वर्ल्ड हेरिटेज डे: रोशनी से जगमगाया जहाज महल:कल मिलेगा स्मारकों में मुफ्त प्रवेश; यूनेस्को सूची के लिए प्रशासन ने भेजे नए प्रस्ताव

विश्व विरासत दिवस पर शनिवार को मांडू के सभी केंद्रीय संरक्षित स्मारकों में पर्यटकों का प्रवेश निशुल्क रहेगा। भारतीय पुरातत्व विभाग इस दिन पर सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विशेष आयोजन कर रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार रात जहाज महल को विद्युत रोशनी से रोशन किया गया। इंदौर कमिश्नर और धार कलेक्टर ने भेजे प्रस्ताव तत्कालीन इंदौर संभाग आयुक्त दीपक सिंह और तत्कालीन धार कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मांडू को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए शासन को कई प्रस्ताव भेजे हैं। मांडू वर्तमान में यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल है। प्रशासन अब इसे पूर्ण विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए तकनीकी डोजियर तैयार करने के प्रयासों में जुटा है। मांडू में होंगी विविध गतिविधियां विश्व धरोहर दिवस पर मांडू में हेरिटेज वॉक, चित्रकला, वाद-विवाद और फोटो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों का उद्देश्य मांडू की प्राचीन वास्तुकला, जल प्रबंधन प्रणालियों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति आमजन को जागरूक करना है। एएसआई इस बार ‘विरासत और जलवायु’ विषय पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। 61 केंद्रीय और 14 राज्य संरक्षित स्मारक मौजूद ऐतिहासिक नगरी मांडू में बाज बहादुर-रानी रूपमती महल, हिंडोला महल, अशर्फी महल और होशंगशाह के मकबरे सहित कुल 61 केंद्रीय पुरातत्व विभाग के संरक्षित स्मारक हैं। इसके अलावा राज्य पुरातत्व विभाग के भी 14 स्मारक यहां स्थित हैं। मांडू को यूनेस्को की सूची में शामिल करने के लिए वर्ष 1998 से संघर्ष जारी है। प्राचीन जल संरचनाओं के संरक्षण पर विशेष फोकस पुरातत्वविद और एएसआई भोपाल मंडल के अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार कुर्मी ने बताया कि मांडू की प्राचीन जल संरचनाएं विश्व में अद्वितीय हैं। विभाग इन जलस्रोतों और स्मारकों के समूह को आधार बनाकर एक सशक्त प्रस्तुतिकरण तैयार कर रहा है। यूनेस्को में भारत का प्रतिनिधित्व एएसआई द्वारा किया जाता है, जिससे मांडू की दावेदारी अब और मजबूत हुई है।
Google AI Gemini Blocks 48 Cr Ads in India (2025)

Hindi News Business Google AI Gemini Blocks 48 Cr Ads In India (2025) | 17 Lakh Accounts Suspended नई दिल्ली54 मिनट पहले कॉपी लिंक गूगल ने 2025 में दुनिया भर में 8.3 बिलियन यानी 830 करोड़ से ज्यादा खराब विज्ञापनों को हटाया है। टेक कंपनी गूगल ने 2025 में भारत में 48.37 करोड़ नियमों का उल्लंघन करने वाले विज्ञापनों को हटाया या ब्लॉक किया है। इसी दौरान कंपनी ने अपने AI प्लेटफॉर्म जेमिनी की मदद से 17 लाख एडवरटाइजर अकाउंट्स भी सस्पेंड किए हैं। गुरुवार को जारी गूगल की 2025 एड्स सेफ्टी रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। गूगल की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्लोबल लेवल पर कार्रवाई और भी बड़े पैमाने पर हुई है। पिछले साल दुनिया भर में 8.3 बिलियन यानी 830 करोड़ से ज्यादा खराब विज्ञापनों को हटाया गया। इसके साथ ही 2.49 करोड़ एडवरटाइजर अकाउंट्स को भी सस्पेंड किया गया है। कंपनी का दावा है कि हटाए गए कुल विज्ञापनों में से 99% को यूजर्स के देखने से पहले ही रोक दिया गया था। जेमिनी AI ने गूगल की ताकत बढ़ाई गूगल ने बताया कि जेमिनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल के जुड़ने से उसकी क्षमता में जबरदस्त सुधार हुआ है। आजकल स्कैमर्स भ्रामक विज्ञापन बनाने के लिए जेनेरेटिव एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। जेमिनी की मदद से ऐसे धोखेबाजों को रियल-टाइम में पहचानना और रोकना आसान हो गया है। इसकी कार्यकुशलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2024 के मुकाबले 2025 में यूजर्स की रिपोर्ट पर चार गुना तेजी से एक्शन लिया गया। की-वर्ड्स की जगह अब ‘इरादा’ समझता है सिस्टम गूगल के एड्स प्राइवेसी एंड सेफ्टी विभाग के वीपी और जनरल मैनेजर कीरत शर्मा ने बताया कि उनकी टीमें 24 घंटे काम करती हैं। कंपनी के नए मॉडल्स अब केवल कीवर्ड्स पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे विज्ञापनों के पीछे के इंटेंट यानी इरादे को भी समझते हैं। ये मॉडल अकाउंट की उम्र और व्यवहार जैसे अरबों संकेतों का एनालिसिस करते हैं। जिससे पकड़ में आने से बचने के लिए डिजाइन किए गए विज्ञापनों को भी पहले ही ब्लॉक कर दिया जाता है। भारत में 5 वजहों से सबसे ज्यादा विज्ञापन हटाए गए रिपोर्ट में भारत का विशेष जिक्र करते हुए बताया गया है कि यहां विज्ञापन हटाने की मुख्य वजहें क्या रहीं। टॉप 5 उल्लंघन इस प्रकार हैं… ट्रेडमार्क: दूसरे ब्रांड के नाम का गलत इस्तेमाल। फाइनेंशियल सर्विसेज: बैंकिंग या निवेश से जुड़े नियमों का उल्लंघन। कॉपीराइट: दूसरों के कंटेंट का बिना अनुमति उपयोग। पर्सनलाइजेशन: निजी जानकारी से जुड़ी नीतियों का उल्लंघन। एड नेटवर्क का दुरुपयोग: गूगल के विज्ञापन नेटवर्क के नियमों को तोड़ना। क्या होता है जेनेरेटिव एआई और एड्स सेफ्टी? जेनेरेटिव एआई: यह ऐसी तकनीक है जो टेक्स्ट, इमेज और वीडियो खुद बना सकती है। स्कैमर्स इसका उपयोग असली दिखने वाले फर्जी विज्ञापन बनाने में करते हैं। एड्स सेफ्टी रिपोर्ट: गूगल हर साल यह रिपोर्ट जारी करता है ताकि पारदर्शिता बनी रहे कि उसने अपने प्लेटफॉर्म को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए हैं। ये खबर भी पढ़ें… चीन; अब पैंथर संभालेगा घर की कमान: सारे घरेलू काम करने को तैयार है ह्यूमनॉइड रोबोट, डिलीवरी शुरू अगर आप हाउस हेल्प या मेड की समस्या से परेशान हैं तो चिंता न करें। ह्यूमनॉइड रोबोट आपकी मदद के लिए बाजार में आ रहे हैं। चीनी रोबोटिक्स कंपनी यूनिक्स एआई ने पैंथर नाम का एक मानवाकार (ह्यूमनॉइड) रोबोट लॉन्च किया है। इसे खासतौर पर घरेलू कामों में मदद के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह घरों में उपयोग के लिए तैयार है। इसकी ग्लोबल डिलीवरी भी शुरू हो चुकी है। इसकी कीमत करीब 1 लाख डॉलर (करीब 90 लाख रुपए) बताई जा रही है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Kangana Supports Deepikas 8-Hour Work Demand

1 घंटे पहले कॉपी लिंक फिल्म इंडस्ट्री में काम के घंटों (वर्किंग आवर्स) को लेकर चल रही बहस के बीच एक्ट्रेस कंगना रनोट ने दीपिका पादुकोण का समर्थन किया है। हाल ही में खबरें आई थीं कि दीपिका पादुकोण ने अपनी शर्तों और फिक्स्ड वर्किंग शेड्यूल के कारण कुछ बड़े बजट के प्रोजेक्ट्स छोड़ दिए हैं। दीपिका की मांग है कि वे दिन में केवल 8 घंटे ही काम करेंगी। अब इस मामले पर कंगना ने दीपिका का पक्ष लेते हुए कहा है कि उनका कहना बिल्कुल सही है और उन्होंने यह मुकाम मेहनत से कमाया है। कंगना बोलीं- अब दीपिका रिप्लेसेबल नहीं हैं ANI को दिए एक इंटरव्यू में कंगना रनोट ने कहा कि समय के साथ प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। कंगना ने कहा मुझे नहीं लगता कि इस बात पर कोई विवाद होना चाहिए। दीपिका आज जिस मुकाम पर हैं, वह उन्होंने अपनी मेहनत से हासिल किया है। वे अब एक मां हैं, उनकी एक बेटी है। अगर आज वे 8 घंटे काम करना चाहती हैं, तो उन्होंने यह हक कमाया है। कंगना ने साफ किया कि जब कोई नया कलाकार होता है, तो उसे रिप्लेस (बदला) किया जा सकता है, लेकिन दीपिका जैसी स्टार के लिए मेकर्स को उनके समय के हिसाब से तालमेल बिठाना चाहिए। पुराने दिनों में 12-14 घंटे करती थीं काम कंगना ने अपने और दीपिका के शुरुआती संघर्ष के दिनों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि करियर के शुरुआती दौर में वे दोनों ही सफलता के लिए काफी जुनूनी थीं। कंगना ने कहा, एक वक्त था जब हम 12 से 14 घंटे की शिफ्ट से कम पर राजी नहीं होते थे। दीपिका ने एक बार मुझसे इम्तियाज अली की फिल्म के दौरान कहा था कि वे 12 घंटे काम कर रही हैं। मैंने तब कहा था कि मैं 10 घंटे काम करती हूं। तब हमारे अंदर एक भूख थी, हम कामयाब होना चाहते थे। महिलाओं पर काम के दबाव पर जताई चिंता वर्क-लाइफ बैलेंस पर बात करते हुए कंगना ने कहा कि आज के समय में महिलाओं पर बहुत ज्यादा दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने कहा, हम अपनी महिलाओं पर बच्चों के साथ-साथ दोगुना काम करने का बोझ डाल रहे हैं। फिर हम गिरती फर्टिलिटी रेट और टूटती शादियों की बात करते हैं। अगर दीपिका जैसी टॉप एक्ट्रेस अपने परिवार और काम के बीच तालमेल बिठाने के लिए समय मांग रही हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म छोड़ने की थी चर्चा बता दें कि पिछले साल ऐसी खबरें आई थीं कि दीपिका पादुकोण ने डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ छोड़ दी है। इसका मुख्य कारण काम करने की शर्तें और 8 घंटे की शिफ्ट की मांग को बताया गया था। इसके बाद से ही सोशल मीडिया और फिल्म गलियारों में इस बात पर बहस छिड़ गई थी कि क्या एक्टर्स को शिफ्ट के घंटे तय करने चाहिए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Kangana Ranaut on Chirag Paswan: Just Friends, No Romance

