Saiyara Recording Emotional | Singer Fahim Ulla Talks AI & Performance

फहीम अब्दुल्ला ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। बॉलीवुड के मशहूर सिंगर फहीम अब्दुल्ला रविवार को रायपुर पहुंचे, जहां उन्होंने SSIPMT मुजगहन में ऑर्गेनाइज लाइव कॉन्सर्ट में शानदार परफॉर्मेंस देकर ऑडियंस का दिल जीत लिया। उन्होंने एक के बाद एक अपने सुपरहिट गाने इश्क, झेलम और सैयारा गाकर युवाओं को झूमन . सिंगर फहीम अब्दुल्ला ने ‘दैनिक भास्कर डिटिजल’ से खास बातचीत की और अपने जर्नी के बारे में बताया। इसके अलावा उन्होंने AI को लेकर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टाइल ले सकता है, लेकिन हमारी अदायगी नहीं ले सकता। फहीम ने बताया कि सैयारा सॉन्ग रिकॉर्ड करने के दौरान वे बहुत इमोशनल हो गए थे। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… देखिए पहले ये तस्वीरें- फहीम अब्दुल्ला ने एक के बाद एक अपने सुपरहिट गाने गाकर फैंस को झूमने पर मजबूर कर दिया। SSIPMT में लाइव कॉन्सर्ट ऑर्गेनाइज किया गया था। फहीम के कॉन्सर्ट में पहुंचे लोगों ने खूब इंजॉय किया। सवाल: बचपन से लेकर अब तक का आपके सिंगिंग का सफर कैसा रहा? जवाब: घर में म्यूजिक बैकग्राउंड से कोई भी नहीं था। मुझे ही म्यूजिक में इंटरेस्ट था। मैं एक सामान्य कश्मीरी लड़के की लाइफ जिया हूं। मेरा परिवार कश्मीर का एक मध्यमवर्गीय परिवार है, मेरे बचपन से जो सिंगिंग के प्रति रुचि थी, बाद में पैशन बन गई। सवाल: अपने झेलम से शुरुआत की, फिर इश्क गाया और अब सैयारा गाना सुपरहिट हुआ है? आप अपने करियर से कितने संतुष्ट हैं। जवाब: मेरा सफर बहुत खूबसूरत था। मैंने हमेशा कोशिश की कि मैं वह गाने गाऊ, जो मेरे दिल को अच्छा लगे और दिल से ही निकले। कहा जाता है जब दिल से कोई बात निकलती है तो वहा दिल तक ही जाती है। मेरे पूरे सफर की यही एक खास बात रही, जो मैं आगे भी अपने साथ रखना चाहूंगा। सवाल: हम लोग जो गाने सुनते हैं वह स्टूडियो में तैयार होकर पूरे फिल्टर के साथ हम तक पहुंचते हैं। गाने रिकॉर्डिंग करने के समय क्या चुनौतियां होती हैं? जवाब: मुझे लगता है स्टूडियो में गाना रिकॉर्ड करने में कोई चुनौती नहीं होती, जितना लाइव कॉन्सर्ट में होती है। यह ठीक वैसा ही है जैसे फिल्म में एक्टिंग और थिएटर करने में। हम जब स्टूडियो में रिकॉर्ड करते हैं तो कई टेक ले सकते हैं, लेकिन कॉन्सर्ट में अपना बेस्ट देना पड़ता है। रही बात ऑटोट्यून की तो इसे सभी लोग इस्तेमाल करते हैं, लेकिन लाइव कॉन्सर्ट में हम रियल सिंगिंग करते हैं और लोग हमसे कनेक्ट कर जाते हैं। फहीम अब्दुल्ला ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। सवाल: यंग जनरेशन में सैयारा सॉन्ग सुनकर कई लोग रो पड़े, जब आप गाना रिकॉर्ड कर रहे थे उस दौरान आपका इमोशंस किस तरह था? जवाब: इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान मैं भी काफी भावुक हो गया था, और वही एहसास गाने में झलकता है। शायद इसी वजह से यह लोगों को पसंद आया। इसकी कंपोजिशन, म्यूजिक और लिरिक्स सभी बहुत प्यार और मेहनत से बनाए गए थे। जब लोगों ने इस गाने को सुना, तो उन्होंने उस भाव और प्यार को भी महसूस किया। सवाल: आपने एआर रहमान के साथ भी कुछ म्यूजिक्स बनाए हैं, उनसे आपको क्या सीखने को मिला? जवाब- रहमान सर के साथ काम करना एक अलग ही अनुभव होता है। वे आपको किसी तरह का दबाव महसूस नहीं होने देते, जिससे आप पूरी तरह फ्री होकर काम कर पाते हैं। अगर आपकी कोई अदायगी उन्हें पसंद आ जाती है, तो वे कहते हैं कि इसे दोहराइए। फिर उसमें कुछ और सुधार करके बेहतर ट्रैक बनाने की कोशिश करते हैं। इस दौरान आप उनके साथ काफी सहज और घुला-मिला महसूस करते हैं। मैंने बचपन से उनका संगीत सुना है, इसलिए मुझे ऐसा नहीं लगा कि