Secret Trick: शबाना सैफी की इस ट्रिक से सिर्फ 1 सिटी में ही पकाए एकदम सीधे-खिले चावल, समय भी बचाए और स्वाद भी बढ़ाया

गुप्त युक्ति: अक्सर लोगों की परेशानी यह होती है कि चावल में थोड़ा-थोड़ा कुकर या तो अलग-अलग तरह से चिपक जाते हैं या फिर नीचे से जल जाते हैं। कुकर में परफेक्ट चावल बनाना एक कला है, और कुकिंग एक्सपर्ट शबाना सैफी ने इस कला को बेहद आसान बना दिया है। उनके बताए गए खास टिप्स और पानी के सही अनुपात को अपनाकर आप घर पर ही रॉयल पुलाव जैसे खिले-खिले चावल तैयार कर सकते हैं। आइए हम आपको इस लेख में स्टेप-बाय-स्टेप चावल बनाने की विधि के बारे में बताते हैं। जिससे चावल एकदम खिला-खिला रहेगा और हर दाना एक अलग सा दिखेगा। चावल की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए चावल की गुणवत्ता और उसे तैयार करने का तरीका सबसे पहला कदम है।खिले-खिले चावल हमेशा अच्छी गुणवत्ता के लिए लंबे ग्रेन बासमती चावल का चयन करें।चावल बनाने से पहले कम से कम 30 मिनट तक सोखना जरूरी है। सब्सने से दाने पानी सोख लेते हैं, जिससे वे पकते समय टूटते नहीं और अपनी पूरी लंबाई तक खिलते हैं।चावल धोते समय हाथों का दबाव अलग, ताकि दानों के बीच से न टूटे। चावल बनाने का पहला स्टेप साधारण चावल को ‘स्पेशल’ बनाने के लिए उन्हें सलाद के बजाय मसाले का तड़का लगाएं। कुकर में थोड़ी सी घी या तेल गरम कर लीजिये. इसमें लौंग, छोटी और बड़ी इलायची, काली मिर्च और जीरा डाला जाता है। जैसे ही मसालों की ध्वनि आने लगे, बड़े-बड़े चावलों को कुकर में डालें। चावलों को घी में 1-2 मिनट का चित्रांकन। ऐसा करने से दानों पर घी की एक परत चढ़ जाती है, जो उन्हें बिजली से रोकती है। चावल पकाने के लिए पानी की मात्रा का ध्यान रखें कुकर में चावल खराब होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि हम पानी कम या फिर ज्यादा ले रहे हैं। साधारण शबाना सैफी के अनुसार 2 चम्मच चावल के लिए सिर्फ 2.5 चम्मच पानी का ही उपयोग करें। ज्यादातर लोग ज्यादा पानी दाल देते हैं। चावल स्वादिष्ट हो जाते हैं। यह पोटली का फॉर्मूलेशन चावल को एकदम सटीक टेक्सास देता है। चावल पकाने का सही तरीका यही स्टेप सबसे जरूरी है। जो आपके चावलों को रेस्टोरेंट की तरह बनाएगा। पानी डाउनलोड करने के बाद तुरंत बंद न करें।कुकर को एक साधारण प्लेट से पुराने डेक और उच्च फ्लेम पर व्यंजन बनाया गया।जब ऊपर का पानी सूख जाए और चावलों की सतह दिखे, तब कुकर का असली समुद्र तट।अब केवल एक सीट पर क्लिक करें और तत्काल बंद कर दें। चावल सर्व करने से पहले ये जरूर करें शहर के बाद कुकुर को घण्टा बंद न छोड़ें। स्टीम को तुरंत हटा दिया गया और डेथ एंकर। अब एक केंट या कढ़ी की मदद से चावलों को हाथों से फुलाएं। इसके अंदर की गर्म हवा निकल जाएगी और चावल के साथ में शामिल नहीं होगा। शबाना सैफी का तरीका ये भी पढ़ें – ड्रैगन फ्रूट Vs बनाना शेक: ड्रैगन फ्रूट और बनाना शेक में कौन सबसे ज्यादा जादुई? जानिए क्या हैं फायदे
Netanyahu Trump Secret Meeting: Iran Attack Decision

वॉशिंगटन डीसी14 मिनट पहले कॉपी लिंक तारीख: 11 फरवरी जगह: व्हाइट हाउस, वॉशिंगटन डीसी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सुबह ही व्हाइट हाउस पहुंच चुके थे। वह कई महीनों से अमेरिका पर दबाव डाल रहे थे कि ईरान पर बड़ा हमला किया जाए। हालांकि इस बार की मुलाकात बेहद सीक्रेट थी। उन्हें बिना किसी औपचारिक स्वागत के सीधे अंदर ले जाया गया ताकि मीडिया को कुछ पता न चले। पहले कैबिनेट रूम में बातचीत हुई और फिर उन्हें व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में ले जाया गया, जहां असली बैठक हुई। यह वही जगह है जहां अमेरिका युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े फैसले करता है, लेकिन आमतौर पर यहां विदेशी नेताओं को नहीं लाया जाता। आमतौर पर जब कोई बड़ी मीटिंग होती है, तो ट्रम्प वह टेबल के सबसे आगे यानी ‘हेड’ वाली कुर्सी पर बैठते हैं। वहां से वह सबको देखते हैं और बैठक को लीड करते हैं। लेकिन इस मीटिंग में ट्रम्प टेबल के किनारे (साइड) पर जाकर बैठे, और उनका चेहरा दीवार पर लगी बड़ी स्क्रीन की तरफ था। ट्रम्प-नेतन्याहू आमने-सामने थे। स्क्रीन पर इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया और इजराइली सैन्य अधिकारी जुड़े हुए थे। इससे ऐसा माहौल बनाया गया जैसे नेतन्याहू युद्ध के समय अपने पूरे कमांड के साथ खड़े हैं। इस बैठक में बहुत कम लोग शामिल थे ताकि कोई जानकारी बाहर न जाए। विदेश मंत्री मार्को रूबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ, जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन, ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ मौजूद थे। व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स भी वहां थीं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बैठक में नहीं थे क्योंकि वे अजरबैजान में थे और बैठक अचानक तय हुई थी। ईरान पर हमले से पहले सिचुएशनल रूम में राष्ट्रपति ट्रम्प और बाकी अधिकारी। तस्वीर जून 2025 की है। नेतन्याहू बोले- ईरान पर हमला करने का यह सही वक्त नेतन्याहू ने एक घंटे का प्रेजेंटेशन दिया और ट्रम्प को समझाने की कोशिश की कि यह ईरान पर हमला करने का सबसे सही समय है। उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार कमजोर हो चुकी है और अगर अमेरिका और इजराइल मिलकर हमला करें तो ईरान की सैन्य ताकत जल्दी खत्म की जा सकती है। नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान का मिसाइल सिस्टम कुछ ही हफ्तों में तबाह किया जा सकता है और सरकार इतनी कमजोर हो जाएगी कि वह होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं कर पाएगी। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरान के अंदर फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं और अगर इजराइल सीक्रेट तरीके से मदद करे तो ये प्रदर्शन सरकार गिराने तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इराक से कुर्द लड़ाके ईरान में घुसकर एक और मोर्चा खोल सकते हैं जिससे सरकार जल्दी गिर जाएगी। इस दौरान एक वीडियो भी दिखाया गया जिसमें उन संभावित नेताओं को दिखाया गया जो सरकार गिरने के बाद सत्ता संभाल सकते हैं। इसमें रजा पहलवी का नाम भी था, जो ईरान के आखिरी शाह के बेटे हैं और फिलहाल अमेरिका में रहते हैं। नेतन्याहू ने बार-बार कहा कि अभी हमला जरूरी है, क्योंकि देर हुई तो ईरान मजबूत हो जाएगा। उनका कहना था कि कुछ न करने का खतरा, हमला करने से ज्यादा है। ट्रम्प 29 दिसंबर 2025 को फ्लोरिडा में अपने मार-ए-लागो क्लब में इजराइली PM नेतन्याहू से मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे हाथ मिलाते हुए। नेतन्याहू की बातों में आ गए ट्रम्प ट्रम्प इस पेशकश से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि यह प्लानिंग उन्हें सही लगती है। इससे नेतन्याहू को पता चल गया कि अमेरिका साथ आ सकता है। इसके बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का काम इस प्लानिंग को समझना था। अगले दिन सिचुएशन रूम में सिर्फ अमेरिकी अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें योजना को 4 हिस्सों में बांटा गया। 1. खामेनेई और टॉप लीडरशिप को खत्म करना 2. ईरान की सैन्य ताकत खत्म करना 3. देश में विद्रोह करवाना 4. सरकार बदलकर नई व्यवस्था लाना खुफिया एजेंसियों ने कहा कि पहले दो मकसद हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन बाकी दो असलियत से दूर हैं। CIA चीफ जॉन रैटक्लिफ ने इसे मजाक जैसा बताया और मार्को रूबियो ने इसे बेकार कहा। जब ट्रम्प बैठक में आए तो उन्हें यही रिपोर्ट दी गई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी वापस आ चुके थे और उन्होंने इस योजना पर गहरी चिंता जताई। जनरल डैन केन ने भी कहा कि इजराइल अक्सर योजनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है क्योंकि उसे अमेरिका की मदद चाहिए होती है। इसके बाद ट्रम्प ने साफ कहा कि अगर सरकार बदलना संभव नहीं भी है तो भी इससे फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि यह इजराइल या ईरान का मामला होगा, लेकिन उनका फैसला इस पर निर्भर नहीं करेगा। उनका ध्यान मुख्य रूप से ईरान के शीर्ष नेताओं को खत्म करने और उसकी सैन्य ताकत को तोड़ने पर था। नेतन्याहू 7 अप्रैल 2025 को व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान बोलते हुए। उनके साथ राष्ट्रपति ट्रम्प, उपराष्ट्रपति वेंस, विदेश मंत्री रूबियो और NSA माइकल वॉल्ट्ज भी मौजूद थे। ईरान को कमजोर समझने की भूल कर बैठे ट्रम्प आने वाले दिनों में कई बैठकें हुईं। इन बैठकों में जनरल केन ने चेतावनी दी कि अगर ईरान के खिलाफ बड़ा युद्ध शुरू होता है तो अमेरिका के हथियार तेजी से खत्म हो सकते हैं। खास तौर पर मिसाइल इंटरसेप्टर पहले से ही कम हैं क्योंकि अमेरिका यूक्रेन और इजराइल की मदद करता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज को सुरक्षित रखना बहुत मुश्किल होगा और अगर ईरान इसे बंद कर देता है तो वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा। लेकिन ट्रम्प को भरोसा था कि युद्ध बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा। उन्हें लगा कि ईरान ज्यादा जवाब नहीं दे पाएगा, जैसा कि पहले जून में हुए हमलों के बाद देखा गया था। जंग शुरू करने का वेंस ने सबसे ज्यादा विरोध किया जनरल केन ने यह कभी नहीं कहा कि जंग गलत है लेकिन वे बार-बार इसके खतरे से आगाह कराते रहे। वह हर प्लानिंग पर पूछते थे कि उसके बाद क्या होगा, लेकिन ट्रम्प अक्सर वही बातों पर
Mossad Biggest Missions Story; Israel Secret Operations Lessons

Hindi News Lifestyle Mossad Biggest Missions Story; Israel Secret Operations Lessons | Michael Bar Zohar Book Review 44 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक किताब: मोसाड: इजराइल की खुफिया एजेंसी के बेमिसाल अभियान (अंग्रेजी किताब ‘मोसाड- द ग्रेटेस्ट मिशन्स ऑफ द इजराइली सीक्रेट सर्विस’ का हिंदी अनुवाद) लेखक: माइकल बार-जोहार, निसिम मिशाल अनुवाद: मदन सोनी प्रकाशक: मंजुल पब्लिकेशन मूल्य: 499 रुपए इजराइल के प्रसिद्ध लेखक माइकल बार-जोहार और निसिम मिशाल ने खुफिया एजेंसी ‘मोसाड’ के सीक्रेट मिशन्स की कहानियां लिखी हैं। यह सिर्फ जासूसी कहानियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह साहस, रणनीति और धैर्य का जीवंत दस्तावेज है। इसकी लेखन शैली इतनी प्रभावशाली है कि हर मिशन एक थ्रिलर फिल्म जैसा लगता है। आज बुक रिव्यू में हम किताब की पांच सबसे रोमांचक और सहसिक मिशन की बात करेंगे। 1. अडोल्फ आइशमन की गिरफ्तारी दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाजी अधिकारी अडोल्फ आइशमन ने लाखों यहूदियों की हत्या करवाई और युद्ध के बाद गायब हो गया। वह अपनी पहचान छिपाकर अर्जेंटीना में ‘रिकार्डो क्लेमेंट’ नाम से एक सामान्य जीवन जी रहा था। लेकिन मोसाड ने 15 सालों तक उसकी तलाश जारी रखी और उसे ढूंढ निकाला। मिशन की खासियत मोसाड के एजेंट्स ने अर्जेंटीना जाकर आइशमन की पहचान की, उसे सड़क से उठाया और बेहोश करके एक विमान के जरिए गुप्त रूप से इजराइल ले आए। इस ऑपरेशन से कई अंतरराष्ट्रीय कानून और सीमाएं आड़े आईं, फिर भी इसे अंजाम तक पहुंचाया गया। इस मिशन से क्या सबक मिलते हैं, ग्राफिक में देखिए- 2. ‘ऑपरेशन एंटेब्बे’ में असंभव को बनाया संभव जुलाई 1976 में एयर फ्रांस का एक विमान हाईजैक हो गया। आतंकी विमान को युगांडा के एंटेब्बे एयरपोर्ट ले गए। उन्होंने गैर-यहूदी यात्रियों को छोड़ दिया, लेकिन 100 से ज्यादा यहूदियों को बंधक बना लिया। इजराइल से युगांडा की दूरी 4,000 किलोमीटर से भी ज्यादा थी और वहां का क्रूर तानाशाह ईदी अमीन आतंकियों की मदद कर रहा था। दुनिया को लगा कि बंधकों को बचाना नामुमकिन है। इसके बावजूद मोसाड ने बंधकों को छुड़ा लिया। मिशन की खासियत इजराइली कमांडोज ने रात के अंधेरे में हजारों मील उड़कर एंटेब्बे पर धावा बोला। इसमें एक मर्सिडीज का इस्तेमाल करके दुश्मन को चकमा दिया गया, जो हूबहू ईदी अमीन की कार जैसी दिखती थी। कमांडोज ने महज 53 मिनट के भीतर बंधकों को छुड़ा लिया। 