Monday, 13 Apr 2026 | 05:20 AM

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रायसेन कलेक्टर का औचक निरीक्षण, गेहूं खरीदी व्यवस्थाओं पर सख्ती:किसानों से लिया फीडबैक; लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए

रायसेन कलेक्टर का औचक निरीक्षण, गेहूं खरीदी व्यवस्थाओं पर सख्ती:किसानों से लिया फीडबैक; लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए

रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने शुक्रवार को सांची विकासखंड के बरखेड़ी सलामतपुर स्थित शाहीन वेयरहाउस गेहूं उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र पर गेहूं खरीदी की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर ने केंद्र प्रभारी और संबंधित अधिकारियों से खरीदी की प्रगति, बारदाना, तौल व्यवस्था और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी और सुचारु उपार्जन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो। किसानों से फीडबैक लिया निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने उपज बेचने आए किसानों से भी सीधे बातचीत की। उन्होंने किसानों से केंद्र पर उपलब्ध व्यवस्थाओं, तौल प्रक्रिया और भुगतान को लेकर फीडबैक लिया। कलेक्टर ने अधिकारियों को किसानों की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण करने और खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि जिले में 9 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू की गई है। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर सरकारी उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा जा रहा है और प्रशासन द्वारा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

शिवपुरी में बिना ड्राइवर दौड़ा ट्रैक्टर:पेड़ से टकराकर रुका; जगतपुर तिराहा पर बड़ा हादसा टला

शिवपुरी में बिना ड्राइवर दौड़ा ट्रैक्टर:पेड़ से टकराकर रुका; जगतपुर तिराहा पर बड़ा हादसा टला

शिवपुरी जिले के कोलारस कस्बे के जगतपुर तिराहा पर गुरुवार देर शाम एक बड़ा हादसा टल गया। सड़क किनारे खड़े एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में पीछे से दूसरी ट्रॉली ने टक्कर मार दी, जिससे आगे खड़ा ट्रैक्टर बिना ड्राइवर के ही स्टार्ट होकर अनियंत्रित दौड़ पड़ा। गनीमत रही कि इस दौरान कोई राहगीर या वाहन उसकी चपेट में नहीं आया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। जानकारी के अनुसार, कुमरौआ गांव निवासी किसान राजेंद्र धाकड़ अपनी फसल बेचकर कोलारस अनाज मंडी से वापस गांव लौट रहे थे। उन्होंने जगतपुर तिराहा पर अपना ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क किनारे खड़ा कर दिया और पास की दुकान पर सामान लेने चले गए। इसी दौरान, खोंकर गांव निवासी उत्तम चंदेल अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली से वहां पहुंचे और पीछे से खड़े ट्रैक्टर में टक्कर मार दी। बताया गया है कि राजेंद्र का ट्रैक्टर गियर में खड़ा था, जिसके कारण टक्कर लगते ही वह स्टार्ट होकर आगे बढ़ गया। बिना ड्राइवर के ही ट्रैक्टर कुछ दूरी तक सड़क पर चलता रहा और फिर सड़क से उतरकर एक पेड़ से टकराकर रुक गया। घटना के वक्त आसपास कोई राहगीर या वाहन मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

174 घनमीटर अवैध रेत जब्त:देवसर के मझौना में खनिज-राजस्व-पुलिस का एक्शन, भंडारणकर्ता की तलाश जारी

174 घनमीटर अवैध रेत जब्त:देवसर के मझौना में खनिज-राजस्व-पुलिस का एक्शन, भंडारणकर्ता की तलाश जारी

सिंगरौली जिले के देवसर क्षेत्र में प्रशासन ने अवैध रेत परिवहन और भंडारण के खिलाफ कार्रवाई की है। शुक्रवार को खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने मझौना इलाके में दबिश दी। इस दौरान दो अलग-अलग स्थानों से अवैध रूप से भंडारित 174 घनमीटर रेत जब्त की गई। यह रेत बिना किसी वैध अनुमति के जमा की गई थी। कार्रवाई के दौरान टीम ने आराजी नंबर 551 और 555/658 की भूमि पर भंडारित रेत को जब्त किया। नियमानुसार आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जब्त रेत की अनुमानित कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, जब्त रेत को संबंधित ठेकेदार को सुरक्षित रूप से सौंप दिया गया है। खनिज विभाग की टीम अब भूमि के वास्तविक स्वामी और रेत के भंडारणकर्ता की पहचान कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन को देवसर क्षेत्र के नदी-नालों से अवैध रूप से रेत निकालकर आसपास के इलाकों में भंडारण और फिर अन्य जिलों में भेजने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इस अवैध गतिविधि से शासन को भारी राजस्व हानि हो रही थी। यह कार्रवाई कलेक्टर के निर्देश पर खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल और सहायक खनिज अधिकारी अशोक मिश्रा के नेतृत्व में की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन और भंडारण के खिलाफ ऐसी कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।

