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West Bengal SIR Voter List Case; Mamata Banerjee EC Vs Supreme Court

West Bengal SIR Voter List Case; Mamata Banerjee EC Vs Supreme Court
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नई दिल्ली5 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी विवाद पर ‘असाधारण’ निर्देश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल को इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए मौजूदा और पूर्व जिला जज को तैनात करने को कहा।

कोर्ट ने कहा कि सरकार और आयोग के बीच विश्वास की कमी है। SIR ड्राफ्ट रोल से जुड़े दावे और आपत्तियों का निपटारा और निगरानी हाईकोर्ट की ओर से अपॉइंट अफसर और जज करेंगे।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के आदेश अदालत के आदेश माने जाएंगे। कलेक्टर और एसपी को इन आदेशों का पालन कराना होगा।

साथ ही चुनाव आयोग को 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने की परमिशन दी गई है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर बाद में सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी करने की भी छूट दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के 4 निर्देश

  • सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रेड-ए अधिकारियों को SIR प्रक्रिया के लिए उपलब्ध नहीं कराने पर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की मदद के लिए माइक्रो-ऑब्जर्वर और राज्य सरकार के अधिकारी तैनात रहेंगे।
  • कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को मुख्य सचिव, डीजीपी और चुनाव आयोग के अधिकारियों समेत सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाने का निर्देश।
  • डीजीपी को SIR अधिकारियों को दी गई धमकियों पर क्या कदम उठाए गए, इस पर सप्लीमेंट्री एफिडेविट दाखिल करने का आदेश।
  • कोर्ट ने जो मामले अभी लंबित हैं, हाईकोर्ट प्रशासन उन्हें संभालने के लिए फिलहाल कोई अस्थायी व्यवस्था (अंतरिम व्यवस्था) बनाए।

कोर्ट रूम LIVE

  • राज्य सरकार: बंगाल सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रेड-ए अधिकारियों की तैनाती नहीं की जाने पर वकील कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध करा दिए गए हैं। कपिल सिब्बल ने कहा कि एसडीएम राज्य में ग्रुप-A अधिकारी होते हैं। माइक्रो-ऑब्जर्वर को हटाने के लिए एसडीएम स्तर का अधिकारी जरूरी नहीं है।
  • चुनाव आयोग: वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि एसडीएम रैंक के अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए गए। एसडीएम ऐसे अधिकारी होते हैं जो अर्ध-न्यायिक (कानूनी प्रभाव वाले) आदेश दे सकते हैं।
  • ममता बनर्जी: वकील श्याम दीवान ने आरोप लगाया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर पर रोक लगने के बाद आयोग ने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर नाम की नई व्यवस्था शुरू कर दी है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस आरोप को गलत बताया है।
  • सुप्रीम कोर्ट: राज्य सरकार से यदि सहयोग नहीं मिला तो वह न्यायिक अधिकारियों को तैनात करेगी या चुनाव आयोग को अन्य राज्यों से अधिकारी तैनात करने की अनुमति देगी।
  • राज्य सरकार: कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि 28 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी गई तो कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • चुनाव आयोग: सीनियर लीडर डीएस नायडू ने असहयोग और कानून-व्यवस्था के मुद्दे उठाते हुए आरोप लगाया कि शरारती तत्वों ने दस्तावेज फाड़ दिए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।राजनीतिक कार्यकर्ता चुनाव अफसरों के खिलाफ बयान दे रहे हैं, लेकिन किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई।

TMC सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीफ की

TMC ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोगों की बड़ी जीत बताया। TMC का कहना है कि इससे साबित होता है कि रिवीजन प्रक्रिया में गड़बड़ियां थीं और असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे थे। वहीं भाजपा ने कन्फ्यूजन के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि राज्य प्रशासन प्रक्रिया में रुकावट डाल रहा है, जबकि चुनाव आयोग निष्पक्ष संशोधन चाहता है। BJP का दावा है कि SIR नकली वोटरों को हटाने के लिए जरूरी है, जबकि TMC इसे असली वोटरों को टारगेट करने की कोशिश बता रही है।

साउथ 24 परगना में CEC के खिलाफ 7 शिकायत दर्ज

बंगाल के साउथ 24 परगना जिले में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान लोगों को परेशान करने के आरोप में चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर के खिलाफ जिबनताला पुलिस स्टेशन में सात शिकायतें दर्ज हुईं। ये शिकायतें TMC विधायक सौकत मोल्ला के साथ कुछ लोगों ने कीं।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि शिकायतों की जांच की जाएगी। विधायक का कहना है कि उनके क्षेत्र में बड़ी संख्या में नाम वोटर लिस्ट से हटाने की सिफारिश की गई है।

