Sunday, 12 Apr 2026 | 08:45 PM

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Supreme Court Denies Divorce to Husband Separated 16 Years

Supreme Court Denies Divorce to Husband Separated 16 Years

Hindi News National Supreme Court Denies Divorce To Husband Separated 16 Years | Maintenance नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल से पत्नी से अलग रह रहे 54 साल के एक व्यक्ति को तलाक देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह अपनी पत्नी को ₹15,000 मासिक गुजारा भत्ता देता रहे और अगर तलाक चाहिए तो स्थायी गुजारा भत्ते का ठोस प्रस्ताव दे। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि ₹15,000 आज के समय में बहुत कम राशि है। कोर्ट ने साफ कहा, “शांति से ₹15,000 देते रहो, खुश रहो।” इससे पहले हाईकोर्ट ने भी इस व्यक्ति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी। पति-पत्नी के बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। सुप्रीम कोर्ट बोला- पत्नी को साथ रखो, कोर्ट रूम LIVE पति के वकील: ‘मैं पिछले 16 साल से पत्नी से अलग रह रहा हूं। हर महीने ₹15,000 दे रहा हूं। मेरी सैलरी ₹65,000 है, इससे ज्यादा देने की स्थिति में नहीं हूं।’ सुप्रीम कोर्ट: ‘अगर आप स्थायी गुजारा भत्ते के लिए कोई उचित रकम प्रस्तावित करते हैं, तो तलाक पर विचार किया जा सकता था।’ सुप्रीम कोर्ट: ‘आप अपनी पत्नी को साथ क्यों नहीं रख सकते। अपनी पत्नी को साथ रखो, इसमें दिक्कत क्या है। पति के वकील: ‘दोनों के बीच स्वभाव में मतभेद हैं और वे करीब 16 साल से अलग रह रहे हैं। कई बार मध्यस्थता की कोशिश भी हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।’ कोर्ट ने गुजारा भत्ता तय करने के लिए समय दिया कोर्ट ने यह भी कहा कि पति ने क्रूरता का जो आधार बताया है, वह सिर्फ इतना है कि पत्नी चाहती थी कि वह जहां भी पोस्टेड हो, उसके साथ रहे। इस पर कोर्ट ने सवाल किया, इसमें दिक्कत क्या है। वहीं, पत्नी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वह स्थायी गुजारा भत्ता नहीं चाहती और अपने पति के साथ रहना चाहती है। उन्होंने कहा कि दोनों की कोई संतान नहीं है और फिलहाल पत्नी अपनी मां के साथ रह रही है। अंत में कोर्ट ने मामले को खारिज नहीं किया, बल्कि दोनों पक्षों को समय दिया कि वे स्थायी गुजारा भत्ते की राशि पर निर्देश लेकर आएं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी। कोर्ट इन आधारों पर तय करता है गुजारा भत्ता पति की आय: यहां पति की सैलरी ₹65,000 है, इसलिए ₹15,000 (करीब 23%) कम माना गया। पत्नी की जरूरतें: रहने, खाने, इलाज, रोजमर्रा खर्च-सब शामिल होते हैं। लाइफस्टाइल: शादी के दौरान जैसा जीवनस्तर था, उसे ध्यान में रखा जाता है। निर्भरता: पत्नी कमाती है या नहीं, यह भी अहम फैक्टर है। अन्य जिम्मेदारियां: बच्चों, माता-पिता की जिम्मेदारी भी देखी जाती है। कानून क्या कहता है CrPC की धारा 125: पत्नी खुद का खर्च नहीं उठा सकती तो पति से भत्ता दिलाया जा सकता है। हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 24/25: केस के दौरान और बाद में स्थायी गुजारा भत्ता तय होता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें: केवल हिंदू-बौद्ध-सिख ही अनुसूचित जाति का दावा कर सकते हैं:सुप्रीम कोर्ट का फैसला- धर्म बदला तो अनुसूचित जाति का दर्जा भी खत्म हो जाता है सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Two years ago an inter-caste marriage sparked ruckus in gujarat

