हनीमून मर्डर 2.0 ; गला घोंटा, बेरहमी से पीटा; पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर पति को उतार मौत के घाट

Sri Ganganagar Honeymoon Murder : श्रीगंगानगर के गांव 1KLM की सुनसान सड़क पर मिले आशीष की मौत ने इलाके को हिला दिया. शुरुआत में मामला सड़क हादसे का लगा, लेकिन पुलिस जांच में यह एक साजिशन हत्या निकली. महज तीन महीने पहले ब्याही पत्नी अंजलि ने अपने प्रेमी संजय और दो साथियों के साथ मिलकर आशीष की हत्या करवाई. टहलने के बहाने सुनसान जगह ले जाकर लाठी-डंडों से पीटा गया और गला घोंट दिया गया. लूट का नाटक रचा गया, लेकिन पुलिस की सख्ती में सच्चाई सामने आ गई. चारों आरोपी गिरफ्तार हैं.
दिल्ली पुलिस ने 48 घंटे में छात्रा का मोबाइल बरामद किया: weeping girl arrived police station case solved by delhi police in 48 hours shahdara district gtb enclave

नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के शाहदरा जिले से इंसानियत और पुलिसिया मुस्तैदी की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने खाकी के प्रति जनता के भरोसे को और मजबूत किया है. यह कहानी एक छात्रा की मेहनत, उसके आंसुओं और दिल्ली पुलिस के उस वादे की है, जिसे पुलिस ने दो दिन की मोहलत में पूरा कर दिखाया. एक छात्रा के साथ ऐसी घटना घटी, जिसने दिल्ली पुलिस के अधिकारी को दिल पसीज गया. घटना है तो बहुत छोटी, लेकिन इतनी मार्मिक है, जिसको सुनकर आपका भी दिल पसीज जाएगा. 31 जनवरी 2026 की शाम एक छात्रा रोती-बिलखती हुई जी.टी.बी. एन्क्लेव थाने पहुंची. उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. उसने पुलिस को बताया कि उसने अपनी पॉकेट मनी से पाई-पाई जोड़कर एक मोबाइल फोन खरीदा था, जिसे दो मोटर साइकिल सवार लड़कों ने उससे छीन लिया. छात्रा का रो-रोकर बुरा हाल था, वह बार-बार कह रही थी कि वह अब दूसरा फोन नहीं खरीद पाएगी और उसकी परीक्षाओं पर भी इसका असर पड़ेगा. छात्रा के साथ क्या हुआ था? छात्रा की हालत देख पुलिस टीम भावुक हो गई. जीटीबी एन्क्लेव पुलिस स्टेशन की टीम ने छात्रा को दिलासा दिया और एक बड़ा वादा किया. पुलिस ने बोला- बेटी, तुम शांति से अपनी परीक्षा की तैयारी करो, तुम्हारा छीना हुआ फोन दो दिन के भीतर वापस मिल जाएगा शुरू हुआ दिल्ली पुलिस का एक्शन शाहदरा जिले के डीसीपी प्रशांत गौतम के निर्देश पर एक क्रैक टीम बनाई गई. इस टीम में हेड कांस्टेबल मनीष, मनोज, सचिन और कांस्टेबल अभिषेक शामिल थे. टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की जांच की. फुटेज में दो संदिग्ध युवक हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर झपटमारी कर भागते हुए नजर आए. पुलिस ने भागने के रास्ते पर लगे कैमरों का पीछा किया, जिससे आरोपियों के ठिकाने का अंदाजा लगा. 48 घंटे में ही पूरा हुआ ऑपरेशन 3 फरवरी 2026 को, जब क्रैक टीम गश्त पर थी, तभी एक मुखबिर से गुप्त सूचना मिली कि वारदात में शामिल संदिग्ध युवक फिर से किसी वारदात को अंजाम देने के इरादे से इलाके में घूम रहा है. पुलिस ने तुरंत घेराबंदी की और दोनों आरोपियों को दबोच लिया. पूछताछ में उन्होंने छात्रा से मोबाइल छीनने की बात कबूल कर ली. पकड़े गए दोनों आरोपी कोई नौसिखिए नहीं, बल्कि पुराने अपराधी हैं. मानसरोवर पार्क का रहने वाला राहुल पहले भी 8 आपराधिक मामलों में शामिल रह चुका है. 36 साल का राजेश कुमार सैनी मॉडर्न शाहदरा का रहने वाला 4 वारदातों में शामिल रहा है. दिल्ली पुलिस ने अपना वादा निभाया और 48 घंटे के भीतर आरोपी को पकड़कर मोबाइल बरामद कर लिया. अब छात्रा अपनी परीक्षाएं बिना किसी तनाव के दे सकेगी. डीसीपी प्रशांत गौतम ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस का काम केवल अपराधी को पकड़ना ही नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय दिलाना और समाज में सुरक्षा की भावना पैदा करना भी है.
