Monday, 13 Apr 2026 | 05:14 AM

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सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एआर रहमान झुके:‘वीरा राजा वीरा’ में जूनियर डागर ब्रदर्स को क्रेडिट देंगे; कॉपीराइट विवाद पर सुनवाई जारी

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एआर रहमान झुके:‘वीरा राजा वीरा’ में जूनियर डागर ब्रदर्स को क्रेडिट देंगे; कॉपीराइट विवाद पर सुनवाई जारी

मशहूर संगीतकार एआर. रहमान ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने एक अहम फैसले के बाद सहमति जताई। उन्होंने कहा कि फिल्म ‘पोन्नियिन सेलवन-2’ के गीत ‘वीरा राजा वीरा’ में डागर परंपरा के प्रतिष्ठित संगीतज्ञ जूनियर डागर ब्रदर्स का नाम जोड़ा जाएगा। अब गाने की आधिकारिक क्रेडिट सूची में उनका नाम और योगदान शामिल किया जाएगा। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसका नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने किया। उन्होंने रहमान और फिल्म निर्माताओं को निर्देश दिया है कि वे इस नए क्रेडिट को पांच सप्ताह के भीतर सभी सोशल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म्स पर दर्ज कराएं। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इस सहमति का अर्थ यह नहीं है कि मुख्य कॉपीराइट मुकदमे के अन्य पहलुओं पर किसी तरह का प्रभाव पड़ेगा। वह मामला अब भी अपनी प्रक्रिया के तहत जारी रहेगा। रहमान के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंहवी ने बोर्ड को बताया कि यह सहमति बिना पूर्वाग्रह के रूप में दी गई है और इसका अधिकारिक मुकदमें में रहमान के पक्ष को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। अदालत ने माना कि भारत की शास्त्रीय संगीत धरोहर की मान्यता और सम्मान देना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि डागर परंपरा, जिसे डागरवानी ध्रुपद कहा जाता है, भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक अनमोल धारा रही है और इसका योगदान अद्वितीय है। यही वजह है कि अदालत ने क्रेडिट को संशोधित करने की सलाह दी। बता दें कि यह विवाद साल 2023 से चला आ रहा है, जब उस्ताद फैयाज वसीफुद्दीन डागर ने दावा किया था कि ‘वीरा राजा वीरा’ गीत में उनके परिवार की पुरानी ध्रुपद रचना ‘शिवा स्तुति’ का अनुमति के बिना उपयोग किया गया है। डागर ने आरोप लगाया कि गीत की ताल, लय और भाव मूल धुन से मेल खाती है, जो उनके पिता उस्ताद नसीर फैयाजुद्दीन डागर और चाचा उस्ताद नसीर जहीरुद्दीन डागर द्वारा पहले रिकॉर्ड की गई थी। हालांकि रहमान और निर्माताओं का कहना है कि उनकी रचना एक मूल और स्वतंत्र संगीत संरचना है, सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम उठाया है ताकि पारंपरिक संगीत जगत को उचित मान्यता और सम्मान मिल सके। यह फैसला संगीत जगत में कॉपीराइट और सांस्कृतिक परंपरा की पहचान के मामले में एक महत्वपूर्ण मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।