विधायक ने आरोप लगाया कि करीब 33 हजार नाम हटाने की कोशिश की गई, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के हैं, और इसे असली वोटरों को रोकने की साजिश बताया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए।

वहीं स्थानीय BJP नेता ने PTI से कहा कि ऐसी कोई आधिकारिक लिस्ट जारी नहीं हुई है और भारत के चुनाव आयोग के प्रमुख के खिलाफ सीधे FIR दर्ज नहीं की जा सकती।

मामले से जुड़ी पिछली सुनवाई…

9 फरवरी: SIR में कोई रुकावट नहीं आने देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह बात सभी राज्यों के लिए है। जरूरत पड़ने पर आदेश जारी किए जाएंगे।

EC ने कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर आरोप लगाया था कि कुछ बदमाशों ने बंगाल में SIR से जुड़े नोटिस जला दिए और अब तक इस मामले में कोई FIR नहीं हुई। कोर्ट ने बंगाल के DGP से जवाब मांगा है। DGP से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। पूरी खबर पढ़ें…

4 फरवरी: ममता बोलीं- EC बंगाल को निशाना बना रहा

ममता ने कोर्ट में कहा था कि चुनाव से पहले 2 महीने में ऐसा कुछ करने की कोशिश की जा रही है, जो 2 साल में होना था। खेतीबाड़ी के मौसम में लोगों को परेशान किया जा रहा है। 24 साल बाद इसे 3 महीने में पूरा करने की जल्दबाजी क्यों है। 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। ECI की प्रताड़ना के चलते BLO की जान जा रही है।

उन्होंने कहा कि बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। असम और नॉर्थ ईस्ट में ऐसा क्यों नहीं हो रहा। पूरी खबर पढ़ें…

28 जनवरी : ममता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी

ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इस मामले में पक्षकार बनाया है।

इससे पहले उन्होंने 3 जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर SIR को मनमाना और त्रुटिपूर्ण बताते हुए रोकने की मांग की थी।

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ये खबर भी पढ़ें…

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के 7 अधिकारी सस्पेंड किए, SIR में लापरवाही-पावर के गलत उपयोग के आरोप

चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में 7 अधिकारियों को सस्पेंड किया है। सभी पर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में गंभीर लापरवाही, कर्तव्य की अनदेखी और वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप है।आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को निलंबित अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लेने के निर्देश भी दिए। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…
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कोर्ट ने कहा कि सरकार और आयोग के बीच विश्वास की कमी है। SIR ड्राफ्ट रोल से जुड़े दावे और आपत्तियों का निपटारा और निगरानी हाईकोर्ट की ओर से अपॉइंट अफसर और जज करेंगे।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के आदेश अदालत के आदेश माने जाएंगे। कलेक्टर और एसपी को इन आदेशों का पालन कराना होगा।

साथ ही चुनाव आयोग को 28 फरवरी को फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश करने की परमिशन दी गई है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर बाद में सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी करने की भी छूट दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के 4 निर्देश

  • सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रेड-ए अधिकारियों को SIR प्रक्रिया के लिए उपलब्ध नहीं कराने पर गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की मदद के लिए माइक्रो-ऑब्जर्वर और राज्य सरकार के अधिकारी तैनात रहेंगे।
  • कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को मुख्य सचिव, डीजीपी और चुनाव आयोग के अधिकारियों समेत सभी संबंधित पक्षों की बैठक बुलाने का निर्देश।
  • डीजीपी को SIR अधिकारियों को दी गई धमकियों पर क्या कदम उठाए गए, इस पर सप्लीमेंट्री एफिडेविट दाखिल करने का आदेश।
  • कोर्ट ने जो मामले अभी लंबित हैं, हाईकोर्ट प्रशासन उन्हें संभालने के लिए फिलहाल कोई अस्थायी व्यवस्था (अंतरिम व्यवस्था) बनाए।