दिल्ली में रिक्शा चालक से Oppo मोबाइल लूट, चमन गिरफ्तार : delhi police anand parbat rickshaw puller mobile snatching robbery case arrest 22 year boy bns sections

होमताजा खबरDelhi नाम- चमन, काम- रिक्शा चालकों से मोबाइल लूटना, ऐसे रगड़ दिया दिल्ली पुलिस Last Updated:February 05, 2026, 17:50 IST Delhi Crime News: दिल्ली पुलिस ने आनंद पर्वत की पंजाबी बस्ती निवासी चमन को रामस्वरूप विद्यार्थी मार्ग से गिरफ्तार किया, जिसने 3 फरवरी 2026 को ओप्पो मोबाइल लूट में दो साथियों संग रिक्शा चालक को निशाना बनाया था. फाइल फोटो- दिल्ली पुलिस नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने सनसनीखेज लूट की वारदात को सुलझाया है, जो आपको हैरान कर देगा. पुलिस ने एक शातिर लुटेरे को गिरफ्तार किया है, जिसने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर एक गरीब रिक्शा चालक को अपना निशाना बनाया था. घटना 3 फरवरी 2026 की हुई थी. रिक्शा चालक रात के समय पहाड़गंज से काम निपटाकर लौट रहा था. जैसे ही वह रोहतक रोड पर एक जूस की दुकान के पास पहुंचा, तीन लड़कों ने उसका रास्ता रोक लिया. वारदात को बड़े ही शातिर तरीके से अंजाम दिया गया. रिक्शा चालक ने बताया एक शख्स धक्का देकर नीचे गिरा दिया. दो अन्य ने उसके हाथ और पैर पकड़ लिए ताकि वह हिल न सके. तीसरे आरोपी ने जबरन उसकी पैंट की जेब से ओप्पो (Oppo) मोबाइल फोन निकाला और तीनों मौके से फरार हो गए. पीड़ित की शिकायत पर आनंद पर्वत थाने में बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया. दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन चमन लूट की गंभीरता को देखते हुए एसीपी पटेल नगर और आनंद पर्वत एसएचओ के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई. जांच के दौरान पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और अपने गुप्तचरों को सक्रिय किया. बीट पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई ताकि संदिग्धों पर नजर रखी जा सके. गुप्त सूचना पर मिली बड़ी कामयाबी तलाश के दौरान पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली कि लूट में शामिल एक आरोपी रामस्वरूप विद्यार्थी मार्ग पर सीएनजी पंप के पास खड़ा है. पुलिस टीम ने बिना देरी किए मौके पर दबिश दी और मुखबिर की निशानदेही पर आरोपी को धर दबोचा. पकड़े गए आरोपी की पहचान चमन, जिसकी उम्र 22 साल के रूप में हुई, जो आनंद पर्वत की पंजाबी बस्ती का रहने वाला है. तलाशी लेने पर उसके पास से रिक्शा चालक का लूटा हुआ मोबाइल फोन मिल गया. नशे की लत बनी जुर्म की वजह पूछताछ के दौरान आरोपी चमन ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि वह कम समय में ज्यादा पैसे कमाने और अपनी नशे की जरूरतों को पूरा करने के लिए चोरी, झपटमारी और लूट जैसी वारदातों को अंजाम देता है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, चमन का पुराना आपराधिक इतिहास भी है. वह साल 2025 में भी आर्म्स एक्ट के तहत आनंद पर्वत थाने में गिरफ्तार हो चुका है. पुलिस अब चमन के उन दो अन्य साथियों की तलाश कर रही है जो इस वारदात में शामिल थे और अभी फरार हैं. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : February 05, 2026, 17:48 IST
20 साल की दिव्यांग बच्ची, 16 रेप के आरोपी; DNA जांच में बच्चे का दादा ही निकला ‘बाप’