3. म्यूनिख आतंकियों को खोज-खोजकर मारा 1972 के म्यूनिख ओलंपिक के दौरान ‘ब्लैक सितंबर’ नाम के एक आतंकी संगठन ने 11 इजराइली खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी। खेल के मैदान पर हुए इस खूनी खेल ने पूरी दुनिया को हिला दिया। मोसाड ने संकल्प लिया कि वह इस कायराना हमले के दोषियों को दुनिया के किसी भी कोने से ढूंढ निकालेगा। मिशन की खासियत मोसाड ने ‘रैथ ऑफ गॉड’ (ईश्वर का प्रकोप) नामक ऑपरेशन शुरू किया। मोसाड के हिट स्क्वाड ने दुनिया के अलग-अलग कोनों में छिपे उन सभी आतंकियों को एक-एक करके ढूंढ निकाला और खत्म कर दिया। यह मिशन कई साल तक चला। 4. ऑपरेशन डायमंड में दुश्मन का सबसे घातक विमान चुरा लिया 1960 के दशक में सोवियत संघ का ‘MiG-21’ लड़ाकू विमान दुनिया का सबसे घातक हथियार माना जाता था। अमेरिका और इजराइल इस विमान की तकनीक को समझना चाहते थे, लेकिन यह उनके लिए एक अनसुलझी पहेली था। इसे हासिल करना लगभग असंभव था, क्योंकि यह दुश्मन के सख्त पहरे में रहता था। मिशन की खासियत मोसाड ने बिना कोई हमला किए, एक इराकी ईसाई पायलट मुनीर रेडफा को इस बात के लिए राजी कर लिया कि वह अपना विमान उड़ाकर सीधे इजराइल ले आए। यह मिशन पूरी तरह से ‘साइकोलॉजिकल वॉरफेयर’ था। मोसाड ने बिना कोई लड़ाई लड़े ही दुश्मन की सबसे बड़ी ताकत को हथिया लिया। 5. ऑपरेशन मोजेज आमतौर पर खुफिया एजेंसियों का नाम सुनते ही जासूसी और हमलों का ख्याल आता है, लेकिन मोसाड का यह मिशन बिल्कुल अलग था। 1980 के दशक में इथियोपिया में भीषण अकाल और गृहयुद्ध छिड़ा हुआ था, जिससे वहां रहने वाले हजारों यहूदी संकट में थे। उन्हें वहां से निकालना लगभग नामुमकिन था। मिशन की खासियत मोसाड ने सूडान के तट पर एक नकली ‘डाइविंग रिसॉर्ट’ बनाया ताकि वे इथियोपियाई यहूदियों को समुद्र और हवा के रास्ते गुप्त रूप से इजराइल ला सकें। यह एक बेहद जोखिम भरा मिशन था, जहां जासूसों ने अपनी जान जोखिम में डालकर हजारों मासूमों की जान बचाई। अब ये जानते हैं कि किताब क्यों पढ़नी चाहिए- यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए? इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाड के बेमिसाल अभियान पढ़ने के पीछे कई कारण हैं- इस किताब में सच्ची घटनाओं पर आधारित रोमांचक कहानियां हैं। इसमें आपको रियल लाइफ थ्रिलर जैसा अनुभव मिलता है। यह साहस, धैर्य और रणनीति के बेहतरीन उदाहरण सिखाती है। किताब लीडरशिप और संकट में निर्णय लेने की कला समझाती है। इसमें बताया गया है कि बुद्धिमत्ता कितनी शक्तिशाली होती है। यह आपको इतिहास और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं की गहरी समझ देती है। किताब प्रेरणा देती है कि मुश्किल हालात में भी हार नहीं माननी चाहिए। यह मनोरंजन और ज्ञान का शानदार संतुलन प्रदान करती है। किसे पढ़नी चाहिए? यह किताब उन लोगों को बेहद पसंद आएगी, जो थ्रिलर फिल्में या कहानियां पसंद करते हैं। यह किताब किसे पढ़नी चाहिए, ग्राफिक में देखिए- किताब के बारे में मेरी राय इस किताब की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टोरीटेलिंग स्टाइल है। हर मिशन को इस तरह लिखा गया है कि पाठक खुद को उस स्थिति में महसूस कर सकता है। भाषा सरल और प्रभावशाली है, जिससे यह किताब हर तरह के पाठकों के लिए उपयुक्त बन जाती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि किताब एक विशेष दृष्टिकोण से लिखी गई है। इसलिए इन सभी घटनाओं और मिशनों को संतुलित रूप से समझने के लिए दूसरी किताबें भी पढ़नी चाहिए। ……………… ये खबर भी पढ़िए बुक रिव्यू- दिमाग में आने वाली हर बात सच नहीं: ज्यादा सोचने से ज्यादा दुख होगा, ओवरथिंकिंग न करें, समझने के लिए ये किताब पढ़ें ओवरथिंकिंग एक ऐसी समस्या है, जो व्यक्ति को अंदर-ही-अंदर खोखला कर सकती है। इसके कारण लोग भविष्य की चिंता में परेशान होते हैं या अतीत के पछतावे में जलते रहते हैं। जोसेफ नूयेन की किताब इसी मानसिक जाल को
dhurandhar ranveer singh fitness secret: धुरंधर के ‘हमजा’की स्टील बॉडी का राज है कैलिस्थेनिक्स! रणवीर सिंह फिटनेस ट्रेंड

Last Updated:March 19, 2026, 16:11 IST धुरंधर-2 मूवी में हमजा अली मजारी बने रणवीर सिंह की दीवानगी फैंस के सिर चढ़कर बोल रही है. पाकिस्तानियों को रूई की तरह धुनते हमजा की स्टील बॉडी का हर कोई दीवाना है, लेकिन क्या आपको पता है कि हमजा की इस स्टील बॉडी का सीक्रेट क्या है? यह है कैलिस्थेनिक्स जो आजकल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में फिटनेस का नया ट्रेंड बन गई है. आइए इंडियन स्कूल ऑफ कैलिस्थेनिक्स मुंबई के फाउंडर्स से जानते हैं इसके बारे में… धुरंधर मूवी के हीरो हमजा अली मजारी की स्टील बॉडी की दुनिया दीवानी हो रही है लेकिन थिएटर में गर्दा उड़ाते एक्शन और परफेक्ट मूव्स से पाकिस्तानियों को धूल चटाते रणवीर सिंह की फिटनेस का राज सिर्फ जिम और एक्सरसाइज नहीं हैं, बल्कि कैलिस्थेनिक्स है, जो फिटनेस वर्ल्ड का नया ट्रेंड बन गया है और बड़ी संख्या में युवा इसे अपने वर्क आउट रूटीन में शामिल कर रहे हैं. फिट रहने के लिए जिम की मशीनें और भारी वजन उठाना अब पुरानी बात हो गई है, अब बॉडी को फिट और परफेक्श शेप देने के लिए कैलिस्थेनिक्स ट्रेनिंग एक नई, ताजा और जबर्दस्त वर्कआउट ट्रेंड बनती जा रही है. बॉलीवुड हीरो रणवीर सिंह से लेकर टाइगर श्रॉफ, दिशा पटानी और जॉन अब्राहम तक इसे अपने डेली एक्सरसाइज रूटीन का हिस्सा बना चुके हैं. इंडियन स्कूल ऑफ कैलिस्थेनिक्स मुंबई के फाउंडर शुभम मिश्रा और जोएल प्रिंस बताते