100 फीट ऊंची पानी टंकी पर स्टंट:दतिया में वायरल होने के लिए रील बनाई,,जान जोखिम में डालकर पाइप से उतरा युवक

100 फीट ऊंची पानी टंकी पर स्टंट:दतिया में वायरल होने के लिए रील बनाई,,जान जोखिम में डालकर पाइप से उतरा युवक

दतिया में सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ अब जानलेवा स्टंट में बदलती जा रही है। बड़ौनी नगर पंचायत क्षेत्र में युवकों द्वारा 100 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़कर रील और वीडियो बनाने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह रही कि एक युवक पाइप के सहारे टंकी से नीचे खिसकते हुए उतर गया। यदि जरा सी चूक होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। पेयजल टंकी की सुरक्षा व्यवस्था फेल गल्ला मंडी के पास बनी यह पानी की टंकी नगर की पेयजल व्यवस्था का अहम हिस्सा है, लेकिन इसकी सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से लचर नजर आ रही है। टंकी पर चढ़ने से रोकने के लिए न तो पर्याप्त बैरिकेडिंग है और न ही कोई निगरानी व्यवस्था मौजूद है। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ समय से लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां युवा सोशल मीडिया पर लाइक और व्यूज पाने के लिए खतरनाक हरकतें कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने कई बार नगर पंचायत को इस बारे में अवगत कराया, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नतीजा यह है कि अब यह लापरवाही बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रही है। बड़े हादसे का बना खतरा सबसे चिंताजनक बात यह है कि इतनी ऊंचाई से गिरने पर किसी की जान भी जा सकती है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। टंकी के आसपास सुरक्षा गार्ड की तैनाती, सीसीटीवी कैमरे और सख्त निगरानी जैसी जरूरी व्यवस्थाएं अब तक नहीं की गई हैं। सीएमओ ने दिया गोलमोल जवाब नगर पंचायत के सीएमओ से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय गोलमोल बातें कर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की। यदि समय रहते इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगाई गई, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

गोलीकांड में 10 पर केस, एक गिरफ्तार:वीडियो से जांच में आया नया मोड़; अस्पताल से आरोपी गायब

गोलीकांड में 10 पर केस, एक गिरफ्तार:वीडियो से जांच में आया नया मोड़; अस्पताल से आरोपी गायब

नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव थाना क्षेत्र के मालीवाड़ा गांव में हुए फायरिंग कांड की जांच में तीसरे दिन नया मोड़ आया है। पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों के कुल 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एक आरोपी शरद पटेल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। यह घटना अब सिर्फ गोलीबारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया पर भी दोनों पक्षों के बीच खुलकर टकराव देखने को मिल रहा है। दोनों पक्षों की ओर से आईडी पर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है, जिससे विवाद और बढ़ गया है। घायल महिला सविता के पति ऋषिराज पटेल ने दूसरे पक्ष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं, जिन्हें बाद में हटा लिया गया। वहीं, दूसरे पक्ष के शुभम पटेल ने आईडी से लाइव के जरिए खुद को जान का खतरा बताते हुए पुलिस पर कार्रवाई न करने के आरोप लगाए। पुलिस ने इन वीडियो और पोस्ट्स को जांच में शामिल कर लिया है। इनमें दिख रहे लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है, जिससे मामले की तह तक पहुंचा जा सके। अस्पताल में भर्ती एक पक्ष के कुछ लोग अचानक वहां से गायब हो गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि ये लोग गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हुए हैं। हालांकि, पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस पहलू पर भी जांच जारी है। एसडीओपी मनीष त्रिपाठी के नेतृत्व में गोटेगांव पुलिस ने मालीवाड़ा गांव में आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की है। हालांकि, अभी तक कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है। पुलिस मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। अस्पताल से गायब हुए आरोपी एसडीओपी मनीष त्रिपाठी ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है। एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। घायल दोनों पक्षों के आरोपी सविता पटेल और गिरवर पटेल को जबलपुर के एक अस्पताल किया गया था। जहां उनका इलाज चल रहा था। इसी दौरान दोनों वहां से गायब हो गए।

