Mamata Banerjees Appeal: Rebuild TMC, Will Paint Offices Herself

Hindi News National Mamata Banerjees Appeal: Rebuild TMC, Will Paint Offices Herself | Kolkata 24 मिनट पहले कॉपी लिंक ममता बनर्जी ने कोलकाता में अपने आवास पर कार्यकर्ताओं से बैठक की। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में पार्टी कार्यकर्ताओं से TMC के संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हम पार्टी दफ्तरों को दोबारा खोलेंगे, उन्हें रंगेंगे और मजबूती से काम पर लौटेंगे। जरूरत पड़ी तो मैं खुद भी दफ्तरों को पेंट करने के लिए तैयार हूं। इसके बाद उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, वे पूरी तरह आजाद हैं और वे किसी को भी जबरदस्ती रोक कर रखने में यकीन नहीं रखतीं। बैठक के दौरान ममता के भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे। कोलकाता में हुई बैठक में अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे। ममता ने कहा- जनादेश लूटा गया ममता ने कहा कि चुनाव के नतीजों में भले ही TMC को 80 सीटें मिली हों, लेकिन यह जनादेश की लूट है। इससे उनका हौसला नहीं टूटेगा। बैठक के दौरान 21 मई को फालता सीट पर होने वाले उपचुनाव के उम्मीदवार भी मौजूद थे। दरअसल, फालता में 29 अप्रैल को वोटिंग हुई थी, लेकिन EVM छेड़खानी के आरोपों के बाद चुनाव आयोग ने वहां दोबारा वोटिंग कराने का फैसला किया। 4 मई को आए 293 सीटों के नतीजों में BJP को 207 सीटें मिली थीं। TMC 31 सीटों के नतीजों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा, ‘बंगाल में सीटों पर जीत का अंतर SIR में कटे वोटों से कम मामले में ममता बनर्जी और अन्य लोग नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं।’ TMC ने दावा किया कि हालिया विधानसभा चुनाव में 31 सीटों पर जीत का अंतर, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान हटाए गए वोटों की संख्या से कम था। दरअसल, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच बंगाल में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान TMC सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने बागची की उस टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि अगर जीत का अंतर हटाए गए वोटों से कम है, तो अदालत शिकायतों पर विचार कर सकती है। भाजपा ने 128 सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं बंगाल में 30 हजार से कम मार्जिन पर जीत वाली 176 सीटों में भाजपा की 128 सीटें हैं। वहीं, 30 हजार से ज्यादा मार्जिन पर जीत वाली 117 सीटों में भाजपा की 79 सीटें हैं। तृणमूल की 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम और 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा है। 2021 में भाजपा की 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में ऐसी 93.5% थीं। साल 2021 में 121 सीटों पर तृणमूल की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 94 पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दर्शाते हैं। इस बार भाजपा की 25 सीटें ऐसी हैं, जहां हटाए या अयोग्य घोषित मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से अधिक है। ——————————————– ये खबर भी पढ़ें… ममता बोलीं- मैं आजाद पंछी, शेर की तरह लड़ूंगी: इस्तीफा नहीं दूंगी, हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे; कोलकाता में BJP कार्यकर्ता की हत्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी।ममता ने आगे कहा- चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
MP Pension Offices Closing; SBI Takes Over Payment Process From April 2026

मध्य प्रदेश सरकार राज्य के लगभग साढ़े चार लाख पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए पेंशन भुगतान की व्यवस्था में बदलाव करने वाली है। नई व्यवस्था के तहत, अब किसी भी बैंक में खाता रखने वाले सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद सीधे अपने उसी खाते में पेंशन . राज्य शासन ने इस प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के मकसद से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एकमात्र ‘एग्रीगेटर बैंक’ के रूप में नियुक्त किया है। यह महत्वपूर्ण बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी होगा। बता दें कि एमपी में पेंशन की मौजूदा व्यवस्था में कई समस्याएं हैं इसकी वजह से पेंशन भुगतान की प्रक्रिया में अक्सर देरी होती है। साथ ही तकनीकी बाधाओं की वजह से भी पेंशन मिलने में दिक्कत होती है। सरकार ने जिला पेंशन कार्यालयों को भी बंद करने का फैसला किया है। आखिर क्या है नईे व्यवस्था? इसका कितना फायदा होगा और दूसरे बैंकों की भूमिका क्या रहेगी। पढ़िए रिपोर्ट मौजूदा व्यवस्था की 4 प्रमुख समस्याएं मौजूदा पेंशन प्रणाली कई जटिलताएं और चुनौतियां हैं। इसकी वजह से पेंशनर्स