Monday, 03 Aug 2026 | 02:55 PM

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LPG Crisis India | Russia Oil Deal, Silver Price Drop

LPG Crisis India | Russia Oil Deal, Silver Price Drop

नई दिल्ली3 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर कच्चे तेल से जुड़ी रही। ईरान-इजराइल में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज रूट बंद हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने के बाद भारत करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदेगा। वहीं जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो रही है। गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों पर लंबी लाइनें लगी हैं। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज गिरावट देखने को मिल सकती है। फरवरी महीने के रिटेल महंगाई दर के आंकड़े आएंगे। पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. रूस से 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदेगा भारत: रिलायंस-IOC ने बुकिंग की, ईरान जंग के बीच सप्लाई बंद होने के बाद फैसला ईरान-इजराइल में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज रूट बंद हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने के बाद भारत करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदेगा। यह दावा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने रूस से तेल के एग्रीमेंट किए हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. देशभर में LPG की किल्लत, एजेंसी के बाहर लंबी लाइनें: UP-बिहार में पुलिस सुरक्षा में सिलेंडर बंट रहे, अयोध्या में राम रसोई बंद अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो रही है। गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों पर लंबी लाइनें लगी हैं। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर रोक से होटलों और रेस्टोरेंट्स में खाना नहीं बन पा रहा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. चांदी आज करीब ₹5,000 गिरकर ₹2.66 लाख/किलो पर आई: सोना ₹42 बढ़कर ₹1.60 लाख पर पहुंचा, इस साल कीमत में ₹27 हजार का इजाफा सोने में 11 मार्च को मामूली तेजी और चांदी में गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 42 रुपए बढ़कर ₹1.60 लाख पहुंच गया। इससे पहले मंगलवार को इसकी कीमत 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, एक किलो चांदी 4,934 रुपए घटकर ₹2.66 लाख पर आ गई है। इससे पहले मंगलवार को इसकी कीमत 2.71 लाख रुपए प्रति किलो थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. लैपटॉप-डेस्कटॉप इस साल 35% तक महंगे होंगे: मार्च में 10% बढ़ सकती है कीमतें, 12% बढ़ोतरी पहले ही हो चुकी; मेमोरी-GPU के दाम बढ़ने का असर देश में अगले कुछ महीनों में लैपटॉप और डेस्कटॉप खरीदना महंगा पड़ सकता है। प्रोसेसर और ग्राफिक्स कार्ड (GPU) जैसे प्रमुख कंपोनेंट्स के दाम बढ़ने से इस साल लैपटॉप-डेक्सटॉप की कीमतों में 35% तक के उछाल की संभावना है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में इस बढ़ोतरी की वजह से इस साल कंप्यूटर बाजार की ग्रोथ में 8% तक की कमी आ सकती है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. अमेरिका में 50 साल बाद पहली नई रिफाइनरी बनेगी: रिलायंस के साथ पार्टनरशिप, ट्रम्प बोले- ये अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी डील रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अमेरिका में ऑयल रिफाइनरी बनाने के लिए डील की है। अमेरिका में पिछले 50 सालों में यह पहली नई ऑयल रिफाइनरी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 11 मार्च को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इसकी जानकारी दी। ट्रम्प ने कहा कि यह 300 अरब डॉलर यानी, करीब 27 लाख करोड़ रुपए की एक ऐतिहासिक डील है। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी वर्कर्स, हमारे एनर्जी सेक्टर और साउथ टेक्सस के शानदार लोगों की बहुत बड़ी जीत है। रिलायंस के निवेश लिए उन्होंने धन्यवाद दिया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 6. शाओमी 17 अल्ट्रा फ्लैगशिप स्मार्टफोन भारत में लॉन्च: 200MP लाइका कैमरा और स्नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 प्रोसेसर, कीमत ₹1,39,999 चाइनीज टेक कंपनी शाओमी ने 11 मार्च को भारतीय बाजार में अपना सबसे पावरफुल फ्लैगशिप स्मार्टफोन ‘शाओमी 17 अल्ट्रा’ लॉन्च कर दिया है। इस फोन को स्टैंडर्ड शाओमी 17 मॉडल के साथ पेश किया गया है। जिसकी डिटेल यहां क्लिक कर देख सकते हैं। कंपनी का दावा है कि यह दुनिया का पहला ऐसा फोन है जिसमें लाइका का 1-इंच LOFIC सेंसर दिया गया है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए इसमें 200 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा और प्रोफेशनल फोटोग्राफी किट जैसे फीचर्स मिलते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… कल दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर मार्केट और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