नर्मदापुरम संभाग के कमिश्नर और दो कलेक्टर बदले:श्रीकांत होंगे कमिश्नर, सोमेश मिश्रा कलेक्टर, सोनिया मीणा भोपाल में संभालेगी वित्त विभाग

नर्मदापुरम संभाग के कमिश्नर और दो कलेक्टर बदले:श्रीकांत होंगे कमिश्नर, सोमेश मिश्रा कलेक्टर, सोनिया मीणा भोपाल में संभालेगी वित्त विभाग

मप्र सरकार ने नर्मदापुरम संभाग में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कमिश्नर समेत नर्मदापुरम और बैतूल जिलों के कलेक्टर के तबादले किए। नर्मदापुरम के कमिश्नर कृष्णगोपाल तिवारी को अब आयुक्त सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण बनाया गया है, उनकी जगह साल 2009 बैच के आईएएस श्रीकांत बनोठ को संभागीय कमिश्नर नियुक्त किया गया है। नर्मदापुरम जिले की कमान अब 2013 बैच के आईएएस मंडला कलेक्टर सोमेश मिश्रा के हाथों में रहेगी। नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीना को वल्लभ भवन में अवर सचिव (वित्त) पद पर पदस्थ किया गया है। बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी को बड़े जिले रीवा की जिम्मेदारी दी गई है। रीवा नगर निगम आयुक्त डॉ. सौरभ संजय सोनवणे को बैतूल कलेक्टर बनाया गया है। कलेक्टर सोनिया मीना जनवरी 2024 को नर्मदापुरम कलेक्टर का पद संभाला था। अब सोमेश मिश्रा को नर्मदापुरम कलेक्टर बनाया गया है। कामकाज और छवि के आधार पर फैसला प्रशासनिक हलकों में इस फेरबदल को अधिकारियों के परफॉर्मेंस और प्रशासनिक संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। नए कमिश्नर श्रीकांत बनोठ को अनुभवी और सख्त प्रशासनिक अधिकारी माना जाता है, जिनसे संभाग में समन्वय और मॉनिटरिंग मजबूत होने की उम्मीद है। नए कलेक्टर सोमेश मिश्रा की पहचान ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले अफसर के रूप में रही है। मंडला में उनके कार्यकाल के दौरान राजस्व और जनसुनवाई मामलों में तेजी देखने को मिली थी। अब नर्मदापुरम में उनसे किसानों, सिंचाई और राजस्व मामलों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने दैनिक भास्कर को बताया नर्मदापुरम कृषि प्रदान जिला है। गेंहू चना समर्थन मूल्य खरीदी प्राथमिकता रहेगी। डॉ. सौरभ सोनवणे शहरी प्रशासन में काम करने का अनुभव रखते हैं। ऐसे में बैतूल जैसे आदिवासी बहुल जिले में उनकी नई चुनौती ग्रामीण विकास, शिक्षा और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना होगी। इस बदलाव का सीधा असर अब आम जनता पर दिखेगा। बैतूल में विकास योजनाओं और आदिवासी क्षेत्रों में कामकाज की रफ्तार बढ़ने की संभावना है। संभाग में हुए इस बड़े फेरबदल को सरकार के प्रशासनिक संतुलन साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। अनुभवी और फील्ड में सक्रिय अफसरों की तैनाती से आने वाले समय में विकास कार्यों और शासन की पकड़ मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं।