Two years ago an inter-caste marriage sparked ruckus in gujarat

थराद1 मिनट पहले कॉपी लिंक गुजरात की थराद तहसील में करीब 2 साल पहले हुई एक इंटर कास्ट मैरिज को लेकर बवाल मचा हुआ है। इस मामले में चौधरी और रबारी समुदाय के लोग आमने सामने हैं। इसी मामले को लेकर बुधवार को थराद में चौधरी समुदाय का महासम्मेलन हुआ। इसमें उत्तर गुजरात और राजस्थान के अंजना चौधरी समुदाय के नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे। सम्मेलन के बाद, चौधरी समुदाय के हजारों लोगों की भीड़ अपने समुदाय की बेटी की घर-वापसी की मांग करते हुए ओगड़ के ऊण गांव जा पहुंची। भीड़ ने गांव का घेराव कर गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की। सूचना मिलते ही डीएसपी समेत बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। इस दौरान नेशनल हाईवे भी कुछ देर के लिए जाम हो गया था। हालांकि, अब हालात कंट्रोंल में है। तोड़फोड़ और पुलिस लाठीचार्च की तीन तस्वीरें… पुलिस भीड़ को ऊण गांव में घुसने से रोकने की कोशिश करती हुई। कुछ लोगों ने पथराव कर दिया तो पुलिस को लाठीचाज करना पड़ा। लाठीचार्ज से बचने लोग हाईवे की तरफ भागे। पहले समझिए कि 2 साल पहले हुई शादी का मामला अब कैसे उठा… दरअसल, हाल ही में पाटण की रहने वाली फेमस गुजराती सिंगर किंजल रबारी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर अपनी लव-मैरीज की जानकारी दी थी। पोस्ट में बताया था कि उन्होंने चौधरी समुदाय के लड़के अशोक चौधरी से लव मैरिज कर ली है। उनकी इस इंटर कास्ट मैरिज की चर्चा होते ही बवाल मच गया था। दोनों समुदाय के नेता आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद किंजल ने वह पोस्ट डिलीट कर दी थी। करीब पांच दिनों बाद किंजल ने दूसरी पोस्ट कर कहा कि उन्होंने अपनी शादी कैंसिल कर दी है। वे घर वापस आ गई हैं और अब अपने ही समुदाय में शादी करेंगी। बस, इसी मामले के बाद दोनों समुदायों का यह साल भर पुराना मामला उठ खड़ा हुआ है। गांव की सड़क पर नेशनल हाईवे पर लगा जाम। अब जानिए, डेढ़ साल पहले हुई लव-मैरिज का मामला थराद तहसील के रूनी गांव की कंकू चौधरी ने करीब दो साल पहले ऊण गांव के महादेव रबारी से लव मैरिज कर ली थी। दोनों का जीवन खुशी-खुशी चल रहा है और उनका एक बेटा भी है। हालांकि, अब चौधरी समुदाय कंकू चौधरी को घर वापसी पर अड़ा है। इसी को लेकर चौधरी समुदाय का महासम्मेलन हुआ था। चौधरी समाज के अध्यक्ष रजनेश चौधरी ने बताया कि यह मामला समाज की प्रतिष्ठा से जुड़ा है। उन्होंने अगले पांच दिनों में रबारी समाज के नेताओं से बात करने के बाद बेटी को वापस लाने की जिम्मेदारी ली है। यदि बेटी पांच दिनों के भीतर वापस नहीं आती है, तो आगे की रणनीति बाद में तय की जाएगी। फिलहाल युवाओं में आक्रोश है, समाज के नेता उन्हें शांत करने का प्रयास कर रहे हैं। हंगामे से नेशनल हाईवे पर तीन किमी लंबा जाम लग गया। कंकू ने कहा- मेरा बेटा है, परिवार से अलग न करें… वहीं, कंकू चौधरी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में अपने परिवार से किसी भी प्रकार का मनमुटाव न रखने की अपील की थी। कंकू चौधरी ने रबारी और चौधरी समुदायों के नेताओं से हाथ जोड़कर कहा है कि उन्होंने 31 मार्च, 2024 को अपनी मर्जी से घर छोड़ा और महादेव रबारी से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की थी। अब उनका एक साल का बेटा भी है। इसलिए उन्हें अपने पति और मासूम बेटे से जुदा न करें। नेताओं को जो भी निर्णय लेना चाहिए, वह इस तरह से लेना चाहिए कि उनका परिवार न टूटे। ————— गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड के बाद गुजरात में UCC की तैयारी:समिति ने CM भूपेंद्र पटेल को रिपोर्ट सौंपी उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी जल्द यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो सकता है। यूसीसी के लिए गठित समिति ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। समिति ने विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत अध्ययन के बाद इसने अंतिम सिफारिशों सहित अपनी रिपोर्ट पेश की है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Two years ago an inter-caste marriage sparked ruckus in gujarat