SC Slams Wildlife Law Violation

SC Slams Wildlife Law Violation

8 घंटे पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर और इन्फ्लुएंसर एल्विश यादव को सांप के जहर (Snake Venom) मामले में कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई प्रसिद्ध व्यक्ति कानून की अनदेखी कर वन्यजीवों का दुरुपयोग करता है, तो यह समाज के लिए बेहद गलत संदेश देता है। साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में Wildlife (Protection) Act, 1972 के प्रावधानों के तहत शिकायत की जांच की जाएगी और यह देखा जाएगा कि कहीं कानून का उल्लंघन तो नहीं हुआ है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक एक बेंच जिसमें जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह शामिल हैं, एल्विश की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने चार्जशीट और इस आपराधिक कार्रवाई को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि यदि प्रसिद्ध व्यक्ति जैसे आप वन्य जीवों जैसे बोलने में असमर्थ’ प्राणियों का उपयोग कर सकते हैं, तो यह समाज को गलत संदेश देगा। अदालत ने यह भी कहा कि कोई यह नहीं कह सकता कि वह मनमानी रूप से जो चाहे करे। एल्विश यादव के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने अदालत को बताया कि यादव न तो सांप का मालिक था और न ही उन्होंने खुद किसी अवैध गतिविधि में शामिल होने का कार्य किया। इसके अनुसार वह केवल एक म्यूजिक वीडियो शूट के लिए अतिथि के रूप में मौजूद थे, जिसमें सिंगर फाजिलपुरिया भी शामिल थे। उन्होंने यह भी कहा कि उन स्नेक्स के पास वंशाणु (venom sacs) और दांत नहीं थे, और साथ ही यह दावा किया कि प्रोड्यूसर ने आवश्यक अनुमति ले रखी थी। वहीं, प्रशासन की ओर से कहा गया कि पुलिस ने इस मामले में कई सांपों सहित संभावित जहर बरामद किया है, और यह भी जांच की जा रही है कि क्या अवैध रूप से जहर निकाला गया या उनका दुरुपयोग किया गया। कोर्ट ने प्रोसिक्यूशन को निर्देश दिया कि वह स्पष्ट करे कि क्या काश्तकारों (productions) ने सभी आवश्यक अनुमति ली थी या नहीं। बता दें कि यह मामला नोएडा के रेव पार्टियों से जुड़ा हुआ है, जहां आरोप है कि सांपों और उनके जहर का उपयोग मनोरंजन और नशीली सामग्री रूप में किया गया। इस मामले में एफआईआर नवंबर 2023 में दर्ज की गई थी और एल्विश यादव को बेल भी मिला था। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं और यह मुद्दा आगे की सुनवाई में विस्तृत रूप से देखा जाएगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

