Saturday, 01 Aug 2026 | 05:15 PM

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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 37 होगी:कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दी, संसद के अगले सत्र में बिल पेश होगा

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 37 होगी:कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दी, संसद के अगले सत्र में बिल पेश होगा

केंद्रीय कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार संसद के अगले सत्र में इससे जुड़ा विधेयक पेश करेगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल चीफ जस्टिस समेत 33 जजों की तय संख्या है। सरकार इसमें चार नए जज जोड़ना चाहती है। इसके लिए संसद के अगले सत्र में बिल लाया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद 1956 के कानून में संशोधन किया जाएगा। संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का अधिकार संसद के पास है। कानून लागू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम नए जजों के नाम सरकार को भेजेगा। 2019 में आखिरी बार बढ़ी थी संख्या 2019 में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 33 की गई थी। अब छह साल बाद फिर संख्या बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इससे पहले सरकार ने 2008 में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 26 से बढ़ाकर 31 की थी। सुप्रीम कोर्ट में अभी 2 खाली पद फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में दो पद खाली हैं। जस्टिस बी.आर. गवई नवंबर 2025 में और जस्टिस राजेश बिंदल अप्रैल 2026 में रिटायर हुए थे। आने वाले महीनों में सुप्रीम कोर्ट में तीन और पद खाली होने वाले हैं। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस पंकज मित्तल जून 2026 में रिटायर होंगे, जबकि जस्टिस संजय करोल अगस्त 2026 में सेवानिवृत्त होंगे। संविधान के अनुच्छेद 124(3) के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का जज वही बन सकता है जो भारतीय नागरिक हो। इसके लिए व्यक्ति का कम से कम पांच साल तक हाईकोर्ट में जज रहना या 10 साल तक वकील के तौर पर काम करना जरूरी है। किसी प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ को भी सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग सुप्रीम कोर्ट में इस समय 92,385 पेंडिंग मामले हैं। कोविड के बाद ई-फाइलिंग बढ़ने से मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। केंद्र सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में बताया कि देशभर के कोर्ट में कुल 5.49 करोड़ से अधिक केस पेंडिंग हैं। इसमें 90,897 मामले सुप्रीम कोर्ट और देश के 25 हाई कोर्ट में 63,63,406 मामले लंबित थे। ————-

15,000 Jobs Cut Globally; India Hit Hardest

15,000 Jobs Cut Globally; India Hit Hardest

नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक IT सेक्टर की बड़ी कंपनी कॉग्निजेंट अपने वर्कफोर्स में बड़ी कटौती करने जा रही है, जिससे दुनिया भर में 15,000 से ज्यादा कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस छंटनी में भारत में सबसे ज्यादा कर्मचारियों की नौकरियां जाएंगी, जो ओरेकल और अमेजन के बाद इस साल की सबसे बड़ी टेक छंटनी मानी जा रही है। कॉग्निजेंट के कुल 3.57 लाख से ज्यादा कर्मचारियों में से 2.50 लाख कर्मचारी भारत में काम करते हैं। हालांकि, कंपनी ने छंटनी की सटीक संख्या का अभी ऐलान नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, 12,000 से 15,000 के बीच नौकरियां जा सकती हैं। भारत कंपनी का सबसे बड़ा वर्कफोर्स हब है, इसलिए यहां असर भी सबसे ज्यादा होने की संभावना है। सेवरेंस पर 320 मिलियन डॉलर खर्च करेगी कंपनी कंपनी ने छंटनी का अनुमान ‘प्रोजेक्ट लीप’ के तहत तय किए गए बजट के आधार पर लगाया है। 29 अप्रैल को तिमाही नतीजों की घोषणा के दौरान कॉग्निजेंट ने बताया कि वह सेवरेंस कॉस्ट (कर्मचारियों को हटाते समय दिया जाने वाला मुआवजा) पर 230 मिलियन डॉलर से 320 मिलियन डॉलर खर्च करने की उम्मीद कर रही है। इसमें कर्मचारियों को दिया जाने वाला कंपनसेशन और अन्य बेनेफिट्स शामिल हैं। भारत में कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी ₹15 लाख भारत में कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी लगभग 15 लाख रुपए है। यदि छंटनी में निकाले गए कर्मचारियों को 6 महीने की सैलरी के बराबर सेवरेंस पे दिया जाता है, तो हर एक कर्मचारी को लगभग 7.5 लाख रुपए मिलेंगे। इस हिसाब से कंपनी द्वारा तय बजट अकेले भारत में ही लगभग 12,000 से 13,000 कर्मचारियों की छंटनी को कवर कर सकता है। क्लाइंट्स की बदलती पसंद और नया मॉडल इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्लाइंट अब पुराने ‘स्टाफिंग पिरामिड’ मॉडल से दूर जा रहे हैं, जो एंट्री-लेवल के कर्मचारियों पर निर्भर रहता था। अब क्लाइंट्स नए फ्रेशर्स के बड़े बैच को ट्रेनिंग देने का खर्च उठाने के लिए तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि कंपनियां अब अपने स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही हैं। सीईओ रवि कुमार एस का विजन कॉग्निजेंट के CEO रवि कुमार एस ने दुनिया भर में किए जा रहे इन बदलावों की पुष्टि की है। उन्होंने अर्निंग्स कॉल के दौरान कहा कि कंपनी अब एक ‘व्यापक और छोटे पिरामिड’ की ओर बढ़ रही है। इसमें डिजिटल लेबर और ह्यूमन लेबर यानी इंसानी श्रम और तकनीक का एक साथ इस्तेमाल किया जाएगा। भारत में कॉग्निजेंट के प्रमुख ऑफिस बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में हैं। सेवरेंस पैकेज क्या होता है? जब कोई कंपनी कर्मचारी को उसकी मर्जी के बिना नौकरी से निकालती है, तो उसे आर्थिक सहायता के रूप में दी जाने वाली राशि को सेवरेंस पे कहते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India Acquires S-400 Missile Squadrons