हैं कि कैलिस्थेनिक्स ट्रेनिंग का एक तरीका है जो आपमें शक्ति, लचीलापन, संतुलन और सहनशक्ति बढ़ाने के लिए आपके अपने शरीर के वजन का उपयोग करता है. इसमें सरल से जटिल तक के व्यायाम शामिल होते हैं जो प्रोग्रेसिव रूप से आपके शरीर के वजन का उपयोग करते हैं. पुश-अप्स, पुल-अप्स, स्क्वैट्स, डिप्स, लंजेस और हैंडस्टैंड कुछ सबसे आम हरकतें हैं. Add News18 as Preferred Source on Google कैलिस्थेनिक्स के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि आपको इसे करने के लिए जिम सेटअप या किसी महंगे उपकरण या मशीनों की जरूरत नहीं होती है. आप अपने घर के अंदर, बाहर या किसी खाली जगह पर अपने शरीर का सही तरीके से उपयोग करके ताकत, मांसपेशियों पर नियंत्रण और लचीलापन बना सकते हैं. कैलिस्थेनिक्स क्यों बन रहा है ट्रेंड? पिछले कुछ साल में कैलिस्थेनिक्स एक वैश्विक फिटनेस ट्रेंड बन गया है. इसके कई कारण हैं. सबसे पहले यह एक फंक्शनल ट्रेनिंग तकनीक है जो न केवल शरीर को मजबूत बनाती है बल्कि इसे बेहतर ढंग से चलाना भी सिखाती है. दूसरा, यह प्रशिक्षण सभी स्तरों के लोगों के लिए उपयुक्त है. शुरुआत में लोग पुश-अप्स और स्क्वैट्स जैसे बुनियादी तरीकों से इसकी ट्रेनिंग शुरू कर सकते हैं. वहीं जो टॉप और प्रेक्टिस्ड एथलीट्स हैं वे मसल-अप और प्लांच जैसे सुप्रीम स्किल्स भी सीख सकते हैं. तीसरी जो सबसे महत्वपूर्ण बात है वह यह है कि कैलिस्थेनिक्स तकनीक को आसानी से गार्डन, खुले मैदान, पार्क, ओपन जिम सेटअप या घर के अंदर भी किया जा सकता है. यह जिम वर्कआउट से कैसे अलग है? फिटनेस का यह नया तरीका पारंपरिक व्यायाम विधि और जिम वर्कआउट दोनों से ही थोड़ी सी अलग है क्योंकि पारंपरिक एक्सरसाइज में दौड़, प्राकृतिक रूप से व्यायाम, योग और आसन शामिल हैं जबकि जिम में अक्सर मशीनों और बाहरी वजन का उपयोग करते हैं, लेकिन कैलिस्थेनिक्स में शरीर पर नियंत्रण और शरीर के वजन की ताकत का उपयोग फिट रहने के लिए किया जाता है. कौन से सेलिब्रिटी इस फिटनेस नियम का पालन कर रहे हैं? भारत में भी, कई मशहूर हस्तियां और फिटनेस के प्रति उत्साही लोग कैलिस्थेनिक्स और बॉडीवेट प्रशिक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं. अभिनेता रणवीर सिंह, टाइगर श्रॉफ, दिशा पटानी और जॉन अब्राहम जैसे अभिनेताओं ने अपनी फिटनेस व्यवस्था में बॉडीवेट स्ट्रेंथ और फंक्शनल ट्रेनिंग को शामिल किया है. इसके अलावा, डिनो मोरिया अपनी फिटनेस के लिए बॉडीवेट ट्रेनिंग और फंक्शनल वर्कआउट भी करते हैं. सिर्फ फिल्म उद्योग ही नहीं बल्कि कई बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट और बिजनेसमेन भी इस फिटनेस स्टाइल को अपना रहे हैं. boAt के सह-संस्थापक अमन गुप्ता ने भी कई बार कहा है कि उन्हें कैलिस्थेनिक्स और बॉडीवेट ट्रेनिंग पसंद है. जब शार्क टैंक इंडिया पर एक प्रतियोगी द्वारा कैलिस्थेनिक्स पेश किया गया था, तो उन्होंने खुद बाद में आकर और कुछ मूवमेंट करके अपनी रुचि दिखाई. इसी तरह शुगर कॉस्मेटिक्स की सह-संस्थापक विनीता सिंह भी अपनी फिटनेस दिनचर्या में बॉडीवेट ट्रेनिंग और फंक्शनल व्यायाम शामिल करती हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें न केवल शरीर चुस्त और दुरुस्त रहता है बल्कि ऊर्जा से भरपूर रहता है. यह फिजिकली और मेंटली दोनों स्तरों पर पॉजिटिव असर डालता है. कैलिस्थेनिक्स केवल व्यायाम करने का एक तरीका नहीं है. यह फिटनेस के बारे में सोचने का एक तरीका है जो आत्मनिर्भरता पर आधारित है. यह लोगों को अपने शरीर के बारे में अधिक जागरूक बनाता है और उन्हें नियंत्रण और ताकत विकसित करने के तरीके को समझने में मदद करता है. यही कारण है कि यह आज युवाओं के बीच एक बहुत लोकप्रिय फिटनेस ट्रेंड बन गया है. First Published : March 19, 2026, 16:11 IST
Not Stones but a Health Treasure The Secret Behind Jamshedpur rs80 kg Pink Rocks benefits

Last Updated:March 11, 2026, 19:53 IST Jamshedpur Rock Salt News: जमशेदपुर की सड़कों पर इन दिनों गुलाबी चट्टानों से लदा एक ट्रैक्टर लोगों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ है. जिसे लोग साधारण पत्थर समझ रहे हैं, वह दरअसल सेहत का खजाना कहा जाने वाला शुद्ध सेंधा नमक है. हरियाणा के हनुमानगढ़ से आए व्यापारी साकची और बर्मामाइंस की सड़कों पर घूम-घूमकर पहाड़ों से निकला यह शुद्ध नमक बेच रहे हैं. जानें, क्या है इसकी कीमत और क्यों बढ़ रही है इसकी मांग. जमशेदपुरः लौहनगरी की सड़कों पर इन दिनों एक अजीबोगरीब नजारा लोगों के कौतूहल का केंद्र बना हुआ है. साकची और बर्मामाइंस जैसे इलाकों से गुजरते वक्त लोग एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को देखकर ठिठक जा रहे हैं. जिसमें विशालकाय गुलाबी पत्थर लदे हुए हैं. पहली नजर में किसी पहाड़ के टुकड़े जैसे दिखने वाले ये पत्थर दरअसल कोई साधारण चट्टान नहीं, बल्कि सेहत के लिए वरदान माने जाने वाला सेंधा नमक है. हनुमानगढ़ से जमशेदपुर तक का सफरहरियाणा के हनुमानगढ़ से आए शंकर और उनकी टीम इन दिनों शहर में घूम-घूमकर इस खास नमक की बिक्री कर रही है. ये लोग ट्रैक्टर पर ही नमक की बड़ी-बड़ी चट्टानें सजाकर लाते हैं. शंकर बताते हैं कि वे इन पत्थरों को पहाड़ों से तोड़कर लाते हैं. सीधे ग्राहकों तक शुद्ध रूप में पहुंचाते हैं. सेहत का खजाना, ₹80 से ₹100 में उपलब्धबाजार में मिलने वाले रिफाइंड नमक के मुकाबले लोग इस रॉक सॉल्ट की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं. जमशेदपुर में यह सेंधा नमक (गुलाबी पत्थर) ₹80 प्रति किलो और विशेष विधि से तैयार काला नमक ₹100 प्रति किलो की दर से बिक रहा है. बताया जाता है कि काला नमक को मिट्टी की हांडी में तपाकर तैयार किया जाता है. जो पाचन और गैस की समस्या में बेहद कारगर है. क्यों उमड़ रही है भीड़?आमतौर पर व्रत और उपवास में इस्तेमाल होने वाले इस नमक की मांग अब रोजाना के खान-पान में भी बढ़ रही है. लोग इसे शुद्धता की गारंटी मान रहे हैं क्योंकि यह सीधे पत्थर के रूप में उनके सामने मौजूद है. गुलाबी पत्थरों से लदे ट्रैक्टर को देखकर न केवल खरीदार बल्कि उत्सुक राहगीरों की भी भारी भीड़ जुट रही है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसे बेचने का तरीका भी थोड़ा अलग है. ट्रैक्टर पर नमक के बड़े-बड़े पत्थर सजाकर रखा गया है. खास अंदाज में आवाज लगाकर लोगों को बुलाया जाता है. गुलाबी पत्थरों से भरी यह गाड़ी सड़क से गुजरती है तो लोग रुककर इसे जरूर देखते हैं. About the Author Amit ranjan मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें Location : Jamshedpur,Purbi Singhbhum,Jharkhand First Published : March 11, 2026, 19:53 IST
