैनिंग, पिंपल्स और रूखापन होना आम है. इनसे निजात पाने के लिए आयुष चिकित्सक प्राकृतिक और ठंडक देने वाले उपाय बताते हैं, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के त्वचा को स्वस्थ बनाए रखते हैं. लोकल 18 से अंबाला की आयुष चिकित्सक डॉ. शेफाली गोयल बताती हैं कि गर्मी के मौसम में स्किन से जुड़ी हुई समस्या से बचने के लिए चंदन, मुलेठी और एलोवेरा जेल काफी फायदेमंद हैं. अंबाला. गर्मियों का मौसम आते ही त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं. तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण टैनिंग, पिंपल्स और रूखापन आम हो जाता है. अक्सर लोग महंगे फेस पैक का इस्तेमाल करते हैं, फिर भी कई बार राहत नहीं मिलती. इन समस्याओं से निजात दिलवाने के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक प्राकृतिक और ठंडक देने वाले उपाय अपनाने की सलाह देते हैं, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के त्वचा को स्वस्थ बनाए रखते हैं. लोकल 18 से अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल की आयुष चिकित्सक डॉ. शेफाली गोयल बताती हैं कि गर्मी के मौसम में स्किन से जुड़ी हुई समस्या से बचने के लिए आयुर्वेद में कुछ औषधियां बताई गई हैं जिसका लेप लगाने से समस्या ठीक हो जाती. चंदन, मुलेठी और एलोवेरा जेल काफी फायदेमंद हैं, लेकिन व्यक्ति के स्किन की प्रकृति पर निर्भर करता है कि किसे पॉलीहर्बल तकनीक से फायदा होगा या मोनो-हर्बल से. डॉ. शेफाली कहती हैं कि गर्मी में सबसे पहले अपने शरीर के हाइड्रेशन को स्थिर रखें, जिसके लिए 7 से 8 गिलास पानी रोज पीना चाहिए. पसीना निकलने के साथ नमक की मात्रा भी शरीर में कम होने लगती है. इसे पर्याप्त मात्रा में बनाए रखने के लिए साल्टेड लस्सी और आम पन्ना ड्रिंक का सेवन करें. आयुर्वेद में जितना प्रभावशाली ऋतुचर्या को माना गया है उतना ही दिनचर्या को भी माना गया है. इसलिए सुबह समय ब्रह्म मुहूर्त में उठें. जितनी जल्दी सुबह उठाएंगे उतना ही फायदा शरीर को होगा. आयुर्वेद में ब्रह्म मुहूर्त का समापन सूर्य उदय से 48 मिनट पहले माना गया है. इसकी शुरुआत रात्रि के अंतिम दो चरण में होती है. तीनों के फायदे अलग डॉ. शेफाली के मुताबिक, चंदन (Sandalwood) त्वचा को ठंडक प्रदान करता है. इसके एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण दाग-धब्बे को दूर करने में मदद करते हैं. चंदन का पेस्ट लगाने से त्वचा की रंगत में सुधार आता है और मुंहासे कम होते हैं. मुलेठी (Liquorice) त्वचा को प्राकृतिक रूप से हल्का और चमकदार बनाती है. मुलेठी के पेस्ट में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाते हैं. यह त्वचा को ठंडक प्रदान करता है और काले धब्बों को भी हल्का करता है. एलोवेरा (Aloe Vera) के हाइड्रेटिंग गुण त्वचा को न केवल मॉइस्चराइज करते हैं, बल्कि यह सनबर्न और मुंहासों से राहत दिलाते हैं. एलोवेरा का जूस या पेस्ट त्वचा पर लगाने से गहरी नमी मिलती है और यह जलन को भी शांत करता है. डॉ. शेफाली कहती हैं कि इन तीनों औषधियों को मिलाकर पेस्ट तैयार करें. चंदन, मुलेठी और एलोवेरा को समान मात्रा में मिलाएं. इस पेस्ट को चेहरे पर 15-20 मिनट तक लगाकर छोड़ दें और फिर ठंडे पानी से धो लें. इस पेस्ट के नियमित उपयोग से त्वचा में निखार आएगा. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें First Published : March 31, 2026, 23:37 IST

साल में केवल एक बार खिलता है ये फूल, वात हो या चर्म रोग, कई बीमारियों का असली डॉक्टर

