Sunday, 12 Apr 2026 | 08:47 PM

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ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन

ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन

अमेरिका के एक F-15 फाइटर जेट को ईरान के ऊपर मार गिराए जाने के बाद उसके दोनों क्रू मेंबर्स को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया है। शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने दर्जनों लड़ाकू विमानों के साथ ईरान में ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। इस दौरान भारी गोलीबारी हुई, लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया है। पैराशूट से उतरने के बाद घायल हुआ था अफसर अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने 3 अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने शुक्रवार को F-15 विमान गिरा दिया था। उसमें दो लोग थे। एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर (जो हथियारों को ऑपरेट करता है)। पायलट को कुछ घंटों के भीतर ही बचा लिया गया था। लेकिन दूसरा क्रू मेंबर, जो वेपन सिस्टम ऑफिसर था, पैराशूट से उतरने के बाद घायल हो गया। चोट लगने के बावजूद वह चलने की हालत में था। इसके बाद वह ईरान के पहाड़ी इलाके में छिप गया और वहां एक दिन से ज्यादा समय तक पकड़ से बचता रहा। उसने अपनी SERE ट्रेनिंग (जिंदा रहना, बचना, विरोध करना और निकलना) का इस्तेमाल करते हुए कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के कठिन पहाड़ी इलाके में खुद को छिपाए रखा। CIA ने अफवाह फैलाकर ईरान को भटकाया अमेरिका और ईरान दोनों उसे ढूंढ रहे थे। ईरान की IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड) भी उसे पकड़ने के लिए वहां पहुंच गई थी। दूसरे अधिकारी को ढूंढना बहुत मुश्किल था। इसके लिए CIA ने एक चाल चली। उन्होंने ईरान के अंदर गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना उसे पहले ही ढूंढ चुकी है और उसे निकालने की तैयारी कर रही है। इससे ईरान की खोज की दिशा भटक गई। इसी दौरान CIA ने अपनी खास तकनीक का इस्तेमाल करके उस अधिकारी की सही लोकेशन पता कर ली। यह लोकेशन पेंटागन, अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस को दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया। अफसर के पास सिर्फ 1 पिस्तौल थी शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने भारी हवाई सुरक्षा के साथ ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। घायल अफसर के पास सिर्फ एक पिस्तौल थी। जब अमेरिकी फोर्स उस एयरमैन तक पहुंचने लगी, तब गोलीबारी भी हुई। लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिका के पूर्व सेना अधिकारी मेजर जनरल (रिटायर्ड) मार्क मैककार्ली ने CNN से कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वह पहाड़ी था और पूरी तरह सुनसान था। इसके साथ ही ईरान की तरफ से उस सैनिक को पकड़ने पर इनाम भी घोषित किया गया था। इन सभी हालात को देखते हुए यह मिशन बेहद खतरनाक था। मैककार्ली ने यह भी बताया कि उस सैनिक की लोकेशन एक इमरजेंसी बीकन (सिग्नल देने वाला उपकरण) के जरिए पता चली होगी। जब फाइटर जेट गिरता है, तो यह बीकन लगातार कमांड सेंटर को लोकेशन भेजता रहता है। पहली बार दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट इस रेस्क्यू मिशन की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरान की सेना ने मार गिराया। यह इस एक महीने से चल रही जंग में पहला मौका था, जब किसी अमेरिकी फाइटर जेट को दुश्मन की फायरिंग से गिराया गया। F-15E विमान में दो लोग थे, जो इजेक्ट होकर बाहर निकले। पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स सिस्टम ऑफिसर का पता नहीं चल पाया, जिससे तुरंत बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया। हालांकि, मिशन के दौरान एक बड़ी रुकावट भी आई। दो ट्रांसपोर्ट विमान, जो कमांडो और एयरमैन को निकालने वाले थे, ईरान के एक दूरदराज बेस पर खराब हो गए। इसके बाद तीन नए विमान भेजे गए। अमेरिकी फोर्स ने उन खराब विमानों को उड़ा दिया, ताकि वे ईरान के हाथ न लगें। ट्रम्प बोले- पहली बार एक साथ दो सफल रेस्क्यू ऑपरेशन हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस सैनिक को बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान भेजे, जिनमें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार लगे थे। उन्होंने बताया कि सैनिक घायल जरूर हुआ है, लेकिन वह ठीक हो जाएगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन एक और पायलट के सफल रेस्क्यू के बाद हुआ, जिसे एक दिन पहले बचाया गया था। उस समय इसकी जानकारी इसलिए नहीं दी गई थी, ताकि दूसरे ऑपरेशन पर खतरा न आए। ट्रम्प के मुताबिक, सैन्य इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि दुश्मन के इलाके के अंदर, दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशन में सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा दबदबा है, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि F-15 जेट को ईरान ने कैसे मार गिराया। ट्रम्प ने इस ऑपरेशन को पूरे अमेरिका के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि देश को इस पर एकजुट होना चाहिए।

ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन

ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन

अमेरिका के एक F-15 फाइटर जेट को ईरान के ऊपर मार गिराए जाने के बाद उसके दोनों क्रू मेंबर्स को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया है। शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने दर्जनों लड़ाकू विमानों के साथ ईरान में ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। इस दौरान भारी गोलीबारी हुई, लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया है। पैराशूट से उतरने के बाद घायल हुआ था अफसर अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने 3 अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने शुक्रवार को F-15 विमान गिरा दिया था। उसमें दो लोग थे। एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर (जो हथियारों को ऑपरेट करता है)। पायलट को कुछ घंटों के भीतर ही बचा लिया गया था। लेकिन दूसरा क्रू मेंबर, जो वेपन सिस्टम ऑफिसर था, पैराशूट से उतरने के बाद घायल हो गया। चोट लगने के बावजूद वह चलने की हालत में था। इसके बाद वह ईरान के पहाड़ी इलाके में छिप गया और वहां एक दिन से ज्यादा समय तक पकड़ से बचता रहा। उसने अपनी SERE ट्रेनिंग (जिंदा रहना, बचना, विरोध करना और निकलना) का इस्तेमाल करते हुए कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के कठिन पहाड़ी इलाके में खुद को छिपाए रखा। CIA ने अफवाह फैलाकर ईरान को भटकाया अमेरिका और ईरान दोनों उसे ढूंढ रहे थे। ईरान की IRGC (रेवोल्यूशनरी गार्ड) भी उसे पकड़ने के लिए वहां पहुंच गई थी। दूसरे अधिकारी को ढूंढना बहुत मुश्किल था। इसके लिए CIA ने एक चाल चली। उन्होंने ईरान के अंदर गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना उसे पहले ही ढूंढ चुकी है और उसे निकालने की तैयारी कर रही है। इससे ईरान की खोज की दिशा भटक गई। इसी दौरान CIA ने अपनी खास तकनीक का इस्तेमाल करके उस अधिकारी की सही लोकेशन पता कर ली। यह लोकेशन पेंटागन, अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस को दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया। अफसर के पास सिर्फ 1 पिस्तौल थी शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने भारी हवाई सुरक्षा के साथ ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। घायल अफसर के पास सिर्फ एक पिस्तौल थी। जब अमेरिकी फोर्स उस एयरमैन तक पहुंचने लगी, तब गोलीबारी भी हुई। लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिका के पूर्व सेना अधिकारी मेजर जनरल (रिटायर्ड) मार्क मैक्कार्ली ने CNN से कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वह पहाड़ी था और पूरी तरह सुनसान था। इसके साथ ही ईरान की तरफ से उस सैनिक को पकड़ने पर इनाम भी घोषित किया गया था। इन सभी हालात को देखते हुए यह मिशन बेहद खतरनाक था। मैक्कार्ली ने यह भी बताया कि उस सैनिक की लोकेशन एक इमरजेंसी बीकन (सिग्नल देने वाला उपकरण) के जरिए पता चली होगी। जब फाइटर जेट गिरता है, तो यह बीकन लगातार कमांड सेंटर को लोकेशन भेजता रहता है। पहली बार दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट इस रेस्क्यू मिशन की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरान की सेना ने मार गिराया। यह इस एक महीने से चल रही जंग में पहला मौका था, जब किसी अमेरिकी फाइटर जेट को दुश्मन की फायरिंग से गिराया गया। F-15E विमान में दो लोग थे, जो इजेक्ट होकर बाहर निकले। पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स सिस्टम ऑफिसर का पता नहीं चल पाया, जिससे तुरंत बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया। अमेरिका ने निकलने से पहले अपने दो विमान जलाए द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से एक बचाए गए अमेरिकी एयरमैन और कमांडो को निकालने वाले दो ट्रांसपोर्ट विमान वहीं फंस गए थे। इसके बाद अमेरिका को तीन नए विमान भेजने पड़े, ताकि एयरमैन और सैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में अमेरिकी सेना ने उन फंसे हुए ट्रांसपोर्ट विमानों को उड़ा दिया, ताकि वे ईरान के हाथ न लगें। ईरान के अंदर से आई तस्वीरों से संकेत मिलता है कि ये विमान एक अस्थायी एयरस्ट्रिप पर फंस गए थे, जिसे अमेरिकी सेना ने देश के एक दूरदराज इलाके में बनाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इस पूरे रेस्क्यू मिशन में सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस सैनिक शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बचाए गए वेपन्स ऑफिसर को रेस्क्यू के बाद इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया। ट्रम्प बोले- पहली बार एक साथ दो सफल रेस्क्यू ऑपरेशन हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस सैनिक को बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान भेजे, जिनमें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार लगे थे। उन्होंने बताया कि सैनिक घायल जरूर हुआ है, लेकिन वह ठीक हो जाएगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन एक और पायलट के सफल रेस्क्यू के बाद हुआ, जिसे एक दिन पहले बचाया गया था। उस समय इसकी जानकारी इसलिए नहीं दी गई थी, ताकि दूसरे ऑपरेशन पर खतरा न आए। ट्रम्प के मुताबिक, सैन्य इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि दुश्मन के इलाके के अंदर, दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशन में सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा दबदबा है, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि F-15 जेट को ईरान ने कैसे मार गिराया। ट्रम्प ने इस ऑपरेशन को पूरे अमेरिका के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि देश को इस पर एकजुट होना चाहिए। —————————- ये खबर भी पढ़ें… 23 साल बाद दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट:ट्रम्प का ईरानी आसमान पर कब्जे का दावा गलत; अब तक अमेरिका के 7 विमान तबाह ईरान जंग के एक महीने बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। 19 मिनट के भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और