Shivam Dubes Secret Train Journey to Mumbai Post T20 World Cup Win

स्पोर्ट्स डेस्क24 मिनट पहले कॉपी लिंक शिवम दुबे ने टी-20 वर्ल्डकप में 169 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए थे। टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद भारतीय ऑलराउंडर शिवम दुबे ट्रेन से मुंबई पहुंचे। उन्होंने अहमदाबाद-मुंबई सायाजी एक्सप्रेस की एसी-3 टियर कोच में अपर बर्थ पर छिपकर सफर किया, ताकि कोई उन्हें पहचान न सके। सफर के दौरान जब टिकट चेकर ने नाम को लेकर सवाल किया तो उनकी पत्नी अंजुम ने तुरंत बात संभालते हुए उनकी पहचान भी छिपा ली। ट्रेन के अपर बर्थ पर छिपकर किया सफर अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में फाइनल जीतने के बाद दुबे सोमवार सुबह करीब 5:10 बजे की ट्रेन से मुंबई रवाना हुए। उन्होंने पहचान छिपाने के लिए कैप, मास्क और फुल स्लीव टी-शर्ट पहनी। ट्रेन में बैठते ही वह एसी-3 टियर कोच की ऊपर वाली बर्थ पर जाकर लेट गए और रेलवे कंबल ओढ़ लिया ताकि कोई पहचान न सके। पत्नी ने TTE से छिपाई पहचान सफर के दौरान टिकट चेकर को दुबे के नाम पर शक हुआ। जब TTE ने पूछा कि शिवम दुबे कौन है, क्या वह क्रिकेटर है?, तब उनकी पत्नी अंजुम ने तुरंत जवाब दिया कि ऐसा कोई यहां नहीं है। इसके बाद टिकट चेकर आगे बढ़ गया और दुबे की पहचान छिपी रही। शिवम दुबे पत्नी अंजुम के साथ। बच्चों से मिलने की जल्दी में लिया फैसला दुबे ने बताया कि फाइनल के बाद मुंबई जाने वाली सभी फ्लाइट्स फुल थीं। सड़क मार्ग से जाना भी संभव था, लेकिन ट्रेन ज्यादा तेज विकल्प था। वह जल्द से जल्द अपने चार साल के बेटे अयान और दो साल की बेटी मेहविश से मिलना चाहते थे, जो मुंबई में घर पर थे। बोरीवली स्टेशन पर पुलिस ने मदद की करीब आठ घंटे के सफर के बाद जब ट्रेन मुंबई के बोरीवली स्टेशन पहुंचने वाली थी तो दुबे को भीड़ की चिंता होने लगी। उन्होंने पुलिस से मदद मांगी। पुलिस एस्कॉर्ट मिलने के बाद वह सुरक्षित तरीके से स्टेशन से बाहर निकल सके। टूर्नामेंट में निभाई फिनिशर की भूमिका टी-20 वर्ल्ड कप में दुबे ने फिनिशर की भूमिका निभाई। उन्होंने टूर्नामेंट में 235 रन बनाए, उनका औसत 39 और स्ट्राइक रेट 169 रहा। फाइनल में भी उन्होंने आखिरी ओवर में 3 चौके और 2 छक्के लगाकर भारत का स्कोर 250 के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। शिवम दुबे ने टी-20 वर्ल्ड कप में 235 रन बनाए। ————————– IPL से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… पूरा सीजन खेलेंगे धोनी:CSK CEO बोले- उनकी भूमिका पर फैसला कोचिंग स्टाफ करेगा, ट्रेनिंग शुरू की भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी IPL 2026 में पूरा सीजन खेलेंगे। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के CEO काशी विश्वनाथन ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। हालांकि उन्होंने कहा कि टीम में धोनी की भूमिका क्या होगी, इसका फैसला कोचिंग स्टाफ करेगा। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Iran Offers Secret Talks to US; Trump Says Time Ran Out

तेल अवीव/तेहरान19 मिनट पहले कॉपी लिंक अजरबैजान ने खुद पर हुए ड्रोन हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने कहा कि इस घटना पर ईरान को माफी मांगनी चाहिए। इसके अलावा ईरानी राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के अनुसार एक ड्रोन नखचिवान इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन से टकराया, जबकि दूसरा शकराबाद गांव में एक स्कूल के पास गिरा। इस घटना में एयरपोर्ट टर्मिनल को नुकसान पहुंचा और दो नागरिक घायल हो गए। राष्ट्रपति अलीयेव ने इस घटना को ‘कायराना हमला’ बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि ईरान ने इस ड्रोन हमले में हाथ होने से इनकार किया है और कहा है कि इस घटना की जांच की जा रही है। फुटेज अजरबैजान में नखचिवान इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमले का है। भारत ने खामेनेई की मौत पर शोक जताया भारत ने पहली बार ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक जताया है। भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास जाकर खामेनेई के निधन पर संवेदना जताई। उन्होंने कंडोलेंस बुक (शोक पुस्तिका) पर हस्ताक्षर कर श्रद्धांजलि दी। अमेरिका-इजराइल के हमले में 28 फरवरी को खामेनेई की मौत हो गई थी। ईरान ने एक दिन बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की थी। खामेनेई के निधन के बाद दुनियाभर के कई देशों से शोक संदेश भेजे जा रहे हैं। भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने आज नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। न्यूजीलैंड में ईरानी दूतावास ने दैनिक भास्कर का कार्टून शेयर किया। यह ईरान में स्कूल पर हमले से जुड़ा था, जिसमें 170 छात्राओं की मौत हो गई थी। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… अमेरिका और इजराइल ने बुधवार रात ईरान की राजधानी तेहरान में कई जगह बमबारी की। ईरानी हथियारों पर अमेरिकी हमले का सैटेलाइट फुटेज। बेरूत के दक्षिणी इलाके दहियाह में हिजबुल्लाह नेता नईम कासिम के भाषण के दौरान लोगों ने हवा में गोलियां चलाईं, जिससे आसमान में गोलियों की रोशनी दिखाई दी। बेरूत के दक्षिणी इलाके दहियाह में इजराइली हवाई हमले के बाद उठता धुआं। ईरान पर हमले के लिए उड़ान भरता अमेरिकी फाइटर जेट। इजराइल-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 20 मिनट पहले कॉपी लिंक अजरबैजान ने ईरान बॉर्डर के पास एयरस्पेस बंद किया अजरबैजान ने ईरान बॉर्डर के पास अपने एयरस्पेस का एक हिस्सा 12 घंटे के लिए बंद कर दिया है। यह फैसला उस घटना के बाद लिया गया जब अजरबैजान ने दावा किया कि ईरान से आए ड्रोन उसके नखचिवान स्वायत्त क्षेत्र में घुस आए और कुछ इलाकों में नुकसान पहुंचाया। 36 मिनट पहले कॉपी लिंक इजराइल बोला- जंग में ईरान के 300 मिसाइल लॉन्चर नष्ट किए इजराइल की सेना ने कहा है कि जंग के दौरान उसकी वायुसेना ने ईरान के 300 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट कर दिया है। इनमें से ज्यादातर मिसाइल लॉन्चर पश्चिमी ईरान में मौजूद थे। इसका मकसद ईरान की मिसाइल दागने की क्षमता को कम करना था। 52 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान बोला- अमेरिका-इजराइल के हमलों से 11 अस्पतालों को नुकसान ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में देश के 11 अस्पताल, सात आपात केंद्र, नौ एंबुलेंस और चार अन्य मेडिकल सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। मंत्रालय के अनुसार इन हमलों के दौरान कई अस्पतालों के साथ-साथ आपात चिकित्सा केंद्र और एंबुलेंस भी प्रभावित हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी ईरान में स्वास्थ्य ढांचे पर कम से कम 13 हमलों की पुष्टि की है, जिनमें अस्पतालों और मेडिकल सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। WHO ने कहा कि संघर्ष के दौरान अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं को निशाना बनना गंभीर चिंता का विषय है और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत इन संस्थानों की सुरक्षा जरूरी है। 02:49 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक ब्रिटेन साइप्रस में एंटी-ड्रोन हेलिकॉप्टर भेजेगा ब्रिटेन ने साइप्रस में सुरक्षा बढ़ाने के लिए एंटी-ड्रोन क्षमता से लैस वाइल्डकैट हेलिकॉप्टर भेजने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि ये हेलिकॉप्टर शुक्रवार को साइप्रस पहुंचेंगे। स्टार्मर ने बताया कि ब्रिटेन के रक्षा मंत्री फिलहाल साइप्रस में मौजूद हैं और वहां सैन्य अभियानों के समन्वय के साथ सैनिकों से मुलाकात कर रहे हैं। ब्रिटेन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूर्वी भूमध्यसागर में अपने युद्धपोत HMS ड्रैगन को भी तैनात कर रहा है। 02:28 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक ईरान बोला- अजरबैजान पर ड्रोन हमले में हमारा हाथ नहीं ईरान ने अजरबैजान में हुए ड्रोन हमले में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने अजरबैजानी समकक्ष से फोन पर बातचीत में कहा कि तेहरान ने अजरबैजान की ओर कोई ड्रोन या अन्य प्रोजेक्टाइल नहीं दागा। उन्होंने बताया कि ईरान की सेना इस घटना की जांच कर रही है। अराघची ने यह भी कहा कि ऐसे हमलों के पीछे इजराइल की भूमिका हो सकती है, जिसका उद्देश्य ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच संबंध खराब करना है। इससे पहले अजरबैजान ने नखचिवान क्षेत्र में हुए ड्रोन हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। 02:12 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक ईरान बोला- इराक में अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमला किया ईरान की सेना ने कहा है कि उसने उत्तरी इराक के एरबिल में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ड्रोन हमला किया है। यह जानकारी ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस हमले में अमेरिकी ठिकाने को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी है। 01:58 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक अजरबैजान बोला- ड्रोन हमले पर माफी मांगे ईरान अजरबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने कहा है कि नखचिवान क्षेत्र में हुए ड्रोन हमले को लेकर ईरान को माफी मांगनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को सजा दी जानी चाहिए। अलीयेव के मुताबिक नखचिवान अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे, उसके टर्मिनल, एक स्कूल और अन्य नागरिक इलाकों को ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिसमें दो लोग घायल हुए। उन्होंने इस घटना को “कायराना हमला” बताते हुए इसकी
China Nuclear Arms Race | US Claims Secret 2020 Test

वॉशिंगटन डीसी2 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका और चीन के बीच परमाणु हथियारों को लेकर तनाव फिर से बढ़ गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने चीन पर आरोप लगाया है कि उसने लगभग छह साल पहले एक सीक्रेट न्यूक्लियर टेस्ट किया था। अमेरिकी विदेश विभाग के सहायक सचिव क्रिस्टोफर येव ने सोमवार को कहा कि लगभग छह साल पहले, 22 जून 2020 को चीन के पश्चिमी इलाके में स्थित लोप नूर में अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट सेंटर पर एक विस्फोट हुआ था। यह विस्फोट 2.75 तीव्रता का था, जिसकी जानकारी पड़ोसी देश कजाकिस्तान के स्टेशन से मिली। येव ने इसे एक परमाणु विस्फोट बताया। उन्होंने कहा कि भूंकप माइनिंग विस्फोट से अलग थे। यह एक सिंगल फायर एक्सप्लोजन की तरह था, जो परमाणु परीक्षण की निशानी है। येव ने कहा कि चीन ने जानबूझकर अपनी परमाणु ताकत बढ़ाई है। उन्होने बताया कि 2020 से अब तक चीन के परमाणु हथियार 200 से बढ़कर 600 से ज्यादा हो गए