Central India AIIMS Free Clinical Autopsy

Central India AIIMS Free Clinical Autopsy

एमपी मातृ और शिशु स्वास्थ्य के मामले में देश के सबसे पीछे रहने वाला राज्य है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में हर एक लाख प्रसव में 159 माताएं और हर एक हजार जन्म में 40 नवजात अपनी जान गंवा रहे हैं। ये आंकड़े सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि उन परिवारों की . यही नहीं कई बार मौत की असली वजह सामने नहीं आ पाती, जिससे सुधार के ठोस कदम भी नहीं उठ पाते। अब इसी चुनौती से निपटने के लिए एम्स भोपाल ने एक अहम पहल शुरू की है। यहां गर्भावस्था या प्रसव के दौरान हुई महिलाओं की मौत के मामलों में क्लिनिकल ऑटोप्सी की सुविधा दी जा रही है, जिससे मौत की असली वजह सामने लाई जा सके। खास बात यह है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह फ्री है और इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती। परिवार की सहमति से होने वाली इस जांच से न केवल परिजनों को सच्चाई पता चलती है, बल्कि सरकार को भी ऐसा डेटा मिलता है, जिससे भविष्य में मातृ मृत्यु को कम करने की रणनीति तैयार की जा सके। AIIMS Bhopal के डॉक्टरों के अनुसार, मध्यप्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां मातृ मृत्यु के मामले अपेक्षाकृत अधिक हैं। मातृ मृत्यु का मतलब है कि गर्भावस्था के दौरान, प्रसव के समय या गर्भसमापन के 42 दिनों के भीतर महिला की मौत। ऐसे मामलों को रोकना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी होती है। अब मौत के कारणों की होगी सटीक पहचान इन मामलों में मौत की असली वजह साफ नहीं हो पाती। ऐसे में एम्स भोपाल में क्लिनिकल ऑटोप्सी के जरिए वैज्ञानिक तरीके से कारणों की जांच की जा रही है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन सी मौत रोकी जा सकती थी और किन मामलों में स्थिति गंभीर थी। यह प्रक्रिया मेडिको-लीगल ऑटोप्सी से अलग होती है। इसमें पुलिस की जरूरत नहीं होती और यह परिवार के अनुरोध पर की जाती है। इसमें शरीर के जरूरी हिस्सों की जांच कर बीमारी या जटिलता की सही वजह पता की जाती है। परिवार को मिलती है पूरी जानकारी ऑटोप्सी के बाद डॉक्टर हिस्टोपैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट तैयार करते हैं। कुछ ही दिनों में यह रिपोर्ट परिवार को दी जाती है। इससे परिजनों को यह समझने में मदद मिलती है कि मौत क्यों हुई और कोई लापरवाही तो नहीं हुई। इस पहल से सरकार को मातृ मृत्यु के मामलों का सटीक और प्रमाणिक डेटा मिलेगा। इसके आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, सुविधाओं की कमी और इलाज की खामियों को पहचान कर बेहतर रणनीति बनाई जा सकेगी। इसलिए जरूरी यह प्रक्रिया SRS मैटरनल बुलेटिन 2020-22 के अनुसार, मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 159 है। जबकि भारत का औसत MMR 88 है। मध्यप्रदेश का IMR-MMR देश के औसत से लगभग दोगुना है। जो इसे सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला राज्य बनाता है। देश और राज्यों से MMR की तुलना उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ का MMR भी 141 है, जो मध्यप्रदेश से थोड़ा बेहतर, लेकिन गंभीर स्थिति में है। ओडिशा का MMR 136 है, जो उच्च MMR वाले राज्यों में से एक है। केरल 18 और महाराष्ट्र 36 MMR के साथ मातृ देखभाल में बेहतर मॉडल प्रस्तुत करते हैं। सम्मान के साथ पूरी होती है प्रक्रिया ऑटोप्सी करीब डेढ़ घंटे में पूरी हो जाती है और इसमें पूरी सावधानी और सम्मान का ध्यान रखा जाता है। जांच के लिए केवल जरूरी ऊतक लिए जाते हैं और बाद में सभी अंगों को वापस सुरक्षित तरीके से शरीर में रख दिया जाता है। शरीर को सही तरीके से सिलकर परिवार को सौंपा जाता है और चेहरे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाता। डॉक्टरों से सीधे बात कर सकते हैं परिजन इस प्रक्रिया के दौरान परिवार के सदस्य डॉक्टरों से पहले और बाद में बात कर सकते हैं। इससे उनकी शंकाएं दूर होती हैं और उन्हें पूरी पारदर्शिता के साथ जानकारी मिलती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मौत के असली कारण समय पर समझ आ जाएं, तो भविष्य में ऐसी कई घटनाओं को रोका जा सकता है।