Last Updated:February 05, 2026, 17:25 IST Mumbai Crime News: मुंबई में एक बाप अपनी बेटी से रेप कर प्रेग्नेंट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने बताया कि लड़की मूक-बधिर थी, वह अपनी पीड़ा किसी से बयां नहीं कर सकती थी. पुलिस ने बताया कि पेट दर्द का इलाज कराने के लिए दादी के साथ अस्पताल पहुंची थी, जहां उसे पांच महीने के प्रेग्नेंसी का पता चला. पेट दर्द की इलाज कराने असप्ताल पहुंची लड़की पांच महीने की प्रेग्नेंट निकली. (सांकेतिक) Mumbai Crime News: मुंबई के पॉश से दिल दहलाने वाली खबर आई है. दक्षिण मुंबई में एक 20 साल की मूक-बधिर संग दरिंदगी ने लोगों को झकझोर दिया. दिल दहलाने वाली एक ऐसी कहानी है जिसे सुनकर किसी भी पत्थर दिल इंसान की रूह कांप जाए. एक 15 साल की युवती, जो न बोल सकती थी और न ही दुनिया को समझने की मानसिक स्थिति में थी, उसे हवस के भेड़ियों ने अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया. तबीयत ज्यादा खराब होने के बाद, जब अस्पताल भर्ती कराया गया, तो दरिंदों की पोल खुली. दरअसल, अस्पताल पेट दर्द को लेकर पहुंची पांच महीने की प्रेग्नेंट थी. वहीं, डॉक्टरों की टीम ने पुलिस की निगरानी में DNA रिपोर्ट में लड़की का बाप ही उसके बच्चे का बाप निकला. पुलिस के सूत्रों के मुताबिक यह मामला 2025 में तब सामने आया. हॉस्पिटल स्टाफ ने मेडिकल जांच के दौरान पाया कि चुप रहने वाली महिला पांच महीने की प्रेग्नेंट थी. सितंबर में अपनी दादी से पेट में तकलीफ की शिकायत करने के बाद उसे शहर के कामा एंड एल्ब्लेस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने जब युवती की जांच की, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. वह युवती, जो अपनी तकलीफ जुबां से बयां नहीं कर सकती थी, पांच महीने की गर्भवती थी. पुलिस जांच में खुला राजअस्पताल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. जब पुलिस ने तफ्तीश शुरू की, तो परत दर परत सच सामने आया. सच ने समाज के चेहरे पर तमाचा जड़ दिया. पीड़ित युवती मानसिक रूप से दिव्यांग और मूक-बधिर थी, जिसका फायदा उठाकर एक-दो नहीं, बल्कि 16 अलग-अलग दरिंदों ने बार-बार उसके साथ घिनौना काम किया. DNA रिपोर्ट का खुलासा पुलिस के लिए असली चुनौती यह थी कि आखिर उस मासूम को गर्भवती करने वाला मुख्य आरोपी कौन है? पुलिस ने संदेह के घेरे में आए 16 लोगों को राउंडअप किया. इन 16 लोगों में युवती का अपना पिता भी शामिल था. उन सभी के खून के नमूने और DNA सैंपल लिए गए ताकि भ्रूण के जेनेटिक मटेरियल से उनका मिलान किया जा सके. जब फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट आई, तो 16 लोगों में से केवल एक व्यक्ति का DNA मैच हुआ. वो कोई और नहीं, बल्कि उस लड़की का सगा पिता था. उस पिता ने अपनी सगी बेटी की जिंदगी को नर्क बना दिया. रिश्तों का कत्ल काउंसलिंग के दौरान पीड़ित युवती ने टूटी-फूटी भाषा और संकेतों में बताया कि उसके साथ कई लोगों ने गलत काम किया था. पुलिस ने इस मामले में पहले ही एक पुरुष और एक को गिरफ्तार किया था, लेकिन मुख्य आरोपी के रूप में पिता का नाम सामने आना सबसे बड़ा झटका था. पुलिस के अनुसार, यह दरिंदगी पिछले साल मार्च से सितंबर के बीच हुई थी. फिलहाल पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गहन जांच जारी है. समाज के लिए एक बड़ा सवाल हमारे समाज के खोखलेपन की गवाही है. एक दिव्यांग बेटी जो अपनी सुरक्षा के लिए अपने पिता पर निर्भर थी, उसे उसी घर में कैद कर दिया गया जहां उसका रक्षक ही भक्षक बन बैठा. 