गर्मी में गन्ने का एक गिलास जूस, पीलिया को रखें हमेशा दूर; डॉक्टर ने बताए चौंकाने वाले फायदे

Last Updated:March 20, 2026, 12:29 IST Sugarcane Juice Benefits: गर्मी के दिनों में शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए मौसमी फलों के सेवन की सलाह दी जाती है लेकिन पीलिया एक ऐसी बीमारी है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक को अपनी चपेट में ले लेती है. वहीं गन्ने के जूस को पीलिया का काल माना जाता है. गर्मी में एक गिलास जूस पीलिया सहित कई बीमारियों में लाभकारी है. गर्मी की शुरुआत होते ही खरगोन सहित निमाड़ में सूरज आग उगलने लगा है. मार्च के महीने में ही तापमान तेजी से बढ़ा है. अप्रैल-मई में हालत और ज्यादा खराब हो सकते हैं क्योंकि हर साल यहां तामपान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. ऐसे में लोगों का दिन में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है और शरीर जल्दी थकने लगता है. इस भीषण गर्मी के कारण तेज धूप और लू की चपेट में आकर लोग जल्दी बीमार पड़ने लगते हैं. बच्चे और बुजुर्ग इसके ज्यादा शिकार होते हैं. इस मौसम में डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और बुखार जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं. खास बात यह है कि इस समय ध्यान न दिया जाए, तो बुखार पीलिया में बदल जाता है और कई बार व्यक्ति की जान तक चले जाती है. खरगोन के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ संतोष मौर्य ने लोकल 18 से कहा कि इस मौसम में ज्यादा पानी पीना चाहिए और ठंडी चीजों का सेवन करना चाहिए ताकि शरीर संतुलित बना रहे. वहीं गन्ने का जूस पीलिया के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद है. यह लीवर को सपोर्ट करता है और शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद करता है. नियमित रूप से इसका सेवन करने से राहत मिल सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google इसी वजह से इन दिनों खरगोन में गर्मी बढ़ते ही गन्ने के जूस के ठेले बड़ी संख्या में नजर आने लगे हैं. दोपहर के समय इन ठेलों पर लोगों की भीड़ खूब दिख रही है. लोग ठंडा-ठंडा जूस पीकर राहत महसूस कर रहे हैं क्योंकि यह सिर्फ प्यास नहीं बुझाता बल्कि शरीर को अंदर से ठंडक भी देता है. गन्ने का रस नैचुरल तरीके से शरीर को एनर्जी देता है. इसे पीने से तुरंत ताजगी मिलती है और थकान कम होती है. गन्ने के जूस में कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे शरीर के लिए जरूरी तत्व पाए जाते हैं. इसके साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. डॉ मौर्य के अनुसार, गन्ने का जूस सिर्फ स्वाद में अच्छा नहीं होता बल्कि यह शरीर को तुरंत एनर्जी भी देता है. तेज धूप में बाहर से आने के बाद एक गिलास जूस शरीर को तुरंत ताजगी देता है और कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाता. नियमित रूप से इसका सेवन करने से पीलिया जैसी घातक बीमारियों में जल्दी राहत मिल सकती है. यह एक नैचुरल ड्रिंक है, जिसमें किसी तरह का केमिकल नहीं होता. वहीं इसकी तासीर भी ठंडी होती है, इसलिए यह शरीर को अंदर से ठंडक भी देता है. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में लोग कोल्डड्रिंक की जगह गन्ने का जूस ज्यादा पसंद करते हैं. यह सस्ता भी होता है और सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. First Published : March 20, 2026, 12:29 IST
आपने देखा है सिंदूर का पौधा? खेती से मालामाल होंगे किसान, कई बीमारियों में भी कारगर

होमवीडियोकृषि आपने देखा है सिंदूर का पौधा? कई बीमारियों में भी कारगर, जानें फायदे X आपने देखा है सिंदूर का पौधा? कई बीमारियों में भी कारगर, जानें फायदे Sindoor Tree Benefits: सिंदूर का पौधा औषधीय गुणों से भी भरपूर माना जाता है. इस पौधे को अंग्रेजी में कुमकुम ट्री या कमील ट्री कहा जाता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इसे रक्तबीज के नाम से भी जाना जाता है. सिंदूर का पौधा बहुवर्षीय होता है, यानी एक बार लगाने के बाद यह कई वर्षों तक फल देता है. यह पौधा लगभग तीन साल में फल देना शुरू कर देता है. इसके फल और बीज से पूरी तरह प्राकृतिक और हर्बल सिंदूर तैयार किया जाता है. एक पौधे से लगभग डेढ़ किलो तक बीज प्राप्त हो जाते हैं, जिनसे गहरा लाल रंग निकलता है. यह रंग पूरी तरह प्राकृतिक होता है और त्वचा के लिए सुरक्षित माना जाता है. यदि किसान बड़े पैमाने पर इस पौधे का रोपण करते हैं तो इससे पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है.