व्यापमं कांड के बर्खास्त छात्रों को बांटी MBBS डिग्रियां:ग्वालियर मेडिकल कॉलेज की छात्र शाखा का बाबू का बोला- पुराने केस थे वो निपटाए, AUDIO

व्यापमं कांड के बर्खास्त छात्रों को बांटी MBBS डिग्रियां:ग्वालियर मेडिकल कॉलेज की छात्र शाखा का बाबू का बोला- पुराने केस थे वो निपटाए, AUDIO

ग्वालियर के जीवाजी विश्विद्यालय से संबंधित गजराराजा मेडिकल कॉलेज में व्यापमं कांड से बर्खास्त हुए छात्रों को बिना बहाली, बिना अटेंडेंस और बिना परीक्षा दिए एमबीबीएस की डिग्री बांटने का बड़ा आरोप सामने आया है। छात्र शाखा (यूजी) प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी और उनके सहायक पंकज कुशवाह पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। मामले में शाखा प्रभारी का एक ऑडियो भी सामने आया है, जिसमें वे जांच कमेटी द्वारा बर्खास्त छात्र को सफाई देते नजर आ रहे हैं। बातचीत में कथित तौर पर 16-16 लाख रुपए में डिग्री देने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता पूर्व छात्र ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत राज्यपाल से लेकर ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के डीन तक की है। शिकायत में जीवाजी यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और गोपनीय शाखा के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यही कारण है कि बाबू, डीन और जांच से जुड़े अधिकारी इस मामले में बोलने से बच रहे हैं। बिना बहाल किए डिग्रियां बांटने का आरोप पूर्व मेडिकल छात्र संदीप लहारिया बताया कि करीब 150 छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें से 30 से अधिक एमबीबीएस छात्रों को बर्खास्त किया गया था, जिनमें संदीप लहारिया खुद भी शामिल हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि बर्खास्त छात्रों में से किसी को भी अब तक बहाल नहीं किया गया है और न ही किसी नई कमेटी ने राहत दी है। इसके बावजूद कई छात्रों को एमबीबीएस की डिग्री जारी कर दी गई, जो धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। यूजी शाखा प्रभारी पर डिग्री जारी कराने का आरोप शिकायत में संदीप लहारिया ने आरोप लगाया है कि बर्खास्त छात्रों को गलत तरीके से एमबीबीएस डिग्री जारी की गईं। न तो उन्हें बहाल किया गया और न ही उन्होंने निर्धारित मानक पूरे किए। उनका कहना है कि इस पूरे मामले में छात्र शाखा (यूजी) प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी और उनके सहायक पंकज कुशवाह की भूमिका है। साथ ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन और जीवाजी यूनिवर्सिटी के संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी डिग्रियां जारी होने का आरोप लगाया गया है। ऑडियो में 16 लाख में डिग्री देने का आरोप शिकायतकर्ता के अनुसार प्रशांत चतुर्वेदी का एक ऑडियो सामने आया है, जिसमें बर्खास्त छात्र के मामले में सफाई दी जा रही है। बातचीत में पूर्व छात्र द्वारा 16-16 लाख रुपए में डिग्री देने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उसके पास कई ऑडियो और वीडियो हैं, जिनसे पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा किया जा सकता है। पूर्व छात्र संदीप लहारिया ने बाबू प्रशांत चतुर्वेदी के अलावा मेडिकल कॉलेज के डीन समेत कई अधिकारियों व जीवाजी यूनिवर्सिटी के गोपनीय शाखा के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। जांच सौंप दी, लेकिन शिकायत का पता ही नहीं इस मामले में ग्वालियर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ से जब बात करना चाहा तो उन्होंने भी बाइट देने से मना कर दिया और इस शिकायत व गड़बड़झाला के बारे में पूछा तो उनका कहना था कि कई शिकायतें आती हैं। यह शिकायत आई होगी, लेकिन उनकी जानकारी में नहीं है। जबकि वह इस शिकायत की जांच डॉक्टर प्रमोद कुमार छाबनिया को सौंप चुके हैं। मुझे तो अभी जांच मिली है, आकर बात करता हूं इस मामले में इस शिकायत की जांच कर रहे डॉ. प्रमोद कुमार छाबनिया से बात की गई तो उनका कहना था कि मेरे पास इस शिकायत की जांच आई है, लेकिन अभी मैं शहर से बाहर हूं। आकर ही कुछ बता पाऊंगा। ये खबर भी पढ़ें,… 100 वाली जांच 18 रुपए में…सरकार ने दे दिया ठेका राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी जांच के लिए भोपाल की साइंस हाउस मेडिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को ठेका दिया है। कंपनी ने सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) की दरों से 81.2% कम कीमत पर बोली लगाकर यह टेंडर हासिल किया है। इसका मतलब है कि 100 रुपए की जांच अब करीब 18 रुपए में की जाएगी।पूरी खबर पढ़ें

