Rajya Sabha BJP strength rises to 113 after 7 AAP MPs merger

नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के सात बागी सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद राज्यसभा में AAP की संख्या घटकर 3 रह गई है, जबकि BJP की ताकत बढ़कर 113 हो गई है। जिन सात सांसदों ने BJP में विलय किया है, उनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर अब इन सभी सांसदों को BJP के सदस्यों के रूप में दिखाया गया है। सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने शुक्रवार को राज्यसभा सभापति को आवेदन देकर खुद को BJP सांसद के रूप में मान्यता देने की मांग की थी, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है। वहीं, AAP ने इस घटनाक्रम का विरोध किया था। पार्टी ने रविवार को सभापति के समक्ष याचिका दायर कर इन सात सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। AAP सांसद संजय सिंह ने भी सभापति को पत्र लिखकर इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की अपील की थी। AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने शुक्रवार को BJP जॉइन कर ली थी। राघव चड्ढा ने कहा था कि हरभजन सिंह, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता भी हमारे साथ हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और मूल्यों से भटक गई है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Rajya Sabha Notice for CEC Gyanesh Kumar Removal

नई दिल्ली38 मिनट पहले कॉपी लिंक मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष ने शुक्रवार को राज्यसभा में नोटिस दिया। इस पर 73 सांसदों के दस्तखत हैं। इससे पहले मार्च में विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में नोटिस दिया था। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन नोटिसों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए आरोप उन्हें हटाने के लिए आवश्यक उच्च संवैधानिक मानदंडों को पूरा नहीं करते। 100 सांसदों के दस्तखत जरूरी लोकसभा में CEC को हटाने के प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। राज्यसभा में इसके लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। कानून के अनुसार प्रस्ताव मंजूर होने पर ही जांच समिति मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके से हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश जरूरी होती है। जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट 1968 के अनुसार, अगर दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है, तो जांच समिति तभी बनेगी जब दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके बाद लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाएंगे। ——————— ये खबर भी पढ़ें: मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की तैयारी में विपक्ष:दोबारा नोटिस देंगे, मार्च में एक बार खारिज हो चुका; अब 200 सांसदों का समर्थन जुटाएंगे मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए विपक्ष एक बार फिर कोशिश में जुटा है। सूत्रों के अनुसार, कई विपक्षी दलों के नेता आपस में बातचीत कर रहे हैं। करीब पांच सीनियर लीडर एक नए नोटिस का मसौदा तैयार करने पर काम कर रहे हैं, ताकि हटाने की कार्यवाही शुरू की जा सके। इससे पहले मार्च में विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में नोटिस दिया था। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Lok Sabha Women Reservation Bill Fails

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक लोकसभा में सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह बिल 54 वोट से गिर गया। 12 साल के शासन में यह पहला मौका था, जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। असर यह होगा कि नई जनगणना के नतीजे आने से पहले महिला आरक्षण लागू नहीं होगा, यानी 2029 के लोकसभा चुनाव में इसका फायदा नहीं मिलेगा। सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 सरकार ने इन पर वोटिंग कराने से इनकार कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि दोनों पहले बिल से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन पर अलग से वोटिंग कराने की जरूरत नहीं है। तीन बिल, जिनके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया NDA के पास 298 सांसद, चाहिए 352 थे बिल पर 528 सांसदों ने वोट किया। इसका दो तिहाई 352 होता है, लेकिन बिल के समर्थन में 298 वोट ही मिले। NDA के पास 293 सांसद हैं। भाजपा सिर्फ 5 अन्य सांसदों को कन्वेंस कर पाई। बाकी विपक्ष को विश्वास में लेने में सफल नहीं हुई, इसलिए बिल पास नहीं करा पाई। 24 साल बाद कोई सरकारी बिल गिरा 2002 के आतंकवाद निवारण बिल (पोटा) के बाद संसद में पराजित होने वाला पहला सरकारी विधेयक है। 