World News Updates; Trump Pakistan China

36 मिनट पहले कॉपी लिंक म्यांमार में सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग को राष्ट्रपति चुन लिया गया है। संसद में हुए वोट में उन्हें जीत मिली, जहां ज्यादातर सांसद सेना समर्थक थे। इससे 2021 में तख्तापलट के बाद देश पर उनकी पकड़ और मजबूत हो गई है। 69 साल के ह्लाइंग 2011 से म्यांमार की सेना के प्रमुख रहे हैं। उन्होंने 2021 में आंग सान सूची की चुनी हुई सरकार को हटाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया था और उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो बाद में सशस्त्र संघर्ष में बदल गए। हाल ही में दिसंबर और जनवरी में चुनाव कराए गए थे, जिसमें सेना समर्थित पार्टी को जीत मिली। विपक्ष और पश्चिमी देशों ने इन चुनावों को निष्पक्ष नहीं बताया और कहा कि यह सिर्फ सेना के शासन को बनाए रखने का तरीका है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिन आंग ह्लाइंग पहले से ही राष्ट्रपति बनना चाहते थे। यह उनका पुराना सपना था। राष्ट्रपति बनने के लिए उन्हें सेना की जिम्मेदारी किसी और को देनी थी, इसलिए उन्होंने अपने भरोसेमंद व्यक्ति ये विन ऊ को सेना का नया प्रमुख बना दिया। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आत्मघाती कार बम हमला, 5 नागरिकों की मौत, एक पुलिसकर्मी समेत 13 घायल पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में पुलिस स्टेशन पर आत्मघाती कार बम हमला हुआ। हमले में 5 लोगों की मौत हो गई। जबकि 13 लोग घायल हुए हैं, इनमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल है। डॉन के मुताबिक विस्फोटकों से भरी कार पुलिस स्टेशन के पिछले हिस्से से टकराई, जिससे जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद कुछ देर तक फायरिंग भी हुई। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पुलिस स्टेशन का सेंट्री पोस्ट पूरी तरह नष्ट हो गया और इमारत का बड़ा हिस्सा मलबे में बदल गया। आसपास के कई घरों को भी भारी नुकसान पहुंचा और कुछ मकान ढह गए, जिससे कई लोग मलबे में दब गए। मृतकों में एक ही परिवार के चार सदस्य शामिल हैं। सभी घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। पाकिस्तान के डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी ऑफिसर बख्तुल्लाह वजीर ने बताया कि ‘राहत और बचाव कार्य जारी है। हालांकि, लगातार बारिश के कारण ऑपरेशन में दिक्कतें आईं है। फायरिंग रुकने के बाद ही रेस्क्यू टीमों ने मलबा हटाना शुरू किया।’ सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेरकर क्लियरेंस ऑपरेशन शुरू कर दिया है। वहीं, हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
World Updates | Indonesia Earthquake 7.4 Magnitude

52 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में पहली बार कोई राष्ट्रपति खुद सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पहुंचा। ट्रम्प अपने ही फैसले से जुड़े मामले को देखने कोर्ट गए, जिसमें जन्म से मिलने वाली नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को सीमित करने की बात है। ट्रम्प काले सूट और लाल टाई में व्हाइट हाउस से मोटरकेड के जरिए कोर्ट पहुंचे और पब्लिक गैलरी की पहली पंक्ति में बैठे। वह करीब एक घंटे तक वहां रहे और सरकार के वकील की दलील पूरी होने के बाद चले गए। सुनवाई की शुरुआत में कोर्ट मार्शल ने पारंपरिक घोषणा ‘ओयेज! ओयेज! ओयेज!’ (यानि सुनिए!) से की, जिस पर ट्रम्प समेत सभी लोग खड़े हुए। हालांकि, इस ऐतिहासिक मौके के बावजूद चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने ट्रम्प की मौजूदगी का कोई खास जिक्र नहीं किया। व्हाइट हाउस लौटने के बाद ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हम ही दुनिया के एकमात्र ऐसे देश हैं जो ‘बर्थराइट’ सिटिजनशिप की इजाजत देने के लिए इतने मूर्ख हैं।” अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… इंडोनेशिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, 1 की मौत इंडोनेशिया में गुरुवार सुबह 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। नॉर्थ सुलावेसी प्रांत के मनाडो शहर में एक इमारत गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हुआ है। रेस्क्यू अधिकारियों के अनुसार, घायल व्यक्ति के पैर में चोट आई है। शुरुआत में भूकंप की तीव्रता 7.8 बताई गई थी, जिसे बाद में घटाकर 7.4 कर दिया गया। यह झटका जमीन से करीब 35 किलोमीटर की कम गहराई पर आया, जिसकी वजह से इसका असर ज्यादा महसूस किया गया। भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी, लेकिन करीब 2 घंटे बाद इसे हटा लिया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वे (USGS) के मुताबिक, यह भूकंप देश के पूर्वी हिस्से में नॉर्दर्न मोलुक्का सागर में सुबह करीब 7:48 बजे आया। इसका केंद्र टरनेटे शहर से लगभग 127 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Italy vs Bosnia and Herzegovina Follow Dainik Bhaskar Latest Updates FIFA World Cup 2026

Hindi News Sports Italy Vs Bosnia And Herzegovina Follow Dainik Bhaskar Latest Updates FIFA World Cup 2026 स्पोर्ट्स डेस्क14 मिनट पहले कॉपी लिंक हार के बाद निराश इटली के स्ट्राइकर पियो एस्पोसिटो। इटली लगातार तीसरी बार FIFA वर्ल्ड कप में जगह बनाने से चूक गया। वर्ल्ड कप के यूरोपियन क्वालिफायर्स के फाइनल में उसे बोस्निया और हर्जेगोविना के हाथों पेनल्टी शूटआउट में 1-4 से हार का सामना करना पड़ा। FIFA वर्ल्ड कप अगले साल 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में खेला जाएगा। यह वर्ल्ड कप का 23वां एडिशन होगा। इसके मुकाबले 16 शहरों में खेले जाएंगे। पहली बार टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं और मेजबानी एक साथ तीन देश कर रहे हैं। फुल टाइम तक मैच 1-1 से ड्रॉ रहा यूरोपियन क्वालिफायर्स का फाइनल आज जेनिका में खेला गया। चार बार की वर्ल्ड चैंपियन इटली के लिए शुरुआत अच्छी रही। मुकाबले के 15वें मिनट में मोइसे कीन ने गोल कर टीम को बढ़त दिलाई। हालांकि, पहले हाफ के अंत से पहले ही डिफेंडर एलेसांद्रो बास्तोनी को रेड कार्ड मिल गया, जिससे इटली 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने को मजबूर हो गया। दूसरे हाफ में बोस्निया ने इसका फायदा उठाया और 79वें मिनट में हारिस तबकोविच ने गोल कर स्कोर 1-1 कर दिया। फुल टाइम और एक्सट्रा टाइम में कोई टीम बढ़त नहीं बना सकी, जिसके बाद मुकाबला पेनल्टी शूटआउट में चला गया। शूटआउट में एक ही गोल कर सकी इटली शूटआउट में इटली की टीम दबाव में बिखर गई। पियो एस्पोसिटो और ब्रायन क्रिस्टांटे अपने पेनल्टी मिस कर बैठे, जबकि बोस्निया के एस्मिरा बाजराक्टरेविक ने निर्णायक गोल कर टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। पेनल्टी शूटआउट में बोस्निया ने 4 और इटनी ने 1 गोल किया। हार के बाद इटली के डिफेंडर लियोनार्डो स्पिनजोला ने कहा, हमें अब भी यकीन नहीं हो रहा है कि हम टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं और यह सब इस तरह से हुआ है। पेनल्टी मिस होने के बाद निराश पियो एस्पोसिटो। फ्रांस के ग्रुप में सेनेगल और नॉर्वे डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना को ग्रुप जे में रखा गया है। स्पेन ग्रुप एच में है, फ्रांस ग्रुप आई में, जर्मनी ग्रुप ई में, पुर्तगाल ग्रुप के में और इंग्लैंड ग्रुप एल में है। ग्रुप एच, आई, जे, के और एल को ग्रुप ऑफ डेथ माना जा रहा है, क्योंकि इनमें मजबूत टीमें हैं। स्पेन के ग्रुप में उरुग्वे और सऊदी अरब जैसी टीमें हैं, जिन्होंने पिछले वर्ल्ड कप में कई उलटफेर