16 लोगों की हैवानियत झेलने वाली उस मासूम की ‘खामोश चीख’ आज हम सब से सवाल पूछ रही है क्या हम वाकई एक सुरक्षित समाज में रह रहे हैं? About the Author Deep Raj Deepak दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें Location : Mumbai,Maharashtra First Published : February 05, 2026, 17:19 IST
why girls are disappearing from delhi : special ground report doctor maid 16 year old daughter love story delhi police – क्यों गायब हो रही हैं दिल्ली से लड़कियां, नौकरानी की 16 साल की बेटी की कहानी से आपको समझ में आ जाएगा

नई दिल्ली. पिछले साल नवंबर महीने में रात के तकरीबन 11.30 बज रहे थे. दिल्ली सरकार के एक बड़े अस्पताल के डॉक्टर ने न्यूज 18 हिंदी को फोन कर बताया, ‘उनकी नौकरानी की बेटी अचानक घर से गायब हो गई है. नौकरानी ने रोते कुछ देर पहले बताया कि सर देखिए न मेरी बेटी तीन-चार दिनों से लापता है. आनंद पर्वत थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है, लेकिन दिल्ली पुलिस कुछ कर नहीं रही है. कुछ लिंक है तो जरा बेटी का पता लगवा दीजिए. लड़की 4 दिनों से घर से गायब है. नाबालिग है सर डर लग रहा है. क्या दिल्ली पुलिस में कोई है, जो मेरी बेटी को खोजने में मदद करेगा? यह घटना दिल्ली के सिर्फ गुलाबी बाग एरिया की नहीं बल्कि कमोबेश हर थाने और हर इलाके की है. हालांकि, तकरीबन दो महीने बाद वह नाबालिग लड़की खुद ही घर लौट आई. लड़की अपने खुद के सगे रिश्तेदार के साथ गायब होकर मथुरा में रह रही थी. फिर दो महीने के बाद मां के पास लौट आई. लेकिन मां की शिकायत रह गई कि दिल्ली पुलिस ने एक बार भी मेरी बेटी के बारे में मुझसे कोई जानकारी नहीं ली और न ही खोजने की कोशिश की. बेटी आ गई तो ठीक है वरना नहीं आती तो हम क्या करते? दिल्ली से इस वजह से गायब हो रही लड़कियां इस एक घटना से आप समझ गए होंगे कि दिल्ली से कम उम्र की लड़कियां क्यों गायब हो रही हैं? क्या मां-बाप का गाइडेंस और पुलिसिंग खराब हो गई है या फिर बच्चे समय से पहले जवान और समझदार हो गए हैं? या फिर मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने क्रांति ला दिया है? दिल्ली में बच्चों के गायब होने के हाल के आंकड़े इसे और गंभीर बना रहे हैं. फरवरी 2026 तक के हालिया डेटा से पता चलता है कि जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में ही राजधानी से 807 लोग गायब हो गए, जिनमें 509 महिलाएं और बच्चियां शामिल थीं. इनमें 191 नाबालिग थे, जिनमें से ज्यादातर 146 लड़कियां थीं. 2025 में दिल्ली में कुल 24,508 मिसिंग केस दर्ज हुए, जिनमें 60% से ज्यादा महिलाएं करीब 14,870 और बच्चियां शामिल थीं. इनमें लड़कियों की उम्र 12-18 साल तक थी. ऐसे में बड़ा सवाल दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस का ह्यूमन ट्रैफिकिंग डिपार्टमेंट इसको कैसे देख रही है? दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी ने क्या कहा? दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी देवेश चंद्र श्रीवासस्तव कहते हैं, ‘दिल्ली में लापता व्यक्तियों, विशेषकर बच्चों के संबंध में किसी भी