1990 के संविधान (64वां संशोधन) बिल के बाद लोकसभा में गिरने वाला पहला संविधान संशोधन विधेयक है। महिला आरक्षण और परिसीमन का कनेक्शन सरकार ने लोकसभा में तीन बिल पेश किए थे। इसमें संविधान (131वां) संशोधन बिल, परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026 शामिल थे। महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होंगी। हालांकि यह अब 2034 तक लागू होगा। इसके लिए परिसीमन की जरूरत है। परिसीमन का मतलब है कि देश की आबादी के आधार पर लोकसभा और विधानसभा की सीटों की सीमाएं और संख्या तय करना। यह काम एक परिसीमन आयोग करता है। पहले तय होगा कि किस राज्य में कितनी सीटें होंगी। किन इलाकों की सीमाएं क्या होंगी। उसके बाद ही आरक्षण तय हो पाएगा। संसद का घटनाक्रम, उसका असर और आगे के एक्शन को 5 सवाल-जवाब से समझिए… 1. अब महिला आरक्षण का क्या होगा 2023 में बना और 16 अप्रैल 2026 को नोटिफाई किया गया महिला आरक्षण कानून लागू रहेगा। लेकिन महिलाओं को इसका फायदा 2034 के लोकसभा चुनाव से मिलेगा। इसके लिए 2027 में पूरी होने वाली जनगणना के मुताबिक परिसीमन जरूरी होगा। पढ़ें पूरी खबर… भाजपा आगामी चुनावों में विपक्षी पार्टियों के महिला विरोधी होने का मुद्दा उठाएगी। तमिलनाडु में स्टालिन और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को बिल के खिलाफ वोटिंग करने के लिए घेरा जा सकता है। 2. अगर बिल पास हो जाता तो क्या होता? सरकार ने कहा कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटें 50% बढ़ जातीं। बढ़ी सीटों के हिसाब से महिलाओं को 33% आरक्षण मिलता। जैसे– यूपी में अभी 80 लोकसभा सीटें हैं। बिल पास होने के बाद यह 120 हो जातीं, जिनमें से 40 महिलाओं के लिए आरक्षित होतीं। 3. अब सरकार के सामने क्या विकल्प हैं? सरकार बिल में कुछ बदलाव कर सकती है। जैसे- दक्षिणी राज्यों की सीटें बढ़ाने का प्रावधान। परिसीमन के लिए 2011 की बजाय 2027 की जनगणना का आधार बनाएगी। नए सिरे से बिल पेश कर सकती है, जिस पर विपक्ष के सुझाव लेकर सहमति बना सकती है। 4. विपक्ष के विरोध की असली वजह क्या है? विपक्ष ने महिला आरक्षण संशोधन बिल का विरोध नहीं किया लेकिन इससे जुड़े दोनों बिल के खिलाफ ही। विपक्ष ने परिसीमन बिल के विरोध के दो कारण बताए। पहला– इससे दक्षिणी राज्यों की संसद में ताकत कम हो जाएगी। दूसरा– यह ओबीसी और एसटी–एससी तबके के खिलाफ है। 5. परिसीमन विवाद: दक्षिण vs उत्तर का मुद्दा क्यों बना? चर्चा के दौरान विपक्ष आरोप लगा रहा था कि परिसीमन से उत्तरी राज्यों को फायदा होगा, जबकि दशकों से जनसंख्या वृद्धि में अंतर की वजह से दक्षिणी राज्य पीछे रह जाएंगे। हालांकि अमित शाह ने लोकसभा में बताया कि, इस पर भ्रम फैलाया जा रहा है। शाह ने कहा कि दक्षिण के पांच राज्यों की कुल लोकसभा सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। उनका प्रतिशत 23.76 से बढ़कर 23.87 हो जाएगा। इस तरह प्रस्तावित 50% सीट वृद्धि से दक्षिण भारत के हर राज्य को अधिक सीटें मिलेंगी। संसद में बिल पर चर्चा के दौरान किसने क्या कहा पीएम मोदी बोले- हमें क्रेडिट नहीं चाहिए जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने तैयार हूं। सबकी फोटो छपवा देंगे। ले लो जी क्रेडिट। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं। प्रियंका गांधी ने कहा, जिस तरह असम में उन्होंने मनचाही सीटों को काटा, नई सीमाएं बनाएं उसी तरह यह देश में करेंगे। मौजूदा सरकार जनता की आंखों में धूल झोंक रही है। राहुल गांधी ने कहा– चुनावी नक्शा बदलने के लिए महिला आरक्षण का सहारा लिया। सच यह है कि जादूगर पकड़ा गया है। बालाकोट, नोटबंदी और सिंदूर का जादूगर पकड़ा गया है। बिल गिरने के बाद उन्होंने कहा, ‘संशोधन बोल गिर गया। उन्होंने संविधान तोड़ने के लिए महिलाओं के नाम पर असंवैधानिक चाल चली। भारत ने इसे देख लिया। इंडिया (गठबंधन) ने इसे रोक दिया। संविधान की जय हो।’ अमित शाह ने बिल गिरने के बाद कहा- महिला आरक्षण बिल खारिज करना, उस पर जश्न मनाना, जीत के नारे लगाना वास्तव में निंदनीय व कल्पना से परे है। अखिलेश यादव ने कहा- ये लोग पिछड़े वर्ग की 33 प्रतिशत महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहते हैं। जब परिसीमन की बारी आई तो इन लोगों ने पूरी रणनीति
Harivansh Re-elected Rajya Sabha Deputy Chairman Unopposed

Hindi News National Harivansh Re elected Rajya Sabha Deputy Chairman Unopposed | India Parliament नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक हरिवंश नारायण सिंह तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति चुने गए हैं। उन्हें शुक्रवार को निर्विरोध चुना गया हैं। विपक्ष की ओर से कोई नाम नहीं आया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है। उनके कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके अनुभव और योगदान की सराहना की। हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो गया था। उनकी पार्टी JDU ने इस बार नाम नहीं दिया था। इसके बाद राष्ट्रपति ने उनका मनोनयन किया। पूर्व CJI रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद सीट खाली हुई थी। इसे भरने के लिए JD(U) के हरिवंश को चुना गया। 69 साल के हरिवंश 2032 तक राज्यसभा में रहेंगे। राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत होते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति तय करते हैं। इन्हें कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा में विशेष योगदान के आधार पर चुना जाता है। 18 मार्च को पीएम मोदी ने कमबैक का हिंट दिया था बजट सत्र के दूसरे चरण के दौरान राज्यसभा में रिटायर हो रहे सांसदों का विदाई समारोह 18 मार्च को हुआ था। इस दौरान पीएम मोदी ने हरिवंश के लिए कहा था- “हमारे उपसभापति हरिवंश विदा ले रहे हैं। हरिवंश को इस सदन में लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर मिला।” पीएम मोदी ने हिंट दी थी कि हरिवंश की राजनैतिक पारी अभी खत्म नहीं हुई है, वे आगे भी जनहित में काम करते रहेंगे। इसके आधार पर ही यह माना जा रहा है हरिवंश नारायण को मनोनीत सांसद बनाकर दोबारा लाया गया है। पत्रकारिता में थे हरिवंश, फिर राजनेता बने हरिवंश नारायण सिंह पत्रकार से नेता बने। उन्होंने जेडीयू की तरफ से राज्यसभा में बिहार का प्रतिनिधित्व किया। 2018 में पहली बार राज्यसभा के उपसभापति बने। इसके बाद 2020 में दोबारा चुने गए। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