West Bengal SIR Voter List Case; Mamata Banerjee EC Vs Supreme Court

West Bengal SIR Voter List Case; Mamata Banerjee EC Vs Supreme Court

Hindi News National West Bengal SIR Voter List Case; Mamata Banerjee EC Vs Supreme Court | Calcutta HC नई दिल्ली5 घंटे पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी विवाद पर ‘असाधारण’ निर्देश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल को इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए मौजूदा और पूर्व जिला जज को तैनात करने को कहा। कोर्ट ने कहा कि सरकार और आयोग के बीच विश्वास की कमी है। SIR ड्राफ्ट रोल से जुड़े दावे और आपत्तियों का निपटारा और निगरानी हाईकोर्ट की ओर से अपॉइंट अफसर और जज करेंगे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के आदेश अदालत के आदेश माने जाएंगे। कलेक्टर और एसपी को इन आदेशों का पालन कराना होगा। साथ ही चुनाव आयोग को 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने की परमिशन दी गई है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर बाद में सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी करने की भी छूट दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के 4 निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रेड-ए अधिकारियों को SIR प्रक्रिया के लिए उपलब्ध नहीं कराने पर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की मदद के लिए माइक्रो-ऑब्जर्वर और राज्य सरकार के अधिकारी तैनात रहेंगे। कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को मुख्य सचिव, डीजीपी और चुनाव आयोग के अधिकारियों समेत सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाने का निर्देश। डीजीपी को SIR अधिकारियों को दी गई धमकियों पर क्या कदम उठाए गए, इस पर सप्लीमेंट्री एफिडेविट दाखिल करने का आदेश। कोर्ट ने जो मामले अभी लंबित हैं, हाईकोर्ट प्रशासन उन्हें संभालने के लिए फिलहाल कोई अस्थायी व्यवस्था (अंतरिम व्यवस्था) बनाए। कोर्ट रूम LIVE राज्य सरकार: बंगाल सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रेड-ए अधिकारियों की तैनाती नहीं की जाने पर वकील कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध करा दिए गए हैं। कपिल सिब्बल ने कहा कि एसडीएम राज्य में ग्रुप-A अधिकारी होते हैं। माइक्रो-ऑब्जर्वर को हटाने के लिए एसडीएम स्तर का अधिकारी जरूरी नहीं है। चुनाव आयोग: वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि एसडीएम रैंक के अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए गए। एसडीएम ऐसे अधिकारी होते हैं जो अर्ध-न्यायिक (कानूनी प्रभाव वाले) आदेश दे सकते हैं। ममता बनर्जी: वकील श्याम दीवान ने आरोप लगाया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर पर रोक लगने के बाद आयोग ने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर नाम की नई व्यवस्था शुरू कर दी है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस आरोप को गलत बताया है। सुप्रीम कोर्ट: राज्य सरकार से यदि सहयोग नहीं मिला तो वह न्यायिक अधिकारियों को तैनात करेगी या चुनाव आयोग को अन्य राज्यों से अधिकारी तैनात करने की अनुमति देगी। राज्य सरकार: कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी गई तो कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है। चुनाव आयोग: सीनियर लीडर डीएस नायडू ने असहयोग और कानून-व्यवस्था के मुद्दे उठाते हुए आरोप लगाया कि शरारती तत्वों ने दस्तावेज फाड़ दिए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।