प्रकार की घबराहट या भय का कोई कारण नहीं है. पहले की तुलना में दिल्ली में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग में कोई तेजी नहीं आई है, जबकि, पिछले वर्षों की तुलना में जनवरी 2026 महीने में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग के मामलों में कमी दर्ज की गई है. क्योंकि, दिल्ली में निष्पक्ष एवं पारदर्शी रिपोर्टिंग की नीति अपनाई जाती है. लापता व्यक्तियों की रिपोर्ट न केवल स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से तथा ERSS-112 के माध्यम से भी दर्ज कराई जा सकती है. निर्धारित SOP के द्वारा, दिल्ली पुलिस इन सभी मामलों में लापता व्यक्तियों का तुरन्त पता लगाने का प्रयास किया जाता है, जिसमें लापता बच्चों के मामलों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है. इस संबंध में सभी जिलों में dedicated Missing Persons Squads तथा क्राइम ब्रांच में Anti Human Trafficking Unit कार्यरत हैं, ताकि इस विषय में केंद्रित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. यह स्पष्ट किया जाता है कि दिल्ली में बच्चों के लापता होने अथवा अपहरण के मामलों में किसी भी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने नहीं आई है.’ क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक? देश के जाने-माने मनोवैज्ञानिक और दिल्ली यूनिवर्सिटी में डॉ अंबेडकर कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग के एचओडी नवीन कुमार कहते हैं, ‘आज के दौर में इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म सबसे बड़े खतरे बन गए हैं. फेक आईडी के जरिए अनजान लोग बच्चियों से दोस्ती करते हैं, उन्हें प्यार के जाल में फंसाते हैं या ग्लैमरस दुनिया का लालच देकर घर छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं. पढ़ाई का बोझ या माता-पिता की टोक-टाक से तंग आकर 12-18 साल के बच्चे-बच्चियां बिना सोचे-समझे घर से निकल जाती हैं. कुछ बच्चे ड्रग्स और अन्य नशों की लत के कारण भी आपराधिक गिरोहों के हत्थे चढ़ रहे हैं. लेकिन कहीं न कहीं घर के अंदर गाइडेंस और बाहर का माहौल बदला है. माता-पिता को अपने बच्चों पर नजर रखने की जरूरूत है. कोशिश करें कि मोबाइल और सोशल मिडिया से दूर रखकर खेलकूद में ध्यान दिलाएं.’ दिल्ली पुलिस क्या कर सकती है? दिल्ली पुलिस के पूर्व ज्वाइंट सीपी एसबीएस त्यागी कहते हैं, ‘देखिए यह बिल्कुल अलग मामला होता है. दिल्ली पुलिस का एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और क्राइम ब्रांच इस समस्या से निपटने के लिए नोडल एजेंसी है. दिल्ली पुलिस का यह विशेष अभियान गायब बच्चों को उनके परिवार से मिलाने का काम करता है. दिल्ली पुलिस ने अबतक हजारों बच्चों को रेस्क्यू किया है. दिल्ली में अब किसी भी नाबालिग के गायब होने पर तुरंत एफआईआर दर्ज होती है और पहले 48 घंटे में सघन तलाशी शुरू की जाती है. गायब बच्चे की जानकारी 24 घंटे के भीतर Zonal Integrated Police Network पर डाल दी जाती है ताकि देशभर की पुलिस अलर्ट हो जाए. इसके बाद भी अगर इस तरह की घटना लगातार हो रही है, तो इसके पीछे के कारणों को दूर करने की जरूरत है. यह सिर्फ अकेले पुलिस की बस की बात नहीं है. पुलिस का काम है, मामला दर्ज होने के बाद जल्दी से जल्दी निपटाना.’ दिल्ली पुलिस हर दिन किसी न किसी को इस तरह के मामले को सुलझाती है. बीते माह जनवरी महीने में हीएक 14 साल की लड़की प्रिया की गायब होने की शिकायत मिली. प्रिया का इंस्टाग्राम पर एक अज्ञात दोस्त से बात करने की आदत लग गई. उस दोस्त ने खुद को मुंबई का एक कास्टिंग डायरेक्टर बताया. प्रिया घर से 50 हजार रुपये और जेवर लेकर उसे मिलने चली गई. एएचटीयू की टीम ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए प्रिया को आनंद विहार बस टर्मिनल से तब पकड़ा जब वह एक