kuchla vati uses in hindi | Kuchla Vati Benefits | कुचला वटी के फायदे | कुचला वटी |

Last Updated:March 19, 2026, 22:01 IST Kuchla Vati Benefits: कुचला वटी एक चमत्कारी आयुर्वेदिक औषधि है, जो कमजोर शरीर में ऊर्जा भरने और नसों की कमजोरी को दूर करने में सहायक है. बागपत के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र चौधरी के अनुसार, यह जोड़ों के दर्द, साइटिका, पाचन तंत्र की समस्याओं और पुरुष स्वास्थ्य के लिए रामबाण इलाज है. हालांकि, इसका सेवन बिना डॉक्टरी परामर्श और शोधन के जोखिम भरा हो सकता है. बागपत: आयुर्वेद की दुनिया में कई ऐसी औषधियां हैं जो लाइलाज बीमारियों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती हैं. इन्हीं में से एक है ‘कुचला वटी’, जिसे एक चमत्कारी औषधि माना जाता है. अगर आप शारीरिक कमजोरी, नसों की सुन्नता या जोड़ों के पुराने दर्द से परेशान हैं, तो कुचला वटी आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. बागपत के अनुभवी आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राघवेंद्र चौधरी के अनुसार, यह औषधि न केवल शरीर को फौलादी ताकत देती है, बल्कि पाचन तंत्र और नर्वस सिस्टम को भी नए सिरे से सक्रिय कर देती है. हालांकि, इसका उपयोग जितना लाभकारी है, सावधानी न बरतने पर उतना ही जोखिम भरा भी हो सकता है. कुचला वटी: आयुर्वेद का एक शक्तिशाली उपहारकुचला वटी एक ऐसी आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग सदियों से शरीर की शक्ति बढ़ाने और वात रोगों को दूर करने के लिए किया जाता रहा है. डॉ. राघवेंद्र बताते हैं कि कुचला वटी का मुख्य घटक ‘कुचला’ है. यह औषधि विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रभावी है जिनका शरीर समय से पहले कमजोर होने लगा है या जिन्हें नसों से जुड़ी गंभीर समस्याएं हैं. यह शरीर में ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाकर आलस और थकान को कोसों दूर रखती है. जोड़ों के दर्द और सूजन में तुरंत आरामआज के समय में गठिया, साइटिका और मांसपेशियों का खिंचाव एक आम समस्या बन गई है. कुचला वटी इन समस्याओं में प्राकृतिक पेनकिलर की तरह काम करती है. यह शरीर के भीतर की सूजन को नियंत्रित करती है, जिससे जोड़ों की गतिशीलता बढ़ती है. जिन लोगों को चलने-फिरने में कठिनाई होती है या जिनके घुटनों में हमेशा दर्द बना रहता है, उनके लिए यह औषधि काफी राहत देने वाली साबित होती है. पुरुष स्वास्थ्य और यौन शक्ति में सुधारयौन स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कुचला वटी का विशेष महत्व माना गया है. डॉ. राघवेंद्र के अनुसार, यह पुरुषों में स्तंभन दोष जैसी समस्याओं को दूर करने में बेहद मददगार है. यह शरीर की आंतरिक कार्यक्षमता को बढ़ाती है और स्टैमिना में सुधार करती है, जिससे वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है. पाचन तंत्र को बनाए फौलादीखराब जीवनशैली के कारण कब्ज, अपच और पेट दर्द की समस्या अब घर-घर की कहानी है. कुचला वटी पाचन अग्नि को प्रदीप्त करती है. यह पुरानी से पुरानी कब्ज को ठीक करने और खाया-पिया शरीर को लगाने में मदद करती है. अगर आपका पेट साफ नहीं रहता, तो यह औषधि पाचन क्रिया को सुधारकर पूरे शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक है. नसों की कमजोरी और झनझनाहट का अंतहाथ-पैरों का सुन्न हो जाना या नसों में झनझनाहट होना तंत्रिका तंत्र की कमजोरी का संकेत है. कुचला वटी नसों को सक्रिय और मजबूत बनाती है. यह मस्तिष्क से शरीर के अंगों तक पहुंचने वाले संकेतों