इंदौर में महिला आरक्षक ने किया सुसाइड का प्रयास:फर्स्ट बटालियन के फ्लैट में फंदे पर लटकी मिली; हालत गंभीर, पुलिस जांच में जुटी

इंदौर में महिला आरक्षक ने किया सुसाइड का प्रयास:फर्स्ट बटालियन के फ्लैट में फंदे पर लटकी मिली; हालत गंभीर, पुलिस जांच में जुटी

इंदौर के फर्स्ट बटालियन में रहने वाली एक महिला आरक्षक ने गुरुवार को आत्महत्या की कोशिश की। महिला अपने फ्लैट में फंदे पर लटकी मिली। रात में परिजन ने उसे देखा तो नीचे उतारकर निजी अस्पताल ले गए। फिलहाल महिला पुलिसकर्मी बयान देने की स्थिति में नहीं है। सदर बाजार पुलिस के मुताबिक, महिला का नाम रूचि, पति पंकज है। वह अपने पति के साथ फर्स्ट बटालियन में रहती है। सदर बाजार पुलिस को रात करीब 11 बजे गोकुलदास अस्पताल से सूचना मिली। हालांकि रूचि अभी बयान देने की स्थिति में नहीं है। उनके पति पंकज भी क्राइम ब्रांच में पदस्थ हैं। रूचि ने यह कदम क्यों उठाया, इसका कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पंकज के भी इस मामले में अभी बयान नहीं हो सके हैं।

राहुल नामदेव धोते बने मंडला के नए कलेक्टर:IAS सोमेश मिश्रा का नर्मदापुरम ट्रांसफर; MP में 26 अधिकारियों के तबादले

राहुल नामदेव धोते बने मंडला के नए कलेक्टर:IAS सोमेश मिश्रा का नर्मदापुरम ट्रांसफर; MP में 26 अधिकारियों के तबादले

मध्यप्रदेश शासन ने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 18 जिलों के कलेक्टरों और 3 संभागीय आयुक्तों की तबादला सूची जारी की है। इस आदेश के तहत मंडला कलेक्टर सोमेश मिश्रा का स्थानांतरण नर्मदापुरम जिले में किया गया है। उनके स्थान पर वर्ष 2017 बैच के आईएएस अधिकारी राहुल नामदेव धोते मंडला के नए कलेक्टर नियुक्त किए गए हैं। उप सचिव से जिला कलेक्टर बने राहुल नामदेव धोते राहुल नामदेव धोते वर्तमान में नर्मदा घाटी विकास विभाग में उप सचिव के पद पर कार्यरत थे। उनके पास दिसंबर 2024 से जल संसाधन विभाग के उप सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी था। वे इससे पहले सीधी में जिला पंचायत सीईओ और रतलाम के जावरा में एसडीएम के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। सोमेश मिश्रा का नर्मदापुरम ट्रांसफर सोमेश मिश्रा 11 अगस्त 2024 से मंडला कलेक्टर के पद पर कार्यरत थे। उनके कार्यकाल के दौरान जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य और धार्मिक क्षेत्रों में कई नवाचार किए गए। उन्होंने प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए कलेक्टर चैंबर में पर्ची सिस्टम को समाप्त कर सीधे जनसुनवाई की व्यवस्था लागू की थी। नए कलेक्टर के सामने जनसमस्याओं के निराकरण की चुनौती मंडला के नए कलेक्टर राहुल नामदेव धोते के समक्ष जिले की विकास परियोजनाओं को गति देने की मुख्य जिम्मेदारी होगी। शासन ने उनसे राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण और आम जनता की बुनियादी समस्याओं के प्रभावी समाधान की अपेक्षा की है। यह फेरबदल प्रशासनिक कसावट लाने के उद्देश्य से किया गया है।