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‘गोविंदा बदलते हैं तो मैं माफ कर दूंगी’:एक्टर की पत्नी सुनीता आहूजा बोलीं- 40 साल का प्यार है, लेकिन अब दिल मजबूत है

‘गोविंदा बदलते हैं तो मैं माफ कर दूंगी’:एक्टर की पत्नी सुनीता आहूजा बोलीं- 40 साल का प्यार है, लेकिन अब दिल मजबूत है

गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा अक्सर अपनी शादीशुदा जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। कभी दोनों के तलाक की खबरें सामने आती हैं तो कभी इन्हें अफवाह बताया जाता है। अब हाल ही में सुनीता ने अपने नए व्लॉग में एक बार फिर गोविंदा के साथ अपने रिश्ते पर खुलकर बात की। इस बार उन्होंने उन्हें माफ करने को लेकर भी रिएक्शन दिया। जब सुनीता से पूछा गया कि क्या उनकी माफी की लिस्ट में गोविंदा का नाम है, तो उन्होंने जवाब दिया, कुछ कहा नहीं जा सकता। वह मेरे बचपन का प्यार हैं। अगर वह बदल जाते हैं और मेरे नियमों के मुताबिक जीवन जीते हैं तो मैं उन्हें माफ कर दूंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह खबरों में आने वाली हर बात पर ध्यान नहीं देना चाहतीं। यह वह उम्र नहीं है जब मैं इतना तनाव झेल सकूं। मैं मेनोपॉज से गुजर रही हूं। इस समय पति और बच्चों के सपोर्ट की जरूरत होती है, दबाव की नहीं। सुनीता ने आगे कहा कि गोविंदा अपनी मां से डरते थे, लेकिन उनके निधन के बाद वह ज्यादा बेफिक्र हो गए। अब वह किसी से नहीं डरते और जो चाहते हैं वही करते हैं। उनकी संगत भी अच्छी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि कई लोगों ने उनकी मासूमियत का फायदा उठाया। मैंने बहुत कुछ सहा है, लेकिन अब और नहीं। मैंने अपनी अलग पहचान बना ली है। 40 साल का रिश्ता रातोंरात नहीं टूटता, इसलिए मैं इमोशनल रहूंगी। लेकिन अब मेरा दिल मजबूत हो गया है। मैं हमेशा सच बोलती हूं। सुनीता ने महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए। जब मेरे ससुराल वाले आसपास होते थे तो मैं चुप रहती थी, क्योंकि मैं उनका सम्मान करती थी। लेकिन अब जब गोविंदा और मैं दोस्त हैं, तो मैं क्यों चुप रहूं या डर में जीऊं?।