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थराद1 घंटे पहले कॉपी लिंक गुजरात की थराद तहसील में करीब 2 साल पहले हुई एक इंटर कास्ट मैरिज को लेकर बवाल मचा हुआ है। इस मामले में चौधरी और रबारी समुदाय के लोग आमने सामने हैं। इसी मामले को लेकर बुधवार को थराद में चौधरी समुदाय का महासम्मेलन हुआ। इसमें उत्तर गुजरात और राजस्थान के अंजना चौधरी समुदाय के नेताओं समेत बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे। सम्मेलन के बाद, चौधरी समुदाय के हजारों लोगों की भीड़ अपने समुदाय की बेटी की घर-वापसी की मांग करते हुए ओगड़ के ऊण गांव जा पहुंची। भीड़ ने गांव का घेराव कर गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की। सूचना मिलते ही डीएसपी समेत बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया। इस दौरान नेशनल हाईवे भी कुछ देर के लिए जाम हो गया था। हालांकि, अब हालात कंट्रोंल में है। तोड़फोड़ और पुलिस लाठीचार्च की तीन तस्वीरें… पुलिस भीड़ को ऊण गांव में घुसने से रोकने की कोशिश करती हुई। कुछ लोगों ने पथराव कर दिया तो पुलिस को लाठीचाज करना पड़ा। लाठीचार्ज से बचने लोग हाईवे की तरफ भागे। पहले समझिए कि 2 साल पहले हुई शादी का मामला अब कैसे उठा… दरअसल, हाल ही में पाटण की रहने वाली फेमस गुजराती सिंगर किंजल रबारी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर अपनी लव-मैरीज की जानकारी दी थी। पोस्ट में बताया था कि उन्होंने चौधरी समुदाय के लड़के अशोक चौधरी से लव मैरिज कर ली है। उनकी इस इंटर कास्ट मैरिज की चर्चा होते ही बवाल मच गया था। दोनों समुदाय के नेता आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद किंजल ने वह पोस्ट डिलीट कर दी थी। करीब पांच दिनों बाद किंजल ने दूसरी पोस्ट कर कहा कि उन्होंने अपनी शादी कैंसिल कर दी है। वे घर वापस आ गई हैं और अब अपने ही समुदाय में शादी करेंगी। बस, इसी मामले के बाद दोनों समुदायों का यह साल भर पुराना मामला उठ खड़ा हुआ है। गांव की सड़क पर नेशनल हाईवे पर लगा जाम। अब जानिए, डेढ़ साल पहले हुई लव-मैरिज का मामला थराद तहसील के रूनी गांव की कंकू चौधरी ने करीब दो साल पहले ऊण गांव के महादेव रबारी से लव मैरिज कर ली थी। दोनों का जीवन खुशी-खुशी चल रहा है और उनका एक बेटा भी है। हालांकि, अब चौधरी समुदाय कंकू चौधरी को घर वापसी पर अड़ा है। इसी को लेकर चौधरी समुदाय का महासम्मेलन हुआ था। चौधरी समाज के अध्यक्ष रजनेश चौधरी ने बताया कि यह मामला समाज की प्रतिष्ठा से जुड़ा है। उन्होंने अगले पांच दिनों में रबारी समाज के नेताओं से बात करने के बाद बेटी को वापस लाने की जिम्मेदारी ली है। यदि बेटी पांच दिनों के भीतर वापस नहीं आती है, तो आगे की रणनीति बाद में तय की जाएगी। फिलहाल युवाओं में आक्रोश है, समाज के नेता उन्हें शांत करने का प्रयास कर रहे हैं। हंगामे से नेशनल हाईवे पर तीन किमी लंबा जाम लग गया। कंकू ने कहा- मेरा बेटा है, परिवार से अलग न करें… वहीं, कंकू चौधरी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में अपने परिवार से किसी भी प्रकार का मनमुटाव न रखने की अपील की थी। कंकू चौधरी ने रबारी और चौधरी समुदायों के नेताओं से हाथ जोड़कर कहा है कि उन्होंने 31 मार्च, 2024 को अपनी मर्जी से घर छोड़ा और महादेव रबारी से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की थी। अब उनका एक साल का बेटा भी है। इसलिए उन्हें अपने पति और मासूम बेटे से जुदा न करें। नेताओं को जो भी निर्णय लेना चाहिए, वह इस तरह से लेना चाहिए कि उनका परिवार न टूटे। ————— गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड के बाद गुजरात में UCC की तैयारी:समिति ने CM भूपेंद्र पटेल को रिपोर्ट सौंपी उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी जल्द यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हो सकता है। यूसीसी के लिए गठित समिति ने मंगलवार को मुख्यमंत्री को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। समिति ने विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत अध्ययन के बाद इसने अंतिम सिफारिशों सहित अपनी रिपोर्ट पेश की है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