India Acquires S-400 Missile Squadrons

नई दिल्ली3 घंटे पहलेलेखक: मुकेश कौशिक कॉपी लिंक एस-400 मिसाइल के एक स्क्वॉड्रन में 8 लॉन्चर होते हैं और प्रत्येक लॉन्चर में 4 मिसाइल कंटेनर होते हैं। भारत सरकार एस-400 मिसाइलों के 5 नए स्क्वॉड्रन खरीदने की तैयारी कर रही है। इसके एक स्क्वॉड्रन में 8 लॉन्चर होते हैं और प्रत्येक लॉन्चर में 4 मिसाइल कंटेनर होते हैं। इस हिसाब से करीब 32 बड़ी मिसाइलें मिलेंगी। पिछले साल 7 से 10 मई के बीच चले ऑपरेशन सिंदूर में हमारे एयर डिफेंस सिस्टम की एस-400 मिसाइलों ने पाकिस्तान में 300 किलोमीटर अंदर घुसकर कहर बरपाया था, अब हमारे रक्षा बेड़े में अब उनकी तादाद बढ़ने जा रही है। खरीदी की दिशा में रूस के साथ चर्चा में सकारात्मक प्रगति हुई है। वायु सेना के लिए 5 एस-400 का पहला सौदा 2018 में हुआ था। 3 सिस्टम्स मिल चुके हैं। दो सिस्टम और ऑपरेशन सिंदूर में खर्च हुई बैटरी की मिसाइलों की भरपाई होनी है। इसके बाद नए स्क्वॉड्रन आएंगे। इस तरह दोनों सौदे करीब एक लाख करोड़ रुपए के होंगे। डीआरडीओ एस-400 जैसी ही इंटरसेप्टर मिसाइलें बना रहा है। यह प्रोजेक्ट कुशा है। इसमें एम-1, 2 और 3 मिसाइलें बन रहीं हैं, जिनकी रेंज 105 से 350 किमी होगी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम ने पाकिस्तानी अटैक को रोका था और 5-6 लड़ाकू विमानों और एक जासूसी विमान को गिराया था अगले 6 महीने में मिलेंगी पहले सौदे की दो स्क्वॉड्रन एस-400 दोतरफा प्रहार करती है। पहला: ध्वनि की गति से 3 से 14 गुना गति से 400 किमी दूर तक हमला करती हैं। दूसरा: दुश्मन की तरफ से आ रही बैलिस्टिक मिसाइलों को 4.8 किमी प्रति सेकंड की गति से मार गिराती है। मैक 15 गति वाली हाइपरसोनिक मिसाइलें भी इसकी रेंज से बच नहीं पातीं। पहली डील 40 हजार करोड़ में हुई पहली डील 40 हजार करोड़ में हुई थी। दूसरी पर सहमति रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान बनी थी। इनकी आपूर्ति का रोडमैप बन गया है। युद्ध के कारण रूस से डिलेवरी में देरी हो रही थी। अब भारत को आश्वस्त किया गया है कि आने वाले 6 महीने में शेष दो स्क्वैड्रन सप्लाई कर दिए जाएंगे। अंतरिक्ष से सर्विलांस में बड़े सुधार करना सबसे बड़ी जरूरत है रिटा. एयर वाइस मार्शल संजय भटनागर (स्ट्रेटेजिक प्लानिंग एवं ऑफेंसिव ऑपरेशन्स) के मुताबिक वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों का विश्लेषण करने के बाद कई कदम उठाए हैं। पाकिस्तान ने 7-8 मई 2025 की दरम्यानी रात दो घंटे में 800 ड्रोन्स की बौछार की थी। ऐसे में ड्रोन्स को काउंटर करने पर ध्यान दिया जा रहा है। चीन के पास 4 हजार सैटेलाइट हैं और इनमें भी 480 सर्विलांस के लिए हैं। हमें भी अंतरिक्ष से सर्विलांस में बड़े सुधार करने हैं। अभी भारत के पास इस काम के लिए 6 सैटेलाइट हैं। अब 52 उपग्रहों का सिस्टम तैयार हो रहा है। S-400 डिफेंस सिस्टम क्या है? S-400 ट्रायम्फ रूस का एडवांस्ड मिसाइल सिस्टम है, जिसे 2007 में लॉन्च किया गया था। यह सिस्टम फाइटर जेट, बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल, ड्रोन और स्टेल्थ विमानों तक को मार गिरा सकता है। यह हवा में कई तरह के खतरों से बचाव के लिए एक मजबूत ढाल की तरह काम करता है। दुनिया के बेहद आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम में इसकी गिनती होती है। इस सिस्टम की खासियत क्या है? S-400 की सबसे बड़ी खासियत इसका मोबाइल होना है। यानी रोड के जरिए इसे कहीं भी लाया ले जाया जा सकता है। इसमें 92N6E इलेक्ट्रॉनिकली स्टीयर्ड फेज्ड ऐरो रडार लगा हुआ है जो करीब 600 किलोमीटर की दूरी से ही मल्टीपल टारगेट्स को डिटेक्ट कर सकता है। ऑर्डर मिलने के 5 से 10 मिनट में ही ये ऑपरेशन के लिए रेडी हो जाता है। S-400 की एक यूनिट से एक साथ 160 ऑब्जेक्ट्स को ट्रैक किया जा सकता है। एक टारगेट के लिए 2 मिसाइल लॉन्च की जा सकती हैं। S-400 में 400 इस सिस्टम की रेंज को दर्शाता है। भारत को जो सिस्टम मिल रहा है, उसकी रेंज 400 किलोमीटर है। यानी ये 400 किलोमीटर दूर से ही अपने टारगेट को डिटेक्ट कर काउंटर अटैक कर सकता है। साथ ही यह 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी अपने टारगेट पर अटैक कर सकता है। कहां तैनात हैं एस-400? एस-400 की एक स्क्वाड्रन में 256 मिसाइल होती हैं। भारत के पास इस वक्त 3 स्क्वाड्रन हैं, जिन्हें अलग-अलग तरफ की सीमाओं पर तैनात किया गया है। पहली स्क्वाड्रन – पंजाब में तैनात की गई है। भारत को पहली 2021 में रूस ने पहली स्क्वाड्रन सौंपी थी। यह पाकिस्तान और चीन दोनों की ओर से आने वाले खतरों को रोकने के लिए है। दूसरी स्क्वाड्रन – सिक्किम (चीन सीमा) में तैनात है। भारत को यह खेप जुलाई 2022 में मिली थी। यहां से चिकन नेक पर भी निगरानी रखी जाती है। तीसरी स्क्वाड्रन- राजस्थान-गुजरात या पंजाब/राजस्थान सीमा पर तैनात है। भारत को यह खेप फरवरी 2023 में मिली। इस स्क्वाड्रन से पश्चिमी सीमा की सुरक्षा मजबूत होती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India Retains ICC T20 Top Ranking After World Cup Win