किए थे। फ्रांस के ग्रुप में सेनेगल और नॉर्वे जैसी अच्छी टीमें हैं। ——————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… IPL- पंजाब ने गुजरात को 3 विकेट से हराया:डेब्यू मैच में कूपर कोनोली की फिफ्टी IPL के चौथे मैच में पंजाब किंग्स ने गुजरात टाइटंस को 3 विकेट से हरा दिया। मुल्लांपुर में मंगलवार को PBKS ने टॉस जीतकर बॉलिंग चुनी। GT ने 6 विकेट खोकर 162 रन बनाए। पंजाब ने 19.1 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर टारगेट हासिल किया। पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
World News Updates: Iran War | Russia Plane Crash

11 मिनट पहले कॉपी लिंक रूस का मिलिट्री ट्रांसपोर्ट प्लेन An-26 मंगलवार को क्रीमिया में क्रैश हो गया। इसमें 23 यात्री और 6 क्रू सदस्य सवार थे। सभी की मौके पर ही मौत हो गई। रूसी न्यूज एजेंसी तास के मुताबिक, पहले विमान से संपर्क टूट गया था। बाद में यह चट्टान से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती जांच में हादसे की वजह तकनीकी खराबी मानी जा रही है। इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है। An-26 प्लेन सोवियत दौर का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान है। इसे एंटोनोव कंपनी ने बनाया था। इसकी पहली उड़ान 1969 में हुई थी। इसका इस्तेमाल सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामान को ले जाने के लिए किया जाता है। इसमें एक साथ दर्जनों सैनिक या भारी कार्गो ले जाया जा सकता है। इस विमान की खासियत है कि यह छोटे और खराब रनवे से भी उड़ान भर सकता है। इससे इसे दुर्गम और युद्ध क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता है। इसके पीछे बड़े कार्गो दरवाजे से एयरड्रॉप ऑपरेशन भी किए जा सकते हैं। 50 साल से ज्यादा पुराने डिजाइन के कारण इसकी सुरक्षा पर सवाल उठते रहे हैं। समय-समय पर इसके हादसे भी सामने आए हैं। आज भी कई देशों में यह विमान इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन धीरे-धीरे इसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमानों से बदला जा रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
World News Updates: Iran War | Russia Plane Crash

41 मिनट पहले कॉपी लिंक रूस का मिलिट्री ट्रांसपोर्ट प्लेन An-26 मंगलवार को क्रीमिया में क्रैश हो गया। इसमें 23 यात्री और 6 क्रू सदस्य सवार थे। सभी की मौके पर ही मौत हो गई। रूसी न्यूज एजेंसी तास के मुताबिक, पहले विमान से संपर्क टूट गया था। बाद में यह चट्टान से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती जांच में हादसे की वजह तकनीकी खराबी मानी जा रही है। इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की जांच जारी है। An-26 प्लेन सोवियत दौर का सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान है। इसे एंटोनोव कंपनी ने बनाया था। इसकी पहली उड़ान 1969 में हुई थी। इसका इस्तेमाल सैनिकों, हथियारों और सैन्य सामान को ले जाने के लिए किया जाता है। इसमें एक साथ दर्जनों सैनिक या भारी कार्गो ले जाया जा सकता है। इस विमान की खासियत है कि यह छोटे और खराब रनवे से भी उड़ान भर सकता है। इससे इसे दुर्गम और युद्ध क्षेत्रों में इस्तेमाल किया जाता है। इसके पीछे बड़े कार्गो दरवाजे से एयरड्रॉप ऑपरेशन भी किए जा सकते हैं। 