18 लाख साल से मच्छर पी रहे हैं इंसानों का खून, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा | Mosquitoes Sucking Human Blood Since 1.8 Million Years

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होमफोटोनॉलेज मच्छरों को कब लगा इंसानों के खून का चस्का? आज भी हर साल लेते हैं 6 लाख की जान Last Updated:February 26, 2026, 23:17 IST दुनिया का सबसे खतरनाक जानवर कौन है? शेर, शार्क या सांप? जवाब है मच्छर. ये नन्हा सा जीव हर साल करीब 6 लाख से ज्यादा लोगों की जान ले लेता है. मलेरिया, डेंगू और वेस्ट नाइल वायरस जैसी बीमारियों के जरिए इसने सदियों से इंसानों को खौफ में रखा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मच्छरों ने इंसानों का खून पीना कब शुरू किया? एक नई इंटरनेशनल रिसर्च ने चौंकाने वाला दावा किया है. रिसर्च के मुताबिक, मच्छरों और इंसानों का ये खूनी रिश्ता आज का नहीं, बल्कि करीब 18 लाख साल पुराना है. साइंटिस्ट्स ने डीएनए एनालिसिस के जरिए उस दौर का पता लगाया है जब मच्छरों ने जानवरों को छोड़कर आदिमानवों को अपना शिकार बनाना शुरू किया था. यह कहानी दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों से शुरू होती है, जहां हमारे पूर्वज पहली बार इन नन्हे शिकारियों के संपर्क में आए थे. साइंटिस्ट्स ने एनोफिलीज ल्यूकोस्फायरस ग्रुप के मच्छरों पर की है. ये वही ग्रुप है जिसके मच्छर मलेरिया फैलाते हैं. रिसर्च के लिए 1992 से 2020 के बीच दक्षिण-पूर्व एशिया से इकट्ठा किए गए 11 अलग-अलग प्रजातियों के मच्छरों का डीएनए टेस्ट किया गया. कंप्यूटर मॉडल्स की मदद से उनके म्यूटेशन और इवोल्यूशन की हिस्ट्री चेक की गई. एनालिसिस से पता चला कि मच्छरों में इंसानों का खून पीने की आदत आज से 29 लाख से 16 लाख साल पहले के बीच डेवलप हुई. यह वह दौर था जब आदिमानव यानी होमो इरेक्टस पहली बार दक्षिण-पूर्व एशिया के सुंडालैंड इलाके में पहुंचे थे. सुंडालैंड आज के बोर्नियो, जावा और सुमात्रा जैसे द्वीपों का हिस्सा है. Add News18 as Preferred Source on Google इस बदलाव से पहले मच्छर इस इलाके में रहने वाले दूसरे जानवरों और बंदरों का खून पीकर खुश थे. लेकिन जैसे ही होमो इरेक्टस की आबादी बढ़ी, मच्छरों के भीतर एक जेनेटिक बदलाव यानी म्यूटेशन हुआ. उन्होंने इंसानों की बॉडी ऑडर यानी शरीर की गंध को पहचानने वाले रिसेप्टर्स डेवलप कर लिए. यह समझना जरूरी है कि मच्छरों का यह विकास अचानक नहीं हुआ. इंसानों की त्वचा पतली होती है और वे झुंड में रहते थे, जिससे मच्छरों के लिए खून पीना आसान हो गया. धीरे-धीरे मच्छरों ने इंसानी पसीने और कार्बन डाइऑक्साइड को पहचानने की क्षमता हासिल कर ली, जो उन्हें एक परफेक्ट शिकारी बनाती है. यह रिसर्च इंसानों के इतिहास की खाली जगहों को भी भरती है. दक्षिण-पूर्व एशिया में आदिमानवों के बहुत कम जीवाश्म मिले हैं. ऐसे में मच्छरों के इवोल्यूशन की टाइमलाइन यह साबित करती है कि 18 लाख साल पहले इस इलाके में इंसानों की अच्छी-खासी आबादी मौजूद थी. अगर वहां इंसान नहीं होते, तो मच्छर कभी भी इंसानी खून के प्रति आकर्षित होने वाले जीन डेवलप नहीं करते. पुरानी थ्योरीज मानती थीं कि मच्छरों ने इंसानों को काटना 61 हजार से 5 लाख साल पहले शुरू किया था, लेकिन इस नई खोज ने इतिहास को लाखों साल पीछे धकेल दिया है. आज दुनिया भर में मच्छरों की करीब 3,500 प्रजातियां हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही इंसान की जान की दुश्मन हैं. मलेरिया के अलावा डेंगू, पीला बुखार और जीका वायरस भी इन्हीं की देन हैं. मच्छरों की लार में मौजूद केमिकल्स इंसानी इम्यून सिस्टम को चकमा देने में माहिर होते हैं. साइंटिस्ट्स का मानना है कि मच्छरों के इस पुराने इतिहास को समझकर हम भविष्य में बीमारियों को रोकने के नए तरीके खोज सकते हैं. फिलहाल तो ये साफ है कि जब तक इंसान धरती पर रहेंगे, ये 18 लाख साल पुराना ‘खून का खेल’ जारी रहेगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : February 26, 2026, 23:17 IST

