Sunday, 12 Apr 2026 | 08:46 PM

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Supreme Court Denies Divorce to Husband Separated 16 Years

Supreme Court Denies Divorce to Husband Separated 16 Years

Hindi News National Supreme Court Denies Divorce To Husband Separated 16 Years | Maintenance नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल से पत्नी से अलग रह रहे 54 साल के एक व्यक्ति को तलाक देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह अपनी पत्नी को ₹15,000 मासिक गुजारा भत्ता देता रहे और अगर तलाक चाहिए तो स्थायी गुजारा भत्ते का ठोस प्रस्ताव दे। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि ₹15,000 आज के समय में बहुत कम राशि है। कोर्ट ने साफ कहा, “शांति से ₹15,000 देते रहो, खुश रहो।” इससे पहले हाईकोर्ट ने भी इस व्यक्ति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। पति-पत्नी के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। सुप्रीम कोर्ट बोला- पत्नी को साथ रखो, कोर्ट रूम LIVE पति के वकील: ‘मैं पिछले 16 साल से पत्नी से अलग रह रहा हूं। हर महीने ₹15,000 दे रहा हूं। मेरी सैलरी ₹65,000 है, इससे ज्यादा देने की स्थिति में नहीं हूं।’ सुप्रीम कोर्ट: ‘अगर आप स्थायी गुजारा भत्ते के लिए कोई उचित रकम प्रस्तावित करते हैं, तो तलाक पर विचार किया जा सकता था।’ सुप्रीम कोर्ट: ‘आप अपनी पत्नी को साथ क्यों नहीं रख सकते। अपनी पत्नी को साथ रखो, इसमें दिक्कत क्या है। पति के वकील: ‘दोनों के बीच स्वभाव में मतभेद हैं और वे करीब 16 साल से अलग रह रहे हैं। कई बार मध्यस्थता की कोशिश भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।’ कोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करने के लिए समय दिया कोर्ट ने यह भी कहा कि पति ने क्रूरता का जो आधार बताया है, वह सिर्फ इतना है कि पत्नी चाहती थी कि वह जहां भी पोस्टेड हो, उसके साथ रहे। इस पर कोर्ट ने सवाल किया, इसमें दिक्कत क्या है। वहीं, पत्नी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वह स्थायी गुजारा भत्ता नहीं चाहती और अपने पति के साथ रहना चाहती है। उन्होंने कहा कि दोनों की कोई संतान नहीं है और फिलहाल पत्नी अपनी मां के साथ रह रही है। अंत में कोर्ट ने मामले को खारिज नहीं किया, बल्कि दोनों पक्षों को समय दिया कि वे स्थायी गुजारा भत्ते की राशि पर निर्देश लेकर आएं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। कोर्ट इन आधारों पर तय करता है गुजारा भत्ता पति की आय: यहां पति की सैलरी ₹65,000 है, इसलिए ₹15,000 (करीब 23%) कम माना गया। पत्नी की जरूरतें: रहने, खाने, इलाज, रोजमर्रा खर्च-सब शामिल होते हैं। लाइफस्टाइल: शादी के दौरान जैसा जीवनस्तर था, उसे ध्यान में रखा जाता है। निर्भरता: पत्नी कमाती है या नहीं, यह भी अहम फैक्टर है। अन्य जिम्मेदारियां: बच्चों, माता-पिता की जिम्मेदारी भी देखी जाती है। कानून क्या कहता है CrPC की धारा 125: पत्नी खुद का खर्च नहीं उठा सकती तो पति से भत्ता दिलाया जा सकता है। हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 24/25: केस के दौरान और बाद में स्थायी गुजारा भत्ता तय होता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें: केवल हिंदू-बौद्ध-सिख ही अनुसूचित जाति का दावा कर सकते हैं:सुप्रीम कोर्ट का फैसला- धर्म बदला तो अनुसूचित जाति का दर्जा भी खत्म हो जाता है सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Parenting Checklist & Tips; Husband Wife Happiness

