Sunday, 08 Nov 2026 | 03:44 PM

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Modi to Meet Trump at G7 Summit on June 17; Also Visiting Slovakia

Modi to Meet Trump at G7 Summit on June 17; Also Visiting Slovakia

नई दिल्ली/पेरिस/ब्रातिस्लावा8 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी फ्रांस के नीस शहर पहुंचे हैं। वे 14 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के नीस पहुंच गए हैं। वे 14 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक और ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, हेल्थ टेक, मेडिकल टेक्नोलॉजी, AI, सेमीकंडक्टर और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े 12 समझौते हो सकते हैं। प्रधानमंत्री 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के 6 दिनों के दौरे पर हैं। पीएम बनने के बाद उनकी यह 7वीं फ्रांस यात्रा है। उनका फ्रांस दौरा दो फेज में होगा। इस दौरान 3 शहरों नीस, इवियान और पेरिस जाएंगे। वे 13-14 जून तक नीस में रहेंगे। 16 से 17 जून को एवियन में G7 समिट में हिस्सा लेंगे। 18 जून को पेरिस में राष्ट्रपति मैक्रों के साथ विवाटेक सम्मेलन में जाएंगे। 17 जून को G7 समिट के दौरान मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से द्विपक्षीय मुलाकात होगी। दोनों नेता 16 महीने बाद मिलेंगे। दोनों आखिरी बार फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में मिले थे। फांस दौरे के बीच मोदी 14 जून की शाम फ्रांस से स्लोवाकिया जाएंगे और 15 जून तक रुकेंगे। इस दौरान स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रोबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी से मुलाकात करेंगे। 1993 में स्लोवाकिया के आजाद देश बनने के बाद किसी भारतीय पीएम का यह पहला दौरा है। 2025 में कनाडा में हुए G7 में PM मोदी शामिल हुए थे। लेकिन ट्रम्प समिट बीच में छोड़कर चले गए थे, जिससे दोनों की मुलाकात नहीं हो सकी थी। सवा 3 लाख करोड़ की डील, यात्रा के बाद फैसला लेगी कैबिनेट विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत और फ्रांस के बीच सबसे अहम चर्चा वायु सेना के लिए 114 रफाल लड़ाकू विमानों की डील पर होगी। करीब सवा 3 लाख कराेड़ रुपए के इस सौदे में भारत विमानों के साझा विकास और उत्पादन के अलावा टेक्नोलॉजी का पूरा ट्रांसफर चाहता है। भारतीय जरूरतों के हिसाब से इन विमानों पर अपनी मिसाइलें और अन्य हथियार लगाने के लिए सोर्स कोड को लेकर भी भारत अपना रुख स्पष्ट करेगा। मोदी कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति ने अभी तक इस डील पर मुहर नहीं लगाई है। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान होने वाले फैसलों के बाद ही कैबिनेट कमेटी अंतिम राय बनाएगी। होर्मुज रक्षा गठबंधन में भारत के शामिल होने पर निर्णय संभव प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। ब्रिटेन की अगुवाई में अप्रैल में हुई पेरिस वार्ता में भारत शामिल हुआ था। होर्मुज खोलने को लेकर भारत किसी एक देश की पहल पर होने वाली सुरक्षा व्यवस्था के बजाए संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुकूल बहुपक्षीय सुरक्षा व्यवस्था के हक में है। ऐसे में भारत फ्रांस और ब्रिटेन की पहल के साथ कदम मिलाते हुए होर्मुज रक्षा गठबंधन में शामिल होने पर सहमति दे सकता है। G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं? G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं। इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बन गया। 1998 में रूस को शामिल कर इसका नाम G8 कर दिया गया, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। इसके बाद यह फिर से G7 कहलाने लगा। भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर विशेष आमंत्रित देश (Guest Country) के रूप में बुलाया जाता है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री को समिट का न्यौता मिलता है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 से 2013 के बीच पांच बार G7 (पहले G8) समिट में हिस्सा लिया था। PM मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित G7 समिट में आमंत्रित किया गया था। 2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन उसने तब समिट रद्द कर दी। इसके बाद 2021 में ब्रिटेन की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन में PM मोदी वर्चुअली शामिल हुए। इसके अलावा मोदी 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान, 2024 में इटली और 2025 में कनाडा में आयोजित G7 समिट में शामिल हुए। भारत इनोवेट्स क्या है, जिसका उद्घाटन करेंगे PM ‘भारत इनोवेट्स’ शिक्षा मंत्रालय की नया ग्लोबल इनोशिएटिव है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी 2026 में भारत-फ्रांस इनोवेशन साल के उद्घाटन के दौरान की थी। इसका उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप, IITs, IISc, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को वैश्विक निवेशकों, कंपनियों, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संगठनों से जोड़ना है। यह कार्यक्रम 14 से 16 जून तक नीस शहर में पैलेस डेस एक्सपोजिशन्स (Palais des Expositions) में होगा। इस मेगा समिट का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों करेंगे। भारत के टॉप-2 हथियार सप्लायर्स में शामिल फ्रांस साल 2025 में फ्रेंच अखबार ला मोंड की खबर के मुताबिक फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है, जब अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था। पोखरण में परमाणु टेस्ट के बाद अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन फ्रांस ने भारत का समर्थन किया। फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत को फ्रांस से मिराज 2000 फाइटर जेट, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी मिल चुकी है। फ्रांस ने इंटरनेशनल फोरम पर हमेशा भारत को सपोर्ट किया सितंबर 2023 में हुई G20 समिट के दौरान PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन दिसंबर में उन्होंने भारत आने से इनकार कर दिया। ऐसे वक्त में भारत ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का