मैं उनके साथ पहली बार काम कर रहा हूं। लाइव कॉन्सर्ट के दौरान फहीम एक युवक को सिंगिंग के लिए स्टेज पर बुला लिया। युवक ने भी फहीम के साथ गाने की कुछ लाइन दोहराई। सवाल: किसी भी कॉन्सर्ट करने से पहले क्या तैयारी करते हैं? जवाब: यह सब का अपना अलग-अलग तरीका होता है। मैं हाइड्रेट रहना पसंद करता हूं। कॉन्सर्ट के एक-दो दिन पहले ही ज्यादा पानी पीना शुरू कर देता हूं। कॉन्सर्ट के पहले थोड़ा रियाज इसलिए भी किया जाता है, जिससे पता चले कि आप सही साउंड कर रहे हैं कि नहीं। सवाल: आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) लोगों की आवाज कॉपी कर रहा है। इसे सिंगिंग के भविष्य के लिए आप किस तरह देखते हैं? जवाब: AI आपके टेक्सचर कॉपी कर सकता है, आपकी अदायगी कॉपी नहीं कर सकता न ही प्रोजेक्शन कॉपी कर सकता है। ज्यादा से ज्यादा एआईं आपका स्टाइल कॉपी कर सकता है, जैसे कि आप ज्यादातर किस तरीके से गाते हैं उसे पकड़ लेगा। लेकिन इसके अलावा जो इमोशन और डेप्थ है, उसे नहीं पकड़ पाएगा। जैसे मैं यह डिसाइड कर सकता हूं कि कोई गाने की एक लाइन को मैं सॉफ्ट गाऊंगा और कोई दूसरे लाइन को हार्ड करूंगा। एआई कैन नॉट डू डिस। कॉन्सर्ट में लोगों ने मोबाइल फोन के टॉर्च जलाकार फहीम का वेलकम किया। सवाल: आप खाली समय पर क्या करते हैं आपकी हॉबी क्या है? जवाब: मुझे बाइक चलाना खूब पसंद है, मैं पेंटिंग भी खूब किया करता था, लेकिन मसरूफियत की वजह से अब समय नहीं दे पा रहा हूं। मुझे गार्डनिंग भी बहुत पसंद है, लेकिन अभी भी जब फ्री रहता हूं तो यही सब करता हूं। सवाल: ऐसा सुना है कि आप इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर सिंगिंग की लाइन में आए, ये पूरा किस्सा क्या है? जवाब: इंटरनेट पर कुछ बातें गड़बड़ तरीके से मिक्स हो गई हैं। यह मेरे दोस्त असलान की कहानी है। वह इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर मेरे साथ मुंबई आया था। उस दौरान मैं भी अपनी मास्टर्स की पढ़ाई कर रहा था। बाद में मैंने भी अपना मास्टर्स पूरा कर लिया। फहीम के साथ फैन्स फोटो खिचवाते नजर आए। सवाल: सिंगिंग की दुनिया में कई बार प्रतिस्पर्धा बहुत व्यक्तिगत हो जाती है। बॉलीवुड में भी ऐसा कई बार देखा गया है। इस बारे में आप क्या सोचते हैं? जवाब: मैं कॉम्पिटिशन में यकीन नहीं करता। कला की दुनिया में और भी संभव नहीं है, क्योंकि से नापने और
Iran Prefers J.D. Vance Over Trump for Talks

नई दिल्ली1 दिन पहले कॉपी लिंक ईरान ने ट्रम्प सरकार को संकेत दिया है कि वह राष्ट्रपति की चुनी हुई टीम के बजाए जेडी वेंस के साथ बातचीत करना ज्यादा पसंद करेगा। CNN के मुताबिक सूत्रों का कहना है कि ईरान वेंस को युद्ध विरोधी मानता है। ईरान ट्रम्प के दामाद और सलाहकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ के साथ बातचीत नहीं करना चाहता। ईरान का कहना है उनके साथ बातचीत चल रही थी तभी अमेरिका-ईजराइल ने हमला कर दिया था। एक राजनयिक सूत्र ने CNN के हवाले से कहा- पुरानी टीम के साथ बातचीत की कोई संभावना नहीं है। ईरान को लगता है कि बातचीत का प्रस्ताव सिर्फ अमेरिका-इजराइल के लिए एक और चाल है, ताकि वे फिर से हमले के लिए कुछ और समय ले सकें। ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर (बाएं) और स्टीव विटकॉफ। (फाइल फोटो) व्हाइट हाउस बोला- कौन बातचीत करेगा यह ट्रम्प तय करेंगे इससे पहले ब्रिटिश अखबार गार्जियन ने भी मंगलवार को रिपोर्ट दी थी कि ईरान के अधिकारी स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से बात नहीं करना चाहते। हालांकि व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह गलत बताया और इसे विदेशी प्रचार बताया। व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि अमेरिका की तरफ से