16 मिनट पहले कॉपी लिंक एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनोट ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ अपने रिश्तों को पर खुल कर बात की है। उन्होंने साफ किया है कि उनके और चिराग के बीच कोई रोमांटिक एंगल नहीं है। ANI को दिए इंटरव्यू में कंगना से चिराग पासवान के साथ उनके कथित अफेयर को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर मुस्कुराते हुए कंगना ने कहा, नहीं, चिराग सिर्फ मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त हैं। जब भी मैं उनके बारे में सोचती हूं, मुझे उनमें सिर्फ एक दोस्त ही नजर आता है। कहा- रोमांस होता तो बच्चे हो गए होते बातचीत के दौरान कंगना ने बेहद बेबाक और मजाकिया अंदाज अपनाया। उन्होंने कहा, हमने करीब 10 साल पहले एक फिल्म साथ की थी। अगर हमारे बीच वाकई कुछ होना होता, तो अब तक हमारे बच्चे हो चुके होते। कंगना ने आगे कहा कि अगर रोमांस होना होता, तो अब तक हो चुका होता। फिल्म ‘मिले ना मिले हम’ से शुरू हुई दोस्ती कंगना और चिराग पासवान के बीच की बॉन्डिंग काफी पुरानी है। साल 2011 में आई फिल्म ‘मिले ना मिले हम’ से चिराग पासवान ने बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इस फिल्म में कंगना रनौत उनकी लीड एक्ट्रेस थीं। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तो खास कमाल नहीं कर पाई, लेकिन यहीं से दोनों की दोस्ती की शुरुआत हुई। आज दोनों राजनीति के मैदान में सक्रिय हैं और अक्सर संसद में एक-दूसरे के साथ हंसते-मुस्कुराते नजर आते हैं। ‘इमरजेंसी’ के बाद ‘क्वीन 2’ की तैयारी कंगना की हालिया रिलीज फिल्म ‘इमरजेंसी’ थी, जिसमें उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किरदार निभाया था। इस फिल्म का निर्देशन भी उन्होंने खुद ही किया था। आने वाले समय में कंगना अपनी फ्रेंचाइजी की अगली कड़ियों ‘क्वीन 2’ और ‘तनु वेड्स मनु 3’ में नजर आएंगी। वहीं, चिराग पासवान अब फिल्म इंडस्ट्री छोड़कर पूरी तरह से राजनीति और अपने मंत्रालय की जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
TIME 100 Most Influential People 2026: Indias Pichai, Kapoor Shine

22 मिनट पहले कॉपी लिंक दुनिया की प्रतिष्ठित TIME मैगजीन ने बुधवार को 2026 की TIME100 सूची जारी की, जिसमें भारत से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों को शामिल किया गया। इस साल सुंदर पिचाई, रणबीर कपूर और शेफ विकास खन्ना को वैश्विक प्रभाव के लिए सम्मानित किया गया। हर साल जारी होने वाली यह सूची मनोरंजन, तकनीक, वित्त, खेल, एक्टिवज्म और अकादमिक क्षेत्रों के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची होती है। TIME मैगजीन की TIME100 सूची में पहले शाहरुख खान, सचिन तेंदुलकर, नरेंद्र मोदी, दीपिका पादुकोण और महात्मा गांधी शामिल हो चुके हैं। विकास खन्ना ने इसे गर्व का क्षण बताया मशहूर शेफ विकास खन्ना ने इसे गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कहा कि 2026 की TIME100 सूची में शामिल होना मेरे लिए बेहद गर्व की बात है। खन्ना ने इस सम्मान का श्रेय अपने परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि उनकी दादी, मां और बहन के त्याग, आशीर्वाद और मार्गदर्शन से वे इस मुकाम तक पहुंच सके हैं। TIME100 2026 की इस सूची में राल्फ लॉरेन, केट हडसन, ईथन हॉक, मार्क केली और हिलारी नाइट जैसे वैश्विक दिग्गजों को उनके क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए शामिल किया गया है। पिछले साल एक भी भारतीय शामिल नहीं टाइम मैगजीन की 2025 की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट जारी में किसी भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया था। तब 21 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ था जब लिस्ट में कोई भारतीय नहीं था। ———————————————– ये खबर भी पढ़ें… टाइम मैगजीन की 100 प्रभावशाली लोगों के नाम जारी:21 साल के इतिहास में पहली बार कोई भारतीय नहीं, बांग्लादेश के यूनुस को मिली जगह टाइम मैगजीन ने बुधवार को साल 2025 के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की लिस्ट जारी की। इसमें बांग्लादेश सरकार के चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को जगह मिली है। हालांकि इस बार लिस्ट में किसी भी भारतीय को शामिल नहीं किया गया है। पिछले 21 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