50 साल से ज्यादा पुराने डिजाइन के कारण इसकी सुरक्षा पर सवाल उठते रहे हैं। समय-समय पर इसके हादसे भी सामने आए हैं। आज भी कई देशों में यह विमान इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन धीरे-धीरे इसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट विमानों से बदला जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… चीन- खाली फ्लैट खरीद परिजनों की अस्थियां रखने पर बैन:कब्रिस्तान महंगा होने पर लोग प्रॉपर्टी खरीद रहे थे, उसमें अस्थियां रखते थे चीन की सरकार एक नया कानून लाने जा रही है, जिसके तहत लोग अपने परिजनों की राख को खाली अपार्टमेंट में नहीं रख पाएंगे। इसे ‘बोन ऐश अपार्टमेंट’ कानून कहा जा रहा है। इसके साथ ही सार्वजनिक कब्रिस्तानों के अलावा कहीं और शव दफनाने या मकबरे बनाने पर भी रोक होगी बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में कब्रिस्तान लगातार महंगा होता जा रहा है। ऐसे में ‘गुहुई फांग’ यानी ऐसे फ्लैट्स का चलन बढ़ गया है, जहां लोग अपने परिजनों की अस्थियां रखते हैं। तेजी से शहरीकरण और बुजुर्ग आबादी बढ़ने के कारण शहरों में कब्रिस्तान की जमीन कम होती जा रही है और उनकी कीमत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Internet Blackout Risk for India & World Amid Iran Conflict

Hindi News Business Strait Of Hormuz Crisis: Internet Blackout Risk For India & World Amid Iran Conflict नई दिल्ली14 घंटे पहले कॉपी लिंक भारत का ज्यादातर इंटरनेशनल इंटरनेट बैंडविड्थ अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र से होकर आता है। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित होने से दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस के बाद अब इंटरनेट ठप होने का खतरा है। इसकी वजह यह है कि होर्मुज रूट से न केवल दुनिया का 20% कच्चा तेल और 25% LNG गुजरती है, बल्कि इस रास्ते के नीचे इंटरनेट केबल्स भी बिछीं हैं। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह इलाका सिर्फ एनर्जी चोकपॉइंट नहीं, बल्कि एक डिजिटल चोकपॉइंट भी है। समुद्र के नीचे से गुजरता है 97% ग्लोबल डेटा अक्सर लोगों को लगता है कि इंटरनेट सैटेलाइट के जरिए चलता है, लेकिन हकीकत अलग है। दुनिया का करीब 95 से 97% डेटा फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है। ये केबल्स समुद्र के नीचे बिछी होती हैं। भारत को यूरोप, अफ्रीका और पश्चिम एशिया से जोड़ने वाली मुख्य केबल्स इसी रूट के पास से गुजरती हैं। इसमें SEA-ME-WE, AAE-1 और EIG जैसे बड़े केबल सिस्टम शामिल हैं। भारत को यूरोप-अफ्रीका और पश्चिम एशिया से जोड़ने वाली केबल्स होर्मुज रूट से गुजरती हैं। भारत के लिए क्यों बड़ा है खतरा? भारत की डिजिटल इकोनॉमी काफी हद तक इन समुद्री रूट्स पर निर्भर है। भारत का ज्यादातर इंटरनेशनल इंटरनेट बैंडविड्थ अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र से होकर आता है। लेटेंसी बढ़ जाएगी: अगर केबल्स को नुकसान होता है, तो ट्रैफिक को लंबे ‘पैसिफिक रूट’ पर डायवर्ट करना पड़ेगा। इससे लेटेंसी यानी डेटा ट्रैवल टाइम बढ़ जाएगा। इंटरनेट स्लो होगा: यूट्यूब, इंस्टाग्राम और नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बफरिंग बढ़ जाएगी। वीडियो कॉल और क्लाउड सर्विस में भी दिक्कतें आ सकती हैं। 23.48 लाख करोड़ के IT सेक्टर पर असर भारत का IT और आउटसोर्सिंग सेक्टर करीब 250 बिलियन डॉलर (23.48 लाख करोड़) का है। अमेरिकी और यूरोपीय क्लाइंट्स के साथ रियल-टाइम कनेक्टिविटी इसी लो-लेटेंसी नेटवर्क पर टिकी है। केबल कटने की स्थिति में कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है, जिससे सर्विस एग्रीमेंट्स (SLA) टूटने और पेनाल्टी लगने का डर है। इसके अलावा, खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस (पैसा भेजना) और SWIFT जैसे बैंकिंग ट्रांजेक्शन भी धीमे पड़ सकते हैं। दुनिया का करीब 95 से 97% डेटा फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है। फोटो सोर्स- https://www.submarinecablemap.com क्या पूरी तरह बंद हो जाएगा इंटरनेट? इंटरनेट का डिजाइन इस तरह बनाया गया है कि एक रास्ता बंद होने पर ट्रैफिक दूसरे रास्ते (री-रूटिंग) पर चला जाता है। इसलिए ‘टोटल ब्लैकआउट’ यानी पूरी तरह इंटरनेट बंद होने