बातचीत कौन करेगा, इसका फैसला सिर्फ राष्ट्रपति ट्रम्प ही करेंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने साफ कहा कि केवल राष्ट्रपति ट्रम्प ही तय करेंगे कि उनकी ओर से बातचीत कौन करेगा। ट्रम्प ने भी कहा कि इस प्रक्रिया में वेंस के साथ-साथ मार्को रुबियो, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। ईरान को ट्रम्प के दामाद पर भरोसा नहीं ट्रम्प के करीबी लोगों के मुकाबले, वेंस को तेहरान में ऐसा नेता माना जा रहा है जो पश्चिम एशिया में सैन्य कार्रवाई को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं है। CNN के एक सूत्र के मुताबिक, “ऐसा माना जा रहा है कि वेंस इस संघर्ष को खत्म करने की कोशिश करेंगे।” एक और सूत्र ने CNN से कहा कि अगर बातचीत का कोई नतीजा निकालना है, तो जेडी वेंस को शामिल होना चाहिए। विटकॉफ और कुशनर के साथ कुछ नहीं होगा। यह पहले भी हो चुका है। ईरान के लिए यह पसंद का नहीं, बल्कि नुकसान कम करने का मामला है। वह ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहता है जिसका इस युद्ध से कम जुड़ाव हो। ट्रम्प प्रशासन में बढ़ रहा वेंस का कद जानकारी से यह संकेत मिलता है कि वेंस, जो पहले विदेशों में सैन्य दखल के खिलाफ रहे हैं, अब मुख्य वार्ताकार बन सकते हैं। इससे यह भी दिखता है कि सरकार में उनका प्रभाव बढ़ रहा है और ईरान उन्हें अमेरिका के अलग तरह के प्रतिनिधि के रूप में देख रहा है। वेंस पहले भी मिडिल ईस्ट में अमेरिकी दखल के खिलाफ रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने ट्रम्प का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि ट्रम्प सही फैसला लेंगे और पिछली गलतियों को नहीं दोहराया जाएगा। वेंस में बढ़ती दिलचस्पी यह दिखाती है कि वह अब अमेरिकी विदेश नीति में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। अगर ट्रम्प उन्हें आगे करते हैं, तो यह उनके लिए खुद को एक सफल सौदेबाज साबित करने का बड़ा मौका होगा। ईरान की तरफ से गालिबाफ कर सकते हैं बातचीत इससे पहले ट्रम्प ने सोमवार को दावा किया था कि वह ईरान में सबसे सम्मानित शख्स के साथ बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। तब माना गया था कि वे शख्स गालिबाफ हो सकते हैं। हालांकि गालीबाफ ने कुछ ही देर बाद सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। ऐसी खबरें वित्तीय और तेल बाजारों को प्रभावित करने के लिए फैलाई जा रही हैं। हालांकि ऐसा अभी भी माना जा रहा है कि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ बातचीत में शामिल हो सकते हैं। लेकिन जैसे अमेरिका को यह पसंद नहीं कि ईरान उसके वार्ताकार चुने, वैसे ही ईरान भी अपने प्रतिनिधि को लेकर सतर्क है। किसी भी बातचीत के लिए ईरान के सर्वोच्च नेता की मंजूरी जरूरी होगी। ईरान बिना शर्त युद्धविराम या आत्मसमर्पण नहीं चाहता। वह खुद को मजबूत स्थिति में मानते हुए बातचीत करना चाहता है। उनका मानना है कि क्षेत्र में दबाव बनाने में वह आगे हैं। गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड के पायलट रह चुके हैं और सख्त रुख रखने वाले नेता माने जाते हैं। खाड़ी देशों ने मध्यस्थता से दूरी बनाई फिलहाल स्थिति यह है कि बातचीत शुरू होने से पहले ही यह तय करना मुश्किल हो गया है कि टेबल पर कौन बैठेगा। इस बीच खाड़ी देशों ने मध्यस्थता से दूरी बना ली है। कतर ने कहा कि अगर ईरान खाड़ी देशों पर हमले बंद नहीं करता, तो वह बातचीत में मदद नहीं करेगा। ईरान ने यह शर्त नहीं मानी, जिसके बाद ये देश पीछे हट गए। उधर सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश भी इस कूटनीतिक प्रक्रिया से दूरी बनाते दिख रहे हैं। वॉशिंगटन में इस बात पर चर्चा हो रही है कि अगर बातचीत नाकाम होती है तो क्या ये देश सैन्य कार्रवाई में साथ देंगे। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सरकार स्तर पर बातचीत जारी है। दोनों पक्ष 15 प्वाइंट्स की एक योजना पर अपने-अपने मांग और रियायतों की समीक्षा कर रहे हैं। बातचीत के लिए तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों के नाम सामने आए हैं, लेकिन अभी कोई औपचारिक बैठक तय नहीं हुई है। ईरान ने UAE के फुजैरा में एक तेल ठिकाने पर हमला किया, जिससे वहां बहुत नुकसान पहुंचा। जंग से पहले ईरान-अमेरिका में हुई थी बातचीत अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले दोनों पक्षों के बीच कई दौर की शांति वार्ता हुई थी। यह बातचीत बातचीत सीधे नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष तरीके से हुई थी। इसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि एक मिडिएटर के जरिए अपनी बात पहुंचा रहे थे। ओमान ने इस दौरान मिडिएटर की भूमिका निभाई थी। ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बदर बिन हमद अल बुसैदी दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचा रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्ध से पहले कम से कम 2 से 3 राउंड की बातचीत हुई: पहला दौर- 6
Sonam Wangchuk Returns to Leh

लेह2 मिनट पहले कॉपी लिंक सोनम वांगचुक 170 दिन बाद लेह पहुंंचे। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक रविवार को 6 महीने (करीब 170 दिन) बाद लेह पहुंचे। केंद्र ने 14 मार्च को वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) हटाया था। इसके बाद उन्हें जोधपुर जेल से रिहा किया गया था। लेह में उनके लिए स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें वांगचुक के सैकड़ों समर्थक पहुंचे। वांगचुक ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा- जिस मकसद के लिए हम काम कर रहे हैं, उसके लिए एक नया सूरज उगेगा। हम उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि न्याय के नजरिए से कई गलतियां हुईं, लेकिन मैं किसी तरह की कड़वाहट नहीं रखना चाहता हूं, बातचीत के जरिए आगे बढ़ना चाहता हूं। अब मैं बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूं। इतने दिनों बाद पहाड़ों में लौटकर लोगों से मिलना खास है। वांगचुक के स्वागत की 4 तस्वीरें… सोनम वांगचुक के स्वागत के लिए हजारों लोग फूल और सफेद पटका लेकर पहुंचे। महिला समर्थक ने सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी को गले लगाया। सोनम वांगचुक 170 दिन बाद लेह पहुंचे। सोनम वांगचुक के बड़े-बड़े बैनर लगाए गए। हिरासत का समय आत्ममंथन का अवसर था वांगचुक ने जेल के समय को कठिन अनुभव बताते हुए कहा कि हिरासत का समय आत्ममंथन का अवसर था। वहीं, इस दौरान मेरी पत्नी गीतांजली को कानूनी लड़ाई में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। दरअसल, केंद्र ने 14 मार्च को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) हटाया था। पिछले साल लद्दाख में उनके अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई थी। दो दिन बाद 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें फौरन जोधपुर शिफ्ट कर दिया था। 170 दिन से वे जोधपुर जेल में थे। NSA सरकार को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है। 