Tuesday, 13 Oct 2026 | 04:16 PM

Trending :

EXCLUSIVE

Central India AIIMS Free Clinical Autopsy

Central India AIIMS Free Clinical Autopsy

एमपी मातृ और शिशु स्वास्थ्य के मामले में देश के सबसे पीछे रहने वाला राज्य है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में हर एक लाख प्रसव में 159 माताएं और हर एक हजार जन्म में 40 नवजात अपनी जान गंवा रहे हैं। ये आंकड़े सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि उन परिवारों की

.

यही नहीं कई बार मौत की असली वजह सामने नहीं आ पाती, जिससे सुधार के ठोस कदम भी नहीं उठ पाते। अब इसी चुनौती से निपटने के लिए एम्स भोपाल ने एक अहम पहल शुरू की है। यहां गर्भावस्था या प्रसव के दौरान हुई महिलाओं की मौत के मामलों में क्लिनिकल ऑटोप्सी की सुविधा दी जा रही है, जिससे मौत की असली वजह सामने लाई जा सके।

खास बात यह है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह फ्री है और इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती। परिवार की सहमति से होने वाली इस जांच से न केवल परिजनों को सच्चाई पता चलती है, बल्कि सरकार को भी ऐसा डेटा मिलता है, जिससे भविष्य में मातृ मृत्यु को कम करने की रणनीति तैयार की जा सके।

AIIMS Bhopal के डॉक्टरों के अनुसार, मध्यप्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां मातृ मृत्यु के मामले अपेक्षाकृत अधिक हैं। मातृ मृत्यु का मतलब है कि गर्भावस्था के दौरान, प्रसव के समय या गर्भसमापन के 42 दिनों के भीतर महिला की मौत। ऐसे मामलों को रोकना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी होती है।

अब मौत के कारणों की होगी सटीक पहचान इन मामलों में मौत की असली वजह साफ नहीं हो पाती। ऐसे में एम्स भोपाल में क्लिनिकल ऑटोप्सी के जरिए वैज्ञानिक तरीके से कारणों की जांच की जा रही है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन सी मौत रोकी जा सकती थी और किन मामलों में स्थिति गंभीर थी।

यह प्रक्रिया मेडिको-लीगल ऑटोप्सी से अलग होती है। इसमें पुलिस की जरूरत नहीं होती और यह परिवार के अनुरोध पर की जाती है। इसमें शरीर के जरूरी हिस्सों की जांच कर बीमारी या जटिलता की सही वजह पता की जाती है।

परिवार को मिलती है पूरी जानकारी

ऑटोप्सी के बाद डॉक्टर हिस्टोपैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट तैयार करते हैं। कुछ ही दिनों में यह रिपोर्ट परिवार को दी जाती है। इससे परिजनों को यह समझने में मदद मिलती है कि मौत क्यों हुई और कोई लापरवाही तो नहीं हुई।

इस पहल से सरकार को मातृ मृत्यु के मामलों का सटीक और प्रमाणिक डेटा मिलेगा। इसके आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, सुविधाओं की कमी और इलाज की खामियों को पहचान कर बेहतर रणनीति बनाई जा सकेगी।

इसलिए जरूरी यह प्रक्रिया SRS मैटरनल बुलेटिन 2020-22 के अनुसार, मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 159 है। जबकि भारत का औसत MMR 88 है। मध्यप्रदेश का IMR-MMR देश के औसत से लगभग दोगुना है। जो इसे सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला राज्य बनाता है।

देश और राज्यों से MMR की तुलना

  • उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ का MMR भी 141 है, जो मध्यप्रदेश से थोड़ा बेहतर, लेकिन गंभीर स्थिति में है।
  • ओडिशा का MMR 136 है, जो उच्च MMR वाले राज्यों में से एक है।
  • केरल 18 और महाराष्ट्र 36 MMR के साथ मातृ देखभाल में बेहतर मॉडल प्रस्तुत करते हैं।

