Sunday, 17 May 2026 | 09:39 AM

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Partner Facebook Flirt; Relationship Insecurity Signs

Partner Facebook Flirt; Relationship Insecurity Signs

Hindi News Lifestyle Partner Facebook Flirt; Relationship Insecurity Signs | Do’s & Dont’s Boundaries 2 घंटे पहले कॉपी लिंक सवाल– मैं जयपुर से हूं। मेरी उम्र 28 साल है और मैं सेरामिक आर्टिस्ट हूं। मेरा पार्टनर भी आर्टिस्ट है। वह सोशल मीडिया पर लड़कियों के साथ बहुत फ्लर्ट करता है। जैसे उनकी हर पोस्ट पर हार्ट इमोजी बनाना, कमेंट करना, देर रात फेसबुक पर ऑनलाइन रहना और चैटिंग करना। मैं पूछूं कि किससे बात कर रहे हो तो नाराज हो जाता है। कहता है, मैं इनसिक्योर हूं। वो उल्टे मुझे ही गिल्ट महसूस करवाने लगता है। क्या दूसरी लड़कियों के साथ फ्लर्ट और चैटिंग भी एक तरह की चीटिंग नहीं है। मैं बहुत अनकंफर्टेबल महसूस कर रही हूं। क्या करूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आपका तनाव महसूस करना और सवाल पूछना, दोनों वाजिब है। यहां मैं मनोविज्ञान के नजरिए से आपके सवाल का जवाब देने की कोशिश करूंगी। डिजिटल एज में रिलेशनशिप इंटरनेट और सोशल मीडिया से पहले के दौर में ‘चीटिंग’ की परिभाषा अलग थी। तब धोखे का एक ही मतलब था- किसी तीसरे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध। लेकिन आज की तारीख में जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल पर गुजर रहा है। हमारी बहुत सारी बातचीत, जुड़ाव, प्रेम और आकर्षण दरअसल हमारी डिजिटल स्क्रीन पर ही हो रहे हैं। तो जाहिर है, ये सवाल मन में आता है कि क्या फेसबुक पर किसी की पोस्ट पर रोज हार्ट इमोजी बनाना या रोज कमेंट करना सिर्फ फ्लर्टिंग है या ये भी चीटिंग है। आइए समझते हैं- फिजिकल चीटिंग से ज्यादा तकलीफदेह ‘इमोशनल चीटिंग’ जैसाकि ऊपर ग्राफिक के पॉइंट्स से जाहिर है कि सिर्फ लाइक और कमेंट करना तो नॉर्मल सोशल बिहेवियर है। लेकिन ये माइक्रो और इमोशनल चीटिंग में भी बदल सकता है। लेकिन सिर्फ तब जब आपका पार्टनर– अपने रिश्ते को इग्नोर करके दूसरे को ज्यादा वक्त और तवज्जो दे। जब वो किसी तीसरे से अपनी बेहद पर्सनल बातें शेयर करने लगे। जब आपका पार्टनर किसी और से इस हद तक जुड़ जाए कि वो आपके हिस्से का प्यार, लगाव, खुशी और वक्त किसी और को देने लगे। जरूरी नहीं कि उस रिश्ते में फिजिकल इंटिमेसी भी हो। बस होता ये है कि जो आपका था, वो अब किसी और को मिल रहा है। यह एक तरह का इमोशनल डिसप्लेसमेंट है। इमोशनल चीटिंग कई बार फिजिकल चीटिंग से भी ज्यादा तकलीफदेह हो सकती है। लोग फ्लर्ट क्यों करते हैं? फ्लर्टिंग अपने आप में गलत नहीं है और न ही ये हमेशा गलत होती है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि कई साइंस स्टडीज दरअसल फ्लर्टिंग को एक हेल्दी साइन के रूप में देखती हैं। फ्लर्टिंग लोगों के सोशल स्किल और उनकी पर्सनैलिटी का हिस्सा भी हो सकती है। वे बातचीत में थोड़ी तारीफ या थोड़े मजाक का सहारा लेते हैं, थोड़ा टीज या फ्लैटर करते हैं। इन सबमें कोई समस्या नहीं है। ऐसा करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। ये बोरडम से लेकर सेल्फ एस्टीम से जुड़ा मसला भी हो सकता है। सारे एंगल नीचे ग्राफिक में देखें– फ्लर्टिंग कब रेड फ्लैग है? फ्लर्टिंग समस्या तब होती है, जब फ्लर्ट करना व्यक्ति का सहज स्वभाव न हो। वह सभी के साथ इस तरह पेश न आता हो, बल्कि उसका ये व्यवहार किसी खास व्यक्ति पर ही केंद्रित हो। इतना ही नहीं, वो इन बातों को छिपाने लगे, पूछने पर नाराज हो जाए। नीचे ग्राफिक में वो सारे संकेत देखिए, जब फ्लर्टिंग रेड फ्लैग हो सकती है। इरादे और उसका प्रभाव मनोविज्ञान में दो चीजें होती हैं– एक है इरादा और दूसरा है उसका असर। हो सकता है कि इरादा नेक हो, लेकिन उसका असर बुरा पड़े। जैसेकि आपके केस में पार्टनर कह सकता है– ये कोई सीरियस बात नहीं है। मैं तो बस मजाक कर रहा था। मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। लेकिन पॉइंट ये है कि इरादा जो भी हो, उसका प्रभाव क्या हुआ है । उसका प्रभाव ये है कि आप– पीड़ा महसूस कर रही हैं। असुरक्षा महसूस कर रही हैं। तनाव महसूस कर रही हैं। रिश्ते में अकेलापन महसूस कर रही हैं। अब आपको क्या करना चाहिए? आपकी फीलिंग्स को टालना, उन्हें इग्नोर करना या झुठलाना ठीक नहीं है। सबसे पहले आपको अपनी फीलिंग्स को एड्रेस करना है। इसके लिए आपको ये कदम उठाने चाहिए– पार्टनर से खुलकर इस बारे में बात करनी चाहिए। उन्हें ब्लेम नहीं करना चाहिए, सिर्फ अपनी फीलिंग्स जाहिर करनी चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि उनके व्यवहार की वजह से आप पीड़ा, असुरक्षा महसूस करती हैं। उनसे आग्रह करना चाहिए कि इस मुद्दे को तत्काल एड्रेस करना जरूरी है। आप सजेस्ट कर सकती हैं कि जरूरत हो तो हम कपल काउंसलिंग के लिए भी जा सकते हैं। हेल्दी रिलेशन के 6 जरूरी कदम आपको सेल्फ केयर के ऊपर लिखे कदम उठाने चाहिए। इसके अलावा नीचे ग्राफिक में छह बातें लिखी हैं, जो किसी भी हेल्दी रिलेशनशिप की बुनियाद हैं। हर रिश्ते में डूज और डोंट्स की सीमा तय करने से लेकर सेल्फ रिस्पेक्ट को प्रिऑरिटी पर रखना जरूरी है। अंतिम बात मुझे पूरी उम्मीद है कि बातचीत, प्यार और संवेदना से यह समस्या सुलझ सकती है। लेकिन अगर ऐसी स्थितियां पैदा हों कि आपका पार्टनर– आपकी बात सुनने से इनकार करे। आपकी फीलिंग्स को पूरी तरह इग्नोर करे। कहे कि “तुम बात का बतंगड़ बना रही हो।” उल्टे आपको ही दोष देने लगे। आपके दुख से पूरी तरह डिटैच्ड, अप्रभावित रहे। तो ऐसी स्थितियों में आपको अपने मेंटल-इमोशनल वेलबीइंग को प्रिऑरिटी देनी चाहिए। सबसे पहले अपनी मेंटल–फिजिकल हेल्थ को डैमेज होने से बचाना चाहिए। काउंसलर से मिलकर बात करनी चाहिए। सबसे पहले अपना आत्मसम्मान और अपनी खुशी चुननी चाहिए। ……………………. रिलेशनशिप एडवाइज से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए रिलेशनशिप एडवाइज- हसबैंड प्रमोशन लेकर दूसरे शहर चले गए: जॉब, घर, बच्चा अकेले संभाल रही हूं, अकेली और फ्रस्ट्रेट हूं, क्या करूं? आप एक मजबूत महिला हैं, जो घर, जॉब और बच्ची की जिम्मेदारी एक साथ संभाल रही हैं। अगर पति दूसरे शहर चले गए हैं और आपको उनका साथ नहीं मिल पा रहा है तो फ्रस्ट्रेशन होना नॉर्मल है। आइए आपकी सिचुएशन को समझते हैं और साथ मिलकर कोई रास्ता

पत्नी बोली- 21 साल बड़ा पति, साथ नहीं रहूंगी:बॉयफ्रेंड के साथ रहने की जताई इच्छा; हाईकोर्ट ने दी परमिशन, शॉर्या दीदी भी नियुक्त की

पत्नी बोली- 21 साल बड़ा पति, साथ नहीं रहूंगी:बॉयफ्रेंड के साथ रहने की जताई इच्छा; हाईकोर्ट ने दी परमिशन, शॉर्या दीदी भी नियुक्त की

ग्वालियर हाईकोर्ट में एक अनोखा मामला सामने आया है। कोर्ट में 19 साल की युवती ने अपने से 21 साल बड़े पति के साथ वैवाहिक जीवन में सामंजस्य नहीं बन पाने की बात कहते हुए बॉयफ्रेंड के साथ रहने की इच्छा जताई। युवती की इच्छा पर कोर्ट ने उसे अपने प्रेमी के साथ जाने की अनुमति दी। साथ ही 6 महीने की निगरानी के लिए ‘शौर्या दीदी’ की नियुक्ति भी की गई। मामला हैबियस कॉर्पस से जुड़ी याचिका का है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने यह फैसला सुनाया। पति ने लगाई थी याचिका युवती के पति अवधेश की ओर से यह याचिका अधिवक्ता सुरेश पाल सिंह गुर्जर ने दायर की थी। आरोप था कि उसकी पत्नी को अनुज कुमार ने अवैध रूप से अपने पास रखा है। युवती को पुलिस ने वन स्टॉप सेंटर में रखा था। सुनवाई के दौरान शुक्रवार को युवती को वन स्टॉप सेंटर से सब-इंस्पेक्टर जितेंद्र सिंह सिकरवार, हेड कांस्टेबल अखिलेश सेंथिया और लेडी कांस्टेबल भावना द्वारा कोर्ट में पेश किया गया। युवती के माता-पिता, पति अवधेश और प्रेमी अनुज भी कोर्ट में मौजूद रहे। सभी की मौजूदगी में मामले की सुनवाई की गई और न्यायाधीश ने युवती की इच्छा को प्राथमिकता देते हुए फैसला सुनाया। युवती बोली- मेरी उम्र 19 साल, पति 21 साल बड़ा सुनवाई के दौरान कोर्ट ने युवती से उसकी इच्छा पूछी। युवती ने साफ कहा कि वह बालिग है, किसी अवैध बंधन में नहीं है और अपनी मर्जी से रह रही है। उसने पति और अपने माता-पिता, दोनों के साथ रहने से इनकार कर दिया। युवती ने बताया कि उसकी उम्र 19 साल है, जबकि पति की उम्र 40 साल है। इस 21 साल के अंतर के कारण वैवाहिक जीवन में सामंजस्य नहीं बन पाया और उसके साथ दुर्व्यवहार भी हुआ। कोर्ट के निर्देश पर शासकीय अधिवक्ता अंजलि ज्ञानानी ने युवती की काउंसलिंग की, लेकिन काउंसलिंग के बाद भी उसने अपने बॉयफ्रेंड अनुज के साथ रहने की इच्छा दोहराई। अनुज ने भी कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह युवती की पूरी देखभाल करेगा और किसी तरह की प्रताड़ना नहीं देगा। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि याचिका का उद्देश्य समाप्त हो चुका है। बॉयफ्रेंड के साथ जाने की अनुमति कोर्ट ने युवती को अनुज के साथ जाने की अनुमति देते हुए अंजलि ज्ञानानी और लेडी कांस्टेबल भावना को अगले 6 महीने के लिए ‘शौर्या दीदी’ नियुक्त किया, जो युवती के संपर्क में रहकर उसकी सुरक्षा, भलाई और मार्गदर्शन सुनिश्चित करेंगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि युवती को वन स्टॉप सेंटर, कंपू (ग्वालियर) से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मुक्त किया जाए। इसी के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया गया।

Mumbai Office Colleague Love Relationship Advice

Mumbai Office Colleague Love Relationship Advice

4 घंटे पहले कॉपी लिंक सवाल: मैं एक 31 साल की वर्किंग प्रोफेशनल हूं और मुंबई में रहती हूं। मुझे अपने एक कुलीग से प्यार हो गया है। रिश्ते की शुरुआत से ही हमने तय किया कि ऑफिस में रिश्ते को रिवील नहीं करेंगे, लेकिन लोगों को पता चल गया। अब ऑफिस में कुछ लोग हमें अलग नजर से देखते हैं, जिससे हम दोनों ही कॉन्शियस रहने लगे हैं। हमें ऑफिस में मामूली सी बात के लिए भी सोचना पड़ता है। इसका असर हमारे रिश्ते पर भी पड़ रहा है। कभी ऑफिस की बात घर तक आ जाए तो तनाव भी हो जाता है। हमें इस सिचुएशन को कैसे हैंडल करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब: आपको बहुत मुबारक कि आप प्यार में हैं। प्यार एक बेहद खूबसूरत एहसास है और जैसाकि गालिब फरमा गए हैं– इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।। प्यार तो ऐसा ही होता है। कभी भी और कहीं भी हो सकता है। जैसाकि आपने बताया कि आप दोनों ने शुरू से ही काम और निजी जीवन को अलग रखने की कोशिश की, लेकिन फिर भी लोग गॉसिप कर रहे हैं। यूं तो गॉसिप सिर्फ गप्प ही होती है, लेकिन जब होने लगे तो अच्छे-भले समझदार लोग भी दबाव में आ जाते हैं। आप जो महसूस कर रही हैं, वह बहुत स्वाभाविक है। चलिए आपकी सिचुएशन को समझने और उसके लिए कुछ प्रैक्टिकल सॉल्यूशन निकालने पर बात करते हैं। ऑफिस के लोग गॉसिप क्यों करते हैं? दरअसल, हमारा समाज प्रेम और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर अमूमन असहज ही रहता है। जब भी दो लोग अपनी मर्जी और पसंद से करीब आते हैं, तो आसपास के लोग उसे ‘मसालेदार खबर’ की तरह देखने लगते हैं। गॉसिप सिर्फ ऑफिस में नहीं होती। वो हर जगह होती है। मोहल्ले की आंटियां भी गॉसिप करती हैं, चौराहे पर बैठे अंकल भी करते हैं, रिश्तेदार भी करते हैं और सच मानिए, कई बार घरवाले भी गॉसिप करते हैं। जब भी कुछ ऐसा होता है, जो समाज के नियम–कायदों को तोड़ता है तो लोग गॉसिप करते ही हैं। इसलिए इसे ज्यादा दिल पर नहीं लेना चाहिए। आपकी भावनाएं सही हैं आप अपनी जगह पर सही हैं। ये समस्या समाज की है। समाज की असहजता के कारण ही आपका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। आपको यह समझना होगा कि ये रिश्ता असामान्य नहीं है। हम अक्सर वहीं अपना जीवनसाथी तलाशते हैं, जहां हम सबसे ज्यादा समय बिताते हैं, फिर चाहे वह कॉलेज हो या ऑफिस। समस्या आपके रिश्ते में नहीं, बल्कि उन लोगों के परसेप्शन और ‘थिंकिंग पैटर्न’ में है, जो अपना काम छोड़कर दूसरों की निजी जिंदगी पर कमेंट करते हैं। लेकिन न चाहते हुए भी ये स्थितियां हमारी मेंटल हेल्थ को प्रभावित करती हैं। इसके कारण मन पर इस तरह के मनोवैज्ञानिक असर पड़ सकते हैं- ऑफिस के डूज और डोंट्स जब आप इन मनोवैज्ञानिक दबावों को पहचान लेते हैं, तो अगला कदम ‘एक्शन’ का है। गॉसिप को रोकना आपके हाथ में नहीं है, लेकिन आप अपने व्यवहार से उसे ईंधन (फ्यूल) देना बंद कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप पार्टनर के साथ बैठकर ऑफिस ऑवर्स के लिए कुछ बुनियादी नियम यानी ‘डूज और डोंट्स’ तय करें। प्रोफेशनल एथिक्स को बनाएं अपनी ढाल आपस में नियम तय करके उन्हें ऑफिस में सख्ती से लागू करें। वर्कप्लेस पर प्रोफेशनल इमेज बनाए रखना ही आपके करियर को सुरक्षित रखने का एकमात्र तरीका है। कोशिश करें कि वर्किंग ऑवर्स में आप दोनों के बीच सिर्फ प्रोफेशनल बातचीत ही हो। जब लोग यह देखेंगे कि आपके रिश्ते से काम के आउटपुट पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, तो धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी खत्म होने लगेगी। याद रखें, अनावश्यक आई-कॉन्टैक्ट या साथ में लंबे ब्रेक गॉसिप को बढ़ावा देते हैं। बाकी आपको ऑफिस में क्या–क्या नहीं करना चाहिए, उसकी डिटेल गाइड के लिए नीचे ग्राफिक देखें। ऑफिस में घर नहीं, घर में ऑफिस नहीं ऑफिस स्पेस में प्रोफेशनल बाउंड्रीज तय करने के बाद दूसरा सबसे जरूरी कदम है, घर के पर्सनल स्पेस में ऑफिस को न घुसने देना। अक्सर ऑफिस का तनाव घर तक आ जाता है, जिससे पार्टनर्स के बीच झगड़े शुरू हो जाते हैं। आपको यह समझना होगा कि ऑफिस में ‘को-वर्कर’ की तरह व्यवहार करना आपकी मजबूरी हो सकती है, लेकिन ऑफिस के बाहर आप दो इंडिपेंडेंट एडल्ट्स हैं। घर लौटते ही काम और गॉसिप की चर्चा बंद करें और एक-दूसरे को वह क्वालिटी समय और प्यार दें, जो किसी भी अच्छे और हेल्दी रिश्ते के लिए जरूरी है। मैच्योर रिश्तों पर गॉसिप का असर नहीं होता मैच्योर और समझदार रिश्तों की बुनियाद इतनी मजबूत होती है कि वे गॉसिप से नहीं डिगते। अगर लोगों की बातें आपको तनाव दे रही हैं, तो कुछ बातें ध्यान रखें– ये एक चुनौती है। रिश्ते में आगे ऐसी चुनौतियां और भी आएंगी। अगर रिश्ता इससे प्रभावित हो रहा है तो इसका मतलब कि वो फ्रेजाइल है। उसे मजबूत बनाने पर काम करें। इस चुनौती को एक-दूसरे के करीब आने के अवसर के रूप में देखें। जो भी बात परेशान करे, उसे दिल में न रखें। उसे लॉजिकली एड्रेस करें, उस पर बात करें। एक-दूसरे का पक्ष ध्यान से सुनें, दूसरे के नजरिए को इग्नोर न करें। आपकी कोशिश दुनिया को जवाब देने की नहीं, बल्कि अपने रिश्ते को मजबूत बनाने की होनी चाहिए। जरूरी लगे तो काउंसिलर की मदद भी ले सकते हैं। आखिरी बात आप दोनों को शायद पता नहीं कि आप अभी अपने जीवन के सबसे खूबसूरत दौर से गुजर रहे हैं। इसके हरेक क्षण को एंजॉय करें और खूब खुश रहें। ऑफिस में जमकर काम करें और ऑफिस के बाहर जमकर जिंदगी जिएं। आपको पता है कि ऑफिस में प्यार होना कोई अपराध नहीं है। आपने कुछ भी ऐसा नहीं किया, जिसके लिए आपको शर्मिंदा होना पड़े। बस प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच एक मजबूत ‘बाउंड्री’ बनाए रखिए। ये सिर्फ एक फेज है। ये गुजर जाएगा। कुछ दिन बाद ऑफिस के लोगों को नया गॉसिप मिल जाएगा और वो उसमें बिजी हो जाएंगे। आप सिर्फ अपने रिलेशनशिप पर काम करिए। ……………… ये खबर भी

Shatrughan Sinha: Sonakshi & Zaheer Made for Each Other

Shatrughan Sinha: Sonakshi & Zaheer Made for Each Other

2 दिन पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी बेटी सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल के रिश्ते का समर्थन किया है। उन्होंने हाल ही में न्यूज 18 को दिए एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि सोनाक्षी और जहीर एक-दूसरे के लिए ही बने हैं। शत्रुघ्न ने इस शादी को पूरी तरह सही बताया और कहा कि उनके लिए परिवार की खुशी सबसे बढ़कर है। शत्रुघ्न ने कहा, “हम बहुत खुश हैं। सोनाक्षी की जो शादी हुई है, उसे देखकर लगता है मानो दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने हैं।” उन्होंने साफ किया कि सोनाक्षी और जहीर दोनों ही एडल्ट और समझदार हैं और वे अपने फैसले खुद ले सकते हैं। शत्रुघ्न ने आगे कहा, “अगर बच्चे खुश हैं, तो मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा काजी। हमें उनका साथ देना चाहिए। मैं पूरे दिल से और एक चट्टान की तरह उनके साथ खड़ा हूं।” सलमान खान की पार्टी में हुई थी पहली मुलाकात सोनाक्षी और जहीर की लव स्टोरी करीब 10 साल पुरानी है। दोनों की पहली मुलाकात साल 2016 में सलमान खान की एक पार्टी में हुई थी। यहीं से उनकी दोस्ती शुरू हुई, जो समय के साथ और मजबूत होती गई। साल 2017 से दोनों ने एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया। फिल्म ‘डबल एक्सएल’ में साथ किया काम साल 2022 में दोनों का रिश्ता तब और चर्चा में आया, जब उन्होंने फिल्म ‘डबल एक्सएल’ में साथ काम किया। पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। करीब 7 साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद साल 2024 में उन्होंने शादी करने का फैसला किया। सोनाक्षी अक्सर सोशल मीडिया पर जहीर के साथ अपनी तस्वीरें शेयर करती रहती हैं। स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत की थी शादी बता दें कि सोनाक्षी और जहीर ने साल 2024 में ‘स्पेशल मैरिज एक्ट’ के तहत शादी की थी। यह कानून अलग-अलग धर्मों के लोगों को बिना धर्म बदले शादी करने की अनुमति देता है। चूंकि यह एक अंतरधार्मिक विवाह था, इसलिए सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी चर्चा और बहस हुई थी। उस वक्त भी शत्रुघ्न सिन्हा अपनी बेटी के फैसले के साथ मजबूती से खड़े नजर आए थे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Saas Bahu Conflict Advice; Husband Support Relationship Tips

Saas Bahu Conflict Advice; Husband Support Relationship Tips

41 मिनट पहले कॉपी लिंक सवाल- मेरी शादी को 2 साल हो चुके हैं। मेरे हसबैंड के पेरेंट्स भी हमारे साथ रहते हैं। यहां बाकी सब तो ठीक है, लेकिन मेरी सास मुझे सख्त नापसंद हैं। वो हर चीज के लिए टोकती हैं। चाहती हैं कि मैं हर काम उनकी मर्जी से, उनसे पूछकर करूं। यहां तक कि उन्हें इस बात से भी समस्या है कि मैं कब-किससे बात करती हूं। ये बातें मेरे हसबैंड को भी पता हैं। अकेले में वो मुझे सपोर्ट करते हैं, लेकिन अपनी मां के सामने चुप रहते हैं। कहते हैं, “मैं मां को नहीं समझा सकता, लेकिन तुम्हें समझा सकता हूं।” मैं समझते-समझते थक गई हूं। क्या करूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- अपनी समस्या को इतने साफ शब्दों में लिखने के लिए शुक्रिया। आपने जो समस्या बताई है, ये अक्सर जॉइंट फैमिली में देखने को मिलती है। यह कोई आदर्श स्थिति नहीं है। बहुत ज्यादा रोक–टोक हो तो परेशानी जायज है। लेकिन पता है, जीवन की और इंसान की सबसे अच्छी बात क्या है। वो ये कि हममें खुद को बदलने की असीमित क्षमता है। आइए आपकी स्थिति को बेहतर बनाने के तरीकों पर बात करते हैं। आपकी फीलिंग्स पूरी तरह वैलिड हैं आप जो महसूस कर रही हैं, वो बिल्कुल सही है। अगर सास हर बात पर टोकती हैं तो इससे आपकी प्राइवेसी और आजादी का दायरा कम हो सकता है। हमारे समाज में सास-बहू के बीच ऐसे कॉन्फ्लिक्ट बहुत कॉमन हैं। सास कंट्रोल करने की कोशिश क्यों करती हैं? सास अकसर बहुओं को कंट्रोल करने की कोशिश इसलिए करती हैं क्योंकि वो सिर्फ बहुओं को ही कंट्रोल कर सकती हैं। अब तक उनकी जिंदगी में जितने भी और रिश्ते थे, उन सब में उनकी स्थिति मातहत की थी। वो अपनी सास को, पति को, बेटे को किसी को कंट्रोल नहीं कर सकती थीं। बहू के रूप में उन्हें जीवन में पहला ऐसा रिश्ता मिला है, जिसके ऊपर उनका पावर है। अपनी सत्ता छिनने का डर इस तरह की स्थितियां अक्सर इनसिक्योरिटी से पैदा होती हैं। अभी सास के हाथ में घर की पावर है। यह सत्ता एक लंबे संघर्ष के बाद उनके पास आई है। इससे पहले ये पावर उनकी सास के हाथ में रही होगी। अब आपके आने से उनके मन में एक अनजाना डर हो सकता है। शायद उन्हें महसूस हो रहा हो कि बहू के आने से घर में उनका हक या उनकी अहमियत कहीं कम न हो जाए। यह भी हो सकता है कि वह जताना चाहती हों कि “इस घर में आज भी मेरी चलती है।” इसलिए वह बार-बार टोककर अपनी जगह सुरक्षित रखने का प्रयास करती हैं। बार-बार टोकने से बढ़ता स्ट्रेस बार-बार टोका-टाकी से किसी भी व्यक्ति के मन पर गहरा असर पड़ता है। इससे तनाव बढ़ सकता है और भावनात्मक संतुलन बिगड़ सकता है। इसके कई साइकोलॉजिकल इफेक्ट हो सकते हैं, सभी ग्राफिक में देखिए- हसबैंड को कैसे समझाएं? आपके हसबैंड अकेले में ही सही, पर आपको सपोर्ट करते हैं। आपने बताया कि वह अपनी मां के सामने चुप रहते हैं। उन्हें बताएं कि ये आपको हर्ट करता है। आप अपने हसबैंड से ये बातें कह सकती हैं- “मैं समझती हूं कि आप मां से प्यार करते हो, लेकिन मुझे भी आपका सपोर्ट चाहिए। मैं खुद को अकेला महसूस करती हूं।” “मां का सम्मान करना अच्छी बात है, लेकिन क्या सम्मान का मतलब हर सही–गलत बात को चुपचाप सिर्फ बर्दाश्त करना होता है?” “क्या आप मां से प्यार से बात नहीं कर सकते। क्या उन्हें प्यार से यह समझाया नहीं जा सकता कि मैं भी तो इस घर की बेटी हूं। मुझे भी थोड़ी आजादी, थोड़ा स्पेस चाहिए।” मेरा बोलना उन्हें बुरा लग सकता है, लेकिन आपकी बात वो सुनेंगी और अमल भी करेंगी। आपको किस बात का डर है कि मां सोचेंगी कि “आप जोरू के गुलाम हो गए हैं।’’ लेकिन आप रोज अपने व्यवहार, अपनी बातों से यह दिखा सकते हैं कि आप अभी भी उन्हें उतना ही प्यार करते हैं। ऊपर मैंने जितने भी उदाहरण पेश किए हैं, उन सबका सार और उनका मकसद एक ही है। अगर प्यार से, संतुलन से और सम्मान से बात की जाए तो दुनिया की कोई ऐसी समस्या नहीं है, जो सुलझ न सके। बिना नाराज हुए, बिना दुखी हुए, बिना आवाज ऊंची किए सिर्फ एक बार अपनी भावनाओं को व्यक्त करके देखिए। अपना पक्ष एक बार तार्किक ढंग से उनके सामने रखकर देखिए। प्यार और कंपैशन से बदल सकते हैं रिश्ते हम ये नहीं कह रहे कि प्यार से पूरी दुनिया बदल जाएगी, लेकिन ये दवा की तरह काम करता है। सास को प्यार दिखाएं। उन्हें महसूस करवाएं कि आप उनकी टीम में ही हैं। इसके लिए छोटी-छोटी चीजें ट्राई करें। जैसे- साथ घूमने जाएं, शॉपिंग करें, टीवी देखें। ह्यूमर से डील करें सिचुएशन आपने सोशल मीडिया पर वो मीम जरूर देखा होगा। एक बहू काम कर रही होती है और सास आकर पूछती है- “तू काम क्यों कर रही है? क्या ये तेरे बाप का घर है?” बहू कहती है, “नहीं।” फिर सास पूछती है, “क्या ये मेरे बाप का घर है?” बहू कहती है, “नहीं।” फिर सास अपने बेटे की तरफ देखती है और कहती है, “ये इसके बाप का घर है। जिसका घर है, वही काम करेगा।” ये ह्यूमर है, लेकिन इसमें सीख ये है कि घर सबका है। सास को ये महसूस करवाएं कि बहू भी फैमिली का हिस्सा है। ह्यूमर से बात कहें, नाराजगी से नहीं। साइकोलॉजिकल हेल्प कब लें? अगर ये तरीके काम न करें तो प्रोफेशनल हेल्प लें। इसके लिए फैमिली थेरेपी ली जा सकती है। इससे आपको प्रोफेशनल टूल्स मिलेंगे, जिससे सिचुएशन को हैंडल करने में मदद मिलेगी। इस दौरान खुद का ख्याल रखें इस बीच खुद को न भूलें। सेल्फ-केयर जरूरी है। जर्नल लिखें, वॉक करें। अपनी हॉबी फॉलो करें। याद रखें, आप अकेली नहीं हैं। लाखों बहुएं ये फेस करती हैं, लेकिन आप मजबूत हैं। दोस्तों से बात करें। जर्नलिंग करें। वॉक और योग करें। हॉबीज ट्राई करें। काउंसलिंग लें। खुद को दोष न दें। एक सच्ची गल्पकथा आखिरी बात से पहले मैं एक कहानी सुनाना चाहती हूं। एक

Open Relationship Marriage Stress; Psychiatrist Advice

Open Relationship Marriage Stress; Psychiatrist Advice

Hindi News Lifestyle Open Relationship Marriage Stress; Psychiatrist Advice | Consent Power Balance 17 घंटे पहले कॉपी लिंक सवाल– मेरी उम्र 35 साल है। मैं बेंगलुरू में रहती हूं। मेरी शादी को तीन साल हो चुके हैं और पिछले दो साल से हम ओपन रिलेशनशिप में हैं। हमारी लव मैरिज थी, लेकिन हसबैंड इस बात को लेकर हमेशा ओपन थे कि उसे मेरे अलावा दूसरी महिलाएं भी अच्छी लग सकती हैं। पहले ये बात मुझे मजाक लगती थी, लेकिन फिर एक दिन उसने शादी को ओपन रिलेशनशिप की तरह ट्रीट करने की डिमांड कर दी। उसकी पर्सनैलिटी और चार्म ही ऐसा है कि वो हमेशा अपनी बातों से कन्विंस कर लेता है। मैं राजी तो हो गई, लेकिन वो सब कभी कर नहीं पाई, जो वो कर रहा है। ये उसका ही एकतरफा डिसिजन था, जो मुझ पर थोप दिया गया। अब मैं एक अजीब सी घुटन महसूस करती हूं। हमेशा स्ट्रेस में रहती हूं। मैं क्या करूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। भारत में अधिकांश विवाह कमिटेड मोनोगैमी (एकनिष्ठ संबंध) ही समझे और माने जाते हैं। अगर शादी के बाद एक साथी ओपन रिलेशनशिप की डिमांड करे, तो यह केवल लाइफस्टाइल का मुद्दा नहीं रहता। यहां सहमति, पावर–बैलेंस और मेंटल हेल्थ जैसे बहुत से जरूरी और बुनियादी सवाल भी मौजूं हो जाते हैं। किसी भी स्वस्थ रिश्ते की बुनियाद आपसी सम्मान, अपनी स्वायत्तता और इच्छा से दी गई सहमति और फैसलों में बराबरी पर टिकी होती है। यदि इन चीजों में से कोई एक भी अनुपस्थित हो, तो रिश्तों में तनाव और असंतुलन पैदा हो सकता है। सहमति के पीछे का मनोविज्ञान ऐसी परिस्थितियों की शुरुआत अक्सर हल्के–फुल्के मजाक के साथ होती है। एक पार्टनर मजाक में यह कह सकता है कि ‘मुझे दूसरे लोग भी आकर्षक लगते हैं’ या ‘ओपन रिलेशनशिप का आइडिया भी कितना इंटरेस्टिंग हो सकता है।’ साइकोलॉजी में इसे ‘चेकिंग बाउंड्रीज’ (सीमा चेक करना) कहा जाता है। मनोविज्ञान में ‘बाउंड्रीज चेक करने’ का मतलब है, अपनी या दूसरे व्यक्ति की सीमाएं देखना, समझना, तय करना, उसे डिफाइन करना। कोई व्यक्ति पहले हंसी–मजाक में अपने विचार रखता है और दूसरे की प्रतिक्रिया देखता है। अगर दूसरा साथी इसे गंभीरता से नहीं लेता, तो धीरे-धीरे यही बात रीअल प्रपोजल में बदल सकती है। कई लोग बाद में सोचते हैं कि उन्होंने उस समय इस बात को गंभीरता से क्यों नहीं लिया। इसके पीछे कुछ सामान्य मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। जैसेकि– कभी-कभी व्यक्ति रिश्ते को खोने से डरता है। कभी वह संघर्ष से बचना चाहता है। कभी उसे लगता है कि साथी को खुश रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है। कई समाजों में यह भी सिखाया जाता है कि रिश्ते को बनाए रखने के लिए एडजस्टमेंट करना जरूरी होता है। परसुएशन या मैनिपुलेशन: एक बारीक रेखा इसी तरह कई बार एक पार्टनर कहता है कि दूसरा पार्टनर हमेशा अपनी बातें मनवा लेता है। जैसाकि आपने भी अपने पार्टनर के लिए लिखा है, “उसकी पर्सनैलिटी और चार्म ही ऐसा है कि वो हमेशा अपनी बातों से कन्विंस कर लेता है।” लेकिन यहां इस बात के गहरे निहितार्थ को समझना जरूरी है। इसका एक अर्थ यह हो सकता है कि पार्टनर का व्यक्तित्व बहुत प्रभावी है। लेकिन दूसरी संभावना यह भी हो सकती है कि वह इनडायरेक्ट तरीके से भावनात्मक दबाव बना रहा हो। या लगातार ‘परसुएशन’ कर रहा हो। परसुएशन का अर्थ है कि एक बात को अनेकों बार कहना, अनुनय–विनय, याचना करना और आखिरकार अपनी बात मनवा ही लेना। कई बार परसुएशन और मैनिपुलेशन के बीच की रेखा बहुत धुंधली होती है। व्यक्ति को बाद में यह महसूस होता है कि उसने सहमति तो दी थी, लेकिन यह सहमति वास्तव में उसकी अपनी मर्जी, खुशी और इच्छा से नहीं दी गई थी। रिश्तों में पावर इंबैलेंस जब कोई व्यक्ति कहता है कि निर्णय उस पर थोपा गया तो यह रिश्ते में पावर इंबैलेंस (शक्ति के असंतुलन) का संकेत हो सकता है। हेल्दी रिश्तों में महत्वपूर्ण फैसले बातचीत और आपसी सहमति से लिए जाते हैं। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके पास सहमत होने के अलावा वास्तव में कोई दूसरा विकल्प नहीं है तो वह कई कारणों से पार्टनर के फैसलेे में हामी भर सकता है। जैसेकि– हो सकता है कि उसे रिश्ते के टूट जाने का डर हो। हो सकता है कि वह पार्टनर पर इमोशनली पूरी तरह डिपेंडेंट हों। हो सकता है कि उसमें आत्मविश्वास की कमी हो। हो सकता है कि वो खुद को बहुत कमजोर और वलनरेबल महसूस करता हो। ऐसी परिस्थितियों में लगातार घुटन और तनाव महसूस होना बहुत स्वाभाविक इमोशनल रिएक्शन है। अगर संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहे तो इससे नींद की समस्या, एंग्जाइटी, इमोशनल फटीग, आत्मसम्मान में कमी जैसे अनुभव हो सकते हैं। ये सारे संकेत इस बात की ओर इशारा करते हैं कि व्यक्ति की भावनात्मक जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं। सबसे पहले जरूरी है खुद को समझना आपके सवाल ने बहुत से तथ्य साफ कर दिए हैं, लेकिन फिर भी आपकी स्थिति का मूल्यांकन आपसे बेहतर कोई नहीं कर सकता। आपको खुद से कुछ सवाल पूछने और अपना सेल्फ इवैल्यूएशन करने की जरूरत है। ये पहला कदम है। जब जमीनी स्थिति साफ समझ में आएगी तभी आप ये तय कर पाएंगी कि आगे आपको कौन–सा रास्ता चुनना चाहिए, कौन से फैसले करने चाहिए। तो आइए शुरू करते हैं। सेल्फ इवैल्यूएशन टेस्ट 1 मैंने ओपन रिलेशनशिप के लिए सहमति क्यों दी? यहां पहला और सबसे जरूरी सवाल ये है कि आप अपनी मर्जी के खिलाफ जाकर ओपन रिलेशनशिप के लिए राजी क्यों हुईं। आपने हामी क्यों भरी। यह सवाल किसी तरह का आरोप नहीं है। यह अपने आत्म–मूल्यांकन का पहला सबसे जरूरी कदम है। मैंने सहमति दिए जाने के पीछे कुछ संभावित कारणों का ऊपर जिक्र किया है। लेकिन आपको अपना इवैल्यूएशन करके यह समझना है कि आपके फैसले के पीछे सबसे बड़ा और ठोस कारण क्या था। नीचे ग्राफिक में कुछ 6 सवाल दिए हैं। आपको इन सवालों को 1 से 10 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपको लगता है कि

Mental Health Relationship Issue; Dr Jaya Sukul Clinical Psychologist Advice

Mental Health Relationship Issue; Dr Jaya Sukul Clinical Psychologist Advice

Hindi News Lifestyle Mental Health Relationship Issue; Dr Jaya Sukul Clinical Psychologist Advice | Husband Wife 50 मिनट पहले कॉपी लिंक सवाल: मैं दिल्ली में रहती हूं। मेरी शादी को 3 साल हो गए हैं। मेरे हसबैंड बहुत समझदार हैं, लेकिन हर बात को मेंटल हेल्थ के फ्रेम में देखने लगते हैं। अगर मैं गुस्सा करती हूं तो कहते हैं, “ये कोई पुराना ट्रॉमा है।” मैं उदास होती हूं तो कहते हैं, “तुम्हें हीलिंग की जरूरत है।” वह मेरे बहुत नॉर्मल इमोशंस को भी मेंटल हेल्थ से लेबल कर देते हैं। पहले मैं उनकी बातों को इग्नोर कर देती थी। लेकिन अब मुझे बहुत फ्रस्ट्रेशन होता है। मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब: सबसे पहले तो शुक्रिया कि आपने अपनी फीलिंग्स को इतने साफ शब्दों में लिखा है। दूसरी बात ये कि ज्यादातर औरतें ऐसी परेशानियों में चुप बनी रहती हैं। सोचती हैं कि शायद मैं ही ओवररिएक्ट कर रही हूं। लेकिन आपने ये सवाल पूछा यानी आप अपनी भावनाओं को लेकर सजग हैं और खुद के बारे में भी सोच रही हैं। ये तारीफ की बात है। आपकी शादी को 3 साल हुए हैं। ये वो वक्त है, जब रिश्ता या तो मजबूती की ओर बढ़ रहा होता है या छोटी-छोटी दरारें दिखने लगती हैं। आपके सवाल से आपके हसबैंड समझदार लगते हैं, लेकिन हर इमोशन को ट्रॉमा कहने की उनकी आदत आपको फ्रस्ट्रेट कर रही है। चलिए, समझते हैं कि ये क्यों हो रहा है और आप क्या कर सकती हैं। ट्रॉमा क्या है? आमतौर पर लोग ट्रॉमा शब्द सुनते ही सोचते हैं कि ट्रॉमा का मतलब है, कोई बड़ा हादसा, जैसे एक्सिडेंट, हिंसा या मारपीट से हुई तकलीफ। जैसे हॉस्पिटल में ट्रॉमा सेंटर होता है, जहां गंभीर चोट वाले पेशेंट्स आते हैं। लेकिन साइकोलॉजी में ट्रॉमा की परिभाषा इससे कहीं ज्यादा विस्तृत है। ट्रॉमा सिर्फ ‘बुरा अनुभव’ भर नहीं है। जरूरी और बुनियादी चीजों की अनुपस्थिति भी ट्रॉमा ही है। इसे ऐसे समझिए कि मान लीजिए एक पेड़ है। उसे स्वस्थ रहने के लिए धूप, पानी, हवा और अच्छी मिट्टी चाहिए। भले ही उसे कोई काटे नहीं, तोड़े नहीं, लेकिन ये सारी जरूरी चीजें न मिलें, तो वो कमजोर हो जाएगा। ये पेड़ का ट्रॉमा है। इसी तरह बच्चे को प्यार, सुरक्षा, दया, प्रोटेक्शन और बिना शर्त का सपोर्ट चाहिए। अगर ये सबकुछ न मिले, तो भी ये ट्रॉमा है। भले ही उसके साथ कोई मारपीट न हुई हो। इस तरह देखें तो हर इंसान के जीवन में कोई-न-कोई ट्रॉमा होता है, क्योंकि हममें से कोई भी परफेक्ट वातावरण में नहीं पला–बढ़ा होता है। आपके हसबैंड इस बारे में अवेयर हैं आपके हसबैंड इस बारे में जागरूक हैं। इसका मतलब है कि वो शायद किताबें पढ़कर ट्रॉमा के बारे में सीख रहे हैं। ये भी हो सकता है कि उन्होंने कभी इसके लिए थेरेपी ली हो, जिससे उन्हें मदद मिली हो। ये अच्छी बात है, लेकिन समस्या ये है कि वो इसे हर छोटी बात पर अप्लाई कर देते हैं। आप कह रही हैं कि वह आपके सामान्य गुस्से या उदासी को भी ट्रॉमा कहकर लेबल कर देते हैं। इससे आपको लगता है कि वो आपकी फीलिंग्स को इग्नोर कर रहे हैं। क्या आपके हसबैंड ‘जज’ कर रहे हैं? अगर आपके हसबैंड बात-बात पर आपकी भावनाओं को ‘ट्रॉमा’ कहने लगे, तो थोड़ी सावधानी जरूरी है। मनोविज्ञान का ज्ञान अच्छी बात है, लेकिन अगर वो इसे सिर्फ आप पर थोप रहे हैं और खुद को ‘ज्ञानी’ मान रहे हैं, तो यह रिश्ते के लिए सही नहीं है। ये संवाद कब हेल्दी है और कब रेड फ्लैग, इसे ग्राफिक से समझिए- अगर ये रेड फ्लैग्स आपकी लाइफ से मैच करते हैं, तो ये रिश्ते को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, अच्छी बात ये है कि यह सबकुछ ठीक किया जा सकता है। आपके हसबैंड समझदार हैं, तो वो सुन सकते हैं। उनके बैकग्राउंड को समझें किसी के खास बिहेवियर की वजह समझने के लिए उसके बैकग्राउंड को समझना जरूरी है। ऐसा हो सकता है आपके हसबैंड ने खुद कोई ट्रॉमा फेस किया हो या किताबें पढ़कर खुद को हील किया हो। वो सोचते होंगे कि ये ज्ञान शेयर करके वो आपकी मदद कर रहे हैं। हर किसी की हीलिंग जर्नी अलग है यहां आपके हसबैंड को ये समझना चाहिए कि हर किसी की हीलिंग की जर्नी पर्सनल होती है। अगर कोई भी दूसरा शख्स किसी को बताए कि तुम्हें कोई ‘ट्रॉमा’ है तो वो पावर गेम जैसा लग सकता है। किसी को तकलीफ हो सकती है। बेहतर है कि खुद अपने ट्रॉमा को पहचानें और स्वीकारें, फिर खुद ही हीलिंग के लिए आगे बढ़ें। अपने हसबैंड से बात करें सबसे जरूरी है खुलकर बात करना, लेकिन गुस्से में नहीं, बल्कि शांति से। हसबैंड पर आरोप लगाने की बजाय उन्हें अपनी भावनाएं समझाएं। आप कुछ इस तरह कह सकती हैं- “मैं जानती हूं कि आपने साइकोलॉजी से बहुत कुछ सीखा है और आप मेरी मदद करना चाहते हो। लेकिन जब आप मेरी हर बात को ‘ट्रॉमा’ का नाम दे देते हो, तो मुझे लगता है कि मेरी भावनाओं की कोई कद्र नहीं है। मुझे चाहिए कि आप सिर्फ मुझे समझने की कोशिश करो।” अपनी समझ भी बढ़ाएं इस बारे में कुछ चीजें पढ़ें, खुद थोड़ा एक्टिव रहें। आप चाहें तो खुद मनोविज्ञान की कुछ अच्छी किताबें पढ़ सकती हैं, जैसे ‘बॉडी कीप्स द स्कोर’ या ‘द साइकोलॉजी ऑफ ट्रॉमा।’ इससे आपको समझ में आएगा कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है। शायद आपकी नाराजगी कम हो जाए क्योंकि अब आप उनकी भाषा समझ पाएंगी। उनसे उसी भाषा में बात कर पाएंगी। याद रखें कि यह सब अपनी मर्जी और अपनी रफ्तार से करें। किसी के दबाव में आकर नहीं। जब बातचीत से हल न निकले तो क्या करें? अगर बार-बार समझाने के बाद भी उनका बर्ताव नहीं बदलता, तो बहुत परेशान न हों, एक्सपर्ट की मदद लें। एक्सपर्ट की हेल्प लें- आप दोनों ‘कपल थेरेपी’ ले सकते हैं। एक प्रोफेशनल थेरेपिस्ट आप दोनों को सही तालमेल बिठाना सिखा सकता है। एहसास जरूरी है, नाम नहीं- प्यार में एक-दूसरे की भावनाओं को समझना जरूरी है, उन पर कोई ‘ठप्पा’ या लेबल लगाना नहीं।

Ishan Kishan Fashion Brand & Aditi Hundia Relationship Profile

Ishan Kishan Fashion Brand & Aditi Hundia Relationship Profile

18 मिनट पहले कॉपी लिंक T20 वर्ल्ड कप 2026 के जीत के बाद ईशान किशन के साथ नजर आने वाली एक मिस्ट्री गर्ल की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हैं। इसके बाद फैंस के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर यह ‘मिस्ट्री गर्ल’ कौन है? यह मिस्ट्री गर्ल कोई और नहीं बल्कि ईशान किशन की कथित गर्लफ्रेंड अदिति हुंडिया हैं। अदिति राजस्थान के जयपुर की रहने वाली एक फैशन मॉडल और आंत्रप्रेन्योर हैं। टी20 वर्ल्डकप 2026 फाइनल में जीत के बाद ईशान किशन और अदिति हुंडिया। T20 वर्ल्ड कप 2026 फाइनल मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया। इसमें टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड को 96 रनों से हराकर तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी अपने नाम की। जीत के बाद मैदान पर खिलाड़ियों और उनके परिवार के बीच जश्न मना रहे थे। इसी दौरान भारतीय बल्लेबाज ईशान किशन अदिति हुंडिया के साथ नजर आए। बचपन में ही पिता की मौत हो गई थी अदिति हुंडिया की मां का नाम बबीता हुंडिया है, जो हाउसवाइफ हैं। जब वो सिर्फ डेढ़ साल की थीं, उनके पिता की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई थी। इसके बाद उनकी मां ने दूसरी शादी बिजनेसमैन ललित हुंडिया से की। ललित उनके स्टेपफादर हैं और अदिति कहती हैं कि वो उन्हें बायोलॉजिकल पिता से ज्यादा प्यार और सपोर्ट देते हैं। अदिति के भाई का नाम यश हुंडिया है, जो एक कमर्शियल पायलट हैं। उनकी एक स्टेप-सिस्टर भी है। मॉडलिंग करियर पर फैमिली ने लगाई थी रोक अदिति ने एक इंटरव्यू में बताया कि मॉडलिंग करियर की शुरुआत उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं थी। वे एक कंजर्वेटिव जैन परिवार से आती हैं, जहां लड़कियों को मॉडलिंग जैसे करियर में जाने की इजाजत नहीं होती है। परिवार को लगता था कि मॉडलिंग सिर्फ ग्लैमर की दुनिया है। लेकिन अदिति ने पढ़ाई के साथ छोटे-छोटे लोकल कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेना शुरू किया। 2016 में एलीट मिस राजस्थान में ‘मिस ब्यूटीफुल आइज’ और ‘मिस बॉडी ब्यूटीफुल’ जैसे टाइटल जीतने पर परिवार की सोच बदलने लगी। इसके बाद उन्होंने कई ब्यूटी कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया और जीती। उनकी लगातार मेहनत और सफलता ने परिवार का रुख बदल दिया। अदिति बताती हैं कि उनकी मां ने सबसे ज्यादा साथ दिया। उन्होंने समाज की परवाह नहीं की। अदिति ने भी परिवार से वादा किया कि वह अपनी परंपराओं और संस्कारों को कभी नहीं छोड़ेंगी। 2021 में खुद का ब्रांड ‘लेबल अदिति हुंडिया’ की स्थापना की अदिति हुंडिया ने साल 2021 में अपना फैशन ब्रांड ‘लेबल अदिति हुंडिया’ (LAH) लॉन्च किया। यह एक ऑनलाइन वुमेंस क्लोदिंग ब्रांड है। ये कंपनी ट्रेंडी, फेस्टिव और स्टाइलिश आउटफिट्स बनाती है। अदिति खुद इस ब्रांड की क्रिएटिव डायरेक्टर हैं। वे अपने मॉडलिंग अनुभव की वजह से डिजाइन, स्टाइल और प्रमोशन पर खास ध्यान देती हैं। 2022 तक अदिति की कुल नेट वर्थ करीब 24 करोड़ रुपए थी। वे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी हैं। उन्हें इंस्टाग्राम पर लगभग 4.69 लाख लोग फॉलो करते हैं। उनकी कमाई का मेन सोर्स मॉडलिंग असाइनमेंट्स, खुद का फैशन ब्रांड, फैशन शो, म्यूजिक वीडियो और प्रमोशनल इवेंट्स हैं। IPL 2019 में मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के मैच के दौरान अदिति हुंडिया की वायरल हुई तस्वीर। IPL 2019 से ईशान किशन के साथ चर्चा में आई थीं मई 2019 में अदिति तब सुर्खियों में आई जब हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में मुंबई इंडियंस (MI) और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के बीच IPL मैच देखने पहुंची थीं। वे MI की तरफ से खेल रहे अपने एक दोस्त को चियर कर रहीं थी तभी कैमरामैन ने उन पर फोकस किया। उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं और लोग उन्हें ‘मुंबई इंडियंस फैन गर्ल’ कहने लगे। इसी के बाद से उनका नाम क्रिकेटर ईशान किशन के साथ जोड़ा जाने लगा। 2019 IPL के बाद से ही दोनों के रिश्ते की चर्चा होती रही। स्टोरी- नीतीश कुमार ——————— ये खबर भी पढ़ें… 6 साल की उम्र में जेल गए थे तारिक रहमान: लॉ की पढ़ाई छोड़ बिजनेस किया, 17 साल देश से बाहर रहे; जानें प्रोफाइल 17 फरवरी को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की शपथ लेने वाले तारिक रहमान 1971 में पाकिस्तान से आजादी की लड़ाई में 6 साल की उम्र में अपने भाई और मां सहित जेल गए थे। BNP तारिक को बांग्लादेश आजादी की लड़ाई का सबसे कम उम्र का कैदी बताती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Toxic Relationship Signs; Girlfriend Boyfriend Trust Issue – Chats Screenshots

Toxic Relationship Signs; Girlfriend Boyfriend Trust Issue - Chats Screenshots

Hindi News Lifestyle Toxic Relationship Signs; Girlfriend Boyfriend Trust Issue Chats Screenshots | Red Flags 3 घंटे पहले कॉपी लिंक सवाल- मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रही हूं। एक साल से रिलेशनशिप में हूं। मेरा बॉयफ्रेंड मेरी हर बात का रिकॉर्ड रखता है, चैट के स्क्रीनशॉट रखता है। मैंने कब क्या कहा, कैसे कहा, सबकुछ। फिर जब भी हमारे बीच झगड़ा होता है, वो पुराने चैट्स निकालकर दिखाने लगता है। जब पहली बार उसने चैट का स्क्रीनशॉट दिखाया तो मुझे बहुत शॉक लगा था। क्या ये बिहेवियर नॉर्मल है, क्या ये ट्रस्ट की कमी है या मैं जरूरत से ज्यादा सेंसिटिव हूं? मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सबसे पहले तो शुक्रिया कि आपने अपनी भावनाओं को शब्दों में इतने अच्छे से व्यक्त किया। कॉलेज लाइफ में रिश्ते की इतनी गहरी समझ होना और ये सवाल पूछना आसान नहीं होता। ज्यादातर लड़कियां ऐसे मामलों में खुद को ही दोष देती रहती हैं, लेकिन आपने सवाल किया यानी आप सजग हैं। ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है। आपका सवाल पार्टनर की सिर्फ एक आदत को लेकर नहीं है। यह सवाल इमोशनल सेफ्टी और उस भरोसे को लेकर है, जो किसी भी रिलेशनशिप की बुनियाद है। इसलिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आप जो महसूस कर रही हैं, वह न तो छोटी बात है और न ही आप ओवर-सेंसिटिव हैं। आपकी फीलिंग्स पूरी तरह वैलिड हैं। रिश्ते में अगर हर बात पर सबूत मांगे जाएं, तो अविश्वास पैदा हो सकता है। चलिए, इस समस्या को स्टेप-बाई-स्टेप समझते हैं और देखते हैं कि आप क्या कर सकती हैं। हर बात का रिकॉर्ड रखना हेल्दी नहीं है अगर कोई पार्टनर बातचीत के स्क्रीनशॉट संभालकर रखता है और झगड़े के समय उन्हें दिखाता है, तो यह हेल्दी पैटर्न नहीं है। रिकॉर्ड्स कोर्टरूम में जरूरी होते हैं क्योंकि वहां जज को सच और झूठ तय करने के लिए सबूत चाहिए। लेकिन ये समझना चाहिए कि रिश्ता कोर्टरूम नहीं है। इसलिए इसमें सबूत नहीं, समझ, भरोसा और भावनाओं की जरूरत होती है। इस तरह का बिहेवियर टॉक्सिक हो सकता है। इसके सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- रिकॉर्ड रखने का पार्टनर पर क्या असर पड़ता है? ऐसे रिश्ते में इंसान पर अक्सर ये तीन भावनाएं हावी हो जाती हैं। डर- कुछ भी कहने से पहले सौ बार सोचना। असुरक्षा- डर कि कहीं मेरी लिखी बात बाद में मेरे खिलाफ ही न इस्तेमाल हो। खुद पर शक- मन में खुद के लिए ही शक पैदा होना। यह टॉक्सिक रिलेशनशिप का संकेत हो सकता है, अगर आपको लग रहा है कि- आप खुलकर बात नहीं कर पा रही हैं। हर शब्द तौलकर बोलना पड़ रहा है। आपको हर वक्त जजमेंट का डर लगता है। ऐसे मामलों में अक्सर लड़कियां खुद को कमतर महसूस करने लगती हैं। उन्हें ऐसा लगता है, जैसे हर बात एक टेस्ट है, जहां फेल होने पर पुराने पेपर निकालकर दिखाए जाते हैं। ये न सिर्फ गुस्सा बढ़ाता है, बल्कि रिश्ते की खुशी को भी छीन सकता है। इसके सभी साइकोलॉजिकल इफेक्ट ग्राफिक में देखिए- क्या यह सिर्फ ट्रस्ट इश्यू है? अक्सर लोग ऐसी सिचुएशन को सीधे ट्रस्ट इश्यू कह देते हैं, जबकि यह इससे ज्यादा गहरी बात है। पार्टनर के ऐसे बिहेवियर के पीछे उसका कोई ट्रॉमा, पास्ट रिलेशनशिप या परवरिश हो सकती है। ऐसा हो सकता है कि उसके ऊपर पिछले रिश्तों में झूठे आरोप लगे हों। हो सकता है कि उसे बार-बार गलत ठहराया गया हो। हो सकता है कि उसकी परवरिश ऐसी रही हो, जहां हर बात का हिसाब रखा जाता हो। उसे यह सिखाया गया हो कि बिना सबूत के बात पर भरोसा नहीं किया जाता। ऐसे लोग अक्सर खुद को सुरक्षित रखने के लिए हर चीज डॉक्यूमेंट करने लगते हैं। यह उनका डिफेंस मेकेनिज्म हो सकता है। पार्टनर के ऐसे बिहेवियर के पीछे के सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए- आपको क्या करना चाहिए? भले ही पार्टनर की ऐसी आदतों के पीछे उसकी जिंदगी के पुराने अनुभव हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको ऐसे व्यवहार को सहन करना चाहिए। किसी की इनसिक्योरिटी को समझना इंसानियत है, लेकिन उसी इनसिक्योरिटी की कीमत पर अपनी मानसिक शांति गंवाना समझदारी नहीं है। आप दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ रही हैं, आपकी जिंदगी में पढ़ाई, दोस्त, करियर भी महत्वपूर्ण हैं। रिश्ता ऐसा होना चाहिए, जो आपको सपोर्ट करे, न कि बोझ बन जाए। पार्टनर को काउंसलिंग की जरूरत अगर कोई इंसान रिश्ते में रहते हुए भी हर बात का रिकॉर्ड रखने की जरूरत महसूस करता है, तो यह संकेत है कि उसके अंदर डर और अविश्वास जैसी भावनाएं बहुत गहरे बैठी हैं। इसके लिए उसे प्रोफेशनल हेल्प और काउंसलिंग की जरूरत है। काउंसलिंग के दौरान सपोर्ट करें, लेकिन दोस्त की तरह यहां आपको एक अहम बात समझनी होगी कि आप पार्टनर को सपोर्ट कर सकती हैं। आप यह कह सकती हैं कि आप उसकी तकलीफ को समझ रही हैं। आप उसे काउंसलिंग लेने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं। लेकिन सपोर्ट का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता है कि आप रिश्ते में रहकर खुद तकलीफ सहती रहेंगी। सपोर्ट करना है तो दोस्त बनकर किया जा सकता है। पार्टनर बनकर खुद की जिंदगी खराब करना, सपोर्ट नहीं कहलाता। बाउंड्री तय करना जरूरी आपको साफ-साफ यह कहना होगा कि झगड़े में पुरानी चैट्स निकालना आपको असहज करता है। यह तरीका आपको सुरक्षित महसूस नहीं कराता और आप रिश्ते में इस पैटर्न को नहीं सहन करेंगी। बाउंड्री रखने का मतलब रिश्ता खत्म करना नहीं होता। इसका मतलब है कि आप अपनी सेफ्टी तय कर रही हैं। अगर पैटर्न न बदले तो क्या करें? अगर पार्टनर आपकी फीलिंग्स को बार-बार नजरअंदाज करे, आपको ही ओवर-सेंसिटिव कहे, हर बार सबूत से चुप कराने की कोशिश करे तो आपको खुद से एक ईमानदार सवाल पूछना होगा- क्या मैं इस रिश्ते में खुद को मानसिक रूप से सुरक्षित महसूस करती हूं? रिलेशनशिप के मजबूत और स्थाई होने के लिए जरूरी है कि कोई इंसान खुद को कमतर न महसूस करे। दोनों एक-दूसरे को बराबरी पर आकें। रेड फ्लैग कैसे पहचानें? अगर पार्टनर बदलने को तैयार नहीं है, तो यह रेड फ्लैग

Porn Addiction Side Effects; Pornography Vs Relationship Intimacy

Porn Addiction Side Effects; Pornography Vs Relationship Intimacy

Hindi News Lifestyle Porn Addiction Side Effects; Pornography Vs Relationship Intimacy | Mental Health 18 घंटे पहले कॉपी लिंक सवाल– मेरी उम्र 32 साल है। मैं एक आईटी प्रोफेशनल हूं। मेरी प्रॉब्लम बहुत पर्सनल है। मुझे पोर्न की लत है। इसके बिना मैं रात में सो नहीं पाता। शुरू में तो ये कोई प्रॉब्लम नहीं लगती थी, लेकिन अब लगता है कि इस आदत का असर मेरी रिलेशनशिप्स पर पड़ रहा है। मैं जिस भी लड़की को डेट करता हूं, वो मुझे छोड़कर चली जाती है। उसका कहना है कि मैं रिश्ते में प्रेजेंट नहीं हूं। मैं भी ये बात जानता हूं कि मुझे किसी लड़की की कंपनी से ज्यादा अपनी कंपनी अच्छी लगती है। सच तो ये है कि सेक्शुअल प्लेजर के लिए भी मैं गर्लफ्रेंड की जरूरत बहुत ज्यादा नहीं महसूस करता। मेरे एक करीबी दोस्त का कहना है कि ये नॉर्मल नहीं है और मुझे थेरेपिस्ट के पास जाना चाहिए। आप प्लीज मुझे गाइड करिए कि मैं क्या करूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। इस डिजिटल युग में पोर्नोग्राफी बहुत आसानी से उपलब्ध है। बहुत व्यापक रूप से इसका इस्तेमाल भी होता है। इसलिए बहुत से इंडीविजुअल और कपल इसे लेकर थोड़ा चिंतित होते हैं कि कहीं ये मेंटल हेल्थ, इंटिमेसी और रिलेशनशिप पर नेगेटिव असर न डाले। पोर्न अपने आप में समस्या नहीं है ‘पोर्न एडिक्शन’ या ‘पोर्न की लत’ जैसे शब्दों का अक्सर प्रयोग किया जाता है। लेकिन एडिक्शन शब्द का इस्तेमाल कई बार एक ज्यादा कॉम्प्लेक्स रियलिटी को सरलीकृत कर सकता है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन की एक रिसर्च इस पर रोशनी डालती है, जिसके मुताबिक पोर्न देखना कुछ लोगों के लिए समस्या बन सकता है, लेकिन यह शायद ही कभी अपने आप में मूल समस्या या मुख्य समस्या होती है। इसके पीछे हमेशा कोई छिपा हुआ इमोशनल, रिलेशनल कारण या कोई इंटरनल कॉन्फ्लिक्ट होता है। पोर्न कब हो सकता है प्रॉब्लमैटिक इंटरनेशनल स्टडीज बताती हैं कि पूरी दुनिया में बहुत बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं पोर्न देखते हैं, लेकिन इससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होता। समस्या तब पैदा होती है, जब पोर्न की लत लग जाए, जब यह एक कंपल्सिव और सीक्रेटिव बिहेवियर हो जाए और जब वास्तविक जिंदगी के रिश्तों पर इसका नेगेटिव असर पड़ने लगे। साथ ही यह सेक्शुअल खुशी, संतोष और इमोशनल हेल्थ को नकारात्मक ढंग से प्रभावित करने लगे। इसके अलावा इन संकेतों से पता चलता है कि पोर्न देखने की आदत समस्या बन रही है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें– पोर्न का ब्रेन पर प्रभाव हमारे ब्रेन में रिवॉर्ड सिस्टम इनबिल्ट होते हैं, जो हैप्पी हॉर्मोन्स रिलीज करते हैं। जब कोई बहुत ज्यादा समय तक और बहुत ज्यादा मात्रा में पोर्न देखता है तो इससे ब्रेन का रिवॉर्ड सिस्टम प्रभावित होता है। इसका नतीजा ये होता है कि वास्तविक जीवन में इंटिमेसी से मिलने वाली खुशी और संतुष्टि कम हो जाती है। साथ ही सेक्स को लेकर अवास्तविक किस्म की अपेक्षाएं पैदा होती हैं। इसलिए आगे बढ़ने से पहले मैं यही कहना चाहूंगा कि शर्मिंदगी या अपराध-बोध महसूस करने की बजाय आप समस्या को समझने और उसकी तह तक जाने की कोशिश करिए। कुछ सेल्फ असेसमेंट टूल्स और सेल्फ हेल्प टूल्स के जरिए मैं आपकी मदद करने की कोशिश करूंगा। क्या आपको पोर्न एडिक्शन है? करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 7 सवाल हैं। आप इन सवालों को ध्यान से पढ़ें और हां या ना में इसका जवाब देें। अंत में अपने जवाब की एनालिसिस करें। स्कोर का इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया हुआ है। जैसेेकि अगर दो या उससे कम सवालों का आपका जवाब ‘हां’ है तो इसका मतलब है कि आपको पोर्न का एडिक्शन नहीं है। अगर तीन या चार सवालों का जवाब ‘हां’ है तो भी यह एडिक्शन नहीं है, सिर्फ पोर्न देखने को आप कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन अगर पांच से ज्यादा सवालों का आपका जवाब ‘हां’ है तो यह पोर्न एडिक्शन है। ऐसे में प्रोफेशनल हेल्प की सलाह दी जाती है। आप पोर्न क्यों देखते हैं? करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट एडिक्शन से जुड़े सेल्फ असेसमेंट के बाद आपको एक और असेसमेंट करने की जरूरत है। अपने पोर्न देखने के वास्तविक कारणों को आइडेंटिफाई करना। ये बहुत साधारण सा असेसमेंट टेस्ट है। नीचे ग्राफिक में कुल 12 सवाल हैं, जिनमें 12 कारण बताए गए हैं। इन सवालों को आपको 0 से 3 के स्केल पर रेट करना है। अगर आपका जवाब 0 है तो इसका मतलब है कि वो कारण नहीं है। अगर जवाब 3 है तो वह एक बड़ा कारण है। इन सवालों से आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपके पोर्न देखने की मुख्य वजहें क्या हैं। पोर्न और रिश्ते: असली नुकसान क्या है? रिसर्च से पता चलता है कि पोर्नोग्राफी अपने आप में हानिकारक नहीं है। बहुत से कपल साथ में पोर्न देखते हैं, लेकिन इससे उनके रिश्ते को कोई नुकसान नहीं होता है। समस्या तब पैदा होती है, जब- सीक्रेसी- व्यक्ति अपनी पोर्न देखने की इच्छा और आदत को दूसरे पार्टनर से छिपाए। उसे लेकर डर, शर्मिंदगी महसूस करे। यौन इच्छा का मैच न होना- असमान यौन इच्छाओं के बारे में आपस में बात करने की बजाय व्यक्ति पोर्न का सहारा ले। सेक्शुल इंटरेस्ट के बारे में बात न होना- अपने सेक्शुअल इंटरेस्ट को लेकर गिल्ट या शर्मिंदगी हो। इस बारे में आपस में बात करने की बजाय व्यक्ति पोर्न का सहारा ले। इन कारणों से पोर्न का रिलेशनशिप पर नेगेटिव असर पड़ सकता है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें– लोग पोर्न क्यों देखते हैं? पोर्न देखने के पीछे अकेलेपन से लेकर, स्ट्रेस और बोरडम तक कई कारण हो सकते हैं। पोर्न इन सारी समस्याओं से डील करने का एक कोपिंग मैकेनिज्म हो सकता है। यह अपने आप में कोई समस्या नहीं है। ये समस्या तब बन जाती है, जब पोर्न ही एकमात्र कोपिंग मैकेनिज्म बन जाए। इसके अलावा अपने मानसिक और भावनात्मक परेशानियों को एड्रेस करने का कोई और टूल हमारे पास न हो। पोर्न एडिक्शन का इलाज क्या है? इस समस्या की अंडरस्टैंडिंग और