Parenting Checklist & Tips; Husband Wife Happiness

12 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सवाल- मैं अहमदाबाद से हूं। मेरी शादी को 3 साल हो गए हैं। जल्द ही हम पेरेंट बनने वाले हैं। जाहिर है, इस कारण हमारी एंग्जाइटी भी थोड़ी बढ़ी हुई है। हम पेरेंटिंग पर तमाम किताबें पढ़ रहे हैं, पॉडकास्ट सुन रहे हैं। हालांकि ये सब पढ़ना-सुनना और कनफ्यूज कर रहा है। क्या आप हमें कुछ बेसिक टिप्स दे सकते हैं कि हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर जवाब- सबसे पहले आप दोनों को इस नई यात्रा के लिए बहुत बधाई। पढ़कर खुशी हुई कि आप इस नई जिम्मेदारी से पहले खुद को तैयार कर रहे हैं। अवेयरनेस ही अच्छी पेरेंटिंग की पहली सीढ़ी है। सबसे पहले तो ये समझिए कि जब बच्चा दुनिया में आता है तो उसे सुख-सुविधाओं वाले पेरेंट्स से ज्यादा हैप्पी पेरेंट्स की जरूरत होती है। माता-पिता का खुश रहना ही बच्चे के लिए सबसे खूबसूरत तोहफा है। वियतनामी बौद्ध भिक्षु और मशहूर राइटर तिक न्यात हन्ह ने अपनी किताब ‘फिडिलिटी: हाउ टू क्रिएट लविंग रिलेशनशिप दैट लास्ट्स’ में इस बारे में लिखा है- पेरेंटिंग की जिम्मेदारी किताबें पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना अच्छी बात है, क्योंकि ये हमें दिशा देते हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि पेरेंटिंग की असली नींव किसी ट्रेंड या तकनीक पर नहीं, बल्कि घर के माहौल पर टिकी होती है। बच्चा सबसे पहले अपने आसपास के वातावरण से ही सीखता है। अच्छी पेरेंटिंग कोई हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग करना या सुपर मॉम-डैड होना नहीं है। पेरेंट होने की जो एकदम बेसिक जिम्मेदारी है, वो है बच्चे को अनकंडीशनल प्यार और सिक्योरिटी देना। जरूरी बेसिक जिम्मेदारियां नीचे ग्राफिक्स में देखिए- अगर ये बुनियादी जिम्मेदारियां निभाने के लिए तैयार हैं, तो आप हैप्पी पेरेंट्स बनेंगे। बच्चे के आने से पहले खुद को कैसे तैयार करें? अक्सर हम बच्चे के आने की तैयारी कपड़ों, खिलौनों और कमरे की सजावट से करते हैं। लेकिन भावनात्मक तैयारी को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि पेरेंटिंग की असली शुरुआत बच्चे के जन्म से पहले हमारी सोच, हमारे रिश्ते और हमारे धैर्य से हो जाती है। ऐसे में नए पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे खुद को मानसिक रूप से तैयार करें। यह समझें कि पेरेंटिंग कोई परफॉर्मेंस नहीं है, बल्कि यह सीखने की निरंतर प्रक्रिया है। आप जितने मजबूत और संतुलित होंगे, बच्चे को उतना ही सुरक्षित और खुशहाल माहौल दे पाएंगे। इस तैयारी को आसान बनाने के लिए यह छोटी-सी चेकलिस्ट मददगार हो सकती है- आइए, इन पॉइंट्स को थोड़ा विस्तार से समझते हैं। इमोशनली तैयार रहें पेरेंटिंग सिर्फ फिजिकल नहीं, इमोशनल जिम्मेदारी भी है। बच्चे के आने के बाद आपकी नींद, रूटीन और प्राथमिकताएं बदलती हैं। अगर आप मानसिक रूप से तैयार रहेंगे तो बदलाव को स्वीकार करना आसान होगा और बच्चे को ज्यादा स्थिर माहौल दे पाएंगे। अपने रिश्ते में मधुरता रखें बच्चे बड़े होते हुए पेरेंट्स के रिश्ते को देखते और महसूस करते हैं। अगर घर में आपसी सम्मान और प्यार है तो वही उनके व्यवहार में भी झलकता है। पार्टनर के साथ स्वस्थ और संतुलित रिश्ता बनाए रखना पेरेंटिंग का अहम हिस्सा है। सुनने की आदत डालें अक्सर पेरेंट्स बच्चों को समझाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं, उन्हें सुनने पर कम। लेकिन एक अच्छा पेरेंट वही है, जो बच्चे की बातों, भावनाओं और छोटे-छोटे एक्सप्रेशंस को ध्यान से समझे। इससे बच्चे को यह महसूस होता है कि उसकी बात मायने रखती है। इसलिए अभी से सुनने की आदत डालें। धैर्य का अभ्यास करें बच्चे तुरंत नहीं सीखते, वे धीरे-धीरे समझते हैं। एक ही गलती बार-बार दोहराते हैं। ऐसे में गुस्सा करने की बजाय धैर्य रखना जरूरी है। आपका शांत-सरल व्यवहार ही बच्चे को सही मार्गदर्शन देता है। गलतियां स्वीकारना सीखें कोई भी पेरेंट परफेक्ट नहीं होता। अगर गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करें। इससे बच्चा भी अपनी गलतियों को स्वीकारना सीखता है और रिश्ते में भरोसा बढ़ता है। पेरेंटिंग को ‘प्रोजेक्ट’ न समझें पेरेंटिंग कोई टास्क या प्रोजेक्ट नहीं है, जिसे परफेक्ट तरीके से पूरा करना है। यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें सीखना, समझना और बदलना शामिल है। खुद पर परफेक्शन का दबाव डालने से आप और बच्चा दोनों तनाव में आ सकते हैं। परिवार के लिए समय निकालें क्वालिटी टाइम बच्चे की इमोशनल ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है। दिन में कुछ समय निकालकर बच्चे के साथ जरूर बताएं। यही क्वालिटी टाइम माता-पिता और बच्चे की बॉन्डिंग को मजबूत बनाता है। स्क्रीन टाइम कम करें ज्यादा स्क्रीन टाइम न सिर्फ बच्चों, बल्कि पेरेंट्स के व्यवहार को भी प्रभावित करता है। अगर आप खुद स्क्रीन में व्यस्त रहेंगे तो बच्चे के साथ कनेक्शन कम होगा। इसलिए टेक्नोलॉजी का संतुलित उपयोग करें। जरूरत पर काउंसलर की मदद लें अगर कभी लगे कि आप स्थिति को संभाल नहीं पा रहे हैं तो काउंसलर की मदद लेने में न हिचकिचाएं। समय पर सही मार्गदर्शन लेना ही समझदारी है। बच्चे के लिए ‘सेफ स्पेस’ बनें पेरेंटिंग सिर्फ जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे को भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस कराना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। जब आप बच्चे को अनकंडीशनल लव देते हैं तो बच्चा सेफ महसूस करता है। बच्चे को ऐसा महसूस होना चाहिए कि- वह हमेशा सुरक्षित है। वह अपनी गलतियों या भावनाओं को बिना डर के आपके साथ शेयर कर सकता है। आपका प्यार किसी शर्त, परफॉर्मेंस या व्यवहार पर निर्भर नहीं है। उसे किसी और जैसा बनने के लिए मजबूर नहीं किया जाता है। वह जो कहता है, उसे ध्यान से सुना और समझा जाता है। उसके डर, गुस्से या दुख को नकारा नहीं जाता, बल्कि समझा जाता है। मम्मी-पापा हर हाल में उसके साथ खड़े हैं। पेरेंट्स बनने के बाद न करें ये गलतियां बच्चे के जन्म के बाद जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। नई जिम्मेदारियां, नई चिंताएं और कई बार अनजाने डर भी पेरेंट्स के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। ऐसे में अनजाने में कई गलतियां हो जाती हैं, जिनका असर बच्चे की पर्सनैलिटी और इमोशनल ग्रोथ पर पड़ सकता है। याद रखें, बच्चा पेरेंट्स के माध्यम से दुनिया को समझता है। इसलिए जरूरी है कि हम उसे सहज प्यार दें। संतुलित