सम्मान के साथ पूरी होती है प्रक्रिया

ऑटोप्सी करीब डेढ़ घंटे में पूरी हो जाती है और इसमें पूरी सावधानी और सम्मान का ध्यान रखा जाता है। जांच के लिए केवल जरूरी ऊतक लिए जाते हैं और बाद में सभी अंगों को वापस सुरक्षित तरीके से शरीर में रख दिया जाता है। शरीर को सही तरीके से सिलकर परिवार को सौंपा जाता है और चेहरे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाता।

डॉक्टरों से सीधे बात कर सकते हैं परिजन

इस प्रक्रिया के दौरान परिवार के सदस्य डॉक्टरों से पहले और बाद में बात कर सकते हैं। इससे उनकी शंकाएं दूर होती हैं और उन्हें पूरी पारदर्शिता के साथ जानकारी मिलती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मौत के असली कारण समय पर समझ आ जाएं, तो भविष्य में ऐसी कई घटनाओं को रोका जा सकता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
विशाल ददलानी ने धुरंधर 2 पर कसा तंज:नोटबंदी वाले सीन पर सवाल उठाए; बोले- फिल्म सिर्फ मनोरंजन के लिए, फैक्ट्स अलग हैं

March 23, 2026/
1:11 pm

रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड ब्रेकिंग परफॉर्मेंस के बीच सिंगर विशाल ददलानी ने...

‘पापा, शो देखने आओगे? गालियां हैं’:समय रैना ने पिता को रात के 4 बजे किया मैसेज, जवाब सुनकर दर्शक हंस पड़े

April 11, 2026/
3:32 pm

कॉमेडियन समय रैना ने हाल ही में बताया कि उनके शो ‘स्टिल अलाइव’ में गालियां होने के कारण वह पिता...

authorimg

March 27, 2026/
10:01 am

Last Updated:March 27, 2026, 10:01 IST रायबरेली के आयुष चिकित्सक डॉक्टर आकांक्षा दीक्षित के अनुसार शीशम की पत्तियों में एंटीऑक्सीडेंट,...

ask search icon

March 31, 2026/
8:33 pm

Last Updated:March 31, 2026, 20:33 IST Health News: नीम की सबसे बड़ी खासियत इसकी एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक क्षमता है. यही...

DC vs KKR Live Score, IPL 2026: Follow Delhi Capitals vs Kolkata Knight Riders IPL matches updates and commentary from Arun Jaitley Stadium. (Picture Credit: X/@IPL)

May 8, 2026/
5:39 pm

आखरी अपडेट:08 मई, 2026, 17:39 IST सुवेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया...

Bhopal Big Pond Encroachment Found During NGT Survey

March 11, 2026/
12:20 am

भोपाल के बड़ा तालाब पर अतिक्रमण किया गया है। अब अतिक्रमणकारियों पर प्रशासन ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है।...

राजनीति

Central India AIIMS Free Clinical Autopsy

Central India AIIMS Free Clinical Autopsy

एमपी मातृ और शिशु स्वास्थ्य के मामले में देश के सबसे पीछे रहने वाला राज्य है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में हर एक लाख प्रसव में 159 माताएं और हर एक हजार जन्म में 40 नवजात अपनी जान गंवा रहे हैं। ये आंकड़े सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि उन परिवारों की

.