Hormuz Strait Crisis; Iran US War Impact

Hormuz Strait Crisis; Iran US War Impact

वॉशिंगटन डीसी4 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहा युद्ध अब इतना बढ़ गया है कि होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया है। इस वजह से सैकड़ों तेल टैंकर दोनों तरफ खड़े हैं और आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि वह इस समुद्री रास्ते को ‘किसी भी तरह’ फिर से खोलेंगे। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह काम इतना आसान नहीं है। अगर ईरान से कोई समझौता नहीं होता या अमेरिका कोई खतरनाक मिलिट्री एक्शन नहीं लेता, तो इस रास्ते पर पूरी तरह से आवाजाही बहाल करना मुश्किल होगा। संकरे रास्ते का फायदा उठाता है ईरान इसकी सबसे बड़ी वजह इस इलाके की भौगोलिक स्थिति है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर दुश्मनों पर हमले करता है। ईरान के पास ऐसे हथियार हैं जो छोटे होते हैं, आसानी से छिपाए जा सकते हैं और अचानक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये हथियार पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपे होते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है। इस वजह से जहाजों को हमला होने पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। जैसे ही मिसाइल या ड्रोन दिखाई देता है, उसके बाद कार्रवाई के लिए सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं। ट्रम्प के लिए होर्मुज का हल ढूंढना बहुत मुश्किल ट्रम्प ने इस रास्ते को खोलने के लिए कई बार अलग-अलग दावे कर चुके हैं। एक बार तो उन्होंने यह भी कहा कि वह ईरान के सुप्रीम लीडर के साथ मिलकर इस रास्ते को कंट्रोल कर सकते हैं। लेकिन असल में अमेरिका जिन विकल्पों पर विचार कर रहा है, उनमें ज्यादातर सैन्य कार्रवाई ही शामिल है। अगर अमेरिका सैन्य ताकत से इस रास्ते को खोलना चाहता है, तो सबसे पहले उसे ईरान की हमले की क्षमता खत्म करनी होगी। यानी उसे मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और उन ठिकानों को नष्ट करना होगा जहां से ईरान जहाजों पर हमला कर सकता है। लेकिन अब तक अमेरिका और इजराइल के हजारों हमलों के बावजूद ईरान की यह क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान के पास कई जगहों पर मिसाइल बैटरी हो सकती हैं और वे मोबाइल भी होती हैं, यानी उन्हें जल्दी-जल्दी एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इसलिए उन्हें ढूंढना और खत्म करना बहुत मुश्किल है। अमेरिकी वॉरशिप भी होर्मुज में सुरक्षित नहीं ट्रम्प ने यह भी कहा है कि जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नौसेना के जहाज उनके साथ चल सकते हैं। इसे एस्कॉर्ट ऑपरेशन कहा जाता है। इसमें वॉरशिप टैंकरों के साथ चलेंगे, ऊपर से विमान निगरानी करेंगे, ड्रोन को मार गिराएंगे और तट पर मौजूद मिसाइल ठिकानों पर हमला करेंगे। इसके साथ ही समुद्र में अगर बारूदी सुरंगें (माइंस) बिछाई गई हैं, तो