को तेज करती है, जिससे लकवा जैसी स्थितियों के बाद रिकवरी में भी मदद मिलती है. सावधानी: बिना शोधन है जानलेवाकुचला वटी के फायदों के साथ इसकी सावधानी सबसे महत्वपूर्ण है. डॉ. राघवेंद्र चौधरी चेतावनी देते हैं कि कच्चा कुचला अत्यंत विषैला होता है. आयुर्वेद में इसे शुद्ध करने (शोधन) की एक लंबी प्रक्रिया है, जिसके बाद ही यह औषधि बनती है. इसलिए कभी भी कच्चे कुचले का प्रयोग न करें. डॉक्टर की सलाह और सेवन विधिइसका सेवन दूध या पानी के साथ किया जा सकता है, लेकिन इसकी खुराक व्यक्ति की उम्र और बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करती है. डॉ. राघवेंद्र चौधरी ने स्पष्ट किया है कि इसका अधिकतम सेवन नुकसानदेह हो सकता है. इसलिए, इस्तेमाल से पहले अपने नजदीकी सरकारी आयुर्वेदिक चिकित्सालय या किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें. About the Author Rahul Goel राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें Location : Baghpat,Uttar Pradesh First Published : March 19, 2026, 21:58 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
castor leaves benefits in hindi | castor leaves benefits | अरंडी के पत्ते के फायदे | अरंडी के पत्ते के फायदे और नुकसान |

Last Updated:March 19, 2026, 15:28 IST Castor Leaves Benefits: बदलते मौसम और गलत जीवनशैली के कारण आज हर दूसरा व्यक्ति जोड़ों के दर्द, सूजन या पेट की समस्याओं से जूझ रहा है. ऐसे में आयुर्वेद का एक प्राचीन नुस्खा ‘अरंडी के पत्ते’ किसी वरदान से कम नहीं हैं. एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर ये पत्ते न केवल गंभीर से गंभीर दर्द को सोख लेते हैं, बल्कि पुरानी कब्ज और त्वचा रोगों को जड़ से मिटाने की क्षमता रखते हैं. आइए जानते हैं डॉक्टर गीतिका शर्मा के अनुसार, कैसे ये मामूली दिखने वाले पत्ते आपकी सेहत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं. अरंडी के पत्ते स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं. विशेष रूप से सूजन, जोड़ों के दर्द और त्वचा रोगों में, इनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं. जो दर्द कम करने और घाव भरने में मदद करते हैं. इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से लेप या तेल के रूप में किया जाता है. जो कब्ज और त्वचा की समस्याओं में भी आराम देते हैं। डॉक्टर गीतिका शर्मा ने बताया किअरंडी के पत्ते जोड़ों के दर्द, सूजन और गठिया में राहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं. इनमें सूजन-रोधी गुण होते हैं. जो दर्द कम करने में मदद करते हैं. सरसों या तिल के तेल के साथ गर्म करके, इन पत्तों का लेप या सिंकाई करने से जोड़ों की जकड़न कम होती है और पुराने दर्द में भी राहत मिलती है। अरंडी के पत्ते और उनका तेल त्वचा संबंधी समस्याओं जैसे संक्रमण, खुजली, घाव और सूजन के इलाज में बेहद फायदेमंद होते हैं. इनके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण, ये दाद और सोरायसिस जैसी स्किन कंडीशंस को ठीक करने में मदद करते हैं. पत्तों का पेस्ट या तेल त्वचा को नमी भी प्रदान करता है। Add News18 as Preferred Source on Google अरंडी के पत्ते और पाचन सुधारने व कब्ज दूर करने के लिए अत्यधिक फायदेमंद होते हैं. इनमें रेचक गुण होते हैं जो आंतों को उत्तेजित कर मल त्याग को आसान बनाते हैं. इनका उपयोग पुरानी कब्ज, गैस, और पेट की सूजन से राहत पाने के लिए किया जाता है। अरंडी के पत्ते शरीर में गांठ या सूजन को कम करते