India Retains ICC T20 Top Ranking After World Cup Win

दुबई2 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत ने 8 मार्च को अहमदाबाद में न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर लगातार दूसरी बार टी-20 वर्ल्ड कप जीता। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में इस साल टी-20 वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रचने वाली भारतीय टीम ने ICC की टी-20 टीम रैंकिंग में भी अपना पहला स्थान बरकरार रखा है। मंगलवार को ICC ने सालाना अपडेट जारी किया है। अपडेशन के बाद टी-20 में टीम इंडिया 275 अंकों के साथ पहले पायदान पर काबिज है, जबकि इंग्लैंड (262 अंक) दूसरे और ऑस्ट्रेलिया (258 अंक) तीसरे स्थान पर है। पिछले एक साल के डेटा को 100% वेटेज मिलता है ICC रैंकिंग में तीन साल के डेटा होते हैं। पिछले 12 महीनों में हुए मुकाबलों का वेटेज 100% होता है। उससे पहले के 2 साल के डेटा का वेटेज 50% होता है। मौजूदा रैंकिंग में मई 2023 से अप्रैल 2024 और मई 2024 से अप्रैल 2025 तक हुए मैचों को 50-50% दिया गया है। वहीं, मई 2025 के बाद के मैचों का वेटेज 100% है। यहां से अप्रैल 2026 तक होने वाले मैचों को भी 100% वेटेज मिलेगा। यानी जब अगले साल मई में नया अपडेट होगा तो उसमें से 2023 से 2024 तक हुए मैचों को रैंकिंग गणना से बाहर कर दिया जाएगा। फिर 2024 से 2025 और 2025 से 2026 तक के मैचों का वेटेज 50% हो जाएगा और 1 मई 2026 के बाद हुए मैचों को ही 100% वेटेज मिलेगा। अपडेशन के बाद टी-20 रैंकिंग के टॉप-7 पायदानों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। श्रीलंका को नुकसान, बांग्लादेश और अमेरिका की लंबी छलांग श्रीलंका को 6 रेटिंग अंकों का नुकसान हुआ है, जिससे वे फिसलकर 9वें स्थान पर आ गए हैं। इसका फायदा बांग्लादेश को मिला है, जो अब 8वें नंबर पर पहुंच गया है। वहीं, उत्तर अमेरिका में क्रिकेट की उभरती ताकत ‘यूएसए’ (USA) ने 6 अंकों के फायदे के साथ 13वां स्थान हासिल कर लिया है। अमेरिका ने नीदरलैंड और स्कॉटलैंड जैसी अनुभवी टीमों को पीछे छोड़ दिया है। इटली ने चौंकाया, 4 टीमें रैंकिंग से बाहर हुईं टी20 वर्ल्ड कप में पहली बार शामिल हुई इटली की टीम ने शानदार प्रदर्शन के दम पर रैंकिंग में तीन पायदान की छलांग लगाई है। नेपाल को 10 विकेट से हराने वाली इतालवी टीम अब 23वें स्थान पर पहुंच गई है। दूसरी ओर, ICC रैंकिंग में शामिल टीमों की संख्या 102 से घटकर 98 रह गई है। फिजी, गाम्बिया, ग्रीस और इज़राइल को रैंकिंग से बाहर कर दिया गया है क्योंकि उन्होंने पिछले तीन वर्षों में न्यूनतम 8 टी20 मैच नहीं खेले थे। विमेंस कैटेगरी में ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत बरकरार विमेंस टी-20 रैंकिंग में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने अपना नंबर-1 स्थान बरकरार रखा है। ताजा रैंकिंग में ऑस्ट्रेलिया 287 पॉइंट्स हैं। इंग्लैंड 275 पॉइंट्स लेकर दूसरे और भारतीय टीम 264 पॉइंट्स के साथ तीसरे नंबर पर काबिज है। रैंकिंग के टॉप-16 पोजीशन में कोई बदलाव नहीं हुआ है। —————————————- भारतीय क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… विमेंस टी-20 वर्ल्डकप के लिए टीम इंडिया का ऐलान BCCI ने विमेंस टी-20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय महिला टीम का ऐलान कर दिया है। पिछले साल वनडे वर्ल्डकप जिताने वालीं कप्तान हरमनप्रीत कौर को ही टीम की कप्तानी सौंपी गई है, जबकि स्मृति मंधाना को ही वाइस कैप्टन बनाया गया है। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry

India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry

Hindi News National India Election Results | West Bengal, Tamil Nadu, Kerala Govt Change; NDA Returns Assam, Puducherry 1 मिनट पहले कॉपी लिंक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के रिजल्ट सोमवार को आए। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में सरकारें बदल गईं। असम और पुडुचेरी में एनडीए ने वापसी की। बंगाल में TMC को हराकर भाजपा पहली बार सत्ता में आई। पार्टी दस साल में 3 सीटों से 206 सीटों पर पहुंच गई है। तमिलनाडु में एक्टर थलपति विजय की पार्टी TVK ने सबसे ज्यादा सीटें लाकर चौंका दिया। 59 साल में पहली बार राज्य में ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसमें DMK या AIADMK नहीं होगी। दो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एम के स्टालिन चुनाव हार गए। बंगाल में 15 साल बाद ममता का राज खत्म भाजपा को वोट शेयर 7.50% बढ़ा, TMC का इतना ही घटा बंगाल में 12 मंत्री हारे, भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट 1. महिला को मिल सकती है कमान: बंगाल में भाजपा ने बिना चेहरे के चुनाव लड़ा, इसलिए अब बड़ा सवाल यह है कि कौन मुख्यमंत्री होगा। संभावित नामों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार, दिलीप घोष और समिक भट्टाचार्य का नाम सबसे आगे है। पार्टी किसी महिला चेहरे को भी ला सकती है। 2. भाजपा का 70% स्ट्राइक रेट: बंगाल में भाजपा ने 293 में से 206 सीटें जीतकर करीब 70% का स्ट्राइक रेट हासिल किया। वहीं, TMC 81 सीटों पर सिमट गई और उसका स्ट्राइक रेट करीब 27.6% रहा। 3. ममता समेत 12 मंत्री हारे: सीएम ममता समेत 12 मंत्री चुनाव हार गए। ममता के पास होम मिनिस्ट्री समेत 7 महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी थी। महिला और बाल कल्याण मंत्री शशि पांजा, उदयन गुहा, ब्रत्य बसु, चंद्रिमा भट्टाचार्य, सुजीत बसु, सिद्दीकुल्लाह चौधरी, रथिन घोष, बेचाराम मन्ना, बिरबाहा हंसदा, मोलय घटक को हार का सामना करना पड़ा है। 4. पहली बार राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार: 1972 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में अब ऐसी पार्टी की सरकार होगी, जो केंद्र में भी सत्ता में है। 1972 में राज्य में कांग्रेस ने 216 सीटें जीतीं थीं और उस वक्त केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी। बांग्लादेश सीमा, घुसपैठ और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी सख्ती हो सकती है। मोदी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में इसका ऐलान भी किया। 5. नॉर्थ से साउथ तक BJP: साउथ बंगाल पहले TMC का मजबूत गढ़ था, यहां BJP ने सबसे ज्यादा 33 सीटें जीतीं। नॉर्थ 24 परगना में BJP ने 18 सीटें जीत लीं। TMC को यहां 15 सीटें मिलीं। पूर्वी मेदिनीपुर में BJP ने 16 और हुगली में 15 सीटें जीतीं। नॉर्थ बंगाल की 54 सीटों में BJP ने 27 सीटें जीतीं। मालदा में BJP को 8 और TMC को 4 सीटें मिलीं। जंगलमहल में भाजपा ने पुरुलिया की 9, बांकुरा की 11 पश्चिम मेदिनीपुर 12 सीटें जीतीं। टीएमसी ने सबसे अधिक सीटें दक्षिणी बंगाल में जीतीं। 6. सबसे छोटी और सबसे बड़ी जीत: बंगाल की सतगछिया सीट पर सबसे कम मार्जिन वाली जीत हुई। BJP के अग्निस्वर नास्कर ने TMC के सोमाश्री बेताल को 401 वोट से हराया है। माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर जीत का मार्जिन सबसे बड़ा रहा। यहां BJP के आनंदमय बर्मन ने TMC के शंकर मलाकर को 1,04,265 वोट से हराया। मोदी का 242 सीट पर प्रचार, 184 में भाजपा जीती मोदी ने सोमवार शाम को भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। वे बंगाली कुर्ता-धोती पहनकर पहुंचे। मोदी ने अपनी जनसभाओं और रोड-शो के जरिए बंगाल की 294 में से 242 सीटें कवर कीं। इनमें से 184 सीटों पर भाजपा की जीत हुई। भाजपा ने राज्य में 208 सीटें जीतीं। जिन सीटों पर मोदी ने सभा या रोड-शो किया, वहां पार्टी का स्ट्राइक रेट 76% रहा। ममता भवानीपुर से चुनाव हारीं, सुवेंदु दोनों सीट पर जीते SIR से अनुपात में मुस्लिम वोटर्स के नाम ज्यादा कटे SIR के तहत बंगाल में वोटर लिस्ट से करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए। भाजपा को 2.89 और TMC को 2.57 करोड़ वोट मिले। दोनों पार्टियों के बीच 31 लाख 84 वोटों का अंतर रहा। SIR में 63% (लगभग 57.47 लाख) हिंदू और 34% (लगभग 31.1 लाख) मुस्लिमों के नाम कटे थे। सीधा मतलब है कि आबादी के अनुपात में मुस्लिम वोट ज्यादा कटे। जिन इलाकों में मुस्लिम वोटर निर्णायक हो सकते थे, वहां कमजोर हो गए। इसका फायदा भाजपा को हुआ। भाजपा की स्ट्रैटजी, शाह 15 दिन बंगाल में रहे शाह 15 दिन बंगाल में रहे। बंगाल में पहली बार ‘पन्ना प्रमुख’ स्ट्रैटजी पर काम किया। 44,000 से ज्यादा मतदान केंद्रों को ‘मजबूत’, ‘केंद्रित’ व ‘कमजोर’ श्रेणियों में बांटा। हर पन्ना प्रमुख को 30-60 मतदाताओं की सीधी जिम्मेदारी दी। उनका कार्य प्रचार करना और यह सुनिश्चित करना था कि उनके आवंटित वोटर मतदान केंद्र पहुंचें। टीएमसी की महिलाओं में ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी कल्याणकारी योजनाएं काफी लोकप्रिय हुईं। इसमें 1000-1200 रु. दिए जा रहे थे। भाजपा सबके लिए 3 हजार की योजना लाई। सुवेंदु अधिकारी और अमित शाह ने बार-बार मंचों से आश्वासन दिया कि भाजपा कोई मौजूदा योजना बंद नहीं करेगी, उनके लाभ और बढ़ाएगी। राज्य के कर्मियों के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग को तुरंत लागू करने और सभी बकाया वेतन विसंगतियों को दूर करने का प्रमुख वादा किया। तमिलनाडु में 2 साल पुरानी TVK ने 50+ साल पुरानी DMK-AIADMK को हराया एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी TVK को 108 सीट पर जीत मिली है। ये DMK (59) और AIDMK (47) की कुल सीटों से ज्यादा है। TVK का उत्तर-मध्य में दबदबा, 46% स्ट्राइक रेट विजय की पार्टी TVK ने हर इलाके में सीटें जीतीं। सबसे अधिक दबदबा उत्तर और तटीय इलाकों में रहा। मध्य तमिलनाडु में भी उसे खूब सीटें मिलीं। DMK ने ज्यादातर सीटें दक्षिणी इलाकों में जीतीं। AIADMK को अधिकतर सीटें उत्तर-मध्य क्षेत्र में मिलीं। TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर 46% के साथ सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट हासिल किया। DMK ने 164 में 59 सीटें जीतकर 36% और AIADMK ने 170 में 47 सीटों के साथ 27.6% स्ट्राइक रेट दर्ज किया। कांग्रेस 28 में 5 सीटें जीतकर 17.8% पर रही। BJP का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा। पार्टी 27 सीटों पर लड़कर सिर्फ