India Ramps Up Russia Crude Oil Bookings Amid Middle East Tensions

India Ramps Up Russia Crude Oil Bookings Amid Middle East Tensions

नई दिल्ली21 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान-इजराइल में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज रूट बंद हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने के बाद भारत करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदेगा। यह दावा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने रूस से तेल के एग्रीमेंट किए हैं। हाल ही में अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल के शिपमेंट्स खरीदने के लिए भारत को 30 दिन (3 अप्रैल तक) की छूट देने का दावा किया था। हालांकि, इस पर भारतीय अधिकारी कह चुके हैं कि भारत तेल खरीदने के लिए किसी भी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं है। एशियाई समुद्री सीमा में फंसा तेल खरीदा कार्गो शिप्स रूस से कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई देशों के आसपास वेटिंग मोड में खड़ी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ के जरिए होने वाली तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में भारतीय रिफाइनर्स ने उन रूसी जहाजों को सुरक्षित किया है जो पहले से ही एशियाई समुद्र में मौजूद थे, लेकिन उन्हें खरीदार नहीं मिल रहे थे। ट्रेडर्स का कहना है कि इंडियन ऑयल ने करीब 1 करोड़ बैरल और रिलायंस ने भी कम से कम 1 करोड़ बैरल तेल खरीदा है। बाकी बचा हुआ तेल अन्य भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने लिया है। रास्ते में ही जहाजों ने भारत की ओर मोड़ा रुख शिपिंग डेटा से पता चला है कि रूसी जहाज ‘मायलो’ और ‘सारा’ जैसे कई बड़े तेल टैंकर, जो पहले सिंगापुर की ओर जा रहे थे, उन्होंने अब भारत के बंदरगाहों की तरफ अपना रास्ता मोड़ लिया है। अमेरिकी छूट मिलने के तुरंत बाद इन जहाजों के डेस्टीनेशन बदल दिए गए। रूस ने इस बार यूराल्स, ESPO और वरान्डे जैसे ग्रेड का तेल ऑफर किया है। सऊदी और इराक से घटाकर फिर रूस पर फोकस पिछले कुछ महीनों में भारत ने रूस से तेल की खरीद कम कर दी थी और इसकी जगह सऊदी अरब और इराक से ज्यादा तेल लेना शुरू किया था। आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में रूस से आयात घटकर 10.6 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो कि 2024 के मध्य में 20 लाख बैरल प्रति दिन से ज्यादा था। अब मिडिल ईस्ट संकट की वजह से एक बार फिर भारत ने रूस की तरफ रुख किया है, ताकि देश में ऊर्जा की किल्लत न हो। जरूरत का 70% कच्चा तेल अब दूसरे रास्तों से आएगा ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को ब्लॉक कर दिया है, जहां से दुनिया की 20% तेल सप्लाई होती है। वहीं, भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए भारत ने अपनी रणनीति बदल ली है और इस विवादित रास्ते पर निर्भरता कम कर दी है। वहीं, भारतीय कंपनियां जल्द से जल्द अपना स्टॉक भरना चाहती हैं। 10% की बढ़ोतरी: भारत ने उन रास्तों से होने वाले कच्चे तेल के आयात में 10% की बढ़ोतरी की है, जो होर्मुज के दायरे में नहीं आते। नया रूट: पहले भारत अपनी जरूरत का 60% कच्चा तेल होर्मुज के अलावा अन्य रास्तों से मंगाता था, जिसे अब बढ़ाकर 70% कर दिया गया है। इससे खाड़ी देशों में छिड़ी जंग का असर भारत की सप्लाई चेन पर कम पड़ेगा। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का करीब 85-90% कच्चा तेल 40+ देशों से मंगाता है। ईरान ने भरोसा दिया: होर्मुज से कार्गो मूवमेंट जल्द शुरू होगा सरकार ने ये संकेत भी दिए हैं कि होर्मुज रूट के पास जहाजों की आवाजाही जल्द ही शुरू हो सकती है। ईरान का रुख: सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने वादा किया है कि वह अपने पड़ोसी देशों को तब तक निशाना नहीं बनाएगा, जब तक कि उनके इलाके से ईरान पर हमला न हो। ग्लोबल ऑफर: भारत के लिए अच्छी बात यह है कि दुनिया के कई अन्य देश भी उसे तेल और LNG सप्लाई करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि भारत के पास अभी LNG का सरप्लस स्टॉक मौजूद है। देश में तेल का भंडार बढ़ा, सरकार का बढ़ा कॉन्फिडेंस पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल के बावजूद भारत की एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत हुई है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, हालिया समीक्षा में तेल के स्टॉक के स्तर में सुधार देखा गया है। स्टॉक की स्थिति: सूत्रों के मुताबिक, “भारत की एनर्जी स्टॉक पोजीशन बेहतर हो रही है। जैसे-जैसे हालात सुधर रहे हैं, इससे हमारा कॉन्फिडेंस भी बढ़ रहा है।” रिव्यू मीटिंग: इंटरनल रिव्यू मीटिंग्स में भी यह बात सामने आई है कि भारत का एनर्जी स्टॉक पहले के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति में पहुंच गया है। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… रूस से कच्चा तेल खरीद सकेगा भारत: ईरान जंग के कारण अमेरिका ने 3 अप्रैल तक रियायत दी, क्रूड ऑयल की कीमत 89 डॉलर के पार भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का संकट फिलहाल खत्म हो गया है, क्योंकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की शर्तों के साथ छूट मिल गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस दिया है। ये लाइसेंस 3 अप्रैल तक वैलिड रहेगा। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत यह अस्थायी कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण पार्टनर हैं और ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर रखने के लिए यह छूट दी गई है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India AI Impact Summit 2026: AI Analysis vs. MBAs