हैं. इनमें एंटी-इफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो दर्द और सूजन को राहत देते हैं. अब्जिव पत्तों का रस या पेस्ट लगाकर लाभ उठाएं. डॉक्टर से सलाह लेकर इसका उपयोग करें और सेहत का ध्यान रखें। अरंडी के पत्ते का पेस्ट घावों को जल्दी भरता है और बालों के विकास को बढ़ावा देता है. इसमें एंटीसेप्टिक और पोषक तत्व होते हैं जो त्वचा और बालों को स्वस्थ बनाते हैं. अब्जिव पत्तों का पेस्ट लगाकर लाभ उठाएं और सेहत का ध्यान रखें। अरंडी के पत्ते सेहत के लिए वैसे तो फायदेमंद होते हैं. लेकिन इसका सेवन करने से पहले चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी होता है. बिना चिकित्सक की सलाह के इसका सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि यह नुकसानदायक भी हो सकते हैं। First Published : March 19, 2026, 15:28 IST
vishamushti benefits | vishamushti uses | विषामुष्टि के फायदे | विषामुष्टि के फायदे और नुकसान |

Last Updated:March 18, 2026, 20:29 IST Vishamushti Benefits: अक्सर हम अपने आसपास उगने वाले कई पौधों को खरपतवार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेद की दुनिया में ये ‘अमृत’ के समान होते हैं. ऐसा ही एक पौधा है ‘विषामुष्टि’. सड़क किनारे, खाली मैदानों या झाड़ियों के बीच आसानी से दिखने वाला यह पौधा अपनी अद्भुत हीलिंग पावर के लिए जाना जाता है. सदियों से ग्रामीण इलाकों में इसे घरेलू उपचार का मुख्य हिस्सा माना गया है. विषामुष्टि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका जड़ से लेकर पत्ती तक, हर हिस्सा औषधीय गुणों से भरपूर है. आइए, आयुष विशेषज्ञों से जानते हैं कि यह साधारण सा दिखने वाला पौधा गंभीर बीमारियों में कैसे सुरक्षा कवच का काम करता है. विषामुष्टि (विषमुष्टि) एक ऐसा पौधा है, जिसे लोग आमतौर पर इसके नाम से नहीं जानते है. लेकिन ये पौधा आपको अक्सर सड़क किनारे, खाली मैदानों या झाड़ियों के बीच आसानी से देखने को मिल जाता है. यह कई तरह से काम का होता है गांवों में इसे पुराने समय से घरेलू इलाज में इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसकी खास बात यह है कि इसका हर हिस्सा काम आता है ये प्राकृतिक और सस्ते इलाज का अच्छा विकल्प बन रहे हैं. आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल बताते है कि विषामुष्टि में ऐसे तत्व होते हैं जो शरीर की कोशिकाओं पर अच्छा असर डालते हैं यही वजह है कि इसे कैंसर जैसी बड़ी बीमारियों में भी सहायक माना जाता है हालांकि यह कोई सीधा इलाज नहीं है डॉक्टर की सलाह के बिना इसका इस्तेमाल करना नुकसान भी दे सकता है इसलिए सावधानी बहुत जरूरी है अगर बार-बार सर्दी-जुकाम हो जाता है तो विषामुष्टि की पत्तियों का काढ़ा काफी राहत देता है गांवों में लोग इसे चाय की तरह पीते हैं इससे शरीर को फुर्ती मिलती है और गले की खराश भी कम होती है यह एक आसान घरेलू तरीका है जिसे सही तरीके से अपनाया जाए तो फायदा मिल सकता है Add News18 as Preferred Source on Google आजकल गैस, कब्ज और पेट दर्द की समस्या आम हो गई है ऐसे में विषामुष्टि का इस्तेमाल राहत दे सकता है इसके सेवन से पाचन बेहतर होता है और पेट हल्का महसूस होता है कई लोग इसे घरेलू नुस्खे के तौर पर अपनाते हैं लेकिन मात्रा का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है वरना उल्टा असर भी हो सकता है इसलिए डॉक्टर की सलाह के बाद ही लें अगर शरीर पर कोई पुराना घाव या फोड़ा-फुंसी हो जाए तो इसकी पत्तियों का लेप लगाया जाता है इससे घाव जल्दी