Rajinikanth-Kamal’s ‘KHxRK’ introduction video released, both will be seen together after 47 years, KHxRK

Rajinikanth-Kamal's 'KHxRK' introduction video released, both will be seen together after 47 years, KHxRK

चेन्नई38 मिनट पहले कॉपी लिंक रेड जायंट मूवीज की फिल्म ‘KHxRK’ के जरिए कमल हासन और रजनीकांत 47 साल बाद एक साथ नजर आने वाले हैं। अब फिल्म का एक खास इंट्रोडक्शन वीडियो सामने आया है, जिसने इस जोड़ी के साथ आने को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है। इस वीडियो में फिल्म की थीम और अंदाज की झलक देखने को मिलती है। वीडियो की शुरुआत एक दिलचस्प कन्फ्यूजन से होती है-पहले किस कमरे में प्रवेश किया जाए। इसके बाद बातचीत में ‘शनमुगा प्रिया’ और ‘कोकिला प्रिया’ जैसे नामों के साथ ‘म्यूजिकल नोट’ का जिक्र आता है। वीडियो में म्यूजिक को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में संवाद होते हैं। एक किरदार कहता है कि उसे संगीत की समझ है, जबकि दूसरा मजाकिया लहजे में ‘दो उंगलियों की तकनीक’ की बात करता है। इस दौरान कमरे के चयन को लेकर समानता दिखाई जाती है। वीडियो के एक हिस्से में कहा जाता है…‘जब बीथोवन की सिम्फनी बप्पी लाहिड़ी के ग्रूव से मिलती है, तब एक लेजेंडरी मिक्स जन्म लेता है।’ इसके बाद होती है रजनीकांत और कमल की दमदार एंट्री। इसके बाद दोनों सूट, बूट, घड़ी और चश्मा पहनते हुए एक-दूसरे की पसंद के विपरीत चीजें चुनते हैं, जिससे मजेदार दृश्य सामने आते हैं। फिर ये दिग्गज अभिनेता एक गैराज में खड़ी कार की ओर बढ़ते हैं, जहां स्टाइलिश मॉडल्स शानदार और विंटेज कारों को धो रही होती हैं। इस फिल्म का निर्देशन नेल्सन दिलीपकुमार के हाथ में है और म्यूजिक अनिरुद्ध रविचंदर दे रहे हैं। फिल्म तमिल, तेलुगु और हिंदी में रिलीज की जाएगी। फिलहाल फिल्म से जुड़ी अन्य जानकारियां साझा नहीं की गई हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Khabar Hatke China Space Tomato & Kid Returns Home After 15 Years; AI Detects Disease From Cough

Khabar Hatke China Space Tomato & Kid Returns Home After 15 Years; AI Detects Disease From Cough