उन्हें हटाने के लिए माइंसवीपर जहाजों को लगाया जाएगा। लेकिन यह सब करना बहुत बड़ा और जटिल सैन्य अभियान होगा। इसमें काफी समय, संसाधन और जोखिम शामिल होंगे। वॉरशिप खुद भी इस इलाके में पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि होर्मुज जैसे संकरे इलाके में जहाजों को चारों तरफ से खतरा रहता है। ड्रोन और मिसाइल से बचाव करना यहां और मुश्किल हो जाता है। समुद्र में बिछी माइंस सबसे बड़ा खतरा सबसे बड़ा खतरा समुद्र में बिछाई गई माइंस से है। अगर पानी में माइंस होने का जरा सा भी शक हो, तो कोई भी देश अपने बड़े जहाज वहां भेजने का जोखिम नहीं उठाएगा। माइंस हटाने का काम बहुत धीमा होता है और इसमें कई हफ्ते लग सकते हैं। इस दौरान जो टीमें माइंस हटाती हैं, उन्हें भी सुरक्षा की जरूरत होती है, क्योंकि वे खुद हमले का आसान निशाना बन सकती हैं। जमीन पर कार्रवाई का विकल्प भी मौजूद है। अमेरिकी मरीन सैनिक इस इलाके की तरफ भेजे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें स्ट्रेट के आसपास के छोटे-छोटे द्वीपों पर तैनात किया जा सकता है, जहां से वे हमले रोकने या एयर डिफेंस सिस्टम लगाने का काम कर सकते हैं। लेकिन ईरान की बड़ी जमीनी सेना को देखते हुए उसके मुख्य इलाके में घुसना बहुत जोखिम भरा होगा। अगर अमेरिकी सैनिक मारे गए या पकड़ लिए गए, तो इससे हालात और बिगड़ सकते हैं और युद्ध और बढ़ सकता है। मान लें कि अमेरिका किसी तरह इस रास्ते को खोल भी देता है, तब भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। सिर्फ एक मिसाइल या ड्रोन हमला भी फिर से डर पैदा कर सकता है और जहाज कंपनियां दोबारा इस रास्ते से गुजरने से बचेंगी। फारस की खाड़ी में फंसे 500 तेल टैंकर इस समय फारस की खाड़ी में करीब 500 तेल टैंकर खड़े हैं और ज्यादातर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। युद्ध से पहले हर दिन लगभग 80 तेल और गैस के टैंकर इस रास्ते से गुजरते थे। अब जहाज मालिक और बीमा कंपनियां तभी तैयार होंगी जब उन्हें लगेगा कि खतरा काफी कम हो गया है। अगर जोखिम ज्यादा रहा, तो वे इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करेंगे। भले ही अमेरिका बड़ा एस्कॉर्ट ऑपरेशन शुरू कर दे, लेकिन वह एक समय में सीमित जहाजों को ही सुरक्षा दे सकता है। यानी सभी टैंकरों को एक साथ सुरक्षित निकालना संभव नहीं होगा। इसके अलावा, ईरान ने सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट में ही नहीं, बल्कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में भी जहाजों पर हमले किए हैं। इसका मतलब है कि जहाजों को पूरे रास्ते में सुरक्षा देनी होगी, जिससे यह मिशन और लंबा और जटिल हो जाता है। इतना बड़ा सैन्य अभियान अमेरिका की बाकी सैन्य ताकत पर भी दबाव डाल सकता है, क्योंकि उसे अपने संसाधन दूसरे इलाकों से हटाने पड़ सकते हैं। आखिर में विशेषज्ञ यही मानते हैं कि जब तक ईरान की तरफ से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक इस स्ट्रेट