14 मार्च: सोनम वांगचुक जेल से रिहा केंद्र ने 14 मार्च को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) हटाया था। सरकार ने कहा कि यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, सोनम ने NSA एक्ट के तहत अपनी हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है। इसके बाद सुबह करीब 10 बजे सोनम की पत्नी गीतांजलि जोधपुर जेल पहुंचीं। कागजी कार्रवाई पूरी की गई। दोपहर करीब सवा एक बजे वांगचुक पत्नी के साथ एक निजी गाड़ी से जेल से निकले थे। सरकार बोली- बातचीत का माहौल बनाने लिए फैसला लिया सरकार ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की याचिका पर अंतिम सुनवाई (17 मार्च) के दो दिन पहले लिया। कोर्ट सुनवाई के दौरान वे वीडियो और फोटो देखेगा, जिनके आधार पर सरकार ने उन पर NSA लगाया था। केंद्र सरकार ने कहा कि यह फैसला लद्दाख में शांति, स्थिरता और संवाद का माहौल बनाने के लिए लिया गया है। लद्दाख में विभिन्न समुदायों और नेताओं के साथ लगातार बातचीत की जा रही है। हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों का असर छात्रों, नौकरी चाहने वालों, व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा था। क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने के लिए हाई-पावर्ड कमेटी के जरिए बातचीत जारी रहेगी। दो दिन पहले वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था लद्दाख के लिए ईमानदार संवाद आवश्यक है। मैंने एक्टिविज्म से दूरी नहीं बनाई है। लद्दाख के प्रति मेरी प्रतिबद्धता पहले जैसी ही है। इसका उद्देश्य लद्दाख के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी भविष्य है। 4 फरवरी को केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें लद्दाख के दो प्रमुख संगठन लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेट्स अलायंस शामिल हुए। इनके नेताओं ने वांगचुक की रिहाई की मांग दोहराई थी। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे सोनम सोनम को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद उनकी गिरफ्तारी की गई थी। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत हुई थी। 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने इस हिंसा को भड़काया। वांगचुक ने जन्म लद्दाख में हुआ, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की वांगचुक का जन्म 1966 में लेह जिले के अल्ची के पास, लद्दाख में हुआ था। उनके गांव में स्कूल न होने के कारण 9 साल की उम्र तक उनका किसी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ। इस दौरान उनकी मां ने उन्हें बुनियादी शिक्षा दी। 9 साल की उम्र में उन्हें श्रीनगर ले जाया गया और वहां एक स्कूल में दाखिला दिलाया गया। बाद में दिल्ली के विशेष केंद्रीय स्कूल में भी उन्होंने पढ़ाई की। फिर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech किया। शिक्षा में सुधार के लिए SECMOL बनाया इंजीनियरिंग के बाद वांगचुक ने साल 1988 में अपने भाई और पांच साथियों के साथ मिलकर स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख यानी SECMOL की शुरुआत की। इसका उद्देश्य लद्दाख के सरकारी स्कूलों की शिक्षा में सुधार लाना है। इसके लिए लद्दाख के सासपोल में मौजूद सरकारी हाई स्कूल में स्कूल सुधार के प्रयोग किए गए। इसके बाद, SECMOL ने ‘ऑपरेशन न्यू होप’ की शुरुआत की। इसके तहत सरकारी स्कूलों में एजुकेशन रिफॉर्म और लोकलाइज्ड टेक्स्टबुक्स, टीचर्स की ट्रेनिंग और गांव-स्तरीय शिक्षा समितियों के गठन की पहल शुरू की गई। फिर इसे शिक्षा विभाग और गांव की जनता के सहयोग से आगे बढ़ाया गया। जून 1993 से वांगचुक ने प्रिंट मैगजीन ‘लद्दाख्स मेलोंग’ की शुरुआत की। अगस्त 2005 तक लद्दाख की एकमात्र प्रिंट मैगजीन के एडिटर के रूप में काम किया। साल 2004 में हिल काउंसिल सरकार में शिक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया। ……………………….. ये खबर भी पढ़ें…. भास्कर इंटरव्यू: वांगचुक की पत्नी बोलीं- सच सामने आएगा, वे रिहा होंगे: लद्दाख हिंसा के
Indonesia BrahMos Missile Deal | India & Russia Talks $200M-$350M