हैं। अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 1,000 से ऊपर पहुंच जाएगी और अगले 4-5 सालों में चीन अमेरिका के बराबर हो सकता है। अमेरिकी विदेश विभाग के सहायक सचिव क्रिस्टोफर येव जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र समर्थित परमाणु सम्मेलन में अपनी बात रखते हुए। अमेरिका का दावा- चीन अपने परमाणु जखीरे का विस्तार कर रहा यह दावा ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और रूस के बीच का आखिरी बड़ा परमाणु समझौता, न्यू स्टार्ट संधि, इस महीने खत्म हो गया है। इस संधि के खत्म होने के साथ ही दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के हथियारों पर लगी सीमाएं हट गई हैं, जिससे नई न्यूक्लियर हथियारों की दौड़ की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका अब चीन और रूस से पारदर्शिता और हथियार और खतरनाक हथियारों को सीमित करने की मांग कर रहा है, जबकि चीन इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है। येव ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र समर्थित निरस्त्रीकरण (हथियारों का त्याग) कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि न्यू स्टार्ट समझौते की सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसमें चीन के तेजी से बढ़ते और गोपनीय परमाणु कार्यक्रम को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि रूस के पास करीब 2,000 गैर-रणनीतिक (नॉन-स्ट्रैटेजिक) परमाणु हथियार हैं, लेकिन चीन भी बिना किसी रोक-टोक के अपने परमाणु जखीरे का तेजी से विस्तार कर रहा है। अमेरिका, रूस और चीन के बीच तीन तरफा समझौता चाहते हैं ट्रम्प पिछले कुछ सालों में परमाणु हथियारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई विवाद हुए हैं। 2010 में अमेरिका और रूस ने न्यू स्टार्ट संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जो दोनों देशों के रणनीतिक परमाणु हथियारों की संख्या को सीमित करती थी। इस संधि के तहत दोनों देशों को अपने परमाणु वारहेड्स को 1,550 तक सीमित रखना था और मिसाइलों और बॉम्बर्स की संख्या पर भी पाबंदी थी। इस संधि में रूस के गैर-रणनीतिक परमाणु हथियारों, जैसे छोटी दूरी के हथियारों को शामिल नहीं किया गया था। ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में अमेरिका, रूस और चीन के बीच तीन तरफा परमाणु समझौते की कोशिश की थी, लेकिन यह असफल रही। ट्रम्प ने 2020 में अमेरिका के परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने की बात भी कही थी, हालांकि बाद में स्पष्ट किया गया कि इसमें विस्फोटक परीक्षण नहीं होंगे। 1992 के बाद अमेरिका ने कोई परमाणु परीक्षण नहीं किया है। चीन का आरोप- अमेरिका खुद परीक्षण शुरू करना चाहता चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सम्मेलन में चीन के राजदूत जियान शेन ने कहा कि अमेरिका के दावे पूरी तरह झूठे हैं। यह अमेरिका का बहाना है ताकि वह खुद परीक्षण शुरू कर सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन ने हमेशा परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) का पालन किया है और पांच परमाणु शक्तियों (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) की प्रतिबद्धता के मुताबिक कोई परीक्षण नहीं किया। चीन का कहना है कि उसका परमाणु भंडार अमेरिका या रूस जितना बड़ा नहीं है, इसलिए तीन तरफा वार्ता की मांग गलत है। उन्होंने बताया कि चीन की रणनीतिक स्थिति अलग है और वह केवल रक्षा के लिए परमाणु हथियार रखता है। वॉशिंगटन में कार्नेगी एंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के विशेषज्ञ टोंग झाओ ने कहा कि अगर चीन ने सच में परीक्षण किया तो उसकी जिम्मेदार परमाणु शक्ति वाली छवि खराब हो सकती है और अमेरिका को परीक्षण बहाल करने का मौका मिल सकता है। दूसरे देशों पर दबाव बना रहे ट्रम्प अमेरिका अब इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा रहा है। येव ने सम्मेलन में दूसरे देशों चीन और रूस पर बहुपक्षीय बातचीत में शामिल होने के लिए दबाव डालने के लिए कहा है। अमेरिका ने रूस और चीन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की है और फ्रांस, ब्रिटेन जैसे सहयोगियों के साथ चर्चा जारी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कम परमाणु हथियार चाहता है, लेकिन चीन और रूस की वृद्धि को देखते हुए चुप नहीं बैठेगा। यह पूरा मामला वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। अगर परमाणु परीक्षण फिर शुरू हुए तो हथियार दौड़ और तेज हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता और बातचीत से ही इस समस्या का समाधान निकल सकता है। परमाणु हथियारों की टेस्टिंग का आदेश दे चुके ट्रम्प ट्रम्प खुद भी साल 2025 के अंत में रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) को परमाणु हथियारों की तुरंत टेस्टिंग शुरू करने का आदेश दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह टेस्टिंग चीन और रूस के बराबर होनी चाहिए। अमेरिका ने आखिरी बार 23 सितंबर 1992 को परमाणु परीक्षण किया था। यह अमेरिका की 1,030वीं टेस्टिंग थी। टेस्टिंग रेनियर मेसा पहाड़ी के 2300 फीट नीचे नेवादा टेस्ट साइट पर की गई, ताकि रेडिएशन बाहर न फैले। इसका कोडनेम था- डिवाइडर। विस्फोट जमीन के नीचे इतनी जोर से हुआ कि नीचे की चट्टानें पिघल गई थीं। जमीन की सतह लगभग 1 फुट ऊपर उठकर फिर धंस गई। वहां अभी भी 150 मीटर चौड़ा और 10 मीटर गहरा गड्ढ़ा दिखाई देता है। चीन हर साल 100 नए परमाणु हथियार बना रहा दुनिया के 9 परमाणु हथियार संपन्न देश अपनी न्यूक्लियर ताकत लगातार बढ़ा रहे हैं। सबसे तेज रफ्तार से यह काम चीन कर रहा है, जिसने हर
Delhi-NCR becoming a hub of Adhoris and Tantriks?: delhi ncr secret world of aghoris and tantriks | occult crimes cases burari peeragarhi flyover | kamruddin baba cases delhi police | क्या अघोरियों और तांत्रिकों की गुप्त दुनिया बन गई दिल्ली-NCR? यहां हैं कई कमरुद्दीन की कहानियां, हिल जाएंगे आप