amit Shah Explains hou 850-Seat Lok Sabha Number After Opposition Criticism on delimitation

Hindi News National Amit Shah Explains Hou 850 Seat Lok Sabha Number After Opposition Criticism On Delimitation नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा में परिसीमन और लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी के बारे में बताया। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिलों पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को यह समझाया कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि लोकसभा की सीटें 543 से 850 कैसे होंगी। दरअसल, चर्चा के दौरान विपक्ष आरोप लगा रहा था कि परिसीमन से उत्तरी राज्यों को फायदा होगा, जबकि दशकों से जनसंख्या वृद्धि में अंतर की वजह से दक्षिणी राज्य पीछे रह जाएंगे। कांग्रेस ने कहा कि ये बिल महिला आरक्षण के लिए नहीं बल्कि यह चोर दरवाजे से परिसीमन के लिए हैं। शाह ने बताया- 850 का आंकड़ा कहां से आया शाह ने कहा, ‘मैं समझाता हूं। मान लीजिए 100 सीटें हैं और 33% महिलाओं के लिए आरक्षण देना है। यदि कुल सीटों में 50% वृद्धि कर दी जाए, तो यह 150 हो जाती हैं। और जब 150 का 33% आरक्षण लागू होता है, तो यह लगभग 100 सीटों के बराबर हो जाता है।’ ‘अभी 543 सदस्य हैं। इसमें 50% वृद्धि की जाएगी और जब 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, तो सभी 543 सीटें ऐसी हो जाएंगी जहां महिलाएं भी चुनाव लड़ सकें। इसी तरह 50% वृद्धि का विचार आया। 850 एक राउंड फिगर है, वास्तविक संख्या 816 होगी।’ तमिलनाडु की सीटें 39 से 59 हो जाएंगी दक्षिण के पांच राज्यों की कुल लोकसभा सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। उनका प्रतिशत 23.76 से बढ़कर 23.87 हो जाएगा। इस तरह प्रस्तावित 50% सीट वृद्धि से दक्षिण भारत के हर राज्य को अधिक सीटें मिलेंगी। तमिलनाडु को 20, केरल को 10, तेलंगाना को 9 और आंध्र प्रदेश को 13 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। उत्तर प्रदेश के बाद लोकसभा में दूसरे सबसे अधिक सांसदों वाला राज्य महाराष्ट्र है, जिसे 24 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। शाह बोले- परिसीमन कानून में कोई बदलाव नहीं शाह ने कहा कि परिसीमन आयोग का कानून पूरी तरह मौजूदा कानून पर है। इसमें कोई बदलाव नहीं है। इसका चल रहे चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। परिसीमन विधेयक के अनुसार: कुल सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी। निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं 2011 की जनगणना के आधार पर फिर से तय की जाएंगी। इन विधेयकों के जरिए संविधान के 7 अनुच्छेदों- 55, 81, 82, 170, 330, 332 और 334 (ए) में संशोधन किया जाएगा। संसद में 4 विपक्षी नेताओं के बयान प्रियंका गांधी: 543 में से महिलाओं को 33% आरक्षण क्यों नहीं दे रहे। अगर पद खोने का डर नहीं तो कुछ लोग इसमें अपना पद खो दें। ताकि महिलाएं और ओबीसी वर्ग आ सके। ये आज ही कर दें, शुभ काम हो जाएगा काला टीका भी काम आ जाएगा। असदुद्दीन ओवैसी: अगर ये तीनों बिल कानून बनते हैं, तो इस सदन में विपक्ष की आवाज लगभग खत्म हो जाएगी। अखिलेश यादव: ये लोग पिछड़े वर्ग की 33% महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहते हैं। जब परिसीमन की बारी आई तो इन लोगों ने पूरी रणनीति बनाई, कि कैसे क्षेत्र बनाए जाएं कि इसका फायदा इन लोगों को ही मिले। टी आर बालू (डीएमके सांसद): तीनों संशोधन बिल ही सैंडविच बिल हैं, हम इनका विरोध करते हैं। हमने काले झंडे दिखाए। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें… मोदी बोले- विपक्ष क्रेडिट ले, ब्लैंक चेक देने को तैयार:प्रियंका का जवाब- महिलाएं बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को पहचान लेती हैं, सावधान हो जाएं पीएम मोदी ने गुरुवार को महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधनों पर कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। यह मोदी की गारंटी है और वादा है। विपक्ष इसका क्रेडिट ले सकता है। मैं क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Amit Shah; Delimitation Lok Sabha Seats Controversy