नेपाल बोला- लिपुलेख से मानसरोवर यात्रा न करें:ये हमारा इलाका; भारत के इस हिस्से को पहले भी नेपाल अपना बताता रहा

नेपाल बोला- लिपुलेख से मानसरोवर यात्रा न करें:ये हमारा इलाका; भारत के इस हिस्से को पहले भी नेपाल अपना बताता रहा

नेपाल सरकार ने लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा हैं। सरकार ने कहा कि लिपुलेख के रास्ते प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर उसने भारत और चीन दोनों को डिप्लोमैटिक तरीके से अपनी आपत्ति और चिंता से अवगत करा दिया है। नेपाल ने यह भी बताया कि वह पहले भी भारत से इस इलाके में सड़क निर्माण, व्यापार और पर्यटन जैसी एक्टिविटी न करने की अपील करता रहा है। नेपाल ने चीन को भी आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी है कि लिपुलेख उसका हिस्सा है। नेपाल इससे पहले भी लिपुलेख को अपना हिस्सा बताता रहा है। उसने पिछले साल कुछ नोट जारी किए थे, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था, जबकि ये तीनों इलाके भारतीय सीमा में आते हैं। नेपाल सरकार की तरफ से जारी प्रेस रिलीज… दो नदियों से तय हुई भारत-नेपाल की सीमा भारत, नेपाल और चीन सीमा से लगे इस इलाके में हिमालय की नदियों से मिलकर बनी एक घाटी है, जो नेपाल और भारत में बहने वाली काली या महाकाली नदी का उद्गम स्थल है। इस इलाके को कालापानी भी कहते हैं। यहीं पर लिपुलेख दर्रा भी है। यहां से उत्तर-पश्चिम की तरफ कुछ दूरी पर एक और दर्रा है, जिसे लिंपियाधुरा कहते हैं। अंग्रेजों और नेपाल के गोरखा राजा के बीच 1816 में हुए सुगौली समझौते में काली नदी के जरिए भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। समझौते के तहत काली नदी के पश्चिमी क्षेत्र को भारत का इलाका माना गया, जबकि नदी के पूर्व में पड़ने वाला इलाका नेपाल का हो गया। काली नदी के उद्गम स्थल, यानी ये सबसे पहले कहां से निकलती है, इसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहा है। भारत पूर्वी धारा को काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम धारा मानता है और इसी आधार पर दोनों देश कालापानी के इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। लिपुलेख दर्रे से गुजरती है मानसरोवर यात्रा, चीनी सेना पर निगरानी भी आसान नेपाल ने 11 साल पहले भी विरोध जताया था पीएम मोदी ने 2015 में चीन यात्रा के दौरान उन्होंने और तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग ने लिपुलेख के रास्ते व्यापार बढ़ाने का समझौता किया था। नेपाल ने उस समय भी इसका विरोध किया था, क्योंकि यह फैसला नेपाल से बिना सलाह के लिया गया था। नेपाल ने तब भारत और चीन को डिप्लोमेटिक नोट भेजे थे। 4 जुलाई से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा विदेश मंत्रालय ने कुछ समय पहले ही कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल जारी किया है। इस साल भी यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के नाथुला दर्रे से संचालित होगी। दोनों रूट से 10-10 बैचों में कुल 1000 श्रद्धालु यात्रा करेंगे, जिनमें लिपुलेख रूट से 500 यात्री शामिल होंगे। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से संचालित होने वाली इस यात्रा का पहला बैच 4 जुलाई को दिल्ली से रवाना होगा। इससे पहले यात्रियों को 30 जून से 3 जुलाई तक दिल्ली में मेडिकल, डॉक्यूमेंट और ब्रीफिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस बार यात्रा को लेकर सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लगभग पूरी यात्रा सड़क मार्ग से होगी। जहां पहले 60 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलना पड़ता था, वहीं अब कुल यात्रा में सिर्फ 38 किलोमीटर ट्रेक ही बचा है। पूरी यात्रा 1738 किलोमीटर की होगी, जिसमें ज्यादातर दूरी वाहन से तय की जाएगी।

नेपाल बोला- लिपुलेख से मानसरोवर यात्रा न करें:ये हमारा इलाका; भारत के इस हिस्से को पहले भी नेपाल अपना बताता रहा

नेपाल बोला- लिपुलेख से मानसरोवर यात्रा न करें:ये हमारा इलाका; भारत के इस हिस्से को पहले भी नेपाल अपना बताता रहा