India Hosts BRICS Foreign Ministers

Hindi News Career India Hosts BRICS Foreign Ministers | April 16 Current Affairs; India Sends TB Vaccine Afghanistan 12 मिनट पहले कॉपी लिंक जानते हैं आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं… नेशनल (NATIONAL) 1. भारत ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की मेजबानी करेगा भारत मई में ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक भारत इस बैठक के जरिए क्षेत्रीय तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा। ब्रिक्स मंच पर सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। ब्रिक्स समिट से पहले अध्यक्षता करने वाले देश को ब्रिक्स की मंत्रिस्तरीय बैठकें करना होती हैं। ब्रिक्स की मंत्री स्तरीय बैठक में ग्लोबल कनफ्लिक्ट, (खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव) कलाइमेट फाइनेंस और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर बातचीत हो सकती है। ब्रिक्स की ये बैठक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (2026) की रूपरेखा के लिए की जाएगी। 13 जनवरी को भारत ने ऑफिशियली 18वें ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता संभाली थी। इस साल ब्रिक्स की थीम ‘बिल्डिंग फॉर रिजिलेन्स, इनोवेशन कॉर्पोरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी’ रखी गई है। 2026 में ब्रिक्स की स्थापना के 20 साल पूरे हुए हैं। 2009 में ब्रिक्स की पहली समिट रूस में हुई थी। ब्रिक्स नाम इसके संस्थापक सदस्य देशों- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के शुरुआती अक्षरों से बना है। वहीं मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया बाद में ब्रिक्स फोरम के पूर्ण सदस्य बने। भारत मई के आखिरी हफ्ते में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी भी करेगा क्वाड बैठक में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि शामिल होंगे। क्वाड: क्वाडिलेटरल सिक्युरिटी डायलॉग (QUAD) एक इनफॉर्मल फोरम है। क्वाड मेंबर में भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की भी मई में भारत में बैठक हो सकती है। 13 जनवरी को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स 2026 की थीम, लोगो और वेबसाइट का शुभारंभ किया था। 2. ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर स्टॉकर भारत की यात्रा पर आए 15 अप्रैल को ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर भारत के आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट पर युवा मामले और खेल मंत्री रक्षा खडसे ने उनका स्वागत किया। स्टॉकर का ये भारत का पहला आधिकारिक दौरा है। एयरपोर्ट पर युवा मामले और खेल मंत्री रक्षा खडसे ने उनका स्वागत किया। स्टॉकर इस यात्रा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में बिजनेस, इंवेस्टमेंट, ग्रीन टेक्नोलॉजी और जरूरी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत होगी। दोनों पक्षों से एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इनोवेशन और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्र में सहयोग को लेकर बात होने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्टाकर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू और विदेश मंत्री एस जय शंकर से भी मुलाकात करेंगे। 2024 में पीएम मोदी ऑस्ट्रिया दौरे पर गए थे। इससे पहले 1983 में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने ऑस्ट्रिया का दौरा किया था। फेडरल चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर की ये पहली भारत यात्रा है। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 3. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जर्मनी की यात्रा पर जाएंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 21 अप्रैल से जर्मनी की तीन दिवसीय यात्रा पर जाएंगे। वे जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ बातचीत करेंगे। इस यात्रा के दौरान दोनों प्रमुखों के बीच सबमरीन सौदे पर भी बातचीत होगी। इस यात्रा के दौरान रक्षा मंत्री जर्मन रक्षा प्रमुख थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स से भी मुलाकात कर सकते हैं। सिंह टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और इंवेस्टमेंट के लिए डिफेंस इंवेस्टमेंट समिट में भी हिस्सा ले सकते हैं। प्रोजेक्ट-75(AI) के तहत लगभग 10 अरब डॉलर की सबमरीन डील एक प्रमुख एजेंडा हो सकता है। भारत प्रोजेक्ट-75(AI) के तहत 6 सबमरीन चाहता है, ये लंबे समय तक पानी में रह सकती हैं। जर्मनी की कंपनी थिसेनक्रुप ने मझगांव शिपयार्ड लिमिटेड के साथ मिलकर इसे बनाने की बोली लगाई है। भारत इस यात्रा के दौरान जर्मनी को इनवाइट करेगा कि जर्मन कंपनियां भारत के साथ मिलकर सबमनरीन, नौसेना जे सिस्टम, ड्रोन और एयरोस्पेस पार्ट्स बनाएं। जून 2023 में जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने भारत का दौरा किया था। मिसलीनियस (MISCELLANEOUS) 4. सरकार जल्द ही जॉइंट थिएटर कमांड लाएगी सरकार तीनों सेनाओं के ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत अब आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की जॉइंट थिएटर कमांड के तौर पर काम करेंगी। रिपोर्ट के मुताबिक चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान की अगुवाई में एक ब्लूब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स ने पिछले सैन्य संघर्षों के आधार पर ब्लूप्रिंट तैयार किए हैं। जॉइंट थिएटर कमांड का ब्लूप्रिंट ही अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पास भेजा जाएगा। फिर इस पर कैबिनेट कमेटी मंजूरी देगी। CDS जनरल चौहान का विस्तारित कार्यकाल मई के आखिर में पूरा हो रहा है। जनरल चौहान के रिटायर होने के बाद CDS के साथ-साथ वाइस CDS का पद भी बनाया जाएगा। नए ब्लूप्रिन्ट के तहत रक्षा बलों का भी विस्तार होगा। इसके अलावा, स्पेस और साइबर कमांड भी भी बनाई जाएगी। पाकिस्तान से निपटने के लिए वेस्टर्न और चीन से मुकाबले के लिए नार्दर्न थिएटर कमान होगी और हिंद महासागर के बड़े समुद्री क्षेत्र की रखवाली के लिए मैरीटाइम कमान बनाई जाएगी। जॉइंट थिएटर कमांड विषम परस्थितियों जैसे लॉजिसटिक ऑपरेशन और युद्ध की तैयारी के समय फैसला लेने के काम आएगी। जॉइंट थिएटर कमांड का उद्देश्य एक थिएटर में सभी बलों के लिए सिंगल कमांडर लाना है। 5. भारत ने अफगानिस्तान को TB वैक्सीन भेजीं 14 अप्रैल को भारत ने अफगानिस्तान के TB वैक्सीन प्रोग्राम में मदद के लिए 13 टन BCG (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) वैक्सीन और इससे जुड़े सामानों की खेप भेजी। ये खेप अफगानिस्तान स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपी गई। इसका उद्देश्य बच्चों के लिए लगाई जाने वाले वैक्सीन कार्यक्रमों को ये बढ़ाना है। ये वैक्सीन एक फ्रीज-ड्राइड (लायोफिलाइज्ड) सफेद पाउडर के तौर पर आती है, जो उपयोग से पहले तरल (डिलुएंट) के साथ मिलाई जाती है। ये शिपमेंट बाढ़, भूकंप और संघर्ष जैसे संकटों के बीच अफगानिस्तान को भारत की चल रही मानवीय सहायता का हिस्सा है। भारत ने इससे पहले 5 अप्रैल को अफगानिस्तान में बाढ़ और भूकंप पीड़ितों के लिए भी मदद भेजी थी। इससे पहले मार्च में भारत सरकार ने अफगानिस्तान को 2.5 टन आपातकालीन दवाएं,
भारत को रूसी तेल पर अमेरिकी छूट नहीं मिलेगी:US ट्रेजरी सेक्रेटरी बोले- जनरल लाइसेंस रिन्यू नहीं होगा; 11 अप्रैल तक मिली थी राहत

अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीद पर दी जा रही छूट को रोकने का फैसला किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को कहा कि हम रूसी तेल पर दी गई छूट को रिन्यू नहीं करेंगे। इससे पहले मंगलवार को ही ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने ईरानी तेल पर मिलने वाली छूट पर भी रोक लगा दी थी। व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए बेसेंट ने कहा कि हम रूसी और ईरानी तेल पर देशों को मिल रहे जनरल लाइसेंस को रिन्यू नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह छूट उन तेल खेपों के लिए थी जो 11 मार्च से पहले समुद्र में थीं और उनका उपयोग हो चुका है। ऐसे में आगे किसी भी देश को यह राहत नहीं मिलेगी। अमेरिका ने 5 मार्च को भारत को 30 दिन