Hindi News National Amit Shah; Delimitation Lok Sabha Seats Controversy | Tamil Nadu UP Maharashtra नई दिल्ली13 घंटे पहले कॉपी लिंक गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा में परिसीमन और लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी के बारे में बताया। लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिलों पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को यह समझाया कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि लोकसभा की सीटें 543 से 850 कैसे होंगी। दरअसल, चर्चा के दौरान विपक्ष आरोप लगा रहा था कि परिसीमन से उत्तरी राज्यों को फायदा होगा, जबकि दशकों से जनसंख्या वृद्धि में अंतर की वजह से दक्षिणी राज्य पीछे रह जाएंगे। कांग्रेस ने कहा कि ये बिल महिला आरक्षण के लिए नहीं बल्कि यह चोर दरवाजे से परिसीमन के लिए हैं। शाह ने बताया- 850 का आंकड़ा कहां से आया शाह ने कहा, ‘मैं समझाता हूं। मान लीजिए 100 सीटें हैं और 33% महिलाओं के लिए आरक्षण देना है। यदि कुल सीटों में 50% वृद्धि कर दी जाए, तो यह 150 हो जाती हैं। और जब 150 का 33% आरक्षण लागू होता है, तो यह लगभग 100 सीटों के बराबर हो जाता है।’ ‘अभी लोकसभा में 543 सदस्य हैं। परिसीमन के बाद सीटों में 50% वृद्धि की जाएगी और कुल संख्या 816 हो जाएगी। इसमें से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। 850 एक राउंड फिगर है, वास्तविक संख्या 816 होगी।’ तमिलनाडु की सीटें 39 से 59 हो जाएंगी दक्षिण के पांच राज्यों की कुल लोकसभा सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। उनका प्रतिशत 23.76 से बढ़कर 23.87 हो जाएगा। इस तरह प्रस्तावित 50% सीट वृद्धि से दक्षिण भारत के हर राज्य को अधिक सीटें मिलेंगी। तमिलनाडु को 20, केरल को 10, तेलंगाना को 9 और आंध्र प्रदेश को 13 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। उत्तर प्रदेश के बाद लोकसभा में दूसरे सबसे अधिक सांसदों वाला राज्य महाराष्ट्र है, जिसे 24 अतिरिक्त सीटें मिलेंगी। शाह बोले- परिसीमन कानून में कोई बदलाव नहीं शाह ने कहा कि परिसीमन आयोग का कानून पूरी तरह मौजूदा कानून पर है। इसमें कोई बदलाव नहीं है। इसका चल रहे चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। परिसीमन विधेयक के अनुसार: कुल सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी। निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं 2011 की जनगणना के आधार पर फिर से तय की जाएंगी। इन विधेयकों के जरिए संविधान के 7 अनुच्छेदों- 55, 81, 82, 170, 330, 332 और 334 (ए) में संशोधन किया जाएगा। संसद में 4 विपक्षी नेताओं के बयान प्रियंका गांधी: 543 में से महिलाओं को 33% आरक्षण क्यों नहीं दे रहे। अगर पद खोने का डर नहीं तो कुछ लोग इसमें अपना पद खो दें, ताकि महिलाएं और ओबीसी वर्ग आ सके। ये आज ही कर दें, शुभ काम हो जाएगा काला टीका भी काम आ जाएगा। असदुद्दीन ओवैसी: जिन राज्यों की आबादी ज्यादा है, उन्हें ज्यादा सीटें मिलेंगी और कम आबादी वाले राज्यों की सीटें घटेंगी। दक्षिणी राज्य देश की GDP का करीब 30% हिस्सा देते हैं और कुल टैक्स राजस्व का 21% वहीं से आता है, लेकिन उन्हें उनके अच्छे शासन के लिए ‘सजा’ दी जा रही है। अखिलेश यादव: ये लोग पिछड़े वर्ग की 33% महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहते हैं। जब परिसीमन की बारी आई तो इन लोगों ने पूरी रणनीति बनाई, कि कैसे क्षेत्र बनाए जाएं कि इसका फायदा इन लोगों को ही मिले। टी आर बालू (डीएमके सांसद): तीनों परिसीमन संशोधन बिल ही सैंडविच बिल हैं, हम इनका विरोध करते हैं। हमने काले झंडे दिखाए। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें… मोदी बोले- विपक्ष क्रेडिट ले, ब्लैंक चेक देने को तैयार:प्रियंका का जवाब- महिलाएं बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को पहचान लेती हैं, सावधान हो जाएं पीएम मोदी ने गुरुवार को महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधनों पर कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। यह मोदी की गारंटी है और वादा है। विपक्ष इसका क्रेडिट ले सकता है। मैं क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Haryana Congress MLAs Face Suspension Over Rajya Sabha Cross-Voting Allegations

केंद्रीय नेतृत्व ने हरियाणा कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति की रिपोर्ट पर यह एक्शन लिया है। हरियाणा राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय कैंडिडेट के पक्ष में वोटिंग करने वाले कांग्रेस के पांच विधायकों शैली चौधरी (नारायणगढ़), रेनू बाला (साढ़ौरा), मोहम्मद इलियास (पुन्हाना), मोहम्मद इजराइल (हथीन) और जरनैल सिंह (रतिया) को निलंबित कर दिया है . 16 मार्च को हुए इस चुनाव में कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध हारते-हारते बचे थे। हरियाणा कांग्रेस की डिसिप्लिनरी एक्शन कमेटी (DAC) ने विधायकों को निलंबित करने की सिफारिश की थी। इस रिपोर्ट को केंद्रीय नेतृत्व ने स्वीकार कर लिया गया। सस्पेंशन के आदेश पर दैनिक भास्कर एप ने सभी विधायकों से पहला रिएक्शन लिया। शैली चौधरी ने कहा कि निलंबन की जानकारी नहीं है, अभी बाहर हैं। जरनैल सिंह ने कहा-एक तरफा कार्रवाई हुई है। विधायक मोहम्मद इजराइल व मोहम्मद इलियास ने कहा पार्टी का फैसला मंजूर है। रेनू बाला के पीए ने कहा-मैडम पारिवारिक समारोह में व्यस्त हैं। हरियाणा कांग्रेस की ओर से जारी किया गया लेटर… पार्टी से सस्पेंड होने से पांचों विधायकों का क्या होगा… विधायक बने रहेंगेः कानून मामलों के जानकार एडवोकेट हेमंत कुमार के मुताबिक कांग्रेस ने जिन विधायकों को सस्पेंड किया है, उनके विधायक पद को कोई खतरा नहीं है। यानी वो विधायक बने रहेंगे। उनका पद तभी खतरे में होगा, यदि वो खुद पार्टी छोड़ते हैं। व्हिप मानना होगाः विधानसभा सदन में कांग्रेस यदि व्हिप (अनिवार्य आदेश) जारी करती है, तो ये निलंबित विधायक उसे मानने को बाध्य होंगे। किसी महत्वपूर्ण बिल पर वोटिंग की स्थिति में पार्टी व्हिप जारी करती है। पार्टी मीटिंग में नहीं बुलाया जाएगाः आमतौर पर निलंबन की स्थिति में कांग्रेस विधायक दल या पार्टी की मीटिंग में इन विधायकों को नहीं बुलाया जाएगा। हालांकि कांग्रेस विधायक ही कहलाएंगे। निलंबन पर विधायकों ने इस तरह दी प्रतिक्रिया… रतिया विधायक बोले- बहुत धक्का हुआ, हमारी सुनवाई नहीं हई रतिया से विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि मुझे मीडिया के जरिए ही पता चला है कि पार्टी ने सस्पेंड कर दिया है। यह हमारे साथ बहुत धक्का हुआ है। हमारी सुनवाई नहीं हुई। जवाब मांगा था, मैंने लिखित में दे दिया था। मगर, बाद में हमें बुलाना चाहिए था। एक तरफा कार्रवाई हुई है, जिसका हमें बहुत दुख हुआ है। आगे कहा कि रतिया में कांग्रेस को जिंदा रखा तो जरनैल सिंह ने रखा है। मैं और मेरे साथी बहुत समय तक कांग्रेस के लिए लगे रहे। रतिया में कभी कांग्रेस नहीं जीती, हमने जिताया। मेरे इलाके के 87 हजार वोटर्स ने मुझे विधायक चुना। उन सबके साथ राय-मशविरा करूंगा। दुख तो इसी बात का है कि जिस आदमी की वफादारी की है, उसी ने यह सिला दिया है। पार्टी हाईकमान ने गलत किया है, हमें बुलाकर पूछना चाहिए था। सारी जांच करनी चाहिए थी। शैली चौधरी बोलीं- हमें कोई चिट्ठी प्राप्त नहीं हुई कांग्रेस पार्टी से निलंबन किए जाने पर नारायणगढ़ से विधायक शैली चौधरी का पहला रिएक्शन आया है। उन्होंने बताया कि अभी उन्हें इस मामले में कोई चिट्ठी पार्टी की ओर से प्राप्त नहीं हुई है। जब तक वह उन्हें नहीं मिल जाती, तब तक वह इस मामले में कुछ नहीं कह पाएंगी। कहा कि वह अभी अपने परिवार के साथ हरियाणा से बाहर आई हुई हैं। संडे को उन्होंने लौटने की बात कही है। इजराइल बोले-हलके के लिए क्रॉस वोट किया हथीन विधायक मोहम्मद इसराइल ने कहा-इलाके के लोगों की भलाई के लिए क्रॉस वोट किया था। कांग्रेस का राज्यसभा का उम्मीदवार पसंद नहीं था। देश में लोकतंत्र है और कोई किसी को भी अपना वोट दे सकता है। हाईकमान का फैसला मंजूर है। पार्टी ने भले ही उनको निलंबित कर दिया हो, लेकिन मैं लोगों की भलाई के लिए काम करता रहूंगा। किसी दूसरी पार्टी में जाने का मन में विचार नहीं है। इलाके के लोगों को एकत्रित करूंगा। जनता जो फैसला लेगी उसी से आगे बढ़ेंगे। इलियास बोले-कुछ नहीं कहूंगा, रेनू बाला का फोन बंद पुन्हाना विधानसभा मोहम्मद इलियास ने कहा-पार्टी का अधिकार है, हम इसमें कुछ नहीं कह सकते, वह चाहे जो कर सकते हैं। BJP या दूसरी किसी पार्टी में शामिल होने वाले सवाल पर वे चुप्पी साध गए। उधर, साढौरा की विधायक रेनू बाला का मोबाइल फोन फिलहाल स्विच ऑफ है। उनके निजी सहायक (पीए) रवि ने बताया कि मैडम आज एक पारिवारिक कार्यक्रम में व्यस्त हैं। सस्पेंशन का आधिकारिक पत्र नहीं मिला है। सस्पेंड होने वाले विधायकों के बारे में जानिए… सस्पेंड की गईं रेनू बाला और शैली चौधरी सांसद कुमारी सैलजा की करीबी हैं। दोनों दूसरी बार विधायक बनी हैं। इन दोनों को टिकट दिलाने में सैलजा की ही भूमिका रही थी। 16 मार्च को वोटिंग के दिन शैली चौधरी विधानसभा के गेट पर सीएम नायब सैनी की टीम से जुड़े तरूण भंडारी के साथ दिखी थीं। वोटिंग के बाद मोहम्मद इलियास सीएम नायब सैनी से मिलने गए थे। इलियास लंबे समय से डायलिसिस पर हैं। दिलचस्प है कि नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा खुद उन्हें अपनी गाड़ी में बैठाकर विधानसभा तक पहुंचे थे। इससे अंदाजा लगाया गया कि हुड्डा को पहले से ही उन पर संदेह था। इलियास पांचवीं बार के विधायक हैं। पहले इनेलो में भी रहे हैं। मोहम्मद इजराइल भी दूसरी बार विधायक बने हैं। उनके पिता जलेब खान हुड्डा सरकार में मुख्य संसदीय सचिव रहे। अब यहां जानिए राज्यसभा चुनाव में क्या हुआ था… कुल 90 वोट थे, इनेलो के 2 विधायकों ने बनाई थी दूरी : 16 मार्च को हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कुल 90 विधायकों के वोट थे, जिनमें से इनेलो के 2 विधायकों ने वोट नहीं डाला था, जबकि 5 वोट रद्द हो गए थे। इस प्रकार, कुल 83 वोट बचे। भाजपा के 48 विधायकों में से 1 का वोट रद्द हो गया, जिससे 47 वोट बचे। कांग्रेस के चार और भाजपा को एक वोट रद्द हुआ था: पहली प्राथमिकता वाले वोट संजय भाटिया को 39 और सतीश नांदल को 8 मिले थे। कांग्रेस के 37 विधायकों में से 4 वोट रद्द हो गए थे, जबकि 5 ने क्रॉस वोटिंग की थी, जिससे 28 वोट बचे। इससे कर्मवीर बौद्ध की जीत हुई थी। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को पहली प्राथमिकता के
Nari Shakti Vandan Act Amendment; Lok Sabha Seats Increase

Hindi News National Nari Shakti Vandan Act Amendment; Lok Sabha Seats Increase | BJP 3 Line Whip नई दिल्ली25 मिनट पहले कॉपी लिंक संसद में आज महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 बिल पेश किए जाएंगे। इन बिलों में महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 2029 से 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव है। इसके लिए तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। संशोधन बिल में लोकसभा सांसदों की संख्या अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव है। मौजूदा संख्या 543 है। राज्यों में अधिकतम 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 तक सीटें होंगी। सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए परिसीमन भी किया जाएगा। 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। बिलों पर 16, 17 और 18 अप्रैल को चर्चा होगी। भाजपा, कांग्रेस समेत सभी दलों ने अपने सांसदों को संसद में मौजूद रहने का व्हिप भी जारी किया है। सरकार को बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। विपक्ष परिसीमन का विरोध कर रहा है। संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा, और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा। लोकसभा में 18 घंटे चर्चा, विपक्ष परिसीमन के खिलाफ कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल दो विधेयक पेश करेंगे, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक विधेयक पेश करेंगे। इन पर चर्चा के लिए 18 घंटे का समय तय किया है। इसके बाद राज्यसभा में चर्चा होगी। पीएम मोदी कल ही चर्चा के दौरान अपनी बात रख सकते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को विपक्षी नेताओं के साथ मीटिंग की। कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है लेकिन लोकसभा में सीटें बढ़ाने के खिलाफ है। पूरा विपक्ष संसद में इसके खिलाफ वोट करेगा। मीटिंग में राहुल गांधी और टीएमसी, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट), AAP के नेता शामिल हुए। ये बदलाव कैसे होंगे, हर जरूरी सवालों के जवाब… 1. कौन से बिल पेश किए जाएंगे: संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन विधेयक (संशोधन) बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 बिल पेश किए जाएंगे। इस पर चर्चा होगी। 2. सीटें कितनी बढ़ेंगी: लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 हो जाएंगी। राज्यों में 815 व केंद्र शासित क्षेत्रों के लिए 35 सीटें। इस बदलाव का असर राज्यसभा और देश की सभी विधानसभाओं पर भी होगा। यहां भी सीटें की संख्या बदल जाएंगी। 3. महिला आरक्षण कितने साल के लिए होगा : कुल सीटों में से 33% यानी 273 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। महिलाओं के लिए यह आरक्षण 15 साल के लिए होगा। यानी 2029, 2034 और 2039 के लोकसभा चुनावों तक। इसके बाद इसे बढ़ाने का फैसला संसद करेगी। आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी, ताकि महिलाओं का हर जगह प्रतिनिधित्व मिल सके। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा। ये आरक्षित सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी। अभी लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 75 और राज्यसभा में 39 है। 4. परिसीमन में क्या होगा: अभी तक सीटों का आधार 1971 की जनगणना थी, जो 2026 तक के लिए मान्य थी। परिसीमन कब होगा और किस जनगणना (जैसे 2011 या 2027) के आधार पर होगा, यह संविधान की जगह संसद एक साधारण कानून बनाकर तय कर सकेगी। सरकार इसमें बदलाव कर रही है। इसके लिए जनसंख्या (आबादी) की परिभाषा को बदला जाएगा है। इससे संसद को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई है। संविधान में संशोधन कर सरकार परिसीमन आयोग बनाएगी। अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे। आयोग सभी निर्वाचन क्षेत्र (लोकसभा सीटें) दोबारा तय करेगा। आयोग का निर्णय अंतिम होगा। इसके फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकते। 5. परिसीमन से यूपी, बिहार को सबसे ज्यादा फायदा 5. क्या सरकार लोकसभा में बिल पास करा पाएगी: संविधान संशोधन पारित कराने के लिए सरकार को बैक-चैनल बातचीत करनी होगी। भारतीय संविधान के ऑर्टिकल 368 के तहत, संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। कुल सदस्यों का बहुमत (50% से अधिक) और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। लोकसभा की वर्तमान संख्या 540 (कुल 543 में से) है। 3 सीटें खाली हैं। यदि सभी सांसद उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो कम से कम 360 सांसदों (दो तिहाई) को इसके पक्ष में वोट देना होगा। वर्तमान में, भाजपा-नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के पास 292 सांसद हैं, जबकि INDIA (विपक्ष) के पास 233 सांसद हैं। 15 सांसद किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं। 6. तीन दशक से पेंडिंग था महिला आरक्षण बिल संसद में महिलाओं के आरक्षण का प्रस्ताव करीब 3 दशक से पेंडिंग है। यह मुद्दा पहली बार 1974 में महिलाओं की स्थिति का आकलन करने वाली समिति ने उठाया था। 2010 में मनमोहन सरकार ने राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण बिल को बहुमत से पारित करा लिया था। तब सपा और राजद ने बिल का विरोध करते हुए तत्कालीन UPA सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दी थी। इसके बाद बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया गया। तभी से महिला आरक्षण बिल पेंडिंग है। 2023 में मोदी सरकार ने महिला आरक्षण बिल को पास कराया। यह कानून बना, अब इसमें संसोधन के जरिए बदलाव किया जा रहा है। ——————– ये खबर भी पढ़ें…. लोकसभा में सीटें बढ़ाने के बिल का विरोध करेगा विपक्ष: खड़गे के घर मीटिंग हुई लोकसभा में सीटें बढ़ाने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव का विपक्ष विरोध करेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को विपक्षी नेताओं के साथ मीटिंग के बाद यह बात कही। मीटिंग खड़गे के घर पर हुई, जिसमें राहुल गांधी और टीएमसी, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट) और AAP नेता भी शामिल हुए। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा 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Nari Shakti Vandan Act Amendment; Lok Sabha Seats Increase

Hindi News National Nari Shakti Vandan Act Amendment; Lok Sabha Seats Increase | BJP 3 Line Whip नई दिल्ली10 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु में सीएम एमके स्टालिन ने गुरुवार को परिसीमन बिल की प्रतियां जलाईं। उनकी पार्टी DMK पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन कर रही है। संसद में आज महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 बिल पेश किए जाएंगे। इन बिलों में महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 2029 से 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव है। इसके लिए तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। संशोधन बिल में लोकसभा सांसदों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव है। मौजूदा संख्या 543 है। राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 तक सीटें होंगी। सीटों की सटीक संख्या तय करने के लिए परिसीमन भी किया जाएगा। 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। बिलों पर 16, 17 और 18 अप्रैल को चर्चा होगी। भाजपा, कांग्रेस समेत सभी दलों ने अपने सांसदों को संसद में मौजूद रहने का व्हिप भी जारी किया है। सरकार को बिलों को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा, और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार प्रभावी होगा। विपक्ष परिसीमन का विरोध कर रहा है। सदन में हंगामा होने के आसार हैं। उधर, तमिलनाडु में सीएम एमके स्टालिन ने बिल की प्रतियां जलाईं। उनकी पार्टी DMK पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन कर रही है। लोकसभा में 18 घंटे तो राज्यसभा में 10 घंटे चर्चा कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल संविधान (131वां संशोधन) बिल और परिसीमन विधेयक (संशोधन) बिल पेश करेंगे, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 बिल पेश करेंगे। इन पर चर्चा के लिए 18 घंटे का समय तय किया है। इसके बाद राज्यसभा में 10 घंटे चर्चा होगी। पीएम मोदी कल ही चर्चा के दौरान अपनी बात रख सकते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को विपक्षी नेताओं के साथ मीटिंग की। कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है लेकिन लोकसभा में सीटें बढ़ाने के खिलाफ है। पूरा विपक्ष संसद में इसके खिलाफ वोट करेगा। मीटिंग में राहुल गांधी और टीएमसी, आरजेडी, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट), AAP के नेता शामिल हुए। लोकसभा कार्यवाही की पल-पल की जानकारी के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं… लाइव अपडेट्स 10 मिनट पहले कॉपी लिंक रिजिजू बोले- आरक्षण बिल पर लोगों को गुमराह किया जा रहा संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री राजनीति कर रहे हैं और यहां कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह किया है। महिला आरक्षण के खिलाफ कोई नहीं है, लेकिन वे इसे हराने के लिए कोई बहाना ढूंढ़ रहे हैं, जो नहीं किया जाना चाहिए। अगर आप किसी बहाने से महिला आरक्षण को हराना चाहते हैं, तो यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पल होगा। इसलिए, तमिलनाडु या किसी भी राज्य को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्हें लोगों को गुमराह और भ्रमित नहीं करना चाहिए। 13 मिनट पहले कॉपी लिंक अखिलेश बोले- जिस तरह से बिल लाया जा रहा, हम उसके खिलाफ सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा, हम महिलाओं के लिए आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि जिस तरीके से यह बिल लाया जा रहा है, हम उसके खिलाफ हैं। वे दलितों, मुसलमानों और पिछड़े वर्गों के खिलाफ हैं। जब हम 33% आरक्षण की बात करते हैं, तो अगर हमारे पास सही आंकड़े ही नहीं हैं, तो हम आरक्षण कैसे दे सकते हैं? 15 मिनट पहले कॉपी लिंक कांग्रेस सांसद राहुल गांधी संसद पहुंचे, VIDEO 31 मिनट पहले कॉपी लिंक कांग्रेस का 131वें संविधान संशोधन बिल का विरोध, नोटिस दिया गुरुवार को कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) बिल, 2026 पेश किए जाने का विरोध करने के लिए एक नोटिस दिया। उन्होंने इस बिल से दक्षिणी राज्यों को होने वाले नुकसान की बात रखी है। ईडन ने लोकसभा महासचिव को सौंपे अपने नोटिस में कहा,’यह बिल संविधान पर एक सीधा हमला है। संविधान के अनुच्छेद 82 और 334A में संशोधन करके, यह बिल उस संवैधानिक आधार को हटा देता है, जिसने ऐतिहासिक रूप से परिसीमन को नवीनतम जनगणना से जोड़ा था। इसलिए, यह बिल मनमाने ढंग से लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने और सीमाओं को फिर से निर्धारित करने का प्रयास करता है। इससे केरल जैसे दक्षिणी राज्यों को निश्चित रूप से नुकसान होगा और संघीय संतुलन हिंदी भाषी राज्यों के पक्ष में झुक जाएगा।’ 37 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी ने कहा- देश आज ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है पीएम मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर लिखा, ‘आज से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र में हमारा देश महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने के लिए तैयार है। हमारी माताओं और बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है, और इसी भावना के साथ हम इस दिशा में दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘आप, जो अपनी उज्ज्वल किरणों से संसार को आलोकित करती हैं, दिव्य रूप से प्रकाशित होती हैं। ऋचाओं (स्तुतियों) के माध्यम से कण्वों ने आपका गुणगान किया है, हे उदार, समस्त का पोषण करने वाली।’ 40 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा- आज बहुत बड़ा दिन केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल विशेष संसद सत्र के लिए अपने आवास से निकल गए हैं। उन्होंने कहा कि यह महिला आरक्षण विधेयक के लिए एक बहुत बड़ा दिन है। सभी को बहुत-बहुत बधाई। 43 मिनट पहले कॉपी लिंक कांग्रेस सांसद ने कहा- भाजपा की नीति और मंशा दोनों ठीक नहीं कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक पर कहा,’कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमने 2023 में जब यह आया था, तब भी इसका समर्थन किया था।’ उन्होंने कहा, ‘भाजपा आरक्षण के नाम पर समाज में जहर घोलना चाहती है। वह लोकतंत्र को खत्म कर तानाशाही थोपना चाहती है। हम इसका विरोध करते हैं, क्योंकि परिसीमन के नाम पर जिस तरह जहर घोला गया है और जिस समय इसे लाया गया है, वह सवाल खड़े करता है।’ ‘ऐसे समय में विशेष सत्र बुलाना, जब भाजपा का दो राज्यों के
Nitish Kumar Rajya Sabha Oath LIVE Update; BJP JDU

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज शुक्रवार को राज्यसभा सांसद की शपथ ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलाई। इस दौरान बिहार एनडीए नेताओं के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, जेपी नड्डा, अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद रहे। . संजय झा ने सिग्नेचर करने के लिए उन्हें पेन दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा, हो गया.. चलें…। जिसपर फोटो सेशन के लिए रूकने को कहा गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चारों सदन का सदस्य बनने का रिकॉर्ड बनाया है। वो पहली बार राज्यसभा पहुंचे हैं, जबकि इसके पहले लोकसभा, बिहार विधान परिषद और विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। इससे पहले सुबह दिल्ली में उनसे मिलने बिहार के बड़े नेता पहुंचे। JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर ने सुबह मुलाकात की। फिर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, मंत्री अशोक चौधरी और मदन सहनी ने मुलाकात की। इधर, केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने नीतीश कुमार के राज्यसभा सांसद बनने पर सोशल मीडिया पर लिखा- “बिहार विल मिस यू नीतीश जी।” जबकि राजद प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा, आज से बिहार में उनकी सेवा समाप्त होती है। शपथ ग्रहण से जुड़ी तस्वीरें…. नीतीश कुमार ने राज्यसभा सांसद की शपथ ली। शपथ के बाद पेपर साइन करते हुए नीतीश कुमार। शपथ ग्रहण के बाद उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से बात करते हुए नीतीश कुमार। खरमास के बाद बिहार में नई सरकार बताया जा रहा कि नीतीश कुमार शुक्रवार शाम को ही पटना लौटेंगे। 13 अप्रैल को कैबिनेट की अंतिम बैठक करेंगे। अगले दिन यानी 14 अप्रैल को सीएम नीतीश अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसी दिन NDA विधायक दल की बैठक भी होगी, जिसमें नए सीएम पर मुहर लगेगी। गुरुवार को दिल्ली पहुंचने पर CM नीतीश ने कहा, ‘अब यहीं रहूंगा। बहुत समय तक यहां (दिल्ली) काम किया है, अब फिर से यहीं काम करूंगा। 20 सालों तक बिहार में बहुत काम किया है, आगे भी काम जारी रहेगा।” इस दौरान उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि वे दिल्ली में सक्रिय रहेंगे, लेकिन पटना आना-जाना भी जारी रहेगा।’ पटना में नीतीश कुमार के बिहार छोड़कर न जाने की अपील करते हुए पोस्टर लगाए गए। JDU से 2 डिप्टी CM हो सकते हैं JDU सूत्रों के अनुसार, एनडीए के मौजूदा फॉर्मूले को आगे बढ़ाया जाएगा। इस हिसाब से जदयू को पहली बार डिप्टी CM पद मिल सकता है। पार्टी के 2 डिप्टी सीएम हो सकते हैं। साथ ही विधानसभा स्पीकर पद भी JDU के पाले में होगा। जदयू सूत्रों के अनुसार, पार्टी के 2 डिप्टी CM में से एक निशांत कुमार का बनना लगभग तय है। ऐसे में बिहार में पार्टी का नेतृत्व निशांत के हाथों में होगा। नीतीश कुमार की शपथ और बिहार की सियासत से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…