Long Distance Marriage Challenges; Husband Promotion Vs Wife

Long Distance Marriage Challenges; Husband Promotion Vs Wife

Hindi News Lifestyle Long Distance Marriage Challenges; Husband Promotion Vs Wife | Communication Gap 6 घंटे पहले कॉपी लिंक सवाल: मैं इंदौर में रहती हूं। मेरी शादी को 9 साल हो गए हैं। हमारी एक बेटी है, जो पहली क्लास में पढ़ती है। हम दोनों वर्किंग हैं। 2 महीने पहले हसबैंड का प्रमोशन हुआ और वो जबलपुर चले गए। मैं नहीं चाहती थी कि वो प्रमोशन के लिए शहर छोड़ें। मेरे लिए हम दोनों का साथ होना ज्यादा जरूरी था। लेकिन वो नहीं माने। अब मैं बिल्कुल अकेली पड़ गई हूं। घर–जॉब–बेटी की जिम्मेदारियां अकेले संभाल रही हूं। मैं बहुत फ्रस्टेट हो रही हूं। क्या करूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब: सबसे पहले तो शुक्रिया। आपने अपनी परेशानी को इतने स्पष्ट तरीके से लिखा है। कई बार जीवन में ऐसे मोड़ आते हैं, जहां कठिन फैसले लेने पड़ते हैं। अगर किसी फैसले का असर पूरे परिवार पर पड़े तो यह और कठिन होता है। आप एक मजबूत महिला हैं, जो घर, जॉब और बच्ची की जिम्मेदारी एक साथ संभाल रही हैं। अगर पति दूसरे शहर चले गए हैं और आपको उनका साथ नहीं मिल पा रहा है तो फ्रस्ट्रेशन होना नॉर्मल है। आइए आपकी सिचुएशन को समझते हैं और साथ मिलकर कोई रास्ता निकालते हैं। आप और आपके हसबैंड दोनों सही हैं आपकी स्थिति ऐसी है, जहां कोई गलत नहीं है। आपके हसबैंड प्रमोशन लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं, जो करियर के लिए जरूरी है। जीवन में पैसे कमाना, परिवार की बेहतरी के लिए सोचना ये सब सही है। कल को आपकी बच्ची बड़ी होगी, उसकी पढ़ाई के खर्चे बढ़ेंगे, परिवार के कई सपने पूरे करने होंगे। इसके लिए उनका प्रमोशन लेना जरूरी है। हालांकि आपका पॉइंट भी वैलिड है। आप अकेली पड़ रही हैं। जॉब के साथ घर और बच्ची की देखभाल अकेले करनी पड़ रही है। ऐसे में थकान और फ्रस्ट्रेशन हो सकती है। ऐसे में अगर मन में ये फीलिंग घर कर जाए कि “वो मेरी परवाह नहीं करते या वो सेल्फिश हैं,” तो ये रिश्ते के लिए खतरनाक है। हमें समझना होगा कि दोनों ही अपनी जगह सही हैं। समस्या फैसले में नहीं, बल्कि ‘कम्युनिकेशन की कमी’ में है। अब आपको पति के फैसले पर उलझने की बजाय मौजूदा स्थिति पर बात करनी चाहिए। इसमें सबसे पहला चैलेंज है, ‘लॉन्ग डिस्टेंस मैरिज।’ लॉन्ग डिस्टेंस मैरिज में हैं ये चुनौतियां आपके हसबैंड प्रमोशन लेकर दूसरे शहर चले गए हैं यानी आप लॉन्ग डिस्टेंस मैरिज में हैं। इसकी कुछ अपनी चुनौतियां हैं। सभी चुनौतियां ग्राफिक में देखिए- आपको इन चैलेंजेस से डील करते हुए फ्रस्ट्रेशन हो सकता है, छोटी-छोटी चीजों पर गुस्सा आ सकता है। लॉन्ग डिस्टेंस मैरिज के साइकोलॉजिकल असर पार्टनर के दूर जाने पर अकेलापन महसूस हो सकता है, चिड़चिड़ाहट हो सकती है। इसके अलावा घर की सिचुएशंस से अकेले डील करने से शारीरिक-मानसिक थकान हो सकती है। आप दिनभर जॉब करती हैं, शाम को घर आकर बच्ची का होमवर्क, खाना बनाना ये सब आपको ब्रेकडाउन की कगार पर ला सकता है। साइकोलॉजी में इसे ‘इमोशनल बर्नआउट’ कहते हैं। इसके सभी साइकोलॉजिकल इफेक्ट ग्राफिक में देखिए- बातचीत ही समस्या का हल अब ये समझते हैं कि ऐसी स्थिति में पति आपका कितना साथ दे रहे हैं। उनके फैसले में कोई समस्या नहीं है। देखना ये है कि वो इस सिचुएशन को आपके साथ मिलकर कैसे डील करते हैं। वह प्रमोशन लेकर दूसरे शहर गए हैं, ये फैसला भी कहीं-न-कहीं परिवार के लिए ही है। लेकिन अगर वो आपकी फीलिंग्स को इग्नोर कर रहे हैं, या बात नहीं कर रहे, तो वो चिंता की बात हो सकती है। आपके सवाल से लगता है कि दोनों के बीच सिर्फ कम्युनिकेशन की कमी है। ऐसे में मिलकर बातचीत करना और बीच का रास्ता निकालना ही बेहतर है। बीच का रास्ता निकालें इसके लिए बेहतर है कि वीकेंड पर समय निकालकर साथ बैठें और इस बारे में खुलकर बात करें। आप अपनी फीलिंग्स शेयर करें। पति से क्लियरली बताएं, “मैं थक जाती हूं, अकेले सबकुछ संभालना मुश्किल है। मुझे तुम्हारी मदद चाहिए।” कई बार महिलाएं सोचती हैं कि पार्टनर खुद समझ जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं होता है। आपको खुलकर अपनी बात कहनी होगी और मदद मांगनी होगी। फिजिकल हेल्प के लिए क्या करें? आप अकेले घर संभाल रही हैं, तो थकान से बचने के लिए मदद लें। घर के काम के लिए हाउस-हेल्प रखें। बच्ची को ट्यूशन दिलाएं और प्ले ग्रुप जॉइन कराएं। घर की सफाई के लिए मंथली क्लीनिंग सर्विस लें। इससे आपको थोड़ा रिलीफ मिलेगा। घर का मैनेजमेंट भी ठीक से होगा। ग्राफिक से समझिए- इमोशनल सपोर्ट भी जरूरी हसबैंड के दूर रहने पर इमोशनल सपोर्ट की ज्यादा जरूरत महसूस होने लगती है। हालांकि वह दूसरे शहर में रहकर भी आपकाे सपोर्ट कर सकते हैं। इसके लिए- उनसे रोज फोन पर बात करें। वीडियो कॉल में अपनी बेटी के साथ मिलकर कनेक्टेड रहें। हसबैंड से कहें कि वो आपकी बातें सुनें, सॉल्यूशन दें। कोई बड़ा निर्णय मिलकर लें। महीने में कम-से-कम एक बार मिलने की कोशिश करें। अकेलेपन से कैसे डील करें? इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें- दोस्तों से मिलें। फैमिली से बात करें। बच्ची के साथ पार्क जाएं, योग करें। डेली जर्नलिंग शुरू करें। रोज अपनी फीलिंग्स लिखें। जरूरत पड़े तो काउंसलर से बात करें। बच्चे पर इस सिचुएशन का असर न पड़ने दें आपकी बेटी अभी छोटी है, उसे माता-पिता दोनों की जरूरत है। हसबैंड से कहें कि वो वीडियो कॉल से होमवर्क में हेल्प करें। आप भी पॉजिटिव रहें, ताकि बच्ची खुश रहे। अगर वो अपने पिता को मिस करती है तो साथ में फोटो देखें, स्टोरीज शेयर करें। अगर नकारात्मकता हावी हो तो क्या करें? मन में निगेटिव विचार ज्यादा आने लगें, जैसे- “दूर रहने से कहीं रिश्ता तो नहीं टूट जाएगा” “पति मेरी सिचुएशन नहीं समझते हैं।” ऐसे में तुरंत बात करें। इसे अंदर दबाने से समस्या बढ़ेगी। याद रखें, ये स्थिति टेम्पररी हो सकती है। कई कपल्स लॉन्ग डिस्टेंस में खुश रहते हैं, बस कम्युनिकेशन स्ट्रॉन्ग होना चाहिए। आखिरी बात अंत में यही कहूंगी कि खुद को दोष न दें। आप मजबूत हैं, ये फेज गुजर जाएगा। हसबैंड से कहें कि आपको सपोर्ट चाहिए, और