India AI Impact Summit 2026: AI Analysis vs. MBAs

59 मिनट पहले कॉपी लिंक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब वो काम कर लेता है, जो कभी मैनेजमेंट की पढ़ाई का सबसे खास और जरूरी हिस्सा हुआ करते थे। स्ट्रेटेजी ड्राफ्ट, फाइनेंशियल मॉडल और कॉम्पिटिटिव स्कैन अब मिनटों में हो जाते हैं। ऐसे में MBA करने के फायदे की समीक्षा अब ज्यादा बारीकी से की जा रही है। सवाल उठता है कि अगर मशीनें बड़े पैमाने पर एनालिसिस कर सकती हैं, तो मैनेजमेंट डिग्री की क्या भूमिका रह जाती है? इसी सवाल ने भारत में हुए AI Impact Summit के एजेंडा को आकार दिया। समिट में पॉलिसीमेकर्स और इंडस्ट्री लीडर्स को इकोनॉमी पर AI के असर को समझने के लिए बुलाया गया था। देश के सबसे बड़े AI कन्वर्जेंस में जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की मौजूदगी देश के सबसे बड़े AI कन्वर्जेंस (जब AI कई अन्य तकनीकी क्षेत्रों के साथ मिलकर काम करे) में जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की मौजूदगी, मैनेजमेंट एजुकेशन और टेक्नोलॉजिकल ट्रांसफॉर्मेशन के बीच एक सोची-समझी अलाइनमेंट के बारे में बताती है। शिक्षा में AI के इस्तेमाल पर चर्चा को मॉडरेट करने वाले जयपुरिया नोएडा के डायरेक्टर डॉ. शुभज्योति रे ने इसे अच्छे से समझाया। टेक्नोलॉजी, संस्थाओं के काम करने के तरीकों के मुकाबले ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रही है। लेकिन, गवर्नेंस और जजमेंट अभी भी इंसान के हाथों में है। उन्होंने चर्चा के दौरान कहा, “हम AI का इस्तेमाल कैसे करते हैं, यह इससे तय होगा कि यह मानवता की सेवा करता है या उसे गुलाम बनाता है।” MBA के लिए इसका मतलब यह है कि भविष्य का मैनेजमेंट एजुकेशन इन्फॉर्मेशन रिकॉल पर AI से मुकाबला नहीं कर सकता। आपको इससे इंटरप्रिटेशन, सिंथेसिस और जजमेंट पर मुकाबला करना होगा। इंस्टीट्यूट का यह मॉडल AI-नेटिव के साथ ह्यूमन-सेंट्रिक भी जयपुरिया के वाइस चेयरमैन श्रीवत्स जयपुरिया ने समिट में इसी बदलाव के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि ज्ञान को डेमोक्रेटाइज किया गया है। “अगर सभी के पास एक जैसा ज्ञान है, तो फर्क पर बात होनी चाहिए।” असल में इसका मतलब है कि पहले आउटपुट से आगे बढ़ना, ज्यादा तीखे सवाल पूछना, और अचानक आने वाली परिस्थितियों में निर्णय लेना। ऐसे माहौल में AI-इन्फॉर्म्ड एनालिसिस की जरूरत होती है, लेकिन इसका आउटकम इंसानी जजमेंट ही तय करता है। Jaipuria Institute of Management का बनाया AI-रेडी MBA/PGDM मॉडल इसी सोच पर आधारित है, जो एक NIRF-रैंक वाला MBA कॉलेज है। इंस्टीट्यूट का यह मॉडल AI-नेटिव के साथ ह्यूमन-सेंट्रिक भी है, जो फैकल्टी की अकाउंटेबिलिटी और मेंटरशिप को बनाए रखते हुए लर्निंग में AI को शामिल करता है। सरल शब्दों में कहें तो यह मॉडल इस सिंपल सोच पर आधारित है कि टेक्नोलॉजी से पढ़ाई या ट्रेनिंग आसान और तेज हो सकती है, लेकिन एक बेहतर लीडर बनने के लिए इंसानों से बातचीत और जुड़ाव ही काम आता है। यह डिजाइन तकनीक के सामान्य इस्तेमाल के बजाय, करिकुलम में किए गए बुनियादी और सोचे-समझे बदलावों को दिखाता है। AI टूल्स का इस्तेमाल जयपुरिया इंस्टीट्यूट AI को इलेक्टिव या ऐड-ऑन सर्टिफिकेशन के तौर पर नहीं मानता। यह एम्बेडेड इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर काम करता है। इंस्टीट्यूट में छात्र रेज्यूमे ऑप्टिमाइजेशन के लिए स्क्रिप्ट/वनCV, AI-ड्रिवन इंटरव्यू सिमुलेशन के लिए रिहर्सल, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट के लिए शोरनर, और रियल-टाइम क्लाइंट एंगेजमेंट के लिए AI-इनेबल्ड वर्कस्पेस जैसे प्रोप्राइटरी AI टूल्स का इस्तेमाल करते हैं। ये टेक्नोलॉजी के काम को आसान बनाते हैं, जिससे क्लास में समय बचता है और उस समय का उपयोग सही निर्णय लेने और लीडरशिप स्किल सिखाने में किया जा सकता है। जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट मेंटरशिप इंटेंसिटी, पीयर कोलेबोरेशन और स्ट्रक्चर्ड इंडस्ट्री एक्सपोजर में लगातार निवेश कर रहा है। AI असिस्टेड प्रोसेस से बचे हुए समय को लीडरशिप डेवलपमेंट, डिसीजन लैब्स, लाइव कंसल्टिंग असाइनमेंट और इटरेटिव फीडबैक एनवायरनमेंट में इस्तेमाल किया जाता है। फाइनल इवैल्यूएशन अभी भी फैकल्टी यानी शिक्षकों के हाथ में है। “शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सवालों के जवाब दे सकती है, लेकिन शिक्षा का असली मतलब है कि कोई इंसान कैसे सोचता है, फैसला करता है या जिम्मेदारी लेता है। हमें इंसान के भीतर शिक्षा को विकसित करना होगा। अपने करिकुलम को बदलते जॉब मार्केट के हिसाब से बदला टेक्नोलॉजी तैयारी के स्पीड को बढ़ा सकती है, लेकिन जजमेंट, एथिक्स और लीडरशिप को अंदर से सीखना होगा,” ऑटोमेशन और एजुकेशन के बीच के अंतर को और पक्का करते हुए श्रीवत्स जयपुरिया ने समिट में कहा। कंसल्टिंग फर्म, BFSI इंस्टीट्यूशन, एनालिटिक्स कंपनियां और डिजिटल एंटरप्राइज AI की समझ रखने वाले उन MBAs को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं जो ऑटोमेटेड सिस्टम के साथ डेटा को इंटरप्रेट कर सकते हैं। MBA प्लेसमेंट का तरीका अब इसी बदलाव को दिखाता है, जिसमें AI अब कंसल्टिंग, BFSI, एनालिटिक्स और डिजिटल फर्म में रोल डिस्क्रिप्शन में शामिल है। हाल ही में हुए एक पोल ने इस ट्रेंड को कन्फर्म किया है, जिसमें कहा गया है कि 99% C-सूट लीडर और 94% एम्प्लॉई किसी न किसी तरह से जेनरेटिव AI का इस्तेमाल करते हैं। बेहतर सैलरी उन कुछ बड़े विश्वविद्यालयों तक ही सीमित है, जिन्होंने अपने करिकुलम को बदलते जॉब मार्केट के हिसाब से बदला है। यह बदलाव अभी के रिक्रूटमेंट आउटकम में पहले से ही दिख रहा है। PGDM 2024–26 बैच में, श्रीजन ताम्रकार, स्नेहा केशरी, आकांक्षा सोनी और नव्या मिश्रा ने BNY के साथ AI एनालिस्ट के तौर पर रोल हासिल किए, जो मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स की बढ़ती मांग को दिखाता है जो फाइनेंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दोनों को मिलाकर काम कर सकें। AI-नेटिव टूल्स का इस्तेमाल कर रहे क्लासरूम से इंडस्ट्री तक के इस बदलाव के बारे में बताते हुए, 2024-2026 बैच के छात्र श्रीजन ताम्रकार कहते हैं, “AI कॉर्पोरेट दुनिया में हलचल पैदा कर रहा है, लेकिन जयपुरिया में इसके चर्चा में आने से पहले से ही हम अपनी क्लासरूम, इंटरव्यू और प्रोजेक्ट्स में AI-नेटिव टूल्स का इस्तेमाल कर रहे थे। AI-ड्रिवन एनालिसिस का वो शुरुआती अनुभव, Human Judgment और Decision-Making पर मेरा अधिक फोकस ने मुझे BNY में AI Analyst के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभालने का भरोसा दिया” करिकुलम और इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच का यह तालमेल जयपुरिया के सभी कैंपस में एक जैसा है। हाल के साइकल में, इंस्टीट्यूट ने ₹36 लाख प्रति वर्ष से अधिक का सबसे बड़ा पैकेज और