चीन ने हाल ही में अंतरिक्ष में लाल टमाटर उगा दिए। वहीं 6 साल की उम्र में गायब हुआ बच्चा 15 साल बाद घर लौट रहा है। उधर कर्नाटक के एक स्टार्टअप ने ऐसा एप बनाया है, जो खांसी की आवाज से बीमारी का पता लगा लेगा। . आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… ************* रिसर्च सहयोग: आकाश मिश्रा खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

Surgical Tool Found in Womans Stomach 5 Years Later

Surgical Tool Found in Womans Stomach 5 Years Later

Hindi News National Alappuzha Medical College: Surgical Tool Found In Womans Stomach 5 Years Later अलाप्पुझा10 घंटे पहले कॉपी लिंक उषा जोसेफ के पेट में मौजूद आर्टरी फोर्सेप्स, उन्होंने मई 2021 में गर्भाशय की गांठ की सर्जरी कराई थी। सर्जरी के 5 साल बाद महिला के पेट में सर्जिकल टूल (आर्टरी फोर्सेप्स) मिलने का मामला सामने आया है। केरल के अलाप्पुझा के पुन्नप्रा गांव की रहने वाली उषा जोसेफ (51) के पेट में टूल मिला है। ऊषा के बेटे शिबिन ने बताया कि मां की मई 2021 में अलाप्पुजा मेडिकल कॉलेज में गर्भाशय की गांठ की सर्जरी हुई थी। इसके बाद वह घर आ गई थीं, लेकिन उनके पेट में लगातार दर्द बना रहता था। शिबिन के मुताबिक मां का पेट दर्द का इलाज लगातार चल रहा था। हमे लगा कहीं किडनी में स्टोन तो नहीं, इसलिए उनका एक्स-रे कराया। उनके पेट में आर्टरी फोर्सेप्स (छोटी ब्लड वेसल्स को पकड़ने का टूल) नजर आया। शिबिन ने कहा कि हम एक्स-रे रिपोर्ट लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। तो वहां के डॉक्टरों ने मां के पेट से सर्जरी करके टूल निकालने की बात कही। लेकिन अब मां को कोच्चि के निजी अस्पताल में एडमिट कराया है। उषा जोसेफ के पेट में मौजूद आर्टरी फोर्सेप्स, उन्होंने मई 2021 में गर्भाशय की गांठ की सर्जरी कराई थी। मेडिकल कॉलेज ने किया मुआवजे से इनकार शिबिन ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने इस मामले में मुआवजा देने से इनकार कर दिया है। मैं अब पुलिस में अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज कराऊंगा। मेडिकल कॉलेज की सर्जन डॉ. ललिताम्बिका (वर्तमान में रिटायर) ने मां की सर्जरी के लिए पैसे भी लिए थे। अलाप्पुजा मेडिकल कॉलेज की रिटायर्ड सर्जन डॉ. ललिताम्बिका। रिटायर्ड सर्जन बोलीं- मैंने सर्जरी नहीं की वहीं, मामले पर रिटायर्ड सर्जन डॉ. ललिताम्बिका ने कहा है कि उन्होंने ऊषा की सर्जरी नहीं की थी। यह सर्जरी उनके रिटायरमेंट से ठीक पहले हुई थी, जब वह अस्पताल के सर्जरी के बड़े केस में शामिल भी नहीं थीं। मैं उस समय यूनिट हेड थी, इसलिए मुझ पर आरोप लगाया जा रहा है। डॉ. ललिताम्बिका ने कहा कि ऑपरेशन से पहले और बाद में फ्लोर नर्स टूल्स की गिनती करती है। इस फेल्योर के लिए वही जिम्मेदार है। मैंने मरीजों से किसी तरह की रकम नहीं ली है। स्वास्थ्य मंत्री बोले- अधिकारियों को निलंबित करेंगे मामले पर केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने कहा कि जो भी अधिकारी-कर्मचारी इस सर्जरी में शामिल थे और आज भी सरकारी सेवा में हैं। उनके खिलाफ जांच होगी। लापरवाही मिलने पर उन्हें सस्पेंड किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिना स्क्रब नर्स के सर्जरी कैसे की जा सकती है? अगर ऐसी सर्जरी होती है, तो यह अपने आप में उल्लंघन होगा। मामले की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट हेल्थ एजुकेशन डायरेक्टर को सौंप दी गई है। अब मामले की जांच के लिए सीनियर डॉक्टरों की एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। …………………… यह खबर भी पढ़ें… प्रयागराज में महिला के पेट से निकलीं 107 पथरियां: 3 सालों से पेट दर्द से पीड़ित थीं; डॉक्टर बोले- जान को खतरा हो सकता था उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 70 साल की बुजुर्ग महिला के पेट से 107 पथरियां निकाली गईं। सभी 5 से 6 mm के साइज की थीं। डॉक्टर के मुताबिक महिला का अगर जल्द ऑपरेशन नहीं किया जाता तो उनकी जान को खतरा हो सकता था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Railway Recruitment 5349 Posts | Age Limit 40 Years; Fee ₹100