passport rules if you live in ghaziabad and have a passport issued with a delhi address right wrong punishment jail | रहते हैं गाजियाबाद में और दिल्ली के पते पर बना है पासपोर्ट, तो अब जाएंगे जेल! शुरू होने जा रहा बड़ा अभियान

गाजियाबाद. हाल ही में गाजियाबाद में एक ही एड्रेस पर 22 पासपोर्ट बनने की खबर ने विदेश मंत्रालय को हैरान और परेशान कर दिया है. पिछले दिनों गाजियाबाद में एक बहुत बड़े पासपोर्ट फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था, जिसमें एक ही पते और एक ही मोबाइल नंबर और फर्जी कागजों के दम पर 22 पासपोर्ट बनवा लिए गए. इस खेल में पोस्ट ऑफिस का पोस्टमैन भी शामिल था. दिल्ली पासपोर्ट ऑफिस की चिट्ठी के बाद जब गाजियाबाद पुलिस ने जांच शुरू की, परत दर परत राज खुलते चले गए. ऐसे में अब पासपोर्ट विभाग ने बड़ी तैयारी शुरू की है, जिसमें पासपोर्ट उसी एड्रेस पर बनेगा, जिस एड्रेस पर आवेदक का कम से कम एक स्थाई पता हो. अगर आप गाजियाबाद में रहते हैं दिल्ली में नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में पहले कभी रह रहे थे, तो अब आप दिल्ली के एड्रेस पर पासपोर्ट नहीं बना सकते. बीते कुछ सालों से आपको अपना पासपोर्ट बनवाने के लिए गांव या शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. विदेश मंत्रालय की Apply Anywhere in India योजना के तहत आप भारत के किसी भी कोने से पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं. लेकिन, इस सुविधा के साथ कुछ सख्त नियम भी जुड़े हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना आपको अपराधी बना सकता है. क्या गाजियाबाद का व्यक्ति दिल्ली में पासपोर्ट बनवा सकता है?जी हां, बिल्कुल! 2018 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) की सीमाएं खत्म हो गई हैं. आप कैसे पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) को चुन सकते हैं, कैसे होता है वेरिफिकेशन? जी आप बिल्कुल अपने पसंद का पोसपोर्ट सेवा केंद्र चुन सकते हैं. पुलिस वेरिफिकेशन आपके ‘वर्तमान पते’ (Current Address) पर ही होगा, जहां आप अभी रह रहे हैं. लेकिन बहुत लोग ये करते हैं कि वह रहते हैं गाजियाबाद में लेकिन दिल्ली के अपने पुराने पते पर पासपोर्ट बना लेते हैं. पुलिस वेरिफेकशन में अड़ोसी-पड़ोसी को बोले रखते हैं कि आए तो बता दीजिएगा कि मैं यही रहता हूं. बाद में पुलिस की मदद से पासपोर्ट तो बना लेते हैं, लेकिन जो गैरकानूनी है. पासपोर्ट बनाने के लिए क्या-क्या जरूरी दस्तावेज चाहिए? आपको दिल्ली में रहने का सबूत जैसे रेंट एग्रीमेंट, बिजली का बिल, बैंक पासबुक या कंपनी का लेटर देना होगा. भले ही आपके स्थायी पते के दस्तावेज बिहार के हों, लेकिन वर्तमान पता साबित करना अनिवार्य है. क्या पुराने पते पर पासपोर्ट बन सकता है?