Laptop & Desktop Prices May Rise Up to 35% in India 2026 – AI Boom Impact

Laptop & Desktop Prices May Rise Up to 35% in India 2026 – AI Boom Impact

Hindi News Business Laptop & Desktop Prices May Rise Up To 35% In India 2026 – AI Boom Impact नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में अगले कुछ महीनों में लैपटॉप और डेस्कटॉप खरीदना महंगा पड़ सकता है। प्रोसेसर और ग्राफिक्स कार्ड (GPU) जैसे प्रमुख कंपोनेंट्स के दाम बढ़ने से इस साल लैपटॉप-डेक्सटॉप की कीमतों में 35% तक के उछाल की संभावना है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में इस बढ़ोतरी की वजह से इस साल कंप्यूटर बाजार की ग्रोथ में 8% तक की कमी आ सकती है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है। मार्च में 10% बढ़ सकती है कीमतें, 12% पहले ही महंगे हो चुके IDC इंडिया के सीनियर मार्केट एनालिस्ट भरत शेनॉय के मुताबिक, रैम (RAM) की कीमतें पहले ही 2.5 से 3 गुना तक बढ़ चुकी हैं। इससे लैपटॉप और डेस्कटॉप की कीमतों में अब तक 10-12% की बढ़ोतरी हो चुकी है। मार्च के महीने में ही 8-10% की एक और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जबकि इसके अगले कुछ महीनों में कीमतें 10% और बढ़ सकती हैं। 35 हजार वाला लैपटॉप अब 45 हजार का होगा शेनॉय ने बताया कि जो डिवाइसेस पहले 30,000 से 35,000 रुपए की रेंज में मिलते थे, उनकी कीमत अब 45,000 रुपए के करीब पहुंच रही हैं। इससे स्टूडेंट्स, होम यूजर्स और पहली बार कंप्यूटर खरीदने वालों के लिए अपग्रेड करना मुश्किल हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि यह तेजी अगले 6-7 तिमाहियों तक जारी रह सकती है और 2027 के दूसरे हाफ से पहले राहत मिलने की उम्मीद कम है। अगले 3-4 महीनों में लैपटॉप 35% तक महंगे होंगे समय बढ़ोत्तरी असर (₹35,000 वाले लैपटॉप पर) अब तक 10-12% ₹39,000 मार्च के अंत तक +8-10% ₹42,000 अगले 3-4 महीने +10% ₹45,000 क्यों बढ़ रहे हैं दाम? AI-सप्लाई चेन है बड़ी वजह काउंटरपॉइंट रिसर्च की सीनियर एनालिस्ट अंशिका जैन के अनुसार, मेमोरी (DRAM और NAND) की कीमतों में उछाल का सबसे बड़ा कारण ‘AI इंफ्रास्ट्रक्चर’ की बढ़ती डिमांड है। कंपनियां अब अपना प्रोडक्शन हाई-मार्जिन वाले सर्वर और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की तरफ मोड़ रही हैं, जिससे आम लैपटॉप के लिए इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स महंगे हो गए हैं। इसके अलावा इंटेल के एंट्री-लेवल प्रोसेसर की कमी ने भी मुश्किल बढ़ा दी है। मिडिल ईस्ट में तनाव का भी असर पड़ेगा इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में चल रहे तनाव के कारण भविष्य में संकट और गहरा सकता है। यह रूट एनर्जी और पेट्रोकेमिकल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। अगर यहां रुकावट लंबी रहती है, तो सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की इनपुट कॉस्ट बढ़ जाएगी। जिसका असर चिप्स की अवेलेबिलिटी और उनकी कीमतों पर पड़ेगा। 2025 में बना था रिकॉर्ड, अब 8% गिर सकता है मार्केट साल 2025 भारतीय पीसी मार्केट के लिए ऐतिहासिक रहा था। IDC के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 1.59 करोड़ यूनिट्स की शिपमेंट हुई, जो साल-दर-साल 10.2% की ग्रोथ थी। यह पहली बार था जब सालाना शिपमेंट 1.5 करोड़ के पार पहुंची। हालांकि, इस साल ऊंचे दामों के कारण डिमांड कमजोर रहने की आशंका है। अनुमान है कि कंज्यूमर और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में 7-8% की गिरावट आ सकती है। सेल और फाइनेंस स्कीम का सहारा ले रहीं कंपनियां बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहकों को लुभाने के लिए टेक ब्रांड्स अब नए रास्ते तलाश रहे हैं। कंपनियां लैपटॉप के कॉन्फिगरेशन में बदलाव कर रही हैं ताकि बेस प्राइस कम रखा जा सके। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को आसान किस्तों और प्रमोशनल ऑफर्स के जरिए जोड़ने की कोशिश की जा रही है। गेमिंग और प्रोफेशनल सेगमेंट के खरीदार महंगे होने के बावजूद खरीदारी जारी रख सकते हैं, लेकिन बजट सेगमेंट में सुस्ती दिखेगी। अगर आप अगले कुछ महीनों में लैपटॉप या पीसी खरीदने की सोच रहे हैं, तो अभी खरीदना बेहतर है। क्योंकि इनकी कीमतों में कमी आने के आसार 2027 से पहले नहीं दिख रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Air India Express Flight Hard Landing in Thailand Phuket, Nose Gear Broken All 133 Passengers Safe

Air India Express Flight Hard Landing in Thailand Phuket, Nose Gear Broken All 133 Passengers Safe