PM Modi LIVE | Narendra Modi France Visit Speech Photos Update; Emmanuel Macron

PM Modi LIVE | Narendra Modi France Visit Speech Photos Update; Emmanuel Macron

Hindi News National PM Modi LIVE | Narendra Modi France Visit Speech Photos Update; Emmanuel Macron G7 Summit 2026 नई दिल्ली/पेरिस/ब्रातिस्लावा10 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम नरेंद्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा पर रवाना हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर रहेंगे। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी 7वीं बार फ्रांस जा रहे हैं। 13-14 जून को नीस शहर में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। साथ ही ‘इंडिया इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। 16 जून को मोदी फ्रांस वापस लौटेंगे। मोदी 17 जून को G7 समिट में हिस्सा लेंगे। समिट में वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नई साझेदारियों और AI के मुद्दे पर चर्चा होगी। पीएम मोदी की कई वर्ल्ड लीडर्स समेत अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात हो सकती है। इसके बाद मोदी पेरिस जाएंगे। दो दिन 14 से 16 जून पीएम स्लोवाकिया में रहेंगे। यहां प्रधानमंत्री रोबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी से मुलाकात करेंगे। 1993 में स्लोवाकिया के आजाद देश बनने के बाद किसी भारतीय पीएम का यहां का पहला दौरा है। पीएम मोदी पिछले साल भी कनाडा में हुए G7 समिट में शामिल हुए थे। भारत इनोवेट्स क्या है ‘भारत इनोवेट्स’ शिक्षा मंत्रालय की नया ग्लोबल इनोशिएटिव है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी 2026 में भारत-फ्रांस इनोवेशन साल के उद्घाटन के दौरान की थी। इसका उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप, IITs, IISc, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को वैश्विक निवेशकों, कंपनियों, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संगठनों से जोड़ना है। यह कार्यक्रम 14 से 16 जून तक नीस शहर में पैलेस डेस एक्सपोजिशन्स (Palais des Expositions) में होगा। इस मेगा समिट का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों करेंगे। G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं? G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है। ये देश हैं- अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी। पहले इसका नाम G-8 हुआ करता था। 2014 में रूस ने पड़ोसी देश क्रीमिया पर कब्जा कर लिया तो बाकी सदस्य देशों ने रूस को ग्रुप से बाहर कर दिया। इसका नाम G7 हो गया। G7 समिट में सबसे ज्यादा 7 बार शामिल होंगे पीएम मोदी G7 समिट के लिए आमतौर पर भारतीय प्रधानमंत्रियों को बुलाया जाता रहा है। 2004 से 2014 तक पीएम रहे मनमोहन सिंह ने पांच बार G-8 समिट में हिस्सा लिया था। पीएम मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में हुई समिट में बुलाया गया था। इसके बाद 2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन अमेरिका ने तब समिट रद्द कर दी। इस एक साल को छोड़ दें तो 2019 से 2024 तक हर साल पीएम मोदी G7 समिट में शामिल हुए। 2021 में वे वर्चुअल मीडियम से इसमें शामिल हुए। 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान और 2024 में इटली में हुई G7 समिट में शामिल हुए। 2025 में कनाडा में हुई समिट में शामिल हुए। भारत के टॉप-2 हथियार सप्लायर्स में शामिल फ्रांस साल 2025 में फ्रेंच अखबार ला मोंड की खबर के मुताबिक फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है, जब अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था। पोखरण में परमाणु टेस्ट के बाद अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन फ्रांस ने भारत का समर्थन किया। फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत को फ्रांस से मिराज 2000 फाइटर जेट, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी मिल चुकी है। फ्रांस ने इंटरनेशनल फोरम पर हमेशा भारत को सपोर्ट किया सितंबर 2023 में हुई G20 समिट के दौरान PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन दिसंबर में उन्होंने भारत आने से इनकार कर दिया। ऐसे वक्त में भारत ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का न्योता भेजा। उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने भारत का हमेशा समर्थन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र में भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग की थी। इसके अलावा फ्रांस, न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में भी भारत को सदस्य बनाने का पक्षधर है। G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है? एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं। इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान और होर्मुज रूट की स्थिति, मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियां), वैश्विक आर्थिक सहयोग और असंतुलन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा G7 के सदस्य देशों के लीडर्स और ऑफिसर्स साल में कई बैठकें करते हैं, जिनमें कई समझौते होते हैं और दुनिया की बड़ी घटनाओं पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते हैं। शुरुआत में G7 का एजेंडा आर्थिक चुनौतियों और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हल निकालना था। बाद में राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। वैश्विक मुद्दों पर G7 के फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उदाहरण के लिए G7 ने 2002 में मलेरिया और एड्स से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड बनाया। 1998 में वित्तीय संकट के दौरान इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को आर्थिक मदद की। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन की मदद करने का फैसला किया। G20 से कैसे अलग है G7 ? G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और इसके सदस्य देश कोई अंतरराष्ट्रीय कानून पारित नहीं कर सकते। G20 में सबसे बड़ा मुद्दा वर्ल्ड इकोनॉमी होता है, जबकि G7 के लिए राजनीतिक मुद्दे भी अहम होते हैं। 1999 में बने G20