Hormuz Strait Crisis; Iran US War Impact

Hormuz Strait Crisis; Iran US War Impact

वॉशिंगटन डीसी4 घंटे पहले कॉपी लिंक ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहा युद्ध अब इतना बढ़ गया है कि होर्मुज स्ट्रेट लगभग बंद हो गया है। इस वजह से सैकड़ों तेल टैंकर दोनों तरफ खड़े हैं और आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि वह इस समुद्री रास्ते को ‘किसी भी तरह’ फिर से खोलेंगे। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह काम इतना आसान नहीं है। अगर ईरान से कोई समझौता नहीं होता या अमेरिका कोई बड़ा मिलिट्री एक्शन नहीं लेता, तो इस रास्ते पर पूरी तरह से आवाजाही बहाल करना मुश्किल होगा। संकरे रास्ते का फायदा उठाता है ईरान ईरान की मजबूती की सबसे बड़ी वजह इस इलाके की भौगोलिक स्थिति है। होर्मुज स्ट्रेट बहुत संकरा और उथला है। यहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान के पहाड़ी तट के बहुत करीब से गुजरना पड़ता है। यही वजह है कि ईरान इस इलाके का फायदा उठाकर दुश्मनों पर हमले करता है। ईरान के पास ऐसे हथियार हैं जो छोटे होते हैं, आसानी से छिपाए जा सकते हैं और अचानक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ये हथियार पहाड़ों, गुफाओं और सुरंगों में छिपे होते हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें तट के पास से ही लॉन्च किया जा सकता है। इस वजह से जहाजों को हमला होने पर प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। जैसे ही मिसाइल या ड्रोन दिखाई देता है, उसके बाद कार्रवाई के लिए सिर्फ कुछ मिनट ही होते हैं। ट्रम्प के लिए होर्मुज का हल ढूंढना बहुत मुश्किल ट्रम्प ने इस रास्ते को खोलने के लिए कई बार अलग-अलग दावे कर चुके हैं। एक बार तो उन्होंने यह भी कहा कि वह ईरान के सुप्रीम लीडर के साथ मिलकर इस रास्ते को कंट्रोल कर सकते हैं। लेकिन असल में अमेरिका जिन विकल्पों पर विचार कर रहा है, उनमें ज्यादातर सैन्य कार्रवाई ही शामिल है। अगर अमेरिका सैन्य ताकत से इस रास्ते को खोलना चाहता है, तो सबसे पहले उसे ईरान की हमले की क्षमता खत्म करनी होगी। यानी उसे मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और उन ठिकानों को नष्ट करना होगा जहां से ईरान जहाजों पर हमला कर सकता है। लेकिन अब तक अमेरिका और इजराइल के हजारों हमलों के बावजूद ईरान की यह क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान के पास कई जगहों पर मिसाइल बैटरी हो सकती हैं और वे मोबाइल भी होती हैं, यानी उन्हें जल्दी-जल्दी एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इसलिए उन्हें ढूंढना और खत्म करना बहुत मुश्किल है। अमेरिकी वॉरशिप भी होर्मुज में सुरक्षित नहीं ट्रम्प ने यह भी कहा है कि जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नौसेना के जहाज उनके साथ चल सकते हैं। इसे एस्कॉर्ट ऑपरेशन कहा जाता है। इसमें वॉरशिप टैंकरों के साथ चलेंगे, ऊपर से विमान निगरानी करेंगे, ड्रोन को मार गिराएंगे और तट पर मौजूद मिसाइल