की विशेष छूट दी थी, जिसके बाद भारत यूक्रेन युद्ध के चलते लगे प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल खरीद रहा था। यह छूट बाद में कुछ अन्य देशों को भी दी गई थी और 11 अप्रैल को समाप्त हो गई। अमेरिका ने 30 दिन की छूट दी थी मार्च में अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर के पार चली गई थीं। इसे काबू में करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने दूसरे देशों को भी रूस से तेल खरीदने की अस्थाई मंजूरी दे दी थी। रूस के कई ऑयल टैंकर समुद्र में फंसे हैं। यह छूट सिर्फ 11 अप्रैल तक के लिए दी गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने तब बताया था कि इसका मकसद दुनियाभर में तेल की सप्लाई बढ़ाना है, ताकि बढ़ती कीमतों पर लगाम लग सके। रूस से तेल आयात 19 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंचा अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 90% आयात करने वाले भारत ने पिछले दो महीनों में रूसी क्रूड की खरीदारी में भारी बढ़ोतरी की है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग के कारण ग्लोबल मार्केट में तेल की किल्लत बढ़ गई है, जिसके चलते भारतीय रिफाइनर्स अब रूस से ज्यादा से ज्यादा तेल जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के डेटा के मुताबिक, मार्च के महीने में रूस से कच्चे तेल का आयात औसत 1.98 मिलियन यानी 19 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) रहा। यह जून 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, अप्रैल में यह आंकड़ा गिरकर 1.57 मिलियन यानी 15.7 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह गिरावट मांग की कमी की वजह से नहीं, बल्कि नयारा एनर्जी की रिफाइनरी में मेंटेनेंस के लिए किए गए शटडाउन के कारण आई है। अगले महीने से इसमें फिर से उछाल आने की उम्मीद है। भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बनाए रखेगा सिंगापुर स्थित कंसल्टेंसी ‘वांडा इनसाइट्स’ की फाउंडर वंदना हरि का कहना है कि भारत वह सारा रूसी तेल खरीदने की कोशिश कर रहा है जो उसे मिल सकता है। उन्होंने बताया कि जब तक फारस की खाड़ी से होने वाली सप्लाई में दिक्कत बनी रहेगी, भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बनाए रखेगा। दरअसल, अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और होर्मुज रूट के बंद होने से दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत फिर शुरू होगी:भारतीय डेलिगेशन अगले हफ्ते वॉशिंगटन रवाना होगा; नए टैरिफ स्ट्रक्चर पर चर्चा होगी भारत और अमेरिका के बीच रुकी अंतरिम ट्रेड डील पर बातचीत फिर शुरू होगी। केंद्र सरकार का हाई-लेवल डेलिगेशन अगले हफ्ते वॉशिंगटन जाएगा। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका में टैरिफ नियमों और अदालती फैसलों से व्यापारिक समीकरण बदल गए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
भारत को रूसी तेल पर अमेरिकी छूट नहीं मिलेगी:US ट्रेजरी सेक्रेटरी बोले- जनरल लाइसेंस रिन्यू नहीं होगा; 11 अप्रैल तक मिली थी राहत

अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीद पर दी जा रही छूट को रोकने का फैसला किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को कहा कि हम रूसी तेल पर दी गई छूट को रिन्यू नहीं करेंगे। इससे पहले मंगलवार को ही ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने ईरानी तेल पर मिलने वाली छूट पर भी रोक लगा दी थी। व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए बेसेंट ने कहा कि हम रूसी और ईरानी तेल पर देशों को मिल रहे जनरल लाइसेंस को रिन्यू नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यह छूट उन तेल खेपों के लिए थी जो 11 मार्च से पहले समुद्र में थीं और उनका उपयोग हो चुका है। ऐसे में आगे किसी भी देश को यह राहत नहीं मिलेगी। अमेरिका ने 5 मार्च को भारत को 30 दिन की विशेष छूट दी थी, जिसके बाद भारत यूक्रेन युद्ध के चलते लगे प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल खरीद रहा था। यह छूट बाद में कुछ अन्य देशों को भी दी गई थी और 11 अप्रैल को समाप्त हो गई। अमेरिका ने 30 दिन की छूट दी थी मार्च में अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर के पार चली गई थीं। इसे काबू में करने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने दूसरे देशों