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Hindi News National PM Modi LIVE | Narendra Modi France Visit Speech Photos Update; Emmanuel Macron G7 Summit 2026 नई दिल्ली/पेरिस/ब्रातिस्लावा4 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम नरेंद्र मोदी शनिवार को फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा पर रवाना हुए। पीएम मोदी 13 से 18 जून तक 6 दिवसीय यात्रा पर फ्रांस और स्लोवाकिया के लिए रवाना हो गए हैं। पीएम बनने के बाद मोदी की यह 7वीं फ्रांस यात्रा है। 13-14 जून को नीस शहर में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। साथ ही ‘इंडिया इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद स्लोवाकिया रवाना हो जाएंगे। यहां वे 15 जून तक रहेंगे। 16 जून को पेरिस लौट आएंगे। मोदी 17 जून को G7 समिट में हिस्सा लेंगे। समिट में वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नई साझेदारियों और AI के मुद्दे पर चर्चा होगी। पीएम मोदी की कई वर्ल्ड लीडर्स समेत अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात हो सकती है। इसके बाद मोदी पेरिस जाएंगे। यहां प्रधानमंत्री रोबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी से मुलाकात करेंगे। 1993 में स्लोवाकिया के आजाद देश बनने के बाद किसी भारतीय पीएम का यहां का पहला दौरा है। पीएम मोदी पिछले साल भी कनाडा में हुए G7 समिट में शामिल हुए थे। भारत इनोवेट्स क्या है ‘भारत इनोवेट्स’ शिक्षा मंत्रालय की नया ग्लोबल इनोशिएटिव है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी 2026 में भारत-फ्रांस इनोवेशन साल के उद्घाटन के दौरान की थी। इसका उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप, IITs, IISc, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को वैश्विक निवेशकों, कंपनियों, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संगठनों से जोड़ना है। यह कार्यक्रम 14 से 16 जून तक नीस शहर में पैलेस डेस एक्सपोजिशन्स (Palais des Expositions) में होगा। इस मेगा समिट का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों करेंगे। G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं? G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है। ये देश हैं- अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी। पहले इसका नाम G-8 हुआ करता था। 2014 में रूस ने पड़ोसी देश क्रीमिया पर कब्जा कर लिया तो बाकी सदस्य देशों ने रूस को ग्रुप से बाहर कर दिया। इसका नाम G7 हो गया। G7 समिट में सबसे ज्यादा 7 बार शामिल होंगे पीएम मोदी G7 समिट के लिए आमतौर पर भारतीय प्रधानमंत्रियों को बुलाया जाता रहा है। 2004 से 2014 तक पीएम रहे मनमोहन सिंह ने पांच बार G-8 समिट में हिस्सा लिया था। पीएम मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में हुई समिट में बुलाया गया था। इसके बाद 2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन अमेरिका ने तब समिट रद्द कर दी। इस एक साल को छोड़ दें तो 2019 से 2024 तक हर साल पीएम मोदी G7 समिट में शामिल हुए। 2021 में वे वर्चुअल मीडियम से इसमें शामिल हुए। 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान और 2024 में इटली में हुई G7 समिट में शामिल हुए। 2025 में कनाडा में हुई समिट में शामिल हुए। भारत के टॉप-2 हथियार सप्लायर्स में शामिल फ्रांस साल 2025 में फ्रेंच अखबार ला मोंड की खबर के मुताबिक फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है, जब अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था। पोखरण में परमाणु टेस्ट के बाद अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन फ्रांस ने भारत का समर्थन किया। फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत को फ्रांस से मिराज 2000 फाइटर जेट, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी मिल चुकी है। फ्रांस ने इंटरनेशनल फोरम पर हमेशा भारत को सपोर्ट किया सितंबर 2023 में हुई G20 समिट के दौरान PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन दिसंबर में उन्होंने भारत आने से इनकार कर दिया। ऐसे वक्त में भारत ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का न्योता भेजा। उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने भारत का हमेशा समर्थन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र में भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग की थी। इसके अलावा फ्रांस, न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में भी भारत को सदस्य बनाने का पक्षधर है। G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है? एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं। इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान और होर्मुज रूट की स्थिति, मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियां), वैश्विक आर्थिक सहयोग और असंतुलन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा G7 के सदस्य देशों के लीडर्स और ऑफिसर्स साल में कई बैठकें करते हैं, जिनमें कई समझौते होते हैं और दुनिया की बड़ी घटनाओं पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते हैं। शुरुआत में G7 का एजेंडा आर्थिक चुनौतियों और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हल निकालना था। बाद में राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। वैश्विक मुद्दों पर G7 के फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उदाहरण के लिए G7 ने 2002 में मलेरिया और एड्स से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड बनाया। 1998 में वित्तीय संकट के दौरान इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को आर्थिक मदद की। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन की मदद करने का फैसला किया। G20 से कैसे अलग है G7 ? G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और इसके सदस्य देश कोई अंतरराष्ट्रीय कानून पारित नहीं कर सकते। G20 में सबसे बड़ा मुद्दा वर्ल्ड इकोनॉमी होता है, जबकि G7 के लिए राजनीतिक मुद्दे भी अहम

पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत हर नागरिक का संकल्प है, राष्ट्र से अपना सर्वश्रेष्ठ देने का आग्रह किया | न्यूज18