Railway Recruitment 5349 Posts | Age Limit 40 Years; Fee ₹100

1 दिन पहले कॉपी लिंक रेलवे रिक्रूटमेंट सेल (RRC) ने पश्चिम रेलवे भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 21 फरवरी से शुरू होगी। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट https://www.rrc-wr.com पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। यह ट्रेनिंग एक साल के लिए दी जाएगी। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : न्यूनतम 50% अंकों के साथ 10वीं पास NCVT के मान्यता प्राप्त संस्थान से आईटीआई सर्टिफिकेट प्राप्त किया हो। एज लिमिट : न्यूनतम : 15 साल अधिकतम : 24 साल एससी/एसटी : 5 साल की छूट ओबीसी : 3 साल की छूट पीडब्ल्यूडी : 10 साल की छूट फीस : जनरल,ओबीसी,ईडब्ल्यूएस : 100 रुपएएससी, एसटी,पीडब्ल्यूबीडी,महिला : नि:शुल्क सिलेक्शन प्रोसेस : मेरिट बेसिस पर शॉर्टलिस्टिंग डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन स्टाइपेंड : रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नियमों के अनुसार ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट www.rrc-wr.com पर जाएं। होमपेज पर अप्लाई ऑनलाइन के लिंक पर क्लिक करें। न्यू रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करके मांगी गई डिटेल्स दर्ज करें। रजिस्ट्रेशन होने के बाद लॉग इन करें। फीस (यदि लागू हो) जमा करें। फॉर्म का प्रिंटआउट निकाल कर रख लें। ऑफिशियल वेबसाइट लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक सरकारी नौकरी की ये खबरें भी पढ़ें पंजाब में एक्साइज इंस्पेक्टर के 197 पदों पर निकली भर्ती; ग्रेजुएट्स को मौका, सैलरी 1 लाख 12 हजार तक पंजाब अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (PSSSB) ने एक्साइज इंस्पेक्टर के पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट sssb.punjab.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Tarique Rahman to be Bangladesh PM After 17 Years Abroad; Profile