नेपाल सरकार ने लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा हैं। सरकार ने कहा कि लिपुलेख के रास्ते प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर उसने भारत और चीन दोनों को डिप्लोमैटिक तरीके से अपनी आपत्ति और चिंता से अवगत करा दिया है। नेपाल ने यह भी बताया कि वह पहले भी भारत से इस इलाके में सड़क निर्माण, व्यापार और पर्यटन जैसी एक्टिविटी न करने की अपील करता रहा है। नेपाल ने चीन को भी आधिकारिक तौर पर यह जानकारी दी है कि लिपुलेख उसका हिस्सा है। नेपाल इससे पहले भी लिपुलेख को अपना हिस्सा बताता रहा है। उसने पिछले साल कुछ नोट जारी किए थे, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था, जबकि ये तीनों इलाके भारतीय सीमा में आते हैं। नेपाल सरकार की तरफ से जारी प्रेस रिलीज… दो नदियों से तय हुई भारत-नेपाल की सीमा भारत, नेपाल और चीन सीमा से लगे इस इलाके में हिमालय की नदियों से मिलकर बनी एक घाटी है, जो नेपाल और भारत में बहने वाली काली या महाकाली नदी का उद्गम स्थल है। इस इलाके को कालापानी भी कहते हैं। यहीं पर लिपुलेख दर्रा भी है। यहां से उत्तर-पश्चिम की तरफ कुछ दूरी पर एक और दर्रा है, जिसे लिंपियाधुरा कहते हैं। अंग्रेजों और नेपाल के गोरखा राजा के बीच 1816 में हुए सुगौली समझौते में काली नदी के जरिए भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। समझौते के तहत काली नदी के पश्चिमी क्षेत्र को भारत का इलाका माना गया, जबकि नदी के पूर्व में पड़ने वाला इलाका नेपाल का हो गया। काली नदी के उद्गम स्थल, यानी ये सबसे पहले कहां से निकलती है, इसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहा है। भारत पूर्वी धारा को काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम धारा मानता है और इसी आधार पर दोनों देश कालापानी के इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। लिपुलेख दर्रे से गुजरती है मानसरोवर यात्रा, चीनी सेना पर निगरानी भी आसान नेपाल ने 11 साल पहले भी विरोध जताया था पीएम मोदी ने 2015 में चीन यात्रा के दौरान उन्होंने और तत्कालीन चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग ने लिपुलेख के रास्ते व्यापार बढ़ाने का समझौता किया था। नेपाल ने उस समय भी इसका विरोध किया था, क्योंकि यह फैसला नेपाल से बिना सलाह के लिया गया था। नेपाल ने तब भारत और चीन को डिप्लोमेटिक नोट भेजे थे। 4 जुलाई से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा विदेश मंत्रालय ने कुछ समय पहले ही कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल जारी किया है। इस साल भी यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख और सिक्किम के नाथुला दर्रे से संचालित होगी। दोनों रूट से 10-10 बैचों में कुल 1000 श्रद्धालु यात्रा करेंगे, जिनमें लिपुलेख रूट से 500 यात्री शामिल होंगे। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से संचालित होने वाली इस यात्रा का पहला बैच 4 जुलाई को दिल्ली से रवाना होगा। इससे पहले यात्रियों को 30 जून से 3 जुलाई तक दिल्ली में मेडिकल, डॉक्यूमेंट और ब्रीफिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस बार यात्रा को लेकर सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लगभग पूरी यात्रा सड़क मार्ग से होगी। जहां पहले 60 किलोमीटर से ज्यादा पैदल चलना पड़ता था, वहीं अब कुल यात्रा में सिर्फ 38 किलोमीटर ट्रेक ही बचा है। पूरी यात्रा 1738 किलोमीटर की होगी, जिसमें ज्यादातर दूरी वाहन से तय की जाएगी।