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Last Updated:March 31, 2026, 22:43 IST Palash Flower Benefits : पलाश ऐसा फूल है, जो साल में केवल एक बार, बसंत से लेकर मार्च तक ही खिलता है. आयुर्वेद में इसके फूलों को औषधि माना गया है, जो हमारी सेहत के लिए रामबाण है. रायबरेली की आयुष चिकित्सक डॉ. आकांक्षा दीक्षित लोकल 18 से बताती हैं कि इसमें एस्ट्रिनजेंट और एंटीऑक्सीडेंट गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो वात रोग से लड़ने में मददगार हैं. अगर किसी के पेट में कीड़े हो गए हों, तो इसके पाउडर को शहद के साथ खाली पेट सेवन करना चाहिए. बसंत पंचमी से पतझड़ शुरू हो जाता है. इसके बाद पेड़-पौधों पर नई पत्तियां और नए फूलों का आगमन होता है. कुछ ऐसे पौधे हैं, जिन पर साल के 12 महीने फूल आते हैं, लेकिन कई ऐसे पौधे हैं. जिनमें फूल साल में केवल एक बार, बसंत से लेकर मार्च तक ही आते हैं. उसके बाद पूरे साल के लिए फूल गायब हो जाते हैं. इन्हीं पौधों में पलाश भी शामिल है. पलाश के फूल चटकती धूप में बेहद खूबसूरत दिखाई देते हैं, जिन्हें आमतौर पर लोग टेसू का फूल कहते हैं. इसके फूल हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं. आयुर्वेद में इसके फूलों को औषधि माना गया है, जो हमारी सेहत के लिए रामबाण है. रायबरेली जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवगढ़ की आयुष चिकित्सक डॉ. आकांक्षा दीक्षित (एमडी आयुर्वेद नेशनल इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद जयपुर, राजस्थान) लोकल 18 से बताती हैं कि बसंत ऋतु के शुरू होते ही पलाश के पौधे में फूल आने शुरू हो जाते हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में मिलने वाले यह गुलाबी रंग के फूल हमारी स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हैं. Add News18 as Preferred Source on Google इसमें एस्ट्रिनजेंट और एंटीऑक्सीडेंट गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो वात रोग से लड़ने में मददगार हैं. ये चर्म रोग, पेट में कीड़ा, डायबिटीज, घाव भरने और त्वचा रोग के साथ महिलाओं को होने वाली कई गंभीर बीमारियों से बचाते हैं. डॉ. आकांक्षा दीक्षित बताती हैं कि अगर किसी के पेट में कीड़े हो गए हों, तो इसके पाउडर को शहद के साथ खाली पेट सेवन करना चाहिए. शरीर पर घाव हो जाए, तो इसके पत्ते और छाल को पीसकर लेप बनाकर लगाने से घाव ठीक हो जाता है. डायबिटीज के मरीजों को इसके पत्ते के सेवन से राहत मिलता है. अगर आप त्वचा की समस्या से परेशान हैं, तो इसके फूलों का लेप बनाकर त्वचा पर लगाने से खुजली और रूखेपन की समस्या दूर हो जाती है. इसमें एस्ट्रिनजेंट गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा के लिए फायदेमंद हैं. First Published : March 31, 2026, 22:43 IST

कई बीमारियों के लिए काल है नीम का पत्ता! रोजाना बस इतनी पत्तियों का करें सेवन, जानिए आयुर्वेदिक फायदे

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Last Updated:March 31, 2026, 20:33 IST Health News: नीम की सबसे बड़ी खासियत इसकी एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक क्षमता है. यही वजह है कि गांवों में आज भी लोग दातुन करते हैं. नीम माउथ को किसी भी टूथपेस्ट से ज्यादा रिफ्रेश करता है. आइए नीम के आयुर्वेदिक फायदों के बारे में जानते हैं. नीम का पौधा आसानी से गांव में मिल जाता है, लेकिन नीम की पत्तियां हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद मानी जाती हैं. डायबिटीज के मरीजों से लेकर ब्लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है. नीम की पत्तियों से बदलते मौसम के साथ-साथ वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. वायरल फीवर के साथ-साथ टाइफाइड, मलेरिया और सामान्य बुखार से भी बचाव में नीम की पत्तियों का सेवन उपयोगी माना जाता है. वहीं इस समय गर्मियों के मौसम में सबसे अधिक समस्या फंगल इन्फेक्शन को लेकर रहती है. कई बार फंगल इन्फेक्शन के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. अगर आप भी फंगल इन्फेक्शन (दाद) की समस्या से अक्सर परेशान रहते हैं, तो सुबह खाली पेट नीम की तीन से चार पत्तियों को चबा सकते हैं. आप नीम की पत्तियों के रस का सेवन कर सकते हैं, तो फंगल इन्फेक्शन जैसी समस्या से आपको राहत मिल जाएगी. नीम की पत्तियां शरीर को अंदर से शुद्ध करने का काम करती हैं और हमारे खून को साफ करती हैं, जिससे रोग प्रतिरोध क्षमता कम होती है. वही नीम की पत्तियों का सेवन सही मात्रा में करना चाहिए. अधिक मात्रा में नीम की पत्तियों का सेवन करने से आप परेशान भी हो सकते हैं. अत्यधिक मात्रा में नीम की पत्तियों का सेवन करने से पेट में दर्द जैसी समस्या हो सकती है. गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि जो लोग फंगल इंफेक्शन से एक्शन परेशान रहते हैं, वह सुबह खाली पेट 5 से 7 देसी नीम की कोपल यह पत्तियों को सुबह खाली पेट चला सकते हैं. ध्यान रहे कि पत्तियों को पेड़ से तोड़ने के बाद अच्छी तरीके से साफ पानी में धो लें. करीब 15 दिन तक लगातार नीम की पत्तियों का सेवन करने से कई बीमारियां ठीक हो सकती हैं. नीम की सबसे बड़ी खासियत इसकी एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक क्षमता है. यही वजह है कि गांवों में आज भी लोग दातुन करते हैं. नीम माउथ किसी भी टूथपेस्ट से ज्यादा रिफ्रेश करता है. यह कैविटी, बदबू, मसूड़ों की सूजन और ओरल हेल्थ से जुड़ी कई परेशानियां दूर करता है. नीम की पत्तियां चबाने से माउथ के हानिकारक बैक्टीरिया खत्म होते हैं, जिससे दांतों का दर्द और बदबू दोनों से राहत मिल जाती है. नीम के पत्तों का रस पेट को साफ और शुद्ध करता है, यही कारण है कि इसके पत्ते पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं. नीम के पत्ते ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. नीम के पत्तों का रस सुबह खाली पेट पीने से शरीर में इम्युनिटी पावर बढ़ता है, जिससे शरीर को छोटी-मोटी बीमारियों से लड़ने की क्षमता मिलती है. नीम की पत्तियों के रस या पेस्ट लगाने से बालों का झड़ना कम होता है. यही नहीं, यह रूसी से भी निजात मिलती है. First Published : March 31, 2026, 20:08 IST