ठिकानों पर हमला करेंगे। इसके साथ ही समुद्र में अगर बारूदी सुरंगें (माइंस) बिछाई गई हैं, तो उन्हें हटाने के लिए माइंसवीपर जहाजों को लगाया जाएगा। लेकिन यह सब करना बहुत बड़ा और जटिल सैन्य अभियान होगा। इसमें काफी समय, संसाधन और जोखिम शामिल होंगे। वॉरशिप खुद भी इस इलाके में पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि होर्मुज जैसे संकरे इलाके में जहाजों को चारों तरफ से खतरा रहता है। ड्रोन और मिसाइल से बचाव करना यहां और मुश्किल हो जाता है। समुद्र में बिछी माइंस सबसे बड़ा खतरा सबसे बड़ा खतरा समुद्र में बिछाई गई माइंस से है। अगर पानी में माइंस होने का जरा सा भी शक हो, तो कोई भी देश अपने बड़े जहाज वहां भेजने का जोखिम नहीं उठाएगा। माइंस हटाने का काम बहुत धीमा होता है और इसमें कई हफ्ते लग सकते हैं। इस दौरान जो टीमें माइंस हटाती हैं, उन्हें भी सुरक्षा की जरूरत होती है, क्योंकि वे खुद हमले का आसान निशाना बन सकती हैं। जमीन पर कार्रवाई का विकल्प भी मौजूद है। अमेरिकी मरीन सैनिक इस इलाके की तरफ भेजे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें स्ट्रेट के आसपास के छोटे-छोटे द्वीपों पर तैनात किया जा सकता है, जहां से वे हमले रोकने या एयर डिफेंस सिस्टम लगाने का काम कर सकते हैं। लेकिन ईरान की बड़ी आर्मी को देखते हुए उसके मुख्य इलाके में घुसना बहुत जोखिम भरा होगा। अगर अमेरिकी सैनिक मारे गए या पकड़ लिए गए, तो इससे हालात और बिगड़ सकते हैं और युद्ध और बढ़ सकता है। मान लें कि अमेरिका किसी तरह इस रास्ते को खोल भी देता है, तब भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। सिर्फ एक मिसाइल या ड्रोन हमला भी फिर से डर पैदा कर सकता है और जहाज कंपनियां दोबारा इस रास्ते से गुजरने से बचेंगी। फारस की खाड़ी में फंसे 500 तेल टैंकर इस समय फारस की खाड़ी में करीब 500 तेल टैंकर खड़े हैं और ज्यादातर आगे नहीं बढ़ रहे हैं। युद्ध से पहले हर दिन लगभग 80 तेल और गैस के टैंकर इस रास्ते से गुजरते थे। अब जहाज मालिक और बीमा कंपनियां तभी तैयार होंगी जब उन्हें लगेगा कि खतरा काफी कम हो गया है। अगर जोखिम ज्यादा रहा, तो वे इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं करेंगे। भले ही अमेरिका बड़ा एस्कॉर्ट ऑपरेशन शुरू कर दे, लेकिन वह एक समय में सीमित जहाजों को ही सुरक्षा दे सकता है। यानी सभी टैंकरों को एक साथ सुरक्षित निकालना संभव नहीं होगा। इसके अलावा, ईरान ने सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट में ही नहीं, बल्कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में भी जहाजों पर हमले किए हैं। इसका मतलब है कि जहाजों को पूरे रास्ते में सुरक्षा देनी होगी, जिससे यह मिशन और लंबा और जटिल हो जाता है। इतना बड़ा सैन्य अभियान अमेरिका की बाकी सैन्य ताकत पर भी दबाव डाल सकता है, क्योंकि उसे अपने संसाधन दूसरे इलाकों से हटाने पड़ सकते हैं। आखिर में विशेषज्ञ यही मानते हैं कि जब तक ईरान की तरफ से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक

Iran Offers Secret Talks to US; Trump Says Time Ran Out

Iran Offers Secret Talks to US; Trump Says Time Ran Out

तेल अवीव/तेहरान19 मिनट पहले कॉपी लिंक अजरबैजान ने खुद पर हुए ड्रोन हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने कहा कि इस घटना पर ईरान को माफी मांगनी चाहिए। इसके अलावा ईरानी राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अजरबैजान के विदेश मंत्रालय के अनुसार एक ड्रोन नखचिवान इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल भवन से टकराया, जबकि दूसरा शकराबाद गांव में एक स्कूल के पास गिरा। इस घटना में एयरपोर्ट टर्मिनल को नुकसान पहुंचा और दो नागरिक घायल हो गए। राष्ट्रपति अलीयेव ने इस घटना को ‘कायराना हमला’ बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि ईरान ने इस ड्रोन हमले में हाथ होने से इनकार किया है और कहा है कि इस घटना की जांच की जा रही है। फुटेज अजरबैजान में नखचिवान इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमले का है। भारत ने खामेनेई की मौत पर शोक जताया भारत ने पहली बार ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शोक जताया है। भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास जाकर खामेनेई के निधन पर संवेदना जताई। उन्होंने कंडोलेंस बुक (शोक पुस्तिका) पर हस्ताक्षर कर श्रद्धांजलि दी। अमेरिका-इजराइल के हमले में 28 फरवरी को खामेनेई की मौत हो गई थी। ईरान ने एक दिन बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की थी। खामेनेई के निधन के बाद दुनियाभर के कई देशों से शोक संदेश भेजे जा रहे हैं। भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने आज नई दिल्ली स्थित ईरान दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। न्यूजीलैंड में ईरानी दूतावास ने दैनिक भास्कर का कार्टून शेयर किया। यह ईरान में स्कूल पर हमले से जुड़ा था, जिसमें 170 छात्राओं की मौत हो गई थी। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… अमेरिका और इजराइल ने बुधवार रात ईरान की राजधानी तेहरान में कई जगह बमबारी की। ईरानी हथियारों पर अमेरिकी हमले का सैटेलाइट फुटेज। बेरूत के दक्षिणी इलाके दहियाह में हिजबुल्लाह नेता नईम कासिम के भाषण के दौरान लोगों ने हवा में गोलियां चलाईं, जिससे आसमान में गोलियों की रोशनी दिखाई दी। बेरूत के दक्षिणी इलाके दहियाह में इजराइली हवाई हमले के बाद उठता धुआं। ईरान पर हमले के लिए उड़ान भरता अमेरिकी फाइटर जेट। इजराइल-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 20 मिनट पहले कॉपी लिंक अजरबैजान ने ईरान बॉर्डर के पास एयरस्पेस बंद किया अजरबैजान ने ईरान बॉर्डर के पास अपने एयरस्पेस का एक हिस्सा 12 घंटे के लिए बंद कर दिया है। यह फैसला उस घटना के बाद लिया गया जब अजरबैजान ने दावा किया कि ईरान से आए ड्रोन उसके नखचिवान स्वायत्त क्षेत्र में घुस आए और कुछ इलाकों में नुकसान पहुंचाया। 36 मिनट पहले कॉपी लिंक इजराइल बोला- जंग में ईरान के 300 मिसाइल लॉन्चर नष्ट किए इजराइल की सेना ने कहा है कि जंग के दौरान उसकी वायुसेना ने ईरान के 300 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट कर दिया है। इनमें से ज्यादातर मिसाइल लॉन्चर पश्चिमी ईरान में मौजूद थे। इसका मकसद ईरान की मिसाइल दागने की क्षमता को कम करना था। 