नई दिल्ली19 घंटे पहले कॉपी लिंक इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए भारत के साथ एक एग्रीमेंट किया है। इंडोनेशिया डिफेंस मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन रिको रिकार्डो सिरैत ने सोमवार को न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को ये जानकारी दी। भारत और रूस की को-ओनरशिप वाली कंपनी ब्रह्मोस ने रॉयटर्स को बताया कि वह जकार्ता के साथ $200 मिलियन से $350 मिलियन की डील पर एडवांस्ड बातचीत कर रही है। रिको ने कहा कि यह एग्रीमेंट मिलिट्री हार्डवेयर और डिफेंस कैपेबिलिटीज़ के मॉडर्नाइजेशन का हिस्सा है। इससे पहले फिलीपींस ने भी ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदा था। 19 अप्रैल 2024: भारत ने फिलीपींस को भेजी थी ब्रह्मोस मिसालइ की पहली खेप, 3130 करोड़ में डील भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की पहली खेप 19 अप्रैल 2024 को सौंपी थी। ब्रह्मोस पाने वाला फिलीपींस पहला बाहरी देश है। भारत ने जनवरी 2022 में फिलीपींस से ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री के लिए 375 मिलियन डॉलर (3130 करोड़ रुपए) की डील की थी। इंडियन एयरफोर्स ने C-17 ग्लोब मास्टर विमान के जरिए इन मिसाइलों को फिलीपींस मरीन कॉर्प्स को सौंपा। इन मिसाइलों की स्पीड 2.8 मैक और मारक क्षमता 290 किमी है। एक मैक ध्वनि की गति 332 मीटर प्रति सेकेंड होती है। फिलीपींस को उस समय मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी मिली है, जब उसके और चीन के बीच साउथ चाइना सी में तनाव बढ़ा हुआ है। फिलीपींस ब्रह्मोस के 3 मिसाइल सिस्टम को तटीय इलाकों (साउथ चाइना सी) में तैनात करेगा, ताकि चीन के खतरे से निपटा जा सके। ब्रह्मोस के हर एक सिस्टम में दो मिसाइल लॉन्चर, एक रडार और एक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर होता है। इसके जरिए सबमरीन, शिप, एयक्राफ्ट से दो ब्रह्मोस मिसाइलें 10 सेकेंड के अंदर दुश्मन पर दागी जा सकती है। इसके अलावा भारत फिलीपींस को मिसाइल ऑपरेट करने की भी ट्रेनिंग देगा। पूरी खबर पढ़ें… भारत ने मिसाइल की खेप C-17 ग्लोबमास्टर विमान के जरिए फिलीपींस को पहुंचाई। कैसे नाम पड़ा ब्रह्मोस? ब्रह्मोस को भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के फेडरल स्टेट यूनिटरी इंटरप्राइज NPOM के बीच साझा समझौते के तहत विकसित किया गया है। ब्रह्मोस एक मध्यम श्रेणी की स्टील्थ रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इस मिसाइल को जहाज, पनडुब्बी, एयरक्राफ्ट या फिर धरती से लॉन्च किया जा सकता है। रक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, ब्रह्मोस का नाम भगवान ब्रह्मा के ताकतवर शस्त्र ब्रह्मास्त्र के नाम पर दिया गया। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया गया है कि इस मिसाइल का नाम दो नदियों भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि ये एंटी-शिप क्रूज मिसाइल के रूप में दुनिया में सबसे तेज है। ब्रह्मोस पर एक नजर ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पनडुब्बी, शिप, एयरक्राफ्ट या जमीन कहीं से भी छोड़ा जा सकता है। ब्रह्मोस रूस की P-800 ओकिंस क्रूज मिसाइल टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इस मिसाइल को भारतीय सेना के तीनों अंगों, आर्मी, नेवी और एयरफोर्स को सौंपा जा चुका है। ब्रह्मोस मिसाइल के कई वर्जन मौजूद हैं। ब्रह्मोस के लैंड-लॉन्च, शिप-लॉन्च, सबमरीन-लॉन्च एयर-लॉन्च वर्जन की टेस्टिंग हो चुकी है। जमीन या समुद्र से दागे जाने पर ब्रह्मोस 290 किलोमीटर की रेंज में मैक 2 स्पीड से (2500किमी/घंटे) की स्पीड से अपने टारगेट को नेस्तनाबूद कर सकती है। पनडुब्बी से ब्रह्मोस मिसाइल को पानी के अंदर से 40-50 मीटर की गहराई से छोड़ा जा