को भी रूस से तेल खरीदने की अस्थाई मंजूरी दे दी थी। रूस के कई ऑयल टैंकर समुद्र में फंसे हैं। यह छूट सिर्फ 11 अप्रैल तक के लिए दी गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने तब बताया था कि इसका मकसद दुनियाभर में तेल की सप्लाई बढ़ाना है, ताकि बढ़ती कीमतों पर लगाम लग सके। रूस से तेल आयात 19 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंचा अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 90% आयात करने वाले भारत ने पिछले दो महीनों में रूसी क्रूड की खरीदारी में भारी बढ़ोतरी की है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग के कारण ग्लोबल मार्केट में तेल की किल्लत बढ़ गई है, जिसके चलते भारतीय रिफाइनर्स अब रूस से ज्यादा से ज्यादा तेल जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के डेटा के मुताबिक, मार्च के महीने में रूस से कच्चे तेल का आयात औसत 1.98 मिलियन यानी 19 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) रहा। यह जून 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, अप्रैल में यह आंकड़ा गिरकर 1.57 मिलियन यानी 15.7 लाख बैरल प्रति दिन रह गया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह गिरावट मांग की कमी की वजह से नहीं, बल्कि नयारा एनर्जी की रिफाइनरी में मेंटेनेंस के लिए किए गए शटडाउन के कारण आई है। अगले महीने से इसमें फिर से उछाल आने की उम्मीद है। भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बनाए रखेगा सिंगापुर स्थित कंसल्टेंसी ‘वांडा इनसाइट्स’ की फाउंडर वंदना हरि का कहना है कि भारत वह सारा रूसी तेल खरीदने की कोशिश कर रहा है जो उसे मिल सकता है। उन्होंने बताया कि जब तक फारस की खाड़ी से होने वाली सप्लाई में दिक्कत बनी रहेगी, भारत रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बनाए रखेगा। दरअसल, अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और होर्मुज रूट के बंद होने से दुनिया भर में सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत फिर शुरू होगी:भारतीय डेलिगेशन अगले हफ्ते वॉशिंगटन रवाना होगा; नए टैरिफ स्ट्रक्चर पर चर्चा होगी भारत और अमेरिका के बीच रुकी अंतरिम ट्रेड डील पर बातचीत फिर शुरू होगी। केंद्र सरकार का हाई-लेवल डेलिगेशन अगले हफ्ते वॉशिंगटन जाएगा। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका में टैरिफ नियमों और अदालती फैसलों से व्यापारिक समीकरण बदल गए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
IMF Predicts India GDP 2026 $4.15 Trillion, UK Regains 5th Spot

नई दिल्ली15 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत की दुनिया की छठी सबसे बड़ी इकोनॉमी के पायदान पर खिसक गया है। पिछले तीन साल से भारत 5वें स्थान पर बना हुआ था। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के ताजा डेटा के अनुसार अब ब्रिटेन (UK) एक बार फिर भारत से आगे निकल गया है। भारत की GDP में ये गिरावट डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने से आई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा कीमतों पर भारत की GDP 2025 में 3.92 ट्रिलियन डॉलर और 2026 में 4.15 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है। वहीं, ब्रिटेन की GDP 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर और 2026 में 4.26 ट्रिलियन डॉलर रहने की उम्मीद है। जापान भी भारत से आगे है, जिसकी इकोनॉमी 202 में 4.38 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया है। भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था देश GDP (₹ लाख करोड़) GDP (ट्रिलियन डॉलर) अमेरिका 3,023 32.38 चीन 1,947 20.85 जर्मनी 508 5.45 जापान 409 4.38 UK 397 4.26 भारत 387 4.15 सोर्स: इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) रैंकिंग में गिरावट की 2 मुख्य वजहें भारत की ग्लोबल रैंकिंग में इस बदलाव के पीछे 2 बड़े कारण माने जा रहे हैं: बेस ईयर में बदलाव: सरकार ने GDP के बेस ईयर को 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। इस बदलाव और नए पेटर्न की वजह से इकोनॉमी के साइज में 2.8% से 3.8% तक की कमी आई है। रुपए की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में आई गिरावट ने भी असर डाला है। FY26 में रुपए में करीब 10% की गिरावट देखी गई, जिससे डॉलर में आंकी जाने वाली GDP कम हो गई। इसके उलट ब्रिटिश पाउंड मजबूत हुआ है, जिससे उनकी इकोनॉमी का डॉलर वैल्यू बढ़ गया है। 