घाव हो या दाद…पीली हरताल कई रोगों में संजीवनी, आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानें तरीका

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Last Updated:March 31, 2026, 19:25 IST Yellow Harsal Benefits : हर पीली चीज सोना नहीं होती, लेकिन ये चीज सोना न होकर भी सेहत के लिए सोने से कम नहीं है. लोकल 18 से बागपत के आयुर्वेदिक चिकित्सा डॉ. राघवेंद्र चौधरी बताते हैं कि पीली हरताल एक चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि है. इसकी मदद से त्वचा रोगों में भी तेजी से आराम मिलता है. इसका इस्तेमाल दाद, खाज और खुजली में कर सकते हैं. डॉ. राघवेंद्र चौधरी बताते हैं कि पीली हरताल से आप शरीर पर अनचाहे बाल भी हटा सकते हैं. बागपत. पीली हरताल एक चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि है, जो शरीर पर चौंकाने वाले फायदे करती है. इसका इस्तेमाल करने से स्किन संबंधित समस्याओं में तेजी से आराम मिलता है. ये घाव को भरने में भी काफी मददगार है. बागपत के आयुर्वेदिक चिकित्सा डॉ. राघवेंद्र चौधरी लोकल 18 से बताते हैं कि पीली हरताल एक चमत्कारी औषधि है, जो आसानी से बाजार में उपलब्ध है. इसका इस्तेमाल मौसम बदलने के साथ होने वाली बीमारियों में करने से तेजी से लाभ मिलता है. पीली हरताल से फेफड़ों में होने वाले इन्फेक्शन से राहत मिलती है. सुनरहे रंग का उपरस हरताल एक प्राकृतिक खनिज है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से आयुर्वेद में त्वचा रोगों के उपचार और औषधियों में किया जाता है. यह सुनहरे-पीले रंग का एक उपरस है, जो चर्म रोगों, फोड़े-फुंसी, और त्वचा की एलर्जी के इलाज में विशेष रूप से प्रभावी है. यह एक विषाक्त खनिज पदार्थ है, जिसे शोधन (शुद्धिकरण) के बाद ही उपयोग में लाया जाता है. त्वचा रोगों में भी तेजी से आराम मिलता है. इसका इस्तेमाल दाद, खाज और खुजली भागने में कर सकते हैं. इसके इस्तेमाल से स्किन चमकदार बनती है. स्किन इन्फेक्शन ठीक होता है. डॉ. राघवेंद्र चौधरी बताते हैं कि पीली हरताल से आप शरीर पर अनचाहे बाल भी हटा सकते हैं. पीली हरताल का इस्तेमाल आप चूर्ण के रूप में देसी घी और दूध के साथ मिश्रण बनाकर कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल आप नीम के तेल में मिलाकर त्वचा के बाहरी हिस्से पर भी कर सकते हैं. हालांकि इसका इस्तेमाल जब भी करें पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर कर लें. इसका कोई खास नुकसान नहीं होता, लेकिन चिकित्सक की सलाह जरूरी है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Baghpat,Uttar Pradesh First Published : March 31, 2026, 19:25 IST