Saas Bahu Conflict Advice; Husband Support Relationship Tips

Saas Bahu Conflict Advice; Husband Support Relationship Tips

41 मिनट पहले कॉपी लिंक सवाल- मेरी शादी को 2 साल हो चुके हैं। मेरे हसबैंड के पेरेंट्स भी हमारे साथ रहते हैं। यहां बाकी सब तो ठीक है, लेकिन मेरी सास मुझे सख्त नापसंद हैं। वो हर चीज के लिए टोकती हैं। चाहती हैं कि मैं हर काम उनकी मर्जी से, उनसे पूछकर करूं। यहां तक कि उन्हें इस बात से भी समस्या है कि मैं कब-किससे बात करती हूं। ये बातें मेरे हसबैंड को भी पता हैं। अकेले में वो मुझे सपोर्ट करते हैं, लेकिन अपनी मां के सामने चुप रहते हैं। कहते हैं, “मैं मां को नहीं समझा सकता, लेकिन तुम्हें समझा सकता हूं।” मैं समझते-समझते थक गई हूं। क्या करूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- अपनी समस्या को इतने साफ शब्दों में लिखने के लिए शुक्रिया। आपने जो समस्या बताई है, ये अक्सर जॉइंट फैमिली में देखने को मिलती है। यह कोई आदर्श स्थिति नहीं है। बहुत ज्यादा रोक–टोक हो तो परेशानी जायज है। लेकिन पता है, जीवन की और इंसान की सबसे अच्छी बात क्या है। वो ये कि हममें खुद को बदलने की असीमित क्षमता है। आइए आपकी स्थिति को बेहतर बनाने के तरीकों पर बात करते हैं। आपकी फीलिंग्स पूरी तरह वैलिड हैं आप जो महसूस कर रही हैं, वो बिल्कुल सही है। अगर सास हर बात पर टोकती हैं तो इससे आपकी प्राइवेसी और आजादी का दायरा कम हो सकता है। हमारे समाज में सास-बहू के बीच ऐसे कॉन्फ्लिक्ट बहुत कॉमन हैं। सास कंट्रोल करने की कोशिश क्यों करती हैं? सास अकसर बहुओं को कंट्रोल करने की कोशिश इसलिए करती हैं क्योंकि वो सिर्फ बहुओं को ही कंट्रोल कर सकती हैं। अब तक उनकी जिंदगी में जितने भी और रिश्ते थे, उन सब में उनकी स्थिति मातहत की थी। वो अपनी सास को, पति को, बेटे को किसी को कंट्रोल नहीं कर सकती थीं। बहू के रूप में उन्हें जीवन में पहला ऐसा रिश्ता मिला है, जिसके ऊपर उनका पावर है। अपनी सत्ता छिनने का डर इस तरह की स्थितियां अक्सर इनसिक्योरिटी से पैदा होती हैं। अभी सास के हाथ में घर की पावर है। यह सत्ता एक लंबे संघर्ष के बाद उनके पास आई है। इससे पहले ये पावर उनकी सास के हाथ में रही होगी। अब आपके आने से उनके मन में एक अनजाना डर हो सकता है। शायद उन्हें महसूस हो रहा हो कि बहू के आने से घर में उनका हक या उनकी अहमियत कहीं कम न हो जाए। यह भी हो सकता है कि वह जताना चाहती हों कि “इस घर में आज भी मेरी चलती है।” इसलिए वह बार-बार टोककर अपनी जगह सुरक्षित रखने का प्रयास करती हैं। बार-बार टोकने से बढ़ता स्ट्रेस बार-बार टोका-टाकी से किसी भी व्यक्ति के मन पर गहरा असर पड़ता है। इससे तनाव बढ़ सकता है और भावनात्मक संतुलन बिगड़ सकता है। इसके कई साइकोलॉजिकल इफेक्ट हो सकते हैं, सभी ग्राफिक में देखिए- हसबैंड को कैसे समझाएं? आपके हसबैंड अकेले में ही सही, पर आपको सपोर्ट करते हैं। आपने बताया कि वह अपनी मां के सामने चुप रहते हैं। उन्हें बताएं कि ये आपको हर्ट करता है। आप अपने हसबैंड से ये बातें कह सकती हैं- “मैं समझती हूं कि आप मां से प्यार करते हो, लेकिन मुझे भी आपका सपोर्ट चाहिए। मैं खुद को अकेला महसूस करती हूं।” “मां का सम्मान करना अच्छी बात है, लेकिन क्या सम्मान का मतलब हर सही–गलत बात को चुपचाप सिर्फ बर्दाश्त करना होता है?” “क्या आप मां से प्यार से बात नहीं कर सकते। क्या उन्हें प्यार से यह समझाया नहीं जा सकता कि मैं भी तो इस घर की बेटी हूं। मुझे भी थोड़ी आजादी, थोड़ा स्पेस चाहिए।” मेरा बोलना उन्हें बुरा लग सकता है, लेकिन आपकी बात वो सुनेंगी और अमल भी करेंगी। आपको किस बात का डर है कि मां सोचेंगी कि “आप जोरू के गुलाम हो गए हैं।’’ लेकिन आप रोज अपने व्यवहार, अपनी बातों से यह दिखा सकते हैं कि आप अभी भी उन्हें उतना ही प्यार करते हैं। ऊपर मैंने जितने भी उदाहरण पेश किए हैं, उन सबका सार और उनका मकसद एक ही है। अगर प्यार से, संतुलन से और सम्मान से बात की जाए तो दुनिया की कोई ऐसी समस्या नहीं है, जो सुलझ न सके। बिना नाराज हुए, बिना दुखी हुए, बिना आवाज ऊंची किए सिर्फ एक बार अपनी भावनाओं को व्यक्त करके देखिए। अपना पक्ष एक बार तार्किक ढंग से उनके सामने रखकर देखिए। प्यार और कंपैशन से बदल सकते हैं रिश्ते हम ये नहीं कह रहे कि प्यार से पूरी दुनिया बदल जाएगी, लेकिन ये दवा की तरह काम करता है। सास को प्यार दिखाएं। उन्हें महसूस करवाएं कि आप उनकी टीम में ही हैं। इसके लिए छोटी-छोटी चीजें ट्राई करें। जैसे- साथ घूमने जाएं, शॉपिंग करें, टीवी देखें। ह्यूमर से डील करें सिचुएशन आपने सोशल मीडिया पर वो मीम जरूर देखा होगा। एक बहू काम कर रही होती है और सास आकर पूछती है- “तू काम क्यों कर रही है? क्या ये तेरे बाप का घर है?” बहू कहती है, “नहीं।” फिर सास पूछती है, “क्या ये मेरे बाप का घर है?” बहू कहती है, “नहीं।” फिर सास अपने बेटे की तरफ देखती है और कहती है, “ये इसके बाप का घर है। जिसका घर है, वही काम करेगा।” ये ह्यूमर है, लेकिन इसमें सीख ये है कि घर सबका है। सास को ये महसूस करवाएं कि बहू भी फैमिली का हिस्सा है। ह्यूमर से बात कहें, नाराजगी से नहीं। साइकोलॉजिकल हेल्प कब लें? अगर ये तरीके काम न करें तो प्रोफेशनल हेल्प लें। इसके लिए फैमिली थेरेपी ली जा सकती है। इससे आपको प्रोफेशनल टूल्स मिलेंगे, जिससे सिचुएशन को हैंडल करने में मदद मिलेगी। इस दौरान खुद का ख्याल रखें इस बीच खुद को न भूलें। सेल्फ-केयर जरूरी है। जर्नल लिखें, वॉक करें। अपनी हॉबी फॉलो करें। याद रखें, आप अकेली नहीं हैं। लाखों बहुएं ये फेस करती हैं, लेकिन आप मजबूत हैं। दोस्तों से बात करें। जर्नलिंग करें। वॉक और योग करें। हॉबीज ट्राई करें। काउंसलिंग लें। खुद को दोष न दें। एक सच्ची गल्पकथा आखिरी बात से पहले मैं एक कहानी सुनाना चाहती हूं। एक

Pak Punjabi Womans Controversial Statement on Sikhs with Muslim Husband| Viral Video