सकता है। पनडुब्बी से ब्रह्मोस मिसाइल दागने की टेस्टिंग 2013 में हुई थी। ————- ये खबर भी पढ़ें… भारत बना रहा बेबी ब्रह्मोस, 20 गुना कम कीमत:भविष्य की जंग की तैयारी, सुरक्षा का नया फॉर्मूला रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने साफ कर दिया है कि भविष्य की जंग अब महीनों और सालों खिंचेगी। इस हकीकत को देख भारत भी तैयारी में जुट गया है। हाल ही में पिनाका रॉकेट सिस्टम के ‘हवाई संस्करण’ के परीक्षण को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। दरअसल, ब्रह्मोस जैसी अचूक सटीकता और मारक क्षमता के कारण इसे ‘बेबी ब्रह्मोस’ भी कहा जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Iran Offers Secret Talks to US; Trump Says Time Ran Out

तेल अवीव/तेहरान19 मिनट पहले कॉपी लिंक अजरबैजान ने खुद पर हुए ड्रोन हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने कहा कि इस घटना पर ईरान को माफी मांगनी चाहिए। इसके अलावा ईरानी राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के अनुसार एक ड्रोन नखचिवान इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन से टकराया, जबकि दूसरा शकराबाद गांव में एक स्कूल के पास गिरा। इस घटना में एयरपोर्ट टर्मिनल को नुकसान पहुंचा और दो नागरिक घायल हो गए। राष्ट्रपति अलीयेव ने इस घटना को ‘कायराना हमला’ बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि ईरान ने इस ड्रोन हमले में हाथ होने से इनकार किया है और कहा है कि इस घटना की जांच की जा रही है। फुटेज अजरबैजान में नखचिवान इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमले का है। भारत ने खामेनेई की मौत पर शोक जताया भारत ने पहली बार ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक जताया है। भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास जाकर खामेनेई के निधन पर संवेदना जताई। उन्होंने कंडोलेंस बुक (शोक पुस्तिका) पर हस्ताक्षर कर श्रद्धांजलि दी। अमेरिका-इजराइल के हमले में 28 फरवरी को खामेनेई की मौत हो गई थी। ईरान ने एक दिन बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की थी। खामेनेई के निधन के बाद दुनियाभर के कई देशों से शोक संदेश भेजे जा रहे हैं। भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने आज नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। न्यूजीलैंड में ईरानी दूतावास ने दैनिक भास्कर का कार्टून शेयर किया। यह ईरान में स्कूल पर हमले से जुड़ा था, जिसमें 170 छात्राओं की मौत हो गई थी। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… अमेरिका और इजराइल ने बुधवार रात ईरान की राजधानी तेहरान में कई जगह बमबारी की। ईरानी हथियारों पर अमेरिकी हमले का सैटेलाइट फुटेज। बेरूत के दक्षिणी इलाके दहियाह में हिजबुल्लाह नेता नईम कासिम के भाषण के दौरान लोगों ने हवा में गोलियां चलाईं, जिससे आसमान में गोलियों की रोशनी दिखाई दी। बेरूत के दक्षिणी इलाके दहियाह में इजराइली हवाई हमले के बाद उठता धुआं। ईरान पर हमले के लिए उड़ान भरता अमेरिकी फाइटर जेट। इजराइल-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 20 मिनट पहले कॉपी लिंक अजरबैजान ने ईरान बॉर्डर के पास एयरस्पेस बंद किया अजरबैजान ने ईरान बॉर्डर के पास अपने एयरस्पेस का एक हिस्सा 12 घंटे के लिए बंद कर दिया है। यह फैसला उस घटना के बाद लिया गया जब अजरबैजान ने दावा किया कि ईरान से आए ड्रोन उसके नखचिवान स्वायत्त क्षेत्र में घुस आए और कुछ इलाकों में नुकसान पहुंचाया। 36 मिनट पहले कॉपी लिंक इजराइल बोला- जंग में ईरान के 300 मिसाइल लॉन्चर नष्ट किए इजराइल की सेना ने कहा है कि जंग के दौरान उसकी वायुसेना ने ईरान के 300 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट कर दिया है। इनमें से ज्यादातर मिसाइल लॉन्चर पश्चिमी ईरान में मौजूद थे। इसका मकसद ईरान की मिसाइल दागने की क्षमता को कम करना था। 