राजनीतिक कार्यकर्ता चुनाव अफसरों के खिलाफ बयान दे रहे हैं, लेकिन किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई। TMC सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीफ की TMC ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोगों की बड़ी जीत बताया। TMC का कहना है कि इससे साबित होता है कि रिवीजन प्रक्रिया में गड़बड़ियां थीं और असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे थे। वहीं भाजपा ने कन्फ्यूजन के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि राज्य प्रशासन प्रक्रिया में रुकावट डाल रहा है, जबकि चुनाव आयोग निष्पक्ष संशोधन चाहता है। BJP का दावा है कि SIR नकली वोटरों को हटाने के लिए जरूरी है, जबकि TMC इसे असली वोटरों को टारगेट करने की कोशिश बता रही है। साउथ 24 परगना में CEC के खिलाफ 7 शिकायत दर्ज बंगाल के साउथ 24 परगना जिले में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान लोगों को परेशान करने के आरोप में चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के खिलाफ जिबनताला पुलिस स्टेशन में सात शिकायतें दर्ज हुईं। ये शिकायतें TMC विधायक सौकत मोल्ला के साथ कुछ लोगों ने कीं। पुलिस अधिकारी ने कहा कि शिकायतों की जांच की जाएगी। विधायक का कहना है कि उनके क्षेत्र में बड़ी संख्या में नाम वोटर लिस्ट से हटाने की सिफारिश की गई है। विधायक ने आरोप लगाया कि करीब 33 हजार नाम हटाने की कोशिश की गई, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के हैं, और इसे असली वोटरों को रोकने की साजिश बताया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए। वहीं स्थानीय BJP नेता ने PTI से कहा कि ऐसी कोई आधिकारिक लिस्ट जारी नहीं हुई है और भारत के चुनाव आयोग के प्रमुख के खिलाफ सीधे FIR दर्ज नहीं की जा सकती। मामले से जुड़ी पिछली सुनवाई… 9 फरवरी: SIR में कोई रुकावट नहीं आने देंगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह बात सभी राज्यों के लिए है। जरूरत पड़ने पर आदेश जारी किए जाएंगे। EC ने कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर आरोप लगाया था कि कुछ बदमाशों ने बंगाल में SIR से जुड़े नोटिस जला दिए और अब तक इस मामले में कोई FIR नहीं हुई। कोर्ट ने बंगाल के DGP से जवाब मांगा है। DGP से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। पूरी खबर पढ़ें… 4 फरवरी: ममता बोलीं- EC बंगाल को निशाना बना रहा ममता ने कोर्ट में कहा था कि चुनाव से पहले 2 महीने में ऐसा कुछ करने की कोशिश की जा रही है, जो 2 साल में होना था। खेतीबाड़ी के मौसम में लोगों को परेशान किया जा रहा है। 24 साल बाद इसे 3 महीने में पूरा करने की जल्दबाजी क्यों है। 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। ECI की प्रताड़ना के चलते BLO की जान जा रही है। उन्होंने कहा कि बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। असम और नॉर्थ ईस्ट में ऐसा क्यों नहीं हो रहा। पूरी खबर पढ़ें… 28 जनवरी : ममता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई

Vikram Bhatt Scam Case; Udaipur Krishna Mandir Darshan

Vikram Bhatt Scam Case; Udaipur Krishna Mandir Darshan

बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर विक्रम भट्‌ट 2 महीने 11 दिन बाद उदयपुर सेंट्रल जेल से बाहर आ गए है। जेल से निकलते ही उन्होंने सबसे पहले कैंपस में स्थित भगवान शिव के दर्शन किए। इसके बाद मीडिया से बात करते बोले कि- . करीब ढाई महीने उदयपुर की जेल में काटे। मुझे उम्मीद नहीं यकीन था कि सच्चाई जरूर सामने आएगी। जेल में मेरे एक दोस्त बने। उन्होंने मुझे मेवाड़ की मिट्टी की तासिर के बारे में बताया। ये मेवाड़ है और यहां सत्य परेशान हो सकता, पराजित नहीं हो सकता है। मैं वहीं मेवाड़ का टीका लगाकर जा रहा हूं कि सत्य पराजित नहीं होगा। बता दें कि फिल्म बनाने के नाम पर 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में विक्रम भट्‌ट को 7 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। मामले में 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट से उन्हें और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्‌ट को नियमित जमानत मिली। श्वेतांबरी 13 फरवरी को अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर आ गई थी। उदयपुर सेंट्रल जेल से रिहा विक्रम भट्‌ट की PHOTOS उदयपुर की सेंट्रल जेल के मुख्य गेट पर गेट रजिस्ट्रर में हस्ताक्षर करते बॉलीवुड डायरेक्टर विक्रम भट्‌ट। जेल से बाहर आने के बाद विक्रम भट्‌ट ने सबसे पहले मंदिर में दर्शन किए। मंदिर की सीढ़ियों से उतरते हुए। उदयपुर सेंट्रल जेल से निकलकर कार में बैठकर रवाना होते हुए विक्रम भट्‌ट। मैं श्रीकृष्ण की तरह नया संघर्ष करने निकला विक्रम भट्‌ट ने कहा- मैं कृष्ण का भक्त हूं। मैं वहीं रहा जहां श्रीकृष्ण पैदा हुए थे। मैं उससे बेहतर और दो गुणा इंसान बाहर निकल रहा हूं। एक नया संघर्ष करने के लिए श्री कृष्ण की तरह, श्रीकृष्ण मेरे अंदर है। इस देश के कानून पर मुझे पूरा भरोसा है। उदयपुर पुलिस मुंबई से पकड़कर लेकर आई थी उदयपुर डीएसपी छगन राजपुरोहित की 6 सदस्यीय टीम ने 7 ​दिसंबर को मुंबई पहुंचकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को उनके जुहू स्थित गंगाभवन कॉम्प्लेक्स के फ्लैट से गिरफ्तार किया था। यहां भट्ट के सुरक्षा गार्डों ने पुलिस को रोका भी था। सुरक्षा गार्डों ने पुलिस से कहा था कि साहब और उनकी पत्नी घर पर नहीं हैं। हालांकि पुलिस को हकीकत पता थी और दोनों गिरफ्तार कर लिए गए थे। विक्रम भट्‌ट की पत्नी श्वेतांबरी 13 फरवरी को अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर आ गई थी। इसके बाद 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट से नियमित जमानत मिल गई। फिल्म के नाम पर 30 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला राजस्थान के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने 17 नवंबर को विक्रम भट्ट समेत 8 लोगों के खिलाफ 30 करोड़ की धोखाधड़ी की FIR उदयपुर में दर्ज कराई थी। डॉ. अजय मुर्डिया का आरोप है कि एक इवेंट में उनकी मुलाकात दिनेश कटारिया से हुई थी। दिनेश कटारिया ने उन्हें पत्नी की बायोपिक बनाने का प्रस्ताव दिया। इस सिलसिले में दिनेश कटारिया ने 24 अप्रैल 2024 को मुंबई स्थित वृंदावन स्टूडियो बुलाया था। कटारिया ने उन्हें विक्रम भट्ट से मिलवाया, जहां भट्ट से बायोपिक बनाने पर चर्चा हुई थी। कुछ दिन बाद विक्रम और श्वेतांबरी भट्ट ने डॉक्टर अजय मुर्डिया को कहा- 7 करोड़ रुपए और फाइनेंस करके वे 4 फिल्में 47 करोड़ में बना सकते हैं। इन फिल्मों की रिलीज से 100 से 200 करोड़ रुपए तक मुनाफा हो जाएगा। इसके बाद उनके स्टाफ में अमनदीप मंजीत सिंह, मुदित, फरजाना आमिर अली, अबजानी, राहुल कुमार, सचिन गरगोटे, सबोबा भिमाना अडकरी के नाम के अकाउंट में 77 लाख 86 हजार 979 रुपए ट्रांसफर करवाए। इस तरह 2 करोड़ 45 लाख 61 हजार 400 रुपए ट्रांसफर किए। वहीं इंदिरा एंटरटेनमेंट से 42 करोड़ 70 लाख 82 हजार 232 रुपए का भुगतान किया गया, जबकि चार फिल्मों का निर्माण 47 करोड़ में किया जाना तय हुआ था। ये खबर भी पढ़िए… उदयपुर जेल में बंद बॉलीवुड डायरेक्टर विक्रम भट्‌ट को जमानत:सुप्रीम कोर्ट का सुझाव- समझौते से सुलझाएं मामला; 30 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप फिल्म बनाने के नाम पर 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में बॉलीवुड डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दोनों को नियमित जमानत (रेगुलर बेल) दे दी। (पूरी खबर पढ़े…)

Vikram Bhatt Bail Update; Rs 30 Crore Fraud Case Supreme Court

Vikram Bhatt Bail Update; Rs 30 Crore Fraud Case Supreme Court

फिल्म बनाने के नाम पर 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में बॉलीवुड डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दोनों को नियमित जमानत (रेगुलर बेल) दे दी। . विक्रम भट्ट के आज शाम तक उदयपुर जेल से बाहर आने की संभावना है। इससे पहले 13 फरवरी को श्वेतांबरी भट्‌ट को अंतरिम जमानत दी गई थी। वह जेल से बाहर आ चुकी हैं। विक्रम भट्‌ट को 7 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया था। कोर्ट का सुझाव- आपसी समझौते से सुलझाएं मामला सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सुझाव भी दिया है। कोर्ट ने दोनों ही पक्षों को मिडिएशन सेल (मध्यस्थता केंद्र) में जाने को कहा है। कोर्ट का मानना है कि दोनों पक्षों को वहां उपस्थित होकर आपसी समझौते से इस मामले को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी को 13 फरवरी को ही अंतरिम जमानत मिल गई थी, जिसके बाद वह जेल से बाहर आ चुकी हैं। कोर्ट ने कहा- यह कमर्शियल विवाद है विक्रम भट्ट के वकील कमलेश दवे ने कोर्ट में अपनी दलील पेश की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह एक तरह का कमर्शियल डिस्प्यूट (व्यापारिक विवाद) है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस मामले को मुंबई कोर्ट ट्रांसफर करने के लिए बेवजह मजबूर न किया जाए। भट्ट के वकील तर्क दिया कि इस फिल्म और प्रोजेक्ट से जुड़े ज्यादातर वेंडर और लोग मुंबई के ही रहने वाले हैं। ऐसे में मामले की कानूनी बारीकियों को समझते हुए कोर्ट ने जमानत की अर्जी स्वीकार कर ली। उदयपुर पुलिस मुंबई से पकड़कर लेकर आई थी 7 ​दिसंबर को उदयपुर डीएसपी छगन राजपुरोहित की 6 सदस्यीय टीम ने मुंबई पहुंचकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को उनके जुहू स्थित गंगाभवन कॉम्प्लेक्स के फ्लैट से गिरफ्तार किया था। यहां भट्ट के सुरक्षा गार्डों ने पुलिस को रोका भी था। सुरक्षा गार्डों ने पुलिस से कहा था कि साहब व उनकी पत्नी घर पर नहीं हैं। हालांकि पुलिस को हकीकत पता थी और दोनों गिरफ्तार कर लिए गए थे। ये फोटो 7 दिसंबर का है। जब उदयपुर डीएसपी छगन राजपुरोहित की 6 सदस्यीय टीम ने मुंबई पहुंचकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया था। व्यापारी की पत्नी की बायोपिक बनाने के नाम पर रुपए लिए राजस्थान के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने 17 नवंबर को विक्रम भट्ट समेत 8 लोगों के खिलाफ 30 करोड़ की धोखाधड़ी की FIR उदयपुर में दर्ज कराई थी। डॉ. अजय मुर्डिया का आरोप है कि एक इवेंट में उनकी मुलाकात दिनेश कटारिया से हुई थी। दिनेश कटारिया ने उन्हें पत्नी की बायोपिक बनाने का प्रस्ताव दिया। इस सिलसिले में दिनेश कटारिया ने 24 अप्रैल 2024 को मुंबई स्थित वृंदावन स्टूडियो बुलाया था। कटारिया ने उन्हें विक्रम भट्ट से मिलवाया, जहां भट्ट से बायोपिक बनाने पर चर्चा हुई थी। कुछ दिन बाद विक्रम और श्वेतांबरी भट्ट ने डॉक्टर अजय मुर्डिया को कहा- 7 करोड़ रुपए और फाइनेंस करके वे 4 फिल्में 47 करोड़ में बना सकते हैं। इन फिल्मों की रिलीज से 100 से 200 करोड़ रुपए तक मुनाफा हो जाएगा। इसके बाद उनके स्टाफ में अमनदीप मंजीत सिंह, मुदित, फरजाना आमिर अली, अबजानी, राहुल कुमार, सचिन गरगोटे, सबोबा भिमाना अडकरी के नाम के अकाउंट में 77 लाख 86 हजार 979 रुपए ट्रांसफर करवाए। इस तरह 2 करोड़ 45 लाख 61 हजार 400 रुपए ट्रांसफर किए। वहीं इंदिरा एंटरटेनमेंट से 42 करोड़ 70 लाख 82 हजार 232 रुपए का भुगतान किया गया, जबकि चार फिल्मों का निर्माण 47 करोड़ में किया जाना तय हुआ था। विधानसभा में भी उठा था मामला यह मामला काफी समय से चर्चा में है। राजस्थान की विधानसभा में भी इसकी गूंज सुनाई दी थी। छबड़ा से विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने पिछले दिनों इस मुद्दे को सदन में जोर-शोर से उठाया था। …… विक्रम भट्‌ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… डायरेक्टर विक्रम भट्ट को राहत नहीं,पत्नी जेल से रिहा होगी:सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 18 को; फिल्म बनाने के लिए 30 करोड़ की धोखाधड़ी फिल्म बनाने के नाम पर 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में बॉलीवुड डायरेक्टर विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांभरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम जमानत दे दी। (पढ़िए पूरी खबर)