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लाइव वीडियो में बोलती सरबजीत कौर और साथ में उसका पाकिस्तानी पति नासिर हुसैन। सिख श्रद्धालुओं की आड़ में पाकिस्तान जाकर मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करने वाली पंजाबी महिला सरबजीत का नया VIDEO सामने आया है। यह वीडियो टिकटॉक पर बनाया गया है, जिसमें सरबजीत के साथ उसका मुस्लिम पति नासिर हुसैन भी नजर आ रहा है। इस वीडियो में सरबजीत सिखों . वह सिखों के पाकिस्तान आने पर सवाल उठाने के साथ कह रही है कि अगर पाकिस्तान वाले एक हो जाएं तो इनकी रोजी-रोटी बंद हो जाए। इससे पहले सरबजीत को खालिस्तानियों का सपोर्ट का वीडियो सामने आया था। जिसमें उन्होंने सरबजीत को बुआ और उसके मुस्लिम पति नासिर को अपना फुफ्फड़ बताते हुए मदद का भरोसा दिया था। वहीं सरबजीत के पहले पंजाबी NRI पति करनैल सिंह ने भी लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। जिसमें उसने दावा किया कि पाकिस्तानी नासिर हुसैन ने ब्लैकमेल कर सरबजीत को पाकिस्तान बुलाया। फिर उसके साथ जबरदस्ती शादी की। उसने हाईकोर्ट में नासिर पर रेप केस दर्ज कर सरबजीत को भारत लौटाने की मांग की है। इस पर कोर्ट ने उससे जुड़े सारे डॉक्यूमेंट्स तलब किए हैं। टिकटॉक के लाइव वीडियो में बोलती सरबजीत कौर, इस दौरान उसका पाकिस्तानी पति भी पीछे बैठा हुआ है। पहले जानिए, वीडियो में सरबजीत क्या कह रही सरबजीत अपने पाकिस्तानी पति नासिर हुसैन के साथ टिकटॉक पर लाइव आई, उस समय दोनों को 200 से ज्यादा लोग लाइव देख रहे थे। इस दौरान सरबजीत कहती है- अगर इस्लाम वाले एक हो जाएं ना, तो इनका रोटी-पानी बंद हो जाएगा। हमने इनसे कुछ लेकर खाना है क्या? अगर सरदार होंगे तो अपने घर में होंगे। ये तो मेरी @$%# के बराबर हैं — मेरी टूटी @$%# , जिसे मैंने कूड़े में फेंक दिया है। इसके बाद वह आगे कहती है- ये लोग पाकिस्तान क्यों आते हैं? पाकिस्तान तो हमारा है, मुसलमानों का है। मैं यहां अपना घर बसाने के लिए आई हूं ऐश करने के लिए नहीं। इस दौरान लाइव में एक व्यक्ति कमेंट करता है- स्वाद लेते-लेते लाहौर पहुंच गई। इतने में सरबजीत का पाकिस्तानी पति तंज भरे लहजे में बोलता है, अगर कोई और भी है, तो उसे भी इधर भेज देना। इसके बाद उनके लाइव में जुड़ा एक व्यक्ति कहता है- यहां 200 लोग देख रहे हैं, नीचे कमेंट कर दो कि इसने सही किया या गलत, लोग जवाब देंगे। दूसरा व्यक्ति सरबजीत के पक्ष में कहता है- इसमें गलत क्या है? यह उसकी निजी जिंदगी है। क्या वह लोगों से पूछकर अपनी जिंदगी गुजारेगी?। फिर पहले वाला व्यक्ति पूछता है- जो इसके भारत में बच्चे हैं, उनका क्या? इस पर सरबजीत भड़क जाती है, वह कहती है- तू कौन होता है मुझे बोलने वाला? इस दौरान उसका पाकिस्तानी पति नासिर उसे चुप कराने की कोशिश करता है, लेकिन सरबजीत इतनी गुस्से में आ जाती है कि उस व्यक्ति को मां-बहन की गालियां देने लगती है। इसके बाद सरबजीत गुस्से में कहती हैं, आप लोग लाहौर, पाकिस्तान क्यों आते हो? ननकाना साहिब गुरुद्वारा में क्या करने आते हो? तब तो मिन्नतें करते हो कि हमारा वीजा लगवा दो। आखिर में वह धमकी देते हुए कहती है कि अब अगर पाकिस्तान आए ना, तो इनकी लाशें ही भारत जाएंगी। हालांकि दैनिक भास्कर इस वीडियो में कही बातों की पुष्टि नहीं करता। मुस्लिम पति नासिर हुसैन के साथ खुश नजर आती सरबजीत कौर। सरबजीत पाकिस्तान कैसे पहुंची, 3 पॉइंट में जानिए सिख श्रद्धालुओं के साथ गई, वापस नहीं आई: सरबजीत कौर 4 नवंबर 2025 को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर 1932 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ अटारी बॉर्डर के जरिए पाकिस्तान गई थी। जत्था 10 दिनों तक विभिन्न गुरुधामों के दर्शन करने के बाद भारत लौट आया। लेकिन वापसी के समय 1922 श्रद्धालु ही लौटे। सरबजीत कौर जत्थे में शामिल नहीं मिलीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित भारतीय एजेंसियों ने सरबजीत कौर की तलाश शुरू की। निकाहनामा वायरल होने से खुलासा हुआ: भारतीय दूतावास और पाकिस्तान स्थित अधिकारियों से भी संपर्क साधा गया ताकि महिला का पता लगाया जा सके। इसी बीच सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के शेखुपुरा की मस्जिद में हुआ निकाहनामा वायरल हुआ। जिसके बाद दावा किया गया कि सरबजीत कौर ने इस्लाम स्वीकार कर नाम बदलकर ‘नूर हुसैन’ रख लिया है। उसने नासिर हुसैन नाम के पाकिस्तानी नागरिक से निकाह कर लिया। पाकिस्तान पुलिस ने कस्टडी में लिया, फिर छोड़ दिया: पाकिस्तान में भी सरबजीत को लेकर सवाल उठे क्योंकि उसके पास पाकिस्तान में रहने की परमिशन नहीं थी। जिसको लेकर मामला कोर्ट तक पहुंच गया। इसके बाद पुलिस ने उसे ननकाना साहिब से अरेस्ट किया। फिर कुछ दिन लाहौर के शेल्टर होम में रखा। इसके कुछ दिन बाद वह रिहा हो गई। पुलिस के हिरासत में लेने के बाद सरबजीत इस तरह से नजर आई थी। सरबजीत ने बताई लव स्टोरी, 2 पॉइंट में जानिए मुंह में दांत न भी रहते तो पाकिस्तान जाती: सरबजीत कौर की रिहाई के बाद पहली बार उसकी बातचीत का वीडियो सामने आया। इसमें पाकिस्तानी मीडिया से बात करते हुए सरबजीत ने कहा कि अगर सच्चा प्यार होता है, तो दिल में यह एहसास जरूर रहता है कि हम एक-दूसरे से मिलेंगे। हमारा प्यार आज का नहीं, बल्कि पिछले 8 साल से है। अगर मुंह में दांत भी न रहते, तब भी मैं पाकिस्तान जरूर आती। फेसबुक पर दोस्ती, फिर प्यार हुआ, पति UK रहता: इसके बाद पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल को इंटरव्यू में सरबजीत ने अपनी लव स्टोरी भी बताई थी। सरबजीत ने कहा था- नासिर हुसैन से बातचीत 2016 में फेसबुक के जरिए शुरू हुई थी, जो बाद में दोस्ती से प्यार में बदल गई और 2025 के अंत तक शादी कर ली। सरबजीत ने बताया कि उसका पति 22 साल से यूके में है और वह मोबाइल अपने बच्चों से छिपाकर रखती थी। पाकिस्तान के यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में सरबजीत लव स्टोरी बताते हुए खुश नजर आई थी। पहला पति लाहौर हाईकोर्ट पहुंचा, बोला- ब्लैकमेल-रेप किया इस मामले में सरबजीत के पहले पति करनैल सिंह की भी एंट्री हो चुकी है। करनैल ने लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा

Pak Man Blackmail Punjabi Woman Sarabjit Kaur, Husband Alleges Financial Drain

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सरबजीत और करनैल सिंह का फाइल फोटो। भारत से पाकिस्तान जाकर एक मुस्लिम व्यक्ति नासिर हुसैन से निकाह करने वाली पंजाबी महिला सरबजीत कौर के पति करनैल सिंह ने हाल ही में एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कई अहम बातें शेयर कीं। . उन्होंने बताया कि वह करीब 20 साल से इंग्लैंड में रह रहे हैं। सरबजीत कौर और बच्चों के खिलाफ भारत में कई केस दर्ज हैं। इन केसों के निपटारे के लिए उन्हें बहुत पैसे चाहिए थे। इसके लिए वह इंग्लैंड में रहकर पैसे कमाते रहे और वकीलों की फीस भरते रहे। यही कारण है कि वह सरबजीत और अपने बच्चों को समय नहीं दे सके। करनैल सिंह के मुताबिक, आज भी कई मामलों में जमानत और कानूनी प्रक्रिया चल रही है, जिस पर लगातार खर्च हो रहा है। वह हर महीने ढाई से 3 लाख रुपए सरबजीत के खाते में डालते थे, जिनसे केस लड़े जा सके और पत्नी-बच्चे जेल से बाहर रहे। इंटरव्यू के दौरान करनैल सिंह ने यह भी कहा कि विदेश में रहने के बावजूद उनका परिवार से संपर्क कभी पूरी तरह नहीं टूटा। उनका कहना है कि वह सरबजीत से पहले भी रोजाना बात करते थे और आज भी कई बार बातचीत होती है। उन्होंने बताया कि सरबजीत कौर इस समय काफी दुखी है। सरबजीत ने उनसे कहा कि वह उन्हें इंग्लैंड अपने पास बुला लें। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि पहले वह भारत आ जाएं, उसके बाद वह उसे अपने पास इंग्लैंड बुला लेंगे। पाकिस्तान में नासिर हुसैन के साथ रील बनाती सरबजीत कौर। – फाइल फोटो पढ़िए, करनैल सिंह ने सवालों के क्या जवाब दिए… सवाल: आपकी पत्नी सरबजीत कौर पाकिस्तान गईं। वहां नासिर हुसैन से शादी कर ली। आपको कैसे पता लगा कि नासिर के साथ सरबजीत के संबंध हैं? जवाब: मुझे सरबजीत की अश्लील फोटो आई थीं। मुझे, उसके (सरबजीत के) भाई को और मेरे बच्चों को भी भेजी गई थीं। उसके बाद सरबजीत सुसाइड करने लगी थी, जिसे बहुत मुश्किल से बचाया गया था। यह बात पाकिस्तान जाने से 2 साल पहले की है। सवाल: फोटो भेजने के बाद आपकी नासिर से बात हुई? क्या बात हुई थी? जवाब: उस समय हमने पाकिस्तान में वकील किया था कि इसे रोको। मगर वह रुका नहीं। बार-बार फोटो भेजता रहा था। वह सरबजीत को पाकिस्तान आने के लिए मजबूर करता था। सवाल: जब सुसाइड करने लगी थी तब आपकी वाइफ सरबजीत ने क्या कहा था? जवाब: कहती थी कि नासिर ब्लैकमेल करता है, पैसे मांगता है। इसी कारण वह ठीक भी नहीं रहती थी। सरबजीत डिप्रेशन की मरीज है। सवाल: आपने एक इंटरव्यू सुना होगा जिसमें सरबजीत कह रही हैं कि मैं पाकिस्तान आई हूं, मुझे बहुत खुशी है, मेरा सपना पूरा हो गया, मैं बहुत खुश हूं? जवाब: सरबजीत का वकील ही कहता है कि ऐसी वीडियो बनाओ। फिर तुम्हें पाकिस्तान की गवर्नमेंट नेशनलिटी दे देगी। सब कुछ वही करवा रहे हैं, लेकिन अंदर की बात यह है कि वह दुखी है। सवाल: आप कहते हैं कि वह दबाव में है। फिर वह आपको कॉल कैसे कर देती है? जवाब: वह दुखी होकर, मरने के किनारे जैसी हालत में कॉल कर देती है। कहती है कि मैं दुखी हूं, मरने के किनारे हूं, पता नहीं मैं मर जाऊं। सरबजीत ने मुझे यह भी बताया कि उसका मोबाइल तोड़ दिया गया था। इसलिए, उसने नया फोन लिया। उसने अपनी सोने की चेन 6 लाख रुपए में बेची, डेढ़ लाख रुपए उसके पास हैं और 1 लाख 70 हजार रुपए का नया फोन लिया है। बाकी पैसे नासिर ने ले लिए। वह कहती है कि नासिर पैसे मांगता था। जब तक पैसे देती रहेगी, तब तक ठीक रहेगा। बाद में वह कुछ भी कर सकता है। सवाल: आप विदेश में 20 साल से हैं। पहले आपकी उससे बात होती थी? जवाब: पहले मेरी उससे रोज तीन-चार बार बात होती थीं। अब भी कई बार बात हो चुकी हैं। सवाल: क्या सरबजीत आपसे कहती है कि वह वापस आना चाहती है? जवाब: हां, वह कहती है कि उसे डराया-धमकाया जाता है और कहा जाता है कि भारत जाने पर भारतीय एजेंसियां उसे पकड़ लेंगी। सवाल: आपकी क्या मजबूरी थी कि आप 20 साल से भारत नहीं आए? जवाब: देखिए, यहां परिवार पर बहुत सारे केस थे। करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं। आप मेरे गांव जाकर भी पूछ सकते हैं। अगर मैं पैसे नहीं लगाता तो वे लोग शायद जिंदगी भर जेल से बाहर नहीं आ पाते। आज भी करोड़ों रुपये लग रहे हैं। पैसों के जरिए ही समझौते करवाए गए हैं। मेरे बेटों पर अभी भी केस हैं। भारत में पैसा नहीं बनता, इसलिए मजबूरी में मुझे विदेश में रहना पड़ा। यहां पैसे कमाकर भारत में अपने परिवार के केसों का निपटारा कर रहा हूं। सवाल: अगर सरबजीत वापस आती है तो क्या आप इंग्लैंड से भारत वापस आएंगे? जवाब: जी, कुछ दिन पहले ही मेरी उससे बात हुई थी। वह कह रही थी कि मुझे इंग्लैंड बुला लो। मैंने कहा था कि मैं बुला लूंगा, लेकिन पहले भारत आ जाओ। इस समय सरबजीत कौर पाकिस्तान में है। वह नासिर हुसैन से शादी कर नूर फातिमा बन गई है। – फाइल फोटो ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ सरबजीत कौर से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… पाक गई पंजाबी महिला बोली- ब्लैकमेल कर निकाह किया:वकील से रोते हुए कहा- नासिर पर कार्रवाई कराना चाहती हूं, मुझे भारत भिजवा दो PAK गई पंजाबी महिला बोली- असीं लाहौरिए हां:इंडिया में हमारी 20 किले जमीन, पाकिस्तान में नंबरदार रहे; मुस्लिम से निकाह कर चुकी PAK गई पंजाबी महिला बोली- मेरा 8 साल पुराना प्यार:मुंह में दांत न रहते तो भी जरूर पाकिस्तान आती; मुस्लिम से निकाह रचाकर खुश हूं पाकिस्तान में निकाह करने वाली सरबजीत कौर की बढ़ी मुश्किलें:लाहौर हाईकोर्ट में याचिका- इसे गिरफ्तार करो, भारत वापस भेजो; सुरक्षा के लिए खतरा पाकिस्तान गई पंजाबी महिला का निकला क्रिमिनल रिकॉर्ड:वेश्यावृत्ति की भी FIR; हिसार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा का इंटरव्यू करने वाले ने वेलकम किया