भरने में मदद मिलती है आप इसे धोकर सीधे पीसकर लगा लेते हैं यह एक सस्ता और आसान तरीका है लेकिन साफ-सफाई का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी होता है ताकि संक्रमण न फैले पुराने समय से मिर्गी के इलाज में भी विषामुष्टि का इस्तेमाल होता रहा है माना जाता है कि इसके पत्तों का रस नाक में डालने से दौरे को नियंत्रित करने में मदद मिलती है हालांकि यह तरीका हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं होता इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के इसे अपनाना सही नहीं है विषामुष्टि की पत्तियों को मुहं की सफाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है इसके लिए पहले पत्तो को धो ले फिर उबालकर उसका पानी से कुल्ला करें इससे मुंह की बदबू, मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द जैसी समस्याओं में राहत मिलती है कई लोग इसे प्राकृतिक माउथवॉश की तरह इस्तेमाल करते हैं यह आसान तरीका है आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल बताते है विषामुष्टि जितना फायदेमंद है उतना ही गलत इस्तेमाल पर नुकसान भी दे सकता है इसकी सही मात्रा और सही तरीका जानना बहुत जरूरी है हर बीमारी में इसका उपयोग अलग-अलग तरीके से होता है इसलिए बेहतर यही है कि किसी आयुर्वेद डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसका इस्तेमाल करें ताकि फायदे के बजाय कोई परेशानी न हो First Published : March 18, 2026, 20:29 IST
सर्दियों का सुपरफूड! अलसी, गोंद और ड्राई फ्रूट्स के लड्डू खाएं, जोड़ों के दर्द को कहें अलविदा – News18 हिंदी

X ये खास लड्डू देंगे ताकत, बढ़ाएंगे रोग प्रतिरोधक क्षमता और रखेंगे शरीर को फिट Winter Immunity Laddoo Recipe: सर्दियों के मौसम में शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने के लिए अलसी, गोंद और ड्राई फ्रूट्स से बने लड्डू बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. ये लड्डू इम्युनिटी बढ़ाने, शरीर को ऊर्जा देने और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में सहायक होते हैं. अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड, गोंद में ताकत बढ़ाने वाले तत्व और ड्राई फ्रूट्स में पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं. यह देसी नुस्खा खासतौर पर ठंड के मौसम में शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. नियमित सेवन से कमजोरी दूर होती है और शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है, जिससे संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर होता है.
रात में दही खाना सही या गलत? एक्सपर्ट से समझें बीमार होने का पूरा सच

X रात में दही खाना सही या गलत? एक्सपर्ट से समझें बीमार होने का पूरा सच Health Tips : गर्मी के मौसम में दही खाना शरीर के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है और यह शरीर को ठंडक देने के साथ पोषण भी देता है. विशेषज्ञों के अनुसार दही में प्रोटीन, कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन B12 जैसे जरूरी तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को ऊर्जा और ताकत देते हैं. यह शरीर में पानी की कमी को भी पूरा करने में मदद करता है. हालांकि दही का सेवन सीमित मात्रा में और दिन के समय करना बेहतर माना जाता है. रात में दही खाने से सर्दी-खांसी या पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं. साथ ही ज्यादा खट्टा या बासी दही खाने से पेट खराब होने का खतरा भी रहता है.