यही नहीं कई बार मौत की असली वजह सामने नहीं आ पाती, जिससे सुधार के ठोस कदम भी नहीं उठ पाते। अब इसी चुनौती से निपटने के लिए एम्स भोपाल ने एक अहम पहल शुरू की है। यहां गर्भावस्था या प्रसव के दौरान हुई महिलाओं की मौत के मामलों में क्लिनिकल ऑटोप्सी की सुविधा दी जा रही है, जिससे मौत की असली वजह सामने लाई जा सके।

खास बात यह है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह फ्री है और इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती। परिवार की सहमति से होने वाली इस जांच से न केवल परिजनों को सच्चाई पता चलती है, बल्कि सरकार को भी ऐसा डेटा मिलता है, जिससे भविष्य में मातृ मृत्यु को कम करने की रणनीति तैयार की जा सके।

AIIMS Bhopal के डॉक्टरों के अनुसार, मध्यप्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां मातृ मृत्यु के मामले अपेक्षाकृत अधिक हैं। मातृ मृत्यु का मतलब है कि गर्भावस्था के दौरान, प्रसव के समय या गर्भसमापन के 42 दिनों के भीतर महिला की मौत। ऐसे मामलों को रोकना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी होती है।

अब मौत के कारणों की होगी सटीक पहचान इन मामलों में मौत की असली वजह साफ नहीं हो पाती। ऐसे में एम्स भोपाल में क्लिनिकल ऑटोप्सी के जरिए वैज्ञानिक तरीके से कारणों की जांच की जा रही है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन सी मौत रोकी जा सकती थी और किन मामलों में स्थिति गंभीर थी।

यह प्रक्रिया मेडिको-लीगल ऑटोप्सी से अलग होती है। इसमें पुलिस की जरूरत नहीं होती और यह परिवार के अनुरोध पर की जाती है। इसमें शरीर के जरूरी हिस्सों की जांच कर बीमारी या जटिलता की सही वजह पता की जाती है।

परिवार को मिलती है पूरी जानकारी

ऑटोप्सी के बाद डॉक्टर हिस्टोपैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट तैयार करते हैं। कुछ ही दिनों में यह रिपोर्ट परिवार को दी जाती है। इससे परिजनों को यह समझने में मदद मिलती है कि मौत क्यों हुई और कोई लापरवाही तो नहीं हुई।

इस पहल से सरकार को मातृ मृत्यु के मामलों का सटीक और प्रमाणिक डेटा मिलेगा। इसके आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, सुविधाओं की कमी और इलाज की खामियों को पहचान कर बेहतर रणनीति बनाई जा सकेगी।

इसलिए जरूरी यह प्रक्रिया SRS मैटरनल बुलेटिन 2020-22 के अनुसार, मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 159 है। जबकि भारत का औसत MMR 88 है। मध्यप्रदेश का IMR-MMR देश के औसत से लगभग दोगुना है। जो इसे सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला राज्य बनाता है।

देश और राज्यों से MMR की तुलना

  • उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ का MMR भी 141 है, जो मध्यप्रदेश से थोड़ा बेहतर, लेकिन गंभीर स्थिति में है।
  • ओडिशा का MMR 136 है, जो उच्च MMR वाले राज्यों में से एक है।
  • केरल 18 और महाराष्ट्र 36 MMR के साथ मातृ देखभाल में बेहतर मॉडल प्रस्तुत करते हैं।

सम्मान के साथ पूरी होती है प्रक्रिया

ऑटोप्सी करीब डेढ़ घंटे में पूरी हो जाती है और इसमें पूरी सावधानी और सम्मान का ध्यान रखा जाता है। जांच के लिए केवल जरूरी ऊतक लिए जाते हैं और बाद में सभी अंगों को वापस सुरक्षित तरीके से शरीर में रख दिया जाता है। शरीर को सही तरीके से सिलकर परिवार को सौंपा जाता है और चेहरे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाता।

डॉक्टरों से सीधे बात कर सकते हैं परिजन

इस प्रक्रिया के दौरान परिवार के सदस्य डॉक्टरों से पहले और बाद में बात कर सकते हैं। इससे उनकी शंकाएं दूर होती हैं और उन्हें पूरी पारदर्शिता के साथ जानकारी मिलती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर मौत के असली कारण समय पर समझ आ जाएं, तो भविष्य में ऐसी कई घटनाओं को रोका जा सकता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.