पीएम मोदी ने कहा कि विकसित भारत हर नागरिक का संकल्प है, राष्ट्र से अपना सर्वश्रेष्ठ देने का आग्रह किया | न्यूज18

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश का हर नागरिक विकसित भारत के सपने से भरा हुआ है और यह सपना अब एक संकल्प बन गया है। उन्होंने नागरिकों से विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने में मदद करने के लिए हर समय अपना सर्वश्रेष्ठ देने का आग्रह किया। पीएम मोदी का संदेश सामूहिक जिम्मेदारी, राष्ट्रीय विकास, सार्वजनिक भागीदारी और एक मजबूत, आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत के निर्माण के लिए मिलकर काम करने की भावना पर प्रकाश डालता है। -newsNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 10 जून, 2026, 20:27 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)आत्मनिर्भर भारत(टी)भारत विकास(टी)भारत ड्रीम(टी)ब्रेकिंग न्यूज इंडिया(टी)सीएनएन-न्यूज18(टी)विकसित भारत(टी)विकसित भारत(टी)प्रत्येक नागरिक भूमिका(टी)अपना सर्वश्रेष्ठ दें(टी)भारत विकास(टी)भारत विकास की कहानी(टी)भारतीय राजनीति(टी)ताजा समाचार(टी)मोदी सरकार(टी)मोदी विकासशील भारत(टी)नरेंद्र मोदी(टी)राष्ट्रीय विकास(टी)न्यूज़18(टी)पीएम मोदी(टी)पीएम मोदी नवीनतम भाषण(टी)पीएम मोदी भाषण(टी)राजनीतिक समाचार भारत(टी)संकल्प(टी)आत्मनिर्भर भारत(टी)विक्सित भारत(टी)विक्सित भारत 2047(टी)विक्सित भारत संकल्प

पीएम मोदी का नया रिकॉर्ड, बॉलीवुड कलाकारों ने दी बधाई:कंगना, अनूप जलोटा और भंडारकर ने की काम की तारीफ; जलोटा बोले- वे हमेशा पीएम रहें

पीएम मोदी का नया रिकॉर्ड, बॉलीवुड कलाकारों ने दी बधाई:कंगना, अनूप जलोटा और भंडारकर ने की काम की तारीफ; जलोटा बोले- वे हमेशा पीएम रहें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के राजनीतिक इतिहास में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। वह भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा करने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं। पीएम मोदी ने इस मामले में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का 4,398 दिनों का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है। पद पर 4,399 दिन पूरे होने के इस मौके पर राजनीतिक क्षेत्र के साथ-साथ फिल्मी जगत की कई बड़ी हस्तियों ने उन्हें बधाई दी है। कंगना रनौत, अनूप जलोटा और मधुर भंडारकर जैसी हस्तियों ने उनके कार्यकाल की सराहना की है। कंगना रनौत ने बताया जनसेवा का संकल्प हिमाचल प्रदेश के मंडी से बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनौत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक वीडियो पोस्ट कर प्रधानमंत्री मोदी को इस उपलब्धि पर बधाई दी। कंगना ने लिखा कि 4399 दिन और जनसेवा का संकल्प लगातार जारी है। यह उपलब्धि 140 करोड़ देशवासियों के विश्वास, सुशासन, विकास और राष्ट्रहित के प्रति उनके अटूट समर्पण का प्रतीक है। कंगना ने इसे नए, विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का एक स्वर्णिम अध्याय बताया जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। नीतू चंद्रा और मधुर भंडारकर ने की काम की तारीफ एक्ट्रेस नीतू चंद्रा ने न्यूज एजेंसी ‘IANS’ से खास बातचीत में प्रधानमंत्री को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इन तमाम वर्षों में देश में बहुत काम हुआ है और आगे भी होता रहेगा। नीतू ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री आगे भी महिलाओं के विकास पर विशेष ध्यान देंगे। वहीं, फिल्म डायरेक्टर और स्क्रीनराइटर मधुर भंडारकर ने बधाई देते हुए कहा कि साल 2014 से देश ने एक बहुत ही शानदार सफर देखा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं और भारत के बाहर भी लोग उनके काम की काफी तारीफ करते हैं। अनूप जलोटा बोले- हमेशा के लिए प्रधानमंत्री बनें मशहूर भजन गायक अनूप जलोटा ने इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री के लंबे जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने देश को तरक्की की राह पर आगे बढ़ाया है और पूरी दुनिया में भारत का सम्मान मजबूत किया है। उन्होंने इच्छा जताई कि नरेंद्र मोदी आगे भी कई सालों तक इसी तरह देश का नेतृत्व करते रहें और हमेशा के लिए देश के प्रधानमंत्री बने रहें। अनूप जलोटा के मुताबिक, देश को उनकी नीतियों से लगातार फायदा मिल रहा है और वे देश को लगातार तरक्की की राह पर ले जा रहे हैं। जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ा नरेंद्र मोदी के नाम अब भारत में सबसे लंबे समय तक लगातार पद पर रहने वाले प्रधानमंत्री होने का रिकॉर्ड दर्ज हो गया है। उन्होंने 26 मई 2014 को पहली बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। तब से अब तक उनका यह कार्यकाल लगातार जारी है। उनसे पहले देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू लगातार 4,398 दिनों (13 मई 1952 से 27 मई 1964) तक इस पद पर रहे थे। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी लगातार 4,077 दिनों (24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977) तक देश की प्रधानमंत्री रही थीं।