drinking water after meal effects | ayurveda tips for drinking water | खाना खाने के बाद पानी पीना सही या गलत | खाना खाने के बाद पानी कब पिएं |

Last Updated:March 16, 2026, 19:13 IST Khana Khane Ke Bad Pani Kab Peena Chahiye: हम अक्सर खाना खत्म करते ही गटागट पानी पीना एक सामान्य आदत मानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी सी चूक आपके पाचन तंत्र के लिए भारी पड़ सकती है. ऋषिकेश के डॉक्टर राजकुमार के अनुसार, भोजन के तुरंत बाद पानी पीना पेट में मौजूद उन जादुई पाचक रसों को पतला कर देता है जो खाने को ऊर्जा में बदलते हैं. इससे न सिर्फ पाचन प्रक्रिया सुस्त होती है, बल्कि गैस और एसिडिटी जैसी परेशानियां भी घर कर लेती हैं. सेहतमंद रहने के लिए पानी कब और कैसे पीना चाहिए, जानिए इसका सही समय. ऋषिकेश: अक्सर हम में से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि जैसे ही खाना खत्म हुआ, तुरंत एक गिलास पानी पी लिया. कई घरों में तो खाना खत्म करते ही पानी पीना सामान्य दिनचर्या का हिस्सा माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह आदत आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकती है.भोजन के तुरंत बाद ज्यादा पानी पीना पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. इसलिए जरूरी है कि हम अपनी इस छोटी सी आदत के पीछे की सच्चाई को समझें. लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि खाना हमारे शरीर के लिए ऊर्जा और पोषण का मुख्य स्रोत होता है. जब हम भोजन करते हैं तो शरीर में पाचन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. पेट में मौजूद पाचक रस और एंजाइम भोजन को तोड़ने का काम करते हैं ताकि शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिल सकें. ऐसे में अगर हम खाना खत्म करते ही तुरंत ज्यादा मात्रा में पानी पी लेते हैं तो यह पाचक रसों को पतला कर सकता है. इससे पाचन की प्रक्रिया थोड़ी धीमी पड़ सकती है. खाना खाने के कितने समय बाद पानी पीना चाहिए कई लोगों को यह भी महसूस होता है कि खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीने से पेट में भारीपन या गैस की समस्या होने लगती है. कुछ मामलों में एसिडिटी या अपच की शिकायत भी देखने को मिलती है. हालांकि हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए इसका असर भी अलग-अलग हो सकता है. फिर भी सामान्य तौर पर भोजन के तुरंत बाद ज्यादा पानी पीने से बचना बेहतर माना जाता है. सबसे अच्छा तरीका यह है कि भोजन करने के करीब 20 से 30 मिनट बाद पानी पिया जाए. इस दौरान पेट में पाचन की शुरुआती प्रक्रिया शुरू हो चुकी होती है, जिससे खाना धीरे-धीरे पचने लगता है. जब आप थोड़ी देर बाद पानी पीते हैं तो यह शरीर को हाइड्रेट भी करता है और पाचन प्रक्रिया को भी ज्यादा प्रभावित नहीं करता. यह भी पढ़ें: वजन कम करना या बढ़ानी हो इम्यूनिटी! रोज खाएं स्प्राउट्स, एक्सपर्ट से जानिए इसके कमाल के फायदे क्या खाना खाते समय पानी पी सकते हैं?हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि खाना खाते समय पानी बिल्कुल नहीं पीना चाहिए. अगर आपको खाने के दौरान प्यास लगती है तो आप थोड़ा-थोड़ा पानी पी सकते हैं. भोजन के दौरान एक-दो घूंट पानी लेना सामान्य है और इससे कोई बड़ा नुकसान नहीं होता. बवजन कम करना या बढ़ानी हो इम्यूनिटी! रोज खाएं स्प्राउट्स, एक्सपर्ट से जानिए इसके कमाल के फायदेल्कि कुछ लोगों के लिए यह खाना निगलने में भी मदद करता है.एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि बहुत ठंडा पानी भी खाने के तुरंत बाद नहीं पीना चाहिए. अत्यधिक ठंडा पानी पाचन प्रक्रिया को थोड़ी देर के लिए धीमा कर सकता है और पेट में असहजता महसूस हो सकती है. इसलिए सामान्य तापमान का पानी पीना ज्यादा बेहतर माना जाता है. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें Location : Rishikesh,Dehradun,Uttarakhand First Published : March 16, 2026, 19:13 IST
StomachProblems | पेट की बीमारियां | खराब जीवनशैली