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  • राज्य सरकार: बंगाल सरकार द्वारा पर्याप्त ग्रेड-ए अधिकारियों की तैनाती नहीं की जाने पर वकील कपिल सिब्बल और मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि ग्रुप-B अधिकारी उपलब्ध करा दिए गए हैं। कपिल सिब्बल ने कहा कि एसडीएम राज्य में ग्रुप-A अधिकारी होते हैं। माइक्रो-ऑब्जर्वर को हटाने के लिए एसडीएम स्तर का अधिकारी जरूरी नहीं है।
  • चुनाव आयोग: वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि एसडीएम रैंक के अधिकारी उपलब्ध नहीं कराए गए। एसडीएम ऐसे अधिकारी होते हैं जो अर्ध-न्यायिक (कानूनी प्रभाव वाले) आदेश दे सकते हैं।
  • ममता बनर्जी: वकील श्याम दीवान ने आरोप लगाया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर पर रोक लगने के बाद आयोग ने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर नाम की नई व्यवस्था शुरू कर दी है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इस आरोप को गलत बताया है।
  • सुप्रीम कोर्ट: राज्य सरकार से यदि सहयोग नहीं मिला तो वह न्यायिक अधिकारियों को तैनात करेगी या चुनाव आयोग को अन्य राज्यों से अधिकारी तैनात करने की अनुमति देगी।
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  • चुनाव आयोग: सीनियर लीडर डीएस नायडू ने असहयोग और कानून-व्यवस्था के मुद्दे उठाते हुए आरोप लगाया कि शरारती तत्वों ने दस्तावेज फाड़ दिए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।राजनीतिक कार्यकर्ता चुनाव अफसरों के खिलाफ बयान दे रहे हैं, लेकिन किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई।

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TMC ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोगों की बड़ी जीत बताया। TMC का कहना है कि इससे साबित होता है कि रिवीजन प्रक्रिया में गड़बड़ियां थीं और असली वोटरों के नाम हटाए जा रहे थे। वहीं भाजपा ने कन्फ्यूजन के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने कहा कि राज्य प्रशासन प्रक्रिया में रुकावट डाल रहा है, जबकि चुनाव आयोग निष्पक्ष संशोधन चाहता है। BJP का दावा है कि SIR नकली वोटरों को हटाने के लिए जरूरी है, जबकि TMC इसे असली वोटरों को टारगेट करने की कोशिश बता रही है।

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पुलिस अधिकारी ने कहा कि शिकायतों की जांच की जाएगी। विधायक का कहना है कि उनके क्षेत्र में बड़ी संख्या में नाम वोटर लिस्ट से हटाने की सिफारिश की गई है।

विधायक ने आरोप लगाया कि करीब 33 हजार नाम हटाने की कोशिश की गई, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के हैं, और इसे असली वोटरों को रोकने की साजिश बताया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए।

वहीं स्थानीय BJP नेता ने PTI से कहा कि ऐसी कोई आधिकारिक लिस्ट जारी नहीं हुई है और भारत के चुनाव आयोग के प्रमुख के खिलाफ सीधे FIR दर्ज नहीं की जा सकती।

मामले से जुड़ी पिछली सुनवाई…

9 फरवरी: SIR में कोई रुकावट नहीं आने देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह बात सभी राज्यों के लिए है। जरूरत पड़ने पर आदेश जारी किए जाएंगे।

EC ने कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर आरोप लगाया था कि कुछ बदमाशों ने बंगाल में SIR से जुड़े नोटिस जला दिए और अब तक इस मामले में कोई FIR नहीं हुई। कोर्ट ने बंगाल के DGP से जवाब मांगा है। DGP से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। पूरी खबर पढ़ें…

4 फरवरी: ममता बोलीं- EC बंगाल को निशाना बना रहा

ममता ने कोर्ट में कहा था कि चुनाव से पहले 2 महीने में ऐसा कुछ करने की कोशिश की जा रही है, जो 2 साल में होना था। खेतीबाड़ी के मौसम में लोगों को परेशान किया जा रहा है। 24 साल बाद इसे 3 महीने में पूरा करने की जल्दबाजी क्यों है। 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है। ECI की प्रताड़ना के चलते BLO की जान जा रही है।

उन्होंने कहा कि बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। असम और नॉर्थ ईस्ट में ऐसा क्यों नहीं हो रहा। पूरी खबर पढ़ें…

28 जनवरी : ममता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी

ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इस मामले में पक्षकार बनाया है।

इससे पहले उन्होंने 3 जनवरी को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर SIR को मनमाना और त्रुटिपूर्ण बताते हुए रोकने की मांग की थी।

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