President Murmu Confers Gallantry Awards

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Hindi News Career President Murmu Confers Gallantry Awards | Rashtrapati Bhavan June 10 Current Affairs 7 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. पीएम नरेंद्र मोदी सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने वाले नेता बने 10 जून को पीएम नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित पीएम बने। पीएम मोदी ने देश के पहले पीएम जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा। पीएम नरेंद्र मोदी ने लगातार 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा किया है और जवाहरलाल नेहरू का 4,398 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। जवाहरलाल नेहरू ने पहले आम चुनाव (1952) के बाद प्रधानमंत्री के तौर पर 4,398 दिन का लगातार कार्यकाल पूरा किया था। इसके साथ ही इंदिरा गांधी ने 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक लगातार प्रधानमंत्री के तौर पर काम किया था और उनका ये कार्यकाल 4,077 दिनों का था। कांग्रेस पार्टी ने 1951-52 में पहला आम चुनाव जीता और फिर 1957 और 1962 में भी जीत हासिल की। वह 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने और 2014 में प्रधानमंत्री का पद संभालने से पहले तक इस पद पर रहे। नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। 2. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में शौर्य चक्र दिए 8 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में रक्षा अलंकरण समारोह में जवानों और उनके परिवारों को 7 कीर्ति चक्र 15 वीर चक्र और 29 शौर्य चक्र प्रदान किए। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे। इन शौर्य चक्रों में मरणोपरांत 2 कीर्ति चक्र, 3 वीर चक्र और 1 शौर्य चक्र शामिल हैं। ऑपरेशन सिंदूर में शामिल भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन मनीष अरोड़ा को भी वीर चक्र से सम्मानित किया गया है। उन्हें पहले शौर्य चक्र भी मिल चुका है। ग्रुप कैप्टन मनीष ने सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान उड़ाते हुए पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले में हिस्सा लिया था। वहीं, LoC पर 3 आतंकियों को मार गिराने वाले लेफ्टिनेंट कर्नल नितेश भारती शुक्ला को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। इसके अलवा अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाके में सैन्य अभियान के दौरान बहादुरी दिखाने वाले मेजर आदित्य प्रताप सिंह को भी शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान साहस दिखाने वाले पुलिस अधिकारी लक्ष्मण केवट और रामेश्वर प्रसाद देशमुख को भी ये सम्मान मिला। भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के. और रूपा ए. ने नाविका सागर परिक्रमा-II अभियान के तहत समुद्र के रास्ते दुनिया का चक्कर पूरा करने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। 4 राष्ट्रीय राइफल्स के शहीद लांस दफादार बलदेव चंद को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रक्षा अलंकरण समारोह में यह वीरता पुरस्कार उनकी पत्नी और मां को प्रदान किया। 7 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) के मेजर आशीष कुमार को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। नवंबर 2024 में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में एक आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान उन्होंने ऑपरेशन का नेतृत्व किया। छत्तीसगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट और इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। दोनों अधिकारियों ने 16 अप्रैल 2024 को एक बड़े नक्सल विरोधी अभियान का नेतृत्व किया था। नक्सलियों के हमले के बीच उन्होंने तीन घंटे से ज्यादा चली मुठभेड़ में मोर्चा संभाला, घायल जवानों को सुरक्षित निकाला और अभियान को सफल बनाया। सिपाही जंजाल प्रवीण प्रभाकर की मां ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की हाथों से कीर्ति चक्र लिया। 3. इंद्रौर में BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक शुरू हुई 9 जून को मध्य प्रदेश के इंद्रौर में ब्रिक्स BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक शुरू हुई। ये समिट 13 जून तक चलेगी। इस बैठक में BRICS देश ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के कृषि मंत्री शामिल हुए। इस समिट में खाद्य सिक्योरिटी , एग्रीकल्चर इनोवेशन , क्लाइमेट चेंज, एग्रीकल्चर ट्रेड और छोटे किसानों पर बात होगी। कृषि मंत्रालय के मुताबिक, दुनिया की लगभग 42% कृषि भूमि, 68% कृषि जोतें और 42% खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों के पास हैं। इस समिट में कृषि क्षेत्र में नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशन पर चर्चा की जाएगी। जलवायु परिवर्तन के दौर में खेती को कैसे सुरक्षित बनाया जाए, इस पर सेशन आयोजित होंगे। इस समिट में छोटे किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें वैश्विक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। जॉइंट डिक्लेरेशन में फूड सिक्योरिटी और न्यूट्रिशन, डिजिटल एग्रीकल्चर और एग्रीकल्चर में स्मार्ट टेक्नोलॉजी का यूज बढ़ाने, एग्रीकल्चर इनोवेशन, AI, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स और एग्रीकल्चर इंवेस्टमेंट पर जॉइंट डिक्लेरेशन भी पेश किया जा सकता है। ये BRICS की 16वीं बैठक है, जिसमें 20 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 4. H-1B वीजा में 1 लाख डॉलर के शुल्क पर अमेरिकी कोर्ट ने रोक लगाई 8 जून को अमेरिका में फेडरल कोर्ट ने ट्रम्प के H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर (करीब 95 लाख रुपए) फीस वसूलने वाली नीति को रद्द कर दिया है। बोस्टन कोर्ट ने कहा कि ये फीस नहीं बल्कि एक टैक्स है और इसे लागू करने के लिए राष्ट्रपति नहीं बल्कि संसद की मंजूरी जरूरी होती है। ट्रम्प ने सितंबर 2025 में कहा था कि H-1B वीजा पर विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने वाली कंपनियों को उनके हर वीजा के लिए 1 लाख डॉलर की एक्स्ट्रा फीस देनी होगी। इसके बाद 20 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने इसे चुनौती दी थी। अब कोर्ट के फैसले के खिलाफ ट्रम्प सरकार अपील कर सकती है। H-1B एक गैर-प्रवासी वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां कुछ समय के लिए विदेशों से हाई स्किल प्रोफेशनल्स को नौकरी पर रख सकती हैं। पहले H-1B वीजा आवेदन करने पर कंपनियों को करीब 2000 से 5000 डॉलर तक फीस देनी पड़ती थी। इस वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय IT और टेक प्रोफेशनल्स करते हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसी साल मई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने H-1B वीजा का मुद्दा उठाया था। रुबियो ने माना था कि नए इमिग्रेशन सिस्टम में बदलाव के दौरान

होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बुधवार को पीएम मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तेल सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता हो सकता है। इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने भी डेल्सी रोड्रिगेज से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि भारत-वेनेजुएला संबंधों को मजबूत करने में रोड्रिगेज की लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका रही है और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत दोनों देशों के सहयोग को और आगे बढ़ाएगी। अमेरिका ने 4 जनवरी को तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद से रोड्रिगेज कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं। रोड्रिगेज की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। होर्मुज संकट की वजह से भारत वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है। वेनेजुएला तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना एनर्जी ट्रैक करने वाली एजेंसी केप्लर के डेटा के मुताबिक, मई 2026 में वेनेजुएला ने तेल सप्लाई के मामले में सऊदी अरब और अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। अभी केवल रूस और UAE ने ही उससे ज्यादा तेल सप्लाई किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ गई है। अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल निर्यात पर कुछ ढील दी थी। उसी के बाद अप्रैल से भारत में फिर से वेनेजुएला का तेल आना शुरू हुआ। करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश माना जाता है। यह भंडार सऊदी अरब और अमेरिका से भी ज्यादा है। अब अमेरिका और वेनेजुएला दोनों कोशिश करेंगे कि भारत के साथ ऐसा समझौता हो, जिससे वेनेजुएला से तेल निर्यात में आई यह तेजी आगे भी जारी रह सके। पहले भी भारत के बड़े सप्लायर्स में शामिल रहा है वेनेजुएला वेनेजुएला भारत के बड़े तेल सप्लायर्स में शामिल रहा है। 2012 में यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना था और कई साल तक टॉप-5 में रहा। 2019 तक वेनेजुएला हर साल करीब 1.6 करोड़ टन कच्चा तेल भारत भेज रहा था। उसी दौरान दोनों देशों का व्यापार बढ़कर 6.4 अरब डॉलर पहुंच गया था, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा तेल कारोबार का था। हालांकि, अमेरिका की तरफ से वेनेजुएला के तेल खरीदारों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत ने करीब एक साल तक वहां से तेल खरीद बंद कर दी थी। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार घटकर 67.9 करोड़ डॉलर रह गया। भारत की रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद है वेनेजुएलाई तेल वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और ज्यादा सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना आसान नहीं माना जाता। हालांकि, भारत की आधुनिक रिफाइनरियां इस तरह के तेल को डीजल और जेट फ्यूल जैसे उत्पादों में बदल सकती हैं। यह तेल तुलनात्मक रूप से सस्ता भी पड़ता है। इसी वजह से भारतीय रिफाइनरियां इसे आर्थिक रूप से फायदे का सौदा मानती हैं। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है। उन्होंने बताया कि भारत की सरकारी तेल कंपनियों का वहां निवेश भी है। भारत सरकार के मुताबिक, भारतीय सरकारी कंपनियों की वेनेजुएला के तेल सेक्टर में अच्छी हिस्सेदारी है और वे आगे भी वहां निवेश बढ़ाने के मौके तलाश रही हैं। रोड्रिगेज तेल मंत्री रहते भी भारत आ चुकी हैं रिपोर्ट्स के मुताबिक डेल्सी रोड्रिगेज छठी बार भारत आई हैं। इससे पहले फरवरी 2025 में भी भारत आई थीं। तब वे वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री थीं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एनर्जी वीक’ में हिस्सा लिया था। इस दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच तेल सप्लाई बढ़ाने, रिफाइनिंग सहयोग और ऊर्जा निवेश पर बातचीत हुई थी। उस समय अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से वेनेजुएलाई तेल खरीद बढ़ाने में रुचि दिखाई थी।

होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

होर्मुज संकट के बीच वेनेजुएलाई राष्ट्रपति भारत आईं:PM मोदी से मिलीं, तेल सप्लाई पर बड़ा समझौता संभव

वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बुधवार को पीएम मोदी से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और वेनेजुएला के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से बढ़ा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तेल सप्लाई को लेकर बड़ा समझौता हो सकता है। इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने भी डेल्सी रोड्रिगेज से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि भारत-वेनेजुएला संबंधों को मजबूत करने में रोड्रिगेज की लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका रही है और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बातचीत दोनों देशों के सहयोग को और आगे बढ़ाएगी। अमेरिका ने 4 जनवरी को तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का तख्तापलट कर दिया था। इसके बाद से रोड्रिगेज कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं। रोड्रिगेज की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। होर्मुज संकट की वजह से भारत वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है। वेनेजुएला तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना एनर्जी ट्रैक करने वाली एजेंसी केप्लर के डेटा के मुताबिक, मई 2026 में वेनेजुएला ने तेल सप्लाई के मामले में सऊदी अरब और अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। अभी केवल रूस और UAE ने ही उससे ज्यादा तेल सप्लाई किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ गई है। अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल निर्यात पर कुछ ढील दी थी। उसी के बाद अप्रैल से भारत में फिर से वेनेजुएला का तेल आना शुरू हुआ। करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश माना जाता है। यह भंडार सऊदी अरब और अमेरिका से भी ज्यादा है। अब अमेरिका और वेनेजुएला दोनों कोशिश करेंगे कि भारत के साथ ऐसा समझौता हो, जिससे वेनेजुएला से तेल निर्यात में आई यह तेजी आगे भी जारी रह सके। पहले भी भारत के बड़े सप्लायर्स में शामिल रहा है वेनेजुएला वेनेजुएला भारत के बड़े तेल सप्लायर्स में शामिल रहा है। 2012 में यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना था और कई साल तक टॉप-5 में रहा। 2019 तक वेनेजुएला हर साल करीब 1.6 करोड़ टन कच्चा तेल भारत भेज रहा था। उसी दौरान दोनों देशों का व्यापार बढ़कर 6.4 अरब डॉलर पहुंच गया था, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा तेल कारोबार का था। हालांकि, अमेरिका की तरफ से वेनेजुएला के तेल खरीदारों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत ने करीब एक साल तक वहां से तेल खरीद बंद कर दी थी। 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार घटकर 67.9 करोड़ डॉलर रह गया। भारत की रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद है वेनेजुएलाई तेल वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और ज्यादा सल्फर वाला होता है। इसे प्रोसेस करना आसान नहीं माना जाता। हालांकि, भारत की आधुनिक रिफाइनरियां इस तरह के तेल को डीजल और जेट फ्यूल जैसे उत्पादों में बदल सकती हैं। यह तेल तुलनात्मक रूप से सस्ता भी पड़ता है। इसी वजह से भारतीय रिफाइनरियां इसे आर्थिक रूप से फायदे का सौदा मानती हैं। वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है। उन्होंने बताया कि भारत की सरकारी तेल कंपनियों का वहां निवेश भी है। भारत सरकार के मुताबिक, भारतीय सरकारी कंपनियों की वेनेजुएला के तेल सेक्टर में अच्छी हिस्सेदारी है और वे आगे भी वहां निवेश बढ़ाने के मौके तलाश रही हैं। रोड्रिगेज तेल मंत्री रहते भी भारत आ चुकी हैं रिपोर्ट्स के मुताबिक डेल्सी रोड्रिगेज छठी बार भारत आई हैं। इससे पहले फरवरी 2025 में भी भारत आई थीं। तब वे वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री थीं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एनर्जी वीक’ में हिस्सा लिया था। इस दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच तेल सप्लाई बढ़ाने, रिफाइनिंग सहयोग और ऊर्जा निवेश पर बातचीत हुई थी। उस समय अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने फिर से वेनेजुएलाई तेल खरीद बढ़ाने में रुचि दिखाई थी।

पीएम मोदी ने पूछी थी फिल्म ‘पेड्डी’ की कहानी:राम चरण बोले थे- मूवी का कॉन्सेप्ट विकसित भारत जैसा है

पीएम मोदी ने पूछी थी फिल्म ‘पेड्डी’ की कहानी:राम चरण बोले थे- मूवी का कॉन्सेप्ट विकसित भारत जैसा है

पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी से एक्टर राम चरण और उनकी पत्नी उपासना कामिनेनी कोनिडेला की मुलाकात हुई थी। हाल ही में इस बातचीत से जुड़ा एक किस्सा राम चरण ने बताया। गुरुवार को राम चरण और जाह्नवी कपूर अपनी अपकमिंग फिल्म ‘पेड्डी’ के प्रमोशन के लिए दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान राम चरण ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई मुलाकात को याद किया। राम चरण ने बताया, “पिछली बार जब मैं दिल्ली में माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी से मिला था, तो उन्होंने मुझसे पूछा था कि ‘पेड्डी’ किस बारे में है। मैंने उन्हें बताया कि यह एक विकसित भारत और हमारे गांवों को सशक्त बनाने के बारे में है।” उन्होंने कहा कि इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल की एक कहानी शेयर की थी। राम चरण ने बताया कि मोदी जी ने कहा था कि दशकों पहले एक छोटे से गांव के एक फुटबॉलर ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था और आज उसी गांव के 85 से अधिक लोग फुटबॉल खेलते हैं। पिछले साल राम चरण ने अपनी पत्नी उपासना कामिनेनी कोनिडेला के साथ नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने अनिल कामिनेनी के नेतृत्व में शुरू की गई तीरंदाजी प्रीमियर लीग (एपीएल) के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया था। मुलाकात के बाद राम चरण ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर तस्वीरें शेयर की थीं और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया था। राम चरण ने पोस्ट के कैप्शन में लिखा था, ‘प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। अनिल कामिनेनी गारू के नेतृत्व में विश्व की पहली तीरंदाजी प्रीमियर लीग की सफलता के लिए बधाई।’ उन्होंने आगे लिखा था, ‘तीरंदाजी की विरासत को संरक्षित करने और इसे वर्ल्ड लेवल पर बढ़ावा देने की दिशा में यह हमारा एक छोटा सा कदम है। सभी खिलाड़ियों को बधाई। हमें उम्मीद है कि और भी कई लोग इस अद्भुत खेल से जुड़ेंगे।’ बाद में मोदी ने भी इस पोस्ट का जवाब दिया। उन्होंने लिखा था, ‘आपसे मिलकर खुशी हुई, उपासना और अनिल कामिनेनी गारू। तीरंदाजी को लोकप्रिय बनाने के आपके सामूहिक प्रयास सराहनीय हैं और इससे अनगिनत युवाओं को लाभ होगा।’ पेड्डी के बारे में ‘पेड्डी’ एक स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म है, जो खेल के माध्यम से अपनी पहचान तलाशने वाले एक व्यक्ति की कहानी पर आधारित है। फिल्म को बुच्ची बाबू सना ने लिखा और डायरेक्ट किया है। इसका प्रोडक्शन वेंकट सतीश किलारू ने वृद्धि सिनेमाज के बैनर तले किया है, जबकि ईशान सक्सेना ने आईवी एंटरटेनमेंट के बैनर तले को-प्रोड्यूस किया है। फिल्म को मैत्री मूवी मेकर्स और सुकुमार राइटिंग्स प्रेजेंट कर रहे हैं। फिल्म में राम चरण, जाह्नवी कपूर, शिव राजकुमार, दिव्येंदु और जगपति बाबू प्रमुख भूमिकाओं में हैं। ‘पेड्डी’ 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। राम चरण को आखिरी बार फिल्म ‘गेम चेंजर’ में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी।