की संभावना कम है। हालांकि, री-रूटिंग की वजह से वैकल्पिक रास्तों पर लोड बढ़ जाएगा, जिससे स्पीड बहुत कम हो जाएगी। शेयर बाजार और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग जैसे सेक्टर्स, जहां मिलीसेकंड का महत्व होता है। वहां बड़ा वित्तीय जोखिम खड़ा हो सकता है। नए ऑप्शन पर निवेश कर रहा भारत इस खतरे को देखते हुए भारत समेत कई देश अब वैकल्पिक रास्तों पर निवेश कर रहे हैं। इलॉन मस्क की स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज बैकअप के तौर पर देखी जा रही हैं। भविष्य में ऐसी केबल्स बिछाने की योजना है जो संवेदनशील क्षेत्रों को बायपास कर सकें। फिलहाल, होर्मुज में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव तेल की कीमतों से ज्यादा डिजिटल दुनिया की चिंता बढ़ा रहा है। ये खबर भी पढ़ें… तेल की कीमतें 10 डॉलर बढ़ने से 0.60% बढ़ेगी महंगाई: रेटिंग एजेंसी का दावा- GDP ग्रोथ और रुपए पर भी असर; कच्चा तेल 116 डॉलर पार पश्चिम एशिया में तनाव से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60%) तक बढ़ सकती है। इस बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जा करना है। उनके इस बयान के बाद ब्रेंट क्रूड आज 116 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंच गया। केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
World TB Day 2026: टीबी की बीमारी कितने दिनों में हो सकती है ठीक? क्या है बेस्ट ट्रीटमेंट, डॉक्टर से जानिए

Last Updated:March 24, 2026, 13:10 IST World TB Day 2026: हर साल 24 मार्च को वर्ल्ड टीबी डे मनाया जाता है. टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जिसका सही इलाज करने पर यह पूरी तरह ठीक हो सकती है. सामान्य टीबी का इलाज लगभग 6 महीने में पूरा होता है, जबकि गंभीर मामलों में ज्यादा समय लग सकता है. DOTS जैसी पद्धति और नियमित दवा लेने से इस बीमारी पर प्रभावी कंट्रोल पाया जा सकता है. टीबी का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं के कॉम्बिनेशन से किया जाता है. Tuberculosis Treatment: हमारे देश में आज भी टीबी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है. टीबी शरीर के हर अंग में हो सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में फेफड़ों को प्रभावित करती है. टीबी का बैक्टीरिया कई लोगों के शरीर में हो सकता है, लेकिन बीमारी तब होती है, जब शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है. यह कमजोरी खराब पोषण, अस्वच्छ जीवनशैली या किसी अन्य बीमारी की वजह से हो सकती है. टीबी होने पर लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना और कभी-कभी खून की खांसी जैसे लक्षण नजर आते हैं. फेफड़ों के अलावा टीबी लिम्फ नोड्स, दिमाग, किडनी, हड्डियां और आंखों को भी प्रभावित कर सकती है. ग्रेटर नोएडा के ओमेगा 1 स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. सर्विंदर सिंह ने बताया कि भारत में टीबी का बोझ बहुत ज्यादा है और दुनिया के करीब 25% टीबी मरीज भारत में हैं. हर साल लाखों नए मामले सामने आते हैं. हालांकि कुल मामलों में धीरे-धीरे कमी आ रही है, लेकिन दवाओं से न ठीक होने वाली टीबी चिंता का विषय बनी हुई है. टीबी को कंट्रोल करने के लिए समय पर जांच, पूरा इलाज, अच्छा पोषण और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना बहुत जरूरी है. टीबी से बचाव और इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए जागरुकता और सही समय पर कदम उठाना जरूरी है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर ने बताया कि आमतौर पर टीबी का इलाज 6 महीने तक चलता है. इसमें मरीज को नियमित रूप से दवाएं लेनी होती हैं. पहले 2 महीने के इलाज को इंटेंसिव फेज कहा जाता है और उसके बाद 4 महीने के ट्रीटमेंट को कंटीनुएशन फेज कहा