को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रमुख रूप से 4 समस्याएं हैं… बैंक बदलने की मजबूरी: कई मामलों में, पेंशनभोगियों को पेंशन लेने के लिए उन्हीं बैंकों में अकाउंट बनाए रखना पड़ता था, जहां उनका सैलरी अकाउंट था। तकनीकी असमानता: महंगाई भत्ते (DA) में वृद्धि या वेतनमान में संशोधन जैसी स्थितियों में पेंशन राशि को अपडेट करने की प्रक्रिया जटिल है। यह कार्य सेंट्रलाइज्ड पेंशन प्रोसेसिंग सेल (CPPC) के माध्यम से किया जाता है, और यह सुविधा केवल 4 प्रमुख बैंकों में ही उपलब्ध है। जिन बैंकों में यह सिस्टम नहीं है, वहां पेंशन अपडेट होने में काफी समय लगता है, जिससे पेंशनर्स को एरियर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। PPO हस्तांतरण में देरी: सेवानिवृत्ति से पहले कर्मचारी का पेंशन अदायगी आदेश (PPO) संबंधित बैंक को भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और समन्वय की कमी के कारण अक्सर सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद पेंशन शुरू होने में देरी होती है। वेतनमान फिक्सेशन की त्रुटियां: कर्मचारियों के वेतनमान फिक्सेशन (Pay Fixation) में फिट-मेंट फैक्टर, मूल वेतन या महंगाई भत्ते की गणना में हुई मामूली गलती भी पेंशन प्रक्रिया को रोक देती है, जिसे सुधारने में महीनों लग जाते है। पेंशनर्स का आरोप- कर्मचारी रिश्वत लेते हैं पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेशदत्त जोशी इन समस्याओं के अलावा एक और मुद्दे पर ध्यान दिलाते हैं। उनके मुताबिक अभी पेंशन प्रकरणों का काम जिला और संभागीय पेंशन दफ्तरों के पास है। जैसे ही कोई कर्मचारी रिटायर होता है और उसका प्रकरण जब पेंशन कार्यालय में जाता है तो वहां मौजूद कर्मचारी एक ही प्रकार की कई आपत्तियां लगाते हैं। इन आपत्तियों को वो बार बार लगाकर कर्मचारी के संबंधित कार्यालय को भेजते हैं। जोशी के मुताबिक वो ऐसा इसलिए करते हैं ताकि रिटायर्ड कर्मचारी उनकी सेवा करें( रिश्वत) और इसके बदले वो उनका पीपीओ जारी करें। मौजूदा व्यवस्था में क्या बदलाव होगा पूरी प्रोसेस को सेंट्रलाइज्ड किया जा रहा है। राज्य सरकार पेंशन की पूरी राशि केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को हस्तांतरित करेगी, जिसमें राज्य सरकार का मुख्य खाता है। SBI एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करते हुए, प्रदेश के सभी पेंशनभोगियों के बैंक खातों में पेंशन की राशि वितरित करेगा, चाहे उनका खाता किसी भी बैंक में क्यों न हो। अब तक जो क्लेम और कमीशन 11 अलग-अलग बैंकों को मिलता था, वह अब केवल SBI को मिलेगा, क्योंकि पेंशन वितरण का पूरा प्रबंधन और क्लेम भेजने की जिम्मेदारी सिर्फ SBI की होगी। प्रशासनिक स्तर पर बदलाव: बंद होंगे जिला पेंशन कार्यालय इस सुधार प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सभी जिलों में स्थित पेंशन कार्यालयों को बंद किया जाएगा। हालांकि, संभागीय मुख्यालयों में स्थित कार्यालय पहले की तरह काम करते रहेंगे। पेंशन निर्धारण की पूरी प्रक्रिया अब भोपाल स्थित मुख्यालय से केंद्रीकृत रूप से संचालित होगी। इस प्रणाली की सबसे खास बात इसकी पारदर्शिता और सीक्रेसी है। अब किसी भी कर्मचारी को यह पता नहीं चलेगा कि उसकी पेंशन का निर्धारण कौन-सा अधिकारी कर रहा है। उदाहरण के लिए, भिंड में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी की पेंशन फाइल का निर्धारण जबलपुर में बैठा कोई भी डिप्टी डायरेक्टर कर सकता है। सरकार का मानना है कि इस कदम से स्थानीय स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार और अनावश्यक दबाव पर पूरी तरह से रोक लगेगी। SBI ने शुरू की तैयारी, 2 लाख PPO होंगे ट्रांसफर इस नई व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए SBI ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में लगभग 4 लाख 46 हजार पेंशनर्स हैं, और इस साल 22 हजार और कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। SBI ने अन्य 10 बैंकों से 2 लाख से अधिक PPO वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बड़े पैमाने के कार्य को पूरा होने में 3 से 4 महीने लगने का अनुमान है। ये खबर भी पढ़ें…. MP के 22 लाख पेंशनर्स को झटका:केंद्र का सहायता राशि बढ़ाने से इनकार, नीति आयोग की सिफारिश के बावजूद वृद्धि नहीं मध्य प्रदेश के करीब 22.5 लाख बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशनर्स के लिए दिल्ली से निराशाजनक खबर है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यसभा में स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत दी जाने वाली पेंशन राशि में बढ़ोतरी करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। केंद्र सरकार के इस फैसले का सीधा असर उन लाखों लोगों पर पड़ेगा, जो महंगाई के इस दौर में आर्थिक मदद बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे थे। पूरी खबर पढ़ें….