अक्सर लोग उस पते पर पासपोर्ट बनवाने की कोशिश करते हैं जहां वे पहले रहते थे लेकिन अब नहीं रहते. यह पूरी तरह गैर-कानूनी है. पासपोर्ट के नियमों के मुताबिक, आपको केवल उसी पते का जिक्र करना चाहिए जहां आप आवेदन के समय पिछले एक साल से रह रहे हैं. यदि पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान आप उस पते पर नहीं पाए जाते हैं, तो आपकी रिपोर्ट ‘Adverse’ लग जाएगी. इससे न केवल आपका पासपोर्ट आवेदन रद्द होगा, बल्कि आपको ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है. फर्जी एड्रेस पर पासपोर्ट बनाना कितना बड़ा जुर्मपासपोर्ट एक बेहद संवेदनशील दस्तावेज है. फर्जी पते या गलत जानकारी देना राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ माना जाता है. पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12 कहता है कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या तथ्यों को छुपाता है, तो उसे 2 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. यदि कोई गैर-भारतीय जैसे बांग्लादेशी या रोहिंग्या फर्जी पते पर भारतीय पासपोर्ट बनवाता है, तो सजा 1 साल से 5 साल तक की जेल और 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. 2026 के नए नियम: डिजिटल और सख्त वेरिफिकेशनसाल 2026 में पासपोर्ट नियमों को और भी ‘हाई-टेक’ बनाया गया है. अब पुलिस वेरिफिकेशन के लिए डिजिटल टैब का इस्तेमाल होता है, जो सीधे जीपीएस (GPS) लोकेशन से जुड़ा होता है. इसका मतलब है कि पुलिसकर्मी को आपके घर आना ही होगा और वह आपकी लोकेशन को सिस्टम में अपडेट करेगा. अगर आप उस एड्रेस पर नहीं रहते हैं, तो सिस्टम तुरंत उसे रिजेक्ट कर देगा. जरूरी सलाह सच्चाई ही रास्ता है: हमेशा अपने वर्तमान पते की जानकारी दें. अगर आप किराए पर हैं, तो रेंट एग्रीमेंट को ही आधार बनाएं. पुराना पासपोर्ट अपडेट: अगर आपके पास पहले से पासपोर्ट है और आपका पता बदल गया है, तो उसे ‘Re-issue’ करवाकर नया पता दर्ज कराएं. पुलिस से न डरें: पुलिस वेरिफिकेशन अब पहले से बहुत आसान और पारदर्शी हो गया है. बस आपके पास सही दस्तावेज होने चाहिए. पासपोर्ट बनवाना अब आपका अधिकार है और सरकार ने इसे सुगम बनाया है, लेकिन ईमानदारी ही इसकी पहली शर्त है. फर्जीवाड़े की छोटी सी कोशिश आपकी विदेश यात्रा के सपने को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है.
पड़ोसी, पेरेंट्स और पुलिस, 3P से कोरियन गेम में जान गंवाने वाली बहनों का आएगा असली सच, क्या थी कूदने की थ्योरी? – ghaziabad sisters fell to death korean game princesses cops investigation 3P will reveal real truth theory behind jump

Last Updated:February 05, 2026, 12:08 IST Proof of love for K-Pop: गाजियाबाद में तीन सगी बहनों की आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया है. के-पॉप (K-Pop) और कोरियन कल्चर के प्रति दीवानगी इस कदर बढ़ी कि 12, 14 और 16 साल की बच्चियों ने अपनी जान दे दी. गाजिाबाद पुलिस घटना के इतने घंटे के बाद अब 3-P फॉर्मूले पर जांच का एंगल घुमा दिया है. तीनों का सुसाइड नोट में कोरियन एक्टर से शादी न कर पाने का तनाव और सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट होने का दर्द छलका था. गाजियाबाद पुलिस अब एक्सपर्ट्स की मदद ले रही है. कोरियन गेम की लत में जान गंवाने वाली तीनों बहनें क्या एक साथ कूदी थी? गाजियाबाद : गाजियाबाद पुलिस ने कोरियन गेम की लत की शिकार हुई तीनों बहनों की मौत की जांच की दिशा बदल दी है. अब गाजियाबाद पुलिस अब हर एंगल से जांच कर रही है. जांच के दायरे में अब कई लोग आ सकते हैं. क्योंकि, गाजियाबाद पुलिस अब 3-P फॉर्मूला पर काम कर रही है. गाजियाबाद की एक गगनचुंबी इमारत की नौवीं मंजिल से जब बुधवार की तड़के तीन चीखें गूंजीं, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह अंत एक ऐसी दीवानगी का होगा जिसे हम और आप अक्सर बचपना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. 12, 14 और 16 साल की तीन सगी बहनों ने एक साथ मौत को गले लगा लिया. यह घटना उस मां-बाप के लिए दिल को झकझोर देने वाला सबक है, जिनके बच्चे मोबाइल की आभासी दुनिया को ही हकीकत मान बैठे हैं. क्या नाबालिग बच्चों में कोरियन गेम फेमस हो रहा है? क्या के-ड्रामा और के-पॉप प्यार पारिवारिक भावनाओं पर आधारित होते हैं? गाजियाबाद पुलिस अब 3-P फ़ॉर्मूले पर जांच कर रही है. जानिए असली सच कैसे आएगा? यूपी पुलिस को जांच के दौरान कई पन्नों का एक सुसाइड नोट मिला है, जिसे पढ़कर पत्थर दिल इंसान की आंखें भी नम हो जाएं. सुसाइड नोट के शब्द बच्चियों के दिमाग में चल रहे उस गहरे द्वंद्व को बयां करते हैं, जिसे उनके माता-पिता कभी समझ ही नहीं पाए. नोट में लिखा था- हमें माफ कर देना, हमें के-पॉप संगीत से बहुत गहरा लगाव था. शायद आप कभी नहीं समझ पाए कि हमारे लिए इसका क्या मतलब था. हमें उन एक्टर्स और संगीत से एक मजबूत भावनात्मक जुड़ाव महसूस होता था. कभी-कभी हमें लगता था कि वह दुनिया हमारे आसपास की दुनिया से कहीं ज्यादा मायने रखती है.’ नोट की फॉरेंसिक जांच सबसे चौंकाने वाली बात नोट का वह हिस्सा था जिसमें उन्होंने लिखा कि किसी भारतीय से शादी करने के विचार ने उन्हें भारी तनाव और उलझन में डाल दिया था, क्योंकि वे किसी कोरियन से ही शादी करना चाहती थीं. अब इस सुसाइड नोट की फॉरेंसिक जांच करवाएगी गाजियाबाद पुलिस. मोबाइल छिना, तो टूट गई जीने की आस पुलिस की जांच में सामने आया कि तीनों बहनों ने सोशल मीडिया पर अलीजा, सिंडी और मारिया जैसे पश्चिमी नामों से फर्जी अकाउंट बना रखे थे, जहां उनके हजारों फॉलोअर्स थे. करीब 10 दिन पहले जब उनके पिता चेतन कुमार को इस बात का पता चला, तो उन्होंने डांटते हुए उनके फोन छीन लिए और सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिए. पुलिस का मानना है कि मोबाइल और कोरियन कंटेंट से अचानक दूर होना उन बच्चियों के लिए ‘संसार उजड़ने’ जैसा था. वे पिछले दो साल से स्कूल भी नहीं जा रही थीं और चौबीसों घंटे घर पर रहकर सिर्फ कोरियन ड्रामा और संगीत की दुनिया में डूबी रहती थीं. इस घटना में एक रहस्य यह भी है कि क्या तीनों बहनें अपनी मर्जी से कूदीं? जहां कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि दो बहनों ने हाथ पकड़कर छलांग लगाई और तीसरी खिड़की से कूदी, वहीं एक चश्मदीद ने चौंकाने वाला दावा किया है. चश्मदीद के अनुसार, उसने देखा कि दो लड़कियां कूदने की कोशिश कर रही थीं, जबकि तीसरी उन्हें पीछे खींचकर रोकने की कोशिश कर रही थी. लेकिन अफसोस, वो उन्हें रोक नहीं पाई और तीनों ही काल के गाल में समा गईं. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Ghaziabad,Uttar Pradesh First Published : February 05, 2026, 12:08 IST