Tarique Rahman to be Bangladesh PM After 17 Years Abroad; Profile

Hindi News Career Tarique Rahman To Be Bangladesh PM After 17 Years Abroad; Profile 4 दिन पहले कॉपी लिंक 17 फरवरी को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की शपथ लेने वाले तारिक रहमान 1971 में पाकिस्तान से आजादी की लड़ाई में 6 साल की उम्र में अपने भाई और मां सहित जेल गए थे। BNP तारिक को बांग्लादेश आजादी की लड़ाई का सबसे कम उम्र का कैदी बताती है। लॉ की पढ़ाई छोड़ बिजनेस में शिफ्ट हुए तारिक ने अपनी शुरुआती पढ़ाई ढाका में सैनिकों के बच्चों के लिए बने स्कूल BAF शाहिन कॉलेज से की। सेंट जोसेफ हायर सेकेंडरी स्कूल फिर ढाका रेजिडेंशियल मॉडल कॉलेज से सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट और एडमजी कैंटनमेंट कॉलेज से हायर सेकेंडरी सर्टिफिकेट पूरा किया। 1985-86 में ढाका यूनिवर्सिटी में पहले लॉ डिपार्टमेंट में दाखिला लिया, फिर इंटरनेशनल रिलेशंस में शिफ्ट हो गए, लेकिन दूसरे साल 1987 में पढ़ाई छोड़ दी और टेक्सटाइल और शिपिंग बिजनेस में चले गए। इरशाद की निरंकुश सत्ता के खिलाफ आंदोलन में कूदे तारिक एक राजनीतिक परिवार से आते थे, इसलिए बचपन से ही उनकी रुचि राजनीति और सामाजिक मुद्दों में रही। उनके पिता जिय-उर-रहमान बांग्लादेश सेना के अधिकारी थे और 1971 के युद्ध में पाकिस्तान के खिलाफ शामिल रहे। पिता के युद्ध के दिनों से प्रेरित होकर उनके भीतर देश सेवा की भावना मजबूत हुई। 1988 में वे अपनी मां खालिदा जिया के साथ मोहम्मद इरशाद की निरंकुश सरकार के खिलाफ आंदोलन में सक्रिय रहे। बिजनेस के साथ राजनीति में भी सक्रिय तारिक टेक्सटाइल और एग्रो बेस्ड इंडस्ट्री में एक सफल उद्यमी बने। 1988 में वे बीएनपी पार्टी के प्राइमरी मेंबर बने और बोगरा के गबताली ब्रांच में काम करने लगे। 1991 और 1996 के चुनाव में उन्होंने अपनी मां के लिए प्रचार किया। 2001 से 2006 तक बीएनपी सरकार के दौरान वे सक्रिय रहे, लेकिन कोई सरकारी पद नहीं लिया। वे जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने में लगे रहे। गांव गांव जाकर लोगों की समस्या सुनते और विकास के काम करते थे, जैसे किसानों को बीज और खाद बांटना तथा गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम चलाना। वे पर्यावरण, युवा ट्रेनिंग और आईटी जैसे क्षेत्रों में भी खास रुचि रखते थे। इलाज के लिए लंदन गए और 17 साल तक वापस नहीं आए 7 मार्च 2007 को चुनाव की तैयारी के दौरान सेना समर्थित अंतरिम सरकार ने उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया। वे 18 महीने जेल में रहे, जहां उन्हें बिजली के झटके जैसे यातनाएं दी गईं। 3 सितंबर 2008 को वे जमानत पर रिहा हुए और 11 सितंबर 2008 को इलाज के लिए लंदन चले गए। 2008 से 2025 तक वे लंदन के किंग्सटन सबअर्ब में अपनी पत्नी डॉ जुबैदा रहमान और बेटी जैमा रहमान के साथ रहते थे। पीठ की चोट के कारण उनका इलाज चलता रहा, लेकिन वे राजनीति से जुड़े रहे। निर्वासन के दौरान वे इंटरनेट और टीवी से बांग्लादेश की खबरें देखते, रिसर्च करते और विद्वानों से बातचीत करते थे। वे दूर से ही बीएनपी का नेतृत्व करते रहे। बांग्लादेश चुनाव 2014 का बहिष्कार, 2018 में स्काइप से इंटरव्यू और पार्टी के लिए पीआर फर्म रजिस्टर कराना इसी दौर में हुआ। 2018 में मां के जेल जाने के बाद वे बीएनपी के एक्टिंग चेयरमैन बने। 17 साल बाद लंदन से बांग्लादेश लौटने पर ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अपने समर्थकों का अभिवादन करते हुए। 17 साल बाद वापस लौटने पर पीएम बनेंगे रहमान 25 दिसंबर 2025 को वे अपने परिवार के साथ बांग्लादेश लौटे। जनवरी 2026 में उन्हें बीएनपी का चेयरमैन चुना गया। फरवरी 2026 में बोगरा और ढाका से चुनाव जीतकर संसद सदस्य बने। अब वे 17 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री पद संभालने वाले हैं। स्टोरी- नीतीश कुमार —————————————————– यह खबर भी पढ़ें- आज की सरकारी नौकरी:AIIMS NORCET 10 का नोटिफिकेशन जारी ; झारखंड में 355 लेक्चरर की वैकेंसी, बिहार सेकेंड इंटर लेवल भर्ती में अब 26,426 वैकेंसी आज की सरकारी नौकरी में जानकारी AIIMS NORCET 10 का नोटिफिकेशन जारी होने की। इस भर्ती के लिए आवेदन की शुरुआत 24 फरवरी 2026 से की जाएगी। झारखंड में 355 लेक्चरर की भर्ती का नोटिफिकेशन जारी। इस भर्ती के लिए आवेदन की शुरुआत 20 फरवरी 2026 से होगी। साथ ही बिहार सेकेंड इंटर लेवल भर्ती में अब 26,426 पदों पर भर्ती। इस भर्ती में 1107 नए पदों को जोड़ा गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…