गाजियाबाद: बदलते दौर की भागदौड़ और आधुनिक जीवनशैली ने युवाओं के सुख-चैन के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य पर भी ग्रहण लगा दिया है. देर रात तक मोबाइल की चमक, सुबह का छूटा हुआ नाश्ता और बाहर का चटपटा जंक फूड ये आज के युवाओं की पहचान बन चुके हैं, लेकिन यही आदतें अब उनके पाचन तंत्र को खोखला कर रही हैं. गाजियाबाद की प्रसिद्ध डाइटिशियन ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते दिनचर्या में सुधार नहीं किया गया, तो पेट की ये आम दिखने वाली समस्याएं भविष्य में गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती हैं. बदलती जीवनशैली और युवाओं की सेहतगाजियाबाद की प्रसिद्ध डाइटिशियन पायल बताती हैं कि आजकल के युवा घर के खाने की बजाय बाहर का खाना ज्यादा पसंद करते हैं. फास्ट फूड, तला-भुना खाना और जंक फूड स्वाद में भले ही अच्छा लगता हो, लेकिन यह पेट के लिए नुकसानदायक होता है. इनमें तेल और मसालों की मात्रा ज्यादा होती है जिससे गैस, एसिडिटी और अपच की समस्या बढ़ जाती है. लंबे समय तक ऐसी आदतें बनी रहें तो पेट में सूजन, संक्रमण और पाचन से जुड़ी अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं. नींद की कमी और जंक फूड का घातक मेलशरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित दिनचर्या और संतुलित आहार बहुत जरूरी है लेकिन आज के समय में कई युवा पढ़ाई, नौकरी और भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करने से नींद पूरी नहीं होती और सुबह का नाश्ता भी अक्सर छूट जाता है. इसके बाद दिनभर बाहर का खाना या जंक फूड खाने से पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है. डाइटिशियन की सलाह: बाहर के खाने से बचेंगाजियाबाद की डाइटिशियन पायल बताती हैं कि आजकल युवा घर के खाने की बजाय बाहर का खाना ज्यादा पसंद करते हैं. फास्ट फूड, तला-भुना खाना और जंक फूड स्वाद में भले ही अच्छा लगता हो लेकिन यह पेट के लिए नुकसानदायक होता है. इनमें तेल और मसालों की मात्रा ज्यादा होती है जिससे गैस, एसिडिटी और अपच की समस्या बढ़ जाती है. लंबे समय तक ऐसी आदतें बनी रहें तो पेट में सूजन, संक्रमण और पाचन से जुड़ी अन्य परेशानियां भी हो सकती हैं. गर्मी में बढ़ जाता है इन्फेक्शन का खतरागर्मियों के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है. गर्मी में फूड प्वाइजनिंग और पेट के इन्फेक्शन के मामले ज्यादा सामने आते हैं. बाहर खुले में मिलने वाला खाना या बासी भोजन खाने से बैक्टीरिया पेट में पहुंच सकते हैं, जिससे उल्टी, दस्त और तेज पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए गर्मियों में खाने-पीने को लेकर विशेष सावधानी बरतना जरूरी है. कैसे रखें खुद को फिट?डाइटिशियन ने बताया कि स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरूरी है कि रोजाना समय पर भोजन किया जाए. नाश्ता, दोपहर का खाना और रात का भोजन तय समय पर लेने से पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है. इसके साथ ही डाइट में हरी सब्जियां, ताजे फल, दालें और हल्का भोजन शामिल करना चाहिए. ज्यादा मसालेदार और तला-भुना खाना कम से कम खाना चाहिए. हाइड्रेशन और व्यायाम है जरूरीगर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखना भी बहुत जरूरी है. दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए. इसके अलावा नींबू पानी, नारियल पानी और ओआरएस जैसे पेय पदार्थ शरीर को तरल और जरूरी मिनरल्स देते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन और पेट की समस्याओं से बचाव होता है. इसके साथ ही नियमित व्यायाम या रोजाना वॉक करना भी पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. चेतावनी: छोटी लापरवाही पड़ सकती है भारीअगर किसी व्यक्ति को बार-बार गैस, एसिडिटी, पेट दर्द, उल्टी या दस्त जैसी समस्या हो रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है क्योंकि छोटी-सी लापरवाही आगे चलकर बड़ी बीमारी का कारण बन सकती है.