जाता है. अगर मरीज समय पर दवा लेता है और इलाज बीच में नहीं छोड़ता, तो ज्यादातर मामलों में टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है. हालांकि अगर टीबी दवाओं के प्रति प्रतिरोधी (MDR-TB) हो जाए और उस पर दवाएं बेअसर होने लगें, तो इलाज 9 से 24 महीने तक भी चल सकता है. टीबी का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं के कॉम्बिनेशन से किया जाता है. भारत में सरकार की डायरेक्टली ऑब्जर्ब्ड ट्रीटमेंट शॉर्ट कोर्स (DOTS) पद्धति सबसे प्रभावी मानी जाती है. इस उपचार में स्वास्थ्यकर्मी की निगरानी में मरीज को नियमित दवा दी जाती है, जिससे इलाज अधूरा न छूटे. सरकार के निक्षय कार्यक्रम के तहत टीबी की जांच और दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं. यह कार्यक्रम मरीजों को आर्थिक और पोषण संबंधी सहायता भी प्रदान करता है. टीबी का इलाज तभी सफल होता है जब मरीज कुछ जरूरी बातों का पालन करे. दवाएं रोजाना और समय पर लें, बीच में न छोड़ें. पौष्टिक आहार लें, जैसे दाल, फल, हरी सब्जियां. पर्याप्त आराम करें और शरीर को मजबूत बनाएं. खांसते समय मुंह ढकें और मास्क का उपयोग करें और नियमित जांच कराते रहें. इलाज बीच में छोड़ने से बीमारी दोबारा हो सकती है और दवाओं का असर कम हो सकता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 24, 2026, 13:10 IST
World TB Day 2026: खांसी, बलगम में खून आने जैसे 5 संकेतों को न करें इग्नोर, ये हो सकते हैं टीबी के लक्षण

Last Updated:March 23, 2026, 17:26 IST Tuberculosis Symptoms: टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जिसके लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. अगर किसी व्यक्ति को 3 सप्ताह से ज्यादा लगातार खांसी, बलगम में खून, वजन घटना और रात में पसीना आने जैसे लक्षण दिखें, तो यह टीबी का संकेत हो सकता है. समय पर जांच और प्रॉपर ट्रीटमेंट से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है. टीबी एक खतरनाक बीमारी है, जो फेफड़ों और शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकती है. TB Symptoms and Treatment: हर साल 24 मार्च को वर्ल्ड ट्यूबरकुलोसिस डे (World Tuberculosis Day) मनाया जाता है. इसक दिन का उद्देश्य लोगों को टीबी के बारे में जागरूक करना और इसे खत्म करने का प्रयास करना है. टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है. हालांकि यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है और इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है. समय पर पहचान और सही इलाज से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. समस्या तब होती है, जब लोग इसके शुरुआती लक्षणों को सामान्य खांसी, सर्दी या प्रदूषण का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही बीमारी को गंभीर बना देती है और दूसरों तक फैलने का खतरा भी बढ़ा देती है. नई दिल्ली के जाने-माने पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. भगवान मंत्री ने News18 को बताया कि लगातार 3 सप्ताह या उससे अधिक समय तक रहने वाली खांसी टीबी का सबसे कॉमन और शुरुआती संकेत है. यह खांसी सूखी भी हो सकती है और बलगम वाली भी हो सकती है. फेफड़ों में मौजूद बैक्टीरिया श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं, जिससे बार-बार खांसी आती है. अगर सामान्य दवाओं या कफ सिरप से राहत नहीं मिल रही है, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत जांच करवाएं. डॉक्टर ने बताया कि खांसी के साथ खून आना एक गंभीर चेतावनी संकेत है. जब संक्रमण फेफड़ों के टिश्यूज को नुकसान पहुंचाता है, तो ब्लड वेसल्स प्रभावित हो सकती हैं, जिससे बलगम में खून दिखाई देता है. भले ही खून की मात्रा कम हो, इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. इसके