नई दिल्ली. पीरागढ़ी ट्रिपल मर्डर केस में ढोंगी तांत्रिक कमरुद्दीन से जुड़ी एक के बाद एक सच्चाइयां सामने आ रही हैं. ढोंगी तांत्रिक कमरुद्दीन दो लाख रुपये को पांच करोड़ में बदलने का दावा कर रहा था, वह भी राजधानी में बैठकर. क्या दिल्ली पुलिस और गाजियाबाद पुलिस को कमरुद्दीन बाबा की सच्चाई नहीं पता थी? क्या कमरुद्दीन बाबा को पुलिस प्रशासन का समर्थन प्राप्त था? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो हर कोई जानना चाहता है. क्या दिल्ली-एनसीआर हाल के वर्षों में अघोरियों और तांत्रिकों का गुप्त ठिकाना बनता जा रहा है? हाल के वर्षों में राजधानी में ऐसे-ऐसे कारनामे हुए हैं, जो कहीं न कहीं इसी ओर संकेत कर रहे हैं. बुराड़ी में एक ही घर में 11 लाशें मिलना, छोटी-छोटी बच्चे-बच्चियों की बलि और अब पीरागढ़ी में 2 लाख रुपये को 5 करोड़ में बदलने का खेल, क्या संकेत दे रहा है? कुछ साल पहले दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार का 11 सदस्य अपने ही घर में रहस्यमयी हालात में मृत पाये गए थे. 10 लोग एक ही कमरे में लटक रहे थे, उनके हाथ-पैर बंधे, आंखों पर पट्टी और मुंह पर टेप लगा हुआ था, जबकि एक 77-साल की बुजुर्ग महिला उसी घर के अलग कमरे में चारपाई पर पाई गई. दिल्ली पुलिस ने शुरुआत में इसे सामूहिक आत्महत्या माना, लेकिन घर से मिले दर्जनों डाइरी पन्नों में कुछ ऐसे निर्देश मिले, जिनमें ‘मुक्ति’ और ‘रूहानी अभ्यास’ जैसे शब्द लिखे थे. डायरी में लिखे नोट्स का स्वरूप इतना अजीब था कि शुरुआती जांच में पुलिस ने बताया कि ये आध्यात्मिक या रहस्यवादी प्रथाओं से जुड़े हो सकते हैं. लोग खुद सोचने लगे कि परिवार किसी तांत्रिक या रहस्यवादी विश्वास में फंसा हुआ था. हालांकि बाद में पुलिस ने इसे विशेष प्रकार के मानसिक असर से जुड़ा मामला बताया. आज भी इस रहस्य से पर्दा नहीं उठा है. AI Photo: तांत्रिकों का जाल क्यों बढ़ता ही जा रहा है? क्या अघोरियों और तांत्रिकों की गुप्त दुनिया बन गई दिल्ली-NCR? अभी कुछ दिन पहले दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके में एक कार के अंदर तीन शव मिले. एक महिला और दो पुरुष. शुरुआती जांच में पुलिस को शक हुआ कि ये आत्महत्या का मामला है. लेकिन जैसे-जैसे पुलिस जांच आगे बढ़ी तंत्र-मंत्र से जुड़ा मामला सामने आया. पुलिस ने एक तांत्रिक बाबा कमरुद्दीन को खोजना शुरू किया, जो गाजियाबाद के लोनी में मिला. उससे पूछताछ में खुलासा हुआ कि अंधविश्वास पर आधारित ‘धनवर्षा’ का झांसा देकर लोगों को मौत का घाट उतार दिया. ‘बरगद पूजा’ से ‘वशीकरण मंत्र’ तक इस तांत्रिक पर आरोप है कि उसने धनवर्षा के नाम पर लोगों को जहरीले लड्डू और पेय दिया और तीन की हत्या कर दी. आरोप के मुताबिक उसने पहले भी दो लोगों की हत्या में नाम रहा है. यह मामला बताता है कि तंत्र-मंत्र-आधारित झूठे वादों के चक्कर में लोग कितने आसानी से दिल्ली-एनसीआर में फंस रहे हैं. ai photo: वशीकरण, धन कमाने का झांसा या मानसिक त्रासदी के चलते कई मौतें हुई हैं. ‘संतान प्राप्ति के लिए बलि’ दिल्ली में पिछले कुछ सालों से वशीकरण, धन कमाने का झांसा या मानसिक त्रासदी के चलते कई मौतें हुई हैं. यहां ऐसे कई केस सामने आ रहे हैं जहां लोग अंधविश्वास या भ्रम में फंस रहे हैं और इससे जानें भी जा रही हैं. आधुनिकता की चमक के पीछे छिपा अंधकार कहने को दिल्ली देश का दिल है और तकनीक व शिक्षा का केंद्र है, लेकिन इसी चकाचौंध के पीछे अंधविश्वास का एक ऐसा काला बाजार फल-फूल रहा है, जो लोगों की जान का दुश्मन बन चुका है. दिल्ली-एनसीआर में दौलत और मोक्ष के लिए भागते लोग हाल के वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में ऐसी कई वारदातें हुई हैं जिन्होंने साबित कर दिया है कि यहां तांत्रिकों और स्वयंभू बाबाओं का जाल बहुत गहरा है. अमीर से लेकर गरीब तक, हर कोई अपनी समस्याओं के ‘चमत्कारी’ समाधान के चक्कर में इन खूनी तांत्रिकों के हत्थे चढ़ रहा है. मासूमों की बलि और सुसाइड पैक्ट सिर्फ बुराड़ी ही नहीं, सितंबर 2024 में वसंत कुंज के रंगपुरी इलाके में एक पिता और उसकी चार दिव्यांग बेटियों की लाशें मिलीं. शुरुआत में इसे भी तंत्र-मंत्र से जोड़ा गया था क्योंकि लाशों के हाथ-पैर में लाल धागे कलावा बंधे थे और कमरे का माहौल अजीब था. बाद में इसे आर्थिक तंगी से जोड़कर देखा गया. वहीं, रोहिणी और नॉर्थ दिल्ली के इलाकों में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जहां संतान प्राप्ति के लिए तांत्रिकों के कहने पर पड़ोस के बच्चों की हत्या या ‘बलि’ दे दी गई. ai photo: दिल्ली-एनसीआर में तांत्रिकों के पैर पसारने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण हैं. NCR क्यों बनता जा रहा है तांत्रिकों का गढ़? दिल्ली-एनसीआर में तांत्रिकों के पैर पसारने के पीछे कई मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारण हैं. भीड़भाड़ वाले शहरों में बढ़ता तनाव, वित्तीय असुरक्षा और रिश्तों में कड़वाहट लोगों को कमजोर बना देती है. इसी कमजोरी का फायदा उठाते हैं गाजियाबाद के लोनी, दिल्ली के जेजे क्लस्टर और सीमावर्ती इलाकों में छिपे ये ठग. ये बाबा खुद को ‘मसीहा’ बताते हैं और ‘वशीकरण’ या ‘दुश्मन का नाश’ जैसे विज्ञापनों से लोगों को फंसाते हैं. पीरागढ़ी केस का आरोपी कमरुद्दीन सालों से लोनी में अपना केंद्र चला रहा था और पुलिस की नजरों से बचकर लोगों की जान ले रहा था. दिल्ली के हालिया केस स्टडीज यह चीख-चीख कर कह रहे हैं कि कोई भी पूजा या तांत्रिक आपके पैसे दोगुना नहीं कर सकता और न ही मुर्दे आपसे बात कर सकते हैं. जब तक समाज में इन ‘शॉर्टकट’ समाधानों की मांग रहेगी, तब तक ये खूनी तांत्रिक दिल्ली की गलियों में अपनी दुकानें चलाते रहेंगे.