Hindi News International Air India Express Flight Hard Landing In Thailand Phuket, Nose Gear Broken All 133 Passengers Safe बैंकॉक1 घंटे पहले कॉपी लिंक थाईलैंड के फुकेत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बुधवार को हैदराबाद से आ रहे एयर इंडिया एक्सप्रेस के विमान की हार्ड लैंडिंग हुई थाईलैंड में एअर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट बुधवार दोपहर लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गई। विमान के रनवे पर उतरते ही उसका नोज गियर टूट गया और आगे का पहिया अलग हो गया। फ्लाइट हैदराबाद से फुकेट जा रही थी। थाई अखबार द नेशन के मुताबिक घटना के बाद कुछ समय के लिए रनवे बंद करना पड़ा, हालांकि विमान में सवार सभी 133 यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। यह फ्लाइट तय समय से पहले फुकेट पहुंच गई थी। विमान का निर्धारित लैंडिंग का समय सुबह 11:40 था, लेकिन यह 11:24 बजे ही उतर गया। बताया जा रहा है कि विमान की लैंडिंग काफी तेज हुई, जिसकी वजह से उसके आगे वाले लैंडिंग गियर को नुकसान पहुंचा। पहिया अलग हो जाने की वजह से विमान तुरंत रनवे से हटाया नहीं जा सका। रनवे पर सफेद पाउडर भी दिखाई दे रहा है, जिसे आमतौर पर एयरपोर्ट की रेस्क्यू टीम सुरक्षा के लिए छिड़कती है, ताकि अगर ईंधन लीक हो तो आग लगने का खतरा कम किया जा सके। नोज गियर (सामने का लैंडिंग गियर) को नुकसान पहुंचा हुआ दिखाई दे रहा है। हार्ड लैंडिंग के दौरान विमान का अगला पहिया अलग हो गया, जिससे उसका हिस्सा टूट गया या मुड़ गया। एअर इंडिया बोला- नोज व्हील में दिक्कत आई एयरपोर्ट अधिकारियों ने स्थिति को जल्दी काबू में कर लिया। विमान में सात क्रू सदस्य, 131 यात्री और दो बच्चे सवार थे। इस घटना के बाद फुकेट इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने रनवे को अस्थायी रूप से बंद कर दिया ताकि विमान को हटाया जा सके और रनवे की सुरक्षा जांच की जा सके। एयरपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट AXB938 हैदराबाद से फुकेट आई थी। यह विमान बोइंग 737-800 था, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-BWQ है। एअर इंडिया एक्सप्रेस ने एक बयान में कहा, “हम पुष्टि करते हैं कि 11 मार्च को हमारी हैदराबाद-फुकेट फ्लाइट में फुकेट एयरपोर्ट पर नोज व्हील में दिक्कत आ गई थी।” नोज व्हील एयरक्राफ्ट के लैंडिंग गियर सिस्टम का एक जरूरी हिस्सा होता है। 6 बजे तक फुकेट एयरपोर्ट का रनवे बंद प्रारंभिक जांच में पता चला कि विमान की लैंडिंग काफी तेज हुई थी, जिससे नोज लैंडिंग गियर को नुकसान पहुंचा और विमान रनवे से हट नहीं सका। फुकेट इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने दोपहर 12:08 बजे से शाम 6 बजे तक रनवे बंद रहने की सूचना जारी की। साथ ही एयरपोर्ट प्रशासन ने संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर स्थिति संभाली और सभी सुरक्षा नियमों का पालन किया। एयरपोर्ट ने प्रभावित यात्रियों से कहा है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी एयरलाइन से संपर्क कर फ्लाइट की स्थिति और यात्रा से जुड़ी जानकारी जरूर जांच लें, ताकि किसी तरह की परेशानी से बचा जा सके। ————————- ये खबर भी देखें… बेरूत में हमलों के बीच पैसेंजर प्लेन ने उड़ान भरी:ईरान के 500 साल पुराने महल पर हमला; अमेरिका- ईरान जंग की 32 PHOTOS ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल हमले का आज चौथा दिन है। इजराइली और अमेरिकी सेनाओं ने मंगलवार को भी ईरान के अहम ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। ईरान ने भी इजराइल पर जवाबी हमले किए। उसने गल्फ देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बर्बाद करने का दावा भी किया। पूरी खबर देखें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Trump Thanks Reliance & India for $25 Lakh Crore Investment in US Oil Refinery

Trump Thanks Reliance & India for $25 Lakh Crore Investment in US Oil Refinery

Hindi News Business Trump Thanks Reliance & India For $25 Lakh Crore Investment In US Oil Refinery 22 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने टेक्सास में 300 अरब डॉलर (करीब 25.35 लाख करोड़ रुपए) की तेल रिफाइनरी की घोषणा करते हुए भारत और उसकी सबसे बड़ी प्राइवेट एनर्जी कंपनी रिलायंस को धन्यवाद दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में पिछले 50 सालों में पहली नई तेल रिफाइनरी बनाने के लिए भारत और रिलायंस इंडस्ट्रीज की सराहना की है। ट्रंप ने इसे एक ऐतिहासिक निवेश बताते हुए कहा कि यह ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति की बड़ी जीत है। इस प्रोजेक्ट के जरिए अमेरिका ऊर्जा के क्षेत्र में फिर से अपना दबदबा कायम करना चाहता है। 300 अरब डॉलर की है पूरी डील डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस प्रोजेक्ट की घोषणा की। उन्होंने बताया कि टेक्सास के ब्राउन्सविले में बनने वाली यह रिफाइनरी 300 अरब डॉलर के बड़े सौदे का हिस्सा है। ट्रंप के मुताबिक, यह अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी डील है। हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि पूरी 300 अरब डॉलर की राशि भारत के साथ हुए समझौते का ही हिस्सा है या इसमें अन्य पार्टनर भी शामिल हैं। दुनिया की सबसे साफ रिफाइनरी होने का दावा ट्रंप ने कहा कि ब्राउन्सविले बंदरगाह पर बनने वाली यह रिफाइनरी न केवल अमेरिकी घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि इससे ग्लोबल एक्सपोर्ट को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने दावा किया कि यह दुनिया की सबसे ‘क्लीन’ यानी स्वच्छ रिफाइनरी होगी। इससे अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी मजबूत होगी और साउथ टेक्सास के इलाके में हजारों नए रोजगार पैदा होंगे। ट्रंप बोले- भारत और रिलायंस का शुक्रिया प्रोजेक्ट का खुलासा करते हुए ट्रंप ने लिखा, “इस शानदार निवेश के लिए भारत में हमारे सहयोगियों और उनकी सबसे बड़ी प्राइवेट एनर्जी कंपनी, रिलायंस को धन्यवाद।” ट्रंप ने अपनी सरकार की नीतियों की तारीफ करते हुए कहा कि टैक्स में कटौती और परमिट की प्रक्रिया को आसान बनाने की वजह से ही इतना बड़ा निवेश अमेरिका वापस आ रहा है। मिडल ईस्ट में तनाव के बीच बड़ा ऐलान यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। हॉर्मुज जलमार्ग के बंद होने से दुनिया की 20% तेल सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। ऐसे में अमेरिका अपनी घरेलू तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाकर दूसरे देशों पर निर्भरता कम करना चाहता है। एलिमेंट फ्यूल्स होल्डिंग कर रही है काम न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, डलास की एक स्टार्टअप कंपनी ‘एलिमेंट फ्यूल्स होल्डिंग’ ने 2024 में ब्राउन्सविले में एक नया प्लांट बनाने के प्रयासों को फिर से शुरू करने की बात कही थी। माना जा रहा है कि ट्रंप का इशारा इसी बड़े प्रोजेक्ट की ओर है, जिसमें अब भारतीय सहयोग की बात सामने आ रही है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

LPG Supply Halt Sparks Gold, Silver Surge; Air India Fare Hiked

LPG Supply Halt Sparks Gold, Silver Surge; Air India Fare Hiked

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर LPG सिलेंडर से जुड़ी रही। अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते गैस सप्लाई ठप हो गई है। इससे देश में LPG की किल्लत हो रही है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगा दी है। वहीं, सोने और चांदी के दामों में बढ़त रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,500 रुपए बढ़कर 1.60 लाख रुपए पर पहुंच गया है। एक किलो चांदी 11 हजार रुपए बढ़कर 2.71 लाख रुपए पर पहुंच गई है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज गिरावट देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर सप्लाई बंद: गैस नहीं मिलने से होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत; जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते गैस सप्लाई ठप हो गई है। इससे देश में LPG की किल्लत हो रही है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगा दी है। गैस सप्लाई बंद होने की वजह से कई शहरों में रेस्टोरेंट्स और होटल बंद होने की नौबत आ गई है। ऐसे में सरकारी सूत्रों का कहना है कि तेल कंपनियां तीन सदस्यी कमेटी के जरिए रेस्टोरेंट एसोसिएशनों से बात करेंगी, ताकि LPG सप्लाई की दिक्कतों को समझा जा सके। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. चांदी आज ₹11 हजार बढ़कर ₹2.71 लाख पर पहुंची: सोना ₹1500 बढ़कर ₹1.60 लाख का हुआ, इस साल कीमत ₹27 हजार बढ़ी सोने और चांदी के दामों में 10 मार्च को बढ़त रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,500 रुपए बढ़कर 1.60 लाख रुपए पर पहुंच गया है। इससे पहले इसकी कीमत 1.59 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। एक किलो चांदी 11 हजार रुपए बढ़कर 2.71 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले इसकी कीमत 2.60 लाख रुपए प्रति किलो थी। एक्सपर्ट्स के अनुसार, 29 जनवरी को सोने की कीमत 1.76 लाख रुपए और चांदी के दाम 3.86 लाख रुपए के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गए थे। इसके बाद से इनकी कीमत में काफी गिरावट आ चुकी है। इसलिए इनकी खरीदारी देखने को मिल रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. एअर इंडिया की घरेलू फ्लाइट ₹399 महंगी: भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का किराया 15% बढ़ाया; ईरान जंग से जेट फ्यूल के दाम दोगुने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है। एअर इंडिया 12 मार्च से घरेलू फ्लाइट टिकटों पर 399 रुपये का फ्यूल सरचार्ज लगाएगी। यानी टिकट खरीदते समय अब आपको 399 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। वहीं, एअर इंडिया इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर भी सरचार्ज लगेगा। ब्लूमबर्ग ने भी अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी कि भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. इंडिगो के CEO पीटर एलबर्स का इस्तीफा: दिसंबर में फ्लाइट ऑपरेशन में गड़बड़ी हुई थी, ₹22 करोड़ जुर्माना लगा था; फाउंडर राहुल भाटिया संभालेंगे कमान भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) पीटर एलबर्स ने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने आज 10 मार्च को रेगुलेटरी फाइलिंग में इसकी जानकारी दी। एलबर्स के जाने के बाद अब कंपनी के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया अंतरिम तौर पर एयरलाइन के कामकाज की जिम्मेदारी संभालेंगे। 3 महीने पहले इंडिगो को भारी फ्लाइट ऑपरेशंस संकट का सामना करना पड़ा था। उस दौरान करीब 3 लाख यात्री फंसे रह गए थे, जिसके बाद एविएशन रेगुलेटर DGCA ने एयरलाइन पर ₹22.20 करोड़ का भारी जुर्माना भी लगाया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए भारत में निवेश आसान: फॉरेन इन्वेस्टमेंट के नियम बदले; 10% से कम हिस्सेदारी पर बिना मंजूरी निवेश कर सकेंगे केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले यानी पड़ोसी देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई। नए नियमों के तहत अब उन निवेश प्रस्तावों को ऑटोमैटिक मंजूरी मिल जाएगी, जिनमें पड़ोसी देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम हो और उसका कंपनी पर कोई कंट्रोल न हो। इसके साथ ही, स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय कर दी गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… कल दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… मंगलवार के शेयर मार्केट और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India Eases FDI Rules for China & Neighbouring Countries: Press Note 3 Amended

India Eases FDI Rules for China & Neighbouring Countries: Press Note 3 Amended

Hindi News Business India Eases FDI Rules For China & Neighbouring Countries: Press Note 3 Amended नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने चीन सहित भारत के साथ जमीनी सीमा यानी बॉर्डर शेयर करने वाले देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के प्रावधानों में संशोधन यानी बदलाव को मंजूरी दी गई। नए नियमों के तहत अब उन निवेश प्रस्तावों को ‘ऑटोमैटिक रूट’ से मंजूरी मिल जाएगी, जिनमें पड़ोसी देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम हो और उसका कंपनी पर कोई कंट्रोल न हो। इसके साथ ही, स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय कर दी गई है। स्टार्टअप्स और डीप टेक कंपनियों को फायदा मिलेगा सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारतीय स्टार्टअप्स और डीप टेक सेक्टर पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य ग्लोबल फंड्स से निवेश हासिल करना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है। अब तक प्रेस नोट 3 की वजह से कई ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) फंड्स को निवेश करने में परेशानी हो रही थी, क्योंकि उनमें पड़ोसी देशों के निवेशकों का छोटा हिस्सा भी शामिल होता था। अब 10% की सीमा तय होने से फंड का फ्लो आसान हो जाएगा। FDI के नियमों में क्या-क्या बदला पुराने नियम नए नियम पड़ोसी देशों से हर निवेश के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी थी। 10% से कम ‘बेनिफिशियल ओनरशिप’ पर निवेश को ऑटोमैटिक अनुमति। अप्रूवल मिलने में महीनों का समय लगता था, कोई डेडलाइन नहीं थी। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 60 दिन की समय सीमा तय की गई है। ‘बेनिफिशियल ओनर’ की परिभाषा को लेकर अस्पष्टता थी। PMLA एक्ट के तहत 10% की लिमिट और स्पष्ट परिभाषा लागू की। ‘बेनिफिशियल ओनर’ की परिभाषा साफ हुई सरकार ने निवेश के नियमों में पारदर्शिता लाने के लिए ‘बेनिफिशियल ओनर’ की परिभाषा को अब प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) रूल्स, 2005 के समान कर दिया है। अगर किसी निवेश में लैंड बॉर्डर वाले देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम है और वह कंपनी के फैसलों को प्रभावित नहीं करता है, तो उसे सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। ऐसी स्थिति में भारतीय कंपनी को सिर्फ डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) यानी उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग को इसकी जानकारी देनी होगी। 60 दिन में निवेश पर फैसला, जॉइंट वेंचर बनाना आसान कैबिनेट ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक ‘फास्ट ट्रैक’ अप्रूवल सिस्टम को भी हरी झंडी दी है। अब स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों में निवेश के प्रस्तावों पर सरकार को 60 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा। इससे भारतीय कंपनियों को विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप करने और जॉइंट वेंचर बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनने में आसानी होगी। इलेक्ट्रॉनिक और सोलर सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होगा सरकार ने साफ किया है कि इन बदलावों से विशेष रूप से तीन सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा… इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स: मोबाइल-लैपटॉप के पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों को विदेशी निवेश और तकनीक मिल सकेगी। कैपिटल गुड्स: भारी मशीनरी और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट के प्रोडक्शन में तेजी आएगी। सोलर सेल्स: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं, भारतीय कंट्रोल जरूरी नियमों में ढील के बावजूद सरकार ने सुरक्षा को बरकरार रखा है। संवेदनशील सेक्टर में फास्ट-ट्रैक अप्रूवल तभी मिलेगा, जब उस कंपनी की मेजोरिटी शेयरहोल्डिंग और कंट्रोल भारतीय नागरिकों या भारतीय कंपनियों के पास ही रहे। यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी निवेश से देश की सुरक्षा को खतरा न हो और कंपनी का कमांड भारतीय हाथों में ही रहे। FDI पॉलिसी को 2020 में लागू किया गया था अप्रैल 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी को लागू किया था। उस समय भारतीय कंपनियों की वैल्यूएशन काफी गिर गई थी। सरकार को डर था कि चीन जैसे पड़ोसी देश की कंपनियां इस मौके का फायदा उठाकर भारतीय कंपनियों का ‘अवसरवादी अधिग्रहण’ कर सकती हैं। इसी को रोकने के लिए नियम बनाया गया था कि पड़ोसी देशों से आने वाले हर छोटे-बड़े निवेश के लिए सरकार की मंजूरी अनिवार्य होगी। ये खबर भी पढ़ें… भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का किराया 15% बढ़ाया: कच्चे तेल के रेट बढ़ने से जेट फ्यूल के दाम दोगुने, ईरान जंग का असर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर भी पड़ते दिखाई दे रहा है। भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India Eases FDI Rules for China & Neighbouring Countries: Press Note 3 Amended

India Eases FDI Rules for China & Neighbouring Countries: Press Note 3 Amended

Hindi News Business India Eases FDI Rules For China & Neighbouring Countries: Press Note 3 Amended नई दिल्ली12 मिनट पहले कॉपी लिंक सरकार ने स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय की है। केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले यानी पड़ोसी देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई। नए नियमों के तहत अब उन निवेश प्रस्तावों को ऑटोमैटिक मंजूरी मिल जाएगी, जिनमें पड़ोसी देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम हो और उसका कंपनी पर कोई कंट्रोल न हो। इसके साथ ही, स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए 60 दिनों की समय सीमा तय कर दी गई है। दरअसल जब कोई विदेशी कंपनी या व्यक्ति भारत में किसी कंपनी, फैक्ट्री, बिजनेस या प्रोजेक्ट में सीधे पैसा लगाता है, तो उसे FDI कहते हैं। स्टार्टअप्स और डीप टेक कंपनियों को फायदा मिलेगा सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारतीय स्टार्टअप्स और डीप टेक सेक्टर पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य ग्लोबल फंड्स से निवेश हासिल करना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है। अब तक प्रेस नोट 3 की वजह से कई ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी (PE) और वेंचर कैपिटल (VC) फंड्स को निवेश करने में परेशानी हो रही थी, क्योंकि उनमें पड़ोसी देशों के निवेशकों का छोटा हिस्सा भी शामिल होता था। अब 10% की सीमा तय होने से फंड का फ्लो आसान हो जाएगा। ‘बेनिफिशियल ओनर’ की परिभाषा साफ हुई सरकार ने निवेश के नियमों में पारदर्शिता लाने के लिए ‘बेनिफिशियल ओनर’ की परिभाषा को अब प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) रूल्स, 2005 के समान कर दिया है। अगर किसी निवेश में लैंड बॉर्डर वाले देश के निवेशक की हिस्सेदारी 10% से कम है और वह कंपनी के फैसलों को प्रभावित नहीं करता है, तो उसे सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। ऐसी स्थिति में भारतीय कंपनी को सिर्फ डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) यानी उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग को इसकी जानकारी देनी होगी। 60 दिन में निवेश पर फैसला, जॉइंट वेंचर बनाना आसान कैबिनेट ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए एक ‘फास्ट ट्रैक’ अप्रूवल सिस्टम को भी हरी झंडी दी है। अब स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों में निवेश के प्रस्तावों पर सरकार को 60 दिनों के भीतर फैसला लेना होगा। इससे भारतीय कंपनियों को विदेशी कंपनियों के साथ मिलकर टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप करने और जॉइंट वेंचर बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनने में आसानी होगी। इलेक्ट्रॉनिक और सोलर सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा होगा सरकार ने साफ किया है कि इन बदलावों से विशेष रूप से तीन सेक्टरों को सबसे ज्यादा फायदा होगा… इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स: मोबाइल-लैपटॉप के पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों को विदेशी निवेश और तकनीक मिल सकेगी। कैपिटल गुड्स: भारी मशीनरी और इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट के प्रोडक्शन में तेजी आएगी। सोलर सेल्स: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं, भारतीय कंट्रोल जरूरी नियमों में ढील के बावजूद सरकार ने सुरक्षा को बरकरार रखा है। संवेदनशील सेक्टर में फास्ट-ट्रैक अप्रूवल तभी मिलेगा, जब उस कंपनी की मेजोरिटी शेयर-होल्डिंग और कंट्रोल भारतीय नागरिकों या भारतीय कंपनियों के पास ही रहे। यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी निवेश से देश की सुरक्षा को खतरा न हो और कंपनी का कमांड भारतीय हाथों में ही रहे। ———————– ये खबर भी पढ़ें… भारतीय एयरलाइंस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स का किराया 15% बढ़ाया: कच्चे तेल के रेट बढ़ने से जेट फ्यूल के दाम दोगुने, ईरान जंग का असर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर भी पड़ते दिखाई दे रहा है। भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Airfares Surge 15% in India, Up to 70% in Vietnam as Jet Fuel Prices Double

Airfares Surge 15% in India, Up to 70% in Vietnam as Jet Fuel Prices Double

Hindi News Business Middle East Conflict 2026: Airfares Surge 15% In India, Up To 70% In Vietnam As Jet Fuel Prices Double नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक एयरलाइंस के लिए जेट-फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर भी पड़ते दिखाई दे रहा है। भारतीय एयरलांइस ने इंटरनेशनल फ्लाइट्स के किराए में करीब 15% की बढ़ोतरी की है। ब्लूमबर्ग ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती जंग और होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जिसका असर ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है। भारत समेत एशिया की प्रमुख एयरलाइंस ने भी टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं और कई कंपनियां अपने विमानों को ग्राउंडेड करने का प्लान भी बना रही हैं। जानकारों का कहना है कि यह 1970 के दशक के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट हो सकता है। एयरलाइंस का कहना है कि ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ने के कारण उनके पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचा है। भारतीय एयरलाइंस आगे किराया और बढ़ा सकती हैं रिपोर्ट के अनुसार, जेट फ्यूल यानी ATF की कीमतों में हो रहे इजाफे को देखते हुए भारत की एविएशन कंपनियां आने वाले दिनों में किराया और भी बढ़ा सकती हैं। एयरलाइंस का कहना है कि ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ने के कारण उनके पास किराया बढ़ाने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचा है। जेट फ्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी हो चुकी हैं 28 फरवरी को शुरू हुई ईरान-इजराइल जंग के बाद से तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत आज 93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। वहीं एक दिन पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी। वहीं कई मार्केट में जेट फ्यूल की कीमतें संघर्ष शुरू होने के बाद से दोगुनी हो चुकी हैं। जंग से पहले जेट फ्यूल की कीमतें लगभग 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल थीं, जो अब बढ़कर 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच गई है। वहीं मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण दुनियाभर में अब तक 40,000 से ज्यादा उड़ानें कैंसिल भी हुई हैं। होर्मुज रूट प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों और जेट फ्यूल के दाम में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। वियतनाम में 70% तक महंगे हो सकते हैं टिकट ब्लूमबर्ग ने रिपोर्ट में बताया कि वियतनाम की सरकारी मीडिया ने चेतावनी दी है कि वहां हवाई किराए में 70% तक का उछाल आ सकता है। इसकी मुख्य वजह वियतनाम की इम्पोर्टेड जेट फ्यूल पर भारी निर्भरता है। इंडस्ट्री एनालिस्ट्स के अनुसार, एशियाई एयरलाइंस यूरोपीय या अमेरिकी एयरलाइंस की तुलना में ज्यादा खतरे में हैं, क्योंकि इनके पास फ्यूल हेजिंग (ईंधन की कीमतों को लॉक करने का प्रोग्राम) की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। एविएशन सेक्टर में हर तरफ पैनिक की स्थिति है स्पार्टा कमोडिटीज की सीनियर ऑयल मार्केट एनालिस्ट जून गोह ने बताया, एविएशन सेक्टर में हर तरफ पैनिक की स्थिति है। जिन एशियाई एयरलाइंस का हेजिंग प्रोग्राम कमजोर है, वे सबसे ज्यादा मुश्किल में हैं। उन्होंने कम कीमत पर टिकट बेच दिए थे, लेकिन अब उन्हें बहुत महंगे रेट पर फ्यूल खरीदना पड़ रहा है। कुछ लो-कॉस्ट एयरलाइंस तो अब विमानों को खड़ा करने की तैयारी में हैं। क्योंकि मौजूदा फ्यूल कीमतों पर उड़ान भरना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। हालात नहीं सुधरे, तो छोटी एयरलाइंस बंद हो सकती हैं जर्मन बैंक डॉयचे बैंक के एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो दुनिया भर में हजारों विमान खड़े हो सकते हैं और कुछ छोटी एयरलाइंस बंद भी हो सकती हैं। लुफ्थांसा जैसी कंपनियों को मिल सकता है फायदा जहां ज्यादातर एयरलाइंस संकट में हैं, वहीं लुफ्थांसा जैसी कंपनियां इसे मौके के तौर पर देख रही हैं। लुफ्थांसा के CEO कार्सन स्पोह्र ने कहा कि उनकी कंपनी ने फ्यूल प्राइज को हेज किया हुआ है, जिससे उन्हें ‘रिलेटिव एडवांटेज’ मिलेगा। वे मिडिल ईस्ट की एयरलाइंस के प्रभावित होने का फायदा उठाते हुए एशिया और अफ्रीका के रूट्स पर अपनी क्षमता बढ़ाने का प्लान बना रहे हैं। ——————— ये खबर भी पढ़ें… कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर सप्लाई बंद: गैस नहीं मिलने से होटल-रेस्टोरेंट बंद होने की नौबत; जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते गैस सप्लाई ठप हो गई है। इससे देश में LPG की किल्लत हो रही है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगा दी है। गैस सप्लाई बंद होने की वजह से कई शहरों में रेस्टोरेंट्स और होटल बंद होने की नौबत आ गई है। ऐसे में सरकारी सूत्रों का कहना है कि तेल कंपनियां तीन सदस्यी कमेटी के जरिए रेस्टोरेंट एसोसिएशनों से बात करेंगी, ताकि LPG सप्लाई की दिक्कतों को समझा जा सके। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…