अलावा टीबी के कारण फेफड़ों में सूजन और संक्रमण बढ़ने लगता है, जिससे सीने में दर्द महसूस होता है. यह दर्द गहरी सांस लेने या खांसने पर ज्यादा बढ़ सकता है. साथ ही सांस लेने में तकलीफ भी होने लगती है, जिससे रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. एक्सपर्ट की मानें तो बिना किसी खास कारण के तेजी से वजन कम होना और भूख में कमी आना भी टीबी का संकेत हो सकता है. शरीर संक्रमण से लड़ने में अधिक एनर्जी खर्च करता है, जिससे कमजोरी और थकान बढ़ जाती है. यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके अलावा टीबी के मरीजों में अक्सर शाम या रात के समय हल्का बुखार रहता है. इसके साथ ही रात में अत्यधिक पसीना आना भी एक खास लक्षण है. यह दर्शाता है कि शरीर का इम्यून सिस्टम संक्रमण से लड़ने की कोशिश कर रहा है, जिससे व्यक्ति को लगातार थकान महसूस होती है. डॉक्टर ने बताया कि टीबी बैक्टीरिया से होने वाली एक गंभीर बीमारी है, लेकिन इसे ट्रीटमेंट के जरिए पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. भारत में सरकारी योजनाओं के तहत इसका मुफ्त इलाज उपलब्ध है. जरूरी है कि लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं, इलाज पूरा करें और बीच में दवा न छोड़ें. इस बीमारी का अगर शुरुआती स्टेज में पता चल जाए, तो इसे खत्म करना आसान होता है. टीबी की बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकती है, इसलिए इसके लक्षणों को जानना जरूरी है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 23, 2026, 17:26 IST
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स्पोर्ट्स डेस्क2 मिनट पहले कॉपी लिंक यह भारतीय टीम का सिलेक्शन पैनल है। तस्वीर में बाएं से दूसरे नंबर पर टी-20 कप्तान सूर्यकुमार यादव और बीच में BCCI सचिव देवजीत सैकिया नजर आ रहे हैं। यह फोटो टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम चयन बैठक के दौरान की है। 28 मार्च से शुरू हो रहा IPL भारतीय खिलाड़ियों के लिए खास रहने वाला है। टी–20 फॉर्मेट में खेली जानी वाली इस लीग से टीम इंडिया की वनडे वनडे वर्ल्ड कप 2027 की टीम तय होगी। न्यूज एजेंसी PTI ने BCCI सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की सिलेक्शन कमेटी ने 20 खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट किया है, जिनके प्रदर्शन पर इस IPL के दौरान खास नजर रखी जाएगी। अजित अगरकर की अगुवाई वाली समिति का फोकस इन खिलाड़ियों की फॉर्म और फिटनेस पर रहेगा। इतना ही नहीं, पंजाब मुल्लांपुर में 6 से 10 जून तक अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले टेस्ट मैच में भी टीम इंडिया अपनी फुल-स्ट्रेंथ के साथ उतरेगा। सारे सीनियर खिलाड़ी इसमें खेलेंगे। स्टेडियम जाकर मैच देखेंगे सिलेक्टर्स BCCI ने सिलेक्टर्स को मैच देखने की जिम्मेदारी बांट दी गई है। हर चयनकर्ता हफ्ते में कम से कम एक IPL मैच स्टेडियम में जाकर देखेगा, ताकि हर सप्ताह शॉर्टलिस्ट प्लेयर्स की पांच मैचों की ग्राउंड रिपोर्ट तैयार हो सके। इसके अलावा बाकी मैचों को टीवी के जरिए ट्रैक किया जाएगा। इस बार चयनकर्ता नए उभरते खिलाड़ियों के बजाय पहले से तय वनडे कोर ग्रुप के प्लेयर्स पर ही ध्यान देंगे। सि्लेक्टर्स के जोन बांटे, अगरकर मुंबई में रहेंगे चयनकर्ताओं की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। चीफ सिलेक्टर अजित अगरकर मुंबई में रहेंगे, जबकि एसएस दास कोलकाता से मैच देखेंगे। वहीं आरपी सिंह और अजय रात्रा NCR क्षेत्र में मौजूद रहेंगे, जबकि प्रज्ञान ओझा बेंगलुरु और हैदराबाद में मुकाबलों पर नजर रखेंगे। अफगान टीम के खिलाफ टेस्ट में सीनियर टीम उतारेगा भारत अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट में भारत अपनी फुल-स्ट्रेंथ टीम उतारेगा। हालांकि इस मैच