सावधान! सुबह उठते ही पैरों में होता है झनझनाहट, तो न करें इग्नोर, इस बीमारी का हो सकता है संकेत, जानें डॉक्टर की सलाह

Last Updated:March 16, 2026, 11:17 IST Health Tips: सुबह उठते ही पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या झुनझुनी को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह कई समस्याओं का संकेत हो सकता है. गाजियाबाद के गणेश हॉस्पिटल की फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. अरुणिमा चौधरी के अनुसार यह गलत तरीके से सोने, नसों पर दबाव, विटामिन-B12 की कमी या कमर की समस्या के कारण हो सकता है. लगातार ऐसी परेशानी स्लिप डिस्क या डायबिटीज का संकेत भी हो सकती है. नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीने से इससे बचाव किया जा सकता है. सुबह नींद से उठते ही अगर पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या हल्की झुनझुनी महसूस होती है, तो अक्सर लोग इसे मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. कई बार यह थोड़ी देर में अपने आप ठीक भी हो जाती है. इसलिए लोग इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते. फिजियोथैरेपिस्ट का कहना है कि अगर यह समस्या बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है तो इसे हल्के में लेना सही नहीं है. यह नसों की कमजोरी, कमर की समस्या या शरीर में पोषण की कमी का संकेत भी हो सकता है. ये लक्षण हैं बेहद खतरनाकगाजियाबाद के गणेश हॉस्पिटल की फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. अरुणिमा चौधरी के अनुसार सुबह उठते समय पैरों में सुन्नपन महसूस होना कई कारणों से हो सकता है. आमतौर पर यह गलत तरीके से सोने, लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने या सोते समय नसों पर दबाव पड़ने की वजह से होता है. कई मामलों में शरीर में विटामिन-बी12 की कमी भी नसों को कमजोर कर देती है, जिससे पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन की समस्या सामने आती है. उन्होंने बताया कि कई बार कमर दर्द भी इस समस्या की बड़ी वजह बन जाता है. कमर की नसें पैरों से जुड़ी होती हैं और जब कमर में दर्द या नसों पर दबाव बढ़ता है, तो उसका असर पैरों तक पहुंच सकता है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति को पैरों में भारीपन, सुन्नपन या झनझनाहट महसूस होने लगती है. अगर इस तरह की परेशानी लगातार बनी रहती है, तो यह स्लिप डिस्क, नसों की कमजोरी या डायबिटीज जैसी बीमारी का संकेत भी हो सकती है. इसलिए बार-बार होने वाली इस समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. रोजाना एक्सरसाइज है जरूरीडॉ. चौधरी का कहना है कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना व्यायाम करना बेहद जरूरी है. सुबह के समय कम से कम 30 से 40 मिनट तक हल्की एक्सरसाइज या स्ट्रेचिंग करने से शरीर की नसें और मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं. जो लोग ऑफिस या नौकरी पर जाने से पहले थोड़ा समय निकालकर व्यायाम करते हैं, उन्हें शरीर से जुड़ी कई समस्याओं से राहत मिलती है. नियमित व्यायाम से शरीर में रक्त संचार भी बेहतर रहता है और दर्द या अकड़न की शिकायत कम होती है. डाइट का भी इस समस्या से सीधा संबंध है डॉक्टर के अनुसार शरीर को मजबूत रखने के लिए संतुलित आहार लेना जरूरी है. खासतौर पर गर्मियों के मौसम में पानी की पर्याप्त मात्रा पीनी चाहिए. ऐसे फल और खाद्य पदार्थ खाने चाहिए, जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो ताकि शरीर हाइड्रेट रहे. नारियल पानी भी गर्मियों में शरीर को ऊर्जा और जरूरी पोषण देने में मदद करता है. अगर कोई व्यक्ति जिम या ज्यादा शारीरिक मेहनत करता है तो उसे अपनी डाइट पर विशेष ध्यान देना चाहिए. कई बार लोग छोटी-छोटी समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती है. अगर पैरों में बार-बार सुन्नपन, झनझनाहट या दर्द की शिकायत हो रही है तो तुरंत डॉक्टर या फिजियोथैरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए. फिजियोथैरेपी का इलाज केवल मशीनों से ही नहीं होता, बल्कि कई मामलों में मैन्युअल थेरेपी और विशेष एक्सरसाइज के जरिए भी मरीज को राहत दी जाती है. About the Author Lalit Bhatt पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें Location : Ghaziabad,Ghaziabad,Uttar Pradesh First Published : March 16, 2026, 11:17 IST