Wife Holi Celebration Vs Husband; Suppress Desires – Silent Stress

Wife Holi Celebration Vs Husband; Suppress Desires - Silent Stress

Hindi News Lifestyle Wife Holi Celebration Vs Husband; Suppress Desires Silent Stress | Relationship 12 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक सवाल- होली मेरा सबसे फेवरेट त्योहार है। बचपन में हम सबसे ज्यादा खुशी और उत्साह से होली का इंतजार करते थे। पूरा परिवार और मोहल्ला इकट्ठा होकर होली खेलता था। मेरे दिल में होली की बहुत सुंदर यादें हैं। लेकिन जब से मेरी शादी हुई है, होली खेलना बिल्कुल बंद हो गया है। मेरे पति बहुत कंजरवेटिव इंसान हैं। उन्हें मेरा होली खेलना बिल्कुल पसंद नहीं है। मेरे ससुराल में कोई भी होली को लेकर एक्साइटेड नहीं रहता। होली खेलने का बहुत मन करता है, लेकिन हसबैंड के कारण मन मारकर रह जाती हूं। क्या करूं? पति से झगड़ा करूं या मन मारकर बैठी रहूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले तो आपका शुक्रिया, क्योंकि आपका सवाल पढ़कर मेरी अपने बचपन की होली की सुंदर यादें ताजा हो गईं। अब आपकी बात। आपकी परेशानी सिर्फ एक त्योहार तक सीमित नहीं है, यह आपकी ‘खुशी के अधिकार’ का भी मामला है। होली कई लोगों के लिए यादों, रिश्तों और खुलकर जीने का एहसास है। आपके सवाल में जो सबसे खूबसूरत बात है, वह है आपका उस खुशी से जुड़ाव, बचपन की वो हंसी, रंगों में भीगा अपनापन और बिना किसी झिझक के जीने का मौका। यही वजह है कि आज जब वो सब नहीं मिल पा रहा, तो भीतर एक खालीपन महसूस हो रहा है। सबसे पहले मैं आपको यह बताना चाहूंगी कि आपकी भावना पूरी तरह जायज है। आप सिर्फ होली खेलना मिस नहीं कर रही हैं, बल्कि उस माहौल को मिस कर रही हैं जिसमें आप खुलकर जी पाती थीं। चलिए समझते हैं कि इस स्थिति को बिना झगड़े के कैसे संभाला जाए। इच्छाओं को दबाने से बनता है ‘साइलेंट स्ट्रेस’ शादी के बाद अक्सर महिलाएं अपने मन की इच्छाओं को ‘एडजस्टमेंट’ के नाम पर दबा देती हैं। शुरू में यह छोटा सा समझौता लगता है, लेकिन लंबे समय में यही दबाव अंदर-ही-अंदर फ्रस्ट्रेशन, उदासी और कभी-कभी गुस्से का रूप ले लेता है। जब आप बार-बार अपने मन को दबाती, रोकती हैं कि “चलो, इस बार नहीं खेलते, पति को पसंद नहीं है,” तो धीरे-धीरे आप खुद से दूर होने लगती हैं। साइकोलॉजी की भाषा में इसे ‘सेल्फ-सप्रेशन’ कहते हैं, जो मेंटल स्ट्रेस की मुख्य वजह बन सकता है। इसके क्या असर होते हैं, ग्राफिक में देखिए- आप मिस कर रही हैं ‘खुलकर जीने का एहसास’ आपको लग रहा होगा कि ये फ्रस्ट्रेशन होली में ‘रंग’ न खेल पाने की वजह से है, लेकिन असल में आप रंग नहीं, वो ‘आजादी का एहसास’ मिस कर रही हैं। जब आप अपनों के साथ मिलकर होली खेलती थीं, तो वो एक ऐसा माहौल होता था, जिसमें कोई जजमेंट नहीं था। सब हंसते थे, गले मिलते थे और बेफिक्र रहते थे। इस असली बात को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि समाधान भी यहीं से निकलेगा। जब आप जान जाएंगी कि आपकी असली जरूरत क्या है, तो उसे पूरा करने के रास्ते भी साफ दिखने लगेंगे। ससुराल का माहौल अलग होना गलत नहीं आपके ससुराल में अगर कोई होली नहीं खेलता है, तो हो सकता है कि उनके घर में कभी ऐसा माहौल ही नहीं रहा हो। हर परिवार का ‘सेलिब्रेशन’ का तरीका अलग होता है। कुछ परिवारों के लिए त्योहार का मतलब सिर्फ अच्छा खाना और आराम करना होता है। हमें यह समझना होगा कि आपके पति या ससुराल वाले ‘बुरे’ नहीं हैं। बस उनका नजरिया अलग है। हो सकता है कि उनके पीछे कुछ वाजिब कारण हों। मायके जाने से हल हो सकती है समस्या आपने अपने सवाल में ही समाधान का संकेत दिया है कि आपके मायके में होली आज भी वैसी ही धूमधाम से खेली जाती है। यही सबसे सरल संतुलित रास्ता है। प्लानिंग करें: आप हर साल या हर दूसरे साल होली पर अपने मायके जाने का प्लान बना सकती हैं। वही पुराना माहौल: वहां आपको वही यादें और वही बेफिक्री दोबारा मिलेगी। बिना डर के खुशी: वहां आपको पति की नाराजगी या ससुराल के नियमों का डर नहीं रहेगा। रिश्ते में बैलेंस: इससे न तो आपको अपनी इच्छा दबानी पड़ेगी और न ही पति से सीधा टकराव होगा। पति से बात कैसे करें? झगड़ा करना या मन मारकर बैठना, दोनों ही एक्सट्रीम फैसले हैं। आपको बीच का रास्ता निकालना होगा। पति को यह न कहें कि “आप गलत हैं”, बल्कि यह कहें कि “होली मेरे लिए कितनी जरूरी है।” ऐसे बोलें, “मुझे पता है, आपको रंगों से परेशानी है और मैं उसका सम्मान करती हूं। लेकिन होली मेरे बचपन का सबसे प्यारा हिस्सा है। जब मैं नहीं खेलती, तो मुझे बहुत उदासी महसूस होती है। क्या इस बार मैं दो दिन के लिए मम्मी के घर जाकर होली खेल आऊं? इससे आपकी शांति भी बनी रहेगी और मेरी खुशी भी।” खुद को खोने मत दीजिए शादी के बाद अक्सर महिलाएं अपनी पहचान धीरे-धीरे खोने लगती हैं। वे भूल जाती हैं कि उनकी भी कुछ पसंद थी। याद रखिए, एक खुशहाल रिश्ता वही होता है, जहां दोनों पार्टनर अपनी व्यक्तिगत खुशियों को भी जगह दें। आपकी खुशियां, आपकी पसंद, आपकी छोटी-छोटी इच्छाएं उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, जितना आपका रिश्ता। अगर आप अंदर से खुश नहीं रहेंगी, तो आप एक अच्छी पत्नी या बहू की भूमिका भी लंबे समय तक नहीं निभा पाएंगी। झगड़ा नहीं, समझदारी से मिलता है समाधान आपकी समस्या का समाधान झगड़े में नहीं, बल्कि समझदारी में है। अपनी इच्छाओं को दबाइए मत, बल्कि उन्हें जीने का नया तरीका ढूंढिए। होली रंगों का त्योहार है, लेकिन उससे भी ज्यादा यह ‘दिल के रंगों’ का त्योहार है। इन रंगों को अपने जीवन से गायब मत होने दीजिए। इस बार होली पर अपने मायके जाने का प्लान बनाइए या पति को प्यार से अपनी भावनाओं का हिस्सा बनाइए। यकीन मानिए, जब आप अपनी खुशी की जिम्मेदारी खुद लेंगी, तो आपके चेहरे की मुस्कान ही आपके हर सवाल का सबसे सुंदर जवाब होगी। हेल्दी रिश्ते की 3 सीख एक-दूसरे की आदतों को स्वीकार करें। पार्टनर को अपनी पसंद की चीजें करने की आजादी दें। अपनी खुशी के लिए पार्टनर पर 100% निर्भर न

एक्स हसबेंड ने X वाइफ से लिया ऐसा बदला, सन्न रह गया पूरा शहर, चारों तरफ मची चीख-पुकार | hyderabad sunitha murdered case ex husband arrested revenge inside story domestic violence canada visa passport suspension