India Loses Semifinal to France; Lakshya Sen Out Due to Injury

India Loses Semifinal to France; Lakshya Sen Out Due to Injury

Hindi News Sports Thomas Cup: India Loses Semifinal To France; Lakshya Sen Out Due To Injury 21 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत की पुरुष बैडमिंटन टीम थॉमस कप के सेमीफाइनल में फ्रांस से हारकर बाहर हो गई। 2022 की चैंपियन भारतीय टीम 3-0 से हारी। इस मुकाबले में भारत का कोई खिलाड़ी मैच नहीं जीत सका। मैच से पहले ही लक्ष्य सेन को कोहनी की चोट के कारण बाहर बैठना पड़ा, जो टीम के लिए बड़ा झटका था। फ्रांस ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उसने ग्रुप स्टेज में 14 बार की चैंपियन इंडोनेशिया को हराने के बाद भारत को भी एकतरफा मुकाबले में हराया। लक्ष्य सेन कोहनी की चोट के कारण बाहर रहे क्वार्टर फाइनल मैच के दौरान लक्ष्य सेन को दाहिनी कोहनी में चोट लग गई थी। मैच के दौरान कई बार डाइव लगाने की वजह से उनकी कोहनी में सूजन आ गई थी। भारतीय बैडमिंटन संघ (BAI) के महासचिव संजय मिश्रा ने बताया कि मेडिकल स्टाफ की सलाह पर एहतियात के तौर पर उन्हें आराम दिया गया ताकि वे गंभीर चोट से बच सकें। उनकी गैरमौजूदगी में भारत की चुनौती कमजोर पड़ गई। लक्ष्य सेन को दाहिनी कोहनी में चोट लग गई थी। आयुष शेट्टी को क्रिस्टो पोपोव ने 39 मिनट में हराया मुकाबले की शुरुआत में आयुष शेट्टी का सामना क्रिस्टो पोपोव से हुआ। पोपोव ने शुरू से ही मैच पर दबदबा बनाए रखा और नेट पर शानदार खेल दिखाया। उन्होंने आयुष को 21-11, 21-9 से हराकर फ्रांस को 1-0 की बढ़त दिला दी। 39 मिनट तक चले इस मैच में आयुष कहीं भी टिकते नजर नहीं आए। कल अपना 21वां जन्मदिन मनाने जा रहे आयुष ने हार के बाद कहा, “क्रिस्टो आज काफी बेहतर खेल रहे थे। उनकी स्पीड और गेम प्लान ने मुझे दबाव में डाल दिया।” किदांबी श्रीकांत और एचएस प्रणय भी नहीं दिला पाए जीत दूसरे मैच में किदांबी श्रीकांत का मुकाबला एलेक्स लानियर से था। श्रीकांत ने लड़ने की कोशिश की, लेकिन लानियर ने सीधे गेम में 21-18, 21-16 से जीत दर्ज कर फ्रांस की बढ़त 2-0 कर दी। इसके बाद ‘डू और डाई’ मुकाबले में एचएस प्रणय कोर्ट पर उतरे। उनका मुकाबला टोमा जूनियर पोपोव से था। प्रणय ने मैच की अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन अंत में वे अपनी लय बरकरार नहीं रख पाए और 19-21, 16-21 से मैच हार गए। इसके साथ ही भारत का सफर सेमीफाइनल में खत्म हो गया। उबर कप: साउथ कोरिया और चीन के बीच होगा फाइनल महिलाओं के उबर कप टूर्नामेंट में साउथ कोरिया ने फाइनल में जगह बना ली है, जहां उनका मुकाबला चीन से होगा। सेमीफाइनल में साउथ कोरिया ने इंडोनेशिया को 3-1 से मात दी। वहीं, दूसरे सेमीफाइनल में चीन ने जापान को 3-0 से हराकर फाइनल का टिकट कटाया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News Sports Thomas Cup: India Loses Semifinal To France; Lakshya Sen Out Due To Injury 1 घंटे पहले कॉपी लिंक भारत की पुरुष बैडमिंटन टीम थॉमस कप के सेमीफाइनल में फ्रांस से हारकर बाहर हो गई। 2022 की चैंपियन भारतीय टीम 3-0 से हारी। इस मुकाबले में भारत का कोई खिलाड़ी मैच नहीं जीत सका। मैच से पहले ही लक्ष्य सेन को कोहनी की चोट के कारण बाहर बैठना पड़ा, जो टीम के लिए बड़ा झटका था। फ्रांस ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन जारी रखा। उसने ग्रुप स्टेज में 14 बार की चैंपियन इंडोनेशिया को हराने के बाद भारत को भी एकतरफा मुकाबले में हराया। लक्ष्य सेन कोहनी की चोट के कारण बाहर रहे क्वार्टर फाइनल मैच के दौरान लक्ष्य सेन को दाहिनी कोहनी में चोट लग गई थी। मैच के दौरान कई बार डाइव लगाने की वजह से उनकी कोहनी में सूजन आ गई थी। भारतीय बैडमिंटन संघ (BAI) के महासचिव संजय मिश्रा ने बताया कि मेडिकल स्टाफ की सलाह पर एहतियात के तौर पर उन्हें आराम दिया गया ताकि वे गंभीर चोट से बच सकें। उनकी गैरमौजूदगी में भारत की चुनौती कमजोर पड़ गई। लक्ष्य सेन को दाहिनी कोहनी में चोट लग गई थी। आयुष शेट्टी को क्रिस्टो पोपोव ने 39 मिनट में हराया मुकाबले की शुरुआत में आयुष शेट्टी का सामना क्रिस्टो पोपोव से हुआ। पोपोव ने शुरू से ही मैच पर दबदबा बनाए रखा और नेट पर शानदार खेल दिखाया। उन्होंने आयुष को 21-11, 21-9 से हराकर फ्रांस को 1-0 की बढ़त दिला दी। 39 मिनट तक चले इस मैच में आयुष कहीं भी टिकते नजर नहीं आए। कल अपना 21वां जन्मदिन मनाने जा रहे आयुष ने हार के बाद कहा, “क्रिस्टो आज काफी बेहतर खेल रहे थे। उनकी स्पीड और गेम प्लान ने मुझे दबाव में डाल दिया।” किदांबी श्रीकांत और एचएस प्रणय भी नहीं दिला पाए जीत दूसरे मैच में किदांबी श्रीकांत का मुकाबला एलेक्स लानियर से था। श्रीकांत ने लड़ने की कोशिश की, लेकिन लानियर ने सीधे गेम में 21-18, 21-16 से जीत दर्ज कर फ्रांस की बढ़त 2-0 कर दी। इसके बाद ‘डू और डाई’ मुकाबले में एचएस प्रणय कोर्ट पर उतरे। उनका मुकाबला टोमा जूनियर पोपोव से था। प्रणय ने मैच की अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन अंत में वे अपनी लय बरकरार नहीं रख पाए और 19-21, 16-21 से मैच हार गए। इसके साथ ही भारत का सफर सेमीफाइनल में खत्म हो गया। उबर कप: साउथ कोरिया और चीन के बीच होगा फाइनल महिलाओं के उबर कप टूर्नामेंट में साउथ कोरिया ने फाइनल में जगह बना ली है, जहां उनका मुकाबला चीन से होगा। सेमीफाइनल में साउथ कोरिया ने इंडोनेशिया को 3-1 से मात दी। वहीं, दूसरे सेमीफाइनल में चीन ने जापान को 3-0 से हराकर फाइनल का टिकट कटाया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Fertility Crisis in India & World | इंसानी स्पर्म और अंडों पर भारी पड़ रहा है प्लास्टिक का जहर, वैज्ञानिकों ने दी फर्टिलिटी संकट की भयानक चेतावनी

Fertility Crisis in India & World | इंसानी स्पर्म और अंडों पर भारी पड़ रहा है प्लास्टिक का जहर, वैज्ञानिकों ने दी फर्टिलिटी संकट की भयानक चेतावनी