52 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान बोला- अमेरिका-इजराइल के हमलों से 11 अस्पतालों को नुकसान ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में देश के 11 अस्पताल, सात आपात केंद्र, नौ एंबुलेंस और चार अन्य मेडिकल सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। मंत्रालय के अनुसार इन हमलों के दौरान कई अस्पतालों के साथ-साथ आपात चिकित्सा केंद्र और एंबुलेंस भी प्रभावित हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी ईरान में स्वास्थ्य ढांचे पर कम से कम 13 हमलों की पुष्टि की है, जिनमें अस्पतालों और मेडिकल सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। WHO ने कहा कि संघर्ष के दौरान अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं को निशाना बनना गंभीर चिंता का विषय है और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत इन संस्थानों की सुरक्षा जरूरी है। 02:49 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक ब्रिटेन साइप्रस में एंटी-ड्रोन हेलिकॉप्टर भेजेगा ब्रिटेन ने साइप्रस में सुरक्षा बढ़ाने के लिए एंटी-ड्रोन क्षमता से लैस वाइल्डकैट हेलिकॉप्टर भेजने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि ये हेलिकॉप्टर शुक्रवार को साइप्रस पहुंचेंगे। स्टार्मर ने बताया कि ब्रिटेन के रक्षा मंत्री फिलहाल साइप्रस में मौजूद हैं और वहां सैन्य अभियानों के समन्वय के साथ सैनिकों से मुलाकात कर रहे हैं। ब्रिटेन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूर्वी भूमध्यसागर में अपने युद्धपोत HMS ड्रैगन को भी तैनात कर रहा है। 02:28 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक ईरान बोला- अजरबैजान पर ड्रोन हमले में हमारा हाथ नहीं ईरान ने अजरबैजान में हुए ड्रोन हमले में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने अजरबैजानी समकक्ष से फोन पर बातचीत में कहा कि तेहरान ने अजरबैजान की ओर कोई ड्रोन या अन्य प्रोजेक्टाइल नहीं दागा। उन्होंने बताया कि ईरान की सेना इस घटना की जांच कर रही है। अराघची ने यह भी कहा कि ऐसे हमलों के पीछे इजराइल की भूमिका हो सकती है, जिसका उद्देश्य ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच संबंध खराब करना है। इससे पहले अजरबैजान ने नखचिवान क्षेत्र में हुए ड्रोन हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। 02:12 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक ईरान बोला- इराक में अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमला किया ईरान की सेना ने कहा है कि उसने उत्तरी इराक के एरबिल में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ड्रोन हमला किया है। यह जानकारी ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस हमले में अमेरिकी ठिकाने को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी है। 01:58 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक अजरबैजान बोला- ड्रोन हमले पर माफी मांगे ईरान अजरबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने कहा है कि नखचिवान क्षेत्र में हुए ड्रोन हमले को लेकर ईरान को माफी मांगनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को सजा दी जानी चाहिए। अलीयेव के मुताबिक नखचिवान अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे, उसके टर्मिनल, एक स्कूल और अन्य नागरिक इलाकों को ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिसमें दो लोग घायल हुए। उन्होंने इस घटना को “कायराना हमला” बताते हुए इसकी