52 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान बोला- अमेरिका-इजराइल के हमलों से 11 अस्पतालों को नुकसान ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में देश के 11 अस्पताल, सात आपात केंद्र, नौ एंबुलेंस और चार अन्य मेडिकल सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। मंत्रालय के अनुसार इन हमलों के दौरान कई अस्पतालों के साथ-साथ आपात चिकित्सा केंद्र और एंबुलेंस भी प्रभावित हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी ईरान में स्वास्थ्य ढांचे पर कम से कम 13 हमलों की पुष्टि की है, जिनमें अस्पतालों और मेडिकल सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। WHO ने कहा कि संघर्ष के दौरान अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं को निशाना बनना गंभीर चिंता का विषय है और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत इन संस्थानों की सुरक्षा जरूरी है। 02:49 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक ब्रिटेन साइप्रस में एंटी-ड्रोन हेलिकॉप्टर भेजेगा ब्रिटेन ने साइप्रस में सुरक्षा बढ़ाने के लिए एंटी-ड्रोन क्षमता से लैस वाइल्डकैट हेलिकॉप्टर भेजने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि ये हेलिकॉप्टर शुक्रवार को साइप्रस पहुंचेंगे। स्टार्मर ने बताया कि ब्रिटेन के रक्षा मंत्री फिलहाल साइप्रस में मौजूद हैं और वहां सैन्य अभियानों के समन्वय के साथ सैनिकों से मुलाकात कर रहे हैं। ब्रिटेन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूर्वी भूमध्यसागर में अपने युद्धपोत HMS ड्रैगन को भी तैनात कर रहा है। 02:28 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक ईरान बोला- अजरबैजान पर ड्रोन हमले में हमारा हाथ नहीं ईरान ने अजरबैजान में हुए ड्रोन हमले में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने अजरबैजानी समकक्ष से फोन पर बातचीत में कहा कि तेहरान ने अजरबैजान की ओर कोई ड्रोन या अन्य प्रोजेक्टाइल नहीं दागा। उन्होंने बताया कि ईरान की सेना इस घटना की जांच कर रही है। अराघची ने यह भी कहा कि ऐसे हमलों के पीछे इजराइल की भूमिका हो सकती है, जिसका उद्देश्य ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच संबंध खराब करना है। इससे पहले अजरबैजान ने नखचिवान क्षेत्र में हुए ड्रोन हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। 02:12 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक ईरान बोला- इराक में अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमला किया ईरान की सेना ने कहा है कि उसने उत्तरी इराक के एरबिल में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ड्रोन हमला किया है। यह जानकारी ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस हमले में अमेरिकी ठिकाने को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी है। 01:58 PM5 मार्च 2026 कॉपी लिंक अजरबैजान बोला- ड्रोन हमले पर माफी मांगे ईरान अजरबैजान के राष्ट्रपति इलहाम अलीयेव ने कहा है कि नखचिवान क्षेत्र में हुए ड्रोन हमले को लेकर ईरान को माफी मांगनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को सजा दी जानी चाहिए। अलीयेव के मुताबिक नखचिवान अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे, उसके टर्मिनल, एक स्कूल और अन्य नागरिक इलाकों को ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिसमें दो लोग घायल हुए। उन्होंने इस घटना को “कायराना हमला” बताते हुए इसकी