में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के अंक नहीं मिलेंगे, फिर भी टीम मैनेजमेंट इसे हल्के में नहीं ले रहा है। अगस्त से मार्च के बीच भारत को 9 टेस्ट खेलने हैं, ऐसे में सभी रेड-बॉल खिलाड़ी इस मुकाबले में उपलब्ध रहेंगे। यह भी तय माना जा रहा है कि बुमराह और सिराज, अगर IPL के दौरान फिट रहते हैं, तो अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट स्क्वॉड का हिस्सा होंगे। ————————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… अगरकर ने 2027 वर्ल्डकप तक कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने की मांग की, BCCI से रिक्वेस्ट की भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर ने अपने कॉन्ट्रैक्ट को 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक बढ़ाने की इच्छा जताई है। उन्होंने इसके लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से एक्सटेंशन मांगा है।अगरकर का मौजूदा कार्यकाल पहले ही बढ़ाया जा चुका है। 2025 IPL से पहले BCCI ने उनका कॉन्ट्रैक्ट एक साल के लिए बढ़ाकर जून 2026 तक कर दिया था। पूर्व तेज गेंदबाज अगरकर को जुलाई 2023 में टीम इंडिया की सिलेक्शन कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था। पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Nagpur: Bhagwat Says World Needs Harmony, Not Conflict

नागपुर5 मिनट पहले कॉपी लिंक RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया में संघर्षों की असली वजह स्वार्थी हित और वर्चस्व की चाहत है। स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म को मानने से ही हासिल की जा सकती है। भागवत नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा- पिछले 2,000 सालों से दुनिया ने संघर्षों को सुलझाने के लिए कई विचारों पर प्रयोग किए हैं, लेकिन उन्हें बहुत कम सफलता मिली है। RSS चीफ ने यह भी कहा कि भारत मानवता के नियम का पालन करता है, जबकि दुनिया के दूसरे देश ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ (सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट) में विश्वास रखते हैं। भारत का स्वभाव ही ऐसा है जो सद्भाव में विश्वास रखता है। यही कारण है कि पूरी दुनिया से यह आवाज उठ रही है कि भारत ही ईरान-इजराइल युद्ध को खत्म करने में मदद कर सकता है। भागवत के बयान की बड़ी बातें… धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और ऊंच-नीच की भावनाएं आज भी मौजूद हैं। भारत का प्राचीन ज्ञान हमें सिखाता है कि सभी आपस में जुड़े हुए हैं और एक हैं। धर्म केवल शास्त्रों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लोगों के व्यवहार में भी झलकना चाहिए। अनुशासन और नैतिक मूल्यों के पालन के लिए लगातार अभ्यास जरूरी है और इसमें अक्सर निजी परेशानियां भी आती हैं। RSS को 86 संभागों में बांटने की बात कही, लेकिन तरीका नहीं बदलेगा नागपुर में एक मराठी अखबार के 100 साल पूरे होने पर गुरुवार को भागवत ने बताया कि स्वयंसेवकों को मजबूत बनाने और काम बेहतर करने के लिए संगठन में बदलाव किए गए हैं। भागवत ने कहा कि RSS का काम बहुत तेजी से बढ़ रहा है और लोगों की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं, इसलिए अब काम को अलग-अलग हिस्सों में बांटने विकेंद्रीकरण की शुरुआत की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले RSS में 46 प्रांत थे, अब इन्हें बढ़ाकर छोटी-छोटी इकाईयों यानी 86 संभागों में बांटा जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर काम आसानी और अच्छे तरीके से हो सके। भागवत कहा कि संघ के काम करने का तरीका नहीं बदलेगा। दोस्ती बनाकर और अच्छे उदाहरण देकर समाज में बदलाव लाना ही संघ का मुख्य तरीका है, और यह आगे भी चलता रहेगा। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔






