Sunday, 12 Apr 2026 | 08:48 PM

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Hormuz Strait Crisis; Iran US War Impact

Hormuz Strait Crisis; Iran US War Impact

वॉशिंगटन डीसी4 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहा युद्ध अब इतना बढ़ गया है कि होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया है। इस वजह से सैकड़ों तेल टैंकर दोनों तरफ खड़े हैं और आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि वह इस समुद्री रास्ते को ‘किसी भी तरह’ फिर से खोलेंगे। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह काम इतना आसान नहीं है। अगर ईरान से कोई समझौता नहीं होता या अमेरिका कोई खतरनाक मिलिट्री एक्शन नहीं लेता, तो इस रास्ते पर पूरी तरह से आवाजाही बहाल करना मुश्किल होगा। संकरे रास्ते का फायदा उठाता है ईरान इसकी सबसे बड़ी वजह इस इलाके की भौगोलिक स्थिति है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर दुश्मनों पर हमले करता है। ईरान के पास ऐसे हथियार हैं जो छोटे होते हैं, आसानी से छिपाए जा सकते हैं और अचानक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये हथियार पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपे होते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है। इस वजह से जहाजों को हमला होने पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। जैसे ही मिसाइल या ड्रोन दिखाई देता है, उसके बाद कार्रवाई के लिए सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं। ट्रम्प के लिए होर्मुज का हल ढूंढना बहुत मुश्किल ट्रम्प ने इस रास्ते को खोलने के लिए कई बार अलग-अलग दावे कर चुके हैं। एक बार तो उन्होंने यह भी कहा कि वह ईरान के सुप्रीम लीडर के साथ मिलकर इस रास्ते को कंट्रोल कर सकते हैं। लेकिन असल में अमेरिका जिन विकल्पों पर विचार कर रहा है, उनमें ज्यादातर सैन्य कार्रवाई ही शामिल है। अगर अमेरिका सैन्य ताकत से इस रास्ते को खोलना चाहता है, तो सबसे पहले उसे ईरान की हमले की क्षमता खत्म करनी होगी। यानी उसे मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और उन ठिकानों को नष्ट करना होगा जहां से ईरान जहाजों पर हमला कर सकता है। लेकिन अब तक अमेरिका और इजराइल के हजारों हमलों के बावजूद ईरान की यह क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान के पास कई जगहों पर मिसाइल बैटरी हो सकती हैं और वे मोबाइल भी होती हैं, यानी उन्हें जल्दी-जल्दी एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इसलिए उन्हें ढूंढना और खत्म करना बहुत मुश्किल है। अमेरिकी वॉरशिप भी होर्मुज में सुरक्षित नहीं ट्रम्प ने यह भी कहा है कि जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नौसेना के जहाज उनके साथ चल सकते हैं। इसे एस्कॉर्ट ऑपरेशन कहा जाता है। इसमें वॉरशिप टैंकरों के साथ चलेंगे, ऊपर से विमान निगरानी करेंगे, ड्रोन को मार गिराएंगे और तट पर मौजूद मिसाइल ठिकानों पर हमला करेंगे। इसके साथ ही समुद्र में अगर बारूदी सुरंगें (माइंस) बिछाई गई हैं, तो उन्हें हटाने के लिए माइंसवीपर जहाजों को लगाया जाएगा। लेकिन यह सब करना बहुत बड़ा और जटिल सैन्य अभियान होगा। इसमें काफी समय, संसाधन और जोखिम शामिल होंगे। वॉरशिप खुद भी इस इलाके में पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि होर्मुज जैसे संकरे इलाके में जहाजों को चारों तरफ से खतरा रहता है। ड्रोन और मिसाइल से बचाव करना यहां और मुश्किल हो जाता है। समुद्र में बिछी माइंस सबसे बड़ा खतरा सबसे बड़ा खतरा समुद्र में बिछाई गई माइंस से है। अगर पानी में माइंस होने का जरा सा भी शक हो, तो कोई भी देश अपने बड़े जहाज वहां भेजने का जोखिम नहीं उठाएगा। माइंस हटाने का काम बहुत धीमा होता है और इसमें कई हफ्ते लग सकते हैं। इस दौरान जो टीमें माइंस हटाती हैं, उन्हें भी सुरक्षा की जरूरत होती है, क्योंकि वे खुद हमले का आसान निशाना बन सकती हैं। जमीन पर कार्रवाई का विकल्प भी मौजूद है। अमेरिकी मरीन सैनिक इस इलाके की तरफ भेजे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें स्ट्रेट के आसपास के छोटे-छोटे द्वीपों पर तैनात किया जा सकता है, जहां से वे हमले रोकने या एयर डिफेंस सिस्टम लगाने का काम कर सकते हैं। लेकिन ईरान की बड़ी जमीनी सेना को देखते हुए उसके मुख्य इलाके में घुसना बहुत जोखिम भरा होगा। अगर अमेरिकी सैनिक मारे गए या पकड़ लिए गए, तो इससे हालात और बिगड़ सकते हैं और युद्ध और बढ़ सकता है। मान लें कि अमेरिका किसी तरह इस रास्ते को खोल भी देता है, तब भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। सिर्फ एक मिसाइल या ड्रोन हमला भी फिर से डर पैदा कर सकता है और जहाज कंपनियां दोबारा इस रास्ते से गुजरने से बचेंगी। फारस की खाड़ी में फंसे 500 तेल टैंकर इस समय फारस की खाड़ी में करीब 500 तेल टैंकर खड़े हैं और ज्यादातर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। युद्ध से पहले हर दिन लगभग 80 तेल और गैस के टैंकर इस रास्ते से गुजरते थे। अब जहाज मालिक और बीमा कंपनियां तभी तैयार होंगी जब उन्हें लगेगा कि खतरा काफी कम हो गया है। अगर जोखिम ज्यादा रहा, तो वे इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करेंगे। भले ही अमेरिका बड़ा एस्कॉर्ट ऑपरेशन शुरू कर दे, लेकिन वह एक समय में सीमित जहाजों को ही सुरक्षा दे सकता है। यानी सभी टैंकरों को एक साथ सुरक्षित निकालना संभव नहीं होगा। इसके अलावा, ईरान ने सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट में ही नहीं, बल्कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में भी जहाजों पर हमले किए हैं। इसका मतलब है कि जहाजों को पूरे रास्ते में सुरक्षा देनी होगी, जिससे यह मिशन और लंबा और जटिल हो जाता है। इतना बड़ा सैन्य अभियान अमेरिका की बाकी सैन्य ताकत पर भी दबाव डाल सकता है, क्योंकि उसे अपने संसाधन दूसरे इलाकों से हटाने पड़ सकते हैं। आखिर में विशेषज्ञ यही मानते हैं कि जब तक ईरान की तरफ से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक इस स्ट्रेट

Hormuz Strait Crisis; Iran US War Impact

Hormuz Strait Crisis; Iran US War Impact

वॉशिंगटन डीसी4 घंटे पहले कॉपी लिंक ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहा युद्ध अब इतना बढ़ गया है कि होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया है। इस वजह से सैकड़ों तेल टैंकर दोनों तरफ खड़े हैं और आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि वह इस समुद्री रास्ते को ‘किसी भी तरह’ फिर से खोलेंगे। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह काम इतना आसान नहीं है। अगर ईरान से कोई समझौता नहीं होता या अमेरिका कोई बड़ा मिलिट्री एक्शन नहीं लेता, तो इस रास्ते पर पूरी तरह से आवाजाही बहाल करना मुश्किल होगा। संकरे रास्ते का फायदा उठाता है ईरान ईरान की मजबूती की सबसे बड़ी वजह इस इलाके की भौगोलिक स्थिति है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर दुश्मनों पर हमले करता है। ईरान के पास ऐसे हथियार हैं जो छोटे होते हैं, आसानी से छिपाए जा सकते हैं और अचानक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये हथियार पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपे होते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है। इस वजह से जहाजों को हमला होने पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। जैसे ही मिसाइल या ड्रोन दिखाई देता है, उसके बाद कार्रवाई के लिए सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं। ट्रम्प के लिए होर्मुज का हल ढूंढना बहुत मुश्किल ट्रम्प ने इस रास्ते को खोलने के लिए कई बार अलग-अलग दावे कर चुके हैं। एक बार तो उन्होंने यह भी कहा कि वह ईरान के सुप्रीम लीडर के साथ मिलकर इस रास्ते को कंट्रोल कर सकते हैं। लेकिन असल में अमेरिका जिन विकल्पों पर विचार कर रहा है, उनमें ज्यादातर सैन्य कार्रवाई ही शामिल है। अगर अमेरिका सैन्य ताकत से इस रास्ते को खोलना चाहता है, तो सबसे पहले उसे ईरान की हमले की क्षमता खत्म करनी होगी। यानी उसे मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और उन ठिकानों को नष्ट करना होगा जहां से ईरान जहाजों पर हमला कर सकता है। लेकिन अब तक अमेरिका और इजराइल के हजारों हमलों के बावजूद ईरान की यह क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान के पास कई जगहों पर मिसाइल बैटरी हो सकती हैं और वे मोबाइल भी होती हैं, यानी उन्हें जल्दी-जल्दी एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इसलिए उन्हें ढूंढना और खत्म करना बहुत मुश्किल है। अमेरिकी वॉरशिप भी होर्मुज में सुरक्षित नहीं ट्रम्प ने यह भी कहा है कि जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नौसेना के जहाज उनके साथ चल सकते हैं। इसे एस्कॉर्ट ऑपरेशन कहा जाता है। इसमें वॉरशिप टैंकरों के साथ चलेंगे, ऊपर से विमान निगरानी करेंगे, ड्रोन को मार गिराएंगे और तट पर मौजूद मिसाइल ठिकानों पर हमला करेंगे। इसके साथ ही समुद्र में अगर बारूदी सुरंगें (माइंस) बिछाई गई हैं, तो उन्हें हटाने के लिए माइंसवीपर जहाजों को लगाया जाएगा। लेकिन यह सब करना बहुत बड़ा और जटिल सैन्य अभियान होगा। इसमें काफी समय, संसाधन और जोखिम शामिल होंगे। वॉरशिप खुद भी इस इलाके में पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि होर्मुज जैसे संकरे इलाके में जहाजों को चारों तरफ से खतरा रहता है। ड्रोन और मिसाइल से बचाव करना यहां और मुश्किल हो जाता है। समुद्र में बिछी माइंस सबसे बड़ा खतरा सबसे बड़ा खतरा समुद्र में बिछाई गई माइंस से है। अगर पानी में माइंस होने का जरा सा भी शक हो, तो कोई भी देश अपने बड़े जहाज वहां भेजने का जोखिम नहीं उठाएगा। माइंस हटाने का काम बहुत धीमा होता है और इसमें कई हफ्ते लग सकते हैं। इस दौरान जो टीमें माइंस हटाती हैं, उन्हें भी सुरक्षा की जरूरत होती है, क्योंकि वे खुद हमले का आसान निशाना बन सकती हैं। जमीन पर कार्रवाई का विकल्प भी मौजूद है। अमेरिकी मरीन सैनिक इस इलाके की तरफ भेजे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें स्ट्रेट के आसपास के छोटे-छोटे द्वीपों पर तैनात किया जा सकता है, जहां से वे हमले रोकने या एयर डिफेंस सिस्टम लगाने का काम कर सकते हैं। लेकिन ईरान की बड़ी आर्मी को देखते हुए उसके मुख्य इलाके में घुसना बहुत जोखिम भरा होगा। अगर अमेरिकी सैनिक मारे गए या पकड़ लिए गए, तो इससे हालात और बिगड़ सकते हैं और युद्ध और बढ़ सकता है। मान लें कि अमेरिका किसी तरह इस रास्ते को खोल भी देता है, तब भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। सिर्फ एक मिसाइल या ड्रोन हमला भी फिर से डर पैदा कर सकता है और जहाज कंपनियां दोबारा इस रास्ते से गुजरने से बचेंगी। फारस की खाड़ी में फंसे 500 तेल टैंकर इस समय फारस की खाड़ी में करीब 500 तेल टैंकर खड़े हैं और ज्यादातर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। युद्ध से पहले हर दिन लगभग 80 तेल और गैस के टैंकर इस रास्ते से गुजरते थे। अब जहाज मालिक और बीमा कंपनियां तभी तैयार होंगी जब उन्हें लगेगा कि खतरा काफी कम हो गया है। अगर जोखिम ज्यादा रहा, तो वे इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करेंगे। भले ही अमेरिका बड़ा एस्कॉर्ट ऑपरेशन शुरू कर दे, लेकिन वह एक समय में सीमित जहाजों को ही सुरक्षा दे सकता है। यानी सभी टैंकरों को एक साथ सुरक्षित निकालना संभव नहीं होगा। इसके अलावा, ईरान ने सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट में ही नहीं, बल्कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में भी जहाजों पर हमले किए हैं। इसका मतलब है कि जहाजों को पूरे रास्ते में सुरक्षा देनी होगी, जिससे यह मिशन और लंबा और जटिल हो जाता है। इतना बड़ा सैन्य अभियान अमेरिका की बाकी सैन्य ताकत पर भी दबाव डाल सकता है, क्योंकि उसे अपने संसाधन दूसरे इलाकों से हटाने पड़ सकते हैं। आखिर में विशेषज्ञ यही मानते हैं कि जब तक ईरान की तरफ से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक

IndiGo Delhi Manchester 6E33 Flight U Turn

IndiGo Delhi Manchester 6E33 Flight U Turn

Hindi News National IndiGo Delhi Manchester 6E33 Flight U Turn | Middle East Airspace Closure नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक दिल्ली से मैनचेस्टर जा रही इंडिगो की फ्लाइट 7 घंटे उड़ने के बाद वापस लौट आई। इंडिगो के एक अधिकारी ने बताया कि फ़्लाइट 6E33 ने इथियोपिया और इरिट्रिया के बॉर्डर के पास यू-टर्न लिया और अब दिल्ली वापस आ गई। अधिकारी ने बताया कि मिडिल ईस्ट में चल रही जंग की वजह से आखिरी मिनट में एयरस्पेस पर रोक लग गई। जिसके बाद पायलट को बीच रास्ते से लौटने का फैसला लेना पड़ा। यह एयरक्राफ्ट सोमवार सुबह दिल्ली से यूनाइटेड किंगडम (UK) के शहर के लिए निकला था। ये 26 फरवरी के बाद इंडिगो की पहली दिल्ली-मैनचेस्टर फ़्लाइट थी। लंबे समय का रूट कुछ समय बाद फिर से शुरू हुआ था। नॉर्मल हालात में फ़्लाइट को लगभग 11 घंटे लगते हैं। फ्लाइट ट्रैकिंग सर्विस Flightradar24 के मुताबिक, नॉर्स की इंडिगो फ्लाइच 6E33 ने इथियोपिया और इरिट्रिया के बॉर्डर के पास यू-टर्न लिया और अब दिल्ली वापस जा रही है। डेटा से पता चलता है कि वेस्ट एशिया में एक्टिव कॉनिफ्लिक्ट जोन से बचने के लिए बनाए गए रूट के बावजूद, एयरक्राफ्ट लगभग सात घंटे उड़ने के बाद वापस लौट आया। Flightradar24 के मुताबिक, एयरक्राफ्ट ने अदन की खाड़ी और अफ्रीका के कुछ हिस्सों से होते हुए एक अजीब दक्षिणी रूट अपनाया था, और इस इलाके में ईरान-इजराइल के बढ़ते तनाव के बीच मिडिल ईस्ट के ज्यादातर एयरस्पेस को बाइपास कर दिया था। एक बयान में, इंडिगो के एक स्पोक्सपर्सन ने कहा कि एयरलाइन को आखिरी समय में एयरस्पेस पाबंदियां लगाए जाने के बाद यह फैसला लेना पड़ा। इंडिगो ने कहा- जंग की वजह से कई फ्लाइट्स का रूट बदल सकता है इंडिगो के प्रवक्ता ने कहा कि मिडिल ईस्ट और उसके आस-पास के बदलते हालात की वजह से, हमारी कुछ फ्लाइट्स लंबे रूट ले सकती हैं या उनका रूट बदल सकता है। एयरलाइन ने कहा कि वह अभी अधिकारियों के साथ मिलकर यह तय कर रही है कि यात्रा फिर से शुरू हो सकती है या नहीं। प्रवक्ता ने आगे कहा, हम यात्रा फिर से शुरू करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजराइल ने हमला किया था मिडिल ईस्ट में युद्ध तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इज़राइल, दो सहयोगी देशों ने 28 फरवरी को ईरान पर मिलकर हमला किया, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। तब से ईरान, खाड़ी देशों में इजराइल और US मिलिट्री बेस पर हमला कर रहा है। दोनों सहयोगी देश भी ईरानी ठिकानों पर हमला कर रहे हैं। जंग की शुरुआत से अबतक 2500 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसिल हुईं नागरिक उड्डयन मंत्रालय के आंकड़ों और एयरलाइंस रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान-इजरायल युद्ध के कारण 28 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक भारत से मिडिल ईस्ट जाने वाली करीब 2500 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स कैंसल हो चुकी हैं। ईरान-इजराइल जंग से जेट-फ्यूल मार्च में 6% महंगा ईरान ईजराइल जंग की वजह से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में उछाल, डॉलर के मुकाबले गिरता रुपया और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने एयरलाइंस की प्रॉफिटेबिलिटी यानी मुनाफे पर दबाव बढ़ा दिया है। हालांकि, ग्राउंडेड विमानों की संख्या में कमी आने से राहत मिली है, लेकिन इंटरनेशनल रूट्स पर उड़ानों के रद्द होने और रूट बदलने से एयरलाइंस का खर्च बढ़ गया है। एयरलाइंस के लिए फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% तक होती है। फरवरी 2026 तक 11 महीनों में ATF की एवरेज कीमत 91,173 रुपए प्रति किलोलीटर (KL) थी, लेकिन मार्च 2026 में यह 6% बढ़कर 96,638 रुपए प्रति KL पर पहुंच गई है। पूरी खबर पढ़ें… ————– ये खबर भी पढ़ें… ईरान बोला- मजबूरी में जंग लड़ रहे:तुर्किये-साइप्रस और अजरबैजान पर हमले से इनकार किया; इजराइली हमले में ईरान के नए सुप्रीम लीडर घायल ईरान ने कहा है कि वह मजबूरी में जंग लड़ रहा है, यह उसकी पसंद नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि जंग देश पर जबरन थोपी गई है। जब उनसे सीजफायर के लिए मध्यस्थता की संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इस तरह की बात करना गलत होगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Iran Offers Secret Talks to US; Trump Says Time Ran Out