पीएम मोदी ने पूछी थी फिल्म ‘पेड्डी’ की कहानी:राम चरण बोले थे- मूवी का कॉन्सेप्ट विकसित भारत जैसा है

पीएम मोदी ने पूछी थी फिल्म ‘पेड्डी’ की कहानी:राम चरण बोले थे- मूवी का कॉन्सेप्ट विकसित भारत जैसा है

पिछले साल पीएम नरेंद्र मोदी से एक्टर राम चरण और उनकी पत्नी उपासना कामिनेनी कोनिडेला की मुलाकात हुई थी। हाल ही में इस बातचीत से जुड़ा एक किस्सा राम चरण ने बताया। गुरुवार को राम चरण और जाह्नवी कपूर अपनी अपकमिंग फिल्म ‘पेड्डी’ के प्रमोशन के लिए दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान राम चरण ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई मुलाकात को याद किया। राम चरण ने बताया, “पिछली बार जब मैं दिल्ली में माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी से मिला था, तो उन्होंने मुझसे पूछा था कि ‘पेड्डी’ किस बारे में है। मैंने उन्हें बताया कि यह एक विकसित भारत और हमारे गांवों को सशक्त बनाने के बारे में है।” राम चरण ने कहा कि इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें पश्चिम बंगाल से जुड़ा एक किस्सा बताया था। एक्टर ने कहा कि मोदी जी ने कहा था कि दशकों पहले एक छोटे से गांव के एक फुटबॉलर ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था और आज उसी गांव के 85 से अधिक लोग फुटबॉल खेल रहे हैं। राम चरण ने कहा कि एक व्यक्ति भी बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने बताया कि फिल्म पेड्डी का मुख्य किरदार भी एक आदिवासी इलाके के छोटे से कस्बे से आता है और अपने समाज में बदलाव लाने का काम करता है। राम चरण ने पिछले साल PM मोदी से मुलाकात की थी पिछले साल राम चरण ने पत्नी उपासना के साथ नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने अनिल कामिनेनी के नेतृत्व में शुरू की गई तीरंदाजी प्रीमियर लीग (एपीएल) के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया था। मुलाकात के बाद राम चरण ने X अकाउंट पर तस्वीरें शेयर की थीं और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया था। राम चरण ने पोस्ट के कैप्शन में लिखा था, ‘प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। अनिल कामिनेनी गारू के नेतृत्व में विश्व की पहली तीरंदाजी प्रीमियर लीग की सफलता के लिए बधाई।’ उन्होंने आगे लिखा था, ‘तीरंदाजी की विरासत को संरक्षित करने और इसे वर्ल्ड लेवल पर बढ़ावा देने की दिशा में यह हमारा एक छोटा सा कदम है। सभी खिलाड़ियों को बधाई। हमें उम्मीद है कि और भी कई लोग इस अद्भुत खेल से जुड़ेंगे।’ मोदी ने इस पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा था, ‘आपसे मिलकर खुशी हुई, उपासना और अनिल कामिनेनी गारू। तीरंदाजी को लोकप्रिय बनाने के आपके सामूहिक प्रयास सराहनीय हैं और इससे अनगिनत युवाओं को लाभ होगा।’ फिल्म पेड्डी के बारे में जानिए पेड्डी एक स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म है, जो खेल के माध्यम से अपनी पहचान तलाशने वाले एक व्यक्ति की कहानी पर आधारित है। फिल्म को बुच्ची बाबू सना ने लिखा और डायरेक्ट किया है। इसका प्रोडक्शन वेंकट सतीश किलारू ने वृद्धि सिनेमाज के बैनर तले किया है। फिल्म को मैत्री मूवी मेकर्स और सुकुमार राइटिंग्स प्रेजेंट कर रहे हैं। 4 जून को रिलीज होगी फिल्म फिल्म में राम चरण, जाह्नवी कपूर, शिव राजकुमार, दिव्येंदु और जगपति बाबू प्रमुख भूमिकाओं में हैं। पेड्डी 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।