2027 में बनेगा चौथी बड़ी इकोनॉमी, जापान को छोड़ेंगे पीछे यह गिरावट केवल अस्थायी साबित हो सकती है। IMF का अनुमान है कि भारत 2027 (FY28) तक एक लंबी छलांग लगाएगा और जापान-ब्रिटेन दोनों को पछाड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा। नॉलेज पार्ट GDP क्या होती है? GDP का पूरा नाम ग्रोस डॉमेस्टिक प्रोडक्शन है, जिसे हिंदी में कुल घरेलू उत्पाद कहते हैं। सरल भाषा में: GDP = एक देश में एक साल में कुल कितना सामान और सेवाएँ बनाई गईं (उनकी कीमत के हिसाब से)। उदाहरण: कारखाने में बनी कारें किसान का गेहूँ-चावल डॉक्टर-इंजीनियर की सेवाएँ दुकानदार का सामान सरकारी सड़क-स्कूल का काम ये सब मिलाकर एक साल में जितनी श्कुल वैल्यू’ बनी, वही देश की GDP है। GDP बढ़ने के फायदे नौकरियाँ बढ़ती हैं सैलरी/मजदूरी बढ़ती है दुकान-बिजनेस अच्छा चलता है सरकार ज्यादा टैक्स पाती है इससे सड़क, स्कूल, अस्पताल बनते हैं शेयर मार्केट ऊपर जाता है (जो म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं उन्हें फायदा) GDP घटने के नुकसान नौकरियाँ कम होती हैं / छंटनी होती है। सैलरी नहीं बढ़ती या कटती है। दुकानदार का सामान नहीं बिकता। किसान का माल सस्ता हो जाता है। बेरोजगारी बढ़ती है।लोग खर्च कम कर देते हैं इससे मंदी की संभावना रहती है। बेस ईयर क्या होता है?: बेस ईयर वो साल होता है जिसकी कीमतों को आधार (बेस) माना जाता है। यानी, उसी साल की चीजों की औसत कीमत को 100 का मान देते हैं। फिर, दूसरे सालों की कीमतों की तुलना इसी बेस ईयर से की जाती है। इससे पता चलता है कि महंगाई कितनी बढ़ी या घटी है। उदाहरण: मान लीजिए 2020 बेस ईयर है। उस साल एक किलो टमाटर ₹50 का था। अब 2025 में वो ₹80 का हो गया। तो महंगाई = (80 – 50) / 50 × 100 = 60% बढ़ी। यही फॉर्मूला CPI में यूज होता है, लेकिन ये पूरे बाजार की चीजों पर लागू होता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Gold & Silver Prices Surge in India

नई दिल्ली23 मिनट पहले कॉपी लिंक सोना-चांदी के दाम में आज 15 अप्रैल को तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,938 रुपए बढ़कर 1.53 लाख रुपए पर पहुंच गया है। इससे पहले 13 अप्रैल को इसकी कीमत 1.50 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, एक किलो चांदी 13,874 रुपए बढ़कर 2.51 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले सोमवार को इसकी कीमत 2.37 लाख रुपए प्रति किलो थी। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: एक शहर से दूसरे शहर सोना ले जाने में ईंधन और सुरक्षा खर्च जुड़ता है, जिससे दूरी बढ़ने पर दाम बढ़ते हैं। खरीदारी की मात्रा: दक्षिण भारत में ज्यादा खपत (करीब 40%) के कारण ज्वेलर्स बड़ी खरीद करते हैं, लेकिन छूट का फायदा सीमित रहता है। लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: राज्य और शहर के ज्वेलरी एसोसिएशन स्थानीय मांग-सप्लाई के आधार पर रेट तय करते हैं। पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स का खरीदी रेट तय करता है कि वे ग्राहकों को कितनी कीमत में बेचेंगे। सोना इस साल 19,754 और चांदी 20,435 महंगी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 19,754 रुपए और चांदी 20,435 रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.53 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.51 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। लेकिन, 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की ईरान से जंग शुरू होने के बाद गिरावट देखी गई। तब से 47 दिन में सोना 6,148 रुपए और चांदी 15,845 रुपए गिरी है। विदेशी जेवर मंगाने के लिए लाइसेंस लेना होगा सरकार ने सोने-चांदी और प्लेटिनम के गहनों को ‘फ्री’ कैटेगरी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी में डाल दिया है। इसका सीधा असर बाजार की सप्लाई पर दिख रहा है, जिससे सोना-चांदी की कीमतें बढ़ रही हैं। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब इन कीमती धातुओं से बनी ज्वेलरी किसी भी देश से मंगाने के लिए सरकार से विशेष लाइसेंस या परमिशन लेना होगा। सरकार ने यह कदम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए उठाया है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