Is Personal Space Demand a Crime? Expert Relationship Advice for Mother Wife

Is Personal Space Demand a Crime? Expert Relationship Advice for Mother Wife

Hindi News Lifestyle Is Personal Space Demand A Crime? Expert Relationship Advice For Mother Wife 2 दिन पहले कॉपी लिंक सवाल- मेरी शादी को 4 साल हो चुके हैं। 2 साल का बच्चा है। बीते कुछ दिनों से मेरे भीतर अजीब सा अलगाव पैदा हो रहा है। ऐसा लग रहा है, जैसे मैंने पिछले कुछ सालों में अपने लिए कुछ किया ही नहीं है। अब मुझे अकेले रहना ज्यादा अच्छा लगता है। जब मैं ये बात हसबैंड से शेयर करती हूं तो उन्हें लगता है कि मैं उनसे दूर जाना चाहती हूं। वो मुझे समझ ही नहीं पा रहे हैं। मुझे डर है कि कहीं हमारी केमिस्ट्री न खराब हो जाए। क्या रिश्ते में स्पेस मांगना गलत है? मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- मैं अपने जवाब की शुुरुआत एक फिल्म से करना चाहूंगी। एक जॉर्जियन फिल्म है, “माय हैप्पी फैमिली।” इसमें एक शादीशुदा, भरे–पूरे परिवार वाली महिला आपकी ही तरह पर्सनल स्पेस चाहती है। थोड़ा अकेले रहना, थोड़ा अपने साथ वक्त बिताना, थोड़ा खुद से बातें करना। सोचिए, हिंदुस्तान से लेकर जॉर्जिया तक औरतें ये करना चाहती हैं। लेकिन बहुत कम में यह हिम्मत होती है कि वो आपकी तरह सवाल लिखकर अपने दिल की बात कहें। आपका सवाल ही बता रहा है कि आप एक संजीदा इंसान हैं। आप खुद को जानने-समझने की यात्रा तय करना चाहती हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। भारतीय समाज की मुश्किलें मुश्किल ये है कि हमारे समाज ने खुद के बारे में सोचने को स्वार्थ से जोड़ दिया है। महिलाओं के लिए तो ये और भी मुश्किल है। अगर कोई महिला कहती है कि उसे अकेले रहना अच्छा लगता है या उसे थोड़ा स्पेस चाहिए तो उस पर तुरंत सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। क्या रिश्ता ठीक नहीं है? क्या शादी में प्यार कम हो गया है? क्या पति से दूर जाना चाहती हो? जबकि सच्चाई यह है कि खुद के लिए समय मांगना, खुद को समझना, खुद के साथ रहना, ये सब रिश्ता तोड़ने के लिए नहीं, उसे बचाने के लिए की गई कोशिशें हैं। शादी का मतलब ‘सेल्फ’ का मर जाना नहीं हमारे समाज और संस्कृति में शादी की बुनियादी परिभाषा ही गलत है। हमें लगता है कि शादी होने का मतलब है, अब महिला की अपनी कोई निजता नहीं रह गई है। उसकी पहचान ही यही है कि वो पत्नी है, मां है, बहू है। लेकिन वो एक इंसान नहीं है, जो आजादी और एजेंसी चाह सकती है। शादी और उसमें भी खासतौर पर छोटे बच्चों की जिम्मेदारी बहुत डिमांडिंग जॉब है। अमूमन औरतों को उतनी मदद नहीं मिलती, जिसकी उन्हें जरूरत है। इन और ऐसे ही तमाम कारणों से अक्सर शादी में दूरियां आ जाती हैं। खुद को जानना है जरूरी इस दुनिया में हर इंसान का अपना अस्तित्व होता है। यहां पर अस्तित्व यानी “मैं कौन हूं, मुझे क्या अच्छा लगता है, मुझे किस चीज से खुशी मिलती है।” यह जानना इसलिए जरूरी है, क्योंकि दुनिया का हर रिश्ता इसके बाद ही आता है। भले ही वह रिश्ता पति-पत्नी का हो, माता-पिता का हो या मां-बच्चे का। अगर कोई इंसान अंदर से खुश नहीं है, संतुष्ट नहीं है, तो वह रिश्तों में भी खुशी नहीं बांट सकता है। स्पेस मांगने में गिल्ट क्यों? अपने लिए स्पेस मांगते हुए बिल्कुल भी संकोच या गिल्ट नहीं फील करना चाहिए। यह अकेलेपन की मांग नहीं, खुद के लिए स्पेस की चाहत है। रिश्ते में स्पेस मांगने का मतलब यह नहीं है कि आप अपने पति से दूर जाना चाहती हैं। इसका मतलब यह है कि आप खुद के करीब आना चाहती हैं। यह फर्क समझना बहुत जरूरी है। पर्सनल स्पेस में इंसान अपने इमोशंस को बेहतर ढंग से प्रोसेस करना सीखता है। वह खुशी और दुख को पहचानकर उनसे डील करना सीखता है। नकारात्मकता और एंग्जाइटी से निपटना सीखता है। इसका सकारात्मक असर उसके सभी रिश्तों पर पड़ता है। पर्सनल स्पेस के फायदे ग्राफिक में देखिए- कंपैशन और जिम्मेदारी से कहें अपनी बात बहुत मुमकिन है कि जब आप अपने हसबैंड से ये बात शेयर करेंगी तो उन्हें लगे कि आप उनसे दूर जाना चाहती हैं। यह उनकी गलतफहमी हो सकती है, लेकिन उनकी अपनी भावनाएं भी जायज हैं। इसलिए ऐसे मामले में बातचीत बहुत सोच-समझकर करनी चाहिए। ऐसी बातें भावनाओं में बहकर नहीं, समझदारी और थोड़ी डिप्लोमेसी के साथ करनी चाहिए। डिप्लोमेसी का मतलब चालाकी से नहीं, बल्कि सही भाषा से है। हसबैंड से पूछें ये सवाल क्या आपने कभी खुद के लिए समय निकाला है? क्या आप दोस्तों के साथ बाहर जाते हैं? क्या आप क्रिकेट देखते हैं, अपने शौक पूरे करते हैं? क्या आप यह सब करते हुए खुद को कम पति या कम पिता (पति या पिता का कम दायित्वबोध) महसूस करते हैं? जब वह इन सवालों का जवाब देंगे तो उन्हें धीरे-धीरे समझ आएगा कि जैसे उन्हें अपने तरीके से रिचार्ज होने का हक है, वैसे ही आपको भी हक है। यह तुलना नहीं, जरूरी उदाहरण है। असली समस्या न भूलें बात करते हुए यह न भूलें कि असल समस्या क्या है। उन्हें यह समझाने की कोशिश करें कि अगर आप खुद को नहीं संभालेंगी तो आगे चलकर इसका असर रिश्ते पर पड़ सकता है। बताएं कि आपको इसी बात का डर है। यहां ये समझना भी जरूरी है कि जब आप स्पेस मांगेंगी तो सामने वाला इंसान असहज हो सकता है। कुछ लोग इसे समझते हैं, जबकि कुछ लोग इसे अपने इगो पर ले लेते हैं। यह भी संभव है कि आपके पति साइलेंट ट्रीटमेंट देने लगें, आपसे बात करना कम कर दें, इंटिमेसी से दूरी बनाने लगें। आपको यह जताने लगें कि जैसे उन्हें आपकी जरूरत ही नहीं है। मानसिक रूप से तैयार रहें पति के इस तरह के रिएक्शंस उनकी अपनी असुरक्षा के कारण हो सकते हैं। उन्हें यह डर हो सकता है कि उनका आप पर कोई कंट्रोल नहीं रहेगा। इसलिए जरूरी है कि आप मानसिक रूप से तैयार रहें कि शुरुआत में सब कुछ स्मूद नहीं होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि आप गलत हैं। यहां आपको इमोशनल नहीं, लॉजिकल रहना पड़ेगा। अगर वो आपसे कहें कि तुम ऐसा करोगी