Iran Offers Secret Talks to US; Trump Says Time Ran Out

तेल अवीव/तेहरान19 मिनट पहले कॉपी लिंक अजरबैजान ने खुद पर हुए ड्रोन हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने कहा कि इस घटना पर ईरान को माफी मांगनी चाहिए। इसके अलावा ईरानी राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के अनुसार एक ड्रोन नखचिवान इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन से टकराया, जबकि दूसरा शकराबाद गांव में एक स्कूल के पास गिरा। इस घटना में एयरपोर्ट टर्मिनल को नुकसान पहुंचा और दो नागरिक घायल हो गए। राष्ट्रपति अलीयेव ने इस घटना को ‘कायराना हमला’ बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि ईरान ने इस ड्रोन हमले में हाथ होने से इनकार किया है और कहा है कि इस घटना की जांच की जा रही है। फुटेज अजरबैजान में नखचिवान इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमले का है। भारत ने खामेनेई की मौत पर शोक जताया भारत ने पहली बार ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक जताया है। भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास जाकर खामेनेई के निधन पर संवेदना जताई। उन्होंने कंडोलेंस बुक (शोक पुस्तिका) पर हस्ताक्षर कर श्रद्धांजलि दी। अमेरिका-इजराइल के हमले में 28 फरवरी को खामेनेई की मौत हो गई थी। ईरान ने एक दिन बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की थी। खामेनेई के निधन के बाद दुनियाभर के कई देशों से शोक संदेश भेजे जा रहे हैं। भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने आज नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। न्यूजीलैंड में ईरानी दूतावास ने दैनिक भास्कर का कार्टून शेयर किया। यह ईरान में स्कूल पर हमले से जुड़ा था, जिसमें 170 छात्राओं की मौत हो गई थी। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… अमेरिका और इजराइल ने बुधवार रात ईरान की राजधानी तेहरान में कई जगह बमबारी की। ईरानी हथियारों पर अमेरिकी हमले का सैटेलाइट फुटेज। बेरूत के दक्षिणी इलाके दहियाह में हिजबुल्लाह नेता नईम कासिम के भाषण के दौरान लोगों ने हवा में गोलियां चलाईं, जिससे आसमान में गोलियों की रोशनी दिखाई दी। बेरूत के दक्षिणी इलाके दहियाह में इजराइली हवाई हमले के बाद उठता धुआं। ईरान पर हमले के लिए उड़ान भरता अमेरिकी फाइटर जेट। इजराइल-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 20 मिनट पहले कॉपी लिंक अजरबैजान ने ईरान बॉर्डर के पास एयरस्पेस बंद किया अजरबैजान ने ईरान बॉर्डर के पास अपने एयरस्पेस का एक हिस्सा 12 घंटे के लिए बंद कर दिया है। यह फैसला उस घटना के बाद लिया गया जब अजरबैजान ने दावा किया कि ईरान से आए ड्रोन उसके नखचिवान स्वायत्त क्षेत्र में घुस आए और कुछ इलाकों में नुकसान पहुंचाया। 36 मिनट पहले कॉपी लिंक इजराइल बोला- जंग में ईरान के 300 मिसाइल लॉन्चर नष्ट किए इजराइल की सेना ने कहा है कि जंग के दौरान उसकी वायुसेना ने ईरान के 300 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट कर दिया है। इनमें से ज्यादातर मिसाइल लॉन्चर पश्चिमी ईरान में मौजूद थे। इसका मकसद ईरान की मिसाइल दागने की क्षमता को कम करना था। 52 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान बोला- अमेरिका-इजराइल के हमलों से 11 अस्पतालों को नुकसान ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में देश के 11 अस्पताल, सात आपात केंद्र, नौ एंबुलेंस और चार अन्य मेडिकल सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। मंत्रालय के अनुसार इन हमलों के दौरान कई अस्पतालों के साथ-साथ आपात चिकित्सा केंद्र और एंबुलेंस भी प्रभावित हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी ईरान में स्वास्थ्य ढांचे पर कम से कम 13 हमलों की पुष्टि की है, जिनमें अस्पतालों और मेडिकल सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। WHO ने कहा कि संघर्ष के दौरान अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं को निशाना बनना गंभीर चिंता का विषय है और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत इन संस्थानों की सुरक्षा जरूरी है। 02:49 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक ब्रिटेन साइप्रस में एंटी-ड्रोन हेलिकॉप्टर भेजेगा ब्रिटेन ने साइप्रस में सुरक्षा बढ़ाने के लिए एंटी-ड्रोन क्षमता से लैस वाइल्डकैट हेलिकॉप्टर भेजने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि ये हेलिकॉप्टर शुक्रवार को साइप्रस पहुंचेंगे। स्टार्मर ने बताया कि ब्रिटेन के रक्षा मंत्री फिलहाल साइप्रस में मौजूद हैं और वहां सैन्य अभियानों के समन्वय के साथ सैनिकों से मुलाकात कर रहे हैं। ब्रिटेन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूर्वी भूमध्यसागर में अपने युद्धपोत HMS ड्रैगन को भी तैनात कर रहा है। 02:28 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक ईरान बोला- अजरबैजान पर ड्रोन हमले में हमारा हाथ नहीं ईरान ने अजरबैजान में हुए ड्रोन हमले में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने अजरबैजानी समकक्ष से फोन पर बातचीत में कहा कि तेहरान ने अजरबैजान की ओर कोई ड्रोन या अन्य प्रोजेक्टाइल नहीं दागा। उन्होंने बताया कि ईरान की सेना इस घटना की जांच कर रही है। अराघची ने यह भी कहा कि ऐसे हमलों के पीछे इजराइल की भूमिका हो सकती है, जिसका उद्देश्य ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच संबंध खराब करना है। इससे पहले अजरबैजान ने नखचिवान क्षेत्र में हुए ड्रोन हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। 02:12 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक ईरान बोला- इराक में अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमला किया ईरान की सेना ने कहा है कि उसने उत्तरी इराक के एरबिल में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ड्रोन हमला किया है। यह जानकारी ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस हमले में अमेरिकी ठिकाने को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी है। 01:58 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक अजरबैजान बोला- ड्रोन हमले पर माफी मांगे ईरान अजरबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने कहा है कि नखचिवान क्षेत्र में हुए ड्रोन हमले को लेकर ईरान को माफी मांगनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को सजा दी जानी चाहिए। अलीयेव के मुताबिक नखचिवान अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे, उसके टर्मिनल, एक स्कूल और अन्य नागरिक इलाकों को ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिसमें दो लोग घायल हुए। उन्होंने इस घटना को “कायराना हमला” बताते हुए इसकी