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Last Updated:February 19, 2026, 13:28 IST हैदराबाद के वनस्थलीपुरम में एक पूर्व पति ने अपनी एक्स वाइफ के साथ जो सलूक किया, उसकी चर्चा सोशल मीडिया पर शुरू हो गई है. एक्स हसबेंड ने अपनी ही एक्स वाइफ को चाकू से गोदकर हत्या कर दी. पूर्व पत्नी ने पूर्व पति पर घरेलू हिंसा का केस क रखा था. इस कारण आरोपी का पासपोर्ट जब्त हो गया था और वह कनाडा नहीं जा पा रहा था. इसी रंजिश में उसने खौफनाक वारदात को अंजाम दिया. हैदराबाद पुलिस ने आरोपी को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया है. हैदराबाद में एक्स पति ने एक्स वाइफ से लिया खौफनाक बदला. हैदरबाद. तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के वनस्थलीपुरम इलाके में बुधवार को दिन-दहाड़े एक ऐसी घटना घटी है, जिससे हर कोई हैरान और परेशान हो गया. एक पति-पत्नी की तलाक के बाद जो कहानी सामने आई, वह हर किसी को होश उड़ा रहा है. एक आईटी इंजीनियर ने पारिवारिक कलह और कोर्ट कचहरी के चक्कर से तंग आकर अपराधी बन गया. सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपनी एक्स वाइफ के घर में घुसकर मौत के घाट उतार दिया. हत्या के बाद बाथरूम में बंद हो गया. पुलिस ने आरोपी शख्स को गिरफ्तार कर लिया है. मृतक की पहचान सुनीता के रूप में हुई है और आरोपी शख्स का नाम महेश है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह शख्स क्यों इस घटना को अंजाम दिया? क्या मां की मौत ने शख्स को अंदर से तोड़ दिया था? क्या यह हत्या केवल निजी दुश्मनी का नतीजा था या फिर इसके पीछे करियर की बर्बादी, कानूनी पचड़े और परिवार की मौत का बदला लेने की एक लंबी और सनकी दास्तां छिपी थी? कहानी शुरू होती है साल 2022 में जब आरोपी और 29 वर्षीय पीड़िता की शादी हुई थी. दोनों ही आईटी क्षेत्र में काम करते थे और एक खुशहाल भविष्य का सपना देख रहे थे. शादी के बाद पति कनाडा चला गया और कुछ समय बाद पत्नी भी उसके पास पहुंच गई. लेकिन सात समंदर पार जाने के बाद दोनों के बीच दूरियां कम होने के बजाय बढ़ने लगीं. आपसी विवाद इतना बढ़ गया कि महिला वापस भारत लौट आई और उसने महाराष्ट्र में अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज करा दिया. सनक की वजह- पासपोर्ट जब्त और मां की मौत साल 2024 में दोनों का आधिकारिक रूप से तलाक हो गया. महिला ने अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाते हुए अप्रैल 2025 में दूसरी शादी कर ली. वहीं दूसरी ओर आरोपी पति की मुश्किलें बढ़ती जा रही थीं. मार्च 2025 में उसकी मां का निधन हो गया, जिसके बाद वह भारत आया. लेकिन घरेलू हिंसा के केस के कारण उसके खिलाफ लुक-आउट सर्कुलर जारी हो चुका था. इस वजह से उसका पासपोर्ट निलंबित कर दिया गया और वह वापस कनाडा नहीं जा सका. 30-year-old woman allegedly stabbed multiple times by her ex-husband

love triangle bloody end : friendship illicit relationship | husband wife woh | delhi police mystery suspicion of extra marital affairs | पति, पत्नी और वो… दोस्ती या अवैध संबंध? जानें दिल्ली में दिल दहला देने वाली वारदात की इनसाइड स्टोरी

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नई दिल्ली. कहते हैं कि शक एक ऐसा जहर है जो हंसते-खेलते परिवार को नरक बना देता है. दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में एक ऐसी घटना घटी है, जो सोचने को मजबूर कर दिया है कि क्या किसी महिला को मदद करना भी गुनाह है? क्या शादी के बाद अगर कोई महिला किसी मर्द के साथ दोस्ती करता है तो उसे अवैध रिश्ता ही माना जाएगा? दिल्ली में एक ऐसी घटना घटी है, जो सोचने को मजबूर कर रहा है कि शादीशुदा महिला किसी गैरमर्द के साथ एक कमरे में दोस्त बनकर क्या रह सकता है? क्या गोकुलपुरी में हुई दिल दहला देने वाली घटना के बाद दिल्ली पुलिस की जांच महिला के अवैध संबंध के एंगल पर भी होगी? पढ़ें दिल्ली में पति, पत्नी और वो की एक ऐसी कहानी, जिसका क्लाइमेक्स धीरे-धीरे बाहर आने लगा है और जिसका अंत रोंगटे खड़े कर देने वाला था. पति ने पत्नी के दोस्त की हत्या कर दी है. हत्या के बाद पत्नी ने दिल्ली पुलिस को बयान दिया है कि उसके पति ने एक ऐसे शख्स की बेरहमी से हत्या कर दी, जो उसके बुरे वक्त में बच्चों के लिए फरिश्ता बनकर आया था. कहानी की शुरुआत होती है करीब 10 महीने पहले. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया की रहने वाली 35 वर्षीय महिला का पति गौरी शंकर यादव गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती था. घर में खाने के लाले पड़े थे और बच्चों का भविष्य अंधकार में था. उस वक्त रवि नाम का युवक महिला के जीवन में सहारा बनकर आया. कहानी पति, पत्नी और वो की महिला के मुताबिक रवि ने न केवल महिला की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कीं, बल्कि उसे आत्मनिर्भर भी बनाया. रवि की मदद से ही महिला ने गोकुलपुरी में एक फूड स्टॉल शुरू किया, ताकि वह अपने बच्चों को पाल सके. जब महिला के सामने रहने का संकट आया तो रवि ने ही उसे एक कमरा किराए पर दिलाया और उसकी ढाल बनकर साथ खड़ा रहा. पति के लौटने के बाद क्या हुआ? लेकिन 6 फरवरी को गौरी शंकर यादव सूरत से दिल्ली वापस लौटा तो उसे अचानक दोनों के संबंध को लेकर शक होने लगा. एक ही घर में रवि की मौजूदगी उसे खटकने लगी. गौरी शंकर को लगने लगा कि उसकी पत्नी और रवि के बीच अवैध संबंध हैं. उसे यह अहसान नहीं दिखा कि उसकी गैरमौजूदगी में रवि ने ही उसके परिवार को बिखरने से बचाया था. 7 फरवरी की रात को रवि को लेकर पति-पत्नी के बीच जमकर झगड़ा हुआ. विवाद इतना बढ़ गया कि डरी हुई पत्नी ने मामला शांत करने के लिए रवि को छत पर सोने के लिए भेज दिया. उसे लगा कि सुबह तक गुस्सा ठंडा हो जाएगा, लेकिन उसे क्या पता था कि रवि के लिए वह रात आखिरी साबित होगी. अगली सुबह का वो खौफनाक मंजर अगली सुबह जब महिला ऊपर पहुंची, तो उसकी चीख निकल गई. रवि खून से लथपथ पड़ा था. पास ही लकड़ी की एक मोटी छड़ी पड़ी थी, जो रवि के सिर पर वार करने की वजह से दो टुकड़ों में टूट चुकी थी. चारों तरफ खून ही खून था. रवि को तुरंत जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी गौरी शंकर यादव को हिरासत में ले लिया. कड़ी पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि वह शक की आग में इतना अंधा हो गया था कि उसने गुस्से में रवि के सिर पर डंडे से कई वार किए. पुलिस ने महिला का बयान दर्ज किया है, जिसमें उसने रवि के ‘एहसानों’ और पति के ‘क्रूर’ व्यवहार की पूरी कहानी सुनाई है.