love triangle bloody end : friendship illicit relationship | husband wife woh | delhi police mystery suspicion of extra marital affairs | पति, पत्नी और वो… दोस्ती या अवैध संबंध? जानें दिल्ली में दिल दहला देने वाली वारदात की इनसाइड स्टोरी

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नई दिल्ली. कहते हैं कि शक एक ऐसा जहर है जो हंसते-खेलते परिवार को नरक बना देता है. दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में एक ऐसी घटना घटी है, जो सोचने को मजबूर कर दिया है कि क्या किसी महिला को मदद करना भी गुनाह है? क्या शादी के बाद अगर कोई महिला किसी मर्द के साथ दोस्ती करता है तो उसे अवैध रिश्ता ही माना जाएगा? दिल्ली में एक ऐसी घटना घटी है, जो सोचने को मजबूर कर रहा है कि शादीशुदा महिला किसी गैरमर्द के साथ एक कमरे में दोस्त बनकर क्या रह सकता है? क्या गोकुलपुरी में हुई दिल दहला देने वाली घटना के बाद दिल्ली पुलिस की जांच महिला के अवैध संबंध के एंगल पर भी होगी? पढ़ें दिल्ली में पति, पत्नी और वो की एक ऐसी कहानी, जिसका क्लाइमेक्स धीरे-धीरे बाहर आने लगा है और जिसका अंत रोंगटे खड़े कर देने वाला था. पति ने पत्नी के दोस्त की हत्या कर दी है. हत्या के बाद पत्नी ने दिल्ली पुलिस को बयान दिया है कि उसके पति ने एक ऐसे शख्स की बेरहमी से हत्या कर दी, जो उसके बुरे वक्त में बच्चों के लिए फरिश्ता बनकर आया था. कहानी की शुरुआत होती है करीब 10 महीने पहले. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया की रहने वाली 35 वर्षीय महिला का पति गौरी शंकर यादव गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती था. घर में खाने के लाले पड़े थे और बच्चों का भविष्य अंधकार में था. उस वक्त रवि नाम का युवक महिला के जीवन में सहारा बनकर आया. कहानी पति, पत्नी और वो की महिला के मुताबिक रवि ने न केवल महिला की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कीं, बल्कि उसे आत्मनिर्भर भी बनाया. रवि की मदद से ही महिला ने गोकुलपुरी में एक फूड स्टॉल शुरू किया, ताकि वह अपने बच्चों को पाल सके. जब महिला के सामने रहने का संकट आया तो रवि ने ही उसे एक कमरा किराए पर दिलाया और उसकी ढाल बनकर साथ खड़ा रहा. पति के लौटने के बाद क्या हुआ? लेकिन 6 फरवरी को गौरी शंकर यादव सूरत से दिल्ली वापस लौटा तो उसे अचानक दोनों के संबंध को लेकर शक होने लगा. एक ही घर में रवि की मौजूदगी उसे खटकने लगी. गौरी शंकर को लगने लगा कि उसकी पत्नी और रवि के बीच अवैध संबंध हैं. उसे यह अहसान नहीं दिखा कि उसकी गैरमौजूदगी में रवि ने ही उसके परिवार को बिखरने से बचाया था. 7 फरवरी की रात को रवि को लेकर पति-पत्नी के बीच जमकर झगड़ा हुआ. विवाद इतना बढ़ गया कि डरी हुई पत्नी ने मामला शांत करने के लिए रवि को छत पर सोने के लिए भेज दिया. उसे लगा कि सुबह तक गुस्सा ठंडा हो जाएगा, लेकिन उसे क्या पता था कि रवि के लिए वह रात आखिरी साबित होगी. अगली सुबह का वो खौफनाक मंजर अगली सुबह जब महिला ऊपर पहुंची, तो उसकी चीख निकल गई. रवि खून से लथपथ पड़ा था. पास ही लकड़ी की एक मोटी छड़ी पड़ी थी, जो रवि के सिर पर वार करने की वजह से दो टुकड़ों में टूट चुकी थी. चारों तरफ खून ही खून था. रवि को तुरंत जीटीबी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी गौरी शंकर यादव को हिरासत में ले लिया. कड़ी पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि वह शक की आग में इतना अंधा हो गया था कि उसने गुस्से में रवि के सिर पर डंडे से कई वार किए. पुलिस ने महिला का बयान दर्ज किया है, जिसमें उसने रवि के ‘एहसानों’ और पति के ‘क्रूर’ व्यवहार की पूरी कहानी सुनाई है.