होमफोटोनॉलेज सूनी रह जाएगी कोख, खाली होंगे घोंसले! कहीं देर न हो जाए, नेचर का बिगड़ा बैलेंस Last Updated:May 02, 2026, 20:20 IST Fertility Crisis: नई रिसर्च ने खुलासा किया है कि पूरी दुनिया इस समय सिंथेटिक केमिकल्स के समंदर में तैर रही है. इन केमिकल्स की मात्रा इतनी ज्यादा बढ़ गई है कि हमने पृथ्वी की सुरक्षित सीमा को पार कर लिया है. टॉक्सिकोलॉजिस्ट और बायोलॉजिस्ट की एक टीम ने चेतावनी दी है कि पेस्टिसाइड्स, प्रदूषण और प्लास्टिक मिलकर एक ‘साइलेंट’ फर्टिलिटी संकट को जन्म दे रहे हैं. यह संकट केवल इंसानों तक सीमित नहीं है बल्कि जानवरों की प्रजनन क्षमता को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. रिसर्च के मुताबिक खराब होते क्लाइमेट चेंज और बढ़ते प्रदूषण के तालमेल ने फर्टिलिटी, बायोडायवर्सिटी और हेल्थ के लिए ग्लोबल लेवल पर रिस्क पैदा कर दिया है. इसका सीधा असर इंसानों के अलावा समुद्री स्तनधारियों, पक्षियों, मछलियों और रेंगने वाले जीवों पर दिख रहा है. पिछले 50 सालों में दुनिया की वाइल्डलाइफ आबादी में दो-तिहाई से ज्यादा की कमी आई है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण पॉल्यूटेंट्स और बदलता मौसम ही माना जा रहा है. इसी दौरान इंसानी पुरुषों और महिलाओं में भी बांझपन की दर तेजी से बढ़ी है. हालांकि इसका सटीक कारण पता लगाना मुश्किल है, लेकिन वैज्ञानिक हमारे जीवन में मौजूद हॉर्मोन बिगाड़ने वाले रसायनों को इसका मुख्य जिम्मेदार मान रहे हैं. आज मार्केट में 1000 से ज्यादा ऐसे सिंथेटिक केमिकल्स मौजूद हैं जो हमारे शरीर के नेचुरल हॉर्मोन्स की नकल करते हैं या उन्हें ब्लॉक कर देते हैं. हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल एक प्रतिशत केमिकल्स की ही सुरक्षा जांच सही तरीके से की गई है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इकोसिस्टम और इंसानी हेल्थ एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं. बढ़ता तापमान और केमिकल एक्सपोजर मिलकर शरीर के रिप्रोडक्शन सिस्टम पर भारी दबाव डाल रहे हैं. यह एक ऐसा अनचाहा खतरा है जिससे कोई भी जीव सुरक्षित नहीं बचा है क्योंकि इन केमिकल्स को बिना पूरी जांच के मार्केट में उतार दिया गया है. (File Photo : Reuters) प्रदूषण और फर्टिलिटी के बीच का रिश्ता बहुत पुराना और खतरनाक रहा है. ओरेगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया कि पुराने समय में भी सिंथेटिक केमिकल्स ने जानवरों की आबादी को तबाह किया था. कीटनाशक यानी इंसेक्टिसाइड्स का इस्तेमाल फसलों को बचाने के लिए किया जाता है, लेकिन अब ये इंसानों के स्पर्म काउंट को कम करने का काम कर रहे हैं. (File Photo : Reuters) डीडीटी जैसा मशहूर कीटनाशक इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. इसकी वजह से पक्षियों के अंडों के छिलके पतले हो गए थे, जिससे उनकी आबादी गिर गई थी. समुद्री जीवों में भी इसकी वजह से प्रजनन की कमी देखी गई थी, हालांकि बैन लगने के बाद उनकी संख्या में कुछ सुधार हुआ है. (File Photo : Reuters) Add News18 as Preferred Source on Google आजकल ‘फॉरएवर केमिकल्स’ यानी पीएफएएस (PFAS) का नाम बहुत चर्चा में है. ये ऐसे केमिकल्स हैं जो पर्यावरण में कभी खत्म नहीं होते. रिसर्च बताती है कि ये सीधे तौर पर एंडोक्राइन सिस्टम को नुकसान पहुंचाते हैं. यह सिस्टम हमारे शरीर के विकास, मेटाबॉलिज्म और रिप्रोडक्शन को कंट्रोल करता है. 1970 के दशक से कंपनियों को पता था कि ये केमिकल्स जहरीले हैं, लेकिन इसे जनता से छुपाया गया. इसकी वजह से प्रेग्नेंट महिलाओं में मिसकैरेज और बच्चों में जन्मजात बीमारियों का खतरा बढ़ गया. ये केमिकल्स इतने ताकतवर होते हैं कि बहुत कम मात्रा में भी शरीर के हॉर्मोन्स का संतुलन बिगाड़ सकते हैं. (File Photo : Reuters) प्लास्टिक प्रदूषण अब केवल जमीन और पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर के अंदर तक पहुंच चुका है. माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक अब इंसानों और जानवरों के प्रजनन अंगों में जमा हो रहे हैं. सबसे डरावनी बात यह है कि हमें अभी तक इनके सटीक नुकसानों के बारे में पूरी जानकारी भी नहीं है. वैज्ञानिक आशंका जता रहे हैं कि अगर ये स्पर्म, अंडों या भ्रूण के लिए जहरीले साबित हुए, तो इस समस्या से निपटना नामुमकिन होगा. प्लास्टिक अब गहरे समंदर से लेकर ऊंचे पहाड़ों तक मौजूद है और इससे बचने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा है. (File Photo : Reuters) वैज्ञानिकों का मानना है कि वर्तमान में चल रही ‘ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी’ की बातचीत बहुत जरूरी है. यह केवल कचरे की समस्या नहीं है, बल्कि एक प्लैनेटरी हेल्थ क्राइसिस है. हजारों की संख्या में मौजूद ये रसायनों वाले प्लास्टिक हमारे अस्तित्व पर सवाल खड़े कर रहे हैं. जब ये केमिकल्स लैब से बाहर निकलकर पर्यावरण में एक-दूसरे से मिलते हैं, तो इनका असर और भी भयानक हो जाता है. रिसर्च में साफ कहा गया है कि अगर हमने अभी सख्त कदम नहीं उठाए, तो भविष्य में फर्टिलिटी का यह संकट पूरी दुनिया की आबादी को खतरे में डाल सकता है. (File Photo : Reuters) इस संकट से बचने के लिए सबसे पहले हमें उन केमिकल्स के बारे में जानना होगा जो हमारे आसपास मौजूद हैं. रोजमर्रा की चीजों में प्लास्टिक का कम इस्तेमाल और सर्टिफाइड प्रोडक्ट्स का चुनाव करना एक शुरुआत हो सकती है. हालांकि यह लड़ाई व्यक्तिगत स्तर से ज्यादा सिस्टम के स्तर पर लड़ने वाली है. सरकारों को उन केमिकल्स पर तुरंत रोक लगानी होगी जिनकी सुरक्षा जांच नहीं हुई है. जब तक हम अपनी धरती और पर्यावरण को केमिकल फ्री बनाने की दिशा में काम नहीं करेंगे, तब तक प्रजनन क्षमता पर मंडरा रहा यह ‘साइलेंट’ खतरा टलने वाला नहीं है. भविष्य की पीढ़ी को बचाने के लिए हमें आज ही अपनी केमिकल निर्भरता को कम करना होगा. (Photo : Generative AI)